• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

mastram kahani एक अधूरी प्यास.... 2

शुभम बहुत खुश था जाने अनजाने में उसने सास बहू दोनों को अपनी मर्दाना ताकत का परिचय करा दिया था.... और दोनों सास बहू की मुस्कुराहट से साफ जाहिर हो रहा था कि उसके मजबूत तगड़े लंड का एहसास उन दोनों को अंदर तक महसूस हो गया था। वह अपनी मस्ती में अपनी नई बाइक को चलाने का आनंद लेते हुए अपने घर पहुंच गया था और रुचि बाथरूम में दिखे अद्भुत नजारे की आगोश में अपने आप को खोता हुआ महसूस कर रही थी। उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि जो कुछ भी उसकी आंखों ने बाथरूम में देखा है वह सत्य है वह मन में यही सोचते हुए करवट बदल रही थी कि क्या किसी का लंड कितना मोटा तगड़ा और लंबा हो सकता है... अगर यह सच है कि उसकी आंखों में जो देखा हुआ बिल्कुल वास्तविक है शुभम का लैंड वाटर मोटा तगड़ा और मजबूत है तो उसके लंड के आगे तो उसके पति का लंड ना के बराबर है.. रुचि शुभम कै लंड के बारे में सोचते हुए रात को अपने बिस्तर पर करवट बदल रही थी। ना जाने क्यों आज उसके मन पर उसके खुद का नियंत्रण नहीं था वह बहकने लगी थी...बिस्तर पर करवट लेते हुए उसकी साड़ी अस्त-व्यस्त हो गई थी जिसकी वजह से घुटने को मोड़ने पर उसकी साड़ी सरक कर नीचे जांघो तक आ गई थी और उसकी मोटी तगड़ी चिकनी केले के सामान चमकती हुई जांघें नजर आने लगी थी.... ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में उसका खूबसूरत गोरा बदन और भी ज्यादा चमक रहा था... शुभम को याद करते हुए उसके तन बदन में शोला सा भड़क रहा था... अपनी भावनाओं पर उसे अब बिल्कुल भी भरोसा नहीं था शुभम को याद करते हुए हो वासना की रंगीन दुनिया में खोती चली जा रही थी... साड़ी कमर तक आने की वजह से उसकी नंगी टांगें उजागर हो गई थी शुभम को याद करते हुए उसके हाथ खुद-ब-खुद टांगों के बीच पहुंच गए जहां पर वह अपनी ब्लू रंग की पैंटी के ऊपर से ही अपनी रसीली बुर को दबाना शुरू कर दी थी.... वैसे तो अक्सर रात की तन्हाई में पति संसर्ग की कामना मैं जब हरलीन हो पर इस तरह की हरकत करती थी तो उसके जेहन में केवल उसका पति ही रहता था लेकिन आज उसके जेहन में पति की कल्पना तो कोसों दूर थी आज उसकी कल्पना में उसकी जिंदगी का नया हीरो आ गया था और वह था शुभम जिसकी टांगों के बीच झूलता हुआ उसका फौलादी औजार देखकर वह उसकी कल्पना के आधीन हो गई थी उसके बारे में ही सोचने लगी थी इस समय भी वह बिस्तर पर शुभम के बारे में खास करके उसके मोटे तगड़े लंड के बारे में सोच कर अपनी पैंटी के ऊपर से ही अपनी लगभग लगभग कोरी बुर को दबा रही थी वैसे भी रूचि की बुर को कोरी कहना ही उचित रहेगा क्योंकि उसके पति का कोई खास लंबाई और मोटाई लिए हुए नहीं था क्योंकि रुचि को अपनी बुर में अपने पति के लंड का एहसास अपनी तो उंगली डालने पर भी हो जाता था जबकि उसे एक मोटे तगड़े दमदार लंड की जरूरत थी जो कि उसकी बुर का पूरा सांचा ही बदल दे और वैसा लंड केवल शुभम के पास था इसलिए रुचि की बुर को कोरी बुर कहना उचित था....
बंद कमरे के अंदर रुचि अपने बिस्तर पर ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में अपने अर्धनग्न बदन से खेलते हुए शुभम की कल्पना कर रही थी वह अपनी ब्लू रंग की पैंटी के ऊपर से ही अपनी रसीली बुर को दबा दबा कर उसे छेड़ रही थी... या यूं कह लो कि वह चिंगारी पर पेट्रोल छिड़कने का काम कर रही थी और उसकी यह हरकत वाकई में चिंगारी से शोला का रूप ले ली...धीरे-धीरे करके रोजी अपनी ब्लू रंग की पेंटी में अपनी नाजुक उंगलियों को सरकार ने लगी और तब तक सरकार ने लगी जब तक कि उसकी रसीली डेढ़ इंच की फूली हुई बुर उसकी हथेली के बीचोबीच ना आ गई .. और जैसे ही रुचि की बुर उसकी हथेलियों के बीच आई वह किसी शिकारी पक्षी की तरह नाजुक फुदकती हुई तितली पर अपने पंजे की पकड़ मजबूत कर ली और ऐसा करने के साथ ही उसके मुख से गर्म सिसकारी भरी आह छूट गई.... वह शुभम को याद करते हुए जोर जोर से अपनी गुलाबी पत्तियों को उंगलियों के बीच फंसा कर रगड़ना शुरू कर दी ऐसा करने से उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी पल भर में ही उसका गोरा मुखड़ा लाल टमाटर की तरह हो गया...उसके पूरे बन जाने में रक्त का प्रवाह बड़ी तेजी से हो रहा था और खास करके उसकी जांघों के इर्द-गिर्द रक्त का प्रभाव कुछ ज्यादा ही था उसकी रसीली बुर कचोरी की तरह फूल गई पूर्वा जोर-जोर से अपनी बुर को मसलना शुरू कर दी मानो की वह उसकी मालिश कर रही हो... रुचि की बचर से ढेर सारा रिसाव हो रहा था जिससे उसकी पूरी हथेली नमकीन रस में डूबने लगी.... रुचि आंखों को बंद किया इस अद्भुत पल का मजा ले रही थी लेकिन बिस्तर पर उसे एक कमी महसूस हो रही थी और वह थी किसी मर्द की जो कि उसकी कल्पना में केवल इस समय सुभम ही घूम रहा था... वह मन ही मन में इस कल्पना कर रही थी कि जो क्रिया को अपने हाथ से कर रहे हैं काश अगर शुभम उसके बिस्तर पर होता तो वह अपनी मजबूत हथेलियों में उसकी कोमल काया को लेकर रगड़ा डालता उसका सारा रस निचोड़ डालता।

उससे रहा नहीं जा रहा था उसकी आंखों के सामने बार-बार वही दृश्य नजर आ रहा था जब शुभम अपने हाथों में अपने लंड को लेकर उसे हिलाते हुए पेशाब कर रहा था जबकि यह जानते हुए भी कि दरवाजे पर रुचि खड़ी है वह रुका नहीं और जानबूझकर रुचि को अपने लंड के दर्शन कराते हुए पेशाब करता रहा...इस बात का एहसास होते हैं कि सुबह में यह सबकुछ जानबूझकर कर रहा था तो रुचि की उत्तेजना और अत्यधिक बढ़ने लगी और वह अपनी हथेली को अपनी पेंटिं में से निकाल कर दोनों हाथों की नरम नरम उंगलियों का सहारा देकर अपनी मदमस्त गोरी गोरी खरबूजे जैसी गोल गांव को हल्के से ऊपर उठाकर अपनी पेंटी को उतारने लगी... और अगले ही पल उसकी पैंटी बिस्तर के नीचे फर्श पर गिरी पड़ी थी... व कमर के नीचे से संपूर्ण रूप से नंगी हो चुकी थी... क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि पेंटी पहने पहने वह अपनी कल्पना को तादृशय नहीं कर सकती थी....
कमर के नीचे से नंगी होते ही जैसे उसकी वासना और ज्यादा भड़कने लगी वह अपने सिर पर डबल तकिया लगाकर अपनी बुर की तरफ देखते हुए उसके साथ अपनी नाजुक नाजुक उंगलियों से खेलने लगी.... आज उसे यह सब करने में कोई चाहता ही आनंद की अनुमति हो रही थी लेकिन ऐसा करने से उसकी प्यास पल-पल बढ़ती जा रही थी ...शादी के बादआज पहली बार वह किसी गैर मर्द की कल्पना करते हुए अपने नाजुक अंगों से खेल रही थी... हालांकि शुभम से मुलाकात के बाद सेवा रातों को थोड़ी थोड़ी बैठने लगी थी लेकिन आज वो खुलकर अपने मायके में अपनी रसीली बुर से खेलते हुए मजे लूट रही थी...
उससे रहा नहीं जा रहा था उसके मुख से लगातार शुभम को याद करते हुए गरम सिसकारी निकल रही थी बार-बार उसकी आंखों के सामने शुभम का मोटा खड़ा लंड झूलता हुआ नजर आ रहा था... वह अपने कचोरी जैसी फूली हुई पुर के साथ खेलते हुए ऐसी कल्पना कर रही थी कि जैसे वह नहीं शुभम उसकी अंगो से खेल रहा हो... उसकी उंगलियां मदन रस में पूरी तरह से गीली हो चुकी थी... गोरे गोरे गाल लाल टमाटर की तरह हो गए थे.... रुचि की कल्पना इतनी मजबूत थी कि उसे अब अपनी उंगली शुभम का लंड लगने लगी थी वह अपनी उंगलियों के पार से अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को छेड़ रही थी और ऐसा महसूस कर रही थी कि जैसे शुभम अपने हाथ में अपना मोटा तगड़ा लंड ले कर उसकी गुलाबी पत्तियों पर उसके सुपाड़े को रगड़ रहा हो... वह इस तरह की कल्पना करते हुए एकदम मदहोश लगी..धीरे-धीरे वह अपनी एक उंगली को अपनी बुर की गुलाब की पत्तियों के बीचो बीच रखकर उसे दबाना शुरू कर दी और साथ ही मदहोशी भरी आवाजें निकालने लगी जो कि पूरे कमरे को मादकता से भर दे रहा था।.... बहुत ही अद्भुत और काम उत्तेजना से भरपूर नजारा कमरे का बना हुआ था रुचि अर्धनग्न अवस्था में अस्तव्यस्त कपड़ों के साथ बिस्तर पर लेटी हुई थी ब्लाउज के ऊपर के दो बटन खुले हुए थे जिससे उसके दोनों पहाड़ियों के बीच की खाईनुमा नहर नजर आ रही थी। और वह खुद काम देवी का रूप लेकर अपनी उंगली को धीरे-धीरे अपनी बुर के अंदर डाल रही थी और ऐसा महसूस करते हुए कल्पना कर रही थी कि जैसे शुभम उसकी कमर पकड़कर अपने मोटे तगड़े लगने को उसकी बुर की गहराई में उतारने की कोशिश कर रहा हो... वह लगातार गर्म सिसकारियां ले रही थी.. ‌आखिरकार धीरे-धीरे करते हुए अपनी एक उंगली को पूरी तरह से अपनी बुर की गहराई में उतार दी... और अपनी एक उंगली से अपनी बुर की चुदाई करना शुरू कर दि... वह अपने नितंबों को बार-बार ऊपर की तरफ उछाल दे रही थी मानो कि जैसे कल्पना में ही शुभम का साथ देते हुए अपनी तरफ से भी एक दो धक्के लगा दे रही हो....शुभम की लंड की कल्पना करते हुए ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी बुर में अभी भी कोई कमी महसूस हो रही है इसलिए वह उस कमी को पूरा करने के लिए अपनी दूसरी उंगली पर अपनी बुर में डाल दी और ऐसा महसूस करने लगी कि जैसे शुभम उसकी दोनों टांगों को फैलाकर अपनी पोजीशन लेकर और शिद्दत से अपने लंड को उसकी बुर की गहराई में उतार रहा हो... कुछ ही सेकंड में रुचि की दोनों उंगलियां उसकी नाजुक कोमल गुलाबी बुर के अंदर घुसी हुई थी और वह मदहोशी के आलम में आंखों को बंद किए कल्पना की दुनिया में खोए हुए शुभम का नाम पुकारते हुए ... अपनी बुर के अंदर अपनी उंगली को जोर जोर से अंदर बाहर कर रही थी....

औहहहहहह शुभम आहहहहहहहह और जोर से शुभम और जोर से पूरी ताकत लगाकर मुझे छोड़ दो मेरी बुर को पानी पानी कर दो (ऐसा कहते हुए रुचि बेशर्म की तरह अपनी बुर के अंदर अपनी उंगली को पेल रही थी.... वह पूरी तरह से पसीने से तरबतर हो चुकी थी.... उसकी कल्पना में हकीकत का अंश नजर आ रहा था वह अपनी बुर में अपनी उंगली से ही क्रिया कर रही थी लेकिन उसकी कल्पना इतनी जबरदस्त थी कि उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे उसकी दोनों टांगों के बीच शुभम खुद आ गया हो और उसकी जगह से चुदाई कर रहा है ऐसी कल्पना करते हुए कुछ ही देर में उसकी बुर पानी पानी हो गई और वो झड़ गई... आज अपनी गलती पर उसे बिल्कुल भी पछतावा नहीं हो रहा था क्योंकि शुभम की कल्पना करने में जो सुकून उसे प्राप्त हुआ था ऐसा एहसास ऊसे कभी भी नहीं मिला था भले ही वह अपने पति से संभोग भी क्यों ना कर रही हो।

दूसरी तरफ घर में अकेले होते हुए भी ना जाने क्यों सरला को अच्छा लगने लगा ... खास करके तब से जब उसने अनजाने में ही बाइक के पीछे बैठे बैठे अपने आप को संभालने की कोशिश करते हुए पेंट में खड़े उसके लंड को पकड़ ली थी उस पल को महसूस करते ही ना जाने कि उसे घर में अकेले रहने की इच्छा होने लगी क्योंकि ऐसे में वह शुभम के साथ अच्छी तरह से बातें कर सकती थी इस उम्र के पड़ाव में भी उसके मन में अजीब अजीब से ख्याल आ रहे थे खास करके शुभम को लेकर वह अपनी आंखों से शुभम के मोटे तगड़े लंड का दीदार करना चाहती थी अपने एहसास को वास्तविकता में बदलना चाहती थी। इसलिए हर पल अब उसकी आंखें शुभम का ही इंतजार कर रही थी।
शुभम लगभग दोपहर के समय अपने घर पर पहुंच गया... निर्मला को यह सब अच्छा नहीं लग रहा था किसी गैर औरत को इस तरह से अपनी बाइक पर बैठाकर उसके घर छोड़ना उसे ना जाने क्यों नागवार लग रहा था... उसे इस बात का डर भी था कि कहीं शुभम किसी दूसरी औरतों के चक्कर में ना पड़ जाए... इसलिए सुभम जैसे ही घर में आया वह बोली....

शुभम यह सब कुछ मुझे अच्छा नहीं लग रहा है जो तुम कर रहे हो (निर्मला बड़े ही शांत स्वर में कुर्सी पर बैठे-बैठे बोली।)

मैं क्या कर रहा हूं मम्मी... (की चैन लगी हुई बाइक की चाबी को वह उंगली से घुमाते हुए बोला)

यही औरतों को इधर ले जाना उधर ले जाना यहां छोड़ ना वहां छोड़ना....

मम्मी तुम यह सब जानती हो कि मैं यह किस लिए कर रहा हूं मैं इसलिए कर रहा हूं ताकि सरला चाची के दिमाग से हम दोनों के बीच के अनैतिक संबंध को लेकर उनका सब दूर हो सके इसलिए उनके सामने संस्कारी लड़का बना हुआ हुं।.....
(शुभम की बात सुनकर निर्मला कुछ सोचने लगी अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम इसीलिए यह सब कर रहा है लेकिन उसके मन के कोने में पराई औरतों को लेकर एक डर सा बना हुआ था...वह बिल्कुल भी नहीं चाहती थी कि शुभम किसी भी दूसरी औरतों के चक्कर में पड़े...)

मैं अच्छी तरह से जानती हूं शुभम कि तू यही सब के लिए यह सब कर रहा है लेकिन मुझे डर लगता है कि कहीं तो दूसरी औरतों के चक्कर में ना पड़ जाए..
(शुभम अपनी मां की बात सुनकर अच्छी तरह से समझता था कि उसकी मां का यूं परेशान होना जायज था क्योंकि कोई भी औरत एक मर्द को दूसरी औरत से बात नहीं सकती... इसलिए वह अपनी मां को समझाते हुए बोला. ।)

किसी बात कर रही हो मम्मी भला तुमसे सुंदर इस दुनिया में कोई है जो मैं दूसरी औरत के पीछे पड़ जाऊं... नहीं कभी भी किसी औरत के बारे में सोचता भी नहीं हूं यह तो बस उन लोग का ध्यान हम लोगों से हटाने के लिए ही है सब कुछ कर रहा हूं बस तुम निश्चिंत होकर रहो मेरी तरफ से किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है....
(शुभम की बात सुनकर कुछ हद तक निर्मला निश्चिंत हो गई लेकिन बेफिक्र बिल्कुल भी नहीं हुई क्योंकि वह मर्दों की जात को अच्छी तरह से जानती है इसलिए उसके मन के कोने में दूसरी औरतों को लेकर डर बना हुआ था।)
 
शुभम रुचि को उसके मायके छोड़ कर अपने घर आ चुका था। साथ में एक अद्भुत और अमिट एहसास लेकर लौटा था.... उसे भरोसा तो नहीं था कि उसका यह सफर बेहद रोमांच से भरा होगा बड़की इतना भी रोमांच नहीं हुआ लेकिन जो कुछ भी बाथरूम में उसके साथ हुआ था यह सब किसी रोमांच से कम नहीं था और शुभम जैसे लड़के के लिए तो सही मायने में इसी तरह के वाक्ये को ही रोमांच कहते हैं.... वह कभी सोचा भी नहीं था कि रुचि को इस तरह से अपने लंड के दर्शन करा पाएगा हालांकि उसके मन में हमेशा यही बात चलती रहती थी कि वह अपनी मर्दाना ताकत का प्रदर्शन रुचि के आंखों के सामने करें ताकि रुचि पूरी तरह से उसके अधीन हो जाए उसकी दीवानी हो जाए.... और ऐसा हुआ भी था वैसे तो रुचि की शादी को 3 साल गुजर गए थे लेकिन अभी भी उसकी गोद हरि नहीं हो पाई थी इसलिए ऐसा कहना भी ठीक था कि हाथों की मेहंदी का रंग छुटा भी नहीं था कि उसके जेहन में उसके दिलो-दिमाग पर किसी पराए मर्द की छाया पड़ने लगी थी ‌। और वह पराया मर्द कोई और नहीं बल्कि उसका ही पड़ोसी शुभम था। शुभम के साथ वैसे भी वह एकदम साहजिक अनुभव करती थी....
बाथरूम वाले हादसे के बाद से रूचि पूरी तरह से शुभम के आकर्षण में बस गई थी खास करके उसके मजबूत तगड़े लंबे खड़े लंड के आकर्षण में वह अपने मन को पूरी तरह से जोड़ चुकी थी।

शुभम रुचि के मायके से आने के बाद जानबूझकर दो दिन तक सरला से मिलने नहीं गया था क्योंकि वह देखना चाहता था कि वाकई में सरला उसके आकर्षण में बंध चुकी है या नहीं और जैसा कि वह मन में सोच रहा था वैसा ही हुआ था सरला शुभम को 2 दिन से ना देखने की वजह से काफी व्याकुल नजर आ रही थी।और शुभम उसकी क्या कविता को दूर करने का उपाय मन में सोच रखा था और उसी प्लान के मुताबिक वह शाम को सूरज ढलने के समय छत पर पहुंच गया और अपनी टीशर्ट निकाल कर अपनी कमर के ऊपर के अंग को पूरी तरह से निर्वस्त्र कर दिया साथ ही वह एकदम स्किन टाइट लोअर पहन लिया जिसमें उसके आगे का भाग उत्थान स्थिति में ना होने के बावजूद भी काफी गोल नजर आ रहा था । यह शुभम की सोची समझी साजिश थी वह जानबूझकर अपनी स्थिति को इस तरह से कर रहा था कि सरला उसे इस अवस्था में देखकर मंत्रमुग्ध हो जाए क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि औरतों की कमजोर कड़ी मर्दों की मर्दाना ताकत उन की जोड़ी मजबूत छाती और कसरती बदन होता है.... और शुभम को अपनी मजबूत बजाओ पर विश्वास था कि वह अपने अंग प्रदर्शन के जरिए सरला की टांगों के बीच हलचल पैदा करने में कामयाब हो जाएगा... वह अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर चुका था ।।।

शाम चलने वाली थी और वह छत पर अपनी पूरी तैयारी के साथ दोनों हाथों में वजनदार डंबल लेकर उससे कसरत करना शुरू कर दिया वह जानता था कि शाम को सरला जरूर छत पर सूखे हुए कपड़े लेने आएगी और तब वह अपने अंग का प्रदर्शन करके उसके तन बदन को झकझोर के रख देगा... वह कसरत करना शुरू कर दिया था और कुछ ही मिनट में उसकी छाती पर पसीने की बूंदें उपसने लगी जो कि मोती के दाने की तरह चमक रही थी... कसरत करते हुए भी उसका दिल जोरों से धड़क रहा था संध्या बेला की शीतल पवन में भी उसके बदन से पसीना टपक रहा था... वह जानता था कि सरला जैसी उम्रदराज औरत को अपने जाल में फंसना इतना आसान नहीं था इसलिए वह कोई भी कसर बाकी रखना नहीं चाहता था और वह यह भी जानता था कि वह घर में बिल्कुल अकेले हैं और यही सही मौका है उसके घर के दरवाजे खोल कर उसकी टांगों के बीच जगह बनाने के लिए ... और इस कार्य में वह माहिर भी था.... लेकिन फिर भी किसी भी प्रकार की ढील बर्तना नहीं चाहता था....

बार-बार कसरत करते हुए उसकी नजर छत पर चली जा रही थी जहां से सरला आने वाली थी वह मन ही मन में गुदगुदा भी रहा था कि ना जाने कब आएगी.... लेकिन थोड़ी ही देर में उसकी प्रतीक्षा की घड़ी खत्म होने लगी उसकी प्यासी आंखों को सावन भादो की फुहार का आभास होने लगा उसे सीढ़ियों पर सरला के कदमों की आहट महसूस होने लगी और वह पूरी शिद्दत से कसरत करने में जुट गया थोड़ी ही देर में उसकी आंखों के सामने सरला नजर आई... कामवासना भी बेहद अजीब चीज होती है जोकि सरला जैसी उम्रदराज औरत होने के बावजूद भी शुभम के तन बदन में इस समय सरला आग लगा रही थी जवानी के शोले भड़का रही थी... वह चोर नजरों से सरला की तरफ देख रहा था जो की छत पर नजर आने के साथ ही उसकी नजर शुभम पर पड़ी थी लेकिन वह उससे नजरें चुरा कर वापस अपने कसरत कार्य में लग गया वह जानबूझकर सरला को नजरअंदाज कर रहा था और यह बात सरला भी नोटिस कर रही थी वह दूर से ही शुभम को इस तरह से कसरत करता हुआ देखकर और खास करके उसकी नंगी चोड़ी छातियों को देखकर मदहोश होने लगी... उसके अर्ध नग्न बदन को देखा कर वह ठंडि आहहहह भरने लगी..... उसने अभी तक शुभम को इस अवस्था में नहीं देखी थी उसे इस बात का आभास बहुत जल्द हो गया कि कपड़ों के अंदर शुभम और भी ज्यादा गठीला और सेक्सी लगता है। उसकी नंगी छातियों पर उभर रहे पसीने की बूंदों को देखकर उसकी टांगों के बीच की पतली दरार नम होने लगी।

ससससससहहहहहह .... आहहहहहहह ..... यह मुझे क्या हो रहा है यह मैं क्या सोच रही हूं और उसे देख कर मेरे बदन में इस तरह के बदलाव क्यों आने लगते हैं ।(सरला ठंडि आहहहह भरते हुए अपने आप से ही बातें करते हुए बोली.... सरला को अपनी सोच और कल्पना पर पछतावा भी होता था वह अपने आप को मन ही मन भला बुरा भी कहती थी लेकिन शुभम जैसे नौजवान लड़के को अपनी आंखों के सामने देखते ही उसे ना जाने क्या हो जाता था वह एकदम मंत्रमुग्ध हो जाती थी।ना जाने उसे ऐसा क्यों लगने लग रहा था कि वह दौड़ कर जाए और उसे अपने सीने से लगा ले अपनी बड़ी-बड़ी चुचियों को उसकी नंगी छाती पर रगड़ कर अपने प्यासे पन का अहसास उसे कराएं... लेकिन ऐसा करने की हिम्मत उसने बिल्कुल भी नहीं थी उसे भी जमाने का डर था अपनी इज्जत का डर था घर के मान मर्यादा का डर था लेकिन मन के किसी कोने में यह सब को छोड़कर मर्यादा के सारे बंधन तोड़ कर रिश्तेदारी रिश्ते नाते के वास्ते से दूर होकर उसका दिल यही कहता था कि एक बार फिर से शुभम की बाहों में जाकर जिंदगी का मजा ले ले... और यही सोचकर वह अपने कदम धीरे-धीरे आगे बढ़ा रही थी....
वह रस्सी कोई खास से पकड़कर शुभम की तरफ भी देख रही थी वह मन ही मन सोच रही थी कि ना जाने कैसी कशिश कैसी प्यास है जो ना चाहते हुए भी उसकी तरफ बढ़ती चली जा रही है.... एक तरह से वह शुभम के ख्यालों में खोई रहती थी.... बड़े प्यार से देख रही थी कि शुभम कैसे अपनी कट के लिए बदन को इस तरह से मेहनत करके और ज्यादा गठीला और आकर्षक बना रहा है..... शुभम के चेहरे पर आई मासूमियत को देखकर वह अपने आपको पिघलता हुआ महसूस करने लगी उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि उसकी टांगों के बीच कोई गर्म लावा धीरे-धीरे पिघल कर बाहर आ रहा है। वह शुभम की कल्पना में खोने लगी पल भर में ही उसे ऐसा एहसास होने लगा कि वह अपने घर के अपने कमरे में और अपने ही बिस्तर पर घुटनों के बल बैठकर अपनी बड़ी बड़ी गांड को हवा में किसी दौर की तरह उठाई हुई है और उसके पीछे एक बहादुर सैनिक की तरह शुभम एकदम नग्न अवस्था में खड़ा है और अपने मजबूत लंबे तगड़े लंड को किसी मशाल की तरह हाथ में लेकर लहराते हुए उस तोप के गुलाबी छेद के माफिक मुहाने पर लगा कर तोप को दाग रहा है। सरला की कल्पनाओं का घोड़ा इतनी तेज गति से दौड़ रहा था कि वह चाहकर भी अपने घोड़ों पर काबू कर नहीं पा रही थी। वह शुभम के व्यक्तित्व से इतना ज्यादा प्रभावित हो चुकी थी कि वह कल्पना करते हुए मदहोश होने लगी दूसरी तरफ से बमों से तिरछी नजरों से देख ले रहा था लेकिन जानबूझकर उसे नजरअंदाज कर रहा था और सरला मस्त होती जा रही थी वह कल्पना में अपनी दोनों टांगों को पिलाई अपनी मदमस्त घाटकोपर उठाएं शुभम के द्वारा उसके मोटे तगड़े लंड से चुदने का आनंद लूट रही थी.... उसे ऐसा साफ सा महसूस हो रहा था कि जैसे शुभम वास्तव में उसकी कमर को थाम कर अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर की गुलाबी पत्तियों के बीचो-बीच अंदर की तरफ धकेल रहा है और उसका लंड धीरे-धीरे करके उसकी बुर की गहराई नापना शुरू कर दिया.... और जैसे ही शुभम उसे चोदने की शुरुआत करते हुए पहला करारा झटका मारा वैसे ही सरला लड़खड़ा कर गिरते-गिरते बची तब जाकर वह अपनी कल्पना से बाहर आए और अपने इस कल्पना के बारे में सोच कर ही उसके होठों पर हंसी आ गई लेकिन उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी....
लेकिन अपनी इस कल्पना को लेकर उसे किसी भी तरह का अपराध बोध और अफसोस नहीं हो रहा था...बल्कि पल भर के लिए इस कल्पना की वजह से उसके तन बदन में एक अद्भुत एक अजीब सा अहसास का रोमांच फैला हुआ था... शुभम के साथ केवल संभोग मात्र की कल्पना करके ही वह एकदम मस्त हो गई थी और वह यह सोच कर तो वह साथ में आसमान में उड़ने लगी थी कि अगर उसकी कल्पना वास्तविकता का रूप लेने तब क्या होगा यही सोचकर वह रोमांचित हुए जा रही थी....
वह धीरे-धीरे रस्सी पर से सूखे कपड़े को उतारने लगी.... वह शुभम की तरफ ही देख रही थी जो कि अभी भी आपने कसरत करने में मस्त था उससे रहा नहीं गया तो वह खुद ही बोली ।

शुभम और शुभम क्या बात है मैं कब से आई हूं तू मेरी तरफ ध्यान ही नहीं दे रहा। (रस्सी पर से सूखे हुए कपड़ों को उतारते हुए बोली।)

माफी चाहूंगा चाची मैं आपसे मुलाकात नहीं कर पाया.... और अभी तो मुझे पता ही नहीं चला कि आप कब छत पर आ गई...(शुभम डंबल को नीचे रखते हुए बोला... वह पूरी तैयारी में था वह डंबल को नीचे रख कर एक बारअपनी स्थिति का जायजा लेते हुए अपनी नजर को पर से नीचे की तरफ घुमाया तो टांगों के बीच की स्थिति कुछ मादक जान पड़ रही थी क्योंकि वहां हल्के हल्के तंबू बनना शुरू हो गया था। और वह अपनी मर्दानगी का जलवा बिखेरने के लिए धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए सरला की तरफ जाने लगा और शुभम को इस तरह से अपनी तरफ आता देखकर उसके दिल में कुछ कुछ होने लगा।)

तू रुचि बहू को उसके मायके छोड़ कर आने के बाद भी मुझसे मुलाकात नहीं किया मुझे यह भी नहीं बताया कि वहां सब कुछ कैसा है....

वही तो बता रहा हूं चाची की वहां में आराम से रुचि भाभी को छोड़ कर आ गया हूं और उनके पिताजी की तबीयत सही है मतलब बीमार है लेकिन ज्यादा बीमार नहीं है इसलिए घबराने वाली कोई बात नहीं है...... (इतना कहते हुए शुभम रस्सी के दूसरे छोर पर दीवार का सहारा लेकर खड़ा हो गया। उसे इस बात का अच्छी तरह से एहसास था कि सरला चोर नजरों से उसकी नंगी जातियों को देख ले रही थी और कभी-कभी उसकी नजर टांगों के बीच भी चली जा रही थी जहां पर अभी कुछ खास तंबू बना हुआ नहीं था लेकिन शायद अच्छे खासे तंबू की उम्मीद सरला को थी ‌।)

चल अच्छा हुआ शुभम कि तू उसको उसके मायके छोड़ आया वरना मुझे लेकर जाना पड़ता सच कहूं तो तेरी वजह से मुझे बहुत आराम मिल जाता है।

चाची जी इसमें तकल्लुफ वाली कोई बात नहीं है। आखिर में पहले भी कहा हूं कि मैं आपकी सेवा में हमेशा हाजिर हुं।(शुभम अपनी बातों के जादू में सरला को पूरी तरह से उलझाने लगा।)

तेरे जैसा लड़का मिलता कहां है आज के जमाने में। जो बिना किसी रिश्ते के इतनी मदद कर सके।

चाची कैसी बात कर रही हो अरे मैं आपको चाची कहता हूं रुचि भाभी को भाभी कहता हूं यह सब रिश्ता तो है.... हां अगर आप यह सब रिश्तेदारी नहीं समझती तो बात कुछ और है।

नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है मुझे मालूम नहीं था कि तू इतना अच्छा लड़का है तेरी संस्कार इतने अच्छे है...

वैसे चाची आपको तकलीफ होती होगी ना अकेले घर का सारा काम करने में। (शुभम इस बहाने से सरला के मन में क्या चल रहा है इस बात की टोह लेने के लिए बोला।)

हां सही कह रहा है तू तकलीफ तो होती है लेकिन क्या करें करना तो पड़ता है ना। (सरला सूखे हुए कपड़ों को पकड़े हुए ही बोली..)

लेकिन जा चीज में एक फायदा है आप घर का सारा काम खुद करती है जो कि आपके शरीर के लिए बहुत ही अच्छा है। (अब शुभम अपना अगला पासा फेंकते हुए बोला जो कि जानता था कि अब सरला को उसका यह फेंका हुआ पासा चारों खाने चित कर देगा...)

क्या बेवजह की बातें कर रहा है मैं काम कर रही हूं और अच्छा है। (सरला शंका जताते हुए बोली)

चाचा जी मैं सच कह रहा हूं यह आपके शरीर के लिए बेहद जरूरी है और बहुत ही अच्छा है।

कैसे?

अच्छा आप सही सही बताओ कि आपकी उम्र कितनी है....

यह कैसा सवाल है....

आप बताइए तो सही आपकी उम्र कितनी है तब मैं बताता हूं.....

हम्मम.... वैसे तो सच कहूं तो तुम्हारी मम्मी से 3 चार साल बड़ी हुं....(वैसे औरतों की हमेशा से यही आदत रही है कि वह हम लोग कभी भी अपनी सही उम्र नहीं बताती और उसी तरह से सरला ने भी यही की थी.)

लेकिन मैं सच कहूं तो चाची आप अभी 35 की लगती हो।
( इतना सुनते ही सरला के मुखारविंद ऊपर शर्म की लाली मचाने लगी और वह मंद मंद मुस्कुराने लगी क्योंकि शुभम की यह बात उसे बहुत अच्छी लगी थी।)

चल तू अब बातें मत बना मैं जानती हूं तू झूठ कह रहा है।

चाची शायद आप एक बात बोल रही हैं कि मैं एक लड़का हूं मतलब एक मर्द एक मर्द के नजरिए से बता रहा हूं कि हम लोगों को क्या अच्छा लगता है।

तू तो ऐसे बोल रहा है जैसे औरतों के बारे में तुझे सब कुछ पता है।

मैं कुछ ज्यादा तो नहीं कहूंगा चाची लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि हम लोगों को क्या अच्छा लगता है यह सिर्फ हम लोग ही जानते हैं। (इतना कहने के साथ शुभम रस्सी पर से सूखे हुए कपड़े उतार कर धीरे धीरे सरला को थमाने लगा)

तो तू क्या जानता है औरतों के बारे में....(सरला शर्म के मारे शुभम से नजरें चुराते हुए बोली)

ज्यादा कुछ तो नहीं जानता लेकिन चाची में इतना जरूर जानता हूं कि हम लोगों को आप जैसी औरत ही सबसे ज्यादा खूबसूरत लगती हैं।....(शुभम रस्सी पर से सूखे कपड़े उतार कर सरला को थमाते हुए बोला।)

क्या तुम सच कह रहा है क्या तुझे और तेरी उम्र के सारे छोकरो को मेरी जैसी औरत अच्छी लगती है...(शुभम के हाथों से कपड़े थाम ते हुए बोली..)

हां चाची में एकदम सही कह रहा हूं तुम्हारी जैसी ही औरत हम जैसे लड़कों की पहली पसंद होती है।

लेकिन ऐसा क्यों ... ‌लड़कियां भी तो है एक से एक खूबसूरत..(सरला शंका जताते हुए बोली...)

यह सब तो मैं नहीं जानता चाचा लेकिन इतना जरुर जानता हूं कि जो कुछ भी मैं कहा वह सत प्रतिशत सही है।

चल तू कहता है तो सही होगा मुझे तुझ पर विश्वास है। लेकिन क्या मैं तुझे अच्छी लगती हुं? (सरला शुभम के ऊपर सीधा सवाल दाग दी शुभम को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि सरला इस तरह के सवाल करेगी लेकिन जैसे वह भी पूरी तरह से हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार था इसलिए सरला की बात सुनते ही बोला ।)

बहुत अच्छी लगती हो चाची....आप मुझे बहुत खूबसूरत लगती हो बहुत सुंदर लगती हो सच कहूं तुम मैंने आज तक आपके जैसी इस उम्र में इतनी खूबसूरत औरत नहीं देखा हूं.....(शुभम के मुंह से अपनी इस तरह की तारीफ सुनकर वह खुशी से गदगद हुए जा रहे थे उसके चेहरे के बदलते भाव देखकर शुभम को उम्मीद होने लगी कि पंछी जाल में फंसने लगा है उसका दाना सही जगह पर गिर रहा है सरला एक जवान लड़के के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर फूली नहीं समा रही थी उसके शरीर में उत्तेजना का असर बड़ी तेजी से हो रहा था उसे अपनी टांगों के बीच की पतली दरार से नमकीन रस बहता हुआ साफ महसूस हो रहा था यह सब उसे सातवें आसमान पर उड़ाए लिए चले जा रहा था.....)

मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि तू मेरी तारीफ कर रहा है।

यह तो आपका बड़प्पन है चाची वरना मैं सही कहूं तो आते-जाते मेरी उम्र के सारे लड़के बस आप ही को देखते रहते हैं....

लेकिन मैंने तो कभी भी इस तरह की कोई भी हरकत महसूस नहीं की।

कैसे करोगी चाची आपने कभी इस बारे में ध्यान ही नहीं दी...मेरी बात का यकीन ना हो तो रास्ते पर चलते समय अपने चारों बाजू नजर घुमा कर देखना कि किसकी नजर आपके ऊपर टिकी रहती हैं....
(शुभम ने अपनी है बात पक्के तौर पर डंके की चोट पर कहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि सरला चाची की गांड बहुत बड़ी-बड़ी और गोल गोल है और जब वो चलती है तो एक मदमस्त हिल्टन उनके बड़े-बड़े नितंबों में होती है और यही वजह है कि जवान हो या बुरे सब की नजर इस तरह की औरतों पे पड़ती रहती है। उसकी खुद की नजर सरला के पिछवाड़े पर हमेशा टिकी रहती है।सरला तो एक जवान लड़के के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर पूरी तरह से उत्तेजना में सरोवर होने लगी उसके चेहरे पर छाई नानी मां साफ बयां कर रही थी कि इस समय उसकी टांगों के बीच हलचल मची हुई है। सरला मारे शर्म के पानी पानी हुई जा रही थी। और पति उत्तेजक बदला शुभम के बदन में भी हो रहा था क्योंकि उसके लोअर में अच्छा-खासा तंबू बन चुका था जिस पर सरला की चोर नजर बार-बार चली जा रही थी और उस जगह को देखकर उसका दिल जोरों से धड़क रहा था। शुभम की बातें सुनकर सरला शर्म के मारे एकदम चुप्पी साध ली थी .... उसके मुंह से एक भी शब्द फूट नहीं रहे थे.... शुभम जोकि कई औरतों की संगत में आ चुका था इसलिए सरला के चेहरे पर बदलते भाव को वाशी तरह से समझ रहा था शुभम की प्रसन्नता का कोई ठिकाना ना था उसका मन हर्षोल्लास में उत्तेजित हुआ जा रहा था वह चाहता तो इसी समय सरला को अपनी बाहों में लेकर उसके गुलाबी होठों का चुंबन कर सकता था और इससे ज्यादा भी आगे बढ़कर वह शायद सरला से संभोग सुख भी हो सकता था लेकिन शायद यह उचित समय नहीं था इसलिए वह अपने आप पर सब्र करके रुक गया सरला की हालत खराब हो जा रहे थे वहां अपनी नजरें शुभम से बचा रही थी...वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उम्र के इस पड़ाव पर आकर एक जवान लड़का उसकी इस तरह की तारीफ करेगा जबकि वह लड़का उसके ही लड़के की उम्र का था.... लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसी से सरला को किसी भी प्रकार का एतराज नहीं था बल्कि उसे तो यह सब बातों का एहसास ही किसी और दुनिया में लिए जा रहा था उसे सब कुछ अच्छा लग रहा था।
सरला के साथ-साथ शुभम की सांसो की गति तेज होती जा रही थी....
शुभम सरला की तरफ देखते हुए रस्सी पर से सूखे हुए कपड़े उतारकर सरला को थमाते जा रहा था ।
और कपड़ों को उतारते समय उसके मन में उम्मीद बनी हुई थी कि जिस तरह से वार रूचि किस तरह से मदद करते हुए उसकी ब्रा और पेंटी तक पहुंच गया था अगर किस्मत अच्छी हुई तो आज उसके हाथों सरला की भी ब्रा और पेंटी हाथ लग जाएगी इसी उम्मीद में वह कपड़े उतारता जा रहा था। ...
सरला एकदम शर्मसार हुए जा रही थी क्योंकि बार-बार उसकी नजरें शुभम के तने हुए तंबू पर चली जा रही थी ... और उस तंबू की ऊंचाई को देखकर उसकी टांगों के बीच की हलचल बढ़ती जा रही थी उसकी जांघों में थरथराहट पैदा हो रही थी। क्योंकि अनजाने में ही उसके हाथ में आए शुभम के लंड की वजह से इतना तो समझ ही गई थी कि शुभम के टांगों के बीच का हथियार एकदम दमदार है। उसके लोहार में तने हुए लंड की कल्पना ही उसकी बुर को पूरी तरह से पनिया रही थी।
कुछ पल के लिए दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी दूर आसमान में सूरज अपनी लालिमा लिए जमीन में समाने के लिए तैयार था छत पर अंधेरा होने लगा था लेकिन इतना भी अंधेरा नहीं था कि सरला कुछ देख ना पाए एक तो कमर के ऊपर का शुभम का नौजवान नंगा बदन और ऊपर से लोअर में तना हुआ उसका तंबू अजीब सा हलचल मचाए हुए था....
शुभम इसी उम्मीद में रस्सी पर से कपड़े उतारे जा रहा था कि सरला की ब्रा पेंटी उसके हाथ लग जाएगी और जैसा कि उसे उम्मीद थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी मनोकामना पूरी होने लगी और जैसे ही वह साड़ी को रस्सी पर से उतारा उसके नीचे सूखने के लिए रखी हुई ब्रा और पेंटी नीचे गिर गई और शुभम तुरंत नीचे की तरफ लपक कर सरला की ब्रा और पेंटी उठा लिया।

उसके हाथों में सरला की ब्रा और पेंटी आ गई थी जिसे वह अपने हाथों में लेकर एक पल के लिए उसे चारों तरफ घुमा कर देखने लगा सरला यह देखकर एकदम शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी क्योंकि उसकी ब्रा और पेंटी एक नौजवान लड़की के हाथ लग गई थी जिसे वह चारों तरफ से देख रहा था एक अजीब सी उत्सुकता और उत्तेजना का अनुभव सरला को हो रहा था उसके दिल की धड़कने बढ़ने लगी थी साथ ही उसके छातियों का घेराव सांसो की गति के साथ ऊपर नीचे हो रहा था ।उत्तेजना के मारे सरला का गला सूखता जा रहा था और यही हाल शुभम का भी हो रहा था उसका सपना उसकी उम्मीद सच हो गई थी उसकी हाथों में सरला की ब्रा और पेंटी आ गई थी जिसे हाथों में लेकर वह काफी उत्साहित और उत्तेजित नजर आ रहा था जिसका हलचल उसे अपनी टांगों के बीच बराबर हो रहा था। ऐसा लग रहा था कि जवानी से भरी सरला की ब्रा और पेंटी को देखकर उसके नौजवान मर्दाना लंड ने सरला की जवानी रूपी ब्रा और पेंटी को सलामी भरी हो इस तरह से ऊपर नीचे होने लगा.... शुभम को तो समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे और कैसे उसकी ब्रा और पेंटी को उसके हाथों में थमाए उसके मुंह से शब्द नहीं फूट रहे थे... फिर भी हिम्मत दिखाते हुए वह सरला से बोला।

चचचचच.... चाची यह आपके हैं....? (शुभम हकलाते हुए बोला।)

सरला छठ से शुभम के यहां तो से अपनी ब्रा और पेंटी ले ली और शर्मा कर मुस्कुराते हुए बोली।

नहीं तो और किसके होंगे मेरे ही हैं....(इतना कहते-कहते उसका गला सूखने लगा....)

लेकिन चाची आप बुरा ना माने तो एक बात कहूं।

बोल ......( सरला शर्म के मारे दूसरी तरफ मुंह करके बोली)

चाची आप की पेंटी में छेद हो गया है। (शुभम सोचे समझे बिना हिम्मत दिखाते हुए एकदम बेशर्म बनकर धड़ाक से बोल दिया....सरला तो यह सुनकर एकदम शर्म से पानी पानी हो गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहें लेकिन जिंदगी में पहली बार उसे इस तरह से किसी ने उसकी पेंटिंग में पड़े छेद के बारे में खुले शब्दों में बोला था और ऐसे भी कोई बोल कहां पाता जब कोई देखेगा तभी ना कहेगा .... और देखने वाला कौन था उसका पति जो कि इस समय दुनिया में नहीं था उसे उम्मीद नहीं थी कि कल का छोकरा उसकी पेंटी के बारे में इतनी बड़ी बात और वह भी एकदम बेझिझक बोल जाएगा.... लेकिन उसकी बात सुनकर पल भर में ही सरला की उत्तेजना बढ़ गई... उसकी जांघों के बीच हरदम आउट होने लगी उत्तेजना का इतना जबरदस्त अनुभव उसने आज तक नहीं की थी उसे अपनी पेंटी पूरी तरह से गीली होती हुई महसूस होने लगी... अपने आप को संभालते हुए वह शुभम के सवाल का जवाब देते हुए बोली...

हां मेरी पेंटिं में छेद है लेकिन क्या करूं मैं कभी बाजार खरीदने गई अगर ऐसा है तो तो क्यों खरीद कर नहीं ले कर दे देता....(सरला शुभम से यह बात नजरें चुराकर लेकिन मंद मंद मुस्कुराते हुए बोली...)

मै खरीद कर ला तो दू लेकिन मुझे साइज नहीं मालुम....(शुभम बड़ी मासूमियत के साथ बोला..)

तुझे तो औरतों के बारे में सब कुछ पता है तो मेरी साइज के बारे में भी तुझे पता ही होगा लाकर दे दे (इतना कहकर वो वहां से मुस्कुराते हुए नीचे चली गई। शुभम तो सरला की यह बात सुनकर एकदम से गनगना गया... वहअपने खड़े लंड को लोगों के ऊपर से ही मचलता हुआ सरला को गांड मटका कर जाते हुए देखता रह गया उसकी मुस्कुराहट देखकर इतना तो समझ गया था कि जो कुछ भी वह बोला था इसे सरला को जरा भी बुरा नहीं लगा था बल्कि जिस तरह से वह बातें कर रही थी वह साफ समझ गया था कि उसकी बातें सरला को अच्छी लगी थी।।
शुभम का काम बन चुका था और वह वापस अपनी छत पर आ गया।
 
शुभम को खुद पर भरोसा नहीं हो रहा था कि उसने इतनी बेशर्मी भरी बातें सीधे-सीधे सरला से कह दी थी उसे अपनी हिम्मत पर भरोसा नहीं हो रहा था लेकिन जो कुछ भी उसने कर दिया था उससे उसे बहुत हिम्मत मिल रही थी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे अब उसकी मंजिल दूर नहीं है या यूं कह लो कि अब उसे अपनी मंजिल साफ साफ नजर आ रही थी जो कि सरला की मदमस्त मोटी मोटी टांगों से होकर गुजरती थी और टांगों के बीच जाकर खत्म हो जाती थी ढेर सारी औरतों को भोग चुका शुभम सरला के बारे में सोच कर मस्त हो जा रहा था उसे यकीन हो गया था कि जिस तरह से वह इतनी गंदी और भद्दी बात पर सरला मुस्कुरा कर गई थी और उसे खुद नई पैंटी और ब्रा खरीद कर लाने के लिए बोल कर गई थी इससे साफ जाहिर था कि आप शुभम का काम बन चुका था उसके हाथों एक नई चिड़िया हाथ लग चुकी थी भले ही वह उम्र दराज थी लेकिन शुभम की आंखों मैं तो हमेशा औरतों की बड़ी-बड़ी गांड और बड़े बड़े दूध ही बसे होते हैं जोकि सरला के पास अखुट भंडार था। सरला जिस तरह से अपनी गांड मटका कर गई थी.. शुभम को लगने लगा था कि सरला खुद अपनी मदमस्त गांड उसकी गोद में पसार देगी... शुभम के दिल पर छुरिया चल रही थी अपने आप को संभाल नहीं पा रहा था उसके लोअर में गदर मचा हुआ था जिसे शांत करना बेहद जरूरी थोड़ी सी बात तुरंत टी-शर्ट पहन कर अपने कमरे में गया और सरला के बारे में कल्पना करते हुए अपनी मोटी तगड़े लंड को हिलाना शुरू कर दिया और तब तक हीलाता रहा जब तक कि सरला के नाम का पानी निकल नहीं गया..... ।
और यही हाल सरला का भी था उम्र के इस पड़ाव पर आकर जिस तरह से वह अपने बदन में उत्तेजना का अनुभव कर रही थी वह उसके लिए काबिले तारीफ थे क्योंकि वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके बदन में इस तरह का बदलाव होगा शुभम की बेधड़क बात और वह भी उसकी पैंटी में छेद के बारे में उस बात को याद करके ही सरला पूरी तरह से कामोत्तेजना के सागर में डूबती चली जा रही थी बार-बार उसकी आंखों के सामने उसके लोअर में तना हुआ तंबू नजर आ रहा था। उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी बार-बार उसकी उत्सुकता लोअर के अंदर के हथियार को देखने के लिए बढ़ती जा रही थी लेकिन उस के नसीब में ना जाने वह दिन कब आएगा जब वह अपने हाथों से शुभम के मोटे तगड़े लंड को हाथ में लेकर हीलाएगी और उसे अपने हाथ में लेकर ही अपनी बुर का रास्ता दिखाएंगी यह सब सोचकर ही उसके बदन में अंगड़ाइयां उठ रही थी.... उत्तेजना और कल्पना के सागर में डूबते हुए उसका बदन पसीने से तरबतर हो चुका था वह बिस्तर पर अपनी साड़ी को कमर तक करके एक बार फिर से अपनी बुर में अपनी दोनों उंगली डालकर अपनी गर्मी को शांत करने की कोशिश कर रही थी। और कुछ देर में वह अपनी पुर का पानी निकाल कर एकदम शांत हो गई....

सरला ने बात ही बात में शुभम को एक अद्भुत काम में डाल दी थी जो कि आज तक शुभम ने उस काम को अंजाम नहीं दिया था लेकिन कभी ना कभी तो यह काम करना ही था ... इसलिए सरला के द्वारा दिया हुआ यह चैलेंज मानकर वह दुसरे दिन ही नहा धोकर तैयार हो गया और बाजार निकल गया वह इस काम में देरी नहीं करना चाहता था। क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था किस काम में ढील देने का मतलब है कि अपनी मंजिल से दूर होना इसलिए वह जल्द से जल्द अपनी मंजिल को पा लेना चाहता था इसलिए मौके की नजाकत को समझते हुए वह बाजार पहुंच गया और अच्छी सी दुकान देख कर उस में प्रवेश कर गया... काउंटर पर बहुत ही खूबसूरत लेडी बेठी हुई थी... पहले तो शुभम बहुत ही अच्छा रहा था क्योंकि उसका यह पहला अनुभव था किसी लेडीस के लिए ब्रा पेंटी खरीदने का। इसलिए उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और वैसे भी काउंटर पर लेडी बैठी होने की वजह से उसे अंदर ही अंदर घबराहट हो रही थी लेकिन उसके लिए एक अच्छी बात थी कि उस काउंटर पर कोई और नहीं था और वह काउंटर औरतों के अंतर्वस्त्र का ही था इसलिए वह थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए कि जो भी होगा देखा जाएगा इतना सोच कर वह उस काउंटर की ओर आगे बढ़ गया.... काउंटर पर पहुंचकर भाई इधर उधर देखने लगा जबकि वह औरतों के अंतर्वस्त्र का काउंटर था इसलिए काउंटर से बनने वाली वह लेडी उसे शंका की नजर से घूरने लगी क्योंकि वह काफी बार इस तरह का अनुभव कर चुकी है कि बेवजह इस तरह के लड़के आते थे और औरतों की ब्रा पेंटी के नाम के बारे में भाव के बारे में पूछ कर वहां से रफूचक्कर हो जाते थे इसलिए वह सोचे कि शायद यह भी इसी तरह का ही लड़का है इसलिए वो खुद बोली।

आपको क्या चाहिए....? (एक सेल्समैन होने के नाते वह काफी इज्जत से शुभम से बोली)

जी ... ‌‌जी......

यह जीजी क्या लगा रखे हो क्या चाहिए यह बताओ... (इस बार हुआ लेडी थोड़े सख्त स्वर में बोली)

जी मुझे मेरे भाभी के लिए ब्रा और पेंटी चाहिए.. (शुभम की बात सुनते ही वह काउंटर वाली लेडी शुभम को ऊपर से नीचे तक संकास्पद नजरों से देखी...) वह क्या है ना गांव से नई नई आई है ना इसलिए वह बाजार नहीं आती इसलिए मुझे लेकर जाना पड़ रहा है। अगर आप मेरी मदद कर देती तो....(इतना कहकर वह उस लेडी की तरफ आशा भरी नजरों से देखने लगा वह काउंटर वाली लेडी भी बात को समझते हुए मुस्कुरा कर बोली...)

जी कोई बात नहीं मैं आपकी हर तरह से मदद करने के लिए तैयार हूं आप साइज बताइए।

जी साइज तो मुझे नहीं मालूम....

देखिए जब आपको शाईज नहीं मालूम तो आप कैसे खरीदेंगे....

जी अगर आप मदद कर देती तो....

लेकिन इसमें मैं कैसे मदद कर सकुगी... साइज के बारे में पता होता तो जरूर मदद कर सकती..... अच्छा एक काम करिए सामने कुछ औरतें खड़ी है उन्होंने तो को देखकर आप मुझे बताइए कि आपकी भाभी का साइज किसकी तरह है तो मैं आपकी जरूर मदद कर सकती हुं।

उसकी बात सुनते ही शुभम दुकान में चारों तरफ नजर घुमाकर सरला के कद काठी वाली औरत को ढूंढने लगा और जल्द ही उसकी तलाश खत्म हो गए सामने की साड़ी के काउंटर पर एक औरत खड़ी थी जो कि एकदम सरला के कद काठी की थी उसके नितंबों का घेराव भी सरला की तरह ही था इसलिए उसकी ओर उंगली दिखाते हुए शुभम बोला।

वह देखिए वह पीली साड़ी वाली आंटी खड़ी है ना बिलकुल वैसी है मेरी भाभी की कद काठी है ‌।

(उस औरत को देखते ही काउंटर वाले लेडी समझ गई कि कौन सा साइज चाहिए इसलिए वह तुरंत अच्छी कंपनी का और एकदम आरामदायक ब्रा और पेंटी की सीरीज निकाल कर रख दी।)

यह लीजिए पसंद कर लीजिए आपको जो अच्छी लगती है यह सबसे अच्छी किस्म की ब्रा और पेंटी है ‌।
(शुभम काउंटर पर रखी हुई प्रॉपर्टी की कुछ सीरीज में से अच्छे कलर की सीरीज देखकर उसे पसंद करने लगा और उनमें से लाल रंग की ब्रा और पेंटी निकालकर दूसरी तरफ रखते हुए बोला।)

यह अच्छी लग रही है अच्छा आप बुरा ना मानो तो एक आप अपनी तरफ से पसंद कर सकती हैं जो वाकई में खूब अच्छी हो...

क्यों नहीं.... ( और इतना कहने के साथ है यह वह लेडी उसमें से एक आसमानी रंग की जालीदार ब्रा और पेंटी निकालकर साइड में रख दी और बोली।)

यह बहुत ही अच्छी लगेगी आपकी भाभी पर...(वह मुस्कुराते हुए बोली उसकी बातों में आत्मविश्वास झलक रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अच्छी तरह से जानती हो कि अगर उसकी भाभी यह पहनेगी तो वह जरुर देखेगा और वह अच्छी तरह से जानती थी कि अधिकतर लड़के केवल औरतों कि टांगों के बीच पहुंचने के लिए ही उन्हें इस तरह के कपड़े खरीद कर देते रहते हैं।)

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद बस आप इतना कीजिए कि इसे गिफ्ट की तरह पैक कर दीजिए....
(शुभम की यह बात सुनते ही क्वालिटी समझ गई कि मामला कुछ और है वह केवल मुस्कुरा कर उसे गिफ्ट की तरफ एक करने लगी और उसे पैक करने के बाद बिल के साथ उसे शुभम को थमा दी जिसका भुगतान करके वह खुशी-खुशी दुकान से बाहर निकल गया...शुभम काफी खुश नजर आ रहा था क्योंकि जिंदगी में आज पहली बार उसने ऐसा काम किया था जिसके बारे में उसने अभी तक कल्पना तक नहीं किया था औरतों के अंतर्वस्त्र खरीदने का यह उसका पहला अनुभव था और यह अनुभव बेहद रोमांच से भरा हुआ था... आखिरकार वह सरला के लिए ब्रा और पेंटी खरीद चुका था और वह भी 2 जोड़ी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह कैसे सरला को यह गिफ्ट का पैकेट थमाए क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि इसे घर पर लेकर जा नहीं सकता था इसलिए दुकान से निकल कर सीधे सरला की घर पर पहुंच गया और होर्न बजाकर
सरला को बाहर आने का इशारा किया सरला को यह नहीं मालूम था कि बाहर घर के कौन होरन बजा रहा है वह सिर्फ देखने के लिए आई थी ईतना होर्न कौन बजा रहा है जब वह अपने दरवाजे पर शुभम खड़ा है तो वह एकदम खुश हो गई वह कुछ कह पाती इससे पहले ही शुभम उसके हाथ में गिफ्ट वाला पैकेट हम आकर अपने घर की तरफ गाड़ी घुमा दिया वह कुछ समझ पाती इससे पहले ही शुभम अपने घर में जा चुका था साला समझ नहीं पा रही थी आखिरकार यह गिफ्ट क्यों...? और इस गिफ्ट में क्या हो सकता है उसके मन में उथल-पुथल चल रही थी एक पल के लिए तो उसका मन आशंका से भर गया कि कहीं कल वाली बात मान कर शुभम ने उसके लिए ब्रा पेंटी तो नहीं खरीद कर लाया...यह ख्याल उसके मन में आते ही उसके बदन में पल भर में उत्तेजना की लहर दौड़ गई और वह उस गिफ्ट वाले पैकेट को लेकर अपने कमरे में चली गई.....

दूसरी तरफ शुभम ब्रा पेंटी वाला गिफ्ट का पैकेट सरला को पकड़ा कर पूरी तरह से रोमांच से भरा हुआ था उसके तन बदन में उत्तेजना चिकोटी काट रही थी... शुभम बेशर्मी की सारी हदें एक के बाद एक बार करता हुआ आगे बढ़ रहा था अपनी मां से भी बड़ी उम्र की औरत को वह उसके अंतर्वस्त्र खरीद कर उसे गिफ्ट किया था इसका क्या असर होने वाला था शायद इसका आभास शुभम को पहले से ही हो गया था जिसको सरला की मुस्कुराहट बयां करती थी।
 
शुभम अपनी उंगली में अपनी बाइक का छल्ला ना चाहते हुए और सीटी बजाते हैं घर में प्रवेश किया..
शुभम काफी उत्साहित नजर आ रहा था अंदर ही अंदर वह बहुत प्रसन्नता क्योंकि उसने आज बहुत बड़ा काम कर दिया था और इस बात की किसी को कानो कान खबर तक नहीं पडी थी.... तभी सामने से सीढ़ियों पर से उतरती हुई निर्मला उसे खुश देखकर बोली।

क्या बात है शुभम आज बहुत खुश नजर आ रहा है... और यह सुबह-सुबह आज कहां चला गया था.... कहीं किसी लड़की का तो चक्कर नहीं है ना....?(निर्मला सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए बोली... शुभम अपनी मां को भी देख रहा था जो इस समय नहा कर बाहर आई थी और अभी भी उसके बाल एकदम गीले थे । आसमानी रंग की जालीदार साड़ी में कयामत लग रही थी वह अपनी मां को देखकर इतना तो निश्चित तौर पर कह सकता था कि दुनिया में उसके जैसी कोई भी दूसरी खूबसूरत औरत नहीं है...

क्या बात कर रही हो मम्मी मैं भला किसी लड़की के चक्कर में क्यों पड़ लूंगा जब घर में ही इतनी खूबसूरत और हसीन औरत है....

लेकिन मुझे मर्दों का कोई भरोसा नहीं लगता...

लेकिन मेरा भरोसा तुम्हें करना होगा मम्मी क्योंकि मेरी जिंदगी में तुम ही एक औरत हो बाकी कोई नहीं और वैसे भी मुझे किसी दूसरी औरत या लड़की में इंटरेस्ट नहीं है क्योंकि मैं अच्छी तरह से जानता हूं बाकी सभी औरतें तुम्हारी तरह खूबसूरत नहीं है....
(अपने बेटे की चिकनी चुपड़ी बातें सुनकर वह मुस्कुराते हुए किचन के अंदर प्रवेश कर गई और पीछे पीछे अपनी मां की मदमस्त मटकती हुई गांड देखकर वह भी रसोई घर में घुस गया। रसोई घर में पहुंचते ही निर्मला अपनी मादक अदाओं का जलवा बिखेरते हुए तुरंत किचन का फ्लोर पकड़ कर तुरंत शुभम की तरफ घूम गई और अपनी भारी भरकम चुचियों को लगभग शुभम की तरफ परोसते हुए बोली....)

अब तु किचन में क्या करने आ रहा है..?

मुझे भूख लगी है मम्मी इसलिए तो किचन में आया हूं.....( शुभम अपनी मां की बड़ी-बड़ी गदराई चुचियों को घूरता हुआ बोला)

अभी नाश्ता तैयार नहीं है बाहर जाकर इंतजार कर अभी समय लगेगा ....(निर्मला जानबूझकर अपनी दोनों फुटबॉल जैसी चुचियों को शुभम की आंखों के सामने नचाते हुए बोली एक तरह से शुभम को उकसाने वाला कार्य था वह जानबूझकर ऐसा कर रही थी ताकि शुभम उससे मस्ती करें और शुभम भी अपनी मां की यह मादक अदा देकर एकदम से मस्ती के सागर में डूबने के लिए तैयार हो गया और वैसे भी सरला की वजह से वह काफी अंदर ही अंदर उत्तेजित था।

अगर नाश्ता तैयार नहीं है तो मुझे दूध ही पिला दो (शुभम तुरंत अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की मदमस्त दशहरी आम को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया)

आहहहहहहह .... क्या कर रहा है बड़ा बदमाश हो गया है तू.....(शुभम के दोनों हाथ को अपनी चुचियों पर से हटाते हुए बोली. ‌)

जब ऐसी मदमस्त जवान औरत अपने हुस्न के जलवे दिखाए तो मेरे जैसा कोई भी जवान लड़का बदमाशी करने पर उतारू हो जाएगा....(शुभम वापस अपने दोनों हाथ को अपनी मां की दशहरी आम पर रखते हुए बोला.. ।)

तू पक्का मादरचोद हो गया है.... मुझे अपने सामने देखा नहीं की नोचने खसोटने के लिए तैयार हो जाता है....

मेरी जान मुझे मादरचोद बनाई भी तो तू ही है....

अच्छा यह बात है तो क्या मैंने तुझे कही थी कि आप मेरे ऊपर चढ़ जा.... (निर्मला जानबूझकर अपने बेटे की तरफ पीठ करके खड़ी हो गई क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसके बेटे की सबसे बड़ी कमजोरी उसके भारी-भरकम मदमस्त गांड थी... और उसे पूरा विश्वास था कि उसकी मदमस्त मांग को देखकर शुभम पूरी तरह से औकात में आ जाएगा ....और उसका यह सोचना उसका आत्मविश्वास सच साबित हुआ शुभम अपनी मां की मदमस्त बड़ी बड़ी गांड देखा कर पूरी तरह से अपनी वासना क्या दिन हो गया और आगे बढ़कर अपने दोनों हथेली को साड़ी के ऊपर से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर रखकर ऊसे दबाते हुए बोला.....

ससससससहहहहहह ....आहहहहहहह ..... मादरचोद जब जानबूझकर ऐसी अपनी बड़ी बड़ी गांड मुझे दिखाएगी तो मैं क्या कोई भी होगा वह चढ़ ही जाएगा ना....(शुभम उत्तेजना में आकर जोर जोर से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड दबाते हुए बोला शुभम को इस तरह से अपनी मत मस्त गांड से खेलता हुआ देखकर निर्मला एकदम उत्तेजित होने लगी उसके गोरे गोरे गाल उत्तेजना के मारे लाल टमाटर की तरह हो गए....)

तो क्या तू मेरी बड़ी बड़ी गांड की वजह से मादरचोद बन गया।

हाय मेरी जान तेरी बड़ी बड़ी गांड की वजह से ही मैं मादरचोद कर गया तेरी गांड देखकर ना जाने मुझे क्या हो जाता था और ना चाहते हुए भी मुझे तेरी गांड में लंड डालना पड़ा।.....

चल हट मुझे अपना काम करने दे....(निर्मला शुभम को पीछे की तरफ झटकते हुए बोली... हालांकि वह ऐसा नहीं चाहती थी लेकिन उसे अपने बेटे की इस तरह की जोर-जबर्दस्ती अच्छी लग रही थी.... अपनी मां की गदराई गांड से खेलकर शुभम पूरी तरह से उत्तेजित होने लगा था ... वह इस बार फिर से अपनी मां को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया और अपने दोनों हाथ आगे करके अपनी मां के दोनों कबूतरों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबोच कर उन्हें पुचकारने लगा....(अपने बेटे की इस हरकत की वजह से ही निर्मल आपने हाथ को पीछे की तरफ लाकर उसे हटाने की कोशिश करते हुए बोली)

हटना क्या कर रहा है मुझे अपना काम करने दे नाश्ता तैयार करने दे....

नहीं मुझे तो आज तेरा दूध पीना है...(इतना कहते हुए शुभम अपनी मां के बदन से एकदम से सट गया और निर्मला के पिछवाड़े पर अपना तना हुआ तंबू रगड़ना शुरू कर दिया... अब क्या था निर्मला तो मस्ती के सागर में गोते लगाने लगी आगे से चूची से खेल रहा था और पीछे से ने लंड को गांड पर रगड़ कर गर्माहट दे रहा था....)

मैंने तो सुबह में ताजा तैयार कर देती हूं मुझे दूध नहीं पिलाना....

लेकिन मुझे तो बस तेरा दूध ही पीना है यह बड़ी बड़ी चूची किस दिन काम आएगी ( इतना कहते हुए शुभम अपनी मां के ब्लाउज के बटन खोलने लगा.... वह पूरी तरह से उत्तेजना में सराबोर हो चुका था... सरला के साथ जिस तरह का व्यवहार उसका होता जा रहा था उसे देखते हुए वह पहले से ही काफी कामोत्तेजना का अनुभव कर रहा था और घर पर आकर अपनी मा कामादक स्वरूप देखकर पूरी तरह से पागल हो गया और देखते ही देखते वह अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया यूं तो निर्मला उसे रोकने की बहुत कोशिश कर रही थी लेकिन अंदर ही अंदर वह उसे उत्साहित भी कर रही थी उसे अच्छा लग रहा था उसके साथ इस तरह से उसका बेटा जबरदस्ती कर रहा था वह एक अजीब सी उत्तेजना का अनुभव कर रही थी...निर्मला अपने बेटे की हर हरकत का भरपूर आनंद लेते हुए सिसकारी ले रही थी शुभम अपनी मां के दोनों दशहरी आम को अपने दोनों हाथ से दबाकर उनका रौशनी छोड़ने में लगा हुआ था और पीछे से अपने तंबू को बार-बार अपनी मां की गांड पर साड़ी के ऊपर से ही रगड़ रहा था जिससे दोनों को ही दुगना आनंद की प्राप्ति हो रही थी। रसोई घर में अद्भुत और कामोत्तेजना से भरपूर दृश्य रचा जा रहा था।

नहीं रहने दे आज तो छोड़ दे मादरचोद रोज तो तू पीता है मेरा दुध....

साली रंडी पहले अपने दूध दिखाती है और जब उस से खेलने लगो तो बातें बनाती है....

भोसड़ी वाले तुझे किसने कहा था कि तू मेरे दूध से खेल।

तो मादर चोद अपने दूध हिला हिला के क्यों मुझे दिखा रही थी....(शुभम लगातार अपनी मां की चुचियों को आपस में मसलते हुए बोला ।।)

मुझे क्या मालूम था मादरचोद की औलाद कि तू मेरी चूची देख कर पागल हो जाएगा....

साली तू यह कह रही है तुझे तो पता होना चाहिए था कि मैं कितना सीधा साधा लड़का था बस तेरी बड़ी-बड़ी चूचियां और मटकती गांड देखकर ही मैं मादरचोद हो गया.....

अच्छा हुआ भोसड़ी वाले तुम मादरचोद हो गया वरना तेरे बाप ने तो मुझे कहीं का नहीं छोड़ा था तो उसके पास इतना छोटा सा लंड था कि मेरी बुर के अंदर पूरा घुसता भी नहीं था।

तभी तो साले तुझे मेरे गधे जैसे लगा से मजा आ रहा है जो कि तेरी बुर की पूरी गहराई नाप कर बाहर आता है.....

लेकिन मादरचोद मुझे अभी छोड़ दे मुझे नाश्ता बनाने दे मुझे देर हो रही है....

अब मै तेरी एक बात नहीं सुनने वाला तूने अपनी हरकतों की वजह से मेरे लंड को खड़ा कर दि है अब ईसे शांत अभी तू ही करेगी....

अभी रहने दे शुभम बाद में कर लेना मुझे बहुत देर हो रही है...(यह बात निर्मला ऊपरी मन से बोली थी अंदर से तो यही चाहती थी कि जो कार्य करने की शुरुआत उसका बेटा कर चुका है उसे अंजाम तक पहुंचाकर ही दम ले क्योंकि उसकी हरकतों की वजह से निर्मला के तन बदन में वासना की और चिंगारी भड़क रही थी जो दो-चार दिन से एकदम अंदर ही अंदर दबी हुई थी वह पूरी तरह से चुदवाती हो चुकी थी क्योंकि दो-तीन दिन से शुभम ने उसकी चुदाई नहीं किया था और निर्मला की आदत बन चुकी थी कि जब तक हुआ अपने बेटे का लंड अपने दिल की गहराई के अंदर में सूचना कर ले तब तक उसे चैन नहीं मिलता था..... अपनी मां की बात सुनकर वह पूरी तरह से जोश में आ गया था शुभम भी यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां को इस तरह से गंदी बातें करना बहुत अच्छा लगता था खासकर के गालियों के साथ... और यह सब शुभम को भी काफी उत्साहित और कामोत्तेजना से भर देता था दोनों पूरी तरह से मस्त हो चुके थे वह अच्छी तरह से जानता था कि वह जानबूझकर उसे रोकने की कोशिश कर रही है क्योंकि इतने साल में शुभम अपनी मां की हरकत को पहचान गया था उसकी रग रग से वाकिफ हो गया था वह चित्र से जानता था कि उसकी मां को इस समय मोटे तगड़े लंड की जरूरत है इसलिए तो वह किचन में आकर उसे उकसा रही थी... इसलिए शुभम एक झटके से अपनी मां के कंधे को पकड़ कर उसे अपनी तरफ घुमा लिया और अपनी मां की नंगी चूचियों पर मूह रखकर उस पर टूट पड़ा कभी दाएं चूची को मुंह में लेकर पीता तो कभी बांए चुची को.... वह अपनी मां के दशहरी आम का भरपूर मजा लूट रहा था निर्मला पूरी तरह से चुदवासी हो गई थी... रसोई घर में निर्मला की गरम सिसकारी गूंजने लगी वह पूरी तरह से मतवाली हुए जा रही थी.. वह उत्तेजना बस नीचे की तरफ i8 हाथ ले जाकर एक हाथ की मदद से शुभम के पेंट के बटन खोलने लगी और अगले ही पल शुभम के लंड को हाथ में लेकर उसे हिलाते हुए बोली....

जल्दी कर सुभम मुझे देर हो रही है नाश्ता तैयार करना है...

मादरचोद मुझे मालूम है तुझे किस चीज की भूख लगी है मैं जानता हूं कि तू मेरे लंड को अपनी बुर में लेना चाहती है.... तू चिंता मत कर मुझे भी इसी चीज की भूख है तो मेरे लंड की भूखी है मैं तेरी बुर का भूखा हूं...जब तक तेरी रसीली बुर मैं अपना लंड नहीं डाल देता तब तक मुझे चैन नहीं मिलता...
(इतना कहते हुए शुभम लगातार अपनी मां की चुचियों से खेलता रहा कुछ देर तक यूं ही मदमस्त दशहरी आम का रस पीने के बाद वह एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपनी मां की साड़ी को ऊपर तक उठाने लगा और तब तक उठाते रहा जब तक कि उसकी साड़ी कमर तक नहीं आ गई.... साड़ी कमर तक आते ही शुभम ने जब अपनी हथेली से
अपनी मां के टांगों के बीच की उस मखमली जगह को टटोला तो उसे इस बात का अहसास हुआ कि उसकी मां ने पेंटी तो पहनी ही नहीं थी .... इस बात का आभास होते ही शुभम की आंखों में चमक आ गई... और वह अपनी मां की बुर को अपनी हथेली में दबोचते हुए बोला......

आहहहहहहह .... मेरी रानी लगता है कि पूरी तैयारी के साथ आई थी तभी तो आज चड्डी नहीं पहनी है....

क्या करूं मेरा तो मन कर रहा था कि आज बिना कपड़े के नंगी होकर घूमु.....

सससहहहहहहह.... तेरी यही अदा का तो मैं दीवाना हूं मेरी जान.....(इतना कहते हुए शुभम अपनी मां की मखमली बुर को जोर जोर से रगड़ रहा था उसमें से मदन रस का रिसाव लगातार हो रहा था जिसे उसकी हथेली पूरी तरह से गीली होने लगी थी और निर्मला को अपने बेटे की इस तरह की गंदी बातें सुनकर बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी वह एक पल भी सब्र करने लायक नहीं थी उसकी बुर मोटे तगड़े लंड के लिए तड़प रही थी... और शुभम अपनी मां की तड़प दूर करने के लिए एक हाथ से उसकी टांग पकड़ कर उसे किसी वृक्ष के तने की तरह अपनी कमर पर लपेट लिया.... अब शुभम का मोटा तगड़ा लंड निर्मला की रसीली बुर पर ठोकर मारने लगी....

Kitchen me hi Shubham apni ma k sath masti karne laga

the charge of the light brigade analysis line by line
दोनों मां बेटी के सब्र का बांध टूट रहा था दोनों उतावले हो चुके थे एक दूसरे में समाने के लिए शुभम तुरंत एक हाथ से अपने मोटी तगड़ी लंड को पकड़ कर उसे अपनी मां की रसीली बुर पर ऊपर नीचे करके रगड़ना शुरु कर दिया... शुभम की इस हरकत की वजह से निर्मला और ज्यादा गरमाने लगी... उसके मुख से लगातार सिसकारी की आवाज निकलने लगी...
Nirmala ko kitchen me hi sabse jyada maja aat tha

ससससससहहहहहह..... सुभम मेरे राजा मुझे इतना क्यों तड़पा रहा है.... डाल दे जल्दी मेरी बुर में (इतना कहने के साथ ही निर्मला खुद अपने बेटे के लंड को पकड़ कर उसे अपनी गुलाबी बुर् के गुलाबी पत्तियों के मुहाने पर रखकर उसे छेद में डालने के लिए उकसाने लगी।... अपनी मां को खुद इस तरह से अपनी पुर का रास्ता दिखाते हुए पाकर शुभम पूरी तरह से उत्तेजना में सरोवर हो गया और दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड थामकर एक करारा झटका मारा ... और उसका मोटा तगड़ा लंड बुर के बीच की सारी अड़चनों को दूर करता हुआ सीधे जाकर बच्चेदानी से टकरा गया... इस करारे झटके की वजह से निर्मला के मुंह से हल्की आह निकल गई.

आहहहहहहहह ...... सुभम .....

लेकिन शुभम कहां रुकने वाला था घर में आने से पहले उसे इस बात की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी कि उसे इस तरह का जबरदस्त चुदाई करने का मौका मिल जाएगा और वह भी रसोई घर में वैसे भी उसकी और उसकी मां की सबसे अत्यधिक रुचिकर जगह रसोई घर ही था ना जाने क्यों रसोई घर में आकर दोनों अपने काबू में नहीं रहते थे और मौका मिलते ही इस तरह से चुदाई का आनंद उठाते थे उसी तरह से आज भी दोनों को मौका मिल गया था और इस मौके का दोनों ने भरपूर लाभ उठाते हुए चुदाई का आनंद लूट रहे थे शुभम तो अपनी मां की मदमस्त गांड पकड़कर धक्के पर धक्के पी रहा था।
निर्मला अपने बेटे की हर धक्के के साथ गर्म सिसकारी की आवाज निकाल रही थी जिससे शुभम का जोश बढ़ता जा रहा था उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी अपनी मां को चोदते समय उसके जेहन में ख्याल अवश्य रहा था कि वह चाहे जहां भी किसी भी औरत के साथ मुंह मार ले लेकिन जो शब्द जो आनंद की अनुभूति जो तृप्ति का अहसास उसे अपनी मां के साथ चुदाई करने में आता है वैसा अहसास उसे किसी के साथ भी नहीं आता। इसी बात का एहसास लिए वह धक्के पर धक्के मार रहा था.... दोनों मजे लूट रहे थे रसोईघर में चप चप की आवाज के साथ साथ निर्मला की मादक सिसकारियां गुंज रही थी.... शुभम का मोटा तगड़ा लंड किसी मुसल की तरह ओखलीनुमा बुर में बार-बार बज रहा था। निर्मला की मखमली बुर मोटे तगड़े लंड को अंदर लेने की वजह से काफी फैल चुकी थी जिसका आकार एकदम जीरो की शेप में हो गया था।शुभम का मोटा तगड़ा लैंड इतना ज्यादा लंबा था कि हर धक्के के साथ निर्मला को अपने बच्चेदानी पर उसकी ठोकर का एहसास बराबर होता था ‌यह एहसास वही था जो एक औरत को संभोग सुख की तृप्ति का अहसास दिलाता था जो कि इस समय निर्मला बराबर महसूस कर रही थी।
Mitchen me Shubham ji bhar k maja le raha tha

शुभम अपनी कमर की रफ्तार बिल्कुल भी कम नहीं कर रहा था एक ही रफ्तार में अपनी मां की चुदाई कर रहा था और यही बात निर्मला को बहुत ही अच्छी लग रही थी कि एक ही रफ्तार में शुभम का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई नाश्ता हुआ बाहर आता है और उसी स्पीड से फिर अंदर की तरफ चला जाता है इस तरह की रगड़ से वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी।....
वैसे भी निर्मला रसोई घर में चुदाई का भरपूर मजा लेती थी। सुभम लगातार अपनी मां की मदमस्त गांड था मैं जोरदार धक्के पर धक्के लगा रहा था...
दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे निर्मला की सिसकारी की आवाज बढ़ती जा रही थी सांसो की गति लगातार किसी रेल के इंजन की तरह चल रही थी शुभम भी हांफ रहा था... दोनों चरमोत्कर्ष की तरफ अग्रसर हुए जा रहे थे ऐसा लग रहा था कि दोनों अपनी मंजिल के बेहद करीब थे क्योंकि दोनों इस चरमोत्कर्ष के अंतिम क्षण में चुदाई का भरपूर आनंद लूट रहे थे और थोड़ी ही देर में निर्मला अपने बेटे को अपनी बाहों में भर कर अपना मदन र छोड़ने लगे और कुछ धक्कों के बाद शुभम भी झड़ गया...

एक बार फिर से दोनों बासना माई खेल खेलकर तृप्त हो चुके थे दोनों अपने अपने कपड़े दुरुस्त करके वापस अपने काम में लग गए थे दूसरी तरफ सरला को समझ में नहीं आ रहा था कि शुभम ने उसे यह गिफ्ट का पैकेट क्यों देकर गया और इस गिफ्ट के पैकेट में है क्या लेकिन उसका मन आशंका से भर जाता था कि कहीं शुभम ने ब्रा पेंटी खरीद कर उसे गिफ्ट तो नहीं कर दिया.... इस बात का ख्याल मन में आते ही उसकी दिल की धड़कन तेज रफ्तार से चलने लगती थी उसकी टांगों के बीच हलचल होना शुरू हो गई थी। वह धड़कते दिल के साथ शुभम के द्वारा दिए गए गिफ्ट के पैकेट को खोलने लगी।
 
सरला का दिल जोरों से धड़क रहा था वह अपने कमरे में अपने बिस्तर पर शुभम के दिए हुए गिफ्ट के पैकेट को हाथों में लेकर इधर-उधर घुमाते हुए उसे देख रही थी। वैसे भी सरला अब 2 दिन से लेट में ही उठती थी क्योंकि वैसे भी घर पर कुछ ज्यादा काम नहीं रहता था इसलिए वह आराम ही करती थी... उसके दिल की धड़कन बहुत तेजी से चल रही थी मन में अजीब अजीब से ख्याल आ रहे थे ... उसका मन उत्सुकता से घिरा हुआ था... उसे पक्का यकीन तो नहीं था कि शुभम ने उसे गिफ्ट के पैकेट में क्या दे कर के आए लेकिन उसकी अंतरात्मा बार-बार उसे कह रही थी कि उसके अंदर ब्रा और पेंटी है क्योंकि जिस हिम्मत के साथ वह अपने हाथों में उसकी ब्रा पेंटी लेकर उसे पेंटी के छेद के बारे में बोला था उसकी हिम्मत को देखते हुए उसे अंदर ही अंदर ना जाने क्यों विश्वास हो रहा था कि हो ना हो सुभम उसके लिए ब्रा और पैंटी ही लाया है.... लेकिन फिर उसके मन में यह ख्याल आता था कि ऐसा तो शुभमबिल्कुल भी नहीं है .. जहां तक कुछ दिनों में वह शुभम के बारे में जानती थी उसे ऐसा लगता था कि जिस तरह का वह सोच रही है ऐसा बिल्कुल भी नहीं है वह गिफ्ट में एक औरत के अंतर्वस्त्र को नहीं दे सकता.... लेकिन फिर भी ऐसा मन में ख्याल आते हैं ना जाने क्यों अपने इस ख्याल को वह खुद ही झूठ लाने की कोशिश कर दी थी क्योंकि अंदर ही अंदर वह यही चाहती थी कि शुभम उसे ब्रा और पेंटी ही गिफ्ट में पैक करके दिया हो।
अपनी ख्याल और भावनाओं पर उसे बिल्कुल भी सब्र और विश्वास नहीं हो रहा था अपने दिल की धड़कनों को दुरुस्त करते हुए वह गिफ्ट वाले पैकेट को खोलना शुरू कर दी.... दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी मानो बेलगाम घोड़ा दौड़ रहा हूं और उसके टापो की आवाज पूरे बदन में गूंज रही हो.... उत्तेजना के मारे सरला का गला सूखते जा रहा था टांगों के बीच मुलायम अंग पर उत्तेजना अपना असर दिखा रहा था.... उम्र के इस पड़ाव पर आकर सरला इतनी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव पहली बार कर रही थी उसे तो बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा था कि उसके बदन में इस तरह के बदलाव आएंगे और वह भी इस उम्र में लेकिन अपनी इस बदलाव की वजह से वह काफी खुश और उत्तेजित नजर आ रही थी। धीरे-धीरे सर गाने पैकेट के ऊपर वाला रेपर खोलकर उसे फेंक दी... चेहरा सुर्ख लाल होने लगा था शर्म की लालीमा पूरे चेहरे पर छाने लगी थी बानो दूर आसमान में सूरज अपनी रंग बिरंगी लालिमा लिए नीचे जमीन में धंसता चला जा रहा हो... आखिरकार सब्र की घड़ी खत्म हो गई उसका मन जो कह रहा था वही हुआ गिफ्ट वाला पैकेट खुल चुका था और सरला पैकेट के अंदर अपने लिए लाए गए अंतर्वस्त्र को देखकर पूरी तरह से उत्तेजना में भर गई उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी बुर कचोरी की तरह फूल चुकी है और जिस तरह से कचोरी में बीच में से तोड़कर उसमें चटनी डाली जाती है उसी तरह से सरला की बुर में से जो की कचोरी जैसी फूली हुई थी उसमें से मदन रस की चटनी बाहर निकल रही थी वह पूरी तरह से काम होते जना में सरोवर हो चुकी थी वह पैकेट में से अपने लिए लाए गए अंतर्वस्त्र को हाथ में उठा कर इधर-उधर करके देखने लगी उसके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी और खुशी से ज्यादा उसके चेहरे पर उत्तेजना के असर नजर आ रहे थे...
शुभम की हिम्मत देखकर ना जाने क्यों शुभम पर उसे गर्व होने लगा...वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके बेटे की उम्र का लड़का उसके लिए बेझिझक ब्रा और पेंटी लेकर आएगा... वह घर में पूरी तरह से अकेली थी इसलिए अपने लिए लाई गई ब्रा पेंटी को पैकेट में से निकालकर वह अपने दोनों हाथों में लेकर उसे घुमाते हुए देखने लगी वह काफी खुश नजर आ रही थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि इस तरह का गिफ्ट बरसों के बाद उसे मिला था।ब्रा और पेंटी की दोनों जोड़ियां उसे बेहद जच रही थी वह काफी उत्साहित नजर आ रही थी।
लेकिन उससे भी ज्यादा वह काफी कामोत्तेजना में डूबती हुई नजर आ रही थी उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी फटी हुई पैंटी उसकी बुर से निकले मदन रस में पूरी तरह से गीली हो रही थी....
अपनी बुर का रिसाव उसे खुद बेचैन बना रहा था वह अपना हाथ कपड़े के ऊपर से अपनी बुर पर रखकर अपने गीले पन का जायजा ले रही थी....
वह शुभम को मन ही मन धन्यवाद देकर घर के काम में जुट गई वह काफी उत्साहित ही नहाने के लिए क्योंकि आज बरसों के बाद वह अपने बदन पर नई ब्रा और पेंटी पहनने वाली थी और वह भी उस ब्रा पेंटी को जिसे शुभम ने उसके लिए गिफ्ट के तरीके से ले आया था। एक उम्रदराज औरत के लिए इसे ज्यादा सुख की बात क्या हो सकती है कि उसके बेटे की उम्र का लड़का उसका दीवाना हो गया है...और जिसकी दीवानगी मे वह खुद को पिघलता हुआ महसूस कर रही है.... वह जल्दी जल्दी घर के काम निपटाने मैं लग गई लेकिन फिर भी आज उसे घर की सफाई करनी थी इसलिए थोड़ा समय हो गया.... लेकिन फिर भी घर की सफाई नहीं हो पा रही थी आखिरकार अकेले वह कितना साफ सफाई कर पाती एक तो उसे शुभम के द्वारा लाई गई ब्रा पेंटी पहन कर महसूस करना था कि वह कैसी है लग रही है और ऊपर से यह घर का काम.....

दूसरी तरफ शुभम ना चाहते हुए भी अपनी मां का काम रूप देखकर पूरी तरह से वासना में लिप्त होकर रसोई घर में अपनी मां की जबरदस्त चुदाई करके एकदम तृप्त हो चुका था ‌.... और खाना खाकर अपने कमरे में आराम कर रहा था लेकिन आज उसे भी चैन नहीं पड़ रहा था बार-बार उस सरला उसकी आंखों के सामने नजर आ जा रही थी बार-बार उसकी मटकती हुई गांड उसे परेशान कर रही थी.... वैसे भी उसे अपना रास्ता साफ नजर आ रहा था क्योंकि जिस तरह से वह शाम के वक्त छत पर उससे बात किया था और उसकी अश्लील बात पर भी जिस तरह से सरला मुस्कुराई थी। शुभम को उसकी मुस्कुराहट से हिम्मत बंधी थी तभी तो वह उसके लिए ब्रा और पेंटी लाकर उसे गिफ्ट किया था अब उसे यह देखना था कि उसके द्वारा लाई गई ब्रा पेंटी सरला पहनती है या नहीं... यही बात सोच कर उसके मन में अजीब सी कशमकश चल रहे थे और साथ ही उत्सुकता बढ़ती जा रही थी वह अपने कमरे में बिस्तर पर करवटें बदल रहा था... वह मन में सोच रहा था कि समय सरला के घर में कोई नहीं है अगर किस्मत मेहरबान रही तो उसका काम बन जाएगा और अगर एक बार काम बन गया तो पड़ोस में ही चोदने के लिए एक औरत और मिल जाएगी... वैसे भी शुभम को अपनी मर्दाना ताकत पर और अपने लंड पर गले तक विश्वास था वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर उसका लंड किसी भी औरत की बुर में एक बार चला गया तो वह औरत उसकी दीवानी हो जाती है... और वही ताकत वह सरला पर आजमाना चाहता था... एक तो बरसों से प्यासी और पूरे घर में एकदम अकेली हो ना हो उसका काम जरूर बन जाएगा.....

शुभम दीवार पर टंगी घड़ी की तरफ देखा तो 2:00 बजने वाले थे दोपहर का समय हो रहा था और ऊपर से गर्मी उसे मालूम था कि इस समय छुट्टी और गर्मी के असर में सब लोग अपने अपने घर में ठंडी ऐसी की हवा ले रहे होंगे वैसे तो वह भी अपने कमरे में ठंडी हवा का आनंद लूट रहा था लेकिन जहां जवानी जोश मार रही हो वहां इस तरह का आराम हराम होता है इसलिए वह अपनी जवानी का जोश ठंडा करने के लिए अपने कमरे में से बाहर आ गया और अपनी मां के कमरे की तरफ़ देखा तो दरवाजा बंद था वह समझ गया कि उसकी मां सो रही है और वैसे भी रसोई घर में जिस तरह की जबरदस्त चुदाई उसने अपनी मां की किया था उससे साफ लगता था कि वह पूरी तरह से तृप्त होकर नींद की आगोश में चली गई है। शुभम निश्चिंत होकर अपने घर से बाहर आ गया और वह सरला के घर की तरफ कदम बढ़ा दिया जो कि उसके घर से महज दो कदम ही दूरी पर थे... वह दरवाजे पर खड़ा होकर घर की बेल बजाता इससे पहले ही उसे आभास हो गया कि दरवाजा खुला हुआ है जोकि सरला जल्दबाजी में लॉक करना भूल गई थी.... यह बात शुभम अच्छी तरह से जानता था कि सरला इस समय घर पर बिल्कुल अकेली है और जरूर उसने उसका दिया हुआ पैकेट खोलकर देखी होगी और अंदर अपने लिए ब्रा पेंटी देखकर उसके मन में अजीब अजीब से ख्याल आए होंगे यह सब बातें सोचकर शुभम की हालत पतली हो जा रही थी उसके मन में उत्सुकता बढ़ती जा रही थी कि उसके लाए पैकेट के बारे में सरला क्या प्रतिक्रिया देती है... वह धड़कते दिल के साथ घर में प्रवेश किया और दरवाजे को वापस बंद कर दिया वह आवाज देकर सरला को अपने आने की खबर देना चाहता था लेकिन उसका शैतानी दिमाग कुछ और करने के मूड में था वह देखना चाहता था कि इस तरह से दरवाजा खुला छोड़ कर सरला आखिरकार घर में कर क्या रही है... और वह दबे पांव सरला के कमरे की तरफ जाने लगा जो कि वह पहले भी इस घर में आकर इतना तो जान ही गया था कि किस का कमरा कहां पर है।
दूसरी तरफ सरला नई ब्रा और पेंटी पाने की खुशी में जल्दी-जल्दी बाथरूम में घुस गई और यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि घर में उसके सिवा कोई भी नहीं है इसलिए निश्चिंत होकर वो दरवाजा खुला छोड़ दी... और आनन-फानन में अपने सारे वस्त्र उतारकर संपूर्ण रूप से एकदम नंगी हो गई... हालांकि ऐसा पहले कभी होता नहीं था कि सरला अपने सारे वस्त्र उतारकर पूरी नंगी होकर नहाए..
लेकिन शुभम के मिलने के बाद से उसके हालात और मिजाज दोनों बदल चुके थे वह बाथरूम में जाते ही अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो चुकी थी...

Sarlaa ko bathrum me nangi dekhkar shubham ki haalat kharab hone lagi

एक बार अपने नंगे पन देख कर उसकी खुद की आंखों में शर्म तैरने लगी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह एकदम नंगी हो चुकी है‌ .. उसके बड़े बड़े दूध एकदम पपैया के फल की तरह लग रहे थे। पेट हल्का सा बाहर निकला हुआ था जिससे उसका बदन भद्दा नहीं बल्कि और भी ज्यादा कामुक लगता था। एक तरफ सरला निश्चिंत होकर संपूर्ण व्यवस्था में बाथरूम में घुसी हुई थी और वह भी बाथरूम का दरवाजा खुला छोड़ कर... और दूसरी तरफ शुभम अपने मचलते मन पर काबू ना पा सकने की वजह से सरला के घर में प्रवेश कर चुका था और चोरी छुपे उसे देखने की फिराक में था... उसका दिल भी जोरों से धड़क रहा था वह चोर कदमों से सरला के कमरे की तरफ आगे बढ़ रहा था वह यह सोच रहा था कि उस दिन जैसा आज भी देखने का मौका मिल जाए तो उसका यू चोरी-छिपे आना सफल हो जाएगा...
उसकी उम्मीद के मुताबिक कमरे का दरवाजा खुला हुआ था। शुभम का दिल जोरों से धड़क रहा था किस बात का ज्ञान उसे अच्छी तरह से था कि एक अकेली औरत और वह भी उसके मन में जब शारीरिक संसर्ग की कामना जागरूक हो रही हो ऐसे हालात में औरत अकेले कमरे में अस्त-व्यस्त हालत में होती ही है और यही सोचकर वह सरला के कमरे में चोरी से नजर घुमाया तो कमरे में कोई भी नहीं था कमरे में सरला को ना पाकर वह थोड़ा बेचैन हो गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार सरला कहां है? वह फिर से धीरे-धीरे सीढ़ियां उतरने लगा कि तभी उसे शावर की आवाज सुनाई दी... सांवर की आवाज कानों में पढ़ते ही शुभम समझ गया कि जरूर वह बाथरूम में नहा रही होगी.... यह ख्याल मन में आते ही सरला को चोरी चोरी देखने की उत्सुकता मन में बढ़ने लगी... क्योंकि अभी तक वह सरला को कपड़ों में ही देखते हैं आया था एक बार नसीब का तेज होने की वजह से कमरे में यूं ही जाते समय कमर के ऊपर का नग्न बदन उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां देखने का शुभ अवसर उसे प्राप्त हो चुका था... लेकिन अब उसके मन में सरला को पूरी नंगी देखने की इच्छा जागने लगी थी और अपनी यही इच्छा के तहत वह दबे पांव बाथरूम की तरफ आगे बढ़ने लगा ... लेकिन उसके मन में शंका जाग रही थी कि अगर बाथरूम का दरवाजा बंद हुआ तो उसके सारे किए कराए पर पानी फिर जाएगा लेकिन फिर भी मन में आखिरी उम्मीद लिए वह बाथरूम की तरफ आगे बढ़ने लगा जहां से सावर की आवाज तेज होती जा रही थी. ‌ वह पूरी तरह से निश्चित था क्योंकि घर में उस पर किसी की नजर पड़ जाए ऐसे हालात बिल्कुल भी नहीं थे क्योंकि इस समय घर में उसके और सरला के सिवा तीसरा कोई भी नहीं था.... इसलिए वह थोड़ा बहुत निश्चिंत था। उसको दिल जोरों से धड़क रहा था ‌।
धीरे-धीरे चोर कदमों से चलते हुए वह बाथरूम के एकदम करीब पहुंच गया वह किसी भी प्रकार का आहट नहीं करना चाहता था जिससे सरला को इस बात का आभास हो कि बाथरूम के बाहर कोई है क्योंकि वह चोरी-छिपे सब कुछ देखना चाहता था।
शुभम की नसीब बहुत तेज थी क्योंकि जैसे ही हो बाथरूम के दरवाजे पर पहुंचा दो दरवाजा हल्का सा खुला नजर आया जिससे शुभम का मन प्रसन्नता से भर गया..... उसकी आंखों में चमक नजर आने लगी वह हल्के से दरवाजा को थोड़ा सा और खोलकर अंदर की तरफ नजर घुमाया तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई... उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था लेकिन जिस तरह से उसके मन में यह इच्छा प्रबल होती जा रही थी सरला को नंगी देखने की शायद यह उसकी महत्वाकांक्षा का ही नतीजा था कि उसकी कल्पना उसका सपना सच होता नजर आ रहा था .... बाथरूम के अंदर का दृश्य बेहद उत्तेजना आत्मक था.... 8 बाय 10 के लंबे चौड़े बाथरूम में जोकि सारी सुख-सुविधाओं की वस्तुओं से संपन्न था जिसकी चिकनी टाइल्स पूरे बाथरूम को सुशोभित कर रही थी ऐसे में उस बाथरूम की शोभा बढ़ाते हुए अंदर का नजारा ही कुछ बेहद कामोत्तेजना वाला था। और ऐसे शोभायमान बाथरूम क्यों शोभा तब और ज्यादा बढ़ जाती है जब उसमें नहाने वाला शख्सियत बेहद खूबसूरत और मादक बदन वाला हो और कुछ ऐसा ही नजारा शुभम को अपनी आंखों से नजर आ रहा था बाथरूम में सरला संपूर्ण रूप से निर्वस्त्र एकदम नंगी होकर बाथरूम की शोभा बढ़ा रही थी या यूं कह लो कि सरला की वजह से ही बाथरूम की शोभा बढ़ रही थी....
Shubham is tarah se chorichipe sarlaa ko bathrum me nangi nahate huye dekh raha tha


शुभम की तो सांस ही अटक गई उसके दिलो-दिमाग पर कुछ ऐसा ही नजारा छाया हुआ था लेकिन उसे इतनी भी उम्मीद नहीं थी कि उसे इस तरह का नजारा देखने को मिल जाएगा लेकिन उसे उम्मीद से दुगना मिला था वह अपनी आंखों से सरला को एकदम नंगी देख रहा था अर्धनग्न अवस्था में तो बहुत पहले ही देख चुका था लेकिन आज बिना वस्त्र के सरला को देखकर एकदम कामोत्तेजना से भर गया....सुबह में अब तक अपनी जिंदगी में बहुत सी औरतों को एकदम नंगी देख चुका था लेकिन सरला की बात कुछ और थी क्योंकि उन औरतों में से सरला की उम्र लगभग 5 या 7 साल कुछ ज्यादा ही थी इसलिए सरला के खूबसूरत नंगे बदन का आकर्षण उसके तन बदन को झकझोर के रख दे रहा था... कपड़ों के ऊपर से ही सरला के बदन की तो हो लेकर वहअपने बदन की गर्मी को अपने हाथों से कई बार शांत कर चुका था लेकिन आज उसकी आंखों के सामने इस समय उसके सपनों की रानी खड़ी थी और वह भी संपूर्ण निर्वस्त्र अवस्था में सागर का पानी उसके सर से लेकर पांव तक उसके चिकने बदन पर फिसलता हुआ गिर रहा था.... इस समय सरला सर से लेकर पांव तक ठंडे पानी की फुहार में एकदम भीगी हुई थी एकदम गोरी होने के कारण वह बेहद खूबसूरत लग रही थी उसके बदन का कटाव अभी भी बरकरार था हालांकि वजन थोडा ज्यादा था और हल्का सा पेट भी निकला हुआ था लेकिन इन सबके बावजूद भी उसकी मादकता में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आई थी...
शुभम उसे देखा तो देखता ही रह गया शावर के ठंडे ठंडे फुहारों में वह नहाने का पूरी तरह से आनंद ले रही थी उसके पापा या जैसे बड़े-बड़े चूचीयो पर पानी मोतियों के दाने की तरह फिसल रहा था। सरला की बड़ी-बड़ी चुचियों को देखकर शुभम के मुंह में पानी आ गया ऐसा लग रहा था कि जैसे एक विशाल वृक्ष में आम का बड़ा बड़ा फल लगा हो।शुभम उत्तेजना में सरोवर हुआ जा रहा था उसका गला सूखता जा रहा था और वह अपने थूक से अपने गले को गिला करने की कोशिश करता हुआ बाथरूम के अंदर के नजारे का चोरी-छिपे बेहद आनंद लूट रहा था...
Bathrum me nangi sarlaa ko dekhkar shubham pent k upar se apne Lund ko masal raha tha


बाथरूम के अंदर का नजारा देखकर शुभम को लंड किसी लोहे के रोड की तरह एकदम कड़क हो गया था शुभम की नजर सरला के नंगे बदन पर ऊपर से नीचे की तरफ जहां तक हो सकती थी वहां तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी मोटी मोटी जांघों के बीच की उसकी पतली दरार बेहद सुहावनी लग रही थी जो कि बेहद हल्की-हल्की ही दिख रही थी उस पर घुंघराले बालों का झुरमुट लगा हुआ था। शुभम यह नजारा देखकर एकदम उत्तेजना से भर गया और पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को पकड़ कर मसलने लगा.... सरला इस बात से अनजान की इस उम्र में भी वह किसी जवान लड़के के लंड को खड़ा कर सकती है वह नहाने में पूरी तरह से मशगुल थी।
शुभम की निगाह बार बार सरला की मोटी मोटी केले के समान चिकनी जांघों के बीच की उस पतली दरार पर चली जा रही थी जहां पर दुनिया का सारा सुख छिपा हुआ था। उस जगह को देखकर शुभम के मुंह में पानी आ रहा था और साथ ही उसके लंड में से भी पानी की दो बूंदे टपक गई.... सरला नहाने में मस्त होते जा रही थी लेकिन तभी सरला की हरकत को देखकर शुभम एकदम से चौक गया क्योंकि वह अपने दोनों हाथों से अपने बड़े बड़े पपैया जैसे चुचियों को दबाना शुरू कर दी थी। यह नजारे को देखकर ही शुभम को अपनी मंजिल करीब लगने लगी वह समझ गया कि सरला बेहद प्यासी औरत है... और इसे इस समय मोटे तगड़े लंड की जरूरत है ।बाथरूम के अंदर के नजारे को देखकर शुभम को लगने लगा कि आज उसकी मनोकामना जरूर पूरी हो जाएगी। सरला शावर के नीचे मस्त होते हुए अपनी बड़ी-बड़ी दोनों चुचियों को दबाते हुए स्तन मर्दन का मजा ले रही थी।.... उत्तेजना के मारे शुभम की सांसो की गति एकदम तेज हो गई थी उसकी इच्छा तो हो रही थी कि अभी बाथरूम का दरवाजा खोलकर अंदर चला जाए और अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर में डालकर उसकी सारी गर्मी निकाल दे लेकिन वह ऐसा नहीं करना चाहता था क्योंकि वह धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहता था और वैसे भी सरला की हरकत को देखकर उसे इतना तो समझ में आ गया था कि सरला को मोटे तगड़े लंड की जरूरत है और जिस तरह से वह उसके साथ बर्ताव कर रही थी उससे साफ जाहिर था कि अब उसका काम बनने वाला है।

ऐसा लग रहा था मानो बाथरूम के अंदर कोई पोर्न मूवी चल रही हो समय जैसे थम सा गया था शुभम की आंख एकदम स्थिर होकर बाथरूम के अंदर के नजारे पर जम सी गई थी शिवम की हालत अब और ज्यादा खराब हो गई जब सरला एक हाथ से अपनी चूची था मैं दूसरे हाथ से अपनी मखमली बुर को मसलना शुरू कर दी... यह नजारा देखकर तो शुभम एकदम से गनगना गया। शुभम उत्तेजना के मारे पसीने से तरबतर हो चुका था वह पूरी तरह से मदहोश हो गया था और उससे भी ज्यादा मदहोशी के आलम में सरला खोने लगी थी.... वाकई में इस समय बाथरूम में अगर उसके साथ कोई मर्द होता तो वह अब तक उसके लंड को अपनी बुर में ले ली होती। उम्र के इस पड़ाव पर एक औरत इतनी ज्यादा चुदवासी हो जाएगी शुभम यह पहली बार अपनी आंखों से देख रहा था... और सरला के बर्ताव में आए इस तरह के जबरदस्त बदलाव का कारण भी शुभम ही था। तभी सरला बाथरूम की दीवार की तरफ अपना मुंह करके घूम गई जिसकी वजह से शुभम की आंखों के सामने सरला की बड़ी-बड़ी गांड मटकने लगी... यह नजारा देखकर तो शुभम की सांस अटकने जैसी हो गई क्योंकि औरतों की बड़ी बड़ी गांड शुभम की सबसे बड़ी कमजोरी थी।
अब माहौल इस तरह का बन गया था कि मानो ऐसा लग रहा था की सलाह नहा रही नहीं है बल्कि शुभम को अपनी मदहोश जवानी के रंग में डूबो रहि है....शुभम कैलेंडर में रक्त का प्रवाह बड़ी तेजी से हो रहा था उसे अपने लंड में दर्द महसूस होने लगा था सरला की मदहोश कर देने वाली जवानी शुभम के दिल पर हथौड़े से वार कर रही थी उससे सब्र नहीं हो रहा था उसकी इच्छा यही हो रही थी कि इसी समय बाथरूम में घुस जाए और सरला की मदहोश जवानी में डूब जाए लेकिन ऐसा कर सकने में अभी वह असमर्थ था। सरला नहा चुके थे इसलिए सुबह का वहां रुकना ठीक नहीं था और वह चुपचाप आकर ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठ गया और वहां पर सरला के बाहर आने का इंतजार करने लगा।
 
शुभम ड्राइंग रूम में आकर सोफे पर बैठकर अपनी उखड़ती हुई सांसो को दुरुस्त करने में लगा हुआ था.... क्योंकि बाथरूम के अंदर का नजारा उसे एकदम से बेसब्र बना रहा था उसे खुद पर यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी आंखों ने जो कुछ भी देखा वह सच है. ‌ सरला को नंगी देखने तक तो सब कुछ ठीक था लेकिन वह कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि सरला जैसी औरत है एकदम कामातुर होकर अपने हाथों से अपनी कामवासना बुझाने की कोशिश कर रही होगी ...लेकिन अपनी मां के हालात को देखते हुए उसे सब कुछ समझ में आ गया था कि एक औरत को भूख के साथ-साथ शरीर की भी भूख लगती है और जब यह भूख हद से ज्यादा बढ़ जाती है तो उसे मिटाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है जैसे कि उसकी मां खुद उसके साथ शारीरिक संबंध बनाकर सारी मर्यादाओं को सारे रिश्ते नातों की डोर को तोड़ कर अपनी काम पिपासा बुझाती आ रही थी....
शुभम के होश उड़े हुए थे उत्तेजना के मारे उसकी कनपटी पूरी लाल हो चुकी थी...शुभम के जिंदगी में ऐसे हालात बहुत बार आए थे जब वह हद से ज्यादा बेसब्र होकर उत्तेजना का अनुभव कर चुका था क्योंकि एक से एक औरतों के साथ वह संभोग सुख भोग चुका था लेकिन सरला की बात कुछ और थी क्योंकि जिन औरतों के साथ हुआ शारीरिक संबंध बना लिया था उनसे सरला की उम्र कुछ ज्यादा ही थी.... सरला की तरफ तो शुभम अनायास ही शारीरिक आकर्षण में फस गया था वह कभी भी सरला से शारीरिक संबंध बनाना नहीं चाहता था लेकिन सरला जिस तरह से उस पर और उसकी मां पर निगरानी रख रही थी उसके चलते शुभम को सरला का मुंह बंद कराने के लिए इस तरह के कदम उठाने पड़े और आज वह दो कदम आगे बढ़ चुका था वह अच्छी तरह से जानता था कि सरला के साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद सरला कभी भी अगर उसे उसके और उसकी मां के बीच के नाजायज संबंध के बारे में पता चलता है तो वह किसी को बताने के काबिल नहीं रह जाएगी क्योंकि वह खुद उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की और ऐसे में शुभम को मौका मिल जाएगा कि वह किसी से भी उसका राज ना करें वरना वह खुद बदनाम हो सकती थी इसलिए शुभम पूरी तरह से निश्चिंत हो गया था अब उसे यह खेल में मजा आ रहा था और वह ईस खेल में आगे बढ़ना चाहता था....

सोफे पर बैठ के धड़कते दिल के साथ शुभम सरला के बाहर आने का इंतजार कर रहा था...जो कि इस समय बाथरूम के अंदर एकदम नंगी होकर नहाने के साथ-साथ अपनी शारीरिक अंगों के साथ छेड़छाड़ करके पूरा लुफ्त उठा रही थी.....सरला बाथरूम में एकदम मस्त होकर नहा रही थी साथ ही अपने अंगों से खेल रहे थे उसकी जिंदगी में यह वाकया पहली बार हो रहा था जब हवा अपने ही अंगों के साथ खेल रही थी... और वास्तव में उसे अपने अंकों के साथ खेलने नहीं बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी वह बाथरूम में एकदम नंगी होकर चिकनी टाइल्स में अपने प्रतिबिंब को देख रही थी जो कि हर धुंधला दिख रहा था लेकिन फिर भी साफ नजर आ रहा था कि वह बाथरूम में एकदम नंगी है.... बड़े-बड़े पपैया जैसे दूध को हाथों में लेकर व झूला रही थी और उसे जलाते समय उसके जीवन में शुभम की छवि बसी हुई थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम चोर नजरों से उसकी बड़ी बड़ी छातियों को घूरता रहता है..... और वह अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर अपने बड़े-बड़े तरबूज की माफिक गोल-गोल कांड को दोनों हाथों से उस पर चपत लगाते हुए और उसे फैलाते हुए मन में सोच रहे थे कि शुभम इसे भी बड़ी प्यासी नजरों से देखता है.... वह अपने मन में अपने आप से ही बात कर रही थी तो क्या वह इस उम्र में भी जवान लड़की को अपनी तरफ आकर्षित करने में सक्षम है। अपने सवालों का जवाब अपने आप से ही देते हुए वह मन में बोल रही थी हां अगर ऐसा नहीं होता तो शुभम जैसा जवान लड़का उसके पीछे आकर्षित होकर ना पड़ा होता... यह उसके मादक बदन का ही कमाल है कि शुभम किसी ना किसी बहाने उसकी मदद करने के लिए तत्पर रहता है और तभी तो वह उसके लिए ब्रा और पेंट भी खरीद कर ला कर उसे गिफ्ट किया है यह सब सोचते ही सरला की सांसो की गति तेज होने लगी.... वह समझ गई कि सुबह उसकी तरफ पूरी तरह से आकर्षित होकर इस तरह से उसे ब्रा और पेंटी गिफ्ट कर रहा है जरूर उसके मन में कुछ ना कुछ चल रहा होगा।
Sarlaa bathrum me ekdam nangi


और वैसे भी अगर यह बात सच है तो यह उसके लिए ही बेहद गर्व करने वाली बात है वरना शुभम जैसे नौजवान लड़का किसी को सच लड़की के पीछे पड़ा होता सरला जैसी उम्रदराज औरत के पीछे नहीं... कुछ भी हो अब इसे इस खेल में मजा आ रहा था. यह सब सोचकर सरला बेहद खुश नजर आ रही थी और जोर जोर से खांसी अपने दूध को दबाते हुए दूसरे हाथ से अपनी टांगों के बीच के बीच मखमली जगह को मसाला रही थी जिस पर सावर से ठंडा ठंडा पानी गिर रहा था। उसके लिए मौका भी अच्छा था क्योंकि उसकी बहू घर पर नहीं थी और वह घर पर एकदम अकेली थी। वह अपने मन में सोच रही थी क्यों ना एक कदम आगे बढ़ा कर वहां सब कुछ कर ले जो एक प्यासी औरत करती है लेकिन तभी उसका मन उसे कोसने लगता उसे भला बुरा कहता लेकिन फिर दूसरा मन कहता कि आखिरकार एक बार फिर से जवानी वाला सुख भोग लेने में क्या दिक्कत है और ऐसे भी अगर व शुभम के साथ है शारीरिक संबंध बनाती है तो इस बात की किसी को भनक भी नहीं लग पाएगी और एक बार फिर जिंदगी जीने का मकसद मिल जाएगा.... आखिरकार सुभम की वजह से ही तो उसकी टांगों के बीच की सूखी पड़ी जमीन फिर से हरी होने लगी थी... वरना पति के गुजरे तो बरसों बीत गई थी तब से वह एक सती की तरह जिंदगी गुजार रही हैं... आखिर इस तरह की जिंदगी जी कर उसे क्या मिला बहुत सी औरतें हैं जो अपनी सुख-सुविधा के लिए बहुत कुछ करने को तैयार हो जाती है और करती भी हैं... पति होता तो शायद यह सब बातें बहुत नहीं सोचती लेकिन सरला अपने आप से ही बातें करते हो कभी उदास हो जाती तो कभी उसकी आंखों में चमक आ जाती आखिरकार बहुत कुछ सोच विचार करने के बाद वह इस नतीजे पर पहुंची की यह सब वह अपनी किस्मत पर छोड़ देगी अपने आप से वापस नहीं करेंगे अगर शुभम उसके साथ आगे बढ़ना चाहता है तो वह उसे रोकेगी नहीं... अपने आप को पूरी तरह से तसल्ली देने के बाद वह इस नतीजे पर पहुंच चुकी थी जहां पर बने ही उसकी हामी नहीं थी लेकिन अंदर ही अंदर वह यही चाहती थी कि शुभम जैसा जवान लड़का उसके साथ सब कुछ करने के लिए आगे बढ़े और वहां अपना सब कुछ समर्पण करने के लिए अंदर ही अंदर तैयार हो चुकी थी....
Sarlaa bathroom me ekdam nangi

अब वो नहा ली थी.... ठंडे पानी से नहाने के बाद उसका मन हल्का हो गया था किसी भी प्रकार का बोझ उसके मन पर नहीं था आखिरकार वह भी एक औरत थी उसे भी अपनी जिंदगी जीने का पूरा हक था अपनी पहली संतान होने के 1 साल बाद ही अपने पति को वह खो चुकी थी तब से लेकर आज तक वह अपने बेटे के लिए ही जी रहे थे इस बीच में कभी भी अपने कदम को लड़खड़ा ने नहीं दी लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर आकर वह आज पूरी तरह से लड़खड़ा चुकी थी अपना सुख ढूंढने के लिए वह अपने सारे संस्कारों मर्यादाओं का त्याग करने के लिए तैयार हो चुकी थी वह काफी खुश नजर आ रही थी और मन ही मन में गीत गुनगुनाते हुए टावल से अपने भीगे बदन को पोंछ रही थी.... वैसे वास्तव में सरला इस उम्र में भी बेहद सेक्सी लगती थी उसके मादक बदन भले ही थोड़ा भारी थे लेकिन एक पुरुष को आकर्षित करने के लिए काफी था वैसे भी इस बात से अनजान रहती थी कि सड़क पर आते जाते मनचले लड़के और प्यासी नजर वाले मर्द हमेशा उसे झांकते रहते थे लेकिन इस बात का एहसास उसे आज तक नहीं हुआ था। वह कभी इन सब बातों पर ध्यान ही नहीं दी थी। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि सरला एकदम चरित्रवान होना थी शादी से पहले बार अपने दोस्तों के साथ जोकि बॉयफ्रेंड कम बस उसके साथ मजे लेने के लिए थे उनके साथ वहां शारीरिक संबंध बना चुकी थी और शादी से पहले ही वह चुदाई का पूरा आनंद उठा चुकी थी। यह सब उसकी जिंदगी का पहला पहला था जोकि खत्म हो चुका था और शादी के बाद के पन्ने पलटने से कोई फायदा नहीं था अब उसकी जिंदगी का नया पहलु शुरू हो रहा था....
आज नहा लेने के बाद सरला कुछ और भी ज्यादा खूबसूरत लगने लगी थी अपने बालों को टावल से पोछकर अपने वतन से लपेटने की जगह वह टावर को अपने गले पर स्कार्फ की तरह डाल दी और पूरी तरह से अपने नंगे बदन को उजागर कर दी। .. क्योंकि वह इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि ड्राइंग रूम में शुभम बैठा हुआ है जो कि कुछ देर पहले ही वह उसके नंगे पन के रस को अपनी आंखों से पी कर एकदम मस्त हो चुका था....वह एकदम नग्न अवस्था में ही बाथरूम से बाहर निकल गई और एक अच्छा सा गीत गुनगुना रही थी जो कि उसके ही जमाने का था... सजना है मुझे सजना के लिए यह गीत गुनगुनाते हुए अपनी मस्ती में मस्त हो कर वह बाथरूम से बाहर निकल गई... जो कि ईस समय यह गीत गुनगुनाते हुए उसके जेहन में शुभम ही बसा हुआ था और अपनी शारीरिक जरूरतों के अधीन होकर वह अपनी और शुभम के बीच की उम्र की मर्यादा को एकदम भूल चुकी थी आज उसे अपने बेटे की उम्र का शुभम उसे खुद का साजन लगने लगा था जिसके साथ वह शारीरिक संबंध बनाने के लिए मन ही मन अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी लेकिन यह मौका भी वाह शुभम को भी देना चाहती थी क्योंकि वह चाहती थी कि अगर शुभम आगे से चलकर उसके साथ सारी संबंध बनाने के लिए तत्पर होगा तो वह जरूर उसके साथ समर्पण कर देगी और यह बात हुआ खुद नहीं कहेगी कि वह शारीरिक संबंध बनाना चाहती हैं जिससे वह अपनी ही नजर में संस्कारी बने रहना चाहती थी जो कि एक अपने आप को ही धोखा देने वाली बातें थी जो कुछ भी हो सरलख एक औरत थी और उसकी भी कुछ जरूरते और ख्वाहिश थी जिसके अंदर उसकी शारीरिक जरूरत भी आ जाती थी जिसे पूरी करने के लिए वह कुछ भी कर सकने में सक्षम थे इसलिए तो वह बाथरूम से एकदम नंगी ही बाहर आ गई थी जो कि यह बात वह जानती थी घर में कोई भी नहीं है इसलिए पूरी तरह से निश्चिंत थी और एक नए अनुभव के लिए वह एकदम नंगी बाथरूम से बाहर आ गई थी जो कि आज तक ऐसा कभी भी नहीं हुआ था जिंदगी के इतने साल गुजार देने के बाद सरला को कुछ नया करने की सुझ रही थी.... वह वही गीत गुनगुनाते हुए अपने कमरे की तरफ जाने लगी और इस बात से अनजान की ड्राइंग रूम में शुभम बैठा हुआ है वह जैसे ही एकदम नग्न अवस्था में उसकी आंखों के सामने से आगे बढ़ने लगी कि तभी उसे आभास हुआ कि ड्राइंग रूम में कोई बैठा है वो एकदम से हक्की बक्की रह गई... अपनी तसल्ली कर लेने के लिए जैसे ही वह सोफे की तरफ नजर घुमाई तो सामने सुबह बैठा हुआ था जो कि उसे ही घूर रहा था यह देखकर तो उसकी सांस ही अटक गई उसे कुछ समझ में नहीं आया कि वह क्या करें कुछ सेकंड तक वह उसकी आंखों के सामने ही एकदम नंगी होकर खड़ी रही मानो जैसे अपने नंगे पन का प्रदर्शन उसकी आंखों के सामने कर रही है शुभम भी उसे देखता ही रह गया क्योंकि उसे इस बात की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि बाथरूम में से सरला एकदम नंगी बाहर आएगी.... आश्चर्य और उत्तेजना से उसका मुंह खुला का खुला रह गया...


ऐसा प्रतीत हो रहा था कि कुछ समय तक वक्त एकदम से ठहर गया हो दोनों एक दूसरे की आंखों में आंखें डाल कर देख रहे थे शुभम तो मानो पागल सा हो गया था वह टकटकी बांधे सरला के खूबसूरत नंगे जिस्म को ऊपर से नीचे तक अपनी आंखों से देख रहा था उसकी आंखो में खुमारी छाने लगी थी... उसके बदन में नशा का एहसास होने लगा था मानो चार बोतल शराब पी कर आया हो... वैसे भी सरला के आगे इस समय शराब का नशा भी फीका पड़ जाता वह दोनों एक दूसरे को देख रहे थे सरला को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है वह एकदम जड़वंत मूर्ति की तरह हो गई थी... सरला की सांस थम सी गई थी। अजीब सी कपकपी उसके तन बदन को झकझोर कर रख दे रही थी.... शुभम तो जैसे टीवी पर फैशन शो देख रहा हूं और कोई खूबसूरत औरत अपने नंगे बदन का प्रदर्शन रैंप पर चलकर उसकी आंखों के सामने कर रही हो.... पल भर में ही उत्तेजना के मारे शुभम का गला सूखने लगा.... सरला महज सात आठ सेकेंड ही वहां खड़ी होकर अपनी स्थिति से अनजान शुभम को देखती रही.... उसे इस बात का भी भान नहीं था कि वह इस समय तक नंगी है वह आश्चर्य से शुभम को देखे जा रही थी क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि इस समय वह उसके घर पर होगा और इस तरह से उसकी आंखों के सामने सोफे पर बैठ कर उसके नंगे बदन को घुर रहा होगा.... ना तो सरलाही कुछ बोल रही थी ना ही शुभम ही कुछ बोल पा रहा था दोनों की सीटी पीटी गुम हो गए थे दोनों एक दूसरे के आकर्षण में इस कदर खो गए कि उन्हें समझ में नहीं आया कि क्या करना है शुभम से ज्यादा हालत खराब तो सरला की थी ऐसे हालात में औरत सबसे पहले अपने नंगे बदन को जो कुछ भी हो उसे छुपाने की भरपूर कोशिश करती है अगर कुछ भी ना मिले तो वह अपनी हथेलियों से ही अपने नाजुक अंगों को ढकने की पूरी कोशिश करती है लेकिन इस बात का भी भान उसे बिल्कुल भी नहीं था कि वह अपने नंगे पन को अपनी हथेली से ढक लें जबकि वह गले में टावल लपेटे हुए थी... और सरला के इसी बात का फायदा उठाते हुए शुभम एक बार फिर से उसके नंगे पन के रस को अपनी आंखों से पी कर मस्त हो चुका था वह भी बेशर्म होकर सरला के नंगे बदन को देखे ही जा रहा था जबकि ऐसे में एक संस्कारी लड़का अपनी नजर फेर लेता है या खुद औरत पर वस्त्र डालकर उसके नंगे पन को ढकने की कोशिश करता है। लेकिन यहां पर ऐसा कुछ भी नहीं था शुभम तो खुद कल्पना में ही सरला को एकदम नंगा देख चुका था और उसे अपने हाथों से नंगा भी कर चुका था ऐसे हालात में जब खुद वह औरत उसकी आंखों के सामने इस तरह से नंगी आए तो ऐसा अद्भुत और अतुल्य पल उस लड़के के लिए भला क्या हो सकता है। शुभम के लिए यह पल उसकी जिंदगी का बेहद हसीन और खूबसूरत पल था।

cradle song poem meaning
जब सरला को इस बात का आभास हुआ कि वह शुभम के सामने एकदम नंगी खड़ी है तब वह शर्म से एकदम पानी पानी हो गई उसका चेहरा पलभर में ही एकदम लाल टमाटर की तरह हो गया उसके चेहरे पर सुर्ख लालिमा छाने लगी.... आनन-फानन में उसे इस बात का भी बिल्कुल भी ध्यान नहीं हुआ कि गले में डाला हुआ टावल वह अपने बदन पर डालकर अपने नंगे पन को ढक ले... वह जिस स्थिति में थी उसी स्थिति में लगभग भागते हुए सीढ़ियां चढ़कर ऊपर गई और अपने कमरे में घुस गई लेकिन इस बीच जो नजारा शुभम की आंखों के सामने पेश आया उसे देखकर शुभम का लंड पानी छोड़ते छोड़ते रह गया हालांकि उसका लंड एकदम कड़क हो चुका था लंड की नसों में रक्त का प्रवाह इतना अत्यधिक हो चुका था कि मानो अभी उसका लंड फट जाएगा.... लंड का दर्द असहनीय हो चुका था वह अच्छी तरह से जानता था कि जब ऐसे हालात होते हैं तो लंड को बुर की बेहद आवश्यकता होती है लेकिन अभी मंजिल दूर थी लेकिन यह भी जानता था कि मंजिल ज्यादा दूर नहीं थी बस थोड़ी सी कोशिश करना बाकी रह गया था...।
सरला जिस तरह से अपनी नंगी गांड दिखाती हुई सीढ़ियों पर नकल भागते हुए गई थी उस नजारे को देखकर शुभम का जीवन धन्य हो गया था कई बार ऐसे ना जा रे उसके सामने पेश हो चुके थे जब वह औरतों के नंगे पन को एक अलग ढंग से देख कर उनका लुफ्त उठा चुका था लेकिन आज का यह दृश्य एकदम अतुल्य था और एकदम बेहद रोमांचकारी और उत्तेजना से भरा हुआ क्योंकि सरला जब अपनी नंगी बड़ी बड़ी गांड दिखाते हुए सीढ़ियां चल रही थी तो ऐसे में उसके खरबूजे जैसे बड़े-बड़े मदमस्त कर देने वाले गांड के दोनों फांके आपस में रगड़ते हुए थिरकन रहे थे... बड़ी बड़ी गांड के दोनों बाजू आपस में इस कदर रगड़ खा रहे थे कि मानो कोई अपने दोनों हाथों से पकड़कर उसे आपस में रगड़ रहा हो.... कुछ इस तरह से एकदम मस्त होकर वह भागते हुए अपने कमरे में गई थी इस उम्र की औरत तो बिल्कुल भी नहीं कर पाती अपनी इस हरकत की वजह से वह कई जवान लड़कियों को अपने आगे पानी भरने के लिए मजबूर कर दी थी। क्योंकि यह नजारा देखकर खुद उसका पानी निकलने वाला था। शुभम के मुंह से आह निकल गई थी। इस तरह से दोपहर में सरला के घर आना एकदमम सफल हो चुका था.... क्योंकि जो कुछ भी हो रहा था वह सब कुछ उम्मीद से दुगुना था यह सब के बारे में शुभम सोचा ही नहीं था। वह कभी नहीं सोचा था कि सरला जैसी उम्रदराज औरत इस तरह से बाथरूम से बाहर एकदम नंगी होकर आएगी जबकि इस उमर में अधिकतर औरतें वस्त्र पहनकर ही नहाती थी... इस बात से शुभम भली-भांति अवगत था क्योंकि वह गांव में अपनी मामी यों को वस्त्र पहनकर नहाते हुए देख चुका था... लेकिन यहां तो शुभम की मामी से भी बड़ी उम्र की औरत वस्त्र पहनकर तो छोड़ो बाथरूम में एकदम नंगी होकर नहा रही थी और नहले पर दहला फेंकने वाली बात यह थी कि बाथरूम के बाहर भी वह एकदम नंगी होकर ही आई थी मानो कि अकेले में वह पूरे घर में नंगी होकर ही घूमती रहती है। सुबह मन में सोच रहा था कि काश अगर ऐसा होता होगा तो कितना अच्छा लगता होगा जब एक खूबसूरत औरत पूरे घर में नंगी होकर अपने सारे काम करती होगी देखने वालों के तो होश उड़ जाते होंगे लेकिन यहां कौन देखने वाला था वह तो नसीब से वह घर में आ गया था ... और अपनी आंखों से यह नजारा देखकर एकदम धन्य हो गया था।

सोफे पर बैठकर एक अद्भुत नजारे को अपनी आंखों से देखने के बाद वह सुन्यमनस्क हो गया था.. ऐसा लग रहा था मानो जैसे उसके सोचने समझने की शक्ति जाती रही है... वह अधीर होकर पूरे ड्राइंग रूम में इधर से उधर देख रहा था.... शुभम की व्याकुलता बढ़ती जा रही थी उसका मन किसी चंचल पंछी की तरह कभी इधर तो कभी उधर फुदक रहा था... वह बेसब्र हुआ जा रहा था सरला के कमरे में जाने के लिए। क्योंकि जिस तरह का नजारा वह देख चुका था उसके बाद किसी भी मरने के लिए अपने ऊपर काबू पाना नामुमकिन होता है लेकिन इन सब के बावजूद भी वह अपने आप को संभाले हुआ था लेकिन आखिरकार यह भी तो एक मर्द था और अपनी आंखों के सामने एक बेहद खूबसूरत औरत के नंगे बदन को देखकर पूरी तरह से मस्ती के सागर में खोने लगा था उसकी आंखो में खुमार छाने लगी थी मदहोशी का आलम उसे अपनी आगोश में ले रहा था वह सरला के कमरे के अंदर जाना चाहता था... उसके करीब बैठ कर उसके नंगे पन को अपनी आंखों से घूंट भर भर कर पीना चाहता था..उसके मखमली बदन को अपने हाथों से सहलाना चाहता था उसके अंगों की गर्मी को अपने अंदर महसूस करना चाहता था।इसलिए वह सरला के कमरे में जाने के लिए बेसब्र हुआ जा रहा था उसकी सांसों की गति उसका साथ नहीं दे रही थी ..वह उत्तेजना के मारे बार-बार अपनी उखड़ती हुई सांसो को दुरुस्त करने में लगा हुआ था.।

दूसरी तरफ सरला के तो जैसे होश उड़े हुए थे ड्राइंग रूम में शुभम को बैठा हुआ देखकर वह इस कदर चौक गई थी मानो जैसे अपनी आंखों के सामने किसी भूत को देख ली हो... उसे अपने ऊपर काफी शर्मिंदगी महसूस हो रही थी इस उम्र में वह इस कदर नंगी होकर बाथरूम से बाहर निकल कर अपने कमरे की तरफ जा रही थी यह सोचकर ही उसे अजीब सा महसूस हो रहा था लेकिन इस सब के बावजूद भी एक रोमांच सा अनुभव हो रहा था...
सरला की दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी वह इस समय बिस्तर पर बैठी हुई थी और इस समय भी वह एकदम नंगी थी जबकि अभी भी उसके गले पर टावेल लपेटे हुए थी... उसे खुद के ऊपर यकीन नहीं हो रहा था कि वह इतनी बेशर्मी वाली हरकत कर कैसे गई.... लेकिन फिर वह मन में सोचने लगी कि वह घर में तो बिल्कुल अकेली थी इसलिए तो वह बिना कपड़ों के बाथरूम से बाहर आई लेकिन उसे कहां मालूम था कि बाथरूम के बाहर ड्राइंग रूम में शुभम बैठा हुआ है..यह बात उसे पता होती तो वहां पता इतनी बड़ी गलती क्यों करती.... वह बिस्तर पर एकदम नंगी बैठकर यही सोच रही थी कि तभी बाल्को एक तरफ करते हुए उसके हाथ में गले में लपेटा हुआ टावल आ गया और उसकी हंसी छूट गई साथ में उसे अपने ऊपर गुस्सा भी आया कि गले में टावर लपेट कर घूम सकती है तो कमर पर लपेट लेती तो क्या हो जाता लेकिन तभी दूसरे पल उसका मन कुछ और सोचने लगा वह मैंने यह सोचने लगी कि चलो जो भी हुआ अच्छा ही हुआ.... क्योंकि यह सब जानबूझकर तो हुआ नहीं था जो कुछ भी हुआ था अनजाने में ही हुआ था अनजाने में ही सही शुभम उसके नंगे बदन को देख तो लिया हो सकता है उसके नंगे बदन को देख कर शुभम खुद ही अपना कदम आगे बढ़ाए और जो बाथरूम में सोच रही थी वही हो जाए यह सोचकर उसका पूरा बदन उत्तेजना के मारे गन गना गया...लेकिन फिर मन में यह सोचने लगी कि कहीं सुभम बाहर किसी को बता दिया तो कि वह घर में नंगी घूमती है तो लोग क्या सोचेंगे उसकी तो बदनामी हो जाएगी लेकिन अपनी ही सवाल का जवाब अपने मन में ढूंढते हुए वह बोली नहीं ऐसा शुभम बिल्कुल भी नहीं करेगा क्योंकि इसके नजरिए से साफ जाहिर होता है कि वह उसके बदन का दीवाना हो चुका है तभी तो वह पागलों की तरह उसके नंगे बदन को घूर रहा था...

सरला



वह अपने आपको अपने मन में डांटते हुए बोली की कितनी पागल है उसकी आंखों के सामने एकदम नंगी भागते हुए सीढ़ियां चढ़कर अपने कमरे में आई शुभम उसके नंगे बदन के हर एक अंग को देख लिया होगा जब उस एरिया चढ़कर भाग रहे थे तो जरूर शुभम उसकी बड़ी बड़ी गांड को देख लिया होगा जिसे वह हमेशा साड़ी के ऊपर से घूरता रहता था। वह उसकी नंगी बड़ी बड़ी गांड के साथ-साथ उसकी बड़े बड़े दूध को भी देखा होगा जिसे वह हमेशा प्यासी नजरों से देखता रहता था जरूर उसका मन उसे पकड़ने को कहा होगा उसे अपने मुंह में भर कर पीने के लिए कहा होगा क्योंकि कुछ देर तक तो वह वहां खड़ी थी तो जरूर उसकी नजर उसकी टांगों के बीच उसकी बुर पर गई होगी जिसे देखने के बाद वह अपने होश खो दिया होगा तभी तो वह मुंह फाड़े घूर रहा था। वह मन में सोचने लगी कि उसे नंगीदेखकर वह क्या सोच रहा होगा उसके मन में कैसी भावनाएं उमड़ रही होगी और जरूर पागल हो गया होगा क्योंकि जिस तरह से वह उसे कपड़े के ऊपर से ही घूरता रहता था आज तो उसकी आंखों के सामने एकदम नंगी हो गई थी तो जरूर वह मदहोश हो गया होगा उसके अंगों को पाने के लिए मचल रहा होगा....यह सब ख्याल उसके मम्मी आता ही सरला के तन बदन में अजीब सी कसक उठने लगी उसका मन मचलने लगा उसे गुदगुदी होने लगी उसके होठों पर मादक मुस्कान तैरने लगी और अपने आप को तसल्ली देने के लिए मन ही मन बोली कि जो कुछ भी हुआ अच्छा ही हुआ इसका अच्छाई परिणाम उसे मिलेगा इतना उसे विश्वास था... उसे अपने बिस्तर पर टावल फेंक कर खड़ी हो गई अभी भी वही दिन नंगी थी... यह सोच कर कि जो भी होगा देखा जाएगा वह शुभम द्वारा लाए गए ब्रा पेंटी को उठा कर देखने लगी और उसे पहनने का निश्चय कर ली और उसमें से आसमानी रंग का जालीदार ब्रा और पेंटी निकालकर उसे पहनने की पूरी तैयारी कर ली।

दूसरी तरफ शुभम अपनी भावनाओं पर काबू कर सकने में असमर्थ साबित हो रहा था। बाथरूम में जिस तरह से सरला को नंगी होकर नहाते हुए और अपने ही अंगों से खेलते हुए देखकर मदहोश हुआ था और जिस तरह से सरला एकदम बेशर्म होकर बाथरूम से बाहर एकदम नंगी होकर आई थी उसे देखकर अब शुभम एकदम पागल हो गया था। .. इसलिए वह भी मन में ठान लिया कि जो भी होगा देखा जाएगा यही सोचकर वह भी सरला के कमरे की तरफ उठ कर जाने लगा.....
 
सरला के तन बदन में अजीब सी हलचल मची हुई थी उसका दिल जोरों से धड़क रहा था आज उम्र के इस पड़ाव पर वह एकदम जवानी के दिनों वाला एहसास लिए बिस्तर पर पड़ी हुई आसमानी रंग की जालीदार ब्रा और पेंटी को अपनी आशा भरी निगाहों से देख रही थी। अपने कमरे में वह एकदम नंगी खड़ी थी बिस्तर के पास मानो ऐसा लग रहा था कि बिस्तर पर उसका साजन लेटा हुआ है और वह उसके लिए अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई है। दरवाजा खुला हुआ था शायद सरला ने दरवाजे को जानबूझकर खुला छोड़ रखी थी भले ही हो शर्मिंदगी का अहसास लिए शुभम के सामने से एकदम नंगी ही भागी थी...लेकिन मन ही मन में वह चाहती थी कि शुभम फिर से उसे नंगी देखें और शायद इसीलिए वह दरवाजे को थोड़ा सा खुला छोड़ कर कमरे के अंदर अभी भी एकदम नंगी खड़ी थी ना जाने क्यों उसे इतना विश्वास जरूर था कि उसी संपूर्ण रूप से नंगी देखने के बाद शुभम अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाएगा और एक बार फिर उसके कमरे की तरफ आएगा.... और इसी उम्मीद के साथ में दरवाजा खुला छोड़ कर इस समय टौवल से अपने भीगे बदन को पोंछ रही थी... बरसों के बाद उसके मन में आज कुछ नया करने की हसरत जगी थी.. इस बार वह अपनी हसरत का अपनी चाहत का गला नहीं घोटना चाहती थी... इतने सालों के बाद आज उसके मन में कुछ करने की ललक जगी थी... वह अपने तन बदन में अजीब सी हलचल महसूस कर रही थी यह हलचल यह एहसास जवानी की उन दिनों की थी जब वह पहली बार किसी पुरुष के बारे में सोच कर अपनी खिलती जवानी की अंगड़ाई ली थी आज वही हलचल महसूस करके वह अपने आप को एकदम तरोताजा महसूस कर रही थी... बार-बार उसकी निगाह पपिया जैसे बड़ी बड़ी चूची हो पर चली जा रही थी तो कभी दोनों टांगों के बीच की फूली हुई हल्की दरार पर जिस पर हल्के हल्के रेशमी बालों का झुरमुट सा लगा हुआ था जो कि देखने में बेहद मनमोहक लग रहा था जब सरला का यह हाल था तो शुभम का क्या हाल हुआ होगा जब वह अपनी प्यासी नजरों से सरला के दोनों टांगों के बीच के उस हसीन दृश्य को देखा होगा जो कि औरत को देखते ही मर्दों की कल्पना में मिश्रित हो जाते हैं... मर्दों की याद से नहीं हमेशा से यही आदत रही है कि जब भी वह किसी खूबसूरत औरत को देखते हैं भले ही वस्त्र में होती है लेकिन कल्पना में वह उस औरत को निर्वस्त्र करके उसके अंगों को अपनी कल्पना की नजरों से जी भर कर देखते हैं और अपनी कल्पना का घोड़ा इतना तेज दौड़ आते हैं कि कल्पना में ही उस औरत के साथ ना जाने क्या-क्या हरकत कर बैठते हैं जिससे उनका पानी निकल जाता है शुभम के साथ भी यही हुआ था सरला को वस्त्र में देखने के बाद हुआ कल्पना में सरला को नग्न अवस्था में देखने की कोशिश करता था और उसकी यह कोशिश हकीकत में बदल गई थी उसका सपना साकार हो गया था।

सरला अपने भीगे बदन को अच्छे से साफ करके बिस्तर पर पड़ी आसमानी रंग की पेंटी को उठा ली जो कि एकदम जालीदार थी आगे की तरफ से जो भाग बुर को ढकता है वही भाग जालीदार था जहां से ढके होने के बावजूद भी ढंका हुआ कुछ नजर नहीं आता बल्कि सब कुछ एकदम सलीके से नजर आता इस बारे में सोचते ही उसके तन बदन में अजीब सी गुदगुदी होने लगी.... क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि इस पेंटिं को पहनने के बावजूद भी कुछ भी पर्दे में नहीं रहेगा सब कुछ बेपर्दा ही रहेगा.... यही सोचती हुई वह शुभम के द्वारा लाई गई पेंटिं अपनी नाजुक नाजुक उंगलियों में लेकर इधर-उधर घुमा कर कुछ देर तक उसे देखती रही। शुभम के द्वारा लाई गई पेंटी देखते ही उसे इसका अंदाजा हो गया था कि ब्रा और पेंटी अच्छी क्वालिटी की और महंगी है। शुभम की पसंद पर वह मुस्कुरा दी...क्योंकि ब्रा पेंटी को देखकर उसे इतना आभास हो गया था कि वाकई में शुभम को औरतों के बारे में कुछ ज्यादा ही ज्ञान है.... उसके दिल में अजीब सी हलचल हो रही थी मानो पूरे बदन में उम्र के इस पड़ाव पर आई फिर से मदहोश कर देने वाली जवानी चिकोटि काट रही है वह अपने दोनों हाथों में पेंटी को लेकर उसमें अपनी एक मदमस्त खूबसूरत चिकनी टांगों डाल दिए और यही हरकत दूसरे टांग से भी की दोनों टांगे और पेंटी के दोनों गोलाई में थी धीरे-धीरे करके सरला पेंटी को अपनी जांघों तक लेकर आई उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी।
अपनी मदमस्त रसीली बुर को ढकने से पहले एक बार हुआ उस दिशा में अपनी नजर घुमाकर कचोरी जैसी फूली हुई बुर को देखा करो आत्म संतुष्टि का अहसास लिए पेंटि और ऊपर चढ़ा ली.... उसकी बड़ी-बड़ी तरबूज ऐसी कांड शुभम के लाए हुए पेंटिं में पूरी तरह से समा गई थी.... पेंटी को पहनते ही सरला के बदन में अद्भुत अहसास होने लगा उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी इस नहीं पेंटी में वह कुछ ज्यादा ही आरामदायक महसूस कर रही थी।

Sarlaa panty pahanne k bad


वह खुद गोल गोल घूम कर अपने चारों तरफ देखने की कोशिश करने लगी। उसे अच्छा लग रहा था सबसे ज्यादा अच्छी बात यह लग रही थी कि जो चीज रखने के लिए पेंटी पहनी जाती है वह अंग ढंका ही नहीं था... उनके हल्के बालों का झुरमुट उस जालीदार पेंटी में से बाहर झांक रहा था माना अपने साथी को निमंत्रण दे रहा हो.... एक तरफ सरला शुभम के द्वारा लाई गई पेंटिंग को पहनकर उत्तेजना के मारे हवा में विचरण कर रही थी और दूसरी तरफ शुभम अपनी भावना होकर दौड़ते घोड़े पर काबू कर पाने में एकदम असमर्थ हो रहा था जिसके चलते वह सरला के कमरे में जाने के लिए अपने कदम आगे बढ़ा दिया था वह धड़कते दिल के साथ सीढ़ियां चल रहा था मन में नई उम्मीद जगी हुई थी टांगों के बीच हलचल मचा हुआ था या यूं कह लो कि पेंट में गदर मचा हुआ था शुभम का लैंड किसी लोहे के रोड की तरह एकदम कड़क होकर पैंट में तंबू बनाए हुए था। जिसे देख कर कर यह आभास सा हो रहा था कि अगर आज यह सरला की बुर में गया तो बरसों की प्यास बुझा कर ही वापस लौटेगा। जो कि इस समय सरला को देखकर ही पूरी औकात में आ गया था जिसे शुभम पैंट के ऊपर से ही अपने हाथों से मसल कर उसे दिलासा देने की कोशिश कर रहा था लेकिन शायद आज ही अभी मानने वाला नहीं है उसका बस चलता तो पेंट फाड़ कर बाहर आ जाता क्योंकि जिस नजारे को देखकर वह सर उठाए खड़ा था उस नजारे को देखने के बाद दूसरे किसी के बस में बिल्कुल भी नहीं था अपनी भावनाओं पर काबू पा लेना क्योंकि जिस अंग के लिए शुभम का लैंड खड़ा हुआ था वह अंग उससे कुछ ही दूरी पर खड़े होकर उसे जैसे अपनी और आने के लिए आकर्षित करते हुए आमंत्रण दे रही थी...

क्योंकि सोफे पर बैठकर शुभम एकदम साफ साफ देख पा रहा था कि बाथरूम से निकलने के बाद जिस अंदाज में वह उसकी आंखों के सामने खड़ी थी उसकी टांगों के बीच के रेशमी बालों के झुरमुट में से पानी की बूंदे किसी मोती की दाने की तरह चमक रही थी और वह धीरे-धीरे बुंद की शक्ल में नीचे गिरकर जमीन को तृप्त कर रही थी... इस नजारे को देखकर तो शुभम इतना लालायित हो गया था कि एक बार उसके मन ने कहा कि भले कुछ भी हो आगे बढ़कर वह अपने घुटनों के बल बैठकर उसकी गुरु को अपनी आगोश में छुपाए हुए रेशमी बालों के झुरमुट में से टपक रहे मोतियों के दानों के समान पानी की बूंदों को अपनी जीभ को आगे बढ़ाकर उस पर गिरा कर उस बुंद को अपने गले के नीचे उतारकर तृप्त हो जाए... लेकिन उस समय उसके नंगे बदन को देखने की कशमकश में वह अपनी भावनाओं को दबा ले गया लेकिन उसकी मटकती हुई बड़ी बड़ी गांड देखकर वह अपने आप हमें बिल्कुल भी नहीं था इसलिए तो निश्चय करके वह सरला के कमरे की तरफ आगे बढ़ रहा था...
शुभम के मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि जिस तरह का उसके साथ होते आ रहा है सरला को लेकर...कहीं ऐसा कुछ के मन का धोखा ना हो कहीं ऐसा ना हो कि यह सब अनजाने में हुआ हो अगर वह कुछ आगे करने की सोचें तो सरला के द्वारा उसे फिट कार मिले....लेकिन फिर शुभम अपने ही सवालों में से जवाब ढूंढते हुए अपने मन को तसल्ली करने के लिए अपने आप से ही बोला कि अगर ऐसा होता तो वह मुस्कुराती नहीं ना तो उसके द्वारा लाए गए गिफ्ट को स्वीकार करती है अगर उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि शुभम ने गिफ्ट में उसके लिए प्राप्त दिलाया है तो इसी समय वह उसे दुत्कार कर बाहर निकाल देती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जिस तरह से वह बाथरूम में से एकदम नंगी ही बाहर आ गई थी और उसे देखकर एकदम रुक गई थी अगर उसके मन में कुछ और चल रहा होता तो वहां उसे खरी-खोटी जरूर सुनाती उसे तमीज सिखाती... लेकिन किस्मत से अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था जोकि शुभम के सोचने के मुताबिक उसके लिए मंजिल तक जाने की राह आसान होती नजर आ रही थी फिर भी उसके मन में शंका जरूर था कि कहीं कुछ गलत ना हो जाए इसलिए वह बड़ी सावधानी से आगे बढ़ना चाहता था इसलिए वह धीरे-धीरे सीढ़ियों पर चढ़ते हुए सरला के कमरे की तरफ आगे बढ़ रहा था जहां पर दूसरी तरफ सरला जानबूझकर हल्का सा दरवाजा खुला छोड़ कर अब जालीदार ब्रा उठाकर उसके कब को अपनी हथेली से नाप रही थी और यह अंदाजा लगा रही थी कि उसकी बड़ी-बड़ी पपैया जैसी चुकी उसके अंदर समा पाएगी कि नहीं... चारों तरफ से तसल्ली कर लेने के बाद वह उसे अपनी बाहों में डालकर ब्रा के कप में अपने हाथों से अपनी एक चूची पकड़ कर उसमें डालकर वही क्रिया दूसरी चूची के साथ कि अभी समय उसकी दोनों चूचियां ब्रा के दोनों कप में समा चुकी थी लेकिन शुभम बहुत चला था वह जानबूझकर ऐसी ब्रा पसंद किया था कि ब्रा पहनने के बावजूद भी सरला की आधे से ज्यादा चूचियां बाहर की तरफ नजर आए ऐसा लगे कि उसकी चूचियां कभी भी ब्रा की कटोरी से बाहर कूद जाएंगी.... इस बात का आभास अल्लाह को भी हो गया था इस बारे में सोच कर उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी अभी वह बराबर ही नहीं रही थी कि धीरे-धीरे करके शुभम दरवाजे पर पहुंच गया और खुला हुआ दरवाजा देखकर उसे पक्का यकीन हो गया कि सरला की तरफ से उसे खुला निमंत्रण है... क्योंकि कोई भी औरत अगर मर्द के सामने अनजाने में ही नग्न अवस्था में आ जाए तो शर्मिंदगी का अहसास मे वह कभी भी दरवाजा खुला नहीं छोड़ेगी लेकिन यहां पर मामला कुछ उल्टा ही था। . सरला ने जानबूझकर दरवाजा खुला छोड़ दी थी या देखकर शुभम कि तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी ऐसा लग रहा था मानो सरला की सोच पर शुभम के लंड ने सलामी दी हो इस तरह से पेंट के अंदर ही ऊपर नीचे होकर उसे सलाम कर रहा था... अब सब कुछ साथ था थोड़ा सा दरवाजा खुला होने के बावजूद भी उसकी ओर से अंदर का पूरा नजारा नजर आ रहा था शुभम खुले हुए दरवाजे की ओट में से अंदर झांकने लगा और अंदर का नजारा देखा कर एक बार फिर से उसके तन बदन में चिंगारी फूटने लगे वह साफ तौर पर देख पा रहा था कि उसकी लाई गई ब्रा पेंटी को सरला स्वीकार कर ली है तभी तो उसके तरबूज ऐसी बड़ी बड़ी गांड को उसकी आसमानी रंग की पेंटी जो कि इस समय ढकने में असमर्थ थी फिर भी दोनों फांकों को अपनी बाजुओं में लेकर छुपाने की भरपूर कोशिश कर रही थी... सरला की बड़ी-बड़ी गाना सुनाने रंग की पेंटी में देखकर शुभम और ज्यादा उत्तेजित हो गया उसकी सांसों की गति तेज होने लगी उसकी हालत खराब होने लगी उसके ऊपर मदहोशी का आलम और ज्यादा छाने लगा जब देखा कि सरला उसके द्वारा लाई गई ब्रा पहन ली है और दोनों हाथ पीछे लाकर उसके हुक को बंद करने की नाकाम कोशिश कर रही है जो कि बंद नहीं कर पा रही थी... यह देखकर शुभम की आंखों में चमक आ गई सरला का गदराया जिस्म उसकी आंखों के सामने था. जोकि ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में और ज्यादा चमक रहा था........ जानबूझकर दरवाजा खुला छोड़ने के बावजूद भी सरला को इस बात का एहसास तक नहीं हुआ कि दरवाजे पर शुभम चोरी छुपे उसे देख रहा है वह अपनी ही धुन में ब्रा का हुक लगाने में मस्त थी जो कि वह ब्रा का हुक नहीं लगा पा रही थी यह देखकर शुभम को अत्यधिक आनंद की अनुभूति हो रही थी क्योंकि एक उम्रदराज औरत ठीक से ब्रा नहीं पहन पा रही थी। शुभम उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुका था जो कुछ भी सरला के घर में आकर उसकी आंखों ने देखा वह काफी मादक और कामोत्तेजना से भरपूर था। ऐसा लग रहा था मानो वह कोई पोर्न मूवी देख रहा हो...
Sarlaa bra ka hook band karne ki koshish karte huye


सरला ब्रा का हुक बंद करने में काफी मशक्कत कर रही थी लेकिन उससे यह काम हो नहीं रहा था। सलाह काफी परेशान हो रही थी जो कि उसकी झुंझलाहट से साफ जाहिर हो रहा था शुभम समझ गया था कि अब सरला के बस में नहीं था कि वह ब्रा का हुक लगा पाती इसलिए वह दरवाजे पर खड़े खड़े ही बोला।

चाची में कुछ मदद करूं क्या...?

इतना सुनते ही सरला एकदम से चौक गई और तुरंत पीछे मुड़कर देखें तो दरवाजे पर शुभम खड़ा था जिसे देखते ही वह फिर से जड़वंत हो गई मानो सांप सूंघ गया हो.... अब सरला के पास बोलने लायक कुछ भी नहीं बचा था क्योंकि वह कुछ बोल पाती इससे पहले ही हुआ कमरे में प्रवेश कर चुका था और अपने आप ही दरवाजा बंद कर दिया था।
 
शुभम सरला को ब्रा का हुक लगाता देख कर और उसे ना लगा सकने की वजह से शुभम काफी उत्तेजित हो गया था और वह खुद उसकी मदद करने के लिए कमरे में घुसकर कमरे का दरवाजा बंद कर दिया था.... शुभम को इस तरह से दरवाजा बंद करता हुआ देखकर सरला के मन में अजीब अजीब ख्याल आने लगे वह मारे शर्म के गड़ी जा रही थी... जो कुछ भी उसके साथ हो रहा था इस बारे में वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी अभी भी उसकी पीठ शुभम की तरफ थी वह शर्म के मारे नीचे जमीन को देखे जा रही थी शुभम के द्वारा लाई गई ब्रा पेंटी उसके बदन की शोभा बढ़ा रही थी लेकिन ब्रा का हुक ना बंद होने की वजह से उसके बाजुओं में से दोनों पट्टियां लटक रही थी मानव शुभम के लिए वह अपने वस्त्र का त्याग कर रही हो अगर इस समय कोई और यह नजारा देख ले तो उसको यही लगेगा कि सरला शुभम के लिए अपने वस्त्र त्याग कर रही है। शुभम की आंखो में वासना की चमक साफ नजर आ रही थी उसकी आंखों में खुमारी छाई हुई थी उसके पूरे तन बदन में सरला के मदहोश मादक बदन का नशा छाया हुआ था। उसके पैंट में गदर मचा हुआ था उसका लंड किसी भी वक्त विद्रोह करने की तैयारी में था जोकि किसी बंदूक की नाल की तरह पेंट में तना हुआ था। कुछ पल के लिए सरला के कमरे में एकदम सन्नाटा छा गया केवल दोनों की गहरी गहरी सांसो की आवाज ही सुनाई दे रही थी दोनों जहां थे वहीं मानो ठहर से गए थे... सरला अपने बदन को कपड़ों की ओट में छुपाना चाहती थी लेकिन ना जाने क्यों वह यह सब करने में असमर्थ साबित हो रही थी... सरला यह बात भलीभांति जानती थी कि वह जिस तरह से जिस पोजीशन में खड़ी थी शुभम उसके बदन को लार टपका ता हुआ देख रहा होगा और अपने द्वारा लाई गई ब्रा पेंटी को भी देख कर मन ही मन खुश हो रहा होगा...और सरला का यह सोचना बिल्कुल ठीक था क्योंकि यही बात शुभम के मन में भी चल रही थी...
उसे काफी प्रसन्नता हो रही थी सरला के खूबसूरत बदन पर अपने द्वारा लाई गई ब्रा पेंटी को देखकर भेज देना करो और भी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रहा था.... शुभम सरला से करीब तीन चार कदम की दूरी पर खड़ा था लेकिन सरला को इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह अपनी नजर घुमाकर शुभम को देख ले... तभी शुभम अपना एक कदम आगे बढ़ाकर सरला की और बड़ा ही था कि उसके कदमों की आहट को सुनकर सरला शर्म के मारे अपने बदन को संकुचाते हुए बोली....

सससससस...... शुभम तो यहां क्या करने आया है.?

ऐसे ही आ गया था चाची आप ही तो कल कह रही थी कि तेरा जब मन करे तब चले आया कर.... (इतना कहते हुए शुभम ज्यों का त्यों वही खड़ा रह गया...)

लेकिन तुझे घंटी तो बजानी चाहिए थी....(सरला उसी तरह से अपनी नजरें नीचे करे हुए बोली..)

अब मैं घंटी बजा तभी तो कैसे बचा था चाचा मैं दरवाजे पर पहुंचा तो दरवाजा खुला हुआ था...(शिवम की यह बात सुनकर सरला सोच में पड़ गई तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ कि जल्दबाजी में शायद उसने दरवाजा लॉक करना भूल गई थी. ‌) मुझे लगा कि शायद आप यहीं ड्राइंग रूम में होगी इसलिए मैं डोरबेल नहीं बजाया और घर में आ गया यहां वहां ढूंढने पर आप मुझे कहीं भी दिखाई नहीं दी.... तो मैं जब सीढ़ियों पर चढ़ने लगा तो मुझे बाथरूम में से पानी के गिरने की आवाज आने लगी तो मैं समझ गया कि शायद आप नहा रही होंगी और इसलिए मैं आपका इंतजार करने के लिए यही सोफे पर बैठ गया....

शुभम अपनी तरफ से सफाई पेश करते समय लगातार सरला के खूबसूरत नंगे जिस्म को देख रहा था... जोकि ट्यूबलाइट की रोशनी में संगेमरमर की तरह चमक रही थी। सरला को इस बात का आभास हो गया था कि शुभम इस समय उसकी बड़ी बड़ी गांड कोई देख रहा है... क्योंकि इस बात से वाशी तरह से आओगे तो ठीक है साड़ी के ऊपर से हमेशा शुभम उसके बदन को नहीं आ रहा करता था और इस समय तो उसके पास पूरा मौका था उसे जी भर कर देखने के लिए बोला ऐसा मौका क्यों जाने देता....

लेकिन फिर भी.. (इतना कहकर सरला एकदम खामोश हो गई और जैसे शुभम सरला क्या कहना चाहती है यह बात अच्छी तरह से जानता था इसलिए जवाब देते हुए वह बोला...)

मैं अच्छी तरह से जानता हूं चाची कि मुझे बिना बताए नहीं आना चाहिए था लेकिन मैं क्या करता दोपहर का समय था मेरा भी समय पास नहीं हो रहा था और आप भी यह बात कह चुकी थी कि जब चाहे तब चले आना... और मैं तो चाची से अपना ही घर समझने लगा था इसलिए चला आया था वरना मैं क्यों आता और मैं यही सोफे पर बैठ गया....(सरला शुभम की बातें बहुत ध्यान से सुन रही थी क्योंकि वह भी मन में सोच रही थी कि हो सकता है वह जो भी बोल रहा है सच हो।) लेकिन चाची इसमें गलती पूरी आपकी है।

ममम.. मेरी इसमें मेरी गलती कहां खो गई ....(इतना कहने के साथ ही चोकने वाले अंदाज में सरला शुभम की तरफ घूमी तो उसे इस बात का आभास हुआ कि इस समय वह अर्धनग्न अवस्था में है लेकिन शुभम की तरफ घूमने के साथ ही उसकी ब्रा की कटोरी चूचियों पर से नीचे की तरफ गिर गई जिसे जल्दी से संभाल कर सरला फिर से दूसरी तरफ घूम गई सरला की इतनी सी हरकत पर शुभम पर मानो उत्तेजना का सैलाब टूट पड़ा... वह एकदम कामोत्तेजना से भर गया... क्योंकि ब्रा की कटोरी गिरने की वजह से शुभम की आंखों के सामने एक बार फिर से सरला के पके हुए पपैया अपनी औकात दिखाते हुए नजर आने लगे जिसे देख कर शुभम की आंखों में उसे पाने की चमक नजर आने लगी। शुभम अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।

तो क्या चाची गलती सब आपकी ही है मैं तो यूं ही आ गया था घर में रूम में सोफे पर बैठ गया लेकिन मुझे क्या मालूम था कि आप बाथरूम से एकदम नंगी होकर बाहर निकलेंगी.... (शुभम जानबूझकर नंगी शब्द पर कुछ ज्यादा ही जोर देते हुए बोला था. और इस नंगी शब्द का असर सरला पर बेहद गहरा हो रहा था क्योंकि शुभम के मुंह से अपने बारे में इस तरह से नंगी शब्द सुनकर उसका चेहरा शर्म के मारे लाल टमाटर की तरह हो गया था वह नजर उठाने में असमर्थ हो रही थी और शुभम अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला.) जाहिर तौर पर सभी औरतें बाथरूम से नहाने के बाद कपड़े पहन कर या टॉवेल लपेटकर ही बाहर आती है इसलिए मैं यहां पर बैठा हुआ था लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि आप बिना कपड़ों के एकदम नंगी होकर बाथरुम से बाहर आएंगे या हो सकता है यह आपकी आदत ही हो लेकिन मैं इसके लिए माफी मांगता हूं...

नहीं ऐसी भी कोई आदत मुझमें नहीं है आज मैं कपड़े बाथरूम में ले जाना भूल गई थी। (सरला शर्मा से नजरें गड़ाए हुए ही अपनी तरफ से सफाई पेश करते हुए बोली...)

लेकिन कुछ भी हो मेरे साथ साथ इसमें गलती आपकी भी है.... आपको इस तरह से नंगी होकर बाहर नहीं आना चाहिए था..

मुझे क्या मालूम था कि दरवाजा खुला होगा और तू चला आएगा मैं तो यह समझी थी कि घर में कोई भी नहीं है इसलिए.....(इतना कहकर सरला चुप हो गई...)

जाने दो चाची जो भी हुआ यह तो मुझे नहीं मालूम अच्छा हुआ या खराब हुआ... लेकिन सब कुछ अनजाने में ही हुआ....

जो हुआ सो हुआ लेकिन सब कुछ जानने के बाद तो मेरे कमरे में क्यों चला आया तुझे यहा नहीं आना चाहिए था ना....

कैसे चाची ....कैसे आप ही बताओ कैसे...... भला मैं अपने आप पर काबू कैसे रख पाता....
(शुभम की यह बात सुनने के बाद सरला आश्चर्य से उसकी तरफ नजर घुमा कर देखी तो शुभम अपनी बात आगे बढ़ाते हुए बोला....)

मेरा मतलब है कि चाची जरा आप खुद सोचो जब एक खूबसूरत औरत खूबसूरत जिस्म लिए हुए... और वह भी ऐसी औरत जिसे देखकर जवान लड़के तो क्या बुढो का भी दिल जोर से धड़कता हो .. अगर ऐसी औरत आंखों के सामने से एकदम नंगी होकर गुजर जाए तो भला वह मर्द क्या शांत बैठेगा उसके तन बदन में हलचल मच जाएगी...(शुभम जानबूझकर इस तरह से बेहद चालाकी से चलना की खूबसूरती की तारीफ कर रहा था और सरला पर इस तारीफ का असर भी हो रहा था वह अंदर ही अंदर खुश हो रही थी... उसे इस बात का आभास हो रहा था कि अभी भी उसके अंदर जवानी कायम है...)

लेकिन तू.....?

तू..... क्या .... क्या मैं मर्द नहीं हूं...? क्या एक औरत को देखकर मुझ में भावना पैदा नहीं होती और जब मेरी आंखों के सामने इतनी खूबसूरत औरत हो तो भला में कैसे अपने आप को रोक पाऊंगा.... चाची में अपने आप को रोक भी लेता लेकिन....(इतना कहकर सब हम खामोश हो गया।)

लेकिन क्या .....(सरला उसी तरह से शर्मिंदा होकर नीचे नजरें झुकाए हुए बोली)

लेकिन चाची अगर मैं आपको नंगी नहीं देखा होता तो अपने आप को रोक लेता आपको अपनी आंखों के सामने एकदम नंगी देखकर ना जाने मुझे क्या हो गया मुझे तो उम्मीद भी नहीं थी कि कपड़ों के अंदर आप इतनी खूबसूरत होगी मैं तो आपकी खूबसूरती को अभी तक कपड़ों के ऊपर से ही देखता आ रहा था लेकिन आज पहली बार कपड़ों के अंदर की खूबसूरती को देखकर मैं अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाया और ना चाहते हुए भी आपके कमरे में आ गया.....(सुभम जानबूझकर अपनी बातों के जादू में सरला को पूरी तरह से उलझा रहा था और सरला पूरी तरह से उसकी बातों में उलझ गई थी... शुभम की चिकनी चुपड़ी बातें सुनकर अंदर ही अंदर वह बहुत प्रसन्न हो रही थी.... श्रम की बातें सुनकर सरला के पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं थे शुभम अपनी बातों से सरला को एकदम निशब्द कर दिया था.)

लेकिन चाची चाहे जो भी हो आप आसमानी रंग की ब्रा और पेंटी में बहुत खूबसूरत लग रही हो....(शुभम जानबूझकर अश्लील शब्दों का प्रयोग सरला के सामने कर रहा था और सरला अपने ही बेटे की उम्र के लड़के के सामने अर्धनग्न अवस्था में खड़ी होकर उसकी इस तरह की बातें सुनकर शर्म से गड़ी जा रही थी।)

शुभम ये क्या कह रहा है तू...मैं तेरी मां की उम्र की हूं और मुझे इस हालात में देखकर तू मेरे खूबसूरती की तारीफ कर रहा है ... क्या यह तेरे संस्कार को शोभा देते हैं...?

चाची में कोई गलत बात नहीं कह रहा हूं मेरी आंखों ने जो देखा है वह मेरी आंखों के सामने जो चीज है मैं उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा हूं आखिरकार खूबसूरती की तारीफ करना कोई गुनाह तो नहीं है।

लेकिन मैं एक औरत हूं और तेरी मां की उम्र की हो तो मेरे बेटे के उम्र का है....?

खूबसूरती की कोई सीमा नहीं होती और आकर्षण उम्र के दायरे में बड़ी नहीं होती आकर्षण का दायरा उम्र और वक्त सबसे आगे होता है मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि आप मेरी मां की उम्र की है लेकिन सबसे पहले आप एक औरत है और वह भी खूबसूरत औरत....

(शुभम के मुंह से अपनी तारीफ में निकले एक एक शब्द सरला को अपने बदन पर मखमली एहसास करा जा रहे थे... शुभम कि कहीं एक एक बात उसके सीने में उतर जा रहे थे आज तक इस तरह की बातें उसके पति ने भी नहीं की थी शुभम अपनी मदमस्त कर देने वाली बातों से उसके कानों में शहद घोल रहा था जो कि सुनने में तो अच्छी लगी रही थी लेकिन उसका एहसास गजब का था एक अद्भुत एहसास जिसके पहलू में वह अपने आप को पिघलता हुआ महसुस कर रही थी और वास्तव में उसे अपनी टांगों के बीच की पतली दरार मै से मदन रस रिश्ता हुआ महसूस हो रहा था... जो कि उसके बदन में उत्तेजना के असर की पूर्ति कर रहा था... शुभम की बातें सुनने के बाद सरला उसी तरह से शर्म के मारे नजरे नीचे गड़ाए हुए बोली)

क्या शुभम तुझे जरा भी शर्म नहीं आ रही है मुझे इस हालात में यूं घूर घूर कर देखते हुए।

चाची आप यह बात अच्छी तरह से जानती हो कि ताजमहल बहुत खूबसूरत है चारों तरफ से रोजाना हजारों आंखें उसे घूरती रहती हैं तो क्या उसे कोई दिक्कत होती है या किसी को वह रोक देता है कि मुझे इस तरह से मत घुरा कर...उसी तरह से चाची आप इतनी ज्यादा खूबसूरत है कि मैं अगर अपने आप को रोकने की कोशिश करृ तो भी मैं शायद रुक नहीं पाऊंगा.... आपका अंग-अंग संगेमरमर की तरह चमक रहा है। आप इतनी ज्यादा गोरी है कि सही कहूं तो मेरी आंखें चमक जा रही है। इस उम्र में भी आप अपनी खूबसूरत बदन को बना कर रखी है यह बात एकदम हैरानी कर देने वाली है कहीं से भी थोड़ी सी भी लचक नहीं है... बदन का हर एक हिस्सा बेहद कसा हुआ है....(शुभम अपने शब्दों में सरला की तारीफ के पुल के पुल बांधे जा रहा था और यह सुनकर सरला खुशी के मारे गदगद हुए जा रही थी साथ ही उसकी बुर लगातार पिघलती जा रही थी... सरला के लिए यह सब एक स्वप्न सा लग रहा था उसे ऐसा लग रहा था मानो वह कोई सपना देख रही है क्योंकि जो कुछ भी अब उसके साथ हो रहा था एहसास तक नहीं हुआ था शुभम एक जवान लड़का था और इस उम्र में वह एक उम्रदराज औरत की तारीफ के तारीफ किया जा रहा था उसकी खूबसूरती को लेकर उसके कसे हुए अंग के बारे में जो कुछ भी वह आज तक नहीं सुनी थी उसके कानों ने आज वह सुनकर एकदम सुन्न हुए जा रहे थे
सरला मारे उत्तेजना और प्रसन्नता के कारण हवा में उड़ रही थी।)

औहहह सुभम ये क्या कह रहा है तू.... इस तरह की बातें मत कर तेरी बातें सुनकर मुझे मुझे .... तो कमरे से बाहर चला जा....

चला जाऊंगा चाची लेकिन जो काम करने के लिए आया हूं पहले वह तो कर लुं....

(शुभम की यह बात सुनकर सरला एकदम सन्न रह गई उसे समझ में नहीं आ रहा है ताकि शुभम क्या करने के लिए अंदर आया है लेकिन इतनी बात तो वो जानती ही थी कि ऐसे हालात में एक औरत के कमरे में एक मर्द का आना किस लिए होता है और जिस तरह से शुभम बातें कर रहा था उससे साफ जाहिर था कि वह कमरे में उसी काम के लिए आया है जो कि एक मर्द ऐसे हालात में एक औरत के साथ करता है यह बात मन में सोचते ही सपना के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारियां फूटने लगी लेकिन उसके अंदर अजीब सा डर फैलने लगा लेकिन इस डर के साथ-साथ उत्सुकता भी बढ़ती जा रही थी वह भले ही समझ रही थी लेकिन अंदर ही अंदर यही चाहती थी कि शुभम उसके साथ सब कुछ करें जो कि एक मर्द को ऐसे हालात में औरत के साथ करना रहता है...और जिस तरह की अश्लील खुले शब्दों में सुबह मुझसे बातें कर रहा था बेशर्मो की तरफ से साफ जाहिर था कि शुभम भी उसके साथ वही करना चाहता है जो एक औरत के साथ मर्द करता है.... यह बात सुनते ही सपना के मन में ढेर सारे सवाल पैदा हो रहे थे लेकिन उन सवालों के साथ-साथ उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर भी दौड़ रही थी उसकी टांगों के बीच कुछ ज्यादा ही हलचल मची हुई थी उसे सा महसूस हो रहा था कि उसकी बुर में से लगातार नमकीन रह रहा था जो कि उसकी नई नई पेंटी को पूरी तरह से गीली कर रही थी.... फिर भी शुभम की बातें सुनकर सरला कांपते स्वर में बोली..)

कककककक.... क्या करने आया है तू...

इतना सुनते ही शुभम आगे बढ़कर सरला के बेहद करीब पहुंच गया और सरला को इस बात का एहसास हो गया कि शुभम उसके बेहद करीब खड़ा है और उसके पीछे ही इस बात का एहसास उसे अंदर तक रोमांच से भर दिया वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके सामने इस तरह का दृश्य रचा जाएगा वह अपने ही कमरे में अर्धनग्न अवस्था में ब्रा पेंटी पहने हुए जोकि ब्रा अभी भी खुली हुई थी और ऐसे हालात में एक जवान लड़का ठीक उसके पीछे खड़ा होगा जहां से वह उसके अर्द्ध नग्न बदन को अपनी प्यासी आंखों से देखकर अपनी आंखों को सेंक रहा होगा.. इस बारे में सोचकर वह काफी उत्तेजना का अनुभव कर रही थी वहां की कुछ सोच पाती इससे पहले ही उसे महसूस हुआ कि शुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर उसकी खुली हुई ब्रा की पट्टी को पकड़ लिया....
 
कमरे का दृश्य बेहद मादक और उत्तेजना से भरा हुआ था उम्रदराज सरला अर्धनग्न अवस्था में... अपने कमरे में बिस्तर के करीब खड़ी थी और ठीक उसके पीछे शुभम उत्तेजित अवस्था में खड़ा था... इस समय सरला के बदन पर केवल ब्रा और पेंटी थी और ब्रा की पट्टी शुभम के हाथों में जिसकी वजह से सरला शर्म के मारे अपने बदन को सिकुड़ते जा रही थी लेकिन भला इससे क्या लाभ होने वाला था...
पल-पल सरला की हालत खराब होती जा रही थी वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसकी जिंदगी में उम्र के इस पड़ाव पर ऐसा मोड आएगा कि जब वह अपने बेटे से भी कम उम्र के लड़के के सामने अर्धनग्न अवस्था में खड़ी होगी और उसकी ब्रा की पट्टी उस लड़की के हाथों में होगी और वह भी एकदम बेशर्म की तरह उससे बर्ताव करेगा लेकिन ना जाने क्यों शर्मिंदगी का अहसास होने के बावजूद भी एक अजीब और अद्भुत किस्म की तृप्ति का अहसास सरला को अपनी आगोश मे लेकर पिघलाए जा रहा था... शुभम की हरकत की वजह से सरला एकदम निशब्द हो चुकी थी उसके होठों से एक भी शब्द फूट नहीं रहे थे वह बस शर्म से नजरें नीचे किए शुभम की हरकतों का आनंद ले रही थी क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो वह उसे कब से डांट कर अपने घर से बाहर निकाल दी होती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं की थी। सरला के दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी और सांसो की गति के साथ साथ उसके भारी-भरकम दोनों कबूतर ब्रा की कैद में खुली सांस लेने के लिए पंख फड़फड़ा रहे थे....
जिस तरह से शुभम सरला के बेहद करीब खड़ा था उसके पैंट में बना तंबू महज 5 6 अंगुल की दूरी पर ही था जहां पर वह अपनी कमर को हल्का सा आगे की तरफ बढ़ाकर सरला की मदमस्त तरबूज जैसी गांड का स्पर्श कर सकता था। लेकिन शुभम अपने आप को बहुत ही रोक कर रखा था वरना ऐसे हालात में किसी भी मर्द को अपने ऊपर सब्र कर पाना नामुमकिन सा होता है और सब रहोगी तो कैसे हो बला की खूबसूरत तो नहीं लेकिन फिर भी कामुक बदन वाली मदमस्त खूबसूरत बदन के कटा वाली औरत अगर अर्धनग्न अवस्था में किसी मर्द के आंखों के सामने और उसके बेहद करीब फ्री हो तो उससे भला कैसे संभव होगा वह तो कब से अपनी बाहों में लेकर उसके खूबसूरत बदन की खुशबू को अपने अंदर महसूस करने लगेगा लेकिन शुभम अपने आप पर काबू करके सरला की ब्रा की पट्टी को दोनों हाथों से पकड़कर उसे हल्का सा खींचकर उसके हुक को लगाने की कोशिश कर रहा था।
सरला को अपने आप पर बहुत ही ज्यादा शर्म आ रही थी क्योंकि उसके बेटे से भी कम उम्र का लड़का उसके कमरे में खड़ा था और वह अर्धनग्न अवस्था में ब्रा और पेंटी की आड़ में अपने मदमस्त बदन को छुपाने की भरपूर कोशिश कर रही थी लेकिन उसके बेटे से कम उम्र का वह लड़का ठीक है उसके पीछे खड़े होकर उसकी ही ब्रा की पट्टी को पकड़कर हुक लगाने की कोशिश कर रहा था ।
Bra panty pahanne k bad sarla


यह एक संस्कारी औरत के लिए शर्म से डूब जाने वाली बात होती है लेकिन सरला इस समय ना जाने क्यों शर्मिंदा होने के बावजूद भी शुभम की हरकतों का आनंद ले रही थी जबकि वह पूरी तरह से खुली नहीं थी लेकिन फिर भी अंदर ही अंदर उसका मन मचल रहा था और एक तरफ उसे शर्मिंदगी भी महसूस हो रही थी उसके तराजू के दोनों पलड़े अपनी-अपनी जगह पर भारी थे लेकिन अपनी खुशी तन की सुख और वासना के आगे संस्कार का पलड़ा बेहद हल्का होता जा रहा था मर्यादाओं की डोर टूटती जा रही थी उम्र की सीमा मिट्ती जा रही थी... कमरे के अंदर के हालात बदलते जा रहे थे...
शुभम के तन बदन में उत्तेजना किनार इतनी तीव्र गति से हो रही थी कि मानो उसके तन बदन में बवंडर से उठ रहा हो पेंट में लंड अलग से गदर मचाए हुए था। जो कि रणसंग्राम में उतरने के लिए उतारू था। उसका बस चलता तो आप तक ना जाने कबसे पेंट फाड़ कर बाहर आ गया होता क्योंकि उसकी आंखों के सामने ही उसे अपनी मंजिल महसूस हो रही थी उसकी खुशबू महसूस हो रही थी तभी तो शुभम का लंड सरला की बुर के अधीन होकर लार पर लार टपका रहा था जिससे शुभम अंडरवियर गिला होते जा रहा था... हाथों में ब्रा की पट्टी लिए वह हुक लगाने के लिए कशमकश जद्दोजहद में लगा हुआ था शुभम का भी शायद यह पहली बार ही था कि जब हम किसी औरत की ब्रा की पट्टी का हुक लगा रहा हो इसलिए उसे भी इसमें सफलता जल्दी प्राप्त नहीं हो पा रही थी लेकिन वह जानता था कि अगर नहीं हुक लगा पाया तो सरला के सामने उसे शर्मिंदा होना पड़ेगा इसलिए वह एक बार फिर से थोड़ा जोर लगाकर पीछे की तरफ खींच कर हुक से हुक भीड़ा कर बड़ी आसानी से लगा दिया.... शुभम के चेहरे पर विजई मुस्कान खिल उठी क्योंकि उसे सफलता प्राप्त हो चुकी थी... दोपहर के समय में सरला के रूम में और इस हालात में पहुंचकर शुभम को अपनी मंजिल बेहद करीब नजर आने लगी थी सरला को ठीक तरह से देखना चाहता था इसलिए.... वह घूम कर सरला के ठीक सामने जाकर खड़ा हो गया उसे देख कर मुस्कुराने लगा पल भर के लिए सरला अपनी नजर को ऊपर उठाकर शुभम की तरफ देखी और उसे मुस्कुराता हुआ देखकर शर्म से पानी पानी हो गई.. वह एक बार फिर से अपने बदन को सिकुड़ने लगी क्योंकि मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे कोई पति अपनी पत्नी को धीरे-धीरे वस्त्र विहीन करते हुए नग्न अवस्था के करीब ले जा रहा हो और उसे चारों तरफ से घूर घूर कर देख रहा हो।। सरला कि यह सोच उसे शर्मिंदा कर रही थी वह शर्म के मारे अपनी नजरें फिर से नीचे करके अपने आपको शुभम की प्यासी नजरों से बचाने की भरपूर कोशिश करने लगी लेकिन यह कोशिश बिल्कुल नाकाम थी क्योंकि शुभम के सामने इस समय व एकदम खुली किताब की तरह थी जिसके एक एक शब्द को वह अपनी निगाहों से पढ़ रहा था।शायद ही हो स्कूल में स्कूली किताबों को इतना पढ़ा होगा जितना कि वह औरतों की जिंदगी उनके भूगोल के बारे में पढ़ चुका था....
सरला को साफ नजर आ रहा था कि शुभम के पेंट का तंबू एकदम तना हुआ है और उस पर नजर पड़ते हैं सरला की टांगों के बीच का वह गुलाबी छेद फुदकने लगा... मानो कि उसे एहसास हो गया हो की बुर्का गुलाबी छेदा शुभम के मोटे तगड़े लंड से चौड़ा होने वाला है यह एहसास बुर के छेद से मदन रस की बुंद निकालने के लिए काफी था और उसी समय ही उसकी गुलाब की पत्तियों से घिरी हुई बुर के अंदर से मदन रस की दो बूंद चु गई जो की पेंटी को गीला कर गई....

उत्तेजना के मारे शुभम का गला सुखता जा रहा था... वह अच्छी तरह से जानता था कि पेंट में बने तंबू को सरला चोर नजरों से देख रही है लेकिन फिर भी वह अपने पेंट में बने तंबू को छिपाने के लिए जरा भी दरकार नहीं लिया....क्योंकि वह यही चाहता था कि सरला उसके पेंट में बने तंबू को देखकर उसकी मर्दाना ताकत के अधीन हो जाए। और ऐसा हो भी रहा था सरला शुभम के पेंट में बने तंबू को देखते ही उत्तेजित हो गई थी वह कल्पना में शुभम के मोटे तगड़े लंड को पेंट के बाहर निकाल कर हीलाना शुरू कर दी थी... एक तरफ वो शर्म से पानी पानी हो जा रही थी अब दूसरी तरफ शुभम की हरकत की वजह से कामोत्तेजना का अनुभव कर रही थी..... शुभम उसके ठीक आगे खड़े होकर ऊपर से नीचे आंखे भर भर कर उसे देख रहा था।‌ एक पराए मर्द और वह भी उसके लड़के की उम्र का लड़के को इस तरह से अपना नंगा बदन घुर घुर कर देखता हुआ पाकर ऊसे शर्मिंदगी महसूस हो रही थी और वह धीरे से बोली.....

शुभम तुझे मेरे कमरे में नहीं आना चाहिए था... कोई देखेगा तो क्या सोचेगा....(यह बात कह कर सरला जो यकीन दिला दी थी कि शुभम के लिए रास्ता एकदम साफ है क्योंकि वह अंदर से यही चाहती थी कि सब कुछ अच्छे से हो जाए और किसी को पता भी ना चले शुभम सरला की यह बात को पकड़ते हुए बोला..)

चाची इस कड़ी धूप में सब लोग अपने घर में एसी और कूलर की ठंडी हवा का मजा ले रहे हैं और यहां आते हुए मुझे किसी ने नहीं देखा है....

लेकिन फिर भी....( इतना कहकर सरला खामोश हो गई और शुभम अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

कुछ भी हो चाची मैंने आज तक तुम्हारी जैसी उम्र की औरत को इतनी खूबसूरत कभी नहीं देखा...(सरला को ऊपर से नीचे की तरफ देखते हुए) इस उम्र में भी कसा हुआ बदन कहीं भी अधिक चर्बी तक नहीं है....(सरला के गोल गोल चक्कर काटते हुए)सच कहूं तो चाची एकदम कयामत लगती हो हुस्न की मलिका खूबसूरती की मिसाल.....

यह क्या कह रहा है शुभम थोड़ा सा तो लाज कर मैं तेरी मां की उम्र की हुं...( सरला फिर से शर्म से दबे हुए स्वर में बोली.)

मैं अच्छी तरह से जानता हूं चाची की आप मेरी मां की उम्र की है लेकिन तुम्हारी खूबसूरती और बदन की बनावट कसा हुआ बदन देखकर नहीं लगता कि आप मेरी मां की उम्र की है....(शुभम अपनी बातों के जाल में सरला को फंसाते हुए बोला सरला शुभम की चुभती हुई निगाहों की वजह से शर्म से गड़ी जा रही थी। लेकिन फिर भी शुभम की यह बातें उसे बहुत अच्छी लग रही थी.... सरला निशब्द होकर शुभम की बातें सुन रही थी और सरला के चेहरे के बदलते हुए भाव को देखकर शुभम अच्छी तरह से समझ रहा था कि सरला के मन में क्या चल रहा है इसी बीच ऊसे युक्ति सूझी.. )

Sarlaa ki maadK adaa
 
अपनी इस युक्ति को आजमाने के लिए भी शुभम का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि अब वह वह हरकत करने जा रहा था शायद सरला को भी इसका अंदाजा नहीं था.... सरला तो कशमकश मैं पड़ी हुई थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है क्या नहीं करना है वह केवल मूर्ति बनी वहां खड़ी थी और ऐसी वैसी मूर्ति नहीं काम देवी की मूर्ति जिसके अंग अंग से मदन रस टपक रहा था जिसका हर एक अंग तराशा हुआ था गुलाबी होंठ गुलाब की पंखुड़ियों की तरह एकदम ताजा लग रहे थे नैन नश्क अद्भुत बनावट की कारीगरी थी छाती की शोभा बढ़ा रहे दशहरी आम पपाया के साइज के थे जिसे देखते ही शुभम के उम्र के लड़के ऊसे पकड़कर झुलने की इच्छा रखते थे... मोटी मोटी चिकनी जांगे मानो केले के मोटे तने की तरह मांसल और चमक रही थी... और नितंबों का घेराव किसी गांव के बीच के तालाब की तरह पूरे अंग की शोभा बढ़ा रही थी.... और सबसे बेहतरीन कारीगरी का नमूना तो सरला की दोनों टांगों के बीच के उस रेशमी बालों के झुरमुट में छुपी हुई उसकी रसीली बुर थी मानव हरे हरे जंगल के बीच कोई नहर गुजर रही हो... कुल मिलाकर इस समय वह काम की देवी लग रही थी। जिसको देखकर ही शुभम के तन बदन में काम भावना प्रकट हो रही थी। सरला की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह उसी स्थिति में खड़ी थी...लेकिन बार-बार उसकी नजर शुभम के पेंट में बने तंबू की तरफ चली जा रही थी और उस तंबू को देख कर उसके तन बदन में भी हलचल मच रही थी‌।
मत मस्त जवानी से भरी हुई सरला


सरला के बड़े बड़े दूध को देखकर शुभम के सूखे गले में नमी पैदा होने लगी उसके मुंह में पानी आ रहा था और उसे छूने के लालच में अपने अंदर दबा नहीं पाया और इसीलिए अपनी युक्ति को आजमाने के लिए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर थोड़ा सा दबी हुई ब्रा के कप को ऊपर से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ खींच कर सही करने लगा.... और सरला शुभम की उंगलियों का स्पर्श अपनी मदमस्त चुचियों पर महसूस करते ही एकदम से सिहर उठी और ना चाहते हुए भी उसके मुख से हल्की सी सिसकारी की आवाज निकल गई.... शुभम अपनी इस हरकत की वजह से पूरी तरह से गर्मा गया था हल्की सी चूची का नरम स्पर्श पाकर उसके तन बदन में आग लग गई थी...


चाची यह ब्रा का कब ठीक से पहना हुआ नहीं है मेरा मतलब है कि इसमें तुम्हारे दूध समा नहीं पा रहे हैं....(दूध शब्द का प्रयोग करके शुभम सीधे-सीधे अपनी बातों का काम बाण सरला के ऊपर दाग दिया था... और सरला भी शुभम के इस काम बाण का प्रहार अपने ऊपर से नहीं पाई और वक्त चारों खाने चित हो गई उसे उम्मीद नहीं थी कि शुभम इतने खुले शब्दों में उसके अंग के बारे में कह देगा दूध शब्द सुनते ही उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी चेहरे पर शर्म की लाली मचाने लगे मानो सरला शर्मिंदगी से पानी पानी हुए जा रही है उसके चेहरे के बदलते भाव उसकी कहानी कह रहे थे.. ‌ फिर भी वह कुछ भी कहने के काबिल नहीं दिखाई दे रही थी वह केवल शुभम की हरकत और उसकी बातों को सुन रही थी जवाब देने में हुआ एकदम असमर्थ नजर आ रही थी....सरला के द्वारा इतनी अश्लील शब्द सुनने के बावजूद भी किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया ना होते देखकर शुभम की हिम्मत बढ़ने लगी और वह एक कदम आगे बढ़कर सरला के बेहद करीब खड़ा हो गया और अपने दोनों हाथ सल्ला के पीछे की तरफ ले जाकर ब्रा के हुक को खोलते हुए बोला. ।).
सरला के बड़े-बड़े दशहरी आम

चाची यह ब्रा एकदम नई टाइप की है इसलिए शायद आपको पहनने में तकलीफ हो रही है लाईए मैं इसे ठीक से पहना देता हूं....(सरला कुछ बोल पाते इससे पहले ही सलाह का जवाब सुने बिना ही वह ब्रा के हुक को खोल दिया था जिससे एक बार फिर से सलाह के दोनों कबूतर को अपनी आगोश में लिए हुए उसकी ब्रा एक बार फिर ढीली हो गई...लेकिन इस दौरान शुभम सरला के इतने करीब आ गया था की सरला के नथुनो से निकल रही गर्म हवा शुभम अपने चेहरे पर एकदम साफ महसूस कर रहा था जिसके बदौलत वह इतना ज्यादा चुदवासा हो गया था कि उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। कई औरतों की संगत में आकर शुभम बेहद चालाक हो गया था इसलिए मैं एक बार फिर से सरला के अंग पर से ब्रा को अलग कर दिया जिसकी वजह से सरला पुनः कमर के ऊपरी हिस्से से एकदम नग्न हो गई सरला की बड़ी-बड़ी चूचियां एक बार फिर से सीना ताने शुभम को चुनौती देने लगी चूची की गोल-गोल ब्राउन कलर की निप्पल चॉकलेट की तरह शुभम को ललचाने लगी... उसे देख कर शुभम की पेंट में हलचल होने लगी बार-बार वह एक हाथ से सरला की आंखों के सामने अपने तने हुए लंड को पेंट में एडजस्ट करने की कोशिश कर रहा था जो कि इसकी हरकत जानबूझकर ही हो रही थी वह सरला को यह अपनी हरकत दिखाना चाहता था और सरला शुभम की यह हरकत को चोर नजरों से देख ले रही थी।
सरला के दोनों दशहरी आम जिसे शुभम अपने हाथ से जोर जोर से दबा रहा था और उसे मुंह में भरकर पीने की इच्छा रखता था


शुभम जानबूझकर सरला की चूचियों को वस्त्र विहीन करके उसकी ब्रा को इधर-उधर करके उसे ठीक करने के बहाने सरला की चुचियों का दीदार कर रहा था ऐसा लग रहा था मानो वह सरला की मदमस्त चूचियों के दर्शन करके एकदम धन्य हो गया हो उसकी गर्म गर्म सांसे सरला के चेहरे पर भी अपनी आभा छोड़ रही थी... जिससे सरला के गोरे गाल सुर्ख लाल होते जा रहे थे.... शुभम के जी में आ रहा था कि वह सरला के दोनों चूचियों को अपने हाथ में भरकर उसे बारी-बारी से मुंह में लेकर किसी कोल्डड्रिंक की तरह पी जाए.... जिसमें सेहत से भरपूर सारे तत्व मौजूद थे और एक मर्द को उसके मर्दाना ताकत में बढ़ोतरी करने के सारे गुण थे जो कि इस समय देखकर ही शुभम की मर्दाना ताकत में इजाफा हो रहा था वह निरंतर अपने अंदर काम शक्ति महसूस कर रहा था....

अब ठीक हो गया है चाची .... लाओ में ईसे अपने हाथों से आप को पहना देता हूं ... (और इतना कहने के साथ ही शुभम इतना ज्यादा बेशर्म हो गया कि सरला को इसकी उम्मीद ही नहीं थी वह अपने हाथ से सरला की एक चूची को पकड़कर ब्रा के कप में भर दिया और यही हरकत वह दूसरी चूची के साथ भी किया......

सससहहहहहहह ..... सुभम यह तू क्या कर रहा है....(शुभम की हरकत की वजह से सरला एकदम मस्त होते हुए गरम सिसकारी के साथ बोली...) तू चला जा मैं अपने हाथ से पहन लूंगी और इतना कहने के साथ एक बार फिर से वहां शुभम को कमरे से बाहर चले जाने के लिए बोल रही थी और लगभग शुभम के हाथों से अपनी ब्रा लेने की कोशिश कर ही रही थी कि शुभम फिर से उसकी ब्रा पर अपना कब्जा जमाते हुए बोला....)

मैं हूं ना चाची और मेरे होते हुए आपको यह सब के लिए तकलीफ उठाने की जरूरत नहीं है मैं जानता हूं कि यह नए जमाने की नई तकनीक से बनी हुई ब्रा है इसे अच्छी तरह से पहनना चाहिए वरना तकलीफ दे देती है...(इतना कहने के साथ ही शुभम एक बार फिर से सरला के दिलो-दिमाग से खेलने लगा उसके हाथों में एक बार फिर से उसकी ब्रा आ गई थी जिसे वह एक बार फिर सेउसी तरह से सरला की बड़ी-बड़ी चुचियों को बारी-बारी से पकड़कर ब्रा के कप में डालने लगा जो की उसकी संपूर्ण चूचियों को अपने आगोश में ले सकने में असमर्थ थी...शुभम जिस तरह से सरला की चूची को अपनी हथेली में पकड़ रहा था वह हल्के हल्के उसे दबा भी रहा था जिसका हवा सरला को अच्छी तरह से हो रहा था और शुभम की यह हरकत की वजह से सरला एकदम कामोत्तेजना के सागर में डूबने लगी थी उसकी आंखें बंद होने लगी थी वह निशब्द होकर उसी अवस्था में खड़ी थी... शुभम एक तरह से सरला के अंग के साथ मनमानी कर रहा था उसे ब्रा पहनने के बहाने वह सरला की चुचियों को दबाने का आनंद लूट रहा था लेकिन यह आनंद केवल शुभम को ही प्राप्त नहीं हो रहा था इसमें सरला भी शामिल थी उसकी मर्जी शामिल थी वरना अगर ऐसा ना होता तो उसके लड़के के उम्र का शुभम इतनी ज्यादा छुट नहीं ले सकता था ..लेकिन इसमें उसकी मर्जी थी तभी तो वह निशब्द होकर समझता में खड़ी थी और शुभम की हरकतों का आनंद ले रही थी क्योंकि अंदर ही अंदर वह भी यही चाहती थी कि वह शुभम को इजाजत नहीं देगी लेकिन शुभम अगर आगे बढ़ेगा तो वह उसे रोकेगी नहीं और अभी यही हो भी रहा था ब्रा पहनने के बहाने से वह मनमानी कर रहा था उसके दशहरी आम को अपने दोनों हाथों से दबा दबा कर शुभम चूची मर्दन का आनंद लूट रहा था सरला की भी सिसकारी की आवाज बदलते जा रही थी.... शुभम सरला के दोनों कबूतरों को बारी-बारी से पकड़ कर पिंजरे में डाल दिया और एक बार फिर से वहां सरला के पीछे खड़े होकर सरला की ब्रा के हुक को लगाने लगा लेकिन इस बार वह सरला के बदन से कुछ ज्यादा ही करीब सट गया था लेकिन अभी भी उसके पेंट में बने तंबू और सरला की मदमस्त गांड के घेराव के बीच दो अंगुल की दूरी रह गई थी जिसे शुभम सांस लेने के दरमियान ही पूरी कर सकता था। लेकिन वह चाहता था कि सरला अपनी गांड को खुद ही उसके पेंट में बने तंबू से स्पर्श कराएं। और सरेला को इस बात का आभास हो गया था कि शुभम उसके बदन से बेहद करीब सटा हुआ है क्योंकि उसकी सांसो की गर्माहट उसे अपनी गर्दन पर महसूस हो रही थी और शुभम की गर्म सांसों को महसूस करके सरला का खूबसूरत मादक बदन कसमस आने लगा था और इसी कसमस आहट में सरला के बदन में हल्की सी हलचल हुई और वह अपनी मदमस्त गांडड को अनजाने में ही पीछे की तरफ सरका दी.....
Shubham sarla ko is tarah se god me utha liya


ससससससहहहहहह ..... आहहहहहहहहह.....(अगले ही पल सरला के मुख से ना चाहते हुए भी गर्म सिसकारी फूट पड़ी उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी सरला को यह समझते देर नहीं लगी कि उसके भारी-भरकम गांड से जो कठोर चीज टकराई है वह शुभम का मोटा तगड़ा लंड है और इस बात का आभास और ऐसा सोते ही सरला का पूरा बदन अनजान रोमांच से एकदम से सिहर उठा..... वह झट से अपनी गांड को आगे की तरफ खींच ली लेकिन शुभम अपना काम जादू चला चुका था और सरला शुभम के इस काम बाण से एकदम विवश हो गई थी वह गरम गरम सांसे लेते हुए अपनी उत्तेजना को शांत करने की कोशिश कर रही थी लेकिन जिसमें वह संपूर्ण रूप से नाकामयाब होती जा रही थी... मोटे तगड़े लंड की चुभन अपनी मदमस्त गांड पर करके वह एकदम से मस्त हो चुकी थी उसे पल भर में इस बात का आभास हो गया कि जब शुभम का लंड पेट में होने के बावजूद भी उसका स्पर्श इतना जबरदस्त है तब जब वह अपना पूरा का पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में उतारेगा तब उसे कितना मजा आएगा... शुभम जानबूझकर में ब्रा के हुक को ठीक से लगा नहीं रहा था क्योंकि वह जानता था अगर ब्रा का हुक ठीक से लग जाएगा तब यह पल उसकी पकड़ से दूर हो जाएगा और वह इस पल को अपनी पकड़ से दूर जाने नहीं देना चाहता था इस पल को वह पूरी तरह से जी लेना चाहता था और शायद यही कशमकश सरला के दिलो-दिमाग पर भी छाया हुआ था क्योंकि शुभम की मर्दाना ताकत को अपने नितंबों पर महसूस कर चुकी सरला एक बार फिर से शुभम के मर्दाना अंग को अपनी मदमस्त गांड पर स्पर्श कराना चाहती थी... जबकि वह पहले ही इस बात का निश्चय कर चुकी थी कि आगे से वह कुछ भी ऐसा काम नहीं करेगी जिससे शुभम को उसकी तरफ से खुली छूट मिल जाए लेकिन जिस तरह का स्पर्श जिस तरह की गर्माहट उसने अपने नितंबों पर महसूस की थी और उस गर्माहट का असर उसे उसकी झनझनाहट का असर उसे अपनी बुर तक महसूस हुआ था एक बार फिर से वह उसी स्पर्श को महसूस करना चाहती थी.... इसलिए एक बार फिर से अंजाना बनाने का नाटक करते हैं फिर से अपनी भारी-भरकम मदमस्त गांड को पीछे की तरफ हल्का सा ले आई और शुभम तो इसी ताक में ही था व नीचे की तरफ ब्रा का हुक लगाते हुए देख रहा था और उसकी आंखों के सामने ही सरला अनजान बनने का नाटक करते हुए एक बार फिर से अपनी मदमस्त गांड पर शुभम के मोटे तगड़े लंड की चुभन को महसूस कर गई। इस बार मोटे तगड़े लंड का स्पर्श उसे पूरी तरह से उत्तेजित कर गया और उसकी बुर से मदन रस की बुंद टपकने लगी..
इस उत्तेजक स्पर्श से वह पूरी तरह से कम उत्तेजित हो गई और शुभम की भी यही हालत थी पहली बार वह अपने पेंट में बने तंबू पर सरला की मदमस्त बड़ी-बड़ी गांड का स्पर्श महसूस कर रहा था। वह पूरी तरह से मदहोश होने लगा था उसके बदन में कपकपी सी उठ रही थी और वह चाहकर भी ब्रा का हुक बंद करने में असफल होता जा रहा था क्योंकि इतनी मादक स्पर्श से उसकी ऊंगलियां कांप रही थी.... शुभम की सांसे गहरी हो चली थी और उसकी गहरी सांसो की गर्मी सरला को उसके गर्दन पर उसमें प्रदान कर रही थी जिससे उसका पूरा बदन जल रहा था कामाग्नि में तप रहा था इस उम्र में भी उत्तेजना की कोई सीमा नहीं होती इस बात को पूरी तरह से सरला के बदन की हलचल साबित कर रही थी.... टांगों के बीच की कचोरी में से लगातार चटनी नुमा मदन रस गिर रहा था .. और अगर किसी को मौका मिल जाए तो वह सरला की फूली हुई कचोरी जैसी बुर में से गिर रहे मदन रस की एक भी बूंद को जाया ना होने दें उसे वह जीभ से चाट कर अपने आप को तृप्त कर ले लेकिन यह मौका दूसरों को तो नहीं लेकिन शुभम को जरूर प्राप्त होने वाला था...
सरला की सोच बदलते जा रही थी... पूरे कमरे का वातावरण जिस तरह से कामोत्तेजना के असर में रंगने लगा था... उसे देखते हुए किसी भी वक्त दोनों के बीच शारीरिक संपर्क स्थापित होने की उम्मीद नजर आने लगी थी शुभम के हाथ अभी भी कांप रहे थे जोकि इसमें सरला का ही हाथ था क्योंकि एक से एक खूबसूरत औरतों को भोग चुका शुभम सरला की इस हरकत की वजह से पूरी तरह से कामोत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच गया था...सरला जिस तरह से जानबूझकर अपनी मदमस्त गोल-गोल गांड को पीछे की तरफ करके उसके लंड का स्पर्श कर रही थी... उसे देखकर शुभम का धैर्य खोने लगा था लेकिन अभी भी वह अपने आप को संभाले हुए था....

शुभम ब्रा की पट्टी पकड़े एक बार फिर से उसके हुक लगाने की तैयारी कर रहा था और दूसरी तरफ सरला गर्माहट भरे मर्दाना अंग का स्पर्श पाकर पूरी तरह से गर्मा गई थी और एक बार फिर से उसके मन में उस मर्दाना अंग के स्पर्श के लिए लालच उभरने लगी थी और इस बार फिर से वह अपनी वही हरकत दोहराते हुए अपनी गोल-गोल गांड को हल्के से पीछे की तरफ ले गई... और इस बार शुभम से रहा नहीं गया जैसे ही शुभम के पेंट में बना तंबू किसी भाले की नोक की तरह सरला की मदमस्त गांड पर स्पर्श हुआ शुभम का सब्र का बांध एकदम से टूट गया और वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपने दोनों हथेलियों को सरला के दोनों कबूतर पर रखकर अपनी कमर को आगे की तरफ सरका दिया.... शुभम का जबरदस्त तना हुआ मोटा तगड़ा लंड तंबू की शक्ल में इस बार सरला की पेंटी के बीचो-बीच गांड की दरार में घुस गया .. शुभम की तरफ से इस तरह की हरकत होगी सरला को इसका बिल्कुल भी ख्याल नहीं था और अनजाने में इस तरह से हुए शुभम की तरफ से इस प्रतिक्रिया की वजह से वह एकदम से सिहर उठी क्योंकि पेंट में होने के बावजूद भी शुभम के लंड में कुछ ज्यादा ही ताकत थी... जिसकी वजह से शुभम के पेंट में बना हुआ तंबू सरला की पेंटिंग सहित गांड की दरार में घुसने लगा था.... और इतने से सरला की गरम सिसकारी फूट पड़ी....

ससससससहहहहहह ...... आहहहहहहह.... शुभम यह क्या कर रहा है छोड़ मुझे.....(इतना कहने के बावजूद भी जिस तरह से शुभम ने अपनी हरकत दिखाया था सलाह पूरी तरह से मस्त हो गई थी एक तो पीछे उसके पेंट में बना था वह उसकी मदमस्त गांड से खिलवाड़ कर रहा था और उसके दोनों हाथ उसके दोनों कबूतरों से खेलें रहे थे जिसकी वजह से सरला एकदम मस्त होने लगी थी लेकिन फिर भी ऊपरी मन से शुभम की इस हरकत का विरोध करते हुए उसे दूर हटने के लिए कह रही थी।) छोड़ मुझे हरामी ऐसा कोई करता है क्या मैं तेरी मां की उम्र की हूं....

मैं जानता हूं चाचा लेकिन क्या करूं तुम्हारी हरकत की वजह से मैं एकदम गरम हो गया हूं....(शुभम लगातार अपनी मर्दाना ताकत की रगड़ से उसकी गोल-गोल गांड पर कहर ढा रहा था और अपने दोनों हाथों की कलाबाजी दिखाते हुए उसके दशहरी आम को जोर जोर से दबा रहा था जो कि अभी भी बुरा की कैद में थे लेकिन फिर भी सरला शुभम की इस हरकत की वजह से मस्त हुए जा रही थी...)

शुभम छोड़ मुझे मैंने कौन सी हरकत कर दी कि तु इतना पागल हुए जा रहा है...( सरला लगातार शुभम की पकड़ से आजाद होने की कोशिश करते हुए बोली)

चाची ......यह तुम्हारी मदमस्त...... गांड..... जो तुमने इसे गोल गोल घुमा कर मेरे लंड से सटाई मेरी तो हालत खराब हो गई सच में तुम बहुत खूबसूरत हो चाची.....(शुभम एकदम मादक स्वर में सिसकारी लेते हुए बोला... और अपनी हरकतों को लगातार जारी रखा जिसकी वजह से सरला पर खुमारी छाने लगी थी...)

शुभम तू पागल हो गया है क्या यह कैसी बातें कर रहा है इतनी गंदी बातें क्या तुझे शर्म नहीं आती मेरे सामने इस तरह की गंदी बातें करते हुए....(सरला फिर से ऊपरी मन से अपने आपको शुभम की पकड़ से छुड़ाने की कोशिश करने लगी और उसके द्वारा कही गई अश्लील बातों के लिए उस पर गुस्सा करने लगी जो कि वह भी ऊपरी मन से कह रही थी अंदर ही अंदर शुभम की यह बातें सुनकर उसके बदन में जवानी की चिंगारी फूटने लगी थी।)

कैसी गंदी बातें चाची मुझे तो इसमें किसी भी प्रकार की गंदगी नहीं लग रही है मैं जो कुछ भी कह रहा हूं सच कह रहा हूं...(शुभम इस दौरान सरला के दोनों कबूतरों को अपनी हथेली में लेकर जोर जोर से दबाते हुए अपने होंठों का स्पर्श उसके नाजुक कोमल गर्दन पर कर रहा था जिससे सरला के तन बदन में मदहोशी चाह रही थी क्योंकि सुबह भी बात अच्छी तरह से जानता था कि औरतों को गर्दन पर चुंबन करने से औरतें एक दम मस्त हो जाती है और वही सरला के साथ भी हो रहा था..) मेरे तन बदन में जो काम भावना जागी है यह सिर्फ आपकी बदौलत है....

क्या बकवास कर रहा है सुभम....?

मैं बकवास नहीं कर रहा हूं चाची....(सरला के दोनों दशहरी आम से खेलते हुए...)मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि आप बहुत खूबसूरत हो लेकिन कपड़ों के बिना इतनी ज्यादा खूबसूरत होगी यह मुझे देखने पर ही पता चला....(इतना कहते हुए शुभम अपनी कमर का जोर सरला की मदमस्त गांड पर बढ़ाया तो सरला के मुंह से हल्की सी चीख निकल गई क्योंकि शुभम का मोटा तगड़ा लंड तंबू के साथ पेंट सहित और ज्यादा गांड की गहराई में घुस गया....)
आहहहहहहह..... सुभम....

क्या हुआ चाची....?(शुभम अनजान बनते हुए बोला)

तेरा वो चुभ रहा है.....

यह तो अपनी गांड मेरी तरफ परोसने से पहले सोचना चाहिए था चाची....
(शुभम सब कुछ खुले शब्दों में बोल रहा था वह एकदम बेशर्मी पर उतर आया था क्योंकि उसने सरला की नाल परख लिया था वह समझ गया था कि यह प्यासी औरत है.. इसलिए वह सरना से गंदे शब्दों में बातें कर रहा था जो कि सरला को अच्छा ही लग रहा था गांड परोसने वाली बात पर तो सरला शर्म से पानी पानी हो गई उसका चेहरा सुर्ख लाल हो गया शुभम की बात सुनकर उसके चेहरे की रंगत उड़ने लगी और वह अपनी तरफ से सफाई पेश करते हुए बोली)

यह बकवास है शुभम यह सब अनजाने में हुआ था मैं जानबूझकर तुम से सटी नहीं थी।

मैं इतना पागल नहीं हूं चाची मैं औरतों की नस नस से वाकिफ हूं मैं पहले भी कह चुका हूं और तुम्हें मेरी बात मान लेना चाहिए था वरना तुम्हारी साइज का पता ना होने के बावजूद भी मैंने तुम्हारे लिए जो ब्रा पहनती लाया हूं वह तुम्हारे बदन पर एकदम फिट आ रही है और तुम्हारी रंगत से कितना मैच खा रही है सच कह रहा हूं चाची तुम्हारी उम्र की औरत नंगी होकर इतनी खूबसूरत लगती होगी आज मैं पहली बार अपनी आंखों से देख रहा हूं तभी मुझे विश्वास हो रहा है....

ससससहहहह.... शुभम यह क्या कर रहा है ऐसा मत कर प्लीज....
(सरला के मुख से एकदम गर्म सिसकारी फूट पड़ी थी क्योंकि शुभम अपना एक हाथ उसके मखमली चिकनी पेट पर घुमाने लगा था)

तू कितना बेशर्म है एक औरत को इस हालत में देखकर नजर हटाने की जगह उस पर कपड़े डालने की जगह आंखें भर भर कर देख रहा था।

पागल है वह लोग जो औरत की खूबसूरती को अपनी आंखों से उसके नग्न अवस्था में देखकर नजर फेर लेते हैं सच कहूं तो चाची मेरा इस तरह से तुम्हारे घर में आना सफल हो गया या यूं कह लो कि मेरा जीवन धन्य हो गया तुम्हारे नंगे बदन को देख कर मेरी जो हालत हो रही है वह शायद आप नहीं समझ पा रही हो....(शुभम की हथेलियों का जादू सरला के तन बदन पर छाने लगा था... मदहोश होने लगी थी आगे पीछे दोनों तरफ से वह शुभम की हरकतों का आनंद ले रही थी अपनी गांड में शुभम के मोटे तगड़े लंड को तंबू की शक्ल में महसूस करके इतना तो समझ ही गई थी कि वास्तव में शुभम का मोटा तगड़ा लंड काफी दमदार है।)

मैं सब समझ पा रही हूं शुभम तुम्हारे जैसे लड़के इस उम्र में नादानी कर बैठते हैं मैं तुम्हारी मां की उम्र की हूं और तुम्हारे ऊपर इस समय आकर्षण का जादू सवार हो गया है इस आकर्षण से बाहर आओ तब तुम समझ पाओगे कि मेरी उम्र और तुम्हारी उम्र में कितना फर्क है मुझे छोड़ो और अपने घर चले जाओ....(सरला जानबूझकर इस तरह की बातें कर रही थी क्योंकि वह चित्र से जानती थी कि जिस हालात में शुभम उसे अपनी बांहों में भरा हुआ है लाख समझाने पर भी वह मानने वाला नहीं है और यही तो वह भी चाहती थी लेकिन फिर भी अपनी तरफ से वह पूरी कोशिश कर रही थी कि इसमें उसका जरा भी हामी शुभम को महसूस ना हो लेकिन शुभम इतना पागल नहीं था सरला के बदलते हाव भाव उसके बदलते स्वर से साफ पता चल रहा था की शुभम की हरकतों का वह भी मजा ले रही है...?)

चाची सच कहूं तो आकर्षण ना होता तो औरत और मर्द के बीच किसी भी प्रकार का संबंध नहीं होता इस समय में आपके घर में आपके रूम में नहीं होता यै आकर्षण ही तो है जो एक दूसरे को मिलाती है एक दूसरे से संबंध बनाती है भाईचारा रिश्ते बनाती है अगर आकर्षण ना हो तो सब बेकार है.... और क्या चाहिए उम्र उम्र लगा रखी हो कभी अपने आप को आईने के सामने एकदम नंगी होकर अपने आप को शीशे में देखना मेरा दावा है कि अपने आपको आईने में देखकर आप खुद शर्म से पानी पानी हो जाओगे इस उम्र में भी जिस तरह की खूबसूरती और अपने बदन की कसावट बनाए हुए हो उसे खुद देख कर आप मचल उठोगी....

शुभम तू पागल हो गया है बातें मत बना मुझे छोड़ और मेरे कमरे से बाहर चला जा मैं नहीं चाहती कि तेरे जैसा अच्छा लड़का कोई गलती कर बैठे....

गलती तो मैं चाची उसी दिन कर बैठा था जब आपसे पहली बार मुलाकात हुई थी पहली नजर में ही आप मुझे अच्छी लगने लगी थी...

शुभम पागल हो गया है तू छोड़ मुझे छोड़....( सरला शुभम की कलाई पकड़ कर उसे अपने आप से छुड़ाने की कोशिश कर रही थी लेकिन शुभम हट्टा कट्टा नौजवान लड़का था उसमें सरला से ज्यादा ताकत थी वह अपने आपको उसकी पकड़ से छुड़ा नहीं पाई लेकिन इस हाथापाई में सरला की ब्रा जोकि दोनों चुचियों पर टिकी हुई थी वह नीचे गिर गई और सरला कीमत मस्त चूचियां एकदम नंगी हो गई शुभम मौके की नजाकत को समझते हुए जैसे ही बुरा नीचे गिरी वैसे ही तुरंत फिर से अपने दोनों हथेली को सरला की मदमस्त नंगी चूची पर रख कर उसे दबाने लगा इस बार उसके मुख से सिसकारी की आवाज फूट पड़ी क्योंकि सरला की नंगी चूचियों को दबाने में वह पूरी तरह से मदहोश हो गया.... सरला भी अपनी नंगी चूचियों पर एक नौजवान लड़के की हथेली की मजबूत पकड़ पागल मस्त होने लगी उसकी आंखें भी मदहोशी के आलम में बंद होने लगी.....)

औहहहहहह...सुभम... यह क्या कर रहा है तू मुझे छोड़ दे मुझे जाने दे तू चला जा मेरे कमरे से बाहर चला जा कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा ...(सरला का विरोध कमजोर होता जा रहा था उसके स्वर में नरमी नजर आ रही थी जिससे साफ पता चल रहा था कि वह भले ही शब्दों मैं उसे जाने के लिए कह रही थी लेकिन वह उसे वही रोकना चाहती थी जोकि शुभम अच्छी तरह से समझता था... इसलिए इस बार शुभम सरला के दोनों कंधों को पकड़कर उसे घुमा कर उसे अपनी तरफ कर दिया सरला शुभम की इस हरकत के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। इसलिए लड़खड़ा गई लेकिन शुभम ने उसे अपनी बाजुओं का सहारा देकर पकड़ लिया... शुभम की इस हरकत पर शर्मा फिर से शर्मा गई अपनी नजरे नीचे झुका ली एक तो उसकी मदमस्त दशहरी आम बिल्कुल नंगे होकर शुभम को जैसे आमंत्रण दे रहे हो और अपनी खुली चुचियों की वजह से सरला और ज्यादा शर्मिंदगी महसूस कर रही थी शुभम भी उसके दोनों दशहरी आम को देखते हुए उसकी दोनों बांहों को अपनी हथेली में थामा हुआ था.... सरला की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी उसका दिल जोरो से धक धक कर रहा था... उत्तेजना और शर्मिंदगी का अहसास लिए उसका पूरा वजूद कसमसा रहा था.... और शुभम अपनी बेशर्मी का एक और उदाहरण पेश करते हुए अपने हाथ से सरला की ठोड़ी पकड़कर उसे हल्के से उठाते हुए मानो जैसे एक दूल्हा अपनी दुल्हन का सुहागरात के दिन चेहरा देख रहा हो शुभम की इस हरकत की वजह से सरला एकदम शर्म से पानी पानी हो गई...क्योंकि शुभम की इस हरकत की वजह से उसे अपनी जवानी के वह दिन याद आ गए जब वह शादी करके पहली बार इस घर में आई थी और उसका पति इसी तरह से सुहागरात की सेज पर अपनी उंगली से ठोड़ी उठाकर उसके चेहरे को देख रहा था। शुभम भी उसी तरह से सरला की खूबसूरत चेहरे को देख रहा था सरला शर्म से अपनी आंखें बंद कर दी थी और शुभम उसका शर्माता हुआ चेहरा देखकर बोला।

चाची सच-सच बताना क्या आपको यह सब अच्छा नहीं लग रहा है?( शुभम बेशर्मी की सारी हद पार करते हुए नई नवेली दुल्हन की तरह उसके खूबसूरत चेहरे को देखते हुए बोला शुभम के इस सवाल का जवाब सरला के पास बिल्कुल भी नहीं था उसके होठों पर उत्तेजना की कपकपी साफ नजर आ रही थी और जवाब दे भी तो कैसे दें.... वह हां कहे या ना कहे यह उसके समझ के परे था.... क्योंकि उसे भी बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी लेकिन अपनी उम्र की मर्यादा को देखकर यह सब उसे अपने बेटे के उम्र के लड़के के साथ करना अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन कर भी क्या सकती थी आनंद की सीमा मर्यादा की सीमा से कहीं ज्यादा होती है अगर किसी भी इंसान को किसी चीज में मजा आने लगता है तो उसमें उम्र की कोई मर्यादा नहीं होती और यही सरला के साथ भी हो रहा था सरला कुछ बोल नहीं पाई उसके पास कोई जवाब नहीं था अपने बेटे की उम्र के लड़के के सामने अपनी मदमस्त दशहरी आम की तरह तनी हुई चूचियां लेकर वह शर्म सार हुए जा रही थी। ... जिंदगी में शादी के बाद पहली बार वह किसी पराए मर्द के सामने अर्धनग्न अवस्था में खड़ी थी अर्धनग्न क्या संपूर्ण नंगी ही थी केवल उसके बदन पर पेंटिं ही थी जो उसकी खूबसूरत खजाने को छिपाए हुए थी। सरला के तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया ना होते देखकर शुभम का हौसला बढ़ने लगा था क्योंकि भले ही होठों से वह कुछ ना कह पा रही हो उसके थिरकते होठ उसके चेहरे के बदलते होगा बदन की भंगिमा सब कुछ बयान कर रही थी और उसके सारे हाव भाव शुभम के पक्ष में थे शुभम की प्यासी नजरें सरला के दशहरी आम पर टीकी हुई थी... जो कि काफी बड़े बड़े थे उनको देखकर ही शुभम के मुंह में पानी आ रहा था ब्रा नीचे गिरी हुई थी शुभम समझ गया था कि अब कमरे में उन दोनों के बीच ब्रा का कोई भी वजूद नहीं था सरला की नंगी छातियां मानो शुभम को आमंत्रित कर रही हो.... सरला शर्म के मारे अपनी आंखों को मुंद चुकी थी और मन की आंखों से अपने अंदर उमड़ते हाव भाव को देखकर प्रसन्न हुए जा रही थी.... कमरे में अब दोनों के बीच एकदम खामोशी छाई हुई थी सरला की आंखें बंद थी लेकिन शुभम अपनी खुली आंखों से सब कुछ देख रहा था उसकी सांसों की गति एकदम गहरी चल रही थी शुभम अच्छी तरह से जानता था कि आप वापस आ गया है जब उसे उसकी मंजिल मिलने वाली है मंजिल के मिलने की खुशी में वह सफल को और ज्यादा रोमांचकारी बनाते हुए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर एक बार फिर से चला कि दोनों चुचियों को दशहरी आम की तरह पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया शुभम की मजबूत हथेलियों को अपनी चूची पर महसूस करके सरला फिर से गनगना गई.... और शुभम एक बार फिर से सरला से बोला...

कहो ना चाची क्या आपको हिसाब अच्छा नहीं लग रहा है अगर आपको अच्छा नहीं लग रहा हो तो मैं यहां से चला जाऊंगा बस एक बार अपने मुंह से कह दो कि आपको यह सब अच्छा नहीं लग रहा है....(इतना कहकर शुभम फिर से सरला की दशहरी आम को दबाते हुए उसके चेहरे के हाव भाव को देख रहा था सरला अभी भी कुछ कह सकने के काबिल बिल्कुल भी नहीं थी वह एकदम निशब्द हो चुकी थी वह जानती थी कि अब कुछ भी कहने सुनने लायक नहीं है वह अपने मन में ठान ली थी कि शुभम को आगे बढ़ने की उसकी तरफ से पूरी आजादी है वह आंखों को बंद किए हुए हैं चेहरे पर शर्मिंदगी का अहसास लिए शुभम की हरकतों का आनंद ले रही थी शुभम भी उसके बदलते हैं भाव को देखकर उसकी चूचियों को मसलते हुए धीरे-धीरे अपने चेहरे को उसके करीब ले जाने लगा और देखते ही देखते शुभम के होठ सरला के दहकते हुए होठ पर भीड़ गए . अपने होठों पर शुभम के होंठ का स्पर्श पाते ही सरला एकदम गरम हो गई वह गरम सिसकारी ले पाती इससे पहले ही शुभम सरला की चूचियों पर से हाथ उठाकर अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होठों को मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया... ।
सरला को शुभम के द्वारा इस हरकत की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी लेकिन धीरे-धीरे उसकी सारी उम्मीदें ना उम्मीद होते जा रही थी शुभम अपनी बेशर्मी की हद पार करते हुए सरला के साथ धीरे-धीरे हरेक वह हरकत कर रहा था जो एक मर्द औरत के साथ करता है शुभम वासना मैं एकदम अंधा हो गया था सरला के गुलाबी होठों को अपने मुंह में भर कर उसे पागलों की तरह चूस रहा था और सरला भी ना चाहते हुए भी शुभम की इस हरकत का पूरा मजा लेने लगी उसे शुभम के द्वारा इस तरह से होठों से जाने पर बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी साथ ही हो जिस तरह से सरला को अपनी बाहों में लेकर उसके बदन से सट गया था उसका मोटा तगड़ा लंड जो कि अभी भी तंबू की शक्ल में था वह अब सही है सरला के पेट के नीचे पैंटी के ऊपर से ही उसकी बुर की मदमस्त दीवारों के ऊपरी सतह पर दस्तक दे रहा था।
सरला के लिए यह सब एकदम आसानी होता जा रहा था एक तो ऊपर से होठो की चुसाई और नीचे से गुलाबी छेद पर जबरदस्त दस्तक सरला के सब्र का बांध तोड़ रहा था शुभम जानबूझकर अपने तंबू को इतनी जोर जोर से टांगों के बीच पैंटी के ऊपर रगड़ रहा था मानो गुलाबी छेद पर अपने हथौड़े से वार कर रहा हूं यह दस्तक इतना जबरदस्त था कि मानो दरवाजा ही तोड़ देगा सरला बदमस्त अंगड़ाई भरने लगी थी देखते ही देखते ना चाहते हुए भी कब उसके दोनों हाथ शुभम की पीठ पर आ गए या सरला को खुद भी पता नहीं चला अपनी पीठ पर सरला के नाजुक हथेलियों का स्पर्श पाते ही शुभम पागलों की तरह सरला के होठों को चूसना शुरू कर दिया क्योंकि यह सरला की तरफ से हरी बत्ती थी जो कि सारे सिग्नल तोड़ चुकी थी शुभम सारी हद पार करते हुए सरला को अपनी बाहों में भर कर अपनी हथेली को उसकी नंगी पीठ पर इधर-उधर फिरा रहा था...उसे समझ में आ गया था कि अब वह कुछ भी सरला के साथ करेगा सरला उसका बिल्कुल भी विरोध नहीं करेगी.... शुभम पागल हुए जा रहा था ... उसकी जवानी उफान मार रही थी... अत्यधिक जोश की वजह से उसका पूरा बदन चरमरा रहा था वह अपनी जवानी का जोश और ताकत का जोर पूरी तरह से सरला पर दिखाते हुए अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर सरला की मटके जैसी गांड को अपनी हथेलियों से कस कर उसे उठा लिया.... देखते-देखते सरला के दोनों पांव हवा में हो गए सरला को तो उम्मीद भी नहीं थी कि सुभम में इतनी ज्यादा ताकत होगी... वह एकदम से घबरा गयी उसे डर था कि कहीं सुभम ऊसे नीचे ना गिरा दे.... इसलिए वह अपनी आंखें खोल कर घबराते हुए बोली....
Sarla ki boor se khelta Shubham


यह क्या कर रहा है सुभम मुझे नीचे उतार में गिर जाऊंगी मुझे नीचे उतार मुझे डर लग रहा है....(लेकिन शुभम पर उसकी बातों का किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ रहा था वह तो अपनी भुजाओं में सरला की बड़ी-बड़ी नितंब का दबाव महसूस करके मस्त हुए जा रहा था ऐसा लग रहा था कि मानव सरला की मदमस्त जवानी का जोश उसके बदन पर पूरी तरह से सवार हो चुका है और उसमें एक अलग से ताकत आ गई हो क्योंकि सरला बेहद भारी भरकम शरीर वाली औरत थी और सरला को उठा पाना सबके बस में बिल्कुल भी नहीं था लेकिन जवानी के जोश में और अपने हट्टी कट्टी शरीर के बदौलत शुभम उसे अपनी भुजाओं के दम पर उठाकर पूरे कमरे में इधर-उधर घूमने लगा था.... सरला लगातार उसे उतारने के लिए गिड़गिड़ा रही थी लेकिन शुभम उसकी एक नहीं सुन रहा था अर्धनग्न अवस्था में शुभम की गोद में सरला बेहद खूबसूरत और मादक लग रही थी लेकिन उसके चेहरे पर कहीं गिर ना जाए इसकी चिंता की लकीर साफ नजर आ रही थी... शुभम उसे उठाएं पूरे कमरे में घूम रहा था जिसकी वजह से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी वह उसे लगातार उतारने के लिए बोल रही थी।...) शुभम उतार दे मुझे लग जाएगी पागल हो गया है तू मेरा वजन ज्यादा है मैं गिर गई तो...

नहीं गिरोगी चाची मुझ पर भरोसा रखो .... आप को संभालने की ताकत मुझ में है.....(शुभम अपनी कलाई का दबाव सरला के नितंबों पर बराबर गड़ाए हुए था बाहर से जितनी कठोर मटके जैसी सरला की गांड नजर आ रही थी इतनी कठोर थी नहीं एकदम रुई की तरह नरम नरम थी जिसकी वजह से शुभम और ज्यादा उत्तेजित हुए जा रहा था... जिस तरह से शुभम उसे उठाकर इधर उधर भाग रहा था उसकी यह ताकत को देखकर सरला एकदम मंत्रमुग्ध हो गई थी उसे इस बात का अंदाजा लग गया था कि वाकई में शुभम में दम है.... यह एहसांस उसे अंदर तक उत्तेजित करे जा रहा था...उसकी बुर काफी मात्रा में मदन रस छोड़ रही थी जिससे उसकी पूरी पेंटी गीली होती नजर आ रही थी और यह शुभम अच्छी तरह से देख रहा था कि उसकी पेंटी खाकर वाला भाग पूरी तरह से गिला हो गया था शुभम को समझते देर नहीं लगी थी कि सरला की बुर पनिया रही है इसका मतलब साफ था कि उसे भी बहुत मजा आ रहा है.....

सरला को भी इस बात का आभास हो रहा था कि उसकी पेंटी पूरी तरह से गीली हो रही थी और उसकी बुर से निकला मदन रस पिघल कर पेंटी के बाहर बहने लगा था... इस बात का आभास होते ही सरला शर्म से पानी पानी होने लगी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि शुभम की नजर उसके गीले पन पर जाए लेकिन भला ऐसा कैसे हो सकता है कि बिल्ली की नजर दूध के कटोरे पर ना जाए शुभम उसे उठाए हुए लगातार उसकी टांगों के बीच कै उस गीलेपन को ही देख रहा था.... और सरला भी यही देख कर शर्मिंदा हुए जा रही थी कि तभी उत्तेजना मैं उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर में से चटनी रृपी रस टपक कर पेंटी से बाहर आई और वह सीधे शुभम के होठों पर जा गिरी यह दृश्य सरला बराबर देख रही थी कि तभी शुभम को भी यह साफ नजर आया था कि सरला की पेंटी में से नमकीन पानी की बूंद उसके होठों पर गिरी है और वह सरला की नजर में नजर मिला कर देखते हुए अपने होंठ पर जीभ फेरने लगा यह देखकर सरला की तो मानो जैसे सांस ही अटक गई हो उसे यकीन नहीं हो रहा है कि जो वह अपनी आंखों से देख रही है वह सच है लेकिन आंखों से देखी चीज को झुठलाई नहीं जा सकती थी...सरला की बहू से निकले पानी को शुभम में अपने होठों से चाट कर उसे अपने अंदर ले लिया था.. । सरला के सब्र का बांध टूटते जा रहा था शुभम भी अपने अंदर काफी उत्तेजना का सैलाब उठता हुआ महसूस कर रहा था। तभी शुभम अपनी कलाइयों का कसाव सरला की मदमस्त गांड पर ढीली कर दिया जिससे सरला भलभला कर नीचे की तरफ आने लगी कि तभी फिर से उसे अपनी कलाइयों को जोर से पकड़ लिया था कि सरला नीचे ना गिर जाए.... और तभी सरला एकाएक शुभम के बराबर में आकर स्थिर हो गई यो एकाएक नीचे आने की वजह से उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी है जिसकी वजह से उसकी दोनों दशहरी आम एक बार फिर से अपना जलवा बिखेरने लगे शुभम काफी उत्तेजित और प्रसन्न नजर आ रहा था उसकी आंखों में खुमारी छा रही थी एक बार फिर से शुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर सरला के दोनों दशहरी आम को अपनी हथेलीयों में थाम लिया और अपने प्यासे होठ को फिर से सरला के गुलाबी होंठ पर रख दिया... स्तन मर्दन और दहकते होठ पर होठ चुम्बन पाते ही सरला के मुख से गर्म सिसकारी फुट पड़ी....

ससससससहहहहहह ..... आहहहहहहहहह .....सुभम.......
 
Back
Top