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Incest पापी परिवार की पापी वासना (Completed)

मैं खूब जानता हूं तू कितनी पहुंची हुई चीज है !", उसने सोनिया के कानों में कहा और अपनी उंगलियों को योनि के चोंचले पर फेरा। "सुबह बाथरूम में जो कुछ हुआ, उसे मैं भूला नहीं हूं! तभी समझ गया था कि तेरे मन में सैक्स की कैसी बेटाबी है।"

जय ने जैसे ही अपनी बीच की उंगली को उसकी तंग योनी में और गहरे कुरेदना प्रारम्भ किया, सोनिया ने भी अपने कूल्हों को भाई के हाथ पर रौन्दना शुरू कर दिया।

"नहीं जय, मेरी बेटाबी का अनुमान तुम भी नहीं लगा सकते। बहुत सब्र किया है मैने। पर अब और नहीं! मुझे अभी, इसी वक़्त , यहीं पर चोद जय !", उसने गुर्राते हुए कहा और अपना सर ऐसे झुकाया कि वो उसे चुम्बन दे।

जय ने अपने होंठों को बहन के पटे हुए, आतुर होंठों पर सटा दिया और तन्मयता से उनका चुम्बन लेने लगा। अपनी सुलगती जिह्वा को साँप की भाटि सोनिया के कोमल गरम मुँह की गहराइयों में सरसरा रहा था। ठीक वैसे ही जैसे उसकी उंगलियाँ सोनिया के टपकते योनि-माँस में टोह ले रही थीं। सोनिया ने भी उसी आवेग से चुम्बन दिया। भाई की जीब को चूसते हुए अपने मुँह के अन्दर निगल रही थी। इस तरह कामावेग में बहन-भाई फ्रेन्च शैली में चुम्बन कर रहे थे। सोनिया ने अपना दाँया हाथ, जिससे उसने किचन - सिंक का सहारा ले रखा था, पीछे से अपनी जाँघों के बीच डाला और भाई के लिंग को दबोच लिया। लिंग वज्र जैसा कठोर और बहुत , बहुत बड़ा था! तभी उसके भाई ने अपना मुँह उसके मुँह से अलग करते हुए उसके कान में फुस्फुसाया।

"सोनिया, अब आखिरी बार पूछ रहा हूं तुझसे। क्या तू अच्छी तरह से समझती है कि हम क्या करने जा रहे हैं ?"

"ऊऊह, हाँ जय! अछुही तरह से !", वो अपने यौवन तन को उसके तन पर दबा कर बोली।

"ऐसा है तो अपनी जुबान से बोल तू क्या चाहती है !", उसके भाई ने माँग की। जय चाहता था कि उसकी बहन खुद अपने मुँह से उससे कामानन्द की भिक्षा मांगे। वो सोनिया को अपने लिम्रा के लिये गिड़गिड़ाते हुए देखना चाहता था !

"मैं तुमसे चुदना चाहती हूं जय!", सोनिया उसके मुँह में हाँफ़ती हुई बोलि , "इसी वक़्त साले अगर मर्द का बच्चा है तो अपना मोटा काला लन्ड मेरी टाईटम-टाईट चूत में डाल और मुझे चोद !"

"बस इतना ही ?", अपने तनते हुए लन्ड पर बहन के सुगठित नितम्बों को भींचता हुआ वो बोला। प्रकट था कि जय अपनी बहन के बेहया से, और ललकार भरे निवेदन को सुन कर और उतावला हो गया था।

नहीं बहनचोद !", सोनिया ने फूली हुई साँसों से जवाब दिया, "बस इतना ही नहीं! मुझे चोदने के बाद तू मेरी चूत चाटना, इतनी चाटना, कि दूसरी बार भी झड़ जाऊं, फिर मेरी गाँड मारनी होगी! बोल है दम तेरे लन्ड में ? कि मुठ मार-मार कर कमजोर कर दिया है। ? मेरे हरामी भैय्या, मेरी गाँड में आज तक कोई लन्ड नहीं घुसा है, बड़ी टाईट है ये !" ।

"तेरी टाईट गाँड की कसम बहन, मेरा लन्ड लम्बी रेस का घोड़ा है!", जय ने जवाब दिया, "तेरी सैक्सी चूत को चोद - चोद कर भोंसड़ा बना दूंगा और गाँड तो ऐसी मारूंगा कि दो हफ्ते तक उसमें से मेरा वीर्य टपकेगा !" ।

"साले भोसड़चोद! डींगें तो बड़ी हाँकता है! मेरी फ़ेयर-एंड- लवली चूत को तो छूते ही बड़े-बड़ों के लन्ड बह जाते हैं, तेरी क्या औकात ? आज तक ऐसा लन्ड नहीं बना जो मेरी चूत की आग को शाँत कर सके !" । |

सोनिया इन अखेलियों का बड़ा आनन्द उठा रही थी। अपने उत्तेजक वार्तालाप के द्वारा भाई को उकसाने का भरसक यत्न कर रही थी। सोनिया की योजना के लिये जय का ध्यान पूरी तरह से उस पर एकत्र होना अति आवश्यक था। और जय का पौरुश सोनिया के इस वार्तालाप को सुनकर क्या उत्तेजित हो रहा था! सामान्यतः कम बोलने वाली सोनिया में इस सुखकर बदलाव को जय ने सहर्श स्वीकर लिया था।

जय ने लपक कर बहन की मिनी-स्कर्ट का हुक खोल कर उसे उसकी जाँघों पर से नीचे उतार दिया।

"क्या बॉम्ब गाँड है, मेरी बहन !" ।

सोनिया ने झुक कर अपनी एड़ियों पर से स्कर्ट को सरका कर उतारा और भाई की एक उंगली पकड़ कर सामने की तरफ़ से अपनी जाँघों के बीच से झाँकती हुई नटखट योनि में घुसाया। जय ने अपना दूसरा हाथ सोनिया के मटकों जैसे नितम्बों के गोरे-गोरे मक्खन से चिकने माँस पर बड़े प्यार से फेरा। सोनिया मस्ती के मारे कराही।
 
41 अधूरा काम

जय कुर्सी से उठा और अपनी बहन के समीप, उसके पीछे खड़ा हो गया। अपने हाथों को सोनिया के टॉप के भीतर सरका कर उसके पुख्ता और सुडौल स्तनों को हथेलियों में भर कर सहलाने लगा।

ओह! जय !", विस्मय का अभिनय करते हुए वो चिल्लायी, "ये क्या बेहूदगी है ?"

बेहूदगी कैसी, अभी तो मुझे हाथ बँटाने को कह रही थी, सो हाथ ही तो बँटा रहा हूँ ?" ।

"अरे बेवकूफ़ ! टाईम और जगह देख कर हरकत किया कर। मम्मी और डैडी देख लेंगे ?", अपने भाई के लिंग के अच्छे-खासे उभार का अपने नितम्बों पर दबाव अनुभर कर के वो कराही। उसकी जाँघों के बीच तत्काल ही नमी छाने लगी।

"अब समझो दो-चार घंटे तक वो अपने बेडरूम के बाहर फटकेंगे भी नहीं, जय के मसलते हाथों के बीच सोनिया के निप्पल अब रोमांच के मारे कुम्हला कर सख्त हो गये थे,

देखा नहीं मम्मी कैसी नशीली आँखों से डैडी की तरफ़ देख रही थीं ? अब तक तो ऊपर कामसूत्र के दो-छार अध्याय समाप्त हो गये होंगे !"

सोनिया जय की कही बात को कल्पित कर के सिहर गयी - जानती थी कि उसकी बात सोलह-आने सही थी। जय की उंगलियाँ उसके नारंगी आकार के अर्धविकसित स्तनों के नरम माँस को सहला कर गरम कर रही थीं। सोनिया अपने नितम्बों को कामुक निमन्त्रण के भाव में मटकाने लगी।

"अममम! अच्छा लग रहा है !", सोनिया अपने सुडौल नितंबों को भाई के तनते हुए लिंग पर रगड़ती हुई कराही। जय के भरपूर मजबूत हाथ उसके नग्न स्तनों को मसल रहे थे।

"तुम्हें मम्मों की मालिश पसन्द है। है ना बहन ?", अपने मुँह से गरम साँसों को बहन की गर्दन पर छोड़ता हुआ वो बोला। ।

"हाँ जय! बहन की पसन्द को खूब पहचानते हो !", सोनिया ने आह भरकर कहा। अपने स्तनों पर उसकी उंगलियों का स्पर्ष उसे इतना भ रहा था कि वो भी अपनी छाती को उसकी हथेलियों मे मसलने लगी थी। सथ में अपने वक्राकार नितम्बों को उसके पेड़ पर और दबा कर रगड़ती जा रही थी। कितनी आनन्ददायक क्रीड़ा थी वो, पर उसका यौवन और अधिक आनन्द का प्यासा था! स्सस • उसकी योनि आनन्द की आशा में सुलग सी रही थी! । "मुझे जरा छुओ जय! मेरी चूत को छुओ !", सोनिया ने बिनती करते हुए अपनी टंगें जय के लिये फैला दीं।

"बन्दा हाजिर है !", जय ने अपना एक हाथ उसके पेट पर फेरते हुए नीचे की ओर सरका कर अपनी बहन की स्कर्ट में घुसाया और उसकी पैन्टी से ढकी योनि को टटोलने लगा। जैसे ही उसकी उंगलियों ने योनि के नरम मखमली उभार का अनुभव किया, उसने एक आह भरी। क्या चालू चीज है, पैन्टी नहीं पहने है !", अपनी उसकी नम योनि की कोमल कोपलों के बीच अपनी उंगलियों को सरकाते हुए सोचा।

भाई की उंगलियों का अनुभव अपनी रसीली योनि के और भीतर पाने की चेष्टा में सोनिया ने भी अपने कूल्हों को आगे उसके हाथों पर दबाया।

* अममम! ओहह जय! तड़पाते क्यों हो ? उंगलियाँ अन्दर घुसाओ ना !" सोनिया ने जय की उंगलियों को अपनी योनि के लिसलिसे द्वार को सहलाते हुए अन्दर की ओर फिसल कर घुसते हुए अनुभव किया।

सोनिया, तेरी चूत तो टपक रही है !" उ ऊहह! तुम्हारे वास्ते ही तो गीली हो रही है!" जय ने मारे उत्तेजना के उसकी गर्दन पर चूमा और कान को होंटों के बीच दबाया।

मैं खूब जानता हूं तू कितनी पहुंची हुई चीज है !", उसने सोनिया के कानों में कहा और अपनी उंगलियों को योनि के चोंचले पर फेरा। "सुबह बाथरूम में जो कुछ हुआ, उसे मैं भूला नहीं हूं! तभी समझ गया था कि तेरे मन में सैक्स की कैसी बेटाबी है
 
"बेटे ने तो सुबह अच्छी चुदाई की, देखें अब पतिदेव रात को क्या गुल खिलाते हैं !", इस तरह सोचते हुए टीना जी ने अपने तेजी से गर्माते जननांगों को शीतल करने के वास्ते अपनी जाँघं जरा सी खोल दीं। जानती थीं कि कुछ ज्यादा ही उतावली हो रही थीं, पर उम्मिद कर रही थीं कि किसी को इसका अंदाजा नही हो। सोनिया ने माँ- बेटे का नैन -मटक्का देख कर अपनी माँ के चेहरे के भाव को ताड़ लिया था।

उधर मिस्टर शर्मा ने खाली गिलासों में दूसरा जाम भर दिया। सोनिया ने देखा कि जय ने एक ही भेंट में पूरा जाम पी लिया। टीना जी भी शौक़ से पी रही थीं। शराब के चढ़ते नशे में वे सोनिया को मैच के महत्वपूर्ण घड़ीयों का हाल बयान करते हुए खिलखिलाती जा रही थीं। मिस्टर शर्मा ने जब सोनिया का गिलास भरना चाहा, तो उसने यह कह कर मना कर दिया कि आज रात उसे अपने अपने पूरे होश-ओ-हवास में रहना है। उसकी योजना के लिये थोड़ी सी शराब लाभदायक थी, पर अधिक मात्रा में पी गयी तो बना-बनाया प्लान समझो चौपट। जब सबका खाना हो गया, तो सोनिया ने कहा कि जय और वो बर्तन समेट कर टेबल साफ़ करेंगे। टीना जी ने सहर्श स्वीकृती दे दी और अपने पति का हाथ पकड़ कर खींचती हई बेडरूम की तरफ़ ले गयीं।

जय ने बेशर्म होकर खुल्लम-खुल्ला लालसा भरी नजरों से अपनी माँ को रूम से बाहर जाते हुए देखा। सोनिया मुस्कुरायी और अपने भैइ की तरफ़ झुकी। "हरामी, तू क्या उम्मीद लगाये था ? मम्मी तेरा हाथ पकड़ कर अपने बेडरूम ले जयेंगी ?" जय सटपटा कर अपनी कुर्सी से उठा और बोला, "फ़ल्तू समझ रखा है क्या मुझे। चल काम में हाथ बटा!", झल्ला कर अपना गिलास उठाता हुआ बोला।।

सोनिया किचन में गयी और झुटे बर्तन अलग रखने लगी। उसके भाई ने भी खाने की मेज से झुठी प्लेटें ला कर सोनिया के पास रख दीं। सोनिया बर्तनों के ढेर को सिंक में रखने लगी, पर जय आराम से पास में कुर्सी पर आसन जमा कर हाथ में बीयर का गिलास थामे उसे पीने लगा।

"लाट साहब, मैं क्या अकेले ही सब काम करूंगी ?", उसने शिकायत भरे स्वर में पूछा। जवाब में जय ने अपनी बहन के नितम्बों को पीछे से एक नजर देखा और फिर जैसे शरब का सुरूर उसके जवान दिमाग पर छाने लगा, अपने होंठों पर छलकी हुई शराब को जीभ फेर कर चाटा। सोनिया मिनी-स्कर्ट पहने हुए जब भी सिंक पर झुकती थी तो जय को उसकी जाँघों के बीच एक काले धब्बे की झलक दिख जाती थी।

वोह बेचारा क्या जानता था कि उसकी चालाक बहन ने बड़ी सावधानी से इस पोशाक का चयन किया था। दोपहर को राज और डॉली के वापस जाने के बाद, उसने नहा कर अपनी अलमारी में से सबसे छोटी मिनि - स्कर्ट ढूंढ निकाली थी, जिसे पहन कर उसके कमसिन चूतड़ों का खासा प्रदर्शन होता था, विशेष कर इसलिये क्योंकी उसने अन्दर कोई पैन्टी नहीं पहन रखी थी। | सोनिया ने ऊपर ब्रा पहनने की तकलीफ़ भी नहीं की थी। उसने जो पारदर्शी सा टॉप पहन रखा था, उसके पार उसके नारंगी जैसे स्तनों और उनके शीर्ष- बिन्दु पर दो उभरे हुए निप्पल साफ़ दृष्टीगोचर होते थे। कोई आश्चर्य नहीं कि उसके कामुक भाई के लिंग पर इसका सीधा असर हो रहा था। अपने भाई की गिद्ध-निगाहों का अपने बदन पर रेंगने का आभास पाते ही सोनिया ने पलट कर जय को देखा और मुस्कुरायी।

"अब रात भर कुर्सी पर ही डेरा लगाओगे, या मुझे भी ज़रा हाथ बँटाओगे ?" । जय ने एक नज़र अपनी बहन की मक्खन सी चिकनी और गोरी जाँघों को देख कर बीयर का एक घूट पिया। "गुरू, आज तो आर या पार !", उसने सोचा, "आज तय हो ही जाये कि चोद्दी केवल फ़्लर्ट करती है कि ...शराब उसे और निडर करे दे रही थी ...
 
40 किचन में पकी खिचड़ी

जब तक जय और उसके मम्मी-डैडी घर आयें, सोनिया ने सबके लिये खाना पका कर रख दिया। उस रात का खाना जय की जीत का जश्न साबित हुआ। मैच में जय की टीम ने फिछले बरस चैम्पियन रही टीम को हरा कर जीता था। जीत की खुशी में मिस्टर शर्मा ने एक बीयर की बोतल भी खोली। और कोई वक़्त होता, तो मिस्टर शर्मा क़तैइ अपने बच्चों के सामने शराब नहीं खोलते, पर आज तो खुशी के मौका था। मिस्टर शर्मा ने सब के लिये एक जाम का गिलास बनाया और अपने बेटे को बधाईयाँ देते हुए खुशी से परोसा।

जय भी जीत के जोश में फूला नहीं समा रहा था। जब मिस्टर शर्मा ने उसकी तन्दुरुस्ती और ताक़त की तारीफ़ की, तो जय अपनी माँ को देख कर चुपके से एक आँख कारी ल मिसेज शर्मा भी मुस्कुरायीं और अपने बेटे के लन्ड की अपनी योनि के भीतर आज सुबह दी हुई आनन्दमय अनुभूतियों को स्मरण कर अपनी जाँचें सिकोड़ने लगीं।:
 
राज ने अपने लन्ड पर अचानक हुए इस हमले से सकपका हर गहरी साँस ली और खुद-ब-खुद उसका लन्ड बहन की फैली हुई चूत की टोह लेने लगा। | सोनिया को तो कानों-कान यक़ीन नहीं हो रहा था! एक डॉली थी, जो उसके डैडी से चुदने का इरादा रखती थी! और अब जाहिर था कि उसका भाई राज उसकी मम्मी पर फ़िदा था। हालात ने उसे जिंदगी के उस मोड़ पर खड़ा कर दिया था जहाँ से उसे अपने आगे कैई राहें खुलती हुई दिख रही थीं। कुछ महीनों से उसके दिल में पनपती हुई मुराद लगता है कि अब पूरी हो जायेगी। उसे अपने सपनों की हक़ीक़त में तब्दीली के आसार नजर आ रहे थे।

"डॉली और राज , दोनो चुप होकर मेरी बात सुनो !", सोनिया ने अचानक कहा, "अगर मेरा कहा मनोगे तो हम सबको अपनी मनचाही चीज हासिल हो सकती है!" लौन्डिया की बात सुनने के लिये राज और सोनिया झट से बिस्तर पर पूरा ध्यान लगा कर बैठ गये।

"बोलो, हमें क्या करना होगा ?", शब्नम ने पूछा। सोनिया उनमें जगी हुए कौतुहूल को देख कर मुसुरायी। सोनिया ने तफ़सील से अपनी पूरी योजना जुड़वाँ भाई-बहन के सामने रखि।

आगे होने वाले हादसों की उपेक्षा में तीनों चर्चा करते हुए एक दूसरे को हवस भरी नज्ज्रों से देख कर मुस्कुरा रहे थे :::::::
 
"पहले तो तुम मुझसे ये वादा करो कि जो राज मैं तुम पर जाहिर करने वाली हूं, उसे सुन कर बिगड़ोगी नहीं।" । "हाँ भैइ, वादा रहा!", सोनिया साँस रोके हुए जवाब क इंतजार कर रही थी, "अब कहो भी !"

अच्छा तो सुनो, जब राज मुझे चोद रहा होता है ::या फिर कभी मुझे नीचे चाट रहा होता है तो ... ।

हाँ, हाँ! तो क्या .. ", बेचैन सोनिया ने उसे उकसाया। "म ... मैं फ़र्ज करती हूं कि मिस्टर शर्मा, यानि तेरे डैडी, मुझे चोद रहे हैं !"

मारे हैरत के, सोनिया का मुँह खुला का खुला रह गया। राज ने भी बहन के इस इक़बालिया बयान से हैरान हो कर दो सीटियाँ दीं।

इसका मतलब तुम डैडी से चुदाई करना चाहती हो ?", सोनिया ने भौचक्के लहजे में पूछा।

हाँ सोनिया, मैं तुम्हारे डैडी पर लट्ट हूं। सच कहूं तो अपने बाप की उम्र के मर्दो पर मैं खास फ़िदा हूं।" डॉली ने अपने भाई के लन्ड को हाथ में दबोचते हुए कहा, "हूं ना बड़े भाई ?"

सोनिया ने मारे शरम और जलन के अपनी नजरें नीची कर लीं। ऐसा नहीं था कि वो डॉली से खफ़ा थी, क्योंकि अपने दिल की गहराईयों में, वो जानती थी की उसके जेहन में भी ये हवास का ये पापी खयाल आता था। जानती थी कि वो अपने डैडी से चुदना चाहती थी, पर इस बात का इक़रार डॉली के सामने भला कैसे करे ? पर वो दोनो उससे जिस क़दर ईमानदारी और खुलुस से पेश आये थे, उसे देख कर, सोनिया ने उनके सामने अपने गुनहगार दिमाग़ के खौफ़नाक इरादों को जाहिर करने की हिम्मत जुटा ली। इसमें उसे खतरा नहीं बलकी ज्यादा मजेदार और हवसनाक हादसों का इमकान हो रहा था।

सोनिया के चेहरे पर गहरी सोच के बादलों को छाया हुआ देख कर राज ने धीरे से उसकी जाँघ को छुआ, "कहाँ खो गयी ?" |

सोनिया ने ऊपर देखा और उसके खूबसूरत जवाँ चेहरे पर एक दिलकश मुस्कान फै गयी, "लगता है शर्मा परीवार और शर्मा परीवार के सम्बन्ध और गहरे होने जा रहे हैं।" |

इस बात पर राज की तो बाँछे ही खिल गयीं। "हाँ हाँ, पड़ोसियों में प्यार मुहब्बत तो होनी ही चाहिये।",

मिसेज शर्मा और उनके शहौर के बीच हुई चुदाई के सोनिया द्वारा दिये हुए ब्यौरे को याद करता हुआ राज बोला।

"मैं जानती हूं तेरा इशारा किसकी ओर है!", डॉली ने अपनी जाँघ पर भाई के लन्ड की सरसराहट का एहसास पाकर खिलखिलाते हुए कहा।

क्या ? क्या मतलब ?" डॉली ने राज के लन्ड को दबोच कर एक झटका दिया। अब ज्यादा भोला मत बन ! जानती हूं कि तू मिसेज शर्मा की गीली और गरम चूत में इस बम्बू को ठूसने के ख्वाब देख रहा है। है ना मेरे प्यारे भैय्या ?"

राज ने अपने लन्ड पर अचानक हुए इस हमले से सकपका हर गहरी साँस ली और खुद-ब-खुद उसका लन्ड बहन की फैली हुई चूत की टोह लेने लगा। | सोनिया को तो कानों-कान यक़ीन नहीं हो रहा था! एक डॉली थी, जो उसके डैडी से चुदने का इरादा रखती थी! और अब जाहिर था कि उसका भाई राज उसकी मम्मी पर फ़िदा था। हालात ने उसे जिंदगी के उस मोड़ पर खड़ा कर दिया था जहाँ से उसे अपने आगे कैई राहें खुलती हुई दिख रही थीं। कुछ महीनों से उसके दिल में पनपती हुई मुराद लगता है कि अब पूरी हो जायेगी। उसे अपने सपनों की हक़ीक़त में तब्दीली के आसार नजर आ रहे थे।

"डॉली और राज , दोनो चुप होकर मेरी बात सुनो !", सोनिया ने अचानक कहा, "अगर मेरा कहा मनोगे तो हम सबको अपनी मनचाही चीज हासिल हो सकती है!" लौन्डिया की बात सुनने के लिये राज और सोनिया झट से बिस्तर पर पूरा ध्यान लगा कर बैठ गये।
 
मेरे साथ झड़! हाँ बहन! आजा! शाबाश हरामजादी! क्या गरम चूत है! कुर्बान जाऊ!", राज चीखा। गुनाहगार भाई-बहन एक दूसरे के कांपते बदनों से लिपटते हुए अपनी हवस की प्यास बुझा रहे थे।

कराहतैइ और ससकती हुई सोनिया उनके पास बिस्तर पर लेटी, अपनी उंगलियों को अभी भी अपने दोनों टपकते छेदों में घुसेड़ी हूइ, पतली सी कमर को बेखुदी से बिस्तर पर ऊपर-नीचे उचकाती हुई थमते हुए जुनून के आगहोश मे तैर रही थी। सर फेरकर उसने राज और डॉली को देखा तो वो दोनों एक दूसरे के जिस्मों से लिपटे हुए इंतेहाई दीवानगी से एक दूसरे को चूम रहे थे। राज का लन्ड अभी भी बहन की चूत में धंसा हुआ था और वो धीमे-धीमे से अपने कुल्हे हिला रहा था। सोनिया डॉली को दबी आवाज़ में कराहते हुए सुन पा रही थी। उसकी कराहें राज के चाटते मुँह में दब रही थीं। | अपनी जाँघों से उंगलियाँ हटा कर सोनिया बिस्तर पर घुटनों के बल बैठ कर अपनी उंगलियों को राज के मजबूत चूतड़ों पर मुहब्बत से सहलाने लगी। सहलाते हुए उसकी उंगलियाँ नीचे की तरफ़, राज की जाँघों के बीच पहुंचीं और उसके के टट्टों पर लिपट गयीं। राज के टट्टे सूज कर साईज मे दुगुने हो गये थे। सोनिया को यक़ीन था कि डॉली की चूत अपने भाई के गाढे, चिपचिपे वीर्य से लबालब हो रही होगी। यह खयाल उसे गुदगुदा रहा था। झट से उसने अपना हाथ और नीचे बढ़ा कर इंगिल्यों को राज के लन्ड और डॉली की चूत के संगम पर लगया तो उसे डॉली की चूत के रिसाव के गीलेपान का गरम एहसास हुआ।

राज ने पलट कर सोनिया को देखा और मुस्कुराया। "कैसे रही, सोनिया ?", उसने पूछा, "इसे कहते हैं बहन और भाई की मुहब्बत !"

"सचमुच, दाद देनी होगी, सोनिया ने मुसुरा कर जवाब दिया, "बेपनाह मुहब्बत की भी, और सैक्स में तुम दोनो की महारत की भी! लगता है बहन-भाई ने बड़ी मेहनत से इस हुनर को निखारा है !"

हाँ भैइ, दोनो कड़ी मेहनत करते हैं! है ना शब्बो ?" राज ने बहन की तरफ़ आँख मारते हुए चुटकी ली।

डॉली ने अपने भाई की तरफ़ आँखे आधी मूंदे हुए देखा। "दोनो नहीं बेवकूफ़, हम तीनों कह! घर पर मम्मी भी तो हैं !" ।

बिगड़ती क्यों हो बहन ? मैने कभी तुम्हे लन्ड की कमी महसूस होने दी है!", राज हँसा और खुद को अपनी बहन के जिस्म से उठ कर अलग किया। सोनिया ने गौर से देखा कि उसका आधे- कड़क लन्ड डॉली की चूत से स्लड़ाप्प की आवाज के साथ खिंच कर बाहर निकला और थप्प कर के बहन की जाँघ पर गिर गया। राज अपनी बहन के साथ बिस्तर पर लेट गया और लेटते ही उसके हाथ बहन के फूले हुए स्तनों पर काले जामुनों जैसे रसीले और नुकीले निप्पलों से खेलने लगे।

"अम्म, बेशक़ तेरे साथ सैक्स में मुझे कमाल का मजा आता है। पर सच कहूं तो कैई बार मेरे जेहन में दूसरे मर्दो के लन्डों से भी चुदने का खयाल आता है।" डॉली ने बड़ी बेतकल्लुफ़ी से दिल की ख्वाहिश बयान की। राज ने अपना हाथ बहन के मम्मों से हटा कर एक झटके से उसे अपने सीने से कसा।।

"तेरे खयालों मे जिनके लन्ड आते हैं, कौन हैं वो मर्द ?", उसने पूछा।

सोनिया बिस्तर पर दोनो के सामने बठ गयी और अपनी बाँहों को भाई-बहन पर डाल कर बोली। । "जलते क्यों हो राज ?", वो बोलि , "अभी-अभी तुमने मुझे डॉली के सामने चोदा, तो उसे कोई ऐतराज नहीं हुआ। अगर डॉली भी लगे हाथ किसी दूसरे मर्द के साथ मुहब्बत के दो पल गुजारती है, तो इसमें बुरा ही क्या है ?"

राज ने सोनिया की बात पर गौर किया तो तर्क को जाज़ज़ पाया। लड़की है तो अट्ठारह साल की, पर छुपी रुस्तम है।

"तुम ठीक कहती हो।", राज अपनी बहन के होंठों पर एक हलका सा चुम्बन देता हुआ बोला, "मुझे गलत मत समझना शब्बो। मेरा मक़साद सिर्फ बहन की हिफ़ाजत ही था। पर इसका ये मतलब तो नहीं की मैं तुझे घर में कैद कर के रखू ?" इस बात पर तिनो ने खुशी से गले मिल कर खिलखिलाने पड़े।

आखिरकार, सोनिया अपनी जनाना उत्सुकता को दबा नहीं पायी, " पर डॉली तुमने बात आधी छोड़ दी। तुम किन मर्दो के साथ चुदाई के सपने देखती हो ?", इचकिचाते हुए उसने पूछा। जवाब देने से पहले डॉली ने एक सरसरी निगाह से भाई राज को देखा।
 
सोनिया भी अब झड़ने वाली थी। बुरी तरह से ताव खाकर अपने दोनों हाथों को खुद पर रगड़ रही थी। जिस जबरदस्त रफ़्तार से एक फ़ीत दूर राज अपनी बहन को चोद रहा था, उसी रफ़्तार में सोनिया भी अपनी चूत मसल रही थी। गाँड और चूत - दोहरी चुदाई का एहसास सोनिया को इससे पहले कभी नहीं हुआ था, और आज इसी कारं उसकी हवस के बरूद में चिंगारी का काम कर रहा! और उस पर राज के लट्ट जैसे मजबूत काले लन्ड से जुड़वाँ बहन की हवस से भीगी चूत को बेरहमी से चोदने का नजारा!

पूरे बेडरूम में सैक्स की जंगली आवाजें गूंज रही थीं। मस्ती भरी कराहें, हवस से भरी चीखें और सिलसिलेवार एक जिस्म से दूसरे जिस्म के टकराने की छप्प-छप्प आवजें। डॉली के बदन में जुनून का एक ऐसा सैलाब उमड़ रहा था, जिसका एहसास उसे पहले नहीं हुआ था। इतनी बेखुदी से उसके भाई ने उसे पहले नहीं चोदा था। डॉली का मानना था कि सोनिया की मौजूदगी से राज के गैर-मामूली जोश का गहरा ताल्लुक़ था। यही नहीं, डॉली की बे-इन्तेहाई दीवानगी की जिम्मेदार भी सोनिया की उस बिस्तर पर उनके साथ गुनाह में शिरक़त थी। एक बार तो वो झड़ चुकी थी, और अब दूसरी बार राज का बेरहम लन्ड उसकी बेचारी चूत को झड़ा डाल रहा था।

"आँह! ऊंह! बहनचोद ! ऊंह! ऊंह! बेरहम, फिर झड़ा रहा है मुझे !" , वो चीखी।

डॉली ने अपनी पीठ को बिस्तर से उचका कर ताना, और चूत को अपने भाई पर कसा। लन्ड की रगड़ाहट उसे पागल बना रही थी। उसने अपनी कमार ऐंठ कर अपनी टंगें ऊपर की और उनसे राज के जबर्दस्त चलते हुए चूतड़ों को जकड़ लिया। अपनी एड़ियों को राज के चूतड़ों पर मार-मार कर जैसे घोड़े को एड़ लगा रही थी। उसी के बगल में सोनिया मारे तड़प के बिस्तर पर ऐंठ रही थी और हाँफ़ती हुई मुं में घिघिया रही थी।

"ऊंगगग! ओहहूंघह! हरामियों! मैं भी झड़ रही हूँ !", सोनिया चीखी और हैवानी लहजे में झड़ने लगी। उसकी जवान चूत अपने जिस्म के ताप के मारे फड़क रही थी, उसकी गाँड घुसी हुई उंगली पर और कसती जा रही थी।

राज भी अब क़ाबू खोने वाला था। सोनिया को बेहूदगी से अपनी बेलगाम हवस की नुमाइश करते देख कर और बहन डॉली की चूत की जोरदार जकड़नों का एहसास पाकर उसके लन्ड में फ़ौरी जुम्बिश चालु हो गयी थी, जिसे वो थाम नहीं सकता था। उसकी बहन को भी लन्ड की जुम्बिश का एहसास हुआ और वो नीचे से कमर को बलखाती हुई अपने कूल्हे बिस्तर से उचका उचका कर राज के हर झटके को झेल रही थी। भाई के लन्ड के सिरे से जल्द ही फूट कर उसकी प्यासी चूत को लबालब करने वाली गर्मागरम बौछार की उम्मिद में वो मस्ती से कराहने लगी। राज का पूरा बदन ऐंठ गया और उसे अपना लन्ड डॉली की लिसलिसी चूत के फड़कते माँस पर पिलता हुआ और भी सूजा हुआ लगने लगा। एक अपने राज को अपने टट्टों में उबाल का एहसास हुआ, और दूसरे ही पल लन्ड में एक अलग तरह की फड़कान हुई।

"आरघ! हराम की भोंसड़ी! ले मेरी रन्डी बहन! ले भाई के टट्टों का दूध !" फिर बहन की चूत उसके लन्ड पर इस क़दर फुर्ती से कसी कि एक पल उसे लगा कि चक्कर आ जायेगा।

अपने लन्ड पर चूत की लगातार खींचातानी ने उसके टट्टों को उसके लन्ड पर सटा दिया था। राज ने अपना सर छत की तरफ़ उठाया और अपनी पलके भींच कर बंद कीं। उसका मुं खुला हुआ था और चेहरे को मारे दीवानगी के भींच रखा था। जैसे ही उसके गाढे, मलाईदार वीर्य की बौछारें लन्ड के सिरे से फूट कर बहन की झूमती चूत की गहराईयों में बहने लगीं, राज के मुँह से एक चीख निकल गयी। डॉली भी जुड़वाँ भाई को अपनी चूत में झड़ते हुए देख कर मजे से चीखी। चूत में छलकते वीर्य और मोटे फड़कते लन्ड के गहरे दबाव के असर ने उसे भी तीसरी बार झड़ाना शुरू कर दिया।

ऊहहघहघ! ओह! राज ! और चोद मुझे! कस के चोद! ऊंगहहह !"
 
जय ने अपनी माता की निर्लज्ज कर्णभेदी चीख सुनी और अपने धूम को दुगुना कर दिया।

टीना जी अपने पाश्विक उन्माद में लिप्त होकर अपनी योनि को ऐसे अलौकिक बल से उसके आतुरता से रसास्वादन करते मुख पर ढकेल रही थीं, कि जय को एक पल लगा जैसे स्वयं को घायल ही न कर बैठे। पर ऐसी कोई बात नहीं थी; टीना जी तो इन्द्रीय सुख के आवेग में आरोहित हो रही थीं, अपनी सुगठित स्त्री- देह में स्फुटित होती ये नवनवीन अनुभूतियँ उन्हें स्वर्ग की ओर प्रक्षेपित कर रही थीं।

ऊऊह, चोहे! ये ले मेरी चूत के पूत ! मैं तो झड़ीऽ !" । कामोत्तेजना से सुखद मुक्ति की आनन्द - लहरें उनकी कुम्हलाती योनि से निकल कार उनके पूरे कांपते बदन पर शीघ्रता से फलने लगीं। टीना जी की आवाज उन्हीं की दबी हुई चीख में कहीं लुप्त हो गयी। जय अपनी लम्बी जिह्वा द्वारा माँ की रिसती योनि पर किसी पिल्ले की तरह ही चटुकार कर रहा था। अपनी माता की प्रचुर योनि-वृष्टि की बून्द बून्द को वो असाधारण तल्लीनता से सफ़ा - चट्ट कर गया। आखिरकार जब टीना जी ने अपनि योनि से उसका मुंह उठाया, तब कहीं जाकर जय ने योनि को चाटना बन्द किया और चेहरा उठाकर उनकी आँखों में झाँका।। । "ओहह, मम्मी डार्लिंग! मजा आ गया! ऐसी चटपटी चूत तो जिन्दगी में पहले कभी नहीं चाटी।", उसने स्वीकारा। टीना जी ने झुक कर उसके द्रव -मंजित मुख को देखा और मुस्कुरा कर बोलीं, "मेरी चूत के नन्हे आशिक़, मम्मी की चूत को आज तक किसी मर्द ने इतने प्रेम से नहीं चाटा है!", उसकी माँ ने उत्तर दिया और उसके सर को अपने उठते-गिरते पेट पर सुला दिया।

"पर एक बात मेरी समज में नहीं आयी, जय। इतनी मजेदार चूत - चटायी तूने आघिर सीखि किससे? हरामी तेरे मुंह में ऐसा जादू है कि चाहे तो दुनिया की किसी भी औरत को अपना गुलाम कर ले !"

जय ने कुछ झेपते हुए से ऊपर टीना जी को देखा। "क्या कहूं, बस प्रैक्टिस हो गयी है। मम्मी!", कुछ अधिक ही डींग हाँकते हुए वो बोला।

"प्रैक्टिस? किससे करता है, लाडले? कहीं आजकाल सोनिया की चूत चाटने का शौक़ तो नहीं पाल रहा है तू ? बोल मादरचोद !", टीना जी ने पूछा। अपनी पुत्री के प्रति होती ईष्र्या उन्हें कुछ अटपटी लग रही थी।

"नहीं, मम्मी। पर सोनिया की चूत चखने में मुझे कोई हर्ज नहीं! अब तो लगता है मेरी जुबान को बस चूत - चटायी की लत लगने वाली है।" । | टीना का मुख लालिमा- रण्जित हुआ, लजा से नहीं, वासना से, और वे मुस्कुरायीं। पर उन्हें अब भी जय साफ़-साफ़ नहीं बतला रहा था कि किसकी योनी को चाट-चाट कर उसने मुख-मैथुन की विद्या में निपुणता प्राप्त की थी।

"अरे मादरचोद, अब बोल भी! अगर बहन की नहीं तो किसकी चूत चाटता है तू?"
 
जय ने अपनी नाक को माता के खेस जैसे योनि-रोमों पर दबाया और एक लम्बी साँस भरी। मातृ-कस्तूरी की मादक सुगन्ध उसके नथुनों में समा गयी, और उसके मस्तिष्क की दिशा में पाश्विक दुराग्रह के संकेत भेजने लगी। क्षुधा- रंजित मादा-योनि की सुगन्धि तो प्रत्येक नर को आकर्षित करती ही है, पर यदि पाठकगण , आपको कामदेव अपनी माता की योनि सूंघने का सुअवसर प्रदान करें, तो वो अनुभव आपको स्वर्ग सा आनन्द पृथ्वी पर ही दे सकता है। । "सच कहूं मम्मी, आपकी चूत तो बिलकुल बोंसड़दान है! दर्जन कुत्तों से चुदी कुतिया जैसी स्मेल है आपकी ! मन तो करता है की मैं भी इसे कुत्ते जैसा चाटने लगू !", जय बुदबुदाया और कुंडली मारे हुए नाग जैस अपनी जिह्वा को मुँह से बाहर निकाल कर लाल लिसलिसी योनी की ओर बढ़ा। टीना जी धैर्य नहीं धर पा रही थीं। उनकी कमर काँप रही थी, और उनकि योनि तो यदि कुछ और क्षण क्रिया-वंचित रहती तो जैसे चूर-चूर ही हो जाती।

"रब्बी! ओहहह मेरे भगवान! कितना तड़पा रहा है मुझे मादरचोद! मेरे लाल, चाट मुझे अब ! प्लीज मेरी चूत को चूस! अब नहीं रुका जाता !", अपने दोनो हाथों से पुत्र के सर को पकड़ कर उन्होंने आग्रह किया, और जय की जिह्वा को अपनी फड़कती, द्रव - लिप्त योनि-माँद में बलपूर्वक ढूंस दिया।

"अमम्म मम्प्फ़म! अँहहममम !", जैसी ही उसकी माँ की योनि की कोपलें उसपर टकरायीं, उसका मुँह स्वतः ही खुल गया। टीना जी की गोरी-गोरी माँसल जाँघे उसके कानों पर कसी हुई थीं और उसे अपना लाचार बन्दी बनाये हुए थीं। ऐसा बन्दी जो केवल उनकी बहती योनी के प्रचण्ड द्रव - प्रवाह को चाट और चूस सकता था। जय ने सहारे के लिये माता के सुडौल गोलाकार नितम्बों को हाथों में जकड़ा। टीना जी उचक-उचक कर अपने कूल्हों को कसमसाते हुए अपने पुत्र के चूसते मुँह पर दबा रही थीं। इतनी किशोर आयु में भी जय उपेक्षा से अधिक कुशलता क स्राहनीय प्रदर्शन कर रहा था। क्षुधित मुख से अपनी वासना की पात्र माँ की तपती, टपकती योनि को निरन्तर चूसता और चाटता हुआ जय, मजाल है कि एक बार भी साँस लेने के लिये रुका हो।

जय अपने मुँह को अपने जननस्थल में जैसे जैसे घुसेड़-घुसेड़ कर उनके संवेदनशील योनिमाँस को लपड़ - लपड़ करके निपुणता से चाटता हुआ गुदगुदा रहा था, टीना जी तो वैसे ही काम-तृइप्ति के समीप पहुँच गयी थीं। उनका पुत्र उनकी योनि से मुखमैथुन करता हुआ उन्हें अपूर्व आनन्द प्रदान कर रहा था! 'सदके जाँवा, क्या मुँह पाया है! मुस्टन्डा पहले भी तजुर्बा कर चुका है!', टीना जी ने सोचा, 'अपने बाप जैसा ही हुनर है। बाप नम्बरी, तो बे बेटा दस नम्बरी !' जय अपनी माँ के सूजे हुए लाल योनि - पटलों को चूस रहा था, पहले दायें फिर बायें, और जब उसकी टटोलती जिह्वा और होंठों को चोंचले की फुदफुदी गाँठ मिल गयी, तो टीना जी स्चमुच ही अपने कूल्हों को लावारिस कुतिया जैसे ऊपर और नीचे उचकाने लगीं। जिस तरह वे अपने काले केशों को आजू-बाजू फटका रही थीं, 'दर्जनों कुत्तों से चुदी कुतिया' ही प्रतीत हो रही थीं।
जय अब अपना पूरा शरीरिक और मानसिक बल काम-क्रिया में झोंक रहा था। अपनी जिह्वा पर अनुभव होते एक नवीन स्वाद का अनुभव करने के पश्चात , वो जान गया था कि उसकी माँ किसी भी क्षण काम - सन्तुष्टि के शिखर पर पहुँचने वाली थीं। अपनी जिह्वा को हौले-हौले टीना जी की फैली हुई योनि की सम्पूर्ण लम्बाई पर फेरते हुए, वो उनके धड़कते चोंचले को अप्ने मुंह में किसी दूध के प्यासे शिषु की तरह लिये हुए चूस रहा था।

अँन्नहहहह! हा, जय! चूस जोर से पिल्ले ! आहहगहह! चूस अपनी कुतिया माँ की चूत ! मादरचोद, मैं झड़ने वाली हूँ! :... भोंसड़चोद, देख तेरे मुँह में तेरी माँ झड़ रही है !" ।
 
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