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चैप्टर १०८०
नेहा बुआ अपने कमरे में जाकर रो रही थी.
मैं कोमल और कविता को लेकर कोमल के कमरे में चला गया.
कोमल और कविता कमरे में जाते मेरे गैल लग कर रोने लागी.
मैं उनको चुप करने की पूरी कोशिश कर रहा था पर वो चुप होने का नाम नहीं ले रही थी.
ऐसे रोते रहने से उनकी सेहत ख़राब हो सकती थी.
ऐसे में मुझे उनको जल्द से जल्द शांत करके खाना खिलाना था और उनका रोना बंद करके सुलाना था.
कोमल- अवी, माँ को क्या हो रहा है ?
अवी-कुछ नही, वो अपना घुस्सा निकालना चाहती है.
कोमल-तुम ने क्या किया?
अवी-तुम्हे लगता है में ने कुछ किया होगा.
कोमल-नही, तुम कुछ नहीं कर सकते,
कविता-भैया,पापा हमें छोड़ कर चले गये
अवी-किसने कहा, में तो यही हु.
कविता-पापा चले गये
अवी-कहा गये,यहि तो है,
कोमल-कविता मत रो
कविता-पापा मुझसे मिले बिना चले गये
अवी-तुम्हे पता है अंकल ने मुझे क्या कहा था.
कोमल-क्या कहा था पापा ने
अवी-यही की मेरी कोमल और कविता रोते हुए अच्छी नहीं लगती, मुझे कहा की उनको हमेशा हसते हुये रखना
कविता-और क्या कहा पापा ने?
अवी-और कहा की,मैं नहीं बताने वाला
कविता-भैया,क्या कहा पापा ने?
अवी-तुम तो रो रही हो,
कविता-बताईयेना पापा ने क्या कहा था
अवी-मैं नहीं बताने वाला.अंकल ने कहा था की कविता और कोमल रोयेंगी तो उनको कुछ मत बताना
कोमल-मैं नहीं रो रही, क्या कहा पापा ने.
अवी-तुम्हारे आँखों से पाणी निकल रहा है और तुम कहति हो रो नहीं रही हो
कविता-क्या कहा मेरे बारेमे
अवी-तुम रोओगी तो में कैसे बता सकता हु. अंकल ने मना किया था. कहा की कोमल और कविता जब तक रोना बंद नहीं करेंगी उनको बताना मत
कोमल-मैं नहीं रो रही. कहो पापा ने क्या कहा था.
अवी-तुम फिर रो रही हो, और खाना भी नहीं खाया
कविता-मैं नहीं रोउंगी बताव ना भैया
अवी-अंकल ने कहा की कविता बिना खाना खाये सोती है तो उनको अच्छा नहीं लगता
कविता फिर से रोने लगी
कविता-पापा ने ऐसा कहा
अवी-हॉ,
कोमल-और क्या कहा
अवी-कहा की कविता बुरी है
मेरी बात सुनते कविता जोर जोर से रोने लगी
कविता-पापा मुझे बुरी नहीं कह सकते
अवी-वो तो में ने कहा है
मेरी बात सुनते कोमल ने मेरे चेस्ट पे मुक्के मारे .कविता को रुलाने के लिए
कविता मेरी बात सुनकर फिर से रोने लगी.
कविता-मैं बुरी नहीं हु
अवी-तुम बुरी हो
कोमल-रोते हुये. ऐसा मत कहो
अवी-क्यों ना कहु,उसके बिना खाये सोने से अंकल को क्या अच्छा लग रहा होगा.
कविता मुझसे दूर हो गयी.
कविता ने अपने आँसु पोछ लिए और कमरे से बाहर जाने लगी.
कोमल-कविता रुको
अवी-जाने दो उसे,मैं अंकल ने दी हुए चिज़ उसे नहीं दूँगा.
कविता गेट के पास रुक गयी. और पलट कर मेरी तरफ देखा.
कविता-मैं खाना खाने जा रही हु
अवी-ये तो अच्छी बात है. पर अंकल ने तुम्हारे लिए क्या लाया था पता है
कोमल-पापा ने क्या लाया था
अवी-मुझे उनके पॉकेट में क्या मिला था पता है
कविता-क्या मिला था.
कोमल-पापा ने क्या लया था हमारे लिए
मैं ने अपने पॉकेट से २ चॉकलेट निकाल ली.
अवी-उनके पॉकेट में मुझे चॉकलेट मिली थी.
मेरे हाथ में चॉकलेट देखकर कोमल और कविता अपने पापा को याद करके रोने लगी.
अवी-तुम को रोना है तो रो लो,मैं तो चॉकलेट खाऊंगा. अंकल की चॉकलेट है
मेरे ऐसा कहते ही कविता भाग कर मेरे पास आयी.
कोमल और कविता ने मेरे हाथ से चॉकलेट ले ली.
दोनो चॉकलेट को देख कर अपने पापा के प्यार को याद करके रोने लगी.
अवी-तुम फिर रोने लगी. दो मुझे चॉकलेट वापस
कविता ने चॉकलेट को ऐसे छुपाया की जैसे उसकी जान किसी ने मांग ली हो और वो मुझसे छुपाना चाहती हो
मैं कोमल की तरफ देखने लगा तो कोमल मुझसे दूर चलि गयी.
कोमल और कविता बस चॉकलेट को देखती रही. पर चॉकलेट को खाना शुरू नहीं किया.
मैं ने दोनों को वैसे ही रहने दिया और किचन में जाकर एक प्लेट में खाना लेकर आ गया.
दोनो अभी तक अपनी अपनी जगा पर खड़ी होकर चॉकलेट को देख कर रो रही थी.
मैं ने कविता और कोमल को बेड पर बैठा दिया.
दोनो के हाथ में चॉकलेट थी. वो अपने पापा की चॉकलेट को छोडना नहीं चाहति थी.
पर दोनों का खाना खाना जरुरी था.
मैं ने एक निवाला उठा कर कविता के मुह के पास ले गया.
अवी-कविता खाना खा लो, वरना अंकल को बुरा लगेगा अगर तुम ने खाना नहीं खाया तो
कविता ने मेरी तरफ देखा और मेरे गले लग कर रोने लगी.
मैं ने खाना बाजु में रखा और उसे चुप करने लगा.
कविता थोड़ी देर वैसे ही रोती रही फिर मेरे हाथ से खाना खाने लगी.
कविता ने निवाला खा लिया. मैंने दुसरा निवाला कोमल के पास ले गया.
अवी-कोमल थोड़ा सा खा लो, अपने पापा के लिये
कोमल ने रोते हुए अपना मुह खोल दिया. निवाले के साथ कोमल ने अपने आँसु भी पि लिये
मैं दोनों को एक एक निवाला खिलाता गया.
कोमल और कविता के हलक से बड़ी मुश्किल से निवाला निचे उतार रहा था.
मेरे कहने पे कोमल और कविता ने थोड़ा थोड़ा खाना खा लिया.
मैं ने उनको ज्यादा फोर्स नहीं किया.
जितना वो खा सकती थी उतना खिला दिया
दोनो अभी तक चॉकलेट को अपने हाथों में रखे हुए धीरे धीरे रो रही थी.
थोड़ी देर बाद कोमल उठ कर अल्मारी के पास गयी और चॉकलेट को संभाल कर रख रही थी.
अवी-कोमल ये क्या कर रही हो ?
कोमल-पापा की चॉकलेट
अवी-अंकल ने वो खाने के लिये लायी थी. तुम दोनों को चॉकलेट पसंद है ना इस लिए लायी थी
कोमल-वो पापा की आखरी चॉकलेट है.
अवी-तो क्या अंकल की चॉकलेट को न खाकर तुम ठीक कर रही हो. अंकल ने इतने प्यार से लायी थी और तुम हो की खाने के बजाय उसको संभल के रख रही हो
कविता-ये पापा की चॉकलेट है
कोमल-ये उनकी याद है.
अवी-क्या क्या संभल कर रखोगी. अंकल को कभी अच्छा नहीं लगेंगा की तुम उनकी चॉकलेट खाने के बजाय ऐसे रख रही हो,अंकल के लिए चॉकलेट खा लो, उनको अच्छा लगेगा.
कोमल ने चॉकलेट का रेफर खोल दिया.
चॉकलेट पिगल गयी थी फिर भी कोमल और कविता ने अपने पापा की लायी हुयी चॉकलेट खानी शुरू की.
दोनो के आँसु चॉकलेट पे गिर रहे थे,कोमल और कविता चॉकलेट के साथ अपने आँसु पि रही थी.
दोनो ने चॉकलेट खा ली .और रेफर को अल्मारी में रख दिया.
कोमल और कविता ने ऐसे ही किया.चॉकलेट का रेफर संभल कर रख दिया.
ओर दोनों मेरे गले लगा कर पापा की चॉकलेट देणे के लिए थैंक्स कहने लगी.
मैं दोनों को अपने साथ बेड पर ले गया.
एक तरफ कोमल और दूसरी तरफ कविता मेरे गले लग कर रोते हुये सो गयी.
ये रात उन दोनों के लिए काफी लम्बी होने वाली थी.
मुझे इसी तरह कोमल और कविता का ध्यान रखना होगा
कोमल और कविता की तरह अगर नेहा बुआ ने भी खाना खा लिया होता तो अच्छा होता.
नेहा बुआ को नीता बुआ ने खाना जरूर खिलाया होगा.
नीता बुआ नेहा बुआ के साथ सो गयी.
नेहा बुआ के साथ कोई तो चाहिये था,नीता बुआ से अच्छा नेहा को कौन समझ सकता था.
ईसी लिए नीता बुआ नेहा बुआ के साथ रुक गयी
नेहा बुआ अपने कमरे में जाकर रो रही थी.
मैं कोमल और कविता को लेकर कोमल के कमरे में चला गया.
कोमल और कविता कमरे में जाते मेरे गैल लग कर रोने लागी.
मैं उनको चुप करने की पूरी कोशिश कर रहा था पर वो चुप होने का नाम नहीं ले रही थी.
ऐसे रोते रहने से उनकी सेहत ख़राब हो सकती थी.
ऐसे में मुझे उनको जल्द से जल्द शांत करके खाना खिलाना था और उनका रोना बंद करके सुलाना था.
कोमल- अवी, माँ को क्या हो रहा है ?
अवी-कुछ नही, वो अपना घुस्सा निकालना चाहती है.
कोमल-तुम ने क्या किया?
अवी-तुम्हे लगता है में ने कुछ किया होगा.
कोमल-नही, तुम कुछ नहीं कर सकते,
कविता-भैया,पापा हमें छोड़ कर चले गये
अवी-किसने कहा, में तो यही हु.
कविता-पापा चले गये
अवी-कहा गये,यहि तो है,
कोमल-कविता मत रो
कविता-पापा मुझसे मिले बिना चले गये
अवी-तुम्हे पता है अंकल ने मुझे क्या कहा था.
कोमल-क्या कहा था पापा ने
अवी-यही की मेरी कोमल और कविता रोते हुए अच्छी नहीं लगती, मुझे कहा की उनको हमेशा हसते हुये रखना
कविता-और क्या कहा पापा ने?
अवी-और कहा की,मैं नहीं बताने वाला
कविता-भैया,क्या कहा पापा ने?
अवी-तुम तो रो रही हो,
कविता-बताईयेना पापा ने क्या कहा था
अवी-मैं नहीं बताने वाला.अंकल ने कहा था की कविता और कोमल रोयेंगी तो उनको कुछ मत बताना
कोमल-मैं नहीं रो रही, क्या कहा पापा ने.
अवी-तुम्हारे आँखों से पाणी निकल रहा है और तुम कहति हो रो नहीं रही हो
कविता-क्या कहा मेरे बारेमे
अवी-तुम रोओगी तो में कैसे बता सकता हु. अंकल ने मना किया था. कहा की कोमल और कविता जब तक रोना बंद नहीं करेंगी उनको बताना मत
कोमल-मैं नहीं रो रही. कहो पापा ने क्या कहा था.
अवी-तुम फिर रो रही हो, और खाना भी नहीं खाया
कविता-मैं नहीं रोउंगी बताव ना भैया
अवी-अंकल ने कहा की कविता बिना खाना खाये सोती है तो उनको अच्छा नहीं लगता
कविता फिर से रोने लगी
कविता-पापा ने ऐसा कहा
अवी-हॉ,
कोमल-और क्या कहा
अवी-कहा की कविता बुरी है
मेरी बात सुनते कविता जोर जोर से रोने लगी
कविता-पापा मुझे बुरी नहीं कह सकते
अवी-वो तो में ने कहा है
मेरी बात सुनते कोमल ने मेरे चेस्ट पे मुक्के मारे .कविता को रुलाने के लिए
कविता मेरी बात सुनकर फिर से रोने लगी.
कविता-मैं बुरी नहीं हु
अवी-तुम बुरी हो
कोमल-रोते हुये. ऐसा मत कहो
अवी-क्यों ना कहु,उसके बिना खाये सोने से अंकल को क्या अच्छा लग रहा होगा.
कविता मुझसे दूर हो गयी.
कविता ने अपने आँसु पोछ लिए और कमरे से बाहर जाने लगी.
कोमल-कविता रुको
अवी-जाने दो उसे,मैं अंकल ने दी हुए चिज़ उसे नहीं दूँगा.
कविता गेट के पास रुक गयी. और पलट कर मेरी तरफ देखा.
कविता-मैं खाना खाने जा रही हु
अवी-ये तो अच्छी बात है. पर अंकल ने तुम्हारे लिए क्या लाया था पता है
कोमल-पापा ने क्या लाया था
अवी-मुझे उनके पॉकेट में क्या मिला था पता है
कविता-क्या मिला था.
कोमल-पापा ने क्या लया था हमारे लिए
मैं ने अपने पॉकेट से २ चॉकलेट निकाल ली.
अवी-उनके पॉकेट में मुझे चॉकलेट मिली थी.
मेरे हाथ में चॉकलेट देखकर कोमल और कविता अपने पापा को याद करके रोने लगी.
अवी-तुम को रोना है तो रो लो,मैं तो चॉकलेट खाऊंगा. अंकल की चॉकलेट है
मेरे ऐसा कहते ही कविता भाग कर मेरे पास आयी.
कोमल और कविता ने मेरे हाथ से चॉकलेट ले ली.
दोनो चॉकलेट को देख कर अपने पापा के प्यार को याद करके रोने लगी.
अवी-तुम फिर रोने लगी. दो मुझे चॉकलेट वापस
कविता ने चॉकलेट को ऐसे छुपाया की जैसे उसकी जान किसी ने मांग ली हो और वो मुझसे छुपाना चाहती हो
मैं कोमल की तरफ देखने लगा तो कोमल मुझसे दूर चलि गयी.
कोमल और कविता बस चॉकलेट को देखती रही. पर चॉकलेट को खाना शुरू नहीं किया.
मैं ने दोनों को वैसे ही रहने दिया और किचन में जाकर एक प्लेट में खाना लेकर आ गया.
दोनो अभी तक अपनी अपनी जगा पर खड़ी होकर चॉकलेट को देख कर रो रही थी.
मैं ने कविता और कोमल को बेड पर बैठा दिया.
दोनो के हाथ में चॉकलेट थी. वो अपने पापा की चॉकलेट को छोडना नहीं चाहति थी.
पर दोनों का खाना खाना जरुरी था.
मैं ने एक निवाला उठा कर कविता के मुह के पास ले गया.
अवी-कविता खाना खा लो, वरना अंकल को बुरा लगेगा अगर तुम ने खाना नहीं खाया तो
कविता ने मेरी तरफ देखा और मेरे गले लग कर रोने लगी.
मैं ने खाना बाजु में रखा और उसे चुप करने लगा.
कविता थोड़ी देर वैसे ही रोती रही फिर मेरे हाथ से खाना खाने लगी.
कविता ने निवाला खा लिया. मैंने दुसरा निवाला कोमल के पास ले गया.
अवी-कोमल थोड़ा सा खा लो, अपने पापा के लिये
कोमल ने रोते हुए अपना मुह खोल दिया. निवाले के साथ कोमल ने अपने आँसु भी पि लिये
मैं दोनों को एक एक निवाला खिलाता गया.
कोमल और कविता के हलक से बड़ी मुश्किल से निवाला निचे उतार रहा था.
मेरे कहने पे कोमल और कविता ने थोड़ा थोड़ा खाना खा लिया.
मैं ने उनको ज्यादा फोर्स नहीं किया.
जितना वो खा सकती थी उतना खिला दिया
दोनो अभी तक चॉकलेट को अपने हाथों में रखे हुए धीरे धीरे रो रही थी.
थोड़ी देर बाद कोमल उठ कर अल्मारी के पास गयी और चॉकलेट को संभाल कर रख रही थी.
अवी-कोमल ये क्या कर रही हो ?
कोमल-पापा की चॉकलेट
अवी-अंकल ने वो खाने के लिये लायी थी. तुम दोनों को चॉकलेट पसंद है ना इस लिए लायी थी
कोमल-वो पापा की आखरी चॉकलेट है.
अवी-तो क्या अंकल की चॉकलेट को न खाकर तुम ठीक कर रही हो. अंकल ने इतने प्यार से लायी थी और तुम हो की खाने के बजाय उसको संभल के रख रही हो
कविता-ये पापा की चॉकलेट है
कोमल-ये उनकी याद है.
अवी-क्या क्या संभल कर रखोगी. अंकल को कभी अच्छा नहीं लगेंगा की तुम उनकी चॉकलेट खाने के बजाय ऐसे रख रही हो,अंकल के लिए चॉकलेट खा लो, उनको अच्छा लगेगा.
कोमल ने चॉकलेट का रेफर खोल दिया.
चॉकलेट पिगल गयी थी फिर भी कोमल और कविता ने अपने पापा की लायी हुयी चॉकलेट खानी शुरू की.
दोनो के आँसु चॉकलेट पे गिर रहे थे,कोमल और कविता चॉकलेट के साथ अपने आँसु पि रही थी.
दोनो ने चॉकलेट खा ली .और रेफर को अल्मारी में रख दिया.
कोमल और कविता ने ऐसे ही किया.चॉकलेट का रेफर संभल कर रख दिया.
ओर दोनों मेरे गले लगा कर पापा की चॉकलेट देणे के लिए थैंक्स कहने लगी.
मैं दोनों को अपने साथ बेड पर ले गया.
एक तरफ कोमल और दूसरी तरफ कविता मेरे गले लग कर रोते हुये सो गयी.
ये रात उन दोनों के लिए काफी लम्बी होने वाली थी.
मुझे इसी तरह कोमल और कविता का ध्यान रखना होगा
कोमल और कविता की तरह अगर नेहा बुआ ने भी खाना खा लिया होता तो अच्छा होता.
नेहा बुआ को नीता बुआ ने खाना जरूर खिलाया होगा.
नीता बुआ नेहा बुआ के साथ सो गयी.
नेहा बुआ के साथ कोई तो चाहिये था,नीता बुआ से अच्छा नेहा को कौन समझ सकता था.
ईसी लिए नीता बुआ नेहा बुआ के साथ रुक गयी