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Incest मेरा परिवार और मेरी वासना

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अपडेट 64

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लेकिन जो भी हो शुरुआत तो हो चुकी थी और बहुत

जल्द मंजू वापस अपनी नॉर्मल लाइफ मे आ जाने वाली थी

यही सब सोचते हुए मैं खाने के लिए नीचे

आ गया...............

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अब आगे......

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मेरे पहुचने तक सभी लोग डाइनिंग टेबल पर बैठ चुके थे मम्मी पापा आमने सामने बैठे थे और डॉली साइड वाली चेयर पर बैठी थी लेकिन मंजू अभी वहाँ नही थी तो मैं डॉली के सामने वाली चेयर पर बैठ गया क्योंकि डॉली के साइड वाली चेयर पर तो मंजू ने ही बैठना था लेकिन मुझे उम्मीद नही थी की मेरे होते वो खाना खाने आएगी क्योंकि वो मुझे अवाय्ड करती ही थी और शायद मेरे रूम मे भी वो सिर्फ़ इसलिए आई थी ताकि पापा मम्मी दुखी ना हो

मैं यही सब सोचते रहा था की मम्मी खाना परोस चुकी

"चलो खाना स्टार्ट करो, लेकिन ये मंजू कहाँ रह गई, मंजूऊुुुुउउ....चल बेटा खाना लग गया है" मम्मी खाना परोसते ही बोली

"आई बुआ जी......." मंजू ने जवाब दिया और कुछ पल बाद ही वो भी वहाँ आ गई और डॉली के साइड वाली कुर्सी की तरफ बढ़ी लेकिन पता नही क्या हुआ की उसने पलट कर मेरी तरफ देखा और फिर मुस्कुराते हुए मेरे साइड मे आकर बैठ गई उसे मेरे साइड मे बैठते और मुस्कुराते हुए देख डॉली की आँखे हैरत से खुली रह गई उसे समझ नही आया की ये क्या हुआ शायद उसे पता नही था की अभी मुझे बुलाने मंजू मेरे रूम मे भी गई थी और हैरत मे तो मैं भी था क्योंकि जो मैं सोच रहा था हुआ बिल्कुल उससे उल्टा था पहले तो मंजू मेरी मौजूदगी मे खाना खाने भी आई और उपर से मेरे साइड मे भी बैठ गई थी

खैर खाना शुरू हुआ और फिर इधर उधर की बाते भी शुरू हो गई आज मंजू भी बातों मे बढ़ चढ़ के हिस्सा ले रही थी जबकि पहले वो सिर्फ़ हूँ हाँ मे ही जवाब देती थी मुझे समझ नही आरहा था की कुछ घंटो मे ही कोई इतना कैसे बदल सकता है तभी बात आकर पढ़ाई पर ठहर गई तो पापा ने मुझसे पूछा की मैं किस कॉलेज मे अड्मिशन लेना चाहता हूँ तो मैने बोल दिया की दीदी का कॉलेज ही ठीक रहेगा तो पापा ने हाँ मे सिर हिला दिया

"लेकिन अब तो कॉलेज शुरू होने मे कुछ ही दिन रह गये है और अब निशा भी वहाँ नही होगी तो अड्मिशन जल्दी ही करवा लो" पापा बोले

"पापा आजकल अड्मिशन ऑनलाइन हो रहे है इसलिए जैसे ही डेट पता चलेगी मैं अड्मिशन करवा लूँगा" मैं बोला और सोचने लगा की निशा दीदी भले ही ना होगी लेकिन निशा और टीना तो होगी ही ना जो मेरे लंबे और मोटे लंड को दीवानी बन चुकी थी

"वैसे फिर भी कितने दिन लग जाएँगे अड्मिशन स्टार्ट होने मे" पापा ने पूछा

"ये ही कोई 15 दिन" मैने जवाब दिया

"और डॉली का तो सवाल ही नही उठता क्योंकि अभी तो इसका लास्ट एअर है स्कूल का तो ये तो उसी स्कूल मे रहेगी, वैसे डॉली कब से शुरू हो रहा है स्कूल" पापा बोले

"अभी 15 दिन तो और लगेंगे ही" डॉली ने बताया

"चलो ठीक है वैसे मैं ये कहना चाहता था की अगर तुम लोग कहीं घुमने जाना चाहते हो तो अभी घूम आओ वरना स्टडी टाइम मे मैं कहीं भी जाने की इजाज़त नही दूँगा" पापा बोले
 
"वाउ......थॅंक्स पापा, मैं भी सोच रही थी की किसी नयी जगह घुमाने जाउ क्योंकि इस बार छुट्टियों मे कहीं भी जाने नही मिला" डॉली बोली

"तुम क्या कहते ही सोनू" पापा ने पूछा

अब मेरी समझ मे नही आया की मैं क्या कहूँ घुमने तो मैं भी जाना चाहता था लेकिन अब जब मंजू लाइन पर आ रही थी तो उसे ऐसे छोड़ कर जाना भी ठीक नही था इसलिए मैं बोला "पापा मेरी अभी कोई खास इच्छा नही है कहीं जाने की"

"अरे........कैसी बात कर रहा है भाई ऐसा गोलडन चान्स मिल रहा है और तू मना कर रहा है और सोच ले पापा कह चुके है की बाद मे इजाज़त नही मिलेगी" डॉली झट से बोली शायद वो ये मौका नही खोना चाहती थी

"हाँ बेटा चले ही जाओ तुम लोग कहीं घुमाने इसी बहाने मंजू भी तुम लोगो के साथ घूम लेगी तो अच्छा फील करेगी, क्यों मंजू जाओगी ना घुमाने" मम्मी बोली तो सबने मंजू की तरफ देखा और डॉली ने तो उसे इशारा भी किया की प्लीज़ हाँ कह दे

"मुझे कोई ऐतराज नही है बुआ जी" मंजू बोली

"तो फिर बताओ की तुम लोग कहाँ जाना चाहते हो मैं जल्द ही इंतज़ाम कर देता हूँ" पापा मुझसे बोले

"अब मैं क्या बोलू आप डॉली से ही पूछ लीजिए क्योंकि यही उछल रही है घुमाने जाने के लिए" मैं बोला और अंदर ही अंदर बहुत खुश भी हो रहा था की अब ज़्यादा टाइम मेला मंजू के साथ रहने को

"बताओ डॉली कहाँ जाना चाहोगी" पापा बोले

पापा की बात सुनकर डॉली कुछ देर सोचती रही फिर चुटकी बजाते हुए झट से बोली "गोआ"

"क्या........बेटा गोआ कुछ ज़्यादा ही दूर नही हो रहा है" पापा बोले

"लेकिन पापा मेरी वहीं जाने की इच्छा है मेरी कुछ फ्रेंड्स गई थी वहाँ और बहुत तारीफ कर रही थी गोआ की" डॉली मुँह बनाते हुए बोली

"लेकिन बेटा......" पापा ने कहना चाहा

"अरे छोड़ो जी लेकिन वेकीन और दूर को जब इनकी यही इच्छा है तो जाने दो और वैसे भी अब ये लोग कोई बच्चे तो है नही और ना ही अकेले जा रहे है तीन लोग है कोई परेशानी नही होगी और आप तो बस इनके जाने का इंतज़ाम कर दो बस" तभी मम्मी बोली

और मम्मी के कहने के बाद अब पापा का कुछ कहना तो बनता ही नही था उन्होने कंधे उचकाये और हाथ धोकर टेबल से उठ गये क्योंकि उनका खाना ख़तम हो चुका था लेकिन हम लोग खा ही रहे थे

"ओके बॉस जैसी आपकी मर्ज़ी" पापा बोले और बाहर निकल गये

"क्यों डॉली अब तो खुश है ना, और सोनू तू ये क्या चिड़िया की तरह खाना खा रहा है अभी तक तेरी 2 चपाती भी ख़तम नही हुई" मम्मी बोली

"नही मम्मी मैं 3 खा चुका हूँ......." मैं और

कुछ कहता इसके पहले ही मंजू ने एक चपाती मेरी थाली मे रख दी

"लेकिन........" मैने कहना चाहा तो मंजू ने एक चपाती और डाल दी

"शाबास बेटा ये हुई ना बात, चल सोनू अब जल्दी से खा ले"ये सब देख कर मम्मी बोली

"हाँ........नही तो गोआ का टूर कॅन्सल, क्यों बुआ जी"

मंजू शरारती मुस्कान के साथ बोली

"एकदम सही कहा" मम्मी ने उसकी हाँ मे हाँ मिलाई

"अब तो खाना ही पड़ेगा" मैने मंजू को मुस्कुरा कर देखते हुए कहा और खाना खाने लगा तभी मेरी नज़र डॉली पर पड़ी जो बड़ी हैरत के साथ ये सब देख रही थी और उसके चेहरे पर कुछ जलन के भाव भी थे मैं समझ गया की ये सब मंजू के मेरे साथ खुलने की वजह से हो रहा है लेकिन मेरे लिए ये अच्छा ही था कम से कम इसी बहाने ही सही डॉली मेरे नीचे तो आजाए और यही सब सोचते हुए मैं खाने मे बिज़ी हो गया.................
 
अपडेट 65 आ

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तभी मेरी नज़र डॉली पर पड़ी जो बड़ी हैरत के साथ ये सब देख रही थी और उसके चेहरे पर कुछ जलन के भाव भी थे मैं समझ गया की ये सब मंजू के मेरे साथ खुलने की वजह से हो रहा है लेकिन मेरे लिए ये अच्छा ही था कम से कम इसी बहाने ही सही डॉली मेरे नीचे तो आजाए और यही सब सोचते हुए मैं खाने मे बिज़ी हो गया................. .

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अब आगे..

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खाना खा कर मैं हॉल मे बैठ कर टीवी देखने लगा लेकिन अभी तक मेरे दिमाग़ मे मंजू ही घूम रही थी और मैं सोच रहा था की एकाएक ही उसमे इतना बदलाव कैसे आ गया खैर जो भी हुआ था वो मेरे लिए ही अच्छा था क्योंकि अब मंजू के चेहरे से गुम हटने लगा था और मुस्कुराहट वापस लौटने लगी थी वहीं मंजू के मेरे साथ खुलने से डॉली भी अब थोड़ी जलन महसूस करने लगी थी और मुझे लग रहा था की इसी जलन के कारण जल्द ही वो मेरे नीचे होगी

टीवी देखते और यही सब सोचते हुए अभी मुझे लगभग आधा घंटा हुआ था की डॉली भी वहाँ आकर बैठ गई और बड़े ध्यान से मुझे देखने लगी उसके ऐसे घूर्ने की वजह से मैने उसकी तरफ देखा तब भी उसने मुझे घूर्ना नही छोड़ा

"ऐसे क्यों देख रही है, क्या आँखो से ही भसम करने का इरादा है क्या" मैं उसके घूर्ने से परेशान होकर बोला लेकिन डॉली चुप ही रही और वैसे ही घुरती रही

"अरे बता ना बात क्या है क्यों ऐसे घूर रही है" मैं झल्लाते हुए बोला

"ज़्यादा बड़ी बात नही है मैं तो बस इतना ही समझ नही पा रही हूँ की सूरज आज पश्चिम से कैसे निकल गया" आख़िर डॉली मुझे टोन्ट मारते हुए तल्ख़ लहजे मे बोली

"क्या मतलब? मैं कुछ समझा नही" मैं बोला जबकि मैं समझ चुका था की वो ये सब मंजू के बदले हुए व्यवहार की वजह से कह रही है

"अब इतना भी नासमझ मत बन के दिखा तू जानता है मैं क्या कहना चाहती हूँ" वो फिर तीखे लहजे मे बोली

"यार जो कहना है सीधे सीधे बोल यू घुमा फिरा कर बात करने से क्या होगा" मैं बोला

"अच्छा.......तो फिर बता की एक रात मे ही मंजू इतना कैसे बदल गई जो लड़की कल तक तेरा चेहरा भी देखना नही चाहती थी वो आज तेरे साइड मे बैठ कर जबरन तुझे खाना परोस रही थी एकदम से ऐसा कौन सा जादू हो गया बता मुझे" डॉली बोली

"देख यार बात तो तू सही कह रही है मैं भी अभी यही सब सोच रहा था और कसम से मैं भी अभी तक नही समझ पाया की वो एकाएक ही इतना कैसे बदल गई, हाँ लेकिन आज नाश्ते के बाद एक ऐसी बात हुई थी जिस पर मुझे भी यकीन करना मुश्किल हो गया था" मैं बोला

"कौन सी बात, ज़रा खुल कर बता" अब वो ध्यान से सुनते हुए बोली

"वो क्या है ना की जब पापा मम्मी ने नाश्ते के टाइम मुझे कहा था की आजकल मैं बहुत अकेले रहने लगा हूँ जिससे वो दोनो दुखी है तो वो सब सुनकर ही मंजू मे ये सब बदलाव आया और फिर इस सब का ज़िम्मेदार अपने आपको ही मान कर वो खाने के लिए बुलाने के बहाने मेरे रूम मे आई और मुझे ये सब बताया" मैने बताया
 
"क्य्ाआअ.. .....वो तेरे रूम मे भी गई थी" डॉली ने पूछा

"हाँ......." मैं बोला

अब मेरी बात सुनकर डॉली कुछ सोचने लगी और फिर बोली "तो......अब क्या इरादा है तेरा"

"किस बारे मे" मैने पूछा

"मंजू के बारे मे ही पूछ रही हूँ मैं" डॉली बोली

"इरादा तो नेक ही है, जैसा मैं चाहता था की वो हँसे, मुस्कुराए और वापस नॉर्मल लाइफ जीने लगे वैसा शायद अब जल्दी हो ही जाएगा" मैं बोला

"और उसके बाद......." डॉली ने पूछा

"उसके बाद क्या" मैं बोला

"अरे जब सब कुछ नॉर्मल हो जाएगा तब क्या करेगा तू उसके साथ" डॉली बोली

"जब सब नॉर्मल हो जाएगा तब की तब देखेंगे और वैसे भी तब जो करना है वो ही करेगी मैं भला क्या करूँगा" मैं बोला

"क्या बाते हो रही है भाई बहन मे" तभी मंजू हॉल मे आकर डॉली के साइड मे बैठते हुए बोली और उसकी सुरीली आवाज़ सुनते ही मेरा दिल खुश हो गया

"कुछ नही ऐसे ही बाते कर रहे थे लेकिन मंजू तू ठीक तो है ना ये आज अचानक ही तुझे क्या हो गया है कल तक तू जिसे देखना नही चाहती थी आज उसी को बुलाने उसके रूम तक गई और उसे खाना भी परोसा एकाएक ही ऐसा क्या हुआ जो तू इतना बदल गई" डॉली ने एक ही सांस मे उससे ये सवाल कर डाला

डॉली की बात सुनकर मंजू कुछ देर चुप रही फिर बोली "मुझे पता था डॉली की तू ये सब ज़रूर पूछेगी तो सुन एक रात मे ही ये बदलाव मुझमे नही आया इसकी शुरुआत उस रात से हुई थी जब मैने सोनू को मेरे रूम से जाने के लिए कह दिया था और फिर तुझसे मेरी बहस भी हुई थी उसके बाद जब मैने इस बात पर ठंडे दिमाग़ से सोचा तो मुझे यही लगा की जैसा बिहेवियर मैं सोनू के साथ कब रही हूँ वो ग़लत है क्योंकि इसकी सिर्फ़ शकल ही मिलती है उस दरिंदे से और इसमे सोनू का कोई दोष नही है और फिर मैं अपने बिहेवियर के लिए सोनू से माफी माँगने वाली थी लेकिन तब तक सोनू एकांत मे रहने लगा और मेरी भी हिम्मत नही हुई उसके पास जाने की लेकिन आज जब तुम्हारे पापा मम्मी ने सोनू के इस अकेलेपन से दुखी होने की बात नही तो मुझे बहुत बुरा लगा क्योंकि इस सब की ज़िम्मेदार सिर्फ़ मैं ही थी और फिर मैने सोच लिया की मेरे साथ जो भी हुआ उसमे सिर्फ़ मेरी किस्मत का दोष था और मैं अपनी बदनसीबी मे तुम्हारी फॅमिली को शामिल करू और वैसे भी मैं अपने पास्ट के लिए कब तक रोती रहूंगी इसलिए मैने फ़ैसाला कर लिया की अब मुझे वापस नॉर्मल होना ही पड़ेगा वरना मेरी आगे की लाइफ भी खराब हो जाएगी और ऐसा करने के लिए मुझे सोनू के साथ रहना होगा क्योंकि जिस दिन इसका चेहरा मुझे अच्छा लगने लगेगा उस दिन पक्का मैं नॉर्मल हो जाउन्गी" मंजू ने बताया और मैं और डॉली उसे देखते रहे...............
 
अपडेट 65 ब

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मंजू ने बताया और मैं और डॉली उसे देखते रहे...............

"लेकिन सोनू का चेहरा जब बार बार उस गुंडे की याद दिलाएगा तब तू क्या करेगी" डॉली ने पूछा

"इसीलिए तो अब मैं ज़्यादा से ज़्यादा सोनू के साथ रहना चाहती हूँ ताकि मुझे इसके चेहरे की आदत पड़ जाए वरना अब जब तुम लोगो के साथ ही रहना है मैं कब तक इससे नज़रे चुराती रहूंगी" मंजू बोली

"बात तो तेरी सही है........." डॉली गर्दन हिलाते हुए

बोली और फिर कुछ देर सभी चुप रहे

"यार तुम दोनो ऐसे चुप क्यों हो गये....... कुछ बाते करो" मंजू मेरी तरफ देख कर बोली

"हूंम्म्मम........ लेकिन क्या बात करे" मैं बोला

"उउन्न्ञणणन्......चलो गोआ के बारे मे ही बताओ जहाँ हम घुमाने जाने वाले है, क्या तुम दोनो मे से कोई गया है कभी वहाँ" मंजू बोली

"नही हम दोनो मे से कोई भी वहाँ नही गया है लेकिन वहाँ के बारे मे सुना बहुत है की बहुत ही रंगीली जगह है गोआ" मैं बोला

"रंगीली मतलब" मंजू ने पूछा

"मतलब..........यार अब कैसे बताऊ तुम्हे, यार डॉली तू ही बता ना इसे आख़िर गोआ जाने का भी तो तूने ही प्लान किया है" मैं बोला

डॉली मेरे तरफ देख कर मुस्कुराइ वो मेरे मन की बात समझ गई थी और बोली "रंगीली से इसका मतलब ये की वहाँ बहुत से बीच है जहाँ विदेशी लड़किया सिर्फ़ बिकिनी या फिर टू पीस मे ही होती है"

"आओउुउउ.........क्या कह रही है तू डॉली क्या सच मे सोनू तुम्हे लड़कियो को वैसे देखना अच्छा लगता है और डॉली अभी सोनू ने तो ऐसा कुछ भी नही कहा था फिर तू कैसे समझ गई इसके मन की बात" मंजू अपने मुँह पर हाथ रखते हुए बोली

"वो...... वो..... अब यार इतनी अंडरस्टॅंडिंग तो है हम दोनो के बीच के हम एक दूसरे के मन की बात समझ जाते है" डॉली हकलाते हुए बोली

"हाँ..... हाँ समझ रही हूँ मैं लेकिन छोड़ो वो बात बाद मे पहले मुझे गोआ की कुछ पिक्स दिखाओ ताकि मुझे भी पता चले की वो कैसी जगह है" मंजू बोली
 
"लेकिन हमारे पास वहाँ की कोई पिक नही है" डॉली बोली "है........ रूको मैं अभी दिखता हूँ" कह कर मैने अपना मोबाइल निकाल लिया और गूगले पर गोआ लिख कर सर्च किया तो बहुत सी साइट स्क्रीन पर आ गई जिसमे से मैने एक को ओपन किया तो उसमे गोआ के बीच की बहुत सी पिक्स थी जिन्हे मैं मंजू को दिखाने लगा लेकिन इसके लिए उसे मुझसे चिपक कर बैठना पड़ा वो मेरे लेफ्ट साइड मे बैठी थी जिससे उसका राइट बूब मेरी लेफ्ट बाँह से टकरा रहा था और उसकी जाँघ भी मेरी जाँघ से लगी हुई थी उसके बदन से बहुत मादक खुश्बू आ रही थी जिसे मैं अच्छे से महसूस कर रहा था जबकि अब तक डॉली भी मेरे राइट साइड मे आकर बैठ गई थी

तभी कुछ ऐसी पिक हमे दिखाई दी जिसे देखते ही मंजू ने हैरत से अपना मुँह पर हाथ रख लिया

"ओह्ह माइ गॉड...........क्या हमारे देश मे भी ऐसा होता है"

मंजू उन पिक्स को देख कर बोली जिनमे बहुत से माले और्र फीमेल अधनंगी हालत मे समुंदर के किनारे लेटे हुए थे

"हाँ लेकिन ये सभी लोग विदेशी ही होते है ऐसी हालत मे इंडियन्स बहुत कम होते है, और ये तो बस शुरुआत है आगे तुम्हे और भी बोल्ड फोटोस देखने को मिल सकती है" मैं बोला और नेक्स्ट पेज ओपन किया जहाँ पहली ही फोटो एक बिकिनी गर्ल की थी जिसमे उसका भरा पूरा पिच्छवाड़ा दिख रहा था

"हे भगवान ये तो सच मे बिकिनी मे है और इस तरह सरेआम बीच पर घूम रही है" मंजू बोली लेकिन अभी वो कुछ और कह पति इसके पहले ही एक और फोटो सामने आ गई जो पहले से भी बोल्ड थी

इस फोटो मे भी एक विदेशी फीमेल सिर्फ़ ब्रा और पैंटी मे थी और उसकी पैंटी उसकी गान्ड की दरार मे घुसी हुई थी जिससे उसके भारी चूतड़ सॉफ नज़र आरहे थे अब तो जैसे मंजू हैरत से पागल ही हो गई थी

"अरे बाप रे........नही ये फोटो कम से कम इंडिया की तो नही हो सकती ये ज़रूर किसी फॉरिन कंट्री की है" मंजू हैरत से बोली

"कैसी पागल जैसी बात कर रही है यार तू जब साइट पर सॉफ लिखा है की सारी फोटो गोआ की है तब भी तू यकीन नही कर रही है" डॉली बोली लेकिन मंजू अभी भी ना मे गर्दन हिला रही थी

"ओके..........ठीक है मत करो यकीन क्योंकि वैसे भी कुछ दिनों बाद हम गोआ मे ही होंगे तब अपनी आँखो से देख कर यकीन कर लेना" मैं बोला और फिर मैने ब्राउज़र बंद कर दिया

"अरे और दिखाओ ना मज़ा आरहा था" मंजू बोली

"क्या देखने मे मज़ा आरहा था वो अधनंगी पिक्स" डॉली तपाक से बोली

"वो......वो.. ..." डॉली की बात सुनकर मंजू हकला गई

उससे कुछ बोलते ही नही बना

"क्या वो वो कर रही है, ला सोनू तेरा मोबाइल मुझे दे और हाँ वो पिक्स है ना अभी इसमे" डॉली बोली

"लेकिन....." मैने कहना चाहा क्योंकि इन सब मे मंजू को शामिल करने की मेरी इच्छा नही थी

"क्या लेकिन वेकीन कर रहा है, मैं अच्छे से समझ गई हूँ की ये मेरे टाइप की ही है और इसका टेस्ट भी मेरी तरह ही है तो अब जल्दी से मोबाइल दे और यहाँ से जा या फिर रुक हम दोनो ही मेरे रूम मे चली जाती है, क्यों मंजू देखनी है ना वैसी ही वाली या फिर उससे भी आगे की" डॉली मेरी बात काट कर बोली

लेकिन मंजू कुछ समझ नही पा रही थी की ये सब क्या हो रहा है तब तक मैं मोबाइल डॉली को दे चुका था

"अब अगर तेरी मर्ज़ी है तो मेरे रूम मे आजा मैं तो चली" कहते हुए डॉली उठ कर अपने रूम की तरफ बढ़ गई और मंजू बड़ी बड़ी आँखो से मुझे देखने लगी तो मैने कंधे उचका दिए और उठ कर बिना कुछ बोले अपने रूम की तरफ बढ़ गया मंजू अभी भी असमंजस मे पड़ी वहीं खड़ी थी लेकिन जैसे ही मैने लास्ट सीधी चढ़ कर नीचे देखा तो मंजू धीमे कदमो से डॉली के रूम की तरफ बढ़ने लगी थी ये देख कर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई और मैं अपने रूम मे चला गया........................
 
अपडेट 66

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मंजू अभी भी असमंजस मे पड़ी वहीं खड़ी थी

लेकिन जैसे ही मैने लास्ट सीधी चढ़ कर नीचे देखा

तो मंजू धीमे कदमो से डॉली के रूम की तरफ बढ़ने लगी थी ये देख कर मेरे चेहरे पर

मुस्कान आ गई और मैं अपने रूम मे चला गया........................

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अब आगे.......

(उधर डॉली के रूम मे)

डॉली अपने रूम मे आ चुकी थी और बेड पर बैठ कर मोबाइल मे नंगी पिक्स वाला फोल्डर खोल लिया था वो जानती थी की मंजू ज़रूर आएगी और हुआ भी ऐसा ही डॉली के आने के दो मिनिट बाद ही मंजू भी वहाँ आ गई

"मुझे पता था की तू ज़रूर आएगी, आ यहाँ बैठ जा" मंजू को आई देख डॉली बेड पर हाथ मारते हुए बोली

मंजू चुपचाप डॉली के साइड मे बैठ गई और मोबाइल की स्क्रीन को देखने लगी लेकिन अभी वहाँ कोई फोटो नही थी

"बता कैसी फोटोस देखना चाहेगी तू" डॉली ने पूछा

"कैसी फोटो मतलब......" मंजू हिचकिचाते हुए बोली

"मतलब की क्या नंगी लड़कियो को फोटो देखना है या फिर नंगे लड़को के लंड की देखना है या चुदाई की फोटो देखना है या फिर सीधे चुदाई की वीडियो ही देखना है" डॉली ने पूछा

डॉली के मुँह से ऐसे नंगे वर्ड सुनकर मंजू शॉक्ड रह गई उसे उम्मीद नही थी की डॉली ऐसे शब्दो मे भी बात कर सकती है और वो हैरानी से डॉली को देखने लगी

"ऐसे क्या देख रही है क्या कभी ऐसे वर्ड सुने नही है क्या" डॉली मंजू के मन की बात समझते हुए बोली

"सुने है लेकिन आज तक कभी भी तेरे मुँह से नही सुने है ना इसलिए कुछ अटपटा लग रहा है" मंजू अब नॉर्मल होते हुए बोली

"चल ठीक है अब बता कैसी फोटो देखनी है" डॉली ने पूछा

"वैसे तो सभी तरह की देखनी है लेकिन अगर ब्लो जॉब वाली पिक्स हो तो मज़ा ही आजाएगा" मंजू शरमाते हुए बोली

"ये हुई ना बात मुझे पता था की तेरा टेस्ट बिल्कुल मेरे ही जैसा होगा" डॉली खुशी से बोली

"मतलब......" मंजू ने पूछा

"मतलब ये की मुझे भी वैसी पिक्स बहुत अच्छी लगती है और पिक्स ही क्या मुझे तो लंड चूसना भी बहुत अच्छा लगता है" डॉली बोली और पिक्स ओपन करने लगी

"इसका मतलब तू लंड चूस भी चुकी है" मंजू एक बार फिर हैरानी से बोली

"हाँ लेकिन अब ये मत पूछना की किसका, ले आ गई हम दोनो की फेवोवरिट पिक्स" डॉली बोली और मंजू को पिक्स दिखाने लगी

"यार डॉली एक बात पुछु बुरा तो नही मानेगी"

मंजू पिक्स देखते हुए बोली

"नही मानूँगी पूछ ले जो पूछना है" डॉली पिक्स चेंज करते हुए बोली

"यार सोनू तेरा भाई है फिर भी तुम दोनो भाई बहन ये सब कैसे शेर कर लेते हो" मंजू ने झिझकते हुए पूछा

"मुझे पता था की तू यही सब पूछेगी तो सुन हम दोनो ही भाई बहन है लेकिन सोनू के 7 साल हम लोगो से दूर रहने के कारण हमारे अंदर भाई बहन वाली फीलिंग्स आई ही नही और फिर सोनू के वापस लौटने के बाद कुछ ऐसी घटनाए हुई जिनकी वजह से ये सब हो गया" कहते हुए डॉली ने मंजू को बताया की सोनू के वापस लौटने पर उन दोनो के बीच क्या क्या हुआ था लेकिन सिर्फ़ मोबाइल मे फोटो देखने तक ही बताया उसके बाद जो हुआ वो नही बताया था

"ओह्ह्ह्ह.." सारी बात सुनने के बाद मंजू के मुँह से बस इतना ही निकला और फिर वो दोनो फोटो देखने मे बिज़ी हो गयी फोटो के साथ ही उन दोनो ने ब्लो जॉब के कुछ वीडियोस भी देखे और जब ये सब देख कर दोनो का मन भर गया तो डॉली ने मोबाइल मे वो फोल्डर क्लोज़ कर दिया
 
"बता कैसा लगा मेरी चूत तो पानी पानी हो गई है ये सब देख कर" डॉली ने पूछा

"मेरा भी वही हाल है यार लगता है अब पैंटी चेंज करनी ही पड़ेगी" मंजू मुस्कुराते हुए बोली

"हाँ यार........लेकिन साली इन फोटो वाली लड़कियो को भी क्या किस्मत है एक से एक लंड चूसने को मिलते है इन्हे वैसे क्या कभी तूने किया है ये सब" डॉली ने मंजू से पूछा

"नही यार मैं ये सब नही कर पाई अभी तक वैसे मेरा एक बाय्फ्रेंड था लेकिन मैं अभी उसके साथ थोड़ा ही खुल पाई थी की पापा मम्मी का आक्सिडेंट हो गया और फिर आगे मेरे साथ ही कुछ भी हुआ उस वजह से मैं उससे कभी मिल ही नही पाई" मंजू खोई खोई सी बोली

"चल छोड़ यार वो किस्सा भले ही तूने लंड नही चूसा लेकिन असली मे देखा तो होगा ना" डॉली ने पूछा

"नही यार देखा भी नही है सिर्फ़ फोटोस मे ही देखा है या फिर बच्चो का देखा है" मंजू बोली

"अरे बच्चो की नुणु होती है लंड नही वैसे क्या तू देखना चाहेगी असली लंड" डॉली ने पूछा

"क्या तू मुझे दिखा सकती है" मंजू ने पूछा

"हाँ. ......दिखा सकती हूँ तभी तो पूछ रही हूँ" डॉली बोली

"किसका.. ....." मंजू ने पूछा

"वो बाद मे बतौँगी पहले तू ये बता की क्या तुझे देखना है" डॉली बोली

"हा......हाँ" मंजू बोली

"तो फिर ठीक है कल सुबह ही तुझे असली लंड महाराज के दर्शन करवा देती हूँ" डॉली बोली

"लेकिन किसका......." मंजू ने फिर पूछा

"वो तुझे जब देखेगी तब पता चल जाएगा" डॉली बोली

"कहीं सोनू का तो नही........" मंजू ने पूछा

"सही पकड़े है मंजू जी......लेकिन कैसे" डॉली मुस्कुराते हुए बोली

"अब जब तू सुबह मुझे दिखाएगी तो जाहिर है की घर मे ही दिखाएगी और इस घर मे दो ही लंड है एक सोनू का और दूसरा अंकल का और मुझे उम्मीद नही है की तूने कभी भी अंकल का देखा होगा इसीलिए कहा" मंजू भी मुस्कुराते हुए बोली उसके भी नंगे वर्ड बोलना शुरू कर दिया था

"बिल्कुल सही कहा" डॉली बोली

"लेकिन तू मुझे सोनू का लंड दिखाएगी कैसे" मंजू ने पूछा

"दरअसल बात ये है की हमारे सोनू जी की नंगे सोने की आदत है और वो अक्सर डोर बंद करना भूल जाते है इसी चक्कर मे मैं कई बार जब सुबह उसके रूम मे गई तो लगभग हर बार मुझे उसका लंड दिखाई पड़ा" डॉली झूठ बोलते हुए बोली क्योंकि सोनू कभी नंगा नही सोता था ये तो प्लान था डॉली का मंजू को अपने ग्रूप मे शामिल करने के लिए

"और अगर सुबह सोनू के रूम का डोर बंद हुआ तो" मंजू ने पूछा

"तो फिर तेरी बाद लक फिर परसो ट्राइ करना पड़ेगा वैसे मुझे उम्मीद नही है की ऐसा कुछ होगा डोर ढालका हुआ ही होगा" डॉली बोली

"ठीक है फिर......." मंजू बोली

"तो मंजू जी अब आप अपने रूम मे जाइए क्योंकि अब मुझे अपनी मुनिया को ठंडा करना है और शायद आपको भी ऐसी ही इच्छा हो रही होगी" डॉली अपनी चूत को तरफ इशारा करते हुए बोली

मंजू मुस्कुराते हुए खड़ी हो गई और डॉली के रूम से निकलते हुए उसको आँख मारते हुए बोली "तूने बिल्कुल सही कहा था हम दोनो का टेस्ट एक सा ही है"

अब मंजू डॉली के रूम से जा चुकी थी और डॉली अपनी चूत को सहलाते हुए सोच रही थी की उसे आगे क्या करना है और कैसे करना है लेकिन सबसे पहले उसे सोनू को तैयार करना था की वो रात को नंगा सोते और उसे उम्मीद नही थी की सोनू मंजू के सामने नंगा होने के लिए आसानी से तैयार हो जाएगा...............
 
अपडेट 67

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अब मंजू डॉली के रूम से जा चुकी थी और डॉली अपनी चूत को सहलाते हुए सोच रही थी की उसे आगे क्या करना है और कैसे करना है लेकिन सबसे पहले उसे सोनू को तैयार करना था की वो रात को नंगा सोते और उसे उम्मीद नही थी की सोनू मंजू के सामने नंगा होने के लिए आसानी से तैयार हो जाएगा.................

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अब आगे.......

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इधर मैं अपने रूम मे आ गया था दोपहर के 2 बाज चुके थे और गर्मी अपने पूरे शबाब पर थी मैने एसी ओंन किया और बेड पर लेट गया मेरे दिमाग़ मे यही चल रहा था की डॉली को पिक्स मंजू को दिखाने वाली है क्या वो पिक्स मंजू को भी पसंद आएगी और क्या वो भी डॉली की तरह ही सेक्स की शोकीन होगी अगर ऐसा होता तो ये मेरे लिए ही अच्छा होता लेकिन मैं मंजू के साथ ये सब नही करना चाहता था क्योंकि अभी तक मैने उसे इस नज़र से नही देखा था मेरे मन मे उसके लिए प्यार इज़्ज़त और सिंपती के भाव थे ना की सेक्स के लेकिन मंजू का डॉली के पीछे उन पिक्स को देखने के लिए जाना यही साबित करता था की वो भी सेक्स मे इंट्रेस्टेड है लेकिन हो सकता था की मैं ग़लत भी हूँ क्योंकि वो सिर्फ़ जिज्सा की वजह से की कैसी पिक्स है देखने के लिए गई हो खैर जो भी हो मैने सोच लिया था की किसी भी कीमत पर मुझे मंजू को उस खेल मे शामिल नही करना था और इन्ही सब सोच विचार और गर्मी की आलसी की वजह से मुझे कब नींद लग गई पता नही चला

पता नही अभी मैं कितनी देर और सोता की मुझे ऐसा लगा जैसे कोई मुझे जगा रही है

मैने आँखे खोल कर देखा तो वो डॉली थी

"कब तक सोएगा भाई चल अब उठ जा शाम होने को आई है" डॉली बोली

मैने घड़ी की तरफ देखा तो 5 बाज चुके थे मैं भी उठ कर बैठ गया और डॉली बेड पर आराम से लेट गई

अभी उसने एक ब्लू टॉप और लाइट ब्लू कलर की कॅप्री पहनी हुई थी जो सिर्फ़ उसके कुल्हो तक ही थी नीचे उसकी गोरी चिकनी भारी भारी जांघें और टाँगे एकदम नंगी थी और इस वक्त वो बहुत ज़्यादा सेक्सी लग रही थी और मेरी नज़रे उसके लगातार घूर रही थी

"ऐसे क्या देख रहा है क्या आज तक तूने कभी मुझे ऐसे नही देखा है, बल्कि तू तो मुझे पूरी नंगी भी देख चुका है" डॉली बोली

"वो बात नही है तू है ही ऐसी की जितना भी देखलो मन नही भरता" मैं बोला

मेरी बात सुनकर वो हँसी और बोली "तू कहे तो हो पहना है वो भी उतार देती हूँ फिर और अच्छे से देख लेना"
 
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