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Guest
होटेल पहुच कर दोनो अपने कमरे में पहुच गये.
लक्ष्मी को अपना घर देखने से वो थोड़ी देर के लिए जो अपने मा बापू को भूल गई थी.
वो फिर से याद करती हुई रोने लगी.
लल्लू- लक्ष्मी जी ये क्या आप फिर से रोने लगी. मैने कहा ना. अगर आप को मुझे सज़ा देना है तो आप को जो ठीक लगे वो सज़ा दे लीजिए मुझे.
लक्ष्मी- नही...में तो मा बापू को याद कर के रो रही हूँ. अभी घर देख कर उनलोगो की याद आ गई.
लल्लू- अपने आप को रो कर क्यू दुखी कर रही हो. जिस ने भी तुम्हारा ये हाल किया है उसका भी वही हाल होगा.
अभी खाना मंगवा रहा हूँ पहले फ्रेश हो जाओ जा कर.
फिर लल्लू लक्ष्मी को समझा बुझा कर चुप करवाया और उसे फ्रेश होने भेज दिया.
थोड़ी देर में खाना आ गया.
दोनो मिल कर खाना खाए.
लल्लू फिर से नीचे चादर बिछा कर लेट गया.
लक्ष्मी उठ कर लल्लू के पैरो में बैठ गई.
लल्लू- ये क्या कर रही है आप. यहाँ क्यू बैठ गई.
लक्ष्मी- आप भी तो यहाँ नीचे लेट गये है.
लल्लू- हा, आप ऊपर बेड पर लेट जाइए.
लक्ष्मी- मा कहती थी, पतिके चरणों में पत्नी का स्थान होता है. पत्नी पति का दासी होती है. बस ये दादी भी वही कर रही है.
लल्लू- ये क्या कह रही हो आप. ये दासी, चरणों में स्थान. ये सब क्या है.
लक्ष्मी- क्या ग़लत कहा है मैने. अब आप ही तो मेरे पति है. मेरे लिए आप के चरणों में ही मेरा चारो धाम है.
लल्लू- बाप रे ऐसी बाते. प्लीज़ आप सब से पहले यहाँ से उठ जाइए.
लक्ष्मी- में उठ जाउन्गी लेकिन आप ऊपर बॅड पर आ जाइए.
लल्लू- नही नही. वो आप का स्थान है. आप वहाँ जा कर आराम कीजिए.
लक्ष्मी- में ऊपर जा कर सो जाऊ और आप यहाँ नीचे सिर्फ़ एक चादर पर सोएंगे. मुझे पाप नही लगेगा. क्या मुझे ऊपर बेड पर नींद आ जाएगी. मेरे लिए तो वो बेड काँटों का बेड लगेगा. जहा में सोऊं ऊपर और मेरा पति सोए नीचे.
लल्लू- क्या… आप आप इस शादी को स्वीकार कर लिए. वो एक ग़लती था. वैसे भी में में आप के कहा लायक हूँ. में तो पागल हूँ. मुझे पागलपनके दौरे पड़ते है. आप को तो मुझे कई गुना अच्छा पति मिलेगा.
लक्ष्मी- नही. अब मेरी शादी हो गई है वो भी माता रानीके आशीर्वाद से. उनके मंदिर में. इस से अच्छा पति तो मेरे मा बापू भी मेरे लिए ढूँढ नही पाते.
अब आप ऊपर चल रहे है या में भी यही नीचे नंगे फर्श पर लेट जाऊ.
लल्लू हड़बड़ा कर उठ गया.
लल्लू- लक्ष्मी जी आप बात नही समझ रही है. में खुद भी घर छोड़ कर आ गया हूँ. मेरा कोई ठिकाना है . क्या करना है कहाँ जाना है कुछ पता नही. ऐसे इंसान को अपना पति मानना समझदारी नही जिसका खुद कोई ठिकाना नही.
लक्ष्मी- आप मुझ से पिच्छा छुड़ाना चाहते है तो ठीक है. अब में आत्मा हत्या नही करूँगी क्यू की मुझे अब आप से प्यार हो गया है.(शरमा कर मूह झुका कर लजाते हुए बोली)
लेकिन में आप पर बोझ भी नही बनूँगी. में वही माता रानीके मंदिर चली जाउन्गी. वही रह कर उनके मंदिर प्रांगण की सॉफ सफाई कर लिया करूँगी और वही किसी कोने में पड़ी रहूंगी.
लल्लू आगे आ कर लक्ष्मी को गले से लगा लिया.
लल्लू- तुम तो मेरे से बड़ी पागल निकली. बहुत बढ़िया है. एक पागल को पत्नी भी एक पगली ही मिली.
लल्लू लक्ष्मी को कस कर गले से लगा लिया.
लक्ष्मी लल्लू के आगोश में शरमाती सकुचती उसकी बाहों से लगी थी
लल्लू लक्ष्मी को गोद में उठा कर बेड पर लेटा दिया फिर खुद भी जा कर लक्ष्मी के साथ लेट गया.
लक्ष्मी को अपना घर देखने से वो थोड़ी देर के लिए जो अपने मा बापू को भूल गई थी.
वो फिर से याद करती हुई रोने लगी.
लल्लू- लक्ष्मी जी ये क्या आप फिर से रोने लगी. मैने कहा ना. अगर आप को मुझे सज़ा देना है तो आप को जो ठीक लगे वो सज़ा दे लीजिए मुझे.
लक्ष्मी- नही...में तो मा बापू को याद कर के रो रही हूँ. अभी घर देख कर उनलोगो की याद आ गई.
लल्लू- अपने आप को रो कर क्यू दुखी कर रही हो. जिस ने भी तुम्हारा ये हाल किया है उसका भी वही हाल होगा.
अभी खाना मंगवा रहा हूँ पहले फ्रेश हो जाओ जा कर.
फिर लल्लू लक्ष्मी को समझा बुझा कर चुप करवाया और उसे फ्रेश होने भेज दिया.
थोड़ी देर में खाना आ गया.
दोनो मिल कर खाना खाए.
लल्लू फिर से नीचे चादर बिछा कर लेट गया.
लक्ष्मी उठ कर लल्लू के पैरो में बैठ गई.
लल्लू- ये क्या कर रही है आप. यहाँ क्यू बैठ गई.
लक्ष्मी- आप भी तो यहाँ नीचे लेट गये है.
लल्लू- हा, आप ऊपर बेड पर लेट जाइए.
लक्ष्मी- मा कहती थी, पतिके चरणों में पत्नी का स्थान होता है. पत्नी पति का दासी होती है. बस ये दादी भी वही कर रही है.
लल्लू- ये क्या कह रही हो आप. ये दासी, चरणों में स्थान. ये सब क्या है.
लक्ष्मी- क्या ग़लत कहा है मैने. अब आप ही तो मेरे पति है. मेरे लिए आप के चरणों में ही मेरा चारो धाम है.
लल्लू- बाप रे ऐसी बाते. प्लीज़ आप सब से पहले यहाँ से उठ जाइए.
लक्ष्मी- में उठ जाउन्गी लेकिन आप ऊपर बॅड पर आ जाइए.
लल्लू- नही नही. वो आप का स्थान है. आप वहाँ जा कर आराम कीजिए.
लक्ष्मी- में ऊपर जा कर सो जाऊ और आप यहाँ नीचे सिर्फ़ एक चादर पर सोएंगे. मुझे पाप नही लगेगा. क्या मुझे ऊपर बेड पर नींद आ जाएगी. मेरे लिए तो वो बेड काँटों का बेड लगेगा. जहा में सोऊं ऊपर और मेरा पति सोए नीचे.
लल्लू- क्या… आप आप इस शादी को स्वीकार कर लिए. वो एक ग़लती था. वैसे भी में में आप के कहा लायक हूँ. में तो पागल हूँ. मुझे पागलपनके दौरे पड़ते है. आप को तो मुझे कई गुना अच्छा पति मिलेगा.
लक्ष्मी- नही. अब मेरी शादी हो गई है वो भी माता रानीके आशीर्वाद से. उनके मंदिर में. इस से अच्छा पति तो मेरे मा बापू भी मेरे लिए ढूँढ नही पाते.
अब आप ऊपर चल रहे है या में भी यही नीचे नंगे फर्श पर लेट जाऊ.
लल्लू हड़बड़ा कर उठ गया.
लल्लू- लक्ष्मी जी आप बात नही समझ रही है. में खुद भी घर छोड़ कर आ गया हूँ. मेरा कोई ठिकाना है . क्या करना है कहाँ जाना है कुछ पता नही. ऐसे इंसान को अपना पति मानना समझदारी नही जिसका खुद कोई ठिकाना नही.
लक्ष्मी- आप मुझ से पिच्छा छुड़ाना चाहते है तो ठीक है. अब में आत्मा हत्या नही करूँगी क्यू की मुझे अब आप से प्यार हो गया है.(शरमा कर मूह झुका कर लजाते हुए बोली)
लेकिन में आप पर बोझ भी नही बनूँगी. में वही माता रानीके मंदिर चली जाउन्गी. वही रह कर उनके मंदिर प्रांगण की सॉफ सफाई कर लिया करूँगी और वही किसी कोने में पड़ी रहूंगी.
लल्लू आगे आ कर लक्ष्मी को गले से लगा लिया.
लल्लू- तुम तो मेरे से बड़ी पागल निकली. बहुत बढ़िया है. एक पागल को पत्नी भी एक पगली ही मिली.
लल्लू लक्ष्मी को कस कर गले से लगा लिया.
लक्ष्मी लल्लू के आगोश में शरमाती सकुचती उसकी बाहों से लगी थी
लल्लू लक्ष्मी को गोद में उठा कर बेड पर लेटा दिया फिर खुद भी जा कर लक्ष्मी के साथ लेट गया.