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Incest मैं और मेरे बेटा बेटी complete

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Guest
मैं और मेरे बेटा बेटी

मेरे पति के गुजरने के बाद मैं और मेरा बेटा बेटी ही थे. दोनों जवान हो गये थे. एक दिन मैंने घर में कुछ ऐसा देखा कि मैं हैरान परेशान हो गयी. क्या देखा मैंने अपने घर में?

मैं मीरा आप लोगों के साथ जो कहानी शेयर करने जा रही हूं वो एक कहानी नहीं है बल्कि एक अनकही घटना है जिसको मैं फ्री सेक्स कहानी के माध्यम आप लोगों के साथ साझा कर रही हूं. इस साईट पर सेक्सी कहानियां हिंदी में प्रकाशित होती हैं.

यह सब घटना मेरी जानकारी के बाहर हो रही थी. मुझे तो ये सब बाद में पता लगा था. मुझे इस खेल की किसी ने भनक भी नहीं लगने दी. इस कहानी को लिखने में ही मुझे काफी समय लग गया.

मैं बहुत परेशान हूं कि आखिर मेरे घर में ऐसा कैसे हो गया. अब मैं इस समस्या का समाधान खोज रही हूं इसलिए इस घटना को मैंने कहानी के रूप में लिखा है. आप कहानी को पूरा पढ़ें और फिर अपने विचार बतायें.

मेरी उम्र 38 साल है. मेरे पति की मृत्यु हो चुकी है. मेरा एक बेटा और एक बेटी है. बेटा 22 साल का है और बेटी 19 साल की है. मेरे पति के छोड़कर जाने के बाद घर में हम तीन लोग ही रहते हैं. मेरे बेटे का नाम करण है और बेटी का नाम नेहा है.

हम लोग बिहार के मोतिहारी जिले के रहने वाले हैं. मगर इस समय हम लोग महाराष्ट्र के पुणे में रहते हैं. मेरे पति की जॉब के कारण हम लोग बिहार से महाराष्ट्र में आ गये थे.

यहां शहर में आने के बाद मेरे पति ने शराब पीना शुरू कर दिया था. उसके बाद वो सारे पैसे को शराब में ही उड़ाने लगे थे. इससे उनकी तबियत भी खराब रहने लगी. उनके इलाज में फिर हमारे गांव के खेत भी बिक गये.

मेरे पति सुबह-शाम शराब पीते रहते थे. शराब के लत के कारण एक भी पैसा नहीं बचा था हमारे पास. सब कुछ गंवाने के बाद भी मैं उनको नहीं बचा पाई. अपने घर की इस हालत के लिए जिम्मेदार मैं अपने पति को ही मानती हूं. अगर हमारे गांव के खेत न बिके होते तो मैं अपना गुजर-बसर गांव में खेतों के सहारे ही कर लेती.

पति की मौत के बाद किसी तरह से मैंने बेटे को ग्रेजुएशन करवाई. उसने मोटर पार्ट्स का काम सीख लिया. उसको पच्चीस हजार सैलरी मिलने लगी थी. वो मुंबई में अपने दोस्त के पास रह कर काम कर रहा था. हम लोगों को पैसे भेज दिया करता था.

मेरी बेटी अभी पढ़ाई कर रही थी. पैसा उसी के अकाउंट में आता था. दो साल के बाद जब घर आया तो करण अब जवान होकर एकदम से मर्द बन गया था. मैं उसको देख कर खुश हो गई थी कि मेरा बेटा इतना बड़ा हो गया है. मैं सोच रही थी कि उसकी शादी कर दूंगी कुछ महीने के बाद.

मैंने करण से शादी की बात की तो वो बोला कि पहले घर बनवाना है. उसके बाद मैं खुद ही शादी कर लूंगा.

इसी बीच कुछ ऐसा हो गया था जो मुझे बहुत परेशान करने लगा था. मुझे इस बात के बारे में बाद में पता चला था. करण ने ही मुझे बताया था.

बात ऐसे हुई कि एक दिन करण घर में सो रहा था. रात के 11 बजे थे. उसको पेशाब लगी तो वो उठा और फिर उसको कुछ आहट सुनाई दी. उसने पीछे गाय वाले तबेले में जाकर देखा तो नेहा एक लड़के के साथ (सेक्स करने में) लगी हुई थी. उसने नेहा को एक झापड़ मारा और उसको वहां से अंदर वापस लेकर आ गया.

उस समय करण ने नेहा को डांटा और कहा- इतनी मेहनत करके मैं पैसा जमा करके तुमको पढ़ा रहा हूं. तुम ये सब कर रही हो?

नेहा चुपचाप खड़ी होकर सब कुछ सुन रही थी. डांटते हुए करण की नजर नेहा को देख रही थी. पता नहीं देखते देखते उसके मन में कुछ अजब विचार आने लगे.

वह नेहा की चूचियों को घूरने लगा. फिर वो उसको समझाने के लिए अंदर लेकर आ गया. उसको बिठा कर समझाने लगा लेकिन उसकी नजर उसकी चूचियों से हट नहीं रही थी. धीरे धीरे उसका मन अपनी बहन की चुदाई के लिए करने लगा.

उसने नेहा के कांधे पर हाथ रख कर कहा- मैं तुम्हारे लिये ही ये सब कर रहा हूं.

वो उसके कंधे को सहलाते हुए बोला- तुम जो कहोगी वो मैं करने के लिए तैयार हूं. अगर तुम्हें ये सब करना ही है तो मेरे साथ ही कर लो. घर की इज्जत को इस तरह से क्यों बाजार में बेच रही हो?

नेहा करण की ओर हैरानी से देखने लगी. तभी करण ने नेहा के हाथ में 20 हजार रुपये रख दिये. छोटी उम्र में इतने सारे पैसे देख कर नेहा की आंखें खुली की खुली रह गयीं.

करण उसकी कमर को सहलाते हुए बोला- ये बात तुम्हारे और मेरे बीच में ही रहेगी.

नेहा ने हां में गर्दन हिला दी.

फिर वो उसके बालों को सहलाने लगा.

वो बोला- तुम बहुत खूबसूरत हो.

उसने अपनी बहन के गालों को सहलाते हुए उसकी चूचियों को छेड़ना शुरू कर दिया. धीरे धीरे फिर उसने नेहा के कपड़े भी खोलना शुरू कर दिये.
 
उसने अपनी बहन की चूचियों को नंगी कर दिया. नेहा की चूचियां कली की तरह कोमल सी थीं. फिर करण ने उनको धीरे धीरे से दबाना और सहलाना शुरू कर दिया. फिर उसने एक चूची को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.

नेहा अभी 19 साल की होने को ही थी इसलिए सेक्स में ज्यादा मैच्योर नहीं हो पाई थी. उसको शायद पैसे का लालच आ गया था या फिर उसके जिस्म में भी अपने भाई के लिए सेक्स पैदा हो गया था. बहन की चूत भाई का लंड लेने के लिए तैयार हो गयी थी.

करण भी अपने मकसद में कामयाब हो रहा था. उसने अपनी बहन को पूरी नंगी कर दिया. करण, जो कि एक भारी भरकम मर्द बन चुका था, नेहा उसके सामने बच्ची ही लग रही थी. वो अपनी बहन को चोद देने के लिए काफी उत्तेजित था. इधर नेहा भी अपने भाई के शरीर को देख कर अपनी चूत गर्म करने लगी थी.

फिर करण ने अपने कपड़े भी उतार दिये. वो दोनों भाई-बहन नंगे हो गये थे. उसके बाद करण ने अपनी बहन की चूत को चाटा तो नेहा एकदम से पागल सी हो गयी. करण ने नेहा की चूत में जीभ दे दी और उसको जोर से चूसने लगा.

कुछ ही देर में नेहा खुद ही उससे चुदने के लिए कहने लगी. करण भी यही चाह रहा था. उसने अपनी बहन की चूत में लंड को रखा और धक्का दे दिया. उसका लंड नेहा की चूत में घुस गया. नेहा अपने भाई के लंड को बर्दाश्त बहुत मुश्किल से ही कर पाई लेकिन जल्दी ही उसको चूत मरवाने में मजा आने लगा.

करण अपनी बहन की चूत को चोदने लगा. उसने उसकी चूत में जमकर लंड पेला और फिर उसकी चूत में ही झड़ गया. उस रात करण ने नेहा की चूत चार बार चोदी.

अगली सुबह मैंने (मीरा ने) देखा कि नेहा ठीक से चल भी नहीं पा रही थी. मैंने पूछा कि क्या हुआ, तो वो बोली कि उसका अंडरवियर साइड से फट गया है इसलिए उसको चलने में दिक्कत हो रही है.

उस रात ने हमारे घर का माहौल बदल दिया. अब नेहा खुद ही अपने भाई से चुदने लगी थी. मेरी बेटी अपने भाई का लंड चूत में लेने के लिए खुद ही उसको बुला लिया करती थी. करण भी जहां एक महीने के लिए घर आया था, इस घटना के बाद वो ढाई महीने घर में रुका और उसने रोज अपनी बहन की चुदाई की.

मेरी आंखों के सामने ही नेहा के शरीर में परिवर्तन साफ दिखाई देने लगा था. उसकी गांड और चूची अब पहले से ज्यादा फैलती हुई आ रही थी जो मैं नोटिस कर पा रही थी. उसका शरीर भी भरने लगा था.

करण उसको चुपके से सूखा मेवा और फल खिलाता था. ढाई महीने में ही उसके शरीर में बहुत बदलाव दिखाई देने लगा. वो सेब की तरह लाल होती जा रही थी. मेरा ध्यान चुदाई की ओर तो गया ही नहीं.

मैं सोच रही थी कि करण के आने से वो अब भाई के साथ मिल कर अच्छे से खाना खा रही है. मगर वो तो अपनी चूत को अपने भाई का लंड खिला रही थी.

करण के साथ वो चूत और लंड के खेल में पारंगत होती जा रही थी. मुझे उस दिन थोड़ा शक हुआ जब मेरे कहने पर भी नेहा मेरे पास नहीं सोई. करण उसको किनारे वाले कमरे में सोने के लिए कहता था. वो भी उसी की बात मानती थी. मैं बाहर बरामदे में सोती थी इसलिए भाई-बहन की चुदाई के बारे में मुझे पहले पता नहीं लग पाया.

छुट्टियां बिताने के बाद करण दोबारा पुणे चला गया. मगर अब काफी कुछ बदल गया था. उसने नेहा को एक मोबाइल फोन भी दे दिया था. वो दिन भर फोन पर बात करती रहती थी.

मैंने सुनने की कोशिश भी की लेकिन वो बहुत ही धीमे बात किया करती थी. मुझे पता नहीं लग पाता था कि वो किससे और क्या बात कर रही है. हो न हो, वह अपने भाई से चुदाई की बातें ही करती होगी.

उसके बाद करण और नेहा दोनों ने ही मिल कर पुणे जाने का प्लान बना लिया. उन दोनों के सामने अब एक समस्या थी कि मुझको (अपनी मां मीरा को) कैसे तैयार किया जाये. वो दोनों मुझे यहीं घर पर छोड़कर जाना चाहते थे.
 
जब उन दोनों ने साथ जाने की बात कही तो मैं बोली- मैं यहां घर पर अकेले कैसे रहूंगी? वैसे भी इसकी पढा़ई लिखाई के दिन हैं, जो अधूरी रह जायेगी.

वो बोला- मां मैं इसको केवल खाना बनाने के लिए साथ ले जाना चाह रहा हूं. मुझे वहां जॉब करते हुए खाने की दिक्कत होती है. इसकी पढ़ाई यहीं पर चलती रहेगी और ट्यूशन वहां कर लेगी. यहां पर आकर एग्जाम दे दिया करेगी.

जब मैं नहीं मानी तो करण ने कहा- मां, तुम भी साथ चलो, कुछ दिन हम दोनों के साथ वहां पर रह लेना. उसके बाद फिर तुम चाहो तो वहीं रह लेना, अगर नहीं चाहो तो यहां घर पर वापस आ जाना.

मैं उन दोनों की जिद के सामने मान गयी. हम तीनों मां-बेटा-बेटी पुणे चले गये.

वहां पर जो घटना हुई वो भी शायद किसी के साथ नहीं हुई होगी. वहां पर जाने के बाद जिस घर में हम रहने वाले थे उसमें एक कमरा नीचे था और उसके ऊपर सीमेंट का छपरा था. साथ में ही लोहे की सीढ़ी लगी हुई थी. ऊपर में दूसरा वार्ड बना हुआ था. मगर वो ऐसा था कि वहां पर सीधे खड़े होकर नहीं चल सकते थे. उसकी ऊंचाई बहुत कम थी.

मैंने वो घर देख कर कहा- बेटा, यहां तो नीचे एक ही कमरा है. हम तीनों इस छोटे से कमरे में कैसे सोयेंगे?

करण बोला- मां, मैं ऊपर सो जाऊंगा और आप दोनों नीचे सो जाना. अगर आपको फिर भी दिक्कत लगे तो नेहा भी ऊपर आ जायेगी. आप आराम से यहां सो जाना, टेंशन मत लो. यहां पर सब ऐसे ही सोते हैं.

फिर हम लोग ऐसे ही सोने लगे. दो-तीन दिन हुए थे कि नेहा कहने लगी कि उसको यहां पर नींद नहीं आती है. नीचे गर्मी ज्यादा है, हम लोग ऊपर सो जाते हैं.

मैं बोली- लेकिन ऊपर तो तुम्हारा भाई सो रहा है!

वो बोली- तो फिर भैया को नीचे बुला लेते हैं और हम ऊपर में सो जाते हैं.

मैंने कहा- अगर उसको यहां पर नींद नहीं आयी तो फिर वो अगले दिन ड्यूटी पर कैसे जायेगा?

नेहा बोली- अच्छा ठीक है, मैं भैया के पास ऊपर में ही सो जाती हूं. आप यहीं सो जाओ.

मैंने कहा- लेकिन तुम दोनों वहां पर परेशान हो जाओगे.

वो बोली- नहीं मां, मैं एक तरफ कोने में सो जाऊंगी. मुझे यहां पर नींद नहीं आ रही.

वो उठ कर ऊपर करण के पास चली गयी.

फिर अगले दिन भी वो ऊपर में ही चली गयी. मुझे अभी तक भी कोई शक नहीं था कि इन दोनों के बीच में क्या चल रहा है. 7-8 दिन हो गये थे नेहा को ऊपर सोते हुए.

एक रात की बात है कि मुझे पेट में दर्द होने लगा. ऐसा लगने लगा कि मुझे उल्टी आयेगी. फिर मेरे कपड़े खराब होने का डर था. मैंने सोचा कि ऊपर से कपड़े मंगवा लेती हूं. मगर मैं बेटे को परेशान नहीं करना चाह रही थी क्योंकि वो सुबह से शाम तक ड्यूटी करके आता था.

मैं खुद ही ऊपर में चली गयी. सारे कपड़े वाले बैग ऊपर में ही रखे हुए थे क्योंकि नीचे जगह कम थी. नीचे किचन और बाथरूम था इसलिए कपड़े के बैग सारे ऊपर में ही रख दिये थे करण ने. जब मैं सीढ़ियों से ऊपर जा रही थी तो वहां अंदर का नजारा देख कर मैं सन्न रह गयी.

करण नीचे नंगा लेटा हुआ था और नेहा उसके लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी. वो अपने भाई के लंड के ऊंह … ऊंह… गूं-गूं करते हुए चूस रही थी. मैं देख कर वहीं फ्रीज सी हो गयी. करण ने नेहा को भी पूरी नंगी किया हुआ था.

वो नेहा की चूचियों को हाथों में लेकर जोर जोर से दबा रहा था. फिर नेहा उठी और नीचे लेट गयी. करण ने उसकी चूत में मुंह लगा कर उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया. नेहा उत्तेजना में सिसकारियां भरने लगी.

फिर करण ने नेहा को अपने ऊपर कर लिया और उसकी चूत को अपने मुंह पर रखवाकर चाटने लगा. नेहा अब अपने हाथों से अपनी चूची को मसल मसल कर सिसकारियां ले रही थी. वह अपने भाई के साथ सेक्स के खेल में पूरी मंझी हुई खिलाड़ी हो गयी थी.

उसके बाद करण ने नेहा की चूत में लंड लगा दिया और उसकी चूत को चोदने लगा. वह अपने हाथों से उसकी चूचियों को दबाते हुए नीचे उसकी चूत में धक्के लगा रहा था. नेहा भी उसके लंड को पूरा अपनी चूत में लेकर मस्त होकर चुद रही थी.

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं. अपनी ही आंखों के सामने जो नजारा था वो मेरी समझ से बाहर था. मैं अपने बेटा-बेटी की आपस में चुदाई देख कर हैरान थी और वहीं खड़ी रही. नेहा मस्ती में उछल उछल कर अपने भाई के लंड को चूत में ले रही थी. फिर करण ने उसकी चूत में ही अपना माल छोड़ दिया.

फिर मैं कुछ संभली और चुपचाप नीचे आ गयी. मुझे पता लग गया था कि करण नेहा को यहां पर लेकर क्यों आया है. उस रात को मुझे नींद नहीं आई. बार बार करण और नेहा की चुदाई की तस्वीर मुझे अपनी आंखों के सामने ही दिखाई दे रही थी.

मेरे पेट का दर्द भी गायब सा हो गया था. परेशानी में मेरी आंखों से नींद ही गायब हो गयी. अपने पति के बारे में सोचने लगी कि यदि वो आज होते तो मेरे घर में ऐसा पाप कभी नहीं होता.
 
मैं सोच रही थी कि करण और नेहा को रोकने की कोशिश करूं तो कैसे करूं. अगर मैं शिकायत भी करूंगी तो मेरे ही बेटे की जिन्दगी बर्बाद हो जायेगी. अगर नहीं करूंगी इन दोनों की चुदाई का खेल ऐसे ही चलता रहेगा. मैं बीच में फंस गयी थी.

सुबह जब वो लोग उठ कर नीचे आये तो जैसे सब कुछ नॉर्मल था. लेकिन मेरे मन में यही सवाल उठ रहे थे कि मैं इस बात की शुरूआत करूं तो कैसे करूं. कुछ समझ में नहीं आ रहा था मुझे.

जब से भाई बहन की चुदाई के इस रिश्ते के बारे में मुझे पता लगा है तो मैं बहुत परेशान हूं.

समझ नहीं आ रहा कि गलती किसकी है और इस गलती को मैं कैसे ठीक करूं.

उस दिन करण काम पर चला गया था. उसके जाने के बाद मैंने अपनी बेटी नेहा से पूछा- तुम काफी थकी हुई लग रही हो, तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है क्या?

वो बोली- नहीं मां, मैं बिल्कुल ठीक हूं.

मैं हिम्मत नहीं जुटा पाई कि उससे करण के बारे में बात कर सकूं.

फिर दिन किसी तरह निकल गया. रात का खाना होने के बाद मैंने नेहा से कहा कि वो नीचे सो जाये और मैं ऊपर सो जाती हूं.

इतने में ही करण भी आ गया.

करण ने ये बात सुन ली. फिर दोनों ही एक सुर में कहने लगे- मम्मी, आप लोहे की सीढ़ियों पर नहीं चढ़ पाओगी, आपके गिर जाने का खतरा रहेगा.

मैंने कहा- नहीं बेटा, मैं चढ़ लूंगी. ऐसी कोई बात नहीं है.

मेरे जोर देने पर वो दोनों मान गये लेकिन नेहा मेरे साथ ऊपर सोने के लिए तैयार नहीं हुई.

करण बोला- मैं आपके साथ सो जाऊंगा. अभी कुछ देर नीचे आराम कर लेता हूं. बाद में आ जाऊंगा. तब तक आप ऊपर जाकर आराम करो.

मेरी ये कोशिश थोड़ी काम करती नजर आई. मैं ऊपर जाकर लेट गयी. मुझे तो नींद नहीं आ रही थी. मैं सोच में लेटी हुई थी कि बात मेरे कंट्रोल से बाहर तो नहीं हो रही है? ये दोनों तो एक दूसरे से अलग नहीं हो रहे हैं.

कुछ देर के बाद मुझे आहट सुनाई दी. करण ऊपर आया तो मैंने आंखें बंद कर लीं. उसने सोचा कि मां सो गयी है लेकिन मैं जाग रही थी. फिर वो देख कर चला गया.

कुछ देर के बाद मैं नीचे गई चुपचाप बिना आवाज किये. मैंने देखा कि मेरा बेटा फिर से मेरी बेटी की चुदाई कर रहा था.

चुदाई करने के बाद वो दोनों नंगे ही लेट गये. फिर करण उठ कर ऊपर आने लगा.

मैं जल्दी से ऊपर आयी. मैंने आकर आंखें बंद कर लीं और लेट गयी. करण आकर देखने लगा. उसने सोचा कि मां सो गयी है. मगर मैं नाटक कर रही थी नींद का. उसके बाद वो पानी पीकर फिर से चला गया.

नीचे जाने के बाद मैं भी उसके पीछे ही जाकर देखने लगी. करण नेहा से बोला- सो गयी क्या जान?

वो बोली- नहीं, आपके बिना नींद नहीं आती है भैया. आपका इंतजार कर रही थी. मगर मैं सोच रही थी कि अगर मां को इस बारे में पता लग गया तो क्या होगा?

करण बोला- मां की चुदाई भी कर दूंगा. वो किसी से कुछ नहीं कहेगी. यहां वैसे भी हम लोगों को कोई नहीं जानता है, हमें डरने की जरूरत नहीं है.

मैं हैरान थी कि मेरा बेटा अपनी ही मां की चूत चोदने की बात कर रहा था. उसकी बातें सुन कर मेरी हिम्मत और भी ज्यादा टूट गयी थी. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि इन दोनों को कैसे कंट्रोल करूं.

उसके बाद नेहा ने करण के लोअर को निकाल दिया. फिर उसके अंडरवियर को निकाल कर उसके लंड को चूसने लगी. कुछ ही पल में करण का लंड फिर से खड़ा हो गया. उसने नेहा के सिर को पकड़ लिया और अपना लंड उसको चुसवाने लगा.

वो सिसकारते हुए बोला- आह्ह जान … अब हम दोनों एक दूसरे के लिए ही जीयेंगे.

नेहा भी लंड को मुंह से निकाल कर बोली- हाह … हां भैया, आप मुझे छोड़कर कभी मत जाना. अब मैं आपके बिना एक पल भी नहीं रह सकती हूं.

करण ने नेहा को अपनी बांहों में भर लिया और उसके होंठों को चूसते हुए बोला- बहना, तुम मेरी जिन्दगी हो. दुनिया में कुछ भी हो जाये लेकिन मैं तुम्हें छोड़ कर कहीं नहीं जाने वाला. इसके लिए चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े.

नेहा ने करण को आई लव यू कहा और उसके होंठों और जोर से चूसने लगी. दोनों एक दूसरे को बहुत जोर से चूसने लगे. ऐसा प्यार देख कर एक बार तो मेरा मन भी चुदने के लिए करने लगा था. पांच मिनट तक चूसने के बाद करण ने नेहा को नीचे लिटा लिया.

उसको नीचे लिटा कर उसकी चूत में उसने उंगली करना शुरू कर दिया और उसकी चूचियों को दबाने लगा. कुछ टाइम तक चूत में उंगली का मजा लेने के बाद नेहा ने करण को नीचे कर लिया. उसने अपने चूतड़ों को मेरे बेटे के लंड पर रख कर उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया.

करण बोला- आह्ह मेरी जान … तुम तो पूरी खिलाड़ी हो गयी हो.

वो बोली- सब आपने ही तो सिखाया है.

फिर उसने अपने चूतड़ों को करण के मुंह पर रख दिया. करण ने नेहा को चूतड़ों को चाटना शुरू कर दिया. नेहा उछल उछल कर अपने चूतड़ों को करण के मुंह पर रगड़ रही थी.

तभी करण ने उसकी चूत में जीभ दे दी और उसको पूरा अंदर तक चाटने लगा, जैसे कि उसकी चूत को मुंह से चोद रहा हो. दस मिनट तक उसने चूत चाट चाट कर नेहा को मदहोश कर दिया. नेहा की चूत ने पानी छोड़ दिया और वो ढीली पड़ गयी.

फिर करण उठा और नेहा के दोनों पैर ऊपर उठा कर उसने मेरी बेटी की चूत में लंड दे दिया. लंड को अंदर घुसा कर वो झटके देने लगा. नेहा मस्ती में होकर चुदने लगी. करण ने जोर जोर से झटके देना शुरू कर दिया. नेहा अब उसके लंड से चुद कर इतना मजा ले रही थी कि उसकी आंखें बंद हो रही थीं.
 
नीचे से गांड उछाल कर वो उसका सहयोग कर रही थी और अपनी चूचियों को मसल रही थी. इसी तरह 20 मिनट तक अपनी बहन की चुदाई करने के बाद करण ने अपने लंड का पानी अपनी बहन की चूत में ही छोड़ दिया. फिर वो दोनों सो गये.

मैं ये देख कर ऊपर आ गयी और लेट गयी. रात काफी हो गयी थी और मुझे भी नींद आ गयी थी. सुबह जब उठी तो करण मेरे बगल में ही सो रहा था. उसका लंड उसकी लोअर में काफी मोटा सा दिख रहा था. मेरी बेटी को अपने भाई का लंड शायद कुछ ज्यादा ही पसंद आ गया था.

सुबह उठने के बाद सब कुछ नॉर्मल था. इन दोनों का रोज का यही हो गया था. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि इन दोनों को कैसे रोकूं. धीरे धीरे इसी तरह दो महीने बीत गये. नेहा और करण अब जैसे पति पत्नी की तरह रहने लगे थे.

मैं सब देखती रहती थी लेकिन कुछ कर नहीं पा रही थी. उन दोनों की हरकतें मैं अपनी आंखों से देख कर भी इग्नोर कर देती थी. वो दोनों सोच रहे थे कि मुझे कुछ नहीं पता लग रहा है लेकिन मैं सब कुछ जान बूझ कर इग्नोर कर देती थी.

एक दिन रात को ऐसा हुआ कि ऊपर वाले कमरे में जीरो वॉट का बल्ब जलाकर मैं लेटी हुई थी. अचानक मुझे बिजली के बोर्ड के पास सांप जैसा कुछ दिखाई दिया. ज्यादा क्लियर तो नहीं दिखाई दे रहा था लेकिन वो सरक रहा था. मैं डर गयी और जल्दी से उतर कर नीचे आ गयी.

मैंने नीचे आकर बल्ब जला दी. ये सब इतनी जल्दी में हुआ कि करण और नेहा को संभलने का मौका नहीं मिला. वो दोनों चुदाई का मजा ले रहे थे.

रोशनी होते ही नेहा उठ कर खड़ी हो गयी और मुझे देख कर खुद को ढकने का प्रयास करने लगी. मेरी बेटी पूरी नंगी ही थी.

उस दिन मैंने रोशनी में उसकी बड़ी बड़ी चूचियां देखीं जो एक औरत के माफिक हो गयी थीं. अपने भाई से चुदवाकर उसकी गांड और चूची दोनों ही आकार में बड़ी होती जा रही थीं.

मेरा बेटा करण 6 फीट लम्बा और 28-30 साल का गबरू जवान मर्द लग रहा था. मैंने उसके शरीर को भी देखा. उसका मोटा और लम्बा लण्ड खड़ा हुआ था. वो भी मुझे देख कर अपने लंड को ढकने लगा.

नेहा हड़बड़ाहट में एक कोने में जाकर अपने कपड़े पहनने लगी और करण ने जल्दी से अपना लोअर पहन लिया. वो दोनों काफी घबराये हुए लग रहे थे.

मैं करण से बोली- तुम्हें शर्म नहीं आई अपनी बहन के साथ (सेक्स) करते हुए?

सांप की बात अब मेरे दिमाग से निकल ही गयी थी. मुझे काफी गुस्सा आ रहा था और मैंने गुस्से में नेहा को तीन-चार झापड़ लगा दिये. उसका गाल लाल हो गया. मैं करण के सामने ही उसको डांट रही थी और थप्पड़ लगा रही थी. करण चुपचाप सब देख रहा था.

वो दोनों कुछ नहीं बोल रहे थे.

मैंने दोनों से कहा- इतने दिन से मैं सब नोटिस कर रही थी लेकिन अपने घर की इज्जत के लिए मैं कुछ नहीं बोल पा रही थी. मुझे तुम दोनों के भविष्य की चिंता थी.

करण और नेहा को जैसे सांप सा सूंघ गया था. वो दोनों चुपचाप गर्दन नीचे करके मेरी बातों को सुन रहे थे लेकिन कुछ बोल नहीं रहे थे.

मैं अपना गुस्सा निकाल कर ऊपर चली गयी.

कुछ दिन तक मैंने उन दोनों से ठीक तरह से बात नहीं की. फिर मैंने एक दिन मोबाइल में एक सेक्स साइट खोल कर इंटरनेट पर देखा.

मैंने फैमिली सेक्स के बारे में सर्च किया. मुझे इससे संबंधित बहुत सारे वीडियो मिले. मैंने मोबाइल में फैमिली पोर्न वीडियो देखे. मैंने RSS की सेक्स कहानियों में भी पढ़ा. रिश्तों में चुदाई की कहानी पढ़ी. मां-बेटे की चुदाई, भाई-बहन की चुदाई, मां और मौसी की चुदाई के बारे में पढ़ा.

उसके बाद मुझे थोड़ा यकीन हुआ कि ये सब भी होता है. मगर नेहा और करण के लिए मेरा मन मानने के लिए तैयार नहीं था. अब उन दोनों को साथ में रहते हुए एक साल हो गया था.

अब वो दोनों मौका पाकर चुदाई कर लेते थे. मैं कुछ नहीं कर पा रही थी. एक रात को मैंने उन दोनों को आपस में बातें करते हुए सुन लिया. वो दोनों शादी की बात कर रहे थे.

करण बोला- तुमसे जल्दी ही मैं शादी कर लूंगा.

नेहा बोली- हां भैया, मैं आपका बच्चा पैदा करना चाहती हूं.

ये सुनकर मेरे पैरों के नीचे से जमीन सरक गयी.
 
चुदाई तक तो ठीक था लेकिन वो दोनों तो आपस में शादी और बच्चा पैदा करने की बात कर रहे थे. मैं तब से ही परेशान हूं. उस वक्त मुझे कुछ साधन नहीं मिल रहा था.

आज मैंने बहुत हिम्मत करने के बाद अपने बच्चों के बारे में ये कहानी लिखी है. करण और नेहा जल्दी ही शादी करने की बात कर रहे हैं. मैं कुछ नहीं कर पा रही हूं.

इसलिए मैं इस आपबीती को कहानी के माध्यम से लिख रही हूं. मैं बहुत बड़ी समस्या में हूं कि भाई-बहन के बीच में अगर ये रिश्ता हुआ तो समाज क्या बोलेगा. मैं कुछ नहीं कर पा रही हूं.

आप लोगों से मैं कहना चाहती हूं कि मुझे मेरी समस्या का समाधान बतायें. अपने घर की इज्जत के लिए मैं बहुत दिन चुप रही. अपने बच्चों के भविष्य के लिए चुप रही. मगर मैं अब और नहीं घुट सकती हूं.

इस घटना को साल भर से ज्यादा हो चुका है. उस वक्त तो मैं सोच भी नहीं सकती थी कि मैं अपने ही बच्चों के लिए चुदाई जैसे शब्दों का प्रयोग करूंगी लेकिन मुझे करना पड़ा.

उस दिन जब मैंने उन दोनों को रंगे हाथ पकड़ा था तो उनको बहुत बुरा भला कहा. वो दोनों चुदाई में बिजी थे और ऊपर मैं अपने कमरे में सांप के आ जाने से बहुत डर गयी थी.

मुझे उन दोनों की इस हरकत पर बहुत गुस्सा आ रहा था. उन्हें अपने मजे के अलावा कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. मैंने उस दिन नेहा को झापड़ मारा. करण को भी बहुत डांटा.

करण ने ऊपर जाकर सांप को मार दिया लेकिन उसने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया. मैंने उससे खिड़की में जाली लगवाने को कहा लेकिन उसने कुछ भी नहीं कहा और चुपचाप अपने बिस्तर पर लेट कर सो गया.

उसके बाद मैं भी नीचे आ गयी. मैंने नेहा को अपने पास बिठाया और बोली- तुम्हें शर्म नहीं आती है क्या ये सब करने में? वो तुम्हारा सगा भाई है.

नेहा तुरंत बोल पड़ी- हम दोनों बहुत दिनों से एक दूसरे से प्यार करते हैं मां. करण मेरे लिए मेरा सब कुछ है. मुझे तो कोई शर्म नहीं आती है अपने भाई से प्यार करने में. मैंने किसी की हत्या थोड़ी ही की है? मैंने तो प्यार ही किया है, और ये कहां लिखा हुआ कि अपने भाई से प्यार करना गलत है?

मैं बोली- लेकिन हम लोग समाज को क्या मुंह दिखाएंगे, तुम समाज का सामना कैसे करोगी, करण को भी ताने सुनने पड़ेंगे.

नेहा बोली- मां, जब मेरा भाई कमा नहीं रहा था, जब हमारे घर में खाने को कुछ नहीं था, सब्जी नहीं बनती थी, दाल रोटी भी महीने भर में तीन-चार बार ही ढंग से बनती थी, उस वक्त आपका ये समाज कहां था?

नेहा की बात का मैं कोई उत्तर नहीं दे पायी. मेरे लाख समझाने के बाद भी उस पर कोई असर नहीं पड़ता हुआ दिखाई दे रहा था मुझे. मेरी शिक्षा के बीच में उसकी नासमझी और कम उम्र की नादानी आ गयी थी. वह मेरी बात को समझने की कोशिश भी नहीं करना चाह रही थी कि इस रास्ते पर कितनी मुश्किलें हो सकती हैं.

इस घटना को हुए एक हफ्ता बीत गया था. करण मुझसे बात नहीं करता था. फिर एक दिन वह शराब पीकर आ गया.

मैंने कहा- तुम पीकर आये हो?

वो कुछ नहीं बोला और जाकर सो गया.

अगली सुबह मैंने उससे बात करने की कोशिश की लेकिन वो बच कर निकल गया. जब रात हुई तो वो उस दिन फिर से शराब पीकर लौटा. अब मुझसे बर्दाश्त न हुआ.

वो ऊपर जाने लगा और मैं भी उसके पीछे पीछे ऊपर चली गयी.

मैंने कहा- तेरा दिमाग खराब हो गया है क्या करण? एक तो तुम दोनों भाई बहन ने मिल कर इतनी बड़ी गलती कर दी है और फिर ऊपर से तुम मुझसे ही बात नहीं कर रहे हो, और अब शराब भी पीने लगे हो, ये सब चल क्या रहा है?

करण ने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया. उसके पास से शराब की बदबू आ रही थी.

मैंने उसको प्यार से समझाते हुए कहा- देख बेटा, मैं तेरे भले के लिए कह रही हूं. मैं तेरी अच्छे से शादी भी करवा दूंगी. लेकिन ये जो तू कर रहा है ये ठीक नहीं है, मैं ये भी जानती हूं कि ये सब जो हुआ है वो अन्जाने में ही हुआ है, इसमें तुम दोनों की गलती नहीं है.

वो बोला- मुझे शादी वादी करनी ही नहीं है. तुम यहां से जाओ मां, मैं तुमसे कोई बात नहीं करना चाहता हूं. तुम घर वापस चली जाओ. मैंने तुम्हारा टिकट निकलवाने के लिए भी बोल दिया है. आज के बाद मैं तुमसे कुछ नहीं कहूंगा. अगर नेहा भी तुम्हारे साथ जाना चाह रही है तो उसको भी ले जाओ अपने साथ. अगर नहीं जाना चाह रही हो तो कोई बात नहीं.

मैंने कहा- लेकिन बेटा, मैं ये तुम्हारे अच्छे भविष्य के लिए कह रही हूं. टाइम के साथ सब ठीक हो जायेगा. हम नेहा की शादी कर देंगे. वो अपने घर चली जायेगी. सब ठीक हो जायेगा.

वो बोला- तुम्हें जो करना है वो करो. मुझे इन सब बातों से कोई मतलब नहीं है.

इतने में ही नेहा भी छत पर आ गयी. नेहा को देख कर करण की आँखों में आंसू आ गये. नेहा भी करण की ये हालत देख कर खुद को रोक नहीं पाया. वो उसके गले से जाकर लिपट गयी और उसके बालों में हाथ फिराते हुए उसको चुप करवाने लगी.

नेहा बोली- आप रो क्यूं रहे हो भैया, मैं हूं न आपके साथ. दुनिया और समाज चाहे कुछ भी कहे, मैं हमेशा आपके साथ में रहूंगी. अगर हम अपने रिश्ते के बारे में किसी को कुछ बतायेंगे ही नहीं तो किसी को क्या पता चलेगा कि हम दोनों के बीच में क्या रिश्ता है?

इतना बोल कर वो करण का हाथ पकड़ कर उसको अपने साथ नीचे लेकर जाने लगी.

मैं वहीं पर बैठी बैठी सोचती रह गयी. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करूं. बहुत ही अजीब कश्मकश थी ये. मुझे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था.

फिर मैं भी नीचे जाने लगी. नीचे वो दोनों बैठ कर धीरे धीरे कुछ बात कर रहे थे. मैं उन दोनों की बातों को सुनने की कोशिश कर रही थी लेकिन मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि वो दोनों आपस में क्या बातें कर रहे हैं.

करण भी अब नॉर्मल सा हो गया था. उन दोनों के दिमाग में जरूर कुछ न कुछ प्लान चल रहा था. मैं उन दोनों के चहेरे को पढ़ने की कोशिश कर रही थी. वह दोनों बहुत खुश दिखाई दे रहे थे. नेहा ने करण से पता नहीं क्या कहा कि वो थोड़ी ही देर में इतना चेंज हो गया था.

उस रात मैंने खाना नहीं खाया और ऐसे ही सो गयी. नेहा भी छत पर ही सो रही थी. करण नीचे सो रहा था. सुबह उठा तो वह बहुत खुश दिखाई दे रहा था. फिर खाना खाकर वो ऑफिस चला गया. नेहा के चेहरे पर भी मुस्कान फैली हुई थी. मैं समझ नहीं पा रही थी इन दोनों के बीच में क्या बात हुई है जो दोनों के दोनों इतने खुश नजर आ रहे हैं.

फिर नेहा ने मुझे खाना लाकर दिया. खाना खाने के बाद मैं आराम करने के लिये छत पर चली गयी लेकिन लेटने के बाद मुझे नींद भी नहीं आ रही थी. फिर ऐसे ही दिन गुजर गया.

शाम हो गयी थी. 7 बजने वाले थे. तभी करण घर आ गया. वो बाकी दिनों में तो 8 बजे के बाद ही घर पहुंच पाता था लेकिन आज वो 7 बजे ही घर आ गया था. आते ही उसने नेहा को गले से लगा लिया और उसको कुछ सामान थमा दिया.

सामान देकर वो सीधा छत की ओर चला गया. नेहा भी बहुत खुश लग रही थी. वो फिर खाना बनाने में लग गयी. करण छत पर ही बैठा था.

लगभग 9 बजे नेहा ने मुझे खाना लाकर दिया. फिर वो वापस चली गयी.
 
करण ऊपर था. मैंने सोचा उसको खाने के लिए पूछे लेती हूं. मैं थाली लेकर ऊपर गयी. वो ऊपर में बैठ कर शराब पी रहा था.

मैंने कहा- क्या बात है बेटा?

वो बोला- बहुत टेंशन हो रही है, मुझे अभी अकेला रहना है, आप जाओ.

मैं बोली- ला मैं तुझे खिला देती हूं.

वो बोला- नहीं, मैं बाद में खा लूंगा. अभी आप जाओ.

मैं नहीं मानी और मैंने उसको खिला दिया. फिर आधा खाना लेकर मैं नीचे आ गयी और मैंने बचा हुआ खाना खुद ही खा लिया.

नेहा से मैंने पूछा- तूने खा लिया क्या?

वो बोली- मैं बाद में खाकर सो जाऊंगी. आप आराम करो.

मैंने कहा- तो फिर करण को भी खिला देना. उसने थोड़ा बहुत ही खाया है.

नेहा बोली- वो पहले से बाहर से ही खाकर आया है.

9.30 बजे के करीब करण भी नीचे आ गया. उस वक्त नेहा किचन में बर्तन साफ कर रही थी. फिर वो भी आ गयी और उसने टीवी चालू कर दिया.

करण ने टीवी में एक छोटी सी चिप लगा दी. उसके बाद वो भी हमारे पास आकर बैठ गया. मुझे फिर धीरे धीरे नशा सा होने लगा. जब मुझे उसका अहसास हुआ तो मैंने नेहा से कहा- मुझे कुछ हो रहा है नेहा.

वो बोली- कुछ नहीं है मां, आपको आराम की जरूरत है.

फिर मैंने देखा कि टीवी पर पोर्न मूवी शुरू हो गयी. उसमें एक महिला को दो पुरूष मिल कर चोद रहे थे. वो महिला चिल्ला चिल्ला कर आवाज निकाल रही थी. मुझे आधा होश था और आधा नहीं. मैं जानती थी कि करण और नेहा अब चुदाई करेंगे. वैसे भी करण ने शराब पी रखी थी. इसलिए मैं धीरे से उठ कर ऊपर जाने लगी.

जैसे ही मैं उठी तो करण ने मुझे पकड़ कर अपने पास लिटा लिया. मुझे समझ नहीं आया कि मेरे साथ क्या हो रहा है.

करण ने मेरी साड़ी के ऊपर से ही मेरे ब्लाउज के अंदर मेरी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया.

तभी नेहा हंसते हुए बोली- भैया, आज मां को सारे सामाजिक बंधनों से मुक्त कर दो. इनको बता दो कि रिश्ता केवल लंड और चूत के बीच में ही होता है. चूत और लंड के इस रिश्ते का क्या मजा होता है मां को समझा दो आज.

करण ने मेरी साड़ी को उठा दिया और मेरी चूत को नंगी करके मेरी चूत पर अपना मुंह रख दिया. मेरी चूत पर उस वक्त बहुत बड़े बड़े बाल थे. मैंने कई महीनों से चूत के बालों की सफाई नहीं की थी.

मेरे बेटे ने मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया. मेरे ऊपर मदहोशी छाने लगी. पति के जाने के बाद पहली बार किसी ने मेरी चूची को छेड़ा था. इतने दिनों के बाद किसी ने मेरी चूत में उंगली की थी. मैं पूरी गर्म हो गयी थी.

करण मेरी चूत में उंगली कर रहा था और मैं अब जोर जोर से आवाज करने लगी. उधर टीवी पर सेक्स मूवी चल रही थी. उसमें एक बेटा अपनी मां की चूत को चाट रहा था और बेटी उन दोनों का चुदाई में सहयोग कर रही थी.

वैसे सच कहूं तो अपने बेटे और बेटी की चुदाई को देख कर मेरा मन भी चुदाई के लिए करने लगा था. ये इच्छा मैंने अपने अंदर ही दबा कर रखी हुई थी. रोज रोज बेटा-बेटी की चुदाई देख कर मेरा मन भी अपने बेटे का लंड चखने के लिए करने लगा था.

मैंने अपने शरीर को पूरा ढीला छोड़ दिया था. करण मेरी चूचियों को मसल रहा था. मैंने अपनी चूत को भी ढीली छोड़ दिया था. अब करण ने अपने कपड़े उतार लिये और उसने मेरी चूत पर अपने लंड को रगड़ने लगा. मैं तड़प उठी.

फिर करण ने मुझे पकड़ कर अपना लंड अंदर कर दिया और मुझे चोदने लगा. उसका लंड बहुत ही कड़क था. मेरी चूत में लंड अंदर गया तो मुझे दर्द होने लगा. मगर मेरा बेटा पूरे नशे में था. उसको चूत का भूत चढ़ा हुआ था.

उसने एक जोर का धक्का मारा और पूरा लंड घुसेड दिया. मेरे मुंह से चीख निकल गयी.

नेहा खुशी से उछल पड़ी. वो बोली- करण भैया, मां की सील टूट गयी है.

पांच वर्षों से मैंने भी सेक्स नहीं किया था. मेरी चूत पूरी टाइट हो चुकी थी. इसलिए उसके लंड के घुसते ही ऐसा लगा जैसे सच में मेरी चूत की सील टूट गयी थी.

मेरे दर्द की परवाह किये बिना ही करण झटके मार मार कर मुझे चोद रहा था. मैं अब पूरी नंगी हो गयी थी. नेहा मेरी चूचियों को पी रही थी. मेरे अंदर की हवस अब मेरे बेटे के लंड को सलाम कर रही थी.
 
आज मेरा खुद का बेटा मेरी चूत में लंड लेने की आदत को दोबारा से डाल रहा था. बहुत दिनों से मैंने लंड को याद करना ही छोड़ दिया था. बेटे के लंड की रफ्तार बुलेट ट्रेन से भी ज्यादा हो गयी थी. मैं तो झड़ चुकी थी.

करण अभी भी मेरी चूत में जोर जोर से लंड को चला रहा था और अंदर बाहर करते हुए जोर जोर से ठोक रहा था. मैं पूरी मदहोश हो गयी थी. फिर 2 मिनट के बाद उसका भी पानी निकल गया. उसने अपनी चुदाई की ट्रेन रोक दी.

अपनी बेटी नेहा की बात सुनकर मैं हैरान थी. मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मेरी बेटी इतनी हरामी हो गयी है. किस तरह से वो मेरी चूत की सील तोड़ने की बात कह रही थी. अगर नेहा ने करण को नहीं उकसाया होता तो करण कभी अपनी मां की चूत चोदने की बात शायद नहीं सोच पाता.

फिर करण अपना लंड मेरे मुंह में डालने लगा. मगर मैंने अपना मुंह नहीं खोला. इतने में ही नेहा ने करण के लंड को मुंह में ले लिया. उसके लंड को मुंह में लेकर वो चूसने लगी.

करण का लंड सिकुड़ चुका था. मगर नेहा फिर भी उसके लंड को जोर जोर से चूसने लगी.

करण बोला- आराम से कर… मुझे दर्द हो रहा है.

नेहा मस्ती में उसके लंड को चूसने में लगी हुई थी. वो करण की बात भी नहीं सुन रही थी. वो करण का लंड फिर से खड़ा करने की कोशिश में लगी हुई थी.

अब मैं भी उन दोनों का प्लान समझ गयी थी. मुझे समझ आ गया था कि ये दोनों आपस में प्लान बना कर ये सब कर रहे हैं और आज मेरी चूत का कबाड़ा करके ही छोड़ेंगे. हुआ भी बिल्कुल वैसा ही.

नेहा ने अपने भाई का लंड चूस चूस कर खड़ा कर दिया. अब नेहा ने मेरी चूत में जीभ दे दी और चूसने लगी. पहली बार मैंने देखा कि एक बेटी अपनी मां की चूत को चाट रही थी.

कई मिनट तक वो मेरी चूत को चाटती रही और फिर मैं भी गर्म होती चली गयी.

वो बोली- मां, आपकी चूत की सील टूट गयी है. आप बहुत खुशनसीब हो कि आपकी चूत की सील आपके बेटे के लंड से टूटी है.

मैंने कहा- तुम भी तो इतनी ही खुशनसीब हो जो मेरे ही बेटे से अपनी चूत मरवाती हो.

उसके बाद एक बार फिर से करण ने मेरी चूत में लंड दे दिया और मुझे चोदने लगा. पंद्रह मिनट तक उसने मेरी चूत को रगड़ा और मैं झड़ गयी. उसके बाद वो भी मेरी चूत में झड़ कर शांत हो गया. हम तीनों ऐसे ही पड़े हुए सो गये.

अगले दिन सुबह करण नहा धोकर अपने ऑफिस चला गया. मैं भी काफी थकी हुई थी. मैं उठी और फिर नहा ली. उसके बाद मैंने थोड़ा नाश्ता किया और दोबारा से सो गयी. मैं काफी थक गयी थी.

नेहा बोली- पतिदेव आते ही होंगे. अभी से क्यों सो रही हो मां?

मैंने कहा- मुझे अब कुछ नहीं करना है, अगर तुम्हें करना है तो तुम करो.

वो बोली- मगर पतिदेव तो अपनी मां की सील तोड़ कर उसकी चूत के रस में खो जाना चाहते हैं.

इतने में ही करण आ गया. वो हम दोनों को देख कर मुस्कराने लगा. उसके चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान थी. नेहा भी उसको देख कर खुश हो गयी.

उस रात जब करण शराब पीकर हमारे साथ सोने लगा तो उसने पोर्न मूवी दिखा कर मुझे भी गर्म कर दिया और अपनी बहन के साथ मिल कर मेरी चूत में अपना लंड दे दिया. मेरी बेटी मेरी ही चूत को चाटने लगी. करण ने उस रात 4 बार मेरी चूत चोदी.

अब मैं आगे की कहानी बताती हूं.

उस रात अपनी मां की चुदाई करने के बाद वो अगले दिन जल्दी घर आ गया.

घर आकर वो कहने लगा- अगर आप मेरा साथ दो तो मैं आपका दामन खुशियों से भर दूंगा. हम तीनों को मिल कर जिन्दगी की एक दूसरी पारी शुरू कर देनी चाहिए. जो होना था वो तो अब हो ही चुका है. अब पुरानी बातों को भूल कर हमें आगे बढ़ना चाहिए.
 
मैंने उसके गाल पर एक थप्पड़ मारा और बोली- अब होने या न होने को बचा ही क्या है! तुम मेरे बेटे तो थे ही और अब पति भी बन गये हो. अब तुम सुखी रखो या दुखी रखो, अब तो सब कुछ तुम्हारे साथ ही है.

करण ने मुझे बांहों में भर लिया और मेरी चूचियों को दबाने लगा. मैं भी थोड़ा मजा लेने लगी.

करण बोला- कुछ ही दिनों में आपको इसकी आदत हो जायेगी मां.

मैं अब विरोध नहीं कर पा रही थी. उसके हाथों में अजीब सा नशा था. मैं भी मजा ले रही थी.

फिर उसने मेरी चूचियों को नंगी कर दिया.

मेरी चूचियों को दबाते हुए वो बोला- आपकी चूची के साइज की ब्रा भी बहुत मुश्किल से मिलती है. आपकी चूचियों को दबाने में मुझे परम शांति मिलती है.

दुनिया में इतनी खुशी दूसरी चीज में नहीं मिलती है जितनी कि आपकी चूचियों से खेलने में मिलती है. बचपन में मैं इनको दूध के लिए पीता था और अब मजे के लिए पीता हूं. अब आप मां-बेटे के रिश्ते को भूल जाओ मां, अब हम ऐसे ही मजे लेकर रहेंगे.

मेरा बेटा मुझे ऊपर से नीचे तक बहुत ही ध्यान लगा कर देख रहा था. मैं शर्म के कारण अपने सिर को नीचे की ओर झुकाए हुए थी. उसने मेरी जांघ पर हाथ फेर कर देखा.

मेरी जांघ पर हाथ फेरते हुए वो कहने लगा- मम्मी आपकी चूत, जांघ और पैर सब के सब बहुत ही चिकने हैं, तुम मेरी हो जाओ. मैं, नेहा और तुम हम तीनों मिल कर अपनी फैमिली बनाएंगे.

वो बोला- हम तीनों को जिन्दगी ने एक नया इतिहास बनाने का मौका दिया है. हमें इस मौके का फायदा उठाना चाहिए. खून के सारे रिश्तों को भूल कर हम तीनों को एक नये रिश्ते की शुरूआत करनी चाहिए.

मैं कुछ नहीं बोल पा रही थी. करण मेरे बदन को चूमने लगा. मैं उसको दूर हटाने की कोशिश कर रही थी लेकिन मुझे अच्छा भी लग रहा था. पति के जाने के बाद किसी मर्द के छूने का मजा बहुत दिनों के बाद मैं महसूस कर रही थी.

नेहा खाना बनाने के लिए चली गयी. करण मेरी चूत में मुंह लगा कर उसको चाटने लगा.

वो बोला- आह्ह मम्मी, ये वही चूत है ना जिससे मैं बाहर आया था.

मैंने सिसकारते हुए कहा- हां मेरे बच्चे, ये वही चूत है जिससे तू इस दुनिया में आया था.

वो बोला- आह्ह … इस चूत से मैं बाहर आया था और इसी चूत से मैं अपने बच्चे को भी बाहर निकाल लूंगा.

ऐसा बोल कर करण ने मेरी चूत को जोर जोर से चाटना शुरू कर दिया. मेरी चूत अन्दर तक गर्म हो गयी.

नेहा किचन में खड़ी होकर मेरी ओर देख रही थी. मुझे भी अजीब सा लग रहा था. नेहा मेरी ओर कामुक नजर से देख रही थी. इतने दिन से वह अपने भाई का लंड ले रही थी. मुझे पता चला कि वो करण को इतना पसंद क्यों करती है.

करण का अंदाज बहुत ही गर्म कर देने वाला था. वो मेरी दोनों टांगों को फैला कर मेरी चूत में अपनी जीभ को अंदर बाहर कर रहा था और मेरी चूत में बहुत मजा आ रहा था. अब मैं भी चुदने के लिए तैयार होती जा रही थी.

नेहा भी अपनी चूचियों को दबाने लगी थी. फिर करण ने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये. देखते ही देखते उसने अपनी शर्ट खोल दी और उसको निकाल कर एक ओर डाल दिया.

उसका लम्बा और मोटा सा लंड उसकी पैंट को ऊपर उठाये हुए था. मैंने करण को इस तरह की नजर से नहीं देखा था. मेरा बेटा सच में बिल्कुल जवान हो गया था. उसको देख कर किसी भी चूत में पसीना आ जाये.

फिर उसने अपनी पैंट उतार दी. अब वो सिर्फ एक स्पोर्ट्स वाले शार्ट्स में था और उसका अंडरवियर पूरा उठा हुआ था. उसने अपने लंड को अपने हाथ से रगड़ कर मसला और मुझे दिखाया.

उसके बाद उसने धीरे से अपने शार्ट्स को उतार दिया. अब वो पूरा का पूरा नंगा हो गया था. उसका लंड 7 इंच लम्बा और काफी मोटा था. मेरे पति का लंड भी इतना दमदार नहीं था.

नेहा अपने भाई के लंड से चुद कर इसी वजह से इतनी खुश रहती थी. करण का लंड किसी भी चूत को खुश करने के लिए काफी अच्छा था. फिर करण मेरे ऊपर आया और अपने लंड को मेरे मुंह के पास कर दिया.

उसका लंड बहुत ही रसीला सा था लेकिन मैं उसको आंख दिखाने लगी. फिर वो पीछे हो गया. उसने मेरी चूचियों को दबा दिया और फिर मेरी जांघों को चूमने लगा. उसने मेरी चूत में उंगली दे दी और उसको तेजी से चलाने लगा.

मैं काफी उत्तेजित हो गयी. उसकी उंगली तेजी से मेरी चूत में अंदर बाहर हो रही थी. मेरी चूत में पहले से ही गीलापन आ गया था. जब करण मेरी चूत को चाट रहा था उसी वक्त मेरी चूत गीला होना शुरू हो गयी थी.
 
अब मेरी चूत की गर्मी और अधिक हो गयी थी और मेरा मन चुदने के लिए करने लगा था. करण भी मेरे चेहरे के भावों को देख कर समझने की कोशिश कर रहा था कि मुझे कितना अच्छा लग रहा है उसके साथ ये करने में.

मैंने कहा- क्या कर रहा है हरामी, मुझे क्यों तड़पा रहा है ऐसे?

वो बोला- मम्मी, क्या तुम मेरा लंड लेना चाहती हो?

मैं कुछ नहीं बोली.

उसने फिर पूछा- मम्मी क्या तुम मेरा लंड अपनी चूत में लोगी?

मैंने कुछ नहीं कहा.

उसने उंगली निकाली और मेरी चूत की फांकों को फैला कर अपनी जीभ को नुकीली बना कर मेरी चूत के दाने को छेड़ने लगा. मेरे पूरे बदन में चीटियां दौड़ने लगीं. मैं गांड को ऊपर उठाते हुए अपनी चूत को उसके होंठों पर रगड़ने की कोशिश करने लगी.

वो तेजी से अपनी जीभ को मेरी चूत के दाने पर चला रहा था. कभी अपने दांतों से मेरी चूत की फांकों को खींच लेता था और कभी पूरी जीभ को ही चूत में घुसा देता था.

मैं चुदने के लिए तड़प उठी थी.

वो बोला- अब बताओ मम्मी, क्या तुम मेरे लंड को अपनी चूत में लेना चाहती हो?

मैं उसके गाल पर तमाचा मारते हुए बोली- हां कुत्ते, चोद दे मुझे. अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा.

ये सुनते ही उसके चेहरे पर एक मुस्कान फैल गयी. मेरे बेटे ने अपने लंड को अपने हाथ में लेकर मेरी ओर देख कर एक दो बार टोपे को आगे पीछे किया और हिला हिला कर मुझे दिखाने लगा.

उसके बाद उसने नीचे बैठ कर मेरी टांगों को फैला दिया और अपने लंड को मेरी चूत पर लगा दिया. लंड को चूत पर लगा कर वो रगड़ने लगा.

मैंने सिसकारते हुए कहा- आह्ह … करण बेटा, अब अपने लंड को मेरी चूत में डाल दे. मुझसे नहीं रुका जा रहा. प्लीज मेरे बच्चे.

मेरे बेटे ने मेरी चूत में एक धक्का लगाया और उसका लंड चूत में घुस गया. लंड को अंदर पेल कर वो तेज तेज झटके मारने लगा. उसके झटके इतने तेज थे कि ऐसा लगा कि मानो करण का लंड मेरी चूत को चीरता हुआ अंदर जा रहा है.

उसके धक्कों की रगड़ से मेरी चूत की दीवारें छिलने लगी थी. बीती रात को भी उसने मेरी चूत की जोरदार चुदाई की थी. इसलिए अब उसके मोटे और लम्बे लंड को बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था. मगर इस दर्द में मजा भी आ रहा था.

करण ने मेरी चूत में लंड को पूरा घुसा दिया था और मेरे ऊपर लेट कर मेरे होंठों को कस कर चूसने लगा. मैं भी उसका साथ देने लगी. उसकी छाती मेरे बूब्स को दबाये हुए थी. मैंने उसकी पीठ को जोर से अपनी बांहों में जकड़ लिया था और उसकी गांड के ऊपर अपने पैरों को लपेट कर मैं उसके होंठों को चूसने लगी थी.

एक दो मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होंठों को पीते रहे. उसके बाद वो फिर से उठा और उसने मेरी टांगों को पकड़ कर ऊपर उठाते हुए फिर से मेरी चूत में अपने लंड को ठोकना शुरू कर दिया.

अब मैं भी अपनी गांड को ऊपर उठाते हुए उसकी ओर धकेलने लगी. मैं नीचे से धक्के लगा रही थी और वो ऊपर से लंड को ठोक रहा था. इस तरह से पंद्रह मिनट तक उसने मेरी चूत को रगड़ कर रख दिया.

फिर वो पूरी स्पीड में तेज तेज मेरी चूत को पटकने लगा. मैं दर्द से कराहने लगी. वो थमने का नहीं सोच रहा था. मैं किसी तरह उसके लंड को अपनी चूत में बर्दाश्त कर रही थी लेकिन बर्दाश्त कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा था.

दो-तीन मिनट में ही उसने मेरी जान निकाल दी और फिर मेरी चूत में ही झड़ने लगा. उसने लंड को पूरा जड़ तक घुसा दिया और मेरे ऊपर लेट कर वीर्य को चूत में छोड़ने लगा.

उसने अपना सारा माल मेरी चूत को पिला दिया. मेरी चूत ने उसके माल को अंदर खींच लिया. बेटे के लंड का माल पीकर मेरी चूत खुश हो गयी. उसके बाद उसने लंड को निकाल लिया और मैंने भी अपनी चूत को ढीला छोड़ दिया.

वो एक तरफ लेट गया. मैं भी थोड़ी शांत हुई. फिर वो उठा और चला गया. मैं वैसे ही सोयी रही. मैंने अपनी साड़ी को ठीक किया और कपड़े पहन लिये.

नेहा चाय बना कर ले आई. वो बोली- कैसा लग रहा है मम्मी?

मैंने कुछ नहीं कहा.

मेरी बेटी के सामने ही मेरी चूत बुरी तरह से चुदी थी. मैं चुप रह गयी, कुछ न बोल सकी.

फिर मैं आराम करने लगी.

2 घंटे के बाद नेहा अनार का जूस ले आई.

मेरे पास आकर बोली- मां, ये अनार का जूस भैया ने आपके लिए भेजा है.

जूस का गिलास मुझे थमा कर नेहा वापस चली गयी.

करण भी वापस काम पर चला गया था. फिर मैं नहाने के लिए चली गयी. फ्रेश होने के बाद मैं बैठ कर दो दिनों के दौरान हुई घटना के बारे में सोचने लगी.

मैं सोच रही थी कि ये सब क्या से क्या हो गया है. मैंने ऐसा तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन मेरा बेटा मेरी ही चूत का दीवाना हो जायेगा और मेरी चूत को इस तरह से चोदेगा.
 
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