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Incest माँ को पाने की हसरत

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आदम वैसे ही धक्का पेलता हुआ चूत से सटासट लंड को अंदर बाहर कर रहा था....माँ की चूत की चिकनाई लिंग को अपने द्वार से बाहर धकेलते हुए जैसे वापिस ढीला छोड़े खुद के अंदर ले रही थी.....आदम को ऐसा महसूस हो रहा था की जैसे उसका लंड की गरम भट्टी के

अंदर जा घुसा....माँ की चूत की गर्मी को सहना जैसे उसके सहन की बात ना थी...

उसने धक्के तेज़ किए..तो चूत से फ़च फचक की आवाज़ आनी शुरू हो गयी....आदम ने झुकते हुए उसके दोनो चुचियो को जैसे हाथो में लेके मसलना शुरू कर दिया....और एक एक चुचि को मुँह में लेने से पहले उसके निपल्स पे अपने ज़ुबान लगाए फिर उसे मुँह में लेके

चूसा...उसकी चुसाइ से ही माँ जैसे पागला उठी....उसने अपनी टांगे बेटे की कमर में लपेट ली थी...

"उईइ माँ आहह स्स्स आहह आहह "......."ओह्ह्ह माँ ससस्स उफ़फ्फ़"........बेटा और माँ दोनो एक साथ जैसे चुदाई का आनंद ले रहे थे...कुछ ही पल में आदम ने माँ की चूत में सतसट धक्के पेलने ज़ोर ज़ोर से करने शुरू कर दिए...जिससे माँ पलभर में काँपने लगी साथ साथ बेटे को अपने उपर चढ़ाए जैसे उसके पीठ पे नाख़ून गाड़ने लगी...

"सस्सह उउई आहह सस्स आहह उररगगगगघह आहह".......माँ की दहाड़ जैसे पूरे कमरे में गूँज़ उठ रही थी..

.आदम जैसे पागलो की तरह माँ के उपर नीचे हो रहा था उसकी चूत से पिस्टल की तरह लंड अंदर बाहर हो रही थी...अंजुम अपने बेटे के पीठ और गाल को चूमते चाटते हुए उसके कुल्हो पे हाथ रख कर उसे कस कर दबाने लगी जिससे आदम को अहसास हुआ कि माँ अब फिर

से झड़ने वाली है..

उसने कस कर लंड को कुछ धक्को के पश्‍चात चूत के भीतर ही लंड को रोके रखा....जिससे माँ एकपल को काँपी और उसके बाद उसकी चूत ने एक पेशाब की तेज़ धार जैसे छोड़ी...जो ठीक उसकी चूत की गहराई से निकलता हुआ चादर से होते हुए फर्श पे जाके गिरा....इससे माँ के दोनो बदन काँप उठे माँ का चेहरा एकदम लाल था और पसीने से तरबतर भी...

वो रोई सा मुँह बनाए चीखने लगी...उसने चादरो को कस कर हाथो में दोनो तरफ से पकड़ लिया...."आहह आहह आहह"......आदम फिर चूत में अपना लंड दाखिल कर फिर उसे चोदने लगा...माँ हर धक्को में हिल रही थी आदम ने उसकी हिलती छातियो को दोनो हाथो से थामा और उसे कस कर मसलना शुरू किया

आदम : आहह सस्स मामा उफ़फ्फ़ अफ फ़ससस सस्स आहह आहह

माँ जैसे दर्द भरा मुँह बनाए उसे देख रही थी उसके दोनो कंधो पे हाथ रखके उसके बेटे के पसीने होते बदन को सहला रही थी अपने हाथो से....फिर उसने उसे अपने से कस कर लिपटा लिया

 
माँ : आहह ह मेरा लाल्ल मेरा बेटा आहह सस्स चोद्द डाल मुझे उफ़फ्फ़ सस्स कार और कस कर और कस कर

आदम वैसे ही पागलो की तरह माँ की चूत पेलता रहा....जब उससे माँ की सिसकती आवाज़ सहन ना हो सकी..तो जैसे वो काँप उठा...उसके

माथे पे जैसे नस एककत्रित हो गयी...और वो ज़ोर लगाने की मुद्रा से कस कर दहाड़ उठा...

उसने धक्के लगाने बंद किए और वैसे ही आधा लंड चूत में फँसाए माँ पे जैसे ढेर हो गया उसका शरीर अकड़ने लगा उसके बाद दोनो हाफने लगे...आदम अपनी माँ की चूत में ही फारिग होने लगा....सफेद रस उसकी गहराईयो में जैसे बहने लगा...माँ को अपने बेटे के गरम रस का अहसास भीतर तक महसूस हुआ...

अंजुम ने आदम को शांत किया उसके माथे के पसीने को पोंछते हुए उसके बालों को समेटते हुए उसके गाल और गले को चूमा....फिर उससे कस कर लिपट गयी.....

"आहह हाहह आहह आहह आहह"........माँ के घुटने मुड़े हुए थे और उसका बेटा आदम उसकी गान्ड की फांको के अंदर बाहर अपने लंड

को कर रहा था उसने इस बीच लंड को बाहर खीचा और छेड़ पे मुँह लगाया और उसे ज़ुबान से गीला किया...

अंजुम हंस पड़ी उसने कस कर अपने नितंबो को भीचा और सिकुड़ते खुलते छेद के बीच एक तीखी सी आवाज़ में पाद छोड्री....प्र्रररर.....आदम ने उसकी चूत पे थप्पड़ मारा और उसके छेद पे नाक लगाया..."ओह्ह्ह वाहह तेरी महेक इतनी खुश्बुदार है

माँ".......

."छी तू क्या जानवर है जो ऐसे सूंघ रहा है".......

."हाहाहा माँ हमे काहे का घिन जब तंन मन से एक मर्द औरत को अपना बनाता है उन दोनो के बीच कोई घिन पीट नही बचती".........आदम ने कस कर माँ की पीठ की मालिश करते हुए

छेद के भीतर फिर अपने मोटे लंड को जैसे जड़ तक पेल दिया....इस बार उसे माँ की बच्चेदानी का अहसास हुआ उसने कस कस कर धक्को पे धक्के लगाए....जिससे कुछ ही पल में अंजुम जैसे फिर चीखने लगी....बेटे के चूत फाड़ने से उसे चूत की सिकाई वैसे ही करनी थी

 
और उपर से बेटे ने ठीक उसी पल उसे कुतिया की मुद्रा बनाया और उस पर चढ़ गया...उफ्फ कितना सेक्स भरा है उसके बेटे के अंदर ये

सोचते हुए वो खिलखाए चुदते वक़्त मुस्कुरा उठी

उसकी छातिया जैसे लटक रही थी जिन्हें नीचे हाथ ले जाते हुए बेटे ने एक दो बार दबाया तो माँ चिहुक उठी...बेटे के झुकने से उसके

अंडकोष ही नितंबो से बाहर लटके हुए थे...पूरा 8 इंच का मस्त लंड उसकी गान्ड की गहराईयो में डाला हुआ था

बेटे ने फिर कमर पे दोनो हाथ कसे और अंजुम की ताबड़तोड़ फिर चुदाइ की "इस्सह सस्स सस्स अहः आहह अहहह माँ मैं

आआया".......

"निकाल डाल्ल"....उसने हाथ बेटे के अंडकोष को सहलाते हुए कहा

तो बेटा जैसे एकदम अकड़ गया....और उसकी गान्ड के भीतर ही जैसे फारिग होता चला गया जब उसने मुआने से अपना लंड प्यूच की आवाज़ के साथ बाहर खीचा तो छेद जैसे खुलते हुए रस बाहर उगल रहा था.....अंजुम की दोनो छेद एकदम लबालब रस से भरी हुई थी वो हानफते हुए जैसे बिस्तर पे ढेर हो गयी...

आदम ने वैसे ही गीले लंड को पास पड़े कपड़े से पोछा और माँ की तरफ देखा जो थकि हुई बुझी आँखो से साँस भरती हुई पेट के बल लेटी हुई थी उसके चेहरे पे बाल जैसे बिखरे हुए थे...

आदम ने उन बालों को जैसे समेटते हुए माँ के माथे को चूमा.....बाहर चाँद जैसे अपना उजाला फ़ैक् रहा था....

 
अंजुम बेटे से लिपटी हुई उसे सीने के बालों से खेल रही थी...

आदम : माँ मैं इस दिन का बेसब्री से इन्तिजार में था

अंजुम : मुझे खुशी दी की तूने सारे गीले शिकवे भुलाके मुझे अपना बना लिया इतना प्यार करता है तू मुझसे? उस दिन तूने क्यूँ ना कहा कि

तुझे निशा से शादी करने का कोई दिलचस्पी नही था..

आदम : बस माँ तेरी सेवा करने के लिए मुझे मज़बूरन ये फ़ैसला लेना पड़ा...लेकिन तुझसे दूर होना ये मेरे लिए मुनासिब ना हुआ

अंजुम : उफ्फ चल कोई बात नही रात गयी बात गयी तू जानता है आज करवाचौथ है

आदम : हाहाहा जानता हूँ माँ स्टाफ मेंबर सब जल्दी जल्दी घर को निकल गये करवा चौथ मनाने आज तो उनकी जैसे हसीन रात है

अंजुम : दो प्यार करने वालो की रात जैसे पत्नी अपने पति के लिए दिन भर वृत रखती है और फिर उसके लिए दुआ मांगती है और उसके

बाद चाँद के बाद अपने पति का मुँह देखकर अपना वृत तोड़ती है

आदम : मैं तुझसे रखवाता हाहहा

अंजुम और आदम दोनो हंस पड़े....."अच्छा आदम बेटा".......

."हां माँ"....

."अब तेरा क्या विचार है आगे के लिए?".....\\

."क्या विचार होगा माँ? अब शादी से जैसे विश्वास उठ चुका है जिसके लिए दिल में बहुत कुछ सोच रखा था वो भी ना मुझे मिल

सका".......आदम ने जैसे माँ की तरफ दुखी भरी निगाहो से देखा

माँ को लगा शायद वो उसकी और अपनी शादी की बात के बारे में कह रहा था उसके इनकार से ही बेटा जैसे उखड़ा उकड़ा सा रहने

लगा....लेकिन उसे क्या पता? की सिर्फ़ उसके इनकार से ही नही बल्कि चंपा की मौत से भी शोक में जैसे डूबा हुआ था आदम...

अंजुम : अगर तू जो चाहता है वो सच हो जाए तो

आदम : मतलब ?(सवालिया निगाहो से माँ की तरफ देखते हुए)

अंजुम : मतलब वहीं जिससे मैने इनकार किया था

आदम : सच माँ पर पिता जी?

अंजुम : अब उनका होना या ना होना एक ही बराबर है उन्हें ज़िंदगी में भी कभी इस बात की खबर ना लगने दूँगी मैं तेरे लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ

आदम : क्या ये इज़हार एक तरफ़ा है ये क्या तेरा सिर्फ़ फ़ैसला है या दिल से?

 


अंजुम ने अपने बेटे के होंठ को चूमा और उसे देखते हुए कहा कि एक औरत सिर्फ़ मर्द का साथ नही चाहती उसका मुहब्बत भी चाहती है ताकि दोनो सिर्फ़ एकदुसरे के ही बने रहे...अंजुम ने जो अरमान उठाया उससे आदम ने उसे अपने गले लगा लिया..

_____________________

वो शाम ही कुछ अजीब थी....महफ़िल जैसे सज़ा हुआ था....घर एकदम दुल्हन की तरह सज़ा हुआ था....और दोनो तरफ पक्ष बैठे हुए थे एक तरफ शेरवानी में आदम तो दूसरी ओर उसकी माँ अंजुम...ये दिन एकदम से आ जाएगा किसी से ने सोचा ना था....जिस रात इज़हार पूर्ण हुई...दूसरे ही दिन सोफीया और समीर को इत्तिला करते ही समीर और सोफीया उनके घर पहुचे....सारी आप बीती सुनने के बाद दोनो ने जैसे गम भुलाने को कहा और निशा की खूब निंदा की....अफ़सोस बेहद हुआ कि वो चाह कर भी कुछ कर ना सके लेकिन अब दिन बदल चुका

था ये वो वक़्त था जिसका आदम और समीर को ख़ासकारके बेसवरी से इन्तिजार था राजीव अपनी पत्नी ज्योति भाभी के साथ ब्रड्वेन गये थे और उसी बीच निक़ाह अपने घर में करने की बात आदम ने रखी थी....और आज वहीं दिन था....पिता जी को गये हुए डेढ़ माँस हो चुका

था...होमटाउन का हर कोई अंजान था सिवाय लाजो के जो केवल उसकी माँ को ना मालूम चल जाए इसलिए छुट्टी किए हुए आई नही थी.....

समीर सोफीया दोनो एकदुसरे के पक्षो के साथ बैठे हुए थे.....क़ाज़ी निक़ाहनामा पढ़ रहा था....कुछ ही पल में जब दोनो से इजाज़त माँगी गई

तो दोनो अपनी तरफ से कॅबूल है कहा....क़ाज़ी ने दोनो पक्षो और दूल्हा दुल्हनो को निक़ाह पूरी हो जाने की बधाइया दी...

समीर : फाइनली फाइनली ये दिन आ ही गया जिसका मुझे बेसवरी से इन्तिजार था (दुल्हन से सजी लाल साड़ी के जोड़े में अंजुम बेहद खूबसूरत लग रही थी जो आदम के साथ बैठी हुई थी)

सोफीया : हां अंजुम इतना कुछ हो गया और तुम दोनो की कहानी यहाँ तक पहुच जाएगी हमने तो उम्मीद ही ना की थी

आदम : मुझे खुशी है कि आप दोनो यहाँ बेंगाल आए

समीर : अबे ओह तू ना भी बुलाता तो अभी हम टपक पड़ते हाहाहा

सब खिलखिलाए हंस पड़े....कुछ देर बाद समीर और सोफीया उन दोनो को सुहागरात के सजे कमरे में छोड़के फ़ौरन बाहर चले गये....आज

अंजुम को ऐसा लग रहा था जैसे ये रात उसकी पहली सुहागरात हो....बेटे ने कमरे में दस्तक दी तो जैसे उसने शरमाये घूँघट किए नज़रें झुका लिया

 
रात साडे बारह बाज चुके थे....और जब मैं कमरे में दाखिल हुआ तो माँ को शादी के जोड़ो में पाया....उसने हल्का सा घूँघट कर रखा था....वो गहनो में जैसे लदी हुई थी....उसके हसीन चेहरे को देख एका एक मैं उसके पास आया उसने नज़रें झुकाए रखा था फिर उसने मुझे देखा और

हल्का सा मुस्कुराया..उसने अपने पाओ को पीछे कर लिया जैसे मुझे छूने ना देना चाह रही हो

आदम : अंजुम आज तो तुम कमाम्ल की लग रही हो तुम्हें इस दुल्हन के जोड़े में देख तो ऐसा लग रहा है जैसे कोई 25 वर्षीए लड़की की नयी नयी शादी हुई है

अंजुम : अच्छा जी अब मैं तुझे 25 वर्ष की लगने लगी हूँ और अब तू मुझे मेरे नाम से पुकार रहा है

आदम : और नही तो किस नाम से तुझे पुकारू?

अंजुम : हट बेशरम शादी का मतलब ये नही कि तू मेरी उमर का हो गया है

आदम : हा हा हा हा

मैं हंस पड़ा तो माँ भी खिलखिलाए हंस पड़ी...फिर उसने कहा कि सोफीया और समीर सो गये....तो मैने कहा हां अपने कमरे में चले गये है.....अंजुम ने कहा देख आदम अब तो तेरी सारी ख्वाहिश मैने क़बूल कर ली अब तुझे ये अहसास होना चाहिए कि तू अब अकेला नही रहा अब तुझपे मेरा और ज़्यादा हक़ हो गया है...

आदम : बीवी की हैसियत से

अंजुम शर्मा गई फिर मैने धीरे धीरे उसकी घूँघट को खोले पूरा सरका दिया....फिर उसके जेवरातो को उसके गले और हाथो से उतारने लगा....माँ के हाथो पे काफ़ी सुंदर मेहेन्दि का रंग चढ़ा हुआ था....धीरे धीरे मैने माँ की साड़ी धीरे धीरे उसके बदन से अलग कर दी जिससे माँ अब सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट में आ गयी..

माँ ने कस कर मुझे अपने बाहों में भीच लिया और मुझे बेतहाशा चूमने लगी....उसके होंठो पे लगी लिपस्टिक गले गाल नाक माथे जहाँ जहाँ उसने चूमा वहाँ वहाँ लग गया था....मैने कस कर उसके चेहरे को दोनो हाथो से थामा और उसके तपते होंठो पे अपने होंठ रख दिए.....हम दोनो एकदुसरे को दीवानो की तरह स्मूच करने लगे....एकदुसरे के मुँह में ज़ुबान धकेलने लगे....एकदुसरे के होंठो को चाटने और चूसने लगे....

 
अंजुम : म्‍म्म्मम आराम से बाबू

आदम : म्‍म्म्मम वाहह माँ तेरे रसीले होंठो का तो मैं जीवन भर रस्पान करना चाहता हूँ (माँ के होंठो से होंठ अलग करते हुए)

अंजुम ने अपने होंठो को पोंच्छा फिर हम दोनो दुबारा से एकदुसरे के होंठो से होंठ सटाये दुबारा किस करने लगे....माँ का इस बीच मेरे

पाजामे के उभार पे हाथ आया और उसने उपर से ही मेरे लिंग को पकड़ लिया....मैने अंजुम के ब्लाउस के उपरी सिरे से ही उसकी दोनो

नरम छातियो को दबाना शुरू कर दिया....माँ ने मेरे होंठो से अपने होंठ हटाए....फिर हान्फ्ते हुए आहें भरने लगी...

आदम : माँ तुझे ये रात कैसी लग रही है?

अंजुम : बहुत ही ख़ास और प्यार भरी (माँ ने एकदम से आँखे मूंद ली क्यूंकी ब्लाउस के बटन लगभग टूट चुके थे और उसके अंदर उसने

कुछ पहन नही रखा था जिस वजह से उसकी छातिया बाहर निकल आई मैने उसके दोनो चुचियो को अब मुट्ठी में लेते हुए दबाया)

आदम : उफ़फ्फ़ तेरी ये नरम चुचियाँ काश इनमें से दूध निकल पाता

अंजुम शरमाई उसने प्यार से बेटे के बालों पे हाथ फेरा और उसे अपने छातियो से सटा लिया....आदम बारी बारी से दोनो चुचियो को मुँह में लिए चूसने लगा....दोनो के मोटे ब्राउन निपल्स को घपप से मुँह में लेके उसे खीचते हुए मुँह में भर लेता....जिससे माँ मदहोश हो जाती...

अंजुम : अहः उःम्म्म्मम (उसने बेटे को जैसे अपने छातियो पे जैसे दबा लिया)

आदम का साँस घुटने लगा और वो माँ की छातियो के बीच जैसे चेहरा लगाए दब गया जब माँ की पकड़ ढीली हुई तब उसने अपना चेहरा उन खरबूजो से हटाया और साँस लेने लगा....माँ खिलखिलाके उसके गुलाबी चेहरे को देखके हंस पड़ी...आदम मुस्कुराया फिर चुचि को मुँह

में लेके चुस्सना शुरू कर दिया....माँ एकदम गरम हो चुकी थी उसकी साँसें गहरी चल रही थी...

 
आदम ने चुचियो को दबाते ही दबाते हाथ को नीचे ले जाना शुरू किया फिर गोल गहरी नाभि को सहलात हुए वो उसकी चूत के मुआने पे आया....आज वहाँ पे झान्टे नही थी जब उसने माँ के पेटिकोट की डोरी खोल कर उसे आइडियो तक नीचे खिसकाई तो माँ की चिकनी चूत उसके सामने प्रस्तुत थी....

आदम ने माँ को लेटा दिया फिर नाभि पे अपनी जीब चलाते हुए वहाँ कुछ देर तक चूमा....अंजुम ने खुद पे खुद उसके सर को नीचे धकेलना शुरू किया....जिससे धीरे धीरे आदम चूत के सिरे पे आया और फिर उसने अपनी गीली ज़ुबान से चूत की फांको में जीब डालना शुरू कर

दिया...गीली लपलापाई ज़ुबान से अंजुम को भरपूर मज़ा मिल रहा था उसकी चूत का हिस्सा जैसे कुलबुला सा गया....एक उंगली आदम ने

फुरती से उसकी गान्ड को खोलने के लिए छेद में घुसा दिया था...

वो जीब से माँ के दाने के साथ साथ चूत पे भी मुँह रख उसे चूसे जा रहा था...माँ की पवरोटी जैसी चूत पनिया गयी...अंजुम ने अपने टाँगों को

मोड़ते हुए बेटे की गर्दन पे लपेट ली...आदम मुँह चूत में घुसाए उसे सूँघता हुआ पागलो की तरह उसे चाटें जा रहा था..

अंजुम : ओह्ह्ह आहह उम्म्म्मम ससस्स (खुद ही अपने छातियो को दबाए जा रही थी)

आदम ने जब चूत के उपर से मुँह हटाया तो उसने उसे मुट्ठी में लेके भीच दिया....अंजुम सिसक उठी उसने मुँह पे हाथ रख लिया आदम ने एक उंगली गान्ड के भीतर से बाहर निकाली और सिकुड़ी उस छेद पे भी अपनी ज़ुबान चलाई...माँ के गुप्तांगो में जैसे टीस उठ रही थी चुदाई

के लिए...वो बेटे के उठने का इन्तिजार करने लगी....

आदम ने जब चूत को चुसते चुसते एकदम से छोड़ा...तो अंजुम जैसे हाँफने लगी....आदम ने मुस्कुरा कर अपना मोटा लंड चूत की दरारो पे फिराया...फिर उसने तीन उंगली अंदर करते हुए बड़े अहेतियात से चार और फिर पाँचवा यानी अंगूठा अंदर तक सरका दिया...धीरे धीरे वो पूरे हाथ को अंजुम की चूत में दाखिल करने लगा...अंजुम का शरीर मारे उत्तेजना के काँपा और उसने बेटे के हाथ को कस कर पकड़ा...उसका मुँह एकदम सख़्त हो गया उसने अपने दाँतों को भीच लिया...बेटे से जैसे गुहार की बस अब उसे और ये दर्द सहा ना जाएगा...

आदम लापरवाह ही रहा....उसने धीरे धीरे अपने पूरे हाथ को चूत की गहराइयो में जैसे ही डाला तो माँ का पूरा शरीर वाइब्रट हुआ और उसने पेशाब की एक मोटी धार छोड़ दी "आआआआहह उउऊईईईई".....आदम ने चूत से हाथ बाहर निकाला जो तरबतर था गीलेपन से....आदम ने

चूत पे मुँह रखके गीली चूत को चाटा फिर अपना मोटा लंड माँ की दरारो में घुसाने लगा...

अंजुम ने कस कर बेटे के दोनो बाज़ुओं को उठते हुए पकड़ा पर बेटे ने उसे फिर बिस्तर पे धकेलते हुए लेटा दिया....उसने अपने मोटे लंबे लंड को चूत की गहराईयो में जैसे एक ही बार में दाखिल कर दिया....चूत गीली थी और चिकनी भी....अंजुम फिर झरने लगी...चूत से रस बहने लगा....उसने कस कर बेटे के लंड को अपने भीतर जैसे जाकड़ लिया...

आदम ने उसके शांत होते ही उसके होंठो से होंठ सटाये और उससे लिपटते हुए अपने कुल्हो को आगे पीछे किए हिलाने लगा..जिससे लंड

गहराईयो तक दाखिल होके वापिस बाहर की ओर निकल आता...चूत से फ़च फ़च्छ की आवाज़्ज़ आ रही थी...

 
अंजुम : ओह्ह स ओह्ह्ह आहह उम्म्म्म ऑश

आदम : आहह उम्म्म सस्स (आदम सिसकता हुआ माँ की छातियो से अपना सीना दबाए उस पर एकदम सवार था)

दोनो माँ-बेटे एकदुसरे की आँखो में जैसे झाँक रहे थे....आदम ने फुरती से लंड आगे पीछे डालना बाहर करना शुरू कर दिया...चूत का मुआना जैसे पूरी तरह से खुल चुका था अंजुम ने खुद ही अपनी आपस में टकराती हिलती छातियो को पकड़ लिया...वो चुदते हुए जैसे लज़्जत पा रही थी...

बेटे को चरम सुख का आनंद प्राप्त हो रहा था उसने माँ के होंठो से अपने होंठ लगा लिए और दोनो आलिंगन में जकड़े एकदुसरे को किस करने लगे...जब आदम बुरी तरह थक गया तो वो माँ के उपर से उतर गया...और सीधा लेट गया...माँ ने उसकी कमर पे चढ़ते हुए उसके

लंड\ को घपप से अपनी चूत की गहराईयो में डालना शुरू किया...उसने हल्का सा अपने कुल्हो को उठाया और हल्के हल्के से लिंग पे बैठना शुरू किया....

कुछ ही देर में वो बेटे के पूरे 8 इंच के लंड को अपने भीतर महसूस कर रही थी...उसे काफ़ी चुभन हो रही थी...पर अब तो उसे इसकी आदत पड़ भी चुकी थी.....उसने बेटे पे कूदते हुए उसके सीने को जैसे दबाना शुरू किया...उसने झुकके एक बार बेटे के निपल्स पे भी ज़ुबान लगाई\ और उसे मुस्कुरा कर देखते हुए चाटा....आदम हंस पड़ा

उसने माँ को फिर सीधा बिठाया और उसकी चुचियो को दबाते हुए बीच बीच में उसे अपने ऊपर झुकाए निपल्स को चूस लेता....फिर उसे

उठाता और नीचे से धक्के लगाता...माँ बेटे की जैसे चुदाई कर रही थी..वो काफ़ी ज़ोर ज़ोर से उछल रही थी...उसके कूल्हे अंडकोषो पे

घिस्सते हुए फिर हवा में थोड़ा उपर उठते जिस बीच लिंग का हिस्सा उसकी चूत की दरारो में बुरी तरह फँसा दिखता और फिर उसके बैठने से जैसे वो कही गुम हो जाता...

अंजुम : ओह्ह सस्स आहह आहह ससस्स सस्स्स्स्सस्स उम्म्म ?(आँखे मूंदते हुए सिसकते हुए होंठो पे होंठ चढ़ाए)

आदम : ओह्ह माँ सस्स आहह तेरी चूत बहुत ज़्यादा गरम है ससस्स (माँ की चुचियो को दबाते हुए)

अंजुम ने फिर कस्स कस कर उपर नीचे कूदना शुरू किया...तो बेटे ने कस कर उसके नितंबो को भीच लिया और उसके जड़ तक जैसे लंड को घुसाए उसे जकड़े ही रहा...जब आदम को लगा की उसका निकल जाएगा तो उसने माँ को खुद अपने उपर से हटाया...

पुकच्छ से लंड उसकी चूत से अलग होते हुए बाहर निकाला...आदम ने उस पर थोड़ा थूक लगाया और उसे अच्छा ख़ासा चिकना किया....उसने माँ की तरफ इज़ाज़त भरी नज़रों से देखा और इशारा किया.....माँ मुस्कुराई उसके गाल को चूमते हुए घुटने मोडके अपना चेहरा लंड के पास लाई और फिर उसे अपने हाथो में भीचते हुए उसकी चमड़ी को सुपाडे के हिस्से से दूर किए उसे पूरा का पूरा अपने मुँह में लिया....

 
ये दृश्य बाहर दोनो माँ-बेटे समीर और सोफीया खड़े कब्से देख रहे थे.....अंदर उसका दोस्त आदम अपनी माँ के साथ सुहागरात मना रहा था...उन्हें मालूम नही था कि बाहर समीर और सोफीया खिड़की से उन्हें झाँकके देख रहे है....समीर का हाथ अपनी माँ की पेटिकोट के अंदर

था और वो उसके गुप्तांगो को सहलाए उसके होंठो को चूमते हुए बार बार....दोनो कसमसाए अंजुम को बेटे का लंड चुस्सता देख रहे थे...

समीर तो जैसे घूर्र घूर्र के अंजुम के झुके हुए नंगे बदन को जैसे घूर्र रहा था और आदम का लंड जो उसके मुँह में था उसे....सोफीया की भी नज़र आदम के लंड पे थी..जो कि उसके बेटे के लंड से काफ़ी हद तक बड़ा और उसे टक्कर देता था...उसने बेटे के कान में धीरे से कहा कि यहाँ से अब चलते है वरना पकड़े जाएँगे ....

."हां माँ वैसे भी मेरा बहुत टाइट हो गया है अब सहा ना जाएगा"........ये बात सुनके सोफीया शरमा गयी उसने बेटे के गाल खीचे फिर उसका हाथ पकड़े दोनो खिदको को अच्छे से लगाए दूसरे कमरे में चले गये...शायद सोफीया को भी अपनी खुजली मिटानी थी इसलिए वो बेटे के लंड को बिना लिए रह नही पा रही थी

अंजुम : म्‍म्म्मम स्लूर्रप्प म्‍म्म्ममम एम्म्म (लंड को मुँह से बाहर निकाले फिर उसे घपप से मुँह में लेके चुसते हुए)

आदम : ओह्ह माँ और लो और लो ना (धीरे धीरे अंजुम ने लंड को जैसे गले तक ले लिया उसकी आँखे बड़ी बड़ी हो गयी)

आदम ने कस कर उसके सर को पकड़ लिया अंजुम बिना साँस के तड़पने लगी....उसने आँखे आँखे बड़ी किए छूटने का प्रयास किया....क्यूंकी अंडकोषो तक उसके होंठ दबे हुए थे."अओउू अओउू अओउूउ".....अंजुम माँ के मुख मैथुन से खुद ब खुद उसके मुँह को

उपर नीचे करने लगा पकड़े.माँ उसे हलक तक चुस्से फिर उसे अपने मुँह से उगल दी....फिर उस पर गले से खाँसते हुए थुक्क्कर उसे हाथो में लिए गीले चिपचिपे लंड को हिलाने लगी...

आदम से अब हो ना पा रहा था...उसने माँ को झुकाए ही रखा और उसके छेद को छेड़ते हुए अपना लंड उसकी गान्ड की दरारो में रखा और धीरे धीरे सुपाडे को अंदर सरकाया..माँ हान्फ्ते हुए आँखे मूंद चुकी थी...आदम ने कस कर एक करारा धक्का पेला तो आधे से ज़्यादा लंड

उसकी गान्ड की दरारो में जैसे दाखिल हो गया....उसने माँ के बालों को सेमेटा और उसके सर को उपर उठाते हुए उसके दोनो बाज़ुओं को जैसे अपने हाथो में पकड़ते हुए खीचा

नीचे से वो माँ के नितंबो के भीतर तक अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था...."ऑश आहह आहह हाहह आहहा अहह"........"आआहह श उम्म माँह ससस्स वाहह क्या टाइट है माँ तेरी? अफ अंजुमम आज तुम्हें साबित करना है कि तू पूरी तरह से सम्पूर्न मेरी है"........

 
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