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kamuk kahaniyaan

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Guest
माँ कैसे चुदा सकती हूँ मैं

मेरी अम्मी फोन पर बोली- अरी फिज़ा कहाँ है तू? बहनचोद तेरा कहीं ठिकाना नहीं रहता। पता नहीं कहाँ-कहाँ तू घूमा करती है। कभी बताकर नहीं जाती है तू…”

मैंने जबाब दिया- अरे चिंता न करो अम्मी, मैं अभी आती हूँ।

थोड़ी देर बाद जब मैं घर पहुँची तो देखा की अम्मी एक अंकल के साथ बैठी हुई हैं। मुझे देखते ही बोली- “माँ चुदाकर आ रही है तू अपनी, बहन की लौड़ी, फिज़ा?”

मैंने जबाब दिया- “माँ कैसे चुदा सकती हूँ मैं। माँ तो बुर चोदी यहाँ बैठी हुई है। मैं तो पार्लर गई थी अपनी झांटें बनवाने। बनाने वाला लड़का थोड़ी देर बाद आया इसलिए मुझे कुछ वक्त लग गया बस…”

अम्मी- “तो क्या तेरी झांटें वहाँ लड़के बनाते है?”

मैं- “मेरी क्या सब लड़कियों की झांटें लड़के बनाते हैं, और नंगे-नंगे बनांते है बहनचोद…”

अम्मी- “तो क्या तू उसका लण्ड पकड़कर झांटें बनवाती है?”

मैं- “और नहीं तो क्या? मैं क्या सभी लड़कियां लण्ड पकड़कर झांटें बनवाती हैं…”

अम्मी- “तो तूने मुझे क्यों नहीं बताया अभी तक माँ की लौड़ी? मैं भी लण्ड पकड़कर झांटें बनवा लेती…”

मैं- “तो अब से जाना शुरू कर दो न अम्मी…”

अम्मी- “किस साईज के लण्ड होते हैं उनके?”

मैं- “सभी तरह के लण्ड होते हैं, अम्मी। लम्बे, मोटे, गोरे, काले, सीधे, टेढ़े, देशी विदेशी आदि। मुझे तो जो भी लण्ड मिलता है मैं उसे पकड़ लेती हूँ और मजे से बनवा लेती हूँ झांटें…”

अम्मी- “तो क्या मन पसंद भी लण्ड मिल जाते है वहाँ?”

मैं- “हाँ मिल जाते हैं। इसके लिए तुम्हें पहले से आर्डर देना पड़ता है…”

हम दोनों की बातें अंकल बड़े ध्यान से सुन रहे थे। इतने में अम्मी उसकी लुंगी में हाथ डालकर उसका लौड़ा सहलाने लगी। मैं वहाँ से जाने लगी तो अम्मी ने कहा- “नहीं फिज़ा, जाओ नहीं यहाँ मेरे पास आओ…”

मैं उसके पास चली गई। अम्मी ने लौड़ा बाहर निकाल लिया और लुंगी खोलकर फेंक दी। अंकल का लौड़ा हम दोनों को देखकर और हमारी बातें सुनकर टन्ना गया।

अम्मी मुझे खड़ा लण्ड दिखाते हुए बोली- “क्या वहाँ इस तरह के भी लण्ड मिलते हैं?”

मैंने कहा- “हाँ अम्मी मिलते हैं। बड़े मोटे-मोटे लम्बे तगड़े प्यारे-प्यारे लण्ड मिलते है वहाँ…”

अम्मी- “अच्छा ये बता कि लड़कियां लण्ड पकड़कर करती क्या है वहाँ?”

मैंने जबाब दिया- “कुछ नहीं जब तक झाटें बनवाती है तब तक लण्ड सहलाती रहती हैं। उसे हिलाती डुलाती रहती हैं। चूमा चाटी भी कर लेती हैं, और जब झाटें बन जाती हैं तो लण्ड का मुठ्ठ मारती है और फिर लण्ड पीकर चली आती हैं। सारा वीर्य पी जाती है मादरचोद और लण्ड चाट-चाटकर बिल्कुल साफ कर देती है”…"

अम्मी बोली- “अच्छा फिज़ा, लो तुम अंकल का लण्ड चूसो मैं जरा पड़ोस में होकर आती हूँ…” इस तरह अम्मी मुझे अंकल का लण्ड पकड़ाकर चली गई।

अम्मी के जाने के बाद मैंने लण्ड बड़े गौर से देखा। घुमा-घुमा के देखा। चारों तरफ से देखा। मुझे बड़ा अच्छा लगा लौड़ा। मैंने पूछा- “अंकल आपका नाम क्या है और आप मेरी अम्मी से कब मिले?”

वह बोला- “मेरा नाम है आरिफ और मैं तेरी अम्मी से एक ट्रैन में मिला था। उस डिब्बे में हम दोनों ही थे। बात करते-करते हम दोनों एक दूसरे के नजदीक आ गये। तेरी अम्मी पहले आगे बढ़ी और मेरे लण्ड पर हाथ मारकर कहा अब तो दिखा दो इस भोसड़ी वाले लण्ड को। यह सुनकर मेरा लण्ड टनटना कर खड़ा हो गया। मैं उससे बात करने में और खुल गया। फिर उसने मेरी पैंट उतार दी और नेकर भी नीचे घसीट दी। अब मेरा लण्ड उसकी आँखों के सामने था। मैं उसकी चूचियों पर टूट पड़ा। वह मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी और मैं मस्त होने लगा। स्टेशन आने वाला था इसलिए उसने लण्ड का मुठ्ठ मार दिया और मेरा झड़ता हुआ लण्ड मस्ती से पिया। मुझे खूब मजा आया। जाते-जाते उसने मुझे अपना पता दिया और मैं यहाँ आ गया…”

मैं अंकल की कहानी उसका लण्ड चूसते-चूसते सुन रही थी। तब तक मेरी चूत बहुत गरम हो गई। मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा था, मेरी चूत बुरी तरह जलने लगी। मैं मन ही मन गाली बकने लगी- “कहाँ मर गई मेरी माँ बहनचोद। पता नहीं वहाँ किससे चुदाने लगी भोसड़ी वाली मेरी माँ? बुर चोदी पता नहीं कितना चुदवाती है? उसका इंतजार करते-करते मेरी गाण्ड फटी जा रही है। अब मैं और नहीं रुक सकती। तू हरामजादी आ चाहे न आ मैं जा रही हूँ अंकल से चुदवाने…” ऐसा विचार मन में आते ही मैंने अपनी टाँगें फैला दी और लण्ड अपनी बुर में घुसा लिया। मैं गचागच चुदवाने लगी।

मेरे चुदवाते ही अम्मी बहनचोद टपक पड़ी। मैंने उसे देखा तो हैरान रह गई। वह बिल्कुल नंगी थी और उसके हाथ में एक लण्ड था।

मैंने पूछा- “इतनी देर से बिटिया की बुर चुदवा रही थी तू अपनी…”

अम्मी बोली- “बिटिया की बुर तो बहनचोद यहाँ चुद रही है। मैं तो वहाँ से एक मस्त काला लण्ड पीकर आ रही हूँ। और एक लण्ड तेरे लिए लेकर आई हूँ। अब तो पहले तू अंकल से चुदवा ले तब तक मैं इससे चुदवाती हूँ। दूसरी पारी में तू इससे चुदवाना और मैं तेरे अंकल से चुदवाऊँगी, क्योंकी मैं उस दिन ट्रेन में चुदवा नहीं पायी थी। केवल लण्ड सड़का ही मार पायी थी…” ऐसा कहकर अम्मी भी अपना भोसड़ा खोला और भकाभक चुदाने लगी।

मैं अपनी माँ को चुदवाते हुए देख रही थी और वह मुझे चुदवाते हुए देख रही थी। अम्मी ने ही मुझे जवानी का मजा लेना सिखाया था। अगर अम्मी ने मुझे पहला लण्ड मेरे हाथ में रखकर न पकड़ाया होता तो आज मैं जवानी का इतना मजा न ले पाती। मैं अपनी माँ की शुक्रगुजार हूँ, जिसने मुझे लण्ड पकड़ना, लण्ड हिलाना, लण्ड चाटना चूसना और लण्ड पीना सब सिखाया। आखीर में सिखाया कि कैसे चुदवाई जाती है बुर, और कैसे मराई जाती है गाण्ड? आज मैं चुदाने में अव्वल हूँ तो अपनी मम्मी की वजह से।

एक दिन मैं जब कालेज से आई तो देखा कि अम्मी फोन पर किसी से बातें कर रही है। अम्मी के मुँह से गालियां दनादन निकल रही थीं, कभी गुस्से में कभी मजाक में। फिर बोली- “हाय मेरी जान अगर तुझे अपनी बेटी चुदवानी है तो उसे मेरी बेटी के पास भेज दो। मेरी बेटी उसे बुर चुदाने में पूरी तरह ट्रेन्ड कर देगी। मुझे अपनी बेटी पर नाज है कि वह अब चूत चुदाने में एक्सपर्ट हो गई है। लण्ड कितना ही बड़ा क्यों न हो मेरी बेटी उसे अपनी चूत में डालकर भून डालती है, और भूनने के बाद ही निकालती है अपनी बुर से लण्ड। वह तो अब निग्रो लण्ड, अरबी लण्ड, अफ्रीकन लण्ड, अमेरिकन लण्ड आदि से आसानी से चुदवा लेती है। लण्ड चूसने में तो उसका कोई जबाब नहीं। तुमको अपनी बेटी चुदवानी है तो उसे मेरी बेटी के पास भेज दो। वह कुछ बड़े और तगड़े लण्ड वाले मर्दों से चुदवा देगी तेरी बेटी की बुर…”

मैं अपनी तारीफ सुनकर फूली नहीं समा रही थी। अचानक डोर बेल बजी तो मैंने दरवाजा खोला। मेरे सामने खड़ी थीं एक खूबसूरत आंटी और उसके साथ एक खूबसूरत लड़की।

वह बोली- “मैडम असमा (मेरी माँ का नाम) घर पर हैं? मैं उनसे मिलना चाहती हूँ…”

मैं थोड़ा समझ तो गई। मैंने उन्हें कमरे में बैठाया और अम्मी को आवाज लगाई।

अम्मी आ गई, और बोली- “अरे वाह आ गई तुम मिसेज वहीदा और ये तेरी बेटी है न वहीदा?”

आंटी बोली- “हाँ यही है मेरी हरामजादी बेटी मिस सायना। इसे चुदाने का बड़ा शौक है। और इसे अपनी माँ चुदाने का भी बड़ा शौक है। लेकिन आज तक कोई मस्त चोदने वाला लौड़ा नहीं मिला इसे। इसके लिए कुछ करो न यार असमा। मैं चाहती हूँ कि मेरी बेटी दो-तीन लण्ड से एक साथ चुदवाये…”

अम्मी बोली- “अरे फिज़ा जरा मेरे पास आ…”

मैं अम्मी के पास जाकर बैठ गई तो अम्मी बोली- “देखो वहीदा यही है मेरी चुदक्कड़ बेटी फिज़ा। इसे तो चुदाने का जबर्दस्त शौक है। कोई ऐसा लण्ड नहीं है जिससे इसने चुदवाया न हो। सभी तरह के लण्ड अपनी चूत में पेल चुकी है मेरी बेटी। और मेरे भोसड़ा में भी पेला है इसने सारे लण्ड। मेरी बेटी जवानी का पूरा मजा ले रही है। तुम अपनी बेटी को मेरी बेटी के पास भेज दो बस…”

आंटी बोली- “यही तो मैं भी चाहती हूँ। मेरी बेटी भी जवानी का पूरा मजा ले…”

तब तक उसकी बेटी सायना बोली- “और मैं चाहती हूँ आंटी कि मैं भी सारे लण्ड अपनी माँ के भोसड़े में भी पेलूँ। मुझे अपनी माँ चुदाना बड़ा अच्छा लगता है…”

मैंने कहा- अब तू चिंता न कर मैं तेरी बुर भी चुदवाऊँगी और तेरी माँ का भोसड़ा भी।

दूसरे दिन सायना मेरे पास आ गई। मैं शाम को उसे लेकर एक क्लब में चली गई। क्लब में घुसते ही उसने जो नजारा देखा तो वह बड़ी हैरान हो गई। उसने कहा- “यार इतना मस्त नजारा तो मैं ख्याब में भी नहीं सोच सकती…”

सायना ने देखा कि वहाँ कई लोग लड़के लड़कियां मर्द औरतें सबके सब नंगी नंगी घूम रही है। सबके चेहरे खिले हुए हैं। सब मस्ती से शराब पी रही हैं। कोई लण्ड पी रही है, कोई लण्ड हिला रही है, कोई लण्ड का चुम्मा ले रही है, कोई लण्ड चाट रही है, कोई चुदवा रही है, कोई गाण्ड मरवा रही है, कोई चूची के बीच लण्ड पेल रही है, कोई लण्ड सहला रही है, कोई मुठ्ठ मार रही है, कोई लण्ड पर बैठी हुई है, कोई किसी मर्द की गोद में बैठी है, कोई चूची नुचवा रही है। लण्ड भी बहनचोद कई तरह के दिख रहे हैं, लम्बे लण्ड, चौड़े लण्ड, मोटे लण्ड, गोरे काले भूरे लण्ड, सीधे लण्ड, टेढ़े लण्ड, कटे लण्ड, देशी और विदेशी लण्ड। सायना की चूत तो एकदम से गरमा उठी। आग निकलने लगी उसकी बुर से। ललचा गई वह इतने बढ़िया-बढ़िया लण्ड देखकर।

मैं और सायना दोनों एक सोफे पर बैठ गई। बस दो मिनट में दो काले नंगे मर्द हमारे सामने आ गये। उन दोनों के लण्ड टनटना रहे थे। इधर हम दोनों भी नंगी थी। एक मेरे बगल में बैठ गया और दूसरा सायना के बगल में। वे हमारी चूचियां सहलाने लगे और हमारे हाथ उनके लण्ड पर चले गये।

जैसे ही सायना ने लण्ड पकड़ा तो वह टन्नाकर और बड़ा हो गया, वो बोली- “हाय अल्ला, ये तो बहनचोद 10” इंच का होगा लण्ड। मैंने तो पहले कभी इतना बड़ा लण्ड देखा ही नहीं। बल्कि मैं तो हैरान हूँ कि क्या लण्ड इतने बड़े-बड़े भी होते हैं फिज़ा?”

मैंने कहा- अरी मेरी माँ की लौड़ी तू देखती जा बस। लण्ड तो इससे भी बड़े-बड़े होते हैं।

सायना बोली- “यार इतना बड़ा लण्ड अगर मेरी माँ के भोसड़े में घुसे तो कितना मजा आये। यहाँ अगर मेरी माँ आई होती तो मुझे अपनी माँ चुदाने में बड़ा मजा आता…”

मैंने कहा- अरे आज तू मादरचोद खूब जम के चुदवा ले। मैं किसी दिन तेरी माँ को भी इन लोगों से जरूर चुदवाऊँगी। मुझे तेरी माँ के भोसड़ा का ख्याल है।

बस सायना लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी। इधर मैं भी लण्ड से खेलने लगी। इतने में पीछे से किसी ने सायना के कंधे पर एक लण्ड रख दिया। उसने मुँह घुमाया तो लण्ड का सुपाड़ा उसके मुँह के सामने आ गया। वह एक गोरा लण्ड था। सायना अब दो-दो लण्ड एक साथ चूसने लगी।

इधर मेरे सामने भी एक गोरा लण्ड दौड़कर आया और मेरे मुँह में घुस गया। हम दोनों दो-दो लण्ड का मजा एक साथ लेने लगी।

सायना बड़ी देर तक रुक नहीं पायी और लण्ड अपनी चूत में पेल लिया। लण्ड घुसते ही वह चिल्ला पड़ी- “उई माँ फाड़ डाला इसने मेरी चूत… बड़ा मोटा है इसका मादरचोद लण्ड। इतना लम्बा है कि मेरे मुँह से निकल आएगा लण्ड… हाय रे मैं तो इससे गाण्ड नहीं मरवाऊँगी। मेरी गाण्ड तो लण्ड देखकर पहले ही फट चुकी है… मेरी चूत में आज पहली बार इतना बड़ा लौड़ा घुसा है। मैंने कभी इतने बड़े लण्ड से नहीं चुदवाया। ये तो मेरी माँ के भोसड़ा के काबिल है लण्ड। मुझे तो लगता है कि उसका भी भोसड़ा फट जायेगा पर मेरी माँ बुर चोदी बड़ा मजा करेगी…”

इधर मैंने मजे से चुदाना शुरू कर दिया क्योंकी मैं तो जब तब यहाँ आकर चुदवाती रहती हूँ। सायना ने फिर गोरे लण्ड से चुदाया। उसके बाद हम दोनों ने लण्ड आपस में बदल लिया। अदला-बदली के बाद मजा और आने लगा। मैंने अपना मुँह सायना की गाण्ड की तरफ रखा और सायना ने मेरी गाण्ड की तरफ। एक लण्ड मेरी बुर में दूसरा मेरे मुँह में। यही हाल सायना का भी था। भकर-भकर धच्च-धच्च फच्च-फच्च गच्च-गच्च छप्प-छप्प की आवाजें हमारी चूत से निकल रही थी। चारों तरफ से लोग हमारी चुदाई देख भी रहे थे। मुझे तो सबके सामने चुदाने में खूब मजा आ रहा था।

सायना बोली- “हाँ यार, आज सबके साथ मिलकर चुदाने में खूब मजा आ रहा है…”

इस तरह हम दोनों ने रात भर चुदवाया। फिर दिन में भी चुदवाया और शाम को घूमते फिरते घर पहुँची। मेरे साथ सायना भी थी। हम दोनों अम्मी के कमरे में घुस गई। हमने देखा की मेरी अम्मी और सायना की अम्मी दोनों आमने सामने लेटी हुई चुदवा रही हैं।

सायना जोर से बोल पड़ी- “अरी फिज़ा यहाँ तो मेरी माँ का भोसड़ा चुद रहा है यार। और चोदने वाले वही हैं भोसड़ी के जो मुझे कल क्लब में सबसे पहले चोदने आये थे। यार मुझे तो मजा आ गया। चलो वहाँ नहीं तो अपनी माँ यहां चुदवा लेती हूँ…”

वह फिर बोली- “अम्मी तुम्हें मजा आ रहा है न? इन्हीं दोनों ने कल मुझे पहले चोदा था। इनके लण्ड बहनचोद बड़े तगड़े हैं अम्मी…”

उसकी अम्मी बोली- “तभी तो साले मेरे भोसड़ा में गोता लगा रहे हैं… और उधर देख फिज़ा की अम्मी भी चुदा रही है। दो लण्ड एक साथ घुसकर उसका भोसड़ा चोद रहे हैं…”

सायना बोली- “यार फिज़ा, ये मादरचोद चारों लण्ड यहाँ कैसे आ गये…”

मैंने जबाब दिया- “यार मैंने कल ही चुदाने के बाद अपनी माँ के लिए और तेरी माँ के लिए इन्हें बुक कर लिया था। ये चारों सवेरे ही आ गए थे और तब से ये दोनों हरामजादी चुदवाये चली जा रही हैं…”

मेरी अम्मी बोली- “अरे मेरी भोसड़ी की फिज़ा तूने इतने बढ़िया लण्ड हमारे पास भेजा है की इन्हें अपनी बुर से निकालने का मन ही नहीं करता है। अब तुम दोनों बैठकर अपने सामने चुदाओ अपनी-अपनी माँ…”

समाप्त
 
अंकल का लण्ड चोदो बेटी

एक दिन मैं अपनी सहेली निदा के घर अचानक पहुँच गई। मैंने घंटी बजायी तो एक मेड सर्वेन्ट ने दरवाजा खोला। मैंने कहा की मैं महक हूँ और निदा से मिलने आई हूँ। उसने मुझे अंदर बैठा लिया और निदा को बताया की आपसे आपकी सहेली महक मिलने आई है।

निदा ने कहा- “महक को मेरे कमरे में भेज दो…”

वह मेड सर्वेंट मेरे पास आई और बोली- “आपको मेम साहब ने अंदर कमरे में बुलाया है…”

मैं अंदर चली गई। मैंने देखा की निदा अपने अब्बा के बगल में बैठी है। मैंने अंकल को आदाब किया। तब तक मेरी नजर निदा के हाथ पर पड़ी। मैंने देखा की वह अपने अब्बा के पैजामे के अंदर हाथ डालकर अंदर ही अंदर उसका लण्ड हिला रही है। मैं समझ तो गई लेकिन चुप रही।

थोड़ी देर तक वह मुझसे बात करती रही फिर उसने मुझे अपने पास बुलाया। मैं उठकर उसके पास गई तो उसने झट्ट से टनटनाता हुआ लण्ड पैजामे के बाहर निकाला और मुझे दिखाते हुए कहा- “महक लो आज तुम मेरे अब्बा का लण्ड चोदो, जैसे मैंने उस दिन तेरे अब्बा का लण्ड चोदा था…”

मैंने लण्ड देखा तो एक ही नजर में मेरी लार बहनचोद टपकने लगी। मुझे तो बड़े और मोटे लण्ड बहुत अच्छे लगते हैं। मैं मुश्कुराई और लपक कर लण्ड पकड़ लिया। निदा घूमकर मेरे कपड़े उतारने लगी और मैंने भी मस्ती से अपने सारे कपड़े उतरवा लिये। अब मैं मादरचोद बिल्कुल नंगी हो गई थी। निदा ने अपने अब्बा का पैजामा भी खोल डाला तो वह भी मादरचोद नंगा हो गया।

मैंने लौड़ा मुँह में भरा और मस्ती से चूसने लगी। मुझे कोई शर्म तो थी नहीं क्योंकी निदा बुर चोदी मेरे अब्बा का लण्ड ऐसे ही चूसती है। मैंने मन में सोच लिया की अब मैं निदा के अब्बा से वैसे ही चुदवाऊँगी जैसे निदा मेरे अब्बा से चुदवाती है। लण्ड चूसते-चूसते मैं बुरी तरह मस्त हो गई थी। मेरी चूत भठ्ठी की तरह जलने लगी थी। मेरे सामने उसके अंदर लण्ड पेलने के अलावा और कोई चारा न था। बस मैं उठी और उसके ऊपर चढ़ बैठी। मेरे बैठते ही लण्ड बहनचोद मेरी चूत में सटाक से पूरा का पूरा घुस गया। फिर मैं कूद-कूद कर वैसे ही चुदवाने लगी जैसे निदा मेरे अब्बा के लण्ड पर कूद-कूद कर चुदवाती है।

मुझे देखकर निदा बोली- “हाय महक भोसड़ी की, तू तो बहनचोद चुदवा नहीं रही है बल्कि लण्ड चोद रही है…”

मैंने कहा- “तू भी तो बुर चोदी मेरे अब्बा का लण्ड चोदती है…”

थोड़ी देर में मैं पीछे से चुदवाने लगी और आगे झुक कर निदा की बुर चाटने लगी। निदा मेरे आगे अपनी दोनों टांगें फैलाये हुए लेटी थी। थोड़ी देर में वह उठी और मेरी चूचियां मसलने लगी। मुझे अपने अब्बा से चुदवाने में उसे भी बड़ा मजा आ रहा था। असली बात तो यह है की वह भी अपने अब्बा से चुदवाती है और मैं भी अपने अब्बा से चुदवाती हूँ। मैंने एक दिन अब्बा को अपनी भाभी की बुर चोदते हुए देख लिया था। मैंने सोचा की जो भोसड़ी का अपनी बहू की बुर चोद सकता है वह अपनी बेटी की भी बुर चोद सकता है। मैं उसका लण्ड देखकर ललचा गई थी।

रात का समय था और कहते हैं की रात में औरत को लण्ड के अलावा कुछ और नजर नहीं आता। वह भूल जाती है की लण्ड बहनचोद है किसका? वो बस पकड़कर चूसने लगती है लण्ड। न कोई नाता न कोई रिश्ता बस लण्ड मुँह के अंदर।

उस दिन मेरे साथ भी यही हुआ। मैं फिर अंदर घुस गई और बोली- “भाभी बुर चोदी तू मेरे अब्बा से चुदवा रही है?”

भाभी बोली- “तो क्या हुआ तू भी चुदवा ले भोसड़ी वाली, ले पकड़कर देख लण्ड…” भाभी मुझे लण्ड दिखाती हुई बोली।

मैं भी अपने आपको रोक न सकी। मैं इतनी गरम हो गई थी की मैं भूल गई थी नाता रिश्ता और पकड़ लिया लण्ड। बस उसी दिन से रास्ता खुल गया और भाभी की तरह मैं भी चुदवाने लगी। मैं बहनचोद चुदाने में बड़ी बेशर्म हो चुकी हूँ। मुझे जब कोई लण्ड दिखाई पड़ता है, तो मैं सारी दुनियां भूल जाती हूँ, और वह लण्ड अपने कब्जे में ले लेती हूँ। लण्ड भोसड़ी का चाहे जिसका हो, मैं इसकी परवाह नहीं करती।

लण्ड जब मेरी पकड़ में आ जाता है तो मैं उससे चुदवाती जरूर हूँ, और अगर चुदवाने का मौका नहीं मिलता तो फिर मुठ्ठ मारकर पी लेती हूँ लण्ड। आप इसे अच्छा कहें या बुरा, मुझे लण्ड का वीर्य पीने में बड़ा मजा आता है, और मैं इसका कोई भी मौका बरबाद नहीं करती। उस दिन मैं निदा के अब्बा से चुदवाकर सीधे अपने घर आ गई।

एक दिन जब मैं शाम को घर आई तो देखा की कमरे में आदिल अंकल बैठे है। मैं उन्हें अच्छी तरह जानती हूँ। वह बड़े स्मार्ट गोरे चिट्टे और तगड़े तंदुरुस्त आदमी हैं। अच्छी बात यह है की वह न तो टोपी पहनते हैं और ही दाढ़ी बढ़ाते हैं। बिल्कुल क्लीन-सेव रहते हैं इसीलिए बड़े हैंडसम लगते हैं। उनका हमारे घर आना जाना बहुत दिनों से है। मेरे अब्बा और अम्मी से खूब घुले मिले हैं। मैंने उन्हें आदाब किया तो वह बहुत खुश हो गए। अम्मी उसके बगल में सटकर बैठी थी।

इतने में अम्मी ने कहा- “अरी महक जल्दी से थोड़ा हलवा बनाकर ले आ। तेरे अंकल को हलवा बहुत अच्छा लगता है…”

बस मैं किचेन में घुस गई और हलवा बनाने लगी। करीब 15 मिनट के बाद मैं हलवा लेकर कमरे में वापस आई तो वहाँ का सीन देखकर मैं दंग रह गई। मैंने देखा की मेरी अम्मी अंकल के पैजामे के अंदर हाथ डाले हुए उसका लण्ड धीरे-धीरे हिला रही हैं। पैजामे का नाड़ा बिल्कुल खुला हुआ है। उधर अंकल भी मादरचोद अम्मी के ब्लाउज के अंदर हाथ घुसेड़कर उसकी चूचियां दबा रहा है। उन लोगों को मालूम ही नहीं हुआ की मैं हलवा लेकर उनके सामने कमरे में खड़ी हूँ। मैंने हलवा मेज पर रख दिया तो उसकी आवाज से अम्मी ने सिर उठाया।

जैसे ही अम्मी ने मुझे देखा वैसे ही पैजामे से अंकल का खड़ा लण्ड मुझे दिखाते हुए बोली- “लो अंकल का लण्ड चोदो, बेटी महक…”

मैं तो यह सुनकर सन्न रह गई। मैंने कहा- “हाय दईया अम्मी यह क्या कह रहीं है आप?”

अम्मी बोली- “हाँ मैं ठीक कह रही हूँ। लो लण्ड चोदो आदिल अंकल का। यह बिचारा दो बार लौट गया यहाँ से। दोनों बार तुमसे अपना लण्ड चुदवाने आया था। आज भी वापस जा रहा था तब मैंने कहा- “रुको अभी महक आती होगी। आज तुम उससे अपना लण्ड चुदवाकर ही जाना। तुम जब हलवा बनाने गई तो मैंने सोचा की तब तक मैं इसका लण्ड खड़ा कर देती हूँ। अब देखो न कैसे टन्नाकर खड़ा हो गया है इसका लण्ड। अब तुम चोदो इसे, जैसे तुमने निदा के अब्बा का लण्ड चोदा था…”

मैं मन ही मन समझ गई की अम्मी को मालूम हो गया की मैं निदा के अब्बा से चुदवाती हूँ। मेरी निगाह आदिल अंकल के लण्ड पर चिपक गई। लण्ड मुझे पसंद आ गया था तो मैंने हाथ बढ़ाकर पकड़ ही लिया लण्ड।

मैंने कहा- “अम्मी अब तुम कहती हो तो मैं जरूर चोदूंगी अंकल का लण्ड…” मैं उसे लण्ड पकड़े-पकड़े अंदर बेडरूम ले गई और उसे चित्त लिटा दिया।

फिर मैंने उसी के सामने अपने एक-एक करके सभी कपड़े उतारे। मेरी जब चूचियां खुली तो उसका लौड़ा और टन्ना गया। साला सिर हिलाने लगा उसका टनटनाता हुआ लण्ड। उसके बाद जब मैंने पेटीकोट खोला और उसने मेरी मोटी-मोटी जाँघों के बीच नंगी चूत देखी तो उसकी आँखें खुल गईं। उसको उम्मीद नहीं थी की मेरी चूत इतनी मस्त होगी। बस मैं गचाक से चढ़ बैठी अंकल के ऊपर और उसके लण्ड को धर दबोचा। मैं लण्ड से खेलने लगी। फिर मैं घूम गई और रख दी अपनी चूत अंकल के मुँह पर। अंकल मेरी बुर चाटने लगा और मैं उसका लण्ड चाटने लगी। मैं मन में सोच रही थी की अम्मी जब इसका लण्ड पकड़ती हैं, तो इससे अपना भोसड़ा जरूर चुदवाती होंगी। और आज से नहीं जाने कब से चुदवा रही हैं अम्मी अपना भोसड़ा।

मैंने फौरन पूछा- “भोसड़ी के अंकल तू मेरी माँ कब से चोद रहा है?”

उसने भी तुरंत जबाब दिया- “जबसे तेरा अब्बा मेरी बीवी चोद रहा है…”

अब मैं बिल्कुल समझ गई की अंकल और अब्बा दोनों एक दूसरे की बीवी चोदते हैं। उसके बाद मन में आया की अंकल की भी एक जवान मस्त खूबसूरत लड़की है। आज अंकल मुझे चोद रहा है तो इसकी लड़की भी मेरे अब्बा से चुदवाती होगी। मैं ये सब बातें मन ही मन सोच भी रही थी और लौड़ा भी मस्ती से चूस रही थी।

अंकल का लौड़ा बहनचोद 8” इंच से बड़ा था और मोटा भी। मोटे लण्ड बड़े मजबूत और बलिष्ठ होते हैं। मुझे मोटे लण्ड से बहुत प्यार है, क्योंकी वह चूत में चिपक कर घुसता है और चिपक कर चोदता है।

उधर मेरी चूत अब लण्ड खाने के लिए पूरी तरह तैयार हो चुकी थी। फिर मैं अंकल की तरफ मुँह करके लण्ड पर बैठ गई। मेरे बैठते ही लण्ड पूरा का पूरा मेरी चूत में घुस गया। मैं थोड़ा आगे झुक कर अपनी गाण्ड के दोनों चूतड़ उठा-उठाकर लण्ड पर पटकने लगी। बार-बार पटकने लगी, जल्दी-जल्दी और जोर से पटकने लगी। मैं भकाभक चोदने लगी लण्ड।

मैं बड़े प्यार और बड़ी सेक्सी अदा से किटकिटाती हुई गालियां भी देती जा रही थी- “साले लण्ड तेरी माँ का भोसड़ा, तेरी बिटिया की बुर। तेरी बहन का लण्ड साले मैं फाड़ डालूंगी तेरी गाण्ड, भोसड़ी के। मेरी लण्ड चोदने की स्पीड बढ़ती जा रही थी।

अंकल को मजा आ रहा था वह बोला- “हाय महक तू तो वाकई लण्ड बहुत बढ़िया चोद लेती है, यार। इसीलिए लोग तेरी तारीफ करते हैं…”

मेरी अम्मी बड़ी देर से बैठी हुई मुझे लण्ड चोदते हुए देख रही थी। मैं फिर घूम गई और अपनी गाण्ड अंकल की तरफ कर दी। लण्ड मेरी चूत में घुसा ही रहा। अंकल की तरफ गाण्ड करके मैंने अपने दोनों हाथ पीछे टिका दिया और अपने चूतड़ उसकी जांघों पर रगड़ने लगी। जल्दी-जल्दी आगे-पीछे करने लगी गाण्ड, और इस तरह चोदने लगी लण्ड।

मैं फिर दांत पीसकर बड़े प्यार से बोली- “मादरचोद लण्ड। बहनचोद साले मैं तेरी बना दूँगी चटनी बेटी चोद। लौड़े मिया, मैं तेरा सारा गुमान तेरी गाण्ड में घुसा दूँगी…” मेरी मीठी-मीठी गालियां सुन-सुनकर लण्ड साला और फूलता जा रहा था, और मोटा होता जा रहा था लण्ड।

इतने में मेरी अम्मी बोली- “वाह बेटी वाह… शाबाश महक। मैंने आज तक किसी लड़की को इस तरह से लण्ड चोदते नहीं देखा। मैं खुद भी इस तरह न चोद पाती हूँ और न चुदवा पाती हूँ। तूने तो कमाल कर दिया बेटी। तूने यह सब सीखा कहाँ से है बुर चोदी महक?”

मैंने कहा- “अरे अम्मी यह सब मैंने चुलबुलेब्लागस की कहानियों से सीखा है। मैं उसकी हर कहानी बड़े ध्यान से पढ़ती हूँ। मैंने बहुत कुछ सीखा है इस ब्लाग की कहानियों से। मैंने गालियां भी यहीं से सीखी हैं और गालियां देते हुए चोदना और चुदवाना भी यहीं से सीखा है। सच तो यह है की अगर गालियों का दिल से और बड़े मन से सही इश्तेमाल किया जाये तो इससे बहुत फायदा मिल सकता है। लोग सेक्स में लण्ड और चूत का पूरा मजा नहीं लूट पाते। मैं तो कहती हूँ की चुलबुलेब्लागस की कहानियां हर एक को पढ़नी चाहिए और तब सेक्स में लण्ड और चूत का पूरा मजा लेना चाहिए। खास तौर से जवान लड़के और लड़कियों को तो जरूर पढ़ना चाहिए ये कहानियां। उनमें से अगर आप कहानी का हिस्सा निकाल भी दें तो भी बहुत कुछ है सीखने के लिए…” और मैं फिर लण्ड चोदने में बिजी हो गई।

दो दिन बाद मैं अचानक आदिल अंकल के घर पंहुच गई। घर में सिर्फ उसकी बेटी हुमा थी। न उसका अब्बा था और न अम्मी। बस हम दोनों बैठी बातें करने लगीं। वह बोली हाय महक बोलो क्या पियोगी।

मैंने कहा- “व्हिस्की पियूंगी…”

हम दोनों व्हिक्सी पीने लगीं और फिर बातें होने लगीं।

मैंने पूछा- “क्या हो रहा है आजकल, हुमा। कैसी कट रही है जिन्दगी…”

हुमा बोली- “बड़ी मस्ती है यार। मजा कर रही हूँ। ऐय्याशी कर रही हूँ।

कैसे ऐय्याशी कर रही हूँ…”

मैं- “कुछ मुझे भी बताओ तो मैं भी करना शुरू कर दूँ यार…”

हुमा- “यार ऐय्याशी का मतलब जवानी का पूरा मजा लूट रही हूँ मैं। खूब लण्ड पकड़ती हूँ और खूब चुदवाती हूँ…”

मैं- “माँ भी चुदवाती हो अपनी…”

हुमा- “हाँ बिल्कुल चुदवाती हूँ। बिना माँ का भोसड़ा चुदाये ऐय्याशी कैसे हो सकती है?”

मैं- “तेरी माँ भी तो फिर अपनी बिटिया की बुर चुदवाती होगी…”

हुमा- “हाँ चुदवाती है। मेरी अम्मी मेरी दोस्त है। मैं उसकी चूत का ख्याल रखती हूँ और वह मेरी चूत का ख्याल…”

मैं- “सुना है तू मेरे अब्बा से भी चुदवाती है?”

हुमा- “अरे यार मैं क्या करूँ? तेरा अब्बा का लौड़ा ही साला इतना शानदार है की उसे देखकर कौन भोसड़ी वाली अपनी बुर नहीं चुदवायेगी?”

मैं- “तूने कब देख लिया मेरे अब्बा का लण्ड माँ की लौड़ी हुमा?”

हुमा- “अच्छा तो तुझे पूरी कहानी नहीं मालूम क्या? सुन बुर चोदी महक, तेरा अब्बा और मेरा अब्बा दोनों भोसड़ी के बहुत दिनों से एक दूसरे की बीवी चोद रहे हैं। एक दिन मैंने तेरे अब्बा को अपनी अम्मी की बुर चोदते हुए देख लिया। मैं उस दिन कुछ नहीं बोली, और पूरी चुदाई छुपकर देखती रही। अगले हफ्ते फिर मैंने तेरे अब्बा को मेरी माँ चोदते हुए देखा। इस बार मेरी नजर तेरे अब्बा के लण्ड पर पड़ी। बस मेरी चूत में आग लग गई। मैं बस उसका लण्ड ही देखती रही…”

इतने में मेरी अम्मी बोली- “सुनो असलम मेरी बेटी भी जवान हो गई है। 21 साल की उम्र है उसकी। मैं चाहती हूँ की वह भी लण्ड का मजा लेना शुरू कर दे। तुम यार किसी दिन अपना लण्ड उसे पकड़ा दो न…”

यह सुनकर मेरी हिम्मत खुल गई। तीसरी बार जब तेरा अब्बा मेरे घर आया तो मैं थोड़ा ज्यादा चहकने लगी।

अम्मी बोली- “ुहमा थोड़ी शराब बनाकर ले आ…”

मैं जब शराब बनाकर लायी तो अम्मी उसका लण्ड ऊपर से दबा-दबाकर मजा ले रही थी।

फिर अम्मी ही बोली- “अरे हुमा इधर आ…”

मैं उसके पास गई तो उसने मेरा हाथ लण्ड पर रख दिया और कहा- “ले हुमा अंकल का लण्ड पकड़कर देख भोसड़ी की। इतनी बड़ी हो गई है तू बुर चोदी अब तो लण्ड पकड़ना सीख ले…”

अम्मी की मस्ती और गाली सुनकर मुझे जोश आ गया और मैंने तेरे अब्बा का लण्ड पकड़ लिया, महक। वह मेरा पहला दिन था जब मैंने अपनी अम्मी के सामने तेरे अब्बा का लण्ड पिया। अब तू बता महक तुझे मेरे अब्बा का लण्ड चोदकर कैसा लगा?

मैं- “हाय अल्ला, तू सब जानती है। तू जानती है की मैं तेरे अब्बा का लण्ड चोद चुकी हूँ?”

हुमा- “हाँ मैं जानती हूँ और अब मैं तुझसे सीखना चाहती हूँ की कैसे चोदा जाता है लण्ड। अभी तक तो मैंने तेरे अब्बा से अपनी चूत चुदवाई है लेकिन अब मैं तेरे अब्बा का लण्ड चोदूंगी…”

हम दोनों इसी बात पर खूब हँसी। फिर हम दोनों ने वही किया जो हुमा चाहती थी।

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अंकल के लण्ड पे बैठ जा

हमारे घर में गालियों से बात करने का चलन है। मेरी अम्मी जान, अब्बू जान, मेरी दीदी, चाचा जान, चाची जान, जीजू, फूफी जान, खालू जान, खाला जान सब लोग गाली देकर ही बात करते हैं। हमारा मानना है की गाली देने से आपस में प्यार बढ़ता है। हमारे घर में ही नहीं बल्कि हमारे सभी नाते रिश्तेदारों में, पास पड़ोस में, गली मोहल्ले में यही माहौल है। अब इसे अच्छा कहें या बुरा? पर जो है वह सबके सामने है। हम लोग इसी में लड़ती झगड़ती है, खुलकर अश्लील बातें करती हैं, और खूब एन्जॉय करती हैं।

एक दिन मैं जब घर आई तो सीधे अम्मी के बेडरूम में चली गई। मुझे बेड पर याकूब अंकल लेटे हुए मिले और अम्मी उनकी लुंगी के अंदर हाथ डाले हुए उनका लण्ड सहलाती हुई दिखाई पड़ी। मैंने अंकल को आदाब बोला और उसने जबाब में मुझे आदाब कहा।

अम्मी मुझे देखकर बोली- “कहाँ से अपनी माँ चुदाकर आ रही है तू फहमीदा?”

मैंने जबाब दिया- “अरी अम्मी, मैं बहनचोद अपनी सहेली के घर गई थी…”

वो बुरचोदी अपनी माँ चुदा रही थी। मुझसे बोली- “अरे यार अब आ गई तू तो मेरी माँ का भोसड़ा देखकर जा…"

मैंने कहा- “यार भोसड़ा क्या देखना? मैं किसी और दिन देख लूंगी, मुझे जरा जल्दी है…”

लेकिन वह पीछे ही पड़ गई बोली- “अरी फहमीदा मेरी माँ का चुदता हुआ भोसड़ा देखकर जा…”

तब मेरा मन वाकई देखने का हो गया। मैं सोचने लगी की मुझे लण्ड भी देखने को मिलेगा जो उसकी माँ चोद रहा होगा। अब मैं उसकी माँ का चुदता हुआ भोसड़ा देखने लगी अम्मी। इसी में थोड़ी देर हो गई।

अम्मी बोली- “तो तूने उसका लौड़ा देखा बहनचोद। कैसा था उसका लण्ड जरा बता मुझे?”

मैंने कहा- “बड़ा मस्त लौड़ा था अम्मी, मोटा-मोटा लंबा चौड़ा, और बिना झांट वाला लण्ड बड़ा सुन्दर लग रहा था भोसड़ी का…”

अम्मी बोली- “तो तूने पकड़कर देखा उसे?”

मैंने कहा- नहीं अम्मी, पकड़ ही तो नहीं पायी। बड़ा मन था पकड़ने का, पर देर हो रही थी।

अम्मी बोली- “तो बुर चोदी फहमीदा बैठ जाती उसके लण्ड पे। थोड़ा और वक्त लग जाता तो क्या तेरी गाण्ड फट जाती?”

मैंने कहा- मैं रुकी नहीं बहनचोद यही तो गलती की, अम्मी। रुक जाती तो लण्ड का मजा लेकर आती।

अम्मी बोली- देख फहमीदा अब तू जवान हो गई है, 21 साल की है तू। अब जहाँ लण्ड देखाकर वहाँ फौरन उसपर बैठ जाया कर। लण्ड भोसड़ी का अपने आप घुस जाएगा तेरी चूत में। अब तो लण्ड का पूरा-पूरा मजा लेना शुरू कर दे तू। अब तू भी मेरी तरह भकाभक चुदाया कर अपनी चूत। इसमें कोई शर्म करने की जरूरत नहीं है। जवानी में लण्ड का मजा नहीं लेगी तो कब लेगी?”

दोस्तों, अब तो आप जान ही गये होंगें की मेरी अम्मी कितनी मादरचोद चुदक्कड़ औरत है। उस भोसड़ी वाली को लण्ड के बीच में रहना बहुत अच्छा लगता है। अभी देखो न अंदर ही अंदर याकूब का लौड़ा हिला रही है माँ की लौड़ी। अपने सारे कपड़े उतारकर बैठी है हरामजादी।

मैं कमरे के बाहर जाने लगी तो अम्मी बोली- “अरी फहमीदा, तू भोसड़ी की कहाँ जा रही है? इधर आ बुरचोदी और बैठ जा अंकल के लण्ड पर…” ऐसा कहकर उसकी लुंगी खींच ली तो लौड़ा टनटना कर मेरे सामने आ गया।

लौड़ा देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया। मेरे मुँह से निकला- “वाओ, कितना खूबसूरत लौड़ा है अम्मी अंकल का। अम्मी, भोसड़ी का लण्ड तो 8” इंच से बड़ा है और मोटा भी अच्छा खासा है। मैं बैठूंगी तो मेरी चूत फट जाएगी अम्मी और कहीं गाण्ड में घुस गया तो उसके चीथड़े उड़ जायेंगें बहनचोद…”

अम्मी ने कहा- “देख फहमीदा, चूत को तो कोई भोसड़ीवाला फाड़ ही नहीं सकता लण्ड मादरचोद चाहे जितना बड़ा हो। खुदा ने जितने लण्ड बनाये हैं, वो सब बुर में घुसने के लिए बनाये हैं, बाहर रखने के लिए नहीं बनाये…”

मैंने कहा- “तू अपने भोसड़े में पेलेगी न यह लौड़ा…”

अम्मी बोली- “मैं अपने भोसड़े में नहीं तेरी बुर में पेलूँगी इसका लण्ड फहमीदा। मैं इसीलिए तेरा इतजार कर रही थी। आज मैंने याकूब को तेरी बुर चोदने के लिए बुलाया है…”

मैंने कहा- “अम्मी मैं थोड़ा चाट लूँ लण्ड, थोड़ा चूस लूँ इसे, थोड़ा लौड़े मियां को हिला-हिलाकर देख लूँ फिर इसकी सवारी करती हूँ अम्मी…”

कहकर मैं मस्ती से चाटने और चूसने लगी लण्ड। मुझे बड़ा मजा आया उसके बाद मैंने अपनी जीन्स खोली और लण्ड पर बैठ गई। लौड़ा सट्ट से मेरी चूत में घुस गया क्योंकी मेरी चूत उसका लण्ड देखकर पहले ही गीली हो चुकी थी।

मैंने झुक कर अंकल की चुम्मी ली और कहा- “भोसड़ी के तू कितनी बार मेरी माँ का भोसड़ा चोद चुका है? इतने दिनों के बाद तुझे मेरी चूत की याद आई साले तुझे बिटिया की बुर मादरचोद। इससे पहले मुझे चोदने में तेरी गाण्ड फटती थी क्या?”

याकूब बोला- “नहीं फहमीदा, मैं तो पहले ही चोद लेता तुझे लेकिन तेरी अम्मी ने कहा कि याकूब तुम मेरे सामने ही चोदना मेरी बेटी की बुर, और इसीलिए आज उसने मुझे बुला लिया…”

मैंने कहा- “तो आज तेरी बीवी कौन चोदेगा?”

याकूब बोला- “आज तेरा अब्बू चोदेगा मेरी बीवी। उसे भी तेरे अब्बू से चुदवाने में बड़ा मजा आता है…”

मैंने कहा- इसका मतलब आज तुम मेरी माँ जरूर चोदोगे।

याकूब बोला- हाँ फहमीदा हम दोस्तों में यह सब चलता रहता है। हम लोग एक दूसरे की बीवी चोदा करते है।

मैंने कहा- तो अब तुम एक दूसरे की बेटी भी चोदोगे, भोसड़ी के याकूब?

याकूब बोला- एक दूसरे की बेटी चोदने में क्या हर्ज़ है फहमीदा? लड़कियां भी तो भोसड़ी की एक दूसरे के अब्बू से चुदवाया करती है। अब देखो न तू मुझसे चुदवा रही हो और मेरी बेटी उधर तेरे अब्बू से चुदवा रही है। देखो बेटी फहमीदा, जवानी में एक ही रिश्ता सबसे प्यार भरा होता है और सबसे मजबूत होता है। वह है लण्ड और चूत का रिश्ता। हम लोग चोदने में कोई दूसरा रिश्ता नहीं देखते, बस बुर देखते हैं। जिसकी भी बुर दिखी वहीं घुसेड़ दिया लण्ड और चोद लिया। इसी तरह हमारी बेटियां, बहुएं, बीवियां भी कोई और रिश्ता नहीं देखती बस लण्ड देखती हैं। जिसका भी लण्ड देखा फौरन घुसेड़ लिया अपनी चूत में और चुदा लिया…” और बात करते-करते याकूब ने सट्ट से पेल दिया अपना लण्ड मेरी चूत में।

मैं चिल्ला पड़ी- “अबे भोसड़ी के याकूब, तुझे लड़की चोदना नहीं आता भोसड़ी के। ये मेरी चूत है माँ के लौड़े, मेरी माँ का भोसड़ा नहीं है जो गप्प से घुसा दिया लण्ड एक ही धक्के में। जरा तमीज से चोद मेरी बुर नहीं तो मैं तेरी गाण्ड में घुसा दूँगी बाबाजी का लण्ड…”

मेरी अम्मी बैठी हुई मुश्कुराने लगी। अंकल मादरचोद फिर धीरे-धीरे लण्ड मेरी चूत के अंदर-बाहर करने लगा।

मैंने कहा- “अब भोसड़ी के जल्दी-जल्दी चोदने में क्या तेरी माँ चुदी जा रही है। जरा गाण्ड से जोर लगाकर चोद जैसे जुम्मन भोसड़ी को चोदता है…”

अम्मी बोली- “हाय अल्ला, क्या तू जुम्मन से भी चुदवाती है फहमीदा?”

मैंने जबाब दिया- “हाँ अम्मी अब मेरे मुँह से सच्चाई निकल ही गई तो बता देती हूँ की मैं जुम्मन अंकल से कई बार चुदवा चुकी हूँ। और अब भी जब मौका मिलता तो चुदवा लेती हूँ…”

अम्मी बोली- “पर फहमीदा उसका लण्ड तो याकूब के लण्ड से बड़ा है बेटी और मोटा भी। तेरी चूत कैसे बर्दास्त कर लेती है उसका लण्ड बहनचोद?”

मैंने कहा- “अम्मी अभी-अभी तुमने कहा की लौड़ा कैसा भी हो, कितना भी मोटा हो, चूत उसे अपने अंदर घुसाकर ही मानती है। और हाँ चूत कभी फटती नहीं है बस फैल जाती है…”

अम्मी बोली- “हाय रब्बा… तू तो मुझसे ज्यादा जानती है बुरचोदी फहमीदा… अब तू यह भी बता बुरचोदी फहमीदा की याकूब और जुम्मन के अलावा और किस-किस से चुदवाती है तू अपनी बुर?”

मैंने कहा- “अम्मी भोसड़ी की पहले तू बता की जुम्मन और याकूब के अलावा और किस-किस से चुदवाती है तू अपना भोसड़ा?” बस इसी बात पर हम दोनों हँसने लगीं और मैंने चुदवाने की स्पीड और तेज कर दी।

अम्मी बोली- “फहमीदा तू याकूब से चुदाने के बाद मुझे बताना की तूने जुम्मन से कब और कैसे चुदवाना शुरू किया?”

चुदाई खत्म होने के बाद मैंने अपनी सहेली आसिफा को फोन लगा दिया और पूछा- “यार तेरी शादी के तो अभी 6 महीने हुए हैं, और तू एक बार भी अपने मायके नहीं आई। माँ चुदा रही है क्या तू अपनी भोसड़ी की? कोई तेरी गाण्ड में डंडा कर रहा है क्या? झांटें उखाड़ रहा है क्या तेरी? तू आती क्यों नहीं माँ की लौड़ी?”

आसिफा बोली- “यार मुझे यहाँ चुदाने से फुर्सत ही नहीं मिलती…”

मैं बोली- “वाओ… तेरा शौहर तुझे इतना चोदता है की तुझे यहाँ आने की फुर्सत नहीं है…”

आसिफा बोली- “यार शौहर तो बहुत कम चोदता है बाकी लोग चोदते है। मैं 6 महीने से इन्हीं लोगों से चुदा रही हूँ। कभी छोटा देवर चोदता है, कभी बड़ा देवर चोदता है, कभी छोटा जेठ चोदता है, कभी बड़ा जेठ चोदता है, कभी नंदोई, कभी मेरे मियां के दोस्त, कभी पड़ोसी, तो कभी इन सबके दोस्त चोदते हैं…”

मैंने कहा- “तू अभी क्या कर रही है बुरचोदी?”

आसिफा बोली- “अभी तो मैं अपने ससुर के लण्ड पर बैठी हूँ। पूरा का पूरा लण्ड मेरी चूत में घुस चुका हैं और मैं झुक कर चुदवा रही हूँ। मुझे ऐसा लग रहा है की कोई न कोई पीछे से मेरी गाण्ड में लण्ड पेल देगा। वैसे फहमीदा एक बात तो है की मैं जबसे अपनी ससुराल आई हूँ तबसे चुदाने का बेहद मजा मिल रहा है। रोज-रोज नये पुराने लण्ड पकड़ती हूँ, उन्हें खूब चाटती हूँ चूसती हूँ और फिर मस्ती से चूत में घुसाकर चुदवाती हूँ। मेरे साथ मेरी ननद, मेरी जेठानी, मेरी देवरानी और यहाँ तक की मेरी सास भी भोसड़ी वाली गैर मर्दों से खूब चुदवाती है। मैं तो कहती हूँ की तू भी जल्दी से अपनी शादी कर ले। फिर ससुराल में ले चुदाई का असली मजा। ससुराल होती ही है बुरचोदी बुर चुदाने के लिए। तू भी मेरी तरह अपनी माँ का भोसड़ा चुदवाती है वहाँ अपनी सास का भोसड़ा चुदवाना…”

एक दिन अम्मी बोली- “अरी फहमीदा तूने बताया की नहीं की तूने कैसे और कब चुदवाया जुम्मन से?”

मैंने कहा- अरे अम्मी तुम्हें मालूम है की जुम्मन की बेटी एक कालगर्ल बन चुकी है। एक ऊँचें स्टाइल की रंडी बन चुकी है, भोसड़ी वाली। जुम्मन मादरचोद अपनी बिटिया की बुर चुदवाता है। अब सुनो मैं तुम्हें पूरा किस्सा सुनाती हूँ-

एक दिन मैं जुम्मन अंकल के घर चली गई। मैंने देखा की उसके कमरे में जुम्मन, उसकी बेटी नादिरा और एक आदमी बैठा है। अंकल और नादिरा खुश हो गये।

तब नादिरा ने बताया- “फहमीदा यह हैं मेरे नासिर अंकल, मेरे अब्बू के दोस्त हैं…”

वो लोग नाश्ता कर ही रहे थे तो मैं भी शामिल हो गई। अंकल बोला- “अरे नादिरा थोड़ा व्हिस्की ले आ न भोसड़ी वाली और सबको पिला…”

मैं समझ गई इसके घर में भी गाली देने का चलन है। नादिरा व्हिस्की लायी और सबको पैग बनाकर हम लोगों ने चियर्स कहकर पीना शुरू कर दिया। इतने में उसने सिगरेट जलायी और सबको दिया। वैसे मैं सिगरेट पीती नहीं हूँ, पर कभी-कभी परहेज भी नहीं करती। तो मैं भी पीने लगी सबके साथ।

नादिरा ने कहा- “देख अब्बू, तू मादरचोद लड़कियां चोदता है लेकिन कभी-कभी बड़ी बेरहमी से उनकी गाण्ड भी मार देता है। तू गाण्ड चोदना छोड़ दे, सिर्फ बुर चोदा कर। मैं तो कभी किसी से गाण्ड नहीं मरवाती…”

तब मुझे मालूम हुआ की जुम्मन लड़कियां चोदता है।

नादिरा आगे बोली- “हाय फहमीदा तुम बुरा नहीं मानना हम लोग खुलकर बातें करते हैं। ये मेरा अब्बू बहनचोद बड़ा हरामी है। इसका लौड़ा खुदा ने बड़ा लंबा चौड़ा बना दिया है। मोटा भी साला बहुत है। इसे अपने लण्ड पर बड़ा गुमान है। इसीलिए लड़कियां क्या लड़कियों की माँ भी इससे चुदवाने आती हैं। ये तो माँ का लौड़ा मेरी भी बुर चुदवाता है। मेरी बुर चुदवा-चुदवाकर मुझे इसने पूरी रंडी बना दिया है। अब देखो न ये नासिर भोसड़ी का मुझे चोदने आया है…”

फिर वो उठी और नासिर के पैजामे के अंदर अपना हाथ घुसेड़ दिया और अंदर ही अंदर लण्ड सहलाने लगी। थोड़ी देर में उसने पैजामा नीचे घसीटा और लण्ड मुझे दिखाकर बोली- “ले तू भी देख ले फहमीदा इसका लण्ड…”

लेकिन मेरे मन में उसके अब्बू का लण्ड देखने की ज्यादा इच्छा थी। फिर भी मैंने हाथ बढ़ाकर नासिर का लण्ड पकड़कर देखा। मैं बोली- “वाओ, नादिरा है तो बड़ा मस्त लौड़ा। ये तो अपने इंग्लिश टीचर इब्राहिम के लण्ड की तरह है…”

नादिरा बोली- “हाँ यार तूने सही याद दिलाया और पहली बार ही हम दोनों ने मिलकर पकड़ा था उसका लौड़ा, फहमीदा। अच्छा अब तू लगे हाथ मेरे अब्बू का भी लण्ड देख ले…”

मैं तो यही चाहती ही थी। मैंने जब जुम्मन अंकल का लौड़ा खोलकर बाहर निकाला तो मेरी आँखें खुल गई बहनचोद। इतना हलब्बी लण्ड, इतना मोटा तगड़ा लण्ड मैं पहली बार देख रही थी, अम्मी। बस मैं उसी दिन जुम्मन के लण्ड को दिल दे बैठी। मैं जी जान से प्यार करने लगी उसके लण्ड से। फिर तो नादिरा ने पेल दिया अपने अब्बू का लण्ड मेरी चूत में और मैं चुदवाने लगी। हाँ पहले दर्द तो बहुत हुआ था। मैं चिल्ला भी पड़ी थी लेकिन बाद में खूब मजा आने लगा। उसके बाद मैंने कई बार उसका लण्ड पकड़ा और कई बार चुदवाया भी।

तो ये थी मेरी कहानी… अब तुम बताओ की तुम कब से और कैसे चुदवाने लगी जुम्मन से अपना भोसड़ा, अम्मी?”

अम्मी बोली- मेरी भी कहानी बड़ी मस्त है बुर चोदी फहमीदा। लेकिन मैं किसी और दिन बताऊँगी। अभी मैं अपनी झांटें बनवाने ब्यूटी पार्लर जा रही हूँ।

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अंकल के लण्ड पे बैठो बेटी

अम्मी- “देखो न सारा, कितना मस्त होकर टनटना रहा है, तेरे अंकल का लण्ड। बिल्कुल सांप की तरफ अपना फन खड़ा किये हुए फुफकार मार रहा है। जरा सा छूते ही करेंट मार रहा है, बहनचोद। कितना लंबा चौड़ा और सख्त है तेरे जुम्मन अंकल का लौड़ा। बेटी 9” इंच से कम नहीं है बेटी इसका लौड़ा। सुपाड़ा तो बिल्कुल तोप का गोला जैसा है मादरचोद। जल्दी से आओ और अपने अंकल के लण्ड पे बैठ जाओ, बेटी। बड़ा मजा आएगा तुम्हें…”

सारा- “ऐसा कर अम्मी आज तू ही बैठ जा अंकल के लण्ड पे बहनचोद। अभी मुझे थोड़ा टाइम लगेगा। मैं बाथरूम में अपनी झांटें बना रही हूँ…”

अम्मी- “अरे जल्दी आ न… रोज-रोज ऐसा लण्ड नहीं मिलता बेटी और अगर मिलता है तो इस तरह खड़ा नहीं होता। आज तो बड़ा मस्त लग रहा है बहनचोद तेरे अंकल का लण्ड…”

सारा- “अच्छा ठीक है, अम्मी अगर तू कह रही है तो मैं झांटें बनाकर अभी आ जाती हूँ। तब तक तू लण्ड हिला-हिलाकर मजा ले…”

मैं जैसे ही बाथरूम से निकली तो देखा की मेरी अम्मी ज़ाहिरा बेगम अंकल का लौड़ा हिला भी रही है और उसे चूम भी रही है। उसकी चूचियां एकदम नंगी हैं, और पेटीकोट का नाड़ा खुला है, लेकिन पेटीकोट नहीं खुला है।

सारा बोली- “अरे अम्मी, अपना बहनचोद भोसड़ा क्यों छुपाकर रखी हो। उसे भी अंकल को दिखाओ न… जाने कब से अंकल ने तेरा भोसड़ा नहीं देखा…”

अम्मी- “तू भी बुर चोदी सारा अपनी चूचियां छुपाकर आई है, और अपनी चूत भी खोलकर नहीं आई। अगर तू भी नंगी हो जा अंकल की तरह तो लौड़ा भोसड़ी का और टन्ना उठेगा न… तब तुझे बैठने में ज्यादा मजा आयेगा भोसड़ी वाली सारा…”

सारा- “अगर मजा लेना है तो तू ही बैठ जा न और चुदा ले अपना भोसड़ा पहले। जैसे कल तू मेरे मियां के लण्ड पे बैठ गई थी…”

अम्मी- “तेरे मियां के लण्ड की और बात है सारा। उसे जितना हिलाओ उतना और बढ़ता जाता है। कल मैं जब उसे हिला-हिलाकर मस्ती कर रही थी तो मुझे लण्ड इतना पसंद आया की फिर मैं अपने आपको रोक नहीं पाई और फिर बैठ गई तेरे मियां के लण्ड पर बेटी…”

सारा- “कोई बात नहीं अम्मी, लण्ड है ही इसी काम के लिए। मैं भी तो अब्बू के लण्ड पर बैठती हूँ। अभी तुम अंकल के लण्ड पर बैठो और चुदाओ, मैं बाद में चुदवा लूंगी। तब तक मैं असद का लण्ड पकड़े-पकड़े अपनी चूत में उससे मेंहदी लगवा लेती हूँ। अभी अपनी पूरी झांटें साफ करके एकदम चिकनी करके आ रही हूँ अपनी चूत…”

इधर मैंने असद को फोन करके बुलाया उधर अम्मी अंकल लण्ड पर बैठकर चुदवाने लगी अपना भोसड़ा। असद आया तो उसने मेरी अम्मी को चुदवाते हुए देखा और मुश्कुराने लगा।

मैंने कहा- “क्या तुझे भी मेरी का भोसड़ा चोदना है?”

असद बोला- “नहीं यार, मेरा इतना बड़ा लौड़ा नहीं है…”

मैंने वाकई उसका लौड़ा कभी देखा ही नहीं बस सुना है की असद लड़कियों की चूत में मेंहदी लगाता है और उन्हें अपना लण्ड पकड़ाता है। मैं बोली- “यार असद तुम मेरी चूत में तीन मोटे खड़े लण्ड बनाते हुए मेंहदी लगा दो। उसके पहले अपने सारे कपड़े खोल दो। मैं तेरा लण्ड पीती रहूंगी और तुम मेंहदी लगते रहो…”

उधर अम्मी अपना भोसड़ा चुदाने में मस्त थी और मैं इधर लौड़ा पीने में।

अचानक मैंने कहा- “असद तेरा लण्ड तो अंकल के लण्ड के बराबर लगता है रे। तू तो मेरी माँ का भोसड़ा चोद सकता है…”

तब तक जाने कैसे मेरी पड़ोस की साज़िया आंटी आ गई, और बोली- “हाँ… असद तो भोसड़ा चोदता है सारा। अभी कल ही मेरा भोसड़ा चोदा इसने। उसके बाद मेरी बिटिया की बुर चोदी तब ये गया वहाँ से। असली बात तो यह है की असद ने लड़कियां चोदने के लिए और उनकी माँ चोदने के लिए ही मेहंदी लगाना सीखा है। यह साला बड़ा लकी है, जाने कितनी लड़कियों की बुर चोदता है हर रोज, और जाने कितनी मम्मियों का भोसड़ा भी चोदता है बहनचोद…”

तब तक मेरी अम्मी बोली- “बेटी सारा इससे कहो कल मेरा भी भोसड़ा चोद ले…”

मैंने कहा- “हाँ अम्मी। मैं तेरा भोसड़ा चुदवा दूँगी, तू बिल्कुल चिंता न कर अभी अंकल से भकाभक चुदवा ले…”

आंटी बोली- “अरी सारा जानती है तू मैं किसलिए आई हूँ तेरे पास? मैं तेरे मियां से अपनी बिटिया की बुर चुदवाने आई हूँ…”

मैं बोली- “तो फिर अपनी बिटिया को आज रात में भेज देना। मैं उसकी बुर रात भर चुदवाकर कल सवेरे वापस भेज दूँगी…”

आंटी बोली- “नहीं सारा, मैं अपने सामने चुदाऊँगी अपनी बिटिया की बुर। क्योंकी वह भी अपने सामने चुदवाती है अपनी माँ का भोसड़ा…”

मैंने कहा- “फिर तो ठीक है आंटी, आज रात को तुम दोनों मेरे ही घर में रहना। इधर मेरा अब्बा भी नहीं है और उधर शौहर भी नहीं है आंटी…”

उसके बाद मैंने असद का लौड़ा चाटते हुए मेंहदी लगवाई और बाद में उसके लण्ड का मारा सड़का और मस्ती से पिया उसका लण्ड। एक घंटे के बाद असद भी चला गया और जुम्मन भी चला गया मेरी माँ चोदकर। शाम को करीब 8:00 बजे मेरा मियां साजिद ख़ान आ गया उसके साथ एक और जवान लड़का था। मैं उसे पहचानती नहीं थी।

मेरे मियां ने उससे परिचय कराया। बोला- “ये है दोस्त रकीब मियां…” फिर उससे कहा- “रकीब इससे मिलो ये है मेरी बीवी सारा ख़ान और ये हैं इसकी अम्मी यानी मेरी सास…”

सारा जानती हो आज मैं अपने आफिस नहीं गया। आज मैं रकीब के घर चल गया था। बातों ही बातों में रकीब ने मुझसे अपनी बीवी चुदवा ली। मैंने इसकी बीवी दो बार इसी के सामने चोदी। तब मैंने कहा- “यार अब तुम मेरे घर चलो और मेरी बीवी चोदो और रात भर चोदो। मैं इसे लेकर आ गया हूँ। आज तुम इससे खूब मस्ती से चुदवाओ…”

मैं बोली- चलो यह अछ ही हुआ। आज मैंने तेरे लिए एक नई चूत का इंतजाम कर लिया है। मेरे पड़ोस में साजियां आंटी रहती हैं। आज तुम उसी के सामने उसकी बिटिया की बुर चोदो। वह तुमसे अपनी बिटिया चुदवाने के लिए बड़ी बेताब है।

साजिद बोला- “और अगर मैंने उसकी बेटी चोदने के साथ-साथ उसकी माँ भी चोद दी तो?”

मैंने कहा- “तो बहुत अहशानमंद होगी। क्योंकी वह भी तुमसे चुदवाना चाहती है…”

थोड़ी देर में साज़िया आंटी अपनी बेटी तराना के साथ आ गई। मैंने उन दोनों को अपने मियां से मिलवाया। वह तराना को देखकर बड़ा खुश हुआ।

तराना बड़ी मदमस्त और गदराई हुई लड़की थी। बड़ी-बड़ी चूचियां, बड़े-बड़े चूतड़ और मस्त बाहें थी, उसकी चेहरा खूबसूरत और उसकी मुश्कुराहट तो बड़ी सेक्सी थी। मेरा मियां तो एकदम लट्टू हो गया।

तराना बोली- “हाय जीजाजी, तुम तो भोसड़ी के बड़े स्मार्ट हो…”

आंटी बोली- “बेटा बुरा मत मानना, मेरी बेटी को गाली देने की आदत है। वह प्यार से बात करती है तो गाली देती है और गुस्से में तो देती ही है। बड़ी मादरचोद है मेरी बुर चोदी बेटी। इस भोसड़ी वाली को अपनी माँ की चूत चुदाने का बड़ा शौक है बेटा…”

मेरा मियां बोला- “हाँ आंटी। अब मैं समझ गया की आपकी बेटी क्यों गालियां देती है? जब माँ इतनी अच्छी और मस्त गालियां देती है तो बेटी उससे ज्यादा अच्छी और मस्त गालियां देगी ही…”

आंटी बोली- “हाँ बेटा। मर्दों को लड़कियों के मुँह से गालियां सुनना बहुत अच्छा लगता है…”

मैं बोली- हाँ आंटी बात तो सही है। तराना तो बड़ी बढ़िया गालियां दे लेती है। गालियां देते हुए कई बार सुना है।

आंटी बोली- “बेटा साजिद, जब से मैंने सुना है की तेरे लण्ड बड़ा दमदार है, तब से मेरे भोसड़ा में आग लगी है। मेरे भोसड़ा से ज्यादा मेरी बेटी की चूत में आग लगी है। आज तुम मेरी बेटी चोदो बेटा मेरे सामने। जितना चोद सको उतना चोदो…”

तब तक मैंने देखा की आंटी के पीछे दो लड़के खड़े हैं।

आंटी बोली- “अरी सारा इनसे मिलो ये है अली और अहमद। मैंने इन्हें बुला लिया है। जब तेरा मियां मेरी बेटी चोदेगा तो ये दोनों हमें चोदेंगें।

तब तक पीछे से मेरी अम्मी बोली- “नहीं साज़िया एक मेरी बेटी चोदेगा और एक बेटी की माँ चोदेगा। तुम लोग चोदा-चोदी करोगी तो मैं क्या तुम सबके धक्के गिनूंगी? अरे भोसड़ी वालियों मैं भी चुदाऊँगी अपना भोसड़ा। मैं चुदाने में किसी से कम हूँ क्या?” ऐसा कहकर अम्मी, अली के लण्ड पर हाथ रखकर रगड़ने लगी।

मैं अहमद का लौड़ा पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी। उधर मेरा मियां का लौड़ा तराना अपने दोनों हाथों से टटोलने लगी और साज़िया आंटी बहनचोद रकीब के लण्ड पर हाथ फेरने लगी।

बस 5 मिनट में ही हम सब लोगों के कपड़े बहनचोद बाहर आ गए। सबसे पहले मैं नंगी हुई तो सारे मर्द मुझे आँखें फाड़-फाड़कर देखने लगे। मेरी चूची, मेरी चूत, मेरी गाण्ड पर नजरें घुमाने लगे। इसके बाद तराना भोसड़ी वाली नंगी हो गई। उस खूबसूरत लड़की को नंगी देखकर सबके लण्ड उछलने लगे। मेरा मियां तो उसे घूरे ही जा रहा था।

मैं बोली- “अबे माँ का लौड़ा तू इतना बेताब क्यों हो रहा है? वह तो तुमसे चुदवाने ही आई है बुर चोदी…”

इधर आंटी ने जब कपड़े खोले तो उसका भोसड़ा चमचमा उठा। पंजाबी पराठा जैसा आंटी का भोसड़ा सारे मर्दों को भा रहा था। सबकी ललचाई आँखें साफ-साफ बता रही थी की वे सब साले भोसड़ा जरूर चोदेंगे। उसके बाद सबने मेरी अम्मी को नंगी होते हुए देखा। उसका कचौड़ी जैसा भोसड़ा सबने खूब पसंद किया। सबने यह ठान लिया की आज सारा की माँ का भोसड़ा जरूर चोदूंगा।

अम्मी ने अली का लौड़ा हिला-हिलाकर खड़ा कर दिया। लौड़ा साला हिनहिनाने लगा। अम्मी उसे चाटने लगी। मुझे अहमद का लण्ड पसंद आ गया। मैं भी अपनी जबान निकालकर लण्ड का सुपाड़ा चाटने लगी। उधर आंटी मेरे मियां के दोस्त का लण्ड पकड़कर बड़ा फख्र महसूस कर रही थी। सब बुर चोदी औरतों के हाथ में एक-एक नया लण्ड आ गया। सब मस्ती में आ गई और सबकी बुर गरम हो गई, सबकी सब मादरचोद एकदम से चुदासी हो गई।

सामने चार-चार लण्ड खड़े होकर चूत को ललकार रहें हो तो कौन भोसड़ी वाली चुदासी नहीं हो जाएगी? सब मर्दों की नजर सबकी चूची और चूत पर थी। सब साले बेटीचोद सबकी बुर चोदने की फिराक में थे। उधर सब औरतों की नजर सब मर्दों के टनटनाते हुए लण्ड पर टिकी थी। सबके मन में यही चल रहा था की आज इन चारों लण्डों से चुदवाकर ही घर जाऊँगी।

अचानक मेरी अम्मी ने ऐलान किया- “तुम सब भोसड़ी वालियों अपने-अपने मर्द को नीचे फर्श पर चित्त लिटाओ, और उसके खड़े लण्ड पर ऐसे बैठ जाओ की लण्ड तेरी चूत में घुस जाए गाण्ड में नहीं, और फिर भकाभक चोदो लण्ड…”

मैं तो जा ही रही थी यही करने। मुझे लण्ड पर बैठकर चुदाने में खूब मजा आता है। मैंने अहमद को चित लिटाया और उसके लण्ड पे धच्च से बैठ गई। लौड़ा साला पूरा का पूरा घुस गया मेरी बुर में। आंटी ने भी ऐसा ही किया और रकीब के लण्ड पे गच्च से बैठ गई। अम्मी तो फटाफट अली के लौड़े पर बैठकर लण्ड चोदने भी लगी। आंटी की बेटी तराना ने जैसे अपने चूतड़ मेरे मियां के लण्ड पे रखा तो उसने इसकी कमर पकड़कर नीचे खींच लिया।

लण्ड धचाक से उसकी बुर में घुसा तो तराना चीख पड़ी- “उई माँ फट गई मेरी चूत बुर चोदी अम्मी। इसका लौड़ा भोसड़ी वाला बड़ा मोटा है अम्मी। इसने मादरचोद ने एक ही बार में घुसा दिया पूरा लौड़ा। बड़ा बेरहम है जीजा और जीजा का लण्ड। मेरी चूत चूत है कोई भोसड़ा नहीं। साला अपनी माँ का भोसड़ा समझ के पेल दिया लण्ड…”

कहकर दो-तीन बार तराना ने अपनी गाण्ड उठा-उठाकर लण्ड को थोड़ा आगे-पीछे किया फिर वह खुद बोली- “हाँ अब ठीक है भोसड़ी के जीजू अब जल्दी-जल्दी चोद मेरी चूत, जितना तेरी गाण्ड में दम हो…”

इस तरह हम चारों गचागच चुदवाने लगी लण्ड से। पूरा कमरा चुदाई की आवाजों से और हम लोगों की मस्ती से भर गया। इस तरह की सामूहिक चुदाई का मजा हम सबको मिलाने लगा।

मैं अपनी माँ का भोसड़ा भी चुदवा रही थी और अपनी चूत भी। तराना भी अपनी माँ चुदाने में बड़ी एक्सपर्ट है देखो न किस तरह वह अपनी माँ का भोसड़ा चुदता हुआ बड़े गौर से देख रही है। उसकी माँ अपनी बेटी की चुदती हुई बुर देख-देखकर फख्र महसूस कर रही है।

आंटी बोली- “सारा बिटिया तुमने मेरी तमन्ना पूरी कर दी। मैं अपने सामने तेरे मर्द से अपनी बेटी चुदवाना चाहती थी, और मैं अब उसे चुदते हुए देख रही हूँ…”

मैंने कहा- “आंटी अभी तो मेरा मियां तेरा भोसड़ा भी चोदेगा…”

तब तक अम्मी बोली- “हाय तराना अब तू अहमद के लण्ड पे बैठ जा और अपने जीजा के लण्ड पर अपनी अम्मी को बैठा दे…” तराना ने ऐसा ही किया।

अब मेरे मियां का लण्ड आंटी के भोसड़े में घुस गया। तराना मेरे पास आई और अहमद के लण्ड पर बैठ गई। मैं उठी और अली के लण्ड पे बैठ गई और अम्मी को रकीब के लण्ड पे बैठा दिया। लण्ड बदल गये भोसड़े बदल गये। सबको फिर नये लण्ड पर बैठने का मौका मिला।

तराना बोली- “हाय सारा तुम भी गजब का चुदवाती हो अपनी माँ का भोसड़ा। और तेरी माँ का भोसड़ा भी साला अभी तक तरो-ताजा बना है जबकी जाने कितने लोगों से चुदवा चुका है अब तक?”

मैंने कहा- “हाँ मेरी बहन की लौड़ी तराना। एक बात तू नोट कर ले जितना मजा अपनी बुर चुदाने में आता है उतना ही मजा माँ का भोसड़ा चुदाने में आता है…”

तराना बोली- “हाँ तू ठीक कह रही है। बल्कि मुझे तो अपनी माँ का भोसड़ा चुदाने में ज्यादा मजा आता है। मैं कल फिर जाऊँगी माँ का भोसड़ा चुदाने…”

एक दिन मैं जब घर आई तो देखा की अम्मी के कमरे में 4 जवान लड़के बैठे हैं।

मुझे देखकर अम्मी बोली- “अरी सारा तुम्हें इन लड़कों से मिलवाती हूँ। ये है बहनचोद शैफ, ये है भोसड़ी का सफीक, ये है माँ का लौड़ा रफीक और ये है बहन का लण्ड अदनान। ये चारों साले मेरी बहन की बुर चोदने वाले है सारा…”

मैंने कहा- “इसका मतलब मेरी खाला इन चारों से चुदवाती है…”

अम्मी बोली- हाँ बेटी, तेरी खाला बड़ी चुदक्कड़ औरत है वो रात में तीन-चार लण्ड के साथ ही सोती है बुर चोदी। मैंने उसी से कहकर इन्हें बुलाया है। अभी बातचीत में मुझे मालूम हुआ की ये चारों साले एक दूसरे की बीवी चोदते हैं। अपनी बीवी कोई नहीं चोदता, सब साले अपनी बीवी चुदवाते हैं…:

तब मैंने कहा- “ये तो बहुत बढ़िया बात है। मैं भी अपनी बेटी की शादी उसी से करूंगी जो अपनी बीवी चुदवाता हो। इससे मेरी बेटी को कभी चोदने वालों की कमी महसूस नहीं होगी। तू जा जल्दी से कपड़े खोलकर आ जा…”

मैं जब वापस अपने कपड़े उतारकर आई तो देखा की अम्मी बिल्कुल नंगी-नंगी एक लड़के के लण्ड बैठी हुई है। एक लण्ड मुँह में लेकर चूस रही है और एक लण्ड दूसरे हाथ से पकड़कर हिला रही है। चौथा लण्ड उसके कंधे पर रखा हुआ है। मैंने फौरन अम्मी के हाथ से दो लण्ड छीन लिया और एक लण्ड पर बैठकर एक लण्ड पीने लगी। उस दिन रात भर हम दोनों ने इन चारों भोसड़ी वालों से खूब चुदाया। लण्ड बदल-बदलकर चुदाया। एक दूसरे की चूत में लण्ड पेल-पेलकर चुदाया, एक दूसरे की गाण्ड में भी पेला लण्ड और मस्ती से मरवाई गाण्ड।

तब मुझे मालूम हुआ की लण्ड पर बैठकर एक साथ चुदाने में कितना मजा आता है।

समाप्त
 
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