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Incest हुस्न का जादू और वासना के अंगारे

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कल की तरह वो आज फिर से अपनी बन्नो के दर्शन करवाकर उन्हे अपने सम्मोहन के जाल में पूरी तरह से फँसा लेना चाहती थी, ताकि उसका बचा हुआ साल अच्छे से निकल जाए…

वो जाने लगी पर फिर कुछ सोचके वो फिर से अंदर गयी और इस बार अपनी शर्ट खोलकर अपनी ब्रा भी उतारकर बेग में रख ली…

अब वो उपर से नीचे तक सिर्फ़ 2 कपड़ो में थी, नीचे से ठंडी हवा उसकी गर्म चूत को सहला रही थी और सामने से देखने पर उसके पिंक निप्पल और सिक्के जितना बड़ा एरोला वाला हिस्सा सॉफ दिखाई दे रहा था…

अभी के लिए उन्हे छुपाने के लिए उसने बेग से वही असाइनमेंट वाला पेपर निकाल कर अपनी छाती से लगा लिया और सर की तरफ चल पड़ी

वहां पहुँची तो राज सर को बेसब्री से अपना ही इंतजार करते हुए पाया..

वो कुछ बोल पाते इस से पहले ही उसने छाती से पकड़ा वो पेपर उनके सामने रख दिया…

उन्होने उसे देखा और जैसे ही सर उठाकर डॉली को कुछ बोलना चाहा वो ठिठक कर रुक गये..

वाइट शर्ट के अंदर से झाँकते मोटे निप्पल्स उन्हे दिखाई दिए…

बेचारे राज सर की तो हालत ही खराब हो गयी…

जीभ सूख कर पत्थर हो गयी…

उन्होने सोचा भी नही था की कल उसकी चूत देखने के बाद आज उसके निप्पल के भी इस तरह से दर्शन हो जाएगे…

भले ही शर्ट के महीन कपड़े की दीवार थी बीच में पर उसके आकार, रंग रूप और चारों तरफ फैला अेरोला सॉफ दिखाई दे रहा था….

और यही नही, ब्रा ना होने की वजह से उसके नन्हे बूब्स का आकार भी सॉफ दिखाई दे रहा था…

जैसे दो नन्हे-2 संतरे उसके सीने से चिपका दिए हो…एकदम गोल और कठोर थे वो.

डॉली : “सॉरी सर ….ये असाइनमेंट मैं नही कर पाई कल…एक तो मेरी तबीयत भी ठीक नही थी और जब मैने इसे देखा तो इसमे मुझे काफ़ी कुछ समझ भी नहीं आया…सो मैने सोचा की आपसे समझकर ही इसे पूरा कर लूँगी…आप मुझे समझाएँगे ना सर ’’

उसने जान बूझकर आख़िरी लाइन अपना सीना थोड़ा और बाहर निकाल कर कहा…

वो थोड़ा और ज़ोर लगाती तो शायद शर्ट में दो छेद हो जाते.

पर अंदर ही अंदर वो भी उस शर्ट से बाहर निकलने के लिए छटपटा रही थी…

मन तो उसका कर रहा था की वो बचे खुचे कपड़े भी फाड़ डाले…

उन्हे नोच कर अपने जिस्म से निकाल फेंके और कूद कर उनकी टेबल पर चढ़ जाए और कूद पड़े राज सर के उपर…

पर अभी के लिए जो वो कर रही थी वही राज सर से संभालना मुश्किल हो रहा था.

डॉली की बात सुनकर उन्होने हकलाते हुए कहा : “उम्म हाँ हन…हां क्यों नही….तुम…तुम एक काम करो…मेरे साथ मेरे घर चलो..आई मीन…मेरे ट्यूशन सेंटर में आकर ये पूरा कर लो…वहां मैं समझा दूँगा’’

डॉली थोड़ा और झुकी उनकी टेबल पर और बोली : “चले फिर…सर …आपके घर…आई मीन, आपके ट्यूशन सेंटर पर…’’

राज सर ने जल्दी-2 अपने पेपर्स बेग में रखे और उस बेग को अपने लंड के सामने वाले हिस्से पर लगाकर वो जल्दी से बाहर निकल गये…

डॉली भी मुस्कुराती हुई उस पेपर को एक बार फिर से अपने सीने से लगाकर , अपने निप्पल्स को दुनिया से छुपाती हुई बाहर आकर राज सर की कार में बैठ गयी और वो दोनो उनके घर की तरफ चल दिए..

राज सर ने अपने घर के ग्राउंड फ्लोर में ही ट्यूशन सेंटर खोल रखा था,

वैसे तो वहां बच्चे शाम 5-8 ही आते थे, अभी तो 2 ही बजे थे.

इसलिए वहां इस वक़्त कोई नही होगा…

रास्ते में ,बातों ही बातों में उसे पता चला की उन्होने आज तक शादी ही नही की है, वो घर पर अकेले रहते थे. उनके माँ पिताजी गाँव में रहते थे.

डॉली सर को गोर से देख रही थी….

थोड़े साँवले थे पर बॉडी एकदम टाइट थी उनकी,

सर ने बताया की मॉर्निंग में वो 10 किलोमीटर वॉक भी करते है और उसके बाद जिम भी जाते है,

वहीं से स्कूल आ जाते है, कार की पिछली सीट पर जिम वाला बेग भी पड़ा था…

सर के शरीर से अजीब सी नशीली गंध आ रही थी डॉली को…

एक असली मर्द वाली..

वो अपनी जाँघो को आपस में रगड़ रही थी…

पर वो उन्हे ज़्यादा रगड़ती तो एक गीला पेच बन जाना था उसके पीछे, इसलिए बड़ी मुश्किल से उसने अपने आप को रोका.
 
सर के शरीर से अजीब सी नशीली गंध आ रही थी डॉली को…

एक असली मर्द वाली..

वो अपनी जाँघो को आपस में रगड़ रही थी…

पर वो उन्हे ज़्यादा रगड़ती तो एक गीला पेच बन जाना था उसके पीछे, इसलिए बड़ी मुश्किल से उसने अपने आप को रोका.

10 मिनट में ही सर का घर आ गया और वो दोनो अंदर आ गये, सर ने ट्यूशन सेंटर का लॉक खोला और डॉली को अंदर बैठने को कहा..

और वो उपर अपना बेग रखने चले गये.

डॉली अंदर गयी और उसने अपना बेग रख दिया…

एक बड़ा सा कमरा था वो, जहाँ स्टूडेंट्स के लिए करीब 15-20 चेयर्स रखी थी,

सामने वाइट बोर्ड था, साथ में शायद वॉशरूम था, वो उसके अंदर चली गयी जहाँ एक बड़ा सा मिरर लगा था..

उसने अपने आप को उपर से नीचे तक उस शीशे में देखा,

उन कपड़ो में, ख़ासकर बिना ब्रा की शर्ट से झाँकते बूब्स की वजह से, वो एकदम कमाल की लग रही थी,

बहुत ही सैक्सी…

उसने एक-2 बटन खोले तो बूब्स की क्लीवेज़ बाहर दिखने लगी…

वो होंठ टेढ़े करके मुस्कुरा दी और तभी बाहर से राज सर की आवाज़ आई

“डॉली ….डॉली…कहाँ हो तुम….”

उनकी आवाज़ से ही उनकी व्याकुलता झलक रही थी…

डॉली ऐसे ही, बिना अपने बटन बंद किए बाहर की तरफ चल दी…

आज जो सोचा हुआ था उसने उसे करने का समय आ चूका था.

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डॉली बाहर आई तो राज सर को बेसब्री से अपना इंतजार करते हुए पाया

उन्होने अंदर आने से पहले बाहर का दरवाजा बंद कर दिया था’’

आज कुछ बड़ा होने वाला था इस ट्यूशन सेंटर में.

राज ने भी जब उसे बाथरूम से बाहर निकलते देखा तो उनकी नज़रें डॉली की क्लिवेज पर जम के रह गयी,

वो सोचने लगे, अभी तक वो बटन बंद थे, अब खुल कैसे गए

यानी वो खुद अपना यौवन उन्हे सोंपने आई थी.

पर एक अध्यापक और स्टूडेंट के रिश्ते में पहल करके वो फँसना नही चाहते थे.

राज सर ने बड़ी मुश्किल से अपने गले को सॉफ करके, थूक निगलते हुए पूछा : “वो…उम्म्म्मम…तुम…असाइनमेंट के लिए बोल रही थी ना….चलो समझा देता हूँ ….’’

“जी सर ….” कहते हुए वो फर्स्ट चेयर पर जाकर बैठ गयी.

राज सर भारी पैरों से चलते हुए वाइट बोर्ड तक गये

क्या लिखे, क्या समझाए

उन्हे खुद समझ नही आ रहा था.

पीछे बैठी डॉली को उनकी इस हालत पर हँसी आ रही थी…

एक लड़की के पास अपने जिस्म के रूम में जो हथियार होता है, उसका इस्तेमाल करके वो इन मर्दों को कैसे धाराशायी कर सकती है, इसका एहसास आज उसे हो रहा था.

कल तक यही राज सर उसे डाँटते रहते थे

क्लास से बाहर निकाल देते थे

पर आज उसके हुस्न की एक झलक पाने के बाद वो उसके सामने पालतू कुत्ते की तरह खड़े थे,

उसे खुद अपनी कार में बिठा कर घर तक लाए थे

वो समझाने जिसे समझने में उसे कोई इंटरेस्ट नही था.

समझना था तो बस एक औरत और मर्द के बीच के रिश्ते को

समझना भी क्या, मज़े लेने थे उन रिश्तो के

अपनी जिस्म के.

राज सर ने एक लंबी साँस भरके उसे समझाना शुरू कर दिया…

डॉली का ध्यान तो उस तरफ था ही नही, वो तो आने वाले पलों के बारे में सोच रही थी.

पेन को मुँह में लेकर खुली आँखो से सपने देख रही थी.

तभी सर की आवाज से उसकी तन्द्रा भंग हुई

सर : “समझ गयी ना….’’

सर ने जब 2-3 बार ये बात बोली तब उसे एहसास हुआ की उन्होने वो असाइनमेंट समझा डाला है

वो हड़बड़ाती हुई उठी और बोली : “सर ….वो बस लास्ट में जो है , वो फ़ॉर्मूला एक बार फिर बता देते तो…..’’

राज समझ गया की उसका ध्यान जरा भी नहीं था उसकी तरफ , तो उन्होंने कुछ सोच के उससे कहा

“एक काम करो, यहाँ आओ, और खुद करके देखो, कैलकुलेशन में, मैं हेल्प कर दूँगा…’’

सर ने बोर्ड क्लीन करके दे दिया उसे

बेचारी फँस चुकी थी,

वो उठी और मार्कर लेकर फिर से उसे करने लगी…

अब करती क्या, उसे तो कुछ आता ही नही था..

पेपर पर लिखे नंबर्स को उसने लिखा और उन्हे किस फार्मूले से कैलकुलेट करना है ये उसे पता नही था…

वो बेचारी आँखे नीचे करके खड़ी हो गयी और तभी उसे राज सर का एहसास हुआ,

वो ठीक उसके पीछे आकर खड़े हो गये थे.

ये पहल उन्होने बड़ी हिम्मत करके की थी.

सर ने अपना हाथ उपर लाकर उसके हाथ पर रख दिया और मार्कर पकड़कर उससे फ़ॉर्मूला लिखवाने लगे.

जैसे किसी छोटे बच्चे को लिखना सीखा रहे हो, ठीक वैसे.

पर वो जिस पोज़ में खड़े थे,

उसमें दोनो की हालत पतली हो रही थी.

राज सर के लंड वाला हिस्सा उसके कुल्हो से थोड़ा उपर आकर टच हो रहा था.

डॉली की हाईट थोड़ी कम थी उनके सामने,

इसलिए उनका चौड़ा सीना उसकी कमर से थोड़ा ऊपर सट गया था,

यहां दोनो जगह तो खैर बीच में कपड़े थे पर उन दोनो की बाहें, जो एक दूसरे के उपर थी, वो पूरी नंगी थी.

डॉली की स्कूल शर्ट और सर की शर्ट हाफ स्लीवस की थी,

जिसकी वजह से राज सर, डॉली के नर्म और मुलायम शरीर का एहसास ले पा रहे थे

दोनो की साँसे तेज होने लगी

राज सर ने थोड़ी नज़रें नीचे की तो उनकी रही सही साँसे भी उखड़ने पर आ गयी…

वो जिस एंगल पर खड़े थे, वहाँ से उन्हे डॉली के सीने का अंदर तक का नज़ारा सॉफ दिखाई दे रहा था…

दो बटन क्या खुले उसकी शर्ट के

जवानी के अंगारे सुलग उठे जिस्म में

यही हाल हो रहा था डॉली का
 
पीछे से राज सर की गहरी साँसे अपने कानो पर महसूस करके उसे पता चल चुका था की उनकी नज़रें इस वक़्त उसकी शर्ट के अंदर है…

सर उसके बूब्स को देख पा रहे है ये सोचते ही उसके निप्पल्स तन कर बंदूक की गोली जैसे खड़े हो गये,

जैसे किसी को भेद ही डालेंगे आज…

राज सर को उसके बूब्स की उँचाई के साथ-2 उसके बड़े -2 एरोला तक दिखाई दे रहे थे…

पर जहाँ से निप्पल की शुरुवत होती है , वहां आकर शर्ट ने उन्हे ढक लिया था…

पर उसके पिंक निप्पल्स की एक झलक उन्हे ज़रूर दिखाई दे गयी….

और ये काफ़ी था उनके सोए हुए शेर को जगाने के लिए…

वैसे जाग तो वो कब का चुका था,

पर अपने विकराल रूप में आने में उसे झिझक हो रही थी,

पर इस झिझक को डॉली के बूब्स ने दूर कर दिया था..

डॉली को अपनी पीठ पर किसी साँप के रेंगने का एहसास हुआ….

पहले भी वो अजीत के लंड को उपर-2 से महसूस कर चुकी थी, पर इस अजगर के सामने तो वो छिपकली था,

इसे अपनी चूत में कैसे ले पाएगी ,

ये सोचके ही उसके बदन में सिहरन सी दौड़ गयी

राज सर ने उसके पेट को जकड़ते हुए उसे अपने बदन से चिपका लिया और उसके कान में फुसफुसाए : “क्या हुआ डॉली….ठंड लग रही है क्या..’’

जवाब में डॉली ने अपना सिर पीछे करते हुए उनके कंधे पर रख दिया,

और अपनी छाती को और बाहर निकाल दिया ताकि वो उसे अच्छे से देख सके.

"नहीं सर, मजा आ रहा है ''

उसकी बात सुनके राज सर के लंड ने 1-2 झटके मारे और उन्होने नीचे से उसकी शर्ट स्कर्ट से बाहर निकाल दी और अपना हाथ अंदर खिसकाकर उसके नंगे पेट पर रख कर उसे ज़ोर से भींच दिया

उम्म्म्ममममममममम सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आआआआह्ह्हह्ह्ह

बेचारी एक नागिन की तरह सिसक कर रह गयी, उसका नशीला जिस्म सर की बाहों में जल बिन मछली की तरह मचलने लगा

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सर ने उसे दबोचा तो उसका बदन बोर्ड से टच हो गया

वो उपर नीचे हिचकोले खा रही थी

उसके निप्पल्स जो इस वक़्त तन कर उसकी कमीज़ में खड़े हुए थे, वो मार्कर बनके वाइट बोर्ड पर अलग ही फ़ॉर्मूला लिखने लगे

राज सर ने उसके पेट को पकड़े -2 उसके शरीर को इस अंदाज से उपर नीचे किया की बोर्ड पर लिखे फार्मूले पर उसके निप्पल्स किसी पेन की तरह चलने लगे,

उनके फार्मूला समझाने के इस अंदाज की कायल हो गयी डॉली.

राज सर की एक उंगली उसकी नाभि में घुस गयी और वो उसे सहलाने लगे

उंगली इतनी मोटी थी की वहां घुस भी नहीं पा रही थी,

डॉली ने सोचा की ये उंगली जब उसकी चूत में घुसेगी तो कितना मज़ा मिलेगा…

ये सोचते ही उसने सर के हाथ के उपर अपना हाथ रखके उसे ज़ोर से दबा दिया

राज सर ने उसे डॉली की स्वीकृति समझा और नीचे झुकते हुए उसके कानो को अपने मुँह में लेकर चुभला डाला

और फिर उसे पूरा मुंह में भरकर चूसने लगे

डॉली को इसकी उम्मीद भी नही थी

कोई कान भी भला चूसता है क्या

पर वो क्या जाने की मर्दों को ये कितना पसंद है

उन्हे तो ऐसी कच्ची कलियों के हर अंग को चूसना पसंद है जो उनके जिस्म की आग को सुलगाने का काम करती है

उसके कच्चे कचरी जैसे कानो को मुँह में लेकर वो ऐसे चूस रहा था जैसे वो उसके होंठ हो….

सर उन्हे ऐसे चूस रहे है तो उसके होंठो का क्या हाल करेंगे, ये सोचते ही उसकी चूत का पानी छलक उठा

चाह तो वो रही थी की सर अभी पलटें , उसके सारे कपड़े निकाल फेंके और उसकी जवानी के भरपूर मज़े ले डाले.

पर जो वो अपनी तरफ से अभी कर रहे थे

उसमें उसे ज़्यादा मज़ा मिल रहा था…

धीरे-2 ही सही,

उसके जिस्म की आग को वो जिस अंदाज में भड़का रहे थे वो क़ाबिले तारीफ था

भले ही राज सर की शादी नही हुई थी पर उनके हुनर को देखकर वो समझ चुकी थी की वो कितना खेले खाए है

पर अभी के लिए तो उसके मज़े में चार चाँद लगने वाले थे

क्योंकि सर का हाथ जो उसकी नाभि के इर्द गिर्द घूम रहा था ,वो खिसक कर अब उपर आने लगा था और जल्द ही उनकी उंगलिया उसके बूब्स के निचले हिस्से से आ टकराई

डॉली की साँसे रुक सी गयी,

राज सर की गहरी साँसे भी उसे अब अपने कानो पर महसूस नही हो रही थी

और अगले ही पल उनका मर्दाना पँजा उसके ऊन के गोले जैसे मुलायम बूब्स पर आ टीका और उन्होने उसे ज़ोर से दबा दिया

आआआआआआआआआअहह उम्म्म्ममममममममममममममममममममममम

ये पहला स्पर्श….

पहला दर्द….

पहला नशा…..

वो हमेशा के लिए अपने सीने में सॅंजो कर रख लेना चाहती थी

पर अभी के लिए तो सर की जादुई उंगलियों को अपने नंगे बूब्स पर महसूस करके वो हवा में उड़ रही थी

मर्दो को पता नही क्या मज़ा मिलता होगा उन्हे पकड़के,

पर आज अपने बुलबुल के बच्चे एक मर्द के हाथो में सौंपके उसे ज़रूर परमानंद की प्राप्ति हो रही थी.

और राज सर को तो जैसे कोई छुपा हुआ खजाना मिल गया था

वो बूब्स नही मलाई कोफ्ते थे,

जिन्हे छूकर…

दबाकर…

एक अलग ही सुख़ कीडॉलीभूति हो रही थी

उन्होने अपना दूसरा हाथ भी उसकी शर्ट के अंदर डाल दिया और दोनो बूब्स को एक-2 हाथ में पकड़कर उन्हें दबाने लगे
 
डॉली भी पीछे खिसककर अब सर के पैरों पर चढ़ चुकी थी और अपना पूरा शरीर पीछे करते हुए उनसे चिपक कर खड़ी हो गयी थी….

आगे वाइट बोर्ड था और पीछे राज सर, जिनके बीच वो पिस कर रह गयी थी

उसकी लोंग स्कर्ट कब की शॉर्ट स्कर्ट बन चुकी थी ये उसे भी पता नही चला..

उसके कुल्हों के बीचो बीच राज सर का लंड ऐसे फँसा हुआ था जैसे उसे किसी चीज़ से चिपका दिया हो

वो पीछे से उसकी दरार में धक्का मारते तो उसकी स्कर्ट का कपडा तो ऊपर खिसक जाता पर लंड वहीं फंसा रह जाता

डॉली ने अपना सिर पूरा पीछे किया और नशीली आँखे खोलके सर को देखा, दोनो की नज़रें मिली और अगले ही पल राज सर ने अपना मुँह आगे करते हुए उसके नर्म होंठो को अपने मुँह में दबोच कर जोरों से स्मूच करना शुरू कर दिया

ऐसे रसीले होंठ आज तक नही चूसे थे शायद राज सर ने,

वो जितना भी उन्हे चूसते, उन्हे और चूसने की चाह बढ़ती जाती

अपनी गांड को सर के लंड पर घिसते-2 कब उसकी स्कर्ट उपर तक आ गयी, उसे पता ही ना चला

सर का मोटा लंड, जो उनकी पेंट में टेंट बना कर खड़ा था अब उसके नंगे चूतड़ों के बीच रगड़ खा रहा था जिसकी वजह से लंड के नीचे वाले हिस्से पर चूत से बह रहे रस की बूंदे चिपक गयी

कुँवारी चूत की गंध पाकर सर का लंड और भी ज़्यादा ख़ूँख़ार हो चुका था

इस वक़्त डॉली और राज सर को कोई होश नही रह गया था,

डॉली ने कल जो भी सोचा था, आने वाले दिनों के लिए जो भी प्लान किया था, वो धरा का धरा रह गया

वासना का जो तूफान इस वक़्त इस कमरे में चल रहा था वो सब कुछ उड़ा लेने वाला था.

पर ऐसा हुआ नही

क्योंकि जैसे ही राज सर ने उसे पलटकर अपनी तरफ करना चाहा , बाहर के दरवाजे पर जोरों से किसी के खड़काने की आवाज़ आई

“राज वा…..ओ राज वा….अंदर है क्या…..’’

वो आवाज़ सुनते ही राज सर के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी

“पिताजी…..ये कैसे आ गये आज….इन्हे तो अगले हफ्ते आना था..’’

इतना कहते ही राज सर ने उसके बूब्स से अपने हाथ बाहर खींचे, उसके कपड़े ठीक किए, अपना हुलिया भी दरुस्त किया और डॉली को बाथरूम में जाकर छिपने को कहा, ताकि पिताजी को वो उपर लेजाकर बिठा सके

डॉली बेचारी भोचक्की सी, इस अप्रत्याशित परिस्थिति से उभरने की कोशिश कर रही थी

वो रोबोट की तरह चलती हुई बाथरूम में जाकर छिप गयी और सर उपर चले गये

कुछ देर बाद जब डॉली उस सदमे से बाहर आई तो उसे एहसास हुआ की वो क्या करने जा रही थी

मज़ा तो बहुत आ रहा था उसे

सर के पापा ना आते तो शायद वो इस वक़्त चुद रही होती उनसे

पर ऐसा तो उसने प्लान नही किया था अपनी लाइफ के बारे में

और शायद उपर वाला भी यही चाहता था की वो ऐसा ना करे,

तभी एंड मौके पर राज सर के पिताजी को वहां भेज दिया

खैर, उसने जल्दी से अपना हुलिया ठीक किया,

बेग से अपनी ब्रा निकाल कर पहनी, बाल बनाए और अपना बेग लेकर वहां से निकल आई

पूरे रास्ते उसके जहन में वही सब चल रहा था जो ट्यूशन सेंटर में हुआ था.

पर अब उसने निश्चय कर लिया था की अपने आप पर कंट्रोल रखेगी

जहां तक उसने पहले सोचा था, वही तक मज़े लेगी

और मज़े कैसे होते है, ये तो वो जान ही चुकी थी

पर उन्हे कैसे और कितनी मात्रा में लेना है, ये जानना उसे सीखना था

जिसका निश्चय वो अब कर चुकी थी

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डॉली जब घर पंहुची तो उसकी हाल खराब हो रही थी

आज वो चुदते-2 बची थी

पर इस बचने में उसका ही नुक्सान हुआ था ये वो अच्छे से जानती थी...

चुदायी के इतने करीब पहुंचकर वो इतना तो जान चुकी थी कि ये मुई चुदाई होगी बड़ी मजेदार

घर पहुंचकर उसे क्या करना है वो अच्छे से जानती थी...

ताला खोलकर उसने अंदर से दरवाजा बंद किया

और ड्राइंग रूम से लेकर बेडरूम तक अपना एक-2 कपडा निकाल कर फेंकती चली गई...

बेड तक पहुंचती-2 वो पूरी नंगी थी...

एक हाथ अपने नन्हे बूब्स पर था और दूसरा रसीली चूत पर

भले ही उसने उस वक्त शुक्र मनाया था कि जज्बातों में बह कर वो सर से चुद नहीं गई, उनके पिताजी सही वक्त पर आ गए...

पर इस वक्त अपनी चूत रगड़ते हुए वो उन्हीं पलों को सोचकर, कामदेव के रथ पर सवार होकर दूसरी ही दुनिया में उड़ी जा रही थी

‘' ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सर …… .. कितना मजा आ रहा था आपके साथ ……। उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म् सिर्रर ……… ''

अपने निप्पल्स को उँगलियों से उमेठती हुई वो सर से शिकायत किए जा रही थी

"क्यों इतनी देर लगायी... मुझे पकड़ने में……. आआआ ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् मेरे करीब आने में…….. मुझे किस्स करने में………ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सर ……..’’

सर के नाम कि दो उँगलियाँ उसने अपनी तर बतर चूत में उतार रखी थी….

गीली तो वो इतनी थी कि सर का लंड तो क्या उनके टट्टे तक उतार लेती इस वक्त अपने अंदर,

फिसल कर अंदर चले जाते निगोड़े…

उनके अंधे विशाल लंड और गोल मटोल टट्टों को सोचते हुए उसके हाथों की गति और तेज हो गई और वो झड़ते हुए एक बार फिर से बुदबुदाने लगी

'' सर ....आआआआआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् प्लीज़ वादा करो। मेरी इस चूत को….. चाटोगे ……अपने मुंह में लेकर…..इसे…..आह्ह्ह्ह…..जोर से चूसोगे…….कोई दया नहीं……बेझिझक……आह्ह्ह्ह्ह डाल देना……अपना लंड इसके अंदर……अंदर तक……"

और उसका कश्मीरी जिस्म अकड़ कर रह गया जब उसके अंदर की ज्वाला बूंद-2 करके चूत के रस्ते पिघलकर बाहर आ गयी.

झड़ने के बाद अस्त व्यस्त सी डॉली ऐसी ही नंगी सो गई,

जानती थी कि शाम को मां के आने से पहले वो सब ठीक कर लेगी।

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उधर राज सर की KLPD होने के बाद उससे भी बुरी हाल था ….

अपने टयूशन सेंटर में पहली बार किसी स्टूडेंट को चोदते -२ रह गए थे….

उनके मां बाप ने आखिरी वक्त पर आकर सब गड़बड़ कर दिया था..

ऊपर से एक नई मुसिबत भी लाए थे वे मेरे साथ...

राज की शादी का मामला,

उनकी उम्र इतनी हो चुकी थी पर अभी तक शादी नहीं की थी इसलिए इस बार उसके माँ पिताजी निश्चय करके आये थे की उनकी शादी की बात पक्की करके रहेंगे

पर उन्हें कौन समझाए कि भले ही राज की उम्र 38 है पर उसे अपने से आधी उम्र की लड़कियों का शोक है,

उनका ही दीवाना है वो,

इसलिए शायद वो गर्ल्स स्कूल में टीचर की जॉब कर रहा था ताकी नवयौवन से भरपुर कलियों के इर्द गिर्द रह सके...

और बीच-2 में उसकी किस्मत जब उसपर मेहरबान होती तो कच्ची कलियों का कुंवारापन चुनने का अवसर भी उसे मिल जाता था

पर इन सबसे डॉली की बात सबसे अलग थी...

एक तो आज तक उसने ऐसी सैक्सी , सुंदर, दूध से नहायी हुई लड़की नहीं देखी थी

ऊपर से आज के किस्से के बाद उसे पता चल ही चूका था कि अंदर से वो कितनी गरम है,

बस अब उसी आंच पर अपनी रोटियां सेकनी थी राज को ...

भले ही आज के लिए उसके पिता ने आकर खेल बिगड दिया था

पर वो जानता था कि आने वाले दिनों में वो उसके जिस्म को कितने चाव से चखने वाला है

अगले दिन स्कूल में जब डॉली और कामिनी मिले तो दोनों के पास एक दूसरे को सुनाने के लिए लम्बे किस्से थे.

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डॉली ने तो एक-2 पल की बात, मिर्च मसाला लगा कर सुना डाली

पर जब कामिनी ने उसे सुनाना शुरू किया तो उसे लगा की जो कल उसके साथ हुआ था ठीक वैसा ही कामिनी के साथ भी हुआ है
 
कामिनी की कहानी, उसकी जुबानी

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कल जब मैं जय के साथ उसकी बाइक पर बैठकर गई तो मुझे भी शायद पता नहीं था कि आज मेरे साथ क्या होने वाला है

पहले तो रोज मुझे अपने झोंपड़े में ले जाता था,

जहां वो मेरी पढने में मदद करता था,

मेरे स्लैबस के हिसाब से मुझे ट्यूशन दिया करता था,

और इसी बीच उसके इधर उधर के टच मुझे उत्तेजित करते रहते हैं...

कल तो मैंने अपने एक बूब्स को उसकी बाजू पर प्रेस करके जब सामने रखी बुक उठाई थी तो उसकी हालत देखने लायक थी

इसलिए आज कुछ ज्यादा करने की हिम्मत थी शायद मुझमें ..

इसलिए मैंने आज जय जो इस तरह से पकड़ा हुआ था कि मेरे दोनों बूब्स उसकी कमर में धंसे जा रहे वे,

वो भी अपनी कमर लचका-2 कर मेरे चुभ रहे निपल्स की खुर्चन महसूस करके उत्तेजित हो रहा था

और जब हम दोनों उसके झोपड़े में पहुंचे तो जय की आंखों में दिख रही बेचैनी साफ बता रही थी कि अंदर से उसका क्या मन है...

मैंने भी उसे तड़पाने के लिए अपनी स्कूल जेकेट उतार दी जिसके बाद मेरे कसे हुए बूब्स देखकर उसकी आंखे चमक उठी

"अब देखते ही रहोगे या कुछ करोगे भी..."

जय : "उम्म हां...क...क्या करूं...। …"

मैं : "कल वाला चैपटर शुरू करो ना फिर से…कुछ डाउट है अभी तक मुझे…"

''ओह्ह...ओके ...चलो करते हैं "

इतना कहकर वो बुक्स खोलकर कल वाला चैपटर फिर से समझाने लगा..

मैं गौर से देख रही थी कि उसकी नजरें चोरी छुपे मेरी क्लीवेज़ पर ही टिकी थी...

मैं थोड़ा और झुक गई तो अंदर तक की गोलाइयाँ पूरी दिखाई देने लगी...

मेरे चेहरे और हाथों की तुलना में मेरा सीने वाला हिसा कुछ ज्यादा ही गोरा है,

इसलिए उसे देखकर आहें भर रहा था वो .

मन तो मेरा भी कर रहा था कि इसे तड़पाना बंद करू और आगे बढ़कर कुछ मजे ले लूँ , पर उसी वक्त बाहर से किसी की आवाज आई

“जय…ओ जय…अंदर ही है क्या”

जय वो आवाज सुनकर चोंक गया…और बोला “ये साला कौशल कहाँ से आ गया इस वक्त”

जय ने पहले भी बताया था कि कौशल उसका दोस्त है और अक्सर वो दोनो मस्ती किया करते हैं

वो कुछ बोल पाता इससे पहले ही कौशल अंदर आ गया...

वो भी देखने में एकदम छपरी था, बिल्कुल जय जैसा

कौशल : "आइला... तू भी अपने आइटम के साथ है आज..."

जय ने घूर कर उसे देखा और चुप रहने को कहा

कौशल : “ओह सॉरी….पर यार…सुन ना…तेरी हेल्प मांगता है….वो क्या है ना आज वो अपनी गर्लफ्रेंड रूपा है ना…वो साथ आई है…और तुझे तो पता है अपनी हालत कैसी रहती है…तो कुछ देर के लिए तेरी खोली मिल जाती तो….कसम से यार…बस आधा घंटा, इस से ज्यादा नहीं लगेगा अपुन को…’’

मेरा तो मुंह खुला का खुला रह गया…

कहां तो हम अभी तक पहली किस करने की कोशिश कर रहे हैं और कहां वो सीधा फकिंग करने आ गए थे ..

जय : “यार कौशल …तू पागल है क्या….देख रहा है ना कि मैं पढ़ रहा हूँ …”

"पता है की तू क्या पढ़ रहा है और क्या पढ़ा रहा है है ..."

उसकी रहस्यमयी मुस्कान बता रही थी कि जय ने उसे हम दोनों के बारे में मुझे सब बात बता रखी है..

बन्टी : 'यार बस...बस आधा घंटा...तू अगर चाहे तो यहीं रह...मैं अंदर चला जाता हूँ ….”

जय कुछ बोल पाता इससे पहले ही कौशल ने बाहर से रूपा को बुलाया और उसे लेकर अंदर चला गया

हम दोनो एक दूसरे को देखते रह गए..

जय : “सॉरी….वो वो…क्या है ना…मैं …मैं “

"इट्स ओके जय….मैं समझ गयी, कोई बात नहीं…आज का अधूरा काम हम कल कर लेंगे…”

मैंने जान बुझकर अपनी क्लीवेज़ की तरफ इशारा करते हुए कहीं ये बात…

और उसकी भुखी नजरें साफ बता रही थी की अपने दोस्त की वजह से आज वो किस सुख से वंचित रह गया है

मैं जैसे ही अपनी जैकेट और बेग उठाकर बाहर जाने लगी तो अंदर से रूपा की आवाज सुनाई दी

"उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ छोड़ न कौशल , आआआअह्ह … .कमीने … ..धीरे … .काट मत कुत्ते "

कौशल कितना भरा बैठा है अंदर से ये रूपा की आहें बता रही थी

जाना तो मैं वैसे भी नहीं चाहती थी

ऊपर से उन दोनों की अआवाजें सुनकर मेरे कदम आगे बढ़ने को तैयार ही नहीं हुए …

मैंने अपने होंठों को जीभ से गीला करके कुछ बोलना चाहा पर गले से कुछ निकल ही नहीं पाया,

चतुर चालाक जय ने ये बात नोट कर ली और मेरा हाथ पकड़कर धीरे से बोला

''ओके...चले जाना...पर इनका खेल देखकर...''

इतना कहकर वो मुझे थोड़ा उनके करिब ले गया,

दरवाजे के नाम पर एक चादर टांग कर झोपड़े में एक कमरे को अलग बना दिया गया था,

चादर हटायी तो अंदर का नजारा साफ दिखायी देने लगा

मैंने उसके कहने पर अंदर झाँका तो मेरी सांसे ही अटक गई....

कौशल ने रूपा के सारे कपड़े निकाले दिए वे और वो उसकी चूत को बुरी तरह से चूस रहा था...

वो खुद भी पूरा नंगा था और उसकी टांगो के बीच उसका मूसल जैसा लंड ऐसे झूल रहा था जैसे 2 मोटे केले एक साथ बाँध कर लटका दिए हो ..

ऐसा लंड तो मैंने पोर्न मूवीज में देखा था

और वो दोनो इस वक्त पोर्न स्टार जैसे ही लग रहे वे...

दोनों ही सांवले रंग के थे पर कपडे निकलने के बाद उतने ही खूबसूरत लग रहे थे

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अचानक मुझ एहसास हुआ की जय मेरे पीछे आ गया है ...

मैंने कुछ नहीं कहा..

मेरी पूरी बॉडी को अपने आप से ढक सा लिया था उसने

हम दोनों ही अंदर का कार्यकर्म देखने लगे, उसके हाथ मेरी कमर पर आ गए,

मैंने फिर भी कुछ नहीं कहा…

मेरी खामोशी को उसने हाँ समझा और धीरे-2 अपने हाथ ऊपर करने शुरू कर दिए

और कुछ ही देर में मेरे आमों पर उसका कब्ज़ा था…

मेरी सांस अटक कर रह गई,

सर पीछे होकर उसके कांधे पर गिर गया,

आंखें बंद हो गई,

उसकी उँगलियों ने कपड़ों के ऊपर से ही मेरे निप्पल्स को मसलना शुरू कर दिया,

कुछ आहें अंदर से रूपा निकाल रही थी और कुछ मेरे मुंह से निकल गई,

उसने अपने होंठ मेरी गर्दन पर रख कर उसे चूम लिया.

बस अब मुझसे बर्दाश्त करना मुश्किल था,

मैं एक झटके में पलटी और उसके चेहरे को पकड़कर उसके होंठों पर अपने होंठ रखकर चूसने लगी

वो भी भुखे भेडिये की तरह मेरी गोरी चमड़ी पर अपने पैने दांतो से निशान बनाता चला गया..

उसने अपने होंठ मेरी गर्दन पर रखकर मुझे बुरी तरह से दबोच लिया

फिर मेरे कुल्हे पकड़कर जय ने मुझे ऊपर खींचा और मैंने अपनी टाँगे उसकी कमर पर लपेट दी और उसपर सवार हो गई

हम दोनों एक दूसरे से बुरी तरह चिपके हुए थे , किस्स हर पल और गहरी होती चली जा रही थी,

देर थी तो बस कपड़े उतारने की फिर जो अंदर हो रहा था ओ बाहर भी होने में देर नहीं लगनी थी

पर आज के लिए शायद उसकी किस्मत में भी चुदाई नहीं लिखी थी...

वो कुछ और कर पाते तभी बाहर से आ रहे शोर ने उनके रंग में भंग डाल दिया...

जय : "अब ये क्या भसूड़ी है..."

उसने बेमन से मुझे अपनी गोद से नीचे उतारा,

मैं अभी भी उसे चूमने में लगी थी,

जैसे मैं जानना ही नहीं चाहती थी कि बाहर क्या हो रहा है

जय ने बड़ी मुश्किल से मुझे समझाया की देखकर तो आने दो की माजरा क्या है

इतना कहकर वो बाहर निकल गया

में बीच में खड़ी बाहर से आ रहे शोर और अंदर से आ रही सिसकारियां सुनके पशोपश में थी की करुं तो क्या करूं.

मैंने अंदर झाँका तो कौशल ने पोजीशन चेंज करके रूपा को पलट कर उसे पीछे से चूसना शुरू कर दिया था,

बेचारे नहीं जानते थे की उनकी मस्ती पर भी ब्रेक लगने वाला है

जय भगता हुआ वापस अंदर आया और चिल्ला कर बोला: "वो म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन वाले आए हैं, सबके झोपड़े तोड़ने को बोल रहे है...."

कौशल भी उसकी बात सुनकर जल्दी से कपडे पहन कर बाहर निकला

मैं भी हैरान परेशान थी की ये क्या हो गया एकदम से...

ये तो इनके घर हैं

उन्हें कैसे निकाल सकते हैं, उन्हें तोड़ कैसे सकते हैं

पर हम बड़े घरों में रहने वालों को इनके दुखों का अंदाजा नहीं होता की कैसी मुसीबतों का सामना करके वो अपनी जिंदगी गुजारते हैं

पर जो भी था अब कुछ नहीं हो सकता था’’

कौशल भी झल्लाता हुआ हुआ बोला : "इन सालों को आज ही का दिन मिलना था इस काम के लिए....हरामियों ने जीना दूभर कर रखा है...साले ढंग से चुदाई भी नहीं करने देते.."

जय ने फिर से घूर कर उसे देखा की कम से कम इस लड़की का तो लिहाज कर

रूपा भी अपने कपडे पहनती हुई बुदबुदा रही थी,

उसकी चूत की खुजली भी नहीं मिट पायी थी,

झोपड़े में चार जिस्म वे और सभी प्यासे रह गए थे

कौशल और रूपा वहां से निकल गए और जय भी मुझे लेकर बाइक पर मुझे घर छोड़ आया

कामिनी की कहानी सुनकर डॉली और कामिनी ने एक दूसरे की तरफ देखा और फिर दोनो हाई फाइव देकर ठहाका लगाकार हंस दी,

दोनो ही जानती थी कि कल लगभाग एक जैसे ही दोनो का पोपट कटा है

पर जैसे कल हुआ, उसपर दोनो में से किसी का जोर नहीं था, वैसे ही आने वाले दिनों में जो होने वाला था उसपर भी दोनो का कोई बस नहीं चलने वाला था..

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अपनी बेटी की जिंदगी में बीत रही रंगीन कहानी से बेख़बर प्रीति एक नई ही दुनिया में क़दम रखने को तैयार थी

अपनी भड़कती वासना की आग को बेंगन से बुझाते-2 वो थक चुकी थी, इसलिए अपने ऑफिस में काम करने वाली एक सिंगल मॉम के कहने पर एक डेटिंग ऐप पर उसने अपनी प्रोफाइल बना डाली,

DP पर सिर्फ अपनी आंखों की फोटो लगायी थी

और उन्हीं नाशिली आंखों को देख उसके पास धडल्ले से रिप्लाई आने शुरू हो गए थे

हालांकि ये सब करे से पहले उसने सोचा भी था कि अपनी जवान हो रही बेटी को अगर ये सब पता चल गया तो उसका सामना कैसे कर पाएगी

पर जिस्म की आग को बुझाने का कोई और तरीका दिखायी नहीं दे रहा था,

अब औरतों के लिए मर्दो की तरह कोठे का ऑप्शन तो होता नहीं है, जहां वो जाएँ और पैसे देकर अपनी प्यास बुझा ले

इसलिए ये डेटिंग एप्प का तरीका ही सही लगा अभी के लिए उसे ।

और आज उसी डेटिंग ऐप के ज़रिए एक मीटिंग फिक्स हुई थी उसकी

अपने ऑफिस से निकल कर वो सीधा मीटिंग वाली जगह पहुंच गई

पर जैसा कि फिल्मों में दिखाया जाता है, किसी रेस्टोरेंट में नहीं बल्कि रेलवे स्टेशन पर बुलाया था उस आदमी ने... .

प्रोफाइल में अपनी उम्र 42 साल लिखी थी ,

बीबी मर चुकी थी और सरकारी कर्मचारी लिखा था जॉब में ...

फोटो लगा रखी थी , देखने में भी ठीक था

पर नाम बड़ा ही फैन्सी रखा हुआ था, लक्की

वो जानती थी कि ये गलत नाम है जैसे उसने भी अपने असली नाम के बदले स्वीटपरी लिखा था।

प्रीति थोडा घबरा रही थी,

उसने साड़ी पहनी हुई थी,

ऑफिस से निकलते हुए हल्का मेकअप भी कर लिया था,

पिंक कलर की लिपिस्टिक लगाकर वो कयामत लग रही थी,

लक्की से फोन पर बात भी की ताकी मिलने का प्रोग्राम कन्फर्म कर सके ,

वो तो उससे भी ज्यादा उत्साहित था मिलने के लिए

रेलवे स्टेशन पहुंचकर जब प्रीति ने लक्की को कॉल किया तो उसने उसे प्लेटफॉर्म नंबर 12 पर आने को कहा, जो वहां का आखिरी प्लेटफॉर्म था,

खैर, वो 15 मिनट तक चलके जब वहां पहुंची तो काफी सुनसानियत थी ,

केवल 15-20 लोग ही थे जो शायद किसी लंबी दूरी तक जाने वाली ट्रेन का इंतजार कर रहे थे

वहां पहुंचते ही उसे लक्की का कॉल आया

“हां हां….. बस वही रुक जाओ परी जी, मैंने आपको देखा लिया है”

प्रीति के दिल की धड़कन तेज हो गई,

कुछ ही देर में अपनी लाइफ की पहली डेट के सामने आने वाली थी वो.

प्रीति कुछ देर वही खड़ी रही, तभी प्लेटफॉर्म पर गाड़ी आ गई और सभी यात्री उसपर चढ़ गए, अब वो अकेली थी वहां

और तभी उसे दूर से कोई अपनी तरफ आता हुआ दिखाइ दिया,

और जब वो शख्स करीब आया तो प्रीति को समझते देर नहीं लगी कि वही लक्की है,

और जैसे की अपनी अपनी प्रोफाइल में लिखा था 42 साल, वो गलत था,

वो करीब 48 साल का था, लगभाग सभी बाल सफ़ेद थे उसके,

घनी मूंछे थी, कद काठी से काफी लंबा चौड़ा था और उसने कोई यूनिफार्म पहनी हुई थी

प्रीति को समझने देर नहीं लगी कि वो रेलवे प्लेटफॉर्म पर काम करने वाला सफाई कर्मचारी है

लक्की ने उसके चेहरे पर आए भाव पढ़ लिए और बोला: “सॉरी मैडम जी….आप सोच रही होंगी कि मैं थोड़ा बढ़ा हूं आपसे …सफाई वाला हूँ …भला आपकी बरबरी कैसे….पर मैडम जी, मुझे गलत मत समझिए..मैं भी आपकी तरह अपनी जिंदगी में अकेला हूं, मुझे भी कोई साथी चाहिए था, मेरे एक दोस्त ने मुझे मोबाइल पर इस ऐप के बारे में बताया था, पहले मैंने अपनी असली उम्र ही डाली थी पर कोई रिप्लाई ही नहीं आ रहा था, फिर उसके कहने पर इसे कम लिखा मैंने.. बाकी आपके ऊपर है, देख लो”

भले ही पहला इम्प्रेशन सही नहीं था उसका,

पर उसकी बात करने का तरीका, गहरी और रोबिली आवाज से वो काफी प्रभावित हुई...

उसके हाव भाव देखकर वो भी समझ गया कि प्रीति मान गई है.

लक्की : "आइये ना, उस तरफ़ बैठते हैं..."

प्रीति ना चाहते हुए भी उसके साथ चल दी,

प्लेटफॉर्म के दूसरी तरफ सर्विस लाइन की पटरी थी, जिसपर 2 एसी कोच खड़े थे, शायद किसी रिपेयरिंग के लिए आए थे

लक्की ने जेब से एक चाबी निकाली और ट्रेन कोच का दरवाजा खोल दिया, वो अंदर जाने से कतरा रही थी तो लक्की बोला: "घबराओ नहीं, हम बिलकुल सेफ हैं यहां, मैंने अंदर चाय पानी का इंतजार भी कर रखा है.."

प्रीति उसका हाथ पकड़कर ऊपर चढ़ गई,

लक्की ने दरवाजा बंद किया तो घुप्प अंधेरा छा गया वहां , जब लाइट ऑन की तब जाकर उसकी जान में जान आई...

ये स्थिति बिल्कुल जवानी के दिनों में अपने बॉयफ्रेंड से मिलने वाले रोमांस जैसी थी,

कॉलेज के दिनों में वो कई बार अपने बॉयफ्रेंड के साथ होटल रूम में गई थी,

रूम में प्रवेश करने तक जो डर, रोमांस दिल में रहता है, ठीक वैसा ही उसे आज महसूस हुआ था और जब रूम में आ जाती थी तो वो डर गायब सा हो जाता था, जैसे अब हो चुका था ।

वो फर्स्ट क्लास कोच थी,

लकी उसे लेकर एक केबिन में आ गया जहां पहले से ही एक कैटल में चाय और कुछ खाने का समान रखा था..

दोनो ने चाय पी, और एक दूसरे के बारे में पूछने लगे...

दोनो को पता था की जो भी जानकरी वो दे रहे हैं वो गलत है पर इसके लिए किसी ने भी कोई काउंटर सवाल नहीं किया

जब चाय खत्म हुई तो दोनों के बीच एक अजीब सी खामोशी छा गई...

हालांकि वो इंसान उसके अनुरूप नहीं निकला था पर बेंगान से तो अच्छा था, जिसे ले लेकर वो तंग आ चुकी थी और शायद इसलिए उसके आने से पहले ही उसने निश्चय कर लिया था कि जैसा भी आदमी मिले, मोटा, काला, बूड़ा...कोई भी...उसका लंड लेकर रहेगी।
 
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