S
StoryPublisher
Guest
शीतल ने अपने दोनों बेटों का लंड चूस लिया था। पर इस उसके लिए सब कुछ नहीं था. आज तो वो दोनों का लंड अपनी चूत में लिए बिना मानने वाली नहीं थी.
विक्रम अपनी माँ को पहली बार बाथरूम में नहीं चोदना चाहता था. वो बोला- माँ…
शीतल- हाँ?
विक्रम- आप नहा लो… बाकी का काम यहाँ नहीं.
शीतल- तो कहाँ?
विक्रम- कमरे में चलते हैं… वह आराम से करेंगे… मैं चाहता हूँ कि जब मैं माँ की चूत की चुदाई करूँ तो मेरे पास पूरी जगह हो.
शीतल- तो फिर अभी चलते हैं… मुझे अभी नहीं नहाना… बाद में नहा लूंगी.
विक्रम- पर आपके बदन पर साबुन लगा हुआ है.
शीतल- तो क्या हुआ… आज ऐसे ही चुदाई होगी मेरी! मैं अपने बेटे से पहली बार चुदने जा रही हूँ, कुछ तो अलग होना ही चाहिए.
विक्रम- जैसी आपकी मर्जी माँ…
और विक्रम ने अपनी माँ को अपने दोनों हाथों से अपनी गोद में उठा लिया जो इस समय नग्न है, भीगी हुई है और उसके पूरे शरीर पर साबुन लगा है.
वो बाथरूम से बाहर निकला, विक्रम भी नीचे से बिल्कुल नंगा था क्योंकि थोड़ी देर पहले ही उसकी अपनी माँ ने उसके लंड को चूसने के लिए उसकी शॉर्ट्स को खोल दिया था.
विक्रम जब बाथरूम से बाहर निकला तो हॉल में बैठे रजत की नजर उन दोनों पर पड़ी- क्या बात है भाई… बड़ी जल्दी पटा लिया माँ को?
विक्रम गर्व से- और नहीं तो क्या… अब कमरे में चल… आज तेरी माँ चोद दूंगा… और तू भी बनेगा मादरचोद!
रजत हँसते हुए- हाँ बिल्कुल मादरचोद!
दोनों भाई एक दूसरे को अपनी माँ के सामने ही मादरचोद नाम की गलियां दे रहे थे पर उनकी माँ को जरा भी बुरा नहीं लग रहा था, उल्टा उसको बड़ा मजा आ रहा था.
तीनों लोग शीतल के कमरे में पहुंचे जहाँ पिछली रात को मयूरी ने अपने बाप से खूब चुदवाया था. और यही बिस्तर आज इस घर में माँ-बेटों की चुदाई का भी प्रत्यक्ष गवाह बनने वाला था.
विक्रम ने अपनी माँ को बिस्तर पर प्यार से लेटा दिया. रजत अपनी माँ से बिना पूछे ही उसकी भीगी चूचियों की मसलने लगा जो साबुन से भीगी हुई थी और इसी कारण वहां बहुत ज्यादा फिसलन भी थी. रजत को बड़ा मजा आ रहा था.
विक्रम अपनी माँ की चूत चाटने लगा तो शीतल बोली- आ… हह… आह… मेरे बेटो!
रजत- माँ… आज तो हम दोनों भाई तुझे खूब चोदेंगे.
शीतल- मैं भी यही चाहती हूँ मेरे बेटो… कि तुम दोनों मुझे खूब चोदो… तुम्हारा हक़ मेरे पर!
थोड़ी देर बाद विक्रम और रजत ने अपने कपड़े उतार फेंके और घर में अब तीनों लोग बिल्कुल नंगे हो गए.
फिर रजत ने अपनी माँ से पूछा- माँ… क्या हम दोनों तुम्हारी चुदाई करना शुरू करें?
शीतल- हाँ मेरे लाडलों… चोद दो अपनी माँ को… एक साथ!
रजत- माँ… पहले मैं तुम्हारी गांड मारूंगा. तुम्हें कई बार देखा है पापा से गांड मरवाते… आज मेरा तुम्हारी गांड मारने का सपना पूरा होगा.
शीतल- हाँ बेटे… देर ना कर… मैं भी तुम्हारा यह मोटा लंड अपने गांड में लेने के लिए मरी जा रही हूँ. तुम्हारा लंड तुम्हारे पापा से थोड़ा ज्यादा मोटा है. आज बहुत मजा आएगा.
रजत उठा और अपना लंड अपनी माँ की गांड पर सेट करने लगा. विक्रम अपनी माँ की चूत को चाटना छोड़ कर उस पर अपना लंड सेट करने लगा और दोनों भाइयों ने एक साथ अपनी माँ की गांड और चूत में एक एक जोरदार झटका दिया.
शीतल को अपनी गांड और चूत दोनों में एक साथ दर्द हुआ, वो चीख पड़ी- आह… मर गई… तुम्हारा लंड तो बहुत मोटा है कुत्तो… उम्म्ह… अहह… हय… याह… मुझे बहुत दर्द हो रहा है.
विक्रम- साली कुतिया… नाटक करती है? इतने साल से पापा से चुद रही है और मेरा लंड लेने में नाटक कर रही है?
और उसने अपने लंड का एक और जोरदार झटका माँ की चूत में दिया. विक्रम का लंड जैसे तैसे शीतल की चूत में पूरा घुस गया.
विक्रम अपनी माँ को पहली बार बाथरूम में नहीं चोदना चाहता था. वो बोला- माँ…
शीतल- हाँ?
विक्रम- आप नहा लो… बाकी का काम यहाँ नहीं.
शीतल- तो कहाँ?
विक्रम- कमरे में चलते हैं… वह आराम से करेंगे… मैं चाहता हूँ कि जब मैं माँ की चूत की चुदाई करूँ तो मेरे पास पूरी जगह हो.
शीतल- तो फिर अभी चलते हैं… मुझे अभी नहीं नहाना… बाद में नहा लूंगी.
विक्रम- पर आपके बदन पर साबुन लगा हुआ है.
शीतल- तो क्या हुआ… आज ऐसे ही चुदाई होगी मेरी! मैं अपने बेटे से पहली बार चुदने जा रही हूँ, कुछ तो अलग होना ही चाहिए.
विक्रम- जैसी आपकी मर्जी माँ…
और विक्रम ने अपनी माँ को अपने दोनों हाथों से अपनी गोद में उठा लिया जो इस समय नग्न है, भीगी हुई है और उसके पूरे शरीर पर साबुन लगा है.
वो बाथरूम से बाहर निकला, विक्रम भी नीचे से बिल्कुल नंगा था क्योंकि थोड़ी देर पहले ही उसकी अपनी माँ ने उसके लंड को चूसने के लिए उसकी शॉर्ट्स को खोल दिया था.
विक्रम जब बाथरूम से बाहर निकला तो हॉल में बैठे रजत की नजर उन दोनों पर पड़ी- क्या बात है भाई… बड़ी जल्दी पटा लिया माँ को?
विक्रम गर्व से- और नहीं तो क्या… अब कमरे में चल… आज तेरी माँ चोद दूंगा… और तू भी बनेगा मादरचोद!
रजत हँसते हुए- हाँ बिल्कुल मादरचोद!
दोनों भाई एक दूसरे को अपनी माँ के सामने ही मादरचोद नाम की गलियां दे रहे थे पर उनकी माँ को जरा भी बुरा नहीं लग रहा था, उल्टा उसको बड़ा मजा आ रहा था.
तीनों लोग शीतल के कमरे में पहुंचे जहाँ पिछली रात को मयूरी ने अपने बाप से खूब चुदवाया था. और यही बिस्तर आज इस घर में माँ-बेटों की चुदाई का भी प्रत्यक्ष गवाह बनने वाला था.
विक्रम ने अपनी माँ को बिस्तर पर प्यार से लेटा दिया. रजत अपनी माँ से बिना पूछे ही उसकी भीगी चूचियों की मसलने लगा जो साबुन से भीगी हुई थी और इसी कारण वहां बहुत ज्यादा फिसलन भी थी. रजत को बड़ा मजा आ रहा था.
विक्रम अपनी माँ की चूत चाटने लगा तो शीतल बोली- आ… हह… आह… मेरे बेटो!
रजत- माँ… आज तो हम दोनों भाई तुझे खूब चोदेंगे.
शीतल- मैं भी यही चाहती हूँ मेरे बेटो… कि तुम दोनों मुझे खूब चोदो… तुम्हारा हक़ मेरे पर!
थोड़ी देर बाद विक्रम और रजत ने अपने कपड़े उतार फेंके और घर में अब तीनों लोग बिल्कुल नंगे हो गए.
फिर रजत ने अपनी माँ से पूछा- माँ… क्या हम दोनों तुम्हारी चुदाई करना शुरू करें?
शीतल- हाँ मेरे लाडलों… चोद दो अपनी माँ को… एक साथ!
रजत- माँ… पहले मैं तुम्हारी गांड मारूंगा. तुम्हें कई बार देखा है पापा से गांड मरवाते… आज मेरा तुम्हारी गांड मारने का सपना पूरा होगा.
शीतल- हाँ बेटे… देर ना कर… मैं भी तुम्हारा यह मोटा लंड अपने गांड में लेने के लिए मरी जा रही हूँ. तुम्हारा लंड तुम्हारे पापा से थोड़ा ज्यादा मोटा है. आज बहुत मजा आएगा.
रजत उठा और अपना लंड अपनी माँ की गांड पर सेट करने लगा. विक्रम अपनी माँ की चूत को चाटना छोड़ कर उस पर अपना लंड सेट करने लगा और दोनों भाइयों ने एक साथ अपनी माँ की गांड और चूत में एक एक जोरदार झटका दिया.
शीतल को अपनी गांड और चूत दोनों में एक साथ दर्द हुआ, वो चीख पड़ी- आह… मर गई… तुम्हारा लंड तो बहुत मोटा है कुत्तो… उम्म्ह… अहह… हय… याह… मुझे बहुत दर्द हो रहा है.
विक्रम- साली कुतिया… नाटक करती है? इतने साल से पापा से चुद रही है और मेरा लंड लेने में नाटक कर रही है?
और उसने अपने लंड का एक और जोरदार झटका माँ की चूत में दिया. विक्रम का लंड जैसे तैसे शीतल की चूत में पूरा घुस गया.