• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest स्पेशल करवाचौथ

साहिल और रूबी दोनो ऐसे ही पड़े रहे और पानी की धार उनके उपर पड़ रही थी। रूबी को बहुत तेज भूख लगी थी लेकिन वो चाहती थी कि साहिल खुद उसे कहे। दोनो की सांसे अब नॉर्मल हो गई थी और साहिल रूबी के उपर से हट गया।

रूबी ने सुकून की सांस ली और शिकायती लहजे में बोली:"

" कोई अपनी मा को इस तरह प्यार करता हैं ज़ालिम, जान ही ले लेता आज तो तू मेरी।

साहिल ने रूबी को पीछे से अपनी बांहों में भर लिया और उसकी चूचियां दबाते हुए बोला:"

" चुदाई से कभी किसी की जान नहीं जाती, अच्छा नहीं लगा क्या तुम्हे ?

रूबी के होंठो पर स्माइल अा गई और पलटते हुए उसकी आंखो में देखते हुए बोली:"

" अच्छा तो लगा बहुत लेकिन दर्द बहुत हुआ साहिल, पता नहीं कैसे तूने इसे इतना बड़ा कर कर लिया और उपर से इतनी तेज तेज धक्के मारता हैं।

साहिल ने उसका गाल चूम लिया और बोला:" सब तुम्हारे ही दूध का असर हैं मम्मी। ओह रूबी अभी तो सिर्फ शुरुवात हुई हैं, आगे आगे देखो होता हैं क्या ।

इतना कहते हुए साहिल ने उसकी गांड़ को मसल दिया तो रूबी के मुंह से आह निकल गई और साहिल की कमर में मुक्के मारने लगी।

साहिल:" ओह माई गॉड, मैं तो भूल ही गया आज आपका फास्ट था। भूख लगी होगी आपको।

रूबी:" अच्छा चलो आखिरी में तुम्हे याद अा ही गया।

साहिल ने अपने दोनो कान पकड़ लिए और उठक बैठक करने लगा। रूबी स्माइल करते हुए बोली:"

" बस कर अब, अा चलते हैं।

इतना कहकर रूबी आगे चली तो उसे अपनी टांगो में दर्द का एहसास हुआ। सालो बाद हुई इस दमदार चुदाई के कारण उसकी चूत की फांके लाल हो गई थी। अपनी मम्मी को लंगड़ाते हुए देखकर साहिल ने रूबी को अपनी बांहों में उठा लिया और बोला:*

" क्या हुआ मम्मी आपको ?

रूबी:" शैतान सब कुछ जानकर भी अनजान बनता हैं, तूने मेरी फाड़ दी हैं अच्छे से।

साहिल को अब समझ आया कि रूबी चुदाई के कारण लंगड़ा रही हैं इसलिए वो बोला:"

" ओह मम्मी मुझे नहीं पता था आपको इतना दर्द होगा, आगे से मैं ध्यान रखूंगा।

रूबी ने अपने बेटे के भोलेपन को समझते हुए उसका मुंह चूम लिया और बोली:"

" चल पागल, इस दर्द के लिए तो हर औरत तरसती हैं। इस दर्द में भी एक अलग ही मजा हैं।

साहिल ने रूबी की आंखो में देखते हुए कहा:"

" मतलब अगली बार मैं फिर से तुम्हे ये दर्द दे सकता हूं। या इससे भी कहीं ज्यादा।

रूबी ने साहिल की आंखो में देखते हुए उसे स्माइल दी और हाथ से उसका लंड दबा दिया। साहिल सब समझ गया और दोनो मा बेटे अब चुदाई लोक से निकल कर घर के अंदर अा गए थे।

रूबी ने नाईट पहन लिया और साहिल ने जल्दी से किचेन में जाकर मैगी बना दी और साहिल ने रूबी को अपनी गोद में बिठा लिया और अपने हाथ से खाना खिलाने लगा।

साहिल:" मम्मी मुझे आपको कुछ बताना था। आज सुबह मैंने लीमा को देखा तो मैं हैरान हो गया।

रूबी:" अच्छा ऐसा क्या हुआ ?

साहिल:" मम्मी यकीन कर पाना मुश्किल हैं। लेकिन जो सामने हैं वो तो मानना पड़ेगा ही।

साहिल ने रूबी को बताया तो रूबी को जैसे यकीन ही नहीं हुआ और बोली:"

" हाय भगवान क्या ये सच हैं, ऐसा कैसे हो सकता है बेटा ?

मुझे यकीन नहीं हो रहा।

साहिल:" यकीन तो मुझे भी नहीं हुआ था, लेकिन वो ही सब सच्चाई बता सकती हैं। हमे उससे बात करनी चाहिए।

रूबी:' हान बेटा, अरे वो दोनो तो भूख से पागल हो गए होंगे।

साहिल:" मम्मी मैंने मैगी ज्यादा बना ली है। आप पहले खाओ फिर उनके पास चलते हैं।

रूबी ने खाना खाया और उसके दोनो मा बेटे नीचे तहखाने की तरफ चल पड़े। अंदर लीमा और अनूप दोनो का भूख के मारे बुरा हाल था।

साहिल ने दरवाजा खोला तो उसकी आंखो में चमक अा गई और दोनो खाना खाने लगे।

साहिल और रूबी दोनो बैठे हुए उन्हें देखते रहे। उनके खाना खाने के बाद साहिल बोला

साहिल:" लीमा मुझे कुछ जरूरी बात करनी थी।

लीमा की भूख शांत हो गई तो उसने चैन की सांस ली और बोली:"

" देखिए मैं आपको कुछ नहीं बता सकती, मैं मजबूर हू।

साहिल:" अरे तुम्हारा मन करे तो बताना नहीं तो मना कर देना। आओ मेरे साथ।

लीमा मजबूर थी इसलिए साहिल के साथ साथ चल पड़ी। अनूप धीरे से मरी हुई आवाज में बोला:"

" बेटा मुझे भी अपने साथ ले चलो।

अनूप के बोलते ही रूबी ने एक जोरदार थप्पड़ उसे जड़ दिया और अनूप की बोलती बंद हो गई। लीमा की भी हालत खराब हो गई और साहिल ने तहखाने के गेट को बंद किया और उपर की तरफ चल दिया।

साहिल,रूबी और लीमा तीनो एक कमरे में बैठे हुए थे और साहिल ने एक बार अच्छे से इधर उधर देखा कि कहीं शांता तो नहीं है।

साहिल:" लीमा मेरी बात ध्यान से सुनो मुझे सब सच बोलना, मैं तुम्हारी मदद करूंगा।

लीमा ने साहिल की तरफ देखा और कुछ बोली नहीं। साहिल समझ गया कि ये ऐसे नहीं मानने वाली इसलिए उसने सच्चाई बताने का फैसला किया।

साहिल लीमा की आंखो में देखते हुए बोला:"

" तुम्हारा असली नाम लीमा नहीं सपना हैं और तुम शांता की बेटी हो।

साहिल की बात खतम होते ही लीमा की आंखे हैरानी से खुल गई और डरते हुए बोली:"

" नहीं नहीं मैं कोई सपना वपना नहीं हूं, मैं किसी शांता को नहीं जानती।

साहिल ने लीमा का हाथ पकड़ लिया और बोला:"

" तुम डरो मत, में जानता हूं कि तुम झूठ बोल रही हो क्योंकि तुम्हारे कंधे पर बना निशान ये साबित कर रहा है कि तुम सपना हो। मैंने आज सुबह देखा था। मैं जानना चाहता हूं कि शांता कहां हैं ?

लीमा समझ गई कि साहिल को सब सच्चाई पता चल गई है इसलिए झूठ बोलने से कुछ फायदा नहीं होने वाला। सपना फफक कर रो पड़ी।

साहिल:" देखो अपने आपको संभालो, तुम्हारी मा हमारे यहां ही काम करती थी। मै उन्हें कुछ नहीं होने दूंगा। बताओ मुझे।

लीमा:" मेरी मा नीरज के कब्जे में है, उसके इशारे पर ही मैंने ये सब किया हैं। मेरी मजबूरी थी अपनी मा की जान बचाने के लिए मुझे ये सब करना पड़ा।

साहिल और रूबी चौंक गए।

साहिल:" इसका मतलब तुम्हारे मा को किडनैप करके उसकी जगह ज्योति को लाया गया तो साफ हैं कि शांता और नीरज मिले हुए हैं, रवि मिश्रा और प्रिया ये सब एक ही डौर से बंधे हुए हैं और उन्हें सबको अपने इशारे पर ज्योति नचा रही है।

रूबी ने अपना सिर पकड़ लिया और बोली:'

" है भगवान, सबसे मासूम दिखने वाली ही सबसे ख़तरनाक निकली, बेटा मैंने तो तुम्हे पहले ही बता दिया था कि शांता ने जान बूझकर प्रिया को भगाया हैं और वो जरूर शांता के साथ मिली हुई हैं तभी तो उसने ऐसा किया हैं।
 
साहिल पूरी तरह से सारी कहानी समझ गया था कि उस दिन जो रूबी ने उसे बताया था वो बिल्कुल ठीक था।

साहिल:" सपना ये बताओ तुम्हारी मा कहां हैं ?

लीमा:" मुझे नहीं पता, बस इतना पता है कि वो नीरज के कब्जे में हैं। मेरी मा को बचा लो साहब।

साहिल:" चिंता मत करो, उन्हें कुछ नहीं होगा। अब मैं वो करूंगा कि नीरज खुद तुम्हारी मा को लेकर आएगा। बस कल टेंडर का फैसला हो जाए।

रूबी:" लेकिन बेटा टेंडर तो हमारे हाथ नहीं लग सकता, तुमने बताया था कि वो सब कुछ बदल चुके हैं।

साहिल:" मा तुम्हारा बेटा इतना बेवकूफ नहीं हैं, अभी भी बाज़ी पूरी तरह से मेरे हाथ में हैं।

रूबी:" मैं समझी नहीं कैसे ?

साहिल:" लीमा मुझे तुम्हे वापिस अभी तहखाने में ही बंद करना होगा। लेकिन शांता मा को अब कुछ नहीं होने दूंगा।

साहिल ने फिर से लीमा की वापिस बंद कर दिया और अपनी मा के पास अा गया। दोनो मा बेटे बेड पर लेते हुए थे।

रूबी:" बताओ मुझे तुम कैसे टेंडर हासिल कर लोगे ?

साहिल ने रूबी की आंखो में देखा और बोला:"

" मा मैं जानता था कि ये सब हो सकता है इसलिए मैंने पहले ही बाहर दूसरी कंपनी से बोंड कर दिया था और टेंडर के असली सैंपल वहां बन गए हैं। ये सारा खेल जान बूझकर खेला गया ताकि उन्हें बेवकूफ बना सकू।

रूबी की आंखे में अपने बेटे के लिए तारीफ साफ दिखाई दी और उसका मुंह चूम कर बोली:"

" सच में कितना तेज निकले तुम, साहिल मुझे तुम पर गर्व हैं। मेरी किस्मत अब तुम मेरे पति हो।

इतना कहकर रूबी ने अपने होंठ साहिल के होंठो पर रख दिए। साहिल ने अपनी मा के होंठो को मुंह में भर लिया और चूसने लगा। एक बार फिर से दोनो के कपड़े उतरते चले गए और रूबी बिल्कुल नंगी अपने बेटे की बांहों में मचल रही थी।

साहिल ने रूबी की चूत में एक उंगली घुसा दी तो रूबी के मुंह से आह निकल पड़ी और उसने साहिल का लंड पकड़ कर दबा दिया और अपनी टांगे खोल दी।

साहिल रूबी के उपर अा गया और उसकी चूत के मुंह पर लंड को सेट किया और एक धक्का लगाया तो आधा लंड रूबी की चूत में घुस गया और रूबी के मुंह से फिर से दर्द भरी सिसकारियां निकलने लगी

" आह उफ्फ साहिल, कितना मोटा लन्ड हैं, हाय मेरी चूत,

साहिल ने अपने लंड को बाहर की तरफ खींचा और फिर से एक ही धक्के में पूरा लंड घुसा दिया और रूबी का बदन एक बार फिर से दर्द से ऐंठता चला गया।

" आह मार दिया, उफ्फ हाय राम, कितना बेरहम हैं तू और तेरे लॉला। आह पूरा घुस गया

साहिल ने रूबी की आंखो में देखते हुए धक्के लगाने शुरू कर दिए और देखते ही देखते रूबी की मजा आंने लगा उसकी सिसकियां फिर से गूंज उठी। साहिल जितनी जोर से धक्का मारता रूबी भी अपनी गांड़ उपर की तरफ उठा देती। दोनो पसीने पसीने हो गए लेकिन कोई हार मानने को तैयार नहीं था।

साहिल ने रूबी की चूत को उंगली से सहला दिया और रूबी के मुंह से आह निकल पड़ी और वो कसकर साहिल से लिपट गई और साहिल ने तक तगड़े धक्के के साथ उसकी चूत को हिला दिया और दोनो मा बेटे एक साथ झड़ते चले गए। साहिल रूबी की चूचियों पर गिर पड़ा और रूबी उसकी कमर सहलाने लगी। थोड़ी देर बाद दोनों नींद के आगोश में चले गए।

रूबी और साहिल दोनो उठ गए थे और आज उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा दिन था क्योंकि आज टेंडर के लिए सैंपल जमा होने थे ताकि आगे काम शुरू किया जा सके।

रूबी:" साहिल बेटा सब कुछ ध्यान से करना, मुझे आज किसी भी कीमत पर जीत चाहिए।

साहिल:" मम्मी आप चिंता मत करो, लेकिन ऐसा क्या हो गया कि आपको हर कीमत पर जीत चाहिए ?

रूबी:" बेटा मैं चाहती हूं कि जीतकर हम ये सब कुछ को कभी हमारा था ही नहीं उसे फिर से वापिस शांता यानी ज्योति को दे दे और हमारे बड़ों से जो गलती हुई हैं उसका थोड़ा सा प्रायश्चित कर सके।

साहिल:" मम्मी सच कहूं तो मुझे खुद भी अच्छा नहीं लगता ये सब। आप बेफिक्र रहे आज मै जीतकर ही वापिस आऊंगा।

दोनो बात कर ही रहे थे कि गेट खुला और शांता अंदर दाखिल हुई। शांता धीरे धीरे चलती हुई उनके पास अा गई और आज उसके चेहरे पर एक अलग ही खुशी, चमक नजर आ रही थी।

साहिल समझ गया कि ये सब इसलिए हैं क्योंकि वो जानती है कि मैं टेंडर हार जाऊंगा।

साहिल और रूबी दोनो ने शांता के पैर छुए और शांता ने उनके सिर पर हाथ रख दिया और बोली:"

" बेटा आज तो शायद तुम्हारा टेंडर का रिजल्ट हैं ना।

साहिल:" जी मा जी, मुझे आश्रीवाद दीजिए ताकि मैं जीत कर अा सकू।

शांता के चेहरे की चमक एकदम से गायब हो गई क्योंकि वो चाहकर भी उसे आशीर्वाद नहीं दे सकती थी लेकिन अब कर भी कहा सकती थीं।

शांता:" भगवान तुम्हे कामयाब करे बेटा।

रूबी के होंठो पर मुस्कान अा गईं और वो चुपचाप किचेन में चली गई। साहिल अपने कमरे में अा गया और जरूरी काम में लग गया। शांता भी पोचा उठाकर सफाई में लग गई।

रूबी ने नाश्ता तैयार किया और फिर जल्दी ही शांता और रूबी के साथ साथ साहिल भी नाश्ता कर रहा था।

साहिल:" शांता मा आज मम्मी मेरे साथ जाएगी मीटिंग में और आप घर ही रहेगी।

रूबी खुश हो गई लेकिन साथ ही साथ उसे इस बात की फिक्र थी कि कहीं शांता पीछे कुछ गडबड ना कर दे। लेकिन आराम से खाना खाती रही। शांता नाश्ता करने के बाद अपने कमरे में बाहर कि तरफ अा गई और साहिल और रूबी दोनो अंदर तहखाने में चले गए।

अनूप और लीमा दोनो ने नाश्ता किया और अनूप एक बार फिर से रूबी के पैरो में गिर पड़ा और माफी मांगने लगा। लेकिन रूबी उसे नजर अंदाज करते हुए बाहर अा गई।

रूबी ने घर को बाहर से बंद किया और साहिल अपनी गाड़ी निकाल चुका था और रूबी उसमे बैठ गई। शांता अपनी जासूस नजरे गड़ाए हुए दोनों को देख रही थी।

साहिल ने सबसे पहले अपने आपको बदला और अनूप के रूप में अा गया। उसके बाद दोनो दोनो ऑफिस की तरफ चल दिए। रूबी को ऑफिस में देखते ही दुबे जी गदगद हो गए और रूबी ने उनकी उम्र का लिहाज करते हुए प्यार से उनको नमस्कार किया।

साहिल:" दुबे जी मुझे ये सभी सामान चाहिए ताकि हम आज की जंग जीत सके।

दुबे:" बेटा देख लो एक बार मैंने पहले ही सब कुछ तैयार कर दिया है जैसा तुमने कहा था।

साहिल ने सारी चीज़े एक के एक चेक करी और बोला:"

" वाह दुबे जी , आप ने बहुत ही अच्छा काम किया हैं। जब तक आप जैसे अनुभवी साथी मेरे साथ हैं तो मुझे क्या दिक्कत होगी। अच्छा रवि मिश्रा का क्या हुए?
 
दुबे: रवि मिश्रा कल वापिस अा गया हैं लेकिन उसकी तबियत थोड़ी खराब हैं। लगता हैं बेचारे को गोवा की ठंड लग गईं हैं।

साहिल ने होंठो पर स्माइल अा गई और दुबे जी इसका पीछे का रहस्य नहीं जानते थे और सोच में पड़ गए।

साहिल:" ज्यादा सोचिए मत आप, आज आपको ही पूरे दिन सब कुछ देखना होगा। मैं शायद टेंडर के बाद सीधे घर चला जाऊंगा ।

दुबे: ठीक हैं बेटा, आप चिंता ना करे, मैं सब देखा लूंगा।

साहिल और रूबी टेंडर के लिए निकल गए। साहिल ने एक नंबर पर फोन किया और अगले ही मोड़ पर उन्हें एक लड़का जिसे साहिल ने डील करी थी मिल गया और सारे सैंपल साहिल को सौंप दिए।

साहिल:* दोस्त मैं तुम्हारा ये एहसान ज़िन्दगी भर नहीं भूल सकता।

लड़का ने एक नजर रूबी पर डाली और :" इसमें एहसान की कोई बात नहीं है अनूप जी, ये तो बिजनेस हैं यहां फायदा दिखता हैं आदमी अपने आप घूम जाता हैं।

साहिल ने उसे स्माइल दी और अपनी गाड़ी अपने लक्ष्य की तरफ दौड़ा दी। रूबी को पता नहीं क्यों अच्छा नहीं लग रहा था, उस लड़के के देखने का नजरिया बहुत ही गंदा था।

रूबी:" साहिल मुझे ये लड़का अच्छा नहीं लगा, इसकी नजर मुझे बड़ी खराब लगी। हमे इस पर यकीन नहीं करना चाहिए।

साहिल ने रूबी की आंखो में एक पल के लिए देखा और स्माइल करते हुए बोला:"

" मेरी जान रूबी तुम्हारे हुस्न के आगे अच्छे अच्छे की नीयत और नजर खराब हो जाती हैं। फिर ये बेचारा किस खेत की मूली हैं।

रूबी ने साहिल को फीकी सी स्माइल और और तभी उसकी नज़र सामने से अा रही कार पर पड़ी और डरते हुए बोली:"

" साहिल सामने देखो बेटा।

साहिल ने सामने देखा और कार को बिल्कुल अपने पास देखकर बौखला गया और ब्रेक मारते हुए बचने की कोशिश करी लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

एक जोरदार आवाज के साथ दोनो गाडियां टकरा गई। साहिल और रूबी को एक झटका सा लगा लेकिन शायद उनका समय अच्छा था और दोनो की जान बच गई।

साहिल हल्का सा घबराते हुए बाहर निकला और देखा कि गाड़ी का ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था। वहीं सामने वाला भी ठीक था।

दोनो ने एक दूसरे को इज्जत और प्यार से देखा और सोरी बोला और उसके बाद साहिल अपनी गाड़ी में आकर बैठ गया और कार स्टार्ट करने लगा तभी उसकी नज़र पीछे पड़ी और और साहिल को लगा कि जैसे वो कोई सपना देख रहा है और उसके मुंह से हैरानी भरे शब्द निकले

* नहीं भगवान, ये नहीं हो सकता।

रूबी तुरंत पीछे घूम गई और देखा कि उस लड़के ने जो टेंडर सैंपल साहिल को दिए थे वो हल्के से झटके से ही टूट गए थे। रूबी की भी हालत खराब हो गई।

रूबी:" वो कमीना भी धोखा दे गया, अब क्या होगा साहिल।

साहिल के चेहरे पर निराशा साफ झलक रही थी। उसे समझ में नहीं अा रहा था कि अब क्या किया जाए। साहिल ने अपने निराशा में अपना माथा पकड़ लिया और अपनी आंखे बंद कर ली। उसे कुछ रास्ता नजर नहीं आ रहा था।

रूबी साहिल को ऐसे उदास देखकर टूट सी गई लेकिन वो जानती थी कि अपने बेटे की आखिरी हिम्मत वहीं हैं इसलिए खुद को संभाल कर बोली:"

" साहिल ऐसे परेशान होने से कुछ नहीं होगा। उठो अभी तो टाइम बाकी हैं हमारे पास, हम अपनी आखरी सांस तक लड़ाई लड़ेंगे।

साहिल ने अपने चेहरे पर से हाथ हटाया और रूबी की तरफ देखा और उसे रूबी की आंखो में दुख के साथ साथ चमक नजर आईं और बोला:"

" हान मम्मी, हम ऐसे हार नहीं मान सकते, हम हर हाल में जीत कर ही दम लेंगे।

रूबी ने साहिल का माथा चूम लिया और उसका हाथ पकड़ कर अपनी गोद में रख लिया। साहिल ने उस लड़के का नंबर मिलाया जिससे उसने डील करी थी जिसका नाम आबिद था।

साहिल:" ये सब क्यों किया मेरे साथ तुमने ? मैंने तो तुम्हे आधे का पार्टनर भी बना दिया था।

आबिद:" मैं सिर्फ अपना फायदा देखता हूं, तुम मुझे आधा दे रहे थे अच्छे सैंपल के लिए और दूसरी पार्टी ने मुझे पूरा टेंडर दे दिया। अब तुम्हीं बताओ मैं क्या करता।

साहिल समझ गया कि ये सब नीरज का किया धरा हैं इसलिए गुस्से से बोला:"

" तुम्हारे लिए जुबान की कोई कीमत नहीं, अपने वादे कोई मायने नहीं रखते।

आबिद:" आवाज नीचे रखकर बात करो, मुझे सिर्फ पैसा अच्छा लगता हैं। वादे जुबान ये सब बाते किताबो में ही अच्छी लगती है।

साहिल:" तुम एक बेहद ही घटिया और नीच किस्म के इंसान निकले।

आबिद:" बकवास मत करो, बिजनेस में सब चलता हैं। भाड़ में जाओ तुम।

इतना कहकर आबिद ने फोन काट दिया। साहिल का मूड पूरी तरह से खराब हो गया और उसने रूबी को सारी बाते बताई।

रूबी उसे समझाते हुए बोली:"

" बेटा आजकल नीच और बुरे लोगो का ही बोलबाला हैं। लेकिन हर पाप का घड़ा भरता हैं और इनके सब पाप का भी घड़ा भर चुका हैं। कोई ना कोई रास्ता निकाल आएगा। चलो गाड़ी चलाओ।

साहिल ने उदास मन से गाड़ी को आगे बढ़ा दिया और दुबे जी को कॉल किया।

साहिल:" दुबे जी मैं आपको एक लिस्ट भेज रहा हूं। आप उसके हिसाब से सामान लेकर खुद ही अा जाओ।

दुबे:" ठीक हैं बेटा।

साहिल ने फोन काट दिया और टेंडर ऑफिस के बाहर ही दुबे का इंतजार करने लगा। रूबी और साहिल दोनो गाड़ी से बाहर अा गए और दोनो खड़े हुए आपस में बात कर रहे थे।

तभी साहिल का फोन बज उठा और साहिल ने देखा कि आरव का नंबर था इसलिए वो कार के दूसरी तरफ चला गया और बात करने लगा। रूबी वहीं खड़ी हुई कुछ सोच रही थी।

तभी एक कार वहां आकर रूकी और उसका दरवाजा खुला और उसमे से एक करीब चालीस साल का गोरा बिल्कुल सुंदर लेकिन गंजा आदमी बाहर निकला जिसके साथ कुछ गार्ड भी थे।

अंदर जाते जाते उसकी नजर रूबी पर पड़ी और वो एक पल ही में ही पहचान गया कि ये तो वहीं योग के लिए प्रसिद्ध रूबी हैं।

आदमी जिसका नाम सुनील था एक पल के लिए ठिठका और उपर से नजर तक एक भरपूर नजर उसने रूबी के जिस्म पर डाली और रूबी को जैसे ही उसका आभास हुआ तो आदमी हल्का सा सकपका गया और स्माइल करते हुए बोला

" अरे आप रूबी मैडम हैं ना, वही जो योगा के लिए प्रसिद्ध हैं।
 
रूबी इतना तो समझ गई थी कि ये आदमी उसे जानता हैं। उसके हाव भाव से ही लग रहा था कि ये आदमी जरूर कोई पहुंचा हुआ हैं और खुद ही उससे बात कर रहा है तो रूबी भी स्माइल करते हुए बोली:"

" जी वही हूं। आपकी तारीफ ?

सुनील को रूबी की स्माइल देखकर हिम्मत अा गई और उसने एक बार फिर से रूबी के जिस्म को प्यासी नजरो से घूरा और बोला:"

" बंदे को सुनील कहते हैं। आपकी फिटनेस का दीवाना हूं। अब सिर्फ टीवी और फोटो में देखा था आज आपको देखा तो एहसास हुआ कि वो कुछ भी नहीं था आप ऐसे ज्यादा सुन्दर लगती हैं। सच में कोई भी आपको देख आपकी उम्र का अंदाजा नहीं लगा सकता। मेरे ख्याल से आप 32 की होगी।

हर औरत को अपनी तारीफ पसंद होती हैं और रूबी भी इसका अपवाद नहीं थी। रूबी खुश हो गई और बोली:"

" जी नहीं, मेरी उमर 39 साल हैं। वैसे आप भी धोखा खा गए।

सुनील स्माइल करते हुए बोला:"

" वैसे आप दुनिया की पहली औरत हैं जो अपनी सही उम्र बता रही है नहीं तो औरतें अपने आपको बहुत छोटी बताती हैं वैसे आप यहां क्या कर रही हैं ?

रूबी:" मेरे पति अनूप श्री वास्तव जी का एक टेंडर पास हुआ था जिसके आज सैंपल पास होंगे। उनके जी साथ अाई हूं।

सुनील हैरानी से :" अच्छा आप अनूप जी की पत्नी हैं, जितनी अच्छी किस्मत हैं उनकी जो इतनी अच्छी, सुंदर और बिल्कुल क़यामत, रति जैसी बीवी मिली है।

रूबी समझ गई कि ये आदमी बहुत बड़ा फेंकू और उस पर मोहित हो गया है। रूबी

" थैंक्स, लेकिन ये बहुत ज्यादा तारीफ हो गई। वैसे आप भी यहां किसी टेंडर के लिए आए हैं या फिर कुछ और काम हैं ?

सुनील के होंठो पर तीखी स्माइल अा और और बोला:"

" बंदा अपनी क्या तारीफ करे मैडम, थोड़ी देर बाद आपको खुद ही पता चल जाएगा। जाते हुए एक बार मिलकर जाना मुझसे आप शाम को।

इतना कहकर स्माइल करते हुए सुनील अंदर घुस गया। रूबी वहीं खड़ी हुई उसे जाते हुए देखती रही। रूबी को लग रहा था कि शायद ये आदमी उसकी मदद कर सके लेकिन वो उस आदमी की नजरे भली भांति समझ गई थी इसलिए साहिल को देखने लगीं ।

साहिल दुबे से बात कर रहा था और एक बार फिर से सभी सैंपल अा गए थे। लेकिन रूबी जानती थी कि ये सभी बिल्कुल नकली सामान हैं और फैल हो जायेगा। दुबे सैंपल देकर वापिस चला गया और रूबी चलते हुए साहिल के पास अाई और बोली:"

" बेटा क्या इससे काम बन जाएगा। ये सब तो बिल्कुल खराब क्वालिटी के है।

साहिल:" मम्मी अब क्या करू, मेरी तो कोई जान पहचान भी नहीं हैं। शायद इससे कुछ जुगाड हो जाए क्योंकि ना होने से कुछ तो होना बेहतर हैं।

रूबी:" चलो देखते हैं जो किस्मत में होगा देखा जाएगा।

दोनो अंदर की तरफ चल दिए और सैंपल जमा करने के बाद नीचे हॉल में अा गए। अभी मीटिंग शुरू होने में करीब 15 मिनट बाकी थीं साहिल जैसे जी अंदर घुसा तो उसकी नजर नीरज पर पड़ी और नीरज के ठीक बराबर में शांता यानी ज्योति बैठी हुई थी बिल्कुल अपने असली रूप में। साहिल के मन में अब कोई शक नहीं रह गया था कि नीरज ज्योति का ही एक मोहरा हैं। साहिल जो कि अनूप बना हुआ था उसने नीरज को स्माइल दी और नीरज रूबी को देखते ही बनती अपनी सीट से उठ गया और साहिल के पास अा गया और बोला:"

" कैसे हो भाई ? उस रात के बाद आए नहीं आप ? सैंपल अच्छे बने है ना आपके ?

साहिल:" सब अच्छे से हो गया हैं। देखो आगे क्या होता हैं

तभी नीरज ने रूबी की तरफ देखने का नाटक किया और दोनो हाथ जोड़ते हुए बोला:"

" प्यारी भाभी जी नमस्कार, कैसी हैं आप ?

रूबी ने उसे खा जाने वाली नजरो से घूरा और फिर अपने होंठो पर स्माइल लाते हुए बोली:"

" अच्छी हू, आप बताए

नीरज:" बस भाभी आपके दर्शन हो गए तो दिल को सुकून मिल गया। वैसे आप हमेशा की तरह आज भी बेहद खूबसूरत लग रही है सच में।

रूबी :" जी थैंक्स।

तभी सरकारी ऑफिसर आने लगे और नीरज अपन जगह पर जाकर बैठ गया। रूबी साहिल के पास बैठ गई और बोली:"

" कितना नीच कुत्ता हैं ये नीरज, बाहर मिलता तो इसका मुंह तोड़ देती।

साहिल:" मम्मी ध्यान से देखना इसके बराबर में जो औरत बैठी हुई हैं वहीं शांता यानी ज्योति हैं।

लेकिन अपनी उसकी तरफ मत देखना आप। शक हो गया तो दिक्कत हो जाएगी।

रूबी:" ये भगवान, मतलब हम सही सोच रहे थे। हमारे साथ सब कुछ इसी ज्योति के इशारे पर हो रहा हैं।

रूबी की बड़ी इच्छा हो रही थी कि एक बार गर्दन घुमा कर ज्योति को देखे लेकिन वो मजबुर थी इसलिए सीधे बैठी रही। रूबी अपने दुश्मन को सामने होते हुए भी नहीं देख पा रही थी और उसे अपनी बेबसी पर तरस अा रहा था।

तभी स्पीकर पर एक एक आवाज गूंज उठी

" सभी लोग शांति के साथ बैठ जाएं। टेंडर समिति के अध्यक्ष आपके समक्ष पधार रहे हैं।

तभी सभी ऑफिसर अा गए और अभी भी बाद एक कुर्सी खाली थी जो कि बॉस के लिए थी। दरवाजा खुला और सुनील अंदर दाखिल हुआ और आकर बॉस की कुर्सी पर बैठ गया और एक साथ सारे लोग उसके सम्मान में खड़े हो गए।

रूबी हैरान हो गई कि जिस आदमी से वो बाहर बाते कर रही थी वो कोई और नहीं बल्कि टेंडर समिति का अध्यक्ष था। सुनील अपनी जगह पर बैठ गया और लोगो को उसने बैठने का इशारा किया और सभी लोग एक एक करके बैठ गए। सुनील ने वहां मौजूद सभी लोगो पर नजरे दौड़ाई और उसकी नजर रूबी पर पड़ी तो उसकी आंखे खुशी से खिल उठी।

सुनील:" आज की कार्यवाही शुरू की जाए। सबसे पहले आप सभी बारी बारी से आए और अपने सामान का प्रदर्शन करते हुए उसकी अच्छाई बताए।

एक के बाद लोग जाने लगे और अपने सामान की क्वालिटी बताने लगे। रूबी ध्यान से सुन रही थी और साहिल से धीमी आवाज में बोली

" साहिल जब हमारा नंबर आएगा तो मैं स्टेज पर जाऊंगी तुम नहीं।

साहिल:" लेकिन आप तो इसके बारे में कुछ नहीं जानती। आप नहीं बता पाओगी।

रूबी:" मेरी बात मानो और मेरे हिसाब से काम करो। तुम मुझे हमारे सामान की क्वालिटी की फाइल दो ताकि मैं देख सकूं

साहिल:" लेकिन मम्मी उससे कोई फायदा नहीं होगा, फाइल के हिसाब से एक भी क्वालिटी हमारे सामान में नहीं हैं।

रूबी:" तुम ज्यादा मत सोचो और मुझे फाइल दो। बाकी मुझे क्या करना हैं वो मैं खुद देख लूंगी।

साहिल ने चुपचाप फाइल रूबी की तरफ बढ़ा दी और रूबी ध्यान से फाइल देखने लगी। बीच बीच में वो नजर उठा कर सुनील की तरफ देख रही थी। सुनील भी उसे देख रहा था कभी कभी लोगो की नज़रे बचाते हुए और ये बात साहिल से ना छुपी रह सकी। साहिल को ये सब देखकर अच्छा नहीं लगा और उसने धीरे से रूबी को बोला:"

" मम्मी वो अध्यक्ष सुनील बार बार आपकी ही तरफ देख रहे हैं और आप जी उन्हें ही देख रही हो। क्या वो आपको जानते हैं ?

रूबी:" बेटा जब तुम बाहर दुबे जी से बात कर रहे थे तो वोट मुझे बाहर मिले थे और पहचान लिया कि मैं योगा वाली रूबी हूं। बोल रहे थे कि मैं आपका बहुत बड़ा प्रशंसक हूं।

साहिल:" अच्छा ये तो ठीक हुआ, अब शायद काम बन जाएगा। लेकिन इतना आसान नहीं हैं सब कुछ।

रूबी धीमे से बोली:"

" साहिल अभी तुमने मुझे ठीक से समझा ही कहां हैं, मैं अगर अपनी पर अा जाऊ तो दुनिया हिला दू फिर ये सुनील किस खेत की मूली हैं साहिल।

साहिल:" लेकिन मम्मी वो आपको गलत नजर से देख रहा हैं और ये मुझे अच्छा नहीं लग रहा हैं बिल्कुल भी।

रूबी:' देखने दो, वैसे भी आज कल लड़की को सही नजर से देखता ही कौन हैं ।
 
साहिल:" लेकिन मम्मी वो आपको गलत नजर से देख रहा हैं और ये मुझे अच्छा नहीं लग रहा हैं बिल्कुल भी।

रूबी:' देखने दो, वैसे भी आज कल लड़की को सही नजर से देखता ही कौन हैं ।

इससे पहले कि साहिल कुछ बोलता स्टेज पर उनका नंबर अा गया और रूबी अपनी फाइल लेकर अाई बढ़ गई। साहिल की समझ में नहीं अा रहा था कि उसकी मम्मी क्या करने जा रही है जिससे वो टेंडर हासिल कर सकेगी।

रूबी धीरे धीरे मटकटी हुई स्टेज की तरफ बढ़ गई और उसकी गांड़ अपने पूरे शवाब पर थी, रूबी की नज़रे सुनील के चेहरे पर टिकी हुई थी और बाकी सभी की नजरें रूबी की गांड़ पर।

रूबी जानती थी कि पीछे बैठे सभी उसकी गांड़ को निहार रहे होंगे इसलिए उसने बेफिक्र होते हुए सुनील को एक कातिल मुस्कान दी और स्टेज पर चढ़ गई। सुनील की आंखे खुली की रह गई, जितना उसने रूबी के बारे में सुना था फोटो में देखा था उससे कहीं ज्यादा कमाल का जिस्म था रूबी का। रूबी की कामुक अदाएं देखकर सुनील को महसूस हो रहा था मानो वो उसके लिए ही अपनी गांड़ हिला रही है।

रूबी स्टेज के बीच में खड़ी हुईं थीं और उसने एक बार सब पर नजर डाली और उसने पहली बार ज्योति का चेहरा ध्यान से देखा। ज्योति सुंदर तो थी ही लेकिन उसकी आंखे बहुत खतरनाक लग रही थी।

रूबी ने सिर्फ एक पल के लिए उसे देखा और अपनी नजरे हटा ली और अगले ही पल अपने आपको बोलने के लिए तैयार करने लगी। रूबी के होंठो पर स्माइल अा गई और चेहरे पर एक गजब का आत्म विश्वास साफ झलक रहा था।

रूबी ने अपने दोनो हाथ अभिवादन की मुद्रा में जोड़ दिए और बोली

:" सबसे पहले तो तो आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार। मैं अध्यक्ष सुनील सर और दूसरे अधिकारियों की बहुत बहुत आभारी हूं कि आपने पहली बार देश में टेंडर का आयोजन किया और देश के आत्म निर्भर बनाने में एक बहुत ही बड़ा सहयोग दिया हैं। मैं आपको बताना चाहती हूं कि हमारी कंपनी पिछले 20 सालो से अपनी अच्छी गुणवत्ता के लिए एक अलग पहचान रखती हैं और उसी को आधार मानते हुए हमने कुछ सैंपल बनाए हैं जो मैं आप सभी के समक्ष प्रस्तुत कर रही हूं।

इतना कहकर रूबी ने सभी अधिकारियों के आगे बल्ले, गेंद, और पूरी क्रिकेट किट रख दी। सबसे आखिर में उसने सुनील के आगे एक बड़ा सा बल्ला रखा दिया जो कि फुल साइज था।

रूबी ने स्माइल देते हुए बेहद धीमे से कहा:"

" सर ये बिल्कुल आपके साइज का बल्ला हैं, इससे आम बेहद आराम से चौके छक्के जड़ सकते हैं वो भी पूरी पारी खेलते हुए। बस इस बल्ले की मार झेलने के लिए आपको मोटी और मजबूत गेंद की जरुरत होगी।

रूबी ये बोलकर अपनी गांड़ मटकाए हुए फिर से चल दी और सुनील के दिमाग में धमाका सा हुआ। वो समझ गया था कि रूबी उसे सीधे सीधे ऑफर दे गई है। अपनी लंड की तुलना बड़े बल्ले से किए जाने पर वो गदगद हो उठा और वो पूरी तरह से रूबी पर फिदा हो गया।

स्टेज पर लगी बड़ी स्क्रीन पर रूबी के द्वारा दिया गया सभी सामान दिखाया जा रहा था और रूबी जानती थी कि उसका खेल खत्म होने वाला हैं तभी उसने एक नई चाल और चल दी।

रूबी ने बल्ले को हाथ में उठाया और हत्थे को थोड़ा नीचे से पकड़ते हुए बोली:"

" देखिए सर ये वजन में ही बहुत ही हल्का हैं लेकिन इसकी मजबूती अपने आप में शानदार हैं और मैं एक औरत होने के बाद इसे बिल्कुल आसानी से उठा सकती हूं और इससे खेल सकती हूं।

इतना कहकर रूबी बल्ले को हवा में उठाने लगी और अलग अलग मुद्रा में फोटो देने लगी। स्क्रीन पर क्या चल रहा हैं सभी अधिकारी भूल गए और सब रूबी को ही देख रहे थे।

टाइम पूरा हो गया तो रूबी स्टेज से नीचे उतर गई और उसी अंदाज में चलते हुए अपनी सीट पर अा गई। साहिल पूरी तरह से खुश हो गया था और वो बोला:"

" वाव मम्मी आपने तो कमाल कर दिया, सच में बहुत ही अच्छा काम किया आपने। देखो आगे क्या होता हैं ।

रूबी:" होना क्या है साहिल ये टेंडर हमे मिल जाएगा आराम से तुम खुश हो जाओ।

साहिल:" हान मम्मी लगता हैं ऐसा ही हैं। अच्छा आप बैठो मैं वॉशरूम से होकर आता हूं।

साहिल उठा और बाहर की तरफ चला गया तो उसके जाते ही रूबी ने अपना मोबाइल निकाला और सुनील का कार्ड भी को उसने बाहर बात करते हुए दिया था। रूबी ने नंबर को सेव किया और व्हाट्स एप पर सुनील की डीपी देखते ही मेसेज किया

" सर प्यार भरा नमस्कार, आप बहुत सेक्सी लग रहे हैं। कैसी रही मेरी परफॉर्मेंस ?

सुनील का मोबाइल बीप किया और उसने देखा कि एक नए नंबर से मेसेज था लेकिन रूबी की डीपी पर लगी फोटो देखते ही वो सब समझ गया और लिखा

" सेक्सी तो आप लग रही है रूबी जी, दीवाना बना दिया आपने, सच में आपकी परफॉर्मेंस सबसे अच्छी थी, मैं तो ये कहूंगा कि सामान से कहीं ज्यादा मुझे आप आपका अंदाज, आपकी बाते, आपके चलना पसंद आया।

रूबी समझ गई कि तीर सजी निशाने पर लगा हैं इसलिए आगे लिखा:'

" सर मेरी खुश किस्मती की आपको ये सब पसंद अाया। सर क्या मुझे टेंडर मिल जाएगा ?

सुनील समझ गया कि रूबी उसे रिझाकर अपना काम करवाना चाहती है इसलिए सुनील ने लिखा

" टेंडर पास तो हो जाएगा लेकिन एक दिक्क्त हैं रूबी जी, बल्ला ज्यादा भारी और मजबूत हैं जबकि गेंद हल्की हैं शायद झेल ना पाए।

इतना कहकर सुनील के अपने लंड के उभार का एक फोटो रूबी को भेज दिया और रूबी यही सब तो चाह रही थी। रूबी ने लिखा

" सर आपका बल्ला सच में बहुत भारी हैं लेकिन मैं भी कुछ कम नहीं हूं। आराम से इस बल्ले से खेल सकती हूं। वैसे भी मेरी पास गेंदों की कोई कमी हैं। बस आप एक बार मुझे टेंडर दीजिए, बाल आपकी।

इतना कहकर रूबी फोन को अपने मुंह के पास रखा और दूसरे हाथ से अपनी चूचियों को उभारते हुए एक फोटो खींच लिया और सुनील को भेज दिया

सुनील के तो जैसे होश ही उड़ गए। वो समझ गया कि रूबी उससे आराम से चुद जाएगी। साहिल आकर अपनी सीट पर बैठ गया और दोनो की बाते रुक गई।

एक एक करके सभी नंबर अा गए और सभी ने अपना सामान दिखा दिया। लंच का समय हो गया और सभी लोग खाना खाकर फिर से हॉल में बैठ गए और सभी अधिकारी लोग अपने अपने ऑफिस में जा चुके थे।

रूबी और साहिल भी अंदर अा रहे थे कि तभी रूबी की नजर सुनील के ऑफिस पर पड़ी और बोली:"

" साहिल तुम चलो मैं एक बार सुनील सर से मिलकर आती हूं।

साहिल ने अपनी मम्मी की तरफ देखा और इससे पहले की वो कुछ बोलता रूबी अंदर घुस गई। साहिल चुपचाप अपनी सीट पर आकर बैठ गया।

रूबी को अपने ऑफिस में घुसते देखकर सुनील घबरा उठा और बोला:'

" क्या गजब कर रही हो रूबी जी, किसी ने आपको यहां देख लिया तो मुसीबत अा जाएगी।

रूबी आगे बढ़ी और पेंट के उपर के उपर से ही उसका लंड सहलाते हुए बोली:"

" सर आपका बल्ला सच में बहुत तगड़ा हैं, मेरे पास गेंद की

कोई कमी हैं, देखो ना उपर भी है और नीचे भी।

अपनी चुचियों का उभार दिखाते हुए रूबी पलट गई और झुक कर सुनील के लंड के आगे अा गई। सुनील की हालत खराब हो गई और उसकी गांड़ को ललचाई नज़रों से देखते हुए बोला:"

" रूबी जी टेंडर अापका, बस मुझे गेंद देनी होगी जी भर कर खेलने के लिए।

रूबी ने एक हाथ पीछे लाते हुए अपनी गांड़ को सहलाया और सिसक उठी

" आह सर, ये गांड़ आपके बल्ले के नाम, बस आज आप मुझे खुश कीजिए फिर देखिए मै बार बार आपको खुश करूंगी ।
 
सुनील:" ठीक हैं, अपना वादा याद रखना तुम। अब जाओ बाद में कॉल करूंगा।

रूबी जानती थी कि उसका काम हो गया है इसलिए वो बाहर निकल गई और हॉल में बैठ गई। साहिल ने अपनी मा को देखकर राहत की सांस ली और थोड़ी देर बाद ही सभी अधिकारी अा गए और सभी लोग दम साधे टेंडर का इंतजार का रहे थे।

सुनील:" आप सभी का मैं आभारी हूं कि आपने यहां आकर टेंडर में भाग लिया। सभी के सामान एक से बढ़कर एक अच्छी गुणवत्ता के हैं। मैं जानता हूं कि हमारे देश में लड़कियो के खेलने का लेवल इतना अच्छा नहीं हैं। और आज जिस तरह से रूबी की ने हमे समझाया हैं उससे एक बात तो साफ हो गई हैं कि लकड़ियां इनकी बातो पर ध्यान देगी और खेल का स्तर ऊंचा होगा। सामान भी इनका बहुत अच्छा है। मैं ये टेंडर रूबी जी को देता हूं

सारा हॉल तालियों से गूंज उठा और साहिल और रूबी के चेहरे खुशी से चमक गए।

सुनील:" लेकिन मेरी एक शर्त हैं रूबी जी, जब भी हमें कहीं खेल को बढ़ावा देना होगा खासतौर से लड़कियो के खेल को तो आपको आना पड़ेगा। आप युवाओं के लिए मॉडल हैं। योगा आप अच्छा सिखा सकती हैं जिससे खिलाड़ी रोगमुक्त हो जायेंगे।

रूबी समझ गई कि सुनील अपनी चाल चल गया हैं इसलिए रूबी अपनी सीट से खड़ी हुई और बोली:"

" सर मैं वादा करती हूं कि सभी को योगा सिखाना मेरी जिम्मेदारी होगी। इसके साथ ही साथ में खुद युवाओं के बीच जाऊंगी और उन्हें खेल के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

सुनील:" धन्यवाद रूबी जी। आज का कार्यकर्म यहीं खत्म होता है।

साहिल और रूबी खुश थे वहीं दूसरी तरफ नीरज और ज्योति को लग रहा था कि मानो उनकी दुनिया की उजाड़ दी गई है। ज्योति की आंखो में अंगारे साफ चमक रहे थे और वो जानती थी कि आज उसके हाथ से एक बहुत बड़ा मौका निकल गया है। रूबी ने अपना जादू दिखाकर टेंडर हासिल कर लिया और उसकी सारी योजना धरी की धरी रह गई।

नीरज ने ज्योति को शांत रहने का इशारा किया और साहिल यानि अनूप के पास अा गया।

नीरज:" बहुत बहुत मुबारक हो दोस्त। मैंने कहा था ना कि मैं ये टेंडर तुम्हे हर हाल में दिलवा दूंगा।

साहिल:" सच में यार तुमने अपना कहा पूरा किया। दोस्त हो तो तुम्हारे जैसा।

नीरज:" लेकिन मैं तुमसे नाराज हू भाई। तुमने अपना वादा पूरा नहीं किया, तुम्हे याद हैं ना।

साहिल की आंखे में थोड़ा पल के लिए उभर अाया लेकिन अगले ही पल की खुद को काबू करते हुए बोला

" आप फिक्र मत करो, देखना मैं कैसे अपना वादा पूरा करता हूं।

तभी स्टेज पर साहिल का नाम पुकारा गया और वो आगे बढ़ तो नीरज ने अपने दोनो हाथ फिर से रूबी के आगे जोड़ दिए और बोला:"

" भाभी आपके फिगर का जवाब नहीं। हमे भी थोड़ा योगा सिखा दो तुम।

रूबी:" मैं तुम्हे खूब समझती हू नीरज और तुम्हारी नज़र को भी। लेकिन तुम्हे कुछ हाथ नहीं लगने वाला हैं। अपने आपको सुधार लो तो तुम्हारे लिए बेहतर होगा।

नीरज:" अरे भाभी जी आप तो बुरा मान गई। थोड़ी लचक हमे भी दिखा दीजिए ना।

रूबी ने उसे घूरकर देखा और तभी रूबी का नाम स्टेज पर बोला गया तो रूबी सीधे आगे बढ़ गई और साहिल के साथ मिलकर कागजी कार्रवाई पूरी करने लगी।

वहीं ज्योति और नीरज के बीच बहस चल रही थी। नीरज उसे कुछ समझाने कि कोशिश कर रहा रहा जबकि ज्योति बहुत ज्यादा गुस्से ने दिखाई दे रही थी। वो उसकी कोई बात नहीं सुन रही थी और गुस्से से अपने कदम पटकती हुई बाहर की तरफ चली गई। उसकी आंखो में ज्वाला साफ नजर आ रही थी मानो वो उसमे आज सबको जलाकर भस्म कर देगी।

रूबी सुनील के साथ मिलकर कागज पूरे कर रही थी और सुनील जानता था कि आज की रात शायद रूबी उससे चुद जाएगी नहीं तो उसने साइन किया ही हैं कि जबकि रूबी जी की जरूरत होगी उसे आना ही होगा इसलिए उसे कोई दिक्कत नहीं थी। साहिल ने ध्यान से ज्योति को जाते हुए देख रहा था और समझ गया था कि आज ये जरूर कुछ ना कुछ कांड करेंगी।

वहीं दूसरी तरफ सुनील और रूबी व्यस्त थे और सुनील बोला:'

" रूबी जी अगर आपकी आज की रात फ्री हो तो क्या मेरे फार्म हाउस पर अा सकती हो

रूबी स्माइल करते हुए बोली:"

" आज तो नहीं कर लेकिन एक या दो दिन बाद मैं पक्का अा जाऊंगी। वैसे भी आपने शर्त ही ऐसी लगा दी हैं कि आपसे मुलाकात होती ही रहेगी।

सुनील ने स्माइल दिया और बोला:"

" बस आपके दर्शन होते रहेंगे इसी बहाने।

थोड़ी देर बाद सभी कागज पूरे हो गए और साहिल रूबी के साथ घर की तरफ लौट पड़ा जहां शांता यानी रूबी उनका बेसब्री से इंतजार कर रही थी।

साहिल और रूबी दोनो कार में बैठे हुए थे और घर की तरफ जा रहे हैं।

साहिल:" मम्मी आपने बताया नहीं कि ये चमत्कार कैसे हो गया ? सुनील जी ने हमारी इतनी खराब क्वालिटी होने के बाद भी हमे टेंडर कैसे दे दिया ?

रूबी ने अपना एक हाथ उठाया और साहिल का हाथ पकड़ लिया और बोली:"

" साहिल ध्यान से मेरी पूरी बात सुनना, उसके बाद ही कोई फैसला करना।

रूबी ने इसके बाद साहिल को बताया कि किस तरह सुनील उसका दीवाना हो गया था और मैंने उसे अपने जाल में फांस लिया और उसने वहीं किया जो मैं चाहती थी।

ये सुनकर साहिल का मूड खराब हो गया और बोला:"

" मतलब एक जगह से इज्जत बचाने के लिए आप दूसरी जगह खुद अपनी इज्जत नीलाम कर रहे हो मम्मी।

रूबी ने उसे गुस्से से देखा और बोली:" पहले मेरी पूरी बात हो जाने दो। मेरे पास उसकी व्हाट्स एप की चैटिंग पड़ी हुई हैं और अब तुम उससे बात करोगे। अगर हम किसी को ये बात बता दे कि उसने टेंडर सिर्फ मेरे चक्कर में आकर मुझे दिया हैं तो उसकी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी ।

और तुम तो समझते ही हो कि मैं मर जाउंगी लेकिन अपने चरित्र पर दाग नहीं लगने दूंगी।

साहिल को अब जाकर रूबी की पूरी कहानी समझ में अाई और बोला:"

" ओह मम्मी मलतब सांप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी। ये तो आपने बहुत ही अच्छा किया।

रूबी ने उसे स्माइल दी और बोली:" पत्नी किसकी हूं आखिर मैं अब। दिमाग तो होगा ही।

साहिल ने गाड़ी अपने घर की तरफ घुमा दी और बोला:"

" मम्मी ज्योति को देखा आपने, कितना गुस्सा अा रहा था उसे ?

रूबी:" हान बेटा, देखने में तो वो अच्छी खासी सुंदर हैं। लेकिन हैं वो बहुत खतरनाक।

साहिल:" मम्मी मुझे तो लग रहा है कि वो शांत नहीं बैठने वाली, जिस तरह से वो गुस्से में अाई हैं जरूर कुछ ना कुछ हरकत करेगी वो आज।

रूबी ने अपना सिर सहमति में हिला दिया और दोनो घर अा गए थे और रूबी घर के अंदर घुस गई। साहिल अपनी गाड़ी पार्किंग में लगाकर आया और देखा कि शांता अंदर खाना बना चुकी थी।

शांता:" क्या हुआ अनूप बेटा टेंडर का आज ? उम्मीद हैं तुम्हे मिल गया होगा।

साहिल:" हान मा जी, आपने आशीर्वाद दिया तो तो मिलना तो था ही।

शांता के चेहरे पर स्माइल अा गई और बोली:"

" चलो ये तो बहुत खुशी की बात है। भगवान तुम्हे कामयाब करे बेटा। अच्छा तुम भी जल्दी से नहा लो, फिर खाना खा लेते हैं।

साहिल बाथरूम में अंदर नहाने के लिए घुस गया। शांता ने इधर उधर देखा और अपने ब्लाउस से एक छोटी सी पुड़िया निकाली और खाने में मिला दिया। तभी रूबी नहाकर बाहर आ गई और उसने शांता की तरफ देखा तो शांता कांप उठी। उसका चेहरा पसीने पसीने हो उठा। उसे लगा मानो उसकी चोरी रंगे हाथो पकड़ ली गई हो। उसके हाथ से खाली पुड़िया छूटकर नीचे गिर गई। रूबी शांता को स्माइल देते हुए अपने कमरे में चली गई और शांता ने सुकून की सांस ली कि वो बच गई है।

शांता ने रोटी बनाईं और खाने को प्लेट में लगा दिया और बोली:"

" अच्छा मेरा तो मन है नहीं खाने का आज। तुम दोनो खा लेना अच्छे से।

इतना कहकर शांता जाने लगी तो रूबी बोली:"

" अरे मा जी बैठो तो आप। चली जाना, आज हमारे लिए खुशी का दिन है, इतना बड़ा टेंडर मिला हैं।

शांता:" हान बेटा मुझे बहुत खुशी हैं टेंडर मिलने की। लगता हैं कि अब हमारे दिन बदल जायेंगे।

तभी साहिल भी अा गया और खाने की टेबल पर बैठ गया। शांता को याद आया कि अंदर नहाने तो अनूप गया था लेकिन बाहर साहिल निकला। है भगवान इसका मतलब अनूप सच में गायब है और साहिल फिर से अनूप बनकर घूम रहा है। मुझे क्या लेकिन आज इनका काम खत्म हो ही जायेगा। साहिल ने देखा कि खाने से बहुत अच्छी खुशबू अा रही है तो बोला:"

" अरे मा जी आपने बहुत अच्छा खाना बनाया हैं आज। आओ साथ में खाना खाते हैं।

शांता के जिस्म पर बेचैनी साफ दिखाई दी और बोली:"

" नहीं बेटा, मेरा मन नहीं हैं। आज ही के दिन मेरी बेटी सपना गायब हुई थी। आज मैं फास्ट रखती हूं।

साहिल अपनी सीट से खड़ा हो गया और ठीक शांता के सामने आकर बोला:"

" मैं जानता हूं कि तुम खाना नहीं खा सकती। क्योंकि सच्चाई ये हैं कि तुमने ये खाना बनाया ही नहीं हैं। ये खाना तो गुप्ता होटल से अाया हूं शांता जी। तुम शायद खाने के पैकेट ठीक से छुपाना भूल गई ज्योति जी।

रूबी और ज्योति दोनो उछल पड़े। सबसे ज्यादा आश्चर्य तो ज्योति को हुआ और बोली:"

" कौन ज्योति और गुप्ता होटल से कौन खाना लाया हैं ?

इतना कहकर शांता थोड़ी पीछे को हटी और अपने ब्लाउस के अंदर हाथ घुसा दिया लेकिन साहिल पूरी तरह से सावधान था इससे पहले कि ज्योति का हाथ बाहर आता साहिल ने बिजली की गति से उसे पकड़ लिया और ज्योति उसकी पकड़ में कराह उठी और बोली:"

" ये क्या बदतमीजी हैं साहिल, तुम्हे मेरे साथ ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए।

साहिल:" ज्यादा बनने की कोशिश मत करो ज्योति, तुम्हारा खेल खत्म हो गया है। मम्मी आप जल्दी से इसके दोनो पैर बांध दीजिए

रूबी ने तुरंत अपना दुप्पटा उतारा और शांता के पैरो को कसकर बांधने लगी तो शांता ने एक जोरदार लात रूबी को मार दी और रूबी दर्द से तड़प उठी। साहिल ने ज्योति के हाथ को मोड़ दिया तो दर्द के मारे ज्योति भी तड़प उठी और अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी।

साहिल ने अपनी दोनो टांगे रूबी की टांगो पर कस दी और रूबी को फिर से इशारा किया तो रूबी ने सावधानी से आगे आते हुए उसके पैरो को बांध दिया और साहिल ने पूरी ताकत लगाते हुए ज्योति के हाथ को बाहर खींचा तो एक पैकेट उसके हाथ से छूटकर फर्श पर बिखर गया।

फर्श पर छोटे छोटे जहर बुझे हुए पिन पड़े हुए थे जो ज्योति निकालने की कोशिश कर रही थी। साहिल ने ज्योति को पीछे की तरफ खींचा और सोफे पर गिरा दिया और देखते ही देखते उसके हाथ भी बांध दिए गए।
 
रूबी ज्योति के सामने बैठ गई जबकि साहिल ने धीरे से बहुत ही सावधानी से पिन हटा दिए और वो भी अब ज्योति के सामने बैठा हुआ था। ज्योति की आंखे लाल सुर्ख हो रही थी और गुस्से से उन्हें घूर रही थी।

साहिल:" देखो मैं जानता हूं कि तुम कौन हो और यहां क्यों अाई हो ? मैं चाहूं तो तुम्हे पीट सकता हूं, जान से मार सकता हूं लेकिन मैं अपने दादा द्वारा कि गई गलती नहीं करना चाहता क्योंकि मैं उनके जैसा नहीं हूं।

ज्योति ने ध्यान से साहिल की बात को सुना तो उसे लगा कि साहिल सही कह रहा है क्योंकि मैं इस वक़्त पूरी तरह से मजबूर हूं लेकिन फिर भी ये मुझे मार नहीं रहा जबकि मैंने अभी रूबी को लात भी मार दी थी।

ज्योति:" मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, तुम चाहो तो मुझे मार दो, लेकिन मैं पीछे नहीं हट सकती। लेकिन तुम्हे कैसे पता चला कि मैं शांता नहीं हूं ?

रूबी:" ज्योति उस दिन मैं तुम्हे हॉस्पिटल लेकर गई तो तुम प्रेगनेंट निकली। बस हमे शक हुआ और फिर तुम्हारे कमरे की तलाशी तो तुम्हारी डायरी मिल गई और हमे सब पता चला कि तुम्हारे साथ कितना गलत हुआ है और इसका मुझे बेहद अफसोस हैं ज्योति ।

ज्योति ने जब अपने प्रेगनेंट होने की बात सुनी तो उसे खुशी हुई और बोली:"

" मैं प्रेगनेंट हूं ये कैसे हो सकता हैं? रिपोर्ट तो कमजोरी की थी।

साहिल:" वो सब मैंने झूठी रिपोर्ट बनवाई थी ताकि तुम्हे सच्चाई का पता ना चल सके।

रूबी:" अच्छा एक बात बताओ क्या नीरज मिश्रा ही तुम्हारा पति हैं जिसके साथ आज तुम टेंडर में गई थी ?

ज्योति कुछ देर चुप रही और बोली:"

" नीरज मिश्रा मेरा पति नहीं है बल्कि मेरे पति का दोस्त हैं।

साहिल:" तो फिर तुम्हारा पति कौन है और प्रिया कौन हैं ?

ज्योति:" मेरा पति कौन हैं ये मैं तुम्हे क्यों बताऊं, अगर तुम अपना भला चाहते हो तो मुझे छोड़ दो नहीं तो शांता को मौत के घाट उतार दिया जायेगा।

साहिल और रूबी को एकदम से शांता की याद अाई और बोली:"

" शांता को कहां छुपा रखा हैं तुमने ? उस बेचारी पर क्यों ज़ुल्म ?

ज्योति:" शांता कहां हैं ये तो तो कभी नहीं समझ पाओगे। मुझे छोड़ दो अगर उसे जिंदा देखना चाहते हो तो।

साहिल:" उसका कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता जब तक तुम मेरे कब्जे में हो। बताओ मुझे शांता कहां हैं ?

ज्योति ने साहिल की तरफ देखा और स्माइल करते हुए बोली:"

" मैं मर सकती हूं लेकिन मुंह नहीं खोल सकती। चाहे तो आजमा कर देख लो।

साहिल जानता था कि ज्योति सच बोल रही है और फिर दूसरी बात वो पहले ही ज़ुल्म की शिकार ज्योति पर और ज़ुल्म नहीं करना चाहता था। रूबी अपने कमरे में चली गई और और खाना लगाने लगी क्योंकि आते हुए वो खाना खरीद चुके थे।

खाना लग चुका था और साहिल नीचे तहखाने से अनूप और लीमा को भी लेकर अा गया। रूबी ने ज्योति के चेहरे को धो दिया था और वो अब बिल्कुल ज्योति लग रही थी शांता नहीं।

ज्योति को देखते ही लीमा उसके पास गई और उसका गिरेबान पकड़ते हुए बोली:"

" बता ज्योति कहां हैं मेरी मा ?

अनूप पूरी तरह से हैरान था और उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। साहिल ने ज्योति को लीमा की पकड़ से आजाद किया और बोला:"

" लीमा तुम चिंता मत करो। तुम्हारी मा को लेकर मैं खुद आऊंगा। तुम उनकी चिंता मत करो।

रूबी:" जब प्रिया शांता की बेटी नहीं थी तो तुमने उसे क्यों भगा दिया था ?

ज्योति:" प्रिया को मैंने इसलिए भगा दिया था ताकि तुम वो तुमसे बच जाए। वो मेरी साथी हैं।

रूबी:" लेकिन फिर उसके कंधे पर निशान कहां से आया था ?

साहिल:" मम्मी वो तो टैटू बना हुआ था । मैंने खुद चेक किया था।

रूबी को अब सारी कहानी समझ में अा गई थी। साहिल और रूबी ने ज्योति को खूब समझाने की कोशिश करी लेकिन उसने समझौता करने से साफ इंकार कर दिया।

सभी लोग खाना खा चुके थे और लीमा कुछ याद करते हुए बोली:"

" मेरी मा को इन्होने नीरज मिश्रा के घर पर रखा हुआ था पहले। अब वो कहां होगी मुझे नहीं पता ?

साहिल:" तुम चिंता मत करो। शांता मा की लेकर खुद नीरज मिश्रा ही आएगा।

साहिल ने अपना मोबाइल निकाला और नीरज का नंबर डायल कर दिया।

साहिल:" नीरज मैं साहिल बोल रहा हूं। ज्योति पकड़ी गई है और मेरे कब्जे में हैं। अगर तुम उसकी जान की सलामती चाहते हो तो चुपचाप शांता को लेकर मेरे घर अा जाओ।

नीरज गुस्से से दहाड़ते हुऐ बोला;"

" अगर ज्योति को एक उंगली भी लगी तो तुम सबकी लाशे बिछा दूंगा। मै अा रहा हूं।

साहिल:" होशियारी मत दिखाना। तुम्हारे साथ प्रिया और रवि मिश्रा भी होना चाहिए।

इतना कहकर साहिल ने कॉल काट दिया और बोला:"

" मम्मी अगले एक घंटे के अंदर नीरज यहां अा जाएगा। अनुप अगर तुम्हे अपनी ज़िन्दगी प्यारी हैं तो नीचे तहखाने में छुप जाओ।

अनूप:' बस साहिल मुझे और जलील मत करो। आज तुम्हे और रूबी को बचाने में मेरी जान भी चली गई तो पीछे नहीं हटूंगा।

साहिल:' तो फिर चलो चलते हैं एक ऐसे किले पर जहां ये आखिरी लड़ाई होगी। ज्योति जी पहले आप खाना खा लीजिए।

सभी लोग ध्यान दे कि ज्योति पर कोई हमला नहीं होगा। हम पहले ही ज्योति की नजरो में गिरे हुए हैं और नहीं गिरना चाहते।

ज्योति हैरान थी कि वो तो साहिल और उसके परिवार को खत्म करना चाहती हैं और ये बोल रहा है कि मुझ पर मली हमला नहीं होगा।

ज्योति;" मुझे कोई भूख नहीं हैं। तुम मुझे हमदर्दी मत दिखाओ। तुम मेरे लिए सिर्फ दुश्मन हो दुश्मन।

साहिल ने ज्योति को स्माइल दी और सारे लोग चुदाई लोक की तरफ चल पड़े। स्क्रीन बंद होने के कारण किसी को भी चुदाई लोक लिखा नजर नहीं आया । जैसे ही चुदाई लोक के दरवाजे पर पहुंचे तो लीमा और ज्योति की आंखे खुली की खुली रह गई।

अद्भुत सौन्दर्य। दोनो को लग रहा था मानो वो कोई सपना देख रही है।

साहिल:" इतनी हैरानी से मत देखो ज्योति। अगर मैं ज़िंदा बच गया तब भी और मर गया तब भी ये सब कुछ तुम्हरा ही होगा।

ज्योति ने साहिल को घूर कर देखा aur फिर से अंदर देखने लगी। सच में ज्योति और लीमा दोनो का मन मोह लिया था चुदाई लोक की अद्भुत सुन्दरता ने। बड़े बड़े पत्थर से बनाए गए पहाड़।

अनूप हैरान था कि साहिल को चुदाई लोक के बारे में कैसे पता चला क्योंकि वो तो सिर्फ रूबी ही जानती थी। वो सब लोगो के सामने चाहकर भी कुछ नहीं पूछ सकता था।

सभी लोगो को वहां छोड़कर साहिल बाहर अा गया और नीराजे के आने का इंतजार करने लगा। तभी एक उसने देखा कि उसके घर के अंदर एक के बाद एक कई गाड़ियां घुस गई और उसमे हथियार बंद गुंडे भरे हुए थे। साहिल ये सब देख कर समझ गया कि नीरज ने उसकी बातो पर कोई ध्यान नहीं दिया।

उसने नीरज का नंबर मिला दिया और बोला:*

" नीरज शायद तुम्हे मेरी बात को ध्यान से नहीं सुना था। इतने सारे गुण्डो के साथ आने की क्या जरूरत थी ? मैंने पहले ही समझाया रहा था तुम्हे।

नीरज ने इधर उधर देखा लेकिन साहिल उसे कहीं दिखाई नहीं दिया तो नीरज समझ गया कि वो घर के अंदर से ही उसे देख रहा हैं इसलिए गुस्से से बोला

" तेरी और तेरे पूरी परिवार की चिता जलाने के लिए आया हूं मैं आज। तेरी मा का वो हाल करूंगा कि औरत कम कुतिया ज्यादा नजर आएगी।
 
साहिल की आंखों में खून उतर आया और अपने लफ्जो को चबाते हुए कहा

" बस नीरज, अपनी मा की कसम, आज तू यहां से जिंदा नहीं जाएगा क्योंकि मैं तुझे ज़िंदा जला दूंगा।

नीरज ने अपने लोगो को आगे बढ़ाने का इशारा किया और गुण्डो की पूरी फौज घर के अंदर घुस गई। साहिल ने देखा कि नीरज प्रिया और रवि तीनो पीछे थे और एक बूढ़ी औरत भी उनके साथ जो असली शांता थी।

गुण्डो को घर में घुसते देखकर साहिल घबरा गया क्योंकि उसे इसका कोई अंदाजा नहीं था। अगर यहां गोलियां चली तो सबको पता चल जाएगा।

साहिल अपने दिमाग पर जोर डालने लगा और तभी एक विचार उसके मन में आया और उसकी आंखे चमक उठी।

साहिल तेजी से दौड़ता हुआ चुदाई लोक में घुस गया और उसने एक पानी का पाइप लिया और धीरे धीरे सारे में पानी फैलता चला गया। चुदाई लोक के आधे से ज्यादा हिस्से में पानी भर गया था करीब एक एक इंच। ये देख कर साहिल समझ गया कि उसकी योजना काम कर रही है।

सभी लोग हैरानी ने उसे देख रहे थे कि तभी साहिल ने रूबी को बोला:"

" मम्मी जल्दी से आप ज्योति का मुंह बांध दीजिए।

रूबी और लीमा ने बला की फुर्ती दिखाते हुए ज्योति का मुंह बंद कर दिया और अब वो चाह कर भी चिल्ला सकती थी।

गुंडे उसको नीचे ढूंढने के बाद उपर की तरफ आने लगे की तरफ आने लगे और साहिल जानता था कि उसे अब क्या करना हैं । उसने गुण्डो को अपनी हलकी सी झलक दिखा दी और बोला:

" मुझे मारना तो दूर तुम छू भी नहीं सकते।

इतना कहकर साहिल ने चुदाई लोक की तरफ दौड़ लगा दी और गुंडे एक के बाद एक उसके पीछे दौड़ पड़े। चुदाई लोक में घुसते ही गुण्डो की आंखे खुली की खुली रह गई। वो पूरी तरह से अचंभित थे ये अद्भुत सौंदर्य देखकर।

साहिल उन्हें उपर खड़ा हुए नजर आया और उनका सरदार बोला:"

" बच्चे क्यों आंख मिचौली खेल रहा है, आजा तेरा खेल खत्म।

साहिल:" खेल किसका खत्म हुआ होगा अभी पता चल जाएगा तुम्हे।

तभी साहिल ने अपना हाथ आगे बढाया और एक स्विच ऑन किया और तभी सरदार को बिजली की तार नजर आईं लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और पानी में करंट उतर गया और सारे गुंडे एक साथ कांप उठे। उनके जिस्म को झटके पर झटके लग रहे थे और देखते ही देखते सारे एक के बाद एक ढेर होते चले गए। बेचारे ढ़ंग से चींखं भी नहीं सके।

ज्योति कांप उठी और जोर जोर से कुछ बोलने की कोशिश कर रही थी और अपने हाथ पैर को पटक रही थी क्योंकि वो जानती थी कि उसके बाकी बचे हुए साथी भी अंदर आते ही मौत कि बली चढ़ जाएंगे। रूबी, लीमा ज्योति और अनूप ये सब देख कर हैरान हो गए कि साहिल ने एक ही झटके में सभी गुण्डो को मौत के घाट उतार दिया और उनकी बंदूक भी पानी में गिरकर अब खराब हो गई।

ज्योति की हालत देखते हुए साहिल ने बिजली का स्विच बंद कर दिया और ज्योति के चेहरे पर कुछ सुकून दिखाई दिया।

नीरज और रवि मिश्रा साहिल की आवाज सुनकर चुदाई लोक की तरफ आए और अंदर घुसते ही उन्हें अपने सारे गुण्डो की लाशे नजर आईं तो उनकी आंखे हैरानी से खुल रह गई।

साहिल सामने नजर आया और बोला:"

" देख लो नीरज तुम्हारे सारे कुत्तों की लाशे पड़ी हुई हैं। मेरे सिर्फ एक बटन दबाने पर तुम भी जल जाओगे।

नीरज और रवि ने देखा तो उन्हें एहसास हुआ कि वो पानी में अंदर खड़े हुए हैं तो डर उनके चेहरे पर साफ नजर आया और पीछे हटने लगे और नीरज का हाथ उसकी जेब की तरफ बढ़ा तो साहिल की आवाज गूंज उठी

" वहीं रुक जाओ, अगर एक कदम भी पीछे हटे तो मैं स्विच ऑन कर दूंगा।

नीरज का हाथ अपने आप रुक गया और मौत का खौफ उनके सभी के चेहरे पर साफ नजर आ रहा था।

साहिल:" प्रिया तुम आगे आओ और इनकी बंदूके निकाल कर पानी में डाल दो। अगर चालाकी की तो इन सबकी मौत के जिम्मेदार तुम होगी।

प्रिया मजबुर थी इसलिए आगे बढ़ी और बंदूक पानी में डाल दी। नीरज और रवि दोनो जानते थे कि उनका खेल खत्म हो गया है।

साहिल:" प्रिया अब तुम शांता मा को लेकर उपर अा जाओ। नीरज और रवि तुम अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिलोगे।

प्रिया शांता को लेकर उपर की तरफ अा गई और लीमा अपनी मा से कसकर लिपट गई। साहिल ने उनके पानी से बाहर निकलते ही साहिल ने स्विच ऑन किया और नीरज और रवि दोनो को झटके लगे और ज्योति उन्हे मौत के मुंह में जाते देखकर बेहोश हो गई।

साहिल ने अपने ही पल स्विच को बंद किया और नीरज और रवि अभी तक खड़े हुए कांप रहे थे। उन्हें अभी तक बिजली के झटके महसूस हो रहे थे। प्रिया दौड़ कर ज्योति के पास गई और उसे झिंझोड़ते हुए बोली:"

" ज्योति दीदी अपनी आंखे खोलो, आपके पति ज़िंदा हैं प्लीज़ दीदी।

ज्योति ने हिम्मत करके अपनी आंखे खोल दी और उसने रवि मिश्रा की तरफ देखा और उसके चेहरे पर राहत दिखाई दी।

साहिल:" ओह तो ज्योति तुम्हारे पति रवि मिश्रा हैं। मुझे आज पता चला कि रवि ने मुझे धोखा क्यों दिया।

रवि:' मैंने तुम्हे कोई धोखा नहीं दिया। मैंने अपनी पत्नी का साथ दिया हैं ताकि उसके बाप और भाई के हथियारों से बदला ले सकू।

साहिल:" लेकिन वो सब तो मेरे दादा केहर सिंह ने किया इसमें हम सब का क्या कुसूर। मुझे जब ये पता चला तो बहुत दुख हुआ।

ज्योति:" लेकिन तुम्हारी रगो में भी उनका ही गंदा खून दौड़ रहा है साहिल।

साहिल लगभग गुस्से से चिल्ला उठा और बोला:"

" नहीं ज्योति नहीं, मेरी रगो में सिर्फ मेरी मा को खून दौड़ रहा है। तभी तो तुम सभी जिंदा हो नहीं तो अभी तक सबको मौत के घाट उतार दिया होता। लेकिन मैं अपने बाप और दादा जैसा कमीना नहीं हू।

ज्योति:" मार दो ना, फिर हम मौत से क्यों डरा रहे हो तुम, अगर मैं ज़िंदा रही तो तुम ज़िंदा रही रह सकते।

शांता अपनी दबी हुई और कमजोर हो गई आवाज में बोली:"

" मेरी खून खराबा किसी चीज का हाल नहीं होता। साहिल अपने बाप और दादा से अलग हैं। ये तुम्हे नहीं मार रहा है जबकि तुम सबके इसकी जान के दुश्मन बने हुए हो।

साहिल:" शांता मा मुझे ये माल दौलत कुछ नहीं चाहिए। मैं तो सब कुछ तुम्हारे हवाले करके तुमसे माफी चाहता हूं।

ज्योति और रवि साहिल की बात सुनकर सोचने पर मजबूर हो गए। उनकी समझ में नहीं अा रहा था कि क्या किया जाए।

शांता:" ज्योति तुमने मुझे पिछले 10 साल से कैद में रखा और मेरी बेटी को अपनी उंगलियों पर नचाया लेकिन मै फिर भी तुम्हे माफ़ करने के लिए तैयार हूं बताओ मेरी क्या गलती थी इसमें , क्यों किया तुमने मेरे साथ ऐसा ? कोई जवाब हैं तुम्हारे पास

तुम्हे अपने बदले की आग में मेरी ज़िन्दगी तबाह कर दी।

ज्योति का सिर नीचे झुक गया और तभी रूबी बोली:"

" ज्योति तुम मा बनने वाली हो। दुनिया की सबसे बड़ी खुशी तुम्हे हासिल हो रही हैं। मै और साहिल तुम्हे ये सब माल पैसा और घर देने के लिए तैयार है। तुम्हारे पैर पकड़कर अपने बड़ों द्वारा किए गए पापो का प्रायश्चित करना चाहते हैं।

ज्योति को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। वो जानती थी साहिल और रूबी जब चाहे उसे मार सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और ये पता होने के बाद भी की मैं ज्योति हू मेरा ख्याल रखा ।

तभी चुपचाप खड़ा हुआ अनूप जोर से बोला:"

" तुम्हारा दिमाग तो खराब नहीं हो गया साहिल, ये सारी दौलत मेरी हैं और तुम्हे कोई हक नहीं हैं उसे बांट देने का।

साहिल आगे बढ़ा और उसने एक जोरदार थप्पड़ अनूप के गाल पर जड़ दिया और बोला:"

" थू है कमीने तेरे उपर, तू बाप के नाम पर सिर्फ एक कलंक हैं। मैं तुझे मार दूंगा

इतना कहकर साहिल ने उसे लात और घुसो से मारना शुरू कर दिया और यही उससे गलती हो गई। नीरज पानी से बाहर अा गया और उसने अपनी जेब में रखे हुए चाकू को बाहर निकालते हुए साहिल पर हमला कर दिया । लेकिन तभी शांता बीच में कूद पड़ी और चाकू उसके पेट में घुसता चला गया और उसके मुंह में एक दर्द भरी चींखं निकल पड़ी।

साहिल ये देखकर गुस्से से पागल हो गया और उसने नीरज पर हमला कर दिया। सभी लोग खड़े हुए थे और दोनो के बीच लड़ाई शुरू हो गई। तभी प्रिया ने एक पत्थर उठा कर साहिल पर हमला किया लेकिन उसका निशाना चूक गया और देखते ही देखते रूबी उसके उपर टूट पड़ी।

थोड़ी देर पहले बदला और मारने की बात करने वाले रवि और ज्योति को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे।

लीमा अपनी मा के कटे हुए पेट को अपने दुप्पटे से बांध रही थी और रोए जा रही थी।

प्रिया ने रूबी के सिर के बाल पकड़ कर जोर से खींच लिया और रूबी दर्द से तड़प उठी। साहिल अपनी मा की दर्द भरी आवाज सुनकर पागल हो गया और एक झटके से नीरज के हाथ से चाकू छीन लिया और जोरदार घुस्सा उसके पेट में जड़ दिया।

नीरज दर्द से दोहरा होता चला गया और साहिल ने उसे बिना मौके दिए पत्थर पर पटक दिया और उसकी रीढ़ की हड्डी चटक गई और उसकी दर्द भरी आह निकल पड़ी।

साहिल अब रूबी की तरफ बढ़ा और रूबी ने खुद ही प्रिया को पटक दिया और उसके मुंह पर लात घुसे बरसाने लगी। तभी जैसे रवि मिश्रा और ज्योति नींद से जागे और उन्होंने रूबी पर हमला कर दिया।

साहिल ने रवि मिश्रा को पकड़ लिया और लीमा भी अपनी मा को छोड़कर ज्योति पर टूट पड़ी। सिर्फ रूबी प्रिया को थप्पड़ मार रही थी जबकि साहिल ने रवि को सिर्फ पकड़ा हुआ था वहीं लीमा ने भी ज्योति को सिर्फ काबू किया हुआ था जबकि रूबी प्रिया को थप्पड़ मारे जा रही थी।

रवि:" रूबी मत मारो उसे, छोड़ दो वो मेरी बहन हैं।

रवि के मुंह से ये सब सुनते ही रूबी के हाथ अपने आप ही रुक गए लेकिन तब तक प्रिया का मुंह लाल हो गया था।

ज्योति:" ये मेरे पति की छोटी बहन हैं और ये नीरज से प्यार करती हैं। छोड़ दो उसे।

साहिल अब सब कुछ समझ गया था और वो दौड़ते हुए शांता के पास गया जोकि बेहोश हो गई थी। साहिल उसे आवाज देता रहा लेकिन शांता खामोश रही।

तभी एक कोने में पड़ा हुआ अनूप खड़ा हुआ और उसने देखा कि किसी कि नजर उस पर नहीं थी इसलिए उसने धीरे से नीरज के पास पड़ा हुआ चाकू उठाया और आंखो में खूनी भाव लिए हुए आगे बढ़ा और नीरज के मुंह पर हाथ रखते हुए उसकी गर्दन काट दी। नीरज तड़प कर रह गया और बेचारा चींखं भी नहीं सका।

अनूप आंखो में खूनी भाव लिए हुए आगे बढ़ा और उसके निशाने पर था रवि मिश्रा क्योंकि वो जानता था कि रवि मिश्रा ने ही उसकी कंपनी को बर्बाद किया है।

रवि मिश्रा और ज्योति दोनो प्रिया के पास थे तभी अनूप ने अपना हाथ उपर उठाया और साहिल की नजर चाकू पर पड़ी और वो बीच में कूद गया और चाकू उसकी पीठ में घुसता चला गया।
 
साहिल दर्द से तड़प उठा और ज्योति और प्रिया ये देखकर हैरान हो गई कि साहिल ने रवि को बचाने के लिए अपनी ज़िंदगी दांव पर लगा दी है। अनूप ने एक झटके से चाकू साहिल की पीठ से बाहर निकाला और उसने फिर से रवि पर हमला किया लेकिन ज्योति ने बचा लिया। लेकिन इसी बीच प्रिया के हाथ में एक बड़ा सा पत्थर अा गया और उसने पत्थर को अनूप के सिर में जोर से मार दिया और अनूप दर्द से तड़प उठा और उसने चाकू का भरपूर वार प्रिया पर किया और उसकी गर्दन एक झटके के साथ कट गई और नीरज की कटी हुई गर्दन के पास जा गिरी।

रूबी साहिल को छोड़कर अनूप की तरफ झपटी और अनूप सिर में चोट के कारण गिर पड़ा और रूबी ने उसके हाथ से चाकू लेते हुए उसके पेट में घुसा दिया।

पेट में चाकू घुसते हुए अनूप ने तड़पते हुए एक बार रूबी की तरफ देखा और अपना दम तोड़ दिया।

रूबी साहिल के पास बैठी हुई रों रही थी जबकि लीमा शांता को हिला रही थी और ज्योति और रवि प्रिया का कटे हुए जिस्म के पास बैठ कर रों रहे थे।

रूबी:" लीमा हमे शांता और साहिल को हॉस्पिटल ले जाना होगा।

रवि को जैसे होश आया और ज्योति भी उठी और दोनो साहिल की तरफ लपके। साहिल बेहोश हो गया था।

रूबी ने चाकू ज्योति की तरफ बढ़ा दिया और उसके पैरो में अपनी गर्दन झुका दी और रोते हुई बोली:"

" ज्योति मेरा बेटा बेहोश और मेरा सिर तुम्हारे क़दमों में हैं, ले लो अपना बदला तुम।

ज्योति ने चाकू हाथ में पकड़ लिया और लीमा और रवि मिश्रा दोनो उसकी आंखो में खूनी भाव देखकर कांप उठे और तभी ज्योति का हाथ चाकू सहित उपर उठा और फुर्ती के साथ नीचे आते हुए पास मरे पड़े अनूप की छाती में घुसता चला गया।

लीमा और रवि ने सुकून की सांस ली और ज्योति ने एक एक बाद कई वार मरे हुए अनूप पर किए और जोर जोर से चिल्ला उठी

" मैंने तुम्हारे मुजरिम से बदला ले लिया है पापा। देखो मैंने आज उसके पूरे परिवार को तबाह कर दिया। साहिल और रूबी को अगर मारा तो मैं जानती हूं आपको दुख होगा क्योंकि ये बेचारे मासूम और निर्दोष है पापा।

रवि आगे बढ़ा और उसने ज्योति के हाथ से चाकू फेंक दिया और बोला:"

" बस करो ज्योति, साहिल और शांता को हॉस्पिटल ले जाना होगा नहीं तो वो दम तोड देंगे।

ज्योति जैसे अपने पागलपन से बाहर अाई और बोली:"

" हान तुम जल्दी से गाड़ी निकालो। मैं उन्हें लेकर आती हूं।

रवि आगे बढ़ा और बाहर चला गया जबकि लीमा रूबी और ज्योति मिलकर साहिल और शांता को बाहर लाए और जल्दी ही सभी लोग हॉस्पिटल के अंदर थे। साहिल और शांता दोनो का ऑपरेशन हुआ और कामयाब रहा।

रूबी तो जैसे पत्थर की बन गई थी और ज्योति उसके पास गई और दोनो हाथ जोड़ते हुए बोली:"

" मुझे माफ़ कर दो बहन। मैंने तुम्हे बहुत गलत समझा और दुख दिए। आज तुम्हारे और साहिल की वजह से ही मेरे पति जिंदा हैं।

रूबी जैसे होश में आई और उसने भी ज्योति के आगे हाथ जोड़ दिए और बोली:"

" माफी तो मुझे मांगनी चाहिए क्योंकि केहर सिंह की वजह से तुम्हारा परिवार बर्बाद हो गया था।

रवि भी उनके पास अा गया और ज्योति ने रूबी का एक हाथ अपने पेट पर टिका दिया और बोली:"

" हान लेकिन आज तुम्हारी वजह से ही मेरा परिवार फिर से बस गया हैं रूबी। तुम सच में एक महान औरत हो। क्या तुम मेरी दोस्त बनोगी।

रूबी पलटी और ज्योति के गले लग गई।ज्योति ने भी उसे अपनी बाहों में कस लिया और दोनो एक दूसरे से ऐसे लिपट रही थी मानो सगी बहन सदियों के बाद मिली हो।

लीमा और रवि ये देख कर भावुक हो गए और उनकी आंखे भी बह चली। साहिल को होश अा गया और उसने जब दोनो को ऐसे गले मिलता देखा तो उसके होंठो पर स्माइल अा गई और उसने फिर से अपनी आंखे बंद कर ली।

इसी बीच बीच में सुनील का रूबी को फोन आता रहा और रूबी ने इसे बता दिया कि उसके एक सड़क दुर्घटना में उसके पति की मौत हो गई और उसका बेटा अस्पताल में भर्ती हैं। सुनील उससे मिलने के लिए अस्पताल अाया और हर संभव मदद का भरोसा भी दिया। रूबी जानती थी कि सुनील ये सब क्यों कर रहा हैं इसलिए वो चुप थी।

दूसरी तरफ अब तक रवि मिश्रा सभी लाशों को ठिकाने लगा चुका था और उसने नीरज और अपनी बहन की लाश का एक साथ अंतिम संस्कार कर दिया था।

रूबी ने अनूप की लाश का अंतिम संस्कार करने से भी साफ इनकार कर दिया तो रवि ने आखिर में अनूप का भी अंतिम संस्कार कर दिया।

करीब चार दिन हॉस्पिटल में रहने के बाद आज साहिल और शांता दोनो अपने घर लौट रहे थे। घर में बेहद खुशियां थी और साहिल और शांता के स्वागत के लिए रूबी से ज्यादा ज्योति खुश नजर आ रही थी।

साहिल और शांता जैसे ही घर के अंदर आए तो ज्योति दौड़ती हुई थाली लेकर घर के दरवाजे पर अा गई और उसकी आरती उतारने लगी।

साहिल ये सब कर कर सच में बहुत खुश था क्योंकि वो समझ गया था कि अब जाकर उसके दादा के द्वारा किए गए पापो का प्रायश्चित हुआ है।

साहिल ने जैसे ही पहला कदम घर के अंदर रखा तो ज्योति ने माथा चूम कर उसका स्वागत किया और बोली:"

" भाई भगवान तुम्हारी ज़िन्दगी खुशियों से भर दे। इस बहन की दुआ तुम्हारे साथ हैं।

साहिल के बस ज्योति ने शांता की थी आरती उतारी और उसके पैरो पर सिर रखकर अपने किए के लिए माफी मांगी। शांता ने उसको उठाया और गले लगा लिया।

सच में ये सब देख कर रूबी और लीमा के साथ रवि मिश्रा की भी आंखे खुशी के मारे गीली हो गई थी। ऐसे ही कुछ दिन गुजर गए और साहिल अब पूरी तरह से ठीक हो गया था।

साहिल काम और रवि दोनो काम के लिए ऑफिस गए और शाम को रवि घर अा गया जबकि साहिल किसी काम की वजह से रुक गया था।

करीब आधे बाद साहिल घर के अंदर दाखिल हुआ और उसके साथ वकील भी था। ज्योति ये देखकर सोच में पड़ गई और हैरानी से उसकी तरफ देखने लगी।

साहिल:" वकील साहब आप और ज्योति जी आप आगे अा जाए।

ज्योति हैरानी में डूबी हुई आगे बढ़ी और वकील ने कोर्ट का लैटर पढ़ना शुरू किया।

" हम साहिल और रूबी दोनो अपने पूरे होशो हवास में अपना ये घर और अपनी कंपनी ज्योति सिंह के नाम कर रहे हैं। आज एक बाद इस प्रॉपर्टी से या कंपनी से हमारा कोई लेना देना नहीं होगा।

ज्योति की आंखे भीग गई और उसकी समझ में नहीं अा रहा था कि वो क्या करे। उसने भीगी आंखो से साहिल की तरफ देखा और साहिल ने उसे प्यार से मुस्कान दी और ज्योति रोती हुई उसके गले लग गई।

ज्योति:" नहीं साहिल, मुझे ये सब नहीं चाहिए। तुम जैसा भाई मुझे मिल गया तो लग रहा हैं कि मुझे सब कुछ वापिस मिल गया।

साहिल ने उसके आंसू साफ किए और बोला:"

" चुप हो जाए आप। भाई भी कहती हो और भाई का फर्ज निभाने से भी मना कर रही हो। ये सब मेरी बहन के लिए उसके भाई की तरफ से तोहफा हैं।

ज्योति:" नहीं मुझे ये सब नहीं चाहिए। मुझे बस तुम्हरा साथ चाहिए ज़िन्दगी भर के लिए।

साहिल ने ज्योति का हाथ पकड़ा और बोला:"

" मैं वादा करता हूं कि जब भी ज़िन्दगी में तुम्हे मेरी जरूरत होगी मैं हमेशा तुम्हरा साथ दूंगा । ये एक भाई का वादा हैं।

ज्योति ने रूबी की तरफ देखा और रूबी ने भी स्माइल देते हुए उसे इशारा किया कि वो सब उसे ले लेना चाहिए।

ज्योति को आखिरी उम्मीद शांता से थी और शांता बोली:"

" देख बेटी, तुम्हे ये सब ले लेना चाहिए नहीं तो हमेशा साहिल और रूबी के दिल पर एक बोझ रहेगा।

ज्योति सबके आगे हार गई और ना चाहते हुए भी उसने कागज पर साइन कर दिया। कागज पर साइन होते ही रूबी और साहिल ने एक दूसरे की तरफ देखा और दोनो के ही चेहरे पर सुकून साफ दिखाई दिया।

वकील जानता था कि उसका काम हो गया है इसलिए अपना बैग उठाकर वो बाहर चला गया।

रूबी जानती थी कि अब पूरी तरह से इस कंपनी की मालिक ज्योति हैं इसीलिए उसे मिला टेंडर अपने आप कैंसल हो जाएगा और सुनील से भी उसे मुक्ति मिल जाएगी।

ज्योति साइन करने के बाद बोली:"

" अच्छा मैंने आप सब का कहा मान लिया। अब मै चाहती हूं कि आपने जो पैसा टेंडर के लिए आशा मैडम से लिया था उसे मैं चुका दू ताकि आप आराम से अपनी ज़िन्दगी जी सके।

साहिल और रूबी दोनो चौंक उठे और साहिल बोला:"

" आपको कैसे मालूम कि हमने आशा से पैसा लिया था ?

ज्योति:" मुझे सब कुछ पता था कि तुम लोगो के पास कोई पैसा नही था। इसलिए तुमने आशा से पैसा लिया था ताकि टेंडर हासिल कर सकोे। मुझे लगा था कि तुम लोग शायद पैसा कमाने के लिए ये सब कर रहे थे लेकिन बाद में मुझे रवि मिश्रा ने बताया कि तुमने गरीब मजदूरों के लिए ये सब किया हैं।

रूबी:" इसका मतलब आपको सब कुछ पता था कि हम कब क्या कर रहे हैं ?

ज्योति:" हान मुझे ये भी पता था कि अनूप बनकर साहिल घूम रहा है लेकिन बस एक ही बात नहीं था कि नीरज तुम्हे हासिल करना चाहता था। मैंने खुद एक औरत हूं और दूसरी औरत का सम्मान करती हूं। लेकिन मुझे ये बात साहिल के द्वारा कि गई रिकॉर्डिंग से पता चली। उसने जैसा किया वैसा भरा।

साहिल और रूबी चुप थे। रूबी अंदर चली गई और अपना बैग लेकर बाहर अा गई।

रूबी:" अच्छा मुझे आप आज्ञा दीजिए। मैं और साहिल अब दिल्ली जा रहे हैं। अब से मैं सिर्फ लोगो को योग सिखाया करूंगी।

ज्योति:" अरे ऐसे कैसे चले जाओगे तुम। मैंने आशा को पैसा वापिस कर दिया है।

साहिल और रूबी उसकी बात सुनकर हैरान हो गए और ज्योति आगे बोली:"

" मैंने तुम्हारे लिए एक नए योगा सेंटर का निर्माण कर दिया है। आज से तुम वहां लोगो को योग की दीक्षा दोगी।

रूबी:" बस करो आप ज्योति जी। मैं अब अपने दम पर कुछ बनना चाहती हूं। मैं ये सब नहीं ले सकती।

ज्योति:" अरे मैं कौन सा फ्री में दे रही हूं। आप घर का किराया और जो पैसा योगा से आएगा उसका आधा मुझे देती रहेगी।

रूबी इससे पहले कुछ बोलती शांता बोल पड़ी:"

" अब मना मत करना बेटी आप। मेरी भी यही इच्छा हैं। फिर इसमें कोई एहसान नहीं भी नहीं हैं। तुम्हारी अपनी मेहनत होगी।

साहिल और रूबी दोनो ने शांता के पैर छुए और घर से बाहर चल दिए। सभी की आंखे भीगी हुई थी और हर कोई अपने आंसू रोक रहा था। लेकिन जाने वालो को आज तक कोई रोक नहीं सकता हैं इसलिए रूबी और साहिल दोनो अपनी गाड़ी में बैठकर दिल्ली की तरफ रवाना हो गए ।

उनके जाने के बाद शांता और लीमा सभी के साथ घर के अंदर अा गए। लीमा अंदर से अपना बैग लेकर अा गई और शांता उसके साथ चल पड़ी।
 
ज्योति और रवि अपने कमरे में थे और उन्हें इसका बिल्कुल भी एहसास नहीं रहा था कि लीमा और शांता घर छोड़कर जा रहे है। लीमा ने बहुत धीरे से गेट खोला और अपनी मा के साथ बाहर की तरफ निकल गई।

पिछले काफी सालों से जासूस की ज़िन्दगी जी रही ज्योति के कान हल्की सी आवाज सुनकर ही खड़े हो गए और वो तेजी से बाहर लपकी और जैसे ही उनकी नजर शांता और लीमा पर पड़ी तो वो पागलों कि तरह उनकी तरफ दौड़ पड़ी और उनसे लिपट गई।

ज्योति लगभग भवावेश में पूरी तरह से भरे हुए गले से बोली:"

" मा जी और लीमा आप क्यों जा रहे हो मुझे छोड़ कर ? क्या गलती हो गई मुझसे जो आप ऐसे बिना बताए जा रहे हैं मुझसे मुंह मोड़कर ?

रवि भी अा गया था और उसने भी शांता और लीमा के आगे हाथ जोड़ दिए और बोला:"

" मा जी बड़ी मुश्किल से मुझे आप के रूप में एक मा और लीमा के रूप में फिर से मेरी बहन प्रिया वापिस मिली हैं। हमे छोड़कर मत जाइए मा जी आप।

शांता और लीमा दोनो बिल्कुल चुप चाप खड़े हुए थे और उन्हें एहसास हो हो रहा था कि ज्योति सच में पूरी तरह से बदल गई हैं।

ज्योति शांता के पैरो में गिर पड़ी और रोते हुए उनके पैरो को आंशू से धोने लगी। शांता ये देखकर पूरी तरह से पिघल गई और उसकी भी आंखे भर आई।

ज्योति:" मा जी रूबी ने तो अपने बड़ों के द्वारा किए गए पापो का प्रायश्चित कर लिया लेकिन मैंने जो पाप किए है उनका प्रायश्चित करने से मुझे मत रोको। मैनें अपनी दुश्मनी के चलते आपको कैद करके रखा, एक मा को उसकी लड़की से दूर रखा। मा जी मैंने बहुत बड़ा गुनाह किया हैं।

शांता ने उसे उठाया और अपने गले लगा लिया और उसकी पीठ थपथपाने लगी और बोली:"

" बस करो ज्योति, तुम्हारे सारे पाप तुम्हारे कोमल आंशूओ से धूल गए हैं। मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है बेटी।

ज्योति:" बेटी भी कह रहीं हो और मुझे बेटी का फ़र्ज़ निभाने भी नहीं दे रही हो। मा जी प्लीज़ मुझ पर रहम करो, मत जाओ मुझे छोड़कर आप कहीं ।

रवि:" मा जी रूबी और साहिल ने तो अपने पापो का प्रायश्चित कर लिया लेकिन आप हमसे ये हक मत छीनिए। मत जाओ आप हमें छोड़कर।

रवि भी शांता के पैरो के गिर पड़ा। शांता ने उसे उपर उठाया और दोनो को अपने गले लगा लिया और शांता भी बिलख उठी क्योंकि आखिरकार वो भी एक औरत थी।

शांता:" नहीं जाऊंगी, कहीं नहीं जाऊंगी मैं तुम्हे छोड़कर। बस अब रोनार बंद करो आप।

ज्योति शांता की बात सुनकर चुप होने की बजाय और ज्यादा जोर से रो पड़ी और शांता उसकी पीठ सहलाती रही। बड़ी मुश्किल से ज्योति के आंसू रुक गए।

रवि ने लीमा से बैग किया और अंदर की तरफ अा गया। पीछे पीछे ज्योति और शांता भी अंदर अा गए।

ज्योति शांता की गोद में अपना सिर रखे हुए थी और बोली:"

" मा मुझे आप मिल गई तो लगता हैं जैसे सब कुछ मिल गया। दुनिया में आज भी अच्छे लोगो की कमी नहीं हैं। मैं जिस रूबी और साहिल को मिटाने के लिए दिन रात कोशिश करती रही उसी साहिल ने मेरे पति को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी और रूबी ने तो सच्चाई का साथ देने के लिए अपने पति को ही मौत के घाट उतार दिया। सच में मा वो दोनो इंसान नहीं देवता हैं इस धरती पर।

शांता उसके बालो में उंगली करते हुए बोली:" बेटी सच में ये धरती ऐसे ही लोगों की वजह से चल रही है। मा बाप जो संस्कार अपने छोटे बच्चे को देते हैं उनके आधार पर ही उसकी आगे की ज़िन्दगी पूरी होती है। रूबी को उसके घर से अच्छे संस्कार मिले और उसने वहीं संस्कार अपने बेटे साहिल को दिए। अनूप को उसके बाप केहर सिंह से संस्कार मिले और उसका नतीजा तुमने देखा ही हैं।

शांता एक पल के लिए रुकी और फिर से बोली:"

" तुम अपने संस्कार देखो, बेशक बदले की आग ने तुम्हे पागल कर दिया था लेकिन आखिर में तुम्हारे संस्कार उस आग पर भारी पड़े और तुमने सब कुछ भूल कर रूबी और साहिल को गले लगा लिया।
 
Back
Top