"मेरी बहन, नाचीज के लन्ड पर भी जरा तवज्जो बसें !" राज अपने मुँह को सोनिया के मम्मों से अलग करता हुआ बोला। डॉली ने सोनिया की चूत पर से मुँह से कुछ बड़बड़ाया। फ़िलहाल तो उसे चूत - चटाई में बड़ा लुफ्त आ रहा था, भाई का लन्ड तो घर की मुर्गी है।
राज समझ गया कि एक बार चूत मिल गयी तो मोहतरमा की शौक़- पोशी में वो क्या, उसके बाप का लन्ड भी कोई खलल नहीं डाल सकता था। पर राज अपने लन्ड को किसी कमसिन हसीना की चिकनी गिरफ्त में कैद करवाने के लिये बड़ा उतावला हो रहा था। उठा और अपने तने हुए लन्ड को सोनिया के दो मुलायम मम्मों के बीच मसलने लगा। लन्ड का सुपाड़ा सोनिया की ठोड़ी पर लग रहा था। सोनिया ने चेहरा ऊपर कर के राज को हवस से मदमस्त अपनी दो आँखों से देखा।
"हरामजादी, अगर खानदानी रन्डी है तो खोल अपना मुँह और चूस मेरे लन्ड !" हाँफ़ते हुए राज ने सोनिया को ललकारा। | लौन्डिया ने सर झुका कर हुक्म की तामील की और अपना मासूम मुँह राज के मोटे बेरहम लन्ड के लिये खोल दिया। अगर सोनिया जिन्दगी में पहली दफ़ा चूत चटवा सकती थी तो भला पहली दफ़ा लन्ड क्यों नहीं चाट सकती थी ? राज का काला लन्ड जब सोनिया की लाल जिभ पर पड़ा तो उसे लन्ड का जायका कुछ अटपटा सा लगा, फिर उसे याद आया कि उसी की चूत के तेल और राज के वीर्य का ही जायका होगा। इस खयाल ने उसकी चूत को डॉली की लसलसाती जीभ पर और जबरदस्त कस दिया।
डॉली की मंझी हुई जीभ और होंठों के असर से सोनिया की सुलगती चूत को बेइन्तहाई लुफ्त मिल रहा था। अपनी छोटी सी जिन्दगानी में पहली दफ़े ऐसे हवसनाक तजुर्बो से गुजरने का रोमंच उसे और खुशगवार कर रहा था। अपनी आँखें मूंद कर बड़े खुलूस से उसने राज का लन्ड मुँह में क़बूल किया। अपने कमसिन होंठों के बीच उसके धड़कते लन्ड के ताक़तवर ठेले और उसके मजबूत माँस और लसलसेपन से उसे एक नायाब एहसास हो रहा था। राज अपने कूल्हे आगे-पीछे हिला हिलाकर लन्ड की लम्बाई को सोनिया के मम्मों के बीच से रगड़ता हुआ उसके छोटे गरमा-गरम मुँह के अन्दर ठूस रहा था।
"डरती क्या है लड़की! समझ लॉलीपॉप है! चूस लन्ड को !", राज कराहा, "हाँ ऐसे ही! अब लगा खानदानी रन्डी है!"
जरा थूक लन्ड पर! और मज़ा आये !"
"थू!", सोनिया ने काले लन्ड पर झागदार थूक डाली और आँखे मटाकर मुस्कुराते हुए ऊपर राज की आँखो में देखा।
"बहुत अच्छे! और थूक !", सोनिया ने दो-चार बार और पेशेवर रन्डीयों जैसे लन्ड के सुपाड़े पर थूका।।
"ऊपर वाले का क़रम! जन्नत का मजा आ रहा है! अब निगल जा पूरा!"
सोनिया ने अपने गले को ढीला कर के लन्ड की लम्बाई को धीरे-धीरे निगलना चालु किया। राज ने भी बड़ी नजाकत से अपना लन्ड इन्च -दर-इन्च सोनिया के गले के अंदर उतारा।।
या ऊपर वाले! शाबाश, एक इन्च और, निगल ले पूरा, लड़की !" राज चीखा और लगभग बर्दाश्त खो बैठा।।
चाहता तो था कि लन्ड की पूरी लम्बाई को लड़की के गले में उतार दे पर जानता था कि लड़की नादान है, अगर ऐसा कुछ किया तो डर जायेगी, क्या पता उल्टी ही न कर दे। फिर लन्ड चुसायी से तौबा न कर ले! किये-कराये पर पानी फिर जायेगा! एहतियातन , राज ने अपना लन्ड दो इन्च बाहर निकाल लिया और सोनिया को चूसने के लिये अपना सूजा हुआ सुपाड़ा दे दिया। सोनिया वहशीयाना अंदाज़ में अपनी लाल-लाल जीभ को साँप के फ़न की तरह लन्ड के सिरे पर डंक मारती हुई चला रही थी। उसके खुद के कूल्हे डॉली के मुंह पर उचक रहे थे। डॉली अपना पूरा मुँह सोनिया की मस्त चूत में ठूस कर पागलों जैसे अपने सर को आजू-बाजू पटकती हुई सपड़ - सपड़ चूत को चाट रही थी और अपनी जीभ को सोनिया की चूत में गहरे-गहरे घुसा कर चूसती जा रही थी।
राज समझ गया कि एक बार चूत मिल गयी तो मोहतरमा की शौक़- पोशी में वो क्या, उसके बाप का लन्ड भी कोई खलल नहीं डाल सकता था। पर राज अपने लन्ड को किसी कमसिन हसीना की चिकनी गिरफ्त में कैद करवाने के लिये बड़ा उतावला हो रहा था। उठा और अपने तने हुए लन्ड को सोनिया के दो मुलायम मम्मों के बीच मसलने लगा। लन्ड का सुपाड़ा सोनिया की ठोड़ी पर लग रहा था। सोनिया ने चेहरा ऊपर कर के राज को हवस से मदमस्त अपनी दो आँखों से देखा।
"हरामजादी, अगर खानदानी रन्डी है तो खोल अपना मुँह और चूस मेरे लन्ड !" हाँफ़ते हुए राज ने सोनिया को ललकारा। | लौन्डिया ने सर झुका कर हुक्म की तामील की और अपना मासूम मुँह राज के मोटे बेरहम लन्ड के लिये खोल दिया। अगर सोनिया जिन्दगी में पहली दफ़ा चूत चटवा सकती थी तो भला पहली दफ़ा लन्ड क्यों नहीं चाट सकती थी ? राज का काला लन्ड जब सोनिया की लाल जिभ पर पड़ा तो उसे लन्ड का जायका कुछ अटपटा सा लगा, फिर उसे याद आया कि उसी की चूत के तेल और राज के वीर्य का ही जायका होगा। इस खयाल ने उसकी चूत को डॉली की लसलसाती जीभ पर और जबरदस्त कस दिया।
डॉली की मंझी हुई जीभ और होंठों के असर से सोनिया की सुलगती चूत को बेइन्तहाई लुफ्त मिल रहा था। अपनी छोटी सी जिन्दगानी में पहली दफ़े ऐसे हवसनाक तजुर्बो से गुजरने का रोमंच उसे और खुशगवार कर रहा था। अपनी आँखें मूंद कर बड़े खुलूस से उसने राज का लन्ड मुँह में क़बूल किया। अपने कमसिन होंठों के बीच उसके धड़कते लन्ड के ताक़तवर ठेले और उसके मजबूत माँस और लसलसेपन से उसे एक नायाब एहसास हो रहा था। राज अपने कूल्हे आगे-पीछे हिला हिलाकर लन्ड की लम्बाई को सोनिया के मम्मों के बीच से रगड़ता हुआ उसके छोटे गरमा-गरम मुँह के अन्दर ठूस रहा था।
"डरती क्या है लड़की! समझ लॉलीपॉप है! चूस लन्ड को !", राज कराहा, "हाँ ऐसे ही! अब लगा खानदानी रन्डी है!"
जरा थूक लन्ड पर! और मज़ा आये !"
"थू!", सोनिया ने काले लन्ड पर झागदार थूक डाली और आँखे मटाकर मुस्कुराते हुए ऊपर राज की आँखो में देखा।
"बहुत अच्छे! और थूक !", सोनिया ने दो-चार बार और पेशेवर रन्डीयों जैसे लन्ड के सुपाड़े पर थूका।।
"ऊपर वाले का क़रम! जन्नत का मजा आ रहा है! अब निगल जा पूरा!"
सोनिया ने अपने गले को ढीला कर के लन्ड की लम्बाई को धीरे-धीरे निगलना चालु किया। राज ने भी बड़ी नजाकत से अपना लन्ड इन्च -दर-इन्च सोनिया के गले के अंदर उतारा।।
या ऊपर वाले! शाबाश, एक इन्च और, निगल ले पूरा, लड़की !" राज चीखा और लगभग बर्दाश्त खो बैठा।।
चाहता तो था कि लन्ड की पूरी लम्बाई को लड़की के गले में उतार दे पर जानता था कि लड़की नादान है, अगर ऐसा कुछ किया तो डर जायेगी, क्या पता उल्टी ही न कर दे। फिर लन्ड चुसायी से तौबा न कर ले! किये-कराये पर पानी फिर जायेगा! एहतियातन , राज ने अपना लन्ड दो इन्च बाहर निकाल लिया और सोनिया को चूसने के लिये अपना सूजा हुआ सुपाड़ा दे दिया। सोनिया वहशीयाना अंदाज़ में अपनी लाल-लाल जीभ को साँप के फ़न की तरह लन्ड के सिरे पर डंक मारती हुई चला रही थी। उसके खुद के कूल्हे डॉली के मुंह पर उचक रहे थे। डॉली अपना पूरा मुँह सोनिया की मस्त चूत में ठूस कर पागलों जैसे अपने सर को आजू-बाजू पटकती हुई सपड़ - सपड़ चूत को चाट रही थी और अपनी जीभ को सोनिया की चूत में गहरे-गहरे घुसा कर चूसती जा रही थी।