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माँ कैसे चुदा सकती हूँ मैं
मेरी अम्मी फोन पर बोली- अरी फिज़ा कहाँ है तू? बहनचोद तेरा कहीं ठिकाना नहीं रहता। पता नहीं कहाँ-कहाँ तू घूमा करती है। कभी बताकर नहीं जाती है तू…”
मैंने जबाब दिया- अरे चिंता न करो अम्मी, मैं अभी आती हूँ।
थोड़ी देर बाद जब मैं घर पहुँची तो देखा की अम्मी एक अंकल के साथ बैठी हुई हैं। मुझे देखते ही बोली- “माँ चुदाकर आ रही है तू अपनी, बहन की लौड़ी, फिज़ा?”
मैंने जबाब दिया- “माँ कैसे चुदा सकती हूँ मैं। माँ तो बुर चोदी यहाँ बैठी हुई है। मैं तो पार्लर गई थी अपनी झांटें बनवाने। बनाने वाला लड़का थोड़ी देर बाद आया इसलिए मुझे कुछ वक्त लग गया बस…”
अम्मी- “तो क्या तेरी झांटें वहाँ लड़के बनाते है?”
मैं- “मेरी क्या सब लड़कियों की झांटें लड़के बनाते हैं, और नंगे-नंगे बनांते है बहनचोद…”
अम्मी- “तो क्या तू उसका लण्ड पकड़कर झांटें बनवाती है?”
मैं- “और नहीं तो क्या? मैं क्या सभी लड़कियां लण्ड पकड़कर झांटें बनवाती हैं…”
अम्मी- “तो तूने मुझे क्यों नहीं बताया अभी तक माँ की लौड़ी? मैं भी लण्ड पकड़कर झांटें बनवा लेती…”
मैं- “तो अब से जाना शुरू कर दो न अम्मी…”
अम्मी- “किस साईज के लण्ड होते हैं उनके?”
मैं- “सभी तरह के लण्ड होते हैं, अम्मी। लम्बे, मोटे, गोरे, काले, सीधे, टेढ़े, देशी विदेशी आदि। मुझे तो जो भी लण्ड मिलता है मैं उसे पकड़ लेती हूँ और मजे से बनवा लेती हूँ झांटें…”
अम्मी- “तो क्या मन पसंद भी लण्ड मिल जाते है वहाँ?”
मैं- “हाँ मिल जाते हैं। इसके लिए तुम्हें पहले से आर्डर देना पड़ता है…”
हम दोनों की बातें अंकल बड़े ध्यान से सुन रहे थे। इतने में अम्मी उसकी लुंगी में हाथ डालकर उसका लौड़ा सहलाने लगी। मैं वहाँ से जाने लगी तो अम्मी ने कहा- “नहीं फिज़ा, जाओ नहीं यहाँ मेरे पास आओ…”
मैं उसके पास चली गई। अम्मी ने लौड़ा बाहर निकाल लिया और लुंगी खोलकर फेंक दी। अंकल का लौड़ा हम दोनों को देखकर और हमारी बातें सुनकर टन्ना गया।
अम्मी मुझे खड़ा लण्ड दिखाते हुए बोली- “क्या वहाँ इस तरह के भी लण्ड मिलते हैं?”
मैंने कहा- “हाँ अम्मी मिलते हैं। बड़े मोटे-मोटे लम्बे तगड़े प्यारे-प्यारे लण्ड मिलते है वहाँ…”
अम्मी- “अच्छा ये बता कि लड़कियां लण्ड पकड़कर करती क्या है वहाँ?”
मैंने जबाब दिया- “कुछ नहीं जब तक झाटें बनवाती है तब तक लण्ड सहलाती रहती हैं। उसे हिलाती डुलाती रहती हैं। चूमा चाटी भी कर लेती हैं, और जब झाटें बन जाती हैं तो लण्ड का मुठ्ठ मारती है और फिर लण्ड पीकर चली आती हैं। सारा वीर्य पी जाती है मादरचोद और लण्ड चाट-चाटकर बिल्कुल साफ कर देती है”…"
अम्मी बोली- “अच्छा फिज़ा, लो तुम अंकल का लण्ड चूसो मैं जरा पड़ोस में होकर आती हूँ…” इस तरह अम्मी मुझे अंकल का लण्ड पकड़ाकर चली गई।
अम्मी के जाने के बाद मैंने लण्ड बड़े गौर से देखा। घुमा-घुमा के देखा। चारों तरफ से देखा। मुझे बड़ा अच्छा लगा लौड़ा। मैंने पूछा- “अंकल आपका नाम क्या है और आप मेरी अम्मी से कब मिले?”
वह बोला- “मेरा नाम है आरिफ और मैं तेरी अम्मी से एक ट्रैन में मिला था। उस डिब्बे में हम दोनों ही थे। बात करते-करते हम दोनों एक दूसरे के नजदीक आ गये। तेरी अम्मी पहले आगे बढ़ी और मेरे लण्ड पर हाथ मारकर कहा अब तो दिखा दो इस भोसड़ी वाले लण्ड को। यह सुनकर मेरा लण्ड टनटना कर खड़ा हो गया। मैं उससे बात करने में और खुल गया। फिर उसने मेरी पैंट उतार दी और नेकर भी नीचे घसीट दी। अब मेरा लण्ड उसकी आँखों के सामने था। मैं उसकी चूचियों पर टूट पड़ा। वह मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी और मैं मस्त होने लगा। स्टेशन आने वाला था इसलिए उसने लण्ड का मुठ्ठ मार दिया और मेरा झड़ता हुआ लण्ड मस्ती से पिया। मुझे खूब मजा आया। जाते-जाते उसने मुझे अपना पता दिया और मैं यहाँ आ गया…”
मैं अंकल की कहानी उसका लण्ड चूसते-चूसते सुन रही थी। तब तक मेरी चूत बहुत गरम हो गई। मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा था, मेरी चूत बुरी तरह जलने लगी। मैं मन ही मन गाली बकने लगी- “कहाँ मर गई मेरी माँ बहनचोद। पता नहीं वहाँ किससे चुदाने लगी भोसड़ी वाली मेरी माँ? बुर चोदी पता नहीं कितना चुदवाती है? उसका इंतजार करते-करते मेरी गाण्ड फटी जा रही है। अब मैं और नहीं रुक सकती। तू हरामजादी आ चाहे न आ मैं जा रही हूँ अंकल से चुदवाने…” ऐसा विचार मन में आते ही मैंने अपनी टाँगें फैला दी और लण्ड अपनी बुर में घुसा लिया। मैं गचागच चुदवाने लगी।
मेरे चुदवाते ही अम्मी बहनचोद टपक पड़ी। मैंने उसे देखा तो हैरान रह गई। वह बिल्कुल नंगी थी और उसके हाथ में एक लण्ड था।
मैंने पूछा- “इतनी देर से बिटिया की बुर चुदवा रही थी तू अपनी…”
अम्मी बोली- “बिटिया की बुर तो बहनचोद यहाँ चुद रही है। मैं तो वहाँ से एक मस्त काला लण्ड पीकर आ रही हूँ। और एक लण्ड तेरे लिए लेकर आई हूँ। अब तो पहले तू अंकल से चुदवा ले तब तक मैं इससे चुदवाती हूँ। दूसरी पारी में तू इससे चुदवाना और मैं तेरे अंकल से चुदवाऊँगी, क्योंकी मैं उस दिन ट्रेन में चुदवा नहीं पायी थी। केवल लण्ड सड़का ही मार पायी थी…” ऐसा कहकर अम्मी भी अपना भोसड़ा खोला और भकाभक चुदाने लगी।
मैं अपनी माँ को चुदवाते हुए देख रही थी और वह मुझे चुदवाते हुए देख रही थी। अम्मी ने ही मुझे जवानी का मजा लेना सिखाया था। अगर अम्मी ने मुझे पहला लण्ड मेरे हाथ में रखकर न पकड़ाया होता तो आज मैं जवानी का इतना मजा न ले पाती। मैं अपनी माँ की शुक्रगुजार हूँ, जिसने मुझे लण्ड पकड़ना, लण्ड हिलाना, लण्ड चाटना चूसना और लण्ड पीना सब सिखाया। आखीर में सिखाया कि कैसे चुदवाई जाती है बुर, और कैसे मराई जाती है गाण्ड? आज मैं चुदाने में अव्वल हूँ तो अपनी मम्मी की वजह से।
एक दिन मैं जब कालेज से आई तो देखा कि अम्मी फोन पर किसी से बातें कर रही है। अम्मी के मुँह से गालियां दनादन निकल रही थीं, कभी गुस्से में कभी मजाक में। फिर बोली- “हाय मेरी जान अगर तुझे अपनी बेटी चुदवानी है तो उसे मेरी बेटी के पास भेज दो। मेरी बेटी उसे बुर चुदाने में पूरी तरह ट्रेन्ड कर देगी। मुझे अपनी बेटी पर नाज है कि वह अब चूत चुदाने में एक्सपर्ट हो गई है। लण्ड कितना ही बड़ा क्यों न हो मेरी बेटी उसे अपनी चूत में डालकर भून डालती है, और भूनने के बाद ही निकालती है अपनी बुर से लण्ड। वह तो अब निग्रो लण्ड, अरबी लण्ड, अफ्रीकन लण्ड, अमेरिकन लण्ड आदि से आसानी से चुदवा लेती है। लण्ड चूसने में तो उसका कोई जबाब नहीं। तुमको अपनी बेटी चुदवानी है तो उसे मेरी बेटी के पास भेज दो। वह कुछ बड़े और तगड़े लण्ड वाले मर्दों से चुदवा देगी तेरी बेटी की बुर…”
मैं अपनी तारीफ सुनकर फूली नहीं समा रही थी। अचानक डोर बेल बजी तो मैंने दरवाजा खोला। मेरे सामने खड़ी थीं एक खूबसूरत आंटी और उसके साथ एक खूबसूरत लड़की।
वह बोली- “मैडम असमा (मेरी माँ का नाम) घर पर हैं? मैं उनसे मिलना चाहती हूँ…”
मैं थोड़ा समझ तो गई। मैंने उन्हें कमरे में बैठाया और अम्मी को आवाज लगाई।
अम्मी आ गई, और बोली- “अरे वाह आ गई तुम मिसेज वहीदा और ये तेरी बेटी है न वहीदा?”
आंटी बोली- “हाँ यही है मेरी हरामजादी बेटी मिस सायना। इसे चुदाने का बड़ा शौक है। और इसे अपनी माँ चुदाने का भी बड़ा शौक है। लेकिन आज तक कोई मस्त चोदने वाला लौड़ा नहीं मिला इसे। इसके लिए कुछ करो न यार असमा। मैं चाहती हूँ कि मेरी बेटी दो-तीन लण्ड से एक साथ चुदवाये…”
अम्मी बोली- “अरे फिज़ा जरा मेरे पास आ…”
मैं अम्मी के पास जाकर बैठ गई तो अम्मी बोली- “देखो वहीदा यही है मेरी चुदक्कड़ बेटी फिज़ा। इसे तो चुदाने का जबर्दस्त शौक है। कोई ऐसा लण्ड नहीं है जिससे इसने चुदवाया न हो। सभी तरह के लण्ड अपनी चूत में पेल चुकी है मेरी बेटी। और मेरे भोसड़ा में भी पेला है इसने सारे लण्ड। मेरी बेटी जवानी का पूरा मजा ले रही है। तुम अपनी बेटी को मेरी बेटी के पास भेज दो बस…”
आंटी बोली- “यही तो मैं भी चाहती हूँ। मेरी बेटी भी जवानी का पूरा मजा ले…”
तब तक उसकी बेटी सायना बोली- “और मैं चाहती हूँ आंटी कि मैं भी सारे लण्ड अपनी माँ के भोसड़े में भी पेलूँ। मुझे अपनी माँ चुदाना बड़ा अच्छा लगता है…”
मैंने कहा- अब तू चिंता न कर मैं तेरी बुर भी चुदवाऊँगी और तेरी माँ का भोसड़ा भी।
दूसरे दिन सायना मेरे पास आ गई। मैं शाम को उसे लेकर एक क्लब में चली गई। क्लब में घुसते ही उसने जो नजारा देखा तो वह बड़ी हैरान हो गई। उसने कहा- “यार इतना मस्त नजारा तो मैं ख्याब में भी नहीं सोच सकती…”
सायना ने देखा कि वहाँ कई लोग लड़के लड़कियां मर्द औरतें सबके सब नंगी नंगी घूम रही है। सबके चेहरे खिले हुए हैं। सब मस्ती से शराब पी रही हैं। कोई लण्ड पी रही है, कोई लण्ड हिला रही है, कोई लण्ड का चुम्मा ले रही है, कोई लण्ड चाट रही है, कोई चुदवा रही है, कोई गाण्ड मरवा रही है, कोई चूची के बीच लण्ड पेल रही है, कोई लण्ड सहला रही है, कोई मुठ्ठ मार रही है, कोई लण्ड पर बैठी हुई है, कोई किसी मर्द की गोद में बैठी है, कोई चूची नुचवा रही है। लण्ड भी बहनचोद कई तरह के दिख रहे हैं, लम्बे लण्ड, चौड़े लण्ड, मोटे लण्ड, गोरे काले भूरे लण्ड, सीधे लण्ड, टेढ़े लण्ड, कटे लण्ड, देशी और विदेशी लण्ड। सायना की चूत तो एकदम से गरमा उठी। आग निकलने लगी उसकी बुर से। ललचा गई वह इतने बढ़िया-बढ़िया लण्ड देखकर।
मैं और सायना दोनों एक सोफे पर बैठ गई। बस दो मिनट में दो काले नंगे मर्द हमारे सामने आ गये। उन दोनों के लण्ड टनटना रहे थे। इधर हम दोनों भी नंगी थी। एक मेरे बगल में बैठ गया और दूसरा सायना के बगल में। वे हमारी चूचियां सहलाने लगे और हमारे हाथ उनके लण्ड पर चले गये।
जैसे ही सायना ने लण्ड पकड़ा तो वह टन्नाकर और बड़ा हो गया, वो बोली- “हाय अल्ला, ये तो बहनचोद 10” इंच का होगा लण्ड। मैंने तो पहले कभी इतना बड़ा लण्ड देखा ही नहीं। बल्कि मैं तो हैरान हूँ कि क्या लण्ड इतने बड़े-बड़े भी होते हैं फिज़ा?”
मैंने कहा- अरी मेरी माँ की लौड़ी तू देखती जा बस। लण्ड तो इससे भी बड़े-बड़े होते हैं।
सायना बोली- “यार इतना बड़ा लण्ड अगर मेरी माँ के भोसड़े में घुसे तो कितना मजा आये। यहाँ अगर मेरी माँ आई होती तो मुझे अपनी माँ चुदाने में बड़ा मजा आता…”
मैंने कहा- अरे आज तू मादरचोद खूब जम के चुदवा ले। मैं किसी दिन तेरी माँ को भी इन लोगों से जरूर चुदवाऊँगी। मुझे तेरी माँ के भोसड़ा का ख्याल है।
बस सायना लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी। इधर मैं भी लण्ड से खेलने लगी। इतने में पीछे से किसी ने सायना के कंधे पर एक लण्ड रख दिया। उसने मुँह घुमाया तो लण्ड का सुपाड़ा उसके मुँह के सामने आ गया। वह एक गोरा लण्ड था। सायना अब दो-दो लण्ड एक साथ चूसने लगी।
इधर मेरे सामने भी एक गोरा लण्ड दौड़कर आया और मेरे मुँह में घुस गया। हम दोनों दो-दो लण्ड का मजा एक साथ लेने लगी।
सायना बड़ी देर तक रुक नहीं पायी और लण्ड अपनी चूत में पेल लिया। लण्ड घुसते ही वह चिल्ला पड़ी- “उई माँ फाड़ डाला इसने मेरी चूत… बड़ा मोटा है इसका मादरचोद लण्ड। इतना लम्बा है कि मेरे मुँह से निकल आएगा लण्ड… हाय रे मैं तो इससे गाण्ड नहीं मरवाऊँगी। मेरी गाण्ड तो लण्ड देखकर पहले ही फट चुकी है… मेरी चूत में आज पहली बार इतना बड़ा लौड़ा घुसा है। मैंने कभी इतने बड़े लण्ड से नहीं चुदवाया। ये तो मेरी माँ के भोसड़ा के काबिल है लण्ड। मुझे तो लगता है कि उसका भी भोसड़ा फट जायेगा पर मेरी माँ बुर चोदी बड़ा मजा करेगी…”
इधर मैंने मजे से चुदाना शुरू कर दिया क्योंकी मैं तो जब तब यहाँ आकर चुदवाती रहती हूँ। सायना ने फिर गोरे लण्ड से चुदाया। उसके बाद हम दोनों ने लण्ड आपस में बदल लिया। अदला-बदली के बाद मजा और आने लगा। मैंने अपना मुँह सायना की गाण्ड की तरफ रखा और सायना ने मेरी गाण्ड की तरफ। एक लण्ड मेरी बुर में दूसरा मेरे मुँह में। यही हाल सायना का भी था। भकर-भकर धच्च-धच्च फच्च-फच्च गच्च-गच्च छप्प-छप्प की आवाजें हमारी चूत से निकल रही थी। चारों तरफ से लोग हमारी चुदाई देख भी रहे थे। मुझे तो सबके सामने चुदाने में खूब मजा आ रहा था।
सायना बोली- “हाँ यार, आज सबके साथ मिलकर चुदाने में खूब मजा आ रहा है…”
इस तरह हम दोनों ने रात भर चुदवाया। फिर दिन में भी चुदवाया और शाम को घूमते फिरते घर पहुँची। मेरे साथ सायना भी थी। हम दोनों अम्मी के कमरे में घुस गई। हमने देखा की मेरी अम्मी और सायना की अम्मी दोनों आमने सामने लेटी हुई चुदवा रही हैं।
सायना जोर से बोल पड़ी- “अरी फिज़ा यहाँ तो मेरी माँ का भोसड़ा चुद रहा है यार। और चोदने वाले वही हैं भोसड़ी के जो मुझे कल क्लब में सबसे पहले चोदने आये थे। यार मुझे तो मजा आ गया। चलो वहाँ नहीं तो अपनी माँ यहां चुदवा लेती हूँ…”
वह फिर बोली- “अम्मी तुम्हें मजा आ रहा है न? इन्हीं दोनों ने कल मुझे पहले चोदा था। इनके लण्ड बहनचोद बड़े तगड़े हैं अम्मी…”
उसकी अम्मी बोली- “तभी तो साले मेरे भोसड़ा में गोता लगा रहे हैं… और उधर देख फिज़ा की अम्मी भी चुदा रही है। दो लण्ड एक साथ घुसकर उसका भोसड़ा चोद रहे हैं…”
सायना बोली- “यार फिज़ा, ये मादरचोद चारों लण्ड यहाँ कैसे आ गये…”
मैंने जबाब दिया- “यार मैंने कल ही चुदाने के बाद अपनी माँ के लिए और तेरी माँ के लिए इन्हें बुक कर लिया था। ये चारों सवेरे ही आ गए थे और तब से ये दोनों हरामजादी चुदवाये चली जा रही हैं…”
मेरी अम्मी बोली- “अरे मेरी भोसड़ी की फिज़ा तूने इतने बढ़िया लण्ड हमारे पास भेजा है की इन्हें अपनी बुर से निकालने का मन ही नहीं करता है। अब तुम दोनों बैठकर अपने सामने चुदाओ अपनी-अपनी माँ…”
समाप्त
मेरी अम्मी फोन पर बोली- अरी फिज़ा कहाँ है तू? बहनचोद तेरा कहीं ठिकाना नहीं रहता। पता नहीं कहाँ-कहाँ तू घूमा करती है। कभी बताकर नहीं जाती है तू…”
मैंने जबाब दिया- अरे चिंता न करो अम्मी, मैं अभी आती हूँ।
थोड़ी देर बाद जब मैं घर पहुँची तो देखा की अम्मी एक अंकल के साथ बैठी हुई हैं। मुझे देखते ही बोली- “माँ चुदाकर आ रही है तू अपनी, बहन की लौड़ी, फिज़ा?”
मैंने जबाब दिया- “माँ कैसे चुदा सकती हूँ मैं। माँ तो बुर चोदी यहाँ बैठी हुई है। मैं तो पार्लर गई थी अपनी झांटें बनवाने। बनाने वाला लड़का थोड़ी देर बाद आया इसलिए मुझे कुछ वक्त लग गया बस…”
अम्मी- “तो क्या तेरी झांटें वहाँ लड़के बनाते है?”
मैं- “मेरी क्या सब लड़कियों की झांटें लड़के बनाते हैं, और नंगे-नंगे बनांते है बहनचोद…”
अम्मी- “तो क्या तू उसका लण्ड पकड़कर झांटें बनवाती है?”
मैं- “और नहीं तो क्या? मैं क्या सभी लड़कियां लण्ड पकड़कर झांटें बनवाती हैं…”
अम्मी- “तो तूने मुझे क्यों नहीं बताया अभी तक माँ की लौड़ी? मैं भी लण्ड पकड़कर झांटें बनवा लेती…”
मैं- “तो अब से जाना शुरू कर दो न अम्मी…”
अम्मी- “किस साईज के लण्ड होते हैं उनके?”
मैं- “सभी तरह के लण्ड होते हैं, अम्मी। लम्बे, मोटे, गोरे, काले, सीधे, टेढ़े, देशी विदेशी आदि। मुझे तो जो भी लण्ड मिलता है मैं उसे पकड़ लेती हूँ और मजे से बनवा लेती हूँ झांटें…”
अम्मी- “तो क्या मन पसंद भी लण्ड मिल जाते है वहाँ?”
मैं- “हाँ मिल जाते हैं। इसके लिए तुम्हें पहले से आर्डर देना पड़ता है…”
हम दोनों की बातें अंकल बड़े ध्यान से सुन रहे थे। इतने में अम्मी उसकी लुंगी में हाथ डालकर उसका लौड़ा सहलाने लगी। मैं वहाँ से जाने लगी तो अम्मी ने कहा- “नहीं फिज़ा, जाओ नहीं यहाँ मेरे पास आओ…”
मैं उसके पास चली गई। अम्मी ने लौड़ा बाहर निकाल लिया और लुंगी खोलकर फेंक दी। अंकल का लौड़ा हम दोनों को देखकर और हमारी बातें सुनकर टन्ना गया।
अम्मी मुझे खड़ा लण्ड दिखाते हुए बोली- “क्या वहाँ इस तरह के भी लण्ड मिलते हैं?”
मैंने कहा- “हाँ अम्मी मिलते हैं। बड़े मोटे-मोटे लम्बे तगड़े प्यारे-प्यारे लण्ड मिलते है वहाँ…”
अम्मी- “अच्छा ये बता कि लड़कियां लण्ड पकड़कर करती क्या है वहाँ?”
मैंने जबाब दिया- “कुछ नहीं जब तक झाटें बनवाती है तब तक लण्ड सहलाती रहती हैं। उसे हिलाती डुलाती रहती हैं। चूमा चाटी भी कर लेती हैं, और जब झाटें बन जाती हैं तो लण्ड का मुठ्ठ मारती है और फिर लण्ड पीकर चली आती हैं। सारा वीर्य पी जाती है मादरचोद और लण्ड चाट-चाटकर बिल्कुल साफ कर देती है”…"
अम्मी बोली- “अच्छा फिज़ा, लो तुम अंकल का लण्ड चूसो मैं जरा पड़ोस में होकर आती हूँ…” इस तरह अम्मी मुझे अंकल का लण्ड पकड़ाकर चली गई।
अम्मी के जाने के बाद मैंने लण्ड बड़े गौर से देखा। घुमा-घुमा के देखा। चारों तरफ से देखा। मुझे बड़ा अच्छा लगा लौड़ा। मैंने पूछा- “अंकल आपका नाम क्या है और आप मेरी अम्मी से कब मिले?”
वह बोला- “मेरा नाम है आरिफ और मैं तेरी अम्मी से एक ट्रैन में मिला था। उस डिब्बे में हम दोनों ही थे। बात करते-करते हम दोनों एक दूसरे के नजदीक आ गये। तेरी अम्मी पहले आगे बढ़ी और मेरे लण्ड पर हाथ मारकर कहा अब तो दिखा दो इस भोसड़ी वाले लण्ड को। यह सुनकर मेरा लण्ड टनटना कर खड़ा हो गया। मैं उससे बात करने में और खुल गया। फिर उसने मेरी पैंट उतार दी और नेकर भी नीचे घसीट दी। अब मेरा लण्ड उसकी आँखों के सामने था। मैं उसकी चूचियों पर टूट पड़ा। वह मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी और मैं मस्त होने लगा। स्टेशन आने वाला था इसलिए उसने लण्ड का मुठ्ठ मार दिया और मेरा झड़ता हुआ लण्ड मस्ती से पिया। मुझे खूब मजा आया। जाते-जाते उसने मुझे अपना पता दिया और मैं यहाँ आ गया…”
मैं अंकल की कहानी उसका लण्ड चूसते-चूसते सुन रही थी। तब तक मेरी चूत बहुत गरम हो गई। मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा था, मेरी चूत बुरी तरह जलने लगी। मैं मन ही मन गाली बकने लगी- “कहाँ मर गई मेरी माँ बहनचोद। पता नहीं वहाँ किससे चुदाने लगी भोसड़ी वाली मेरी माँ? बुर चोदी पता नहीं कितना चुदवाती है? उसका इंतजार करते-करते मेरी गाण्ड फटी जा रही है। अब मैं और नहीं रुक सकती। तू हरामजादी आ चाहे न आ मैं जा रही हूँ अंकल से चुदवाने…” ऐसा विचार मन में आते ही मैंने अपनी टाँगें फैला दी और लण्ड अपनी बुर में घुसा लिया। मैं गचागच चुदवाने लगी।
मेरे चुदवाते ही अम्मी बहनचोद टपक पड़ी। मैंने उसे देखा तो हैरान रह गई। वह बिल्कुल नंगी थी और उसके हाथ में एक लण्ड था।
मैंने पूछा- “इतनी देर से बिटिया की बुर चुदवा रही थी तू अपनी…”
अम्मी बोली- “बिटिया की बुर तो बहनचोद यहाँ चुद रही है। मैं तो वहाँ से एक मस्त काला लण्ड पीकर आ रही हूँ। और एक लण्ड तेरे लिए लेकर आई हूँ। अब तो पहले तू अंकल से चुदवा ले तब तक मैं इससे चुदवाती हूँ। दूसरी पारी में तू इससे चुदवाना और मैं तेरे अंकल से चुदवाऊँगी, क्योंकी मैं उस दिन ट्रेन में चुदवा नहीं पायी थी। केवल लण्ड सड़का ही मार पायी थी…” ऐसा कहकर अम्मी भी अपना भोसड़ा खोला और भकाभक चुदाने लगी।
मैं अपनी माँ को चुदवाते हुए देख रही थी और वह मुझे चुदवाते हुए देख रही थी। अम्मी ने ही मुझे जवानी का मजा लेना सिखाया था। अगर अम्मी ने मुझे पहला लण्ड मेरे हाथ में रखकर न पकड़ाया होता तो आज मैं जवानी का इतना मजा न ले पाती। मैं अपनी माँ की शुक्रगुजार हूँ, जिसने मुझे लण्ड पकड़ना, लण्ड हिलाना, लण्ड चाटना चूसना और लण्ड पीना सब सिखाया। आखीर में सिखाया कि कैसे चुदवाई जाती है बुर, और कैसे मराई जाती है गाण्ड? आज मैं चुदाने में अव्वल हूँ तो अपनी मम्मी की वजह से।
एक दिन मैं जब कालेज से आई तो देखा कि अम्मी फोन पर किसी से बातें कर रही है। अम्मी के मुँह से गालियां दनादन निकल रही थीं, कभी गुस्से में कभी मजाक में। फिर बोली- “हाय मेरी जान अगर तुझे अपनी बेटी चुदवानी है तो उसे मेरी बेटी के पास भेज दो। मेरी बेटी उसे बुर चुदाने में पूरी तरह ट्रेन्ड कर देगी। मुझे अपनी बेटी पर नाज है कि वह अब चूत चुदाने में एक्सपर्ट हो गई है। लण्ड कितना ही बड़ा क्यों न हो मेरी बेटी उसे अपनी चूत में डालकर भून डालती है, और भूनने के बाद ही निकालती है अपनी बुर से लण्ड। वह तो अब निग्रो लण्ड, अरबी लण्ड, अफ्रीकन लण्ड, अमेरिकन लण्ड आदि से आसानी से चुदवा लेती है। लण्ड चूसने में तो उसका कोई जबाब नहीं। तुमको अपनी बेटी चुदवानी है तो उसे मेरी बेटी के पास भेज दो। वह कुछ बड़े और तगड़े लण्ड वाले मर्दों से चुदवा देगी तेरी बेटी की बुर…”
मैं अपनी तारीफ सुनकर फूली नहीं समा रही थी। अचानक डोर बेल बजी तो मैंने दरवाजा खोला। मेरे सामने खड़ी थीं एक खूबसूरत आंटी और उसके साथ एक खूबसूरत लड़की।
वह बोली- “मैडम असमा (मेरी माँ का नाम) घर पर हैं? मैं उनसे मिलना चाहती हूँ…”
मैं थोड़ा समझ तो गई। मैंने उन्हें कमरे में बैठाया और अम्मी को आवाज लगाई।
अम्मी आ गई, और बोली- “अरे वाह आ गई तुम मिसेज वहीदा और ये तेरी बेटी है न वहीदा?”
आंटी बोली- “हाँ यही है मेरी हरामजादी बेटी मिस सायना। इसे चुदाने का बड़ा शौक है। और इसे अपनी माँ चुदाने का भी बड़ा शौक है। लेकिन आज तक कोई मस्त चोदने वाला लौड़ा नहीं मिला इसे। इसके लिए कुछ करो न यार असमा। मैं चाहती हूँ कि मेरी बेटी दो-तीन लण्ड से एक साथ चुदवाये…”
अम्मी बोली- “अरे फिज़ा जरा मेरे पास आ…”
मैं अम्मी के पास जाकर बैठ गई तो अम्मी बोली- “देखो वहीदा यही है मेरी चुदक्कड़ बेटी फिज़ा। इसे तो चुदाने का जबर्दस्त शौक है। कोई ऐसा लण्ड नहीं है जिससे इसने चुदवाया न हो। सभी तरह के लण्ड अपनी चूत में पेल चुकी है मेरी बेटी। और मेरे भोसड़ा में भी पेला है इसने सारे लण्ड। मेरी बेटी जवानी का पूरा मजा ले रही है। तुम अपनी बेटी को मेरी बेटी के पास भेज दो बस…”
आंटी बोली- “यही तो मैं भी चाहती हूँ। मेरी बेटी भी जवानी का पूरा मजा ले…”
तब तक उसकी बेटी सायना बोली- “और मैं चाहती हूँ आंटी कि मैं भी सारे लण्ड अपनी माँ के भोसड़े में भी पेलूँ। मुझे अपनी माँ चुदाना बड़ा अच्छा लगता है…”
मैंने कहा- अब तू चिंता न कर मैं तेरी बुर भी चुदवाऊँगी और तेरी माँ का भोसड़ा भी।
दूसरे दिन सायना मेरे पास आ गई। मैं शाम को उसे लेकर एक क्लब में चली गई। क्लब में घुसते ही उसने जो नजारा देखा तो वह बड़ी हैरान हो गई। उसने कहा- “यार इतना मस्त नजारा तो मैं ख्याब में भी नहीं सोच सकती…”
सायना ने देखा कि वहाँ कई लोग लड़के लड़कियां मर्द औरतें सबके सब नंगी नंगी घूम रही है। सबके चेहरे खिले हुए हैं। सब मस्ती से शराब पी रही हैं। कोई लण्ड पी रही है, कोई लण्ड हिला रही है, कोई लण्ड का चुम्मा ले रही है, कोई लण्ड चाट रही है, कोई चुदवा रही है, कोई गाण्ड मरवा रही है, कोई चूची के बीच लण्ड पेल रही है, कोई लण्ड सहला रही है, कोई मुठ्ठ मार रही है, कोई लण्ड पर बैठी हुई है, कोई किसी मर्द की गोद में बैठी है, कोई चूची नुचवा रही है। लण्ड भी बहनचोद कई तरह के दिख रहे हैं, लम्बे लण्ड, चौड़े लण्ड, मोटे लण्ड, गोरे काले भूरे लण्ड, सीधे लण्ड, टेढ़े लण्ड, कटे लण्ड, देशी और विदेशी लण्ड। सायना की चूत तो एकदम से गरमा उठी। आग निकलने लगी उसकी बुर से। ललचा गई वह इतने बढ़िया-बढ़िया लण्ड देखकर।
मैं और सायना दोनों एक सोफे पर बैठ गई। बस दो मिनट में दो काले नंगे मर्द हमारे सामने आ गये। उन दोनों के लण्ड टनटना रहे थे। इधर हम दोनों भी नंगी थी। एक मेरे बगल में बैठ गया और दूसरा सायना के बगल में। वे हमारी चूचियां सहलाने लगे और हमारे हाथ उनके लण्ड पर चले गये।
जैसे ही सायना ने लण्ड पकड़ा तो वह टन्नाकर और बड़ा हो गया, वो बोली- “हाय अल्ला, ये तो बहनचोद 10” इंच का होगा लण्ड। मैंने तो पहले कभी इतना बड़ा लण्ड देखा ही नहीं। बल्कि मैं तो हैरान हूँ कि क्या लण्ड इतने बड़े-बड़े भी होते हैं फिज़ा?”
मैंने कहा- अरी मेरी माँ की लौड़ी तू देखती जा बस। लण्ड तो इससे भी बड़े-बड़े होते हैं।
सायना बोली- “यार इतना बड़ा लण्ड अगर मेरी माँ के भोसड़े में घुसे तो कितना मजा आये। यहाँ अगर मेरी माँ आई होती तो मुझे अपनी माँ चुदाने में बड़ा मजा आता…”
मैंने कहा- अरे आज तू मादरचोद खूब जम के चुदवा ले। मैं किसी दिन तेरी माँ को भी इन लोगों से जरूर चुदवाऊँगी। मुझे तेरी माँ के भोसड़ा का ख्याल है।
बस सायना लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी। इधर मैं भी लण्ड से खेलने लगी। इतने में पीछे से किसी ने सायना के कंधे पर एक लण्ड रख दिया। उसने मुँह घुमाया तो लण्ड का सुपाड़ा उसके मुँह के सामने आ गया। वह एक गोरा लण्ड था। सायना अब दो-दो लण्ड एक साथ चूसने लगी।
इधर मेरे सामने भी एक गोरा लण्ड दौड़कर आया और मेरे मुँह में घुस गया। हम दोनों दो-दो लण्ड का मजा एक साथ लेने लगी।
सायना बड़ी देर तक रुक नहीं पायी और लण्ड अपनी चूत में पेल लिया। लण्ड घुसते ही वह चिल्ला पड़ी- “उई माँ फाड़ डाला इसने मेरी चूत… बड़ा मोटा है इसका मादरचोद लण्ड। इतना लम्बा है कि मेरे मुँह से निकल आएगा लण्ड… हाय रे मैं तो इससे गाण्ड नहीं मरवाऊँगी। मेरी गाण्ड तो लण्ड देखकर पहले ही फट चुकी है… मेरी चूत में आज पहली बार इतना बड़ा लौड़ा घुसा है। मैंने कभी इतने बड़े लण्ड से नहीं चुदवाया। ये तो मेरी माँ के भोसड़ा के काबिल है लण्ड। मुझे तो लगता है कि उसका भी भोसड़ा फट जायेगा पर मेरी माँ बुर चोदी बड़ा मजा करेगी…”
इधर मैंने मजे से चुदाना शुरू कर दिया क्योंकी मैं तो जब तब यहाँ आकर चुदवाती रहती हूँ। सायना ने फिर गोरे लण्ड से चुदाया। उसके बाद हम दोनों ने लण्ड आपस में बदल लिया। अदला-बदली के बाद मजा और आने लगा। मैंने अपना मुँह सायना की गाण्ड की तरफ रखा और सायना ने मेरी गाण्ड की तरफ। एक लण्ड मेरी बुर में दूसरा मेरे मुँह में। यही हाल सायना का भी था। भकर-भकर धच्च-धच्च फच्च-फच्च गच्च-गच्च छप्प-छप्प की आवाजें हमारी चूत से निकल रही थी। चारों तरफ से लोग हमारी चुदाई देख भी रहे थे। मुझे तो सबके सामने चुदाने में खूब मजा आ रहा था।
सायना बोली- “हाँ यार, आज सबके साथ मिलकर चुदाने में खूब मजा आ रहा है…”
इस तरह हम दोनों ने रात भर चुदवाया। फिर दिन में भी चुदवाया और शाम को घूमते फिरते घर पहुँची। मेरे साथ सायना भी थी। हम दोनों अम्मी के कमरे में घुस गई। हमने देखा की मेरी अम्मी और सायना की अम्मी दोनों आमने सामने लेटी हुई चुदवा रही हैं।
सायना जोर से बोल पड़ी- “अरी फिज़ा यहाँ तो मेरी माँ का भोसड़ा चुद रहा है यार। और चोदने वाले वही हैं भोसड़ी के जो मुझे कल क्लब में सबसे पहले चोदने आये थे। यार मुझे तो मजा आ गया। चलो वहाँ नहीं तो अपनी माँ यहां चुदवा लेती हूँ…”
वह फिर बोली- “अम्मी तुम्हें मजा आ रहा है न? इन्हीं दोनों ने कल मुझे पहले चोदा था। इनके लण्ड बहनचोद बड़े तगड़े हैं अम्मी…”
उसकी अम्मी बोली- “तभी तो साले मेरे भोसड़ा में गोता लगा रहे हैं… और उधर देख फिज़ा की अम्मी भी चुदा रही है। दो लण्ड एक साथ घुसकर उसका भोसड़ा चोद रहे हैं…”
सायना बोली- “यार फिज़ा, ये मादरचोद चारों लण्ड यहाँ कैसे आ गये…”
मैंने जबाब दिया- “यार मैंने कल ही चुदाने के बाद अपनी माँ के लिए और तेरी माँ के लिए इन्हें बुक कर लिया था। ये चारों सवेरे ही आ गए थे और तब से ये दोनों हरामजादी चुदवाये चली जा रही हैं…”
मेरी अम्मी बोली- “अरे मेरी भोसड़ी की फिज़ा तूने इतने बढ़िया लण्ड हमारे पास भेजा है की इन्हें अपनी बुर से निकालने का मन ही नहीं करता है। अब तुम दोनों बैठकर अपने सामने चुदाओ अपनी-अपनी माँ…”
समाप्त