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Guest
इधर कर्नल पुरी के घर भी कुछ शांति सी थी. कॉल साहब अपने कमरे मे थोड़ा आराम कर रहे थे क्योंकि उनको पता था कि रात को आज दोस्तो के साथ जाम टकराएँगे. और अपने कमरे के अंदर बैठी प्रीति खरीदे हुए कपड़ो को निहार रही थी. कभी वो चूड़ियों को देखती तो कभी पायल की जोड़ी को. फिर कुछ सोचकर वो बाथरूम के अंदर चली गई बाहर निकली तो एक शॉर्ट निक्कर और बिना बाह की टीशर्ट मे थी. कमरे मे अलमारी पर लगे आदमकद शीशे मे खुद को ध्यान से देखा. बिल्कुल पास खड़ी वो अपनी बाह और टाँगो को देख रही थी. फिर अपनी कपड़ो के साथ वाली अलमारी खोली और उसमे से कुछ अलग अलग ट्यूब और डिब्बीया बिस्तर पर रखी और एक पॅकेट सा भी निकाला.
" पार्वती दीदी.. इधर आना ज़रा." उसकी आवाज़ रसोईघर मे सफाई करती पार्वती ने सुनी और फिर
प्रीति के कमरे मे चली आई. "जी दीदी कहिए."
"यहा आओ तो और दरवाजा बंद कर दीजिए." उसने प्यार से पार्वती को समझाया.
"एक पानी का मग बाथरूम से ले आइए और सॉफ्ट टवल भी." पार्वती भी तुरंत ही समान ले आई.
"पहले बस हल्के गीले तौलिए से मेरी बाह और गर्दन सॉफ कीजिए और फिर ये क्रीम हल्के हाथो से लगा दीजिए." प्रीति ने एक ट्यूब पार्वती की तरफ बढ़ा दी.
अगले 10 मिनिट मे पार्वती ने उतना कर दिया. "दीदी और भी कही?"
"हा यहा पैरो पर भी कर दो." पार्वती पहले वाला ही सब दोहरा रही थी और प्रीति अब उस पॅकेट से कुछ गीले टिश्यू निकाल कर अपनी बाह और गर्दन सॉफ करने लगी.
"दीदी एक बात कहूं ?" पार्वती ने थोड़ी शरम से कही ये बात तो प्रीति ने मुस्कुराते हुए गर्दन हा मे हिलाई.
"दीदी आपके पैर ना बहुत खूबसूरत है और मांसल होने के साथ कितने लंबे भी है. कही भी कुछ हल्का सा ज़्यादा या कम नही है. और वैसे ही आपकी बाहें और गर्दन भी है."
"चल कुछ भी बोलती है.इतना कुछ खास नही बस ये ज़रूर है के टेन्निस खेलने से थोड़ी मजबूत हो गई है." और फिर उसने अपनी टीशर्ट भी उतार दी.
बेदाग सुडोल जिस्म और हर अंग जैसे तराशा हुआ था. पेट भी ऐसा था कि उसपर कही कोई चर्बी ना थी. हल्की मासपेशियो की झलक मिल रही थी जो उसके उभरे यौवन को और बढ़ा रही थी. लेस वाली सफेद आधे कप की ब्रा मे उसके उभार सर उठाए खड़े थे. प्रीति का शरीर और अंगो को देख कर लड़की होते हुए भी पार्वती को जैसे उसके शरीर की तरफ खींचाव सा होने लगा था.
"पार्वती यहा पीठ और पेट पर भी कर देना." इतना बोलकर प्रीति पेट के बल नरम बिस्तर पर पसर गई.
पार्वती के हाथ जैसे अपने आप ही उसके शरीर पर रेंग रहे थे. सख़्त जांघे लेकिन उसपर बालरहित मुलायम खाल किसी माखन से लग रही थी पार्वती को. दोनो हाथो से अच्छे से जैसे वो क्रीम से मालिश करने लगी थी. जाँघो के जोड़ के पास जैसे ही हाथ पहुचे प्रीति की आवाज़ ने उसको चेताया. "बस दीदी अब उसको सॉफ कर दीजिए और यहा मेरी पीठ पर सॉफ करके क्रीम लगा दीजिए."
" पार्वती दीदी.. इधर आना ज़रा." उसकी आवाज़ रसोईघर मे सफाई करती पार्वती ने सुनी और फिर
प्रीति के कमरे मे चली आई. "जी दीदी कहिए."
"यहा आओ तो और दरवाजा बंद कर दीजिए." उसने प्यार से पार्वती को समझाया.
"एक पानी का मग बाथरूम से ले आइए और सॉफ्ट टवल भी." पार्वती भी तुरंत ही समान ले आई.
"पहले बस हल्के गीले तौलिए से मेरी बाह और गर्दन सॉफ कीजिए और फिर ये क्रीम हल्के हाथो से लगा दीजिए." प्रीति ने एक ट्यूब पार्वती की तरफ बढ़ा दी.
अगले 10 मिनिट मे पार्वती ने उतना कर दिया. "दीदी और भी कही?"
"हा यहा पैरो पर भी कर दो." पार्वती पहले वाला ही सब दोहरा रही थी और प्रीति अब उस पॅकेट से कुछ गीले टिश्यू निकाल कर अपनी बाह और गर्दन सॉफ करने लगी.
"दीदी एक बात कहूं ?" पार्वती ने थोड़ी शरम से कही ये बात तो प्रीति ने मुस्कुराते हुए गर्दन हा मे हिलाई.
"दीदी आपके पैर ना बहुत खूबसूरत है और मांसल होने के साथ कितने लंबे भी है. कही भी कुछ हल्का सा ज़्यादा या कम नही है. और वैसे ही आपकी बाहें और गर्दन भी है."
"चल कुछ भी बोलती है.इतना कुछ खास नही बस ये ज़रूर है के टेन्निस खेलने से थोड़ी मजबूत हो गई है." और फिर उसने अपनी टीशर्ट भी उतार दी.
बेदाग सुडोल जिस्म और हर अंग जैसे तराशा हुआ था. पेट भी ऐसा था कि उसपर कही कोई चर्बी ना थी. हल्की मासपेशियो की झलक मिल रही थी जो उसके उभरे यौवन को और बढ़ा रही थी. लेस वाली सफेद आधे कप की ब्रा मे उसके उभार सर उठाए खड़े थे. प्रीति का शरीर और अंगो को देख कर लड़की होते हुए भी पार्वती को जैसे उसके शरीर की तरफ खींचाव सा होने लगा था.
"पार्वती यहा पीठ और पेट पर भी कर देना." इतना बोलकर प्रीति पेट के बल नरम बिस्तर पर पसर गई.
पार्वती के हाथ जैसे अपने आप ही उसके शरीर पर रेंग रहे थे. सख़्त जांघे लेकिन उसपर बालरहित मुलायम खाल किसी माखन से लग रही थी पार्वती को. दोनो हाथो से अच्छे से जैसे वो क्रीम से मालिश करने लगी थी. जाँघो के जोड़ के पास जैसे ही हाथ पहुचे प्रीति की आवाज़ ने उसको चेताया. "बस दीदी अब उसको सॉफ कर दीजिए और यहा मेरी पीठ पर सॉफ करके क्रीम लगा दीजिए."