मैं खूब जानता हूं तू कितनी पहुंची हुई चीज है !", उसने सोनिया के कानों में कहा और अपनी उंगलियों को योनि के चोंचले पर फेरा। "सुबह बाथरूम में जो कुछ हुआ, उसे मैं भूला नहीं हूं! तभी समझ गया था कि तेरे मन में सैक्स की कैसी बेटाबी है।"
जय ने जैसे ही अपनी बीच की उंगली को उसकी तंग योनी में और गहरे कुरेदना प्रारम्भ किया, सोनिया ने भी अपने कूल्हों को भाई के हाथ पर रौन्दना शुरू कर दिया।
"नहीं जय, मेरी बेटाबी का अनुमान तुम भी नहीं लगा सकते। बहुत सब्र किया है मैने। पर अब और नहीं! मुझे अभी, इसी वक़्त , यहीं पर चोद जय !", उसने गुर्राते हुए कहा और अपना सर ऐसे झुकाया कि वो उसे चुम्बन दे।
जय ने अपने होंठों को बहन के पटे हुए, आतुर होंठों पर सटा दिया और तन्मयता से उनका चुम्बन लेने लगा। अपनी सुलगती जिह्वा को साँप की भाटि सोनिया के कोमल गरम मुँह की गहराइयों में सरसरा रहा था। ठीक वैसे ही जैसे उसकी उंगलियाँ सोनिया के टपकते योनि-माँस में टोह ले रही थीं। सोनिया ने भी उसी आवेग से चुम्बन दिया। भाई की जीब को चूसते हुए अपने मुँह के अन्दर निगल रही थी। इस तरह कामावेग में बहन-भाई फ्रेन्च शैली में चुम्बन कर रहे थे। सोनिया ने अपना दाँया हाथ, जिससे उसने किचन - सिंक का सहारा ले रखा था, पीछे से अपनी जाँघों के बीच डाला और भाई के लिंग को दबोच लिया। लिंग वज्र जैसा कठोर और बहुत , बहुत बड़ा था! तभी उसके भाई ने अपना मुँह उसके मुँह से अलग करते हुए उसके कान में फुस्फुसाया।
"सोनिया, अब आखिरी बार पूछ रहा हूं तुझसे। क्या तू अच्छी तरह से समझती है कि हम क्या करने जा रहे हैं ?"
"ऊऊह, हाँ जय! अछुही तरह से !", वो अपने यौवन तन को उसके तन पर दबा कर बोली।
"ऐसा है तो अपनी जुबान से बोल तू क्या चाहती है !", उसके भाई ने माँग की। जय चाहता था कि उसकी बहन खुद अपने मुँह से उससे कामानन्द की भिक्षा मांगे। वो सोनिया को अपने लिम्रा के लिये गिड़गिड़ाते हुए देखना चाहता था !
"मैं तुमसे चुदना चाहती हूं जय!", सोनिया उसके मुँह में हाँफ़ती हुई बोलि , "इसी वक़्त साले अगर मर्द का बच्चा है तो अपना मोटा काला लन्ड मेरी टाईटम-टाईट चूत में डाल और मुझे चोद !"
"बस इतना ही ?", अपने तनते हुए लन्ड पर बहन के सुगठित नितम्बों को भींचता हुआ वो बोला। प्रकट था कि जय अपनी बहन के बेहया से, और ललकार भरे निवेदन को सुन कर और उतावला हो गया था।
नहीं बहनचोद !", सोनिया ने फूली हुई साँसों से जवाब दिया, "बस इतना ही नहीं! मुझे चोदने के बाद तू मेरी चूत चाटना, इतनी चाटना, कि दूसरी बार भी झड़ जाऊं, फिर मेरी गाँड मारनी होगी! बोल है दम तेरे लन्ड में ? कि मुठ मार-मार कर कमजोर कर दिया है। ? मेरे हरामी भैय्या, मेरी गाँड में आज तक कोई लन्ड नहीं घुसा है, बड़ी टाईट है ये !" ।
"तेरी टाईट गाँड की कसम बहन, मेरा लन्ड लम्बी रेस का घोड़ा है!", जय ने जवाब दिया, "तेरी सैक्सी चूत को चोद - चोद कर भोंसड़ा बना दूंगा और गाँड तो ऐसी मारूंगा कि दो हफ्ते तक उसमें से मेरा वीर्य टपकेगा !" ।
"साले भोसड़चोद! डींगें तो बड़ी हाँकता है! मेरी फ़ेयर-एंड- लवली चूत को तो छूते ही बड़े-बड़ों के लन्ड बह जाते हैं, तेरी क्या औकात ? आज तक ऐसा लन्ड नहीं बना जो मेरी चूत की आग को शाँत कर सके !" । |
सोनिया इन अखेलियों का बड़ा आनन्द उठा रही थी। अपने उत्तेजक वार्तालाप के द्वारा भाई को उकसाने का भरसक यत्न कर रही थी। सोनिया की योजना के लिये जय का ध्यान पूरी तरह से उस पर एकत्र होना अति आवश्यक था। और जय का पौरुश सोनिया के इस वार्तालाप को सुनकर क्या उत्तेजित हो रहा था! सामान्यतः कम बोलने वाली सोनिया में इस सुखकर बदलाव को जय ने सहर्श स्वीकर लिया था।
जय ने लपक कर बहन की मिनी-स्कर्ट का हुक खोल कर उसे उसकी जाँघों पर से नीचे उतार दिया।
"क्या बॉम्ब गाँड है, मेरी बहन !" ।
सोनिया ने झुक कर अपनी एड़ियों पर से स्कर्ट को सरका कर उतारा और भाई की एक उंगली पकड़ कर सामने की तरफ़ से अपनी जाँघों के बीच से झाँकती हुई नटखट योनि में घुसाया। जय ने अपना दूसरा हाथ सोनिया के मटकों जैसे नितम्बों के गोरे-गोरे मक्खन से चिकने माँस पर बड़े प्यार से फेरा। सोनिया मस्ती के मारे कराही।
जय ने जैसे ही अपनी बीच की उंगली को उसकी तंग योनी में और गहरे कुरेदना प्रारम्भ किया, सोनिया ने भी अपने कूल्हों को भाई के हाथ पर रौन्दना शुरू कर दिया।
"नहीं जय, मेरी बेटाबी का अनुमान तुम भी नहीं लगा सकते। बहुत सब्र किया है मैने। पर अब और नहीं! मुझे अभी, इसी वक़्त , यहीं पर चोद जय !", उसने गुर्राते हुए कहा और अपना सर ऐसे झुकाया कि वो उसे चुम्बन दे।
जय ने अपने होंठों को बहन के पटे हुए, आतुर होंठों पर सटा दिया और तन्मयता से उनका चुम्बन लेने लगा। अपनी सुलगती जिह्वा को साँप की भाटि सोनिया के कोमल गरम मुँह की गहराइयों में सरसरा रहा था। ठीक वैसे ही जैसे उसकी उंगलियाँ सोनिया के टपकते योनि-माँस में टोह ले रही थीं। सोनिया ने भी उसी आवेग से चुम्बन दिया। भाई की जीब को चूसते हुए अपने मुँह के अन्दर निगल रही थी। इस तरह कामावेग में बहन-भाई फ्रेन्च शैली में चुम्बन कर रहे थे। सोनिया ने अपना दाँया हाथ, जिससे उसने किचन - सिंक का सहारा ले रखा था, पीछे से अपनी जाँघों के बीच डाला और भाई के लिंग को दबोच लिया। लिंग वज्र जैसा कठोर और बहुत , बहुत बड़ा था! तभी उसके भाई ने अपना मुँह उसके मुँह से अलग करते हुए उसके कान में फुस्फुसाया।
"सोनिया, अब आखिरी बार पूछ रहा हूं तुझसे। क्या तू अच्छी तरह से समझती है कि हम क्या करने जा रहे हैं ?"
"ऊऊह, हाँ जय! अछुही तरह से !", वो अपने यौवन तन को उसके तन पर दबा कर बोली।
"ऐसा है तो अपनी जुबान से बोल तू क्या चाहती है !", उसके भाई ने माँग की। जय चाहता था कि उसकी बहन खुद अपने मुँह से उससे कामानन्द की भिक्षा मांगे। वो सोनिया को अपने लिम्रा के लिये गिड़गिड़ाते हुए देखना चाहता था !
"मैं तुमसे चुदना चाहती हूं जय!", सोनिया उसके मुँह में हाँफ़ती हुई बोलि , "इसी वक़्त साले अगर मर्द का बच्चा है तो अपना मोटा काला लन्ड मेरी टाईटम-टाईट चूत में डाल और मुझे चोद !"
"बस इतना ही ?", अपने तनते हुए लन्ड पर बहन के सुगठित नितम्बों को भींचता हुआ वो बोला। प्रकट था कि जय अपनी बहन के बेहया से, और ललकार भरे निवेदन को सुन कर और उतावला हो गया था।
नहीं बहनचोद !", सोनिया ने फूली हुई साँसों से जवाब दिया, "बस इतना ही नहीं! मुझे चोदने के बाद तू मेरी चूत चाटना, इतनी चाटना, कि दूसरी बार भी झड़ जाऊं, फिर मेरी गाँड मारनी होगी! बोल है दम तेरे लन्ड में ? कि मुठ मार-मार कर कमजोर कर दिया है। ? मेरे हरामी भैय्या, मेरी गाँड में आज तक कोई लन्ड नहीं घुसा है, बड़ी टाईट है ये !" ।
"तेरी टाईट गाँड की कसम बहन, मेरा लन्ड लम्बी रेस का घोड़ा है!", जय ने जवाब दिया, "तेरी सैक्सी चूत को चोद - चोद कर भोंसड़ा बना दूंगा और गाँड तो ऐसी मारूंगा कि दो हफ्ते तक उसमें से मेरा वीर्य टपकेगा !" ।
"साले भोसड़चोद! डींगें तो बड़ी हाँकता है! मेरी फ़ेयर-एंड- लवली चूत को तो छूते ही बड़े-बड़ों के लन्ड बह जाते हैं, तेरी क्या औकात ? आज तक ऐसा लन्ड नहीं बना जो मेरी चूत की आग को शाँत कर सके !" । |
सोनिया इन अखेलियों का बड़ा आनन्द उठा रही थी। अपने उत्तेजक वार्तालाप के द्वारा भाई को उकसाने का भरसक यत्न कर रही थी। सोनिया की योजना के लिये जय का ध्यान पूरी तरह से उस पर एकत्र होना अति आवश्यक था। और जय का पौरुश सोनिया के इस वार्तालाप को सुनकर क्या उत्तेजित हो रहा था! सामान्यतः कम बोलने वाली सोनिया में इस सुखकर बदलाव को जय ने सहर्श स्वीकर लिया था।
जय ने लपक कर बहन की मिनी-स्कर्ट का हुक खोल कर उसे उसकी जाँघों पर से नीचे उतार दिया।
"क्या बॉम्ब गाँड है, मेरी बहन !" ।
सोनिया ने झुक कर अपनी एड़ियों पर से स्कर्ट को सरका कर उतारा और भाई की एक उंगली पकड़ कर सामने की तरफ़ से अपनी जाँघों के बीच से झाँकती हुई नटखट योनि में घुसाया। जय ने अपना दूसरा हाथ सोनिया के मटकों जैसे नितम्बों के गोरे-गोरे मक्खन से चिकने माँस पर बड़े प्यार से फेरा। सोनिया मस्ती के मारे कराही।