[color=rgb(255,]CHAPTER - 4[/color]
[color=rgb(255,] कौन बनेगा चोदपति[/color]
सोनिया ने फिर छेद से झांका तो
अपने डैडी के चमचमाते लन्ड को मम्मी की खुली
चूत पर पहले जैसे कार्यरत पाया।
सोनिया ने फिर अपने फड़कते चोचले को रगड़ना चालू कर दिया।
उसने कली जैसे उत्तेजित चोचले को इतना रगड़ा कि
दूसरी बार चरमानंद पर पहुंच गयी।
दोनो उंगलीयों से अपनी टपकती चूत को
मसलती हुई मस्ती से ऐंठने लगी।
चरमानंद जब थमा तो कुछ ऐसी शरम आयी कि
चुपचाप अपने कमरे की ओर वपास चल पड़ी।
अपने कमरे में बिस्तर पर लेटी और सोने की कोशिस तो की
पर उसक सर कामुक खयालों से भन्ना रहा था।
डर भी लग रहा था कि अपने ही बाप से चुदने
की कल्पना क्यों उसे उत्तेजित कर रही थी!
मालूम नहीं कहीं वो मानसिक रूप से बीमार तो नहीं थी ?
बस एक ही बात मालूम थी - कि आज उसके बदन
में सैक्स के एक जानवर ने जन्म लिया था
और वो इस जानवर से और खेलना चाहती थी।
अपने बाप के लन्ड की और राजेश के लन्ड की कल्पना कर
उसने निश्चय किया कि जैसा मजा उसने हस्तमैथुन से पाया था,
उसे फिर पायेगी। परन्तु इस बार ऐसे लन्ड से सो उस्की चूत्त को
गर्मा-गरम उबलते लन्ड के तेल से लबालब
भर कर उसे मजे से बेहोश कर दे। |
सोनिया की जवानी के तेवर देख कर उसकी
माँ ने उसे माला -डी" दे रखी थी -
कहीं गुलछरें उड़ते पाँव भारी न हो जायें।
बस अब क्या चिंता थी ? कोई लड़का मिलना चाहिए।
पर कौन ? स्कूल के सब लड़के तो बिलकुल अनाड़ी थे।
एक बार किसी लड़की को चोद लें तो
सेखी इतनी बघारते कि पूरे मोहल्ले को खबर हो जाए।
और राजेश ? वो तो मिनटों में झड़ जाता थ।
हाँ पर उसके डैडी की तो बात ही कुछ और थी!
पर उसे बाप का लन्ड नसीब कहाँ हो सकता।
कोई और विकल्प ढूंढना पड़ेगा -
कोई जो शहर भर ढिंढोरा न पीटता फिरे।
[color=rgb(255,] कौन बनेगा चोदपति[/color]
सोनिया ने फिर छेद से झांका तो
अपने डैडी के चमचमाते लन्ड को मम्मी की खुली
चूत पर पहले जैसे कार्यरत पाया।
सोनिया ने फिर अपने फड़कते चोचले को रगड़ना चालू कर दिया।
उसने कली जैसे उत्तेजित चोचले को इतना रगड़ा कि
दूसरी बार चरमानंद पर पहुंच गयी।
दोनो उंगलीयों से अपनी टपकती चूत को
मसलती हुई मस्ती से ऐंठने लगी।
चरमानंद जब थमा तो कुछ ऐसी शरम आयी कि
चुपचाप अपने कमरे की ओर वपास चल पड़ी।
अपने कमरे में बिस्तर पर लेटी और सोने की कोशिस तो की
पर उसक सर कामुक खयालों से भन्ना रहा था।
डर भी लग रहा था कि अपने ही बाप से चुदने
की कल्पना क्यों उसे उत्तेजित कर रही थी!
मालूम नहीं कहीं वो मानसिक रूप से बीमार तो नहीं थी ?
बस एक ही बात मालूम थी - कि आज उसके बदन
में सैक्स के एक जानवर ने जन्म लिया था
और वो इस जानवर से और खेलना चाहती थी।
अपने बाप के लन्ड की और राजेश के लन्ड की कल्पना कर
उसने निश्चय किया कि जैसा मजा उसने हस्तमैथुन से पाया था,
उसे फिर पायेगी। परन्तु इस बार ऐसे लन्ड से सो उस्की चूत्त को
गर्मा-गरम उबलते लन्ड के तेल से लबालब
भर कर उसे मजे से बेहोश कर दे। |
सोनिया की जवानी के तेवर देख कर उसकी
माँ ने उसे माला -डी" दे रखी थी -
कहीं गुलछरें उड़ते पाँव भारी न हो जायें।
बस अब क्या चिंता थी ? कोई लड़का मिलना चाहिए।
पर कौन ? स्कूल के सब लड़के तो बिलकुल अनाड़ी थे।
एक बार किसी लड़की को चोद लें तो
सेखी इतनी बघारते कि पूरे मोहल्ले को खबर हो जाए।
और राजेश ? वो तो मिनटों में झड़ जाता थ।
हाँ पर उसके डैडी की तो बात ही कुछ और थी!
पर उसे बाप का लन्ड नसीब कहाँ हो सकता।
कोई और विकल्प ढूंढना पड़ेगा -
कोई जो शहर भर ढिंढोरा न पीटता फिरे।