सोनिया ने फिर छेद से झांका तो
अपने डैडी के चमचमाते लन्ड को मम्मी की खुली
चूत पर पहले जैसे कार्यरत पाया।
सोनिया ने फिर अपने फड़कते चोचले को रगड़ना चालू कर दिया।
उसने कली जैसे उत्तेजित चोचले को इतना रगड़ा कि
दूसरी बार चरमानंद पर पहुंच गयी।
दोनो उंगलीयों से अपनी टपकती चूत को
मसलती हुई मस्ती से ऐंठने लगी।
चरमानंद जब थमा तो कुछ ऐसी शरम आयी कि
चुपचाप अपने कमरे की ओर वपास चल पड़ी।
अपने कमरे में बिस्तर पर लेटी और सोने की कोशिस तो की
पर उसक सर कामुक खयालों से भन्ना रहा था।
डर भी लग रहा था कि अपने ही बाप से चुदने
की कल्पना क्यों उसे उत्तेजित कर रही थी!
मालूम नहीं कहीं वो मानसिक रूप से बीमार तो नहीं थी ?
बस एक ही बात मालूम थी - कि आज उसके बदन
में सैक्स के एक जानवर ने जन्म लिया था
और वो इस जानवर से और खेलना चाहती थी।
अपने बाप के लन्ड की और राजेश के लन्ड की कल्पना कर
उसने निश्चय किया कि जैसा मजा उसने हस्तमैथुन से पाया था,
उसे फिर पायेगी। परन्तु इस बार ऐसे लन्ड से सो उस्की चूत्त को
गर्मा-गरम उबलते लन्ड के तेल से लबालब
भर कर उसे मजे से बेहोश कर दे। |
सोनिया की जवानी के तेवर देख कर उसकी
माँ ने उसे माला -डी" दे रखी थी -
कहीं गुलछरें उड़ते पाँव भारी न हो जायें।
बस अब क्या चिंता थी ? कोई लड़का मिलना चाहिए।
पर कौन ? स्कूल के सब लड़के तो बिलकुल अनाड़ी थे।
एक बार किसी लड़की को चोद लें तो
सेखी इतनी बघारते कि पूरे मोहल्ले को खबर हो जाए।
और राजेश ? वो तो मिनटों में झड़ जाता थ।
हाँ पर उसके डैडी की तो बात ही कुछ और थी!
पर उसे बाप का लन्ड नसीब कहाँ हो सकता।
कोई और विकल्प ढूंढना पड़ेगा -
कोई जो शहर भर ढिंढोरा न पीटता फिरे।
सोनिया को अपने 1 साल बड़े भाई जय का खयाल आया।
दीवान पर लेटे टीवी देखते समय हरामी
उसकी पैंटी में तांक-झांक करता रहता था।
बाथरूम से निकलती तो बद्माश पीछे एक चपत भी जड़ देता।
और जब कभी घर के प्राईवेट स्विमिंग पूल में
अपनी काले रंग की तंग बिकीनी
पहनती तो टुकुर-टुकुर देखता।
वैसे तो बड़ा बनता थ,
पर सोनिया को पता था कि
अभी साले का लन्ड किसी चूत के परवान नहीं चढ़ा था।
वैसे था बदन उसका हट्ट-कट्टा।
क्रिकेट जो खेलता था।
कितनी ही बर सोनिया उसे जिम की टाइट पसीने
भरी टी-शर्ट मे देख कर उसके तगड़े बदन को निहारती थी।
और जाँघों के बीच जो तना क्या हुआ बम्बू था -
बिलकुल डैडी जैसा! "
हरामी का डैडी जितना बड़ ही होगा ?"
इस बेशरम खयाल ने खुद उसे चौंका डाला था।
भाई के तने हुए लन्ड की कल्पना से बेकाबू
होती वासना ने उसके तन को कंपकंपा दिया।
याद आया उसे वो दिन जब वो बाथरूम में दाखिल हुई
और वहाँ जय को एकदम नंगा पया!
शायद उसने जानबूझ कर दरवाजा बन्द नहीं किया था
ताकि मम्मी या सोनिया घुस आयें।
लन्ड तना तो नहीं था
पर उसके आकार को देख सोनिया जान गयी थी
की जो तन गया तो भारी-भरकम हथौड़े से कम नहीं होगा।
सोनिया ने तुरण्त ही माफ़ी मंगी और
बाथरूम से बाहर निकली तो
जय के होंठों पर एक कुटिल मुस्कान देखी।
फिर उसकी यादें में आया
आशीष - उसकी सकेली का यार था।
लंबा मुस्टंडा जवान थ और
सुनने में आया था कि लड़कीयों को चोदने में बड़ा माहिर भी!
पर सहेली के यार से चुदवाना ठीक नहीं
[color=rgb(255,]CAHPTER - 5 सपने की दुनिया[/color]
सोनिया को हल खुद-ब-खुद ही सूझ गया -
राज शर्मा, पड़ोस में एक लड़का था।
उम्र उन्नीस लम्बे फैशनेबल बाल, नशीली आँखें।
दो साल पहले ही तो शर्मा परिवार पड़ोस में आया था।
माँ रजनी शर्मा, जुड़वाँ बहन डॉली।
डॉली का तो उसके घर अच्छा आना जाना भी था।
"राज ही ठीक रहेगा! पर साले को लाइन कैसे मारू ?
घर के प्रईवेट स्विमिंग पूल की मरम्मत करने जब आयेगा तभी मौका मिल सकता है।"
सोनिया यूं योजना बना चुकी थी।
राज को पटाने की इस साजिश उसके चेहरे पर वासना भरी एक मुस्कान ले आयी थी। |
नींद के आगोश में अब उसके मन में बाप के बारे में पाप भरी तस्वीरें नाच रहीं थीं।
सपने मे उसने देखा कि डैडी अपने भारि-भरकम लन्ड
को हाथ मे लिये उसकी फैली हुई जाँघों के बिच झुके हुए थे।
पास ही उसकी मम्मी और भाई बिलकुल नगे खड़े थे।
भाई जय का लंड बिलकुल बाप जैस लम्बा और कड़क तना हुआ।
डैडी ने जैसे अपने लन्ड के सिरे से उसकी चूत के दरवाजे को खटखटाया,
सोनिया शरम से माँ से कहने लगी।
"मम्मी मुझे माफ़ करना।
मैं खुद को रोक नहीं पायी!"
पर मम्मी के चेहरे पर वासना की लाली थी और
वो नजारा देख कर रन्डीयो जैसे बेशरम हो कर मुस्कुरा रही थी।
"मुझे कोई ऐतराज नहीं बेटी! मेरे वास्ते मस्ती की चीज तो मेरी मुठी में ही है!"
माँ रीटा जी की हथेली प्यार से बेटे जय के कड़क लन्ड पर लिपटी हुई थी।
जय जवाब में एक हाथ से मम्मी के उभरे हुए पुख्ता मम्मों को दबा हुआ था
और दूसरे से मम्मी की रिसती हुई झांटेदार चूत को टोल रहा था।
"पर मम्मिं अपने ही बेटे से !!"
माँ को भाई जय के तने लन्ड को अपनी चूत के झोलों में डालते देख वो बोली।
"तो क्या मेरा बेटा चोदना नहीं जानता ?
एक बार तु भी आजमा कर देख मादरचोद को !"
सोनिया को यकीन नहीं हुआ
जब मम्मी ने एक झटके में भाई का लोहे सा तना
लन्ड चूत मे हड़प लिया।
ठीक उसी समय उसने अपने डैडी का बम्बू अपनी
चूत को चीरता हुआ महसूस किया।
फिर उसके मुँह से जो चीख निकली उसमे दर्द नहीं,
केवल रोमांच था।
अपने सपने की झूमती कल्पना में उसने अपनी माँ
को भी उसी मिठे पाप के उन्माद में चीखते सुना।
[color=rgb(255,]CHAPTER - 6 [/color] अकेले नहाना मना है।
भोर के सूरज की किरनों ने सोनिया की बंद पलकों
पर पड़ कर उसे जगा दिया।
अंगड़ाइयां लेते हुए उसने रात की घटना और
अपने सपने को याद किया।
क्या मजेदार दिन गुजरा! इतना मजा थे कि अब भी उसकी पैंटी गीली थी। |
फिर उसे अपनी साजिश की याद आयी जो
उसने खुद के लिये लन्ड का जुगाड़ करने के लिये रची थी।
मर्यादावश अपनी सैटिन की परदर्शी नाईटी,
जिससे क्लीवेज पूरा दिखता था,
पर तौलिया ओढ़े वो बाथरूम की ओर चल पड़ी।
दरवाज खुला था तो वो घुस गयी।
घुसते ही एक मर्दाना अवाज ने उसे चौंका डाला।
"आओ बहना !" उसका भाई जय फिर पुरानी करतूत दोहरा रहा था।
इस बार तो सोनिया उससे डरने वाली नहीं थी।
इत्मिनान से मुस्कुराई और
सीधे आँख से आँख मिला कर बोली "स्नान कर चुके भैया?"
"हः 'हाँ सोनिया बस 2 मिनट और दो।"
अपना सर तौलिये से पोंछता हुआ बड़े मजे से बहन के
सामने नग्नता क प्रदर्शन कर रहा था।
पलट के सोनिया की ओर मुस्कुराने लगा -
सोचा था वो मारे शरम के नौ दो ग्यारह हो जायेगी।
सोनिया ने ऐसा कुछ नहीं किया,
बल्की कुल्लम-कुल्ल भाई के बदन को घुर-घुर कर मुआयना करने लगी।
जय की खिल्ली उड़ाने के लिये चुटकी ले कर बोली।
ऊह! मैं जानती हूं ये क्या लटक रहा है इधर !"
भैया जय के झुलते लन्ड की ओर इशारा कर के बोली।
"तो बोलो क्या है ?" जय ने आशापूर्वक पूछा।
लन्ड जैसी ही कोई चीज है, पर उससे कहीं छोटी !"
जय के अवाक् चेहरे को देख कर खिलखिला कर हँस पड़ी।
जय ने चेहरे से झेप को पोंछ कर खेल मे शमिल होना चाहा।
। "हाँ भगवान ने मुझ से बड़ी नाइंसाफी की !"
अपने लटकते लन्ड को देखते हुए बोला।
झेपते हुए जय ने बहन से पुछा कि
अगर तुम कहो तो मैं बाथरूम छोड़ दूँ ?
"बाहर जाने की ऐसी भी क्या जल्दी है प्यारे भैया !"
सोनिया की निर्भीकता ने खुद उसे चौंका दिया।
जय को यक़ीन नहीं हो रहा था कि उसकी प्यारी बहना उसकी आँखों के सामने कपड़े उतारने जा रही थी।
जैसे ही सोनिया ने नाईटी के दोनो स्ट्रैप को धीरे से कन्धों से सर्काय,
नाईटी देर हो कर उसके कदमों पर गिर गयी।
सोनिया की अन्छुई किशोर चूचियाँ जैसे ही फुदक कर बन्धन से मुक्त हुईं,
जय उन दो पकते हुए आमों को देख कर दंग रह गया।
"तेरी बहिन की तो." अकस्मात् उसके मुंह से निकला।
बहिन की क्या ?' सोनिया मुस्कुरायी।
कुछ भी तो नहीं !" जय ने सकपकाते हुए बहन के नंगे
गोश्त पर गिद्ध सी नजरें गाड़ीं।
भैया की वासना भरी नजरों के सामने यों अंग-प्रदर्शन
का सोनिया को अब अलग ही मजा आ रहा था।
जय ने अपने सूखे होंठो पर जीभ फेरी और
उसकी नजरें सोनिया की उंगलियों के साथ-साथ
उसकी पैंटी की इलास्टिक के अंदर फिसलीं।
अब सोनिया अपने भाई को उंगलियों के इशारे पर नचा रही थी।
"सोचा न था कि इतनी आसानी से फंस जायेगा"
सोचते हुए सोनिया उस मखमली पैंटी को
सो उसका आखिरी लज्जा वस्त्र था,
अपने नाजुक छरहरे कूल्हों से सरकाने लगी।
जब सोनिया ने बड़ी नजाकत से एक के बाद एक अपनी दोनों चिकनी,
सुडौल टाण्गें उठा कर पैंटी के दोनों पायों को जिस्म से अलग किया
तो बहन के नंगे यौवन को देख जय की हवाइयाँ ही उड़ गयीं।
वो बहन की गुलाबी टपकती चूत के झोलों को
उसकी भूरी-भूरी महीन झान्टो के बीच साफ़ खिलता देख पा रहा था।
खुद-ब-खुद उसकी जीभ से पापी वासना की लार टपकने लगी।
"कहो क्या बोलते हो ?" सोनिया खिलखिला पड़ी
और जय को भौचक्क छोड़ शॉवर के नीचे खड़ी हो गई।।
सोनिया को एक कुटिल रोमांच का अनुभव हो रहा था।
उसे लगने लगा था कि मर्दो के सामने जिस्म की नुमाइश में
वाकई अलग ही मजा आता है।
शॉवर के गरम पानी ने उसके जवाँ बदन को तरोताजा कर दिया था
सोनिया ने कनखियों से देखा कि
भैया अभी भी बाथरूम में खड़े सीन का लुफ्त उठा रहें हैं।
सोनिया जैसे अन्जान बन कर उसकी तरफ़ होकर खड़ी हो गयी
और साबुन को जाँघों के बीच पेड़ पर मलने लगी।
झाग चूत से टपक कर जाँघों को लसलसा बना रहा था।
जय ने देखा कि उसके पसन्दीदा अंग, जो बहन की चूचियाँ थीं,
उनपर वो साबुन मल रही थी।
"जय मादरचोद! काश तेरी किस्मत मे होता
बहिन पर साबुन मलना!" जय ने मन में सोचा।
इस नजारे का असर अब सीधा उसके लन्ड पर होने लगा था।
उसका दायाँ हाथ खुद-ब-खुद तेजी से
तनते हुए लन्ड को अपनी मुट्ठी में ले चुका था। |
कनखियो से सोनिया ने भैया की उंगलियों को लन्ड को जकड़ कर
उसे आगे- पिछे हिलाते हुए देखा।
"भोसड़- चोद लगा मुठ मारने !"
साबुन के झाग से से उत्तेजित उसकी चूत में इस खयाल ने एक करन्ट दौड़ा दिया।
अपने नंगे जिस्म का भाई पर ये असर देख वो रोमंचित हो गयी थी
और वासना के हॉरमॉन उसके जवान खून को खौला रहे थे।
अब वो भी भाई के सामने हस्तमैथुन करना चाहती थी।
भाई जय की मुट्ठी में कूदते लंड पर नजरें गाड़े
सोनिया ने साबुन से सनी एक उंगली से अपनी गर्माई चूत के झोलों को खोला।
सोनिया ने शॉवर की धार को अपनी चूत पर डाला जैसे
कोई तांत्रिक योनि को दूध से नहला रहा हो।
सोनिया ने दीवार के सहारे पिछे हाथ टेक कर जाँघों को
और फैलाया ताकि पानी की धार ठीक उसकी चूत पर बरसने लगे ।
"ऊऊह्ह्ह !"
सोनिया मजे से कराही।
बहन सोनिया को बेधड़क मस्ती से कराहते सुन जय की मुठ्ठी
डबल स्पीड से खून से उबलते लन्ड पर चलने लगी थी।
चूत का फड़कता चोचला और
उसके नीचे चूत की मादक गहराइयाँ उसे दिख रहीं थीं।
"रंडी की चूत बड़ी गरम और तंग होगी !"
जय के लन्ड पर फैली नसें अब धड़क रहीं थीं और
लन्ड खुद-ब-खुद फुदक रहा था - मालूम होता था
कि टट्टों में वीर्य अब खौल रहा है।
बस अब कभी भी सरसराता हुआ उडेल सकता था।
सोनिया ने भाई के लन्ड को निहार कर अपनी
टपकती चूत में एक पतली उंगली डाली।
बाथरूम में उनकी मुलाकात के बाद अब वो लन्ड कितना बड़ा हो गया था!
वाकई तेल पिलाये लट्ठ सा सख्त था।
पिछली रात डैडी के लन्ड से कोई कम नहीं।
भैया को यूं ताबड़तोड़ मुठ मारते देख सोनिया की चूत का चोचला अब फड़कने लगा था।
चोचले पर उंगलियाँ फेरते उसने देखा कि
जय अपनी मुट्ठी से और तेजी से लन्ड को रगड़ने लगा।
सोनिया इस पाप भरे सुख की अनुभूति में पूरी तरह डूब चुकी थी।
अब बस वो चाहती थी कि भाई-बहन एक साथ ही चरम आनन्द को पायें।
जब भाई के लन्ड से मलाई की धार फूटे,
ठीक उसी के साथ सोनिया की चूत मे भी मस्ती का करन्ट दौड़े।
अब शरम को पूरी तरह त्याग कर के
वो शॉवर बंद कर ठीद उसके सामने खड़ी हो गयी।
बहन के बेहया रंडीपने से जय के हाथ की
हरकत में पल भर की रुकावट भी नहीं हुई।
वॉशबेसिन के सहारे उसने अपने मुस्टंड लन्ड को दनादन दुहना जारी रखा।
बहन सोनिया की मासुमियत की शराब को उसकी
सैक्सोत्तेजना ने और भी नशीली बना दिया था।
इस शराब का सुरूर जय की आँखों पर चढ़ रहा था।
उसकी सुडौल चूचियों पर निप्पल काले मीठे जामुनों की तरह लगते थे।
पानी की अन्गिनत बून्दै गोरी-गोरी चूचियों की मरमरी
चमड़ी पर ओस की तरह चमचमा रही थीं।
जय ने फूलती साँसों से बहन सोनिया को अपनी कमसिन चूत के
रोम रहित होंठों को उंगलियों से धीमे धीमे खोलते देखा।
एक पल मे वो उंगली अन्दर थी, दूसरे पल गुलाबी योनि के
ऊपर लगे चोचले को टटोलने लगीं।
चोचला सुपारी की तरह ही धमनियों से भरपूर और संवेदनशील होता है।
"बहनचोद ! आज दो जन्नत के नजारे हो गये !"
जय बुदबुदाया। * माल लग रही हो माल सोनिया !"
"ओह जय! सुबह से ही मेरे जिस्म में ये आग लगी हुयी है!" सोनिया कराही।
"मुझमें क्या कम है आग! देख बहन मेरा लौड़ा कैसा टनाटन हो गया है"
जय अपना लन्ड बहन की ओर फुदकाता हुआ बोला।
कितना बड़ब्बड़ा हो गया है! क्या मेरे कारण ?"
सोनिया ने बच्ची के स्वर मे नादानी का नाटक किया।
सोनिया बन मत ! तुझे हस्तमैथुन करते देख साले लन्ड
से तेल ही निकाल दिया! मेरे तो टट्टे उबल रहे हैं !"
वैसे सच कहूं तो डैडी जितना ही बड़ा होगा!" सोनिया बोली।
क्या बोल रही है? डैडी का कब देख लिया तूने ?
" जय ने शंकात्मक स्वर में पूछा।
कल रात ।
मम्मी और डैडी को अपने बेडरूम में मैने एकसाथ देख लिया।"
रन्डी की चूत ! अपने ही माँ-बाप पर जासूसी करती है!"
जय के होंठों पर साजिश भरी एक मुस्कान छा गयी।
"ठीक से दिखा सब ? मेरा मतलब :: मम्मी - डैडी एकसाथ कर क्या रहे थे ?"
"फिर बताउंगी। अभी हम दोनो अपना बाकी काम तो निपटा लें !"
"बिल्कुल बहना! हम साथ-साथ हैं!"
दोनों काम निपटाने का मतलब खूब जानते थे।
सोनिया ने एक टांग कुछ इस तरह ऊपर उठाई कि
उसकी चूत के पाट अब पूरी तरह खुले थे।
हल्के भूरे रंग की झान्टे उसकी जाँघों के बीच एक मखमली चादर सी बिछाये थी।
सोनिया जानती थी कि अंगारों जैसी लालम -
लाल चूत का ये नजारा उसके भाई को और भी सुलगाए देता है।
"अन्दर झाँक जरा !" सोनिया ने जय को पास आते देख बोला।
देख तेरी बहन कैसे करती है हस्तमैथुन
! तू भी मुठ मार। हम साथ-साथ हैं !"
जवान बहन सोनिया को उंगलियों से चूत के फूले नरम झोलों पर
ऊपर-नीचे मसलते देख रहा था जय।
कमसिन जवानी की गीली चिकनी चूत को उगलियों के बीच
मसलता देख जय सम्मोहित हो गया था।
बहन के कामुक जिस्म से रिसते मादा-द्रवों ने पूरी चूत को लबालब कर दिया था।
जय ने उसके चेहरे को देखा तो पाया कि
सोनिया की नजरें भी उसके तगड़े नरांग पर गड़ी हुई हैं।
"मम्मी को चोदते डैडी का लन्ड भी ऐस ही लगता होगा!"
अपनी हथेली में मोटे लन्ड को ले सोनिया की तरफ़ एक झटका देते हुए वो हुंकारा।
जैसे डैडी का ही लन्ड मम्मी की चूत में घुस रहा हो।
उसकी इस हरकत को देख सोनिया की चूत मे एक करन्ट दौड़ा ।
"बिल्कुल ऐसा ही !" अपने बाप के लन्ड का कल रात मम्मी की
चूत में घुसने की तस्वीर अब भी उसके जेहन में थी। ।
हस्तमैथुन के समय अपने ही माँ- बाप के सैक्स की बात ने जो
असर सोनिया पर दिखलाया था उससे जय ने भांप लिया कि
लड़की इस बात से बड़ी गरम हो जाती है।
" डैडी अपने लन्ड को मम्मी की चूत में ठूसते हैं!"
सोनिया इस बात को सुन कर बेकाबू हो चुकी थी।
बेतहाशा अपनी चिकनी चूत को मसलने लगी।
भाई की बात ने उसके सपनों की कल्पना को उड़ान दे दी थी
और बड़ी तेजी से वो चरम आनंद के शिखर को चूमने वाली थी।
[color=rgb(255,]9 एक दूजे के लिए[/color]
अब जय अपनी बहन को इशारे पर नचा रहा था।
बहन को कामाग्नि के पशोपेश मे तड़पता देख वो तसल्ली से मुठ मार रहा था।
उसकी अभ्यस्थ उंगलियां लन्ड की काली चमड़ी को सुर्ख सुपारी पर मजे से फिसला रहीं थीं।
सोनिया अपनी चुदाई की कल्पना कर हौले-हौले कराह रही थी।
। "ओहहह! म्म्म्हुहुहुह! आहह्म !" सोनिया की वासना भरी आवाज ने जय को निडर बना दिया था।
वो सोनिया के इतना करीब खड़ा हो गया कि उसके जिस्म की गरमी को महसूस कर सकता था।
सोचता था कि अगर हाथों से इसके जिस्म को टटोलने पर बिहड़ तो नहीं जायेगी।
बाएं हाथ से अपने तने लन्ड पर मुठ चलाते हुए, दाएं हाथ को बढ़ा कर
उसने झिझकते हुए अपनी बहन की फुदकती चूची पर फेरा।
शुरू में तो सोनिया को मालूम नहीं पड़ा पर जब जय ने चूची के नरम गोश्त को दाब कर
मसला तो अपनी अध्खुली आँखों से भाई की हरकत को देखा।
पर उसे अब इस बात की कोई परवाह नहीं थी। ।
"ओहहहह! रब्बा !" अपनी चूची को उसने जय के हाथों मे एंठा।
जय को यकीन नहीं हुआ। सोनिया खुद उससे चूची मसलवा रही थी।
"बेहेण दी! मार लिया मैदान! अब तो चूत भी छू कर देखूगा!"
सोचते हुए जय ने अपना हाथ फुदकती चूची से
हटा कर धीमे-धीमे सोनिया की जाँघों के बीच सर्काया।
सोनिया पूरी कमर को उसके हाथ पर पटक कर कराह पड़ी।
कमर के इस झटके ने जय का हाथ दोनों जिस्मों के बीच अटका दिया।
जय का लन्ड बहन के पेट से भिड़ा हुआ
दोनो जिस्मों के बीच से पैदा होती बिजली से फड़क रहा था।
"ओह्ह जय भैया!" सोनिया ने पेट पर लन्ड को महसूस कर के कराहा।
अपनी ही बहन सोनिया की पतली गोरी उंगलियों को अपने लन्ड
से लिपटता देख जय मजे से गुर्रा पड़ा।
नाजुक उंगलियों मे उसके लन्ड की पूरी मोटाई कहाँ समा पा रही थी।
"ओह! म्म्म्म! मज़ा आ रहा है !" जय की गरम साँसे उसके कानों पर पड़ रहीं थीं।
"हाथ को लन्ड पर ऊपर-नीचे हिला ना सोनिया !"
सोनिया ने वैसी ही हरकत की।
चूत पर भैया के हाथ का स्पर्श अपने हाथों से कहीं ज्यादा मजेदार था।
खसकर अब जो जय बड़ी निपुणता से उसके संवेदनशील चोचले को मसल रहा था।