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नीरज बहुत ज्यादा शातिर खिलाड़ी था इसलिए सब कुछ समझ गया और बोला:"
" ठीक हैं मैं उसे एक नई कार लेकर दे दूंगा। लेकिन ये कार उसे तुम खुद देना ताकि वो तुम्हे ज्यादा सम्मान और इज्जत दे। तुम तो प्लानिंग करने में बहुत तेज निकले अनूप।
अनूप ने पहली बार अपनी गर्दन उठाई और नीरज की तरह देखा और बोला:"
" वो मेरा बेटा कल शाम को अा जाएगा दिल्ली से, परसो उसे मैं कर दिला दूंगा।
नीरज:" मैं कल ही गाड़ी के सब कागज तैयार करके गाड़ी भेज दूंगा अनूप लेकिन ध्यान रखना मुझे हर हाल में रूबी चाहिए। अगर मेरे साथ धोखा हुआ तो याद रखना मै जितना अच्छा हूं उससे कहीं ज्यादा बुरा हूं।
अनूप:" आप फिक्र ना करे, मैं आपको वचन देता हूं कि अब रूबी जरूर कमजोर पड़ जाएगी।
नीरज:" ठीक हैं मैं चलता हूं, आज लीमा नहीं दिखाई दे रही है क्या हुआ छुट्टी पर हैं क्या ?
अनूप:" हान उसे कुछ जरूरी काम था, इसलिए आज नहीं अाई, कल से अा जाएगी। कोई काम था क्या तुम्हे ?
नीरज: नहीं बस ऐसे ही पूछ रहा था क्योंकि आज दिखी नहीं।
इतना कहकर नीरज ने अनूप को जेब से कुछ किताबे निकाल कर दी और बोला:"
"एक काम करना, आज से रूबी से अलग सोना और ये किताबे उसके कमरे में रख देना ताकि उसकी नजर पड़े और वो पढ़े।फिर खेल का असली मजा आएगा।
अनूप ने हाथ आगे बढ़ा कर वो किताबे ले ली और बोला:"
" ठीक हैं मैं रख दूंगा।
नीरज:"चल ठीक हैं अनूप, मैं चलता हूं । कल तक। गाड़ी अा जाएगी।
इतना कहकर नीरज ऑफिस से चला गया तो अनूप ने किताबे खोली तो उसने काफी सारी चुदाई की कहानियां थी। अनूप ने जैसे ही एक कहानी को पढ़ना शुरू किया तो पता चला कि लड़की का नाम रूबी और उसने हीरो का नाम नीरज था जो रूबी की दमदार चुदाई करता हैं।
अनूप समझ गया कि नीरज ये सब रूबी को अपनी आई झुकाने के लिए कर रहा हैं इसलिए उसने चुपचाप किताबे अपने बैग में रख ली और दारू का पैग बनाने लगा। दारू पीने के बाद वो आराम से कुर्सी पर ही सो गया और करीब शाम को सात बजे उसकी आंख खुली तो वो अपना बैग उठाकर घर की तरफ चल पड़ा।
रूबी खाना बना चुकी थी और शांता बेचारी खाना खाकर नीचे अपने कमरे में चली गई थी। करीब आठ बजे के आस पास अनूप घर के अंदर दाखिल हुआ और उसने रूबी को स्माइल दी और बोला:'
" हो गया तुम्हारे जिम का उदघाटन? कैसा रहा सब कुछ ?
रूबी:" बस ठीक ही रहा सब, रात अाई तो आप सोए हुए थे इसलिए नहीं उठाया मैंने।
अनूप:" मैं 11बजे तक तुम्हारा इंतजार करता रहा लेकिन तुम नहीं अाई। आगे से ध्यान रखना कि शरीफ घर की औरतें रात में घर देर से नहीं आती।
रूबी ने बिना कुछ बोले अपनी गर्दन स्वीकृति में झुका दी क्योंकि उससे बेहतर अनूप की शराफत को कौन जानता था लेकिन वो उससे बहस नहीं करना चाहती थी।
अनूप ने अपना बैग टेबल पर रखा और नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया। थोड़ी देर बाद वो फ्रेश होकर अा गया और बोला:"
" अरे जल्दी से खाना लगाओ, बहुत तेज भूख लगी हैं मुझे।
रूबी किचेन में चली गई और जल्दी से खाना लगा दिया। उसके बाद दोनो के एक साथ खाना खाया और रूबी हैरान थी कि आजकल अनूप में कुछ बदलाव अा रहा है। उस बेचारी को क्या पता कि अनूप उसके साथ जो खेल खेल रहा हैं उसने वो बुरी तरह से फस जायेगी।
खाना खाने के बाद अनूप सोने के लिए चल गया। उसने अपने बैग से किताबे निकाली और आराम से साहिल के कमरे में तकिए के नीचे छुपा दिया। अनूप अच्छी तरह जानता था कि उसे रूबी को अपने पास नहीं सोने देने के लिए क्या करना हैं इसलिए उसने बहाना करते हुए अपने बेड पर लेटकर अपनी आंखे बंद कर ली। दूसरी तरफ रूबी बेचारी इन सब बातों से अनजान बरतन धो रही थी। अपना काम निपटा कर रूबी सोने के लिए अाई टी देखा कि अनूप जोर जोर से खर्राटे मार रहा है। अनूप को पहले ये बीमारी थी और रूबी को रात भर नींद नहीं आती थी इसलिए रूबी अलग सोती थी और अनूप का इलाज हुआ तब कहीं जाकर रूबी ने चैन की सांस ली।
लेकिन आज फिर से अनूप को तेज तेज खर्राटे मारते देखकर रूबी समझ गई कि फिर से इसे प्रोबलम हो रही है। उसने चुपचाप अपनी चादर उठाई और बाहर की तरफ चल दी ताकि वो आराम से साहिल के कमरे में सो सके।
जैसे ही वो गेट पर पहुंची तो उसने गुस्से से पलटकर अनूप को देखा जो आंखे बंद किए उसे रूबी को देख रहा था। रूबी ने मन ही मन उसे काफी सारी गालियां दी और जैसे ही वापिस पलटी ती उसकी नजर विटामिन सिरप पर पड़ी और उसने जल्दी से एक चम्मच सिरप पिया और सोने के लिए साहिल के कमरे में अा गई।
रूबी आराम से लेट गई लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी। सामने कमरे में साहिल की फ्रेम में एक बड़ी सी फोटो लगी हुई थी जिसे देखकर उसे अपने बेटे की याद आने लगी। रात के करीब 10 बज चुके थे और वो आमतौर को 9 बजे के बाद साहिल को कॉल नहीं करती थी।
" ठीक हैं मैं उसे एक नई कार लेकर दे दूंगा। लेकिन ये कार उसे तुम खुद देना ताकि वो तुम्हे ज्यादा सम्मान और इज्जत दे। तुम तो प्लानिंग करने में बहुत तेज निकले अनूप।
अनूप ने पहली बार अपनी गर्दन उठाई और नीरज की तरह देखा और बोला:"
" वो मेरा बेटा कल शाम को अा जाएगा दिल्ली से, परसो उसे मैं कर दिला दूंगा।
नीरज:" मैं कल ही गाड़ी के सब कागज तैयार करके गाड़ी भेज दूंगा अनूप लेकिन ध्यान रखना मुझे हर हाल में रूबी चाहिए। अगर मेरे साथ धोखा हुआ तो याद रखना मै जितना अच्छा हूं उससे कहीं ज्यादा बुरा हूं।
अनूप:" आप फिक्र ना करे, मैं आपको वचन देता हूं कि अब रूबी जरूर कमजोर पड़ जाएगी।
नीरज:" ठीक हैं मैं चलता हूं, आज लीमा नहीं दिखाई दे रही है क्या हुआ छुट्टी पर हैं क्या ?
अनूप:" हान उसे कुछ जरूरी काम था, इसलिए आज नहीं अाई, कल से अा जाएगी। कोई काम था क्या तुम्हे ?
नीरज: नहीं बस ऐसे ही पूछ रहा था क्योंकि आज दिखी नहीं।
इतना कहकर नीरज ने अनूप को जेब से कुछ किताबे निकाल कर दी और बोला:"
"एक काम करना, आज से रूबी से अलग सोना और ये किताबे उसके कमरे में रख देना ताकि उसकी नजर पड़े और वो पढ़े।फिर खेल का असली मजा आएगा।
अनूप ने हाथ आगे बढ़ा कर वो किताबे ले ली और बोला:"
" ठीक हैं मैं रख दूंगा।
नीरज:"चल ठीक हैं अनूप, मैं चलता हूं । कल तक। गाड़ी अा जाएगी।
इतना कहकर नीरज ऑफिस से चला गया तो अनूप ने किताबे खोली तो उसने काफी सारी चुदाई की कहानियां थी। अनूप ने जैसे ही एक कहानी को पढ़ना शुरू किया तो पता चला कि लड़की का नाम रूबी और उसने हीरो का नाम नीरज था जो रूबी की दमदार चुदाई करता हैं।
अनूप समझ गया कि नीरज ये सब रूबी को अपनी आई झुकाने के लिए कर रहा हैं इसलिए उसने चुपचाप किताबे अपने बैग में रख ली और दारू का पैग बनाने लगा। दारू पीने के बाद वो आराम से कुर्सी पर ही सो गया और करीब शाम को सात बजे उसकी आंख खुली तो वो अपना बैग उठाकर घर की तरफ चल पड़ा।
रूबी खाना बना चुकी थी और शांता बेचारी खाना खाकर नीचे अपने कमरे में चली गई थी। करीब आठ बजे के आस पास अनूप घर के अंदर दाखिल हुआ और उसने रूबी को स्माइल दी और बोला:'
" हो गया तुम्हारे जिम का उदघाटन? कैसा रहा सब कुछ ?
रूबी:" बस ठीक ही रहा सब, रात अाई तो आप सोए हुए थे इसलिए नहीं उठाया मैंने।
अनूप:" मैं 11बजे तक तुम्हारा इंतजार करता रहा लेकिन तुम नहीं अाई। आगे से ध्यान रखना कि शरीफ घर की औरतें रात में घर देर से नहीं आती।
रूबी ने बिना कुछ बोले अपनी गर्दन स्वीकृति में झुका दी क्योंकि उससे बेहतर अनूप की शराफत को कौन जानता था लेकिन वो उससे बहस नहीं करना चाहती थी।
अनूप ने अपना बैग टेबल पर रखा और नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया। थोड़ी देर बाद वो फ्रेश होकर अा गया और बोला:"
" अरे जल्दी से खाना लगाओ, बहुत तेज भूख लगी हैं मुझे।
रूबी किचेन में चली गई और जल्दी से खाना लगा दिया। उसके बाद दोनो के एक साथ खाना खाया और रूबी हैरान थी कि आजकल अनूप में कुछ बदलाव अा रहा है। उस बेचारी को क्या पता कि अनूप उसके साथ जो खेल खेल रहा हैं उसने वो बुरी तरह से फस जायेगी।
खाना खाने के बाद अनूप सोने के लिए चल गया। उसने अपने बैग से किताबे निकाली और आराम से साहिल के कमरे में तकिए के नीचे छुपा दिया। अनूप अच्छी तरह जानता था कि उसे रूबी को अपने पास नहीं सोने देने के लिए क्या करना हैं इसलिए उसने बहाना करते हुए अपने बेड पर लेटकर अपनी आंखे बंद कर ली। दूसरी तरफ रूबी बेचारी इन सब बातों से अनजान बरतन धो रही थी। अपना काम निपटा कर रूबी सोने के लिए अाई टी देखा कि अनूप जोर जोर से खर्राटे मार रहा है। अनूप को पहले ये बीमारी थी और रूबी को रात भर नींद नहीं आती थी इसलिए रूबी अलग सोती थी और अनूप का इलाज हुआ तब कहीं जाकर रूबी ने चैन की सांस ली।
लेकिन आज फिर से अनूप को तेज तेज खर्राटे मारते देखकर रूबी समझ गई कि फिर से इसे प्रोबलम हो रही है। उसने चुपचाप अपनी चादर उठाई और बाहर की तरफ चल दी ताकि वो आराम से साहिल के कमरे में सो सके।
जैसे ही वो गेट पर पहुंची तो उसने गुस्से से पलटकर अनूप को देखा जो आंखे बंद किए उसे रूबी को देख रहा था। रूबी ने मन ही मन उसे काफी सारी गालियां दी और जैसे ही वापिस पलटी ती उसकी नजर विटामिन सिरप पर पड़ी और उसने जल्दी से एक चम्मच सिरप पिया और सोने के लिए साहिल के कमरे में अा गई।
रूबी आराम से लेट गई लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी। सामने कमरे में साहिल की फ्रेम में एक बड़ी सी फोटो लगी हुई थी जिसे देखकर उसे अपने बेटे की याद आने लगी। रात के करीब 10 बज चुके थे और वो आमतौर को 9 बजे के बाद साहिल को कॉल नहीं करती थी।