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संदीप की हरकत से तृप्ति के बदन में उत्तेजना और गर्माहट दोनों पूरी तरह से अपना असर दिखाने लगी,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह पागल हुए जा रही थी देखते ही देखते संदीप उसके दोनों संतरों को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया,,,, जिस उत्तेजना के साथ संदीप उसकी चूचियों को दबा रहा था उसे तृप्ति,, को दर्द का एहसास तो हो ही रहा था लेकिन आनंद भी बेहद मिल रहा था,,, दोनों का चुंबन इतना गहरा था कि दोनों के लार और थुक एक दूसरे के मुंह में आदान-प्रदान हो रहे थे,,, दोनों पूरी तरह से पागल हो जाएंगे उन्हें इस बात की भी परवाह नहीं थी कि दरवाजा खुला हुआ है वह तो गनीमत था कि मैडम नहाने के लिए बाथरुम में चली गई थी,,,।
दोनों की हालत खराब हो गई थी इस तरह के एकांत में तृप्ति पूरी तरह से उत्तेजित हो गई थी उसकी बुर से मदन रस लगातार बह रहा था,,,, उसकी बाहों को पड़कर संदीप उसे खड़ी कर दिया और कुछ पल के लिए उसके होठों से अपने होठों को दूर करके उसके खूबसूरत चेहरे को देखने लगा पल भर में ही तृप्ति का गोरा चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया था,,, तृप्ति की सांस ऊपर नीचे हो रही थी साथ में उसकी चूचियां भी लहरा रही थी,,,।
संदीप,,, हमें यह नहीं ,,,, करना चाहिए,,,,(एकदम मदहोश होते हुए गहरी सांस लेते हुए वह बोली तो संदीप बोला)
ऐसा मौका फिर कभी नहीं मिलेगा तृप्ति,,,,
लेकिन समझने की कोशिश करो मैडम भी इधर ही है,,,।
( खेला खाया संदीप,, तृप्ति की बातों से ही समझ गया कि उसका भी मन है,,,, इसलिए वह धीरे से दरवाजे को बंद करतेहुए बोला,,,)
मैडम की चिंता मत करो वह बाथरूम में है,,,,।
तो,,(गहरी सांस लेते हुए तृप्ति बोली)
तो,,, क्या,,, इस मौके का फायदा उठाना चाहिए,,,,(और इतना कहने के साथ ही फिर से अपने होठों को उसकी तरफ आगे बढ़ाने लगा और देखते ही देखते फिर से दोनों एक दूसरे के होठों को चूसना और चबाना शुरू कर दिए,,,, तृप्ति पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है बस वह संदीप की हरकतों का मजा ले रही थी और संदीप अपनी हरकत को धीरे-धीरे आगे बढ़ा रहा था,,,, उसकी चूचियों पर से उसके दोनों हाथ नीचे की तरफ फिसलते उसकी कमर पर आ गए थे और कमर पर आते ही वह धीरे से अपने हाथों को उसकी गोल-गोल नितंबों पर रख दिया था नितंबों पर संदीप के हाथों का स्पर्श इसे पूरी तरह से मदहोश कर रहा था वह पागल हुए जा रही थी और पागलों की तरह संदीप के होठों को चूस रही थी संदीप भी अपनी हरकत को अनजान देते हुए उसके नितंबों को दोनों हथेलियां में कसकर दबा दबा कर मजा ले रहा था,,,,,।
संदीप समझ गया था कि तृप्ति चुदवाने के लिए तैयार हो गई है,,,, इसलिए उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे एकदम से अपने लंड पर सता लिया और ऐसा करने पर उसका लंड जो कि पेंट में तनकर खड़ा हो गया था वह सीधे-सीधे उसकी दोनों टांगों के बीच जाकर उसकी बुर पर दस्तक देने लगा,,, तृप्ति को संदीप के लंड का एहसास अपनी बुर पर बहुत अच्छी तरह से हुआ था इसलिए उसके मुंह से हल्की सी शिकारी फूट पड़ी थी,,, और उसकी सिसकारी की आवाज सुनकर संदीप एकदम से चुदवासा हो गया और उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे उठाते हुए पास में ही पड़े टेबल पर बैठा दिया,,,,।
संदीप से अब रख पाना बहुत मुश्किल था क्योंकि जवानी का पर पूरी तरह से पार कर गया था इससे अच्छा मौका संदीप को मिलने वाला नहीं था इस तरह का एकांत उसे फिर दोबारा मिलने वाला नहीं था ऐसा एहसास उसके मन में होते ही वह तुरंत तृप्ति के सलवार की डोरी को खोलने लगा,,,, संदीप को इस तरह से सलवार की डोरी खोलता हुआ देखकर वह अपना हाथ बढ़ाकर उसे रोकने की कोशिश करने लगी लेकिन वह उसका हाथ हटा दिया और दोबारा तृप्ति में उसे हटाने की रोकने की कोशिश भी नहीं की क्योंकि अंदर से वह भी यही चाहती थी जो संदीप चाहता था देखते-देखते वह है तृप्ति की सलवार की डोरी खोलकर उसकी सलवार को ढीली कर दिया था और पेटी सहित उसे पड़कर उसके घुटनों तक खींच दिया था,,,,।
संदीप की हरकत से तृप्ति पानी पानी हो रही थी उसकी बुर लगातार पानी छोड़ रही थी,,, दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी लेकिन पूरे कमरे में दोनों की गरमा गरम सांसो की आवाज ही गुंज रही थी,,,, संदीप की हर हरकत तृप्ति को बहुत ही अच्छी लग रही थी तृप्ति पूरी तरह से मदहोशी के आलम में हो गई थी,,, वह जवानी के नशे में डूब चुकी थी संदीप उसकी दोनों टांगों को उसके घुटनों से मोड कर उसकी गोल गोल गांड को देख रहा था और गांड की बीच उसकी गुलाबी बुर को देख रहा था,,, और उसकी बुर को देखकर उसके मुंह में पानी आ रहा था,,,, क्योंकि उत्तेजना के मारे उसकी बुर फुलकर कचोरी हो गई थी,,, संदीप की अनुभवी आंखें में तृप्ति की बुर को देखकर पहचान लिया था कि आज ही उसने क्रीम लगाकर उसे साफ की थी,,,, तृप्ति संदीप के हर हरकत को देख रही थी,,,,।
संदीप का मन तो कर रहा था कि तृप्ति की बुर को जीभ लगाकर चाटे,,, लेकिन वह जानता था कि इतना समय उसके पास बिल्कुल भी नहीं है वह तृप्ति की बुर में अपनी विजय पताका लहराना चाहता था,, इसलिए वह इस समय ज्यादा कुछ ना करते हुए अपनी हथेली को उसकी बुर पर रखकर उसे ज़ोर से मसलते हुए अपनी पेंट का बटन खोलने लगा,,,,।
संदीप के द्वारा हथेली से बुर को रगड़ने की वजह से उत्तेजना के चलते तृप्ति की आंखें एकदम से बंद हो गई थी,,,, और वह गहरी गहरी सांस लेने लगी थी लेकिन फिर वह अपनी आंखों को खोलकर संदीप की तरफ देखने लगी थी उसकी हरकतों को देखने लगी थी वह अपनी पेंट खोल रहा था और देखते-देखते वह अपनी पेट को घुटनों तक नीचे खींच दिया था लेकिन जैसे ही तृप्ति की नजर संदीप के लंड पर गई तो उसके होश उड़ गए,,,, वह अपने मन में ही सोचने लगी कि सुबह जो देखी थी उससे तो इसका आधा भी नहीं है,,,, तृप्ति,,, को कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,, जब तक वह अपने भाई का नहीं देखी थी तब तक उसके मन में लड के आकार को लेकर वास्तव में संदीप के लंड के आकार का ही वास्तविक लंड नजर आता था,,, लेकिन सुबह अपने भाई के बम पिलाट लंड के दर्शन करने के बाद संदीप का लंड उसे बहुत छोटा लग रहा था,,,,।
लेकिन फिर भी उसकी उत्तेजना परम सीमा पर थी वह पूरी तरह से चुदवाने के लिए तैयार हो चुकी थी,,, और संदीप उसे चोदने के लिए तैयार हो गया था,,,, लेकिन जैसे ही संदीप ने थूक को लगा कर अपने लंड को गीला किया वैसे ही डोर बेल बजने लगी,,, उसके तो होश उड़ गए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, समय की सीमा रेखा को देखकर ही वह तृप्ति की बुर को चाटने का सुख छोड़कर एक बार उसने अपना लंड डालना चाहता है अपनी ख्वाहिश पूरी करना चाहता था और इसके लिए वह पूरी तरह से तैयार भी हो चुका था दरवाजे की घंटी बजाने के बावजूद भी वह एक हाथ में लंड पड़कर दूसरे हाथ से तृप्ति की दोनों टांगो को ऊपर उठाते हुए उसकी बुर में डालने जा रहा था कि लगातार डोर बेल बजाने की वजह से बाथरूम में से ही उसके मैडम ने आवाज लगाते हुए बोली,,,)
संदीप जल्दी से दरवाजा खोल दे बच्चे आ गए होंगे,,,,।
रहने दो संदीप,,,(लगातार डोर बैल और मैडम की आवाज सुनकर तृप्ति एकदम से घबरा गई और तुरंत टेबल पर से नीचे उतर कर अपनी सलवार की डोरी बांधने लगी,, संदीप भी समझ गया था कि अब उसके बस में कुछ भी नहीं है इसलिए वह भी अपने आप को व्यवस्थित करके दरवाजा खोलने के लिए चला गया,,, और तृप्ति वापस से सब्जी काटने लगी,,, देखते ही देखते घर में मेहमानों की संख्या बढ़ने लगी और फिर कब शाम हो गई पता ही नहीं चला,,,,।
रास्ते भर संदीप और तृप्ति एक दूसरे से बात नहीं कर रहे थे तृप्ति तो शर्म के मारे संदीप से बात नहीं कर पा रही थी और संदीप हाथ में आया । मौका चला गया था इसलिए कुछ बोल नहीं रहा था
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दोनों की हालत खराब हो गई थी इस तरह के एकांत में तृप्ति पूरी तरह से उत्तेजित हो गई थी उसकी बुर से मदन रस लगातार बह रहा था,,,, उसकी बाहों को पड़कर संदीप उसे खड़ी कर दिया और कुछ पल के लिए उसके होठों से अपने होठों को दूर करके उसके खूबसूरत चेहरे को देखने लगा पल भर में ही तृप्ति का गोरा चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया था,,, तृप्ति की सांस ऊपर नीचे हो रही थी साथ में उसकी चूचियां भी लहरा रही थी,,,।
संदीप,,, हमें यह नहीं ,,,, करना चाहिए,,,,(एकदम मदहोश होते हुए गहरी सांस लेते हुए वह बोली तो संदीप बोला)
ऐसा मौका फिर कभी नहीं मिलेगा तृप्ति,,,,
लेकिन समझने की कोशिश करो मैडम भी इधर ही है,,,।
( खेला खाया संदीप,, तृप्ति की बातों से ही समझ गया कि उसका भी मन है,,,, इसलिए वह धीरे से दरवाजे को बंद करतेहुए बोला,,,)
मैडम की चिंता मत करो वह बाथरूम में है,,,,।
तो,,(गहरी सांस लेते हुए तृप्ति बोली)
तो,,, क्या,,, इस मौके का फायदा उठाना चाहिए,,,,(और इतना कहने के साथ ही फिर से अपने होठों को उसकी तरफ आगे बढ़ाने लगा और देखते ही देखते फिर से दोनों एक दूसरे के होठों को चूसना और चबाना शुरू कर दिए,,,, तृप्ति पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है बस वह संदीप की हरकतों का मजा ले रही थी और संदीप अपनी हरकत को धीरे-धीरे आगे बढ़ा रहा था,,,, उसकी चूचियों पर से उसके दोनों हाथ नीचे की तरफ फिसलते उसकी कमर पर आ गए थे और कमर पर आते ही वह धीरे से अपने हाथों को उसकी गोल-गोल नितंबों पर रख दिया था नितंबों पर संदीप के हाथों का स्पर्श इसे पूरी तरह से मदहोश कर रहा था वह पागल हुए जा रही थी और पागलों की तरह संदीप के होठों को चूस रही थी संदीप भी अपनी हरकत को अनजान देते हुए उसके नितंबों को दोनों हथेलियां में कसकर दबा दबा कर मजा ले रहा था,,,,,।
संदीप समझ गया था कि तृप्ति चुदवाने के लिए तैयार हो गई है,,,, इसलिए उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे एकदम से अपने लंड पर सता लिया और ऐसा करने पर उसका लंड जो कि पेंट में तनकर खड़ा हो गया था वह सीधे-सीधे उसकी दोनों टांगों के बीच जाकर उसकी बुर पर दस्तक देने लगा,,, तृप्ति को संदीप के लंड का एहसास अपनी बुर पर बहुत अच्छी तरह से हुआ था इसलिए उसके मुंह से हल्की सी शिकारी फूट पड़ी थी,,, और उसकी सिसकारी की आवाज सुनकर संदीप एकदम से चुदवासा हो गया और उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे उठाते हुए पास में ही पड़े टेबल पर बैठा दिया,,,,।
संदीप से अब रख पाना बहुत मुश्किल था क्योंकि जवानी का पर पूरी तरह से पार कर गया था इससे अच्छा मौका संदीप को मिलने वाला नहीं था इस तरह का एकांत उसे फिर दोबारा मिलने वाला नहीं था ऐसा एहसास उसके मन में होते ही वह तुरंत तृप्ति के सलवार की डोरी को खोलने लगा,,,, संदीप को इस तरह से सलवार की डोरी खोलता हुआ देखकर वह अपना हाथ बढ़ाकर उसे रोकने की कोशिश करने लगी लेकिन वह उसका हाथ हटा दिया और दोबारा तृप्ति में उसे हटाने की रोकने की कोशिश भी नहीं की क्योंकि अंदर से वह भी यही चाहती थी जो संदीप चाहता था देखते-देखते वह है तृप्ति की सलवार की डोरी खोलकर उसकी सलवार को ढीली कर दिया था और पेटी सहित उसे पड़कर उसके घुटनों तक खींच दिया था,,,,।
संदीप की हरकत से तृप्ति पानी पानी हो रही थी उसकी बुर लगातार पानी छोड़ रही थी,,, दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी लेकिन पूरे कमरे में दोनों की गरमा गरम सांसो की आवाज ही गुंज रही थी,,,, संदीप की हर हरकत तृप्ति को बहुत ही अच्छी लग रही थी तृप्ति पूरी तरह से मदहोशी के आलम में हो गई थी,,, वह जवानी के नशे में डूब चुकी थी संदीप उसकी दोनों टांगों को उसके घुटनों से मोड कर उसकी गोल गोल गांड को देख रहा था और गांड की बीच उसकी गुलाबी बुर को देख रहा था,,, और उसकी बुर को देखकर उसके मुंह में पानी आ रहा था,,,, क्योंकि उत्तेजना के मारे उसकी बुर फुलकर कचोरी हो गई थी,,, संदीप की अनुभवी आंखें में तृप्ति की बुर को देखकर पहचान लिया था कि आज ही उसने क्रीम लगाकर उसे साफ की थी,,,, तृप्ति संदीप के हर हरकत को देख रही थी,,,,।
संदीप का मन तो कर रहा था कि तृप्ति की बुर को जीभ लगाकर चाटे,,, लेकिन वह जानता था कि इतना समय उसके पास बिल्कुल भी नहीं है वह तृप्ति की बुर में अपनी विजय पताका लहराना चाहता था,, इसलिए वह इस समय ज्यादा कुछ ना करते हुए अपनी हथेली को उसकी बुर पर रखकर उसे ज़ोर से मसलते हुए अपनी पेंट का बटन खोलने लगा,,,,।
संदीप के द्वारा हथेली से बुर को रगड़ने की वजह से उत्तेजना के चलते तृप्ति की आंखें एकदम से बंद हो गई थी,,,, और वह गहरी गहरी सांस लेने लगी थी लेकिन फिर वह अपनी आंखों को खोलकर संदीप की तरफ देखने लगी थी उसकी हरकतों को देखने लगी थी वह अपनी पेंट खोल रहा था और देखते-देखते वह अपनी पेट को घुटनों तक नीचे खींच दिया था लेकिन जैसे ही तृप्ति की नजर संदीप के लंड पर गई तो उसके होश उड़ गए,,,, वह अपने मन में ही सोचने लगी कि सुबह जो देखी थी उससे तो इसका आधा भी नहीं है,,,, तृप्ति,,, को कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,, जब तक वह अपने भाई का नहीं देखी थी तब तक उसके मन में लड के आकार को लेकर वास्तव में संदीप के लंड के आकार का ही वास्तविक लंड नजर आता था,,, लेकिन सुबह अपने भाई के बम पिलाट लंड के दर्शन करने के बाद संदीप का लंड उसे बहुत छोटा लग रहा था,,,,।
लेकिन फिर भी उसकी उत्तेजना परम सीमा पर थी वह पूरी तरह से चुदवाने के लिए तैयार हो चुकी थी,,, और संदीप उसे चोदने के लिए तैयार हो गया था,,,, लेकिन जैसे ही संदीप ने थूक को लगा कर अपने लंड को गीला किया वैसे ही डोर बेल बजने लगी,,, उसके तो होश उड़ गए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, समय की सीमा रेखा को देखकर ही वह तृप्ति की बुर को चाटने का सुख छोड़कर एक बार उसने अपना लंड डालना चाहता है अपनी ख्वाहिश पूरी करना चाहता था और इसके लिए वह पूरी तरह से तैयार भी हो चुका था दरवाजे की घंटी बजाने के बावजूद भी वह एक हाथ में लंड पड़कर दूसरे हाथ से तृप्ति की दोनों टांगो को ऊपर उठाते हुए उसकी बुर में डालने जा रहा था कि लगातार डोर बेल बजाने की वजह से बाथरूम में से ही उसके मैडम ने आवाज लगाते हुए बोली,,,)
संदीप जल्दी से दरवाजा खोल दे बच्चे आ गए होंगे,,,,।
रहने दो संदीप,,,(लगातार डोर बैल और मैडम की आवाज सुनकर तृप्ति एकदम से घबरा गई और तुरंत टेबल पर से नीचे उतर कर अपनी सलवार की डोरी बांधने लगी,, संदीप भी समझ गया था कि अब उसके बस में कुछ भी नहीं है इसलिए वह भी अपने आप को व्यवस्थित करके दरवाजा खोलने के लिए चला गया,,, और तृप्ति वापस से सब्जी काटने लगी,,, देखते ही देखते घर में मेहमानों की संख्या बढ़ने लगी और फिर कब शाम हो गई पता ही नहीं चला,,,,।
रास्ते भर संदीप और तृप्ति एक दूसरे से बात नहीं कर रहे थे तृप्ति तो शर्म के मारे संदीप से बात नहीं कर पा रही थी और संदीप हाथ में आया । मौका चला गया था इसलिए कुछ बोल नहीं रहा था
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