• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest मर्द का बच्चा

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
होटेल पहुच कर दोनो अपने कमरे में पहुच गये.

लक्ष्मी को अपना घर देखने से वो थोड़ी देर के लिए जो अपने मा बापू को भूल गई थी.

वो फिर से याद करती हुई रोने लगी.

लल्लू- लक्ष्मी जी ये क्या आप फिर से रोने लगी. मैने कहा ना. अगर आप को मुझे सज़ा देना है तो आप को जो ठीक लगे वो सज़ा दे लीजिए मुझे.

लक्ष्मी- नही...में तो मा बापू को याद कर के रो रही हूँ. अभी घर देख कर उनलोगो की याद आ गई.

लल्लू- अपने आप को रो कर क्यू दुखी कर रही हो. जिस ने भी तुम्हारा ये हाल किया है उसका भी वही हाल होगा.

अभी खाना मंगवा रहा हूँ पहले फ्रेश हो जाओ जा कर.

फिर लल्लू लक्ष्मी को समझा बुझा कर चुप करवाया और उसे फ्रेश होने भेज दिया.

थोड़ी देर में खाना आ गया.

दोनो मिल कर खाना खाए.

लल्लू फिर से नीचे चादर बिछा कर लेट गया.

लक्ष्मी उठ कर लल्लू के पैरो में बैठ गई.

लल्लू- ये क्या कर रही है आप. यहाँ क्यू बैठ गई.

लक्ष्मी- आप भी तो यहाँ नीचे लेट गये है.

लल्लू- हा, आप ऊपर बेड पर लेट जाइए.

लक्ष्मी- मा कहती थी, पतिके चरणों में पत्नी का स्थान होता है. पत्नी पति का दासी होती है. बस ये दादी भी वही कर रही है.

लल्लू- ये क्या कह रही हो आप. ये दासी, चरणों में स्थान. ये सब क्या है.

लक्ष्मी- क्या ग़लत कहा है मैने. अब आप ही तो मेरे पति है. मेरे लिए आप के चरणों में ही मेरा चारो धाम है.

लल्लू- बाप रे ऐसी बाते. प्लीज़ आप सब से पहले यहाँ से उठ जाइए.

लक्ष्मी- में उठ जाउन्गी लेकिन आप ऊपर बॅड पर आ जाइए.

लल्लू- नही नही. वो आप का स्थान है. आप वहाँ जा कर आराम कीजिए.

लक्ष्मी- में ऊपर जा कर सो जाऊ और आप यहाँ नीचे सिर्फ़ एक चादर पर सोएंगे. मुझे पाप नही लगेगा. क्या मुझे ऊपर बेड पर नींद आ जाएगी. मेरे लिए तो वो बेड काँटों का बेड लगेगा. जहा में सोऊं ऊपर और मेरा पति सोए नीचे.

लल्लू- क्या… आप आप इस शादी को स्वीकार कर लिए. वो एक ग़लती था. वैसे भी में में आप के कहा लायक हूँ. में तो पागल हूँ. मुझे पागलपनके दौरे पड़ते है. आप को तो मुझे कई गुना अच्छा पति मिलेगा.

लक्ष्मी- नही. अब मेरी शादी हो गई है वो भी माता रानीके आशीर्वाद से. उनके मंदिर में. इस से अच्छा पति तो मेरे मा बापू भी मेरे लिए ढूँढ नही पाते.

अब आप ऊपर चल रहे है या में भी यही नीचे नंगे फर्श पर लेट जाऊ.

लल्लू हड़बड़ा कर उठ गया.

लल्लू- लक्ष्मी जी आप बात नही समझ रही है. में खुद भी घर छोड़ कर आ गया हूँ. मेरा कोई ठिकाना है . क्या करना है कहाँ जाना है कुछ पता नही. ऐसे इंसान को अपना पति मानना समझदारी नही जिसका खुद कोई ठिकाना नही.

लक्ष्मी- आप मुझ से पिच्छा छुड़ाना चाहते है तो ठीक है. अब में आत्मा हत्या नही करूँगी क्यू की मुझे अब आप से प्यार हो गया है.(शरमा कर मूह झुका कर लजाते हुए बोली)

लेकिन में आप पर बोझ भी नही बनूँगी. में वही माता रानीके मंदिर चली जाउन्गी. वही रह कर उनके मंदिर प्रांगण की सॉफ सफाई कर लिया करूँगी और वही किसी कोने में पड़ी रहूंगी.

लल्लू आगे आ कर लक्ष्मी को गले से लगा लिया.

लल्लू- तुम तो मेरे से बड़ी पागल निकली. बहुत बढ़िया है. एक पागल को पत्नी भी एक पगली ही मिली.

लल्लू लक्ष्मी को कस कर गले से लगा लिया.

लक्ष्मी लल्लू के आगोश में शरमाती सकुचती उसकी बाहों से लगी थी

लल्लू लक्ष्मी को गोद में उठा कर बेड पर लेटा दिया फिर खुद भी जा कर लक्ष्मी के साथ लेट गया.
 
लक्ष्मी लल्लू की ओर करवट लिए उसे देख रही थी.

जैसे ही लल्लू के नज़रो से उसकी नज़र मिली वो शरमा कर लल्लू के सीने में अपना मूह छुपा ली.

लल्लू हाथ बढ़ा कर उसे पीछे से पकड़ कर अपने से कस कर चिपका लिया.

लक्ष्मी लल्लू की बाहों में उस से चिपकी हुई लक्ष्मी का रोम रोम थिरक रहा था.

लक्ष्मी लल्लू के एक हाथ को अपना तकिया बनाए लल्लू के कंधे पर लेटी हुई थी.

लल्लू दूसरे हाथ से लक्ष्मी के बालो को सहला रहा था.

थोड़ी देर में लक्ष्मी लल्लू की बाहों में ही सो गई.

आधी रात का समय होगा लल्लू ऐतिहात से एक तकिये पर आहिस्ता से लक्ष्मीके सर रख दिया.

फिर आराम से बेड से उतर कर गेट खोल कर दुबारा गेट लगा दिया.

बाहर आ कर लल्लू होटल से बाहर आ गया.

कार में बैठ कर वो एक दिशा को चल दिया.

थोड़ी देर में ही लल्लू अपने मंज़िल पर था.

वहाँ लल्लू थोड़ी दूर पहले कार एक साइड रोक कर उतर गया और एक तरफ चल दिया.

लक्ष्मीके घर के चारदीवारी के पास पहुच कर लल्लू कूद कर उस चारदीवारी को पार कर लिया.

वहाँ एक बल्ब जल रहा था. बाहर कोई नही था.

लल्लू झट से दौड़ कर घर के दीवार से जा कर चिपक गया.

घूम कर घर का निरीक्षण करने के बाद भी कही से घर के अंदर जाने का रास्ता नही दिख था.

लल्लू वॉटर पाइप को पकड़ कर उसकी मजबूती आंक उसी को पकड़ कर लटक गया और चढ़ने लगा.

मकान तीन फ्लोर का था.

ऊपर फर्स्ट फ्लोर पर एक खिड़की खुली थी तो लल्लू उस खिड़कीके सहारे कमरे के अंदर चला गया.

वो एक खाली कमरा था.

फिर लल्लू वहाँ से निकल कर सभी कमरो को च्छुपते हुए देखने लगा.

फर्स्ट फ्लोरके एके कमरे में एक लड़का सो रहा था. ये लक्ष्मी का भाई था.

लक्ष्मीके चाचा का लड़का.

बाकी सारे कमरे उस फ्लोर पर खाली ही थे.

लल्लू फिर सेकेंड फ्लोर पर चला गया वहाँ सारे कमरे खाली ही थे.

लल्लू वहाँ से नीचे ग्राउंड फ्लोर पर आ गया.

ग्राउंड फ्लोर पर लल्लू एक एक कर सभी कमरो को देखने लगा.

नीचेके एक कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था.

लल्लू उसके कमरे के चारो और देखा तो पीछे एक खिड़की का थोड़ा सा सिशा टूटा हुआ था.

उस से लल्लू देखा तो अंदर एक मर्द और एक औरत नंगे एक दूसरे से चिपके सो रहे थे.

सब से पहले लल्लू ऊपर जा कर उस लड़के को सोते हुए ही हाथ पैर बाँध दिया.

फिर एक चमत कस कर लगाया.

जैसे ही वो जगा लल्लू उस के पेट में एक घुस्सा लगा दिया.

उस लड़केके मूह से आ निकल गया.

उस लड़के ने जैसे ही मूह खोला लल्लू कपड़े का टुकड़ा को गोला बना रखा था वो उसके मूह में ठूँस दिया.

फिर लल्लू वहाँ से नीचे आ कर उसी टूटे हुए खिड़की के पास चला गया. उस टूटे काँच को लल्लू बहुत आराम से और तोड़ दिया फिर उस खिड़की से अंदर चला गया.
 
उस लड़के ने जैसे ही मूह खोला लल्लू कपड़े का टुकड़ा को गोला बना रखा था वो उसके मूह में ठूँस दिया.

फिर लल्लू वहाँ से नीचे आ कर उसी टूटे हुए खिड़की के पास चला गया. उस टूटे काँच को लल्लू बहुत आराम से और तोड़ दिया फिर उस खिड़की से अंदर चला गया.

लल्लू अपना मोबाइल निकाल कर उसे चालू किया और रेकॉर्डिंग चालू कर एक ऐसे जगह लगा दिया जहा से सारा कुछ रेकॉर्ड हो जाये.

लल्लू अपने मूह को कपड़े से ढक कर बेड के पास गया और लक्ष्मीके चाचा की काली गान्ड पर एक लात मारा.

लक्ष्य का चाचा लुढ़क कर नीचे गिर गया बेड से.

लक्ष्मी के चाचा हड़बड़ा कर उठ खड़ा हुआ.

देखा तो सामने एक आदमी मूह ढके खड़ा है.

लक्ष्मी के चाचा- कौन हो तुम. ये क्या हरकत है. यहाँ कैसे आए तुम.

लल्लू- में तुम्हारा काल हूँ बेटा. दूसरे का दौलत हड़पने का बहुत शौक है ना तुम्हे आज बताता हूँ तुम्हे में.

लक्ष्मी के चाचा- तुम बच कर नही जा सकते. यहाँ से तेरी लाश ही जाएगी.

लल्लू- जैसे अपने भाई और भाभी को मारा था.

लक्ष्मी के चाचा - क्या बक रहे हो तुम. में क्यू मारूँगा उन्हे. उन्हे तो किसी चोर ने मारा था. जो चोरी करने आया था.

लल्लू- और वो चोर अपना भाई ही निकला. जो बहुत दिन से अपने भाई का सब कुछ चोरी करना चाहता था.

लक्ष्मी के चाचा- कौन है तू. तेरी तो में…

वो लल्लू पर झपटा की लल्लू एक लात दिया उसके मूह पर.

लक्ष्मी के चाचा उड़ता हुआ बेड से टकरा कर नीचे लुढ़क गया.

नंगी औरत उठ कर दहशत से लल्लू को देखती हुई अपने नंगे जिस्म को चादर से ढक ली.

लल्लू- कौन है ये.

लक्ष्मी के चाचा कुछ नही बोला.

लल्लू- कौन हो तुम.

उस औरत से लल्लू बोला.

औरत- मा..में कुछ नही...क..या है. ये सब इस..इसी ने क्या है. मैने मना किया था किसी का हत्या ना करे लेकिन ये दौलत का अँधा. अपने ही भाई और भाभी की हत्या कर दी.

लल्लू- मैने तुम से पूछा है की तुम कौन हो.

औरत- मा..में इनकी प..पा.पत्नी.

लल्लू लक्ष्मी के चाचा की ओर देखा.

वो बेड को पकड़ कर खड़ा था.

लल्लू लक्ष्मी के चाचा की ओर देख कर.

लल्लू- सच सच बता क्या किया है तू ने अपने भाई भाभी के साथ.

लक्ष्मी के चाचा- तू जानता नही कौन हूँ में. यहाँ की पोलिश नेता सब मुझे सलाम करते है.

लल्लू- अच्छा वो भी देख लेंगे.

फिलहाल तुम्हे बता दूं की तेरा बेटा जो ऊपर सो रहा था कमरे में. उसे मैने जहर का इंजेक्षन लगा दिया है. उसे आधे घंटे में डॉक्टर के पास नही ले जाया गया तो वो गया काम से.

लक्ष्मी के चाचा- क्या..नही..नही. तुम ऐसा नही कर सकते. तुम्हारी मुझ से क्या दुश्मनी है. मैने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है.

लल्लू- तुम्हारे भाई ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था. क्यू मार दिया उसे. तुम्हारी भाभी ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था जो मार दिया उसे.

लक्ष्मी के चाचा- तुम कौन हो. तुम्हे क्या मतलब इस सब से. तुम्हे पैसे चाहिए तो बोलो. में तुम्हे मालामाल कर दूँगा.

लल्लू- चुप बेटी चोद. तू खुद भिखारी. बहनचोद मुझे मालामाल करने चला है. अभी तो अपने बेटे के बारे में सोच.

औरत- क्या सोच रहे हो जी. हमारा एकलौता बेटा है वो. ये सब उसके लिए ही तो किए थे तुम. अगर वही नही रहेगा तो क्या करोगे धन दौलत ले कर.

लक्ष्मी के चाचा- क्या जानना चाहता है तू.

लल्लू- क्यू और कैसे मारा अपने भाई और भाभी को.
 
लक्ष्मी के चाचा- मैने दो नबर का काम शुरू किया था. काम में लॉस हो गया तो कर्ज़ उधार ले कर फिर शुरू किया लेकिन काम फिर भी नही चला.

इस चक्कर में मेरा घर बार सब बेचना पड़ा.

में पैसे पैसे के लिए मोहताज हो गया.

एक दिन में अपने भाई के पास आ कर उस से कुछ पैसे उधर माँगे ताकि एक बार फिर से अपना धंधा शुरू कर सकु.

लेकिन भाई ने पैसे देने से मना कर दिया. बहुत बेज़्जती महसूस हुई मुझे. बस मैने फ़ैसला कर लिया की अब में सब से पहले इस से बदला लूँगा.

एक सुबह सुबह आ कर मैने उसके बेटीके सर पर बंदूक रख कर सब कुछ अपने नाम करवा लिया. फिर दोनो को गोली मार दिया.

पोलीस में जा कर कुछ पैसे खिला दिए.

पोलीस ने ये एक चोरीके उद्देश्य से मर्डर दिखा कर केस क्लोज़ कर दिया.

लल्लू- वाहह क्या बात है. कौन सा पोलीस वाला था जिसे तुम ने पैसे खिलाए थे.

लक्ष्मी के चाचा- यहाँ के थाने का दारोगा.

लल्लू- वो कागजात कहा है जिस पर लिखवाया था अपने भाई से सब कुछ अपने नाम पर.

लक्ष्मी के चाचा- बताने में हिचकिचाया…

लल्लू लक्ष्मीके चाची की ओर देखा तो वो आलमरी से निकाल कर सारे कागज लल्लू को दे दी.

लल्लू सभी पेपर्स को देखने लगा.

लल्लू- और कही है कोई पेपर्स.

लक्ष्मी के चाचा- नही यही है सारे.

लल्लू- तुम्हारे भाई की बेटी थी. वो कहा है.

लक्ष्मी के चाचा- वो हमें पता नही. वो यहाँ से भाग गई थी.

लल्लू- क्यू भाग गई.

लक्ष्मी के चाचा- मेरा बेटा उस के साथ कुछ ग़लत हरकत कर दिया था. उस से डर कर वो भाग गई.

लल्लू- मतलब तेरा बेटा तेरा ही कार्बन कॉपी है.

लक्ष्मी के चाचा- नही नही. उसे कुछ मत कहना. प्लीज़ मैने सब कुछ तुम्हे बता दिया है अब मेरे बेटे को डॉक्टर के पास ले जाने दो.

लल्लू- अभी कहा ससुर जी. अभी पहले लिख कर दो तुम जैसे अपने भाई से लिखवाया है.

लक्ष्मी के चाचा जल्दी से एक स्टंप पेपर ले कर उस में साइन कर दिया.

लक्ष्मी के चाचा- लो अब मैने वो सब कर दिया जो तुम ने करने को कहा. अब तो मेरे बेटे को डॉक्टर के पास ले जाने दो.

लल्लू- ठीक है जा ले जा.

फिर वो मिया बीबी जल्दी से भाग कर अपने बेटे के कमरे में पहुचे. उन्हे अपने नंगे पन का भी याद नही रहा.

उन दोनो के जाते ही लल्लू अपना मोबाइल उठा कर झट से वहाँ से बाहर निकल आया.

फिर चलता हुआ अपने कार तक आ कर लल्लू अपना कार ले कर होटल को चल दिया.

अब सुबह होने वाला था.

यहाँ काफ़ी समय लग गया.

लल्लू को अब दर आता रहा था की कही लक्ष्मी ना उठ गई हो.

अगर उसे वहाँ नही पाया तो लक्ष्मी कितनी परेशान होगी. कही वो ये ना समझ ले की में उसे सोया छोड़ कर भाग गया हूँ.

ये सब ख़याल आते ही. लल्लू का पैर एक्सीलेटर पर दबाव बढ़ता चला गया.

जल्दी से लल्लू होटल में गाड़ी खड़ी कर भगा अपने कमरे की ओर. वहाँ जा कर देखा तो लक्ष्मी अभी भी सो रही थी.

लल्लू सर पर आए पसीने को सॉफ करता लक्ष्मीके माशूम चेहरे को देखने लगा.

फिर बेड पर आ कर सोए हुए लक्ष्मी के गालो पर आते एक लट को हटा कर वहाँ एक प्यारी चुम्मि ले लिया.

लक्ष्मी कसमसा कर फिर से सो गई.

लल्लू भी लक्ष्मी के साथ आ कर लेट गया.
 
सोनम को जब से पता चला है की लल्लू खो गया है. गायब हो गया है तब से कमरे से बाहर ही नही निकली है. बस रोए जा रही है और बार बार मोबाइल पर कॉल करती जा रही थी.

आधी रात में जब लल्लू लक्ष्मीके चाचा के यहाँ रेकॉर्ड करने को मोबाइल चालू किया था तब सोनम मोबाइल चार्ज में लगा कर बेड पर बैठी रोए जा रही थी और खिड़की से बाहर अंधेरे में देखे जा रही थी.

गाँव में सुबह की पहली किरण के साथ सब उठ गये. वैसे भी नींद किसे आना था.

आज राघव का सगुण ले कर लड़की वाले आने वाले थे.

सभी घर वाले सर से सर जोड़े बिचार कर रहे थे की अब आगे क्या करना चाहिए.

ये शादी अगर अभी रोक दे तो इन लोगो से ज़्यादा लड़की वालो को मान सम्मान पर उंगली उठेगा साथ ही धन की भी हानि होगी.

इधर लल्लू के ऐसे गायब हो जाने से किसी का अब इस ब्याह में रूचि भी नही रह गया था.

सब से पहले सभी वहाँ के पोलीस स्टेशन गये जहा लल्लू की गुमशुदी का रिपोर्ट लिखवाए थे ये.

वहाँ जा कर पता चला की अभी केस में कोई प्रोग्रेस नही हुआ है. लल्लू का और कार का दोनो में से किसी का कोई अता पता नही चला.

सब ठगा सा मूह ले कर वापस आ गये.

सोनम जब सुबह मोबाइल चार्जर से निकाल कर लाई फिर से लल्लू को कॉल करने को तो उस में नोटिफिकेशन आया था.

सोनम ये देख कर खुश हो गई और भाग कर बाहर दालान पर पहुच कर सब को ये बात बताई.

सब अपना अपना मोबाइल निकाल कर लल्लू को कॉल लगाना शुरू कर दिए. लेकिन अभी सुबह में तो लल्लू रेकॉर्ड करने के बाद फिर से मोबाइल बंद कर दिया था.

कॉल नही लगा.

फिर एक बार सब मायूष हो गये.

गज्जू मामा एस पी को कॉल कर इस बारे में बात किए.

एस पी उन्हे दिलासा दिया कि जैसे ही अब ये मोबाइल चालू होगा. पोलीस को पता चल जायगा की ललित कहाँ है.

गज्जू मामा को फिर थोड़ी तस्सली हुई की हो सकता है लल्लू का मोबाइल फिर से चालू होगा.

सब इंतजार करने लगे. कब लल्लू मोबाइल चालू करता है.

इधर सुबह लक्ष्मी जैसे ही उठी अपने आप को लल्लू की बाहों में पाई.

लल्लू की बाहों में देख कर लक्ष्मी को बड़ा लाज आया. शरम से गाल लाल हो गये उसके.

लल्लू तो लक्ष्मीके सुंदर चेहरे को निहारते निहारते ही कब सो गया पता नही चला.

लक्ष्मी लल्लू को यू सोया देख कर उसे लल्लू पर बड़ा प्यार आया.

लक्ष्मी अब लल्लू को ही अपना सब कुछ मानने लगी थी. और कोई तो था ही नही उसका.

वो झुक कर लल्लू के माथे को चूम ली.

फिर खुद ही शरमा कर अपने हाथो से अपना चेहरा ढक ली.

लल्लू अभी भी सोया ही था.

कुछ क्षण बाद लक्ष्मी अपनी उंगलियो के बीच गॅप बना कर देखी तो लल्लू को अभी भी सोया देख कर अपना हाथ चेहरे से हटा कर एक बार फिर चूमने के लिए होंठो को गोल कर लल्लू के ऊपर झुकने लगी.

लल्लू के होंठो से लक्ष्मी के होंठो के बीच एक से डेढ़ इंच का फासला था की लल्लू की आँखे खुल गई.

दोनो की नज़रे चार होते ही लक्ष्मी तो अचानक से चौक कर पीछे हो गई और बेड से कूद कर वॉशरूम भाग गई.

लल्लू लक्ष्मी की हरकत देख कर उसे लक्ष्मी पर बड़ा प्यार आया.

लल्लू मुस्कुराता हुआ बेड पर लेटा रहा.

थोड़ी देर बाद लक्ष्मी वॉशरूम से बाहर आ गई. अभी भी शरम से उसकी पलके झुकी हुई थी और गाल लाल थे.

लल्लू चाय के लिए बोल दिया था तो चाय आ गया था तब तक.

दोनो चुप चाप चाय पी लिए.

फिर लल्लू मोबाइल निकाल कर चार्ज में लगाया. और फिर सारे पेपर निकाल कर लक्ष्मी को दिखाया.

लक्ष्मी पेपर्स देख कर बहुत खुश हुई.

वो कूद कर लल्लू को गले से लगा ली.

लल्लू उसे गले से लगाए उसके सर को सहलाता रहा.

लल्लू- अगर इजाज़त हो तो नाश्ता भी मंगवा ले. फिर हम दोनो को पोलीस स्टेशन भी जाना है.

लक्ष्मी- पोलीस स्टेशन क्यू.

लल्लू- आप के चाचाके खिलाफ कॉम्पलेंट करने.

लक्ष्मी खुश हो कर सर हा में हिला दी.

फिर लल्लू नाश्ते का ऑर्डर कर दिया.

थोड़ी देर में नाश्ता आ गया.

फिर दोनो साथ में नाश्ता किए.

दोनो फिर तैयार हो कर पोलीस स्टेशन को चल दिए.
 
लल्लू पोलीस स्टेशन आ कर पता किया यहाँ एसीपी कहाँ बैठता है. फिर लल्लू लक्ष्मी के साथ वहाँ चला गया क्योंकि यहाँ का दारोगा तो वैसे भी लक्ष्मीके चाचा का ही आदमी है. दूसरा दारोगा खुद इस केस में मुजरिम है तो उसे ही कॉम्पलेंट लिखवा कर लल्लू उसके नज़रो में नही आना चाहता था.

लल्लू एसीपी ऑफीस जा कर वहाँ के एक हवलदार को बताया की वो एसीपी से मिलना चाहता है.

हवलदार लल्लू को वहाँ के दारोगा के पास भेज दिया.

लल्लू लल्लू सोचा की ये ऐसे सीधा एसीपी के पास जाने नही देगा तो उस से अच्छा है की पहले इस दारोगा से मिल लिया जाये फिर वही बोलेगा की एसीपी से मिला दे.

लल्लू लक्ष्मी के साथ चला गया दारोगाके कॅबिन में.

वहाँ एक लड़की बैठी थी दारोगाके कुर्सी पर.

नेम प्लेट पर उसका नाम किरण लिखा था.

किरण- कहिए क्या बात है.

लल्लू- मेडम, हमें एक मर्डर के बारे में बात करनी है.

किरण- बैठ जाइए आप लोग. वैसे किस का मर्डर हुआ है.

लल्लू लक्ष्मी की ओर इशारा कर के इनके पेरेंट्स का. लल्लू और लक्ष्मी कुर्सी पर बैठ गये.

किरण- कहाँ हुआ है.

लक्ष्मी- हमारे घर में. सूरज नगर में.

किरण- वहाँ के पोलीस स्टेशन जाइए और वहाँ रिपोर्ट लिखवाए.

लल्लू- उस पोलीस स्टेशन का इंचार्ज भी इस केस में इन्वॉल्व्ड है.

किरण- क्या बक रहे है आप.

लल्लू- मुझे एसीपी सर से मिला दे प्लीज़.

किरण- वो ऐसे किसी से नही मिलते.

लल्लू- तो कैसे मिलते है यही बता दीजिए.

किरण- आप के पास कोई प्रूफ है की उस पोलीस स्टेशन का इंचार्ज इन्वॉल्व है इस केस में.

लल्लू- बिल्कुल है. में बिना प्रूफ के क्यू बोलूँगा.

किरण- दिखाइए वो प्रूफ .

लल्लू अपना मोबाइल से रेकॉर्डिंग चालू कर किरण को सारा दिखा दिया.

किरण- काफ़ी है ये प्रूफ .

फिर किरण एक हवलदार को बुला कर एफआईआर तैयार करने को कहती है.

लल्लू - क्या एक बार आप एसीपी सर से मिला देंगे प्लीज़.

किरण- उन से क्यू मिलना चाहते है आप.

लल्लू- क्यू की दूध का जला छाछ भी फूक फूक कर पीता है. आप खुद देखी है कैसे इस रेकॉर्डिंग में कहा है की इस ने दारोगा को भी अपने तरह मिला लिया है. तो इसी लिए हम दोनो यहाँ एसीपी ऑफीस में आए है.

किरण- आप का शक करना जायज़ है लेकिन यकीन मानिए. अभी में कातिल को बाद में पकडूँगी उस से पहले इस हरामजादे को पकडूँगी जो गीदड़ के खाल में सेर बना फिर रहा है.

हमें इसके खिलाफ और भी कॉम्पलेंट आए थे लेकिन तब हमारे पास कोई सबूत नही था इसके खिलाफ. अब ये नही बच सकता है.

लक्ष्मी तब तक एफआईआर लिखवा दी.

फिर दोनो वहाँ से निकल आए.

लल्लू लक्ष्मी को ले कर उसके घर आ गया.

लल्लू गाड़ी ले जा कर लक्ष्मीके घर के बाहर खड़ी कर दी.

लक्ष्मी- हम यहाँ क्यू आए है.

लल्लू- अब यहाँ ही रहना है ना.

लक्ष्मी- नही नही. मुझे यहाँ नही रहना. अगर फिर चाचा इस बार आप के साथ कुछ किया...हे भगवान में तो जीते जी मर जाउन्गी.

लल्लू- अरे बाबा ऐसा कुछ नही होगा. आप का वो सो कॉल्ड चाचा अभी जैल में होगा. आप इतना क्यू घबराती है.

लक्ष्मी लल्लू को पकड़ कर कैसे ना घबराऊँ आप के सिवा मेरा है ही कौन.

लल्लू- हाय्यी मेरी प्यारी बीबी जी.

लल्लू लक्ष्मी को पकड़ कर अपने बाहों में भर लिया.

फिर ले कर घर के अंदर आ गया.

वहाँ अभी कोई नही था. पूरा घर खाली था.

लल्लू- लक्ष्मी यहाँ कोई काम करने वाला नही रहता है क्या.

लक्ष्मी- मा बापू के बाद उन लोगो को भी चाचा ने भगा दिया.

लल्लू- पता है वो लोग कहाँ रहते है. उन्हे फिर से बुला कर लाए.

लक्ष्मी- हाँ पता है मुझे. अभी बुला कर लाती हूँ.

लक्ष्मी जाने लगी उन लोगो को बुलाने को.

लल्लू- अरे अरे मेरी गुलाबो . अकेले कहाँ जा रही है. अपने दीवाने को भी तो साथ ले कर चलिए.

लक्ष्मी शरमा गई लल्लू की बात सुन कर.

फिर दोनो गाड़ी से उन लोगोके घर चले गये.

वहाँ जा कर लक्ष्मी गाड़ी से उतर कर लल्लू के साथ उनके घर पर पहुच गये.

लक्ष्मी दरवाजा खटकाया.

एक औरत बाहर निकली.

औरत- अरे लक्ष्मी बिटिया. तुम कहा चली गई थी. हम सब कहाँ कहा नही ढूँढा तुम्हे.

लक्ष्मी - काकी वक्त खराब होता है इंसान का तो फिर कोई ठिकाना नही रह जाता. वो तो ऊपर वाले ने मुझे इन से मिला दिया. नही तो आप की ये अभागन बेटी पता नही जिंदा भी होती या नही.

औरत- नही मेरी बेटी. ऐसा नही बोलते. ऊपर वाला तुम्हे लंबी उम्र दे.
 
लक्ष्मी- काकी अब सब ठीक है. में ये बताने आई थी की आप सब आज से ही आ जाना घर. आप लोग होंगे तो मुझे भी अच्छा लगेगा.

औरत- ठीक है बेटा. में बोल देती हूँ सब को.

फिर लल्लू और लक्ष्मी वहाँ से वापस घर आ गये.

घर आ कर लल्लू अपना मोबाइल चालू कर लिया. ये उसकी मजबूरी थी. क्योंकि यही नंबर वो अभी एसीपी ऑफीस में दे कर आया है इन्स.किरण को.

अभी मोबाइल चालू कर के दोनो बैठे ही थे की फोन बज उठा.

लल्लू मोबाइल निकाल कर देखा तो सुनील काका का कॉल था.

लल्लू अब सोच में पड़ गया. क्या करे कुछ समझ नही आ रहा था.

लक्ष्मी- किस का कॉल है. उठा क्यू नही रहे.

लल्लू- यार ये मेरे घर से मेरे काका का कॉल है. कैसे उठाऊ.

लक्ष्मी- क्यू क्या हुआ. क्यू नही उठा सकते.

लल्लू- यार में घर से गुस्से में भाग कर आया था.

लक्ष्मी- क्या. आप घर से भाग कर आए थे. सब कितना परेशान होंगे.

आप जल्दी से फोन उठाइए.

लल्लू- नही यार. में कॉल नही उठा सकता. क्या कहूँगा.

लक्ष्मी तब तक लल्लू के हाथ से फोन झपट कर उठा ली.

लक्ष्मी- हेलो…

सुनील- हेलो कौन बोल रहे है.

लक्ष्मी- आप को किन से बात करना है. कौन है आप.

लल्लू अपना सर पीट लिया.

इधर सुनील के पास घर के सभी आ कर जमा हो गये.

सुनील- आप कौन बोल रही है. ये मेरे बेटे का मोबाइल नंबर है. ये आप के पास कहाँ से आ गया. मेरा बेटा कहाँ है.

लक्ष्मी- ऑश, नमस्ते. मा..में आप…में...आप.

सुनील- क्या बोल रही है. में आप में आप. कुछ समझ ही नही आ रहा है. साफ साफ बोलिए ना.

लक्ष्मी- वो..वो..में...में..

सुनील अब कुछ बोलता तब तक बड़ी मामी सुनील काका के हाथ से मोबाइल छीन के रोते हुए बोली.

बड़ी मामी- कौन बोल रही हो तुम. बोलती क्यू नही. मेरा बेटा कहाँ है. मेरा ललित कहाँ है. प्लीज़ मुझे मेरे बेटे से बात करवा दो. में जिंदगी भर तुम्हारी दासी बन कर रहूंगी.

लक्ष्मी- मा जी. वो यही है. लीजिए बात कीजिए.

लक्ष्मी बड़ी मामी का रोता हुआ आवाज़ सुन कर उसे अपनी मा की याद आ गई. वो रोती हुई मोबाइल लल्लू को पकड़ा दी.

लल्लू-( काँपति आवाज़ से.) ब..आ..दी मा..म..ई.

मामी- कहाँ है तू. बिना बताए कहाँ चला गया था. क्या तेरे इस मा से कोई ग़लती हो गई. किस बात का सज़ा दे रहा है अपने मा को.

लल्लू- मा में आप सब के प्यारके काबिल नही हूँ. इसी लिए मूह छुपा कर भाग आया.

बड़ी मामी- ऐसा क्या हो गया जो तुम ऐसे बोल रहा है. अगर तुम्हारे दिल में अपने इस मा के लिए ज़रा सा भी प्यार है तो शाम तक यहाँ आ जा नही तो में अपनी जान दे दूँगी.

लल्लू- मा. प्लीज़ ऐसा मत कहो. म..मा..में वहाँ नही आ सकता. में...में आप के यहाँ आ जाता हूँ.

बड़ी मामी- ठीक है तू वही आ. हम भी अभी यहाँ से निकल रहे है.

लल्लू मोबाइल रख कर सर पर हाथ रख कर बैठ गया.

लक्ष्मी- अब ऐसे क्यू बैठे है. सुना नही मा ने क्या कहा आप शाम तक नही गये तो क्या होगा.

लल्लू- कुछ समझ नही आ रहा क्या करू. यहाँ भी अभी रहना ज़रूरी था. इन्स. किरण कभी भी पोलीस स्टेशन बुला सकती है. और वहाँ अगर नही गया अब तो बड़ी मामी परेशान होगी.

लक्ष्मी- में क्या कहती हूँ. आप चले जाइए और में यहाँ रहती हूँ.

लल्लू- पागलो वाली बात करती है. अब तुम्हे में यहाँ तो किसी भी कीमत में अकेला नही छोड़ सकता. तुम मेरे साथ चलॉगी.

तभी वहाँ पर जो लोग पहले यहाँ लक्ष्मीके घर काम करते थे वो सभी आ गये.

वो सभी कुल 5 लोग थे.

लक्ष्मी- आ गये आप लोग. हम आप का ही इत्तज़र कर रहे थे.

उन में एक गेट कीपर, एक ड्राइव, एक लक्ष्मी के पापा के साथ उनका खेती बॉडी का काम देखता था और दो लॅडीस घर के कामो में लक्ष्मीके मा का हेल्प करती थी.

लल्लू- देखिए अब लक्ष्मी जी का आप सब ही परिवार है. मुझे अभी अभी कही ज़रूरी काम से जाना पड़ेगा. में साथ में लक्ष्मी जी को भी ले जा रहा हूँ. इन्हे अब यहाँ नही छोड़ सकता में. वैसे भी इनके चाचा और उसका लड़का शायद अभी तक पकड़ा जा चुका होगा.

आप सब से मेरा एक ही गुज़ारिश है.

आप सब जब तक हम ना आए. यही रहिएगा. किसी से डरने की ज़रूरत नही है.

जैसे पहले आप सब यहाँ काम करते थे वैसे ही कीजिएगा. कोई आप सब को परेशान करे तो तुरंत मुझे बता दीजिएगा. में जहा भी रहूँगा आ जाउन्गा यहाँ.

अब आप सब बताइए. कुछ कहना है आप सब को.

एक आदमी- बाबू हम आप को पहचाने नही. आप कौन है.

लल्लू- लक्ष्मी की ओर देख कर. ये तो अब लक्ष्मी जी ही बता सकती है की में कौन हूँ.

लक्ष्मी- काका, मा बापू के बाद चाचा मुझे भी मारना चाहते थे. में यहाँ से भागने लगी की मुझे चाचा का वो आवारा लड़का पकड़ लिया था. बड़ी मुश्किल से उस से पीछा छुड़ा पाई. लेकिन वो मेरे पीछे ही लगा रहा. वो मेरे साथ कुछ ग़लत करना चाहता था तो में एक ट्रक में बैठ कर यहाँ से दूसरे शहर पहुच गई छूप कर.
 
Back
Top