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Incest पापी परिवार की पापी वासना (Completed)

टीना जी के कुछ मिनट और राज के भीमकाय लिंग को चूसना जारी रखा, वे अपनी योनि के भीतर जवान राज के टटोलते हाथ के अनुभव का आनन्द लेती रहीं। पर शीघ्र ही, उनकी आग्नेय योनि की तड़प में अद्भुत वृद्धि हुई! राज की रगड़ती उंगलियों पर उनकी योनि फड़क - फड़क कर फुदकने लगी, उनकी योनि राज के मोटे लिंग स्तम्भ, जिसे उसने उस समय उनके निगलते मुख के भीतर दूंस रखा था, से मिलन की आतुरता के मारे तड़प उठीं।।

अचानक, टीना जी ने अपने मुंह के भीतर से राज के विशाल लिंग को उखाड़ निकाला, और उठ कर बैठ गयीं। राज की उंगलियाँ उनकी तंग रिसती योनि से एक गीली प्लॉप्प की आवाज के साथ बाहर निकलीं। वे अब बेहद उत्तेजित तथा कामातुर हो चली थीं, किसी लिंग को प्राप्त करने के लिये तड़प रही थीं. टनाटन जवान लिंग! टीना जी अच्छी तरह जानती थीं कि इस उमर में राज पूरी रात भी उनसे सम्भोग करता रहे, तो भी पौ फटने तक उसके पौरुष बल में कोई घटाव नहीं होने वाला है। यही तो वे चाहती थीं ... को वो अपने प्यारे युवा लिंग से उनकी तड़पती योनि को भर डाले, ढूंस-ठूस कर उनकी योनि में अपने पुरुषत्व द्वारा कामानन्द की असीम आनन्द लहरें उडेल दे..

उनके नेत्र कामेच्छा से विह्वल हो चले थे और पुतलियाँ अंगारों सी सुलग रही थीं। वे अपनी जाँघे चौड़ी पाट कर राज के ऊपर सवार हुईं। टीना जी अपने सामने लेटे हट्टे-कट्टे बलिष्ठ नौजवान से सम्भोग करने के लिये इतनी लालायित हो रही थीं कि उन्हें हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था। वे लपक कर उसके कूल्हों पर सवार हुईं,और नौजवान राज के कठोर लम्बे लिंग के सुपाड़े को अपनी टपकती योनि के ठीक नीचे दाग लिया। राज का लिंग खासा दस इन्च लम्बा तना हुआ था, एक उग्र लाल भाले के समान फहरा रहा था, उनके योनि को भेदने के लिये एकदम तैयार! टीना जी के खुले मुँह से जीभ लटक रही थी और वे आँखें फाड़ कर उसके लिंग के विशाल आक्रामक तेवर को एकटक देख रही थीं।

"अब देख कैसे चोदती हूँ, रन्डी की औलाद !", वे गुर्रायीं, और किशोर राज के मोटे फड़कते लिंग को एक हाथ में दबोच कर बोलीं। "आज तेरी माँ की जगह मैं तेरे मादरचोद लन्ड पर सवार होकर तेरी जम के चुदाई करूंगी, आई समझ में, मेरे पहलवान ?"

ओहहह! ऊपर वाले क़सम! क़िस्मत खुल गयी! चलिये आँटी हो जाये चुदाई !", राज उनके विशाल फूले स्तनों की ओर देखकर हकला कर बोला। जब वे आगे को झुकीं और अपनी योनि को उसके लिंग पर दबा कर बैठीं, तो उनके स्तन राज के मुख के बिलकुल निकट झूल रहे थे। टीना जी ने उसके लिंग के सूजे हुए सुपाड़े को अपनी योनि की खुली कोपलों के बीच में रगड़ना चालू कर दिया। इस विलक्षण घर्षण के कारणवश दोनो के तन-बदन में छायी काम की तड़प और तीक्षण होने लगी।

"ऊपर वाले, मजा आ रहा है !", राज ने एक आह भरी। "आँटी आपकी चूत कितनी लिसलिसी और गर्मा-गरम है! उम्मम्म! घिसती रह! कर मेरे लन्ड की सवारी! :: : क्या चटके मार रही है तेरी चूत, साली अब घुसा भी ले मेरे लन्ड को इसके अन्दर !"

"तेरा लन्ड भी साला क्या आग उगल रहा है! जरूर अपनी मम्मी जान को चोदने का सवाब है! हाय रे, रजनी जी ने क्या लन्ड जना है अपनी कोख़ से ! मारी जावाँ तेरी मर्दानगी पर, मेरे आशिक़ !" टीना जी इस प्रकार कराह कर बोलीं, और अपनी जाँघों को और भी चौड़ा फैला डाला। "सुन मेरे पहलवान, जब मैं चूत नीचे दबाऊं तो तू भी अपने चूतड़ों को ऊपर उचकाना। इस चुदाई के लिये, तेरा लन्ड जितना अंदर घुसता है, घुसना, ठीक है ?"

* समझ गया आँटी!", राज ने उनके माँसल नितम्बों को मजबूती से पंजों में दबोच कर कहा।

टीना जी के कंठ की गहरायी से एक कराह निकली और उन्होंने उसके लिंग को धर दबोचा, फिर अपनी जंघाओं के बीच तना कर साध लिया। फिर, उसके लाल मोटे कटुवे सुपाड़े को अपनी योनि की पटी कोपलों के बीच डालकर हौले-हौले नीचे की ओर सरकाते हुए उसे निगलती चली गयीं। उनकी टपकती तंग योनि उसके लिंग को इतमिनान से ग्रहण करती गयीं। आखिरकार जब उन्हें अपनी योनि की सूजी हुई कोपलों पर राज की झाँटों का स्पर्श अनुभव हुआ, तो उन्हें ज्ञात हुआ कि उसका लिंग सम्पूर्ण रूप से उनकी योनि में प्रविष्ट हो चला है, तब कहीं जाकर टीना जी रुकीं। उन्हें अपनी योनि भरी-पूरी प्रतीत होने लग रही थी, खिंच कर पूरी तरह से खुल चुकी थी, और एक बार फिर एक जवाँ-मर्द के फड़कते लिंग से ठुस चुकी थी
 
राज के उत्कृष्ट जवान लिंग को देख कर उन्हें अपने सगे पुत्र जय का स्मरण होता था। यूं तो टीना जी ने अपने जीवन में अनेक लिंगों पर मुख-मैथुन किया हुआ था, परंतु जवाँ तन्दुरुस्त किशोरों के दबंग लिंगों में जो बात थी वैसी अन्य किसी में नहीं। राज का लिंग भी इसी क्षेणी में आता था। वही तरो-ताजा नमकीन स्वाद, जैसे ही वे उसे अपने मुख के भीतर निगलतीं, टीना जी के नथुनों में वही जानी-पहचानी किशोरत्व की गन्ध भर जाती थी। उस मोहक गन्ध के कारणवश उनकी योनि फड़कने लगती और वे अपने नितम्बों को ऐंठ- ऐंठ कर कसमसाने लगती, उन्हें कस भींचतीं, और अपने तन को उसकी भुजाओं पर दबा कर उससे अपनी योनि को स्पर्श करने की मूक यातना करतीं ::: ताकि वो उनकी कामाग्नि का अनुभव कर अपने प्रति उनकी कामेच्छा को जान ले।

अब तक टीना जी की कामाग्नि इस कदर भड़क चुकी थी, कि उनकी जाँघों का भीतरी भाग उनके योनि-द्रवों से पूरी तरह सन चुका था, उनके योनि स्थल पर उनके रोम भीग कर उनकी लालिम लिसलिसी योनि के चारों ओर चिपक गये थे। राज को शीघ्र ही इन संकेतों का आशय समझ में आया, और वो नीचे की ओर झुका, और अपनी दो उंगलियों को उनकी चुपड़ी हुई योनि के भीतर डाल दिया।

। "म्म म्म म्म म्म म्म! म्म म्म! म्म म्म म्म म्म !", टीना जी कराहीं, उनके मुँह में भरे विशालकाय लिंग के कारण बेचारी कुछ कह भी नहीं पा रही थीं।

"साली, खूब मजा ले रही है! पक्की पैदाइशी रन्डी है !", राज हाँफ़ता हुआ बोला। "अपनी रन्डी चूत में उंगल चोदी करवाने का बड़ा शौक़ है तुझे , हरामजादी ?"

97 कुश्ती टीना जी का उत्तर उनके मुख में ही कहीं लुप्त हो गया :: उनका मुँह सरपट गति से अपने पड़ोसी लड़के के थूक से सने कठोर लिंग पर वार कर रहा था। जिस प्रकार वो अपनी उंगलियों को टीना जी की आतुर व ज्वलन्त योनि के भीतर घोंप रहा था, उससे चुपड़-चुपड़ की बेहदी आवाजें निकल रही थीं. उनकी योनि को जरा ढीला होते देख , उसने तुरन्त अपनी तीसरी उंगली को भी अंदर घुसा डाला।

ऊपर वाले, उम्मीद से कहीं टाइट हैं आप !" राज कराहा, और अपनी उंगलियों को टीना जी की जकड़ती योनि के भीतर हिला-हिला कर गुदगुदाने लगा।

"पसन्द आयी ना आँटी की चूत ! एक बार चोद कर देख , फिर भूल जायेगा अपनी माँ को चोदना !", टीना जी ने कह कर संकेतात्मक लहजे में मुस्कुराया और उसे आँख मारी।।

फिर अपने भूखे मुंह को नीचे कर उसके लिंग पर अपना ध्यान पुनः केन्द्रित कर दिया। एक बार फिर उनके होंठ उसके लिंग पर कस गये, और अपने दोनो हाथों को उसके नितम्बों पर जकड़ कर टीना जी राज को उनके मुख से सम्भोग करने के लिये उकसाने लगीं। राज ने उनके लाल लिपस्टिक लगे हुए भरपूर मोटे होठों को अपने लिंग पर जकड़ते हुए देखा। देखकर वो अपने लिंग को उनके गले में ठेलने लगा, और अपनी नग्न पड़ोसन के गले से उत्पन्न होती फच्च-गलच्च - सड़प्प सी बेहूदी आवाजों को सुनता हुआ, उनकी कस कर कुलबुलाती योनि के भीतर अपनी चारों उंगलियों से हस्त-मैथुन करने लगा।
 
पहल-पहल तो वे राज के सम्पूर्ण लिंग को अपने मुख में ले ही नहीं पायीं, पर एक बर जब उनका गले में तनाव कम हुआ और वे ठीक प्रकार से राज के लिंग के आकार की आदी हो चुकीं, फिर वे आसानी से राज के लिंग को अपनी गर्दन की गहनता में निगल कर उस फड़कते स्तम्भ के तने तक निगल कर दक्षता से मुख-मैथुन का आनन्द प्रदान करने लगीं। उनके होंठ राज के सुंघराले झाँटों पर सटे हुए थे। अपनी ठोड़ी पर वे उसके अण्डकोष की उष्मा का अनुभव कर रही थीं, और उनका मुख बुरी तरह से ठंसा हुआ था।

टीना जी ने अपनी उंगलियों को उसकी जंघाओं पर फेरा और उसकी ठोस व सुडौल माँसपेशियों को सहलाने लगीं। फिर उसके नग्न नितम्बों को अपनी हथेली में भर कर, वे अपने मुख को आतुरता से अपने किशोर प्रेमी के लिंग पर ऊपर और नीचे चूस - चूस कर चलाने लगीं।

राज को तो पल-पल स्वर्गतुल्य आनन्द प्राप्त होता प्रतीत होता था! ::: वो तो सातवें आसमान में परवाज हो गया था! टीना जी के हाथ उसके भिंचे हुए नितम्बों को निचोड़ रहे थे और उनका नम और तप्त मुख किसी कसैल योनि की भाँति उसके लिंग पर कसा हुआ था, क्या विलक्षण तालमेल था! राज ने एक हुँकार भरी और फिर अपने लिंग को टीना जी के चाटते हुए खुले मुख के भीतर जोश से ठेलने लगा।

"चूस, रन्डी !", वो गुर्राया। "चूस मेरा मोटा कटुवा लन्ड! ::: ऊहहह, आहहहह.. आज तेरा पाला असली मर्द के लन्ड से पड़ा है, चूस साली! चाट- चाट कर चूसती जा रन्डी, फिर तो तुझे अपने बड़वे शौहर के लन्ड से ही गुजारा चलाना है !"

टीना जी जोर-जोर से कराहने लगीं और किशोर राज का लिंग हर ठेले के साथ उनकी गर्दन में और नीचे धकेलने लगा। उन्होंने अपने होठों के बीच उसके लिंग को कस कर दबोच रखा था और उनकी जिह्वा राज के पौरुष स्तम्भ को अपने मुँह के ऊपरी भाग पर दबाये दे रही थी, जिसके फलस्वरूप राज के लिंग पर उनकी जकड़ यथाचेष्ट मजबूत हो गयी थी। राज के मादक पुरुष हॉरमोनों के प्रभाव से उनकी लार टपक रही थी, उन्हें यह आभास हो रहा था कि पुरुष लिंग पर मुख-मैथुन करने की उनकी कितनी तीव्र आसक्ति थी। खासकर किशोर लिंग पर! 'वर्जित हरकतों से ही सैक्स का परम आनन्द प्राप्त होता है, उन्होंने मुस्कुरा कर सोचा।

| राज के उत्कृष्ट जवान लिंग को देख कर उन्हें अपने सगे पुत्र जय का स्मरण होता था। यूं तो टीना जी ने अपने जीवन में अनेक लिंगों पर मुख-मैथुन किया हुआ था, परंतु जवाँ तन्दुरुस्त किशोरों के दबंग लिंगों में जो बात थी वैसी अन्य किसी में नहीं। राज का लिंग भी इसी क्षेणी में आता था। वही तरो-ताजा नमकीन स्वाद, जैसे ही वे उसे अपने मुख के भीतर निगलतीं, टीना जी के नथुनों में वही जानी-पहचानी किशोरत्व की गन्ध भर जाती थी। उस मोहक गन्ध के कारणवश उनकी योनि फड़कने लगती और वे अपने नितम्बों को ऐंठ- ऐंठ कर कसमसाने लगती, उन्हें कस भींचतीं, और अपने तन को उसकी भुजाओं पर दबा कर उससे अपनी योनि को स्पर्श करने की मूक यातना करतीं ::: ताकि वो उनकी कामाग्नि का अनुभव कर अपने प्रति उनकी कामेच्छा को जान ले।
 
96 पड़ोसन को मिला पहलवान
ठीक है राज ! चूस लूंगी तेरा लन्ड पर उसके बादः ..

जिस प्रकार टीना जी की अंगारों जैसी आँखें उसपर वासना के ताप को फेंक रही थीं, राज कामलोभ के मारे सिहर उठा। उनका मुख उसके सुपाडे के इतना निकट आ चुका था, कि राज को अपने उत्पीड़ित लिंग पर उनकी साँसों की गर्माहट का आभास हो रहा था।

क्या? ::. उसके बाद क्या करना होगा?" राज अपने कूल्हे उठा कर उखड़ी साँसों में बोला।

सुन मेरे आशिक़ : उम्मीद करती हूँ कि तूने इन गोल-गोल मोटे टट्टों में दो-चार लीटर वीर्य स्टोर कर रखा हैक्योंकि तुझे अपने मुँह में झड़ाने के बाद, मैं फिर इस लन्ड को चूसुंगी, और जब तेरा मादरचोद लन्ड फिर से फूल कर खड़ा हो जायेगा, तो इसे मेरी टपकती गरम चूत की अच्छी खातिर करनी है . . ?

टीना जी की पसीने से सनी हथेली में राज का लिंग धड़क-धड़क कर बेतहाशा झटके दे रहा था। उनके स्तन राज की निचली जंघाओं पर दबे हुए थे और अपनी बात कहते हुए वे अपने आग्नेय योनिस्थल को उसपर संकेतात्मक रूप में रगड़ती जा रही थीं।

"या खुदाः आँटी आपकी बातें सुनकर मेरे लन्ड की गर्मी बढ़ रही है! :::: अब तो आपको चोदे बिना नहीं रहा जाता !" टीना जी कुटिलतापूर्वक मुस्कुरायीं।।

तू क्या मुझे चोदेगा मादरचोद, आज मैं तुझे चोदूंगी! तेरे इस लट्ठ जैसे मोटे लौड़े के ऊपर उचक-उचक कर तेरी घोड़े जैसी सवारी करूंगी! ::: तू बस मेरे मम्मों को थामे रहनाः '' तेरे इन जवान टट्टों को सुखा देंगी मादरचोद, निचोड़ लूंगी अपनी चूत से, तेरे लन्ड की सारी पहलवानी निकल लूंगी, फिर घूमना अपने लंगड़े लन्ड और सूखे नीम्बू जैसे टट्टों को! ::: बोल है हिम्मत ? चढ़ मादरचोद ? घबराता है तो अब भी बोल दे! फिर मत कहना कि मम्मी मेरा लटका लन्ड देखकर नाराज हो रही हैं। वरना मेरी चूत तेरे हरे-भरे लन्ड को ऐसा निचोड़ेगी बच्चू कि तेरी मम्मी और बहन मिलकर भी खड़ा नहीं कर पायेंगे !"

"ऊ ऊह, भगवान क़सम हाँ! ऊपर वाले!::: मैं तैयार हूँ!::: क़सम ईमान की आज तेरी चूत को चोद चोद कर भोसड़ी बना दूंगा!", राज चीखा।

"ये हुई मर्दो वाली बात, डार्लिंग !", टीना जी मुस्कायीं। "पर मैं चाहती हूँ कि जब तेरे लन्ड को चूसूं , तो तू मेरी चूत की खातिर करे। बेचारी कब से तरस रही है, कोई मर्द इसकी गर्मी को ठंडा करे।"

ठीक बात है आँटी!", राज हाँफ़ा। "आप जरा घूम जाइये।"

टीना जी खिसक कर सोफ़े पर राज के पास ऐसे लेट गयी कि उनका सर उसके पेड़ के निकट और पैर उसके सर के निकट हो गये। वे अपनी बगल पर लेटी हुई थीं और अपनी चिकनी दूधिया टाँगों को फैलाने लगीं, उन्होंने अपने घुटनों को मोड़ कर चौड़ा फैलाया, ताकि राज सरलता से उनकी चमचमाती लाल योनि तक पहुँच पाये। टीना जी ने उसकी ओर मुंह फेरा और उनकी आँखों में एक कुटिल चमक कौंध गयी।

"जानेमन मैं तेरा लन्ड चूसती हूँ, तब तक तू मेरी चूत की सेवा कर ! :: और सुन मादरचोद, तू मुझसे क्या-क्या करवाना चाहता है, खुद अपने मुँह से बोलना जैसा मन कहे खुल कर बोल! बेहिचक बता दे! मैं तेरी जबानी तेरी चाहतें सुनना चाहती हूँ राज '' क्योंकि आज रात तेरी सारी मुरदें मैं पूरी कर दूंगी ::: तेरा एक-एक सपना मैं सच कर देंगी मादरचोद !"

राज जोर से कराहा, जब टीना जी ने अपने सर को झुका कर अपने तप्त और नम होठों में उसके लिंग के सिरे को चूस लिया। फिर कुछ सेकन्ड तक उसके सूजे हुए सुपाड़े को चूसने के उपरांत टीना जी ने अपने मुंह को खोला और अपने होठों को धीरे-धीरे उसके लिंग की लम्बाई पर सरकाने लगीं, और अपनी पूर क्षमता से किशोर राज के ठोस लिंग को निगलने लगीं।
 
*आपको पछतावा तो नहीं हो रहा है ?" ।

कैसा पछतावा, सोनिया की वजह से तो मुझे आज तेरा कटुवा लन्ड नसीब हुआ है !" टीना ने बढ़कर राज के लिंग को हाथों में लिया और अपनी मुट्ठी मे दबाकर उसकी चिकनी सतह और अद्भुत् लम्बाई पर ऊपर और नीचे मालिश करने लगीं। इससे पहले कि वो उसे उनकी योनि में भोंक दे, टीना जी उसके मादक पुरुषत्व का अपने होठों के बीच अनुभव करने को बेताब हो रही थीं।

म्म्म्म्म , ओह, वाह! ::. ओहहह, बहुत बढ़िया! :: जोर से रगरिये!", राज कराहा, और अपने लिंग के विकराल भार को बेहदगी से टीना जी के हाथों में झुलाने लगा।

टीना जी ने अपनी मुट्ठी को किशोर राज के लिंग की सम्पूर्ण लम्बाई पर ऊपर और नीचे रगड़ा, प्रतीत होता था उनके हाथ में एक मोटी मूसल हो जिसे वे ओखली में कूट रही हों। और टीना जी प्रेमपूर्वक उसके सुपाड़े को निचोड़ती रहीं। है दैय्या, कैसा राक्षसी लन्ड था! मोटा तो इतना की उसके तने का व्यास उनकी उंगलियों में नहीं समाता था। लम्बा इतना कि उनकी ठोड़ी से शुरू होकर उनके माथे के तीन इन्च ऊपर फ़हराता था। और कोबरा नाग जैसा काला - कलूटा, जिसके ऊपर लाल फननुमा कटुवा सुपाड़ा, जो किसी भी पल विशैला वीर्य-दंश मारने को तैयार लगता था!

जब वे उसके लिंग को सहला रही थीं, राज के हाथ उनके अंग-अंग पर घूम रहे थे, उनके गोरे-गोरे स्तनों और नितम्बों की भरपूर चिकनी माँसलता की मालिश कर रहे थे, और उनकी सिहरती नग्न देह को अपनी देह से आलिंगन करा रहे थे। टीना जी ने अपने नये हमबिस्तर प्रेमी के होठों का चुम्बन लिया, और अत्यंत कामुकता से उसके कानों में फुसफुसायीं ...

जानेमन , तू कहे तो पहले तेरे लन्ड को चुसू ?" ओह, जरूर, जरूर !" उखड़ी हुई साँसों में राज बोला, उसका लिंग टीना जी के हाथों में फुर्ती से फड़क रहा था। टीना जी ने नीचे सर झुकाकर लिंग को देखा।

म्म्म्म्म्म्म , देख तो कैसा दनदना कर फूल गया है, बेटा, लगता है चूसने की जरूरत ही नहीं, खुद-ब-खुद झड़ जायेगा मादरचोद !"

* उहहहह, प्लीज !??! चूसिये ना !! :: :: जरा देर मुँह में लेकर चूस लीजिये ना !" टीना जी फिसल कर उसकी टाँगों के बीच पहुँचीं और राज के लिंग के विकराल उभार पर अपनी आँखें जमा दीं। अपने दोनो हाथों में लिंग को लेकर, अपने मुंह को उसके सिरे के ठीक उपर रखकर, टीना जी ने नजरें ऊपर कर राज के उल्लासित चेहरे को देखा। उनके नेत्र कोरी वासना के मारे सुलग रहे थे।
 
95 पूछताछ

टीना जी के झटकते नितम्बों को जकड़े हुए, राज उनकी योनि को भूखों के समान चाटता और चूसता जा रहा था। उसे ज्ञात था कि उसकी बहन और मम्मी चूसते वक़्त किस प्रकार की क्रियायों से अधिक सुख अनुभव करती हैं.. सो अपने अनुभव वश, वो टीना जी के आनन्दोपार्जन के लिये ठीक उसी रीति में मुख मैथुन करने लगा। बार-बार अपनी जिह्वा से उनके चोंचले को पुचकारता, फिर जितना गहरा घुसती, जिह्वा को उनकी खुली योनि के भीतर घुसेड़ डालता। राज की मैथुन शैली अचूक सिद्ध हुई, क्योंकि शीघ्र ही टीना जी लाचार होकर राज के आतुरता से चूसते मुख में रिसने लगीं।

राज चटखारे ले लेकर उनकी योनि से टपकती हर एक बून्द को निगलता गया। उनकी स्वादिष्ट योनि में उसने अपनी जिह्वा को मरोड़-मरोड़ कर कुरेदा, उनके कड़े चोंचले को चूसा, और उनकी हवस के मारे सूजी हुई योनि के इन्च - इन्च को चाटा।

टीना जी राज के द्रवों से चुपड़े चेहरे पर अपनी योनि को ऊपर-नीचे उचकाने लगीं, और कस के रगड़ने लगीं। वे अपने हाथों से राज के सर को पकड़े हुए, उसके मुंह को अपनी ज्वलन्त योनि पर कस के कुचलती जा रही थीं।

"मैं झड़ने वाली हूँ, राज !", वे चीखीं। "उहहहह, मुझे झड़ा दे! मैं तेरे चेहरे पर, तेरे मुँह पर झड्गी! ले चूस मेरी चूत, डार्लिंग! ऊऊह, बेटा चूस मेरी भीगी चूत को! ::अंम्म्म! चूस मेरे चोंचले को चोद इस रन्डी चूत को और ओहहहहह, कस के, और दम लगा !" | टीना जी मस्त घोड़ी जैसी सरपट फुदक रही थीं, उनके स्तन झूम रहे थे और केश लहरा रहे थे।

राज ने उनके कूल्हों पर अपनी जकड़ कायम रखी थी, जब वे परम दैहिक आनन्द की अनुभूति करने लगीं तो उसका मुँह टीना जी की फड़कती योनि पर चिपका रहा। तीव्र आनन्द की लहरों पर लहरें उनकी योनि को लबालब करने लगीं। उनके जीवन का सबसे सशक्त ऑरगैस्म उनकी हाँफ़ती, थरथराती देह में अच्छादित होने लगा।

ओह, बेटा! कमाल कर दिया! क्या ट्रेनिंग दी है तेरी मम्मी ने तुझे, ऐसी बढ़िया चूत - चटायी तो मेरी जिन्दगी में किसी मर्द ने नहीं की !"

राज ने अपने द्रवों से सने चेहरे को उनकी योनि पर से उठाया और मुस्कुराया। * शर्मा अंकल से भी बढ़िया?" उसने पूछा, और हाथ बढ़ा कर उनके कंपकंपाते स्तनों को सहलाने लगा।

बिलकुल ! ::: मुझे गलत मत समझना। वैसे तो तुम्हारे अंकल और जय दोनो ही माहिर चोद्दे हैं, पर चूत - चटायी के मामले में तेरा जवाब नहीं, मेरे पहलवान आशिक़ !"

"शुक्र है भगवान का कि ये हुनर मुझ नाचीज को बख्शा, वैसे मैंने आज तक किसी औरत को शिकायत का मौक़ा नहीं दिया !", राज हँसा।

"अरे, शिकायत तो अब हम औरतों के शौहरों को होगी! • और क्या डॉली भी तुझसे अपनी चूत चटवाती है ?" ।

"बिलकुल चटवाती है! हमारी शब्बो तो मुझसे अपनी गरम चुतिया चटवाकर पागल हो जाती है। सुबह-सुबह ऐसी चीखती है, कि आस-पड़ोसी जाग जायें ।"

*और तेरी मम्मी: ?" "आँटी, लगता है आप पहले से ही सब कुछ जानती हैं !", राज हँसा।

"अब पड़ोसियों की खोज - खबर रखना तो मेरा फ़र्ज है !"

"अब मालूम हुआ कि सोनिया ने होशियारी कहाँ से सीखी है।" मुझे लग रहा था, कि ये सब सोनिया का किया धरा है :..", टीना जी मुस्कुरायीं।

*आपको पछतावा तो नहीं हो रहा है ?" ।

कैसा पछतावा, सोनिया की वजह से तो मुझे आज तेरा कटुवा लन्ड नसीब हुआ है !" टीना ने बढ़कर राज के लिंग को हाथों में लिया और अपनी मुट्ठी मे दबाकर उसकी चिकनी सतह और अद्भुत् लम्बाई पर ऊपर और नीचे मालिश करने लगीं। इससे पहले कि वो उसे उनकी योनि में भोंक दे, टीना जी उसके मादक पुरुषत्व का अपने होठों के बीच अनुभव करने को बेताब हो रही थीं।

म्म्म्म्म , ओह, वाह! ::. ओहहह, बहुत बढ़िया! :: जोर से रगरिये!", राज कराहा, और अपने लिंग के विकराल भार को बेहदगी से टीना जी के हाथों में झुलाने लगा
 
94 प्रतिवाद
जैसे ही दोनो फ़ार्महाउस के भीतर दाखिल हुए, राज ने टीना जी को अपनी बाँहों में भरा और तन्मयता से उनका चुम्बन लेने लगा। टीना जी उसके नौजवान बदन की कैद में सिमट कर जैसे पिघलने लगीं, और अपने बिकीनी की जाँघिया से ढके पेड़ को उसके वज्र से कठोर लिंग के उभार पर बेशर्मी से मसलने लगीं। राज उनके पुत्र जैसा ही था, जवान और कामेच्छुक। उसमें एक अद्भुत आकर्षण था जो उन्हें उसके संग सैक्स क्रीड़ा करने पर मजबूर किये दे रहा था!

उन्हें इस बात की तनिक भी चिंता नहीं थी कि उनके पतिदेव बाहर मौजूद थे। शर्मा कुटुम्ब के बीच नवस्थापित यौन -स्वातंत्र्य ने समाज के रूढ़ीवादी नियमों को दरकिनार कर दिया था। वैसे भी, मिस्टर शर्मा स्विमिंग पूल में जवान डॉली पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो रहे थे, टीना जी विश्वास से कह सकती थीं कि उनके कामातुर पतिदेव उस क्षण राज की जुड़वाँ बहन के साथ ऐसे ही रंगरेलियाँ मना रहे होंगे। और अपने पुत्र की काम प्रवृतियों का स्वयं अनुभव कर लेने के बाद उतने ही विश्वास के साथ कह सकती थीं कि राज की माँ और जय जैकूजी में सिर्फ स्नान करने के वास्ते नहीं गये थे।

उन्हें तो संशय था कि सब किया धरा सोनिया का ही था, पर जैसे-जैसे राज के हाथ दृढ़तापूर्वक उनके अंग-अंग पर घूमने लगे, टीना जी अन्य विचार त्याग कर अपना पूरा ध्यान केवल अपनी वासना भरी अनुभूतियों और अपनी भीगी योनि के भीतर उठती तीक्षण टीस पर केन्द्रित लगीं।

"राज !", नाटकीय शैली में चिंता व्यक्त करती हुई वे बोलीं, "क्या इसका मतलब है कि तुम मुझे चाय-नमकीन परोसने में मदद नहीं करोगे, बेटा ?"

"ओहहह, टीना आँटी! चाय-नमकीन को छोड़िये! इस वक़्त तो मुझे आप ऐसी नमकीन लग रही हैं, कि मेरा दिल तो आपसे ही भर जायेगा !"

"म्म्म्म! बेटा नमकीन पसन्द है तो जरा इसका स्वाद भी चख कर देखना !", टीना जी खिलखिलायीं, और नीचे की ओर संकेत करके अपने भीगे पेड़ को किशोर राज की आतुरता से सहलाती उंगलियों पर रगड़ने लगीं।

आपको शिकायत का मौक़ा नहीं दूंगा। बस देखते जाईये!", वो मुस्कुराया। ऐसा कह कर, राज ने टीना जी को अपनी बाँहों में भर कर उठा लिया और उस रूपमती स्त्री को आत्मीयता से चूमता हुआ बैठक में उठा लाया। उसने सावधानीपूर्वक उन्हें सोफ़े पर लेटा दिया, और लपक कर अपना स्विमिंग टूक उतार निकाला। अपने जवान तन्दुरुस्त लिंग की प्रथम झलक पाकर टीना जी की फटी रह गयी आँखों को देखकर राज मुस्कुराने लगा।

उहहह हे भगवान राज ! तू तो राक्षस है! कटुवे लन्ड वाला राक्षस !", टीना जी ने आह भरी, वे हड़बड़ाती हई अपनी बिकीनी के टॉप के हक को खोलने की चेष्टा कर रही थीं।

जैसे उनके स्तन विमुक्त होकर कूद कर बाहर निकले, राज कराहा और अपने सर को टीना जी के सुविकसित और परिपक्व स्तनों पर झुकाया, फिर भूखों की तरह उनके निप्पलों को अपने मुँह के भीतर चूसने लगा। ।

"ओहाहह, शाबाश बेटा! डार्लिंग, मेरे मम्मों को चूस! शिशु की तरह इन्हें चूस बेटा, अपनी माँ के मम्मों जैसा ही समझ ! जैसी रजनी के मम्मों से चूस चूस कर दूध पीया था, मेरे थनों को भी चूस !" ।

राज ने शीघ्रतापूर्वक आदेश का पालन किया, एक-एक करके लड़के के आतुर मुँह ने उनके अति - संवेदनशील निप्पलों को स्तनपान की रीति में चूसा, तो टीना जी मातृट्व बोध के मारे ऊंचे स्वर में अभूतपूर्व आनन्द का अनुभव करती हुई कराह पड़ीं। बड़ा मर्मस्पर्शी दृष्य था, राज किसी मासूम शिसु की तरह प्रेमपूर्वक उनके भरे-पूरे स्तनों का पान करता हुआ जैसे बलवर्धक दूध का संचय कर रहा हो। टीना जी भी अपने स्तनपान के दिनों को स्मरण कर के ममता से ओतप्रोत होकर तृप्ति प्राप्त कर रही थीं।

किशोर राज के होंठ उनके स्तनों से जुदा होकर जब नीचे की ओर बढ़े, तो टीना जी हलके से चीख उठीं। राज ने उनके नग्न पेट पर गरम और भीगे चुम्बनों की बरसात कर दी, जिससे उनकी योनि में कामोपेक्षा के अनेक बुलबुले फूटने लगे।

टीना जी अब अधिक समय धीरज नहीं धर सकती थीं। उन्होंने अपने अंगूठों को अपनी बिकीनी की जाँघिया के इलास्टिक में अटकाया और उन्हें नीचे खींच लिया। फिर अपेक्षापूर्वक भाव से अपने होठों पर जिह्वा को फेरते हुए, टीना जी आराम से लेटीं और अपनी मलाई सी चिकनी जाँघों को चौड़ा पाट दिया, जिससे उनकी रोमयुक्त योनि की खुली कोपलें राज की भूखी निगाहों के समक्ष अनावृत हो गयी।

ले खा नमकीन बेटा!", वे फुकार कर बोलीं, और किशोर राज के सर को अपनी जाँघों के बीच खींच दिया। राज ने अपने पूरे मुंह को टीना जी की खुली, भीगी योनि पर दबा डाला और सुड़प - सुड़प कर चूसने लगा। टीना जी की योनि का स्वाद उसकी माँ जैसा ही कुछ था! अपनी माँ की योनि के स्वाद को चख कर राज की कामेन्द्रियाँ सदैव ही उदिक्त हो उठती थीं। उसका उतावला युवा लिंग शीघ्र ही कठोर होने लगा और फूल कर दैत्याकार का हो गया।

"ऊ ऊ ऊह, बहुत बढ़िया! चूस ले, राज !", टीना जी हाँफ़ कर बोलीं, और अपने नितम्बों को सोफ़े से ऊपर उचकाने लगीं। उनकी खुला हुआ योनि-द्वार लड़के के चूसते मुख पर कस के चिपटा हुआ था, परन्तु टीना जी और अधिक घर्षण के लिये तड़प रही थीं।

दोनो हाथों में उनके नग्न नितम्बों को दबोचे हुए राज अपने मुँह को टीना जी की चौड़ी खुली हुई योनि में और गहरा गाड़ता जा रहा था। वे हर्ष के मारे कराहीं, और अपनी रिसती योनि को राज के चूसते मुख पर मसलने लगीं। राज भी अपने मुख को उनकी योनि के कोमल और नम माँस पर रगड़ता रहा। राज की सुलगती जिह्वा लपक लपक कर टटोल रही थी, और बार-बार टीना जी के चोंचले पर चाबुक से वार कर रही थी। टीना जी आह्लाद के मारे अपने नितम्बों को आगे और पीछे फटकती जा रही थीं। । "अंदर घुसा !", टीना जी बिलबिलायीं। "मेरे अंदर डाल अपनी जीभ ! ::: मेरी चूत को अपनी जीभ से चोद, बेटा !"

राज ने अपना मुंह खोला, और अपनी जिह्वा को टीना जी की कुलबुलाती योनि में गहरा घोंप डाला। अपने पंजों से टीना जी के छरहरे चिकने नितम्बों को जकड़े हुए, वो उनके प्रचुरता से प्रवाहित होते योनि -दवों को 'सड़प्प - चपड़ कर के चाटता जा रहा था। टीना जी मारे उन्माद के बिलबिलायीं और अपने नितम्बों को झटकने लगीं। वे इधर से उधर अपने बदन को ऐंठ- ऐंठ कर रगड़ाव कर रही थीं, और अपनी योनि से बहती तरलता को राज के आतुर युवा मुंह पर चुपड़े जा रही थीं। उन्होंने नीचे, अपने झूलते स्तनों के बीच राज के चेहरे को देखा, उनके योनि - रोमों के ऊपर केवल उसकी आँखें ही दीख रही थीं। टीना जी को अपनी योनि के भीतर किशोर राज की लम्बी और कड़ी जिह्वा बड़ी मनोरम प्रतीत हो रही थी। खासकर जीस तरह से वो उनके योनि द्वार की सम्पूर्ण लम्बाई को चाटता था, और फिर होठों से चूसता हुआ अपनी जिह्वा को उनकी कसमसाती योनि के भीतर गहरा घोंप डलता था।

"चाट मेरी चूत' ऊ ऊहह, चाट मादरचोद !", वे बिलबिलायीं। "मेरी चूत को चूस, राज !' उ ऊह, बेटा! :.. चूस मेरी चूत ! ::' चुद मुझे अपनी जीभ से ! ::' म्म्म्म्म्म्म , चूस, चूस इसे, चूस ! ::अपने चूत चाटते मुँह में मुझे झड़ा !" टीना जी अपने पतिदेव और पुत्र को पूऋनतय भुला चुकी थीं, उन्हें फ़िक्र थी तो सिर्फ अपनी क्षुधा-पीड़ित योनि के भीतर इस लड़के के सुखदायक मुख और जिह्वा की।
 
क्या रन्डीपना मचा हुआ है भाई! यहाँ तो हर शख्स एक दूसरे को चोद रहा है! देख कर मेरे टट्टे तो फिर फुदकने लगे यार !", जय एक वासना से लिप्त तथा कुटिल मुस्कान देता हुआ बोला।

"अबे बहनचोद फुदकेंगे क्यों नहीं, जानते जो हैं कि सामने खड़ी लड़की भी उसी चूत से पैदा हुई है जहाँ से ये !", उसकी बहन भी ऐसा कह कर मुस्कुरायी। | सोनिया ने एक हाथ अपनी जाँघों के बीच में फिसलाया और अपनी भीगी योनि को बिकीनी की जाँघिया के पार से बड़ी कामुक शैली में रगड़ने लगी। उसके देखते-देखते रजनी जी भी अपनी ठुसी हुई योनि को उसके भाई के विकराल लिंग की बची-खुची तनतनाहट पर कसमसाने लगीं थीं।

म्म्म्म्म, और सोनिया बेटी, तुम्हारी बतायी दूसरी बात भी सोलह आने सच निकली," रजनी जी मुस्कुरायीं।

"झड़ने के बाद इसका लन्ड राज से कहीं ज्यादा जल्दी फिर खड़ा हो उठता है। अँहहह, हाय ऊपर वाले! देख मेरे मुंह से बात निकली नहीं कि मुस्टंडा मेरी चूत के अंदर फिर से तनने लगा! ओहहह, भगवान! जय बेटा, मेरा बड़ा मन कर रहा है तू मुझे एक बार फिर चोदे! बोल बेटा, है तुझमें इतनी ताक़त ? कुछ बचा है तेरे टट्टों में शर्मा खानदान का जोशो-खरोश ?" ।

"बिलकुल है! अरे तेरे जैसी तो एक-के-बाद- एक पाँच-छह रन्डियाँ चोद दूं मैं। माँ का दूध पिया है मैने, यह टट्टे पुरे रन्डीखाने की चूतों की गर्मी ठंडी कर सकते हैं!" किशोर जय ने हुंकार कर ऐलान किया, और अपने चमचमाते कठोर लिंग को रजनी जी की वीर्य से छलकती योनि के भीतर आगे और पीछे क्रियाशील करने लगा।

सोनिया बढ़ते रोमांच के साथ अपनी वयस्का पड़ोसन को कराहते हुए अपनी योनि को जय के पुनर्जीवित लिंग पर झटकते हुए देखने लगी। कुटिलता से मुस्कुराती हुए, उस भोली सूरत वाली चालाक लड़की ने अपनी बिकीनी की सूक्ष्म जाँघिया को उतार लिया और अपनी टाँगों को पसार दिया।

"दो से भले तीन ! क्या ख़याल है ?", सोनिया ने मुस्कुरा कर प्रस्ताव रखा
 
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आशापूर्ति
जय निगाहें नीची कर के अत्यंत रोमांचित दशा में अपने लम्बे और मोटे लिंग को रजनी शर्मा के पटे हुए नितम्बों के नीचे अंदर और बाहर हरकत करते हुए देख रहा था। वह अपने वज्ञ से कठोर स्तम्भ को उनकी कस के जकड़ती योनि के भीतर और बाहर ठेलकर सम्भोग क्रीड़ा करता देख रहा था। उसके लिंग का वह भाग जो उनकी योनि के बाहर था, रजनी जी के प्रचुर द्रवों से सना हुआ चमचमा रहा था। जय अपने लिंग को रजनी जी की योनि को पीछे की ओर से भेदता हुआ देखकर बड़ा प्रसन्न हो रहा था,

अपने लिंग पर उनकी लिसलिसी योनि की सुखमय फिसलन और अपने पेड़ पर उनके सुडौल नितम्बों के प्रहारों का दिल भर कर आनन्द लूट रहा था वो। परन्तु इन सब से अधिक उत्तेजक तो वे धीमी कराहें और उन्माद भरी चीखें थीं, जिन्हें वो नग्न स्त्री उसके संग प्रणय लीला करते हुए अपने होठों से निकालती जा रही थी। जय बलपूर्वक उनके भीतर ठेल रहा था, हर बार जब वे पीछे को धकेलतीं तो वो प्रत्युत्तर में आगे को झुकता, और अपने लम्बे और पुखता लिंग को उनकी तप्त व चिपचिपी योनि में दे मारता: फिर एक बार लगातार • मारता ही जाता।

ओहहह, अर्से बाद आपकी चूत नसीब हुई आँटी !", जय गुर्राया। "अब जोर से चोदना शुरू करू ?" ऊ ऊ ऊह, हाँ! अब कस के चोद मुझे! डार्लिंग, तेरे लन्ड में जितनी ताक़त है, लगा के चोद !"

साले, खुद को क्या समझता है, मोटा लन्ड लटका कर पहलवानी दिखाता है, देखू तेरी माँ ने तुझे रन्डी की आग बुझाना सिखाया है भी कि नहीं। मैं ख़ानदानी रन्डी हूँ, खानदानी, चूत में ऐसी गर्मी है की बड़े-बड़ों के लवड़े इसमें पिघल कर मोम हो जाते हैं !"

जय ने रजनी जी के लुभावने नितम्बों को और ऊपर उठाया और अपने पुट्ठों की पूरी शक्ति लगाकर अपने लिंग को उनकी टाइट और चिपचिपी योनि में ठेलने लगा।

अच्छा तो ले !", जय चिल्लाया। ६ : '' ले झेल मेरे लन्ड की ताक़त को, रन्डी! आज तुझे दिखाता हूँ कि शर्मा खानदान के सुपूत पीढ़ियों से तेरी जैसी मोहल्ले की रन्डियों को चोद चोद कर कैसे चूत की गर्मी ठन्डी करते आये हैं और अपनी रखैल बनाते आये हैं !

जय पशु की भांति अपने लिंग को उनके भीतर घोंपने लगा, और हुंकारें भरता हुआ अपने दानवाकार लिंग से लक्ष्य पर प्रहार करता रहा। उसने पीठ को अकड़ा कर रजनी जी के कूल्हों को अपने हाथों में दबोच रखा था, और अपने हर ठेले के साथ लिंग पर उनकी योनि को कस के खींचता जा रहा था।

"चोद मुझे !", कर्कष स्वर में उन्होंने चुनौती दी। "माई का लाल है तो चोद, चोद अपनी माँ की चूत समझ कर! :: : चोद, जय बेटा! :: : ऐसे चोद, जैसे इस रन्डी की चूत को आज तक किसी और मर्द ने न चोदा हो !"

रजनी जी की तरलता से लबालब योनि में उसके लिंग के छपाकों की आवाजों के बीच में एक अन्य प्रकार का स्वर उभरता था - रजनी जी के नितम्बों पर जय के पेट और जाँघों के लयबद्ध थपेड़े। इस प्रकार ऊर्जात्मक सैक्स क्रीड़ा की आवाजें उस जैकूजी वाले कमरे में गूंजने लगीं। दोनो इकट्ठे कराहते और आहें भरते हुए, अत्यंत वेगपूर्वक चरम यौनानन्द, जिसकी चेष्टा में वे जूझ रहे थे, की प्राप्ति के समीप आ रहे थे।

रजनी जी को पहले चरमानन्द की प्राप्ति हुई, वे कसाईख़ाने में कटती सूअरनी जैसी बिलबिलायीं , और जय ने भयानक दरिन्दगी से अपनी सम्भोग क्रीड़ा जारी रखी। वो अपने ठोस युवा लिंग को बार बार उनकी फुदकती कंपकंपाती योनि में पीटे जा रहा था। अपने रौन्दते लिंग पर रजनी जी की आह्लादित योनि की तरंगों ने उसे भी यौन आनन्द के शिखर पर पहुंचा दिया, और एक तीक्षण चीत्कार के साथ, किशोर जय अकड़ कर ऐंठा, उसका धड़कता लिंग उबलते मलाईदार वीर्य की बौछार पर बौछार रजनी जी की थरथराती योनि में उडेलने लगा।

"ओहो," उनके पीछे से एक आवाज आयी, "तुम दोनो तो वाक़ई अच्छी तरह घुलमिल गये हो !"

रजनी जी और जय ने सर उठा कर देखा तो सोनिया को दरवाजे पर खड़ा हुआ पाया, उसके सुन्दर सलोने मुख पर एक मुस्कान फैली हुई थी।

"अन्दर आओ बेटा," रजनी जी बोलीं, और जय की सशक्त भुजाओं को थपथपती हुई बोलीं, "तू एकदम सही बोलती थी, सोनिया, तेरे भाई का लन्ड तो सचमुच मस्त - तन्दुरुस्त है!"

जय भौचक्का होकर अपनी बहन के मुँह को ताकने लगा। "क्यों सोनिया ? तू आँटी को पहले ही सब कुछ बता चुकी है?"

"और नहीं तो क्या, सोनिया अपनी बिकीनी के टॉप को उतारती हुई बोली। "आँटी को हमारी पूरी कहानी मालूम है, बड़े भैया!" ।

"पूरी कहानी?", जय ने घूट लिया। "मम्मी और डैडी के बारे में और ... )

"साहबजादे, अब छोटी सी बात से इतना हैरान ना होइये, जय की के पुट्ठों की मालिश करते हुए रजनी जी ने धीमे से कहा। "अब देखो, राज भी तो मुझे और डॉली को चोदता है।"

ग़लत आँटी, आपको, डॉली को ::: और साथ में मुझे भी!", सोनिया ने खिलखिलाते हुए चहक कर बोला।
 

Hello everyone.




We are Happy to present to you The annual story contest of XForum


<marquee width="100%" direction="left" height="60px" scrollamount="3" behavior="alternate"> "The Ultimate Story Contest" (USC).</marquee>
As you all know, in previous week we announced USC and also opened Rules and Queries thread after some time. Before all this, chit-chat thread already opened in Hindi section.

Well, Just want to inform that it is a Short story contest, in this you can post post story under any prefix. with minimum 700 words and maximum 7000 words . That is why, i want to invite you so that you can portray your thoughts using your words into a story which whole xforum would watch. This is a great step for you and for your stories cause USC's stories are read by every reader of Xforum. You are one of the best writers of Xforum, and your story is also going very well. That is why We whole heatedly request you to write a short story For USC. We know that you do not have time to spare but even after that we also know that you are capable of doing everything and bound to no limits.

And the readers who does not want to write they can also participate for the "Best Readers Award" .. You just have to give your reviews on the Posted stories in USC

"Winning Writer's will be awarded with Cash prizes and another awards "and along with that they get a chance to sticky their thread in their section so their thread remains on the top. That is why This is a fantastic chance for you all to make a great image on the mind of all reader and stretch your reach to the mark. This is a golden chance for all of you to portrait your thoughts into words to show us here in USC. So, bring it on and show us all your ideas, show it to the world.

Entry thread will be opened on 7th February, meaning you can start submission of your stories from 7th of feb and that will be opened till 25th of feb. During this you can post your story, so it is better for you to start writing your story in the given time.

And one more thing! Story is to be posted in one post only, cause this is a short story contest that means we can only hope for short stories. So you are not permitted to post your story in many post/parts. If you have any query regarding this, you can contact any staff member.



To chat or ask any doubt on a story, Use this thread - Chit Chat Thread

To Give review on USC's stories, Use this thread - Review Thread

To Chit Chat regarding the contest, Use this thread- Rules & Queries Thread

To post your story, use this thread - Entry Thread

<marquee width="70%" direction="left" height="60px" scrollamount="6" behavior="alternate"> Prizes</marquee> Position Benifits
Winner 1500 Rupees +
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Award + 30 days sticky Thread (Stories)
1st Runner-Up 500 Rupees +
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Award + 2500 Likes + 15 day Sticky thread (Stories)
2nd Runner-UP 5000 Likes + 7 Days Sticky Thread (Stories) + 2 Months Prime Membership
Best Supporting Reader
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Award + 1000 Likes+ 2 Months Prime Membership
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Regards :- XForum Staff
 
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