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Incest भाई-बहन वाली कहानियाँ

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जिस्म तो जिस्म को ही जानता है

मेरी एक बड़ी बहन रचना (मौसी की लड़की) है, जो सिवनी (मध्य प्रदेश) में रहती थी. मैं नागपुर (महाराष्ट्र) में रहता हूँ.

वो और मैं बहुत अच्छे दोस्त हैं. मेरी सारी निजी बातें उनको पता थीं और मुझे उनकी सारी बातें मालूम थीं. हम अपनी बातें हमेशा शेयर करते थे. उस वक्त मैं 18 साल का था और वो 20 साल की थीं. हम दोनों में अंडरस्टैंडिंग बहुत ही अच्छी थी. अगर मुझे कोई तकलीफ होती तो उनको तुरंत पता चल जाता था और उन्हें कुछ हो तो मुझे खबर मिल जाती थी.

एक दिन मैं उनसे फोन पर बात कर रहा था तो मुझे लगा कुछ गड़बड़ है, मैंने पूछा- दीदी क्या हुआ?

उन्होंने बताया कि मेरे भैया ने मुझे और मेरे ब्वॉयफ्रेंड को एक साथ में देख लिया. इसके बाद भैया ने उस लड़के की बहुत पिटाई की.

मैंने बोला- आपका प्यार सच्चा है क्या?

उन्होंने बोला- हां, और मैं उससे मिलना चाहती हूँ.

मैंने बोला- तो मिल लो.

दीदी बोलीं- कैसे..? भैया ने कहीं भी आने जाने को मना किया है.

मैंने उनसे बोला- आप नागपुर आ जाओ. फिर एक दिन उसे भी नागपुर बुला लेंगे. आप यहां पर मिल लेना, पर कुछ ही घंटे मिलने मिल पाएगा.

दीदी बोलीं- ठीक है.

फिर योजना के अनुसार दीदी नागपुर आ गईं. उन्हें देखते ही मेरे चेहरे पर एक अलग ही चमक आ गई. हालांकि मैं कभी भी उन्हें बुरी नज़र से नहीं देखता था, वो मेरी सबसे अच्छी बहन थी. वो माँ पिताजी से मिलीं और सीधा मेरे कमरे में आ गईं.

वो बोलीं- लो मैं ला गई, आगे क्या सोचा है?

मैंने बोला- वो कब आ रहा है?

दीदी ने बोला- वो कल ही आ जाएगा.

मैं- अच्छा.. और आप कितने दिन के लिए आई हो?

वो बोलीं- सात दिन के लिए.

मैं बोला- बढ़िया है.. बहुत मस्ती करेंगे.

अब हम यहां वहां की बातें करने लगे. फिर रात को खाना खा कर सोने चले गए. जैसे कि हम बचपन से ही साथ में सोते हैं, वैसे ही आज भी हम साथ में लेट गए. मैंने उनके हाथ को अपने गालों के नीचे रखा और सो गया.

दूसरे दिन योजना के हिसाब से हम घर से निकले और उसके ब्वॉयफ्रेंड को मिलने चले गए. दीदी मेरी साथ गई थीं, इसलिए कोई संदेह भी नहीं कर सकता था. वो एक गार्डन में मिले, मैंने कुछ देर उन दोनों को अकेला छोड़ दिया.

मैं दीदी से बोला- मैं बाद में आता हूँ.

मैं चार घंटे बाद गया, तब भी उनकी बातें खत्म नहीं हुई थीं. मैं बोला- अब चलो.

फिर हम दोनों घर आ गए.

आज वो बहुत खुश थीं, उन्होंने मुझको बहुत बार थैंक्स बोला.

मैं बोला- अब खुश तो हो.

दीदी बोली- बहुत..

वो ख़ुशी से कूदने लगीं, तब पहली बार मेरी नज़र उनके मचलते मम्मों पे पड़ी. वो हिल ही ऐसे रहे थे. दीदी की हाइट कुछ 5 फुट 2 इंच थी, साइज़ लगभग 34-28-30 का रहा होगा. उभरे हुए चूचे और पतली कमर गोरा रंग. मैं साढ़े पांच फुट की हाइट थी और तब जिम जाता था, तो मेरी बॉडी भी ठीक ही थी.

रात को खाना खाने के बाद हम हमेशा की तरह सोने की तैयारी करने लगे. मैंने बरमूडा और टी-शर्ट पहन लिया और दीदी ने नॉर्मली रेड सूट पहन लिया था. हम दोनों बिस्तर पर लेट गए. बहुत देर तक दीदी और मैं बातें करते रहे. बाद में हम दोनों सो गए, पर पता नहीं उसे रात मुझे क्या हुआ. उस रात मुझे कुछ अलग ही सेक्सी सपने आ रहे थे और बहुत में बेचैन हो रहा था. पर जैसे तैसे मुझे नींद लग गई.

पर जब रात को मेरी नींद खुली तो मेरा हाथ दीदी के चूचे पे था. मैं थोड़ा सा डर गया, पर न जाने क्यों मैंने दीदी के मम्मों से हाथ नहीं हटाया. मैंने सोचा अगर एकदम से हाथ हटा लूँ, तो शायद दीदी जाग जाएंगी. मैं उन्हें वैसे ही देखता रहा, दीदी बहुत ही खूबसूरत लग रही थीं. उनका गोरा बदन उस पर रेड कलर का सूट.. और कमरे की डिम लाइट.. हाय.. क्या बताऊं क्या मस्त माल लग रही थीं, मेरी कामवासना मुझे दीदी की चुदाई के लिए कह रही थी.

ये सोचते सोचते ही पता ही नहीं चला कि मेरे हाथों ने उनके मम्मों को कब धीरे धीरे दबाना शुरू कर दिया. मुझे भी अच्छा लग रहा था. पर कुछ देर बाद मैंने अपने हाथ को वापस खींच लिया.

मैं बहुत देर तक दीदी के बारे में सोचता रहा. फिर मैंने सोचा केवल दबा ही तो रहा था, वैसे भी दीदी को कुछ पता नहीं चला.

मैंने फिर से दीदी के तरफ मुड़ा और थोड़ी हिम्मत करके फिर से दीदी के मम्मों पर एक हाथ रख कर धीरे धीरे दबाना शुरू कर दिया.

दीदी नहीं उठीं तो मेरी थोड़ी हिम्मत बढ़ गई. मैंने धीरे से उनके होंठों को हाथ लगाया. बड़े ही कोमल होंठ थे. मैंने फिर से दीदी के मम्मों को दबाना शुरू कर दिया. एकदम से दीदी मेरी तरफ पलटीं मैं डर गया, मुझे ऐसा लगा कि जैसे वो जाग गई हों. पर उन्होंने केवल करवट ली और सो गईं.

मैंने फिर से मम्मों को दबाना शुरू कर दिया और अपने चेहरे को उनके चेहरे के पास ले जाकर उनके होंठों को धीरे से चूम लिया.

दीदी फिर भी सोती रहीं.

मेरी हिम्मत और अधिक बढ़ गई. मैंने धीरे धीरे उनके पूरे बदन पे हाथ फेरा, अब मेरी नींद पूरी तरह से उड़ गई और मुझे बहुत मजा आ रहा था.

अब तक तो मैं ये भी भूल गया था कि ये मेरे दीदी हैं.

मैं अपने आपको रोक ही नहीं पा रहा था. मैंने धीरे से दीदी के सूट के अन्दर हाथ डाला और उनके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया. फिर अपने हाथ को उनके पीछे ले गया और उनकी ब्रा का हुक खोल दिया. फिर मैं अपने हाथों को आगे लाकर उनके मम्मों को दबाने लगा.

बहुत देर तक दूध दबाने के बाद भी दीदी नहीं उठीं, तो मेरी हिम्मत पूरी तरह से खुल गई. मैं अपने हाथ दीदी के नीचे ले ही जा रहा था कि अचानक दीदी ने मेरे हाथों को पकड़ लिया. मुझे लगा दीदी उठ गईं, मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और सोने का नाटक करने लगा. पर मैं बहुत डर गया था, इसलिए मैं सो गया.

अगले दिन सुबह जब हम दोनों उठे, तो दीदी ने मुझे हमेशा की तरह एक हल्की सी मुस्कान दी और चली गईं. पर मैं दीदी से नज़र नहीं मिला पा रहा था. मुझे लगा दीदी को पता ही नहीं चला. क्योंकि वो हर राज की तरह ही मुझसे बात कर रही थीं.

फिर दूसरी रात को हम कल की तरह सो गए. मेरी नींद फिर से खुल गई. मैंने फिर से हिम्मत की और पहले दिन की तरह हाथ से बढ़ा कर उनके अन्दर डाला, दूध दबाए.. पर आज मैंने हाथ नीचे नहीं ले गया. थोड़ा सा करीब हो कर उनके पजामे का नाड़ा खोल दिया. जब दीदी बेसुध पड़ी रहीं तो धीरे से अपने हाथों को पजामे से बाहर निकाल लिया.

फिर मैंने धीरे से उनका शर्ट ऊपर करना शुरू किया. उनका शर्ट मम्मों तक ऊपर लाने के बाद मैंने दीदी के हाथ पकड़ को अपने बरमूडे में डाल दिया और दीदी के पजामे को धीरे से नीचे करना शुरू किया.

तभी मैंने महसूस किया कि दीदी का हाथ मेरा लिंग को हल्का हल्का दबा रहा है. मैंने सोचा दीदी जानबूझ कर दबा रही हैं.

इसके बाद मेरी और हिम्मत बढ़ गई. मैंने धीरे से दीदी का पजामा और अंडरवियर उतार दिया. इस सब में मुझे पूरा आधा घंटा लग गया. मैंने दीदी की योनि देखी, तो देखता ही रह गया. क्योंकि आज तक मैंने केवल टीवी पे ब्लू फिल्म में ही योनि देखी थी.

अब मैंने अपना बरमूडा भी उतार दिया और दीदी के हाथों में अपना लिंग पकड़ा दिया. अपने हाथों से दीदी को अपनी ओर खींचा और उन्हें धीरे धीरे चूमना शुरू कर दिया.

मैंने महसूस किया कि चूमने में भी दीदी मेरा साथ दे रही थीं और देखते ही देखते हम एक दूसरे में डूब गए. हम एक दूसरे को जोर जोर के चूमने लगे.

करीब 20 मिनट हम लोग तक चूमते रहे. अब मैं खुल कर दीदी के मम्मों को पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा. दीदी भी मादक सिसकारियां ले रही थीं. दरअसल हम दोनों की जवानी उफान मार रही थी. दीदी भी मुझे जोर के जकड़ लिया था.

फिर मैंने दीदी की योनि में हाथ लगाया और सहलाना शुरू किया.. तो एकदम से दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोलीं- राहुल नहीं.. बस इतना ही.. और आगे नहीं.

पर तब तक तो मेरे अन्दर हवस भर चुकी थी, मैंने दीदी से कहा- दीदी प्यार अलग है और शरीर की जरूरत अलग बात है.

फिर उसने मुझसे बोला- पर तू मेरा छोटा भाई है.

मैंने उनसे बोला- दीदी जिस्म की आग के सामने क्या बड़ा और क्या छोटा, क्या भाई और क्या बहन, क्या बाप और क्या माँ, क्या बेटा और क्या बेटी, क्या ब्वॉयफ्रेंड और क्या पति, क्या जीएफ और क्या पत्नी.. ये सब बेकार की बातें हैं. बस जिस्म तो जिस्म को ही जानता है.

दीदी की हवस भी जागने लगी थी.

मैं अपनी रौ में कहे जा रहा था- अभी हम दोनों को केवल एक शरीर की जरूरत है. मुझे एक लड़की की और आपको एक लड़के की.

उनकी हवस जागने के बावजूद भी वो समझ नहीं पा रही थीं, वो बोलीं- पर राहुल..

मैंने दीदी को रोकते हुए बोला- दीदी प्लीज़ और कुछ मत कहो.

मैं उनको जबरदस्त चूमने लगा.

कुछ देर बाद दीदी भी मुझे चूमने लगीं. मैंने धीरे से दीदी का हाथ पकड़ कर अपना लंड थमा दिया. दीदी ने भी लंड पकड़ लिया और लंड को दबाना भी शुरू कर दिया.

मैं समझ गया कि दीदी के ऊपर भी प्यार का नशा चढ़ने लगा है, मैं भी दीदी की योनि को सहलाने लगा.

अब मैंने दीदी के सूट को ऊपर से खींच कर निकाल दिया और अपने भी पूरे कपड़े उतार लिए. अब हम दोनों बिना कपड़े के थे. पर अब फिर से दीदी ने आँखें खोलीं और फिर बोलीं- राहुल ये सही नहीं है.

मैं उठा और कमरे की नाइट लाइट भी बुझा आया. मैं दीदी के कान में बोला- रचना.. मैं सौरभ हूँ.. तुम कैसी हो.

सौरभ दीदी के ब्वॉयफ्रेंड का नाम था.

दीदी बोलीं- पर तू तो राहुल है ना?

मैंने बोला- आपको मेरा चेहरा दिख रहा है क्या?

वो बोलीं- नहीं..

मैंने उनसे कहा- तो आप मुझे सौरभ ही समझ लो.

वो अचानक मुझसे लिपट गईं और भूखी शेरनी की तरह मुझे चूमने लगीं. मैंने भी पूरा पूरा साथ दिया और अपने हाथों से उनके मम्मों को खूब दबाया और योनि पर हाथ भी रगड़ने लगा. फिर धीरे से उनके गालों को किस किया.. गले पे चूमा.

दीदी कामुक सिसकारियां भर रही थीं. फिर दीदी ने मुझे नीचे किया और वो चूमने लगीं. मुझे चूमते चूमते वो नीचे की ओर आने लगीं. दीदी ने मेरे लिंग को पकड़ लिया और हल्के से किस किया. मैं झनझना गया. दीदी ने मुझे फिर से किस किया और वो ऐसा करते करते मेरे ऊपर की तरफ आ गईं. मैं भी उनको किस करने लगा और किस करते करते मैं नीचे की तरफ आ गया.

रचना दीदी तड़पने लगीं और जोर जोर से सिसकारियां भरने लगीं. मैं उनकी योनि के पास तक पहुँचता, इससे पहले रचना दीदी ने मुझे ऊपर की तरफ खींचा और मेरे ऊपर चढ़ गईं.

दीदी मुझसे बोलने लगीं- प्लीज़ करो ना.

मैंने मेरे लिंग को उनकी योनि पे रखा और डालने की कोशिश की, पर उन्हें बहुत दर्द हो रहा था.

वो वापस उठ गईं और बोलीं- सौरभ, बहुत दर्द हो रहा है.

मैंने उनसे कहा- डार्लिंग, थोड़ा तो दर्द होता ही है.

शायद ये उनका भी पहली बार था.. मेरा तो था ही पहली बार. मैंने उसे नीचे किया और मैं उनके ऊपर चढ़ गया.

मैंने अपने लिंग को उनकी योनि पे रखा और अपने हाथों से उनके पैरों को ऊपर की तरफ खींचा. उनके हाथों को अपनी पीठ पर रखवा दिए और कहा- अगर थोड़ा भी दर्द हुआ, तो मुझे जोर से पकड़ लेना.

अब मैंने धीरे से अपने लिंग को प्रेस किया, उन्हें थोड़ा दर्द हुआ और वो बोलने लगीं- आह.. सौरभ बहुत दर्द हो रहा है.. प्लीज़ मत करो ना.

मैंने लिंग को थोड़ा बाहर निकाला और फिर से जोर से अन्दर डाला. तब भी पूरा नहीं गया. दीदी थोड़ा चिल्लाईं और मैंने जल्दी से एक बार फिर जल्दी से लिंग बाहर निकाल कर उतनी तेजी से वापस अन्दर पेल दिया.

इस बार दीदी की आँखों से आंसू निकल आए.

वो जोर से चिल्ला उठीं- आहह.. आआअहह.. सौरभ बहुत दर्द हो रहा है.

दीदी ने अपने पैने नाखून मुझे गड़ा दिए. मैं और भी जोश में आ गया. फिर मैं उन्हें झटके देने लगा.

कुछ देर बाद दीदी की चुत का दर्द खत्म हो गया और वो चिल्लाने लगीं ऊऊ.. ओहोहो.. ऊऊह.. सौरभ और करो.. तेज करो.. और तेज करो.

मैं और ज़्यादा तेज चुदाई करने लगा.

फिर मैंने उनके पैर छोड़े और उनके मस्त रसीले मम्मों को दबाना शुरू कर दिया. क्या मस्त चूचे थे, एकदम कड़क और पूरे गोल.. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. उन्होंने भी अपने पैरों से मुझे जकड़ लिया था, जैसे कोई अजगर अपने शिकार को पकड़ लेता है.

मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि रचना में इतना दम किधर से आ गया है. पर बहुत मजा आ रहा था.

अब मैंने उन्हें लिप किस करना शुरू किया, यहां एक हाथ से उनके मम्मों को जोर जोर से दबा रहा था, दूसरे हाथ से उनकी गांड जोर जोर दबा रहा था. इसके साथ ही मैं अपने लिंग को अन्दर बाहर कर रहा था.

वो भी भी पूरा साथ दे रही थीं, उन्होंने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और जबरदस्त किस कर रही थीं, दीदी अपने दोनों हाथों से मेरे पीठ पर नोंच रही थीं.

उनके पैरों के बारे में तो पहले ही बता चुका हूँ. सेक्स करने में हम दोनों नए थे इसलिए जैसे जैसे हम आगे बढ़े… हम दोनों को और ज़्यादा मजा आने लगा. कुछ देर बाद दीदी झड़ गईं, पर मेरे लंड में अभी भी जान थी, मैं दीदी की चुदाई करता रहा.

अब उन्होंने बोलना शुरू कर दिया- आह.. बस अब और नहीं, मुझे जलन हो रही है.. अब और नहीं..

ये सुन कर मुझे अचानक और जोश आ गया. मैं और जोर जोर से चुदाई करने लगा. मुझे तो ऐसा लग रहा था कि अपने लिंग को इनकी योनि के आर पार कर दूँ.

वो अब चिल्लाने लगीं- अह.. नहीं करो.. दर्द हो रहा है.. प्लीज़ रुक जाओ.

दीदी के आंसू रुक ही नहीं रहे थे और वो रोते ही जा रही थीं.

तब मुझे ये सब नहीं देख रहा था, मेरे ऊपर तो बस चोदने का भूत सवार था. फिर कुछ देर बाद मैं एकदम से तेज हो गया और उनकी योनि के अन्दर ही अपना पूरा रस छोड़ दिया.

अब मैं भी शांत हो गया और उनके ऊपर वैसे ही लेटा रहा.

कुछ देर बाद उठा, लाइट जलाई और दीदी के बाजू में लेट कर उनको प्यार से देखने लगा. यह देख के दीदी को भी शरम आ रही थी, वो अपना मुँह छुपाने लगीं.

मैंने अपने हाथों से उनके मुँह को ऊपर किया और एक जोरदार लिप किस करके थैंक्स बोला.

वो थोड़ा हंसी और उसने मुझे किस करके मुझे भी थैंक्स बोला.

फिर हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और सो गए.

सुबह जब उठा को बड़ा थका थका सा लग रहा था, पर अच्छा भी लग रहा था. वो मेरे पास आईं और बोलीं- मैं प्रेग्नेंट तो नहीं हो जाऊंगी ना?

मैंने उन्हें मना कर दिया- नहीं ना रचना दीदी.. एक बार में थोड़ी ना कुछ होता है.

मैंने कह तो दिया, पर टेंशन तो मुझे भी बहुत हो रही थी. मैंने जल्दी से कंप्यूटर ऑन किया और गूगल से सब जानकारी निकाली. वहां से पता चला कि दीदी प्रेग्नेंट हो सकती हैं तो उससे बचने के तरीके निकाले. अब पता चला कि कुछ गोलियां आती हैं.

मैंने गोली का नाम लिखा और मार्केट से ले कर आ गया. मैंने दीदी को गर्भनिरोधक गोली खिला दी.

अब ज़रा सांस में सांस आई.

सुबह शाम अब तो बस मैं दीदी की चूत और चुदाई के बारे में ही सोचता रहता.

मैंने फिर कंप्यूटर ऑन किया और सेक्स के बारे में पढ़ना शुरू किया. वहां से मुझे चुदाई की बहुत सारी जानकारी मिली. सेक्स के पूरे 52 स्टेप मिले, सेक्स से पहले क्या करना चाहिए और बाद में क्या करना चाहिए. फिर मैंने कुछ वीडियो भी डाउनलोड किए.

इसके बाद मैंने और दीदी ने बहुत मजे किए..

सच मानिए हर एक चीज़ में अपना ही एक मजा है. मैं आशा करता हूँ कि आपको मेरी दीदी की चुत चुदाई की कहानी पसंद आई होगी.
 
दीदी एक बार डालने दो

मेरे घर में केवल 3 लोग हैं. पिता के गुजरने के बाद मेरी माँ को उनकी जगह नौकरी मिल गई. माँ के काम के चलते ज्यादातर समय हम दोनों भाई बहन घर पर अकेले रहते थे. मेरी दीदी का नाम नीतू है. उनकी उम्र 24 साल है, वो मुझसे ढाई साल बड़ी हैं. उनकी लम्बाई 5 फुट 4 इंच है, रंग गोरा है और भरा हुआ शरीर है. वो बहुत सेक्सी दिखती हैं. उनका फिगर 38-28-36 का है. उनकी अभी शादी नहीं हुई है. वो एकदम काम की देवी का रूप लगती हैं. उनकी बड़ी सी गांड इतनी जबरदस्त मटकती है, जब वो जीन्स पहनकर चलती हैं कि सब देखने वालों के लंड खड़े हो जाते हैं.

तो आप ये तो जान ही चुके हैं कि मेरी नीतू दीदी बला की खूबसूरत हैं.

दीदी मेरे साथ बहुत ही घुलमिल कर रहती थीं. हम दोनों अक्सर देर रात तक अकेले गप्पें मारते और मजाक करते रहते थे. दीदी के बारे में अपने दिल की एक बात बताऊँ.. तो वो मुझे बहुत अच्छी लगती थीं, पर उनको मैंने कभी गलत नजरिए से नहीं देखा था.

लेकिन उस दिन की घटना के बाद से दीदी के लिए मेरा नजरिया ही बदल गया. उस दिन दीदी अपनी सहेली की शादी में जाने के लिए तैयार हो रही थीं. जब वो तैयार होकर अपने कमरे से बाहर आईं तो एक पल के लिए मेरी साँसें थम गईं.

गोरे बदन पे लाल रंग की साड़ी, जिसका पल्लू जालीदार था. जालीदार पल्लू होने की वजह से पूरा ब्लाउज साफ दिखाई पड़ रहा था. उभरी हुई छाती, गहरे गले का ब्लाउज पहने हुए दीदी एकदम मादक माल लग रही थीं. दीदी ने साड़ी नाभि के नीचे बांधी ताकि उनकी नाभि की रिंग एकदम साफ दिखाई दे. दीदी स्वर्ग की अप्सरा रंभा के समान लग रही थीं.

दीदी ने मुझसे उन्हें अपनी सहेली के घर तक छोड़ने को कहा. इतना कह कर दीदी आगे बढ़ गईं. जैसे ही मैंने पीछे से उनकी गदराई हुई गांड को ठुमकते हुए देखा तो मेरे होश उड़ गए.

मैं दीदी को छोड़ कर घर वापस आ गया.

रात के करीब दस बज चुके थे. माँ ने मुझे खाना दिया और अपने कमरे में सोने चली गईं. मैं खाना खाकर अपने कमरे में गया, पर मेरा ध्यान मेरी दीदी से हट ही नहीं रहा था. मैं उनके कमरे में गया, लाईट जलाई और सीधा उनके बाथरूम में घुस गया. बाथरूम में एक किनारे पे उनकी नाईटी रखी थी, जैसे ही मैंने उसको उठाया, उसमें से उनकी ब्रा और पैन्टी नीचे गिर गई. दीदी की ब्रा और पैन्टी को देख कर मुझपे मदहोशी सी छाने लगी. मैंने ब्रा और पैन्टी को सूंघा. सूंघते ही मुझे नशा सा होने लगा. मैंने पहली बार दीदी को सोचकर मुठ मारी और सारा मुठ उनकी ब्रा और पैन्टी पे गिरा कर सोने चला गया.

अगले दिन जब दीदी वापस आईं तो मैं सो रहा था. जब उठा तो फ्रेश हो कर नाश्ते की टेबल पे गया. दीदी पहले से ही वहां थीं और मुझे घूर रही थीं. मैं समझ गया कि दीदी ने ब्रा और पैन्टी में लगे मेरे मुठ को देख लिया है. दीदी ने कुछ नहीं बोला और अपने कमरे में चली गईं.

अब मैं अपनी दीदी को बहन की नजर से नहीं बल्कि एक जवान लड़की की नजर से देखने लगा. मेरा पूरा ध्यान अब दीदी पे ही रहने लगा. मैं उनकी जवानी की झलक पाने का कोई मौका नहीं गंवाता था. झाडू पोंछा करते वक्त जब वो झुकती थीं तो मैं उनकी चूचियों को गौर से देखता. शायद उन्हें भी पता था कि मेरा ध्यान उन्हीं पर है, इसलिए वो जानबूझ कर ऐसी हरकतें करती थीं, जिससे मेरा ध्यान उन पर जाए.

माँ के बाहर काम करने की वजह से दीदी को आजादी मिल गई. अब वो और भी भड़कीले कपड़े घर में पहनने लगीं और अपनी मादक जवानी से मुझे सम्मोहित करने लगीं. मैं उनकी वासना को भड़काने के लिए रोज उनकी ब्रा पैन्टी में मुठ मारकर वैसे ही रख देता था. दीदी को भी और मुझे भी दोनों को पता था कि हम क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं.

एक दिन दीदी के रूम का एसी खराब हो गया, जिसकी वजह से उन्हें मेरे कमरे में सोने की वजह मिल गई. उनकी हवस से भरी आँखें साफ चमक रही थीं. माँ, दीदी और मैं खाना खाकर उठे. माँ को सुबह ऑफिस जाना था, इसलिए वो खाना खाकर सोने चली गईं. मैं भी अपने कमरे में चला गया. आधे घण्टे के बाद दीदी मेरे कमरे में आईं.

मैंने दीदी को देखा तो हैरान रह गया. उन्होंने एक काले रंग की पारदर्शी सिल्की फ्रॉकनुमा नाईटी, जो सिर्फ उनकी जाँघों तक आ रही थी.. उसे पहनी थी. उसके अन्दर की ब्रा और पैन्टी साफ साफ दिखाई दे रही थी. सिंगल बेड होने के कारण वो मेरे एकदम करीब आकर लेट गईं. दीदी के शरीर से निकलती मादक महक से मेरे लंड का बुरा हाल हो गया था. दीदी लेटते ही नींद के आगोश में चली गईं. पर उनके शरीर की खुशबू से मेरी नींद उड़ गई थी.

रात करीब एक बजे दीदी ने जब करवट बदली तो उनकी गदराई गांड मेरी तरफ थी. अब मुझसे काबू नहीं हुआ तो मैंने अपना लंड दीदी की गांड के पास कर दिया और धीरे धीरे दबाव बढ़ाने लगा. दीदी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

मैंने हिम्मत न होने के कारण आगे कुछ नहीं किया और सो गया. ऐसा करीब 3 दिन चलता रहा.

एक दिन मैंने कोशिश की, वो गहरी नींद में सो रही थीं. दीदी ने 2 पीस वाला गाउन पहना था और अन्दर ब्रा भी पहनी थी. रात के 2 बजे की बात है, मैं उठा और कमरे की लाइट जला दी. नीतू दीदी सो रही थी, उनकी चूचियां साफ दिखाई दे रही थीं. मुझे थोड़ा सा डर भी लग रहा था कि वो मुझे देख ना लें, पर मैंने हिम्मत करके उनकी चूची पर हाथ रखा. पहले मैंने गाउन के ऊपर रखा.. फिर धीरे से दीदी की एक चूची दबाई और फिर दोनों हाथ से दोनों चूचियों को दबाने लगा. सच में मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

अब मैंने उनके रसीले होंठों को चूमा, फिर उनकी गर्दन पर चूमा. इतने में मुझे लगा कि शायद दीदी जाग गई हैं और सोने का नाटक कर रही हैं. मुझे इससे और हिम्मत मिल गई, मैंने उनका गाउन नीचे से ऊपर किया, तो उनकी गोरी और चिकनी जांघें मुझे दिखने लगी थीं.

इतने में वो उठ गईं और बोल पड़ीं- यह क्या कर रहा है तू?

मेरे तो जैसे होश उड़ गए.

मैं बोला- दीदी, मैंने कभी किस नहीं किया, मुझे नहीं पता कि किस कैसे करते हैं.

पहले तो वे मुझे देखती रहीं फिर दीदी मुस्कुरा कर बोलीं- मुझे भी नहीं पता, आज करके देखते हैं.

मैं दीदी के पास जाकर बैठ गया, दीदी ने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया. मैंने भी दीदी को बाँहों में ले लिया और उनके रसीले होंठों को चूमने लगा. लगभग 5 मिनट तक हम एक दूसरे को चूमते रहे.

तभी एकदम से दीदी बोलीं- अमित, अब बस करो. मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है.

मैं समझ गया कि दीदी गर्म होने लगी हैं, मैंने कहा- दीदी, मुझे आपसे किस करके बहुत अच्छा लग रहा है.

वो कुछ नहीं बोलीं. मैंने फिर से उन्हें चूमना शुरू कर दिया. मैं समझ गया कि वो चुदवाने के मूड में आ गई हैं. मैं दीदी की चूचियों को जोर से मसलने लगा. दीदी के मुँह से कामुक सिसकारियाँ निकलने लगीं. मैंने धीरे से दीदी की गाउन खोला और चूची चूसने लगा.

दीदी के कुछ भी न बोलने पर मैंने कहा- दीदी, गाउन उतार दो न प्लीज.

वो बोलीं- अमित मुझे डर लग रहा है, किसी को पता चल गया तो?

मैं बोला- दीदी कुछ नहीं होगा, किसी को पता नहीं चलेगा.

वो मान गईं. मैं दीदी की बुर सहलाने लगा, दीदी की बुर एकदम गीली हो चुकी थी, दीदी बोलीं- देखो अमित हम जो कर रहे हैं, ये सही नहीं है.

मैं कुछ नहीं बोला तो दीदी ने कहा- अब बस करो.

पर मैंने दीदी की एक न सुनी. उनको चूमने के बाद मैंने अपनी पैंट उतारी और अपना 7 इंच का लंड निकाला तो दीदी के होश उड़ गए.

मैंने कहा- दीदी एक बार डालने दो.

दीदी बोलीं- इतना बड़ा.. मुझे मारना है क्या?

मैं बोला- तुम एक बार डलवाओ तो सही, कुछ नहीं होगा.

दीदी के मन में उत्सुकता और डर दोनों था. मैंने दीदी को बेड पर लिटाया और अपना लंड उनकी बुर में धीरे धीरे डालने लगा. वो दर्द से कसमसाने लगीं. फिर मैं जोर जोर से झटके मारने लगा. दीदी चीखने लगीं. मैंने उनके होंठों को अपने होंठों से दबा दिया ताकि माँ को न सुनाई दे.

दीदी कराहते हुए बोलीं- बस करो, बहुत तेज दर्द हो रहा है.

लेकिन मैं कहाँ सुनने वाला था. मैं दीदी की चूत में लंड पेलता चला गया. दीदी की सील टूट गई थी. दीदी की बुर से हल्का हल्का खून निकल रहा था. मैं उनको हचक कर चोदने लगा. दीदी भी मस्ती से चुदवाने लगी थीं

अभी 15 मिनट हुए थे कि मेरा सारा जोश दीदी की बुर में निकल गया. मैं हांफता हुआ दीदी की चूचियों पर गिर गया. दीदी भी झड़ चुकी थीं.

फिर मैंने दीदी की नाभि को चूमना शुरू किया. नाभि को चूमने से दीदी फिर से गरम हो गईं और उन्होंने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया, जिससे हम दोनों दुबारा चुदाई के लिए तैयार हो गए. फिर दीदी ने मुझे लेटने को कहा और खुद अपनी गांड के छेद को मेरे लंड पर रख कर अपनी गांड मरवाई. शायद दीदी पहले भी किसी से गांड मरवा चुकी थीं.

जब मैंने उनसे इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि नहीं मैंने अभी तक किसी से गांड नहीं मरवाई है, वो तो ब्लू-फिल्म देखते हुए मैंने मूली वगैरह से अपनी गांड को ढीला कर लिया था.

मैंने पूछा कि चूत में मूली क्यों नहीं की?

तो बोलीं- मैं चूत की सील लंड से ही खुलवाना चाहती थी.

अब मैं बेफिक्र होकर दीदी की गांड मारने लगा. मुझे उनकी चूत से ज्यादा मजा गांड मारने में आ रहा था.

करीब दस मिनट के बाद दीदी की गांड में ही मेरा पानी निकल गया और हम दोनों उसी तरह एक दूसरे से लिपट कर सो गए.

इसके बाद तो माँ के ऑफिस जाने के बाद दीदी और मैं नंगे ही घर में चुत चुदाई का सुख भोगने लगते थे.
 
तड़प बढ़ती गई -1

यह कहानी है 19-20 साल की एक लड़की मंजरी की जिसके घर में उसकी माँ माधुरी, नानी और एक भाई माणिक हैं. आय के नाम पर माधुरी एक प्ले वे स्कूल चलाती है. माधुरी तलाकशुदा है तो इसके साथ नानी और माँ को विधवा पेंशन आती है. घर का गुजारा मुश्किल से चलता है.

ऐसा नहीं कि यह परिवार शुरू से इस हालत में था, यह खाता पीता परिवार था, मंजरी के नाना की हरियाणा के एक गाँव में जमीन थी और वे गाँव के जाने माने वैद्य थे तो अच्छी खासी आय हो जाती थी. माधुरी की शादी भी एक पंजाब के अमीर घर में हुई थी. लेकिन शादी के बाद से ही ससुराल वाले उसे तंग करते थे. इसी बीच माणिक और मंजरी हो गए.

आखिर परेशान होकर माधुरी अपने पति को छोड़ कर अपने पिता के पास आ गई. तलाक का केस सालों चलता रहा, इसी बीच इस गम से माधुरी के पिता बीमार रहने लगे. माधुरी के भाइयों ने घर की जमीन बेच कर कारोबार किया और सारा पैसा कारोबार के नुकसान में चला गया, घर बैंक वालों ने नीलाम करा दिया.

माधुरी को तलाक के फैसले से जो पैसा मिला उससे उसने एक काम चलाऊ घर खरीदा और अपने माँ बाप को लेकर इस घर में आ गई क्योंकि माधुरी के भाई पहले ही अलग घर किराए पर लेकर रहने लगे थे.

ससुराल छोड़ कर आने के बाद माधुरी ने पढ़ाई की और किसी स्कूल में नौकरी करने लगी. किसी कारण से वो स्कूल बंद हो गया तो उसने अपना प्ले वे स्कूल खोल लिया लेकिन वो कुछ ज्यादा अच्छा नहीं चल रहा था.

कुछ समय बाद माधुरी के पिता की मृत्यु हो गई.

अब मंजरी और माणिक कॉलेज में पढ़ रहे हैं. उनके सपने ऊंचे है क्योंकि वे अपने रिश्तेदारों को देखते हैं तो उनका मन भी वैसे ही रहन सहन को करता है. और रिश्तेदार हैं कि पास नहीं फटकते.

मंजरी अब जवान हो रही थी उसका बदन खिलने लगा था, तो उसके दूर के एक मामा के लड़के पुलकित की नजर उस पर पड़ी. पुलकित हरियाणा में ही किसी दूसरे शहर में रहता था, एक घंटे का रास्ता था, उसने अपनी बुआ के घर आना जाना शुरू कर दिया और कुछ ही समय में उसने मंजरी को अपने जाल में फंसा लिया क्योंकि मंजरी में नादानी अभी भी बाक़ी थी.

माधुरी के पास साधारण सा फोन था तो मंजरी उस फोन से पुलकित को मिस काल करके उससे खूब बातें करती थी. कॉलेज जाने के नाम पर वे दोनों बाहर भी मिलने लगे थे. पुलकित मंजरी को रेस्तराँ में ले जाता, खूब खिलाता पिलाता, मंजरी बहुत खुश थी क्योंकि वो खाने पीने की शौकीन थी.

उधर माधुरी पुलकित और मंजरी को भाई बहन समझती थी तो उनकी नजदीकी को भाई बहन का प्यार समझ कर अनदेखा करती थी.

कॉलेज की छुट्टियों में दोनों का मिलना जब मुश्किल होता तो पुलकित अक्सर माधुरी के घर आ जाता था और शाम के धुंधलके में किसी बहाने दोनों स्कूटर लेकर चले जाते और सुनसान सड़क या स्थान पर जाकर खूब चूमाचाटी करते और जितना हो सकता एक दूसरे के बदन का मजा लेते थे.

रात को पुलकित घर में ही रुकता था तो देर रात में भी चुपचाप दोनों घर की छत पर या कहीं और दूसरे कमरे में जाकर सेक्स भरी हरकतें करते थे.

मंजरी ने बहुत बार पुलकित के लंड को अपने हाथ में पकड़ कर देखा था, एक दो बार पुलकित के कहने पर अपने मुंह में लेकर चूसा भी था. पुलकित तो हमेशा ही उसकी अमरूद की सी चूचियाँ दबाता, उसके चूतड़ सहलाता… कपड़ों के ऊपर से ही या हाथ अंदर डाल कर उसकी चूत को सहलाता. वो ये सब कुछ करते रहते थे, मगर कभी भी पुलकित का लंड मंजरी की चूत में नहीं गया था. पुलकित ने यह बात साफ तौर पर मंजरी से कही थी- जिस दिन मौका मिला चोद दूँगा तुझे!

मंजरी भी कहती- यार… मैं तो खुद उस दिन का इंतज़ार कर रही हूँ. पता नहीं वो दिन कब आएगा?

दोनों प्रेमी भाई बहन चुदाई के लिए तड़प रहे थे, मगर उन्हें कोई मौका नहीं मिल रहा था कि दोनों दो जिस्म एक जान हो सकें. अभी तक दोनों ने चाहे कितनी चूमाचाटी की हो या और सब कुछ किया हो लेकिन वो अभी तक चुदाई नहीं कर पाए थे क्योंकि मंजरी को किसी होटल वगैरा में जाकर कमरा लेकर सेक्स करने से डर लगता था.

एक बार पड़ोस में माधुरी के पड़ोस में से शादी का निमंत्रण आया तो मंजरी ने हिसाब लगाया कि उसकी मम्मी और भाई शादी में जायेंगे तो 2-3 घंटे लग जायेंगे, उसने फोन करके पुलकित को सुबह ही बुला लिया और आपस में यह तय कर लिया कि जब उसकी मम्मी और भाई शादी में जाएंगे तो उनके पास कम से कम दो घंटे का वक्त होगा क्योंकि बूढ़ी नानी तो खाना खाकर एक कमरे में जाकर सो जायेगी और उन दोनों को पूरा वक्त मिलेगा घर में ही मस्ती करने का…

रविवार का दिन था, रात को आठ बजे शादी में जाना था तो पुलकित सुबह दस बजे ही उनके पास आ गया. वो पुराने मॉडल का एक आई फोन मंजरी के लिए लाया और यह कह कि उसने नया फोन ले लिया है तो यह पुराना फोन मंजरी को दे दिया. यह काम उसने सबके सामने ही किया ताकि कोई इन दोनों पर शक ना करे.

माधुरी ने इस बात को भाई बहन का प्यार समझ कर सामान्य रूप से लिया और वो खुश हो गई कि वो अपनी बेटी को फोन नहीं दिला सकी थी तो अब यह अच्छा हो गया कि उसके पास भी अपना फोन हो गया.

अब रात हुई तो माधुरी ने सबको शादी में चलने के लिए कहा. नानी तो नहीं जा सकती थी तो उसके लिए माधुरी ने दो रोटी दिन की दाल सब्जी से दे दी.

अब उनके पास स्कूटर एक ही था तो सब एक साथ शादी में नहीं जा सकते थे. मंजरी ने मना कर दिया कि वो शादी में नहीं जाएगी, पुलकित ने भी कह दिया कि उसका जाना ठीक नहीं लगेगा.

लेकिन माधुरी जिद कर रही थी कि दो तीन चक्कर लगा कर सब लोग शादी में जा सकते हैं.

अब मंजरी और पुलकित शादी में नहीं जाते तो उनके खाने की समस्या थी तो यह हल निकाला गया कि पहले मंजरी और पुलकित शादी में जाकर कुछ खा पी आयें उसके बाद माणिक और माधुरी शादी में चले जायेंगे.

सब कुछ मंजरी और पुलकित के मन मुताबिक़ हो रहा था. वे दोनों आठ बजे से पहले ही स्कूटर ले कर निकल गए और पहले तो उन दोनों वे उसी तरह किसी निर्जन सड़क पर जाकर खूब चूमा चाटी की और तय कर लिया कि आज वो सब कुछ कर ही डालेंगे.

यह सब करने के बाद वो शादी में गये और फटाफट चाट टिक्की खाकर घर आ गए.

माधुरी और माणिक उनका ही इन्तजार कर रहे थे, उनके आते ही वे दोनों जल्दी से शादी में चले गए.

जिस लड़के की शादी थी, वो माणिक का दोस्त था तो वे शादी में से देर में ही आने वाले थे, यह बात मंजरी जानती थी.

अब घर में सिर्फ नानी और वे दोनों थे. नौ से ऊपर का वक्त हो गया था. नानी लेट चुकी थी, लेकिन सोई नहीं थी. उनके पास दो ही कमरे थे, एक बेडरूम और एक ड्राइंग रूम.. सब जाने बेडरूम में एक्स्ट्रा चारपाई लगा कर एक साथ सोते थे.

पुलकित के आने से आज नानी अपने आप ही ड्राइंग रूम में बिछे दीवान पर सो गई.

अब मंजरी बाहर का मेन गेट अच्छे से बंद करके बड़े अंदाज़ से मटकती हुई धीरे धीरे आई. सामने ही आँगन में पुलकित खड़ा था, वो उसका पास आई, उसके गले में अपनी बाहें डाल दी, पुलकित ने भी उसकी कमर में अपनी बाहें डाल दी उसे अपनी तरफ खींचा और कस कर अपने सीने से लगा लिया.

दोनों आगे बढ़े और पहली बार पूरी आज़ादी और बेफिक्री से दोनों के होंठ एक दूसरे से मिले. आँगन में खड़े दोनों बहन भाई अब प्रेमी बन चुके थे, और एक लंबे और प्रगाढ़ चुंबन में लिप्त थे.

दोनों के दिल की धड़कन तेज़ थी.

एक लंबे चुंबन के बाद जब दोनों के होंठ अलग हुये, तो मंजरी बोली- यार, नानी अभी जाग रही होगी… पता नहीं उठ कर आ जाए तो? एक बार देख आऊँ!

मंजरी ने पहले जाकर ड्राइंग रूम में देखा, अब पता नहीं नानी जाग रही थी, या सो रही थी. बस एक बार देख कर ही मंजरी पुलकित को अपने रूम में ले गई.

स्लेटी रंग के फूलों वाले प्रिंट की लॉन्ग फ्रॉक पहने मंजरी बहुत खूबसूरत और सेक्सी लग रही थी. शादी में जाने के कारण उसने लिपस्टिक, बिंदी, काजल और न जाने क्या क्या मेकअप किया हुआ था.

पुलकित तो वैसे ही बहुत गोरा चिट्टा था, तो उसे किसी मेकअप की ज़रूरत नहीं थी.

बेडरूम में जा कर मंजरी बेड के पास जा कर खड़ी हो गई. पुलकित ने पहले बेडरूम की कुंडी लगाई और फिर वो भी मंजरी के पास आ कर उसके पीछे खड़ा हो गया. पुलकित ने उसको कंधे से पकड़ कर अपनी ओर घुमाया, तो मंजरी खुद ही उसके सीने से लग गई.

‘ओह, मेरी प्यारी मंजरी, आज मौका मिला है मुझे तुम्हें अपनी पत्नी बनाने का!’ कह कर पुलकित ने मंजरी को बांहों में जकड़ कर ऊपर को उठा लिया तो मंजरी ने अपनी आँखें बंद कर लीं.

अभी कुछ देर पहले जिस लड़की ने खुले आँगन में अपने प्रेमी को चुम्बन दिया था, अब अपने उसी प्रेमी से शरमा रही थी क्योंकि अब वो जानती थी कि आगे क्या होने वाला है.

पुलकित ने भी बिना कोई और बात किए, मंजरी के लिपस्टिक लगे सुर्ख होंठों पर अपने होंठ धर दिये. जैसे ही पुलकित ने मंजरी का ऊपर वाला होंठ अपने होंठों में लिए, मंजरी ने भी पुलकित का नीचे वाला होंठ अपने होंठों में ले लिया दोनों बारी बारी से कभी ऊपर वाला तो कभी नीचे वाला होंठ चूस रहे थे, दोनों की साँसें तेज़, धड़कन भी तेज़… दोनों ज़ोर ज़ोर से एक दूसरे को अपनी बाहों में समेटने की ऐसी कोशिश कर रहे थे, जैसे एक दूसरे को खुद में समा लेना चाहते हों.

इसी चूमा चाटी में पुलकित ने मंजरी को पीछे को धकेल कर बेड पे लिटा दिया और खुद भी उसके ऊपर ही लेट गया. पुलकित का तना हुआ लंड मंजरी के पेट पर रगड़ खा रहा था.

पुलकित ने मंजरी के कानों के झुमके, गले की माला सब उतार दिये. एक बार फिर पुलकित झपटा मंजरी पर और उसके गर्दन और कंधों पर यहाँ वहाँ चूमने चाटने लगा.

मंजरी की भी हालत बहुत खराब हो रही थी, वो भी आँखें बंद किए बस ‘आह, आ… स्स… उफ़्फ़…’ ही बोल पा रही थी.

पुलकित ने अपने जूते उतारे, और फिर अपने कपड़े भी उतारने लगा और मन ही मन सोच रहा था कि ‘बस अब सब्र नहीं होता, पहले एक शॉट लगा लूँ, फिर सोचूँगा कि बाद में क्या करना है.’

एक ही मिनट में पुलकित नंगा हो गया. छह इंच का भूरे रंग का तीखा लंड ऊपर को मुँह उठाए हवा में झूल रहा था.
 
तड़प बढ़ती गई -2

मंजरी भी अपनी कपड़े उतारने लगी तो पुलकित ने मना कर दिया- नहीं, मेरी दुल्हन को मैं ऐसे ही चोदूँगा!

वो बोला.

मंजरी वैसे ही रुक गई.

पुलकित ने पहले मंजरी को बेड पे बिठाया, उसके पाँव नीचे ही लटक रहे थे, फिर उसने मंजरी को लेटा दिया. उसका घागरा ऊपर उठाया, नीचे उसने काले रंग की चड्डी पहनी थी. उसने एक झटके में उसकी चड्डी उतार फेंकी. नीचे आज ही शेव की हुई, गोरी चूत उसके सामने नंगी हो गई.

“वाह क्या मस्त चूत है तेरी, तुझे तो चोद कर जन्नत का नज़ारा आ जाएगा!” कह कर पुलकित ने उसकी दोनों टाँगें उठाई और अपने कंधे पे रख ली, मंजरी को थोड़ा अपनी तरफ खींचा, और अपना लंड उसने मंजरी की चूत पे रख दिया.

इससे पहले के मंजरी इसके लिए तैयार हो पाती, पुलकित ने ज़ोर लगा कर अपना लंड मंजरी की चूत में ठेल दिया.

मंजरी दर्द से तड़पी- धीरे पुलकित, दर्द होता है!

वो बोली.

मगर पुलकित ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया और फिर से अपना लंड उसकी चूत में ज़ोर से पेला, मंजरी फिर से तड़पी, मगर वो तड़पती रही, और पुलकित ज़ोर लगाता गया, जब तक के उसका पूरा लंड मंजरी की चूत में नहीं घुस गया.

मंजरी को यह उम्मीद नहीं थी कि उसका पहला सेक्स ऐसा होगा, वो तो सोच रही थी कि पुलकित पहले उससे बहुत सारा प्यार करेगा, फिर सेक्स करेगा, मगर पुलकित ने बहुत ही ज़्यादा जल्दबाज़ी की.

पुलकित को यह भय था कि अगर मंजरी का भाई और मम्मी घर आ गए तो कहीं उसे यह मौका भी न गंवाना पड़े, तो पहले एक बार मंजरी कंजरी को ठोक लो, चुदाई कर लो, प्यार बाद में करते रहेंगे.

बेशक मंजरी की चूत भी पूरी गीली थी और पुलकित का लंड ‘पिच पिच’ की आवाज़ करता हुआ अंदर बाहर आ जा रहा था, मगर फिर भी मंजरी को काफी दर्द हो रहा था. उसका पहला सेक्स जो था.

पुलकित नीचे झुका और उसे मंजरी के ब्लाउज़ की डोरी खोलनी शुरू की और उसका ब्लाउज़ ढीला करके उतार दिया. पहले भी उसने मंजरी के बोबे बहुत बार दबाये थे, चूसे थे, मगर आज का मज़ा ही कुछ और था.

पुलकित ने मंजरी के दोनों बोबे पकड़े और खूब ज़ोर ज़ोर से दबाये, जैसे नींबू में से रस निकाल रहा था. उसकी सख्त उंगलियों के निशान मंजरी के बोबों पर कई जगह बन गए थे. पुलकित किसी वहशी की तरह उसे नोच रहा था. कभी उसके होंठ चबा जाता कभी उसके निप्पल.

और सिर्फ 5 मिनट की चुदाई के बाद ही पुलकित ने अपनी जवानी के रस से मंजरी की चूत को भर दिया.

मंजरी को इस सेक्स में बिल्कुल मज़ा नहीं आया. न पुलकित ने उसे प्यार किया, न प्यार से सेक्स किया. वो वैसे ही नंगी लेटी छत को देखती रही. वो सोच रही थी, ये क्या किया है पुलकित ने, ये प्यार था या हवस की पूर्ति.

और मुझे तो उसने शांत ही नहीं किया, खुद की तसल्ली की और ठण्डा पड़ गया, मैं तो प्यासी ही रह गई.

भाई ने फुफेरी बहन को चोदा लेकिन बहन को मजा नहीं आया.

मगर फिर भी मंजरी ने दिल नहीं छोटा किया, वो पुलकित से एक पत्नी की भान्ति बोली- सुनिए जी, जब हम नहीं मिले थे न, तब मैं सोचती थी कि हमारा पहला मिलन बहुत ही यादगार होगा, आप मुझे बहुत प्यार करोगे, मगर आप ने तो बस अपनी ही आग बुझाई है, मैं तो अभी भी जल रही हूँ.

पुलकित बोला- जानेमन, मेरा भी अभी मन नहीं भरा है, मैं तो बस इस जल्दबाज़ी में के कहीं तुम्हारे घर के ना आ जाएँ, जल्दी गेम खत्म कर दी. अभी थोड़ी देर में मैं एक और पारी खेलूँगा, उसमें मैं तुम्हारे सारे शिकवे दूर कर दूँगा.

इसके बाद पुलकित ने मंजरी को एक किस किया. मंजरी उठ कर गई और बाथरूम में जा कर उसने अपना घागरा भी उतार दिया, पूरी तरह नंगी होकर उसने स्नान किया और बाहर आई.

मंजरी कमरे में आई तो पुलकित वैसे ही बेड पर लेटा था, उसका लंड ढीला सा हो कर एक तरफ को लटका पड़ा था और थोड़ा सा वीर्य उसके लंड से उसकी जांघ पर भी चू रहा था.

मंजरी को बाहर आते देख, पुलकित उठ कर बाथरूम में चला गया, और वो भी नहा कर बाहर आया. मंजरी ने अभी कपड़े नहीं पहने थे, वो सिर्फ अपने बदन पर अपना दुपट्टा लपेट कर ही बैठी थी. झीने दुपट्टे से उसका गोरा बदन अपनी झलक दिखा रहा था.

‘अरे…’ पुलकित बोला- यार माजरी, इस चुनरी में तो तू बहुत सेक्सी लग रही है.

मंजरी शर्मा गई.

पुलकित उसके पास आया, उसका हाथ पकड़ा और उसके पास बैठ गया- आज सच कहता हूँ, ज़िंदगी का पहला सेक्स करके मज़ा आ गया!

पुलकित बोला. मन ही मन वो सोच रहा था कि साली इस कंजरी मंजरी की सील बंद चूत पहली बार मिली है, इससे पहले तो सब रंडियां ही चोदी है.

“मगर मुझे कोई मज़ा नहीं आया” मंजरी बोली- सिर्फ एक उत्तेजना थी कि पहली बार सेक्स कर रही हूँ, मगर मज़ा नहीं आया. मुझे तो धीरे धीरे प्यार करने में मज़ा आता है. आप तो किसी वहशी की तरह टूट पड़े मुझ पर!

पुलकित ने उसे अपनी बाहों में जकड़ा और फिर से बेड पर लेट गया. मंजरी उसके सीने पर अपना सर रख कर लेटी रही.

पहले तो पुलकित मंजरी की पीठ पर हाथ फेरता हुआ इधर उधर की बातें करता रहा, फिर उसने मंजरी का दुपट्टा उतार दिया. मंजरी ने कोई ना नुकर नहीं की. अब मंजरी फिर से पुलकित

के सामने नग्न थी. पुलकित उसकी कमर के ऊपर चढ़ कर बैठ गया, उसका ढीला लंड मंजरी की नाभि को छू रहा था. दोनों प्रेमी एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे.

मंजरी ने हल्के से अपना सर हिला कर पुलकित को आने को कहा, पुलकित नीचे को झुका और उसने मंजरी के होंठों को चूम लिया.

फिर मंजरी ने, फिर पुलकित ने, फिर मंजरी ने और इस तरह चुंबनों के आदान प्रदान का सिलसिला ही चल पड़ा. पता नहीं कितनी बार दोनों ने एक दूसरे को चूमा. जब भी दोनों के होंठ आपस में मिलते दोनों के बदन में काम ज्वाला प्रज्वलित होती, दोनों में उत्तेजना बढ़ती और इसी उत्तेजना ने जहां पुलकित के लंड को फिर से सख्त कर दिया, उसी उत्तेजना ने मंजरी की चूत को फिर से पानी से भिगो दिया.

पुलकित बोला- मैंने कहा सुनती हो! अपने पति का लंड चूसोगी क्या?

और वो हंसा.

मंजरी ने उसको एक मीठी झिड़की दी- छी… ऐसे नहीं बोलते, ऐसे कहो कि मेरी चॉकलेट खाओगी क्या?

“अच्छा जी” पुलकित बोला- और अगर मुझे तुम्हारी चूत चाटनी हो तो?

मंजरी ने बनावटी गुस्सा दिखाते हुये कहा- उंह, फिर वही बात, आप बोलो, मुझे कचोड़ी खानी है.

पुलकित भी हंस दिया- ओ के जी, तो क्या हम दोनों चॉकलेट और कचोड़ी एक साथ खा सकते हैं?

मंजरी बोली- हाँ, क्यों नहीं!

“तो पहले तुम मुझे चॉकलेट खा कर दिखाओ!” पुलकित बोला.

मंजरी उठी और उठ कर उसने पुलकित का लंड अपने हाथ में पकड़ा और अपने मुँह में ले लिया. मंजरी के नर्म, भीगे लबों के एहसास ने पुलकित के मन को एक अजीब से शांति दी, उसने अपनी आँखें बंद कर ली.

मगर मंजरी का भी यह पहला मौका था, किसी लंड को चूसने का, तो वो सिर्फ पुलकित के लंड को अपने मुँह में लेकर बैठी रही तो पुलकित बोला- सिर्फ मुँह में मत लो, इसे चूसो, जैसे मैंने तुम्हारी चूची पी थी, और अपनी जीभ से इस को चाटो भी.

मंजरी ने वैसे ही किया, तो पुलकित ने मौज में आ कर अपनी कमर को आगे को धकेला तो उसके लंड की चमड़ी पीछे हट गई और उसके लंड का टोपा मंजरी के मुँह में और आगे घुस गया.

मंजरी को एक उबकाई सी आई, मगर उसने फिर भी अपने मुँह से लंड बाहर नहीं निकाला और चूसती रही.

जब पुलकित ने देखा कि मंजरी अपनी आँखें बंद किए उसका लंड चूस रही है, तो वो भी घूमा और उल्टा हो कर मंजरी के ऊपर ही लेट गया. मंजरी की दोनों जांघें खोल कर पुलकित ने बीच में देखा, मंजरी ने शायद आज ही अपनी चूत के बाल साफ किए थे, इसलिए बहुत ही साफ और गोरी चूत थी. अंदर से गुलाबी, जब पुलकित ने उसकी चूत के दोनों होंठ अपनी उंगली से खोल कर देखे तो अंदर से उसकी चूत पूरी तरह से गीली थी.

पुलकित ने पहले तो उसकी चूत के ऊपर ही किस किया, फिर उसकी बाहर को उभरी हुई चूत को अपने मुँह में लिया और अपनी जीभ उसकी चूत की दरार में घुमाई. मंजरी ने अपनी जांघें भींच ली, शायद उसे बहुत मज़ा आया, या गुदगुदी हुई. मगर पुलकित को भी उसकी चूत का हल्का नमकीन स्वाद बहुत अच्छा लगा. उसने मंजरी की दोनों टाँगें पूरी तरह से खोल दी और अपना पूरा मुँह उसकी चूत से सटा दिया कि उसके होंठों और मंजरी की चूत के होंठों में से हवा भी न गुज़र सके.

मंजरी शायद पुलकित से भी ज़्यादा उत्तेजित थी, क्योंकि पुलकित एक बार स्खलित हो चुका था, मगर मंजरी नहीं हो पाई थी. इसी वजह से जैसे जैसे पुलकित मंजरी की चूत चाटता जा रहा था, मंजरी की तड़प बढ़ती जा रही थी.

अब तो मंजरी पुलकित के लंड को खा जाने की हद तक चूस रही थी, कभी कभी तो वो उसका पूरा का पूरा लंड निगल जाती, और उसके लंड की जड़ में जा कर अपने दाँतो से काट देती. कभी कभी मंजरी इतनी ज़ोर से अपनी कमर को झटका देती के पुलकित का मुँह उसकी चूत से फिसल जाता, मगर उसने भी मंजरी की कमर को पूरी मजबूती से पकड़ा हुआ था.

जितना मंजरी तड़पती, उतना पुलकित उसे काबू कर के रखता. लंड मुँह में होने के बावजूद मंजरी के मुँह से ‘ऊंह… ऊँ… हूँ…’ निकल रही थी.

आज तो ये आलम था कि अगर मंजरी का बस चलता तो वो पुलकित के लंड को चबा कर खा जाती.

तड़प बढ़ती गई और तड़पते तड़पते, उछलते कूदते, मंजरी स्खलित हो गई. जब वो स्खलित हुई तो उसने पुलकित का लंड अपना मुँह से निकाल दिया और उसकी जांघ पर बहुत ज़ोर से काट लिया. पुलकित को दर्द हुआ, पर फिर भी उसने मंजरी की चूत चाटनी नहीं छोड़ी. मंजरी अपने दोनों हाथों से पुलकित का सर अपनी दोनों जांघों से निकालना चाहती थी, वो चाहती थी कि पुलकित के होंठ उसकी चूत से हट जाएँ, मगर पुलकित उसको शांत होने से पहले छोड़ना नहीं चाहता था इसलिए उसने मंजरी को खूब तड़पाया.

बहुत तड़प के बाद मंजरी शांत हुई तो पुलकित ने अपना मुँह ऊपर उठाया. मंजरी के बोबों के दोनों निप्पल तीर की तरह तीखे ऊपर को उठे हुये थे. मंजरी को हल्का पसीना भी आ रहा था, तेज़ तेज़ चलती सांस, तेज़ धक धक धड़कता दिल.

उसने पुलकित की ओर देखा- तुमने तो मुझे मार ही दिया था, मुझे नहीं पता था कि सेक्स करने में इतना मज़ा आता है, मेरे तो सारा बदन झनझना उठा है.

कह कर वो पुलकित की ओर देख कर मुस्कुराई. उसके चेहरे पर बहुत ही संतुष्टि के और पुलकित के लिए प्रेम के भाव थे.

पुलकित बोला- अब मैं अपना काम भी कर लूँ.

मंजरी ने अपने हाथ में पुलकित का लंड पकड़ा और अपनी और खींच कर बोली- मेरी क्या औकात स्वामी कि मैं आप को रोक सकूँ!

पुलकित ने मंजरी को उल्टा कर के लेटाया और पीछे से अपना लंड उसकी चूत पर रखा और अंदर डाल दिया. गीली भीगी चूत में उसका लंड फच्च से घुस गया. मंजरी को दर्द हुआ पर वो संतुष्ट हो कर लेटी रही.

अगले 10 मिनट तक पुलकित ने अपनी पूरी ताकत लगा दी मंजरी पर. पूरे ज़ोर से वो अपना लंड मंजरी की चूत के अंदर मारता, मंजरी को लगता जैसे पुलकित का लंड उसके पेट तक पहुँच जाता हो. मगर वो अब पुलकित के हर ज़ुल्मो सितम को सहने को तैयार थी.

वो शांत लेटी रही और पुलकित उसे फिर किसी वहशी की तरह नोचे जा रहा था.

मगर अब मंजरी को इस नोचने में भी आनन्द आ रहा था. इस बार फिर पुलकित ने मंजरी से पहले हार मान ली. हालांकि एक मिनट और भी वो खुद को रोक लेता तो मंजरी भी उसके साथ ही धराशायी हो जाती. मगर जैसे ही पुलकित स्खलित हुआ, मंजरी बोली- थोड़ी देर और करो यार, मेरा भी होने वाला है.

मगर तब तक पुलकित की विकेट गिर चुकी थी, वो निढाल होकर गिर गया.

मंजरी ने तभी अपनी दो उंगलियाँ अपनी चूत में डाली और ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे करने लगी और 10 सेकंड में ही उसने भी अपनी जांघें भींच ली. दो बदन निहाल हुये पड़े थे, कितनी देर दोनों नंगे लेटे रहे, फिर दोनों ने उठ कर कपड़े पहने और खुद को और कमरे को व्यवस्थित किया.

उसके बाद मंजरी पुलकित की गोद में सर रख कर लेट गई और सो गई.

पुलकित टीवी देखता रहा.

करीब एक घंटे बाद माधुरी और उसका बेटा घर वापिस आए.

जब माधुरी कमरे में घुसी तो बोली- यह कैसी अजीब से गंध आ रही है कमरे से?

मगर पुलकित और मंजरी दोनों मुकर गए- कैसी गंध? हमें तो नहीं आ रही, कहीं बाहर से आ रही होगी.

खैर माधुरी भी थकी थी, कपड़े बदल कर सब सो गए.

सुबह पुलकित अपने घर चला गया.

उसके बाद 4 साल तक मंजरी और पुलकित का अफेयर चला. मगर पुलकित ने उस से शादी नहीं की. पुलकित तो मन ही मन मंजरी को मंजरी नहीं कंजरी कहता था. उसे तो चूत से मतलब था.

मंजरी को भी पता था कि वो उसका रिश्ते में भाई लगता है तो दोनों की शादी होना मुश्किल है. और दोनों का यह अफेयर तो चला ही चुदाई के लिए थी.

पता नहीं क्यों जिस लड़की को लड़का खुद शादी से पहले चोद लेता है, उस से शादी क्यों नहीं करता.

शायद लड़का यह सोचता है कि शादी से पहले ही चुद गई तो पता नहीं किस किस से चुदती होगी.
 
ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैया और चूसो

हैल्लो दोस्तों, मेरी बहन पदमा जब 22 साल की हुई तब में 21 साल का था. मेरा नाम आशु है और में एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता हूँ. मेरा कद 5 फुट 11 इंच है और में बहुत कसरती जिस्म का मालिक हूँ. जिस कम्पनी मे में काम करता हूँ उसकी मालकिन मिस कुकरेजा एक 40 साल की महिला है जिसका पति मर चुका है और उसके एक बेटा और एक बेटी है. उसका बेटा अनिल मेरा दोस्त है और वो बिल्कुल लड़की जैसा दिखता है.

अनिल की उम्र कोई 23 साल की है और उसकी बहन अनीला 20 साल की है. दोनों भाई बहन बहुत सुंदर दिखते है. मिस कुकरेजा भी काफ़ी प्रभावशाली औरत है. बेशक अनिल की उम्र 23 साल की हो चुकी है, लेकिन उसकी शादी अभी तक नहीं हुई क्योंकि में कुकरेजा फेमिली का दोस्त हूँ इसलिए मिस कुकरेजा मुझे अपना बेटा ही मानती है. अनिल स्लिम सा लड़का है, बहुत गोरा, गुलाबी होंठ, कद कोई 5 फुट 7 इंच, भूरे बाल और सबसे आकर्षित करने वाली चीज़ उसकी गांड है जो काफ़ी उभरी हुई है. मेरे दोस्त लोग आमतौर पर बातें करते है कि अनिल को लड़की होना चाहिए था क्योंकि उसकी गांड चुदने वाली है. में और अनिल एक साथ पढ़ते थे और पढ़ाई के बाद मुझे उसकी माँ ने नौकरी पर रख लिया था. में कुकरेजा परिवार का बहुत एहसानमंद हूँ.

मेरी माँ यशोदा एक स्कूल में टीचर है और पिता जी का देहांत हो चुका है. मेरी दीदी पदमा कॉलेज में पढ़ती है और बहुत सेक्सी है, पदमा 5 फुट 5 इंच की सेक्सी लड़की है और कई बार लड़के मेरी बहन के कारण एक दूसरे से लड़ाई कर चुके है, लेकिन मेरी बहन किसी को घास नहीं डालती. पदमा का जिस्म 36-24-36 है और गोरा रंग, कटीले नेन. वो अधिकतर टाईट जीन्स और टॉप पहनती है जिसमें से उसकी सेक्सी गांड और चूची का उभार देखने को बनता है. बेशक पदमा मेरी बहन है फिर भी मेरा ध्यान उसके हुस्न की तरफ चला ही जाता है.

एक बार वो अपने रूम मे कपड़े बदल रही थी और दरवाजा लॉक करना भूल गयी और में ग़लती से रूम मे घुस गया. पदमा बिल्कुल नंगी थी और उसका साँचे में ढला हुआ नंगा जिस्म देखकर मेरी साँस रुक गयी. मेरी बहन की लंबी टाँगें, कसरती जांघे और सपाट पेट देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया. उसने झट से अपने हाथों से अपनी बड़ी-बड़ी चूची को ढक लिया, लेकिन में उससे पहले ही पदमा दीदी के जिस्म को देख चुका था. फिर में मांफी मांगता हुआ वापस लौट गया, लेकिन दीदी के नंगे जिस्म की तस्वीर ना भुला सका.

अब 25 जून को मेरी बहन का जन्मदिन है और में कुकरेजा फेमेली को इन्वाईट करने चला गया. सबसे पहले मुझे अनीला मिली अनीला एक स्लिम सी सेक्सी लड़की है, जिसकी चूची कोई 34 करीब होगी और गांड भी बिल्कुल कसी हुई है और मुझे उसके जिस्म पर कोई भी कमी नहीं दिखती. भूरी आँखें और भूरे बालों वाली अनीला क़िसी का भी दिल जीत सकती है और में भी उसके हुस्न का आशिक था.

वो मुझे प्यार की नज़र से कभी-कभी देख लेती थी, लेकिन में उन लोगों के बराबर नहीं था इसलिए में हमेशा अनीला को बस इज़्ज़त की नज़र से देखता था. मिस कुकरेजा ने मेरे इन्विटेशन के बारे मे कहा कि बेटा में तो आ नहीं पाऊँगी, लेकिन अनिल और अनीला पदमा के बर्थ-डे पर ज़रूर आयेंगे. ख़ैर अब मेरी बहन के जन्मदिन पर अनिल पदमा पर फिदा हो गया और या यह कहो कि अनीला मेरी बहन को अपनी भाभी बनाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो गयी.

फिर उसने अपने भाई से ना जाने क्या कहा कि अनिल बोला कि आशु मुझे तेरी बहन बहुत पसंद है और में तुझे अपना साला बनाना चाहता हूँ क्या हुस्न है? तेरी बहन पदमा का, तू मुझे अपना जीजा बना ले. में सारी उम्र उसको हर खुशी दूँगा और अपनी रानी बनाकर रखूँगा. मुझे ये रिश्ता पसंद था अनिल एक ईमानदार लड़का था, सुंदर था, अमीर था. फिर मैंने माँ से बात कि तो वो तुरंत मान गयी, लेकिन अब मिस कुकरेजा पर निर्भर करता था कि ये रिश्ता होगा या नहीं.

फिर अनिल और अनीला ने अपनी माँ से बात चलाई तो मिस कुकरेजा ने मुझे ऑफिस मे बुलाया. मिस कुकरेजा उस वक्त सफेद साड़ी मे अपनी कुर्सी पर बैठी हुई थी. वो बोली कि आशु बेटा मुझे इस रिश्ते से कोई एतराज़ नहीं है अगर तुम अनिल को अच्छी तरह जानते हो, समझते हो और उसको अपनी बहन का सुहाग बनाना चाहते हो तो मुझे ये शादी मंज़ूर है, लेकिन फिर बाद में मुझे क़िसी बात पर दोषी मत ठहराना. फिर में बोल उठा आपको दोषी, नहीं आंटी, कभी नहीं ? आप तो हम लोगों को इतना प्यार करती है, तो ठीक है हम शादी की तैयारी शुरू करते है.

अब पदमा भी बहुत खुश थी, होती भी क्यों ना? उसको इतना पैसे वाला पति मिल रहा था. शादी की शॉपिंग मे में और अनीला भी बहुत काम कर रहे थे और अनीला भी मेरे नज़दीक आ रही थी, वो बात-बात पर हंस देती मुझे पीठ पर हाथ मारती और कई बार तो गले से लिपट जाती. फिर मुझे लगा कि वो मेरे साथ अपना चक्कर चलाने के मूड में है. ऐसी सेक्सी लड़की के साथ संबंध बनाने मे मुझे क्या एतराज़ हो सकता था? अब अनिल और पदमा की शादी हो गयी और कुछ दिन के बाद पदमा हमारे घर वापस आई, लेकिन उसके चेहरे पर कोई खास खुशी नहीं झलक रही थी. मेरा एक दोस्त पदमा की शक्ल देखकर मुझसे अकेले मे बोला आशु क्या बात है? पदमा दीदी खुश नज़र नहीं आती. में तो सोचता था कि शादी के बाद पदमा दीदी खिल उठेगी, लेकिन ये तो मामला ही कुछ और है.

सच कहूँ तो शादी के बाद जब औरत को खूब अच्छा लंड मिले और खूब ज़ोर से चुदाई हो तो पूरा बदन खिल उठता है. आशु कहीं अनिल जीजा जी के लंड मे तो कोई कमी नहीं है. साले अगर मुझे मौका मिलता तो चाहे में पदमा को दीदी पुकारता हूँ, लेकिन उसको चोद-चोदकर कली से फूल बना देता. मुझे मेरे दोस्त की बात पर बहुत गुस्सा आया और मैंने उसको बाहर जाने को कह दिया, लेकिन मेरे दोस्त के शब्द मेरे दिमाग मे टिक गये.

फिर अगले दिन दोपहर को में अनिल से बात करने गया तो पता चला कि वो गोदाम मे गया हुआ है. गोदाम के बाहर चौकीदार ने मुझे देखा तो बोला साहब अन्दर जाने की क़िसी को इजाजत नहीं है, लेकिन आप तो साहब के साले हो तो चले जाओ. फिर में अंदर गया तो सारा गोदाम खाली पड़ा था. में मुड़ने ही वाला था की एक कमरे से आवाज़ें आ रही थी, हह्ह्ह्ह ज़ोर से अकबर भाई, ज़ोर से चोदो अपनी रानी को बहुत दिनों के बाद मौका मिला है, आअहह चोदो मुझे अकबर, क्या मस्त लंड पाया है आपने? वाहह अकबर भाई.

ये आवाज़ तो अनिल की थी और अकबर हमारी कंपनी मे एक ड्राइवर था, दरवाजा कुछ खुला था और मुझे अनिल नग्न रूप मे घुटनों और हाथों के बल झुका हुआ नज़र आया. अनिल की गोरी गांड उठी हुई थी और अकबर का कम से कम 7 इंच लंबा और मोटा लंड अनिल की गांड में घुसा हुआ था. अकबर मेरे जीजा को बेरहमी से चोद रहा था और अनिल मज़े से लंड अपनी गांड मे ले रहा था. अकबर क़िसी कुत्ते की तरह हाँफ रहा था. फिर अकबर बोला हाँ मालिक जब से आप शादी मे व्यस्त थे, मुझे भी ऐसी गांड नहीं मिली.

अब तो मेरी बीवी भी गांड मरवाने से मना करती है और मुझे गांड के बिना कुछ और अच्छा नहीं लगता. मालिक आप ही मेरी रानी बने रहो, मुझे कोई बीवी नहीं चाहिए. अब अनिल भी नीचे से बोला कि अकबर भाई मैंने भी पदमा से शादी करके यू ही मुसीबत मोल ले ली है, अगर मेरी बहन मुझे ना कहती तो में कभी ये शादी नहीं करता, लेकिन में अपनी बहन को क्या कहता कि मुझसे ठीक तरह से चुदाई नहीं होगी? या ये कहता कि में पदमा को क्या चोदूंगा? मुझे तो खुद को अपनी गांड के लिए अकबर भाई का लंड चाहिए. अब में उनकी और बातें सुन नहीं सका और गुस्से से भरा हुआ मिस कुकरेजा के रूम में गया.

फिर में बोला आंटी मेरी बहन शादी से खुश नहीं है, अनिल तो खुद कहता है कि वो ठीक से चोद नहीं सकता, वो तो खुद गांडू है और इस वक्त गोदाम मे अकबर से गांड मरवा रहा है. आंटी मेरी बहन की तो ज़िंदगी बर्बाद हो गयी ना. फिर मिस कुकरेजा अपनी सीट से उठी और मुझे अपनी बाहों में भरकर सीने से लगाते हुए बोली कि आशु बेटा मैंने तुझसे कहा था ना कि कल मुझे दोष मत देना. असल में अनिल के पिता भी लंड के मामले में कमज़ोर थे, लेकिन मुझे ये पता नहीं था कि उसको ये गांड कि भी बीमारी है. बेटा निराश मत होना जो करना होगा में करूँगी.

में कभी पदमा के जज़्बातों का नुकसान नहीं होने दूँगी, आख़िर पदमा अब हमारे घर की बहू है. में अनिल से बात करूँगी और समस्या का हल ढूंढ ही लूँगी और फिर अनीला भी तो तुझसे शादी करना चाहती है, अब मेरी एक नहीं दो बेटियाँ है अनीला और पदमा और जल्द ही अनिल तुझसे बात करेगा. फिर में बोला अनिल साला मुझसे क्या बात करेगा? जो करना था वो ठीक से कर नहीं पाया, लेकिन उसी रात अनिल ने मुझे एक बार में बुलाया और दो पेग विस्की के पीने के बाद मुझसे बोला यार में जान चुका हूँ कि तुझे मेरे उस शौक के बारे मे पता चल गया है और तुम जानते हो कि मेरे लंड में इतनी ताक़त नहीं है, लेकिन मेरे पास एक बहुत अच्छा सुझाव है अगर कहो तो बोलूं?

फिर मैंने कहा अब क्या सुझाव बचा है मेरी बहन की ज़िंदगी बर्बाद करके? देख आशु पदमा की चुदाई तो होगी अगर में नहीं करता तो कोई और करेगा. अब किसी बाहर के आदमी से हो तो घर की इज़्ज़त का क्या होगा? मेरी बात मान लो तुम खुद पदमा की चुदाई जी भरकर कर लो.

तुम दोनों भाई बहन पर क़िसी को शक भी नहीं होगा और में तुझे अपनी मनाली वाली कोठी की चाबी भी दूँगा जहाँ तुम दोनों अपना हनीमून मना लेना. तुझे भी अपनी बहन के जिस्म का मज़ा मिल जायेगा और अगर भगवान की मर्ज़ी हुई तो पदमा माँ भी बन जायेंगी और सारे समाज मे में भी बाप कहलाऊंगा. फिर कल को तुझे ही तो अनीला का पति बनाना है. फिर तुम हमारे घर मे रहकर दोनों को चोद सकते हो बोलो मंज़ूर है? लेकिन में पदमा को कैसे? वो मेरी बहन है, ये कैसे हो सकता है? फिर अनिल पेग पीकर फिर से बोला तो हम क्या पदमा को क़िसी और गैर से चुदने के लिए छोड़ दें ? इससे बेहतर होगा कि तुम ही उसकी जवानी के मज़े लूट लो और घर की इज़्ज़त भी बची रहेगी. फिर में बोला लेकिन अगर मैंने अपनी बहन को स्पर्श भी किया तो वो मुझे जान से मार डालेगी, चोदना तो दूर की बात है.

फिर अनिल बोला तू उसकी चिंता मत कर कल ही हम तीनों मनाली जायेंगे और में पदमा को चोदने की कोशिश करूँगा और जब मुझसे चोदा नहीं जायेगा तो वो मुझे गाली देगी और तब तुम आ जाना. जब चूत जल रही होती है तो रिश्ते नहीं देखती और फिर अपनी बहन की चूत अपने लंड से भर देना, एक बार वो चुद गयी तो सदा के लिए तेरी हो जायेगी.

जीजा की बात सुनकर अचानक मेरा लंड खड़ा होने लगा और अपनी बहन को चोदने की इच्छा सच होती नज़र आने लगी. फिर अगले दिन हम तीनों मनाली की तरफ चल पड़े. पदमा को उत्तेजित करने के लिए अनिल बार-बार उसके जिस्म पर हाथ फेरने लगा. फिर हम दोपहर को शराब पीने लगे, अनिल जानबूझ कर मेरे सामने ही पदमा के साथ सेक्सी बातें करने लगा, जिनको सुनकर पदमा का रंग लाल होने लगा.

फिर मनाली पहुँचकर अनिल बोला आशु तुम पास वाले कमरे मे सो जाओ और में अभी अपनी बीवी के साथ चुदाई के मज़े लेता हूँ. उसकी बात सुनकर पदमा शर्म से लाल हो उठी थी. शराब पी होने की वजह से अनिल का लंड जो थोड़ा बहुत खड़ा होता था वो भी नहीं हुआ था. फिर पदमा गुस्से में चिल्लाने लगी कि अनिल बहनचोद अगर लंड में कमज़ोरी थी तो मुझसे शादी क्यों की? साले अब इस जलती हुई चूत को में कहाँ लेकर जाऊं? मादरचोद की औलाद, साले नपुंसक कहीं के.

फिर अनिल शर्मिंदा हुआ बाहर निकला और बोला आशु तू अब बस 5 मिनट इंतज़ार करना, फिर अंदर चले जाना तेरा मामला फिट हो जायेगा. फिर ठीक 5 मिनट के बाद जब मे पदमा दीदी के रूम मे गया तो मैंने देखा कि पदमा नंगी पलंग पर लेटी हुई है और जांघे फैलाकर अपनी चूत मे उंगली कर रही थी. सच मानो तो उस समय मेरी बहन कोई कामदेवी लग रही थी. उसकी शेव की हुई चूत से पानी टपक रहा था और वो आँखें बंद किए हुई थी और चूत रगड़ रही थी.

फिर मैंने हिम्मत की और पलंग के पास जाकर उसके नंगे जिस्म पर हाथ फेरने लगा तो उसने झट से अपनी आँखें खोल दी और बोली भैया तुम यहाँ क्या कर रहे हो? जाओं यहाँ से, लेकिन फिर मैंने अपने हाथ उसकी चूची पर रख दिए और रगड़कर बोला दीदी में तुझे ऐसे प्यासी कैसे छोड़ दूँ? आख़िर भाई का भी कोई फ़र्ज़ होता है या नहीं? अगर जीजा नपुंसक हो तो क्या भाई का फ़र्ज़ नहीं बनता कि अपनी बहन की चूत की आग ठंडी करे, ऐसा मदमस्त जिस्म क्या भगवान हर क़िसी को देता है? दीदी अपनी भारी-भारी चूची, आपकी मस्त चूत जो बेचारी मस्त लंड के लिए तरस रही है और आपकी गांड सब मुझे पागल बना रही है. दीदी अब मुझे चुदाई से मत रोकना, में अपनी पदमा दीदी की चूत चोदे बिना आज यहाँ से जाने वाला नहीं हूँ, अगर मुझ पर विश्वास नहीं होता तो अपने भाई का लंड देख लो.

फिर मैंने ये कहते ही अपनी पेंट उतार दी और अपना 9 इंच वाला मोटा लंड पदमा को दिखाते हुए उसके हाथ मे दे दिया. मेरा मोटा लंड मेरी काली झांटो के बीच में से क़िसी काले नाग की तरह फूंकार रहा था. दीदी अब बताओ कि आपके भाई का लंड मस्त है या नहीं? आपकी मस्त चूत इसको अंदर लेने के लिए मचल रही है या नहीं? अब पदमा के भाव बता रहे थे कि वो एक पल के लिए झिझकी, लेकिन फिर वासना ने उस पर काबू पा लिया.

फिर मैंने कमीज़ भी उतार दी और कमरे का दरवाजा बंद करने के लिए बढ़ा तो पदमा बोली कि नहीं मेरे प्यारे भैया दरवाज़ा खुला ही रहने दो, अगर मेरा नपुंसक पति देखना चाहे तो देख ले कि मर्द का लंड कैसा होता है? और जवान औरत की प्यास कैसे बुझाई जाती है? आ जाओ भैया और तोड़ दो मेरी सील, जो शायद आज तक मेरे भैया के लिए ही बची हुई थी. मेरे भाई आज मुझे अपना बना लो, मुझे इस मस्त लंड से चोदकर पूरी औरत बना लो, आपकी बहन आज से सिर्फ़ आपकी है.

फिर में भी पदमा दीदी की बात सुनकर पूरा जोश में आ गया और अपनी दीदी के होंठों को चूमने लगा. उसके होंठों पर जीभ फेरते हुए उसके नंगे जिस्म से लिपटने लगा. हमारे जिस्म जल रहे थे और दीदी अभी भी मेरे लंड को पकड़े हुई थी और में उसको चूम रहा था. फिर मैंने बोला कि दीदी तुमने कभी लंड चूसा है? तो दीदी मचलकर बोली कि अभी तक तो नहीं, लेकिन आज अपने भैया का लंड चूसने की इच्छा ज़रूर है. अगर इजाज़त हो तो चूस लूँ? अगर चूस लेती हूँ तो मेरे भैया मेरे सईयां बन जायेंगे.

फिर मैंने दीदी की चूची को चूम लिया और बोला कि देर किस बात की, बना लो मुझे अपना सईयां. फिर दीदी ने झुककर मेरे लंड का टोपा चूम लिया और मेरे अंडकोष थामकर लंड को मुँह में ले लिया. फिर मैंने दीदी के बाल पकड़कर उसका मुँह अपने लंड पर टिका दिया और कमर आगे पीछे करने लगा.

फिर मैंने दीदी को पलंग पर सीधा लेटाकर उसके ऊपर चढ़ गया और अब मेरा मुँह दीदी की लाल चूत पर था और मेरा लंड उसके मुँह में था. हम 69 पोजिशन में एक दूसरे को चाटने लगे. अब दीदी की चूत का रस मुझे बहुत उत्तेजित करने लगा और उसकी चूत फड़फडाने लगी. अब देरी करना फ़िज़ूल था क्योंकि दीदी अब बहुत गर्म हो चुकी थी. मैंने दीदी से पूछा कि अब चुदाई शुरू करें? तो दीदी बोली हाँ भैया, अब इंतज़ार नहीं होता पेल डालो अपना लंड मेरी चूत में भैया और इस रात को यादगार बना दो. अब दीदी ने शर्म छोड़कर मुझे चोदने का निमंत्रण दिया. अब मैंने चूत की भीगी हुई फांकों को फैलाकर लंड चूत के मुँह पर टिका दिया और धड़कते दिल से मैंने लंड को एक धक्का मारा और मेरा पूरा टोपा चूत में घुस गया, ओह भैया धीरे से आहह में मर गयी, अहह भैया धीरे से उई माँआआ धीरे से भैया. फिर मेरे लंड को चूत के अंदर गर्माहट महसूस हुई और मैंने धीरे से लंड और आगे बढ़ा दिया.

फिर में दीदी की गांड को थाम कर धीरे-धीरे लंड अंदर पेलने लगा, सच मानों दोस्तों ऐसा मज़ा मुझे आज तक नहीं मिला था. दीदी की चूत जन्नत का दरवाजा थी. मेरे लंड पर कसी हुई दीदी की चूत की दीवारें मेरे लंड को सहला रही थी. जब आधे से ज्यादा लंड चूत में घुस गया तो दीदी अपने चूतड़ उठाकर और लंड लेने लगी. में दीदी के ऊपर सवार था और जन्नत का मज़ा लेते हुए चुदाई करने लगा और चूत की चिकनाहट के कारण अब लंड आसानी से चूत में घुस रहा था.

फिर कोई 5 मिनट में लंड पूरा चूत में समा गया. मेरी रानी बहन मेरा लंड पूरा अपनी चूत में ले चुकी थी. मेरी रानी तेरी क्या मस्त चूत है? अहहहह क्या मस्त है मेरी बहना? अब तो दर्द नहीं हो रहा पदमा रानी? तो दीदी मज़े से आँखें बंद किए हुए बोली नहीं मेरे राजा भैया, अब तो मज़ा आ रहा है, चोद डालो अपनी लाडली बहना को, शाबाश राजा भैया, पेलो अपना लंड अपनी सजनी की चूत में, अब तो हम भाई बहन सिर्फ़ दुनिया के लिए ही है असल मे तो मेरा भाई मेरा पति है, ऑह्ह्ह्ह मेरे भैया का कितना मस्त लंड है.

अब दीदी अपनी गांड उठाकर चुदवाने लगी थी और में बहुत जोश में आकर ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. अब पूरा कमरा फ़च फ़च की आवाज़ों से गूँज रहा था और चुदाई का संगीत चारों तरफ था और चुदाई की सिसकियाँ हम दोनों भाई बहन के मुँह से निकल रही थी. मेरा लंड क़िसी पिस्टन की तरह अपनी सग़ी बहन की चूत चोद रहा था. अब हमारे जिस्म पसीना-पसीना हो चुके थे और में आगे झुक कर दीदी के बूब्स चूसने लगा. दीदी मदहोश हो गई और बोली ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैया और चूसो आआआआआ म्‍म्म्मममममम चोदो मेरे राजा चोदो मुझे, मुझे हर रोज ऐसे चोदना भैया. फिर में दीदी को चोदने लगा और दीदी बेकाबू होने लगी, भैया मुझमे समा जाओ, रोज़ चोदना मुझे, भर दो मेरी चूत अपने लंड से, बना दो मुझे अपनी पत्नी, मुझे अपने बच्चे की माँ बना दो भैया. फिर लगातार चुदाई के बाद दीदी झड़ गई और वो पूरी तरह से संतुष्ट हो गई थी. अब हम बहुत चुदाई करते है और खूब मजे लेते है.
 
दीदी और उसकी सास चोदा

हैल्लो दोस्तों, कैसे है आप सब? में आज बहुत दिनों के बाद कोई नयी कहानी पेश करने जा रहा हूँ। मुझे चुदाई का चस्का ही मेरी माँ और बुआ ने लगाया था और उन्होंने अपनी भोसड़ी में मुझे ऐसा घुसाया था कि आज तक मेरा उनकी भोसड़ी में ही घुसा रहने को जी चाहता है। हाँ कभी-कभी मेरी बड़ी दीदी भी अपना एक बच्चा पैदा की हुई चूत फैलाकर मुझसे चुदवा लेती है और जब से उसने मुझसे चुदवाया है, तब से वो अपने पति यानी कि जीजा जी का लंड अपनी चूत में लेना पसंद ही नहीं करती है। जब वो पिछली बार यहाँ आई थी, तब मैंने माँ और उसको एक साथ चोदा था, जिसके बारे में फिर कभी बताउंगा। अभी तो में फिलहाल उसकी सास के बारे में आप सबको बताने जा रहा हूँ कि कैसे इस बार मैंने उनकी सास को सैकड़ों धक्के दिए और उसकी भोसड़ी की चुदाई की? हाँ तो बहनों और भाइयों अपने लंड और चूत पर अपना हाथ रख ले। फिर इस बार जब में दीदी के ससुराल गया तो मैंने वहाँ दीदी और उनकी सास के अलावा एक हट्टे-कट्टे पहलवान जैसे आदमी को देखा, जिसकी उम्र 46-47 साल रही होगी और दीदी के ससुर और पति हर बार की तरह इस बार भी कहीं बाहर गये हुए थे।

फिर मैंने दीदी से उस अजनबी के बारे में पूछा तो उसने बताया कि ये मामा जी है माँ के दूर के भाई लगते है, लेकिन असल में माँ जी इनके साथ खूब रंग रेलिया मनाती है, मैंने कई बार इन दोनों को खुद अपनी आँखों से चुदाई करते देखा है। अब मुझे तो यकीन ही नहीं आ रहा था, लेकिन जब दीदी ने बताया तो यकीन करना पड़ा, क्योंकि उसकी सास काफ़ी धर्म-कर्म वाली सीधी साधी औरत लगती थी। फिर मैंने दीदी से कहा कि आपकी सास तो बहुत सीधी साधी लगती है। तो वो बोली कि हाँ बिल्कुल हमारी माँ जैसी ना और ये कहकर हम दोनों हँसने लगे। उनकी सास की उम्र भी हमारी माँ के जितनी ही थी, यानी कि 44-45 साल के करीब और उनकी बड़ी-बड़ी ठोस चूचीयाँ किसी का भी ध्यान अपनी तरफ खींच लेती थी। फिर मैंने दीदी से कहा कि क्या माँ जी मुझसे चुदवाएगी? तो दीदी हँसने लगी और बोली कि मुझे तो यकीन है कि वो चुदवा लेगी, लेकिन इस काम में पहल तुझको ही करनी पड़ेगी।

फिर मैंने कहा कि अगर में इन दोनों को चुदाई करते वक़्त रंगे हाथ पकड़ लूँ तो मेरा काम बन सकता है। तो फिर दीदी बोली कि हाँ तब तो तेरा काम आसान हो जाएगा। फिर मैंने पूछा कि क्या माँ जी रोज़ रात को मामा जी से चुदवाती है? तो दीदी बोली कि नहीं रोज़ तो नहीं, लेकिन अब ये तो खुजली की बात है कभी-कभी वो दोनों दिन में ही शुरू हो जाते है और मैंने तो अक्सर उन दोनों को दिन में ही चुदाई करते देखा है और तब मुझे तुम्हारे लंड की बहुत याद आती है मेरे भाई और इतना कहकर दीदी ने मेरा लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी। फिर मैंने कहा कि हाय दीदी कोई देख लेगा, तो हम दोनों के बारे में क्या सोचेगा? फिर दीदी बोली कि आज रात को तुझे मेरी प्यास बुझानी है, मेरी चूत रानी बहुत दिन से सुलग रही है, अब तू आया है तो इस पर मेहरबानी करके जाना। फिर मैंने कहा कि ठीक है दीदी, आज रात को ही तुम्हारी चूत चोदूंगा और तुम्हारी सास को भी रंगे हाथ पकडूँगा।

फिर रात को हम लोग खाना खाने के बाद जल्दी ही अपने-अपने रूम में चले गये। मेरी मामा जी से हाय हैल्लो हुई थी और सासू माँ ने भी मुझे सीने से लगाया था, तब ही से उनकी चूचीयाँ अब तक मेरे सीने में चुभती हुई महसूस हो रही थी। फिर मैंने दीदी से पूछा कि क्या मामा जी माँ के रूम में ही सोते है? तो वो बोली कि नहीं, वो दोनों काफ़ी देर तक बातें करते है और फिर मामा जी गेस्ट रूम में जाकर सो जाते है। फिर थोड़ी देर के बाद हमें सासू माँ के रूम से हंसने खिलखिलाने की आवाज़ आने लगी, तो मैंने कहा कि दीदी लगता है आज मेरी किस्मत अच्छी है, अब बगल वाले रूम में चुदाई का प्रोग्राम शुरू होने जा रहा है। अब आप ये बताओं कि आप अपनी सास की चुदाई कहाँ से देखती हो? फिर दीदी मुझे बाथरूम में लेकर गयी, वहाँ की एक खिड़की आंटी के रूम की तरफ खुलती थी और जिस पर किसी का ध्यान ही नहीं जाता था। फिर मैंने देखा कि मामा जी साड़ी के ऊपर से ही माँ जी की चूचीयाँ दबा रहे थे और माँ जी अपने दोनों हाथ से मामा जी का लंड पजामे से बाहर निकालकर सहला रही थी और मामा जी का लंड खड़ा देखकर में और दीदी भी मस्त हो गये थे।

फिर मामा जी ने माँ जी की साड़ी उतारकर एक तरफ फेंक दी और उधर दीदी ने मेरा लंड बाहर निकालकर सहलाना चालू कर दिया था, जिससे वो भी खड़ा होने लगा था। अब उनकी सास को मामा जी ने पूरी तरह से नंगा कर दिया था और उनकी चूत पर ढेर सारे बाल भी थे। फिर मामा जी बोले कि शोभा तुमने झाटें कब से नहीं बनाई? अगली बार बना लेना, मुझे बड़ी हुई झाटें अच्छी नहीं लगती है, इधर देखो मेरा लंड कितना चिकना-चिकना है। तो माँ जी बोली कि वक़्त ही नहीं मिल पाता है, पूरे दिन तो बहु घर में रहती है और जब फ्री होती हूँ तो तुम अपना मूसल लेकर चुदाई करने लग जाते हो। अब जल्दी भी करो या बातें ही करते रहोगे? अब मामा जी ने तुरंत ही अपना आसान संभाल लिया और अपने लंड का सुपड़ा माँ जी की बालों से भरी चूत के मुँह पर रखकर एक जोरदार धक्का मारा तो माँ जी की चीख निकल पड़ी।

अब उन्होंने अपने दोनों पैर मामा जी की पीठ से चिपका दिए थे और वो अपने चूतड़ उछालने लगी थी। अब इधर दीदी ने भी अपने सारे कपड़े उतार डाले और मुझसे बोली कि फटाफट मुझे चोदकर माँ जी के रूम में घुस जाओ, तब ही आज रंगे हाथ पकड़ पाओगे। फिर मैंने कहा कि आपको तो में बाद में भी चोद सकता हूँ, अगर मामा जी इतनी देर में झड़ गये तो सब गड़बड़ हो जाएगी। फिर इस पर दीदी बोली कि अरे मेरे भोले भाई में मामा जी को जानती हूँ, वो साला भड़वा पता नहीं क्या खाकर चुदाई करता है? वो बहुत देर तक टिकता है और माँ जी के पसीने छुड़वा देता है, तब तक तुम मुझको निबटा दोगे। तो मैंने कहा कि ठीक है दीदी तुम जानो, अगर आज में तुम्हारे चक्कर में आपकी सास को नहीं चोद पाया तो में आपकी चूत चोदने के बाद आपकी गांड भी फाड़ दूँगा और ये कहकर दीदी की एक टाँग अपने कंधे पर रख ली।

अब वो एक पैर से खड़ी थी और में अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ रहा था। अब हम लोग माँ जी की घमासान चुदाई भी देख रहे थे। फिर मैंने एक धक्का मारा तो मेरा लंड दीदी की चूत में पूरा जा घुसा और फिर हम लोग भी धक्के लगाने लगे। अब चुदाई दोनों तरफ चालू थी, अब एक तरफ सास चुद रही थी तो दूसरी तरफ बहु चुद रही थी, लेकिन वहाँ पर आवाज़ें ज़्यादा माँ जी की ही आ रही थी, जिसका कारण था कि मामा जी बहुत जोरदार चुदाई कर रहे थे। अब एक पैर पर खड़े-खड़े दीदी थक गयी थी तो वो बोली कि राज मुझे अपनी गोद में उठा लो, में तो थक ही गयी हूँ। फिर उसके बाद मैंने दीदी को अपनी गोद में भर लिया और दीदी अपने चूतड़ उछाल-उछालकर मेरा लंड अपनी चूत में लेने लगी। अब उनके उछलने से उनकी बड़ी-बड़ी चूचीयाँ भी हिल रही थी, जिसे में अपने मुँह में भरकर चूस रहा था। अब दीदी आह आआआआ करके झड़ने लगी थी और कुछ धक्को के बाद में भी किनारे लग गया, मगर मामा जी थे कि अभी भी लगे हुए थे। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर दीदी अपनी चूत को साफ करते हुए बोली कि देखा मैंने कहा था ना कि ये भड़वा साला झड़ता ही नहीं है, काश में भी इससे कभी चुदवा पाती। अब दीदी के मुँह से ऐसी बात सुनकर मुझे थोड़ी हैरानी हुई। फिर मैंने कहा कि क्या आप मामा जी से चुदवाना चाहोगी? तो दीदी बोली कि हाँ क्यों नहीं? आख़िर कौन औरत अपनी चूत में मर्द का लंड ज्यादा देर तक डलवाना पसंद नहीं करेगी? तो मैंने कहा कि ठीक है अगर आज मेरा काम बन गया, तो में तुझे भी मामा जी की टाँगों के नीचे लाने का इंतज़ाम कर दूँगा। फिर इसके बाद मैंने अपना पजामा पहनकर माँ जी के रूम में जाने की तैयारी कर ली और में अचानक से दीदी की सास के कमरे में धड़ाक से दरवाज़ा खोलकर घुस गया और मुझे इस तरह आया देखकर सासू माँ के होश ही उड़ गये थे, लेकिन मामा जी अड़ियल किस्म के लग रहे थे, अब जहाँ सासू माँ ने अपने नंगे बदन को चादर में छुपा लिया था, वहीं मामा जी पूरी तरह से वैसे ही नंगे बैठे रहे थे।

फिर सासू माँ झिझकते हुए बोली कि अरे राज बेटा तू यहाँ इस वक़्त? तुझे तो आराम करना चाहिए था ना? फिर में बोला कि आराम ही करने की कोशिश कर रहा था आंटी, लेकिन आप लोग सोने दो तब ना? इतनी ज़ोर-ज़ोर से धड़ाधड़ आवाजे आ रही थी कि में तो यही सोच रहा था कि कहीं चोर तो नहीं घुस आया और यहाँ आकर देखा तो नज़ारा ही बदला हुआ है। फिर मामा जी बोल पड़े कि हाँ बेटा में समझ गया तुझे यहाँ क्या चीज़ खींचकर लाई है? आख़िर तू है भी ना लंड धारी, बता चूत मारनी है ना इसकी? तो फिर मैंने झूठ का नाटक दिखाते हुए कहा कि मामा जी आप भी कैसी गंदी बातें कर रहे है, भला में आंटी से इस तरह का बर्ताव कैसे कर सकता हूँ? ये मेरी दीदी की सास है और मेरी मम्मी के बराबर है। फिर मामा जी बोले कि अब नाटक मत कर और अपनी लूँगी उतारकर मैदान में आ जा। फिर में झिझकते हुए बेड की तरफ बढ़ा तो मामा जी ने लपककर मेरी लूँगी खोल दी जिससे में पूरा नंगा हो गया।

अब मेरा लंड लटका हुआ था, जिसे मामा जी अपने हाथ से पकड़कर आंटी को दिखाते हुए बोले कि लो भाई अब आज तुम भी जवान लंड का मज़ा ले लो, तुम मुझसे चुदवा-चुदवाकर बोर हो गयी होगी, चलो अब तुम भी चादर हटाकर अपनी चूत इस बेचारे को दिखा ही डालो। फिर उन्होंने सासू माँ की चादर हटा दी और मुझसे बोले कि बेटा सारी शर्म को इसकी चूत में डालकर खुद भी इसकी चूत में घुस जाओ। अब में तो पहले से ही सासू माँ को चोदने की सोचकर आया था और जब रूम में आने के बाद उनका नंगा बदन देखा तो मुझे अपनी मम्मी की याद आ गयी, बिल्कुल वैसी ही बड़ी-बड़ी चूचीयाँ और उन पर उभरे हुए ब्राउन कलर के निप्पल्स तनकर लंबे शेप में थे, जिसे फ़ौरन अपने होंठ में दबाकर चूसने का मन हुआ। फिर मैंने आंटी की चूची पर बहुत आहिस्ता से अपना एक हाथ रख दिया और सहलाने लगा।

अब आंटी भी मुझसे शर्मा नहीं रही थी और तब मामा जी ने उनकी चूत पर अपना हाथ फैरते हुए कहा कि लो रानी ठीक से मज़ा लो, आज दो मर्द तुम्हें एक साथ मज़ा देंगे, में तुम्हारी चूत चूसता हूँ। जब तक तुम मुन्ने को थोड़ा दूध पिलाकर तैयार करो और मेरे मुँह को उनकी चूची की तरफ को बढ़ाते हुए बोले कि लो बेटा दूध पीकर अपने लंड में ताक़त लाओ, साली बहुत लंड मार औरत है। जब में दो बार पेलता हूँ, तब साली का पानी झड़ता है। अब ये सब बातें मेरी दीदी खिड़की से सुन भी रही थी और अंदर का माज़रा देख भी रही थी। में पहले से ही उनसे कहकर आया था कि मामा जी का लंड तेरी चूत में डलवाकर रहूँगा। फिर मैंने सासू माँ की चूचीयाँ अपने मुँह में भर ली और चूसने लगा और उधर मामा जी उनकी चूत अपने होंठो से चूस रहे थे। अब माँ जी की हालत खराब थी, फिर वो बेड पर लेट गयी और में उनके सिरहाने जाकर आराम से उनकी चूची पीने लगा और मामा जी उनकी चूत चूस रहे थे, जिससे उनके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी।

फिर वो मुझसे बोली कि बेटा और ज़ोर से चूस, दबा-दबाकर चूस। अब में उनके साथ थोड़ी नरमी दिखा रहा था। फिर थोड़ी देर में आंटी पूरी तरह से गर्म गयी और मेरा लंड भी फंनफनाने लग गया तो मामा जी ने कहा कि बेटा अब अपना लंड इसकी चूत घुसेड़ डाल और इसकी चूत का भुर्ता बना डाल। अब मामा जी मम्मी के मुँह के पास जाकर बैठ गये और अपना लंड उनके होंठ पर फैरने लगे थे। अब में अपने लंड की टोपी को उसकी चूत से रगड़ रहा था। तब आंटी ज़ोर से बोली कि साले हरामी रगड़ता ही रहेगा या अंदर भी डालेगा। फिर उसके बाद मुझे भी गुस्सा आ गया और मैंने एक ही बार में अपना 8 इंच लंबा लंड उनकी सूखी चूत में अंदर तक घुसा दिया, जिससे उनकी जोरदार चीख निकल पड़ी आआईयईईईईईईईई आआआआआहह आआअहह हरामी मादरचोऊऊऊऊऊऊऊद, तेरी माँ को कुत्ता चोदे, बहन के लंड कहीं के इतनी ज़ोर से डाला जाता है क्या? पहले कभी चूत नहीं मारी क्या? हरामजादे।

अब मुझे और गुस्सा आ गया था, तो मैंने और ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। अब सासू माँ मुझे गंदी-गंदी गालियाँ देने लगी थी। अब उनकी गालियों से माहौल और मस्त हो रहा था। फिर मामा जी ने जब देखा कि आंटी गालियाँ बक रही है तो तब उन्होने अपना लंड उनके मुँह में नहीं डाला और उनकी चूची को ज़ोर-ज़ोर से दबाकर मज़ा लेने लगे। तब तो आंटी और भी जल गयी और बोली कि अब भोसड़ी के बहनचोद तुझे भी मस्ती सवार हो गयी, जो मेरी मुलायम चूचीयों को आटे की तरह बेदर्दी से गूँथ रहा है, आराम-आराम से कर वरना कल तेरी बहु को बुलाकर इसका लंड अंदर घुसवा दूँगी, हरामी कहीं का, भोसड़ी वाला फ्री में चोदने को क्या मिल जाता है? तो अपनी औकात ही भूल जाता है। अब इधर मेरे धक्के जारी थे, तभी आंटी फिर दर्द से कराह उठी क्योंकि मैंने अपना पूरा लंड बाहर निकालकर फिर से अंदर घुसेड़ दिया था। अब ये सब देखकर दीदी की चूत भी गीली हुए जा रही थी, जो बाहर खिड़की से सब देख रही थी।

फिर मामा जी ने अपना लंड आंटी के मुँह में डाल दिया और अंदर बाहर करने लगे। अब में भी झड़ने के करीब आ गया था तो तब ही में झड़ गया और मामा जी ने मुझे धकेलकर तुरंत अपना लंड सटाक से उनकी चूत में डाल दिया और फटाफट चोदने लगे। अब में अपना लंड उनके मुँह में डाले हुए था और मामा जी आंटी की चूत चोद रहे थे। फिर कुछ देर में ही आंटी भी झड़ गयी और फिर मामा जी भी झड़कर एक तरफ लेट गये। अब में अभी भी आंटी के मुँह में अपना लंड डाले हुए था, तब ही मेरे लंड से पानी की बौछार होने लगी, जिसे आंटी बहुत मज़े लेकर चूसने लगी। फिर मैंने अपना थोड़ा सा रस उनके मुँह पर भी गिराया और ढेर सारा उनके बालों में और उनकी चूचीयों पर भी गिरा दिया, जिससे उनकी चूची चमक उठी। फिर आंटी बोली कि लड़के तेरे लंड का पानी तो बहुत रसदार है, तूने बेकार ही इसे बाहर गिरा दिया, भैय्या ज़रा अब तुम मेरी चूची पर गिरा रस चूसकर देखो, इसका पानी कितना मज़ेदार है?

फिर मामा जी सासू माँ की चूचीयों पर सना हुआ मेरा रस चाटने लगे। फिर उसके बाद हम लोग वहीं बेड पर लेट गये। अब में बेचारी दीदी के बारे में सोच रहा था कि अब उनको अपनी उंगली से ही काम चलाना पड़ेगा। तब मैंने यूँ ही सासू माँ से पूछा कि माँ जी आप कह रही थी कि मामा जी की बहु को मुझसे चुदवाओगी? क्या सही में आप मुझसे उनकी बहु को चुदवाओंगी? तो इतने में मामा जी बोल पड़े कि हाँ बेटा क्यों नहीं? तू मेरी बहु को चोद और में तेरी दीदी को चोदूंगा? क्यों तैयार है ना तू? फिर में गुस्सा दिखाता हुआ बोला कि कैसी बातें कर रहे है आप? आपको शर्म आनी चाहिए, आंटी जी आप भी कुछ नहीं बोल रही है ये दीदी के बारे में कैसी कैसी बात कर रहे है? तो मामा जी बोले कि भोसड़ी वाले अब बड़ी मिर्ची लग रही है, मेरी बहु को फ्री में चोदगा क्या?

तब आंटी बोली कि बेटा इसमें बुरा क्या है? अपनी बहन को इनसे चुदवा देना, वैसे भी मेरा बेटा कई कई दिनों तक बाहर रहता है, तो वो बेचारी लंड की चाहत में तड़पति रहती है, मैंने कई बार उसको अपनी चूत में उंगली करते हुए देखा है। अब में तो चाहता ही यही था तो मैंने कहा कि ठीक है आंटी, अब आप कह रही है तो मुझे कोई हर्ज़ नहीं है। फिर चुदाई का दूसरे दिन का प्रोग्राम सेट हो गया, फिर इसके बाद किस तरह से मामा जी ने मेरे सामने मेरी बहन को चोदा? और मैंने उनकी बहु को और दीदी की सास ने मिलकर उनकी बहु को चोदा, इसके बारे में अगले पार्ट में बताउंगा ओके, तब तक अपने हाथ लंड पर रखे रहिए और अपनी चूत में उंगली डाले रहिए ।।

धन्यवाद …
 
रक्षाबन्धन पर शालू दीदी की चुदाई

यह उन दिनों की बात है जब मैंने 10वीं क्लास के एग्जाम दिए थे और में अब फ्री बैठा था, सुबह क्रिकेट खेलकर आता था और दोपहर में टी.वी देख लेता था और सो जाता था और पतंग उड़ाता था और कॉमिक्स पढ़ता था। ऐसे ही मेरे दिन कट रहे थे। मैंने कभी सोचा नहीं था कि सेक्स का मज़ा कितना अच्छा होता है और कितना प्यारा होता है। एक बार यह आपको लग जाए तो बस क्या कहने? एक बार में छत पर पतंग उड़ा रहा था, तो एक पतंग कट कर मेरे पास वाले घर में जा रही थी, वहाँ एक अंकल आंटी रहते थे और उनकी एक लड़की थी, जिसका नाम शालू था। में उनको दीदी बुलाता था, क्योंकि वो मुझसे 3-4 साल बड़ी थी और वो मुझे राखी भी बाँधती थी तो अब में स्टोरी पर आता हूँ।

फिर पतंग कट कर उनकी छत पर चली गयी और में भी अपनी छत से कूदकर उनकी छत पर आ गया, ऊपर वाला कमरा शालू दीदी का ही था। पतंग उनके कमरे के ऊपर थी, में वहाँ चढ़कर पतंग निकाल रहा था तो शालू दीदी भागकर बाहर आई, क्योंकि उन्हें खटपट की आवाज़ आई थी। फिर उन्होंने कहा कि कौन है वहाँ? तो मैंने बोला दीदी में हूँ पतंग लेने आया था, तो वो बोली ठीक है। फिर मैंने कहा दीदी पानी पीना है तो वो पानी देने लगी और फिर में पानी पीकर वहीं रुक गया और इंतज़ार करने लगा कि शायद कोई पतंग और कटकर आ जाए और फिर घर जाऊंगा। दीदी को लगा शायद में चला गया हूँ तो वो चेंज कर रही थी, में उनके रूम पर फिर से पानी की बोतल लेने गया तो देखा कि दीदी अपनी ब्रा चेंज कर रही थी और मैंने उनके छोटे-छोटे बूब्स देख लिए, वो ब्रा उतार कर अपनी बॉडी पर क्रीम लगा रही थी। यह देखकर मेरा लंड अपनी जीन्स में खड़ा हो गया और फिर उन्होंने ब्रा और टॉप पहन लिया और में भी चुपके से वहाँ से निकल गया। फिर जब रात हुई तो मेरा दिमाग़ और खराब हो गया। मुझे तो बस शालू दीदी के बूब्स नज़र आ रहे थे, मेरा मन कर रहा था कि उनके बूब्स को हाथ में लेकर उनको मसल दूँ। अब यही प्लान बनाने लगा कि भाड़ में जाए पतंगबाज़ी, अब तो बस एक बार शालू दीदी की चूत मिल जाए, पर कैसे? एक तो वो मुझे राखी बाँधती थी और उनको सेट करूँ तो कैसे? फिर 4-5 दिन तो मैंने मुठ मार कर काट लिए, लेकिन अब दिन नहीं कट रहे थे।

एक बार दोपहर को मैंने उनके रूम पर जाने का प्लान बनाया और फिर उनके रूम पर जाकर मैंने उनसे कहा कि दीदी पढ़ने के लिए कुछ कॉमिक्स है क्या? में बोर हो रहा हूँ। फिर उन्होंने मुझे पढ़ने के लिए कॉमिक्स दी और फिर में वही कॉमिक्स पढ़ने लगा, वहाँ रूम में दीदी का एक सिंगल बेड ही था। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने कहा दीदी नींद आ रही है, तो वो बोली इधर ही सो जा, में भी यही प्लान बनाकर आया था, क्योंकि सिंगल बेड था। फिर थोड़ी देर के बाद दीदी भी सोने के लिए आ गई, वो एक कट आर्म्स वाला पिंक टॉप और वाइट शॉर्ट्स पहने थी। उनको लगा कि में सो रहा होगा, लेकिन में तो मौके कि तलाश में लेटा था। फिर 10 मिनट होने के बाद मुझे लगा कि दीदी सो गयी है तो मैंने करवट बदलकर एक हाथ उनके ऊपर रख लिया। फिर थोड़ी देर के बाद दीदी मुझसे और चिपक गयी और उनकी बॉडी मेरे से टच होने लगी, उनकी खुशबू मेरा दिमाग़ ख़राब कर रही थी मेरा मन कर रहा था कि बस अभी सब कुछ कर दूँ। फिर मैंने अपना मुँह उनके पास लिया और महसूस किया, तो उनके मुँह से गर्म-गर्म साँसे निकल रही थी, फिर मैंने अपनी जीभ उनके लिप्स पर लगाई, उनके बड़े सॉफ्ट लिप्स थे।

फिर मैंने उनके लिप्स पर एक किस किया और फिर अपनी एक उंगली उनके टॉप में डाली जहाँ से बूब्स स्टार्ट होता है और ऊपर से धारी दिखती है, साला वहां बड़ा ही सॉफ्ट पार्ट था। फिर मैंने उसमें अपनी पूरी उंगली डाल दी, लेकिन साली ब्रा बीच में आने लगी, तो में उनके बूब्स को ऊपर से पकड़कर दबाने लगा। फिर थोड़ी देर के बाद जब दीदी हिली तो मैंने अपना हाथ हटा लिया और उनसे चिपककर सो गया। फिर जब में उठा तो मैंने देखा कि दीदी भी उठने वाली थी और फिर उन्होंने मेरे माथे पर किस किया तो मुझे अच्छा लगा और मैंने उनको गले से लगा लिया और मेरा मुँह उनके बूब्स पर था। फिर मैंने उनसे कहा दीदी मुझे भी किस करने दो, तो वो बोली कर ले तो मैंने उनके गालों पर किस किया। फिर मैंने कहा कि दीदी और करूँ तो वो बोली करो ना। फिर मैंने कहा कि दीदी आपके लिप्स पर कर लूँ? तो वो थोड़ा सोचने लगी और फिर बोली कि चलो कर लो। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने उनके लिप्स पर किस किया तो उन्होंने कुछ प्रतिक्रिया नहीं दी। फिर मैंने कहा दीदी मैंने आपको इतने किस किए, लेकिन आप नहीं करती तो वो बोली कि अच्छा करती हूँ, तो मैंने कहा लिप्स पर ही करना। फिर तब उन्होंने लिप्स पर किस किया और फिर मैंने भी उनका पूरा साथ दिया। फिर वो नहाने जाने लगी तो में वहीं पर लेटा था। फिर वो नहाकर बाहर आई और उनके गीले-गीले बाल मस्त लग रहे थे। फिर मैंने उनसे कहा कि दीदी एक प्रोब्लम है, तो वो बोली क्या? मैंने कहा शर्म आती है तो उन्होंने कहा कि बता ना क्या बात है? तो मैंने अपने लंड की तरह उंगली करके कहा कि दीदी मुझे दर्द होता है और खुजली भी होती है। तो वो बोली क्या बात कर रहा है? फिर मैंने कहा आप प्लीज देख सकती हो, तो फिर वो बोली मुझे ऐसे नहीं पता क्या प्रोब्लम है?

फिर मैंने कहा कि घर पर बताने में शर्म आ रही है इसलिए आपको बताया है। फिर वो मुझे बाथरूम में ले गयी और फिर उन्होंने कहा कि दिखाओ, तब मैंने जीन्स और अंडरवियर उतारकर अपना लंड दिखाया और कहा कि दीदी यहाँ दर्द होता है पता नहीं क्यों? फिर दीदी ने उसको अपने हाथ में लिया तो वो खड़ा होने लगा। तो मैंने कहा कि दीदी इसमें खुजली भी होती है, फिर उन्होंने कहा यह तो होता रहता है। फिर मैंने कहा कि दीदी मुझे आपका नीचे का देखना है, तो वो कहने लगी पागल है क्या? तो मैंने कहा दीदी प्लीज दिखाओ कैसी होती है? मैंने आज तक किसी का नहीं देखा, तो वो मान गयी और अपना शॉर्ट्स और पेंटी उतार दिया। फिर मैंने कहा दीदी रूम में चलो यहाँ अंधेरा है तो फिर हम रूम में गए और अब में उनकी चूत पर हाथ फेर रहा था। अब उनको सेक्स चढ़ने लगा था तो मैंने कहा कि दीदी मेरे लंड में खुजली हो रही है, तो वो बोली दिखा ज़रा और उसको मुँह में लेकर चूसने लगी। फिर 5 मिनट के बाद मेरा पूरा पानी उनके मुँह में ही चला गया और वो लेट गयी और फिर वो बोली रात को आना और मज़े करेंगे।

फिर में रात को उनके रूम में पढ़ने के बहाने गया तो वो वहाँ बैठी हुई थी। फिर मैंने रूम का लॉक लगाया और कहा कि दीदी मुझे आपको पूरा नंगा देखना है तो उन्होंने अपने पूरे कपड़े उतार दिए और मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और उनके बूब्स से खेलने लगा। अब वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी थी। फिर उन्होंने मुझसे कहा कि अपना लंड मेरी चूत में डालो तो मैंने कहा कि दीदी कैसे करना है? तो वो बोली इसमें डालो और झटके दो, लेकिन में डालने से पहले ही झड़ गया था और फिर दो तीन दिन ऐसे ही चलता रहा। फिर मैंने उनसे कहा कि आज पूरा करेंगे, तो वो खुश हो गयी और फिर मैंने उनको पूरा नंगा किया और अपना लंड उनके मुँह में चूसने को कहा। अब उनको भी मज़ा आ रहा था।

फिर मैंने देर ना करते हुए उनकी चूत में अपना लंड डाला, लेकिन लंड चूत में नहीं घुस रहा था, तो दीदी ने कहा कि जोर-जोर से झटका दो तो ये अन्दर जायेगा। फिर मैंने दम लगाकर एक झटका दिया तो वो उनकी चूत के छेद में चला गया और फिर मैंने झटके देने चालू किए। अब उन्हें भी बड़ा मज़ा आ रहा था, पहले तो वो चिल्लाई फिर मेरा अच्छा साथ देने लगी। जब में झटके दे रहा था तो मुझे लग ही नहीं रहा था कि में फर्स्ट टाईम सेक्स कर रहा हूँ। उनकी चूत में मेरा लंड ऐसा लग रहा था कि जैसे लंड आग की भट्टी के अंदर हो। साला वहां बहुत गर्म था। फिर यही सिलसिला में 12वी क्लास तक करता रहा और फिर उनकी शादी हो गयी। अब जब भी वो घर आती है तो मुझे मौका मिलता है और में उनकी चूत लेने से नहीं चूकता, क्योंकि यार वो माल बहुत मस्त था। अब तो उनके बूब्स बड़े हो गये है और उनके एक लड़की भी हो गयी। अब रक्षाबन्धन पर वो नहीं आती तो में उनके पास राखी बंधवाने चला जाता हूँ और अपना काम करके आ जाता हूँ। तो दोस्तों यह मेरी पहली कहानी थी ।।
 
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