टीना जी के कुछ मिनट और राज के भीमकाय लिंग को चूसना जारी रखा, वे अपनी योनि के भीतर जवान राज के टटोलते हाथ के अनुभव का आनन्द लेती रहीं। पर शीघ्र ही, उनकी आग्नेय योनि की तड़प में अद्भुत वृद्धि हुई! राज की रगड़ती उंगलियों पर उनकी योनि फड़क - फड़क कर फुदकने लगी, उनकी योनि राज के मोटे लिंग स्तम्भ, जिसे उसने उस समय उनके निगलते मुख के भीतर दूंस रखा था, से मिलन की आतुरता के मारे तड़प उठीं।।
अचानक, टीना जी ने अपने मुंह के भीतर से राज के विशाल लिंग को उखाड़ निकाला, और उठ कर बैठ गयीं। राज की उंगलियाँ उनकी तंग रिसती योनि से एक गीली प्लॉप्प की आवाज के साथ बाहर निकलीं। वे अब बेहद उत्तेजित तथा कामातुर हो चली थीं, किसी लिंग को प्राप्त करने के लिये तड़प रही थीं. टनाटन जवान लिंग! टीना जी अच्छी तरह जानती थीं कि इस उमर में राज पूरी रात भी उनसे सम्भोग करता रहे, तो भी पौ फटने तक उसके पौरुष बल में कोई घटाव नहीं होने वाला है। यही तो वे चाहती थीं ... को वो अपने प्यारे युवा लिंग से उनकी तड़पती योनि को भर डाले, ढूंस-ठूस कर उनकी योनि में अपने पुरुषत्व द्वारा कामानन्द की असीम आनन्द लहरें उडेल दे..
उनके नेत्र कामेच्छा से विह्वल हो चले थे और पुतलियाँ अंगारों सी सुलग रही थीं। वे अपनी जाँघे चौड़ी पाट कर राज के ऊपर सवार हुईं। टीना जी अपने सामने लेटे हट्टे-कट्टे बलिष्ठ नौजवान से सम्भोग करने के लिये इतनी लालायित हो रही थीं कि उन्हें हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था। वे लपक कर उसके कूल्हों पर सवार हुईं,और नौजवान राज के कठोर लम्बे लिंग के सुपाड़े को अपनी टपकती योनि के ठीक नीचे दाग लिया। राज का लिंग खासा दस इन्च लम्बा तना हुआ था, एक उग्र लाल भाले के समान फहरा रहा था, उनके योनि को भेदने के लिये एकदम तैयार! टीना जी के खुले मुँह से जीभ लटक रही थी और वे आँखें फाड़ कर उसके लिंग के विशाल आक्रामक तेवर को एकटक देख रही थीं।
“अब देख कैसे चोदती हूँ, रन्डी की औलाद !”, वे गुर्रायीं, और किशोर राज के मोटे फड़कते लिंग को एक हाथ में दबोच कर बोलीं। “आज तेरी माँ की जगह मैं तेरे मादरचोद लन्ड पर सवार होकर तेरी जम के चुदाई करूंगी, आई समझ में, मेरे पहलवान ?”
ओहहह! ऊपर वाले क़सम! क़िस्मत खुल गयी! चलिये आँटी हो जाये चुदाई !”, राज उनके विशाल फूले स्तनों की ओर देखकर हकला कर बोला। जब वे आगे को झुकीं और अपनी योनि को उसके लिंग पर दबा कर बैठीं, तो उनके स्तन राज के मुख के बिलकुल निकट झूल रहे थे। टीना जी ने उसके लिंग के सूजे हुए सुपाड़े को अपनी योनि की खुली कोपलों के बीच में रगड़ना चालू कर दिया। इस विलक्षण घर्षण के कारणवश दोनो के तन-बदन में छायी काम की तड़प और तीक्षण होने लगी।
“ऊपर वाले, मजा आ रहा है !”, राज ने एक आह भरी। “आँटी आपकी चूत कितनी लिसलिसी और गर्मा-गरम है! उम्मम्म! घिसती रह! कर मेरे लन्ड की सवारी! :: : क्या चटके मार रही है तेरी चूत, साली अब घुसा भी ले मेरे लन्ड को इसके अन्दर !”
“तेरा लन्ड भी साला क्या आग उगल रहा है! जरूर अपनी मम्मी जान को चोदने का सवाब है! हाय रे, रजनी जी ने क्या लन्ड जना है अपनी कोख़ से ! मारी जावाँ तेरी मर्दानगी पर, मेरे आशिक़ !” टीना जी इस प्रकार कराह कर बोलीं, और अपनी जाँघों को और भी चौड़ा फैला डाला। “सुन मेरे पहलवान, जब मैं चूत नीचे दबाऊं तो तू भी अपने चूतड़ों को ऊपर उचकाना। इस चुदाई के लिये, तेरा लन्ड जितना अंदर घुसता है, घुसना, ठीक है ?”
* समझ गया आँटी!”, राज ने उनके माँसल नितम्बों को मजबूती से पंजों में दबोच कर कहा।
टीना जी के कंठ की गहरायी से एक कराह निकली और उन्होंने उसके लिंग को धर दबोचा, फिर अपनी जंघाओं के बीच तना कर साध लिया। फिर, उसके लाल मोटे कटुवे सुपाड़े को अपनी योनि की पटी कोपलों के बीच डालकर हौले-हौले नीचे की ओर सरकाते हुए उसे निगलती चली गयीं। उनकी टपकती तंग योनि उसके लिंग को इतमिनान से ग्रहण करती गयीं। आखिरकार जब उन्हें अपनी योनि की सूजी हुई कोपलों पर राज की झाँटों का स्पर्श अनुभव हुआ, तो उन्हें ज्ञात हुआ कि उसका लिंग सम्पूर्ण रूप से उनकी योनि में प्रविष्ट हो चला है, तब कहीं जाकर टीना जी रुकीं। उन्हें अपनी योनि भरी-पूरी प्रतीत होने लग रही थी, खिंच कर पूरी तरह से खुल चुकी थी, और एक बार फिर एक जवाँ-मर्द के फड़कते लिंग से ठुस चुकी थी।