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Incest भाई-बहन वाली कहानियाँ

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कुछ दूर चलने के बाद बारिश शुरू हो गई.. तो मैंने जानबूझ कर जंगल वाला रास्ता चुना कि बारिश में फंसे तो जंगल में ही तो कुछ करने का ज्यादा चान्स मिलेगा और शायद मेरी किस्मत को भी यही मंजूर था। अभी हम लोग आधे जंगल ही पहुँचे होंगे कि बारिश तेज होने लगी। सो हम एक पेड़ के नीचे रुकने के लिए भागे.. लेकिन तब तक हम भीग चुके थे और भीगने के कारण कपड़े उसके बदन से चिपक गए थे.. जिससे वो और भी सेक्सी लग रही थी।

आप लोगों ने भी किसी को भीगे कपड़ों में देखा होगा… सो अंदाज़ा तो लगा ही सकते हैं कि वो कितनी सेक्सी लग रही होगी। मेरा लंड तन कर पैन्ट फाड़ने को रेडी था कि तभी ज़ोर से बिजली कड़की और वो मेरे गले से लग गई।

मैंने भी मौके का फ़ायदा उठाते हुए उसको अपने से चिपका लिया। पहली बार उसके पूरे बदन को मैं महसूस कर रहा था.. तो मैंने सोचा इतना अच्छा मौका है तो उसका फ़ायदा तो उठाना ही चाहिए। मैंने उसकी गर्दन कर हल्का सा किस कर दिया और किसी भी लड़की को अगर गर्दन पर किस किया जाए तो वो अन्दर से हिल जाती है.. सो वो भी सिहर उठी और मुझे और भी ज़ोर से पकड़ लिया।

मैं समझ गया कि ये गरम हो रही है.. सो मैं उसके नंगे बदन पर हल्के से हाथ फेरने लगा.. जिससे वो और एग्ज़ाइटेड हो रही थी। अभी आगे कुछ और होता उससे पहले मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और लिप किस करने लगा। तब तक मेरा हाथ कैसे शांत बैठा रहता.. सो मेरा हाथ भी उसके बुरड़ों तक पहुँच गया और उसको दबाने लगा।

उम्मीद से ज्यादा मुलायम बुरड़ थे.. उसके बुरड़ों को कुछ देर ऐसा करने के बाद मैं नीचे बढ़ने लगा। उसकी गर्दन पर किस करते हुए चूचियों के पास पहुँचा और ऊपर से ही चूसने लगा। फिर और नीचे को बढ़ा.. पेट पर किस करने लगा.. तो वो चहकने लगी.. उसके मुँह से निकलने वाली सीत्कार मुझे बहुत ही मीठी लग रही थीं।

कुछ देर ऐसा करने के बाद मैं फिर ऊपर चूचियों की तरफ़ बढ़ने लगा और ब्लाउज के ऊपर से ही चूचियों को काटने-खाने लगा। फिर मैंने हाथ को पीछे किया और ब्लाउज की डोर को खोलने ही वाला था कि उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।

दीप्ति- नहीं.. रूको.. ये सब ग़लत हो रहा है।

मैं- कुछ ग़लत नहीं हो रहा है मेरी जान.. मैं तुम से प्यार करता हूँ।

दीप्ति- और तुम ये सब कर रहे थे.. पता नहीं मुझे क्या हो गया था.. मैं तुमको नहीं रोका.. सॉरी..

मैं उसको खींच कर अपने से चिपका कर बोला- मेरी जान.. शायद तुम भी मुझसे प्यार करती हो.. तब तो इतना कुछ हुआ.. लेकिन नहीं रोका तो अब किस बात का डर है?

दीप्ति- हाँ मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ लेकिन तुम मुझसे छोटे हो और मेरे भाई के दोस्त हो.. जय को पता चलेगा तो उसको कितना बुरा लगेगा उसने भरोसा करके मुझे तुम्हारे साथ भेजा।

मैं- उसे पता चलेगा तब ना.. और जब ज़रूरत पड़ेगी तो मैं उसको बता दूँगा।

दीप्ति- मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है.. अब घर वापस चलो।

मैं - ओके लेकिन तुम पूरी भीग गई हो सो मैंने उसको बाइक की डिक्की में से रेनकोट निकाल कर दिया और बोला- लो इसको पहन लो.. तो उसको पहन लिया और हम घर आ गए।

जब मैं अन्दर गया तो देखा जय फोन पर बात कर रहा था, मैं समझ गया कि कांता से बात कर रहा होगा।

खैर.. दीप्ति अपने कमरे में कपड़े बदलने चली गई और मैंने भी जय के कपड़े लेकर पहन लिए और उसके कमरे में चला गया।

दीप्ति- तुम यहाँ क्या कर रहे हो.. भाई यहीं है।

मैं- नहीं है.. कुछ खाने का सामन लाने गया है।

दीप्ति- क्या हुआ बोलो?

मैं- सॉरी बोलने आया हूँ।

दीप्ति- किस बात का?

मैं- कुछ देर पहले जो हुआ उस बात के लिए.. मुझे लगा तुम भी मुझसे प्यार करती हो.. सो.. लेकिन शायद मुझे अभी भी लग रहा है कि तुम मुझसे प्यार करती हो। आज रात मैं यही रुक रहा हूँ तुमने कहा था ना.. तुम्हारा फॉर्म भरने के लिए। तुम मुझे रात को जगा देना.. 12-1 बजे के बाद.. तब मैं भर दूँगा और हाँ मुझे अभी भी लगता है कि तुम मुझसे प्यार करती हो। अगर तुम्हारे मन में मेरे लिए थोड़ी सी भी फीलिंग हो.. तो रात को मेरा दिया हुआ ड्रेस पहन कर आना.. अगर तुम वो ड्रेस पहन कर आओगी.. तो मैं ‘हाँ’ समझूँगा.. नहीं तो मैं फिर तुमको कभी भी परेशान नहीं करूँगा।

इतना बोल कर मैं वापस लौट आया और मन में सोचा कि लगता है अब इस तरह एमोशनल ब्लैकमेल करके काम बन जाएगा..

रात का खाना बन गया था.. सब खा रहे थे.. तभी।

मैं- मैं कहाँ सोऊँगा?

दीप्ति- जय के साथ..

जय- नहीं मैं बिस्तर शेयर नहीं करने वाला हूँ.. एक काम कर तू पापा के कमरे में सो जा.. वैसे भी तू रात को उसका फॉर्म भरने उठेगा। मुझे अपनी नींद नहीं खराब करनी है। पापा का कमरे दीदी के कमरे के पास ही है.. वो तुमको आसानी से उठा देगी।

मैं- ओके.. ठीक है वहीं सो जाऊँगा।

जय- ओके भाई.. गुड नाइट मैं चला सोने.. मुझे बहुत ज़ोर से नींद आ रही है।

फिर मेरे कान में सट कर बोला- बेटा आज मत चूकना.. मैं तेरी बहन का अब और इंतज़ार नहीं कर सकता।

मैं- टेन्शन मत ले.. कल तू चले जाना मेरे घर..

जय- ओके थैंक्स!

अब हम लोग अपने-अपने कमरे में जाकर सो गए। नींद तो मुझे आ नहीं रही थी.. लेकिन लेटा था इस इंतज़ार में.. कि जवाब ‘हाँ’ आए.. पता नहीं कब आँख लग गई.. तभी मेरे कान में प्यारी सी आवाज़ गूँजी। तब जाकर मेरी आँख खुली तो देखा दीप्ति थी।

 
अब हम लोग अपने-अपने कमरे में जाकर सो गए। नींद तो मुझे आ नहीं रही थी.. लेकिन लेटा था इस इंतज़ार में.. कि जवाब ‘हाँ’ आए.. पता नहीं कब आँख लग गई.. तभी मेरे कान में प्यारी सी आवाज़ गूँजी। तब जाकर मेरी आँख खुली तो देखा दीप्ति थी।

तभी मैंने सबसे पहले उसकी ड्रेस को देखा तो मेरी नींद टूट गई.. और सपना भी क्योंकि उसने गाउन पहन रखा था।

दीप्ति- एक बज गए हैं.. चलो फॉर्म भर दो।

मैं भन्नाता हुआ बोला- ओके.. मैं फ्रेश हो कर आता हूँ।

दीप्ति- मेरे कमरे में आ जाना।

मैं- ठीक है।

मैंने उसका फॉर्म भर दिया.. जब पूरा फॉर्म भर गया तो।

मैं- लो हो गया..

दीप्ति- ओके थैंक्स..

मैं- ओके.. अब गुड नाइट.. मैं सोने जा रहा हूँ.. बहुत ज़ोर से नींद आ रही है।

दीप्ति- रूको.. लाइट ऑफ करो और अपनी आँखें भी.. जब मैं बोलूँगी.. तो जलाना।

मैं- क्यों क्या बात है?

दीप्ति- करो तो सही..

मैं- ओके कर दिया..

दीप्ति- आँखें भी बंद हैं ना?

मैं- हाँ..

कुछ पलों बाद..

दीप्ति- अब लाइट जलाओ और आँखें भी खोलो।

मैंने आँख खोलीं.. तो मेरी आँखें खुली की खुली ही रह गईं.. उसने वही ड्रेस पहन रखा था.. जो आज मैंने उसको दिया था। मेरी तो नींद उड़ गई और दौड़ते हुए मैं उसके पास गया और उसके गले लगते हुए बोला।

मैं- थैंक्स आई लव यू.. मेरी जान..

कांता- आई लव यू टू.. मैं भी तुम से बहुत प्यार करती हूँ.. लेकिन भाई के दोस्त हो.. इसलिए डर रही थी… लेकिन अब नहीं.. अब जो होगा सो देखा जाएगा।

मैं- तो आ जाओ अपने प्यार की पहली रात मनाते हैं..

थोड़ी नानुकर के बाद मान गई लेकिन बोली- सिर्फ़ ऊपर से ही..

मैं बोला- ठीक है..

उसने खुद ही अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिए और मैं उसके होंठ चूसने लगा।

थोड़ी देर होंठ चूसने के बाद मैं सीधा चूचियों पर टूट पड़ा.. तब तो वो ब्लाउज में बंद थे.. जिसे मैं देख भी नहीं पाया था। लेकिन अभी तो इस ड्रेस में आधी चूचियों बाहर ही थीं। सो मैं उसी निकले हुए भाग को चूसने लगा। फिर कुछ देर बाद मैंने ड्रेस को थोड़ा नीचे खींचा और ऊपर से एक चूची को पकड़ कर उसको बाहर निकाल लिया।

क्या मस्त गुलाबी निप्पल थे। मैं उसको चूसने लगा और अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो पा रहा था.. सो मैंने हाथ पीछे ले जाकर ड्रेस की स्ट्रिप खोल दी और ड्रेस को नीचे खींच दिया.. जिससे उसकी दोनों चूचियाँ बाहर आ गईं।

वैसे तो वो गोरी बहुत थी.. लेकिन उसकी चूचियों का रंग उससे भी अधिक गोरा था। उस पर गुलाबी निप्पल का तो कोई जवाब ही नहीं था।

मैं उन पर टूट पड़ा और एक हाथ से एक चूचियों दबा रहा था और मुँह से दूसरी चूची को पी रहा था। मेरा दूसरा हाथ पीछे से उसकी गान्ड को सहला रहा था। तभी उसका हाथ मेरे पैंट के ऊपर घूमने लगा.. शायद वो लंड ढूँढ रही थी.. जो कि पहले से ही तना हुआ फुंफकार मार रहा था। उसको जींस के ऊपर से ही सहलाने लगी। जब उससे मन नहीं भरा तो उसने मेरी चड्डी की इलास्टिक को अन्दर हाथ डाल के नीचे कर दी और फनफनाता हुआ लंड बाहर आ गया।

वैसे तो लंड बहुत गर्म था और जब उस पर थोड़ी ठंडी हवा लगी तो अच्छा महसूस होने लगा। जब उसने अपने कोमल हाथों से मेरे लंड को छुआ तो मैं सिहर गया और जब वो सहलाने लगी तो मानो मैं जन्नत में पहुँच गया। कुछ ऐसा जादू था उसके हाथों में।

 
वैसे तो लंड बहुत गर्म था और जब उस पर थोड़ी ठंडी हवा लगी तो अच्छा महसूस होने लगा। जब उसने अपने कोमल हाथों से मेरे लंड को छुआ तो मैं सिहर गया और जब वो सहलाने लगी तो मानो मैं जन्नत में पहुँच गया। कुछ ऐसा जादू था उसके हाथों में।

ऊपर मैं उसकी चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा और चूसने लगा.. तो वो भी मेरे लंड को ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगी। सो मैं भी बुरड़ों को छोड़ कर अपना एक हाथ उसकी बुर के पास ले आया और ऊपर से सहलाने लगा। कपड़ों के ऊपर से ही लेकिन कपड़ों के ऊपर में बुर को सहलाने का क्या मजा..? सो मैंने उसके कपड़ों में हाथ डाल दिया और मेरी उंगली उसकी बुर के पास पहुँच गई। उसकी बुर तो मानो तप रही थी.. जैसे कोयले की भट्टी हो।

सो मैं उसके कपड़े उतारने लगा.. तो वो भी कपड़े उतारने में साथ देने लगी और अब वो मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी थी।

जब उसके बदन पर ठंडी-ठंडी हवा लगी तो उसके रोंए खड़े हो गए।

दीप्ति- मैं नंगी खड़ी हूँ.. और तुम कपड़ों में अच्छे नहीं लग रहे हो।

मैं- तुम ही आकर उतार दो।

दीप्ति- खुद से उतार लो।

मैं- नहीं खुद से तो नहीं उतारना है मुझे.. तुम उतारोगी तो बोलो..

दीप्ति- ओके.. मैं ही उतार देती हूँ.. वैसे भी तुमसे बड़ी हूँ।

वो मेरे कपड़े उतारने लगी तो मैं खुद सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया और बोला- लो मैं भी तुम्हारे जैसा हो गया।

दीप्ति- वाउ… तुमने तो अच्छी बॉडी बना रखी है।

मैं- हाँ जिम जाता हूँ वैसे तुम्हारी बॉडी भी बहुत सेक्सी है और कोई इतना गोरा कैसे हो सकता है यार..

दीप्ति- ओहो.. थैंक्स..

मैं- आओ अब इसको मुँह में ले लो.. ये अन्दर जाने के लिए बहुत देर से तड़फ रहा है।

दीप्ति- छी: नहीं.. मैं नहीं लूँगी..

मैं - लेकर तो देखो.. मजा आ जाएगा।

कांता - ठीक है.. कोशिश करती हूँ।

वो नीचे बैठ गई और लंड पर किस किया फिर लंड के आगे वाले भाग पर जीभ घुमाने लगी। मुझे मजा आने लगा तो मैं बोला- अब अन्दर लो ना इसको..

तो उसने मुँह खोला और मैंने लंड अन्दर डाल दिया..

उसके मुँह में पूरा लंड नहीं आ पा रहा था.. सो वो उतने ही भाग को ही चूसने लगी।

मैं उसके सिर को पकड़ कर लंड अन्दर-बाहर कर रहा था। कुछ देर ऐसा करने के बाद उसको बिस्तर पर लिटा दिया और हम 69 की अवस्था में आ गए। अब मैं उसकी बुर को और वो मेरे लंड को चूस रही थी। उसकी गुलाबी सी बुर को जब मैं जीभ से चाट रहा था तो कितना मजा आ रहा था कि बता नहीं सकता।

कुछ देर ऐसा करने के बाद उसकी बुर ने पानी छोड़ दिया। कुछ देर बाद मेरा लंड भी छूट गया और सारा पानी उसके चेहरे पर लग गया। अब हम दोनों अलग हुए।

मैं- कैसा लगा?

दीप्ति- बहुत मजा आया..

मैं- बड़ी कमाल की है तुम्हारी बुर यार.. मुझे भी चूस कर मजा आ गया।

दीप्ति ने मेरे लंड पर हाथ मारते हुए- ये अभी तक खड़ा है।

मैं - हाँ तुम्हारे अन्दर जाना चाहता है।

दीप्ति- अब कहाँ?

मैंने उसकी बुर पर उंगली फिरा दी… बोला- यहाँ..

दीप्ति - नहीं यार.. नहीं जाएगा.. बहुत बड़ा है… बहुत दर्द होगा।

मैं - नहीं होगा ना.. मैं आराम से डालूंगा

दीप्ति - नहीं.. मेरी बुर फट जाएगी.. किसी और दिन।

मैं - कुछ नहीं होगा.. वैसे भी काल करे सो आज कर.. सो अभी ही करते हैं।

दीप्ति - नहीं यार.. मुझे डर लग रहा है.. बहुत दर्द होगा..

मैं - कुछ भी नहीं होगा.. जब ज्यादा दर्द होगा.. तो मत करना..

दीप्ति - ओके ठीक है.. लेकिन कन्डोम है? बिना कन्डोम के मैं नहीं करूँगी।

 
मैं - कुछ भी नहीं होगा.. जब ज्यादा दर्द होगा.. तो मत करना..

दीप्ति - ओके ठीक है.. लेकिन कन्डोम है? बिना कन्डोम के मैं नहीं करूँगी।

मैं - हाँ है ना.. मेरी गाड़ी में है..

दीप्ति - गाड़ी में क्यों रखते हो।

मैं - वैसे ही.. पता नहीं कब कहाँ ज़रूरत आ जाए.. जैसे आज ज़रूरत पड़ गई.. रूको मैं लेकर आता हूँ।

दीप्ति - ओके जाओ लेकर आओ।

मैं उसी की ओढ़नी लपेट कर कन्डोम लाने चला गया.. बाइक की डिक्की से तो कन्डोम निकाल लिया और आते समय मैंने सोचा देखूँ कि जय क्या कर रहा है?

मैंने उसको देखा कि साला फोन पर ही लगा हुआ था तो मैं उसके कमरे में गया।

मैं- क्या कर रहा है साले?

जय- तेरी बहन को फोन पर चोद रहा हूँ अभी नंगी लाइन पर ही है.. पूछ लो..

मैं - होगी.. मुझे क्या प्राब्लम है..

जय - और साले तुझे तो मैं छोडूँगा नहीं..

मैं - क्यों क्या हुआ.?

जय - तुम दोनों भाई-बहन ने मिल कर प्लान करके मुझे फंसाया है।

मैं - तुझे कौन बोला?

जय - ले लाइन पर ही है.. पूछ ले..

मैं - कांता, तुमने इसको सब कुछ बता दिया क्या..?

कांता - हाँ भैया ग़लत किया क्या?

मैं - नहीं.. सही किया..

जय - पूछ ले नंगी है.. तेरी बहन मुझसे अभी चुद रही थी।

कांता - ये सही बोल रहा है भैया..

मैं - तू साले मेरी बहन को फोन पर चोद रहा है.. और मैं तेरी बहन को रियल में चोदने जा रहा हूँ.. अपने कमरे में वो भी नंगी मेरा इंतज़ार कर रही है।

जय – सच ?

मैं- हाँ बेटा.. नहीं भरोसा हो.. तो देख ये ओढ़नी किसकी है.. पहचानता है ना और अगर फिर भी भरोसा नहीं है तो जाकर उसके कमरे में देख ले।

जय - तो क्या इधर मुझे बताने आया था क्या?

मैं - नहीं कन्डोम लेने आया था अगर लाइव टेलीकास्ट देखना है.. तो आ जा.. मैं खिड़की खोल दूँगा।

जय - ओके.. जा खोल देना.. मैं अभी तेरी बहन को चोद कर आता हूँ।

मैं - ओके!

मैं कन्डोम लेकर अन्दर आया तो..

दीप्ति - इतनी देर कहाँ लगा दी..?

मैं- देख रहा था तेरा भाई क्या कर रहा है?

दीप्ति - क्या कर रहा है.. सोया हुआ होगा।

मैं - नहीं फोन पर सेक्स चैट कर रहा है

दीप्ति - किससे?

मैं - पता नहीं.. उसको छोड़ो.. तुम मेरे आगोश में आ जाओ मेरी जान..

दीप्ति - मैं तो कब से तैयार बैठी हुई हूँ।

‘ओके मेरी जान.. लेकिन पहले मेरे राज़ा को कपड़े तो पहनाओ..’ मैं उसको कन्डोम देते हुए बोला।

दीप्ति- ओके।

उसने मुझे कन्डोम पहना दिया फिर मैंने उसको गोद में उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी बुर पर उंगली फिराने लगा।

कुछ देर ऐसा करने के बाद एक उंगली उसकी बुर में डाल दी, उसके मुँह से सीत्कार निकल रही थी.. तो मैं लंड को उसकी बुर पर घुमाने लगा।

जब देखा कि वो पूरी गरम है.. तो हल्का सा झटका लगा दिया.. लेकिन ज़ोर पूरा लगाया था सो लंड बुर के अन्दर चला गया और वो ज़ोर से चीख पड़ी..

‘आआअहह..’

जब तक मेरा हाथ उसके मुँह के पास पहुँचता.. उसकी आवाज़ गूँज चुकी थी और उसकी बुर से खून गिरना चालू हो गया था.. मतलब उसकी झिल्ली फट चुकी थी। वो दर्द से तड़फ रही थी.. सो मैंने उसके मुँह पर अपने होंठ रख दिए और उसके बदन को सहलाने लगा।

कुछ देर बाद वो जब नॉर्मल हुई तो मैंने एक और झटका मार दिया और मेरा आधा लंड बुर के अन्दर जा चुका था।

उसकी आँखों से आँसू आ गए.. सो फिर मैंने उसको किसी तरह नॉर्मल किया और फिर मौका पाकर एक जोरदार झटका मार दिया और अब की बार पूरा लंड उसकी बुर के अन्दर जड़ तक चला गया।

वो तड़फने लगी.. लंड को निकालने की कोशिश करने लगी.. लेकिन मैंने नहीं करने दिया और कुछ देर बाद जब वो नॉर्मल हुई तो मैंने लंड निकाला और उसकी बुर को साफ़ किया। अपने लंड को भी साफ़ किया.. उसके खून से लौड़ा लाल जो हो गया था।

 
कुछ देर आराम करने के बाद मैं फिर रेडी करने लगा लेकिन वो मना कर रही थी कि बहुत दर्द हो रहा है। लेकिन मेरे मनाने पर वो मान गई तो मैंने फिर से उसकी बुर पर लंड डाला और बड़े ही प्यार से लौड़े को अन्दर डाला.. तो इस बार दर्द कम और बर्दाश्त करने लायक हुआ.. तो मैं धीरे-धीरे लंड को अन्दर-बाहर करने लगा।

जब लौड़े ने बुर में अपनी जगह बना ली और उसे मजा आने लगा.. तो मैं ज़ोर-ज़ोर से चुदाई करने लगा।

उसके मुँह से ‘आह्ह.. उई माँ..’ की आवाजें पूरे कमरे में गूंजने लगीं।

कुछ देर बाद वो भी नीचे से गान्ड उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी।

कुछ देर वैसे किया.. फिर मैं उसके दोनों टाँगों के बीच में आ गया और चोदने लगा।

वो अपने दोनों पैरों को मेरी कमर में फंसा कर लेटी थी और कुछ देर उसी अवस्था में उसकी बुर चोदने के बाद मैंने महसूस किया कि उसका शरीर अकड़ने लगा। मैं समझ गया कि ये अब झड़ने ही वाली है.. सो मैंने झटके और तेज कर दिए और वो ज़ोर-ज़ोर से ‘आआहह.. ऊऊऊ ऊऊऊओह.. उउफ्फ़..’ करने लगी और एकदम से अकड़ते हुए डिस्चार्ज हो गई।

तो मैंने भी अपना लंड निकाल लिया और खुद हिलाने लगा। कुछ देर बाद मैं भी डिसचार्ज हो गया और उसके बगल में लेट गया।

मैं - मजा आया?

दीप्ति - हाँ लेकिन दर्द भी बहुत हुआ।

मैं - पहली बार हर किसी को होता है.. फिर धीरे-धीरे मजा आने लगता है.. जैसे आखिर में आया होगा।

दीप्ति - हाँ बहुत मजा आया..

कुछ देर लेटे रहने के बाद वो खुद मेरे शरीर पर हाथ फेरने लगी। मैं समझ गया इसका मन एक और राउंड के लिए हो गया है..

मैंने उसको दूसरा कन्डोम दिया.. तो उसने मेरे सोए हुए लंड को जैसे ही छुआ वो फिर से खड़ा हो गया। उसको साफ़ करके उस पर नया कन्डोम पहना दिया और मेरे लंड पर बैठने लगी। मैंने अपना लंड पकड़ लिया और उसकी बुर के छेद में टिका दिया।

वो उस पर बैठ गई और लंड अन्दर चला गया.. ज़रा सी ‘आह्ह..’ के बाद वो खुद ऊपर-नीचे हो कर चुदने लगी। जब वो चुद रही थी.. तब उसकी चूचियाँ गजब की उछाल मार रही थीं। जिसको देख कर मैं कंट्रोल नहीं कर पाया और मैं उसकी चूचियों को मसलने लगा। वो भी अपनी गान्ड को घुमा-घुमा कर चुद रही थी और खुद ही ऊपर-नीचे हो रही थी। फिर वो आगे को झुक गई और मैं उसको किस करने लगा और उसकी चूचियाँ मेरी छाती पर मसाज दे रही थीं।

मैं भी उसके बुरड़ों को दबा रहा था और आगे-पीछे होने में उसकी मदद कर रहा था।

कुछ देर बाद मैं नीचे से भी झटके मारने लग गया.. कुछ देर वैसे करने के बाद हम दोनों ने पोज़ बदल-बदल कर उस रात चार राउंड चोदन किया। मतलब चार बार हम दोनों डिसचार्ज हुए और फिर थक कर लेट गए.. ना जाने कब हमारी आँख लग गई.. पता ही नहीं चला।

सारी रात हम नंगे ही सोए रहे.. हमारी नींद सुबह खुली.. जब जय की आवाज हमारे कानों में पड़ी।

जय- कितनी देर तक सो रहे हो.. उठना नहीं है क्या?

एक ही कपड़े से हम अपने आपको छुपाने की नाकाम कोशिश करते हुए मैं बोला- तुम कब जागे?

दीप्ति- भाई वो..

उसके पास बोलने के लिए शब्द ही नहीं थे.. लेकिन तभी जय - अरे घबराओ नहीं.. मैंने कुछ नहीं देखा.. तुम दोनों कपड़े पहन कर बाहर आ जाओ और जो देखा वो किसी को नहीं बताऊँगा.. तुम लोग ज़वान हो.. ये सब तो हो ही जाता है.. ये सब छोटी-छोटी बातें हैं।

 
दीप्ति- भाई वो..

उसके पास बोलने के लिए शब्द ही नहीं थे.. लेकिन तभी जय - अरे घबराओ नहीं.. मैंने कुछ नहीं देखा.. तुम दोनों कपड़े पहन कर बाहर आ जाओ और जो देखा वो किसी को नहीं बताऊँगा.. तुम लोग ज़वान हो.. ये सब तो हो ही जाता है.. ये सब छोटी-छोटी बातें हैं।

अब जय दीप्ति के पास गया और बोला - तुम बुरा क्यों महसूस कर रही हो.. तुमने कुछ ग़लत नहीं किया.. मैं सब कुछ जानता हूँ.. अब मुस्कुरा दो।

दीप्ति मुस्कुरा दी।

‘ओके गुड गर्ल.. अब जाओ फ्रेश हो कर जल्दी आ जाओ.. मैं जब तक मार्केट से नास्ता ले आता हूँ.. मैं ज्यादा देर इंतज़ार नहीं करूँगा.. जल्दी आओ..’

वो बाहर चला गया।

दीप्ति- भाई ने तो कुछ बोला ही नहीं..

मैं - वो हमारे बारे में सब जानता है.. मैंने उसको सब कुछ बता दिया था.. सो डरने की कोई बात नहीं.. जाओ फ्रेश हो जाओ।

दीप्ति - बाथरूम तक अपनी गोद में लेकर चलो ना..

मैं- ओके..

मैं उसको गोद में उठा कर बाथरूम में गया।

हम दोनों फ्रेश हुए और कपड़े पहन कर रेडी हो गए तो वो फिर बोली- मुझे गोद में ही ले चलो ना नीचे..

तो मैं उसको गोद में ही ले कर नीचे आया.. टेबल पर जय नाश्ता लगा चुका था, दीप्ति मेरी गोद में ही बैठ कर खाने लगी।

तो वहीं जय और मैंने दोनों मिल कर दीप्ति को सारी बात बता दी।

दीप्ति - क्या.. मुझे चोदने के लिए तुम लोगों ने इतना बड़ा प्लान बनाया था।

मैं - क्या करूँ.. तुम हो ही इतनी खूबसूरत.. किसी का भी दिल तुमको चोदना चाहेगा।

जय - ये प्लान इसका नहीं.. इसकी बहन का था.. जो मुझसे चुदना चाहती है।

मैं - ये भी सही है।

जय - मैं अपना वादा पूरा किया.. अब मैं जा रहा हूँ तुम्हारे घर.. और तुम यहाँ एंजाय करो।

मैं - ठीक है जाओ..

दीप्ति - नहीं जय.. रूको.. मेरे पास एक प्लान है।

जय और मैं एक साथ बोले- क्या?

दीप्ति- क्यों ना तुम कांता को यहीं ले आओ.. वैसे भी घर 4 दिन तो खाली ही रहेगा.. यहीं पर ग्रुप में हम लोग मस्ती करेंगे।

जय और मैं - यह भी सही बोल रही है।

जय - तो एक काम करो.. तुम कांता को ले कर आओ।

मैं - ठीक है.. अभी लेकर आता हूँ।

मैं घर चला गया.. कांता का चेहरा मुझे देखते ही खिल उठा और मुझसे गले लग गई और बोली - वाउ भाई तुमने तो कमाल कर दिया।

मैं - मम्मी-पापा कहाँ हैं?

कांता - अन्दर हैं।

मैं उनके पास गया तो मुझे देखते ही पूछने लगे - अकेले पार्टी कहाँ करके आ गया?

‘नहीं पापा पार्टी आज है.. और वो आप तीनों को भी बुलाया है।’

तो पापा बोले - अरे न भाई.. हमारे पास टाइम नहीं है.. तुम कांता को ले कर चले जाना.. और हमारी तरफ़ से सॉरी बोल देना.. अब हम ऑफिस चलते हैं।

इतना बोल कर वे दोनों ऑफिस चले गए उनके जाते ही कांता फिर से मेरे ऊपर कूद पड़ी।

कांता - कमाल के लड़के हो तुम यार.. इतनी जल्दी काम कर दिया।

मैं - कभी कभी कमाल कर देता हूँ।

कांता - बिस्तर में कैसी लगी दीप्ति?

मैं - मस्त आइटम है यार.. उसके साथ चुदाई में मजा आ गया.. और वो सील पैक भी थी।

कांता - तब तो तुमने एक और सुहागरात मना ली.. मतलब 12 के चोदू हो गए।

मैं - हाँ चलो.. आज तुम भी मना लेना अपनी तीसरी सुहागरात..

वो शर्मा गई.. तो मैं बोला शर्माना बंद करो और जल्दी से तैयार हो जाओ.. जय के यहाँ चलना है.. अभी आज तेरे मन की मुराद पूरी हो जाएगी।

हम लोग जल्दी से रेडी होकर जय के घर पहुँच गए और जैसे ही अन्दर गए तो देखा जय और दीप्ति एक बिस्तर को सज़ा रहे थे।

पूछने पर पता चला आज इन दोनों की पहली चुदाई यादगार रहे.. उसी की तैयारी चल रही है। तभी दीप्ति कांता को लेकर चली गई बोली- इसको मैं सज़ा देती हूँ.. और मुझसे बोली - तुम जय को जाकर सज़ा दो।

मैं जय को कमरे में ले गया और बोला- खुद से तैयार हो जा..।

जब वो रेडी हो गया तो मैंने थोड़ा बहुत उसको सज़ा दिया और खुद भी फ्रेश हो कर बाहर आया। तो पता चला दीप्ति अभी भी कांता को सज़ा ही रही है.. वो भी बंद कमरे में।

 
जब वो रेडी हो गया तो मैंने थोड़ा बहुत उसको सज़ा दिया और खुद भी फ्रेश हो कर बाहर आया। तो पता चला दीप्ति अभी भी कांता को सज़ा ही रही है.. वो भी बंद कमरे में।

कुछ देर बाद जब वो बाहर निकली.. तो मैं देखता ही रह गया। कांता एकदम खूबसूरत दुल्हन की तरह सजी हुई थी। सिल्वर रंग की पारदर्शी साड़ी और उसी रंग की ब्लाउज.. पूरा फेस मेकअप किया हुआ.. साड़ी नाभि से नीचे.. बुर से थोड़ी ही ऊपर बँधी हुई थी।

उसकी बुर और नाभि के बीच का चिकना भाग और भी खूबसूरत लग रहा था।

मुझे तो लग रहा था कोई हूर परीलोक से उतर कर आई है.. क्योंकि इतनी खूबसूरत कांता को मैंने भी पहले कभी नहीं देखा था। वैसे दीप्ति भी तैयार हो कर आई थी.. लेकिन कांता के आगे वो कुछ ख़ास नहीं लग रही थी। मुझसे रहा नहीं गया और मैं कांता के गले लग गया - अभी तुम इतनी खूबसूरत लग रही हो कि मन हो रहा है कि पहले मैं ही चोद दूँ।

कांता - आज तो मैं जय के लिए सजी हूँ.. आप किसी और दिन..

मैं - ओके मेरी जान.. लेकिन मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है।

कांता - दीप्ति है ना.. आज इसी से काम चलाओ।

मैं - उसके अलावा कोई चारा भी तो नहीं है।

दीप्ति - अब तुम हटो इसको बिस्तर पर ले जाने दो।

मैं - हाँ उसको पहुँचा कर मेरे पास आ जाओ.. जल्दी से मेरा राजा खड़ा हो रहा है।

दीप्ति - हाँ आती हूँ.. मेरे राजा सब्र करो।

मैं - नहीं हो पा रहा है।

दीप्ति - पिछली बार मिली थी.. तो बहुत छोटी थी.. लगता है कोई मेहनत कर रहा है।

मैं - हाँ तुम्हारा वही.. और तुम आओ मैं तुम पर मेहनत करता हूँ।

दीप्ति - अभी इन दोनों को देखने दो.. पहली बार लाइव सेक्स देख कर मजा आ रहा है।

मैं - अब शायद मैं पहला आदमी होऊँगा जो अपनी ही बहन को चुदते हुए लाइव देखूँगा।

हम दोनों हँसने लगे और वो दोनों अपने काम में लगे हुए थे। जय कांता की चूचियों से खेल रहा था.. कभी मसल रहा था.. तो कभी चूस रहा था।

इधर मैं भी दीप्ति की चूचियों को दबाने लगा तो ‘आहह..’ बोलते हुए वो मेरी गोद में बैठ गई।

मैं उसकी पीठ पर किस करते हुए उसकी चूचियों को मसलने लगा।

उधर वे दोनों अलग होकर बिस्तर पर ही खड़े हो गए… तो हम दोनों भी अलग हो गए ये देखने के लिए कि क्या हो रहा है।

मैंने देखा कांता उसके लंड को पैंट के ऊपर से मसल रही थी.. तो जय ने अपनी पैंट उतार को दिया और उसका लंड देख कर कांता उसके साथ खेलने लगी। तो दीप्ति से भी रहा नहीं गया और वो भी मेरे लंड को निकाल कर खेलने लगी और मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। दीप्ति जब तक चूस रही थी, मैंने भी अपनी पैंट उतार दी.. कुछ देर चूसने के बाद जय कांता को खड़ा करके उसकी साड़ी उतारने लगा.. तो कांता ने उसकी साड़ी और पेटीकोट दोनों उतारने में मदद कर दी।

मैं भी कहाँ पीछे रहने वाला था.. मैंने भी दीप्ति के कपड़े उतार दिए। अब कांता सिर्फ़ पैन्टी में थी और दीप्ति ब्रा और पैन्टी दोनों में खड़ी थी।

मैंने दीप्ति को सोफे पर बिठा कर उसकी दोनों टाँगों के बीच में जाकर उसकी पैंटी को हटा दिया और उसकी बुर चूसने लगा। तो जय भी पीछे नहीं रहा वो भी शुरू हो गया और दोनों लड़कियां मुँह से सीत्कार निकालने लगी। उनकी सीत्कारें पूरे कमरे में गूंजने लगीं।

दीप्ति मेरे लंड को पकड़ कर हिलाने लगी, कुछ देर ऐसा करने के बाद हम चारों डिसचार्ज हुए और अलग हो गए।

कुछ देर बाद फिर दोनों लड़कियों ने हम दोनों को कन्डोम पहनाए और हमारा लंड खाने को रेडी हो गईं। मैंने उधर देखा कि कांता बुर खोल कर बिस्तर पर लेट गई और जय ने अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया।

उसको कोई खास दर्द नहीं हुआ.. क्योंकि वो मेरा लंड खा चुकी थी.. तो उसको क्या परेशानी होती भला..

दीप्ति - अरे वाहह.. इसने तो बड़ी आसानी से लंड खा लिया.. इसको तो दर्द भी नहीं हुआ और मैं तो कल बहुत रोई थी।

मैं - अब तुमको भी नहीं होगा मेरी जान..

दीप्ति - क्यों.. क्या ये पहले भी लंड खा चुकी है क्या?

मैं - हाँ इसको भी पहली बार हुआ होगा!

दीप्ति - ओह आजकल की लड़कियां बड़ी फास्ट होती हैं।

मैं - हाँ पद्मा भी अब तक लंड खा चुकी होगी।

दीप्ति - पता नहीं शायद..

मैंने उसको लिटा कर उसकी बुर में अपना मोटा लंड डाल दिया और जोरदार झटके मारने लग गया। पूरे कमरे में ‘आआआहह.. ऊहह.. ओह..’ की आवाजें गूंजने लगीं तो हम दोनों लड़कों ने झटके और तेज कर दिए।

फिर कुछ देर बाद हम चुदाई की अवस्था बदल-बदल कर चोदने लगे।

मैंने दीप्ति को घोड़ी बनाया तो ये देख कर जय भी कांता को घोड़ी बना दिया। जैसे-जैसे मैं दीप्ति के साथ कर रहा था.. वैसे ही वो कांता के साथ करने लगा।

उन दोनों लौंडियों के मुँह से ‘उऊहह.. ऊहह.. फफ्फ़..’ की आवाजें निकल कर पूरे कमरे में भरने लगीं और कुछ देर के बाद हम चारों लोग डिसचार्ज हो गए।

 
मैंने दीप्ति को घोड़ी बनाया तो ये देख कर जय भी कांता को घोड़ी बना दिया। जैसे-जैसे मैं दीप्ति के साथ कर रहा था.. वैसे ही वो कांता के साथ करने लगा।

उन दोनों लौंडियों के मुँह से ‘उऊहह.. ऊहह.. फफ्फ़..’ की आवाजें निकल कर पूरे कमरे में भरने लगीं और कुछ देर के बाद हम चारों लोग डिसचार्ज हो गए।

इस तरह बार-बार चुदाई होती रही और बार-बार झड़ते.. फिर कुछ देर के बाद शुरू हो जाते.. और इसी तरह हम लोगों ने चार-चार राउंड चुदाई की।

फिर वहीं नंगे ही निढाल होकर सो गए और मेरी नींद जब तक खुली.. तब तक शाम हो चुकी थी।

तो मैंने सबको उठाया और बोला- कहाँ खाना है.. यहीं खाना है या बाहर चलना है?

तो सबने एक साथ बोला- बाहर होटल में चलते हैं ना..

तो मैं बोला- जाओ.. जल्दी से रेडी हो जाओ.. हम बाहर चलते हैं।

हम सब साथ में ही बाथरूम में जाकर फ्रेश हुए और अच्छे से कपड़े पहन कर बाहर चल दिए।

कांता जय की बाइक पर और दीप्ति मेरी बाइक पर बैठी हुई थी। कुछ देर आगे ही गए होंगे कि बारिश शुरू हो गई सो हमने डिसाइड किया कि मैं और जय जाकर होटल से खाना पैक करवा कर ले आएंगे। तो वो दोनों लौट गईं और हम दोनों खाना पैक करवाने चले गए।

जय- थैंक्स यार..

मैं- थैंक्स क्यों बे?

जय- कांता के साथ चुदाई करने देने के लिए।

मैं- ऊऊऊऊओह.. अब समझ में आया.. मैंने कुछ नहीं किया.. वो तो कांता तुमको पसंद करती थी.. तो मैंने उसे तुमसे मिलवा दिया और बदले में मुझे दीप्ति मिली।

जय- हाँ बात तो सही बोली तुमने।

मैं- अच्छा ये बता.. कैसी लगी कांता?

जय- एकदम कट्टो माल है.. इतना किया उसके साथ.. फिर भी मन नहीं भरा यार..

मैं- हाँ वो चीज़ ही ऐसी है.. कभी मन नहीं भरेगा.. वैसे तेरी बहन भी कम नहीं है.. जबरदस्त आइटम है।

जय - हाँ देखा मैंने.. मुझे भी.. मस्त लगी..

मैं - क्यों अपनी बहन पर भी मन डोल रहा है क्या?

जय- हाँ यार.. एक बार मुझे भी दिला दो ना..

मैं- साले अपनी बहन को चोदेगा?

जय- तो साले तुमने कौन सा छोड़ दिया अपनी बहन को.. कांता मुझे सब बता चुकी है..

मैं- ठीक है.. अभी जो है उसको सम्भाल ना.. उसके बाद मैं कुछ करता हूँ।

जय- ठीक है.. अब घर चल.. दोनों हमारा इंतज़ार कर रही होगीं।

मैं- हाँ चल.. चलते हैं।

हम लोग घर पहुँचे तो वो दोनों टेबल के पास थाली लगा कर बैठी हुई थीं। मैं समझ गया कि इन दोनों को बहुत ज़ोर से भूख लगी हुई है..।

सो मैंने खाना टेबल पर रख दिया और वो दोनों खाना दो थालियों में लगाने लगीं.. हम दोनों खाने के लिए बढ़े ही थे कि दोनों एक साथ बोलीं - अभी नहीं पहले कपड़े उतारो.. साथ ही वे दोनों भी अपने-अपने कपड़े उतारने लगीं।

तो हम लोग कौन सा पीछे रहने वाले थे.. झट से उतार कर रेडी हो गए। तो दीप्ति मेरे और कांता जय की गोद में जाकर बैठ गई और हम नास्ता करने लग गए।

भोजन करते वक्त मैं दीप्ति की चूचियों को भी किस कर लेता था.. कैसे नहीं करता सामने जो था और कौन कंट्रोल करने वाला था।

तो दीप्ति ने कुछ सब्जी उठा कर अपनी चूचियों पर लगा ली और मेरे हाथ में रोटी पकड़ा दी। मैं समझ गया मैं कौन सा पीछे रहने वाला था.. मैं वहीं से सब्जी लगा कर खाने लगा। रोटी उठा कर सब्जी के लिए उसकी चूचियों चाट लेता था। अब मैंने भी थोड़ी सी सब्जी ले कर अपने लंड पर गिरा दी और बोला- लो अब तुम खा लो।

तो वो फिर रोटी खा कर पूरी सब्जी चाटने लग गई। इसी तरह की कुछ नोक-झोंक में हमने खाना ख़त्म कर लिया और रात भर चुदाई का कार्यक्रम चला। थक कर सब वहीं सो गए।

सुबह पापा के फोन ने हमारी नींद खोल दी.. तो मैंने कांता को गोद में उठाया और उसको बाथरूम में जा कर खड़ी कर दिया। कुछ देर में वो फ्रेश हो गई तो मैं उसको ले कर घर जाने लगा। तो जय एक और राउंड के लिए बोला.. लेकिन मैंने मना कर दिया और कांता को लेकर घर आ गया।

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