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सूरज के हाथों में रसमलाई लग चुकी थी वह अपनी गोद में नीलू को उठाकर कच्ची झोपड़ी की तरफ ले जा रहा था और वह अच्छी तरह से जानता था की कच्ची झोपड़ी में नीलू के साथ क्या करना है और नीलू भी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज उसे झोपड़ी में ले जाकर उसके साथ क्या करने वाला है,,, इसलिए तो उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी नीलू के लिए यह पहला मौका था जब वह किसी मर्द के साथ इस तरह से एकांत में समय बिताने जा रही थी,, और एक मर्द के साथ समय बिताना और वह भी एकांत में घर से दूर इतनी तो नादान वह थी नहीं कि वह इसका मतलब को ना समझती हो वह अपनी मर्जी से सूरज के पास आई थी बगीचे में सुनसान जगह पर दोपहर के समय वह जानती थी कि एक जवान लड़का उसके साथ क्या करना चाहता है,,,।
और वैसे भी पेड़ के नीचे उसकी कुर्ती में से उसकी दोनों चूचियों को निकाल कर उससे खेल कर उसे गर्म कर चुका था,,,। इसीलिए तो वह चलते तैयार हो चुकी थी उसके साथ झोपड़ी में जाने के लिए और सूरज भी इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए उसे अपनी गोद में उठा लिया था एक औरत जात का एक मर्द द्वारा उसे गोद में उठाना इस बात की तसल्ली दिलाता है कि वह औरत को पूरी तरह से संतुष्ट कर देगा और पूरी तरह से औरत के लायक है,,,,,।
सूरज का पायजामा तनकर तंबू बन चुका था,, खूबसूरत जवान लड़की को गोद में उठाने का एहसास क्या होता है इस समय सूरज ही समझ पा रहा था वैसे तो वह नीलू की मां को भी अपनी गोद में उठ चुका था और उसे उठाने का भी आनंद बेहद अद्भुत और अतुलनीय था,,, नीलू शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद कर चुकी थी,,, एक जवान मर्द की भुजाओं में वह पूरी तरह से शर्म से सिमटी हुई थी आम के बगीचे में तो जवान बदन क्या गुल खिलाते हैं इस बात को जानने के लिए वह भी बेहद उत्सुक थी,,,। सूरज की हालत खराब हुई जा रही थी मुखिया की बीवी के बाद यह उसका दूसरा मौका था जब किसी दूसरी खूबसूरत जवान लड़की को चोदने के लिए वह झोपड़ी में ले जा रहा था,,,।
देखते ही देखते सूरज नीलू को अपनी गोद में उठाए हुए झोपड़ी के पास पहुंच चुका था,,,, दरवाजे के रूप में लकड़ी का बना हुआ एक छोटा सा दरवाजा था जो कि बंद था लेकिन उसमें कोई भी कड़ी लगी हुई नहीं थी,,, और सूरज अपनी गोद में उठाए हुए ही थोड़ा सा नीचे की तरफ झुक कर अपने हाथ से दरवाजे को पकड़ कर बाहर की तरफ खोल दिया और धीरे से अंदर प्रवेश कर गया,,,,, और नीलू को अपनी गोद में से नीचे उतारकर वह दरवाजे को बंद कर दिया,,,, झोपड़ी में होने के बावजूद भी अंधेरा जैसा यहां कुछ भी नहीं था क्योंकि झोपड़ी इधर-उधर से टूटी हुई थी जिसमें से सूरज की रोशनी अंदर अपना उजाला बरसा रही थी और यह दोनों के लिए अच्छा भी था क्योंकि यह दोनों के लिए पहली बार था एक दूसरे के साथ हालांकि नीलू को इस उजाले से थोड़ा परहेज था क्योंकि वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी लेकिन झोपड़ी में उजाला देखकर सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे क्योंकि वह नीलु को जवानी को उसकी खूबसूरत नंगे बदन को अपनी आंखों से देखना चाहता था,,,।
झोपड़ी के बीचों बीच दोनों खड़े थे,,, इधर-उधर सूखी हुई घास का ढेर पड़ा हुआ था जो कि दोनों के लिए बिस्तर का काम करने वाला था नीलू तो सर में से पानी पानी हो जा रही थी अपनी नजरों को नीचे झुकाए हुई थी और सूरज उतावला हुआ जा रहा था नीलू के साथ एक जाकर होने के लिए लेकिन एक जाकर होने से पहले बहुत सा खेल बाकी था जिसे खेलने बहुत जरूरी था,,, और इसलिए मुखिया की बीवी के साथ का अनुभव बहुत कम आने वाला था मुखिया की बीवी के साथ बिताए हुए पल उसके लिए अनुभव का काम कर रहे थे,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि सीधे-सीधे संभोग क्रिया पर उतरना यह औरत के लिए अच्छा होता है ना ही एक मर्द के लिए क्योंकि संभोग क्रिया के पहले का जो कार्य होता है वह बेहद सुहाना और मादकता भरा होता है जो अपनी मंजिल तक धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की एक सीढ़ी होती है,,, और सीढ़ी पर एक-एक कदम रख कर आगे बढ़ते हुए मंजिल पर पहुंचने का जो मजा है जो एक नशा है वह बेहद अद्भुत है इस बात को सूरज अच्छी तरह से समझ गया था,,,,। नीलू के डर और उसकी शर्म को खत्म करने के इरादे से सूरज बोला,,,।
अब यहां से शर्म का काम खत्म हो जाता है अब यहां से शुरू होती है एक जवानी का मदहोश कर देने वाला खेल जिसमें शर्म की रत्ती भर भी गुंजाइश नहीं होना चाहिए तभी जवानी का मजा ले पाओगी,,,।
मुझे तो शर्म आती है,,,।(अपनी नजरों को नीचे झुकाए हुए ही नीलू बोल तो सूरज अपना हाथ आगे बढ़कर उसके खूबसूरत थोड़ी पर अपनी उंगली रखकर उसके चेहरे को हल्के से ऊपर उठाते हुए बोला,,,)
आंखें खोलो नीलू और जवानी का मजा को बंद आंखों से बिल्कुल भी मजा नहीं आएगा आंखें खोल कर रखोगी तो खुलकर मजा ले पाओगी,,,,(वह ऐसा कहते हुए अपने प्यास होठों को नीलू के दहकते हुए होठों के पास ले जा रहा था,,, नीलु इस बात से अनजान शर्मा तुम्हारी अपनी आंखों को बंद किए हुए थी,,, और तभी सूरज अपने होठों को उसके लाल-लाल होठों पर रख दिया नीलू को जैसे ही सूरज के होठों का एहसास अपने होठों पर हुआ उसकी आंखें एकदम से खुल गई और एक गहरी सांस उसके जिस्म को अकड़न भरने लगा और तभी सूरज जल्दबाजी दिखाता हुआ अपना एक हाथ जल्दी से उसकी कमर पर रखकर उसे एकदम से अपनी तरफ दावत लिया ऐसा करने से उसके पजामी बना तंबू सीधे उसकी दोनों टांगों के बीच सलवार के ऊपर से ही उसकी बुर पर दस्तक देने लगी और इस बात का एहसास नीलू को होते ही नीलू मदहोश हो गई और सूरज उसके लाल-लाल होठों का रसपान करते हुए पलों की तरह उसकी कमर को अपने एक हाथ से अपने बदन से सटे हुए दूसरे हाथ से उसकी गांड को दबाना शुरू कर दिया,,, ।
सूरज अच्छी तरह से जानता था की औरतों की उत्तेजना धीरे-धीरे बढ़ती है उनके नितंबों को उनके स्तन को मर्दन करने से संभोग की लालसा उनके मन में तीव्र होती जाती है और इसी कार्य में अग्रसर होते हुए सूरज पूरी तरह से नीलू पर अपनी पकड़ जमाते हुए दोनों हाथों से उसके नितम्बो को पकड़कर सलवार के ऊपर से ही दबोचने लगा मसलने लगा दबाने लगा,,,, यह एहसास सूरज को जितना आनंद दे रहा था उससे कहीं ज्यादा आनंद नीलू को प्रदान कर रहा था नीलु तो मदहोशी के सागर में डूबने लगी थी,,, सूरज लगातार उसके खूबसूरत अंगों का मर्दन कर रहा था लेकिन अभी तक उसकी चूची पर उसके हाथ नहीं आए थे क्योंकि उसकी गांड से उसका मन नहीं भर रहा था,,, जवानी से भरी हुई नीलू के नितंबों का उभार बेहद जानलेवा था भले ही उसकी मां की तरह ज्यादा बड़ी-बड़ी नहीं थी लेकिन एकदम सुडौल और सीमित आकार में बेहद खूबसूरत लग रही थी नीलू भी मदहोश हुए जा रही थी और देखते ही देखते सूरज के द्वारा चुंबन का आनंद लेते हुए सूरज की तरह ही वह भी सूरज के होठों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी थी,,,।
नीलू की तरफ से इस तरह की प्रतिक्रिया को देखकर सूरज उत्साहित हो गया और तुरंत अपने एक हाथ को ऊपर की तरफ लाकर कुर्ती के ऊपर से ही उसकी नारंगी को दबोच लिया और उसे दबाना शुरू कर दिया,,,, सूरज के तो दोनों हाथों में रसगुल्ला आ चुका था जिसका स्वाद वह बारी-बारी से ले रहा था,,, सूरज काफी देर तक किसी तरह से उसके लाल-लाल होठों का रसपान करता रहा और अपने दोनों हाथों से कभी उसकी चूची तो कभी उसकी गांड को दबाता रहा मसलते रहा इस तरह का आनंद लेते हुए वह पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो चुका था और इस दौरान उसके पजामे में बना तंबू नीलू की बुर पर दस्तक देते हुए उसे पानी पानी कर रहा था,,,,।
अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी कोमल दूर पर कठोर अंग का स्पर्श उसे मदहोश किया जा रहा था और बार-बार उसका मन उसे पकड़ने को कर रहा था लेकिन मन में एक झिझक थी जो उसे रोक ले रही थी,,, लेकिन इस झिझक को भी सूरज दूर कर दिया,,, और नीलू के हाथ को पकड़ कर अपने पजामी के ऊपर बने तंबू पर रख दिया और नीलू के लिए यह बेहद अनमोल तोहफा था नीलू भी पजामे के ऊपर से ही उसके लंड को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दी,,, लेकिन ऐसा करने से भी उसके मन में एक डर पैदा हो गया क्योंकि वह पजामे के ऊपर से जिस तरह से सूरज के लंड को दबा रही थी उसकी मोटाई और लंबाई को लेकर उसके मन में अजीब सी हलचल हुई जा रही थी,,, और वह अपने मन में सूरज के लंड की मोटाई और अपनी बर के छोटे से छेद के बारे में सोच कर घबरा रही थी,,,,,।
नीलू के होठों पर से सूरज अपने होठों को हटाकर नजर नीचे करके नीलू की हरकत को देख रहा था नीलू पागलों की तरह पजामी के ऊपर से ही उसके लंड को बड़े जोर से दबा रही थी ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी यह देखकर सूरज नीलू से बोला,,,,।
कैसा लग रहा है नीलू,,,,।
पूछो मत सूरज डर भी लग रहा है और मजा भी आ रहा है,,,,।
लेकिन डर कैसा,,,,।
तुम्हारा बहुत मोटा है,,,,।
तो क्या इससे पहले भी किसी का अपने हाथ में ली हो,,, इससे खेली हो,,,।
नहीं,,,,(गहरी सांस लेते हुए नीलू बोली)
तो तुम्हें कैसे मालूम कि मेरा बहुत मोटा है,,,।
क्योंकि पहले में देखी हूं,,,।
कीसका,,,,,?(मदहोश होता हुआ सूरज बोला और उसके मन में यह शंका भी थी कि कहीं इतनी किसी और के साथ तो संबंध नहीं बन चुकी है,,)
ऐसे ही मैं और मेरी बहन खेतों में इधर-उधर घूम रहे थे तो एक जगह पेशाब करने के लिए बैठ गए थे झाड़ियां के बीच तभी सामने गांव का एक लड़का आया हूं अभी पजामा नीचे करके पेशाब करने लगा लेकिन उसका तो बहुत छोटा था मतलब एकदम उंगली जितना इसीलिए तो तुम्हारा देखकर मुझे डर लग रहा है,,,,।
(नीलू की नादानी भरी बात सुनकर सूरज के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह प्रसन्नता के भाव मन में लिए हुए बोला,,,)
तुम शायद नहीं जानती मिलो की उंगली जितने लंड से औरत को कभी भी संतुष्टि प्राप्त नहीं होती वह प्यासी ही रह जाती है,,, देखना आज मैं तुम्हें कितना खुश करता हूं तुम बार-बार मेरे पास आओगी,,,,।
(और इतना कहते हुए अपने दोनों हाथ को आगे बढ़कर नीलू की कुर्ती को पकड़ लिया और उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा यह देखकर नीलू के मन में थोड़ी जीजक होने लगी क्योंकि वह जानती थी कि सूरज उसे निर्वस्त्र करने जा रहा है उसे नंगी करने जा रहा है इसलिए वह बोली,,,)
मुझे डर लग रहा है कहीं कोई आ तो नहीं जाएगा,,,।
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो इस बिराने में कोई नहीं आता,,,,(और इतना कहते हुए वह कुर्ती को ऊपर की तरफ उठा दीया,,,और नीलू भी उसका साथ देखो इतनी दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठाती ताकि वह आराम से उसकी कुर्ती को निकाल सके,,, देखते ही देखते सूरज अपने हाथों से इसकी कुर्ती निकाल कर उसकी कुर्ती को नीचे पड़ी घास पर रख दिया,,, कुर्ती के निकलते ही कमर के ऊपर नीलू पूरी तरह से नंगी हो गई उसकी दोनों नारंगिया एकदम से उजागर हो गई उसे देखते ही सूरज के मुंह में पानी आ गया और सूरज बिना एक पल गंवाए अपने प्यास होठों को नीलू की चूची पर रखकर उसे मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया उसकी हरकत से नीलु के बदन में दौड़ने लगी और गहरी गहरी सांस लेने लगी,,,,)
सहहहहहह ,,,,ऊमम ममममम,,,,,,,,।
(नीलू के मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी थी यह उसके लिए पहला अनुभव था जब अनजाने में ही उसके मुंह से स्टार की आवाज निकल रही थी और उसकी इस तरह की आवाज सुनकर सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी और वह दूसरे हाथ से नीलू की चूची को दबाकर आनंद लेने लगा,,,,, नीलू की चूचियां अपने उफान पर थी बिल्कुल नंगी के आकार की भले ही वह उसकी मां की चुचियों जैसी बड़ी-बड़ी नहीं थी लेकिन इस समय पूरी तरह से आनंद से भरी हुई थी जिसके छुहारे को मुंह में लेकर पीने में सूरज को अत्यधिक उत्तेजना और आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,। सूरज नीलू की चूची से उलझा हुआ था और नीलू अपने दोनों हाथों को सूरज के कंधों पर रखकर सूरज की हरकत का आनंद ले रही थी उसके मन से डर धीरे-धीरे खत्म हो रहा था वह लगातार गहरी सांस लेते हुए रह रह कर शिसकारी भी ले रही थी,,,।
सूरज बारी-बारी से नीलू की दोनों चुचियों का मजा ले रहा था,,,, नीलू की जवानी का मुख्य द्वार का आज उद्घाटन होगा ऐसा निश्चित हो चुका था,,,, लेकिन उसके पहले बहुत सी प्रक्रिया बाकी थी जिसमें से नीलू गुजर रही थी और हर एक प्रक्रिया का वह आनंद ले रही थी,,,, गांव से दुर आम के बगीचे में दो जंवा बदन एकाकार होने की प्रतीक्षा में थे,,,।
और वैसे भी पेड़ के नीचे उसकी कुर्ती में से उसकी दोनों चूचियों को निकाल कर उससे खेल कर उसे गर्म कर चुका था,,,। इसीलिए तो वह चलते तैयार हो चुकी थी उसके साथ झोपड़ी में जाने के लिए और सूरज भी इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए उसे अपनी गोद में उठा लिया था एक औरत जात का एक मर्द द्वारा उसे गोद में उठाना इस बात की तसल्ली दिलाता है कि वह औरत को पूरी तरह से संतुष्ट कर देगा और पूरी तरह से औरत के लायक है,,,,,।
सूरज का पायजामा तनकर तंबू बन चुका था,, खूबसूरत जवान लड़की को गोद में उठाने का एहसास क्या होता है इस समय सूरज ही समझ पा रहा था वैसे तो वह नीलू की मां को भी अपनी गोद में उठ चुका था और उसे उठाने का भी आनंद बेहद अद्भुत और अतुलनीय था,,, नीलू शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद कर चुकी थी,,, एक जवान मर्द की भुजाओं में वह पूरी तरह से शर्म से सिमटी हुई थी आम के बगीचे में तो जवान बदन क्या गुल खिलाते हैं इस बात को जानने के लिए वह भी बेहद उत्सुक थी,,,। सूरज की हालत खराब हुई जा रही थी मुखिया की बीवी के बाद यह उसका दूसरा मौका था जब किसी दूसरी खूबसूरत जवान लड़की को चोदने के लिए वह झोपड़ी में ले जा रहा था,,,।
देखते ही देखते सूरज नीलू को अपनी गोद में उठाए हुए झोपड़ी के पास पहुंच चुका था,,,, दरवाजे के रूप में लकड़ी का बना हुआ एक छोटा सा दरवाजा था जो कि बंद था लेकिन उसमें कोई भी कड़ी लगी हुई नहीं थी,,, और सूरज अपनी गोद में उठाए हुए ही थोड़ा सा नीचे की तरफ झुक कर अपने हाथ से दरवाजे को पकड़ कर बाहर की तरफ खोल दिया और धीरे से अंदर प्रवेश कर गया,,,,, और नीलू को अपनी गोद में से नीचे उतारकर वह दरवाजे को बंद कर दिया,,,, झोपड़ी में होने के बावजूद भी अंधेरा जैसा यहां कुछ भी नहीं था क्योंकि झोपड़ी इधर-उधर से टूटी हुई थी जिसमें से सूरज की रोशनी अंदर अपना उजाला बरसा रही थी और यह दोनों के लिए अच्छा भी था क्योंकि यह दोनों के लिए पहली बार था एक दूसरे के साथ हालांकि नीलू को इस उजाले से थोड़ा परहेज था क्योंकि वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी लेकिन झोपड़ी में उजाला देखकर सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे क्योंकि वह नीलु को जवानी को उसकी खूबसूरत नंगे बदन को अपनी आंखों से देखना चाहता था,,,।
झोपड़ी के बीचों बीच दोनों खड़े थे,,, इधर-उधर सूखी हुई घास का ढेर पड़ा हुआ था जो कि दोनों के लिए बिस्तर का काम करने वाला था नीलू तो सर में से पानी पानी हो जा रही थी अपनी नजरों को नीचे झुकाए हुई थी और सूरज उतावला हुआ जा रहा था नीलू के साथ एक जाकर होने के लिए लेकिन एक जाकर होने से पहले बहुत सा खेल बाकी था जिसे खेलने बहुत जरूरी था,,, और इसलिए मुखिया की बीवी के साथ का अनुभव बहुत कम आने वाला था मुखिया की बीवी के साथ बिताए हुए पल उसके लिए अनुभव का काम कर रहे थे,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि सीधे-सीधे संभोग क्रिया पर उतरना यह औरत के लिए अच्छा होता है ना ही एक मर्द के लिए क्योंकि संभोग क्रिया के पहले का जो कार्य होता है वह बेहद सुहाना और मादकता भरा होता है जो अपनी मंजिल तक धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की एक सीढ़ी होती है,,, और सीढ़ी पर एक-एक कदम रख कर आगे बढ़ते हुए मंजिल पर पहुंचने का जो मजा है जो एक नशा है वह बेहद अद्भुत है इस बात को सूरज अच्छी तरह से समझ गया था,,,,। नीलू के डर और उसकी शर्म को खत्म करने के इरादे से सूरज बोला,,,।
अब यहां से शर्म का काम खत्म हो जाता है अब यहां से शुरू होती है एक जवानी का मदहोश कर देने वाला खेल जिसमें शर्म की रत्ती भर भी गुंजाइश नहीं होना चाहिए तभी जवानी का मजा ले पाओगी,,,।
मुझे तो शर्म आती है,,,।(अपनी नजरों को नीचे झुकाए हुए ही नीलू बोल तो सूरज अपना हाथ आगे बढ़कर उसके खूबसूरत थोड़ी पर अपनी उंगली रखकर उसके चेहरे को हल्के से ऊपर उठाते हुए बोला,,,)
आंखें खोलो नीलू और जवानी का मजा को बंद आंखों से बिल्कुल भी मजा नहीं आएगा आंखें खोल कर रखोगी तो खुलकर मजा ले पाओगी,,,,(वह ऐसा कहते हुए अपने प्यास होठों को नीलू के दहकते हुए होठों के पास ले जा रहा था,,, नीलु इस बात से अनजान शर्मा तुम्हारी अपनी आंखों को बंद किए हुए थी,,, और तभी सूरज अपने होठों को उसके लाल-लाल होठों पर रख दिया नीलू को जैसे ही सूरज के होठों का एहसास अपने होठों पर हुआ उसकी आंखें एकदम से खुल गई और एक गहरी सांस उसके जिस्म को अकड़न भरने लगा और तभी सूरज जल्दबाजी दिखाता हुआ अपना एक हाथ जल्दी से उसकी कमर पर रखकर उसे एकदम से अपनी तरफ दावत लिया ऐसा करने से उसके पजामी बना तंबू सीधे उसकी दोनों टांगों के बीच सलवार के ऊपर से ही उसकी बुर पर दस्तक देने लगी और इस बात का एहसास नीलू को होते ही नीलू मदहोश हो गई और सूरज उसके लाल-लाल होठों का रसपान करते हुए पलों की तरह उसकी कमर को अपने एक हाथ से अपने बदन से सटे हुए दूसरे हाथ से उसकी गांड को दबाना शुरू कर दिया,,, ।
सूरज अच्छी तरह से जानता था की औरतों की उत्तेजना धीरे-धीरे बढ़ती है उनके नितंबों को उनके स्तन को मर्दन करने से संभोग की लालसा उनके मन में तीव्र होती जाती है और इसी कार्य में अग्रसर होते हुए सूरज पूरी तरह से नीलू पर अपनी पकड़ जमाते हुए दोनों हाथों से उसके नितम्बो को पकड़कर सलवार के ऊपर से ही दबोचने लगा मसलने लगा दबाने लगा,,,, यह एहसास सूरज को जितना आनंद दे रहा था उससे कहीं ज्यादा आनंद नीलू को प्रदान कर रहा था नीलु तो मदहोशी के सागर में डूबने लगी थी,,, सूरज लगातार उसके खूबसूरत अंगों का मर्दन कर रहा था लेकिन अभी तक उसकी चूची पर उसके हाथ नहीं आए थे क्योंकि उसकी गांड से उसका मन नहीं भर रहा था,,, जवानी से भरी हुई नीलू के नितंबों का उभार बेहद जानलेवा था भले ही उसकी मां की तरह ज्यादा बड़ी-बड़ी नहीं थी लेकिन एकदम सुडौल और सीमित आकार में बेहद खूबसूरत लग रही थी नीलू भी मदहोश हुए जा रही थी और देखते ही देखते सूरज के द्वारा चुंबन का आनंद लेते हुए सूरज की तरह ही वह भी सूरज के होठों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी थी,,,।
नीलू की तरफ से इस तरह की प्रतिक्रिया को देखकर सूरज उत्साहित हो गया और तुरंत अपने एक हाथ को ऊपर की तरफ लाकर कुर्ती के ऊपर से ही उसकी नारंगी को दबोच लिया और उसे दबाना शुरू कर दिया,,,, सूरज के तो दोनों हाथों में रसगुल्ला आ चुका था जिसका स्वाद वह बारी-बारी से ले रहा था,,, सूरज काफी देर तक किसी तरह से उसके लाल-लाल होठों का रसपान करता रहा और अपने दोनों हाथों से कभी उसकी चूची तो कभी उसकी गांड को दबाता रहा मसलते रहा इस तरह का आनंद लेते हुए वह पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो चुका था और इस दौरान उसके पजामे में बना तंबू नीलू की बुर पर दस्तक देते हुए उसे पानी पानी कर रहा था,,,,।
अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी कोमल दूर पर कठोर अंग का स्पर्श उसे मदहोश किया जा रहा था और बार-बार उसका मन उसे पकड़ने को कर रहा था लेकिन मन में एक झिझक थी जो उसे रोक ले रही थी,,, लेकिन इस झिझक को भी सूरज दूर कर दिया,,, और नीलू के हाथ को पकड़ कर अपने पजामी के ऊपर बने तंबू पर रख दिया और नीलू के लिए यह बेहद अनमोल तोहफा था नीलू भी पजामे के ऊपर से ही उसके लंड को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दी,,, लेकिन ऐसा करने से भी उसके मन में एक डर पैदा हो गया क्योंकि वह पजामे के ऊपर से जिस तरह से सूरज के लंड को दबा रही थी उसकी मोटाई और लंबाई को लेकर उसके मन में अजीब सी हलचल हुई जा रही थी,,, और वह अपने मन में सूरज के लंड की मोटाई और अपनी बर के छोटे से छेद के बारे में सोच कर घबरा रही थी,,,,,।
नीलू के होठों पर से सूरज अपने होठों को हटाकर नजर नीचे करके नीलू की हरकत को देख रहा था नीलू पागलों की तरह पजामी के ऊपर से ही उसके लंड को बड़े जोर से दबा रही थी ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी यह देखकर सूरज नीलू से बोला,,,,।
कैसा लग रहा है नीलू,,,,।
पूछो मत सूरज डर भी लग रहा है और मजा भी आ रहा है,,,,।
लेकिन डर कैसा,,,,।
तुम्हारा बहुत मोटा है,,,,।
तो क्या इससे पहले भी किसी का अपने हाथ में ली हो,,, इससे खेली हो,,,।
नहीं,,,,(गहरी सांस लेते हुए नीलू बोली)
तो तुम्हें कैसे मालूम कि मेरा बहुत मोटा है,,,।
क्योंकि पहले में देखी हूं,,,।
कीसका,,,,,?(मदहोश होता हुआ सूरज बोला और उसके मन में यह शंका भी थी कि कहीं इतनी किसी और के साथ तो संबंध नहीं बन चुकी है,,)
ऐसे ही मैं और मेरी बहन खेतों में इधर-उधर घूम रहे थे तो एक जगह पेशाब करने के लिए बैठ गए थे झाड़ियां के बीच तभी सामने गांव का एक लड़का आया हूं अभी पजामा नीचे करके पेशाब करने लगा लेकिन उसका तो बहुत छोटा था मतलब एकदम उंगली जितना इसीलिए तो तुम्हारा देखकर मुझे डर लग रहा है,,,,।
(नीलू की नादानी भरी बात सुनकर सूरज के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह प्रसन्नता के भाव मन में लिए हुए बोला,,,)
तुम शायद नहीं जानती मिलो की उंगली जितने लंड से औरत को कभी भी संतुष्टि प्राप्त नहीं होती वह प्यासी ही रह जाती है,,, देखना आज मैं तुम्हें कितना खुश करता हूं तुम बार-बार मेरे पास आओगी,,,,।
(और इतना कहते हुए अपने दोनों हाथ को आगे बढ़कर नीलू की कुर्ती को पकड़ लिया और उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा यह देखकर नीलू के मन में थोड़ी जीजक होने लगी क्योंकि वह जानती थी कि सूरज उसे निर्वस्त्र करने जा रहा है उसे नंगी करने जा रहा है इसलिए वह बोली,,,)
मुझे डर लग रहा है कहीं कोई आ तो नहीं जाएगा,,,।
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो इस बिराने में कोई नहीं आता,,,,(और इतना कहते हुए वह कुर्ती को ऊपर की तरफ उठा दीया,,,और नीलू भी उसका साथ देखो इतनी दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठाती ताकि वह आराम से उसकी कुर्ती को निकाल सके,,, देखते ही देखते सूरज अपने हाथों से इसकी कुर्ती निकाल कर उसकी कुर्ती को नीचे पड़ी घास पर रख दिया,,, कुर्ती के निकलते ही कमर के ऊपर नीलू पूरी तरह से नंगी हो गई उसकी दोनों नारंगिया एकदम से उजागर हो गई उसे देखते ही सूरज के मुंह में पानी आ गया और सूरज बिना एक पल गंवाए अपने प्यास होठों को नीलू की चूची पर रखकर उसे मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया उसकी हरकत से नीलु के बदन में दौड़ने लगी और गहरी गहरी सांस लेने लगी,,,,)
सहहहहहह ,,,,ऊमम ममममम,,,,,,,,।
(नीलू के मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी थी यह उसके लिए पहला अनुभव था जब अनजाने में ही उसके मुंह से स्टार की आवाज निकल रही थी और उसकी इस तरह की आवाज सुनकर सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी और वह दूसरे हाथ से नीलू की चूची को दबाकर आनंद लेने लगा,,,,, नीलू की चूचियां अपने उफान पर थी बिल्कुल नंगी के आकार की भले ही वह उसकी मां की चुचियों जैसी बड़ी-बड़ी नहीं थी लेकिन इस समय पूरी तरह से आनंद से भरी हुई थी जिसके छुहारे को मुंह में लेकर पीने में सूरज को अत्यधिक उत्तेजना और आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,। सूरज नीलू की चूची से उलझा हुआ था और नीलू अपने दोनों हाथों को सूरज के कंधों पर रखकर सूरज की हरकत का आनंद ले रही थी उसके मन से डर धीरे-धीरे खत्म हो रहा था वह लगातार गहरी सांस लेते हुए रह रह कर शिसकारी भी ले रही थी,,,।
सूरज बारी-बारी से नीलू की दोनों चुचियों का मजा ले रहा था,,,, नीलू की जवानी का मुख्य द्वार का आज उद्घाटन होगा ऐसा निश्चित हो चुका था,,,, लेकिन उसके पहले बहुत सी प्रक्रिया बाकी थी जिसमें से नीलू गुजर रही थी और हर एक प्रक्रिया का वह आनंद ले रही थी,,,, गांव से दुर आम के बगीचे में दो जंवा बदन एकाकार होने की प्रतीक्षा में थे,,,।