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Incest भाई-बहन वाली कहानियाँ

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भाई-बहन वाली कहानियाँ



1-मैं दिवाना बहनों का page 1 to 18

2-कमीना भाई और ताज़ा माल बहनें Page 18 to

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मैं दिवाना बहनों का



मैं राजाबाबू एक बार फिर। मैं अब 22 साल का हो गया हूँ.. पहले से थोड़ा और हैण्डसम भी हो गया हूँ। मेरे घर में माँ-पापा के अलावा मैं और मेरी दो बहनें हैं.. डॉली और कांता। डॉली मुझ से 3 साल बड़ी है।

वो बीटेक पूरी करके एक सॉफ़्टवेयर कंपनी में जॉब कर रही है। दूसरी है कांता.. जो 19 साल की है.. वो पूनमढिल्लो जैसी हो गई है। लेकिन पहले सिर्फ़ चेहरे से ही पूनमढिल्लो जैसी लगती थी.. पर जिस्म से भी वैसी ही हो गई है। कांता बीटेक के पहले साल में है।

बात शुरू यहाँ से हुई कि एक दिन मेरे निम्बज आईडी (एक चैट पोर्टल) में एक रिक्वेस्ट ‘हॉट & सेक्सी गर्ल’ के नाम से आई.. तो मैंने उसको अपनी फ्रेंड लिस्ट में ज़ोड़ लिया और उसको ‘हाई’ लिख कर भेजा.. तो उधर से भी ‘हाई’ लिख कर आया।

मैंने उसका नाम पूछा.. तो वो बोली- नाम में क्या रखा है?

तो मैं बोला- तो मैं आपको किस नाम से बुलाऊँ?

‘सेक्सी गर्ल बोल सकते हो..’

मैंने उससे कुछ देर तक यूँ ही फॉर्मल बात की.. फिर मैंने उससे सेक्स चैट करना चाहा.. और पूछा।

मैं- आपकी उम्र?

सेक्सी गर्ल- 24 और तुम्हारी?

मैं- सेक्सी एज.. 22..

सेक्सी गर्ल- थैंक यू.. तुम तो मुझसे छोटे हो..

मैं- छोटा हूँ तो क्या हुआ.. मेरा दिल बड़ा है।

सेक्सी गर्ल- ऊऊऊऊऊओह..

मैं- आपका ब्वॉयफ्रेण्ड है?

सेक्सी गर्ल- नहीं..

मैं- क्यों?

सेक्सी गर्ल- कोई अच्छा लड़का मिला नहीं.. तुम्हारी गर्लफ्रेंड है?

मैं- नहीं..

सेक्सी गर्ल- क्यों?

मैं- कोई हॉट & सेक्सी गर्ल मिली नहीं या ये बोलूँ कि बस आप से जो मिलना था इसलिए कोई मिली ही नहीं..।

सेक्सी गर्ल- हा हा हा हा..

वो हँसने लगी।

मैं- आप रियली हॉट & सेक्सी हो..

सेक्सी गर्ल- हाँ वो तो मैं हूँ..

मैं- पर तुम कितनी सेक्सी हो.. ज़रा हमें भी बताओ अपना फिगर..

सेक्सी गर्ल- 36बी-28-32..

मैं- वाउ.. मस्त है.. मम्मे इतने बड़े कैसे हुए.. और पतली कमर?

सेक्सी गर्ल- जब चैट करती हूँ.. तो मैं खुद अपने दबाती रहती हूँ।

मैं- खुद से.. कभी किसी लड़के ने नहीं दबाए?

सेक्सी गर्ल- हाँ..

मैं- किसने?

सेक्सी गर्ल- एक ब्वॉयफ्रेण्ड था.. उसने दबाए थे..

मैं- था.. मतलब अब नहीं है.. चलो मेरी लाइन तो क्लियर है..

सेक्सी गर्ल- हा हा अह आहा हाहा.. नो.. मैंने खुद ही उसे छोड़ दिया..

मैं- क्यों?

सेक्सी गर्ल- पसंद नहीं था..

मैं- ऊओह.. तो ब्वॉयफ्रेण्ड ने सिर्फ़ चुचों को ही दबाया या कुछ किया भी?

सेक्सी गर्ल- हाँ.. किया था..

मैं- क्या.. क्या.. बताओ भी?

सेक्सी गर्ल- किस किया.. चुचों को दबाया..

मैं- बस.. और कुछ नहीं.. मतलब उसने तुम्हें चोदा नहीं?

सेक्सी गर्ल- नहीं..

मैं- तो तुम्हारी बुर ने अभी तक लंड नहीं चखा है..?

सेक्सी गर्ल- नहीं..

मैं- वाउ.. पूरे 24 साल की हो गई हो.. और बुर कुँवारी है?

सेक्सी गर्ल- नहीं.. मैंने उसमें उंगली की है।

मैं- ऊऊओह..

सेक्सी गर्ल- हाँ.. तुमने कभी सेक्स किया है?

मैं- हाँ..

सेक्सी गर्ल- किसके साथ?

मैं- एक स्कूल फ्रेंड.. एक पड़ोसी.. एक दोस्त की बहन.. एक भाभी और पापा के एक दोस्त की बीवी और बेटी और उसकी बेटी की एक दोस्त.. गर्ल-फ्रेंड.. कईयों के साथ चुदाई की है..

सेक्सी गर्ल- वाउ.. यार इतने लोगों को चोदा.. मतलब तुमको चोदना अच्छा लगता है?

मैं- हाँ.. ये मेरा पसंदीदा खेल है.. क्यों तुमको चुदना अच्छा नहीं लगता है क्या?

सेक्सी गर्ल- हाँ यार.. मेरा मन तो बहुत करता है..

मैं- तो तुमको चुदने का मौका नहीं मिला क्या?

सेक्सी गर्ल- हाँ मेरा मन तो बहुत होता है.. लेकिन मैं किसी से भी नहीं चुद सकती.. सामने कोई अच्छा लड़का भी तो मिलना चाहिए ना..

मैं- हाँ.. वो तो है.. मतलब आप मेरे बारे में बोल रही हो?

सेक्सी गर्ल- नोओ.. तुम्हारे लंड का साइज़ कितना है?

मैं- 8.5″ लंबा और 3.5″ मोटा..

सेक्सी गर्ल- वाउ.. सो सेक्सी लंड.. क्या तुम अपने लंड की एक पिक्चर सेंड कर सकते हो?

मैं- हाँ.. क्यों नहीं.. आप बोलें तो पूरा लंड लेकर ही आपके पास आ जाऊँ..

वो हँसने लगी- पहले दिखाओ तो..

मैंने एक पिक्चर सेंड कर दी।

सेक्सी गर्ल- वाउ यार.. इतना सेक्सी लंड है..

मैं- थैंक्स.. अब तुम भी अपने चुचों या बुर की पिक्चर सेंड करो ना..

उस दिन तो पट्ठी ने टाल दिया.. लेकिन अगले दिन एक फोटो बिना चेहरे की भेज दी जिसमें मम्मे और बुर दिख रहे थे।

मैं- सच में यार तेरे मम्मे तो उम्मीद से ज्यादा सेक्सी हैं।

सेक्सी गर्ल- थैंक्स..

मैं- वीडियो चैट करो न.. बिना फेस के..

सेक्सी गर्ल- अभी नहीं..

मैं- डर रही हो क्या..? खैर.. कोई बात नहीं.. जब भरोसा हो जाए.. तब ही करना..

सेक्सी गर्ल- ओके..

कुछ दिन वैसे ही बात करने के बाद.. फिर एक दिन रात में मैंने पूछा- वीडियो चैट करोगी?

तो वो मान गई और उसने अपना कैमरा ऑन कर दिया.. लेकिन कैमरे में सिर्फ़ गर्दन के नीचे का जिस्म दिख रहा था। उसने गुलाबी रंग की एक स्लीबलैस नाइट ड्रेस पहनी हुई थी.. जो उसकी आधी चूचियों और पेट को ढके हुई थी।

बाकी उसकी गर्दन.. दोनों हाथ और चुचों के ऊपर का गोरा बदन दिख रहा था। उसने हाथ हिलाया तो मैंने भी हाथ हिला कर ‘हाय’ बोला..

मैं- सो सेक्सी बॉडी..

सेक्सी गर्ल- थैंक्स..

मैं- अपने चुचों को सहलाओ ना..

तो उसने अपने चुचों को कैमरा के और पास ला कर उन्हें हल्का सा हिला दिया और हाथ से सहला दिया। फिर उसने कैमरा को नीचे किया.. नीचे उसने सिर्फ़ एक काली और लाल मिक्स रंग की पैंटी पहनी हुई थी और नीचे से पूरी नंगी थी। उसकी टाँगें भी बहुत चिकनी और सेक्सी लग रही थीं।

मैं- तुम्हारे पैर भी बहुत सेक्सी हैं.. थोड़ा और दिखाओ न..

सेक्सी गर्ल- ओके..

उसने थोड़ा पीछे हो कर कैमरे को एड्जस्ट किया और गर्दन के नीचे के अपने पूरे बदन को दिखाया.. उसने ब्रा और पैंटी के ऊपर कुछ पारदर्शी ड्रेस पहनी थी। फिर वो पीछे मुड़ गई.. उफ्फ.. क्या मस्त गान्ड थी उसकी यार..

कपड़ों के ऊपर से ही मन कर रहा था कि कैमरे में हाथ डाल कर दबा दूँ.. लेकिन मैं देखने के अलावा और कुछ नहीं कर सकता था।

फिर वो गान्ड मटकाते हुए आगे को बढ़ी.. जब वो चल रही थी तो उसके बुरड़ और भी सेक्सी लग रहे थे।

फिर उसने गान्ड के पास से अपने झीने से टॉप को उठाया तो सिर्फ़ पैंटी में उसके बुरड़ों की गोरी चमड़ी और उस पर एक काला तिल तो और भी हॉट लग रहा था। जैसे किसी ने बुरी नजर से बचाने के लिए काला टीका लगा दिया हो।

मैं- वाउ.. यार क्या मस्त गान्ड है.. इसको देख कर मेरा तो लंड खड़ा हो गया है.. और इस पर वो तिल तो.. और भी क़यामत लग रही हो।

सेक्सी गर्ल- ऊऊऊहह.. सच में.. तुम भी तो दिखाओ अपना लंड..

मैं- लो देखो..

मैं अपना लंड कैमरे के सामने ले गया तो लंड को देख कर बोली- सच में.. बहुत अच्छा लंड है.. बड़ा और मोटा भी है.. छूने का मन हो रहा है..

मैं- हाहहहहह.. तो छू लो.. रोका किसने है..

सेक्सी गर्ल- हाहहहहहहाहा..

मैं- अब कुछ और दिखाओ.. अपने कपड़े उतारो न..

उसने अपनी गुलाबी पारदर्शी ड्रेस को खोल दिया.. तो मुझे उसके गुलाबी ब्रा और काली पैंटी दिखने लगी और अब वो सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में सामने थी।

मैं- अपनी चूचियों को कैसे दबाती हो..?

वो अपनी रसीली सी चूचियों को मसलने लगी।

मैं- ज़रा अपनी ब्रा हटा कर अपने नंगी चूचियों का दीदार तो करवाओ यार..

उसने अपनी ब्रा को हटा दिया.. ब्रा के हटते ही उसकी दोनों चूचियों बाहर उछल कर आ गईं, उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर लाल निप्पल और भी क़यामत लग रहे थे।

मैं- तुम्हारी चूचियाँ तो और भी हॉट हैं.. इसको देख कर मेरे लौड़े को कंट्रोल ही नहीं हो रहा है.. अगर तुम पास होतीं.. तो मैं इनको चूसता ही रहता।

सेक्सी गर्ल ने अपने बुब्बू दबाते हुए एक आह सी निकाली- ऊऊऊओह..

मैं- हाँ.. लेकिन क्या करूँ.. इन्हें देख कर ही संतुष्ट हो जाता हूँ.. मेरे बदले तुम ही उनको मसलो न.. और हिलाओ भी..

सेक्सी गर्ल- ठीक है..

अब वो अपनी चूचियों को मसलने लगी हिला-हिला कर मुझे दिखा रही थी। फिर अपने निप्पल को दो उंगली के बीच में फंसा कर चूचियों को हिलाने लगी।

मैं- सिर्फ़ एक कपड़ा अच्छा नहीं लग रहा है तुम्हारे ऊपर.. उसको भी उतार दो..

तो वो पीछे मुड़ गई और अपने बुरड़ों को दबाते हुए उसने अपनी पैन्टी भी उतार दी।

उसके बाद उसके नंगे बदन को देख कर मजा आ गया। वो अपने गोल बुरड़ों को कैमरे के सामने लाई और हिलाने लगी।

मैं- ज़रा अपनी गुलाबी बुर तो दिखाओ?

तो वो आगे को घूम गई और कैमरा को अपनी बुर के सामने ले गई.. क्या हॉट और चिकनी चमेली बुर थी.. उसकी बुर को देख कर ही लग रहा था कि ये अब तक सच में ही कुँवारी है.. मानो मेरे लंड को बुला रही है.. कि आओ और मेरे अन्दर समा जाओ।

कुछ देर तक ये सब चलता रहा.. फिर वो एक बॉडी लोशन ले आई और उसको अपने पूरे बदन में लगा लिया। एक तो वो इतनी गोरी.. ऊपर से बदन पर बॉडी लोशन.. अब वो और क़यामत लग रही थी।

मैं- अब ज़रा अपनी बुर में उंगली करो न..

सेक्सी गर्ल- ठीक है.. लेकिन तुम भी अपना लंड हिलाओ न..

मैं अपना लंड हिलाने लगा और वो बुर में उंगली करने लगी। कुछ देर ऐसा करने के बाद हम दोनों झड़ गए और फिर आज के खेल का अंत हो गया.. इसके बाद हम दोनों लगभग रोज वीडियो चैट करने लगे थे।

कुछ दिन तक ऐसा ही चलता रहा, फिर एक दिन।

मैं- हम दोनों बहुत दिन से चैट कर रहे हैं.. क्यों ना एक बार रियल में मिला जाए..।

सेक्सी गर्ल- आइडिया बुरा नहीं है.. लेकिन किधर मिलोगे?

मैं- तुम जहाँ बोलो..

सेक्सी गर्ल- मैं पटना से हूँ.. लेकिन कोलकाता में रहती हूँ।

मैं- मैं भी पटना से ही हूँ.. लेकिन दिल्ली में रहता हूँ।

सेक्सी गर्ल- तो कहाँ मिलें?

मैं- पटना में।

सेक्सी गर्ल- मैं अभी पटना नहीं जाऊँगी!

मैं- ओके.. तो मैं कोलकाता आ जाता हूँ। लेकिन कोलकाता में कहा पर मिलोगी?

सेक्सी गर्ल- हाँ ये सही रहेगा.. यहाँ मैं एक होटल में 2 कमरे बुक करती हूँ.. वहीं मिलूँगी।

मैं- ठीक है..’क्या अब भी अपना चेहरा नहीं दिखाओगी?’

सेक्सी गर्ल- अब चेहरा क्या चीज है तुम मुझे सीधे होटल में पूरा खोल कर ही देख लेना..

मैं हँस दिया और बात खत्म हो गई।

दूसरे दिन..

सेक्सी गर्ल- मैंने एक होटल बुक किया है दो कमरे हैं.. 212 & 213 तुम रविवार को कोलकाता आ जाओ।

मैं- मैं रविवार क्या.. मैं तो शुक्रवार को ही पहुँच जाऊँगा..

सेक्सी गर्ल- तुम जब भी आओ.. लेकिन मैं मिलूँगी रविवार को ही..

मैं- ठीक है..

मैं घर पर बोला कि मेरा एक एग्जाम है.., मैं कोलकाता जा रहा हूँ। वैसे कोलकाता मे मेरी बड़ी दीदी रहती हैं.. सो वहीं रुक जाऊँगा और मैं कोलकाता पहुँच गया।

वहाँ मेरी दीदी मुझे लेने आईं.. मैं दीदी से 2 साल के बाद मिल रहा था.. क्योंकि जब वो आती थीं.. तो मैं नहीं होता था.. और जब मैं आता था.. तो वो नहीं होती थीं।

दो साल में दीदी बहुत बदल गई थीं.. पहले से सुंदर हो गई थीं। मैं दीदी के साथ उनके कमरे पर गया ये फ्लैट दीदी और उसकी एक दोस्त को कंपनी ने ही दिया था.. लेकिन अभी उसकी दोस्त अपने घर गई हुई थी। वो रविवार को आने वाली थी।

फिर कुछ देर दीदी के साथ बात करता रहा.. फिर मैं फ्रेश हो गया और दोनों ने खाना खा लिया। दीदी ऑफिस चली गईं.. तब मैं अकेला था.. तो मैंने सेक्सी गर्ल को मैसेज किया।

मैं- मैं कोलकाता पहुँच गया हूँ।

सेक्सी गर्ल- अभी मैं ऑफिस में हूँ.. रात में बात करती हूँ।

मैं घूमते हुए दीदी के कमरे में गया.. तो मुझे कमरा कुछ जाना-पहचाना सा लग रहा था.. लेकिन मैं तो पहली बार कोलकाता आया हूँ.. तो ये कमरा मैंने कैसे देखा??

तभी अचानक से कैमरे में देखा हुआ कमरा याद आया और एकदम से मेरे मन में आया कि कहीं दीदी ही तो सेक्सी गर्ल नहीं हैं।

मैं दीदी की ड्रेस वगैरह ढूँढने लगा.. तो मुझे वो कपड़े भी दिख गए.. जिसको पहन कर सेक्सी गर्ल चैट करती थी। अब तो मुझे भरोसा हो गया कि दीदी ही सेक्सी गर्ल हैं। तो मुझे अपने आप में बहुत बुरा लग रहा था कि मैं अपनी ही बहन को नंगी देख चुका हूँ और उसी के साथ सेक्स करने दिल्ली से कोलकाता आ गया हूँ। फिर मैंने सोचा कि सिर्फ़ मैं ही तो नहीं हूँ.. जो अपनी बहन को चोदूँगा..

कुछ देर तक मैं अपने आपसे जूझता रहा फिर मैं भाई-बहन वाली कहानियाँ पढ़ने लगा।

करीब 10-15 कहानियाँ पढ़ने के बाद मैंने सोचा- नहीं यार.. अगर कोई कुँवारी बुर मिल रही है तो उसे छोड़ना नहीं चाहिए और मैं दीदी को चोदने के लिए तैयार हो गया।



शाम को जब दीदी आईं.. तो उसको देखने का मेरा नज़रिया ही बदल चुका था। अब मुझे वो दीदी नहीं.. सेक्सी गर्ल नज़र आ रही थी।

फिर सारा दिन भी उसी तरह बीत गया..

रात को हम दोनों फिर से ऑनलाइन आए..

कुछ देर बात करने के बाद पूछा- तुम कितने भाई-बहन हो?

सेक्सी गर्ल- 3… एक भाई और 2 बहन और तुम?

मैं- एक भाई और 2 बहन.. तुमको तुम्हारा भाई कैसा लगता है?

सेक्सी गर्ल- अच्छा है..

मैं- अगर मौका मिला तो तुम उसके साथ सेक्स करोगी?

सेक्सी गर्ल - नहीं ऐसा कुछ नहीं सोचा है..

मैं - और अगर वो तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहे तो करोगी?

सेक्सी गर्ल- पता नहीं.. तब की तब देखी जाएगी।

मैं - तो आओ वीडियो चैट पर आज अपना चेहरा तो दिखाओगी ना?

सेक्सी गर्ल- ठीक है..

वो वीडियो चैट पर आई.. तब मैं न्यूड था और वो भी सिर्फ़ तौलिया लपेटी हुई थी। जैसे ही मैं उसको अपना चेहरा दिखाया..

वो चौंकते हुए बोली- तुम?

उसने तत्काल चैट ऑफ कर दी। तो मैं नंगा ही उठा और उसके कमरे में चला गया और लाइट जला दी।

वो बोली- तुम जाओ यहाँ से.. ये सब ग़लत है..

मैं- दीदी प्लीज़.. सिर्फ आज.. फिर कभी नहीं..

दीदी- पागल हो गया क्या तू.. हट दूर..

मैं- नहीं दीदी..

दीदी- यह ग़लत है.. और मैं तेरी बहन हूँ।

मैं- नहीं.. आज हम दोनों भाई-बहन नहीं.. एक लड़का और लड़की हैं और हम दोनों को अभी एक-दूसरे की ज़रूरत है.. हम दोनों ने एक-दूसरे का सब कुछ देख लिया है और अगर मैं तुम्हारा भाई नहीं होता.. तो क्या तुम वो सब नहीं करतीं?

यह बोल कर मैं दीदी को चूमने लग गया, मैं उसके चुचों को दबाने लग गया।

अब दीदी का विरोध कम हो गया। मैंने अपनी एक उंगली उसकी बुर पर लगाई.. दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली।

दीदी- नहीं.. मेरे को अजीब लग रहा है..

मैं समझ गया था कि दीदी वर्जिन है और अपनी ही सग़ी बहन की सील तोड़ने में बहुत मज़ा आएगा। दीदी अब गरम हो चुकी थी.. मेरा लंड भी अब बुर को सलाम कर रहा था.. लेकिन फिर दीदी ने मुझे अलग कर दिया।

मैंने उसे समझाया और कहा- प्लीज़ मान जाओ.. हम दोनों को सेक्स की जरूरत है..

जब मैं समझा रहा था.. तो वो मेरे लंड को ही देख रही और तभी मैंने उसके हाथ पर अपना हाथ रखा और अपनी तरफ खींचा और उसने गाल पर किस किया।

वो बोली- यह पाप है.. हम दोनों भाई-बहन हैं और किसी को पता चल गया तो बदनामी हो जाएगी। तब मैंने उसे समझाया कि किसी को पता नहीं चलेगी.. ये बात हम दोनों के बीच ही रहेगी। अब मैंने उसके होंठों पर अपने होंठों को रख दिया, वो छूटने की कोशिश करने लगी, मैंने ढील नहीं छोड़ी.. कुछ देर में वो भी गरम होने लगी और उसने छूटने की जद्दोजहद भी खत्म कर दी। तभी मैंने उसके मम्मे पर अपना हाथ रखा और उसे सहलाना चालू कर दिया। करीब 15 मिनट तक ऐसा ही चलता रहा.. फिर वो भी मेरा साथ देने लगी।

अब वो भी मान गई थी और मुझसे गले लग गई.. तो मैं उसके सिर पर हाथ फेरने लगा और उसके कंधे पर किस करने लगा। उसको भी अच्छा लग रहा था.. अब मेरा लंड उसकी बुर के पास स्पर्श हो रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरा लवड़ा उसके कपड़े को फाड़ कर बुर में चला जाएगा।

फिर मैं हाथ नीचे ले जाकर उसके बुरड़ों को दबाने लगा और चूचियों के ऊपर किस करने लगा। मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसके चुचों को दबाने लगा।

वो सिसकरियाँ लेने लगी ‘आआअह.. अहहह..’

मैंने मौके का फायदा उठाते हुए उसकी तौलिया को हटा दिया.. वो मेरे सामने ब्रा-पैंटी में थी।

आह.., क्या माल लग रही थी.. मैं बता नहीं सकता..

उसके गोरे बदन पर काली ब्रा और पैन्टी.. आह्ह.. पूछो मत कि क्या दिख रही थी। वो जैसे कोई जन्नत की हूर अप्सरा लग रही थी।

फिर मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके दूध दबाने आरम्भ किए.. वो सिसकारियाँ भरने लगी और ‘आआआहह.. आआहह..’ करने लगी।

धीरे-धीरे मैंने उसके पेट पर हाथ फिराते हुए उसकी जाँघों पर हाथों को ले गया और सहलाने लगा। उसने मेरा हाथ अपनी जाँघों में दबा लिया और अकड़ गई।

अब मैं अपने हाथ को पीठ पर ले जाकर सहलाने लगा और गर्दन और चूचियों के ऊपरी भाग पर किस कर रहा था। मैंने हाथ को पीछे ब्रा के हुक में फंसा दिया और उसको खोल दिया। अब ब्रा सिर्फ़ उसकी चूचियों पर टिकी हुई थी.. तो मैंने अपने मुँह से ही ब्रा को हटा दिया। जैसे ही मैंने ब्रा हटाई.. उसकी दोनों चूचियों मेरे सामने आ गई थीं.. जिसको देख कर मेरे मुँह में पानी आने लगा।

अब तक इसको कपड़े के अन्दर या नंगा देखा था.. तो बस लैपटॉप पर ही देखा था.. आज ये सच में मेरे सामने थीं.. वो भी पूरी नंगी।

मैं तो कुछ देर देखता ही रह गया.. नज़दीक से तो ये और भी सेक्सी लग रही थी और इसके गुलाबी निप्पल तो और कयामत ढा रहे थे.. जैसे दो मलाई के ढेर हों.. और उनके ऊपर एक-एक छोटा गुलाबजामुन रखा हुआ हो।

मैं देर ना करते हुए नंगी चूचियों पर झपट्टा मारा और पूरी चूचियों को एक बार में ही अपने मुँह में लेना चाहा। लेकिन उसके मम्मे बड़े थे.. सो नहीं जा पाए.. लेकिन जितना भी गए.. उतने को ही पीने लगा और एक हाथ से दूसरे चूचे के निप्पल को दबाने लगा.. वो तड़प उठी और बोली- भाई रहने दो ना प्लीज़.. अब और नहीं मैं मर जाऊँगी..

वो वासना से ‘आआअहह.. आआहह..’ करने लगी। फिर भी मैं रुका नहीं.. उल्टे मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी बुर पर हाथ रखा और सहलाने लगा। उसने मेरा लंड पकड़ लिया और अचानक छोड़ दिया।

मैं बोला- क्या हुआ?

तो बोली- यह तो बहुत मोटा और बड़ा है.. मेरे अन्दर नहीं जाएगा..

मैं अपना खड़ा हुआ लंड उसके सामने कर दिया और कहा- इस किस करो..

वो बोली- नहीं मुँह से नहीं होगा..

तो मैं बोला- कोई बात नहीं.. एक काम करो.. इसको थोड़ा पकड़े हुए ही रहो।

थोड़ा ना-नुकर के बाद उसने लंड को पकड़ लिया और सहलाने लगी, फिर हल्का सा चूमा भी.. मेरे लण्ड के मुँह में पानी आने लगा।

अब हम दोनों बिस्तर पर नंगे ही 69 अवस्था में आ गए थे और एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। मैंने उसकी बुर पर हाथ रखा और एक उंगली अन्दर डाल दी.. वो तड़प उठी और मेरे लंड को ज़ोर से दबा कर पकड़ लिया। ऊऊओह गॉड.. क्या सीन था..

मैंने अपना लंड उसके होंठों के पास रखा और मुँह में देने लगा.. कुछ देर मना करने के बाद वो मजे से चूसने लगी और मैं उसकी बुर को चूसता रहा और बुर के अन्दर जीभ घुमाता रहा।

इस काम को करते हुए हमें 45 मिनट हो गए थे और वो भी झड़ भी चुकी थी। फिर मैंने मुँह से लंड निकाल लिया, मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा.. तो वो डरते हुए घोड़ी बन गई..

मैं अपने लंड का सुपारा उसकी बुर पर रगड़ने लगा और वो तड़फ रही थी, उसके मुँह से सिसकारी निकल रही थी। उसकी सिसकारी सुन कर मुझे इतना मजा आ रहा था.. जैसे वो बोल रही हो प्लीज़ जान डाल दो अन्दर.. प्लीज़ भाई चोद दो अपनी बहन को..

मैंने लंड उसकी बुर पर रखा और हल्का सा धक्का लगाया तो लंड अन्दर नहीं गया.. क्योंकि उसकी बुर बहुत टाइट थी। वो दर्द से कराह कर आगे को हो गई तो मैंने उसकी चूची को कस कर पकड़ा और थोड़ा ज़ोर से धक्का लगाया.. तो अबकी बार लंड का टोपा बुर में अन्दर फंस गया।

वो दर्द से चिल्ला उठी.. बोली- प्लीज़ निकाल लो.. वरना मर जाऊँगी.. प्लीज़..

उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे थे.. तभी मैंने एक और धक्का लगाया, लंड आधा अन्दर घुस गया और उसके मुँह से ज़ोरदार चीख निकली- उउउइईई.. ममाआ.. आआह… आआअ मर गई.. आआआहह.. वो रो रही थी.. मैंने उसका मुँह नहीं पकड़ा हुआ था.. क्योंकि हमारा घर बंद था और मकान से बाहर आवाज़ नहीं जाती थी।

मैं ऐसे ही रुका रहा.. उसकी बुर से खून निकल रहा था.. वो आगे की तरफ़ झुकी ताकि छूट सके… लेकिन उसकी इस हरकत से लंड और टाइट हो गया क्योंकि अब उसका मुँह नीचे बिस्तर पर टिका था और घुटने उठे हुए थे।

‘उओ आआहह.. आअहह..’ चिल्ला रही थी और मुझसे लौड़े को बाहर निकालने के लिए कह रही थी लेकिन मैं उसे नहीं छोड़ा.. वरना वो फिर से अन्दर नहीं डलवाती..

कुछ देर मैं ऐसे ही रुका रहा और उसके दूध दबाता रहा। वो कुछ देर बाद नॉर्मल हो गई और मैंने धक्के लगाने शुरु कर दिए, धीरे-धीरे पूरा लंड अन्दर पेल दिया..

वो अभी भी दर्द से कराह रही थी लेकिन कुछ ही देर में वो नॉर्मल हो गई और गान्ड उठा कर मेरा साथ देने लगी.. उसके मुँह से ‘आआहह.. उउऊहह उउउइ.. आअहह..’ की कामुक आवाजें निकलने लगी थीं और ‘छप.. छा..’ की आवाजों से पूरा कमरा गूँज रहा था।

अब मैं झड़ने ही वाला था और तेज-तेज धक्के लगा रहा था, हर धक्के पर उसके मुँह से ‘आअहह..’ निकलती।

करीब 30 मिनट की धकापेल चुदाई के बाद मैं उसकी बुर से बाहर निकल कर झड़ गया। इस बीच वो दो बार झड़ चुकी थी.. झड़ने के बाद मैं उसके ऊपर ही लेट गया और उसे चूमने लगा। मैंने उससे पूछा- कैसा लगा?

तो बोली- पहले बहुत दर्द हुआ.. लेकिन बाद में बहुत मजा आया..

फिर कुछ देर बाद हमने एक-दूसरे को चूमना चाटना शुरु किया और हम फिर से तैयार हो गए। वो मना कर रही थी लेकिन गरम होकर मान गई।

उस रात हमने 4 बार चुदाई की.. सुबह वो चल भी नहीं पा रही थी और उसकी बुर सूज गई थी.. तो मैं बर्फ का टुकड़ा ले कर उसकी बुर की सिकाई करने लगा, तब जा कर कहीं उसकी बुर की सूजन ठीक हुई।

उसके बाद जब वो ठीक हुई तो फिर मैंने उसको चोदा.. मैं वहाँ 5 दिन रहा और इन 5 दिनों में मैंने घर के हर कोने में उसको चोदा और शायद जितने पोज़ मैं जानता था.. हर उस पोज़ में उसको चोदा।

उसके बाद तो मैं अक्सर कोलकाता आने-जाने लगा और जब भी आता.. मन भर के चोद कर आता था। जब वो घर भी आती थी तो भी मैं आ जाता था और हम दोनों खूब मजे करते थे।

*****

 
मैं अपनी ही बहन डॉली को चोद कर बहनचोद बन गया। लेकिन यह कहानी है मेरी दूसरी बहन कांता के बारे में.. कांता मेरी छोटी बहन। उसकी उमर 19 साल है जो भोपाल से बी-टेक कर रही है। अभी वो पहले साल में है। तब उसका फिगर 28बी-24-26 था।

मुझे हर रोज बुर चोदने की आदत हो गई है। दिल्ली में मेरे प्यारी काजल डार्लिंग थी और कोलकाता या घर पर चोदने के लिए डॉली हो गई थी। मैं जब भी घर आता था तो डॉली घर आ जाती थी.. उसके बाद तो आप समझ ही गए होंगे। एक बार मैं घर आया लेकिन किसी कारण से डॉली नहीं आ पाई.. तो मैं अकेला.. अपने हाथ से काम चला रहा था और अपने लौड़े के लिए बुर को ढूँढ रहा था। तभी पता चला कि कांता घर आ रही है और उसको लाने मैं स्टेशन गया।

मैं खुश हो गया और सोचा कि चलो बुर का जुगाड़ हो गया.. बस अब कांता को पटाना बाकी है और अपने हथियार के लिए बुर का जुगाड़ हो जाएगा।

मैं तैयार होकर कांता को लाने निकल गया और ट्रेन आने से पहले ही स्टेशन पहुँच कर उसका इन्तजार करने लगा।

जैसे ही वो ट्रेन से उतरी.. मैं उसको देखता ही रह गया।

अब मेरी नज़र एक भाई की नहीं थी.. बुर के शिकारी की थी.. जिसको अपना शिकार दिख रहा था। तब उसने सफ़ेद टॉप और गुलाबी स्किन टाइट जींस पहन रखी थी। जैसे-जैसे वो मेरे पास आ रही थी.. मेरा लंड खड़ा होता जा रहा था।

वो आते ही मेरे गले से लग गई।

मैं भी तो यही चाहता था.. मेरे सीने पर उसकी चूचियों का अनुभव होने लगा, मैंने उसको अपने जिस्म से चिपका लिया और अपने हाथ से उसकी बुरड़ों को सहला दिया।

उसे खुद से अलग करने का मेरा मन तो नहीं हो रहा था.. लेकिन वो कुछ बोलती उससे पहले उसको अलग कर के बाइक पर बिठा दिया।

वो दोनों पैर एक तरफ़ कर के बैठ रही थी.. लेकिन मेरे बोलने पर दोनों पैर अलग करके बाइक पर लड़कों के जैसे बैठ गई और मैंने जानबूझ कर सामान पीछे बाँध दिया जिससे वो और आगे को होकर मुझसे चिपक कर बैठ गई। अब मेरी पीठ को उसके चूचियों का अनुभव होने लगा और पूरे रास्ते उसकी चूचियों की रगड़ ने मेरे लौड़े का हाल बुरा कर दिया था।

किसी तरह हम घर पहुँच गए और मैंने जल्दी से अकेले में जाकर अपने हाथ से काम चलाया। अब मैं कभी भी उसको छूने का मौका जाने नहीं देता था।

एक दिन मैं उसके कमरे में गया तो वो पेट के बल लेट कर लैपटॉप में कुछ कर रही थी, मैं अन्दर गया तो मेरी नज़र उसके बुरड़ों पर से हट ही नहीं रही थी।

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसकी बुरड़ों पर एक चपत लगा दिया और पूछा- लेट कर कर रही हो?

वो कॉलेज फंक्शन की फोटो देख रही थी। मैं भी उसी के बगल में लेट कर देखने लगा.. तो उसमें उसका फोटो नहीं था।

मैंने पूछा.. तो वो बोली- मैंने इस फंक्शन के प्रोग्राम में भाग नहीं लिया था।

मैंने कारण पूछा तो बोली- मुझे कोई डान्स सिखाने वाला ही नहीं था।

तो मैं बोला- अरे मुझसे कहती.. मैं सिखा देता।

तो बोली- अभी सिखा दो.. एनुअल फंक्शन में कर लूँगी।

मैं बोला- ठीक है.. मैं सिखा दूँगा.. बदले में मुझे क्या मिलेगा?

तो वो बोली- क्या लोगे?

मैं बोला- जब लेना होगा.. तब वो मैं बाद में बता दूँगा.. बस उस समय पीछे मत हटना..

वो मान गई.. तो मैं बोला- आ जाओ.. मैं अभी ही डान्स सिखाना चालू कर देता हूँ।

वो मेरे साथ आ गई.. और मैंने कुछ स्टेप्स उसको बताए। लेकिन वो जींस पहने हुई थी.. सो नहीं कर पा रही थी। तो मैंने बोला- इन कपड़ों में कुछ नहीं होगा.. मैं कल डान्स के लायक कपड़े ला दूँगा।

अगले दिन मैं घर आया तो घर में कोई नहीं था। पूछने पर पता चला मम्मी-पापा ऑफिस चले गए हैं।

मैं बोला- आओ.. डान्स सिखाऊँ।

वो आ गई.. मैंने उसको कुछ ड्रेस दिए और बोला- जाओ पहले इसे पहन के- आ जाओ।

पहले तो थोड़ी मना करने के बाद रेडी हो गई और कपड़े लेकर चली गई।

जब वो उन कपड़ों को पहन के- आई.. तो मैं देखता ही रह गया। ख़ास करके उसकी नाभि पर से मेरी नज़र ही नहीं हट रही थी।

वो आई और बोली- इतने गौर से क्या देख रहे हो?

मैं बोला- कुछ ख़ास नहीं.. यू आर लुकिंग हॉट एंड सेक्सी!

तो वो शर्मा गई और बोली- चलो डान्स करते हैं।

मैं भी बोला- हाँ आओ..

पहले मैंने उसको कल वाले सारे स्टेप्स करवाए.. फिर मैं उसको नया स्टेप बताने लगा.. उसको करने में कुछ परेशानी हो रही थी.. तो मैं उसकी मदद करने लगा।

मदद तो उसको छूने का और उसके अंगों का मजा लेने का बहाना था।

उसको सिखाते-सिखाते मैंने उसके पेट पर हाथ फेर दिया और वो सिहर गई। तभी मैंने एक उंगली उसकी गर्दन पर फेर दी और तब तक मेरा लंड खड़ा हो कर तंबू बन गया था जो की उसको साफ़-साफ़ दिख रहा था।

तभी एक और स्टेप उससे नहीं हो रहा था तो मैंने उसको बताने के क्रम में उसको पीछे से पकड़ा जिससे मेरा लंड उसके दोनों बुरड़ों के बीच लग गया.. जिसे वो आसानी से महसूस कर सकती थी। साथ ही मैं अपने हाथों से उसके चुचों को छूने की कोशिश कर रहा था.. लेकिन मुझे हाथ और पेट से ही काम चलाना पड़ रहा था।

उसके मुलायम और मखमली बदन को छूने के बाद मुझे अजीब सा अहसास हो रहा था और यह अहसास इतना अच्छा था कि मैं कुछ ज्यादा ही एग्ज़ाइटेड हो गया था और मैं अपनी इस उत्तेजना में उसकी गर्दन पर किस कर बैठा।

दोस्तो, ऐसे माहौल में किसी लड़की को अगर गर्दन पर किस करो तो वो सिहर जाती है.. मैंने देखा कि लोहा गरम है इस पर हथौड़ा मार देना चाहिए।

अब मैंने एक उंगली से उसकी बुर को कपड़ों के ऊपर से ही सहला दिया। वो इतनी गर्म हो चुकी थी कि मुझसे चिपक गई। मैं इतना अच्छा मौका कैसे जाने दे सकता था.. मैंने अपने होंठों को उसके होंठ पर रख दिए और उसने कोई विरोध नहीं किया।

बस.. अब तो मैं चालू हो गया था.. मेरा हाथ कब से उसके आगे-पीछे के उभारों को दबाने के लिए मचल रहा था। इस खेल में मैं कौन सा पीछे रहने वाला था। मैं सीधे उसकी चूचियों पर पहुँच गया और कपड़ों के ऊपर से ही उसके चुचों को सहलाने लगा।

कुछ पलों तक ऐसा ही चलता रहा.. फिर जैसे ही मैंने उसके टॉप को खोलने की कोशिश की.. तो उसने मुझे पीछे धकेल दिया और मुझसे अलग हो गई और बोली- ये सब ग़लत है.. तुम मेरे भाई हो.. और भाई-बहन के बीच ये सब ठीक नहीं है।

मैंने उसको बहुत समझाया.. लेकिन वो नहीं मानी और अपने कमरे में चली गई।

मैंने मन ही मन में सोचा- हो गया ना बेटा खड़े लंड पर धोखा.. और उसको पटाने का दूसरा तरीका सोचने लगा।

सो मैं उसको कुछ डान्स वीडियो एक पेन ड्राइव में देने गया और उसी में कुछ पॉर्न वीडियो और एक फोल्डर में भाई-बहन की चुदाई वाली कहानी डाल कर दे दिया और बोला- मैं एक दोस्त के घर जा रहा हूँ.. तुम अन्दर से दरवाजा लगा लो।

उसके सामने तो मैं निकल गया.. लेकिन पीछे के दरवाजे से अन्दर आ गया और देखने लगा वो क्या कर रही है। वो डान्स वीडियो देख रही थी कि बीच मे पॉर्न वीडियो आ गया.. तो वो चौंक गई पर फिर से देखने लगी कि पेन ड्राइव में और क्या क्या है?

तो उसको स्टोरी वाला फोल्डर दिख गया और वो स्टोरी पढ़ने लगी। कुछ ही मिनट बाद मैंने देखा कि वो अपने हाथों से अपनी चूचियों दबाने लगी। फिर कुछ देर पढ़ते-पढ़ते उसने अपनी चूचियों को बाहर निकाल लिया और खुल कर दबाने लगी। धीरे-धीरे वो अपने कपड़े उतारने लगी और पूरी नंगी होकर कहानी पढ़ने लगी। उसके नंगे बदन को देख कर मैं भी अपने आपको काबू नहीं कर पाया और उधर वो भी गर्म हो ही गई थी। मैंने भी अपने कपड़े उतारे और उसके कमरे में चला गया।

वो मुझे देखते ही उठ कर मुस्कुराते हुए मेरे गले लग गई और हम एक-दूसरे को किस करने लगे। अब वो भी साथ दे रही थी और हम दोनों के हाथ भी शान्त नहीं थे, मेरे हाथ उसकी बुरड़ों को मसल रहे थे और उसके हाथ मेरे लंड को हिला रहे थे।

कुछ देर ऐसा चला.. फिर मैं उसकी गर्दन को चूमते हुए उसके चुचों पर पहुँच गया और क्या रसीले मम्मे थे.. बता नहीं सकता।

मैं उसके पूरे चुचों को अपने मुँह में लेने का कोशिश करने लगा.. लेकिन ज़ा नहीं पा रहे थे। कुछ देर यूँ ही उसके मस्त चुचों को चूसने के बाद मैं नीचे की तरफ बढ़ने लगा और उसके चिकने पेट पर किस करते हुए उसकी बुर के पास पहुँच गया।

उसकी बुर एकदम गुलाबी थी.. देख के पता चल गया कि कांता ने इसमें अब तक कोई लंड नहीं खाया है.. मतलब एक और कुँवारी बुर..

सो मैंने अपनी उंगली उसकी बुर पर लगा दी। कुछ देर बाद बुर के नजदीक मुँह को ले गया और उसकी कटीली बुर को किस कर लिया.. इस किस से वो सिहर गई।

 
अब मैं अपना जीभ उसकी बुर पर घुमाने लगा और हल्का सा अन्दर करने लगा।

जैसे ही मेरी जीभ उसकी बुर में अन्दर सुरसुराती.. तो वो बार-बार पीछे को हट जाती थी तो मैंने उसको गोद में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया और हम दोनों ही 69 की अवस्था में आ गए।

मैंने उसको लंड चूसने को बोला.. तो थोड़ी नानुकर के बाद मान गई और लंड को चूसने लगी, मैं भी मजे से उसकी बुर को चूसने लगा। मैं अपनी पूरी जीभ उसकी बुर के अन्दर-बाहर करने लगा।

कुछ देर ऐसा करने के बाद अचानक वो अपने पैर से मेरे सिर को ज़ोर से दबाने लगी और उसका जिस्म अकड़ने लगा।

कुछ ही पलों के बाद उसकी बुर से एक जोरदार फुहारा निकाला और मेरे मुँह पर पर निकल गया और मेरा चेहरा पूरा भीग गया।

फिर हम दोनों अलग हुए और उसको सीधा करके चुदाई की स्थिति में लाकर उसकी अनछुई बुर पर अपना फौलादी लंड रगड़ने लगा।

उसका पानी निकलने के बाद बुर और भी मुलायम हो गई थी। मैं लंड पेलने ही वाला था कि तभी डोरबेल बज़ी.. मम्मी-पापा आ गए होंगे..

मैं किसी तरह कपड़े पहन के- दरवाजा खोलने चला गया और वो कपड़े लेकर बाथरूम में घुस गई। मैंने सोचा साला फिर खड़े लंड पर धोखा.. खैर..

पापा कुछ स्पेशल खाने को लाए थे.. हम लोग नाश्ता कर रहे थे.. कांता मेरे बगल में बैठी थी तो पापा बोले - बेटा हम दोनों (मम्मी-पापा) को किसी काम से 2 दिन के लिए पतबा से बाहर जाना होगा.. तुम दोनों दो दिन अकेले रह तो लोगे ना.?

हम दोनों मन ही मन खुश हो गए थे और बोले- हाँ रह लेंगे.. कोई बात नहीं आप आराम से जाओ..

तो पापा बोले- ठीक है हम दोनों सामान पैक करते हैं तुम दोनों अपना ख्याल रखना।

फिर कांता बर्तन उठा के रसोई में ले गई.. मैं भी उसके पीछे-पीछे चला गया और रसोई में उसके चुचों को दबाते हुए बोला- आज रात तुझे कौन बचाएगा..

तो वो बोली- बचना भी कौन चाहता है.. बस कन्डोम लेते आना।

मैं उसको किस करके बाहर आ गया और मम्मी-पापा को समय पर स्टेशन छोड़ आया.. ट्रेन लेट थी सो उधर कुछ अधिक टाइम लग गया। लौटते समय मैंने 12 कन्डोम के पैकेट ले लिए.. सब अलग-अलग फ्लेवर के थे।

घर पहुँचा तो कांता कहने लगी- बड़ी देर लगा दी.. आओ पहले खाना खा लो।

उस वक्त वो सलवार-कुरती में थी। हम दोनों ने चुहलबाजी करते हुए खाना खाया। फिर वो अपने कमरे में जाने लगी तो मैंने उसे किस करने के लिए अपनी तरफ मोड़ा और वो भी मुँह आगे करके तैयार हो गई।

फिर हम जोरदार फ्रेंच किस करने लगे उसके गुलाब की पंखुरियों जैसे होठों को चूसते हुए मुझे मजा आ रहा था। ऐसे ही किस करते हुए मैं उसे अपनी गोद में उठा कर अपने बेडरूम में ले गया और बिस्तर पर लिटा उसकी गर्दन पर किस करते-करते उसके सूट को ऊपर उठाने लगा। तो वो फिर से बोली- यार ये ग़लत तो नहीं है ना..

मैंने बोला - आजकल तो सब चलता है यार.. तुम एक लड़की हो और मैं एक लड़का.. हमारी अपनी-अपनी जरूरतें हैं और डरो नहीं.. मैं कन्डोम का इस्तेमाल करूँगा… तो तुम्हें प्रेग्नेंट होने का डर भी नहीं होगा.. और किसी को पता भी नहीं चलेगा।

तो वो बोली- आर यू श्योर ना?

मैंने कहा - हाँ जान.. आइ रियली केयर फॉर यू।

हम फिर से किस करने लगे.. मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाली तो उसकी गरमी मुझे महसूस हो रही थी। फिर वो भी अपनी जीभ मेरे मुँह में घुमाने लगी।

करीब 15 मिनट तक ऐसे ही करते हुए मैं भी उसकी कमीज़ के ऊपर से ही उसके चूचों को दबाने लगा तो वो बोली- ओह.. जान.. आराम से.. दर्द हो रहा है..

फिर मैंने उसकी कमीज़ ऊपर की और उसके पेट पर किस करने लगा। उसकी कमर बहुत पतली थी। वो भी तड़पने लगी.. फिर धीरे-धीरे मैंने उसकी सूट की चैन खोली और कमर पर किस करते हुए उसे उसके बदन से अलग कर दिया।

उसने नीचे लाइट ग्रीन कलर की सॉफ्ट ब्रा पहनी थी.. अब मैं उसके पूरे बदन पर किस करते हुए उसके चुचों को दबाने लगा। वो भी मस्ती में आने लगी और अपनी टाँगें मेरी कमर में डाल कर हाथ मेरे बालों में अपना हाथ लहराने लगी। फिर धीरे-धीरे मैंने उसकी पजामी का नाड़ा खोल दिया और उसे उतारने लगा।

वो बहुत टाइट थी.. तो उतारने में टाइम लगा.. लेकिन उतार दिया.. अब वो सिर्फ़ गुलाबी पैन्टी में थी और फिर उसकी हिरनी जैसी टाँगों को मैं चूमने चूसने लगा। ऐसा करते-करते मैंने उसकी पैन्टी में हाथ डाल दिया.. जो अब तक पूरी गीली हो चुकी थी।

उसकी बुर को मैं हाथ से सहलाने लगा तो उसके मुँह से ‘ससईईईई सीईईई उउफ्फ़ आहह उउम्म’ की सिसकारियाँ आने लगीं। फिर मैंने उसकी पैन्टी उतारी और बुर को चाटने लगा.. जैसे ही मैंने उसकी बुर में अपनी जीभ लगाई.. वो बोली- अओउ.. माआअ.. उसके शरीर में करंट सा दौड़ गया।

करीब 5 मिनट तक चाटने के बाद बुर में से जूस आने लगा.. जिसे चाटता हुआ मेरा लंड और भी टाइट हो गया। उसके रस से मेरा पूरा मुँह भर गया। उसका रस अब तक के रसों में बहुत ही टेस्टी और सेंटेड माल था।

फिर मैंने उसकी ब्रा उतारी तो उसके दो गोल चूचे.. बहुत ही अच्छे लग रहे थे। उन गोल चूचों पर सजे हुए गुलाबी निपल्स को मैं बेताबी से चूसने लगा और दूसरे हाथ से दूसरे चूचे को दबाने लगा। इसके साथ ही मैंने उसकी बुर मैं. अपनी छोटी उंगली डाल दी.. वो ज़ोर से चिल्लाई- उउइईई.. म्म्मारआआ आआ.. माआअर गइईई.. आहह.. सुश्ह्ह्ह्ह.. क्या कर रहे हो.. बहुत दर्द हो रहा है.. आअहह..

तब मैंने कहा- कोई बात नहीं डार्लिंग.. थोड़ी देर और सह लो.. फिर तो बहुत मज़ा आएगा।

थोड़ी देर तक मैं यूँ ही चूचे चूसते रहा और उसकी बुर में उंगली डालता-निकालता रहा.. तो वो बोली- आह्ह.. तुमने मेरे ही कपड़े उतारे.. अपने तो ऐसे ही पहने हुए हैं।

मैंने कहा- तो उतार दो जान..

ये सुनते ही उसने खींच कर मेरी टी-शर्ट उतार दी और जीन्स का बतन खोल दिया।

वो मेरा अंडरवियर के ऊपर से हाथ लगाते हुए बोली- ये तो निकालो..

तो मैंने कहा- जान.. खुद ही निकाल लो न..

फिर उसने मेरा जॉकी उतार दिया और मेरे 7.5 इंच के डंडे को देखते हुए बोली- ओ माय गॉड.. इतना बड़ा केला..!!

तो मैंने कहा- जान इस केले को अपने मुँह में डाल लो।

फिर उसने मेरे लंड को मुँह में डाला और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी। यूँ ही मस्ती से चूसते-चूसते उसने मेरे 7 इंच के लंड को 5 मिनट में 10 इंच का कर दिया और फिर मुझे लिटा कर मेरे पूरे बदन को चूमने लगी। अब मैंने देर नहीं करते हुए उसे कन्डोम दिया और कहा- इसे मेरे लंड पर पहना दो।

उसने अपने कोमल हाथों से कन्डोम को मेरे लंड पर पहना दिया और मैंने फ्रेंच किस करते हुए उसको बिस्तर पर लिटा दिया। जैसे ही मैंने अपने लंड उसकी बुर की तरफ बढ़ाया..!

वो बोली- इसे तुम इतने छोटे छेद में डालोगे.. तो ये तो फट नहीं जाएगी.. मैं मर जाऊँगी।

तो मैंने कहा- नहीं जान.. इसके अन्दर जाने के बाद तुम्हें जन्नत का नज़ारा मिलेगा..

जैसे ही मैंने उसकी बुर पर लंड को लगाया.. वो उसके मुँह से सिसकी निकाली- आहह.. उउम्म्म.. ममा..

मैंने उसकी सिसकी सुन कर अपने लंड को हाथ से पकड़ कर उसकी बुर पर घुमाने लगा। फिर मैंने एक हल्के से धक्के के साथ लंड को थोड़ा अन्दर किया.. पर उसकी बुर इतनी टाइट थी कि लंड सिर्फ़ सिरे तक ही अन्दर गया और वो चीख पड़ी- आअहह.. नणनईईईई.. ब्बाहहाआरर.. निककालूओ.. ससुसस्स्स.. मैं मररर.. गईई.. आहह..

तो मैंने उसके मुँह को बंद कर दिया.. फिर थोड़ी देर तक मैं ऐसे ही पड़ा रहा.. और जब चीखना बंद हो गया.. तो मैंने एक और धक्का लगा दिया।

अब मेरा दो तिहाई लण्ड उसकी बुर में घुस गया और 7 इंच का डंडा अन्दर जाने पर वो दर्द के मारे उछल पड़ी, वो चिल्लाई- आआअहह.. उफफ्फ़.. आआईयईई.. मम्मीई.. मररर गईईईई.. बसस्स्स्स.. नही..अई बाहआअररर निककाललो.. जाआ अन्नऊऊउउ आहह.. अहह उम्म्माआ आईईई…

फिर मैंने एक और जोरदार झटके से लंड को पूरा बुर की जड़ तक अन्दर डाल दिया। तो उसकी आँखों से आँसू आ गए और वो और जोर से चिल्लाने लगी- आईएईईईई.. आआईएईइ! फिर थोड़ी देर जब तक उसकी चीखें बंद नहीं हुईं तो मैं ऐसे ही पड़ा रहा।

मैंने बहुत अनुभव लिया हुआ था सो मुझे मालूम था कि साली कुछ देर में ही अपनी गान्ड हिलाने लगेगी। वही हुआ.. जब वो अपनी गान्ड हिलाने लगी.. तो मैं समझ गया कि अब उसे भी मज़ा आ रहा है।

तो मैंने लौड़े के टोपे को अन्दर छोड़कर पूरे लंड बाहर निकाला और फिर मैं उसे अन्दर-बाहर करने लगा.. तो वो मेरे बालों को पकड़ कर धीरे-धीरे सिसकारने लगी और बोली- कम ऑन.. जान फक मी.. फक मी हार्ड.. उउंम्मा.. आअहह.. आअहह.. आई लव यू सुशान्त.. आई लव यू…

अब मैं धीरे-धीरे तेज होने लगा.. तो वो भी ज़ोर-ज़ोर चिल्लाने लगी- आअहह ओह ज़ोर से.. और ज़ोर से.. कम ऑन जान.. आहह फक फक.. फक्क मी.. फक मी.. आआहह.. ओह सुशान्त यू आर माय लवर ब्वॉय.. आहह फक फक.. आह..

यह सुन कर मैं और तेज चोदने लगा तो उसकी मस्त कामुक चीखों से पूरे कमरे में मादक आवाजें गूंजने लगीं- आहह.. अहह.. आआहह.. आआहह.. उफफफ्फ़.. उउफफ्फ़.. ज़ोर से और ज़ोर से..

काफी देर तक ऐसे ही चोदने के बाद बाद वो ढीली हो गई और मेरा लौड़ा भी झड़ने वाला था।

वो बोली- बस.. अब बाद में जान.. कल कर लेना..

तो मैंने अपना लंड निकाला और कन्डोम उतार कर अपना माल निकालने लगा।

मैंने कहा- डियर कांता.. माय लव कम ऑन.. टेस्ट इट..

उसने अन्तर्वासना के वशीभूत होकर अपना मुँह खोल दिया और मैंने अपने जूस से उसका मुँह भर दिया। उसके पूरे मुँह और बदन पर मेरा माल पड़ा था और वो उसे चाट रही थी।

फिर हम बाथरूम में गए.. एक-दूसरे को साफ़ किया.. और बिना कपड़े ही सो गए।

सुबह जब मैं उठा तो कांता अभी भी वहीं सो रही थी और उसका नंगा बदन सुबह की किरणों के साथ सोने की तरह चमक रहा था। उसे देखते ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया, मैंने उसे बाँहों में भरा और एक ज़ोरदार किस करते हुए बोला- गुड मॉर्निंग डार्लिंग..!

वो भी आँखें बंद किए ही बोली- गुड मॉर्निंग डियर..

फिर उसने मुझे उठ कर फ्रेंच किस करते हुए बोला- लास्ट नाइट वाज़ मोस्ट वंडरफुल नाइट ऑफ माय लाइफ जानू…

तो मैंने कहा- कम ऑन.. गेट रेडी फॉर आ सेकेंड ट्रिप..

वो थोड़ा शरमाई और फिर बोली- ओह कम ऑन.. कम माय बेबी..

उसने मुझे हग किया और फिर किस करते हुए दराज में से एक कन्डोम निकाल अपने मुँह से मेरे लंड पर चढ़ाने लगी। फिर मैंने उसे कहा- जानू.. अब घोड़ी की तरह झुक हो जाओ।

उसने ऐसे ही किया और फिर मैंने उसकी बुर में पीछे से लंड डाल दिया और वो सिसकारने लगी।

फिर 10 मिनट तक मैंने ऐसे ही उसे चोदा और फिर मैंने कंडोम निकाल कर उसके मुँह से लंड साफ़ करवाया।

अब वो नहाने चली गई और बोली- तुम बाजार से दूध और ब्रेड ले आओ.. मैं तब तक चाय बनाती हूँ.. जाओ तुम सामान ले आओ… और मेरे लिए एक विस्पर भी ले आना.. वो ख़त्म हो गया है। मैं बाजार चला गया और जब थोड़ी देर बाद आया तो वो रसोई में थी। उसने अपने जिस्म पर सिर्फ़ एक तौलिया लपेटा हुआ था।

वो चाय लाई.. फिर हमने पी और वो नाश्ता तैयार करने लगी और मैं नहाने चला गया।

वो और मैं भी घर में सिर्फ़ जॉकी डाल घूमने लगे। हमने साथ में नाश्ता किया और फिर वो घर का काम करने लगी और मैं कमरे में चला गया।

वो तीन घंटे बाद मेरे कमरे में आई वो अभी भी सिर्फ़ तौलिये में ही थी, वो आकर बोली- और जानू.. अब क्या ख्याल है?

यह बोलते हुए उसने अपना तौलिया उतार दिया… अब वो मेरे सामने पूरी नंगी थी, वो मेरी तरफ बढ़ने लगी, उसने मुझे पकड़ा और कहा- अब मेरी बारी है.. तुम्हें चोदने की.. उसने मुझे पकड़ा और अपनी जीभ पूरी मेरे मुँह में डाल दी। फिर मेरे होंठों को चूसने लगी। वो धीरे-धीरे मुझे बिस्तर पर लिटा कर मेरी चुम्मियां लेने लगी और साथ ही उसने मेरा जॉकी उतार दिया।

अब वो मेरे लंड को बुरी तरह चूसने लगी। मैं पूरी तरह मदहोश हो गया था और मेरे मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं- आह.. आह आह…

वो उन्हें सुन कर और तेज होती गई। फिर लंड को हाथ में पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगी और मेरे अन्डकोषों को चूसने लगी। थोड़ी देर बाद मेरे लंड से माल बाहर आ गया और वो उसे चाटने लगी।

लेकिन मेरा लंड अभी भी लोहे की रॉड की तरह मजबूत था। उसने मेरे लंड को पकड़ा और धीरे से उस पर अपने बुर का छेद रख कर ऊपर बैठते हुए उसे अन्दर करने लगी।

तो मैंने कहा- जान कन्डोम?

तो वो बोली- नहीं आज मुझे उसके बिना ही मजा लेना है.. रसगुल्ले को कपड़े में रख कर खाने का क्या फ़ायदा..

फिर पूरा लंड अन्दर करके धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होकर उसे अन्दर-बाहर करने लगी और जब वो अन्दर-बाहर कर रही थी.. तो उसकी चूचियों उछाल मार रही थीं। मैंने उसकी चूचियों को पकड़ लिया और जोर से दबाया। फिर उसको खींच कर अपने मुँह के पास ले आया और उका चूचा चूसने लगा। दूसरे हाथ से उसके बुरड़ों को पकड़ कर बुर को लौड़े के ऊपर-नीचे करने में उसकी हेल्प करने लगा।

कुछ देर ऐसा करने के बाद मैं उठा और उसको गोद में उठा कर चोदने लगा।

कुछ देर ऐसे ही चुदाई की.. फिर मैं लेट गया और वो मेरे लंड पर बैठ कर ऊपर से खुद करने लगी।

फिर मैं भी थोड़ा साथ देते हुए ऊपर-नीचे होने लगा। धीरे-धीरे वो तेज-तेज कूदने लगी और चीखने लगी- आअहह.. अह आआहह.. जान.. अया आहह..

फिर वो रुक गई और आगे को झुक गई तो मैं नीचे से ही उछाल मार कर उसे झटके देने लगा और वो भी सिसकियां भरने लगी।

थोड़ी देर बाद वो मुझ से लिपट गई और उसका बदन अकड़ने लगा, मैं समझ गया की लौंडिया झड़ने वाली है.. सो मैंने लंड बाहर निकाल लिया और वो झड़ गई.. साथ में मैं भी झड़ गया और अगल-बगल ही लेट गए।

उस दो दिन में मुझे जितने भी चुदाई के आसन आते थे.. उन हर अवस्था में मैंने उसको चोदा। मम्मी-पापा के आने तक हम लोग कहीं नहीं गए.. सिर्फ़ चुदाई ही करते रहे।

उन लोगों के आने के बाद भी मुझे जब भी मौका मिलता था.. मैं उसकी चूचियों को और गान्ड को दबा देता था और रात को उसे पूरी रात चोदता था। वो पूरे एक महीना घर पर रही। एक दिन दोपहर को मेरे पास आई और बोली- देखो तुमने क्या कर दिया है..?

मम्मी-पापा के आने तक हम लोग कहीं नहीं गए.. सिर्फ़ चुदाई ही करते रहे।

मैंने पूछा- क्या किया.. बताओ तो सही?

तो उसने अपनी ब्रा मुझे दी और बोली- इसको पहनाओ..

मैंने पहनाया.. तो वो नहीं आ रही थी।

‘मेरी सारी ड्रेस टाइट होने लगी हैं..’

जब मैंने नापा तो उसका फिगर 34बी-26-32 हो चुका था, तो मैं बोला- कोई बात नहीं डार्लिंग.. नए कपड़े आ जायेंगे..

वो मेरे लौड़े पर हाथ लगा कर पूछने लगी- इसका दोष नहीं.. इतने कम दिनों में इसने मेरा नाप इतना बढ़ा दिया है।

तो मैं बोला- अगली बार जब साथ रहेंगे तो कुछ दिनों में ही 38 साइज़ के कर दूँगा।

तो वो हँसने लगी और मुझसे लिपट गई।

कुछ दिन बाद उसकी छुट्टियाँ ख़त्म हो गईं और वो भोपाल वापस चली गई।

 
उसके बाद जब कभी मौका मिलता.. तो मैं भोपाल या कोलकाता हो आता था और जम कर अपनी बहनों की बुर चुदाई के मजे लेता था। फिर एक दिन मैं भोपाल गया हुआ था और कांता मेरी बाँहों में लेटी थी, वो बोली- तुम इतना अच्छा से चोदते हो.. सीखा है कहीं से?

मैं- नो डार्लिंग.. ओनली एक्सपीरियेंस..

कांता - मतलब मुझसे पहले भी किसी को चोद चुके हो?

मैं- हाँ..

कांता- किसको..?

मैं- एक हो तब ना बताऊँ.. किसी का नाम..

कांता - तो कितनी हैं?

मैं- दस..

कांता - इतना ज्यादा मतलब मेरा नम्बर 11वां है?

मैं- हाँ।

कांता मेरे लंड को पकड़ते हुए बोली- तभी तो ये इतना मजबूत है।

मैं- हाहहह..

कांता- कौन-कौन थीं वो ख़ुशनसीब लड़कियाँ? ज़रा बताओ तो.. मैं भी तो जानूँ.. मैं कितनों को जानती हूँ?

मैं- लगभग सभी को जानती होगी शुरूआत हुई थी चेतना से.. याद है तुमको?

कांता - हाँ.. वो जो साथ स्कूल जाती थी।

मैं- हाँ वही..

कांता - कब.. स्कूल के टाइम में ही.. या बाद में?

मैं- स्कूल के टाइम में भी और अभी भी चोदता हूँ।

कांता - दूसरी??

मैं- इसको भी तुम जानती हो.. ऊपर वाले फ्लोर पर पूजा रहती थी.. याद है?

कांता - ओह्ह.. उसको भी?

मैं- हाँ..

कांता - तीसरी..

मैं- रीमा भाभी..

कांता- रीमा भाभी.. रोशन भैया की बीवी?

मैं- हाँ..

कांता- इनके साथ कब हुआ?

मैं- याद है.. एक गर्मी की छुटियों में मैं नानी के यहाँ एक महीना रहा था.. तभी..

कांता- अभी भी करते हो?

मैं- हाँ जब जाता हूँ.. तो मौका मिलने पर हो जाता है।

कांता- चौथी?

मैं- मेरा दोस्त मयंक याद है?

कांता - उसके साथ.. तुम ये भी?

मैं- अरे नहीं.. उसकी बहन अंकिता..

कांता - बड़ा कमीना है तू..

मैं- बचपन से ही हूँ.. हाहहहह..

कांता- उसके बाद?

मैं - इसको तुम नहीं जानती हो.. मेरी मकान मालकिन।

कांता- ओके उसके बाद?

मैं - मोनिका.. पापा के दोस्त की बेटी..

कांता- राउरकेला वाले?

मैं - हाँ..

कांता- और ये कब हुआ?

मैं - जब राउरकेला गया था ना ट्रेनिंग के लिए?

कांता- ट्रनिंग के लिए गए थे या ये सब करने गए थे?

मैं उसकी चूचियों को दबाते हुए बोला- दोनों काम करने गया था मेरी जान.. क्या करूँ.. ये मेरी कमज़ोरी है।

कांता - ऊहूऊऊ.. छोड़ो न.. उसके बाद?

मैं- उसके बाद का भी राउरकेला में ही मोनिका की दोस्त सोनी और उसकी मम्मी..

कांता - ओ तेरी.. उसकी मम्मी को भी.. ये कैसे हुआ?

मैंने फिर से उसकी चूची को दबा दिया- बस हो गया।

कांता- ऊऊऊऊऊहू ऊऊऊऊ.. इसी लिए.. जब वो आती है.. तो तुम भाग के मिलने जाते हो।

मैं- बहुत समझदार हो।

कांता- उसके बाद कौन है?

मैं- काजल.. मेरी गर्ल-फ्रेंड..

कांता - उसके बाद?

मैं - मत जानो.. ये?

कांता - कौन है.. बताओ तो सही..?

मैं- डॉली..

कांता एकदम चौंकते हुए बोली- क्या??

मैं- हाँ..

कांता - बहुत बड़ा कमीना है तू.. यार ये कैसे हुआ?

उसे अपनी सारी कहानी बता दी।

कांता - मतलब कोलकाता इसीलिए जाते हो?

मैं- हाँ..

कांता- दीदी को मेरे बारे में पता है?

मैं- नहीं..

कांता- गुड..

मैं- ओके..

कांता- ओके.. उसके बाद?

मैं- मेरी जान.. जो मेरी बाँहों में है।

कांता- अच्छा सबसे ज्यादा मजा किसके साथ आया?

मैं उसको किस करते हुए बोला- मेरी इस जान के साथ..

कांता- हहाहाहा..

मैं- मेरे बारे में तो सब जान गई.. तुम अपने बारे में भी कुछ बताओ।

कांता - मेरे बारे में क्या.. सब तो जानते ही हो.. क्या जानना बाकी है.. बताओ?

मैं- तुम्हारे ब्वॉय-फ्रेण्ड के बारे में?

कांता - ब्वॉय-फ्रेण्ड के बारे में… क्या?

मैं- अब तक कितने बने और कौन-कौन से खेला है?

कांता - अब तक तीन..

मैं- तीन.. कौन थे ये सब.. और सिर्फ़ घूमी-फिरी हो.. या किसी के साथ.. लेट भी चुकी हो?

कांता - ओके बताती हूँ.. पहला ब्वॉय-फ्रेण्ड राहुल.. याद है ना तुझे?

मैं- हाँ स्कूल वाला..

कांता - हाँ वही.. लेकिन सिर्फ लव लैटर ही देता रहा।

मैं- ओके.. दूसरा?

कांता- समीर..

मैं- कौन.. जो साथ में पढ़ने आता था.. हरामी साला?

कांता- हाँ वही.. ये सिर्फ़ किस ही कर पाया.. उससे आगे मौका ही नहीं दिया।

मैं- गुड तीसरा?

कांता- सूरज.. याद है तुमको?

मैं- कौन जो हमारे पड़ोस में रहता है?

कांता- हाँ इसके साथ दो बार..

मैं- इसके साथ चुदी हो?

कांता- हाँ..

मैं- कहाँ?

कांता- अपनी छत पर और एक बार उसके घर में..

मैं - पहले से ही उस कमीन पर मुझे शक था.. पर अब तो मैं उसकी बहन को भी चोदूंगा।

कांता- किसको सोनिया को?

मैं - हाँ और तुम मेरी हेल्प करना.. उसको पटाने में..

कांता- ओके.. लेकिन बदले में मुझे क्या मिलेगा?

मैं - क्या चाहिए बोलो?

कांता- जो माँगूगी.. दोगे..?

मैं - कोशिश करूँगा!

कांता - ओके बताती हूँ.. मुझे तुम्हारा एक दोस्त बहुत पसंद है।

मैं - कौन?

कांता - जय.. एक बार मुझे उससे मिला दो ना प्लीज़!

इतना कहते ही वो मेरे लंड पर बैठ गई और मेरा लंड उसकी बुर में घुसता चला गया।

मैंने नीचे से उसकी बुर में ठोकर मारते हुए कहा- ओके.. कोशिश करता हूँ।

बातों ही बातों में हमारी चुदाई हो गई जब चुदाई ख़त्म हुई तो।

कांता - राजा.. अपना प्रोमिस भूलना मत.. मैं तुमको शेफाली को पटाने में हेल्प करूँगी और तुम मुझे जय से मिलवा दोगे।

मैंने दबे मन से ही सही.. लेकिन ‘हाँ’ बोल दिया।

कांता - तो कब बुला रहे हो?

मैं- जब घर आओगी।

कांता - तो चलो आज ही चलते हैं घर!

मैं - बड़ी जल्दी है..

कांता - जय की बहन भी कम नहीं है.. तुम भी ट्राई कर सकते हो..

मैं - तुमको कैसे पता?

कांता - उसकी फ़ेसबुक में आडी है ना.. वहीं देखी थी।

मैं - उसका प्रोफाइल भी देख चुकी हो!

कांता - हाहाहहाहा जलने की बू आ रही है..

हम घर आ गए और पूरे रास्ते मजा लेते आए.. जैसे हम दोनों ब्वॉय-फ्रेण्ड गर्लफ्रेंड हों।

 
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