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Incest भाई-बहन वाली कहानियाँ

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खूबसूरत बहन की गांड चुदाई

आज जो गांड मरने की कहानी बताने जा रहा हू , मेरी 18 साल की खूबसूरत बहन की चुदाई की कहानी हैं .

मैं मोंटी दिल्ली का पंजाबी मुंडा हु, मैं दिन भर मस्ती करता हु, रात को डिस्को पार्टी पब यही मेरा काम है, मेरे घर में मैं मेरी अठारह साल की बहन और मेरी माँ हम तीन जन रहते है पापा कनाडा में जॉब करते है हम तीनो अपने बाप के पैसे से खूब मस्ती करते है माँ भी चुदक्कड़ है वो भी शाम होते ही अपने आशिक के पास चली जाती है मेरी बहन काफी अच्छी है वो आज तक किसी से चुदी नहीं है, वो बड़ी ही हसीन नैन नक्स की लड़की है, बूब बड़ा बड़ा गांड चौड़ी, गोरी, गाल गुलाबी.उसके दीवाने तो बहुत है पर वो ज्यादा किसी को भाव नहीं देती, मैं कामयाब रहा अपने बहन को गांड मारने में, एक दिन की बात है, मैं और मेरी बहन दोनों घर पे थे, माँ बोली आज रात को नहीं आउंगी मैं अपने दोस्त के यहाँ जा रही हु उसके यहाँ फंक्शन है तुम लोग पिज़्ज़ा मंगवके खा लेना, और माँ चली गयी, हम दोनों बहन भाई ने प्लान बनाया की आज रात को बियर पिएंगे और तंदूरी चिकिन खाएंगे, रात को करीब १० बजे खाना खाया और बियर पि, मैंने बियर में थोड़ा सा व्हिस्की भी मिला दी थी, व्हिस्की कभी कभी मम्मी पीती है, मैंने जितना व्हिस्की निकली उतना पानी डाल दिया ताकि माँ को शक ना हो की हम लोगो ने उनकी व्हिस्की पि.

मेरी बहन ने कहा भैया आज का बियर तो काफी स्ट्रांग है मुझे तो काफी नशा आ गया, मैंने कहा हां लग तो ऐसे ही रहा था, वो उठी और बाथरूम जाने लगी वैसे ही वो लड़खड़ा कर गिरने लगी मैंने उसको संभाला, पर उसी कर्म में बहन का गोल गोल बड़ा बड़ा बूब मेरे हाथो में आ गया, बहन झूमते हुए बोली “हम्म्म्म नॉटी भाई, क्या किया तुमने”

मैं : कुछ भी तो नहीं

बहन: तो ऐसे ही मेरे बूब दब दया

मैं : अरे यार तो क्या हुआ, गलती से दब गया

बहन: तो जोर से क्यों नहीं दबाया

मैं : जोर से? क्यों तुम्हे अच्छा लगेगा क्या?

बहन: अभी आती हु तुम्हे गिफ्ट दूंगी, आज तो खुश कर दिया बियर पिला के, और हां सिगरेट है अभी आती हु वाशरूम से जला के रखना.

मेरी बहन वाशरूम में गयी और वापस पेशाव कर के आई मैंने सिगरेट जला के उसे दे दिया, वो कस पे कस लगाने लगी, मैं भी कस लगा रहा था, उसके बाद बोली, आज मजा आ गया. तो मैंने कहा मजा तो आ गया चिकन भी था, बियर भी था, पर वो नहीं रहने की वजह से मजा थोड़ा फीका हो गया, तो मेरी बहन बोली क्या है यार साफ़ साफ़ बोल. आज तुम्हे सब कुछ मिलेगा, मैंने कहा क्या आज हम दोनों सेक्स कर सकते है किसी को पता भी नहीं चलेगा. तो मेरी बहन बोली नहीं यार, ये मेरे से नहीं होगा, मैंने आज तक सेक्स नहीं किया है. तो मैंने कहा नहीं किया तो आज कर लो तुम तो मस्त माल हो गयी है, अभी तुमको चुदने में काफी अच्छा लगेगा, आज तो मौका ही, w अगर तुम आज मेरे से नहीं चुदी तो आने बाले समय में किसी और से चुद जाएगी क्यों ना घर का माल घर में रह जाये. आप ये कहानी निऊ हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पे पढ़ रहे है, मेरी बहन तैयार हो गयी, बोली देख भाई मैं तुम्हे चूत में घुसाने नहीं दूंगी क्यों की मैं अपनी वर्जिनिटी मैं अपने बर्थडे में खोना चाहती हु, तू चाहे तो गांड मार ले, मेरा तो ख़ुशी का ठिकाना ना रहा क्यों की मुझे तो गांड मारना ही पसंद है, फिर क्या था हम दोनों एक दूसरे को बाहों में झूमते हुए बैडरूम में गए और मैंने अपने बहन का एक एक कर के सार कपडा उतार दिया, वो गजब की हॉट लग रही थी, बड़ा बड़ा चूच मस्त गोरी शरीर पिंक होठ, चूत के पास हलके हलके बाल, गांड गोल गोल उभरा हुआ चलती तो दोनों तरफ चूतड़ एक दूसरे को सहलाते हुए चलती, वो लेट गयी मैंने अपने बहन के होठ को चूसना सुरु किया फिर बूब दबाना, मजा आ गया दोनों निप्पल को जब बारी बार से अपने दांत से दबा रहा था वो तो बस आआह्ह आआआहह आआआहह उफ्फ्फ्फ्फ़ कर रही थी, वो बार बार अंगड़ाई ले रही थी, फिर मैंने चूत को चाटना सुरु किया पर बहन बोली आज नहीं तू बर्थडे पे चाट लियो, तू ही मेरी वर्जिनिटी का मालिक रहेगा, और वो पेट के बल लेट गयी, मैंने उसके कंधे से पीठ से चूतड़ से जांघ से निचे पैर तक चाटना सुरु किया और फिर गांड को चाटने लगा दोनों हाथ से चूतड़ को अलग अलग किया, और गांड के छेद पे जीभ रखा और जीभ को लकपकाने लगा वो तो इतनी कामुक हो गयी यार की बता नहीं सकते वो तो ऐसे ऐसे आवाज निकाल रही थी कभी तो लग रहा था उसे दर्द हो रहा था कभी लग रहा था उसे ठण्ड लग रही है कभी तो लग रहा था किसी ने पेट में चुति काट ली, फिर मैंने अपने लैंड पे ऊपर थोड़ा थूक लगाया और अपने बहन से गांड में पेल दिया.

वो कराहने लगी और आँख में आंसू आ गए जब की अभी तक मेरे लैंड का सुपाड़ा ही अंदर गया था, मैंने उसको सहलाया और फिर से कोशिश की चार पार झटके में पूरा लण्ड अंदर चला गया, मेरी बहन बार बार कह रही थी भैया गांड धीरे से घुसाओ प्लीज दर्द होता है, मैंने भी कहा रुकने बाला मैं जोर जोर से उसके गांड में अपना लण्ड घुसा रहा था, दोनों नशे में चूर चूर थे और फिर थोड़े देर बाद वो भी गांड उठा उठा के गांड मरवाने लगी, रात भर में करीब ६ बार मैंने अपने बहन को गांड मारी, सुबह जब उससे देखा तो वो ठीक से चल नहीं पा रही थी, आपको मैं अपनी बहन की वर्जिनिटी की कहानी बताऊंगा उसका बर्थडे अभी ३ दिन बाद है. आपको मेरी ये कहानी कैसी लगी जरूर कमेंट करे और रेट करे प्लीज.
 
मेरी दीदी मेरी कंबल बनी



मैं उस वक़्त 12त में अड्मिशन लिया था. मैं घर पे रह के पढ़ाई करता था क्यूंकी एक्षांज़ सर पे थे. घर पे अक्सर दीदी ही होती थी क्यूंकी मों और दाद जॉब करते थे. हू मेरा बहुत ख़याल रखती थी. पता नही कब ये उसके चाहत में बदल गया मुझे पता नही चला. हमरी बहुत नीभती थी दोस्ती. हम हमेशा साथ खाना, रहना, सोना और गप्पे करते थे.

मैं भी उनके प्रति आकर्षित होता था. उसके बड़े बड़े गांद के फाँक मुझे खींचते थे. जब वो झुकती थी तब उसके चुचि दीखते थे. मैं पागल हो जाता था. मैने काई बार उसके पनटी चुराई. कभी उस पनटी को मुँह पे रख के सूंघता था मानो दीदी का बर सूंघ रहा हू. और सूंघट सूंघते ही मैं मूठ भी मरता था. काई बार उसकी अपनटी में ही मूठ मार लेता था मगर तुरंत उसे धो के रख भी देता था. डरता था कही दीदी को पता ना चल जाए.

मैं रोज़ उन्हे छोड़ने की बारे में सोचता था मगर हिम्मत नही होती थी. वो बहुत कड़क थी. शायद मैं कभी शुरुआत कर भी नही पता मैं इतना डरता था और शर्मिला भी था. यहा मेरी दीदी पहले स्टार्ट की थी. वो मुझसे 6 साल बड़ी है और मुझे बोहुत चाहती है. एकदिन मेरा सर मेआइं ज़ोर से दर्द कर रहा था तो मैने रिक्वेस्ट किया तोड़ा सा सिर दबाने के लिए वो मान गयी.

वो मेरा सिर दबा रही थी और मुझसे बाते भी कर रही थी. फिर वो मुझसे गर्ल फ्रेंड के बारे में पूछने लगी लेकिन सच तो ये है की मेरा कोई गर्ल फ्रेंड नही थी.

अंजलि: तुमहरि कोई गर्लफ्रेंड है की नही.

मे: नही दीदी कोई नही, किसी लड़की से बात करनी की इच्छा नही होती.

वो फिर मुझे सेक्स के बारे में पूछने लगी तो मैं चुप रहा. क्यूंकी मैं कभी भी किसी के साथ ये सब टॉपिक्स डिसकस नही करता.

अंजलि: तुमने कभी किसी के साथ सेक्स किया है.

मे: नही कभी नही. किसी ने नही अलो किया दीदी.

अंजलि: किसी लड़की को नेकेड देखा है. किसी को भी.

मे : नही कभी नही.

अंजलि: झूट मत बोलो कभी मुझे नहाते वक़्त कीहोल से नही डेका? मैने काई बार महसूस किया की जब मैं नहाने जाती हू तब तुम दरवाजे आस पास रहते हो जैसे मुझे कीहोल से देखा हो. सॅक्स सच बताओ………तुमने मेरे पनटी को भी काई बार हाथ लगाया है. एक जगह पे रखा हुए मेरे पनटी काई बार दूसरी जगह मिलते है. सुखी पनटी गीली या वॉश्ड मिलती है. ऐसा कैसे तेरे अलावा ये कौन कर सकता है.

मे: नो……..नही दीदी कभी नही.

अंजलि: मुझे नंगी देखना चाहोगे? अगर सच बोलॉगे तो मैं दीखा दूँगी. अगर झूठ बोलॉगे तो कभी नही दीखौँगी. मैं तुम्हे टच करने भी दूँगी.

एसा लगा की मेरे कान सुन्न पर गये. मैने ऐसा सोचा ही नही था. मैं कुछ बोल भी नही पाया.

दीदी ने फिर पूछा. “देखना चाहते हो की नही?” मैं फिर भी चुप रहा.

फिर वो बोली, “क्या तुम मेरे साथ सेक्स करोगे””

मुझे लगा की दुनिया घूम गयी मेरी. दीदी ने सॉफ कहा सेक्स करोगे?

मैने कहा, “ये ठीक नही होगा क्यूंकी तुम मेरी बहन हो. और मुझे कुछ भी नही आता है.”

उसने कहा, “बहन की पनटी चुराने में ठीक था अब बहन से सेक्स करने में ठीक नही है. मैं तुमको सब सिख़ाओँगी अब बोलो करोगे मेरे साथ…मुझे नंगी देखोगे….मगर मों दाद को मत बताना……….बहँचोड़ बनॉगे.”

मैं मूर्ति की तारझ क़हदा रहा. इसके बाद वो शुरू हो गई. उसने अपने होंठ मेरे होंठ पे रख दिया. फिर मेरे होंठ चूसने लगी. पहले तो फ्रेंच किस 20 मीं तक और सबसे हैरानी की बॅयात है की ये सब मेरी दीदी खुद करवा रही थी. मैं भी मज़े से उसके लिप्स चूस रहा था. फिर उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में घुसेड दिया. मैं उसे भी चूसने लगा मानो वो टॉफी हो. बहुत टेस्टी लगा उसके जीभ का स्वाद. दीदी वास्तव में मीठी है.

उसने रेग्युलर निघट्य पहना था. मुझे क्या फीलिंग हो रहा था बता नही सकता. फिर मैने उसके कपड़े उतरे. उसने मुझे निघट्य उतरने में मदद की. उसने अंदर पिंक कलर की पनटी पहनी थी.

तब दीदी ने कहा, “अब मेरी पनटी उतरो.”

और मैने उतार दी. उतरते वक़्त मेरा चेहरा उसके छूट के एकद्ूम बगल में था. मैने अपनी गाल पे उसके छूट के सांस महसूस किए. लगा गाल पे कोई गरम साँस ले रहा है. शयड उसके छूट से गर्मी निकल रही हो. मेरा दिल किया की मैं उसके छूट को किस करू मगर मैने ऐसा कुछ नही किया.

वो उस वक़्त वर्जिन थी आंड ऑफ कोर्स मैं भी. हू बिल्कुल नंगी हो गयी. मैं थोड़ी देर तक उसके नंगे बदन को देखता रहा. चिकना चेहरा, सुतला गार्डेन, उन्नत छाती, नोकिला निपल, सता हुआ पेट, पेट पे छोटा सा नाभि, नाभि से नीचे बिना बाल के चिकना बर और चिकने जाँघो वाला पैर. उपर से नीचे बहुत सुंदर, एकद्ूम मलाई. जी करता था खा जौ. दीदी का छूट कैसा था आज भी याद है. एकद्ूम बिना बाल के गोरा चिकना था. बहुत ही सेक्सी और प्यारा. बाहर का लिप्स पिंक था और अंदर में दाना भी रेड और पिंक का मिक्स था.

दीदी बोली, “क्या देख रहा है? क्या देखता ही रहेगा या कुछ करेगा भी?”

मिने दीदी से कहा, “मैं कहा से शुरू करू, मुझे तो कुछ भी नही पता है.”

दीदी मुझसे एकद्ूम लिपट गयी और फिर किस करने लगी. शायद उसे नंगे खड़े रहने में शरम आने लगी. दीदी बिल्कुल मेरे पास खड़ी थी. उसके चुचि बिल्कुल बगल में मैं खुद को रोक नही पा रहा. मैने चुचि को ज़ोर से दबा दिया. दीदी के मुँह से चीख निकल गयी. दीदी की क्या बूब्स थे, गुड 38 साइज़ के. वो मुझे परे हटाने लगी. मुझसे अब बर्दाश्त नही हो रहा था. मैं उसके लिप्स को क़िस्स्स कर दिया. वो पीछे हटी.

मैं इसी बीच उसके नंगे चुचि को फिर से दबा दिया. इस बार में सॉफ्ट्ली दबा रहा था. दीदी शॅंटी से इसके मज़े ले रही थी. उक्से निपल कड़े थे मैने निपल को उंगलिंके बीच ले कर दबाया. मैं कभी बूब्स दबाता कभी निपल दबाता. मैं उसके चुचि को लीक करने लगा. फिर निपल को मुँह में ले कर चूसने लगा. म्‍म्म्मममस्त लग रहा था…………

दीदी बोली, “आआआआअहह…….ज़ोर से चूस इसे मेरे भाई.चूस मेरे बूब्स को. इसे मलाई समझ के खा. आइस क्रीम समझ के चूस.”

मैं बारी बारी से दोनो बूब्स चूस रहा था. बिना कपड़ो के शी वाज़ लुकिंग डॅम सेक्सी.

मेरा मान तो कैसा हुआ, पूछो मत जैसे ही मैने छुआ दीदी बोली, “चुसेगा? एकद्ूम मीठा आम के जैसा है.”

तो मैने कहा, “तुम डोगी तो ज़रूर चुसूंगा. इसमें से दूध निकलेगा क्या.”

मैं जाँबोझ के पूच्छा, “चूसने से तुम्हे दर्द तो नही करेगा ना?”

दीदी हँसने लगी बोली, “हा क्यूँ नही आज सब कुछ तेरे लिए. तुम खूब चूसो. मुझे भी अच्छा लगेगा.”

मैं चूसने लगा………….दीदी के चुचि बिल्कुल गोरी और बहुत सॉफ्ट थी. निपल्स थोड़े छ्होटे मटर के दाने जैसे थे.

फिर मैने पूछा, “अचानक मेरे साथ क्यू? तुम्हारा कोई बॉय फ्रेंड नही है के. उस से करती ये सब. या शादी के बाद करती पति के साथ.”

उसके बाद वो जो बोली इट वाज़ आउट ऑफ मी इमॅजिनेशन. वो बोली, “जब शादी नही करना है तो बॉय फ्रेंड बनके क्या फयडा.” मैं सन्न रह गया. हू शादी ही नही करेगी…..मतलब मैं हमेशा उसे छोड़ सकता हू. फॉर फ्यू सेकेंड्स रियली ई वाज़ डॅम शॉक्ड.

मैं बोला, “अगर किसी को पता चल गया तो क्या होगा?”

“हॅव फेत, नतिंग विल हॅपन. मैं हू ना.” उसने कहा और अपने बहो में भर लिया.

20 मीं के सकिंग के बाद वो मेरे कपड़े उतरने लगी. मैं उनके सामने नंगा नही होना चाहता था और मुझे तोड़ा अजीब भी लग रहा था. पता नही दीदी को मेरा लंड पसंद आएगा की नही. कभी किसी लड़की के सामने मैं नंगा नही हुआ था.

मैं पीछे हटने लगा तब दीदी ने मुझे इशारा किया और बोली, “तुम भी उतरो, मैं अकेली नंगी रहूंगी क्या? मेरा सब कुछ देख लिया अब मुझे भी दीखाओ मेरे भाई के पास क्या है?”

दीदी मेरे शॉर्ट्स खींचने लगी. मैने अपने कपड़े उतरे. मेरा लॉडा झट से दीदी को सल्यूट करने लगा. एकद्ूम एरेक्ट था. उसका टोपा एकद्ूम लाल और नसे भी फदाक राई थी. दीदी मेरे लॉड को बड़े प्यार से देख रही थी. उस वक़्त हम दोनो न्यूड थे. दीदी मेरे लंड को हाथ में लिया और दबाने लगी. वो घुटनो पे बैठ के मेरा लंड को किस करने लगी. उसे मुँह में लिया और लीक किया. दीदी के चूसने से मुझे बिजली के झटके लग रहे थे. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मुझे लगा मैं दीदी के मुँह में ही झाड़ जौंगा. मैं इतनी कलडी झड़ना नही चाहता था. अभी तो शुरुआत हुई थी. मैने डिड को अलग किया. फिर दीदी रुक गयी.

दीदी ने कहा, “कितना प्यारा और मस्त लंड है मेरे भाई का. मेरे बर में जाएगा तो फाड़ देगा उससे. प्ल्ज़ मेरे प्यास को बुझाओ क्यूंकी मैं तुम्हे सबसे ज़्यादा ट्रस्ट करती हूँ. मैं चाहती हू तुम ही मेरी सील तोडो…..मुझे सेक्स का स्वाद दो. मुझे आज जाम के छोड़ो?”

मैं शॉक्ड था. उस वक़्त मेरा आगे 19 था ुआर बहन का 25. तब मुझे सब क्लियर हो गया. मैं समझ गया आअज दीदी मुझसे चूड़ेगी. उस दिन मेरा सबसे लकी दिन था. सामने दीदी बिल्कुल नंगी खड़ी था और मैं भी नंगा था. दीदी ने मुझे बाहों में पकड़ा और किस करने लगी. उसने मेरा मुँह लिया और मुझे अपने बूब्स के तरफ धकेली और चूसने को कहा.

मैं उसके बूब्स को चूसने लगा. उस वक़्त वो मेरे पीठ पर हाथ फेर रही थी मानो मैं उसका बच्चा हू. हू मेरे मुँह में अपना चुचि घसेद भी रही थी और मेरे हार्ड लंड को प्रेशर से दबा रही थी. मेरा लंड एकद्ूम कड़ा था. उसके नस वग़ैरह एकद्ूम कड़े थे मानो अभी फट जाएँगे. दीदी हाथो से लंड को फिर से दबा रही थी. मैने उसका हाथ हटाना चाहा क्यूंकी मुझे लगा अब किसी भी वक़्त मेरा पानी निकला सकता है.

मैने कहा, “दीदी हाथ हटाओ मेर अपनी निकल जाएगा.”

दीदी झट से मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी. मेरा तो एग्ज़ाइट्मेंट से हालत खराब हो रह था. फिर 2 मीं लंड चूसने के बाद वो बोली, “सक मी पुसी जब तक मैं तेरा लंड चुस्ती हू.”

हम 69 हो गये. मैने अपना मुँहे दीदी के छूट पे रखा और वो मेरा लंड चूस रही थी. दीदी के छूट में से अच्छी खुसबु आ रही थी. आख़िर कर मुझे वो छूट चूसने मिल गे था जिसका मैं काई दिन से पूजा करता था. मैं छूट के लिप्स को चाटने लगा. दीदी के मुँह से आआआअम्म्म्मममममममम की आवाज़े आ रही थी. मेरा लंड तो लगा अब फट जाएगा मगर दीदी चूस्ते जा रही थी. वो लंड को चुस्ती कभी लंड के टोपा को दाँत से रगड़ती. उसकी हर हरक़त पे मेरे शेरर में सिहरन होता था. कभी वो मेरे बॉल्स मुँह में ले लेती थी.

मैने अपना जीभ दीदी के छूट के फाड़ में घुसेड दिया. वो ज़ोर से चमकी. मैं अंदर का रस पीने लगा. बहुत टेस्टी था दीदी के छूट का रस. मैं जीभ घुसेड घुसेड कर अंदर तक पीना चाहता था. मैं मज़े से दीदी के बर को छत रहा था चूस रहा था. दीदी के छूट का दाना को चाटने लगा. दीदी को मेरा क्लिट चूसना बहुत अच्छा लग रहा था.

दीदी बोली, “चूस मेरा छूट…आग्ग्घह.छूट का दाना चूस भाई.”

उधर डिड के चूसने से अब मेरा लंड पानी छ्चोड़ने वाला था. मैने अपना लंड दीदी के मुँह से निकलना चाहा मगर वो चुस्ती रही.

मैने कहा, “दीदी अब मेरा लॉडा पानी छ्चोड़ेगा……….अब मुझे छ्चोड़ दो………..आआआआहाहहााआआ……………दीदी आआआआआआआ निकाला मेरा पानी.”

और बिना किसी चेतावनी के मेरे लॉड से मेरा पानी निकल गया. दीदी बिना एक बूँद गिराए पूरा पी गयी. मुझे तो विश्वश ही नही हुआ. तभी दीदी के छूट में भी हलचल हुई और मैं ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा.

दीदी बोली, “बच्चे अब मेरा भी पानी निकलने वाला है और ज़ोर से चूसो.आआआआअम्म्म्ममममममममाआअ……..मेरााआआआआआआआ पाााआआआअन्न्‍ननननननन्न्निईीईईईईईई निककककककककककककककल्ल्लाआाआआ…………”

दीदी ने दोनो जाँघ मेरे कान पे ज़ोर से दबाया और तभी उनके बर से एक झटका महसूस हुआ. उनके छूट से पानी सा निकला जिसे मैं पी गया. मुझे नही पता था लड़कीो का भी अपनी निकलता है. मगर मैं दीदी का पानी पी गया जैसे दीदी ने मेरा लूडा का पानी पीया था.

हम दोनो कुछ देर तक आराम किए. हमारा हार्ट बीट बहुत ज़्यादा था जो अब धीरे धीरे नॉर्मल हो रहा था. हम अभी भी नंगे ही थे. मैं सोच रहा था बस यही इतना होगा या और कुछ भी.

मैने दीदी से कहा, “अब और कुछ दीदी, या हो गया?”

दीदी बोलीं “नही मेरे राजा भैया. अभी चुदाई तो बाकी है…….तुम मुझे छोड़ोगे और मेरी सील तोड़ोगे. मैं कितनी एग्ज़ाइटेड हू ये सोच के की मेरा भाई मेरी सील तोड़ेगा. चल आजा मेरे पास.”

फिर दीदी ने मुझे किस करना शुरू किया. लगा दीदी ने मेरे दिल की बात सुन ली. वो फिर से मेरे लुआडे को दबाने लगी थी. दीदी का दबाव और उसके किस करना फिर से मेरे लंड को कड़ा करने लगा. मैं कुछ ही सेकेंड्स में फिर चुदाई के लिए तैयार हो गया.

मैने पूच्छा, “दीदी असली काम कब करोगी? कब तक ऐसे चूसना चलता रहेगा? मेरा मतलब क्या हम चुदाई नही करेंगे?”

यह कह के मैने अपना जीभ कटा मानो मैने कोई ग़लत बोल दी हो. अपनी बहन से अभी भी इतना नही खुला था मैं. दीदी मेरी इस बात को भाँप गयी.

दीदी बोली, “ज़रूर मेरे बही…………..ज़रूर करनेगे…..तुम ऐसे ही भाषा मैं मुझसे बात करो. डरो मत…………मुझे भी ऐसे बोलना अच्छा लगता है………. जब हम चुदाई कर रहे है तो बोलने में क्या हर्ज़ है……… भूल जाओ की मैं तुमहरि बहन हू. मुझे एक रंडी की तरह छोड़ो.”

इतना सुनना था की मैं भी जोश में आ गया. मैने दीदी का एक चूची चूसना शुरू किया और हाथ से दूसरा चूची दबाने लगा. इस डबल अटॅक से दीदी चौंक गयी मगर फिर मुझे चूची चूसने दी. मैं दोनो बूब्स को बाअरी बारी चूसने लगा. मैने उसके आर्म्पाइट्स देखे एकद्ूम चिकने उसके बर की तरह. मैं खुद को रोक नही पाया और उसे भी चाटने लगा. पहले लेफ्ट फिर रिघ्त आर्म्पाइट.

देन ई मूव्ड तो हेर नेवेल लीक्ड हेर तेरे. शी लाइक्ड इट. शी वाज़ एंकरेजिंग मे तो मूव फर्दर डाउन टुवर्ड्स हेर पुसी विच ई हद सक्ड. मैं उसके चूत तक पहुँच गया. अभी उसके छूट से दूसरी तरह की गंध आ रही थी. मैं उसे चूसा टेस्ट भी अलग था. शायद पानी निकालने के बाद टेस्ट बदल जाता है.

दीदी ने कहा, “अब छूट चूसना छ्चोड़ बहँचोड़ और मुझे जल्दी से छोड़…मेरा छूट तेरे लॉड के लिए मारा जा रहा है. छोड़ेगा की नही बहँचोड़ या बाहर से किसी को बूलौऊ मुझे छोड़ने के लिए.”

दीदी मस्ती में जाने क्या क्या बाद बड़ा रही थी. मैं दीदी के उपर आ गया और अपना लंड उसके छूट में दे दिया. मैने धक्का मारा मगर लंड अंदर जाने की जगह फिसल गया.

डिड ने झल्ला के मेरा लॉडा अपने हाथ में ले लिया और बोली, “सेयेल बहँचोड़…बहन के लॉड………….छोड़ना नही आता.लॉडा बाहर ही रग़ाद रहा है मदारचोड़.”

दीदी को आज के अफले ऐसे बात करते नही सुना था. शायद इस चुदाई का बुखार उस पर चाड गया था. मैं भी अब टॉ मैं आ गया था. मुझे भी जोश चाड गया और अनप शनाप बोलने लगा.

मैने कहा, “अरी बापचॉड़ी शांत रह. मेरा लॉडा बौट मोटा है. इसे ऐसा पेलुँगा की तेरा छूट फट जाएगा….रोटी रहेगी कोई सीलने वाला नही मिलेगा. मदारचोड़ साली रंडी……..देख अब मेरे लंड का कमाल.”

और मैने ज़ोर से धक्का मारा…..और मेरा लूडा दीदी की बर में घुसा मगर तोड़ा सा ही क्यूंकी दीदी का छेड़ छ्होटा तह और मेरा लॉडा मोटा. मैने साँस रोक कर एक और ज़ोर का धक्का मारा.

दीदी ज़ोर से चिल्लई, “आआअहह……….बहँचोड़ साला……………….मेरी छूट फाड़ दिया रेर्रररीईईईईईई………मैं मार गयी साला इतना ज़ोर से लंड पेल दिया की हालत खराब कर दी. मगर रूको मत राजा और ज़ोर से छोड़ आज फाड़ ही दो इस छूट को…………..बहुत गरम है तेरे लिए.”

मैने फिर एक जोरदार धक्का मारा…………..मेरा लॉडा दीदी का सील तोड़ता हुआ अंदर पेल गया.

दीदी को बहुत ज़ोर से दर्द हुआ और वो फिर चिल्लई, “मार दल मुझे मेरे मदारचोड़ भाई ने………………मई मार गयी रे…आज के बाद कभी नही चड़वौनगी………….आआआअहहाअ. सला बहुत दर्द हो रहा है ……………..”

मगर मैं अपना छोड़ना जारी रखा. एक सेकेंड को भी नही रुका. दीदी के वैसे गली देने से मुझे बहुत जोश आ रहा था. मैं और दुगुने जोशे दीदी की चुदाई कर रह था.

मैने अपना हाथ दीदी के चूतड़ पे रखा. और उसे ज़ोर से अपनी तरफ खींचा. दीदी भी नीचे से धक्के मरने लगी. अभी उसे दर्द भी अकर रहा था और नज़ा भी आ रहा था. मैने झट से अपनी एक उंगली दीदी केग आंड के छेड़ में डाल दिया. दीदी ज़ोर से चिहुनक गयी और उपर की तरफ उछली. मेरा सारा लॉडा एक ही झटके मीन अंदर चला गया.

दीदी फिर बाद बड़ाने लगी, ‘और छोड़ मुझे …………………..आआआआआअम्म्म्मममममममम………..मज़ा आ रहाआआआआ हाईईईईईईईईईईई……………..और छोड़ो राजा…फाड़ दो इस बर को………………..इसे रोज़ तुम छोड़ना..मैं शादी अँहि आकृंगी उमरा भर तुमसे ही चड़वौनगी………..मुझे छोड़ोगे ना राजा……………………..आआआआआअम्म्म्ममममममम………………और तेज़ और तेज़………”

मैं अपनी रॅफटर तेज़ करता गया…………दीदी का छूट फैल और सिकुड रहा था……हू मज़े से छुड़वा रही थी ……कुछ देर के बाद मुझे लगा की मेरा पानी निकलेगा.

मैने दीदी से कहा, “दीदी अब मेरा पानी निकलेगा. मैं बाहर निकल लू?”

दीदी बोली, “नही निकल अभी………..बहँचोड़ कुछ देर और छोड़ मुझे. मेरा पानी भी निकलेगा……………. दोनो साथ साथ ही पानी छ्चोड़ना.”

मैं कुछ देर बाद पानी छ्चोड़ा, “दीदी संभलो मेरा बीज……..तेरा छूट अब मेरे पानी से फूल गया.”

और मैं दीदी के छूट में ही झड़ने लगा…………

दीदी भी मेरे साथ ही झड़ने लगी…….. “मैं भी तेरे साथ झाड़ रही हू भाई.”

और हम दोनो फारिग हुए. मैं ये देख के दर गया की दीदी के बर से खून निकल रहा था. नीचे चादर भी गंदा हो गया था. मैने डिड को दीखया. मेरे लंड में भी खून लगा था.

दीदी ने मुझे ज़ोर से चुम्मा और कहा, “मेरे राजा भैया अब मैं कुँवारी नही रही. तुम्हारी बहन चुड़क्कड़ हो गयी है. ये उसी का निशानी है. मेरा छूट का सील तुमने तोड़ा. ये सील टूटने का खून है. अब मेरा बर सिर्फ़ और सिर्फ़ तेरा है. अब मैं चुदाई के बिना नही रह सकती.”

मैने कहा, “दीदी आज तुमने मुझे बहँचोड़ बना दिया.”

मैने भी ख़ुसी में दीदी के चुचि दबा दिए. फिर हम दोनो हँसने लगे. दोनो बातरूम में जा के अच्छे से नहा लिए और एक दूसरे को साबुन से सॉफ भी किया. दीदी ने बातरूम में भी मेरा लंड चूसा. मैने दीदी का बर सॉफ किया

फिर रात हुई तो हल्की हल्की ठंड शुरू हो गयी थी. मैने दीदी से कंबल माँगा तो दीदी हँसने लगी. उसने बाते की उसने सारे कंबल धो दिए थे तो आज बिना कंबल के सोना पड़ेगा. मों दाद घर पे नही थे और वो एक दो दिन बाद आने वेल थे. तो हम चाह कर की भी कंबल का उपाय नही कर सकते थे. मैं परेशन हो गया.

तो दीदी हँसने लगी बोली, “मेरा से सात के सोना रात भर ठंड नही लगेगी भाई. मेरे बर में हीटर है. अपना लंड मेरे बर में दे देना बर की गर्मी से सारा ठंड निकल जाएगा.”

ऐसा कह कर दीदी बिल्कुल नंगी हो गयी और मेरे कपड़े उतार दिया.वैसे भी दीदी घर पे दिन भर कपड़े नही पहनती थी.हम दोनो बिस्तर पे नंगे ही सात के सोए थे.

मुझे आइडिया सूझा.मैं उठा और कंप्यूटर ओं कर दिया और वेब कॅमरा सेट कर दिया. मॉनिटर पे हमारा फोटो आने लगा.

दीदी पूच्च्ी, “ये क्या कर रहा है तू?”

मैं बोला, “देखती जाओ दीदी. मैं हमारी चुदाई का रेकॉर्डिंग कर रहा हू. बाद में हम साथ देखेंगे.”

दीदी को ये बात पसदञ आई. बोली, “ठीक है है भाई. मगर इसे किसी और को मत दीखाना.”

मॉनिटर में दीदी का नंगा बदन दीख रहा था. मैं सब सेट कर एक दीदी के बगल में आ के लेट गया. मैं दीदी का एक चुचि दबाने लगा और दूसरा चूसने लगा. मेरा लंड फिर खड़ा हो गया. दीदी ने उसे दबाया और अपने उपर आने को कहा. मैं उसके उपर सो गया तो दीदी ने मेरा लंड अपने छूट में घुसेड दिया.

सुबह से ये दूसरी बार मैं दीदी को छोड़ रहा था. अबकी बार दीदी का बर उतना टाइट नही था. मैने धक्का लगे तो लंड एकद्ूम से अंदर छा गया. सच में अंदर बहुत गर्मी थी. मैं दीदी को छोड़ने लगा. मॉनिटर पे सब दीख रहा था. छोड़ने से और गर्मी आई लगा अब कंबल की ज़रूरत नही है.

मेरा धक्का तेज़ होने लगा. मैं दीदी का चुचि चूसने लगा. दीदी सुबह से ऐसे ही नंगी थी एक कपड़ा नही पहना था उसने. मुझे उसके चुचि से दूध का एहसास हो रहा था. दीदी भी नीचे से धक्के मार रही थी. उसे अभी अक चुदाई ज़्यादा अच्छा लग रह था क्यूंकी अभी उसे दर्द नही था.

दीदी फिर मूड में बोल रही थी, “और धक्के मार राजा ….छोड़ मुझे……………..मुझे अपनी रंडी बन ले बहँचोड़….और ज़ोर से छोड़…………आज इस बर को तूने उद्घाटन किया. आज इसे फाड़ भी दे……………मुझे मज़ा दे.”

मैं पूरी तेज़ी से छोड़ रहा था. हमारे बदन आपस में टकरा रहे थे.

तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप तुप

ऐसी आवाज़े आ रही थी. मैं उन्हे पूरी ताक़त से छोड़ रहा त….बीच में दीदी को दाँत भी काट लेता था.

दीदी बोली, “हाआआआआ…..आआआआअहह.छोड़ो और ज़ोर से छोड़ो. मुझे ज़ोर से दाँत कतो. मुझे लोवे बीते दो… ज़ोर से कजटेक मार………अपने दाँत का निशान छ्चोड़ो मेरे बूब्स पे……………..मेरा चुचि अपने दाँत से लाल कर दो……………ऊऊऊऊऊऊऊऊफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ……आआआआाअगगगगगगगगग.”

मैं दीदी का बात मानते हुए उनके चुचि पे ज़ोर से दाँत काटने लगा जिस से उनके चुचि के नीचे लाल दाग उभर गया. दीदी की आँख में दर्द से आँसू निकल आ गये. मुझे अफ़सोस भी हुआ मगर गर्व भी हाउ के मैने दीदी के बदन पे अपने निशान बना दिए. इतना मस्त सीन था. मैने फिर दीदी केग आंड में अपनी उंगली घुसेड दी. इस से दीदी का बदन कड़ा हो गया और वो ज़ोर से नीचे से धक्के मारी.

दीदी चिल्ला के बाय्ल, “अरे हरामी गांद में क्यू उंगली करता है जब अपना बर तुम्हे मैने फ्री में दे दिया……………छूट छोड़ो सेयेल और मेरा गांद छ्चोड़ो…….आहह…….तेरे गंद में मैं उंगली करूँगी बहँचोड़.”

दीदी ऐसी गंदी बाते करती रही और चुड़वति रही अंगार मैने अपना उंगली उनके गांद से नही निकाला. दीदी की बाते मुझे बहुत गरम कर रही थी. मेरा लॉडा कुछ ही देर में पानी चूड़ने को तैयार हो गया.

मैने दीदी से कहा, “मैं तो तेरे गंद में मर्चॅ पेल दूँगा, उंगली क्या चीज़ है. मैं छोड़ने में मास्टर बन ना चाहता हू. दीदी अब मैं झड़ने वाला हू. तेरे बर में छ्चोड़ डू पानी?”

दीदी बोली, “हाहााआअ. जल्दी छ्चोड़ भाई……..अब मैं भी साथ ही पानी छ्चोड़ूँगी. मेरा भी निकालने वाला है.उूुउउफफफफफफफफफफ्फ़……..उउगगगगगगगगगघह.”

इस बार काफ़ी देर लगा पानी छ्चोड़ने में कुनकी, सुबह से ये तीसरी बार था ना. मगर मैं बहुत देर तक झाड़ता रहा. दीदी के छूट में सारा बीज उंड़ेल दिया. बहुत मज़ा आया दीदी को छोड़ के. कंप्यूटर पे हमारी चुदाई पूरी रेकॉर्ड हो गयी थी. हुँने प्लेबॅक कर के देखा. दीदी मॉनिटर पे और भी सेक्सी लग रही थी. फिर हम वैसे नंगे ही सात के सारी रात सोए और सच में हुमें कंबल की ज़रूरत महसूस नही हुई. दीदी का बदन इतना हॉट है.

हुँने फ़ैसला किया की हम दोनो घर पे नंगे ही रहेंगे जब तक अकेले है और रात को कंबल की जगह एक दूसरे से लिपट के सोएंगे….यानी मों दाद के आने से पहले और किसी भी हालत में उन्हे ये पता नही चलेगा. बाद में, जब में और दीदी कोई जॉब करेंगे तो घर का सारा खर्चा हम दोनो मिल के उठाएँगे.
 
मैंने बेहेन की चुत को गरम किया



हैल्लो दोस्तों, ये स्टोरी तब की है जब छुट्टी के दिन थे और हम सब लोग घर पर ही थे, मेरी बहन जो कि 25 साल की है वो भी सारा दिन घर पर ही होती थी। मेरी उम्र 18 साल है और उस वक्त हम सब लोग छत पर सोते थे। फिर रोज की तरह जब हम लोग रात के 11 बजे सोने गये। अब हम कुछ इस तरह सोये थे कि मेरे लेफ्ट में मेरी बहन, फिर उसके लेफ्ट में मेरी दादी और माँ पापा नीचे घर में ही सोते थे। अब में रोज की तरह नेट पर फेसबुक और कुछ सर्च कर रहा था। फिर मैंने सोचा कि अब कुछ लव स्टोरी पढ़ते है और मैंने चोदन डॉट कॉम वेबसाईट खोली।

फिर मैंने देखा कि उसमें एक भाई-बहन की स्टोरी भी है। फिर मैंने वो स्टोरी पढ़ ली और वो मुझे बहुत पसंद आई। अब में अपना लंड सहलाने लगा था। तभी मेरी दीदी ने करवट बदली और मेरी तरफ मुँह करके सो गई। अब उसकी वजह से मेरा ध्यान उसकी तरफ गया और अब में भी उसके बूब्स की तरफ घूर रहा था और उसके बूब्स का उभार उसकी नाईट ड्रेस के पतले कपड़े की वजह से साफ नज़र आ रहा था। अब में मन ही मन उन्हें हाथ लगाने की सोच रहा था, लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हुई। अब में बस उसे देखकर ही गर्म हो रहा था। अब में दीदी के पूरे शरीर को आँखो से निहार रहा था। मुझे आज पहली बार एहसास हुआ कि मेरी दीदी कितनी सुंदर है, अब मेरे मन में हवस पैदा हो गई थी और फिर मैंने हिम्मत करके धीरे-धीरे मेरा हाथ दीदी की छाती की तरफ सरकया तो अब मेरा हाथ कांप रहा था। फिर मैंने हल्के से मेरे सीधे हाथ की पहली उंगली उसके स्तन पर रख दी और 5 मिनट के बाद धीरे से मैंने अपना हाथ उसके स्तन पर रख दिया। अब में उसके स्तन का गोल शेप महसूस कर सकता था।

फिर मैंने इंतजार किया कि कहीं दीदी जाग ना जाए, लेकिन वो गहरी नींद में थी। जब रात के 2 बज गये थे और अचानक से दादी नींद में खांसने लगी तो मैंने झट से मेरा हाथ दीदी के स्तन के ऊपर से हटा लिया और अपनी आँखे बंद कर ली। अब में कुछ वक़्त तक खामोश रहा और करीब 10 मिनट के बाद मैंने मेरी आँखे खोली तो मैंने देखा कि दीदी अब सीधी लेटी हुई थी। अब मैंने फिर से हिम्मत करके मेरा हाथ उसकी छाती पर रख दिया। अब मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। फिर मैंने धीरे-धीरे उसके स्तन को दबाया, तो क्या बताऊँ दोस्तों? मुझे एकदम से करंट सा लग गया। अब मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था और हवस का नशा मुझ पर पूरी तरह से चढ़ गया था, अब मेरी हिम्मत बढ़ गयी थी और अब में रुक रुककर दीदी के बूब्स दबाने लगा था।

फिर करीब 15 मिनट के बाद मैंने हिम्मत की और में अपनी जगह से थोड़ा ऊपर सरक गया और मैंने एक हाथ से दीदी के गले के ऊपर की ड्रेस थोड़ा ऊपर कर दी और में झुककर उसके स्तन देखने लगा। उसके स्तन बहुत गोरे थे जो एक दूसरे से एकदम चिपके हुए थे और दोनों स्तनों के बीच ऊपर वाले हिस्से में छोटी सी दरार बन गयी थी। फिर मैंने हाथ आगे बढ़ाकर दीदी के गले के पास से मेरा हाथ उसके टॉप के अंदर डाल दिया और मेरी एक उंगली को उस दरार में घुसा दिया। पसीने की वजह से उसके स्तनों के बीच थोड़ा गीलापन था। अब में उसके नंगे स्तनों को छू रहा था और उसका मज़ा ही कुछ और होता है। अब मेरे लंड से पानी टपकने लगा था और अब में बहुत उत्तेजित हो गया था। फिर में रुक रुककर उसके स्तनों पर हाथ फैरने लगा, उस समय दीदी ने ब्रा पहनी थी तो में सिर्फ़ ऊपर वाले हिस्से में ही अपना हाथ फैर रहा था। फिर मैंने सोचा कि दीदी गहरी नींद में है तो मैंने बिना सोचे ही उसके एक स्तन को दबोच लिया और दबाने लगा। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर 5 मिनट के बाद दीदी ने अपना पैर हिलाया, शायद उन्हें मच्छर काट गया था तो मैंने घबराकर अपना हाथ बाहर निकाल लिया और सो गया, लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी तो में फिर से जाग गया। अब दीदी मेरी तरफ पीठ करके सोई थी। उसकी गांड की दरार में उसका पतला गाउन (नाईट ड्रेस जिसमें पेंट नहीं होती जो कि ऊपर से घुटनो के नीचे तक लंबा होता है) फंस गया था और इस वजह से उसकी गांड का उभार बहुत सेक्सी दिख रहा था। अब मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और फिर में उसके पास गया और अपना हाथ उसकी गांड पर रख दिया। मेरी बहन ना पतली थी ना मोटी थी। उसका फिगर एकदम शानदार था। इसकी वजह से गांड बहुत मुलायम लग रही थी। अब में और उसके करीब आ गया और पीछे से उसके पूरी तरह से चिपक गया, अब मेरी सांसो की हवा से उसके सिर के बाल उड़ रहे थे।

फिर मैंने हिम्मत करके मेरा अपना पैर दीदी के ऊपर रख दिया और अब मेरा लंड उसकी गांड को पीछे से छू रहा था। अब में हल्के से उसकी गांड पर अपने लंड को रगड़ने लगा। जब मेरा लंड पेंट में ही था और मेरी उसे बाहर निकालने की हिम्मत नहीं हो रही थी। अब मेरा लंड पानी छोड़ने लगा था। अब में वैसे ही दीदी के चिपककर लेटा था और मुझे कब नींद लग गई पता ही नहीं चला। फिर जब में सुबह उठा तो मैंने देखा कि दीदी और दादी कब की उठ गई थी और उनका नहाना भी हो गया था। फिर मैंने घड़ी में देखा तो 8 बज गये थे। फिर में भी नहा लिया और जैसे मैंने कल रात दीदी के साथ कुछ किया ही नहीं, ऐसे नॉर्मल रोज की तरह दीदी से बर्ताव करने लगा। अब दीदी भी बिल्कुल नॉर्मल थी तो मेरी जान में जान आ गई, क्योंकि मुझे लगा था कि शायद दीदी ने जागने के बाद मुझे उनसे चिपके हुए लेटे देख लिया होगा, लेकिन शायद में नींद में फिर से अपनी जगह पर सीधा सो गया था। फिर ये दिन चला गया और फिर रात को हम रोज की तरह ऊपर जाकर सो गये।

अब में बस इंतजार कर रहा था कि जल्दी से माँ और दीदी सो ज़ाये और में फिर से मज़ा ले सकूँ, लेकिन आज दीदी माँ की जगह पर सो गई और दादी मेरे पास सो गई। फिर दादी ने पूछा तो वो बोली कि वहाँ पर हवा नहीं आती है इसलिए में यहाँ सो रही हूँ। में निराश हो गया, लेकिन जब सब सो गये तो में उठकर दीदी के पास सो गया और फिर से उसके स्तनों को दबाने लगा और कल की तरह में एक पैर उसकी कमर पर डालकर उसकी गांड को लंड से छूने का मज़ा ले रहा था। अब मुझे बड़ा अच्छा महसूस हो रहा था, में फिर उस रात ज्यादा कुछ कर नहीं पाया और अपनी जगह पर आकर सो गया और किसी को कुछ पता भी नहीं चला ।।
 
ताऊ की लड़की को बायोलॉजी पढ़ाया-1

ये बात तब की है, जब मैं अपने एम बी बी एस के दूसरे साल में था. मैं अपनी फैमिली के साथ रहता था मेरी फैमिली में मेरे पापा-मम्मी और मेरे ताऊ जी रहते थे. मेरे ताऊ की लड़की, जिसका नाम मनीषा है. मनीषा भी हमउम्र होने के कारण मुझको मेरे नाम से ही बुलाती थी.

हमारे घर 3 मंजिल का है. ग्राउंड फ्लोर पर ताऊ जी रहते हैं, दूसरे फ्लोर पर मेरे माँ डैड और लास्ट फ्लोर पर दो रूम थे, जिसमें एक में मैं और दूसरे में मनीषा रहती थी.

वो 12 वीं क्लास में थी. उसने भी विज्ञान विषय ले रखा था और वो भी मेरी तरह डॉक्टर बनना चाहती थी.

चूंकि मैं पढ़ाई में बहुत अच्छा था और मैंने 12 वीं क्लास में भी 87% स्कोर किया था, तो मेरे ताऊ जी ने कहा था कि मनीषा पर ध्यान देते रहना. मैं उस टाइम एम बी बी एस की पढ़ाई भी कर रहा था और घर पर ही 11 वीं और 12 वीं क्लास के स्टूडेंट्स को टयूशन भी देता था.

यह बात जनवरी 2012 की है. मैं और मनीषा दोनों देर रात तक संग ही पढ़ते थे और पढ़ाई खत्म होने के बाद अपने अपने रूम में चले जाते थे.

मैं कॉलेज से आकर करीब शाम 5 बजे से टयूशन पढ़ाता था और मनीषा भी उसी टाइम मेरे से ही टयूशन पढ़ती थी. उसके साथ उसकी कुछ सहेलियां भी पढ़ती थीं. चूंकि वो सारे मेरे ही हमउम्र थे, तो हंसी मजाक में वक़्त यूं ही कट जाता था. धीरे धीरे हम लोगों में फ्रेंड्स जैसा माहौल बन गया. कभी कभी वो लोग मुझसे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछते थे.

मैं भी उनको बहुत एन्जॉय करता था.

पढ़ाई में मैं उन सभी को सिर्फ बायोलॉजी और फिजिक्स ही पढ़ाया करता था. एक दिन जब उनका बायोलॉजी का टर्न आया तो मैं रोज की तरह उनको पढ़ाने के लिए अपने रूम में आया, तो सारी लड़कियां धीरे धीरे हंस रही थीं. मैं समझ नहीं पाया कि क्यों हंस रही हैं.

मुझे देख कर मनीषा भी हंस रही थी. मैंने उससे पूछा कि मनीषा क्या हुआ.. ये लोग इतना क्यों हंस रहे हैं?

तो उसने भी हंस कर कहा- आज आपके बायोलॉजी का टर्न है ना!

मैंने कहा- तो इसमें हंसने की क्या बात है.. बायोलॉजी पढ़ने का सब्जेक्ट नहीं है क्या?

फिर मैंने और थोड़ा कड़क होते हुए कहा- चलो चलो.. सब अपनी अपनी बुक निकालो और बताओ कि आज कौन सा चैप्टर पढ़ना है?

मनीषा मेरे पास तीसरा चैप्टर ले कर आ गई और बोली- पंकज, आज आपको ये पढ़ाना है.

वो चैप्टर देखकर में भी थोड़ा झिझक गया. चैप्टर था ‘ह्यूमन रिप्रोडक्शन’ का. (मानव प्रजनन)

थोड़ी देर तो मैं कुछ नहीं बोला, लेकिन मैं उस टाइम थोड़ा असहज हो रहा था, मैं बोला- आज नहीं पढ़ा सकता.. ये किसी और दिन पढ़ाऊंगा.

और उस दिन मैंने उनको दूसरा चैप्टर ‘इवोल्यूशन’ का पढ़ाया.

अब तक उनके सारे चैप्टर खत्म हो चुके थे, तो उन्होंने मुझसे वही छूटा हुआ तीसरा प्रजनन वाला चैप्टर पढ़ने की जिद की. अब मैं उन सबको रोज रोज तो टाल नहीं सकता था. तो मैंने उनको पढ़ाना चालू किया.

दोस्तो, सच बताऊं तो सबसे ज्यादा एन्जॉय हम लोगों ने उसी चैप्टर को पढ़ने में किया. शुरू में तो वो सब भी कुछ पूछने से कतरा रही थीं और मैं भी कुछ बताने से कतरा रहा था. मैंने नोटिस किया कि वो लड़कियां मेरे खड़े लंड को घूर रही थीं. पढ़ाई के बाद मैंने उस दिन दो बार मुठ मारी.

उस समय जनवरी 2013 का महीना चल रहा था, उसी टाइम मतलब फरवरी 2013 में हमारे छोटे चाचा की शादी भी पक्की हो गई. शादी गाँव से होकर थी. कुछ दिन बाद मेरे घर वाले शादी की तैयारी में लग गए. हमारा होम टाउन कानपुर पड़ता है, तो माँ पापा और ताऊ जी सब जाने की तैयारी में लग गए.

मेरा और मनीषा का भी जाने का मन था लेकिन मनीषा के बोर्ड के एग्जाम की वजह से मुझे भी नहीं जाने दिया गया. थोड़ा दुःख तो हुआ लेकिन मुझे स्कोर अच्छा करना था, तो मैंने अपना सारा ध्यान पढ़ाई पे ही लगा दिया.

वो भी दिन आ गया, जिस दिन मेरे पेरेंट्स और ताऊ जी सब गांव चले गए. अब पूरे घर में सिर्फ मैं और मनीषा ही रह गए थे.

उस दिन के बाद सिर्फ हमने टयूशन में सिर्फ ह्यूमन प्रोडक्शन का ही चैप्टर्स पढ़ाई की थी. उस दिन रात में मैं और मनीषा दोनों जब पढ़ाई कर रहे थे, तब मैंने नोटिस किया कि मनीषा वो चैप्टर पूरे ध्यान से पढ़ रही है. मैंने उसको वो चैप्टर पढ़ते देखा, तो मेरा लंड मानो आसमान छूने लगा. उस वक्त मैंने ट्राउजर पहना था, फिर भी मेरा लंड पजामा फाड़ के बाहर आने को तैयार था.

मैंने मनीषा के बारे में ऐसा पहले कभी नहीं सोचा नहीं था, लेकिन ना जाने क्यों उस दिन के बाद मैं हर समय मनीषा के बारे में सोचने लगा.

उस रात पढ़ने के बाद मैं अपने रूम में आ गया और मानो मेरे दिल दिमाग पर सिर्फ मनीषा ही मनीषा दिखाई दे रही थी. मैंने अपना कमरा बंद किया और पूरा नंगा हो गया. उस रात सर्दी बहुत थी, लेकिन फिर भी मानो मुझे गर्मी लग रही थी.

पूरी रात रजाई के अन्दर नंगा लेट कर टीवी पे ब्लू फिल्म देखता रहा. सुबह मेरी आंखें तब खुलीं, जब मनीषा ने गेट खटखटाया.. मैं जल्दी से उठा. थैंक्स गॉड कि मैंने गेट बंद कर रखा था. मैंने जल्दी से कपड़े पहने और बिस्तर सही किया. तकिये की तो बुरी हालत हो चुकी थी. मैंने जल्दी से तकिये का कवर निकाल दिया और फिर कपड़े पहन कर रूम खोला.

रूम खुलते ही चारों तरफ जेस्मिन की खुशबू ही खुशबू थी.

मनीषा ने अपने रूम के अन्दर से ही आवाज लगाई- पंकज मैंने नहा लिया है.. तू भी तैयार हो जा, कॉलेज नहीं जाना क्या?

“हां मनीषा, मैं भी तैयार होने जा रहा हूँ.” यह कहते हुए मैं भी बाथरूम में चला गया.

मैं बाथरूम के अन्दर ब्रश कर ही रहा था कि अचानक मेरी नज़र मनीषा की पेंटी पर पड़ी.

उसकी पिंक कलर की ब्रा और पेंटी देखी तो मुझे मस्त चढ़ गई. मैंने बिना सोचे समझे उन दोनों को हैंगर से उतार लिया. मनीषा की पेंटी अभी मेरे हाथों में ही थी और मेरा लंड मानो फिर से सलामी देने लगा.

उसकी पेंटी में से भी गुलाब और जैस्मिन जैसी खुशबू आ रही थी. मैं पागलों की तरह उसकी पेंटी को सूंघे और चाटे जा रहा था. उसकी पेंटी की वो जैस्मिन और गुलाब की सुगंध के साथ हल्की नमकीन वाली मादक खुशबू मानो मुझ पर ऐसा जुल्म ढहा रही थी कि मेरे लंड की सारी नसें फट कर बाहर आ जाएंगी.

जब मैं उसके पेंटी का चुत वाला हिस्सा चाट रहा था तो मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे मैं उसकी चुत को चाट रहा हूँ.

दोस्तो, मैं बता नहीं सकता कि उस टाइम मुझे कितना मजा आ रहा था. फिर मैंने उसकी पेंटी से ही मुठ मारी और सारा माल उसकी पेंटी में ही छोड़ दिया. इसके बाद उसकी पेंटी वहीं हैंगर पर टांग दी.

उसके बाद मैं नहा धोकर बाथरूम के बाहर आ गया.

मनीषा ने कहा- नाश्ता तैयार है, खा लो.

मैं टीवी देखते देखते ब्रेकफास्ट करने लगा. थोड़ी देर में मनीषा रूम में आई और पूछने लगी- कुछ और चाहिए?

मैं टीवी देखने में मशगूल था, मैंने ना में सर हिला दिया. उसने फिर पूछा, मैंने फिर से बिना उसे देखे ना में सर हिला दिया.

लेकिन फिर उसने तीसरी बार फिर पूछा इस बार मुझे थोड़ा ग़ुस्सा आया और मैंने ये कहते हुए पीछे मुड़ा. उसको देखते ही मानो मेरी ऊपर की सांस ऊपर.. और नीचे की सांस नीचे रह गई.

उसने अपने हाथों में वही गुलाबी पेंटी और ब्रा पकड़ रखी थी. मैं उसको देख के कुछ बोल नहीं सका. फिर वो मुस्कुरा कर जाते हुए बोली- कुछ चाहिए हो तो मुझे बता देना.

मुझे अचानक ही याद आया कि मैंने जो अपना माल उसकी पेंटी में निकाला था, वो मैंने धोया नहीं था. अब मुझे अंदाज़ा हो गया था कि मनीषा ने वो मेरा माल देख लिया होगा. पर बावजूद इसके उसने मुझसे कुछ नहीं कहा. मनीषा की ये बात मैं समझ नहीं पाया.

मेरा उस दिन कॉलेज में मन नहीं लगा. मैं मनीषा के बारे में ही पूरे दिन सोचता रहा. उस दिन में कॉलेज से घर भी जल्दी आ गया, फिर तैयार होकर मैंने सबको टयूशन पढ़ाई. मैं और मनीषा उस दिन एक दूसरे से नज़रें नहीं मिला पा रहे थे. पर चोरी चोरी कनखी निगाहों से एक दूसरे को कभी कभी देख लेते थे.

मेरे उस दिन पढ़ाने का भी मन नहीं कर रहा था, पर मैंने हालात को ठीक से हैंडल किया. मैंने मनीषा से उसके होम वर्क और कुछ इस तरह की बातें की ताकि वो मुझसे बात कर सके. उसने भी मुझसे सही तरह से बात करना शुरू किया.

कुछ देर बाद हम दोनों थोड़ा हंसने बोलने लगे. ऐसा लग रहा था जैसे गाड़ी फिर से पटरी पर आ रही हो.

शाम को मैंने सिचुयेशन को और ठीक करने के लिए कुछ नया प्लान किया. मैंने आज रात का डिनर बाहर से ऑर्डर कर लिया और मनीषा से बोला- आज डिनर मत बनाना.

तो उसने भी उत्सुकतापूर्वक पूछा- क्यों नहीं बनाना है?

तो मैंने कहा- आज मैंने डिनर बाहर से ऑर्डर कर दिया है, चल जब तक खाना नहीं आता, कुछ पढ़ लेते हैं.

शाम के करीब 7:30 हो रहे होंगे, चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था.

हम दोनों वहीं बेड पर बैठे पढ़ रहे थे. मैंने जानबूझकर उस दिन हाफ पैन्ट पहना हुआ था. मैं आराम से मनीषा के बदन को घूर रहा था. आज मानो मैंने पहली बार उसके बदन को सही तरीके से देखा था.

मनीषा का वो गेहुंआ रंग और हाइट 5 फुट 3 इंच.. बाल घने और लंबे.. और पूरा बदन एकदम भरा हुआ था. उसके लिप्स पे लगी हल्की लिपस्टिक मानो मुझसे कह रही थी कि आ जाओ और होंठों के पूरे रस पी लो.

मैं अपनी बहन की नंगी पीठ और ढकी जाँघों को देखे जा रहा था. उसने सफेद रंग का सूट पहन रखा था, इसमें वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी, उसे देख कर ऐसा लग रहा था, जैसे स्वर्ग से कोई अप्सरा उतर कर आ गई हो.

मेरी नज़र कभी उसके मम्मों पर तो कभी उसकी पेंटी पर जाती. उसके सफ़ेद झीने से सूट में से झलकती ब्लैक पेंटी और ब्रा की हल्की झलक मैं साफ़ देख सकता था. उसके कूल्हे के बगल से जाती वो पेंटी की रबर और उसकी पीठ पर बँधी उसकी ब्रा की पट्टी और उसका हुक मैं साफ़ देख सकता था.

वो मेरी नज़रों को भांप चुकी थी, तभी नज़र से नज़र नहीं मिला रही थी. उसके मम्मों को देख कर मानो मेरे पूरा मुँह पानी से भर गया. मेरा लंड तो हाफ पेंट के अन्दर से बाहर आने को बेताब था. मैं पढ़ते हुए हल्के हल्के अपने लंड को कभी कभी सहला लेता.

मैंने नोटिस किया कि मनीषा भी मेरे लंड को कनखी निगाहों से देख रही है. मैंने उसको भी अपने लंड की हल्की झलक दिखाने में पूरा सहयोग किया. मैंने बैठे-बैठे अपनी एक टाँग को उठा सा लिया और एक घुटने पर बैठ गया. अब मेरा लंड हल्का बाहर आ रहा था. मैंने मनीषा को भी कनखी नगाहों से देखा, वो मेरे लंड को पूरा देखने की कोशिश कर रही थी. उस दिन मैंने जानबूझ कर अंडरवियर भी नहीं पहना था. तनिक खुल जाने से हवा मेरी हाफ पेंट के अन्दर जाने लगी थी और मैं अपने लंड पर हल्की ठंडक महसूस करने लगा था. मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था. लेकिन मैंने जानबूझकर पूरा लंड बाहर नहीं निकाला.

मैंने नोटिस किया कि मनीषा मेरा पूरा लंड देखने के लिए जैसे पागल से हो रही थी.

इससे पहले कि मैं कुछ करता, डोर बेल की आवाज़ ने हम दोनों की मशगूलता में जैसे पूरी तरह खलल डाल दी.

मनीषा ने कहा- पंकज, तू हाथ मुँह धोकर तैयार हो जा. मैं डिनर लगा देती हूँ.

इस टाइम करीब रात के 9:00 बज चुके थे. मैं वॉशरूम में हाथ मुँह धोने के लिए चला गया. जब मैं फ्रेश होकर वापस डिनर टेबल पर आया.. तो देखा कि मनीषा डिनर लेकर लगा रही थी. इस वक्त वो एक नई नाइटी में थी. उसकी नाइटी देख कर मैं दंग रह गया. क्या लग रही थी दोस्तो.. मानो सच में कोई अप्सरा आ गई हो.. जन्नत की हूर धरती पर आ गई हो.

हम दोनों डिनर टेबल पर बैठे, मैं उसको पागलों की तरह घूर रहा था. अचानक उसने मुझे टोका और पूछा- पंकज, खाना कैसा है.

खाना तो वास्तव में टेस्टी था, खाने में जीरा राइस, शाही पनीर और नान के साथ रायता और राजमा भी मँगवाया था.

हम दोनों संग में डिनर कर रहे थे.

मैं हल्के से फुसफुसाया- मनीषा तुम आज बहुत खूबसूरत लग रही हो.

मनीषा ने पूछा- क्या बोला, कुछ कहा क्या तुमने?

‘नन..नहीं..’ मैंने हड़बड़ाते हुए कहा.

वो भी हल्के से मुस्कुराने लगी. फिर मैंने अपना डर निकालते हुए कहा- मनीषा यू आर लुकिंग सो ब्यूटिफुल.

उसने कुछ नहीं कहा और हल्के से मुस्कुराते हुए थैंक्स बोला.

रात को हम दोनों डिनर करके अपने अपने रूम में चले गये.

मैंने अपना रूम बंद किया और फिर से ब्लू फिल्म चालू कर दी. मैं पूरा न्यूड होकर मनीषा के ख्यालों में खोकर रज़ाई में सोते सोते मुठ मार रहा था.

अब करीब रात के 10:30 हो रहे होंगे, मैंने लाइट बंद की और सो गया. थोड़ी देर में मैं वॉशरूम जाने के लिए उठा. इस वक्त घड़ी में रात के करीब 1:20 हो रहे थे. मैंने अपना रूम खोला और वॉशरूम चला गया. वॉशरूम से बाहर आने के बाद मेरी नज़र मनीषा के रूम पर गई, उसके रूम के अन्दर की लाइट अभी भी जल रही थी. मेरे दिल की धड़कन अचानक बढ़ गई और में दबे पांव मनीषा के रूम की तरफ जाने लगा. मैं उसके की-होल से झांक कर अन्दर की तरफ देखने लगा.

अन्दर का नज़ारा देख कर मानो मेरी पूरी नींद गायब हो गई. मैं पूरे तरीके से तो नहीं देख पा रहा था, लेकिन मनीषा अन्दर पूरी नंगी बिस्तर पर पड़ी थी. मैं उसकी टांगें थोड़ी बहुत देख सकता था. उसकी पूरी नंगी टांगें और हिलते कूल्हे देख कर ऐसा लग रहा था वो अपनी चुत में कुछ डाल रही थी.

मैं बदहवाश सा उस डोर के की-होल से जितना हो सकता था, देखने की कोशिश कर रहा था. थोड़ी देर देखने के बाद उसका हिलना बंद हो गया, उसने अपने बेड के पास ही रखे डस्ट बिन में कुछ डाला और फिर लाइट बंद कर दी. मैं भी अपने रूम में वापस आकर सो गया.

अगले दिन सुबह मैं जल्दी ही उठ गया लेकिन कमरे से बाहर नहीं आया. मेरे अन्दर इस बात को जानने की उत्सुकता थी कि मनीषा ने डस्ट बिन में क्या डाला. थोड़ी देर बाद मनीषा बाथरूम में चली गई. मैंने हल्के से अपने रूम का डोर खोला और दबे पांव मनीषा के रूम में चला गया. मैंने डस्ट बिन उठा कर देखा उसमें एक 6-7 इंच का लंबा बैंगन पड़ा था. मैंने उस बैंगन को उठाया और उसको सूंघने लगा. दोस्तो उस बैंगन से मादक नमकीन सी खुशबू आ रही थी उस डस्ट बिन में विश्पर के भी पैकेट पड़े थे. मैंने उनको भी उठा कर देखा हल्के से खूने के दाग से भरे वो विश्पर उसी में पड़े थे.

मैं फटाफट उसके रूम से निकल आया. मनीषा अभी भी बाथरूम में थी. गिरते पानी की आवाज़ से पता चल रहा था कि शायद वो नहा रही होगी.

मैं बाथरूम के दरवाजे के छोटे होल से उसको देखने लगा. अन्दर हल्का सा अंधेरा था, उसने लाइट नहीं ऑन की थी, लेकिन उस डोर से उसकी वही पुरानी जेस्मीन और गुलाब की मिक्स खुशबू आ रही थी.

थोड़ी देर में उसने उसने अपना शावर बंद किया, पानी गिरना बंद हुआ तो मैं झट से अपने कमरे में आ गया. मैंने अपना रूम हल्के से फिर से बंद कर लिया.

वही कल की तरह उसने दुबारा आवाज़ लगाई- पंकज उठ जा, सुबह हो गई.

मैंने भी आवाज़ लगा कर कहा- हां मनीषा बस अभी उठा.

फिर मैंने अपना रूम खोला और बाथरूम में गया. बाथरूम में घुसते ही मेरी नजर हैंगर पर गई, आज भी वहां काले पेंटी लटकी हुई थी. मैंने झट से उसको उठा लिया और पागलों की तरह उसको सूंघने लगा.

दोस्तो, मैं बता नहीं सकता कि कितना मजा आ रहा था. मैं बाथरूम में पूरा नंगा था और शावर चला रखा था, लेकिन मैं नहा नहीं रहा था. बस मिरर के सामने खड़े होकर उसकी पेंटी और ब्रा को पागलों की तरह सूँघे जा रहा था.

अचानक मैंने बाथरूम के दरवाजे के नीचे एक परछाई को नोटिस किया कि मनीषा मुझे डोर के छेद से देख रही थी.

मैंने अपने आप को जल्दी ही संभाला लेकिन मैंने ऐसा बिहेव किया कि उसे शक ना हो कि मैंने उसको देख लिया है. मैं जानबूझ कर डोर के पास आ गया और मैंने बाथरूम की लाइट भी ऑन कर दी ताकि मनीषा मेरे लंड के दर्शन जी भर के कर सके. मेरा लम्बा लंड फड़फड़ाता हुआ डोर के छेद को ही देख रहा था. मैं अपने लंड पर शैम्पू लगा कर धीरे धीरे मुठ मार रहा था और उसकी पेंटी को चाट रहा था. मनीषा इस सब को देख रही थी.

फिर मैंने अपना लंड धोया और सारा शैम्पू साफ़ किया. अब मानो मेरे लंड की सारी नसें फटने सी हो गई थीं. तभी लंड ने उल्टी कर दी और मैंने अपना लंड उसकी ही पेंटी से साफ़ किया. फिर लंड पर थोड़ा तेल लगाया और एक बाक़ी की बची फुहार से मैंने अपना सारा माल उसकी पैंटी में डाल दिया.

ये सब मनीषा डोर के छेद से देख रही थी. अब मैं नहाने लगा, शावर चालू किया और नहाना चालू कर दिया.

मैंने नीचे देखा तो समझ गया कि मनीषा अब जा चुकी थी. थोड़ी देर में मैं नहा धोकर बाहर आया.

फिर मनीषा ने कहा- नाश्ता लगा लिया है.. खा लेना.

मैंने नोटिस किया कि मनीषा पहले की तरह मुझसे बात करने में शर्मा नहीं रही थी, वो मुझसे पहले की तरह खुल कर बातें कर रही थी.

फिर मैं नाश्ता की प्लेट लेकर अपने रूम में चला गया और ब्रेकफास्ट करने लगा. तभी मैंने देखा कि मनीषा बाथरूम में जा रही है.. और मुझे उसके बाथरूम के दरवाजे बंद करने की आवाज़ सुनाई दी.

मैंने तुरत नाश्ता करना छोड़ा और बाथरूम की तरफ दबे पांव आ गया. मैंने छेद से देखा कि मनीषा उसी ब्लैक पेंटी पे लगा मेरा माल चाट रही थी. उसके कंठ से हल्की मादक सिसकारियों की आवाज़ बाहर तक आसानी से सुनाई दे रही थी. तभी मनीषा ने भी बाथरूम की लाइट ऑन कर दी. अब मैं मनीषा को पूरी नंगी देख सकता था. मुझे अहसास हुआ कि मनीषा ने भी मुझे देख लिया है था, पर मैं फिर भी दरवाजे से हटा नहीं.

मनीषा भी मेरी तरह की दरवाजे के पास आ गई और उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए. उसकी चुत पर हल्के हल्के बाल थे.

दोस्तो क्या बताऊं.. कितना मज़ा आ रहा था. वो डोर के छेद के पास ही अपनी टांग उठा कर अपनी उंगली अपने चुत में डाल रही थी और कामुक सिसकारियां निकाल रही थी. साथ ही अपनी ही पेंटी को चाटे जा रही थी. मुझे याद था कि मैंने अपना सारा माल उसी पेंटी में छोड़ा था. थोड़ी देर बाद मनीषा शांत हो गई.

फिर जैसे ही उसने लाइट को ऑफ किया, मैं भी अपने रूम में आ गया.

उसने फिर मुझसे पूछा कि और कुछ चाहिए क्या?

मैंने उसके तरफ अपनी गर्दन घुमाई वो मुझे देख कर हल्का मुस्कुरा कर पूछ रही थी- कुछ चाहिए क्या?

इस वक्त उसके हाथों में वही ब्लैक पेंटी थी. मैंने भी मुस्कुराते हुए बोला- और कुछ नहीं चाहिए.

 
ताऊ की लड़की को बायोलॉजी पढ़ाया-2



उस दिन भी कॉलेज में मेरा मन ही नहीं लग रहा था, मेरा टाइम वहां बिल्कुल भी नहीं कट पा रहा था.

मैं शाम 4 बजे तक वापस घर पर आया. फिर थोड़ा रेस्ट करने के बाद टयूशन पढ़ाना चालू कर दिया. एक सप्ताह हो गया था, घर वालों को गांव गए हुए और पूछो मत हम दोनों ने ये वीक कितना मजा किया.

टयूशन के बाद मैं और मनीषा अपने अपने रूम में वापस आ गये. फिर वो डिनर बनाने में बिज़ी हो गई और मैं टीवी देख रहा था.

फिर रात को डिनर खा कर हम दोनों पढ़ने बैठे, मैंने उस दिन भी हाफ ट्राउजर ही पहन रखा था.

मैंने नोटिस किया कि मनीषा मेरे ट्राउजर के अन्दर झांकने की कोशिश कर रही है. मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा तो हो रहा था लेकिन मैंने जानबूझ कर उसको अपने नागराज के दर्शन नहीं करवाए.

मैंने महसूस किया कि मनीषा पागलों की तरह मेरे ट्राउजर को बार बार घूर रही है. मेरा खड़ा लंड भी बाहर आने को बेताब तो हो रहा था, लेकिन मैंने उस दिन जानबूझ कर अंडरवियर पहना था दरअसल मैं उस दिन मनीषा की तड़प देखना चाहता था और शनिवार होने की वजह से हम दोनों में से किसी का भी मन पढ़ाई करने का नहीं किया.

अचानक मनीषा ने मुझसे पूछा- पंकज तेरी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?

मैंने मना कर दिया, फिर पूछा- आज ये क्यों पूछा, कोई ख़ास वजह?

वो बोली- नहीं.. बस यूं ही.

फिर मैंने पूछा कि तेरा कोई ब्वॉयफ्रेंड है क्या?

उसने भी ना में अपना सिर हिला दिया.

फिर मैंने उसके साथ इधर उधर की बातें करना शुरू किया और उसने भी मेरे साथ सवाल जवाब किया. उस रात मानो हम एक दूसरे के साथ और भी ज़्यादा खुल गये. शनिवार की वजह से हम दोनों जल्दी ही अपने अपने रूम में सोने चले गये.

रूम क्लोज़ करते ही मैंने अपने ऊपर से सारे कपड़े इतनी जल्दी उतार दिए, जैसे कितनी देर से वो मुझ पर एक बोझ लग रहे थे. फिर मैंने ब्लू फिल्म चालू की और उसकी साउंड थोड़ी स्लो कर दी. मुझे महसूस हुआ कि मनीषा शायद की-होल से देख रही है, तो मैंने अपने रूम की लाइट भी ऑन कर दी. अब शायद मनीषा मुझे सही से देख सकती थी.

मैंने अपने ऊपर से रज़ाई हटाई और दोनों तकियों के साथ सेक्स शुरू कर दिया. मैंने ब्लू फिल्म की आवाज़ भी तेज कर दी और ‘आह.. मनीषा.. मनीषा..’ बोल करके तकियों की माँ चोद दी.

मैंने अपना पूरा माल तकिये पे ही झाड़ दिया, फिर लाइट बंद की.

मनीषा अब तक जा चुकी थी. मेरी आंखों से नींद तो मानो कोसों दूर चली गई थी. मैं सोने की कोशिश भी कर रहा था तो सो नहीं पा रहा था.

मैंने अपने रूम का दरवाजा हल्के से खोला और फिर मनीषा के रूम की तरफ दबे पांव गया. जैसा मैंने सोचा था मनीषा ने भी अपने रूम की लाइट ऑन कर रखी थी और इस बार मनीषा बिल्कुल की-होल के सामने नंगी लेटी हुई थी. मैं समझ चुका था कि मनीषा जानबूझ कर ही की-होल के सामने नंगी बैठी है.

मैंने ध्यान से देखा कि उसकी चुत पैरों में दबी होने के कारण बहुत हल्की सी दिख रही थी, लेकिन उसके चूचों को मैं बिल्कुल साफ़ देख सकता था. उसके मोटे मोटे चुचे मानो कह रहे थे कि अभी जाकर चूस लूँ.

मनीषा भी की-होल की तरफ ही देख रही थी और मादक सिसकारियां ले ले कर अपनी चुत में बैंगन का मजा ले रही थी.

थोड़ी देर में वो शांत हो गई, मैं भी फिर से मुठ मार कर झड़ गया था. उसने नाइटी पहनी और अपने रूम की लाइट बंद कर दी. मैं भी अपने रूम में आ गया.

उस रात मानो मेरे दिल और दिमाग़ पर सिर्फ़ और सिर्फ़ मनीषा ही छाई हुई थी. अब तक मैं समझ चुका था कि आग दोनों तरफ बराबर ही लगी है, पर ये समझ नहीं आ रहा था कि गरम लोहे पर हथौड़ा कब और कैसे मारूं.

जैसे तैसे रात कटी. अगले दिन रविवार था, सारे दोस्तों ने क्रिकेट खेलने का प्लान बनाया था. मैं भी ब्रेकफास्ट करके क्रिकेट खेलने निकल गया. क्रिकेट खेलने के बाद करीब दोपहर के एक बजे वापस आया.

मैंने 2-3 बार बाहर से आवाज़ लगाई मनीषा दरवाजा खोलने नहीं आई. मैंने नोटिस किया कि दरवाजा अन्दर से सेंटर लॉक के थ्रू बंद है. मैंने डुपलीकेट चाभी से डोर खोला.

मैंने अन्दर आ कर ‘मनीषा मनीषा..’ आवाज़ लगाई, पर कोई नहीं आया. मैंने फिर तीसरी मंजिल पर आकर मनीषा के रूम में जाकर देखा, मनीषा निढाल होकर सो रही थी. उसने वही वाइट नाइटी पहनी हुई थी.

दोस्तो, कसम से सोती हुई वो किसी परी से कम नहीं लग रही थी. मैंने उसको पहले तो 2-3 मिनट जी भर के घूर के देखा. मैं उसको ऐसे देख रहा था, जैसे मानो उसको पहली बार देख रहा होऊं.

मैं उसके होंठों पर अपने होंठों को ले गया.

दोस्तो क्या बताऊं, उसकी सांसों से निकलती खुशबू मुझे पागल किये दे रही थी. मैंने धीरे धीरे उसके कानों के बगल में सूंघना शुरू किया. उसके बालों से ऐसी सुगंध आ रही थी जैसे मैं किसी गुलाब और जेस्मीन के बगीचे में आ गया होऊं.

अब मैंने उसके होंठों को हल्का किस किया. वाह मुझे ऐसा लगा, जैसे मैंने गुलाब की पंखुड़ी को चूम लिया हो. उसकी सांसों की खुशबू से जी कर रहा था.. बस उसके लबों से निकलती महक को बस सूंघता ही रहूँ.

मैंने हल्के से उसको किस किया. फिर मैंने उसकी गर्दन के चारों तरफ किस किया. मनीषा अभी भी निढाल होकर सो रही थी. अब मेरी नज़र उसके चूचों पर पड़ी. मैंने उसके चुचे जैसे ही छुए मानो मेरे जिस्म में 11000 किलोवाल्ट का करेंट दौड़ गया. उसके हल्के कठोर और नरम चुचे.. आह.. दोस्तो पूछो ही मत.. कितना मजा आ रहा था. मैं शब्दों में बता नहीं सकता.

अब मेरी नज़र उसकी टांगों पर गई. मैंने उसकी नाइटी को धीरे धीरे ऊपर करना शुरू किया. मनीषा की टांगों पर हल्के रोंए थे. उसकी गोरी गोरी टाँगों और उस नाइटी के अन्दर से निकलती मादक गरम हल्की हवाओं में जैसे फूलों की सुगन्ध मिला दी गई हो.

इस बीच मनीषा ने अपनी करवट बदली. मेरी तो मानो जान ही निकल गई. मुझे लगा कि कहीं वो जाग ना गई हो.

मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया. जब मनीषा हल्की शांत सी हो गई तो मैंने फिर से उसकी नाइटी को हल्का सा ऊपर उठाना चालू किया. नाइटी अब जाँघों के नीचे तक आ गई थी. उसकी जांघें इतनी गोरी थी, जैसे दूध की तरह सफेद और संगमरमर की तरह चिकनी हों.

मैं उसकी जांघों पे हाथ फिराने लगा और फिर न जाने क्या हुआ, मैं अपनी जीभ से उसके पैरों को उंगलियों से लेकर जांघों तक चाटने लगा. मुझे उसके जाग जाने का मानो डर ही नहीं रहा.

इस वक्त तो मुझे ऐसा स्वाद आ रहा था जैसे उसके बदन में कूट कूट कर चंदन भर दिया गया हो. तभी मुझे अहसास हुआ कि मनीषा जाग चुकी है. मैं पहले तो थोड़ा हिचकिचाया, पर जब उसने कोई विद्रोह नहीं किया तो मेरे अन्दर भी हौसला आ गया.

अब मैंने उसकी नाइटी को उठाते हुए उसकी जाँघों से ऊपर कर दी, उसने वही पिंक पेंटी पहनी थी. इस वक्त उसकी चुत और मेरे बीच सिर्फ़ वो पिंक पेंटी थी. उसकी हल्की हल्की झांटें भी बाहर आ रही थीं. मैंने हल्के से उसके पेंटी को किस किया.

मेरी बहन की पेंटी से निकलती वो मादक खुशबू मुझे दीवाना बना रही थी. मुझे लग रहा था कि अभी उसकी पेंटी फाड़ दूँ. उस टाइम मेरा लंड फड़फड़ाते हुए काले नाग की तरह बाहर आने को बेताब था.

मैं पागलों की तरह उसकी पेंटी को सूँघे जा रहा था. मैं यह भूल चुका था कि मनीषा को इसकी आहट भी हो सकती है. उसकी गुलाबी पेंटी और उसमें से निकलती मादक खुशबू ने मेरे लंड की नसों को इतना टाइट कर दिया था कि जैसे मेरा लंड फट पड़ेगा.

अब मैंने अपनी बहन की पेंटी हल्के से उतारना चालू किया. धीरे धीरे मैं उसकी पेंटी घुटने तक सरका कर ले आया. मेरी नज़र उसकी नंगी चुत पर टिकी थी.

क्या मस्त चुत थी.. हल्के रेशमी बालों से भरी चुत. उसके वो रोंएदार बाल ऐसे लग रहे थे, मानो उसने अभी तक कभी यहां शेविंग ही नहीं की हो. उसकी चुत पर हल्के-हल्के घुंघराले बाल ऐसे थे, जैसे उन पर कभी ब्लेड नहीं लगाया गया.

मैं उसकी चुत को आंखें बंद करके हल्के हल्के से सूंघने लगा. उसकी झांटें मेरी नाक में घुसकर मुझे छींकने पर मजबूर कर रही थीं. मैंने हल्के हल्के से उसकी चुत को चाटना शुरू किया. मुझे हल्का नमकीन सा स्वाद महसूस हुआ. हालांकि अब तक मैं समझ चुका था कि मनीषा भी अपनी चुत चटवाने का मजा लेने लगी है.

अब मैंने भी अपने सारे कपड़े निकाल दिए और उसके बगल में नंगा होकर लेट गया. मैंने अपना लंड मनीषा के हाथों से सहलाना शुरू किया. क्या बताऊं दोस्तो.. उसके हाथों का मेरे लंड पर स्पर्श पाते ही जैसे मेरा 6 इंच का लंड 7 इंच का हो गया. मेरे लंड से कुछ बूँदों की फुहार सी छूट पड़ी.

मुझे कुछ शक तो हुआ कि मनीषा जाग रही है. अब मैंने अब अपनी सारा डर दूर करते हुए अपनी जीभ धीरे धीरे उसकी चूत के अन्दर देनी शुरू की. थोड़ी देर में उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी. मेरे मुँह की सारी लार उसकी चूत में आ जा रही थी. अब मैंने उसकी चूत में उंगली देना शुरू किया. मैंने जैसे ही मनीषा की चूत में उंगली डाली, मनीषा हल्की सी हिली. मेरी तो मानो गांड ही फट गई हो.

थोड़ी देर के लिए मैं रुक गया. फिर थोड़ी देर बाद मनीषा शांत हो गई, तो मैंने उसकी चूत में फिर से उंगली करना शुरू किया. अब मेरी लार से उसकी चूत इतनी गीली हो चुकी थी कि मेरी उंगली उसकी चूत में आराम से अन्दर बाहर हो रही थी.

मेरा लंड मानो उसकी चूत के अन्दर जाने की ज़िद कर रहा था. उसकी चूत इस वक्त मेरे सामने पूरी खुली पड़ी थी. उसकी नाइटी उसके कमर से भी नीचे थी. मैंने होश गंवाते हुए पास की टेबल पर रखी क्रीम की डिब्बी उठाई और अपने लंड पर क्रीम लगाकर उसकी चूत के मुँह पर सुपारा फिराना चालू किया. उसकी चूत ऐसी थी मानो उसने कभी लंड का स्वाद नहीं चखा था.

मुझे मालूम हो चुका था कि मनीषा जाग रही है, फिर भी मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा और हल्का सा ज़ोर लगाया. मेरा लंड थोड़ा सा ही घुसा था कि मनीषा के मुँह से तेज सी चीख निकली. मैंने झट से अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया और पूरी ताक़त के साथ के और ज़ोर का झटका दे दिया.

इस बार मेरा पूरा लंड मनीषा की चूत के अन्दर था. मनीषा दर्द से चिल्ला रही थी, पर मैंने हाथों से उसके मुँह को दबा रखा था. मनीषा मेरी बांहों से निकलने के लिए अपना पूरा ज़ोर लगा रही थी, पर मेरी मजबूत बांहों ने उसे इस तरह पकड़ रखा था कि छूटना तो दूर, वो हिल भी नहीं पा रही थी.

मेरा अन्दर का शैतान मानो पूरी तरह जाग रहा था. मुझे उसके दर्द का थोड़ा भी ख्याल नहीं रहा. मैं मानो पागल कुत्ते की तरह बस अपनी कमर आगे-पीछे किए जा रहा था.

मनीषा की आंखों से आंसुओं की धार से मेरा पूरा हाथ गीला हो चुका था. लेकिन मैंने फिर भी उसका मुँह दबाए रखा. मुझे डर लग रहा था कि कहीं उसकी चीख बाहर ना चली जाए. पूरा बिस्तर खून से लाल हो चुका था.

थोड़ी देर बाद मैंने मनीषा को समझते हुए अपनी पकड़ कमजोर की. दर्द से कराहते हुए उसने मुझसे मेरा लंड बाहर निकालने की गुहार लगाई. बिस्तर पर खून देख कर तो जैसे उसकी जान ही निकल गई, पर मैंने उसको समझाते हुए शांत किया.

मैं बोला- बस थोड़ी देर बर्दाश्त कर ले.

उसने बोला- पंकज मुझे ज़रा भी अहसास नहीं था कि तू यूं ही अचानक डाल देगा.. अरे कम से कम संभलने का मौका तो दिया होता.

फिर वो हल्की नाराज़गी सा मुँह बना के मुस्कुराने लगी, मैं समझ चुका था कि बात बन चुकी है.

मैंने अपनी कमर को फिर से आगे-पीछे करना शुरू किया. अब मनीषा ने भी मेरा पूरा साथ दिया. उसने भी कमर हिलाना शुरू किया. अब मैंने उसको अपनी बांहों में समेटा और उसको किस करना शुरू कर दिया. हमने एक दूसरे को किस करना शुरू कर दिया. सेक्स का मजा भाई बहन उठाने लगे.

कुछ ही देर तक बहन की चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था. मैंने जल्दी से अपना लंड बाहर निकाला. लंड बाहर निकालते ही मैं बिस्तर पर झड़ गया.

हम दोनों एक दूसरे को देख कर सिर्फ़ मुस्कुरा रहे थे.

मैंने उससे अपनी हरकतों के लिए उससे माफी माँगी. तो उसने भी हंसते हुए कहा- ईडियट बताना तो चाहिए था. जैसे ही तूने डाला, मैं बिल्कुल भी तैयार नहीं थी.. तू बिल्कुल पागल है. कम से कम कुछ इशारा तो करना चाहिए.. ऐसा कोई करता है क्या? देख तो कितना खून निकला है.. सारा बिस्तर खून से लाल हो गया है.. और कितना दर्द हो रहा है मुझे.. पागल कहीं का.

मैंने भी हंसते हुए उससे फिर से माफी माँगी, फिर उसको गले से लगाया और कहा कि वैसे तुझे भी मज़ा आया ना.

“धत तेरी की… मजा न आया होता तो तू टच भी कर पाता?” बोलते हुए शर्मा के उसने अपना मुँह दूसरी तरफ फेर लिया.

मैंने उसको फिर किस करना शुरू किया. इस बार वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी.

किस करते करते हम दोनों मेरे रूम में आ गये. मैं उसके गर्दन के चारों तरफ किस कर रहा था, पागलों की तरह उसके चुचे दबा रहा था.

करीब 10-15 मिनट तक हम एक दूसरे को किस करते रहे. मैं कभी उसके होंठ को, कभी उसकी गर्दन के चारों तरफ किस करता रहा. वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. वो मेरे भी होंठों को और छाती को पागलों की तरह चूमे जा रही थी. मैंने धीरे धीरे उसके चूचों को चूसना शुरू किया. उसके चुचे हल्के से टाइट हो चुके थे. मैं अब धीरे धीरे नीचे की तरफ सरका.

दोस्तो, अभी शाम के करीब 5 बज रहे थे. रूम खाली होने की वजह से सिर्फ मेरी और मनीषा की सिसकारियों से गूँज रहा था. वो आंहे भरते हुए मेरा नाम लेकर सिसकार रही थी.

अब मैंने उसकी कमर को किस करना शुरू किया. हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतारे. अब हम दोनों एक दूसरे के सामने बिल्कुल नंगे खड़े थे. मेरा लंड मानो आसमान छू रहा था. मनीषा कभी मुझे देखती, कभी मेरे खड़े लंड को देखती. हम दोनों फिर से एक दूसरे से चिपक गये.

मनीषा नीचे होते हुए थोड़ी देर मेरे लंड को घूरा, फिर बोली- पंकज, कितने दिन से इसे पूरा देखने की मेरी तमन्ना आज जाकर पूरी हुई है.

इससे पहले कि मैं कुछ बोलता, मनीषा ने मेरा पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया. मेरे मुँह से मानो एक आहह सी निकल पड़ी.

दोस्तो, ऐसा मज़ा.. आह.. पूछो मत. ये अहसास मैं बता नहीं सकता, कितना मज़ा आ रहा था.

मनीषा हल्के हल्के मेरे लंड को पूरा अन्दर तक लेने की कोशिश कर रही थी. मैं भी उसका पूरा साथ दे रहा था.

अब हम दोनों 69 की पोज़िशन में आ गये. मैं उसकी चुत को पागलों की तरह से चूस और चाट रहा था और वो भी मेरे लंड और पोतों को पूरे मज़े से अपने मुँह में लेकर चूस रही थी.

फिर मैंने उसको सीधा बिस्तर पर लेटाया और उसकी कमर के नीचे दो तकिया लगा दिए. अब उसकी खुली चुत मेरे सामने थी. मैंने उसका चेहरा देखा, मानो ऐसा लगा कि उसको इसी दिन का इंतज़ार था.

इस बार मैंने थोड़ा तेल उसके चुत की अन्दर तक लगाया और थोड़ा तेल अपने लंड पे भी लगाया. इसके बाद मैंने अपना लंड मनीषा की चुत पर रखा और उसके गले में बांहें डालकर उसके कानों में फुसफुसाया- अब तो तू तैयार हो ना!

मनीषा ने अपनी आंखें बंद करते हुए हल्के से कहा- पंकज फाड़ दे मेरी चुत को.. आज एक बार में ही पूरा डाल दे. मैं वो दर्द दुबारा महसूस करना चाहती हूँ पंकज प्लीज़ एक बार में ही पूरा डालना.

इतना सुनते ही मैंने मनीषा को पूरी तरह से अपनी बांहों में जकड़ लिया और अपनी कमर को थोड़ा ऊंचा किया. अपने सुपारे को मनीषा की चुत के मुँह पे ले गया और पूरा ज़ोर लगा के एक ही बार में पूरा लंड मनीषा की चुत में ऐसा घुसता चला गया, जैसे गरम सरिया किसी प्लास्टिक को चीरता हुआ पूरा अन्दर तक चला जाता है.

इस बार मनीषा चिल्लाई नहीं, लेकिन एक हल्की सी आहह भर कर उनसे मुझे भी पूरी ताक़त के साथ जकड़ लिया.

थोड़ी देर मैंने अपना लंड उसकी चुत में ऐसे ही घुसा रहने दिया. उसके बाद मैंने अपनी कमर को हिलाना शुरू किया. शायद अब मनीषा को भी मज़ा आ रहा था. वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी. उसने भी अपनी कमर को हिलाना शुरू किया. फिर थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला, जैसे ही मैंने अपना लंड बाहर निकाला मानो एक अजीब सी मादक खुश्बू सारे कमरे में फ़ैल गई.

अब मैंने उसको घुटनों के बल बिठा दिया. दोस्तो इसको ऑन बेड डॉगी स्टाइल कहते हैं. मैंने अपना लंड फिर से उसके चुत पे टिकाया और धीरे धीरे अन्दर डाल दिया. अब उसकी चुत हल्की सी फ़ैल चुकी थी, तो ज़्यादा टाइट महसूस नहीं हो रहा था. मेरा लंड अब आसानी से अन्दर बाहर जा रहा था.

थोड़ी देर तक उसको चोदने के बाद मैं झड़ने वाला था, तो मैंने मनीषा को बताया कि मैं झड़ने वाला हूँ.. क्या करूँ?

उसने अपना मुँह खोला और कहा- अपना पूरा माल मेरे मुँह में डाल दे.. तेरा ताज़ा ताज़ा माल मैं पीना चाहती हूँ.

ये सुनते ही मैंने पूरा का पूरा माल उसके मुँह में डाल दिया और उसने एक घूँट में ही मेरा पूरा माल पी लिया.

बहन के साथ सेक्स के बाद मैं निढाल हो गया था. हम दोनों थोड़ी देर बिस्तर पर यूं ही नंगे पड़े रहे.

दोस्तो, मैं उन दिनों को कभी भी भूल नहीं सकता. उस दिन के बाद हम रात भी एक ही कमरे में सोते और रात को भी कितनी 3-4 बार सेक्स करते. मैंने उसको अगले दिन बाथरूम में भी चोदा. मनीषा के 12 वीं में अच्छे मार्क्स तो नहीं आए थे, लेकिन आज वो एक सरकारी स्कूल में गेस्ट टीचर है. उसकी शादी हो गई है और उसके एक डेढ़ साल की लड़की भी है. वो आज भी जब घर पर आती है तो मुझसे पहले की तरह ही हंस के बात करती है. उसका हज़्बेंड भी उससे बहुत प्यार करता है. शादी के बाद भी मौका मिलता है और उसका मन करता है तो वो मुझे चुद जाती है.

दोस्तो, ये बहन की चुदाई की कहानी आप लोगों को कैसी लगी

 


ज़रूरतमंद बुआ की लड़की


यह घटना मेरी बुआ की लड़की के साथ हुई थी. वह मुझसे उम्र में बड़ी है, उसकी और मेरी उम्र में तीन या चार साल का अंतर है. उसका नाम सपना है. वह रिश्ते में तो मेरी बहन लगती है और यहीं मेरे घर के पास रहती है. वह दिखने में ऐसी है कि कोई भी उसका दीवाना हो जाए. गदराया हुआ शरीर, बड़े-बड़े मम्मे और मोटी गांड लेकर जब चलती है तो लोगों का लंड खड़ा होने में देर नहीं लगती. उसे देखकर अक्सर मैं मुट्ठ मारकर खुद को शांत कर लेता था, मगर उसे जमकर बजाने का सपना मन में लिए बैठा था.

जब मैं 22 साल का था तब ही उसकी शादी हो गई थी और एक बच्चा भी हो चुका था पर उसके शरीर में कोई बदलाव नहीं आया था. मैं तो हैरान था कि उल्टा वह और सेक्सी दिखने लगी थी और मेरा मन अभी तक उसकी चूत में ही अटका था. उसे जब भी देखता था तो उसके मम्मों को घूरने लगता था. फिर लंड खड़ा होने के बाद मुझे मुट्ठ मारनी ही पड़ती थी.

शादी के दो साल बाद ही उसका उसके पति से आये दिन झगड़ा होने लगा था और अक्सर वह अपने मायके में आकर रहती थी. मैं समझ गया था कि अब उसकी चूत को लंड की भूख लगी ही होगी.

यही सोचकर मैं एक दिन उसके घर गया.

जब मैं उसके घर पर पहुंचा तो वहाँ पर कोई नहीं था और वह घर पर बिल्कुल अकेली थी. घर पर अकेली देख मैंने उसे बातों-बातों में कह दिया- आजकल लडकियाँ शादी के बाद भी दूसरों के साथ सम्बन्धों में रहती हैं.

वह बोली- हाँ, बात तो ठीक है तुम्हारी. मेरी ननद का भी मेरे देवर के साथ सम्बंध है.

फिर मैंने सपना को पटाने के लिए और आगे बात बढ़ाई, मैंने कहा- तो यार इसमें गलत क्या है, सेक्स करना तो सबकी शारीरिक इच्छा होती है. अगर वह बाहर से पूरी नहीं हो रही हो तो घर में ही पूरी कर लेनी चाहिए.

वह बोली- नहीं यार … जब लोगों को पता चलता है तो कितनी बदनामी होती है.

मैं बस उसके मन को टटोलने में लगा हुआ था और मुझे पता चल गया था कि मन तो इसका भी कर रहा है लेकिन यह बदनामी के डर से कुछ नहीं कर पा रही है. मैंने कहा- अगर दोनों मर्जी से कर रहे हैं तो किसी को क्या पता चलेगा. अगर घर में बहन अपने भाई के साथ चुदाई करवा लेती है तो बाहर वालों को उनकी चुदाई के बारे में कैसे पता लग सकता है.

यह बात सुनकर वह थोड़ी घबरा सी गई.

वह बोली- तू ऐसी गंदी बातें क्यों कर रहा है?

मैंने कहा- इसमें गंदा क्या है, चुदाई को तो चुदाई ही कहा जाता है. और यदि और कुछ कहते हों तो तू ही बता?

वह मेरी बात सुनकर हँसने लगी. वह बोली- तुम्हारा भी चल रहा है क्या किसी के साथ?

मैं उसकी आंखों को देख रहा था और मैं समझ गया था कि अब माल तो हाथ आने ही वाला है. इधर मेरा लंड भी हमारी कामुक बातों के कारण पूरा तना हुआ था और मेरी पैंट में अलग से ही शेप बना रहा था. झटके मार-मार कर फटने ही वाला था.

मैंने कहा- नहीं यार, हमारी ऐसी किस्मत कहां और ऐसी कोई बहन भी तो नहीं जिसे जरूरत हो.

वह बोली- तुम पागल हो, तुम नहीं समझोगे.

कहकर वह अंदर कमरे में जाने लगी.

मैंने उसका हाथ पकड़ लिया, मैंने कहा- समझ तो मैं सब कुछ गया हूँ, मगर सामने वाली कुछ खुलकर बोल ही नहीं रही है. अगर वह खुल जाए तो मैं भी सब कुछ खुल कर बोल दूँ.

मेरा इतना कहना था कि उसने रोना शुरू कर दिया.

मैं सोचने लगा कि मैंने कुछ गलत बोल दिया है. यह सोचकर मैं उसके सामने माफी मांगने लगा. फिर वह मेरे गले लगकर रोने लगी.

मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था कि वह क्या चाहती है. मैंने उसको चुप करवाना शुरू किया. मैंने कहा- क्या तुम्हें याद है कि आज मेरा जन्मदिन है?

जब उसने जन्मदिन की बात सुनी तो वह खुद ही अपने आंसू पौंछने लगी.

वह बोली- अरे, मैं तो भूल ही गई थी.

मैंने कहा- अब जब तुम्हें याद दिला दिया है तो फिर गिफ्ट कौन देगा?

वह बोली- बता क्या चाहिए तुझे?

मैंने कहा- सपना तुम्हारी ननद के जैसी ही जरूरत मेरी भी है. मेरे लिए कोई ऐसी लड़की देखो जो मेरी जरूरत को पूरी कर सके.

वह बोली- एक लड़की है, लेकिन वह शादीशुदा है और बदनामी से डरती है.

मैंने कहा- शादीशुदा है तो बिल्कुल चलेगी और बदनामी की बात तो तुम करो ही मत. मैं तो उसके बारे में तुम्हें भी कुछ नहीं बताऊंगा, लेकिन पहले तुम मेरी उसके साथ कुछ बात तो करवा दो. मुझे भी तो पता चल जाए कि वो है कौन और देखने में कैसी है?

वह बोली- पक्का तुम किसी को नहीं बताओगे?

मैंने कहा- मैं चुतिया हूँ क्या जो किसी को बताऊंगा?

वह तपाक से बोली- तो फिर अपनी इस बहन की जरूरत पूरी कर दे.

उसकी यह बात सुनते ही मेरा लौड़ा पूरा तनकर एकदम से खड़ा हो गया. मेरा मन तो कर रहा था कि अभी नंगी करके इसकी चूत के दर्शन कर लूँ मगर मैं कुछ बोल नहीं पाया.

मैंने उसके हाथ को अपने हाथ में ले लिया और वह मेरे गले लगकर नीचे से मेरे लंड को सहलाने लगी. जब उसे पता चला कि मेरा लंड तनकर खड़ा हो चुका है तो वह नीचे मेरे सामने ही बैठ गई.

उसने ऊपर की तरफ देखा और कहा- गिफ्ट चाहिए तुझे?

मैंने हाँ में सिर हिलाया.

इतना कहते ही उसने मेरी पैंट खोलकर मेरी चड्डी पर ही जीभ से सहलाने लगी और झटके से चड्डी को नीचे कर मेरे लौड़े को मुंह में भर लिया और पूरे 5 मिनट तक भूखी शेरनी की तरह मेरे लौड़े को चूसती रही. ऐसा लग रहा था कि पूरा निगल जायेगी. मेरा लंड पूरे चरम पर था इसलिए मैंने उसे रोकने के लिए कहा. मगर वह तो मेरे लंड को ऐसे चूसने में लगी हुई थी जैसे कुछ सुनाई न दे रहा हो उसे.

मैंने उससे कहा कि मेरा निकलने वाला है, मगर वह तब भी नहीं रुकी और मेरे लंड ने वीर्य उसके मुंह में छोड़ दिया. उसका मुंह पूरा भर चुका था. वीर्य को पीने के बाद फिर भी लंड उसने अपने मुंह से बाहर नहीं निकाला और पूरा वीर्य पीकर मेरे लंड को चूसकर साफ़ करने लगी. फिर उसे ऐसे प्यार करने लगी जैसे किसी छोटे बच्चे को प्यार किया जाता है.

वह बोली- यह रहा तुम्हारा गिफ्ट!

मैंने कहा- अब रिटर्न गिफ्ट भी तो देना पड़ेगा!

और इतना कहकर मैंने उसे गोद में उठा लिया उसे उठाकर अंदर कमरे में पलंग पर ले गया. उसे पलंग पर लिटाकर उसकी साड़ी को खोलने लगा और पलभर में वह मेरे सामने नंगी थी. उसके बड़े-बड़े मम्मे देखकर मेरा लौड़ा वापस खड़ा हो गया और मैं उसके मम्मे चूसने लगा. वह पागलों के जैसे मुझे सहलाने लगी, कभी मेरा लौड़ा सहलाती, कभी मेरी गांड में उंगली फिराने लगती.

मम्मे चूसते-चूसते मैं उसकी चूत पर आ गया. उसकी चूत गर्म हो रही थी. उसकी गर्म चूत पर मैंने जैसे ही जीभ रखी तो वह तड़प उठी और उसके मुंह से सिसकारी निकल गई.

मैं पागलों की तरह उसकी चूत चाटने लगा. आज मेरा सपना हकीकत में बदल रहा था. यही सोचते-सोचते पूरी जीभ उसकी चूत में घुसा दी. वह पागलों की तरह आह … आह … करके सिसकारियां निकाल रही थी.

थोड़ी देर चूत चटाई करते हुए हम 69 की पोजीशन में आ गये और लंड उसके गले तक डालकर उसकी चूत चाटते हुए मैं उसका मुंह चोदने लगा. वह भी पूरे मजे ले रही थी.

मजे लेते हुए बोली- अब चाटते ही रहोगे या इस कुँए में पानी भी भरोगे?

मैं समझ गया और सीधा उसकी टांगों के बीच में बैठकर लौड़े को चूत पर फेरने लगा. वह लौड़े को अंदर डालने के लिए कहने लगी और मैंने एक ही झटके में लौड़ा उसकी चूत में डाल दिया.

जब मैंने लौड़ा उसकी चूत में डाला तो उसका मुंह खुला का खुला रह गया. कोई आवाज़ नहीं आई. मुझे यह देखकर बहुत खुशी हो रही थी. फिर वह आह … आह … करते हुए अपनी गांड को ऊपर उठाकर मेरे लंड से चुदने लगी और चुदाई के मजे लेने लगी. काफी देर तक मैं उसकी चूत में लंड को पेलता रहा. चूंकि मैंने पहली बार सपना की चूत मारी थी तो ज्यादा देर तक मैं भी रुक नहीं पाया.

मैंने कहा- मेरा निकलने वाला है. कहाँ निकालूँ, जल्दी बताओ.

उसने कहा- चूत के अंदर ही निकाल दो.

मैंने कहा- अगर तुझे बच्चा हो गया तो?

वह बोली- तुम उसकी चिंता मत करो, इस वक्त केवल चूत पर ध्यान दो.

फिर मैंने उसको कुतिया बना दिया. मुझे कुतिया बनाकर चूत के अंदर पानी छोड़ने में बहुत मजा आता है. वह एकदम से कुतिया बन गई और फिर उसकी गांड मेरे सामने हिलने लगी जिसके कारण मेरे लंड से पानी निकलने को तैयार हो गया. मैंने उसकी गांड को हाथों से पकड़ लिया और लौड़े को पूरा अंदर तक पेल दिया.

झटकों के साथ मैंने उसकी चूत में पानी भर दिया.

वह बोली- आह … मजा आ गया मेरे शेर!

उसके बाद वह मेरी बांहों में लेटकर सोने लगी. मैंने सोचा कि अभी घर में रुकना ठीक नहीं है. बुआ भी शायद आने ही वाली थी. मैंने एक बार फिर से उसको लंड चुसवाया. उसने दूसरी बार भी मेरा माल पी लिया. फिर मेरे लंड को साफ किया.

वह कहने लगी- किसी को बताना मत, नहीं तो मैं मर जाऊंगी.

मैंने कहा- मैं बेवकूफ हूं तो हाथ में आए हीरे को ऐसे जाने दूंगा.

यह सुनकर वह मुझे बांहों में लेकर मेरे होंठों को चूसने लगी.

उसके बाद मैं अपने घर आ गया. मेरा सपना उस दिन पूरा हो गया था. अब जब भी वह घर पर अकेली होती है तो मैं उसकी चूत चुदाई करके उसको संतुष्ट करने पहुंच जाता हूँ.

हमारा यह संबंध अभी भी चल रहा है. मेरी शादी भी हो चुकी है लेकिन बुआ की लड़की सपना की चूत मेरे लंड से ही शांत होती है. अब वह चाहती है कि मैं उसकी सहेली को भी चोदूँ. उसकी सहेली भी उसी की तरह ज़रूरतमंद है.

आप मुझे बताएँ कि मैं क्या करूँ? मैं शादीशुदा हूँ लेकिन अपनी बहन को खुश देखना चाहता हूँ. मुझे भी उसको चोदने में मजा आता है. लेकिन क्या यह सब ठीक है?
 


अच्छा तो लग रहा है लेकिन तुम मेरे भाई हो


मुझे मेरी कज़िन सिस्टर अविका शुरू से ही बहुत मस्त लगती थी और मेरे मन में कहीं न कहीं उसको चोदने की ललक थी. लेकिन वो मेरी ममेरी बहन थी, जिस वजह से मैं उसको चोदने का नजरिया बना ही नहीं पा रहा था. तब भी मैं उसके साथ हमेशा बातचीत करता रहा था. गर्मियों की छुट्टी में जब मैं मामा के घर रहने आ जाता था, तो हम दोनों बहुत मस्ती करते थे.

आगे बढ़ने से पहले आप भी अविका के रंग रूप और फिगर के बारे में जान लीजियेगा ताकि लंड हिलाने में आसानी हो. अविका की हाइट थोड़ी कम है, पर वो देखने में एक कांटा माल है. उसका फिगर 32-28-30 का है. जब भी मैं उसे देखता हूँ तो उसे चोदने का मन होने लगता है. मैंने उसके नाम की बहुत बार मुठ भी मारी है. उसको ध्यान में रख कर मैं 3 लड़कियों के साथ सेक्स भी कर चुका हूँ. जिनकी चुदाई करते वक्त मैं अविका को ही याद करके चुदाई का मजा लेता था.

मैं पिछले साल होली पर उसके घर गया था. हालांकि मैं होली नहीं खेलता लेकिन उस दिन की होली ने मेरी लाइफ बदल दी. हुआ यूं कि मैं कमरे में अपने बेड पर लेटा हुआ आँख बंद करके कुछ सोच रहा था. तभी अचानक से अविका कमरे में आई और उसने एकदम से मुझे रंग लगा दिया. उन दिनों हल्की ठंडक रहती ही है उसके ठंडे हाथ से मैं एकदम से बौखला सा गया और जब रंग लगा देखा तो मुझे बहुत गुस्सा आया.

मैं उस पर चिल्लाने लगा और उसे पकड़ने के लिए बेड से उठा ही था कि वो हंसते हुए दौड़ लगा कर भाग गयी. मैं उसे पकड़ने को उसके पीछे भागा. मैं मामी को आवाज लगाते हुए उसकी शिकायत करने लगा. लेकिन उस समय मेरी मामी मंदिर गयी थीं.

उधर अविका भागते हुए बाथरूम में घुस गयी और उसने बाथरूम का दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया. मैं भी गाल से रंग साफ़ करता हुआ बाथरूम के बाहर खड़ा खड़ा बड़बड़ाने लगा. वो अन्दर हंस रही थी और मेरी हालत का मजा ले रही थी.

मुझे एक तरकीब समझ में आई. मैं पैर पटकते हुए ऐसे आवाज करने लगा, जैसे मैं वहां से चला गया हूँ. लेकिन मैं बाथरूम के बाहर ही उसके निकलने का वेट करने लगा. पांच मिनट बाद जब उसे लगा कि शायद मैं चला गया हूँ. फिर जैसे ही उसने दरवाजा खोला, तो मैं भी बाथरूम के अन्दर घुस गया और उसे पकड़ कर उसकी पैन्ट की जेब से रंग निकाल कर उसे लगाने लगा.

मैंने उसके चेहरे पर उसकी कमर पर भी रंग लगाया. रंग लगाते समय वो मुझसे बचने की कोशिश कर रही थी, जिस चक्कर में मेरे हाथ उसके मम्मों पर लगे जा रहे थे. मैंने उसे इस तरह से पहले कभी टच नहीं किया था. आज ऐसा करते ही मेरा लंड खड़ा होने लगा. इस वक्त मैंने उससे कसके पकड़ा हुआ था. मैं उसकी बॉडी फील कर सकता था. उसकी मदमस्त जवानी के स्पर्श से मैं अपना कंट्रोल खो चुका था. मेरी कजिन को भी मेरे हाथों की हरकत से और लंड की सख्ती से पता चल गया था कि मेरा सेक्स का मूड बन गया है और लंड खड़ा हो चुका है.

फिर ऐसे ही में मैंने शॉवर ऑन कर दिया. पानी गिरने से हम दोनों गीले हो गए. उसके कपड़े उसके जिस्म से चिपक गए. बस फिर मेरा दिमाग़ खराब हो चुका था. अब मैंने उसे किस करना प्रारम्भ कर दिया और अपने एक हाथ से उसके एक उरोज दबाने लगा.

वो मेरी इस हरकत से मुझे कहने लगी- ये क्या कर रहे हो, ये गलत है.

वो मुझे मना तो कर रही थी, लेकिन मुझसे अलग होने का प्रयास नहीं कर रही थी.

मैंने उससे चूमते हुए पूछा- क्या तुमको ये सब अच्छा नहीं लग रहा है?

उसने कहा- वो बात नहीं है शुभ … मुझे ये सब अच्छा तो लग रहा है लेकिन तुम मेरे भाई हो.

मेरा लंड फटने वाला था, मैंने कहा- तुम जवान हो और क्या तुमने भाई बहन के सेक्स की कहानियां नहीं पढ़ीं हैं?

बोली- हां मगर!

मैं कहा- बस कुछ नहीं बोलो … मैं तुमको बहुत पसंद करता हूँ. हम दोनों एक दूसरे के इस राज को राज ही बने रहने देंगे और अपनी आग को भी बुझा लेंगे.

ये सुनते ही उसने मुझे जकड़ लिया और कहने लगी- आह … शुभ मैं भी तुमको बहुत चाहती हूँ. पर समाज के भय से मैं अपनी बात तुमसे कह न सकी.

अब तक हम दोनों बहुत गर्म हो चुके थे और एक दूसरे को चूमने और चूसने में लग गए थे. तभी मैंने अपने आपको संभाला और मामी के आने के डर से उससे कहा कि हम लोग बाकी की प्यास बाहर चल कर बुझा लेंगे, अभी जल्दी से बाहर चलना चाहिए. तुम्हारी मम्मी भी आती होंगी.

उसने मेरी बात सुनकर एकदम से होश सा सम्भाला. हम दोनों जल्दी जल्दी फ्रेश हुए और नॉर्मल होकर बाहर आ गए.

वो इस दिन से मुझसे सैट हो गई थी. उस दिन के बाद जब भी चान्स मिलता तो हम किस कर लेते थे. मैं कभी उसके पीछे से किचन में जाकर उसके बूब दबा देता था.

उसके घर से आने का मन तो नहीं था. लेकिन मजबूरी में वापस आना पड़ा.

फिर हम दोनों की फोन पर ज़्यादा बात होने लगी. हम दोनों कजिन सेक्स के मौके की तलाश में थे.

तभी एक दिन उसके गांव में किसी के घर शादी थी, तो मामी और उसका भाई बरात में चले गए. अब घर में सिर्फ़ वो और उसकी दादी थीं. मामा ड्राइवर हैं, तो वो ज़्यादातर बाहर ही रहते हैं.

उस रात हमने प्लानिंग की और मैं रात में अपने घर से बिना किसी को बताए बाइक लेकर उसके घर पहुँच गया. उसने मुझसे कह दिया था कि तुम आकर बाहर वाले कमरे में ही आकर मुझे फोन कर देना. मैं कमरे की कुण्डी खोल कर ही अन्दर वाले कमरे में रहूंगी.

मेरी नानी यानि अविका की दादी को थोड़ा कम दिखाई देता है, तो ज़्यादा प्राब्लम नहीं थी. मैंने उसे आते ही फोन कर दिया था कि मैं बाहर वाले कमरे में आ गया हूँ.

रात को 11:30 बजे वो उस दूसरे रूम में आ गयी, जहां मैं छुपा हुआ था. उसके आते ही मैंने उसे ज़ोर से हग किया और एक दूसरे को किस करने लग गए. उसने टॉप और पजामा पहना हुआ था. फिर हम बेड पर आ गए.

पहले हमने कुछ देर मेरे फोन में पॉर्न मूवी देखी. वो बहुत गर्म हो गयी थी. तब फोन बंद किया और हम दोनों की किसिंग शुरू हो गई. मैं उसके मम्मों को दबाने का मजा लेने लगा. सच में उसके आमों ही मजा ही अलग है.

फिर मैंने धीरे धीरे अपनी ममेरी बहन को नंगी कर दिया और उसे बिस्तर पर लिटा दिया. बिस्तर पर उसकी टांगें फैला कर उसकी पकौड़ा सी फूली अनचुदी चुत को चाटने लगा. वो चुदास से तड़प रही थी. उसने अपनी गांड उठा कर मेरे मुँह पर अपनी बुर रगड़ना चालू कर दिया था.

मैंने उसकी चुदास देखी तो झट से अपने कपड़े निकाल दिए. अब तक मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था. तब भी मैंने अविका से लंड चूसने को बोला. पहले वो मना करने लगी. जैसे सब लड़कियां शुरुआत में लंड चूसने से मना करती हैं, अविका भी मना कर रही थी.

फिर वो लंड चूसने को राजी हो गई. उसने मेरा सुपारा जीभ से चाटा फिर लंड को मुँह में भर लिया. वो लंड को दबा कर चूसने लगी. मैं भी उसके मुँह को चोदने लगा.

कुछ ही पलों में वो आउट ऑफ द कंट्रोल हो गई थी. अविका बोल रही थी- बस करो शुभम … अब रहा नहीं जाता … प्लीज़ अन्दर डाल दो.

मैंने कंडोम लगाया और चुदाई का खेल शुरू हो गया. मेरे लपलपाते लंड के सामने कुंवारी चुत चुदने को रेडी थी, जिसकी सील टूटने का पल आ गया था.

मैं धीरे धीरे उसकी चुत पर लंड घिस रहा था. उसकी टांगें लंड के स्पर्श से खुद ब खुद फैलने लगी थीं. मैंने उसकी टांगें पूरी तरह से खोल कर चुत फैलाई और लंड के सुपारे को बुर की फांकों में डालने लगा.

अभी मेरे लंड की सिर्फ़ टोपी ही अन्दर गयी थी, वो मना करने लगी. उसे अपनी बुर चिरती सी महसूस हो रही थी जोकि उसकी फैलती आँखों से समझ आ रहा था. मैंने बड़ी मुश्किल से अविका को समझाया और अपने लंड को धीरे धीरे घुसेड़ने लगा. मैंने उसके मुँह पर अपने होंठों का ढक्कन लगाया और जोर से लंड को पेला. मेरा लंड उसकी सील तोड़ता हुआ अन्दर तक चला गया.

वो चिल्लाने को हुई … लेकिन मुँह बंद होने से वो चीख न सकी, लेकिन उसकी छटपटाहट बता रही थी कि उसे भयंकर पीड़ा हो रही है. मैं अपना लंड अपनी कजिन की कुंवारी बुर में लंड घुसेड़ कर कुछ देर ऐसे ही रुक गया.

जब उसका दर्द थोड़ा कम हुआ, तो उसकी कमर ने हरकत करनी शुरू कर दी. मैं समझ गया कि इसको अब दर्द नहीं रहा. बस मैं उसकी चुदाई करने में लग गया. मैं ताबड़तोड़ धक्का लगाना चालू कर दिया. वो भी मस्त होकर लंड का मजा लेने लगी थी. यही कोई 12-13 मिनट तक मैंने उसे हचक कर चोदा और चूंकि मैंने कंडोम लगाया हुआ था तो उसकी बुर में ही मेरा पानी निकल गया. मेरे लंड का पानी तो मेरी बहन की चूत नहीं पी पाई फिर भी मेरे लंड फड़कने से उसकी बुर को भी बहुत सुकून मिला होगा.

उस रात मैंने उसे तीन बार चोदा फिर सुबह चार बजे अंधेरे में ही उसके घर से निकल कर अपने घर वापस आ गया.

इसके बाद तो जैसे हम दोनों को एक दूसरे की लत लग गई थी. हम दोनों ने ठान लिया है कि जब तक हम दोनों की शादी नहीं होगी, तब तक मैं उसे चोदता रहूँगा.
 
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