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Guest
वो पसीने पसीने एकदम दहशत से भी डरा हुआ था कि कब कोई सामने प्रकट ना हो जाए या फिर कोई जंगली जानवर उस पर और उसकी माँ पे हमला ना कर दे उनकी उपस्थिति का किसी को खबर ना लग जाए की वो लोग जंगल में छुपे हुए है...काफ़ी 1 एक आध घंटे बाद जब
माँ ने उससे कहा की जल्दी जल्दी हाथ चला बेटा वक़्त कम है तब तक वो मज़बूती से परख के लिए पहले से तय्यार की दो बाँस की जुड़ी बँधी लकड़ी को पानी में फैक देता है जिससे वो डूबती नही बल्कि तैरने लगती है....
अर्जुन का हौसला बढ़ जाता है...फिर वो माँ को उस तख्ते जैसे बनी बाँस की लड़की की नाव पे बैठने को कहता है...इतने में उसे कुछ आवाज़ सुनाई देती है..वो पीछे बिना मुड़े ज़ोरो से नाव को घँसीटते हुए ढल्लां से उतारते हुए सीधा पानी में उतार देता है जिससे बाँस की
लकड़ी का बना नाव तैर पड़ता है गनीमत थी कि उसे नाकामी नही हासिल हुई बल्कि माँ के वजन को उस नाव ने झेल लिया था और वो ना डूबा....
तब तक अरुणा को दिखा कि मशाल की आग जहाँ वो साँस लिए ठहरे थे वहाँ तक पहुच चुकी है...उनमें किसी ने चिल्लाते हुए कहा "आई
कौन है उधर?"......"वो माँ-बेटे भाग रहे है पकडो उन्हें बचके ना जा पाए"......
.अरुणा चिल्ला उठी उसने किनारे पे खड़े बेटे को पुकारा
अरुणा : अर्जुन कूद अर्जुन (धीरे धीरे नाव पानी पे बहती हुई जैसे किनारे से दूर होती जा रही थी और अरुणा का दिल धक धक करने लगा उसका बेटा अब भी किनारे पे ही मज़ूद था)
अर्जुन जानता था अगर उन्हें मार ना दिया गया तो वो लोग भागके गान वालो को उनके नहेर से भागने का राज फ़ाश कर देंगे....अर्जुन के पास उस वक़्त कम था....वो बिना पलके झपकाए अपनी तरफ आते उस हमले से ठीक सर झुकाए बाल बाल बचा...लाठी की आवाज़ जैसे हवा में
घूमी हमला नाकाम रहा...अर्जुन ने अपने छुरे को एक ही बार में उसकी गर्दन के आर पार कर दिया....खाकच्छ आअहह......वो जो भी था
वहीं गिरके दम तोड़ चुका था.....अर्जुन पे जैसे ही उन्होने हावी होना शुरू कर दिया....अर्जुन पानी में कूद पड़ा...
अरुणा की नाव जैसे बेटे से दूर होती जा रही थी...वो तैरना जानती नही थी उपर से उसका बेटा भी बहती नहर के साथ बहने लगा....उसने मज़बूती से नाव की सिरे को पकड़ा माँ हाथ जैसे आगे बढ़ती तो तो पीछे से उसके बेटे पे किसी ने आहट भरा हमला किया....अर्जुन की
पकड़ इससे ढीली हुई और उसने तुरंत अपने दूसरे हाथ के छुरे को उसके चेहरे पे जैसे घोपप दिया...अरुणा ने नज़रें फेर ली अर्जुन ने उसके चेहरे से छुरे को बाहर जैसे ही खीचा उस आदमी की लाश पानी में लाहुलुहान बहती हुई आगे चली गयी....
माँ ने उससे कहा की जल्दी जल्दी हाथ चला बेटा वक़्त कम है तब तक वो मज़बूती से परख के लिए पहले से तय्यार की दो बाँस की जुड़ी बँधी लकड़ी को पानी में फैक देता है जिससे वो डूबती नही बल्कि तैरने लगती है....
अर्जुन का हौसला बढ़ जाता है...फिर वो माँ को उस तख्ते जैसे बनी बाँस की लड़की की नाव पे बैठने को कहता है...इतने में उसे कुछ आवाज़ सुनाई देती है..वो पीछे बिना मुड़े ज़ोरो से नाव को घँसीटते हुए ढल्लां से उतारते हुए सीधा पानी में उतार देता है जिससे बाँस की
लकड़ी का बना नाव तैर पड़ता है गनीमत थी कि उसे नाकामी नही हासिल हुई बल्कि माँ के वजन को उस नाव ने झेल लिया था और वो ना डूबा....
तब तक अरुणा को दिखा कि मशाल की आग जहाँ वो साँस लिए ठहरे थे वहाँ तक पहुच चुकी है...उनमें किसी ने चिल्लाते हुए कहा "आई
कौन है उधर?"......"वो माँ-बेटे भाग रहे है पकडो उन्हें बचके ना जा पाए"......
.अरुणा चिल्ला उठी उसने किनारे पे खड़े बेटे को पुकारा
अरुणा : अर्जुन कूद अर्जुन (धीरे धीरे नाव पानी पे बहती हुई जैसे किनारे से दूर होती जा रही थी और अरुणा का दिल धक धक करने लगा उसका बेटा अब भी किनारे पे ही मज़ूद था)
अर्जुन जानता था अगर उन्हें मार ना दिया गया तो वो लोग भागके गान वालो को उनके नहेर से भागने का राज फ़ाश कर देंगे....अर्जुन के पास उस वक़्त कम था....वो बिना पलके झपकाए अपनी तरफ आते उस हमले से ठीक सर झुकाए बाल बाल बचा...लाठी की आवाज़ जैसे हवा में
घूमी हमला नाकाम रहा...अर्जुन ने अपने छुरे को एक ही बार में उसकी गर्दन के आर पार कर दिया....खाकच्छ आअहह......वो जो भी था
वहीं गिरके दम तोड़ चुका था.....अर्जुन पे जैसे ही उन्होने हावी होना शुरू कर दिया....अर्जुन पानी में कूद पड़ा...
अरुणा की नाव जैसे बेटे से दूर होती जा रही थी...वो तैरना जानती नही थी उपर से उसका बेटा भी बहती नहर के साथ बहने लगा....उसने मज़बूती से नाव की सिरे को पकड़ा माँ हाथ जैसे आगे बढ़ती तो तो पीछे से उसके बेटे पे किसी ने आहट भरा हमला किया....अर्जुन की
पकड़ इससे ढीली हुई और उसने तुरंत अपने दूसरे हाथ के छुरे को उसके चेहरे पे जैसे घोपप दिया...अरुणा ने नज़रें फेर ली अर्जुन ने उसके चेहरे से छुरे को बाहर जैसे ही खीचा उस आदमी की लाश पानी में लाहुलुहान बहती हुई आगे चली गयी....