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राहुल अंकित को अपने घर ले गया था लेकिन घर पहुंचने से पहले उसने अंकित से बहुत सारी बातें की थी और वह सब बातें बेहद गंदी और अश्लील थी दूसरे लोगों के बारे में और घर की औरतों के बारे में राहुल की बातों को सुनकर वह भी घर की औरतों के ही बारे में अंकित का दिमाग चकराने लगा था उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी उसे राहुल की बातें बड़ी अच्छी लग रही थी क्योंकि राहुल की बातों में मां बहन चाची भाभी सबका जिक्र था लेकिन अंकित का आकर्षण किसी और रिश्ते से नहीं बल्कि अपनी मां से था वह अपनी मां के प्रति कुछ ज्यादा ही आकर्षित था क्योंकि अपनी मां को जाने अनजाने में अर्धनग्न अवस्था में नग्न अवस्था में देख चुका था और कुछ दिन पहले तो वह अपनी मां की कचोरी जैसे खुली हुई बुर को देखकर पागल हो गया था,,, इसलिए राहुल किस तरह की बातें उसे देखा अच्छी लग रही थी,,.
राहुल के द्वारा डोर बेल बजाने के बाद थोड़ी ही देर में दरवाजा खुल गया लेकिन दरवाजे के अंदर का नजारा देख कर तो अंकित के होश उड़ गए थे अंकित की आंखें फटी की फटी रह गई थी क्योंकि दरवाजा राहुल की मां ने खोली थी और जिस अवस्था में वह इस समय थी इस अवस्था के बारे में अंकित कभी सोच भी नहीं सकता था,,,, क्योंकि दरवाजा खोलने वाली राहुल की मां थी और इस समय वह केवल साड़ी पहनी हुई थी लेकिन ब्लाउज उनके बदन पर नहीं था और ना ही ब्रा था और ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी-अभी वह नहा कर बाहर आई हूं क्योंकि साड़ी भी उनके बदन से चिपक सी गई थी,,, और साड़ी से चिपक जाने से उसकी दोनों गोलाईया एकदम उभर कर सामने नजर आ रही थी,,, अंकित देखा तो देखता ही रह गया,,, नूपुर की चूचियां गीली साड़ी में एकदम साफ नजर आ रही थी और चूचियों के बीच की उसकी कसी हुई कड़ी निप्पल कैडबरी चॉकलेट की तरह एकदम साड़ी से चीपके हुई नजर आ रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई भाले की नोक हो,,,,,।
राहुल की मां का यह रूप देखकर अंकित तो एकदम मंत्र मुग्ध हो गया था कुछ देर के लिए वह अपनी मां को भूल गया था,,,, और भूल कैसे नहीं जाता उसकी आंखों के सामने बाथरूम से अभी-अभी नहा करने के लिए भी खूबसूरत जवान औरत जो थी और वैसे भी नहाने के बाद जवान औरतों की खूबसूरती और ज्यादा बढ़ जाती है औरतें और भी ज्यादा जवान नजर आने लगती है और उनके खूबसूरत अंगों का निखार और उभार और ज्यादा बढ़ जाता है,,,। और इस समय जवानी से भरी हुई नूपुर स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा नजर आ रही थी अंकित को यह समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां जानबूझकर ब्लाउज नहीं पहनी किया अनजाने में ही वजह दरवाजे में बिना ब्लाउज के दरवाजा खोलने आ गई थी,,,, पल भर में ही उसके मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे,,,,।
राहुल भी कुछ देर के लिए हक्का-बक्का रह गया था क्योंकि इस तरह से पहले भी उसकी मां दरवाजा खोल चुकी थी लेकिन उसकी मां जानती थी कि दरवाजे पर राहुल है इसलिए वह इस हालत में दरवाजा खोल देती थी लेकिन आज राहुल खुद भूल गया था कि उसके साथ अंकित है और शायद उसकी मां भी इस बात से अनजान थी इसीलिए वह इस वेशभूषा में दरवाजा खोल दी थी,,,, और वैसे भी पल भर के लिए राहुल भी अपनी मां के ऐसे रूप यौवन को देखकर मदहोश हो गया था,,,,,, लेकिन बात को संभालते हुए वह बोला,,,।
क्या हुआ मम्मी नहा रही थी क्या,,,?
(जिस तरह की हालत इस समय अंकित की थी ठीक उस विपरीत हालत नूपुर की थी जहां एक तरफ नूपुर की जवानी को देखकर अंकित उत्तेजित हो रहा था मदहोश हो रहा था वहीं दूसरी तरफ नूपुर एकदम घबरा गई थी उसे ऐसा ही था कि रोज की तरह उसका बेटा ही दरवाजे पर होगा और वह जानबूझकर इस अवस्था में दरवाजा खोलने चली गई थी,,, क्योंकि वह वाकई में नहा रही थी नहाने के बाद वह अपना ब्लाउज पहन चुकी थी लेकिन दरवाजे की बेल की आवाज सुनकर उसके चेहरे पर उत्तेजना के भाव नजर आने लगे और वह ब्लाउज और ब्रा दोनों को उतार कर केवल साड़ी को कंधे पर डालकर दरवाजा खोलना चली गई थी क्योंकि उसका मन बहुत कर रहा था सारी संबंध बनाने के लिए और वह राहुल को जानकर ही इस अवस्था में दरवाजा खोली थी लेकिन दरवाजे पर राहुल के साथ अंकित भी था उसकी अध्यापिका का बेटा इसीलिए वह एकदम से चौंक गई थी और अपनी दोनों जवान को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे क्योंकि साड़ी से छुपाने का कोई मौका उसके पास नहीं था सारी गीली थी और उसकी दोनों चूचियों से चिपक गई थी और अगल-बगल का चूची वाला हिस्सा हल्का सा नजर आ रहा था और साथ ही सूची के बीच की निप्पल एकदम तनी हुई थी जो की साड़ी से एकदम बाहर निकलने को आतुर नजर आ रही थी इन सब पर अंकित की नजर बराबर जमी हुई थी लेकिन अपने बेटे की बात सुनकर अपने आप को संभालते हुए वह बोली,,,,)
हा रे में नहा रही थी मुझे लगा तू होगा,,,,
नमस्ते आंटी,,,,(औपचारिकता निभाते हुए अंकित बोल)
खुश रहो बेटा आओ अंदर आओ,,,(अपनी साड़ी को दुरुस्त करने की नाकाम कोशिश करते हुए वह बोली और इसी के साथ राहुल और अंकित दोनों घर में प्रवेश कर गए और वह दरवाजा बंद कर दी)
तुम दोनों बैठो मैं तब तक कपड़े चेंज करके आती हूं,,,,(इतना कहकर नूपुर वापस बाथरूम में चली गई और जल्दी-जल्दी अपनी के लिए साड़ी को वापस उतार दी और कपड़े पहन कर अपने आप को ठीक करने लगी और आईने में अपने आप को देखकर वह अपने आप से ही बात करते हुए बोली)
बाप रे यह मैंने क्या कर दी यह तो अंकित है सुगंधा का बेटा,,, मुझे उसके सामने इस तरह के हालात में नहीं आना चाहिए था,,, उसने तो मेरा (अपनी चूचियों की तरफ देखते हुए) सब कुछ देख लिया गली साड़ी में बिना ब्लाउज और ब्रा के मेरी बड़ी-बड़ी चूचियों से साफ नजर आ रही थी और उसकी नजर भी तो मेरी छाती पर गड़ी हुई थी,,,,,(यह सब सोचते हुए जहां एक तरफ उसे डर का एहसास हो रहा था घबराहट हो रही थी वहीं दूसरी तरफ एक अनजान लड़के को अपना जिस्म दिखाने पर उसपर मदहोशी भी छा रही थी उसके लिए यह पहला मौका था जब वह किसी अनजान लड़की के सामने इस अवस्था में हाजिर हुई थी उसका दिल जोरो से धड़क रहा था अभी भी उसके टांगों में कंपन महसूस हो रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं वह अपनी मां को इस बारे में बोल दे तो क्या होगा वह क्या सोचेगी कि दरवाजे पर कौन खड़ा है कौन नहीं है यह सब जाने बिना ही वह अवस्था में कैसे दरवाजा खोल सकती हैं,,, यही सब सो कर हैरान हो रही थी उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी नूपुर मर्दों की नजरों को अच्छी तरह से समझती थी उसके ही बेटे का हम उम्र था अंकित और जिस तरह से वह उसकी चूचियों की तरफ देख रहा था जरूर वह उसकी तरफ आकर्षित हो रहा था,,,, नूपुर इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि साड़ी के अंदर उसकी नज़रें उसकी चूचियों की गोलाई को नाप रही थी,,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी नजरों से ही उसकी साड़ी को हटाकर उसकी नंगी चूचियों के दर्शन करना चाहता है,,,, यह सब सोचते हुए नूपुर के बदन में दोस्त भेजने की लहर उठ रही थी और नतीजा उसकी बुर गीली हो रही थी,,,, कुछ देर गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे अपनी सांसों को और अपने आप को दुरुस्त करने के बाद वह धीरे से बाहर निकली और एक बार फिर से दोनों के पास गई और मुस्कुराते हुए बोली,,,,)
तुम दोनों बैठकर बातें करो मैं चाय बना कर लाती हूं,,,
नहीं रहने दीजिए आंटी इसकी क्या जरूरत है हम दोनों अभी-अभी चाय पी कर आ रहे हैं,,,(अंकित औपचारिकता दिखाते हुए बोला)
अरे कोई बात नहीं फिर से पी लेना वैसे भी तुम मेरे घर पर पहली बार आए हो इसलिए मेरा फर्ज बनता है बस 10 मिनट में आती हुं,,,,(इतना कहने के साथ ही नूपुर किचन की तरफ जाने लगी और जाते हुए अंकित उसके पिछवाड़े को ही देख रहा था जो कि कुछ ज्यादा ही खीला हुआ और उभरा हुआ नजर आ रहा था,,,, नूपुर की बड़ी-बड़ी गांड देखकर उसे मटकता हुआ देखकर,,, अंकित की हालत खराब होने लगी वाकई में कुछ देर के लिए वह अपनी मां की खूबसूरती अपनी मां गदराया बदन,,, उसकी मदहोश करने वाली जवानी को भूल चुका था नूपुर के मदमस्त से यौवन में डूबता चला जा रहा था,,,, अंकित तब तक देखता रहा जब तक की राहुल की मां किचन के अंदर चली नहीं गई,,, और यह सब राहुल तिरछी नजर से देख रहा था अपनी मां के किचन के अंदर जाते ही राहुल बोला,,,,,।
क्या देख रहा हैअंकित,,,?
(राहुल की बात सुनते ही अंकित एकदम से घबरा गया उसकी चोरी पकड़ी गई थी लेकिन फिर भी अपने आप को संभालते हुए बोला)
कककककक,,, कुछ तो नहीं बस ऐसे ही,,,
बस ऐसे ही नहीं मैं जानता हूं तु क्या देख रहा था,,,
नहीं यार कुछ भी तो नहीं,,,,(अंकित घबराते हुए बोला)
देख हम दोनों एक ही उम्र के हैं और इस हिसाब से मुझे पता है कि तु क्या देख रहा था,,,
(अंकित तो राहुल की बातें सुनकर एकदम से हक्का-बक्का रह गया था,,,, अंकित समझ गया था कि राहुल उसकी नजरों को पहचान गया है,,,, वह कुछ बोल नहीं पा रहा था और राहुल अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)
तु मम्मी की गांड देख रहा था ना,,,(इतना सुनते ही अंकित के तो माथे से पसीना छूटने लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले और राहुल अपनी बात को आगे बढ़ते हुए बोला) मैं सही कह रहा हूं ना मैं जानता हूं मैं तेरी नजरों को देख लिया था बड़ी-बड़ी है ना मेरी मां की गांड,,,,,
(राहुल की बात सुनकर अंकित एकदम से चौंक गया था उसे यह चिंता लगी हुई थी कि राहुल ने उसकी नजरों को देख लिया था जो कि वाकई में वह उसकी मां की गांड कोई देख रहा था लेकिन वह इस बात से कुछ ज्यादा ही हैरान था क्योंकि राहुल अपनी मां की गांड के बारे में एकदम सहज होकर बोल रहा था उसके चेहरे पर बिल्कुल भी शर्म के भाव नजर नहीं आ रहे थे इसीलिए तो अंकित एकदम हैरान था और हैरान होते हुए बोला,,,)
यह तु क्या कह रहा है राहुल,,,?
मैं एकदम ठीक कह रहा हूं मैं तेरी नजरों के गौर किया था तू लगातार मेरी मां को ही देख रहा था खास करके उनकी गांड को और जब दरवाजे पर खड़ा था तो तू मेरी मां की चूचियों की तरफ देख रहा था ना जो कि वह भी खरबूजे की तरह बड़ी-बड़ी है,,,,
यह तो कैसी बातें कर रहा है अंकित वह भी अपनी मां के बारे में ही,,,
तो इसमें क्या हो गया,,,, खूबसूरत चीज को तो देखी जाती है ना और उनकी तारीफ भी की जाती है तो भी तो पागलों की तरह देख रहा था मेरी मां की चूची और गांड को दरवाजे पर तो सबकुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा था मेरी मां की चूची और तनी हुई निप्पल जिस पर तेरी नजर गई थी,,,,।
(अंकित एकदम हैरान हो गया था,,, आपस में मां बहन की गाली देते हुए तो वह देखा था और सुना था लेकिन आज पहली बार एक बेटे को अपनी मां के बारे में गंदी बात करते हुए देख रहा था सुन रहा था इसलिए वह बेहद अंचभित था,,, और वह बोला)
यह कैसी बातें कर रहा है तू राहुल अपनी ही मां के बारे में,,,
यार अभी रास्ते में मैं तुझे क्या समझाया था,,, मैं तुझे बताया था ना कि घर में ही जुगाड़ कर लेने का,,,
तो तेरा,,,,(एकदम आश्चर्य चकित होते हुए अंकित बोला,,)
हां मेरा आकर्षण मेरी मां की तरफ है,,,, देखा नहीं तूने मेरी मां कितनी खूबसूरत और सेक्सी है उसकी बड़ी चूची है उसकी बड़ी बड़ी गांड देखकर जो तेरी हालत खराब हो गई तब तुम्हें दिन-रात अपनी मां के साथ रहता हूं तो मेरी क्या हालत होती होगी,,,,
क्या यह सब तेरी मां को मालूम है,,,,
पहले नहीं मालूम था लेकिन धीरे-धीरे मेरी मां को भी समझ में आने लगा कि मैं उनको देखता रहता हूं,,,
फिर तेरी मां ने क्या कहा,,,
कुछ नहीं लेकिन जिस दिन से उसे ऐसा एहसास हुआ कि मैं उन्हें घूरता रहता हूं उसे दिन से उनका सजना सजना शुरू हो गया वैसे एकदम साधारण रहती थी लेकिन धीरे-धीरे उन्हें बदलाव आने लगा जानता है क्यों,,,?
क्यों,,,?
क्योंकि औरतों को भी यही पसंद है मर्द उनकी खूबसूरती खून के खूबसूरत अंगों को जब घुरते हैं तो उन्हें भी अंदर से अच्छा लगता है,,,, और उनकी खूबसूरती और ज्यादा खिलने लगती है,,,, इसलिए तो कहता हूं कि तू भी घर में जुगाड़ बना ले और वैसे भी मेरी मां से ज्यादा खूबसूरत तेरी मां है बहुत सेक्सी,,,
(राहु के मुंह से अपनी मां के बारे में इस तरह की बातें सुनकर अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि राहुल इस तरह से बात करेगा लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रहा था और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)
पहली मुलाकात में ही मैं तेरी मां को देखा ही रह गया तेरी मां की छाती कितनी खूबसूरत है ऐसा लगता था कि तेरी मां की चूची ब्लाउज फाड़ कर बाहर आ जाएगी,,,, तू भी मेरी मां की चूची देख रहा था ना कैसी थी गोल-गोल बड़ी-बड़ी तेरा भी मन कर रहा होगा अपने हाथों में लेकर दबाने के लिए,,, मेरा भी मन कर रहा था तेरी मां की चूची को पकड़ने के लिए और तोड़ तेरी मां का पिछवाड़ा कितना कसा हुआ है मेरी मां से ज्यादा खूबसूरत और जवान तेरी मां है मुझे पूरा यकीन है कि तेरी मां का हर एक अंग एकदम जवान लड़कियों की तरह कसा हुआ होगा और उनमे जरा भी ढीलापन नहीं होगा,,,,।
(राहुल की बातें अंकित के होश उड़ा रही थी और साथ ही उत्तेजना के मारे अंकित का लंड खड़ा हो गया था अपने दोस्त के मुंह से अपनी मां के लिए स्टार की गंदी बात सुनकर जहां एक तरफ अंकित को गुस्सा आता था वही आज न जाने क्यों उसे अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ सुनने में मजा आ रहा था उत्तेजना का अनुभव हो रहा था उसे इस बात का एहसास हो रहा है कि वाकई में उसकी मां कितनी ज्यादा खूबसूरत है की आते जाते जवान लड़के उसकी मां को देखते रहते और न जाने कैसी कैसी कल्पनाएं करते रहते हैं जैसा कि राहुल कर रहा था,,,,)
मैं तो कहता हूं तू भी मेरी तरह नजरिया रखा कर,,,
ना बाबा ना मुझे तो डर लगता है,,,।
(दोनों की बातचीत परवान चढता ईससे पहले नूपुर हाथ में चाय का ट्राय लेकर आ गई और फिर दोनों को चाय नाश्ता देकर खुद भी चाय पीने के लिए बैठ गई,,,, इधर-उधर की बातें करते हुए तीनों बहुत खुश नजर आ रहे थे लेकिन इस बीच लगातार अंकित की नजर राहुल की मां के ऊपर से उसकी बदमाशी कर देने वाली चूचियां उसका खूबसूरत गदराया बदन उसका गोरा रंग,,, और उसका पिछवाड़ा,,,, इन सब के बारे में सोचते हुए अंकित का लंड खड़ा हो गया था,,, बातों ही बातों में नुपुर बोली,,,)
बेटा तुम भी आया करो तुम भी तो मेरे बेटे जैसे हो,,,
जी आंटी में जरूर आता रहूंगा,,,,
और हां राहुल के जन्मदिन पर जरूर आना,,,
जरूर आऊंगा आंटी,, वैसे जन्मदिन कब है,,,
अभी तो काफी दिन है यार मैं बता दूंगा तुझे,,,(चाय का कप टेबल पर रखते हुए राहुल बोला,,, और फिर अंकित अपनी जगह पर खड़ा हो गया और जाने के लिए इजाजत मांगने लगा,, राहुल उसे छोड़ने के लिए बात कर रहा था लेकिन वह बोला कि वह चला जाएगा इसलिए वह घर से बाहर निकल गया और पैदल अपने घर की तरफ निकल गया अपने मन में ढेर सारे सवाल लेकर,,,
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राहुल के द्वारा डोर बेल बजाने के बाद थोड़ी ही देर में दरवाजा खुल गया लेकिन दरवाजे के अंदर का नजारा देख कर तो अंकित के होश उड़ गए थे अंकित की आंखें फटी की फटी रह गई थी क्योंकि दरवाजा राहुल की मां ने खोली थी और जिस अवस्था में वह इस समय थी इस अवस्था के बारे में अंकित कभी सोच भी नहीं सकता था,,,, क्योंकि दरवाजा खोलने वाली राहुल की मां थी और इस समय वह केवल साड़ी पहनी हुई थी लेकिन ब्लाउज उनके बदन पर नहीं था और ना ही ब्रा था और ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी-अभी वह नहा कर बाहर आई हूं क्योंकि साड़ी भी उनके बदन से चिपक सी गई थी,,, और साड़ी से चिपक जाने से उसकी दोनों गोलाईया एकदम उभर कर सामने नजर आ रही थी,,, अंकित देखा तो देखता ही रह गया,,, नूपुर की चूचियां गीली साड़ी में एकदम साफ नजर आ रही थी और चूचियों के बीच की उसकी कसी हुई कड़ी निप्पल कैडबरी चॉकलेट की तरह एकदम साड़ी से चीपके हुई नजर आ रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई भाले की नोक हो,,,,,।
राहुल की मां का यह रूप देखकर अंकित तो एकदम मंत्र मुग्ध हो गया था कुछ देर के लिए वह अपनी मां को भूल गया था,,,, और भूल कैसे नहीं जाता उसकी आंखों के सामने बाथरूम से अभी-अभी नहा करने के लिए भी खूबसूरत जवान औरत जो थी और वैसे भी नहाने के बाद जवान औरतों की खूबसूरती और ज्यादा बढ़ जाती है औरतें और भी ज्यादा जवान नजर आने लगती है और उनके खूबसूरत अंगों का निखार और उभार और ज्यादा बढ़ जाता है,,,। और इस समय जवानी से भरी हुई नूपुर स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा नजर आ रही थी अंकित को यह समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां जानबूझकर ब्लाउज नहीं पहनी किया अनजाने में ही वजह दरवाजे में बिना ब्लाउज के दरवाजा खोलने आ गई थी,,,, पल भर में ही उसके मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे,,,,।
राहुल भी कुछ देर के लिए हक्का-बक्का रह गया था क्योंकि इस तरह से पहले भी उसकी मां दरवाजा खोल चुकी थी लेकिन उसकी मां जानती थी कि दरवाजे पर राहुल है इसलिए वह इस हालत में दरवाजा खोल देती थी लेकिन आज राहुल खुद भूल गया था कि उसके साथ अंकित है और शायद उसकी मां भी इस बात से अनजान थी इसीलिए वह इस वेशभूषा में दरवाजा खोल दी थी,,,, और वैसे भी पल भर के लिए राहुल भी अपनी मां के ऐसे रूप यौवन को देखकर मदहोश हो गया था,,,,,, लेकिन बात को संभालते हुए वह बोला,,,।
क्या हुआ मम्मी नहा रही थी क्या,,,?
(जिस तरह की हालत इस समय अंकित की थी ठीक उस विपरीत हालत नूपुर की थी जहां एक तरफ नूपुर की जवानी को देखकर अंकित उत्तेजित हो रहा था मदहोश हो रहा था वहीं दूसरी तरफ नूपुर एकदम घबरा गई थी उसे ऐसा ही था कि रोज की तरह उसका बेटा ही दरवाजे पर होगा और वह जानबूझकर इस अवस्था में दरवाजा खोलने चली गई थी,,, क्योंकि वह वाकई में नहा रही थी नहाने के बाद वह अपना ब्लाउज पहन चुकी थी लेकिन दरवाजे की बेल की आवाज सुनकर उसके चेहरे पर उत्तेजना के भाव नजर आने लगे और वह ब्लाउज और ब्रा दोनों को उतार कर केवल साड़ी को कंधे पर डालकर दरवाजा खोलना चली गई थी क्योंकि उसका मन बहुत कर रहा था सारी संबंध बनाने के लिए और वह राहुल को जानकर ही इस अवस्था में दरवाजा खोली थी लेकिन दरवाजे पर राहुल के साथ अंकित भी था उसकी अध्यापिका का बेटा इसीलिए वह एकदम से चौंक गई थी और अपनी दोनों जवान को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे क्योंकि साड़ी से छुपाने का कोई मौका उसके पास नहीं था सारी गीली थी और उसकी दोनों चूचियों से चिपक गई थी और अगल-बगल का चूची वाला हिस्सा हल्का सा नजर आ रहा था और साथ ही सूची के बीच की निप्पल एकदम तनी हुई थी जो की साड़ी से एकदम बाहर निकलने को आतुर नजर आ रही थी इन सब पर अंकित की नजर बराबर जमी हुई थी लेकिन अपने बेटे की बात सुनकर अपने आप को संभालते हुए वह बोली,,,,)
हा रे में नहा रही थी मुझे लगा तू होगा,,,,
नमस्ते आंटी,,,,(औपचारिकता निभाते हुए अंकित बोल)
खुश रहो बेटा आओ अंदर आओ,,,(अपनी साड़ी को दुरुस्त करने की नाकाम कोशिश करते हुए वह बोली और इसी के साथ राहुल और अंकित दोनों घर में प्रवेश कर गए और वह दरवाजा बंद कर दी)
तुम दोनों बैठो मैं तब तक कपड़े चेंज करके आती हूं,,,,(इतना कहकर नूपुर वापस बाथरूम में चली गई और जल्दी-जल्दी अपनी के लिए साड़ी को वापस उतार दी और कपड़े पहन कर अपने आप को ठीक करने लगी और आईने में अपने आप को देखकर वह अपने आप से ही बात करते हुए बोली)
बाप रे यह मैंने क्या कर दी यह तो अंकित है सुगंधा का बेटा,,, मुझे उसके सामने इस तरह के हालात में नहीं आना चाहिए था,,, उसने तो मेरा (अपनी चूचियों की तरफ देखते हुए) सब कुछ देख लिया गली साड़ी में बिना ब्लाउज और ब्रा के मेरी बड़ी-बड़ी चूचियों से साफ नजर आ रही थी और उसकी नजर भी तो मेरी छाती पर गड़ी हुई थी,,,,,(यह सब सोचते हुए जहां एक तरफ उसे डर का एहसास हो रहा था घबराहट हो रही थी वहीं दूसरी तरफ एक अनजान लड़के को अपना जिस्म दिखाने पर उसपर मदहोशी भी छा रही थी उसके लिए यह पहला मौका था जब वह किसी अनजान लड़की के सामने इस अवस्था में हाजिर हुई थी उसका दिल जोरो से धड़क रहा था अभी भी उसके टांगों में कंपन महसूस हो रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं वह अपनी मां को इस बारे में बोल दे तो क्या होगा वह क्या सोचेगी कि दरवाजे पर कौन खड़ा है कौन नहीं है यह सब जाने बिना ही वह अवस्था में कैसे दरवाजा खोल सकती हैं,,, यही सब सो कर हैरान हो रही थी उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी नूपुर मर्दों की नजरों को अच्छी तरह से समझती थी उसके ही बेटे का हम उम्र था अंकित और जिस तरह से वह उसकी चूचियों की तरफ देख रहा था जरूर वह उसकी तरफ आकर्षित हो रहा था,,,, नूपुर इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि साड़ी के अंदर उसकी नज़रें उसकी चूचियों की गोलाई को नाप रही थी,,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी नजरों से ही उसकी साड़ी को हटाकर उसकी नंगी चूचियों के दर्शन करना चाहता है,,,, यह सब सोचते हुए नूपुर के बदन में दोस्त भेजने की लहर उठ रही थी और नतीजा उसकी बुर गीली हो रही थी,,,, कुछ देर गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे अपनी सांसों को और अपने आप को दुरुस्त करने के बाद वह धीरे से बाहर निकली और एक बार फिर से दोनों के पास गई और मुस्कुराते हुए बोली,,,,)
तुम दोनों बैठकर बातें करो मैं चाय बना कर लाती हूं,,,
नहीं रहने दीजिए आंटी इसकी क्या जरूरत है हम दोनों अभी-अभी चाय पी कर आ रहे हैं,,,(अंकित औपचारिकता दिखाते हुए बोला)
अरे कोई बात नहीं फिर से पी लेना वैसे भी तुम मेरे घर पर पहली बार आए हो इसलिए मेरा फर्ज बनता है बस 10 मिनट में आती हुं,,,,(इतना कहने के साथ ही नूपुर किचन की तरफ जाने लगी और जाते हुए अंकित उसके पिछवाड़े को ही देख रहा था जो कि कुछ ज्यादा ही खीला हुआ और उभरा हुआ नजर आ रहा था,,,, नूपुर की बड़ी-बड़ी गांड देखकर उसे मटकता हुआ देखकर,,, अंकित की हालत खराब होने लगी वाकई में कुछ देर के लिए वह अपनी मां की खूबसूरती अपनी मां गदराया बदन,,, उसकी मदहोश करने वाली जवानी को भूल चुका था नूपुर के मदमस्त से यौवन में डूबता चला जा रहा था,,,, अंकित तब तक देखता रहा जब तक की राहुल की मां किचन के अंदर चली नहीं गई,,, और यह सब राहुल तिरछी नजर से देख रहा था अपनी मां के किचन के अंदर जाते ही राहुल बोला,,,,,।
क्या देख रहा हैअंकित,,,?
(राहुल की बात सुनते ही अंकित एकदम से घबरा गया उसकी चोरी पकड़ी गई थी लेकिन फिर भी अपने आप को संभालते हुए बोला)
कककककक,,, कुछ तो नहीं बस ऐसे ही,,,
बस ऐसे ही नहीं मैं जानता हूं तु क्या देख रहा था,,,
नहीं यार कुछ भी तो नहीं,,,,(अंकित घबराते हुए बोला)
देख हम दोनों एक ही उम्र के हैं और इस हिसाब से मुझे पता है कि तु क्या देख रहा था,,,
(अंकित तो राहुल की बातें सुनकर एकदम से हक्का-बक्का रह गया था,,,, अंकित समझ गया था कि राहुल उसकी नजरों को पहचान गया है,,,, वह कुछ बोल नहीं पा रहा था और राहुल अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)
तु मम्मी की गांड देख रहा था ना,,,(इतना सुनते ही अंकित के तो माथे से पसीना छूटने लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले और राहुल अपनी बात को आगे बढ़ते हुए बोला) मैं सही कह रहा हूं ना मैं जानता हूं मैं तेरी नजरों को देख लिया था बड़ी-बड़ी है ना मेरी मां की गांड,,,,,
(राहुल की बात सुनकर अंकित एकदम से चौंक गया था उसे यह चिंता लगी हुई थी कि राहुल ने उसकी नजरों को देख लिया था जो कि वाकई में वह उसकी मां की गांड कोई देख रहा था लेकिन वह इस बात से कुछ ज्यादा ही हैरान था क्योंकि राहुल अपनी मां की गांड के बारे में एकदम सहज होकर बोल रहा था उसके चेहरे पर बिल्कुल भी शर्म के भाव नजर नहीं आ रहे थे इसीलिए तो अंकित एकदम हैरान था और हैरान होते हुए बोला,,,)
यह तु क्या कह रहा है राहुल,,,?
मैं एकदम ठीक कह रहा हूं मैं तेरी नजरों के गौर किया था तू लगातार मेरी मां को ही देख रहा था खास करके उनकी गांड को और जब दरवाजे पर खड़ा था तो तू मेरी मां की चूचियों की तरफ देख रहा था ना जो कि वह भी खरबूजे की तरह बड़ी-बड़ी है,,,,
यह तो कैसी बातें कर रहा है अंकित वह भी अपनी मां के बारे में ही,,,
तो इसमें क्या हो गया,,,, खूबसूरत चीज को तो देखी जाती है ना और उनकी तारीफ भी की जाती है तो भी तो पागलों की तरह देख रहा था मेरी मां की चूची और गांड को दरवाजे पर तो सबकुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा था मेरी मां की चूची और तनी हुई निप्पल जिस पर तेरी नजर गई थी,,,,।
(अंकित एकदम हैरान हो गया था,,, आपस में मां बहन की गाली देते हुए तो वह देखा था और सुना था लेकिन आज पहली बार एक बेटे को अपनी मां के बारे में गंदी बात करते हुए देख रहा था सुन रहा था इसलिए वह बेहद अंचभित था,,, और वह बोला)
यह कैसी बातें कर रहा है तू राहुल अपनी ही मां के बारे में,,,
यार अभी रास्ते में मैं तुझे क्या समझाया था,,, मैं तुझे बताया था ना कि घर में ही जुगाड़ कर लेने का,,,
तो तेरा,,,,(एकदम आश्चर्य चकित होते हुए अंकित बोला,,)
हां मेरा आकर्षण मेरी मां की तरफ है,,,, देखा नहीं तूने मेरी मां कितनी खूबसूरत और सेक्सी है उसकी बड़ी चूची है उसकी बड़ी बड़ी गांड देखकर जो तेरी हालत खराब हो गई तब तुम्हें दिन-रात अपनी मां के साथ रहता हूं तो मेरी क्या हालत होती होगी,,,,
क्या यह सब तेरी मां को मालूम है,,,,
पहले नहीं मालूम था लेकिन धीरे-धीरे मेरी मां को भी समझ में आने लगा कि मैं उनको देखता रहता हूं,,,
फिर तेरी मां ने क्या कहा,,,
कुछ नहीं लेकिन जिस दिन से उसे ऐसा एहसास हुआ कि मैं उन्हें घूरता रहता हूं उसे दिन से उनका सजना सजना शुरू हो गया वैसे एकदम साधारण रहती थी लेकिन धीरे-धीरे उन्हें बदलाव आने लगा जानता है क्यों,,,?
क्यों,,,?
क्योंकि औरतों को भी यही पसंद है मर्द उनकी खूबसूरती खून के खूबसूरत अंगों को जब घुरते हैं तो उन्हें भी अंदर से अच्छा लगता है,,,, और उनकी खूबसूरती और ज्यादा खिलने लगती है,,,, इसलिए तो कहता हूं कि तू भी घर में जुगाड़ बना ले और वैसे भी मेरी मां से ज्यादा खूबसूरत तेरी मां है बहुत सेक्सी,,,
(राहु के मुंह से अपनी मां के बारे में इस तरह की बातें सुनकर अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि राहुल इस तरह से बात करेगा लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रहा था और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)
पहली मुलाकात में ही मैं तेरी मां को देखा ही रह गया तेरी मां की छाती कितनी खूबसूरत है ऐसा लगता था कि तेरी मां की चूची ब्लाउज फाड़ कर बाहर आ जाएगी,,,, तू भी मेरी मां की चूची देख रहा था ना कैसी थी गोल-गोल बड़ी-बड़ी तेरा भी मन कर रहा होगा अपने हाथों में लेकर दबाने के लिए,,, मेरा भी मन कर रहा था तेरी मां की चूची को पकड़ने के लिए और तोड़ तेरी मां का पिछवाड़ा कितना कसा हुआ है मेरी मां से ज्यादा खूबसूरत और जवान तेरी मां है मुझे पूरा यकीन है कि तेरी मां का हर एक अंग एकदम जवान लड़कियों की तरह कसा हुआ होगा और उनमे जरा भी ढीलापन नहीं होगा,,,,।
(राहुल की बातें अंकित के होश उड़ा रही थी और साथ ही उत्तेजना के मारे अंकित का लंड खड़ा हो गया था अपने दोस्त के मुंह से अपनी मां के लिए स्टार की गंदी बात सुनकर जहां एक तरफ अंकित को गुस्सा आता था वही आज न जाने क्यों उसे अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ सुनने में मजा आ रहा था उत्तेजना का अनुभव हो रहा था उसे इस बात का एहसास हो रहा है कि वाकई में उसकी मां कितनी ज्यादा खूबसूरत है की आते जाते जवान लड़के उसकी मां को देखते रहते और न जाने कैसी कैसी कल्पनाएं करते रहते हैं जैसा कि राहुल कर रहा था,,,,)
मैं तो कहता हूं तू भी मेरी तरह नजरिया रखा कर,,,
ना बाबा ना मुझे तो डर लगता है,,,।
(दोनों की बातचीत परवान चढता ईससे पहले नूपुर हाथ में चाय का ट्राय लेकर आ गई और फिर दोनों को चाय नाश्ता देकर खुद भी चाय पीने के लिए बैठ गई,,,, इधर-उधर की बातें करते हुए तीनों बहुत खुश नजर आ रहे थे लेकिन इस बीच लगातार अंकित की नजर राहुल की मां के ऊपर से उसकी बदमाशी कर देने वाली चूचियां उसका खूबसूरत गदराया बदन उसका गोरा रंग,,, और उसका पिछवाड़ा,,,, इन सब के बारे में सोचते हुए अंकित का लंड खड़ा हो गया था,,, बातों ही बातों में नुपुर बोली,,,)
बेटा तुम भी आया करो तुम भी तो मेरे बेटे जैसे हो,,,
जी आंटी में जरूर आता रहूंगा,,,,
और हां राहुल के जन्मदिन पर जरूर आना,,,
जरूर आऊंगा आंटी,, वैसे जन्मदिन कब है,,,
अभी तो काफी दिन है यार मैं बता दूंगा तुझे,,,(चाय का कप टेबल पर रखते हुए राहुल बोला,,, और फिर अंकित अपनी जगह पर खड़ा हो गया और जाने के लिए इजाजत मांगने लगा,, राहुल उसे छोड़ने के लिए बात कर रहा था लेकिन वह बोला कि वह चला जाएगा इसलिए वह घर से बाहर निकल गया और पैदल अपने घर की तरफ निकल गया अपने मन में ढेर सारे सवाल लेकर,,,
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