27 नायाब जाम - 2
जब राज ने अपने होंठों के बीच बहन के चोचले को दबाया तो एक क़ायनाती मस्ती के आलम में डॉली के मुँह से चीख निकल गयी थी। उसने राज के कानों को पकड़ कर अपनी ऐंठती चूत से भींच दिया थी। राज फिर अपने रस से सने मुँह को हिला हिला कर अपनी लहराती जीभ को डॉली की नशीली, ललचाती चूत के और अन्दर गोदने लगा था। अपनी बहन की चूत का जायका राज को मजेदार लग रहा था।
चाहता तो पूरी रात चूत - चुसाई कर सकता था, पर अचानक उसे अपने टट्टों मे उमड़ता मीठा सा दर्द और अपनी जाँघों के बीच झूलते हुए तने हुए बम्बू का खयाल आया। अपनी बहन की चूत से मुँह हटा कर उसने अपने भूखे लन्ड को उस मांद पर दागा जहाँ पर चन्द लम्हों पहले उसका मुँह हरकत कर रहा था। उतावलेपन में राज ने लन्ड के एक ही झटके में अपनी बहन की चूत में दाखिल होना चाहा था, पर उसका लन्ड एक इन्च भी अन्दर दाखिल हुआ था कि जा कर चूत की झिल्ली पर जा टकराया। । "माँ क़सम! तेरी चूत तो कुआँरी है!!" उसने चौंक कर बोला था।
"हाँ भाई! तुझे कसम है ऊपर वाले की! अब मत रुकना !" डॉली चीख कर गिड़गिड़ायी थी।
"बहनचोद राज ! ऊउह्ह्ह मुझे भाई से ही चुदना है! चोद के मेरा कुआँरापन लूट ले बहनचोद !" । बहन की जुबान से खुद के लिये ऐसी गालीयाँ सुनकर राज बेइन्तेहाँ दीवाना हो गया।
"हे ऊपर वाले! हाँ, बहन को चोदूंगा मैं ! क़यामत तक चोदूंगा! बहनचोद बनूंगा !" चीखता हुआ राज बोला। | एक बार तो राज को लगा की एक ही जबरदस्त झटके में झिल्ली तोड़ कर अपना लन्ड बहन की लसलसाती, टाइट चूत में ढकेल दे। पर अपनी बहन की कमसिन जवानी पर उसे तरस आ गया था। उसे लगा की डॉली दर्द को झेल नहीं पायेगी। | फिर राज ने अपनी हथेलियाँ बिस्तर पर टेक कर अपने मजबूत बदन का सारा भार बाजुओं पर डाल दिया था। मन्झे हुए खिलाड़ी की तरह वो डॉली को अपने मोटे लन्ड के तनाव को अपनी चूत में क़बूल करने का वक़्त देना चाह रहा था। उसका सुपाड़ा उसकी बहन की चूत के कड़े शिकन्जे में कैद था।
गरम चूत की कसती हुई जकड़न , उसे अपना लन्ड अन्दर घुसाने पर मजबूर किये देती थी। एक हलके से झटके से राज ने अपना लन्ड आधे इन्च और अन्दर ठूसा। डॉली चीखी, और उसी के साथ राज को झिल्ली के फटने का एहसास हुआ। फ़तह के जोश में वो चीखा और उसका लम्बा लन्ड बहन की चूत की गहराईयों में फिसलता चला गया, जब तक की उसके टट्टे डॉली की नम, चिकनी गाँड की खाई में धंस न गये।
राज के लन्ड ने जब चूत में अपनी क़ायनाती हरकत शुरू की तो डॉली एक अलग ही लहजे में चिखने लगी थी। "ऐसे ही! चोद मुझे ! रहम मेरे खुदा! कस के चोद! मैं तेरी गुनहगार हूं! लगा के चोद !"
सूअर ! दम नहीं क्या लन्ड में ? मम्मी के भोंसड़े को कैसे चोदता था! मेरी चूत इतनी ढीली नहीं! तेरा लन्ड थक जायेगा !"
जब राज ने अपने होंठों के बीच बहन के चोचले को दबाया तो एक क़ायनाती मस्ती के आलम में डॉली के मुँह से चीख निकल गयी थी। उसने राज के कानों को पकड़ कर अपनी ऐंठती चूत से भींच दिया थी। राज फिर अपने रस से सने मुँह को हिला हिला कर अपनी लहराती जीभ को डॉली की नशीली, ललचाती चूत के और अन्दर गोदने लगा था। अपनी बहन की चूत का जायका राज को मजेदार लग रहा था।
चाहता तो पूरी रात चूत - चुसाई कर सकता था, पर अचानक उसे अपने टट्टों मे उमड़ता मीठा सा दर्द और अपनी जाँघों के बीच झूलते हुए तने हुए बम्बू का खयाल आया। अपनी बहन की चूत से मुँह हटा कर उसने अपने भूखे लन्ड को उस मांद पर दागा जहाँ पर चन्द लम्हों पहले उसका मुँह हरकत कर रहा था। उतावलेपन में राज ने लन्ड के एक ही झटके में अपनी बहन की चूत में दाखिल होना चाहा था, पर उसका लन्ड एक इन्च भी अन्दर दाखिल हुआ था कि जा कर चूत की झिल्ली पर जा टकराया। । "माँ क़सम! तेरी चूत तो कुआँरी है!!" उसने चौंक कर बोला था।
"हाँ भाई! तुझे कसम है ऊपर वाले की! अब मत रुकना !" डॉली चीख कर गिड़गिड़ायी थी।
"बहनचोद राज ! ऊउह्ह्ह मुझे भाई से ही चुदना है! चोद के मेरा कुआँरापन लूट ले बहनचोद !" । बहन की जुबान से खुद के लिये ऐसी गालीयाँ सुनकर राज बेइन्तेहाँ दीवाना हो गया।
"हे ऊपर वाले! हाँ, बहन को चोदूंगा मैं ! क़यामत तक चोदूंगा! बहनचोद बनूंगा !" चीखता हुआ राज बोला। | एक बार तो राज को लगा की एक ही जबरदस्त झटके में झिल्ली तोड़ कर अपना लन्ड बहन की लसलसाती, टाइट चूत में ढकेल दे। पर अपनी बहन की कमसिन जवानी पर उसे तरस आ गया था। उसे लगा की डॉली दर्द को झेल नहीं पायेगी। | फिर राज ने अपनी हथेलियाँ बिस्तर पर टेक कर अपने मजबूत बदन का सारा भार बाजुओं पर डाल दिया था। मन्झे हुए खिलाड़ी की तरह वो डॉली को अपने मोटे लन्ड के तनाव को अपनी चूत में क़बूल करने का वक़्त देना चाह रहा था। उसका सुपाड़ा उसकी बहन की चूत के कड़े शिकन्जे में कैद था।
गरम चूत की कसती हुई जकड़न , उसे अपना लन्ड अन्दर घुसाने पर मजबूर किये देती थी। एक हलके से झटके से राज ने अपना लन्ड आधे इन्च और अन्दर ठूसा। डॉली चीखी, और उसी के साथ राज को झिल्ली के फटने का एहसास हुआ। फ़तह के जोश में वो चीखा और उसका लम्बा लन्ड बहन की चूत की गहराईयों में फिसलता चला गया, जब तक की उसके टट्टे डॉली की नम, चिकनी गाँड की खाई में धंस न गये।
राज के लन्ड ने जब चूत में अपनी क़ायनाती हरकत शुरू की तो डॉली एक अलग ही लहजे में चिखने लगी थी। "ऐसे ही! चोद मुझे ! रहम मेरे खुदा! कस के चोद! मैं तेरी गुनहगार हूं! लगा के चोद !"
सूअर ! दम नहीं क्या लन्ड में ? मम्मी के भोंसड़े को कैसे चोदता था! मेरी चूत इतनी ढीली नहीं! तेरा लन्ड थक जायेगा !"