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Incest हुस्न का जादू और वासना के अंगारे

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कल की तरह वो आज फिर से अपनी बन्नो के दर्शन करवाकर उन्हे अपने सम्मोहन के जाल में पूरी तरह से फँसा लेना चाहती थी, ताकि उसका बचा हुआ साल अच्छे से निकल जाए…

वो जाने लगी पर फिर कुछ सोचके वो फिर से अंदर गयी और इस बार अपनी शर्ट खोलकर अपनी ब्रा भी उतारकर बेग में रख ली…

अब वो उपर से नीचे तक सिर्फ़ 2 कपड़ो में थी, नीचे से ठंडी हवा उसकी गर्म चूत को सहला रही थी और सामने से देखने पर उसके पिंक निप्पल और सिक्के जितना बड़ा एरोला वाला हिस्सा सॉफ दिखाई दे रहा था…

अभी के लिए उन्हे छुपाने के लिए उसने बेग से वही असाइनमेंट वाला पेपर निकाल कर अपनी छाती से लगा लिया और सर की तरफ चल पड़ी

वहां पहुँची तो राज सर को बेसब्री से अपना ही इंतजार करते हुए पाया..

वो कुछ बोल पाते इस से पहले ही उसने छाती से पकड़ा वो पेपर उनके सामने रख दिया…

उन्होने उसे देखा और जैसे ही सर उठाकर डॉली को कुछ बोलना चाहा वो ठिठक कर रुक गये..

वाइट शर्ट के अंदर से झाँकते मोटे निप्पल्स उन्हे दिखाई दिए…

बेचारे राज सर की तो हालत ही खराब हो गयी…

जीभ सूख कर पत्थर हो गयी…

उन्होने सोचा भी नही था की कल उसकी चूत देखने के बाद आज उसके निप्पल के भी इस तरह से दर्शन हो जाएगे…

भले ही शर्ट के महीन कपड़े की दीवार थी बीच में पर उसके आकार, रंग रूप और चारों तरफ फैला अेरोला सॉफ दिखाई दे रहा था….

और यही नही, ब्रा ना होने की वजह से उसके नन्हे बूब्स का आकार भी सॉफ दिखाई दे रहा था…

जैसे दो नन्हे-2 संतरे उसके सीने से चिपका दिए हो…एकदम गोल और कठोर थे वो.

डॉली : “सॉरी सर ….ये असाइनमेंट मैं नही कर पाई कल…एक तो मेरी तबीयत भी ठीक नही थी और जब मैने इसे देखा तो इसमे मुझे काफ़ी कुछ समझ भी नहीं आया…सो मैने सोचा की आपसे समझकर ही इसे पूरा कर लूँगी…आप मुझे समझाएँगे ना सर ’’

उसने जान बूझकर आख़िरी लाइन अपना सीना थोड़ा और बाहर निकाल कर कहा…

वो थोड़ा और ज़ोर लगाती तो शायद शर्ट में दो छेद हो जाते.

पर अंदर ही अंदर वो भी उस शर्ट से बाहर निकलने के लिए छटपटा रही थी…

मन तो उसका कर रहा था की वो बचे खुचे कपड़े भी फाड़ डाले…

उन्हे नोच कर अपने जिस्म से निकाल फेंके और कूद कर उनकी टेबल पर चढ़ जाए और कूद पड़े राज सर के उपर…

पर अभी के लिए जो वो कर रही थी वही राज सर से संभालना मुश्किल हो रहा था.

डॉली की बात सुनकर उन्होने हकलाते हुए कहा : “उम्म हाँ हन…हां क्यों नही….तुम…तुम एक काम करो…मेरे साथ मेरे घर चलो..आई मीन…मेरे ट्यूशन सेंटर में आकर ये पूरा कर लो…वहां मैं समझा दूँगा’’

डॉली थोड़ा और झुकी उनकी टेबल पर और बोली : “चले फिर…सर …आपके घर…आई मीन, आपके ट्यूशन सेंटर पर…’’

राज सर ने जल्दी-2 अपने पेपर्स बेग में रखे और उस बेग को अपने लंड के सामने वाले हिस्से पर लगाकर वो जल्दी से बाहर निकल गये…

डॉली भी मुस्कुराती हुई उस पेपर को एक बार फिर से अपने सीने से लगाकर , अपने निप्पल्स को दुनिया से छुपाती हुई बाहर आकर राज सर की कार में बैठ गयी और वो दोनो उनके घर की तरफ चल दिए..

राज सर ने अपने घर के ग्राउंड फ्लोर में ही ट्यूशन सेंटर खोल रखा था,

वैसे तो वहां बच्चे शाम 5-8 ही आते थे, अभी तो 2 ही बजे थे.

इसलिए वहां इस वक़्त कोई नही होगा…

रास्ते में ,बातों ही बातों में उसे पता चला की उन्होने आज तक शादी ही नही की है, वो घर पर अकेले रहते थे. उनके माँ पिताजी गाँव में रहते थे.

डॉली सर को गोर से देख रही थी….

थोड़े साँवले थे पर बॉडी एकदम टाइट थी उनकी,

सर ने बताया की मॉर्निंग में वो 10 किलोमीटर वॉक भी करते है और उसके बाद जिम भी जाते है,

वहीं से स्कूल आ जाते है, कार की पिछली सीट पर जिम वाला बेग भी पड़ा था…

सर के शरीर से अजीब सी नशीली गंध आ रही थी डॉली को…

एक असली मर्द वाली..

वो अपनी जाँघो को आपस में रगड़ रही थी…

पर वो उन्हे ज़्यादा रगड़ती तो एक गीला पेच बन जाना था उसके पीछे, इसलिए बड़ी मुश्किल से उसने अपने आप को रोका.
 
हुस्न का जादू और वासना के अंगारे

भाग एक : पहली किस्स

आज स्कूल के लिए फिर से लेट हो गयी थी डॉली , लगभग भागते हुए जब वो क्लास में पहुँची तो अंदर राज सर की मैथ्स क्लास पहले से शुरू हो चुकी थी….

उन्होने डॉली को देखा और उपहास भरे स्वर में बोल पड़े

“अर्रे….डॉली जी, आप आ गये…..थोड़ा और लेट आते, मेरा पीरियड बस ख़त्म होने ही वाला है….’’

वो कुछ ना बोल पाई बस आँखे नीचे करके खड़ी रही…

“गेट आउट ऑफ माय क्लास एन्ड स्टेंड आउटसाइड”

राज सर की तेज आवाज़ से वो अंदर तक काँप गयी….

क्लास में सबसे पीछे बैठी उसकी फ्रेंड कामिनी ने उसे बाहर जाने का इशारा किया, ताकि राज सर के प्रकोप से वो बच सके…

वो चुपचाप बाहर निकलकर दीवार से अपनी गांड लगाकर खड़ी हो गयी

थोड़ी देर में पीरियड की घंटी बजी और दूसरी क्लास से बाहर निकल रहे बच्चे उसे देखके हंस रहे थे, शायद वो जानते थे की ये तो उसका रोज का है…

वो मायूस सी होकर वापिस अंदर गयी और कामिनी के पास जाकर बैठ गयी

कामिनी : “क्या यार डॉली, आज फिर लेट हो गयी तू, तुझे पता है ना वो राज सर कितना अकड़ू है”

डॉली : “यार, तुझे तो पता है, मोम की वजह से ….”

कामिनी : “हेलो…रहने दे ये बहाने….रात को 2-2 बजे तक तू ऑनलाइन रहेगी तो टाइम से कैसे उठेगी…मैने देखा है तेरा लास्ट सीन आज मॉर्निंग में …देख…ये आख़िरी साल है स्कूल का, इसके बाद कॉलेज में जितनी मस्ती करनी है कर लियो…वहां का टाइम भी इतनी सुबह का नही रहता…पता है ना तुझे….बस, ये आख़िरी के 8 महीने किसी तरह से निकाल ले और टाइम से स्कूल आ जाया कर, वरना 12वी दोबारा करनी पड़ेगी…सोच ले….”

इतना कहकर वो वॉशरूम की तरफ चली गयी..

पर डॉली भी बेचारी क्या करती,

उसके पापा नही थे, कई सालों पहले एक सड़क हादसे में उनकी मौत को गयी थी, माँ ने ही उसे पाला पोसा, जॉब और घर के कामो की वजह से वो भी उसकी तरफ पूरा ध्यान नही दे पाती थी, शायद इसलिए वो इतनी लापरवाह सी हो गयी थी

पर अब उसने सोच लिया था की अपनी आदतों में सुधार करके रहेगी

पर ये लड़के उसे सुधारने दे , तभी ना….’

कामिनी के जाते ही फ्रंट सीट पर बैठा अजीत लपक कर उसके करीब आकर बैठ गया….

उसके शरीर के एहसास से ही उसका बदन गर्म होने लगा…

होता भी क्यों नही, वही तो था, जिसने 2 बजे तक गर्म बातें करके उसे जगा कर रखा था…

पड़ने में वो सबसे होशियार था…

देखने में भी ठीक ठाक सा था…

बातों - 2 में उसने शायद डॉली की नस पकड़ की थी , और ये जान लिया था की अंदर की गर्मी उसे कितना परेशान करती है

अजीत (फुसफुसा कर बोला) : “यार डॉली….कल का प्रॉमिस मत तोड़ना अब….प्लीज़ यार….सिर्फ़ एक क़िस्स्स…..”

उसकी बात सुनके वो और भी गर्म होने लगी….

याद तो उसे आ ही चुका था की कल रात कैसे गर्म बातें करके वो अपनी चुचियाँ चुसवाने के लिए और उसे फ्रेंच किस्स करने के लिए बोल रही थी व्हाट्सएप पर…

और पिछले कई दिनों से उसे टालने के बाद अब उसे रोकना मुश्किल था…

पूरी क्लास भी जानती थी की दोनो का कुछ चक्कर चल रहा है…’’

और दूसरी लड़किया भी अपने बाय्फरेंड्स को ये किस्स वगेहर तो दे ही चुकी थी…

यहां तक की उसकी फ्रेंड कामिनी भी …

पर वो ही अभी तक ये सब करने मे घबरा रही थी…

पता नही उसे किस बात का डर था, बातें तो वो दुनिया भर की कर लेती थी, अंदर गर्मी भी बहुत थी उसमें, पर जब कुछ करने का सोचती या टाइम आता तो काँपने लग जाती थी, साँसे रुक सी जाती थी उसकी…

पता नही ये उसके साथ ही हो रहा था या उसकी उम्र की दूसरी लड़कियों के साथ भी ऐसा ही होता था पहली बार में …

पर जो भी था, वो पहली रेखा पार करने में उसे परेशानी बहुत हो रही थी…

पर अजीत को और संभालना मुश्किल था अब…

उसके हाथ उसकी जाँघो पर आ चुके थे….

साथ वाली रो में बैठी जसप्रीत उन्हे देखके मंद-2 मुस्कुरा रही थी,

अपनी आँखों के केमरे से उनकी हरकतें रिकॉर्ड भी कर रही थी, जो बाद में वो पूरी क्लास को मिर्च मसाला लगा कर सुनाने वाली थी

उसे अपनी तरफ घूरता देखके डॉली वहां से उठी और वॉशरूम की तरफ चल दी…

उसके पीछे-2 अजीत भी उसके पीछे हो लिया…इंग्लीश का पीरियड शुरू होने में सिर्फ़ 5 मिनट का समय रह गया था…

वो लगभग भागती हुई सी बाथरूम में पहुँची और एक खाली केबिन देखके उसके अंदर घुस गयी, वो दरवाजा लॉक करती , उस से पहले ही अजीत भी अंदर घुस आया और दरवाजा लॉक कर दिया

डॉली : “ओ पागल हो गया है क्या अजीत….ये गर्ल्स वॉशरूम है, तुझे किसी ने देख लिया तो बवाल हो जाएगा…”

अजीत : “होता है तो होने दे, मुझे आज बस किस्स चाहिए तेरी”
 
डॉली बेचारी सिर्फ़ दाँत पीस के रह गयी, वो कुछ बोलने ही वाली थी की अजीत ने उसे अपनी बाँहों में जकड़ लिया और ज़ोर से उसे हग कर लिया..

ये पहला मौका था उसकी लाइफ का जब किसी लड़के ने उसे ऐसे गले लगाया था, उसकी कसी हुई 32 साइज़ की चुचियाँ अजीत के सीने से लगकर बुरी तरह से पिस गयीं….

उसका बदन हमेशा की तरह फिर से काँपने लगा…

वो कुछ बोलती, इस से पहले ही अजीत ने अपने होंठ उसके होंठो पर रखके उन्हे चूसना शुरू कर दिया…

एक पल के लिए उसकी साँसे ही रुक गयी….

वो तो पहले भी रुका करती थी, पर जो रही सही साँस उसे आ रही थी, वो भी अब आनी बंद सी हो गयी….

फड़फड़ाते हुए उसने बड़ी मुश्किल से अपने आप को और अपने नर्म होंठों को उसके चुंगल से छुड़वाया

और दबी हुई सी आवाज़ में अजीत को डांटते हुए वो बोली : “तू सच में पागल हो गया है, साला ठरकी ….आई एम नोट एबल तो ब्रीथ ….मर जाती मैं अभी….”

अजीत : “ आई एम् सॉरी बैबी…..सो सॉरी…..बट यार, ट्राइ तो अंडरस्टॅंड….अब यहाँ तक आ ही गये है तो जस्ट एंजाय द मोमेंट….कितना मज़ा आ रहा था यार….युवर लिप्स आर सो सॉफ्ट….सो जूसी …..’’

अब वो थोड़ी शांत हुई….

समझ तो अब उसे भी आ ही रहा था की ऐसा मौका फिर नही मिलेगा,

और पहली किस्स की रेखा तो वो पार कर ही चुकी थी,

अजीत जो इतने दिनों से उसके पीछे पड़ा था, वो इतने कम में तो मानेगा नही….

इसलिए उसने धीरे से हाँ में सिर हिलाते हुए अपना चेहरा नीचे कर लिया….

अजीत की तो खुशी का ठिकाना ही नही रहा…

उसने उसकी चिन को थोड़ा सा उपर उठाया और बड़े ही प्यार से एक बार फिर से उसके होंठो पर होंठ रखके उन्हे चूसने लगा….

और इस बार डॉली भी एंजाय कर रही थी….

वो पहली बार वाली झिझक उसके अंदर से निकल चुकी थी…

उसे भी अजीत के होंठ चूसने में मज़ा आ रहा था….

दोनों के जीभ और होंठ एक दूसरे से गुत्थम गुत्था होकर अंदर का गीलापन बाहर उडेल रहे थे…..

दोनो ने चाट चाटकार एक दूसरे को पूरा गीला कर दिया था…

साँस लेने के लिए दोनों एक पल के लिए रुके तो पहल करते हुए डॉली ने एक बार फिर से अजीत को दबोच लिया…

वो उसे ऐसे चूस रही थी जैसे उसे खा ही जाएगी…

आख़िर ऐसा करती भी क्यों नही, स्मूच करने में इतना मज़ा मिलता है, ये आज ही उसे पता चला…

वो चूमती जा रही थी की अजीत का एक हाथ उसके बूब्स पर आ टीका और तभी अचानक दूसरे पीरियड की बेल ज़ोर से बज गयी…

अजीत ने एकदम से घबराकर उसे छोड़ दिया, शायद इंग्लीश की क्लास वो मिस नही करना चाहता था….

वो बिना कुछ बोले, लॉक खोलके बाहर भागता हुआ चला गया.

और डॉली उस किस्स के उन्मांद में खोई हुई सी, अपने सीने पर हाथ रखके कुछ पल पहले के एहसास से उभरने की कोशिश कर रही थी…

तभी उसे एहसास हुआ की उसकी कच्छी पूरी गीली हो चुकी है,

शायद अत्यधिक उत्तेजना की वजह से उसकी चूत का पानी रिसने लगा था,

ठीक वैसे ही जैसे कल रात अजीत से बात करते हुए निकला था, जिसे उसने अपनी उंगलियों से शांत किया था…

पर अभी वो ये काम यहाँ स्कूल में नही कर सकती थी….

पर वो कच्छी उतारनी ज़रूरी थी, उसने अपनी स्कर्ट उठा कर उसे उतारा और अपने रस से लबालब उस कच्छी को डस्टबिन में डाल दिया…

टिश्यू पेपर से अपनी चूत को सॉफ किया और बाहर निकलके अपना हुलिया ठीक करके वो भी तेज़ी से क्लास की तरफ दौड़ पड़ी…

राज सर से डांट खाने के बाद वो गीता मेम का गुस्सा नही झेलना चाहती थी, शुक्र था की वो अभी तक आई नही थी…

सीट पर बैठते ही कामिनी ने आँखे तरेर के उसे कहा : “मैने देखा था, अजीत को भागके गर्ल्स टाय्लेट से निकलते हुए….आख़िर कर ही दिया ना आज तूने कांड…”

वो भी बस उसे देखके मुस्कुराइ और फ्रंट सीट पर बैठे अजीत को देखके अपने होंठो को दांतो तले दबाकर हँसने लगी….

और साथ ही साथ उसकी कमर धीरे-2 लचकाने लगी

अपनी नंगी चूत को बेंच की सीट पर रगड़ने में उसे काफ़ी मज़ा आ रहा था….सिर्फ़ एक स्कर्ट का ही कपड़ा था बीच में ….

काश वो भी ना होता….

कोई भी कपड़ा ना होता….

वो पूरी नंगी होती

कोई भी ना होता क्लास में …

सिर्फ़ वो और अजीत होते….

तो वो…वो….अपनी गर्म चूत को उस से चुसवाती , जैसा वो पिछली रात उसे बोल रही थी….

पर ऐसा हो नही सकता था…

सब आस पास ही थे….

और गीता मेम भी आ चुकी थी…इसलिए अभी के लिए उसने अपना ध्यान बड़ी मुश्किल से इन सब चीज़ो से बाहर निकाला और पढ़ने पर ध्यान देने लगी..

पर आज का दिन उसे हमेशा के लिए याद रहने वाला था…

आख़िर अपनी लाइफ का पहला किस्स जो किया था उसने.

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स्कूल ख़त्म होने पर डॉली जब कामिनी के साथ बाहर निकल रही थी तो सुबह की किस्स के बारे में ही सोच रही थी

तभी कामिनी की आवाज़ सुनके उसकी तंद्रा भंग हुई

कामिनी : “कहाँ खोई हुई है तू…अभी तक वो अजीत तेरे माइंड में घुसा बैठा है क्या ”

जवाब में डॉली मुस्कुरा दी

कामिनी : “देख बैबी, ये सब तो चलता रहेगा, पर मेरी बात का भी ध्यान रख…कल मॉर्निंग में टाइम से स्कूल पहुँच जाना, वरना राज सर को तो तू जानती ही है….ओह्ह फक्क…राज सर से याद आया, उन्होने आज एक मैथ असाइनमेंट दिया था क्लास में , जो कल कंप्लीट करके लाना ज़रूरी है, वो लिया क्या तूने…?”

डॉली अपनी हिरनी जैसी आँखो से उसे घूर रही थी, वो बोली : “मैं कैसे लेती, मैं तो क्लास के बाहर खड़ी थी…”

कामिनी : “ओह गॉड , यार….वो असाइनमेंट देते हुए उन्होने क्लियर्ली बोला था, ये कल मॉर्निंग में सॉल्व करके लाना बहुत ज़रूरी है, तू एक काम कर, सर अभी स्टाफ रूम में ही होंगे, तू जल्दी से अंदर जा, और उनसे असाइनमेंट लेकर आ, वरना कल भी बाहर खड़ा रहना पड़ेगा तुझे “

वो कामिनी को बोली की वो भी साथ चले,

पर तभी एक बाइक उनके पास आकर रुकी और कामिनी उचक कर उसपे बैठ गयी,

और उसे बाइ करते हुए बोली : “ये तेरा काम है, तू जा , और सर को पटा कर असाइनमेंट ले आ, ऑल द बेस्ट”

इतना कहकर उसने उस लड़के को इशारा किया और वो बाइक सवार कामिनी को लेकर चलता बना…

डॉली हैरान परेशान सी उसे देखती रह गयी…

हैरान वो इसलिए थी की वो लड़का कितना लफंगा टाइप का लग रहा था, जैसे कोई झुग्गी में रहने वाला लड़का हो…

कामिनी जैसी खूबसूरत लड़की को ऐसे छिछोरे लड़के में क्या दिख गया जो उसके साथ चल पड़ी.

पर ये तो वो उससे कल भी पूछ सकती थी

अभी तो वो वापिस स्टाफ रूम की तरफ दौड़ पड़ी ताकि राज सर से असाइनमेंट की कॉपी ले सके..

वो बस जाने की तैयारी ही कर रहे थे..और कोई नहीं था वहां पर

डॉली : "एक्सक्यूस मी सर , वो…वो आज क्लास में जो आपने असाइनमेंट दिया था….वो मुझे नही मिला..”

राज सर ने उसे उपर से नीचे तक देखा जैसे पहचानते ही ना हो

वो बोले : “तुम उसे लेकर भी क्या करोगी डॉली..तुमसे होना तो वैसे भी नही है”

वो तो जैसे उसका उपहास उड़ा रहे थे…

डॉली को गुस्सा तो आया पर वो चुपचाप खड़ी रही

और तभी उसे कामिनी की कही हुई बात याद आई…”सर को पटा और असाइनमेंट ले आ”

वैसे ये तो उसने पहले भी कई बार बोला था और उसने सोचा भी था, पर कभी हिम्मत नही हुई,

पर अब उसे लग रहा था की उन्हें पटाये बिना वो पास नही हो पाएगी..

राज सर की उम्र करीब 45 के आस पास थी…

ठीक ठाक से ही थे देखने में .. पर थे बिल्कुल फिट…जैसे जिम जाने वालों की बॉडी होती है ठीक वैसे.

वो उन्हे उपर से नीचे तक स्केन करने लगी…

उनके बारे में उसके मन में गंदे विचार आने लगे…

जिन्हे सोचकर उसके जवानी के अंगारे भड़क उठे….

अंगारे यानी उसके निप्पल्स…

ये निप्पल्स उसकी लाइफ का वो हिस्सा थे जो उसपर पूरा नियंत्रण रखने की क्षमता रखते थे…

कोई उन्हे पकड़ कर उमेठ दे तो वो आँखे बंद करके उससे लिपट जाए और कुछ भी कर डाले…

इसका कारण ये था की उसकी पूरी बॉडी का वो वीक पॉइंट थे, देखने में वो जितने खूबसूरत थे उतने ही सेन्सिटिव भी..

पिंक कलर के नन्हे -2 निप्पल्स के चारों तरफ महीन दानों की चादर बिछी हुई थी जो उनका सरक्षण करती थी

और जब वो उत्तेजित होती थी तो वो नन्हे निप्पल अंगारे बनकर उसका बदन जलाते और चारों तरफ के दाने उसकी जवानी के उन्माद में और भी निखर जाते और कड़क होकर उसका साथ देते.

राज : “अब खड़ी क्या हो, वो सामने वाली अलमारी से निकाल लो और कल टाइम से क्लास में आना और ये कंप्लीट करके लाना”

वो जिस तरह से दाँत पीस के ये सब बोल रहे थे, वो ये बताने के लिए काफ़ी था की वो ऐसा ना कर पाई तो क्या होगा.

वो सहमी हुई सी पलटी और अलमारी खोलके पेपर ढूँढने लगी,

कहाँ तो वो उन्हे पटाने की सोच रही थी और कहाँ वो भीगी बिल्ली बनी कुछ कर भी नहीं पा रही थी.

“ध्यान कहाँ है तुम्हारा, वो नीचे के हिस्से में रखे है, एक लो और जाओ घर, मुझे भी निकलना है”

वो झुकी और अलमारी में सबसे नीचे के हिस्से में रखे बंडल से असाइनमेंट निकालने लगी, पर उन्हे बाँधा हुआ था, इसलिए वो उन्हे खोलने में लग गयी…

और तभी एक ठंडी हवा का झोंका उसे पीछे से अपनी चूत पर महसूस हुआ, और अगले ही पल उसका शरीर नम सा पड़ गया..

दरअसल उसने पेंटी तो पहनी नही थी,
 
झुकने की वजह से उसकी स्कर्ट उपर उठ गयी और पीछे चल रहे एसी ने रही सही कसर पूरी करते हुए उसकी स्कर्ट को थोड़ा और उपर खिसका दिया,

सामने लगे एसी से निकल रही ठंडी हवा सीधे उसकी नंगी और गर्म चूत से टकरा रही थी…

कुछ पल पहले जो अंगारे राज सर की बात सुनके बुझ गये थे वो फिर सुलग उठे.

और वो जानती थी की पीछे खड़े राज सर भी वो सब देख पा रहे थे,

उसने सिर पीछे करके देखा तो उसकी आशा के अनुरूप राज सर बिना पलक झपकाए उसकी नंगी चूत को ही निहार रहे थे…

उनका मुँह थोड़ा खुल सा गया था…

डॉली की लाइफ का ये पहला मौका था जब वो अपनी कुँवारी चूत किसी मर्द को दिखा रही थी

अजीत को भी उसने अभी तक कुछ नही दिखाया था

सिर्फ़ गंदी बातों के अलावा कुछ भी नही किया था

पर यहाँ, पहली ही बार में वो अपनी चूत उघाड़े अपने मैथ टीचर के सामने झुकी खड़ी थी…

बंडल तो खुल चुका था, वो चाहती तो पेपर निकाल कर उठ सकती थी, पर कुछ देर और झुक के वो सर को पूरी तरह से अपने वश में कर लेना चाहती थी

वो खुद भी उत्तेजित हो चुकी थी, और इसी वजह से उसकी चूत से एक गाढ़े रस की धार निकलकर उसकी जाँघों पर बहने लगी

राज सर भी अपने खड़े लंड को बिठाने के लिए उसे छुपा रहे थे अपने बेग से…

बस, इतना बहुत था अभी के लिए..

वो पेपर उठा कर खड़ी हुई और बाहर जाने लगी.

राज सर ने पीछे से उसे आवाज़ दी

“सुनो डॉली….एक मिनट यहाँ आओ…”

और इस बार उनकी आवाज़ मे एक अलग ही मिठास थी.

डॉली के चेहरे पर कुटिल मुस्कान तैर गयी, वो मासूम सा चेहरा बनाके पलटी और बोली : “जी सर …”

सर वापिस अपनी चेयर पर जाकर बैठ चुके थे, शायद अपने खड़े लंड को छिपाने के लिए.

उन्होने उसे सामने बैठने के लिए कहा, पर उसने मना कर दिया…

उसकी चूत पूरी तरह से भीग चुकी थी, वो बैठती तो उसकी स्कर्ट खराब हो जाती.

सर बड़े ही प्यार और नर्म आवाज़ में बोले : “देखो, मैं भी नही चाहता की तुम्हारा साल खराब हो, ख़ासकर मेरी वजह से…इसलिए मेरी क्लास में थोड़ा ध्यान दिया करो…मैं भी अपनी तरफ से कोशिश करूँगा की तुम्हारा ख़ास ध्यान रख सकूँ”

उन्होने 'ख़ास' शब्द पर कुछ ज़्यादा ही ज़ोर देते हुए कहा

डॉली मुस्कुरा उठी, उसके हुस्न का जादू काम कर गया था.

वो बोली : “थेंक्स सर , मैं भी पूरी कोशिश करुँगी की आपको नाराज़ होने का कोई मौका ना दूँ ”

इतना कहकर वो पलटी और अपनी नन्ही और अंदर से नंगी गांड को मटकाती हुई बाहर निकल गयी

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बाहर निकली तो उसका दिल जोरों से धड़क रहा था….

उसे तो यकीन ही नही हो रहा था की अभी कुछ देर पहले उसने अपनी नंगी चूत के दर्शन अपने टीचर को करवा दिए…

डॉली का पूरा बदन इस वक़्त जल सा रहा था…

वो उसे शांत करना चाहती थी…

उसने जल्दी से एक ऑटो लिया और घर पहुँचकर सीधा अपने रूम में गयी,

अपने सारे कपड़े उतारके नंगी हुई और जाकर ठंडे पानी के शावर के नीचे खड़ी हो गयी.

आआआआआआआअहह सससससससस sssssssss

एक लंबी सी सिसकारी निकली जब उसके गर्म जिस्म पर ठंडा पानी पड़ा तो

उसके हाथ अपने नन्हे बूब्स पर आ गये और वो उन्हे प्यार से सहलाने लगी

दूसरा हाथ उसकी चूत पर मंडराने लगा

वैसे तो ये उसका रोज का काम था, मॉम तो इस वक़्त ऑफीस में रहती थी, इसलिए वो खुल कर , नंगी होकर अपने बाथरूम में एक घंटा लगाकर नहाती , अपनी चूत को मसलती और लगभग रोज मास्टरबेट करके झड़ जाती

पर आज के लिए तो उसके पास इतना मसाला था की उसे सोच-सोचके ही उसकी चूत झड़ने को तैय्यार थी.

वो अजीत के बारे में सोचने लगी….उसके साथ बाथरूम हुई किस्स के बारे में सोचने लगी.

पर फिर अचानक उसके विचारों में राज सर बीच में आ गये ,

उसकी नंगी चूत को घूरते हुए जो उनके चेहरे पर एक्शप्रेशन था, उसे सोचते ही वो मुस्कुरा दी.

वहां स्कूल में तो वो कुछ नही कर पाए थे, पर यहाँ उसकी 'सोच' में तो वो कुछ भी कर सकते थे.

वो आगे बड़े और अपना हाथ उसकी नंगी चूत पर रखकर उसे ज़ोर से उसे दबा दिया…

आँखे बंद करके नहाती हुई डॉली ने अपनी चूत को अपने हाथों के पंजों में जोरों से भींच लिया…

जैसे उसे निचोड़कर उसका सारा रस निकाल डालेगी

हाथ उसका था पर एहसासों में राज सर उसे रगड़ रहे थे.

ओह सर …….प्लीईईईईईईईईईईस……..धीऱे एएएईई sssssssss ….

घर में कोई नही था, इसलिए वो खुलकर कुछ भी कर सकती थी…..

चिल्ला सकती थी.

राज सर के हाथ की उंगली उसकी चूत का दरवाजा तलाशने लगी..

डॉली ने अपनी उंगली भी लेजाकर वहां रख दी जहाँ से चिकनाई भरे रास्ते शुरू होती हैं.

राज सर की बीच वाली मोटी उंगली धीरे-2 अंदर घुसने लगी…

डॉली ने भी अपनी दो उंगलियों को एकसाथ अंदर खिसकाना शुरू कर दिया

एक अजीब सी सिहरन दौड़ रही थी उसके पूरे शरीर में

अपने पंजों पर खड़ी हो गयी वो जब उसकी उंगलिया उसके मटर दाने से जा टकराई…

एक बार फिर एक गहरी और मादक सिसकारी से पूरा घर गूँज उठा…

उम्मम्मम्मम्मम्म्म्मममममममममममममममममममम आआआआआआआआआआअहह स्स्स्सस्स्स्स

राज सर ने वो घी से चुपड़ी उंगली को बाहर खींचा और उसे अपने मुँह में लेकर चूस लिया…

ये काम डॉली खुद करना चाहती थी, इसलिए राज सर से वो सब करवा रही थी जो उसे पसंद था.

उसने अपनी दोनो उंगलियाँ बाहर निकाली और अपने शहद रस से भीगी उन गोरी उंगलियों को मुँह में लेकर चूसने लगी…

दूसरे हाथ से वो अपने जवानी के अंगारों को पकड़कर उन्हे और ज़्यादा सुलगा रही थी….

क्योंकि वही रास्ता था उसके ऑर्गॅज़म तक जाने का.
 
सुबह से अपनी चूत में जिस तूफान को वो समेटे बैठी थी, उसके निकालने का समय अब आ चूका था.

उसने तेज़ी से अपनी चूत को रगड़ते हुए , अपने निप्पल्स को उमेठते हुए ज़ोर-2 से चिल्लाना शुरू कर दिया

ओह राज सर ……..प्लीज़ …………. और अंदर डालो…..अपनी फिंगर…….घुसा दो पूरी…..उंगलियाँ…..सारी उंगलिया……एक साथ…..डाल दो….पूरा हाथ अंदर तक…….आआआआआआआअहहsssssssss …..

चरम सुख प्राप्त करते हुए वो उत्तेजना के मारे इस तरह से कांपी की उसका खड़ा रहना भी मुश्किल हो गया….

वो वहीं बाथ टब के उपर बैठ गयी और अपनी चूत से निकल रहे गाड़े रस को अपनी वहीँ पर मलकर उसका शृंगार करने लगी…

और जब वो उस नशे से उभरी तो उसका पूरा शरीर निढाल हो चूका था….

बड़ी मुश्किल से वो उठी और एक बार फिर से शावर के नीचे खड़े होकर अपने आप को सॉफ किया और नंगी चलती हुई अपने रूम में गयी और बेड पर लेट गयी….

कब उसका बदन सूखा, कब उसकी आँख लगी उसे पता ही नही चला.

ये जवानी का उन्माद था जो उसके सिर चढ़कर उसे गहरा नशा प्रदान कर रहा था…

ये तो बस शुरूवात थी…

अभी तो इस नशे में उसे पूरी तरह से भीगना था.

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शाम को जब उसकी नींद खुली , उसका फोन लगातार बजे जा रहा था.

उसने देखा तो उसकी मोम का फोन था, टाइम देखा तो उसके होश ही उड़ गये, शाम के 7 बज चुके थे.

यानी पिछले 4 घंटे से वो बेहोश होके सो रही थी.

उसने फोन उठाया तो मोम ने गुस्से भरी आवाज़ में कहा : “डॉली …दरवाजा खोलो…कब से बेल बजा रही हूँ ”

वो भागती हुई सी बाहर निकली और दरवाजा खोला…

और लगभग तभी उसे याद आया की उसने क्या कांड कर दिया…

जल्दबाज़ी में वो नंगी ही दौड़ती चली आई थी…

पर अब छुपाने का कोई फ़ायदा नही था,

देर हो चुकी थी,

मोम ने उसे ऐसे देखा तो हड़बड़ाते हुए जल्दी से दरवाजा बंद किया और गुस्से से चिल्ला पड़ी

“डॉली , दिमाग़ तो सही है तेरा…घोड़ी जैसी बड़ी हो गयी है और अकल रत्ती भर की भी नही है…ऐसे नंगे होकर कौन घूमता है भला ”

बेचारी अपने उभार और चूत को छुपाती हुई वापिस अपने कमरे की तरफ भागी वो..

तभी माँ ने कड़क आवाज़ में उसे रोका और बोली : “रूको….इधर आओ…’’

डॉली : “पर मोम …..मैं कपड़े तो पहन आऊं ”

मोम : “मैने कहा ना…यहाँ आओ…’’

वो बेचारी पलटी और उसी हालत में माँ के सामने खड़ी हो गयी…

मोम : “हाथ हटाओ..”

अपने बूब्स और चूत को उसने अपने हाथो से ढका हुआ था, मोम उन्हे हटाने को क्यों बोल रही थी…

हैरानी में उसकी आँखे फैल गयी…

मोम को उसने देखा, जैसे पूछ रही हो की वो ऐसा क्यों करने को कह रही है..

पर मोम के चेहरे के एक्शप्रेशन देखके उसने कुछ पूछना सही नही समझा…

उसने अपने हाथ हटा दिए.

अब वो अपनी माँ के सामने जन्मजात नंगी होकर खड़ी थी..

एक लड़की होने के नाते वो इस तरह एक औरत के सामने, ख़ासकर अपनी माँ के सामने नंगी खड़ी थी, इसमें उसे कोई परेशानी नही हो रही थी..

पर हां, आश्चर्य ज़रूर हो रहा था की आख़िर मोम ऐसा क्यों करना चाह रही थी.

मोम उसके करीब आई और उसके चारों तरफ घूमकर उसके शरीर और एक-2 अंग को निहारने लगी…

वो उसे इतने करीब से देख रही थी की उनकी गर्म साँसे डॉली को अपने शरीर पर महसूस हो रही थी…

अब डॉली के दिल की धड़कने बढ़ने लगी…

ऐसा आज तक उसके साथ नही हुआ था…

वो किसी म्यूज़ियम में लगी नंगी मूर्ति की तरह खड़ी थी और उसकी माँ दर्शक बनके उसके बदन की कारीगरी को निहार रही थी.

डॉली की मोम , प्रीति, जिनका शादी से पहले नीरजा नाम था, वो दिखने में बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति शाह की तरह लगती थी, इसलिए उसके पति यानी डॉली के पापा ने शादी के बाद इनका नाम प्रीति रख दिया
 
प्रीति : “देखो डॉली, अब तुम जवान हो गयी हो…ऐसी कोई भी हरकत मत करना जिससे मुझे शर्मिंदा होना पड़े…’’

प्रीति का एक हाथ उसके कूल्हे की गोलाई नाप रहा था.

डॉली : “आई नो मोम …ये भी कोई कहने वाली बात है…अब मैं जाऊं प्लीज़…’’

उसके स्वर में अब थोड़ी खीज आ चुकी थी

प्रीति : “रूको…मेरी बात अभी ख़त्म नही हुई है…’’

अब वो उसके सामने आकर खड़ी हो चुकी थी…

डॉली के नन्हे अमरूद कड़क होकर पत्थर बन चुके थे…पता नही क्यों

प्रीति का एक हाथ उसके नन्हे बूब्स पर आया और उन्हे थाम कर होले से दबा दिया….डॉली चिहुंक उठी.

प्रीति : “तुम अगर मेरी बात समझती तो मुझे ये सब ना बोलना पड़ता…अभी की ही बात लेलो, ऐसे नंगे होकर तुम भागती चली आई और दरवाजा खोल दिया, कोई और होता तो…उसे तो सब दिख जाता ना ये…’’

वो उसके नशीले जिस्म की तरफ इशारा करके बोली

डॉली अब थोड़े गुस्से में बोली : “बट मोम , मुझे तो पता था ना की आप ही है, आपने फोन करके दरवाजा खोलने को कहा था, और आपको तो पता ही है, स्कूल से आने के बाद मैं नहाके ऐसे ही सो जाती हूँ ’’

प्रीति की उंगलियो मे उसके निप्पल आ चुके थे, जो इस वक़्त अकड़कर अपने पूरे यौवन पर थे,

बस उन्ही को बचाने के लिए वो इतनी देर से अंदर जाने की जिद्द कर रही थी,

वो नही चाहती थी की मोम की नजर उसके जवानी के अंगारो पर पड़े ..

पर यहाँ तो मामला उस से भी आगे निकल चूका था,

वो उन्हे देख ही नही रही थी बल्कि उनके साथ खेल भी रही थी.

डॉली के अंगारे अब सुलग कर अपने विकराल रूप में आ चुके थे.

प्रीति : “जो तुम दिन में करती हो वो तो ग़लत है ही, पर जो तुम रात में करती हो उसका क्या ?”

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अपनी मॉम से डाँट खाकर और उनके एमोशन्स को महसूस करके डॉली जब अपने रूम में आई तो उसके सामने अभी तक की रंगीन जिंदगी आँखो के सामने घूम गयी…

उसने महसूस किया की उन सभी पलों में कई बार वो कमजोर पड़ गयी थी

अगर परिस्थितिया साथ देती तो शायद वो अपना कुँवारापन खो चुकी होती…

पर जो अभी तक मज़े उसने लिए थे वो भी कम नही थे…

उसने अपनी माँ से वादा किया था की वो ऐसा कोई काम नही करेगी जिस से उनकी बदनामी हो…

पर बदनामी तो तभी होगी ना जब वो बिन ब्याही माँ बन जाएगी और ऐसा वो होने नही देगी…

उपर-2 वाले मज़े तो वो ले ही सकती है ना…

हर तरह के उल्टे सीधे विचार उसके दिमाग़ मे आ रहे थे.

खाना खाते वक़्त भी उनके बीच ज़्यादा बात नही हुई…

बाद में अजीत का कॉल भी आया पर उसका मन नही हुआ की बात करे उसके साथ…और फिर वही सब सोचते-2 वो सो गयी.

अगले दिन जल्दी आँख भी खुल गयी, रात कोई कोई बकचोदी जो नही की थी उसने फोन पे, इसलिए टाइम से स्कूल भी पहुँच गयी.

पर वहां जाते ही उसकी फट्ट के हाथ में आ गयी

कामिनी ने जाते ही राज सर के असाइनमेंट के बारे में पूछा

उसने राज सर का असाइनमेंट तो किया ही नही था.

कल की भसड़ में वो उसे भूल ही गयी थी

और जब तक वो कुछ सोचती, राज सर क्लास में आ चुके थे

आते ही उन्होने सबसे असाइनमेंट देने को कहा…

डॉली की तरह 3 और स्टूडेंट्स थे जिन्होंने वो नही किया था

डॉली ने भी असाइनमेंट नही किया, ये देखते ही राज सर की आँखो में एक अलग सी चमक आ गयी और झुकी हुई डॉली की, बिन कच्छी वाली चूत भी तैर गयी

खैर, आशा के विपरीत, आज राज सर ने असाइनमेंट ना करने वालो को कुछ नही कहा…

ना तो डांटा और ना ही क्लास से बाहर खड़ा किया..

पर अभी के लिए उन्होने स्टूडेंट्स को समझाकर छोड़ दिया और कल तक काम पूरा करके लाने को कहा..

और साथ ही स्कूल के बाद उनसे मिलकर जाने की हिदायत भी दे दी.

शायद डॉली को वो सज़ा नही देना चाहते थे

या फिर अपने तरीके से देना चाहते थे

डॉली समझ गयी की उनके दिमाग़ में ज़रूर कुछ चल रहा है…

और कल वाली बात सोचके उसकी फांके एक बार फिर से गीली हो गयी

कामिनी अपनी आँखे गोल करके , मंद-2 मुस्कुराके डॉली को देख रही थी…जैसे पूछ रही हो ‘कल क्या जादू कर आई तू राज सर के उपर कमिनी’

डॉली ने अपने होंठ दांतो तले दबाते हुए अपनी खुशी को दबाने का प्रयत्न किया और राज सर द्वारा पढाये जा रहे चेपटर पर ध्यान देने लगी.

क्लास ख़त्म होते ही अजीत लपककर उसके पास आ पहुँचा, वो सुबह से डॉली से बात करने की कोशिश कर रहा था पर वो उसे इग्नोर कर रही थी

अजीत : ‘’यार डॉली, क्या है ये, तुम बात क्यू नही कर रही…कल रात भी कॉल नही उठाया मेरा…मैने कितने मैसेज छोड़े और कॉल्स किए..’’

डॉली : “मैं थकी हुई थी अजीत…तबीयत ठीक नही थी…’’

डॉली का सपाट सा चेहरा और उत्तर सुनके अजीत समझ गया की उसे और कुरेदना सही नही है, वो चुपचाप अपनी सीट पर जाकर बैठ गया

उसके जाते ही कामिनी बोल पड़ी : “अब बोल साली…कल क्या हुआ था सर के रूम में …देख रही हूँ हू उनकी नज़रे इनायत कुछ ज़्यादा ही हो रही है तुझपे आज सुबह से…वरना तेरी तो जान का दुश्मन बना बैठा था ये..’’

डॉली मुस्कुराइ और बोली : “अब हर बात बताई नही जाती मेरी जान….पर एक बात तो पक्की है, आज के बाद सर मुझे कभी डांटेंगे नही…’’

और ये कहते-2 वो राज सर के साथ क्या करेगी, इसके बारे में सोचके रोमांचित हो रही थी.

सोच तो उसने लिया ही था कल ही की इन लड़को या मर्दो को अपने हुस्न के जाल में फँसा कर कैसे मज़े लेने है,

जिसमें उसे मज़े भी मिल जाए और उसकी बदनामी भी ना हो, जैसा की उसकी मॉम ने उसे समझाया था..

और वो कैसे करना है , ये उसके शरारती दिमाग़ ने ऑलरेडी प्लान कर लिया था.

स्कूल ख़त्म होते ही रोजाना की तरह दोनो सहेलियां गेट तक साथ आई, दूसरे स्टूडेंट्स राज सर से मिलने स्टाफ रूम में जा चुके थे, वो बाद में जाना चाहती थी इसलिए अभी के बाहर तक आ गयी, बाहर जाते-2 उसने कल का राज सर वाला पूरा किस्सा उसे सुना डाला..

और तभी डॉली को कल वाले लड़के की बात याद आ गयी,

कामिनी भी बाहर आकर इधर-उधर नज़रे घुमाके शायद उसी को ढूँढ रही थी, पर वो कहीं नही दिखा.

डॉली : “उसी को ढूँढ रही है ना…”

जवाब में कामिनी मुस्कुरा दी

डॉली : “अब तू बोल, क्या सीन है उसके साथ तेरा…और मिला कहाँ से ये तुझे..देखने में तो झुग्गी में रहने वाला लगता है..’’

कामिनी : “हाँ , वहीं रहता है….और ये मेरे पापा के ड्राइवर का लड़का है, जय “

डॉली हैरानी से उसे देखने लगी…

अपने पापा के ड्राइवर के लड़के के साथ क्यूँ घूम रही है भला..’

कामिनी : “तू तो मेरे पापा को जानती ही है, उनके सर पर समाज सेवा का भूत सवार रहता है, ड्राइवर के बच्चे की मदद के लिए उसका एडमिशन सरकारी स्कूल में करवाया और उसे ये बाइक भी लेकर दी ताकि खाली समय पर ओला / उबर चला कर कुछ कमा सके ’’

डॉली : “वो तो ठीक है, पर तू क्यों घूम रही है इसके साथ…ऐसा क्या मज़ा मिल रहा है तुझे ? “

कामिनी (मुस्कुराते हुए) : “मज़ा मिला नही है अभी, पर मिलने वाला है…मैने इसे स्कूल ड्रॉप एंड पिकअप के लिए पटा लिया है और बदले में मैं इसकी पढ़ने में हैल्प करती हूँ …इसके घर जाकर….आई मीन, इसके झोपडे में जाकर”

ये कहते हुए उसने एक आँख मार दी…डॉली का तो मुँह खुला का खुला रह गया…

पर अभी भी उसे ये आश्चर्य हो रहा था की वो उस लड़के के साथ भला ये सब क्यों कर रही है,

उसके स्कूल में काफ़ी गुड लुकिंग लड़के थे जो कामिनी के पीछे हाथ धोके पड़े थे,

यहाँ तक की अजीत भी पहले कामिनी के चक्कर में था, उसने घांस नही डाली तो वो डॉली के पीछे पड़ गया…

डॉली को तो हमेशा से ही एक बाय्फ्रेंड की चाह थी, इसलिए एक-2 बार में ही वो उससे ‘पट’ गयी

वो कामिनी से ये पूछने ही वाली थी की तभी जय आ गया, अपनी नयी बाइक लेकर , और कल की तरह कामिनी फिर से उछल कर उसके पीछे बैठ गयी, पर जाने से पहले बोली : “वो मज़ा आज लूँगी…अब तू भी जा …राज सर को भी थोड़ा मज़ा दे दे…’’

ओह्ह …

कामिनी के चक्कर में वो उनके बारे में तो भूल ही गयी थी….

वो भागती हुई सी वापिस अंदर गयी…

पर राज सर के पास जाने से पहले वो वॉशरूम में गयी और अपनी कच्छी उतारकर अपने बेग में रख ली…

चूत उसकी काफ़ी गीली हो चुकी थी…
 
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