एका एक लाज्जो शरमाई "पिता जी के ज़िंदा रहने के बाद तक भी माँ आपके मौसा जी से ठेले में ताड़ी पिलाने के बाद उन्हें मुक़रार जगह पे ले जाया करती थी वहीं वो दोनो रासलीला रचाते थे ..........मैं एका एक हंस पड़ा..तो लाज्जो शरमाई.
लाज्जो : किसी को मालूम नही बाबू खासकरके आपके भाई तक को नही मत बताइयेगा हम जानत है सब....उसके बाद तो साल हो गये हमरे बापू को बच्चा नही हुआ और हमे ही उन्होने पाला पोसा और शादी तय करवा दिया मरर्ने से पहले
आदम : ह्म जाने दे इस्पे तेरा क्या कसूर? तभी तू राज़ी हुई मेरे यहाँ काम करने के लिए
लज्जो : हमारा दिल सॉफ है बाबूजी हम काहे को ऐसा मतलबपरस्ती सोच रखेंगे कि वो हमरा दुश्मन वो हमारा सगा वो सौतेला....खून का रिश्ता तो आपसे भी हुआ ना
आदम : मतलब तू मेरी बहन हुई इस हिसाब से तुझे राखी बाँध देता हूँ हाहहा
लज्जो : बाबू ये क्या बोल रहे है? आप हमरे भैया बन जाना चावत है
आदम : हाहहा तेरा ये शरमाना मुझे अच्छा लगता है माँ अभी इतने जल्दी घर नही आएगी तू एक काम कर
लज्जो : कहिए ना क्या काम करना है?
आदम : देख मैं किसी पे ज़ोर ज़बरदस्ती नही करता तू अब पर्सनल है और अब तो तू मेरी बहन भी हुई तो चल एक काम कर कल तू ताड़ी लेके आना और मुझे पिलाना और फिलहाल यहाँ कुछ देर ठहर मैं तुझे घर तक छोड़ दूँगा रात हो जाएगी
लज्जो : लेकिन माँ अगर पूछी तो आपकी माँ? और हमरी तो नाराज़ होगी कि हम देर क्यूँ किए?
आदम : मैं हूँ ना वैसे भी वो हमारे परिवार से अंजान नही मैं कह दूँगा कोई बहाना...
आदम जानता था घर पे माँ नही थी और ये अच्छा मौका था लाज्जो को देखके उसके अंदर भी जैसे हवस जाग उठ रही थी....उसने पहले लाज्जो से पहेल करना चाहा था...पर लाज्जो खुद ब खुद उसकी तरफ खीची चली आई...आदम ने तुरंत उसके हाथ को अपने पाजामे के उपर रखा..तो लाज्जो शरमाई उसने कस कर आदम के पाजामे के उपर से लिंग को सहलाया वो काफ़ी मोटा और लंबा था और काफ़ी सख़्त भी
उसकी मोटाई और लंबाई से ही वो थूक घोंट रही थी...आदम ने एका एक लाज्जो के गालों का एक चुम्मा लिया....और उसे नज़ाकत भरी नज़रों से घूरा.....लाज्जो शरमाने लगी....अंजुम काकी की गैरमज़ूद्गी उसे भी भा रही थी....
लाज्जो : मांफ कीजिएगा आशु बाबू अगर आपकी माँ आ गयी तो
आदम : अरे लाज्जो माँ को आने में टाइम तो लगेगा ना तब तक हम थोड़ा देर एक दूसरे के साथ टाइम स्पेंड कर सकते है ना अकेले में...यही तो तू चाहती थी (लाज्जो के जैसे गाल शरम से लाल हो गये )
लज्जो : ज.जीई ये हमने कब चाहा था?
आदम : अपने दिल पे हाथ रखके कह कि तूने नही चाहा था
लाज्जो ने कोई जवाब नही दिया शरम से उसके गाल एकदम टमाटर की तरह लाल हो गये....आदम खड़ा हुआ और उसके हाथ को अपने हाथो में लिए उसे एक बार चुम...फिर उसने लाज्जो की साड़ी को टाँगों से उपर उठाना चाहा...तो लाज्जो डर डर के खुले दरवाजे की तरफ देख रही थी..
लज्जो : बाबू रुकिये तो ज़रा दरवाजा खुला है कहीं आपकी काकी हमे यूँ रंगे हाथो देख ना ले
आदम : ओह्ह अच्छा जा गेट लगा दे मैं तेरा कमरे में इन्तिजार कर रहा हूँ
इतना कहते हुए आदम अपने कमरे में घुस गया....लाज्जो झटपट दरवाजा लगाए...कमरे में प्रवेश करती है तो देखती है आदम खुले बदन है और उसका पाजामा में उसका लिंग एकदम तोप की तरह सख्ती से उभार बनाए खड़ा है...ऐसा लग रहा है जैसे पाजामे में कोई बहुत बड़ी चीज़ छुपी हुई हो
लाज्जो के तो हाथ पाँव काँपने लगे...लेकिन कामवासना की आग उसे धीरे धीरे आदम के पास जाने को मज़बूर कर रही थी....लाज्जो आगे बढ़ी और उसने पाजामे को उसी पल नीचे खिसका दिया....उफ्फ आदम का मोटा लंबा लिंग उसके सामने झूलने लगा...जिसपे हाथो की पकड़ बिठाए लाज्जो ने धीरे धीरे उसे आगे पीछे चमड़ी को किए सहलाया...
आदम : आहह लज्जो ससस्स तेरे हाथो ने तो कमाल कर दिया (आहें भरते हुए)
लज्जो : बाबू जी ए तो बहुत विशाल है इतना मोटा और लंबा निशा को तो काफ़ी दर्द होता होगा
आदम : हाहाहा छोड़ उस रंडी की बात ये लंड तो तेरी काकी जी की भी चूत में दाखिल हो चुका और सोच उन्हें कितना मज़ा मिला होगा?
लाज्जो : बाबू जी हमने सुना है कि ऐसे बड़े मोटे लंड तो हबशियो के होते है और अंग्रेज़ो के फिर आपका इतना विशाल कैसे हुआ?
आदम : हाहहा बताया ना वैद्य जी वाली बात तू मुझे थोड़ा टाइम दे मैं तेरे लिए उनके वहाँ से ऐसा दवाई लाउन्गा कि जिससे तेरी ये चुचियाँ और भी सुडोल और मोटे मोटे तरबूज़ो की तरह हो जाएँगी
लाज्जो : बाबू जी हमने सुना है कि ऐसे बड़े मोटे लंड तो हबशियो के होते है और अंग्रेज़ो के फिर आपका इतना विशाल कैसे हुआ?
आदम : हाहहा बताया ना वैद्य जी वाली बात तू मुझे थोड़ा टाइम दे मैं तेरे लिए उनके वहाँ से ऐसा दवाई लाउन्गा कि जिससे तेरी ये चुचियाँ और भी सुडोल और मोटे मोटे तरबूज़ो की तरह हो जाएँगी
लाजो ने शर्मा गई लेकिन वो खड़ी खड़ी आदम के लंड को हाथो में लिए मुठिया भी रही थी.....आदम ने झुकके थोड़ा उसके गले और गाल को चूमा तो जैसे लाजो काँप उठी.....आदम मुस्कुराया उसने धीरे धीरे साड़ी को उपर करना शुरू किया और फिर एकदम उपर किए उसने डोरी खोलनी चाही
लाजो : बाबू अभी हम फ्री ना है काकी आ जाएगी
आदम : क्यूँ? तू नही चाहती कि मैं ये सब तेरे साथ करूँ क्या तुझे अपने पति के लिए कुँवारापन बचाना है
लाजो : हाहाहा हमरा पति तो ऐसे ही कितनो बार आए हमारे साथ चुदाई की कोशिश भी कर चुका है शादी जो हो गयी हमसे एक बार इसी बहाने उसने हमे खेतो में ले जाके हमारी इन छातियो को खूब भीचा था हाथो से....लेकिन सच कहे बाबू जी आपके जितना बड़ा उनका नही है झूठ ना बोलेंगे
आदम : हाहाहा अरे तो क्या हुआ? ये भी तेरा ही है चल अब नीचे झुक जा
लाजो संकोच करने लगी उसे मालूम था कि आदम उसे क्या करने को कह रहा है?.....उसने तुरंत लाजो की साड़ी पेटिकोट सहित जब उपर किया तो फिर उसके चुतड़ों के बीच नाक रगड़ते हुए उन दोनो नितंबो को हाथो में लिए खूब मसला वो इतना भारी भरकम विशाल थे कि
दोनो हाथो में सामना मुश्किल ही था...
आदम ने लाजो के दोनो चुतड़ों को भीचते दबाते हुए उसने लाजो को पहले शरमो लिहाज से खोलने के लिए उल्टा कर दिया...लाजो खुद पे खुद टाँगों को फैलाए झुक गयी...उसने आदम के आदेश अनुसार अपने नितंबो को भी फैला लिया जिससे उसका छेद सॉफ आदम के सामने
प्रस्तुत था...इर्द गिर्द पसीने छूटने से उसमें गंध आ रही थी...
आदम ने उसके छेद के मुआने पे अपनी जीब लगाई और नितंबो के बीच मुँह घुसाए उस छेद पे ज़ुबान चलाई..."सस्स ईई आहह ससस्स श बाबूजी"....सिसक उठी लाजो...अपने नितंबो को हाथो से लगभग चीरते हुए वो जैसे आदम के मुँह को अपने नितंबो के बीच दबाने की भी चाह
कर रही थी...
आदम ने छेद को चाटते हुए गीला कर दिया थूक से फिर एक उंगली जैसे अंदर सर्कायि...तो लाजो सिसक उठी उईईईईई...आदम को उसकी गान्ड की सख्ती का अहसास हुआ...उसने फिर लाजो को अपने सामने सीधा घुमाया लेकिन गान्ड के अंदर उंगली करता रहा....जिससे लाजो ने
आहिस्ते आहिस्ते से अपने चुतड़ों पर से सख्ती को ढीला छोड़ दिया....जिससे उंगली आसानी से गान्ड के अंदर बाहर होने लगी...लाजो इससे
आँखे मुन्दे आदम के बालों पे हाथ फेर रही थी...
आदम ने जब दो उंगली एक साथ डालनी चाही तो वो मुस्किल से अंदर घुस पाई पर इससे लाजो को मीठा मीठा दर्द होने लगा...."आहह आहिस्ते बाबूजी दर्द होता है"......."अरे पगली इसी में तो मज़ा है थोड़ा खुल जाएगी तो आसानी से अंदर ले पाएगी ये तो जायेज़ा कर रहा हूँ तेरे सख़्त छेदवा का".........आदम ने बिहारी टोन में कहा
लाजो शरमाई...वो खड़ी अपनी गान्ड की दरारो में आदम को उंगली करने से ना रोक सकी...आदम ने नितंबो से उंगली खीच के निकाली और उसे सूँघा....वाहह जब उसने फिर छेद की तरफ देखा तो छेद सिकुड रहा था...उसने फिर नितंबो पे एक आध थप्पड़ बरसाए और फिर उन्हें
भीचा फिर छेद में उंगली पे लगाए थूक से सीधा प्रवेश किया...
तो लाजो की गान्ड की दरारो के भीतर उंगली आसानी से घुस गयी...इससे लाजो ने गान्ड को सख़्त किया और एक ज़ोरदार पाद मारा...प्र्र्रर.....आदम हंस पड़ा लाजो भी खिलखिलाए हंस पड़ी....तो आदम ने उंगली निकाली फिर उठके उसे अपने सीने से लगाया.....लाजो आदम के बाज़ुओ को सहला रही थी...
आदम के होंठ लाजो के होंठ से टकराए और दोनो एकदुसरे को देसी स्मूच करने लगे....ज़ुबान मुँह में डाले थूक घोंटते हुए एकदुसरे के होंठो को बेदर्दी से चूस्ते हुए दोनो एकदुसरे को पागलो की तरह किस करने लगे...लाजो को इतना करारा आदम ने स्मूच किया कि वो बदहवास हो गयी उसके मुँह से दबी सिसकिया निकल रही थी......जब आदम ने उसे किस करना छोड़ दूर किया तो लाजो को अपने होंठो में जलन सी हो रही थी...वो अपने गीले होंठ को पोंछते हुए आदम को नज़ाकत से देखने लगी..
आदम अपना हाथ में मोटा लंड लिए चमड़ी को आगे पीछे मसल रहा था....लाजो झट से झुक गयी फिर उसने अपना मुँह खोला "हाए दय्या ये
तो काफ़ी मोटा है"....मन ही मन आँखे बड़ी बड़ी किए लाजो ने लिंग को एक बार अच्छे से घुरते हुए सोचा
आदम अपना लिंग जैसे ही उसके मुँह के पास लाया....लाजो ने घप्प से उसे मुँह में लेके चुस्सना शुरू कर दिया...उसे बड़े चाव से मुँह के अंदर बाहर किए चुसते हुए उसे बड़े आहिस्ते आहिस्ते चुस्सती जा रही थी उसका सुपाडा इतना मोटा था कि उसके इर्द गिर्द ज़ुबान फेरते हुए
उसने उसे जड़ तक चूसने की कोशिश की हलक तक जाते ही जैसे लाजो की आँखे बड़ी बड़ी हो गयी...
अओउू अओउुुुउउ अओउुुउउ...लाजो के सर को कस कर थामे हुए हलाक तक अपना लंड घुसाए...आदम वैसे ही उसे थामें रहा...जब कुछ सेकेंड बाद उसने अपना लंड मुँह से बाहर खीचा तो लाजो की जान में जान आई लंड थूक से साना हुआ था...."फिर लो".....आदम ने इतना कहा और लाजो के मुँह में अपना लंड डाला...लाजो फिर उसे चुसते हुए हलाक तक लेने की कोशिश करने लगी....तो इस बीच बालों को समइते आदम ने जैसे एक करारा धक्का मुँह के भीतर पेला लाजो के आँखो से आँसू आ गये फिर भी उसके मुँह को दबाए आदम रहा.
जब उसने मुँह से लंड बाहर खीचा तो लंड थूक से पूरा गीला हो चुका था....लाजो ने फिर उसे हाथो में लिए आगे पीछे मसला फिर उसे मुँह में
\ लेके चूसा...."अओउ ओउ एम्म्म एम्म"......काफ़ी देर की चुसाइ के बाद आदम ने उसे रोका...
उसने लाजो को उठाया और पलंग पे लेटा दिया.....उसना अपना लिंग उसकी सूजी फूली चूत के मुंहाने पे अभी घिस्सना शुरू ही किया था कि
इतने में दरवाजे पे घंटी बजी..."अरे यार माँ इतने जल्दी इसस्सह".........आदम जैसे खिजला गया..
लाजो ने तुरंत आदम को अपने से दूर धकेला और अपनी पेटिकोट की डोरी झट से बाँधी...फिर साड़ी को अपने बदन पे लपेट लिया....आदम ने तुरंत जैसे तैसे प्यज़ामे को पहना पर उभार के चलते माँ को शक़ ना हो जाए इसलिए उसने काफ़ी अहेतियात से दरवाजा खोला और एक आड़ हो गया....
लाजो ने तुरंत आदम को अपने से दूर धकेला और अपनी पेटिकोट की डोरी झट से बाँधी...फिर साड़ी को अपने बदन पे लपेट लिया....आदम ने तुरंत जैसे तैसे प्यज़ामे को पहना पर उभार के चलते माँ को शक़ ना हो जाए इसलिए उसने काफ़ी अहेतियात से दरवाजा खोला और एक आड़ हो गया....
माँ ने उसे पसीने पसीने पाया....आदम फिर उखड़े मन से बोला आप आ गयी ? आ जाओ.....इतना कहते हुए आदम कमरे में चला गया.....माँ की नज़र लाजो पे गयी
अंजुम : लाजो अभी तू यही है? तुझे देरी नही हुई
लाजो : आ.आ.आप ही ने कहा था
अंजुम : अच्छा अच्छा अब जा तू
आदम : माँ मैं उसे छोड़ देता हूँ
अंजुम : नही बेटा मैं उसे छोड़ आती हूँ वैसे भी अभी बाहर से ही लौटी हूँ आ लाजो
लाजो हाँफ रही थी उसने एक बार पलटके आदम की तरफ देखा....अपनी अधूरी प्रेम क्रीड़ा के बीच उसे उठके जाने में काफ़ी गुस्सा आया...क्यूंकी उसकी चूत पूरी गीली हुई सी थी...आदम ने उसे इशारा किया कि एक दिन ना सही अगले दिन तो पक्का....लाजो ने शरमाया फिर मुस्कुराया और अंजुम की आवाज़ देते ही वो बाहर निकल गयी....
आदम कमरे में आके हाथ मुँह धोया फिर उसने पेशाब किया अपने लंड से निकलते प्री-कम की बूँदो को पोंच्छा और लिंग को धोते हुए कमरे में लौट आया.....8 बज चुका था...आदम का दिल धक धक किए जा रहा था काश एक बार लाजो के साथ 1 घंटा और मिल जाता तो ना जाने क्यूँ आज उसे ताहिरा मौसी और रूपाली भाभी की याद आ गयी....
इतने में उसने पाया कि माँ आ गयी थी..."छोड़ आई उसे".....
."हां बेटा उफ्फ ग्रामीण सेवा की गाड़िया तो पूछो मत इतनी भीड़"........
"ह्म कोई बात नही दरवाजा लगा लो मच्छर आ रहा है बाहर से"........
आदम थोड़ी देर सुस्त लहज़े से लाइट ऑफ किए अपने कमरे का पलंग पे लेट गया...माँ ने किचन में से आवाज़ दी "आदम बेटा आना तो ये मिक्सर में मसाला पीस दे आदम बेटा"........जब अंजुम को लगा कि आदम आवाज़ का कोई जवाब नही दे रहा....तो वो खुद कमरे की तरफ
आई उसने देखा कमरे में अंधेरा है और बेटा पलंग पे लेटा हुआ है....
माँ मुस्कुराई वापिस किचन में खाना बनाने लगी उसने फिर खुद ही मिक्सर में मसाला पीसा फिर उसे कढ़ाई में डालते हुए चौंकने लगी....जब खाना से फारिग हुई तो उसे बोरियत सी लगी अब तो ना उसका हज़्बेंड घर पे था और ना ही उसकी बहू जिसके लिए वो जल्दी जल्दी करे एक टाइम था माँ-बेटा देर रात गये एक साथ खाते थे आज जैसे उन दीनो को अंजुम याद कर रही थी....
वो धीरे धीरे बेटे के कमरे में आई उसने पलंग पे चढ़ते हुए उसके माथे को चूमा "बाबू सो गया क्या?".....बेटे के बाज़ू पे हाथ फेरते हुए
आदम : क्या कर रही हो माँ? (माँ की तरफ पलटते हुए)
माँ ने उसकी पीठ को सहलाते हुए उसके बालों की तरफ देखा फिर चेहरे की धाड़ी की ओर...."तू बाल क्यूँ नही कटवा रहा? कितना गंदा लग रहा है चेहरा देखने में"........
"जाने दो".........\\
"देख आजकल तेरा ज़रा सा भी खुद पे ध्यान नही नौकरी के बाद आता है और थक्के चूर हो जाता है ऐसा थोड़ी ना चलेगा शरीर को फिट भी
रखना ज़रूरी है".........
."क्या करना माँ ये सब करके? अब तो ज़िंदगी से जैसे जी भर गया
माँ ने कस कर उसके पीठ पे थप्पड़ मारा....."क्या कहा तूने? दुबारा ऐसा ना कहना जिंदगी से जी भर गया आख़िर क्यूँ इतना सोच रहा है तू? क्या इंसान अकेला नही जीता क्या हर इंसान के ज़िंदगी में दुख नही होता टेन्षन नही होता अभी तो तेरी पूरी लाइफ पड़ी हुई है"..........
.आदम ने कोई जवाब नही दिया जैसे वो फिर सो रहा था....
अंजुम : अगर तुझे कुछ हो जाएगा तो मेरा क्या होगा मालूम है तुझे? जब से वो गयी है तबसे मेरा घर जैसे बेरौनक हो गया है आख़िर पूछती हूँ क्यूँ? क्यूँ मुझे याद दिलाता है कि जो ग़लती मैने की अब तू ही मुझे उस ग़लती की सज़ा दे दे जो मैने तेरी ज़िंदगी बर्बाद की और तूने शादी करने का फ़ैसला लिया तेरा तो कभी दिल नही था ना
आदम : माँ तुम्हें कुछ हो जाए तो मैं खुद भी ख़तम कर लूँगा प्ल्ज़्ज़ ऐसी बात ना कहो
अंजुम सुबकने लगी....तो आदम ने उठके उसकी तरफ प्यार से देखा और उसके आँसू पोंछे..."माँ अब हम हालत के मारे हुए है....अब मुझसे ये ना कहना कि मैं फिर कभी किसी और लड़की को अपनी घर की बहू बनाके ले आउ मैं अब किसी को स्वीकार करने के हालत में नही हूँ एक बार ठोकर खा चुका और नही खाउँगा जानती भी हो घर में ददिहाल में सबको मालूम चल गया होगा कि आदम की बीवी किसी और से
फँसी हुई थी? उसका मेरा तलाक़ हो गया कोई तो ये भी कह चुका कि मेरा बच्चा लिए वो इस शहर को छोड़ गयी".......
माँ ने जैसे उसे ज़ज़्बातो पे बह जाने से रोका
अंजुम : देख लोग क्या कहते क्या सोचते हैं ? हमे इसकी परवाह नही कल तक तू ही ये कहता था ना कि मुझे परवाह नही कि हमारे बीच कैसा भी रिश्ता क्यूँ ना हो? मुझे किसी की परवाह नही
आदम : उस वक़्त सिर्फ़ हम दोनो का वास्ता था माँ
अंजुम : जानती हूँ
अंजुम ने बेटे के सीने को सहलाया और उसे कहा कि खाना ख़ाके सोए...और ज़्यादा टेन्षन ना ले दिन पे दिन दुबला पतला होते जा रहा है...आदम ने कुछ ना कहा वो उठके मुँह धोने चला गया...अंजुम को जैसे उसकी चिंता सताने लगी....कही वो टूटके बिखर ना जाए? उसने
बेटे\ को ग़लत दिशा दिखाई अब उसे ही बेटे को पहले जैसा नॉर्मल करना था...उसने ठान लिया की वो ऐसा करके रहेगी..
अगले शाम आदम जब नौकरी से थका हारा घर लौटा तो उसने दरवाजा खुला पाया उसने कॉल बेल नही बजाया....."उफ्फ माँ को कितनी दफ़ा कहा है? ऐसा घर खुला छोड़ा ना करे दिन ज़माना ठीक नही है"......आदम नाराज़गी भरे लहज़े में घर में दाखिल हुआ और दरवाजा लगाए जैसे अंदर घुसा....
"माँ माँ कहाँ हो तुम?"....अपना बॅग को रखते हुए टाइ को ढीला करते हुए आदम ने इधर उधर नज़रें फिराई पर माँ कही नही थी....जब उसकी निगाह अपने माता पिता के कमरे की ओर हुई तो जैसे कमरे का दरवाजा लगा हुआ था...
"मामा मामा दरवाजा खोलो माँ क्या कर रही हो अंदर? अरे माँ श माँ"....अंदर से गाना बजने की आवाज़ें आ रही थी....शायद माँ ने टीवी ऑन रखा हुआ था कमरे की ट्यूबलाइट तो जल रही थी लेकिन माँ ने अंदर से दरवाजा लगाया हुआ था....आदम को थोड़ी फिकर हुई क्यूंकी दरवाजा माँ खोल नही रही थी...आदम ने फिर दो-चार बार दस्तक दी पर माँ ने कोई जवाब ना दिया
"माँ माँ दरवाजा खोलो माँ माँ"......आदम दरवाजे को खोलने की नाकाम कोशिश कर रहा था....उसका दिल जैसे बेचैन हो रहा था....कि आख़िर क्या बात हो गयी? इतना टाइम हो गया माँ दरवाजा क्यूँ नही खोल रही?
इसी लहज़े में जब उसने दुबारा हॅंडल पे हाथ रखना चाहा ही था कि कुण्डी खुलने की आवाज़ हुई और उसके बाद दरवाजा खुद पे खुद चर्र चर्रे तीखे स्वर में अपने आप खुलने लगा...आदम ने झट से दरवाजे को धकेला....तो पाया कि सामने का नज़ारा कुछ और ही था आदम ऐसा
आदम जैसे कमरे के दरवाजे पे ही खड़ा ठिठक गया....उसका मुँह खुला का खुला रह गया....जो आँखे थकी हारी रोज़ाना आँसुओं बोझल सी
हो जाती थी वो एकदम से सामने के नज़ारे को देख जैसे आँखे बड़ी बड़ी सी हो गयी....सामने का नज़ारा कुछ था ही वैसा...
सामने बिस्तर पे अंजुम बैठी हुई थी उसके हाथ पाओ पे मेहेन्दि का रंग चढ़ा हुआ था...शायद दिन में ही मेहेन्दि लगाई थी उसने...उसके बदन पे एक भी कपड़ा नही था....एकदम मदरजात नंगी अपने बेटे के सामने जैसे प्रस्तुत थी...दोनो कलाईयों में भरी भरी चूड़िया और पाओ में बेटे का दिलाए हुए वो पायल....उसकी चुचियाँ एकदम लटकी हुई थी ब्राउन निपल्स जैसे कठोर से हुए से थे....टाँगों पर से टाँग हटाए जब उसने
दोनो टाँगों को एकदुसरे से अलग किया टाँगों को फैलाया तो उसकी झान्टेदार चूत बेटे के सामने हुई झान्टो के ठीक बीच में जैसे चूत एकदम गुलाबी सी थी....माँ एका एक बेटे के सामने खड़ी होके अपनी चोटी पे हाथ फेरते हुए गजरे को जैसे ठीक करने लगी जो उसके बालों में सजी हुई थी....
माँ : क्या हुआ बेटा? तू ऐसे बाहर क्यूँ खड़ा है? क्या हुआ तुझे (एका एक शरारत से मुस्कुराते हुए)
आदम : म्म...माँ आप ऐसे
माँ : क्यूँ? अपने घर क्या ऐसे भी रहना गुनाह है क्या?
आदम : पर माँ ये सब आज कैसे?
आदम की नज़र माँ की बगलो को उठाने से उसके काख के शेव्ड बालो पे पड़ी लगता था वहाँ से माँ ने हाल ही में ही बाल सॉफ किए थे इसलिए वहाँ कालापन और हल्की हल्की उगती बाल दिख रही थी...
अंजुम बेटे के एकदम नज़दीक आई तो आदम ने पाया कि उसके बदन से भीनी मोगरे की खुश्बू आ रही थी....आदम ने तुरंत माँ के पेट पे हाथ रखते हुए हाथ नीचे ले जाते हुए स्ट्रेच मार्क्स बने दागो पे फिर तल पेट को सहलाया....माँ इससे सिहर उठी उसने कस कर बेटे के हाथ
को थाम लिया....आदम ने अपना हाथ एका एक तल पेट से नीचे ले जाते हुए झान्टो में लाया और उस पर हाथ से सहलाते हुए चूत के ठीक
उपरी सिरे पे हाथ रखा...
चूत एकदम गरम हो चुकी थी....आदम ने कस कर चूत को अपने हाथो में लिए दबोचा और उसे 2-3 बार मसला...वैसे भी काफ़ी अरसा हो गया था माँ से दूर हुए आज जैसे माँ खुद रह ना पाई और इतने सालो बाद दोनो ने अपने फास्लो को एक झटके में एकदुसरे के बीच से दूर कर दिया...
जब तक आदम का हाथ माँ के चूत को सहला रहा था उसकी पावरोटी जैसी फूली सूजी चूत के मुआने पे उंगलिया जैसे घिस रहा था....उस
पल अंजुम ने बेटे के कपड़ों को उतारना शुरू कर दिया.....कुछ ही पल में फर्श पर आदम के कपड़े गिरे परे हुए थे
और आदम माँ की टाँगों के बीच अब अपनी बीच की उंगली चूत के मुआने के अंदर बाहर कर रहा था....और उसी बीच वो माँ की छूट को
\ खूब कस कर मुट्ठी में लिए मसल देता...जिससे माँ का पूरा बदन सिहर जाता और वो जैसे स्खलित होने जैसी अवस्था में आ जाती...
"ऑश ऑश सस्स उूउउइइ सस्स आहह".......अंजुम सिसक उठी और ठीक उसी पल बेटे ने मुट्ठी में चूत को जैसे 2 मिनट के लिए दबोचे रखा और फिर उसे मसल्ते हुए छेद को अंगूठे से जैसे सहलाया फिर उसने लगभग तीन उंगली अंदर डाली और फिर चूत को अच्छी तरह से उंगली करने लगा...कुछ ही पल में अंजुम ने बेटे के उंगली करते हाथो को कस कर पकड़ा और ठीक उसी पल जैसे उसका बदन एक बार काँप
उठा उसने मुँह को भीच लिया सख्ती से...और चूत से फव्वारा जैसे बरसाया....आदम का पूरा हाथ गीला हो गया और फर्श पे अंजुम की चूत
से निकला पानी फैल गया....
अंजुम अब पलंग पे लेटी हुई थी और उसकी टाँगों के ठीक बीच आदम अपना मुँह रखे हुए था...उसने चूत पे अपना मुँह लगाया हुआ उसे मुँह में लिए जैसे उसे ज़ुबान से चाटें जा रहा था....अंजुम को यह मुख मैथुन बेटे की बहुत पसंद थी....वो नंगी ही लेटी हान्फते हुए बेटे के मुँह को
अपनी चूत पे लगा देख उसके बालों पे हाथ फैरने लगी....
उसने बेटे को जैसे प्रोत्साहित किया कि वो और गहराई से चूत को चूसे...आदम ने चूत के दाने को मुँह में भरते हुए उसे बड़े प्यार से चूसा
और उसके बाद मुंहाने पे अपनी गीली ज़ुबान चलाता रहा....माँ की गरम नमकीन चूत का स्वाद चखते हुए आदम जैसे पागला गया....
"ओह्ह स"......ज़बान अब छेद के भीतर जैसे आदम घुसा रहा था...कुछ ही पल में चूत जैसे फिर पानी पानी हो गयी.....आदम ने उससे
निकलते रस को चखते हुए उसमे जैसे अपनी नाक घुसाई और उसे सूँघा भीतर से एक भीनी महेक आ रही थी...
आदम उठ खड़ा हुआ और उसने अंजुम की दोनो टाँगों को अपने गिरफ़्त में ले लिया अंजुम ने अपनी दोनो अपने हाथो से थामते हुए एकदम फैला ली...जैसे इस दिन के लिए वो कितनी बेचैन हो?
आदम ने माँ की चूत में सटाक से एक ही करारे धक्के में लंड को फुरती से अंदर जैसे धकेल दिया था....चूत ने जैसे उसके लंड को एक ही झटके में अंदर तक समा लिया....इससे माँ का पूरा बदन काँप उठा...
अंजुम : उईईई हाए अल्ल्लाहह
आदम : ओह्ह्ह माँ ऐसा लगता है कि कभी ये ढीली हुई ही नही
अंजुम : ढीली अगर ना होती तो तो एक ही बार में कैसे इतना अंदर तक तू ले सकता? उमर के हिसाब से औरतो की वो जगह ढीली होती ही जाती है चल लगा धक्के
आदम : ससस्स माँ उफ़फ्फ़ तुम्हे ऐसी टांगे चौड़ी किए मुद्रा में देखकर तो मेरा लंड अंदर जैसे ही फारिग हो जाएगा
अंजुम : हा हा हा हा हा काबू रख खुद पर ज़्यादा परिश्रम करने की ज़रूरत नही आराम से आराम कर
आदम वैसे ही धक्का पेलता हुआ चूत से सटासट लंड को अंदर बाहर कर रहा था....माँ की चूत की चिकनाई लिंग को अपने द्वार से बाहर धकेलते हुए जैसे वापिस ढीला छोड़े खुद के अंदर ले रही थी.....आदम को ऐसा महसूस हो रहा था की जैसे उसका लंड की गरम भट्टी के
अंदर जा घुसा....माँ की चूत की गर्मी को सहना जैसे उसके सहन की बात ना थी...