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Incest मेरी आत्मा मेरे पिता के शरीर में घुसी

सुबह जब साक्षी की नींद खुलती है तो वो देखती है वीर एक तकिए को हग कर के लेटा हुआ है

साक्षी - हाए मेरे बंदर रात भर तड़पते रहे बस

ही ही ही ही ही

फिर वीर भी उठ जाता हैं और गुस्से मे साक्षी को देखता है

साक्षी की तरफ आता है

साक्षी - अरे क्या हुआ मैने क्या किया

वीर - रुको तुमको बताता हूं मैं

साक्षी उठ कर भागने लगती है , और उसके पीछे ही वीर भागता है

साक्षी - अरे सुनो तो

वीर - क्या सुनो हा

तभी साक्षी बेड के पास रुक जाती है और वीर उसके ऊपर ही गिर पड़ता है

वीर पहली बार अपनी मां के ऊपर लेटा था और उसके चूचे उसके सीने में फील हो रहे थे

और ऐसा होते ही वीर की सास बहुत तेजी से ऊपर नीचे होने लगती है और वीर को ऐसे सास लेता देख साक्षी को हसी आ जाती है

साक्षी - आराम से सास लो ही ही ही ही

वीर के हाथ पैर कांपने लगते है और वो धीरे धीरे से कापते हुए हाथों से साक्षी के गाल को छुने जाता है तभी साक्षी कहती है ओ मेरे बच्चे मुझे कुछ चुब रहा है

इतना सुन कर वीर फिर से काप जाता है और ये देख कर साक्षी कहती है चलो हटो मजा बहुत ले लिया मेरा

साक्षी फिर उसको अपने ऊपर से फेक देती है और कहती है जब देखो मेरे पीछे पीछे पड़े रहते हो बड़े आए

वीर - मैं तुमसे डरता नहीं समझी मेरा जो दिल करेगा वो करूंगा तुम पत्नी हो मेरी मेरा हक बनता है तुमसे प्यार करने का

इसके पहले वो कुछ और कहता वीर देखता है की साक्षी उसको ही घूर रही है जो लोहे की रेलिंग पर हाथ रख कर खड़ी थी

वीर जैसे ही ये नजारा देखता है उसकी गांड़ ही फट जाती है और वो कूदते हुए वापिस पीछे हो जाता है

तभी साक्षी उसकी तरफ बढ़ती है और कहती है कुछ कह रहे थे ना तुम वो मैं सुन नहीं पाई जरा फिर से बोलना

वीर - देखो तुम मुझे ऐसे डराया मत करो देखो मारना मत प्लीज तुम मुझे प्यार करने क्यों नहीं देती जब देखो दूर रहती हो सोते टाइम हग भी नहीं करने देती

साक्षी - अच्छा ठीक है दिन भर मुझे खुश रख कर दिखाओ अगर मैं खुश हुई तो बहुत प्यारा हग दूंगी और रात को जैसे तुम चाहो वैसे सोने दूंगी

फिर साक्षी वहा से जाने लगती है और वीर भी उसके साथ चल कर आगे आता है जैसे ही वो दूर गई वीर कहता है बड़ी आई हूं!!!

इधर साक्षी नहाने के लिया चली जाती है और वीर भी अपना काम करने लगता है स्वाति के पास कॉल कर के उसको सब समझा देता है

स्वाति - ओके सर मैं सब संभाल लुंगी आप आराम से जाइए

इधर साक्षी नहा कर के आती हैं और वीर को देखती है जो उसको घूर रहा था और उसके होठ काँप रहे थे

साक्षी - यार मैं तो तुमसे बहुत परेशान हूं अब क्या हुआ है बोलो

वीर - वो वो क्या तुम जींस पहनोगे

साक्षी उसको देखती है ।

वीर -नहीं नहीं कोई बात नहीं मत पहनो मन नहीं है तो

साक्षी - पहन लेती लेकिन मेरे पास नहीं है और जो थी वो अब टाइट आती है

वीर - मैंने लाया है आपके लिए वो पहन लो प्लीज

साक्षी - अच्छा ठीक है अब जाओ तैयार होने दो

वीर - थैंक्यू जान

और फिर वीर वहा से निकल जाता है और थोड़े टाइम बाद साक्षी तैयार हो कर नीचे आती है जिसे देख कर ही वीर देखता रह जाता है

साक्षी - चले अब मुझे देख चुके तो

वीर - थोड़ा सा देख लो तो इतना गुस्सा

साक्षी - पड़ोसी की बीवी नहीं हूं तुम्हारी ही बीवी हूं मैं चलो

फिर दोनो निकल पड़ते है मॉल की तरफ

साक्षी - सुनो मेरे मायके मे कुछ भी नाटक मत करना समझे कोई कुछ भी कहे डान्टे तो सुन लेना चुप चाप

वीर - ही ही ही ही ही मैं सब संभाल लूंगा प्यार करता हूं तुमसे

साक्षी - शायद वहा मैं तुम्हारी मदद ना कर पाऊं तो कुछ भी कांड मत करना वहा तुम मेरा साथ चाहते हो तो मेरे घर वालो के सामने साबित कर देना की मेरे लिया कुछ भी कर सकते हो

वीर - हा ठीक है शायद मैने बीते कुछ दिनों में ऐसा कर दिया है जिससे सब मुझसे नाराज़ है ना

साक्षी - अभी का टाइम देखो पुरानी बात छोड़ो मिटी डालो उसमें

इधर ये दोनो मॉल कब आ गए पता ही नहीं चला और जैसे ही दोनो अंदर आए वीर ने साक्षी को बोला की हम मूवी देखेंगे आज है ना सारे कपल देखते है मूवी अब हमारी पूरी हुर्रे

साक्षी - आज नहीं लेट हो रहा है ना जब वहा से लौट कर आएंगे तो साथ मैं देखा जाएगा और प्रोमिस एक गर्लफ्रेंड और बाय्फ्रेंड की तरह देखने दूंगी

वीर उदास हो कर कहता है कोई बात नहीं जैसे तुमको सही लगे

और साक्षी के साथ चुप चाप चलने लगता है और साक्षी उसका हाथ पकड़ लेती है और वीर अब स्माइल कर के उसके साथ चलने लगता है।

फिर दोनो एक ड्रेस की दुकान पर जाते है

सेल्स गर्ल - मेम क्या दिखाना है आपको

साक्षी - साड़ी मैरिज के लिए

साक्षी फिर वहा साड़ी पसंद करती है और वीर को कहती है तुम भी ड्रेस ले लो अपनी पसंद के जो जो तुम्हे पसंद हो

वीर भी कपड़े ले लेता है और दोनो बिलिंग करवाते है तो सारे ड्रेस देख कर साक्षी हैरान हो जाती है

फिर साक्षी कार मैं वीर से कहती है क्या है ये सब हा

वीर - तुमने ही कहा था जो पसंद हो लेते आना

साक्षी - बहस मत करो मैने तुम्हारे लिया कहा था तुम मेरे लिए सारी ड्रेस ले आए हो क्यो

वीर - मैं इन ड्रेस में तुमको देखना चाहता हूं तो ले आया

इधर वीर और साक्षी घर आते है और तभी साक्षी के डॅड का फोन आ जाता है जो कहते है 5 मिनट मे तैयार रहो आने के लिए

फिर दोनो गांव के लिया साक्षी के घर के लिए निकल जाते है जहा वीर ड्राइव कर रहा था वही साक्षी उदास बैठी थी
 
साक्षी मन में सोचती है काश सब ठीक हो गांव में तुम एक बार गांव से मेरे बन कर आना प्लीज सब को बता देना की तुम मेरे से कितना प्यार करते हो वो सब कर सकते हो मेरे लिए मेरे साथ पाने के लिए तुम एक न्यू वीर हो जो मेरे इतने करीब आया है

इतने में गांव आ जाता है और दोनो की कार घर के बाहर रुकती है घर पूरा शादी की तैयारी से सजा हुआ था

वही साक्षी का बाप खड़ा था बंदूक ले कर उदय भान

और इसके बगल उसका बेटा राज और हमारी तरफ दौड़ कर आती है अनु साक्षी की बहन जिसकी शादी है

और वही बहुत से और लोग थे साक्षी की चाची मधु और चाचा सूर्य भान

वही दूर से छत पर खड़ी थी एक औरत ये कोई और नहीं ये साक्षी की बुआ राखी है और उनके पीछे एक लड़की खड़ी वीर को घूर रही थी तनु

और बहुत से गेस्ट और साक्षी के भाई राज के ससुराल वाले दोस्त लोग भी आए थे वो गांव में घूमने निकलते थे

तभी हमारे पास साक्षी की बहन अनु आती है

अनु - दी दी दी आप आ गई ही ही अब दोनो बहने मस्ती करेंगे खूब सारी

तभी राज और उदय भान आते है

और चिल्लाते हुए कहते है रुको

राज - दी आप अंदर जाइए और वीर को यही छोड़ दीजिए

साक्षी - में अपने पति को छोड़कर नहीं जा सकती

उदय भान - ये यहाँ से जिंदा नहीं जाएगा समझी तू

राज - अनु तू अंदर जा इसने मेरी दी को दर्द दिया रुलाया इतनी बेदर्दी से मारा

साक्षी - अब हमारी लाइफ अच्छी चल रही है तो क्यों आप मेरी जिंदगी खराब करना चाहते है

उदय भान - ठीक है दिया एक मौका इसको यही कच्चे घर में गरमी में रहना पड़ेगा जमीन में एक टाइम का खाना खाने पड़ेगा और शादी तक ये कर सका तो मैं दोनो को अलग नहीं करूँगा कभी एक नौकर बन कर रहना पड़ेगा बोल

साक्षी - क्या बकवास है नौकर सब के सामने

राज - हा नौकर शादी तक शादी के बाद हम तुमको परमिशन दे देंगे इसने तुझे 15 साल नौकर बना कर रखा आज तू 33 साल कि है अब इसे भी नौकर बन कर रहना होगा जितना दर्द तुझे दिया गया इसे सहना होगा तूने ही ये मदद मागी थी ना

साक्षी अपने बाप को कुछ नहीं कह सकती थी क्योंकि वीर ने उसके साथ ऐसी ऐसी हरकते की थी जो अब उसके नए पति सिड को चुकानी पड़ेगी

साक्षी मन मैं सोचती है एक बार यहाँ से निकल चले वीर वादा रहा तुमको तुम्हारी साक्षी बहुत प्यार देगी वही ये सब सुन कर साक्षी समझ गई की ये वीर नौकर बनना बर्दास्त नहीं करेगा वो भी सभी के सामने

तभी वीर कहता है मुझे मंजूर है मैं साक्षी का पति हूं और ये साबित कर के रहूंगा की उसके लिए मुझसे अच्छा कोई नहीं रहेगा और मैं साक्षी को अपने साथ वापिस ले जाऊंगा

उदय भान - ये तो 15 दिन बताएगा समान उठा और घर के बाहर बने तबेले मे जा कर सामान रख और काम शुरू कर महमान आने वाले है याद रहे ये 15 दिन तू नौकर है

अनु - चलो दीदी कपड़े दिखाती हूं और राज की वाइफ भाभी से भी मिलवाती हूं सब आएं है यहा

राज वीर को तबेला दिखा देता है जहा पर गाय और भेस बंधी थी

वीर अंदर जाता है तो देखता है अंदर बस बदबू है लेकिन एक कोने मे थोड़ी सी साफ जगह है वहा बदबू नहीं है

वीर अपना सामान वहीं रख देता है और शाम तो हो ही गई थी तभी साक्षी के बाप की आवाज आती है मर गया क्या तबेले मे सामना कोन रखेगा तेरा बाप कार से समान निकाल

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जैसे ही वीर तबेले मे आया वैसे ही उसको आवाज आती है।

"मर गया क्या अरे घर का काम भी करना है और साक्षी के कपड़े निकाल कर कोन लाएगा तेरा बाप" ये आवाज थी साक्षी के बाप उदय भान की

वीर ये सुन कर चुप चाप बाहर आता है और सीधा बाहर जा कर कार में से कपड़े निकाल कर सीधा घर में चला जाता है और उसको देख कर अनु कहती है पापी कही का।

वीर उसको कुछ भी नही कहता और सीधा कपड़े रखने के लिए अंदर जाने लगता है तभी राज उसको टोकता है और कहता है नौकरों को घर में आने की परमिशन कब से होने लगी और उसको धक्का दे देता है जिससे वीर थोड़ा पीछे गिर जाता है

फिर वीर शांति से वहा से उठ कर चला जाता है और बाहर आते ही सूर्य भान साक्षी के चाचा उसको कहते है चल मेरे साथ थोड़ा आटा की दुकान दिखा दूं वहा से आटा ले आ कर रसोई में रख दो

फिर चाचा उसको 2 km दूर पैदल ले गया और वीर से 15 राउंड लगवाया और वीर जब ये काम कर के घर आया तो उसकी हालत खराब हो चुकी थी।

वही ये सब दूर बैठी साक्षी देख रही थी और वो और कुछ रिएक्ट कर पाती तभी अनु उसके पास आ कर कहती है

क्या दीदी मेरी शादी है और आप मेरा साथ के बजाए अकेले बैठे हो चलो आपको भाभी से मिलवाती हूं राज की होने वाली वाइफ

साक्षी - आज नहीं मैं थक गई हूं कल चलेंगे सुबह से

तभी उसको उसकी चाची की आवाज आती है अरे मेरी बेटी जब से आई है तब से कुछ खाई भी नही कम से कम उसको कुछ खिला तो दे।

अनु - मैं भी कितनी बेवकूफ हूं रुको अभी लाती हूं

इधर अनु खाना ले कर आती है लेकिन साक्षी खाना का बहाना बना कर मना कर देती है और घर के कामों में लग जाती है और अनु उसके पीछे पीछे लगी हुई थी

इधर वीर के कपड़े पूरा गंदे हो गये और तभी राज के दोस्त घर में आते है और वीर से टकरा जाते है और उनमें से एक कहता है गुस्सा कर " क्या बे दिखता नहीं क्या चल हट साइड और जा कर चाय ला"

तभी एक लडका कहता है पागल है क्या तू ऐसे बात नहीं करते।

लड़का कहता है अबे रोहित ये वीर है राज ने बताया था ना घर में काम करने के लिया नौकर आएगा आज वही होगा ये अब जा

और वीर चुप चाप वहा से चला गया सुनता हुआ

वही सुबह से वीर ने कुछ खाया नहीं था उसको प्यास बहुत जोर की लगी थी वो डरते हुआ कहता है क्या पानी देंगी चाची बहुत प्यास लगी है

चाची - तूने काम तो कुछ किया नही बड़ा आया प्यास लगी है निकम्मा कही का

लड़का - अबे चाय ला रहा है या मर मुरा गया बे

राज ,- क्या यार तुम लोग भी ना

वीर - चाय ले कर देता है

यही सब हो रहा था ऐसे ही जिल्लत सहते सहते रात हो गई और वीर चुपके से बाहर आ कर साक्षी को देख ने लगता है लेकिन वो उसको नहीं दिख रही थी

तभी उदयभान उसको बाहर से लकड़ी लाने को बोलता है और कहता है जा कर लकड़ी ला और पानी भर कर छत पर रख दे वही पर राज के दोस्त सोएंगे

तभी वीर वहा से चला जाता है और शांति से लकड़ी उठाने लगता है तभी उसको आवाज सुनाई पड़ती है

रोहित - अबे तूने उसको देखा उस साड़ी वाली भाभी को क्या लग रही थी बे कसम से बड़ा कसा हुआ माल है यार अजय

वीर इसका नाम अजय है घमंडी साला

तभी अजय कहता है - " हा यार बहुत कसा हुआ है अबे वो साक्षी है राज की बहन बहुत कसा हुआ माल है टाइट सी लोड़ा पूरा खड़ा कर देती है

इतना सुन कर वीर का खून खोल जाता है और उन दोनो की तरफ आगे बढ़ता है तभी उसको याद आता है

साक्षी ने उससे कहा था कुछ भी उल्टा सीधा मत करना

वीर लकड़ी ले कर रसोई में दे देता है और कहता है ये लीजिए

इतना सुन कर अनु कहती है ठीक है रखो और जाओ

वीर वहा से छत पर निकल जाता है और पानी डालने लगता है तभी वो देखता है साक्षी और अजय बात कर रहे थे।

अजय - आप ऐसे अकेला मत रहा करिए लड़कियां अकेला अच्छी नहीं लगती

साक्षी कोई रिस्पांस नहीं देती और चुप चाप वीर को देखती है जो सफाई करते हुए चुपके से साक्षी को देख रहा था तभी उसकी नज़र साक्षी पर पड़ जाती है और साक्षी उसको देख लेती है और वो समझ जाती है की वीर को जलन हो रही है तभी वो कहती है हा सही कहा इसलिए तो तुम्हारे पास बैठी हूं

इतना सुन कर वीर अपना उदास हो कर काम करने लगता है और वो दोनो बहुत बात करने लगते है और फिर वीर वहा से जाने लगता है।

तभी उसकी आंखो में आसू देख कर साक्षी भी उदास हो जाती है और साक्षी को उदास देख कर अजय बोलता है क्या हुआ सब ठीक है?

तब तक वीर चला गया था और साक्षी खड़ी हस रही थी बच्चू तड़पो जरा मेरे लिए

तभी साक्षी के पास अजय आ कर खड़ा हो जाता है

साक्षी कहती है अपनी हद क्रॉस करने की कोशिश करोगे तो हाल मौत से भी बुरा होगा समझे

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इधर वीर को रात का खाना नसीब होता है तो वो खुशी से उछल पड़ता है कब से भूख लगी थी उसको और अब वो खाना मुंह में डाला तो तड़प उठा 2 रोटी और नमक और पानी लेकिन वीर के लिया इतना ही काफी था।

इसी तरफ कई दिन गुजर जाते है और वीर साक्षी और अजय को करीब आता और बात करता देखता और उन दोनो को बात करता देख सभी हँसते खुश होते

एक दिन रात का टाइम था और वीर पूरे घर का काम कर के थक गया था तभी उसकी नज़र उसकी वाइफ पर पड़ती है साक्षी जो किनारे खड़ी हो कर हस रही थी और अनु से बात कर रही थी और आपने बाल को संवार रही थी

वीर जब नही रह पाया तो वो साक्षी को पीछे से उसकी पीठ को छू लेता है जो दूध जैसी गोरी थी और इतना देख कर अजय पूरा गुस्सा हो जाता है और वीर को धक्का दे कर मारने लगता है

अजय - मादरचोद तूने उसको हाथ भी कैसे लगाया तेरी इतनी औकात हो गई मादरचोद

अजय वीर पर लात और घूँसा बरसाए जा रहा था और वीर चुप चाप जमीन पर लेटा मार खा रहा था

साक्षी ये देख कर अजीब नज़रों से सब देख रही थी तभी सब आ कर मेहमान और राज सब वीर को बचाते है

रोहित - माफी मांग

वीर - माफ कर दीजिए गा मेम साब सर माफ कर दीजिए

अजय फिर आगे बढ़ता है तभी साक्षी उसको पकड़ लेती है और कहती है बस करो अब

और वीर चुप चाप तबेला मे जा कर लेट जाता है जमीन मे

और वीर के पास आज अनु खाना ले कर आती है और कहती है क्यों ये सब कर रहे हो वापिस शहर चले जाओ

और चली जाती है और इधर सब अजय को समझा रहे थे और तभी साक्षी बिलकुल चुप चाप बस बैठी हुई थी और आज उसके सामने उसके प्यार को मारा गया और वो चुप चाप बस बेबस और लाचार हो कर देख रही थी

तभी राखी और तनु आती है नीचे उनको देख कर सब की आंख बड़ी हो जाती है और तनु सीधे भागते हुए वीर की तरफ चली जाती है

उदय भान - होश में हो तनु कहाँ जा रही हो

तनु - अपने पति के पास और अगर किसी में हिम्मत है तो रोक के दिखाओ

इतना कह कर तनु वीर के तबेले में झांकती है जो बहुत प्यार से देख रही थी उसकी आंखो में जो था वो बस दर्द था

और वो देखती है की वीर दर्द से कहार रहा है

वीर देखता है की एक औरत उसको घूर रही है जो लगभग साक्षी के हम उमर ही थी वो वीर के पास आती है

और उसके हाथों को थाम कर चोट पर दवा लगाने लगती है

वीर - तुम कोन हो

तनु - तुम्हारी पत्नी जिसको तुमने कभी अपना नही समझा मैं बस तुम्हारी मदद करने आई हूं फिर चली जाऊंगी

वीर - तुम मेरी हो

तनु उसको घूर कर देखती है फिर इग्नोर कर के खाना ले कर चली जाती है

और तनु उसको गुस्से मे कहती है अपनी शकल भी मुझे मत दिखाना और गुस्से मे चली जाती है

और वो सीधा खाना साक्षी की तरफ फेक कर कहती है ये देख क्या खिलाया जा रहा है अब तो कुछ शर्म कर ले उसकी गलती क्या थी की नही रह पाया तुम्हारे बिना

वही ये सब वीर देख रहा था

इतने में अजय कहता है तुम होती कोन हो ये बोलने वाली

इतने में तनु उसको इतना जोर से थापड़ मरती है की उसका मुंह हिल जाता है सुन बे लोडू चांद अगर साक्षी के पास भी दिखा ना तू अब तो जनाजा जवानी में उठा दूंगी समझा

अजय की गांड़ फट गई ये देख कर और वो साक्षी का हाथ पकड़ लिया

इतने में साक्षी उसको एक और जोरदार थप्पड़ दे देती है जो इस बात का सबूत था की साक्षी वीर की वाइफ है

तनु- डायन इतना ही है तो पहले स्टैंड लेती ना तब तो गांड़ में दम नहीं था तुम्हारे

साक्षी - तू क्यों नही आई फिर बचाने मैं तो डरती हूं तू बचा लेती ना तुझे तो शकल देखनी भी नहीं पसंद थी ना भोसड़ा चोदी

वही वीर इतनी सारी गालिया सुन कर डर रहा था बहुत ज्यादा उसकी गांड़ फटी पड़ी थी उसको ये तो कन्फर्म था की तनु के साथ भी कोई कांड उसके बाप ने किया है लेकिन तभी उसकी नज़र दोनो पत्नियों की गांड़ पर पड़ती है दोनो एकदम कसा हुआ माल थी ऊपर से भाभियों वाली उमर मैं थी दोनो

तभी अनु ये देख लेती है और उसको लड़ाई चुप कराने का आइडिया दिमाग में आया और वो दोनो के बीच आती है और कहती है

"तनु दीदी और साक्षी दीदी आप दोनो लड़ाई छोड़ जरा कही और भी तो देखिए "

जैसे ही तनु और साक्षी ने वीर की नजर का पीछा किया तो पाया वो उनकी गांड़ घूर रहा है

तो दोनो का खून जल जाता है
 
दोनों वीर की नजर का पीछा करती है तो पाती है की वो उन दोनो की गांड़ देख रहा हैं

दोनो का खून जल जाता है और दोनो एक दूसरे को देखती है किसी तरह गुस्सा कंट्रोल करती है

तभी सूर्य भान और उदय भान गुस्से मे नीचे आते है और तनु से कहता है क्या नाटक लगा रख है ये

तनु - देखो मामा आपकी बेटी की शादी है तो चैन से हो जाने दो वर्ना मैं आपकी जिंदगी का सत्यानाश कर दूंगी

राखी - बस बहुत हो गया अब। तू क्या चाहती है तनु मैं खुश ना रहूं,वैसे भी तुम वीर से बात नहीं करती तूने इसे कभी अपना नहीं समझा , फिर आज तुझे मौका मिल रहा है सब से छुटकारा पाने का तो ये सब क्यों कर रही है तू

तनु - पति है वो मेरा उसको, मैं मारू पीटू बहस करू ये मेरा हक है आज वो सीधा हो गया सुधर गया तो आप उसके साथ नौकर जैसा बिहेव कर रहा है

तनु - वो आज खुशी से रह रहा है साथ रहना चाह रहा है तो ऐसा कर रहे हो अगर वो पहले जैसा हो गया तो आप सब की हिम्मत हैं क्या उसको छुने की

सूर्यभान - जबान को लगाम दे तनु वर्ना जबान बाहर निकाल दी जाएगी

तनु - हा हा हा हा गिरा हुआ इंसान धमकी किसी और को देना

उदय भान - निकल जा मेरे घर से इसके पहले की में धक्के मार कर भगा दूं आज के बाद अपनी घटिया शकल मत दिखा देना

राखी - भैया मेरी बेटी को माफ कर दो वो इतनी रात कहा जाएगी कैसे आज रात को उसको रहने दो

तनु - मुझे भी कोई शौक नहीं है तेरा इस घर में रहने का

तनु वहा से निकल जाती है और राखी चिल्लाते हुआ उसको रोकने लगती है तब तक तनु चली जाती है

वीर ये सब बहुत चुप चाप देख रहा था और उसको ये तो समझ आ गया था की तनु उसके लिए लड़ रही थी और आज इतनी रात वो उसके लिया घर छोड़ कर चली गई

तभी वीर भी बाहर जाने लगता है और तभी उदय भान बोलता है तुम कहा जा रहे हो और

वीर - जब मेरी पत्नी को ही घर से निकाल दिया गया तो मेरा भी क्या काम

साक्षी भी इसके पीछे जाने लगती है और तभी उदय भान और राज उसको बोलते है क्या हुआ साक्षी किधर जा रही हो

साक्षी - आप माने या ना माने लेकिन ये दोनो मेरी फैमिली है और वीर अब बदल चुका है और जहा मेरा परिवार नही रहेगा वहा मेरा भी रहना ठीक नही होगा

और वीर और साक्षी तनु के पीछे पीछे चलने लगते हैं

तभी ये बात तनु नोटिस करती है और चिल्लाते हुए कहती है मेरे पीछे पीछे क्यों आ रहे हो

साक्षी - तो कहा जाए हम दोनो

तनु - घर वापिस जाओ अपने मेरे साथ मत आओ जो मर्जी करो लेकिन मेरे साथ मत आओ

वीर - मुझे तुम्हारे साथ रहना है

तनु इतनी रात को बहस करना ठीक नहीं समझी और चुप चाप चलती रही

तभी वीर पलट कर देखता है तो उसकी नज़र साक्षी पर पड़ती है वो देखता है की साक्षी आज पीली कलर की साड़ी पहने हुए थी

तभी वीर ने साक्षी का हाथ पकड़ने के लिया आगे बढ़ता है लेकिन साक्षी उसी टाइम पीछे हट जाती है क्युकी उसको किसी की आवाज आती है तभी उसका हाथ सीधा तनु की गांड़ पर लग जाता है

* चटाक्क्क्क *

फिर आवाज गूंजी और ये आवाज सुन कर साक्षी हँसते हुए गिर पड़ी

साक्षी इतनी हसी की वो जमीन पर लेट गई हँसते हँसते

तभी वीर चुप चाप मुंह बना लेता है और तभी साक्षी कहती है " वीर सॉरी वो मुझे किसी की आवाज आ गई थी इसलिए मैं पीछे हट गई "

तभी तनु कुछ कहने वाली थी लेकिन एक आवाज उन सब के कानो मैं पड़ती है

मां लूटो ना लूटो ना

वीर पलट कर देखता है तो लड़की जो सही से बोल नहीं पा रही थी वो उन सब के पास दौड़ते हुए आ रही थी

तनु दौड़ते हुए उसके पास जाती है उसको अपने से चिपका लेती है

तनु - मेरी बच्ची तू बाहर क्यों आई हा तुझे कहा था ना चुप चाप ऊपर रहो

तभी वो बच्ची कहती है मां मे में लेटी थी लेकिन फिर मैं

साक्षी - ये कब हुआ

तनु - मेरी बेटी के सामने कुछ मत बोलो मैं बाद मे सब बताऊंगी मैने इसको बहुत प्यार से पाला है

वीर - ये मेरी बेटी है?

तनु उसको घूरती है और वीर चुप चाप साक्षी के पीछे खड़ा हो जाता है

साक्षी - हा तुम्हारी बेटी

तभी वो दोनो लड़के अजय और रोहित इधर आते है और कहते है आप दोनो को राज ने बुलाया है चलो

अजय - चलो साक्षी ये बच्चो जैसी जिद छोड़ दो

अजय ने साक्षी को इतने हक से कहा था की अभी तक वीर जो साक्षी के पीछे खड़ा था उसके कंधे पर हाथ रख कर वो पीछे हट गया

तभी साक्षी के दिल में दर्द होने लगा और इसके पहले की वीर अपना हाथ उसके ऊपर से हटा पता साक्षी ने उसका हाथ पकड़कर अपनी कमर पर बांध दिया

तनु - तुझे एक बार मैं समझ नहीं आता क्या हा

साक्षी अजय को घूर कर देखती है और कहती है क्या बोला जरा फिर से बोल तो

रोहित - भाई चल यहाँ से वर्ना लेने के देने पड़ जाएंगे

अजय और रोहित वहा से भाग जाते है

अजय - ये वीर का बच्चा कहाँ से आ गया बे

रोहित - भाई कुछ भी कहो बड़ा कड़क माल है यार दोनो साक्षी और तनु दोनो इतना कसा हुआ माल हाए

अजय - अबे गांदू दोनो एक से बडकर एक गुस्सा वाली दूर रह वर्ना जिंदा खा जाएगी

रोहित - अब समझा मैं

अजय - क्या

रोहित - यही की वो तुझसे वीर को जलाने के लिए बात कर रही थी ही ही ही ही

वही वीर अब चुपके से तनु को देखता है उसके चूचे उसकी गांड़ सब उभार देख कर उसकी सास थम जा रही थी

तभी वो बच्ची कहती है आप मेरी मम्मी को क्यों घूर रहे हो ऐसे हा

और उसकी ऐसे टूटी हुई आवाज सुन कर साक्षी फिर हसने लगती है और उसको कहती है मम्मी से पूछो

बच्ची - मम्मी ये कोन है जिसके लिए आप इतना लड़ रही थी

वीर को उसकी मीठी मीठी तुतराने वाली आवाज बहुत प्यारी लग रही थी वो थी ही इतनी प्यारी

तभी तनु कहती है ये तुम्हारे पापा है काव्या

काव्या - आप आते तू नी

साक्षी - हँसते हुए कहते है सॉरी मोटी

काव्या - मैं आप दोनो से बात नहीं करूँगी

तभी अनु वहा आती है और कहती है अरे दीदी आप लोग मेरे से क्यो गुस्सा हो मैने क्या बिगाड़ा आप का कम से कम मेरी शादी तो अटेंड कर लो

तभी मधु और बाकी सब भी कहते है वापिस चलो

लेकिन जब राज वीर की तरफ आया तो साक्षी उसके आगे खड़ी हो जाती हैं

राज - जीजा जी आप कहिए ना उन दोनो तो शायद मान जाए

तभी वीर देखता है की काव्या बेचारी को गोद में उठाए उठाए तनु का पूरा हाथ दर्द करने लगा था और साक्षी भी चुप चाप एक पेड़ के पास बैठी हुई थी

वीर - चलो घर

तनु - मुझे नही जाने उस घर जहा मुझे घर से निकाल दिया गया मेरा भी इगो है और तुम होते कोन हो मुझे बोलने वाले

काव्या को अच्छा से पता था तनु का गुस्सा इसलिए वो चुप चाप साक्षी की गोद में बैठी जाती है

वीर - तुम्हारा पति

तनु - मैं नहीं मानती तुमको अपना पति समझे अपनी साक्षी को उठाओ और चले जाओ

तनु की डाट सुन कर वीर चुप चाप अपना सिर नीचे कर के सुनता रहता है

तभी काप रहे हाथो से उसका हाथ पकड़ लेता है

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तनु फिर उठने लगती है और हाथ को छुड़ा कर आगे बढ़ती है तभी वीर उसको रोक कर खुद काव्या को उठा लेता है

काव्या - पापा अब हम कहा जाएंगे सुनिए मम्मी से ज्यादा बात मत करना मम्मी जब गुस्सा रहे तो बात मत करना

वीर - चॉकलेट खाओगे

काव्या - नही

वीर - क्यो

काव्या - जब मैं चॉकलेट मांगती हूं ना तो मम्मी बहुत परेशान होती है

तनु - काव्या आवाज ना निकले मुंह से

फिर तनु कहती है चलो अब घर की ओर और तनु और साक्षी आगे जाने लगती है जो बहुत थक गई थी

तभी साक्षी तनु को इशारे करती है

तनु - पहले जब हम दोनो को प्यार की जरूरत थी तब इन्हें घिन आती हम दोनो से अब जब पक्के जवान हो गए हम दोनो तो पता नहीं कहा का प्यार जाग गया है हरकते देखो कमिने की क्या चल रहा है ये

साक्षी - घर पर बात करेंगे

तभी साक्षी और तनु रुक जाती है और वीर तनु और साक्षी से लड़ जाता है उसका ध्यान तो गांड़ पर था

वीर - क्या है रुक क्यों गई

साक्षी - आगे आगे चलो बेटी नही लिए होते तो बताते

वीर जल्दी से आगे ले कर चलने लगा तभी वो दोनो घर के बाहर आते है

तभी वीर वही गेट पर रुक जाता है जहा इस बार उसको इस जगह पर जाना नही चाहता था वही उसको रुका हुआ देख कर साक्षी आ जाती हैं

और उसका हाथ पकड़ लेती है

साक्षी - चलो

सब घर के अंदर आ जाते है और साक्षी को देख कर सब खुश हो जाते है

राज - चाची देखो दीदी आ गई

उदय भान और सूर्य भान भी आ गए और कड़क आवाज़ में कहते है आ गए ना सब

साक्षी - हा और यहां पे वापिस आना हमारी सबसे बड़ी गलती थी

राखी साक्षी को पकड़ कर ऊपर ले जाने लगती है तभी

वीर को देख कर उदयभान कहता है जा अपनी सही जगह पर तबेले पर

वीर कुछ कहता उसके पहले तनु वापिस आती है और साक्षी को इशारे करती है कुछ

साक्षी काव्या को लेंकर ऊपर चली जाती है और तनु वीर का हाथ पकड़ कर ऊपर ले जाने लगती है और पलट कर कहती है

"हमारे पति के सामने आवाज और औकात दोनो नीचे"

तभी अनु कहती है पापा बस कीजिए अगर दीदी जीजू के साथ खुश है तो दिक्कत क्या है

अब उदय भान को कुछ बोलना सही नही लगा लेकिन वो हँसते हुए कहता हैं ठीक है जाओ

और इधर वो तीनो ऊपर जाने लगते है और तनु देखती है की अजय और रोहित उदय भान से बात कर रहे है

फिर वो सब ऊपर आ जाते है जहा घर का एक हिस्सा था ऊपर

राखी उन सब को छोड़ कर नीचे जाने लगी क्युकी वो नीचे ही सोती थी

वीर देखता है घर का ये हिस्सा

काव्या - ही ही ही ये हमारा नन्हा सा घर है 1 कमरा है एक रसोई है और छोटा सा छत

वीर अब छत को देखता है जो दिखने में तो छोटी सी है लेकिन पेड़ की छाव आ रही थीं और बहुत प्यारा लग रहा था

तभी वीर को आवाज आती है बहस की जो बहुत जोर से लड़ रही थी दोनो

वीर - दो दो शादियों के बाद का सुकून

इधर रूम में

साक्षी - तो तू कोनसा अच्छी है डायन है डायन खून चूसने वाली

तनु - मैने बोला ना बेड पर में सोऊंगी तुम जमीन पर

साक्षी - मैं सोऊंगी बोली ना समझ नही आता क्या काव्या के साथ

तनु – मुझे नहीं सोना जमीन पर

तभी वीर रूम में जाता है और जमीन पर बिस्तर रखा हुआ था वो उठाया और ले कर काव्या के पास आता है और छत के कोने जहा पेड़ की छाव भी आ रही थी वही पर बिस्तर सजा दिया

और चुप चाप बैठ गया

तभी काव्या कूदती हुई आती है अरे वाह क्या मस्त लग रहा है ही ही ही ही

तनु - देख मुझसे बहस मत कर

तभी साक्षी और तनु बाहर आते है तो देखते है वीर काव्या को जकड़ कर सोया हुआ है

साक्षी - तेरी वजह से वो दोनों भूखे सोए

तनु - कमिनी

साक्षी - हट

तनु - ये सो रहा है इसलिए सुकून हैं वर्ना जाग रहा होता तो एक बवाल ही हैं तुझे गुस्सा नही आता

साक्षी - क्या करू हा उसको बोल दूं की अपनी वाइफ को क्यों घूर रहे हों हा

तनु बस साक्षी को देखती है

साक्षी - एक तो हम दोनो का ये कसा हुआ बदन दिन भर घूरता रहता है लेकिन ठीक है कम से कम मैं खुश हूँ इस वीर से

तनु - वैसे ये वीर इतना भी बुरा नही है डाट खाता रहता है डरता भी है हम दोनो से शायद हम दोनो इसकी इन्ही सब बातों से जीना सीख जाए

साक्षी - हा लेकिन मुझे तो मजा आता है इतने दिन से साथ हूं पीछे पीछे लगा रहता है

तनु - मैं नहीं जानती कुछ ना ही जानना चाहती हूं

साक्षी - मुस्कील है हमारे लिए आगे बढ़ना लेकिन जैसी इसकी हरकते रहती है ना वो देख कर हसी आ जाती है

तनु - हा वो तो देख रही हूं मैं, शर्म तो है नहीं बेटी के सामने ऐसे घूर रहा था

साक्षी - तू अभी ही परेशान हो गई अभी तो शुरुआत है

तनु - मतलब

साक्षी - कुछ नही

तनु - क्या है बता ना

साक्षी - वैसे इसके साथ रहने से भले ही ये चाहे जैसा हो लेकिन अच्छा लगता है कम से कम कोशिश कर रहा है

तनु - कोशिश, मुझे मेरी बेटी की खुशी के आगे सब फीका नजर आ रहा, वो इसके आने से खुश है

साक्षी - हा

तनु - वैसे भी में कुछ नही जानती लेकिन इतना जानती हूं अब अकेला जीना सीख गई इसलिए मैं अब नही मतलब रखना नही चाहती लेकिन मेरी बेटी को में अकेला नहीं देख सकती थी

साक्षी - बड़ी टाइट हो गई है तू तो

तनु - तेरी हरकते कब ठीक होंगी

साक्षी - सुन जरा ब्रा छुपा कर रखना

तनु - ठीक है समझ गई वैसे इसकी हरकते देख कर समझ नहीं आता गुस्सा हूं या हसू

साक्षी - मैं चली सोने तू भी चल साथ

तनु और साक्षी उसके अगल बगल लेट जाती है

इधर लेट लेटे साक्षी कहती है तनु

तनु - हा

साक्षी - इसने साबित कर दिया की हम दोनो से प्यार करता है साथ रहना नही बल्कि हमारा साथ चाहता है

तनु - हा इसीलिए दिया है एक मौका जीते ले हमारा दिल तोड़ दे हम दोनो की बेरुखी अगर इतना ही है तो हमे अहसास दिलाए प्यार का अभी तक इसने फैमिली का विश्वास जीता हमारा नही

साक्षी - ऐसे नही तनु हमारे साथ इसने जिस लड़की के लिए ये सब किया इस लड़की के सामने हमारे आगे पीछे घूमे याद है ना उस लड़की के सामने हमारी इज्जत करे उसको भी पता चले की हम अब इसकी वाइफ है हमारा राज चलता है वीर पर

तनु - कल तैयार रहना वो वापिस आ रही है और देखना कल वीर चला जाएगा तेरा सारा घमंड टूट जाएगा

साक्षी - ठीक है लेकिन वादा कर तू अगर वीर हम दोनो को चुनता है तुझे हमारे साथ रहना पड़ेगा शहर चलना है पड़ेगा वीर को एक मौका देना पड़ेगा

तनु - सपने मत देख वीर कभी नही चुनेगा हमे लेकिन वादा करती हूं अगर वीर ने हमारे लिए कल लड़ा हमारे साथ के लिए उसका सामना किया तो मैं उसको एक मौका दूंगी साथ तो रहूंगी ये वादा किया लेकिन उसको हमारा दिल जीतना पड़ेगा

साक्षी - वो तो हैं साथ रहेंगे अब ये इसकी प्रोब्लम है कब जीत पाए हमारा दिल लेकिन हमारा साथ चाहता है हमारे साथ रहना चाहता है तो कल साबित करे

इधर एक रूम में उदय भान सूर्य भान अजय और रोहित बैठे थे

अजय - ही ही ही ही ही कल वो आ रहीं है अब तो वीर चला जाएगा और नही जाएगा तो उसको जाना पड़ेगा जबरदस्ती ही ही ही

रोहित - अब तो भाभी तेरी हो जाएंगी
 
साक्षी - वो तो हैं साथ रहेंगे अब ये इसकी प्रोब्लम है कब जीत पाए हमारा दिल लेकिन हमारा साथ चाहता है हमारे साथ रहना चाहता है तो कल साबित करे

इधर एक रूम में उदय भान सूर्य भान अजय और रोहित बैठे थे

अजय - ही ही ही ही ही कल वो आ रहीं है अब तो वीर चला जाएगा और नही जाएगा तो उसको जाना पड़ेगा जबरदस्ती ही ही ही

रोहित - अब तो भाभी तेरी हो जाएंगी

अब आगे

अजय - चल ना ऊपर चल के देखते है क्या कर रही है दोनो

रोहित - नही मुझे मार नही खाना समझा तू । तू अकेला जा कल वो आएगी और वीर को ले कर चली जाएगी फिर तुझ जो करना होगा वो तू करना अभी कुछ भी मत कर...

इधर साक्षी सो चुकी थी लेकिन तनु जागी हुई कुछ पुरानी याद मैं खोई हुई थी

तनु - ही ही ही ही मम्मी तुम टेंशन क्यो लेती हो मेरा पति शादी बाद मुझे यहां से ले जाएगा और बहुत अच्छी जगह रानी की तरह रखेगा देखना फिर तू तेरी बेटी खुश रहेगी रानी की तरह

राखी - बेटा तू रानी की तरह रहे या ना रहे लेकिन तेरे चहरे का जो ये नूर है और हसी है ये बनी रहे

तनु - ही ही ही ही हमेशा मम्मी

राखी - बाकी तू जो ये नाक पर गुस्सा ले कर बैठी रहती है वो छोड़ दे समझी

तनु - खाना दो ना मम्मी भूख लगी है

राखी जा कर छत पर कोने से किचन में देखती है वहा खाने को कुछ नही था

तनु - मुझे भूखनहींहै मां तू परेशान मत हो

राखी - माफ करना बेटी

लेकिन तब तक राखी जा चुकी थी

सूर्यभान - अरे साक्षी कहा हो बेटा

मधु - गई है बाग अनु के साथ

उदय भान - ये लड़की शहर से आती है तो जमीन पर पाव तो टिकते ही नहीं

साक्षी - रुक अनु की बच्ची तुझे तो मैं बताती हूं

अनु - अरे नही रुको तो

साक्षी - रुक कमीनी

अनु - ही ही ही ही दीदी सुनो तो

तभी एक उड़ता हुआ चप्पल उसने अनु की ओर फेक दिया जो सीधा जा कर तनु को लग जाता है

तनु - कमिनी देख कर नहीं फेक सकती

साक्षी - ऐसे ही फेक ती हूं मैं तुमको दिक्कत है क्या

तनु - कर्म जली तेरा मुंह ना तोड़ दूं

साक्षी - मैं तेरी गांड़ ना तोड़ दूं वैसे भी फुली हुई है

तनु - हद मैं रहो कुतिया

साक्षी - अरे जा ना बंदरिया

तभी वहा पर एक बॉल आ कर लग जाती है साक्षी को

और फिर एक लड़का आता है बॉल दे मेरी साक सब्जी

तनु - बॉल इधर कैसे आई

लडका - क्या मतलब

तनु - *चाटाआक*

साक्षी जल्दी से तनु के पीछे आ जाती हैं

लडका - बहुत महंगा पड़ेगा मुझे मारना

तनु - रुक तेरी मां की बताती हूं

इतने में वो लड़का भाग गया

2 लडका - क्या है बे बॉल क्यो नहीं लाया

वो लड़का बोलता है - अबे मादरचोद वहा तनु खड़ी थी

2 लड़का - तूने अदब से बात की होगी तनु से

लडका - हा

2 लड़का - अबे वो तनु दी है जितनी प्यारी और सुंदर है उतनी गुस्सैल अगर उनको गुस्सा आ गया तो मतलब फिर दूर रहने का रुक तू मैं बॉल ले कर आता हूं

फिर ये लड़का भी डरते डरते आता है

तनु - तुझे क्या चाहिए

लडका - दीदी बॉल दे दो ना

तनु - आ पास देती हूं

लडका - नही आप मरोगी दे दो ना दीदी

तनु - ले कर जा बॉल अपनी

जैसे ही वो लड़का गया साक्षी बोलती है " डरती क्यो है तू इतना तनु मैं हूं ना डर जाती है बार बार

तनु - हप्प बस मेरे से लड़ती है तू और किसी से मत लड़ियों तू डरपोक

साक्षी - में डरती नही घबरा जाती हूं

तनु - जा दोनो बहन यहाँ से

साक्षी - ये ले केला खा डायन

तनु को भूख लगी थी वो भी खाने लगती है फिर तनु कहती है अब मैं शहर नहीं जाऊंगी पास मे कॉलेज है यही बच्चो को पढ़ा कर पैसे कमा लूंगी

अनु - दी दी दी आप दोनो के लिए रिश्ता आया है चलो घर जल्दी

इतने में दोनो घर चले जाते है...

और साक्षी और तनु घर आते है तो बहुत भीड़ लगी हुई थी।।

दोनो का रिश्ता तय हो चुका था वैसे तो दोनो छोटी थी लेकिन बाप पुराने खयाल का था ।

तनु - मेरी शादी किसने तय की और क्यो

उदय भान - देख तू शादी के लिए हा कर दे राखी का ध्यान और खाना पीना हम लोग देख लेंगे

तनु के पास फिर कोई ऑप्शन नहीं बचता तो वो हा कर देती है

इधर वीर एक घर में बैठा था

रमेश - क्या यार मां मुझे नहीं करनी शादी समझती क्यो नही तू

रमेश - कुछ कर ना वीर यार तू

वीर - अबे मैं क्या करू लोडू मैं जा रहा घूमने मेरी प्रेमिका ने बुलाया

रमेश - सही से जाना ये गांव है यहां लोग पीट देते है

वीर निकल पड़ता है बाग की तरह जहा पर पेड़ के नीचे वो लड़की बैठी इंतजार कर रही थी

वीर - सॉरी लेट हो गया मैं

अंजली - अरे लेट नही हुआ आप आ गए हम दासी के पास ये बहुत है ना

वीर - ही ही ही एक गुड न्यूज़ हम दोनो शादी करने जा रहे है

वीर कुछ और कहता तभी कुछ लोग आ गए वीर को ले कर चले गए

वीर - छोड़ दीजिए मुझे कहाँ ले कर जा रहे हो आप मुझे

तभी वीर देखता है ये कोई और नही सूर्य भान होता है

सूर्य भान - अरे लड़के तू रमेश का दोस्त हैं ना शहर का पढ़ा लिखा

वीर - हा

सूर्य भान - अब तेरी शादी होगी साक्षी और तनु से क्योकी तेरे दोस्त रमेश और राजेश जिनसे शादी होनी थी वो भाग गये

वीर – मुझे नहीं करनी शादी मेरी शादी मेरी प्रेमिका अंजली से करनी है समझे गवार

तभी वहा पर उदय भान आता है और कहता है "अंजली का बाप तो जमीदार है ना अरे सूर्य जरा बता उसको की उसकी बेटी क्या कर रही है "

देखते ही देखते वीर की दुनिया बिगड़ गई और उसकी बचपन की दोस्त उसकी प्रेमिका अब जा चुकी थी उससे दूर

जमीदार ने बहुत मारा उसको और भेज दिया अमेरिका पढ़ाई करने ।

अंजली - आप बहुत गलत कर रहे है पापा उसका दुनिया में कोई नही है मेरे सिवा

जमीदार - ठीक है तुझे उसके साथ रहना हैं ना जा यहाँ से उसके पास लेकिन याद रहे तुझे हमारे हिस्सा का एक नवा कुछ नही मिलेगा और बदले में तेरे इस आशिक को में बहुत बुरी मौत दूंगा

अंजली - आप मेरे किए का उसे क्यों दे रहे है

जमीदार - ठीक है फिर तुझे यहाँ से जाना पड़ेगा मुझे माफ कर देना बच्ची मैं एक ऐसे दल दल में फस गया हूं जहा पर मैं लाचार हूं ! तनु तेरी बहन है सगी छोटी बहन

फिर अंजली ना चाहते हुए भी अमेरिका के लिए निकल गई लेकिन उसको ये नही पता था की प्रोब्लम खुद उसके पीछे पीछे आएगी

इधर वीर ये सब बात सुन कर टूट गया उसके दिमाग में बस यही चल रहा था बहुत शौक है ना तुझे जबरदस्ती शादी करवाने का अगर तेरी बेटियों को मौत से भी ज्यादा दर्द ना दिया तो मेरा नाम भी वीर नही

और वीर ने ऐसा किया भी उसने साक्षी को सोसाइड करने तक की नौबत लाई और तनु को गरीबी भरा जीवन जीने पर मजबूर किया

वही ये सब तनु लेटे लेटे सोच रही थी तभी उसने वीर की तरफ देखा जो उसकी बेटी को जकड़ कर सोया हुआ था

तभी उसको याद आता है इसके शादी के बाद की बात

तनु और साक्षी की शादी के बाद दोनो रूम में बैठे थे तभी वीर भी आता है।

फिर वीर ने साक्षी के साथ जो सुलूह किया उस रात की तनु दंग रह गई

और साक्षी रोते हुए बस इतना पूछ रही थी आप मेरे साथ ऐसा क्यू कर रहे है मैने क्या बिगाड़ा है आप का

वीर - तू मेरी कुछ नही है याद रखना

वीर ने उसके साथ ऐसा ऐसा सुलुह किया की अब साक्षी हंसना मस्ती करना भूल गई।

लेकिन वीर तनु के साथ ऐसा कुछ नही कर सकता था लेकिन तनु के साथ उसने बदला 5 साल पहले लिया तनु को नींद की गोली मिला कर जिसके रूप में उसे काव्या मिली।

तभी साक्षी नींद में कांपने लगती है और तनु का ध्यान साक्षी पर आता है और वो भी फिर सो जाती है

तभी वीर की नजर खुलती है तो वो देखता है की साक्षी कपकपा रही थी क्यो छत पर ठंड लगती है तो वो काव्या को साक्षी को दे देता है

और साक्षी काव्या को अपने सीने से लगा लेती है जिससे उसका कापना बंद हो गया लेकिन अब वीर को नींद नही आ रही थी एक तो उसके बगल साक्षी और तनु लेटी थी एक से बढ़कर एक कसा हुआ माल

तभी वीर चुप चाप सो जाता है लेकिन उसको उलझन हो रही थी वो थोड़ा घूमने का फैसला करता है।

जैसे ही वीर उठने की कोशिश करता है वो देखता है तनु उसको घूर रही होती हैं

वीर तुरंत लेट जाता है और सो जाता है

वीर - हद है मैं अब उठ भी नहीं सकता

वीर भी चुप चाप सो जाता है और जब सुबह होती है तो वीर सो रहा होता है

तनु और साक्षी उठ जाती है

इधर नीचे भी सभी उठ गये थे

अनु - भाभी अच्छा हुआ ना दीदी आ गई अब शादी अटैंड कर के जाएंगी

निधि - बनो अच्छा तो शादी बाद होगा

अनु - क्यो

निधि - पागल शादी के बाद ही तो होगा आआअह आह धीरे दर्द हो रहा आह ओह येसस्सस फक्ककक

अनु – मुझे नहीं बात करनी आप से हटिए

तभी उनकी बात के बीच उनको आवाज आती है

कमीनी ये तेरी करतूत है

तनु - मेरी करतूत है मैं तो गई बर्तन धोने सुबह सुबह तूने किच किच की

साक्षी - बड़ी आई तू तो दूध की धुली है ना

तनु - फिर रात को तू बनाएगी खाना

अनु - भाभी सुबह हो गई

निधि - ये दोनो जितनी सुंदर उतनी बवाल दोनो हंसना भूल गई लेकिन लड़ना नही भूली

वही ये सुबह की लड़ाई सुन कर जब वीर उठता है तो वो देखता है सामने तनु बैठी थीं
 
तनु उसको तिरछी नजर से देखती है

तभी वीर की बिल्ली उठ जाती है और वो कहती गुड मॉर्निंग पपाआ

उसकी बात सुन कर साक्षी को चाय बना रही थी वो हस देती है

वीर - गुड मॉर्निंग बिल्ली

काव्या - ही ही ही ही फिर वो वीर के गले लग कर तनु की ओर भाग जाती है

तनु - मेरी बच्ची गुड मॉर्निंग

फिर काव्या साक्षी के पास चली जाती है और काव्या के जाते ही वीर तनु के पास जाता है

तनु इतनी ज्यादा सुंदर लग रही थी की उसको मन कर रहा था उसको जकड़ ले

तनु - क्या है

वीर उसकी बात सुन कर भाग जाता है किचन में

वीर किचन में जाता है जहा साक्षी बैठी थी वो उसके पास आ कर उसको देखता है

साक्षी - गुड मॉर्निंग

वीर - गुड मॉर्निंग काव्या कहाँ पर है

साक्षी - गई है फ्रेश होने तुम भी फ्रेश हो लो

वीर - मैने कुछ गडबड नही किया ना देखो तुमने कहा था गांव में कुछ मत करना

साक्षी - हा तुमने कुछ नही किया , अच्छा किया अब मैं चाय बना रही हूं तुम जाओ ब्रश करो और जो तुम सोच रहे हो वो दिमाग से निकाल दो ठरकी

वीर - तुम और तनु मुझे नहीं छोड़ोगी ना अब

तनु - आज पता चल जाएगा तुमको

तभी घर के बाहर एक ऑडी कार आ कर रुकती है जिसमें से एक लड़का और एक लड़की बाहर आते है

लडका - मेरे भाई वीर हम आ गए चल बाहर

वीर शोर सुन कर बाहर आता है और देखता है सामने एक लेडी और एक लड़का खड़ा था

वीर - कोन

लडकी - अपनी अंजली को भूल गए तुम तो हा

रमेश - भाई तू भी ना यार बहुत फनी है बदला नही जरा भी

रमेश - हमने तुझे जितना जलील करने को कहा उतना जलील किया आखिर तूने अपनी दोनो वाइफ को हा

अंजली - छोड़ो ये बात अब हम आ गए चलो अब चलते हैं यहां से दूर अपनी प्यार की दुनिया में

वीर - मेरी दुनिया ऊपर छत पर खेल रही है और बाकी दोनो खाना बना रही है तुम लौट जाओ अपनी दुनिया में

अंजली - तुम ये क्या कह रहे हो हा वीर होश में आओ तुम्हारे सामने मैं हूं अंजली तुम्हारी अंजली जिसने तुम्हरा हमेशा साथ दिया या है ना मेरे कहने पर तुम क्या क्या करते थे

वीर - निकल जाओ यहा से

तभी रमेश उसको पकड़ लेता है और कहता है भोसडी के लन्ड सी शकल के तेरा दिमाग काम नही कर रहा है क्या

अंजली - होश में रहो समझे रमेश

तभी वीर आगे आने लगता है तो अंजली उसको पकड़ लेती हैं कहती है क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करते हा

इतने मे रमेश उसको थप्पड़ मार देता है और कहता है तू अंदर जा अंजली इसे मैं समझा दूंगा

रमेश - साले जिस थाली में खायगा उसी मे छेद करेगा हा तुझे याद है तूने क्या क्या किया अंजली के लिया हां

रमेश - साले तू घटिया इंसान किसी भी लड़की के लायक नही है चुप चाप चलता है अंजली के साथ या दूसरा रास्ता अपना ना पड़ेगा हमे

वीर - गिरा हुआ तो तू है साले उससे भी गिरी हुई है ये लड़की अंजली मुझे केवल मेरी फैमिली से मतलब है बस

रमेश - तू किसी का नही हो सकता बे, चोट ने तुझे मर्द से छक्का बना दिया। आज तुझे वो मिल रही है तो इतनी सान पट्टी कर रहा है। अबे इतना ही प्यार था तो तूने तनु के साथ क्या किया पता है ना नींद मैं, जिसका नतीजा है काव्या और उसको भीख मांगने पर मजबूर किया

रमेश - साक्षी के साथ याद है हर दिन उसको मारता पीट देता क्युकी वो सीधी थी तू प्यार के लायक नही है साले तुझे कदर नही है किसी इंसान की

रमेश - कहा है तेरी पत्नी जिसके लिए इतना बोल रहा है तू तुझे उनसे इतना ही प्यार हैं क्यों किया उनके साथ ऐसा सुलह

वीर - तू कोन होता है पूछने वाला तेरे साथ क्यो आई अंजली! और मैं नही जानता निकलो यहाँ से में किसी के लायक नही हूं तो निकलो इतने साल से नही आए तो अब भी मत आओ।

रमेश - इतना ही घमंड है अपनी सुन्दरता पर रुक इसको ही छीन लेता हु

इतने में रमेश गरम पानी उठा लेता है और कोई कुछ बोलता उसके पहले रमेश पानी वीर के ऊपर फेक देता है

वही ये सब ऊपर से साक्षी और तनु देख रही थी और पीछे से काव्या ये सब देख रही थी

काव्या - पापा

तभी तनु काव्या को अंदर भेज देती है और चुप चाप वो दोनो नीचे आने लगती है

जिनको देख कर रमेश कहता है तुम दोनो डिवॉस के कागज साइन करो और जाओ

साक्षी - पानी क्यो फेका

रमेश - तुम मेरी पत्नी होने वाली थी याद है ना डिवॉस दे दो फिर मैं तुमको अपना बना लूंगा तनु राण्ड

इतने मे रमेश को अपने चहरे मैं गरम पानी फील हुआ रमेश - आह किसने किया ये मादरचोद

इतने मे रमेश को एक बार और गर्म पानी फील हुआ जिसको किसी और ने नहीं अंजली ने फेका था

अंजली - वो रांड़ नही है समझे राड तेरी मां थी जो मेरे बाप के साथ सोने आई थी मेरी बहन के पाव के धूल जितनी भी नही है वो समझी

इतना कांड हो रहा था तभी वीर का दिमाग ब्लास्ट हो गया (बहन चोद हो क्या रहा है ये कोई कुछ बोल रहा कोई कुछ, मैं रीडर का दिमाग चोद के बराबर कर दूंगा )
 
इतना कांड हो रहा था तभी वीर का दिमाग ब्लास्ट हो गया (बहन चोद हो क्या रहा है ये कोई कुछ बोल रहा कोई कुछ, मैं रीडर का दिमाग चोद के बराबर कर दूंगा )

वही ये सुन कर तनु राखी को देखती हैं

राखी मुंह छिपा कर चुप चाप बैठ गई

तनु - शर्म नही आई ना मेरी जिंदगी बर्बाद करने में

अंजली - नही आई। क्यो आएगी मेरा पास एक ही ऑप्शन थे तुम सब की शादी करा दूं और खुद चली जाऊ तो मैने ऐसा किया लेकिन फिर रमेश भी अमेरिका आया उसको वहा देख कर मैं शॉक्ड हो गई।

अंजली - फिर रमेश से मुझे पता चला की उसका मां। मेरे बाप की रखैल थी उसने मुझे धमकी दी और ये सब करवाना पर मजबूर किया तो मैने किया

तनु - कैसी धमकी

अंजली - तुम सब की जान की धमकी तो मैं भी लड़की थी क्या करती डर गई, तो समझ आया वो किया। फिर मेरी इससे डील हुई की में सारी प्रॉपर्टी इसके नाम कर दूंगी बदले में ये तुम्हे आजाद कर दे।

अंजली - लेकिन आधी प्रॉपर्टी तो तुम्हारे नाम पर थी तो इसने वीर से कॉन्टेक्ट करवाया और मुझसे तुम सब को जलील करवाया लेकिन फिर अचानक से वीर का एक्सीडेंट हो गया और वीर ने इसका साथ छोड़ दिया और तुम सब के आगे पीछे घूमने लगा।

रमेश - ही ही ही ही सच्चाई जान गई लेकिन हमारे प्लान को सक्सेसफुल बनाने वाला तो साक्षी का बाप भी था उसी के वजह से ये सफल हो पाया आखिर इसने ही तो वीर से शादी करवाने का आइडिया दिया क्युकी इसको भी आधी प्रॉपर्टी चाहिए थी हवस में इसको भी घेर लिया था

अनु - भगवान कभी तुझे खुश नही रखेगा रमेश

रमेश - मेरी छोड़ बन्नो तू अपनी देख वीर तो हमारा साथी है उसको सारा प्लान पता था ही ही ही लेकिन तू अपनी देख तेरा बाप तो शादी भी राजेश से करा रहा था लेकिन अब बहुत इंतजार कर लिया

अंजलि - हम तुझे अपना हिस्सा नही देंगे

रमेश ने अपनी बंदूक वीर की तरफ कर दी और बोला मुझे नहीं पता तू कोन है लेकिन इतना जरूर जानता हूं तू वीर तो बिल्कुल नही है

काव्या - पापा को मत मारो मारो पापा

रमेश - सब की जान एक ही तोते मे बस्ती है ना अब तोता ही खतम होगा।

तनु - तुझे हिस्सा चाहिए ना

रमेश - हा

तनु - हम देने को तैयार है।

रमेश - पंडित को बुलाओ और शादी रचाओ तुम आज क्युकी तुम्हारे बाप ने मरते मरते वसीयत की मां चोद दी थी। तुम्हारे बाप ने वसीयत में लिखा की तुम्हारी प्रॉपर्टी शादी के बाद ही तुम्हरे नाम पर होगी।

तभी रमेश बोलता है किस्से शादी करनी है जल्दी करो और तुम्हारी तो हो गई है। अंजली तुम दोनो भी करो और फिर वसीयत पर सिग्नेचर करो और अगर 10 मिनट मैं शादी शुरू नही हुई तो मैं ही ही ही

इधर वीर से मतलब ही नहीं था यह क्या हो रहा है क्या होगा

तभी सूर्यभान साक्षी और तनु के आगे आ कर हाथ फैला देता है और कहता है मुझे माफ कर दो।

पंडित - जल्दी बोलिए किसकी शादी करवानी है

वीर - मैयत करवानी है मेरी

तनु और साक्षी एक दूसरे की तरफ देखती है

साक्षी - डायन देख तूने क्या करवा दिया एक मौका देने की बात हुई थी एक और आ गई

तनु - मुझे तो जैसे सपना आया था ना अरे मुझे क्या पता था ये अलग ही कांड करेगा

तभी साक्षी कहती है तनु

तनु - जा

साक्षी - पल्लू सही करो

तनु आस पास देखती है तो पाती है वीर उसको ही घूर रहा है

तनु - मेरी आधी जिंदगी तो इसने झाट कर दी है इसको ऐसे टाइम पर भी सुकून नही है

तभी जब अंजली की शादी होने जा रही थी तभी अनु बोलती है ये तो गलत है ना सब बहन की शादी एक लड़के से हो रही है

साक्षी - बेटा हो नही रही करनी पड़ रही है सामने देख, अब होने दे वर्ना यही से जनाजा उठ जाएगा

अनु - जब सब बहन एक साथ रहेगी तो मैं अलग क्यो जाऊ। मुझे भी वीर से शादी करनी है वैसे भी पिता जी ने तो मुझे मारने का प्लान बना रखा है

फिर अंजली के बगल अनु भी आ जाती है

रमेश - अब शुरू करो शादी और मैं ज़्यादाद लूं फिर मुझे नही मतलब किसी चीज से

पंडित - जजमान वीर आप आगे क्यो नही बढ़ रहे

तभी वीर को याद आता है की उसकी शादी तो हुई ही नहीं है तनु और साक्षी से तो वो कहता है मैं शादी तभी करूंगा जब साक्षी और तनु दोनो शादी करेंगे साथ मैं

रमेश - बहन चोद ये क्या नाटक चला रहा है KBC चल रहा है क्या?

लेकिन फिर साक्षी और तनु आगे आ जाती है और शादी होती है और रमेश प्रॉपर्टी ले कर चला जाता है.....

लेकिन फिर साक्षी और तनु आगे आ जाती है और शादी होती है और रमेश प्रॉपर्टी ले कर चला जाता है.....

तभी शादी होने के बाद वीर लंगड़ाते हुए ऊपर जाने लगता है उसका पूरा चेहरा लाल हुआ पड़ा था पीठ भी जल गई थी।

वीर ऊपर आ कर चुप चाप क्रीम लगाने लगता है तभी तनु और साक्षी आती है जिसको देख कर वीर डर जाता है

तनु - नही छोडूंगी तुमको डरो मत लेकिन मुझे तुमसे प्यार नहीं है जो है वो सिर्फ नफरत है पुराने पास्ट को ले कर तो और है अगर तुम मैं इतनी हिम्मत है तो हमे मना सको तो मना लो...

तभी तनु और साक्षी का ध्यान काव्या पर जाता है तो देखती है तो वो उन दोनो से बात नही कर रही थी उल्टा दूर जा रही थी वो बस वीर की गोद में बैठी क्रीम लगा रही थी।

तनु - क्या हुआ बेटा

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तभी तनु और साक्षी का ध्यान काव्या पर जाता है तो देखती है तो वो उन दोनो से बात नही कर रही थी उल्टा दूर जा रही थी वो बस वीर की गोद में बैठी क्रीम लगा रही थी।

तनु - क्या हुआ बेटा

अब आगे

साक्षी - बेटा जरा आप नानी के साथ जा कर खेलोगी

तभी ऊपर अंजलि आती है और तनु उससे कहती है अब बोल रण्डी क्या बक रही थी नीचे बंदूक दिखा कर

वही ये सुन कर अनु बेचारी डर जाती है और चुप चाप बैठ जाती है कोने में तभी वो ध्यान देती हैं उसके बगल चुपके से वीर छिपा बैठा है

तभी वो दोनो अपना ध्यान तनु पर लगाते हैं

साक्षी - हम दोनो ने क्या इधर ट्रस्ट चला रखा है कोई भी आएगा और हमारे पति से शादी कर लेगा अब सच सच बता

तभी अंजलि कहती है वाह अकड़ तो देखो तुम दोनो की, तुम दोनो की जिंदगी जहन्नुम कर दी थी मैंने लेकिन अकड़ नही गई हा।

अंजलि - इस बक्चोद के साथ रहने का मुझे भी कोई शौक नही है समझी लेकिन मुझे मेरी प्रॉपर्टी चाहिए वही लेने आई हूं मैं

साक्षी - कमीनी दिखा दी ना अपनी औकात

अंजलि - हा किया मैने ये सब, रमेश मेरा भाई है हमने ये सब बस पैसे के लिए किया लेकिन वीर की खानदानी प्रॉपर्टी वीर की शादी के बाद उसकी पत्नी के नाम हो गई यानी मेरी अब मुझे किसी चीज से नही मतलब

तनु - गंदे खून का नतीजा अच्छा तो कभी हो ही नहीं सकता मुझे यही उम्मीद थी तेरे से

साक्षी - बहस बंद करो तुमको प्रोपर्टी चाहिए थी तो मुझे बताया होता मैं पहले ही दे देती ये इतना लंबा चौड़ा नाटक क्या करना

तभी साक्षी वीर को आवाज लगाती है

वीर आता है साक्षी उससे कहती है इन सब कागज पर सिग्नेचर करो

उसकी बात मान कर वीर चुप चाप सिग्नेचर कर देता है तभी अंजलि कहती है थैंक्यू

अंजलि - अब मैं जाती हूं

तनु - इतनी भी जल्दी क्या है

अंजलि - क्या मतलब

तनु - उसके सामने डिवॉस पेपर रख देती है और कहती है अब इस पर सिग्नेचर करो और फिर तुम्हरा वीर से सारा रिश्ता खत्म

अंजलि हँसते हुआ सिग्नेचर कर देती है और चली जाती है

साक्षी - साली रण्डी

तनु - अनु का क्या करना है

तभी उन दोनो का ध्यान अनु पर जाता है जिसको किसी बात से मतलब ही नहीं था

साक्षी - इसको तो किसी चीज से मतलब ही नहीं है ये पिक क्लिक कर रही है

तनु - अनु इधर आओ

अनु - हा दीदी

साक्षी - वीर से शादी के लिया हा क्यो की

अनु - क्या करती मैं मेने देखा पापा को किसी और के साथ मरने से अच्छा है अपनी बहनों के साथ ही रह लूं

तभी अनु कहती है दीदी आपने अंजली को इतनी जल्दी तलाक दे कर क्यो भगा दिया और आपको कैसे पता चला

तनु - हाथ में उसके हीरे की रिंग थी और अगर कोई किसी से प्यार करता है तो 17 साल इंतजार नही करता और उनकी नजर वीर की खानदानी जमीन पर थी जो वो लेकर गए।

साक्षी - और भागने के पीछे की वजह हैं काव्या उसके लिए उसके पापा बेस्ट और हम किसी बाहरी को नही आने देंगे जिससे उसका दिल टूटे तू अगर बहन नही होती तो तेरा भी यही हाल करते।।

अनु - मुझे मत चाटो

तनु - इसको रहने का तरीका सिखा दो

साक्षी - समझ जाएगी खुद ही

तभी वीर रूम से बाहर आता है और कहता है क्या हम सब घर चले अब शहर

तनु उसको इग्नोर कर के रूम में चली जाती है खाना बनाने चली जाती है

उसके बाद अनु सोचती है रहने का तरीका मतलब कहना क्या चाहती हैं

तभी वीर को देख कर वो भी उसको अनदेखा कर के चली जाती है

तभी साक्षी उसके पास आ जाती है और कहती है तुम्हारा घर तो अंजली का हो गया और तुम्हारा टूर का बिजनेस भी

तभी वीर ये सुन कर उदास हो जाता है

और अनु साक्षी को भी ले कर चली जाती है

तनु - बता दिया

अनु - हा दीदी ने बता दिया

तभी तनु की नज़र वीर पर पड़ती है जो एक कोने चुप चाप उदास बैठा हुआ था

साक्षी भी उसको देखती है तो उसे अच्छा नही लग रहा था

अनु - आप लोग उसे क्यों देख रही हो सुना नही था क्या अगर वीर पहले जैसा होता ना तो अब तक ये भी हमे छोड़ कर प्रोपर्टी ले कर चला जाता अंजली के साथ, तब ये अंजली का ही राग जपता और ये एक तो पता नही कोन है कोनसा वीर है भले ही ये बदल गया बट रहेगा तो वीर ही।

और ये बात सच भी थी वीर पहले जैसा होता तो बहुत चीज बदल चुकी होती

तभी साक्षी कहती है बस करो अनु बहुत बोल ली तुम्हारा तो पति है ना और जैसा भी है कोई भी है कोशिश तो कर रहा है ना वो साथ पाने की तुम्हारा भी साथ दिया ना उसने इतना ही नफरत है तो उसके नाम का सिंदूर क्यों लगा ली

अब अनु चुप हो गई तभी तनु कहती है जाओ जरा काव्या को बुला कर ले आओ और डरो मत

अनु भाग जाती है जल्दी काव्या को लाने
 
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