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मैं और मेरे बेटा बेटी
मेरे पति के गुजरने के बाद मैं और मेरा बेटा बेटी ही थे. दोनों जवान हो गये थे. एक दिन मैंने घर में कुछ ऐसा देखा कि मैं हैरान परेशान हो गयी. क्या देखा मैंने अपने घर में?
मैं मीरा आप लोगों के साथ जो कहानी शेयर करने जा रही हूं वो एक कहानी नहीं है बल्कि एक अनकही घटना है जिसको मैं फ्री सेक्स कहानी के माध्यम आप लोगों के साथ साझा कर रही हूं. इस साईट पर सेक्सी कहानियां हिंदी में प्रकाशित होती हैं.
यह सब घटना मेरी जानकारी के बाहर हो रही थी. मुझे तो ये सब बाद में पता लगा था. मुझे इस खेल की किसी ने भनक भी नहीं लगने दी. इस कहानी को लिखने में ही मुझे काफी समय लग गया.
मैं बहुत परेशान हूं कि आखिर मेरे घर में ऐसा कैसे हो गया. अब मैं इस समस्या का समाधान खोज रही हूं इसलिए इस घटना को मैंने कहानी के रूप में लिखा है. आप कहानी को पूरा पढ़ें और फिर अपने विचार बतायें.
मेरी उम्र 38 साल है. मेरे पति की मृत्यु हो चुकी है. मेरा एक बेटा और एक बेटी है. बेटा 22 साल का है और बेटी 19 साल की है. मेरे पति के छोड़कर जाने के बाद घर में हम तीन लोग ही रहते हैं. मेरे बेटे का नाम करण है और बेटी का नाम नेहा है.
हम लोग बिहार के मोतिहारी जिले के रहने वाले हैं. मगर इस समय हम लोग महाराष्ट्र के पुणे में रहते हैं. मेरे पति की जॉब के कारण हम लोग बिहार से महाराष्ट्र में आ गये थे.
यहां शहर में आने के बाद मेरे पति ने शराब पीना शुरू कर दिया था. उसके बाद वो सारे पैसे को शराब में ही उड़ाने लगे थे. इससे उनकी तबियत भी खराब रहने लगी. उनके इलाज में फिर हमारे गांव के खेत भी बिक गये.
मेरे पति सुबह-शाम शराब पीते रहते थे. शराब के लत के कारण एक भी पैसा नहीं बचा था हमारे पास. सब कुछ गंवाने के बाद भी मैं उनको नहीं बचा पाई. अपने घर की इस हालत के लिए जिम्मेदार मैं अपने पति को ही मानती हूं. अगर हमारे गांव के खेत न बिके होते तो मैं अपना गुजर-बसर गांव में खेतों के सहारे ही कर लेती.
पति की मौत के बाद किसी तरह से मैंने बेटे को ग्रेजुएशन करवाई. उसने मोटर पार्ट्स का काम सीख लिया. उसको पच्चीस हजार सैलरी मिलने लगी थी. वो मुंबई में अपने दोस्त के पास रह कर काम कर रहा था. हम लोगों को पैसे भेज दिया करता था.
मेरी बेटी अभी पढ़ाई कर रही थी. पैसा उसी के अकाउंट में आता था. दो साल के बाद जब घर आया तो करण अब जवान होकर एकदम से मर्द बन गया था. मैं उसको देख कर खुश हो गई थी कि मेरा बेटा इतना बड़ा हो गया है. मैं सोच रही थी कि उसकी शादी कर दूंगी कुछ महीने के बाद.
मैंने करण से शादी की बात की तो वो बोला कि पहले घर बनवाना है. उसके बाद मैं खुद ही शादी कर लूंगा.
इसी बीच कुछ ऐसा हो गया था जो मुझे बहुत परेशान करने लगा था. मुझे इस बात के बारे में बाद में पता चला था. करण ने ही मुझे बताया था.
बात ऐसे हुई कि एक दिन करण घर में सो रहा था. रात के 11 बजे थे. उसको पेशाब लगी तो वो उठा और फिर उसको कुछ आहट सुनाई दी. उसने पीछे गाय वाले तबेले में जाकर देखा तो नेहा एक लड़के के साथ (सेक्स करने में) लगी हुई थी. उसने नेहा को एक झापड़ मारा और उसको वहां से अंदर वापस लेकर आ गया.
उस समय करण ने नेहा को डांटा और कहा- इतनी मेहनत करके मैं पैसा जमा करके तुमको पढ़ा रहा हूं. तुम ये सब कर रही हो?
नेहा चुपचाप खड़ी होकर सब कुछ सुन रही थी. डांटते हुए करण की नजर नेहा को देख रही थी. पता नहीं देखते देखते उसके मन में कुछ अजब विचार आने लगे.
वह नेहा की चूचियों को घूरने लगा. फिर वो उसको समझाने के लिए अंदर लेकर आ गया. उसको बिठा कर समझाने लगा लेकिन उसकी नजर उसकी चूचियों से हट नहीं रही थी. धीरे धीरे उसका मन अपनी बहन की चुदाई के लिए करने लगा.
उसने नेहा के कांधे पर हाथ रख कर कहा- मैं तुम्हारे लिये ही ये सब कर रहा हूं.
वो उसके कंधे को सहलाते हुए बोला- तुम जो कहोगी वो मैं करने के लिए तैयार हूं. अगर तुम्हें ये सब करना ही है तो मेरे साथ ही कर लो. घर की इज्जत को इस तरह से क्यों बाजार में बेच रही हो?
नेहा करण की ओर हैरानी से देखने लगी. तभी करण ने नेहा के हाथ में 20 हजार रुपये रख दिये. छोटी उम्र में इतने सारे पैसे देख कर नेहा की आंखें खुली की खुली रह गयीं.
करण उसकी कमर को सहलाते हुए बोला- ये बात तुम्हारे और मेरे बीच में ही रहेगी.
नेहा ने हां में गर्दन हिला दी.
फिर वो उसके बालों को सहलाने लगा.
वो बोला- तुम बहुत खूबसूरत हो.
उसने अपनी बहन के गालों को सहलाते हुए उसकी चूचियों को छेड़ना शुरू कर दिया. धीरे धीरे फिर उसने नेहा के कपड़े भी खोलना शुरू कर दिये.
मेरे पति के गुजरने के बाद मैं और मेरा बेटा बेटी ही थे. दोनों जवान हो गये थे. एक दिन मैंने घर में कुछ ऐसा देखा कि मैं हैरान परेशान हो गयी. क्या देखा मैंने अपने घर में?
मैं मीरा आप लोगों के साथ जो कहानी शेयर करने जा रही हूं वो एक कहानी नहीं है बल्कि एक अनकही घटना है जिसको मैं फ्री सेक्स कहानी के माध्यम आप लोगों के साथ साझा कर रही हूं. इस साईट पर सेक्सी कहानियां हिंदी में प्रकाशित होती हैं.
यह सब घटना मेरी जानकारी के बाहर हो रही थी. मुझे तो ये सब बाद में पता लगा था. मुझे इस खेल की किसी ने भनक भी नहीं लगने दी. इस कहानी को लिखने में ही मुझे काफी समय लग गया.
मैं बहुत परेशान हूं कि आखिर मेरे घर में ऐसा कैसे हो गया. अब मैं इस समस्या का समाधान खोज रही हूं इसलिए इस घटना को मैंने कहानी के रूप में लिखा है. आप कहानी को पूरा पढ़ें और फिर अपने विचार बतायें.
मेरी उम्र 38 साल है. मेरे पति की मृत्यु हो चुकी है. मेरा एक बेटा और एक बेटी है. बेटा 22 साल का है और बेटी 19 साल की है. मेरे पति के छोड़कर जाने के बाद घर में हम तीन लोग ही रहते हैं. मेरे बेटे का नाम करण है और बेटी का नाम नेहा है.
हम लोग बिहार के मोतिहारी जिले के रहने वाले हैं. मगर इस समय हम लोग महाराष्ट्र के पुणे में रहते हैं. मेरे पति की जॉब के कारण हम लोग बिहार से महाराष्ट्र में आ गये थे.
यहां शहर में आने के बाद मेरे पति ने शराब पीना शुरू कर दिया था. उसके बाद वो सारे पैसे को शराब में ही उड़ाने लगे थे. इससे उनकी तबियत भी खराब रहने लगी. उनके इलाज में फिर हमारे गांव के खेत भी बिक गये.
मेरे पति सुबह-शाम शराब पीते रहते थे. शराब के लत के कारण एक भी पैसा नहीं बचा था हमारे पास. सब कुछ गंवाने के बाद भी मैं उनको नहीं बचा पाई. अपने घर की इस हालत के लिए जिम्मेदार मैं अपने पति को ही मानती हूं. अगर हमारे गांव के खेत न बिके होते तो मैं अपना गुजर-बसर गांव में खेतों के सहारे ही कर लेती.
पति की मौत के बाद किसी तरह से मैंने बेटे को ग्रेजुएशन करवाई. उसने मोटर पार्ट्स का काम सीख लिया. उसको पच्चीस हजार सैलरी मिलने लगी थी. वो मुंबई में अपने दोस्त के पास रह कर काम कर रहा था. हम लोगों को पैसे भेज दिया करता था.
मेरी बेटी अभी पढ़ाई कर रही थी. पैसा उसी के अकाउंट में आता था. दो साल के बाद जब घर आया तो करण अब जवान होकर एकदम से मर्द बन गया था. मैं उसको देख कर खुश हो गई थी कि मेरा बेटा इतना बड़ा हो गया है. मैं सोच रही थी कि उसकी शादी कर दूंगी कुछ महीने के बाद.
मैंने करण से शादी की बात की तो वो बोला कि पहले घर बनवाना है. उसके बाद मैं खुद ही शादी कर लूंगा.
इसी बीच कुछ ऐसा हो गया था जो मुझे बहुत परेशान करने लगा था. मुझे इस बात के बारे में बाद में पता चला था. करण ने ही मुझे बताया था.
बात ऐसे हुई कि एक दिन करण घर में सो रहा था. रात के 11 बजे थे. उसको पेशाब लगी तो वो उठा और फिर उसको कुछ आहट सुनाई दी. उसने पीछे गाय वाले तबेले में जाकर देखा तो नेहा एक लड़के के साथ (सेक्स करने में) लगी हुई थी. उसने नेहा को एक झापड़ मारा और उसको वहां से अंदर वापस लेकर आ गया.
उस समय करण ने नेहा को डांटा और कहा- इतनी मेहनत करके मैं पैसा जमा करके तुमको पढ़ा रहा हूं. तुम ये सब कर रही हो?
नेहा चुपचाप खड़ी होकर सब कुछ सुन रही थी. डांटते हुए करण की नजर नेहा को देख रही थी. पता नहीं देखते देखते उसके मन में कुछ अजब विचार आने लगे.
वह नेहा की चूचियों को घूरने लगा. फिर वो उसको समझाने के लिए अंदर लेकर आ गया. उसको बिठा कर समझाने लगा लेकिन उसकी नजर उसकी चूचियों से हट नहीं रही थी. धीरे धीरे उसका मन अपनी बहन की चुदाई के लिए करने लगा.
उसने नेहा के कांधे पर हाथ रख कर कहा- मैं तुम्हारे लिये ही ये सब कर रहा हूं.
वो उसके कंधे को सहलाते हुए बोला- तुम जो कहोगी वो मैं करने के लिए तैयार हूं. अगर तुम्हें ये सब करना ही है तो मेरे साथ ही कर लो. घर की इज्जत को इस तरह से क्यों बाजार में बेच रही हो?
नेहा करण की ओर हैरानी से देखने लगी. तभी करण ने नेहा के हाथ में 20 हजार रुपये रख दिये. छोटी उम्र में इतने सारे पैसे देख कर नेहा की आंखें खुली की खुली रह गयीं.
करण उसकी कमर को सहलाते हुए बोला- ये बात तुम्हारे और मेरे बीच में ही रहेगी.
नेहा ने हां में गर्दन हिला दी.
फिर वो उसके बालों को सहलाने लगा.
वो बोला- तुम बहुत खूबसूरत हो.
उसने अपनी बहन के गालों को सहलाते हुए उसकी चूचियों को छेड़ना शुरू कर दिया. धीरे धीरे फिर उसने नेहा के कपड़े भी खोलना शुरू कर दिये.