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mastram kahani एक अधूरी प्यास.... 2

उसे सुभम ने जिस तरह से नीचे उतार कर उसके होंठों पर होंठ रख कर उसके दोनों दशहरी आम को थाम लिया था इस हरकत की वजह से सरला के मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी थी लेकिन उसकी कर्म सिसकारी शुभम के तन बदन में अत्यधिक कामोत्तेजना का प्रसार कर रही थी... वह पूरी तरह से मदहोश हो गया था वह लगातार सरला के गुलाबी होठों को अपने मुंह में भर कर उसे चूसना शुरू कर दिया था मानव के जैसे उसके होठों पर शहद लगा हो... पहले तो सरला उसे फिर से छुड़ाने की कोशिश कर रही थी लेकिन जिस अंदाज में और शिद्दत से वह सरला के होंठों को चूस रहा था ऐसा लग रहा था मानो वह सरला के: होठों का सारा रस किसी भंवरे की तरह चूस जाएगा.... और सरला भी शुभम के इस चुंबन से पिघलने लगी उसकी जवानी का पारा धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगा और उसका विरोध कम होने लगा शुभम लगातार सरला के होठों को चुसे जा रहा था और दशहरी आम का रस दबा दबा कर निकाले जा रहा था और नीचे से अपने दमदार तंबू की ठोकर सरला की जालीदार पेंटिं पर लगाए जा रहा था जिससे सरला की गुलाबी बुर की बाहरी दीवारें ढहने लगी थी उनमें से रिसाव होना शुरु हो गया था... सरला की पेंटी इतनी अत्यधिक गीली हो चुकी थी कि शुभम को अपने पेंट पर उसके गीले पन का एहसास साफ हो रहा था।... तभी शुभम को एक अलग सा महसूस हुआ जिससे मेवा सरला के गुलाबी होठों को अपने मुंह में लेकर चूस रहा था तभी उसे ऐसा एहसास हुआ कि सरला ने भी उसके मुंह में जीभ डाल कर कुछ सेकंड के लिए चाटना शुरू की थी एहसास शुभम के तन बदन में आग लगा गया.. वह सरला के होंठों को चूसता हुआ ही सरला के चेहरे की तरफ देखा तो सरला आनंद विभोर होकर अपनी आंखों को मूंद ली थी और शुभम के द्वारा होठ चुसाई का भरपूर आनंद लूट रही थी.... शुभम पागल होने लगा वह लगातार सपना के होंठों को चूसता रहा और अपने दोनों हाथ को दशहरी आम पर से हटाकर सरला के पीछे की तरफ ले गया और उसके भारी-भरकम नितंबों को अपनी हथेली में जितना हो सकता था लेकर उसे दबाना शुरू कर दिया इस तरह से नितंब मर्दन की वजह से सरला के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसके मुख से फिर से सिसकारी की आवाज छूटने लगी और इसी पल का फायदा उठाते हुए शुभम उसे अपनी बाहों में दबोचे हुए ही सरला को लेकर बिस्तर पर गिर गया... सरला बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी और शुभम उसके ऊपर चढ़ा हुआ था जो कि बिस्तर पर गिरने की वजह से सरला नेअपनी दोनों टांगों को हल्का सा खोल दी थी जिससे शुभम का पूरा बदन उसके बीचोंबीच आ गया था और इस पोजीशन में शुभम अभी भी सरला के होंठों को चूस रहा था और सरला की टांगों के बीच शुभम अपनी मर्दाना ताकत को रगड़ कर उसे एहसास दिला रहा था कि आज उसे वह सुख देने वाला है जिसके लिए वह बनी है. ‌‌ सरला भी एकाएक इस पोजीशन में आ जाने की वजह से पूरी तरह से उत्तेजना की सागर में डूबती चली जा रही थी यह वह स्थिति थी जब वाकई में एक औरत पीठ के बल लेटी हुई होती है और मर्द उसके ऊपर चढ़कर उसकी टांगे फैला कर उसकी बुर में अपना मर्दाना अंग डालकर उसकी जी भर कर चुदाई करता है अपने आपको उसी स्थिति में पाकर सरला के तन बदन में आग लगने लगी उसकी भी इच्छा हो रही थी कि अपने हाथों से वह अपनी पेंटी उतार कर शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी गुलाबी छेद में लेकर मस्त हो जाए.....लेकिन वह आगे से ऐसी कोई भी हरकत नहीं करना चाहती थी इसलिए अपने आप को शांत रखी....... लेकिन मदहोश पन सरला को पल-पल अपनी आंखों उसमें लिए जा रहा था उसकी आंखों में नशा छाने लगा था और यह नशा किसी शराब का नहीं था यह नशा शराब से भी कहीं ज्यादा असर करने वाला मादकता का नशा था वासना का नशा था ।जिसके आधी नौकर वह पल पल अपने वजूद को मिटा दी जा रही थी अपने आप को बोलती जा रही थी सही गलत के फैसले को समझ सकने की क्षमता होती जा रही थी तभी तो तपती दोपहरी में सरला अपने ही कमरे में अपने ही बिस्तर पर अपने ऊपर अपने बेटे के उम्र के लड़के को लेकर मस्त हुए जा रही थी।
शुभम के प्रगाढ़ चुंबन की वजह से सरला की सांस फूलने लगी थी वह उसे हटाने की कोशिश कर रही थी लेकिन शुभम पर भी मदहोशी का आलम छा चुका था वह पूरी तरह से सरला की मदहोश जवानी की गिरफ्त में आ चुका था .... बार-बार सरला उसे हटाने की कोशिश करती लेकिन शुभम और अत्याधिक कामोत्तेजीत होकर उसके होठों को चूसने लगता.... लेकिन उसे इस बात का आभास हो गया कि चलना की सांस फूल रही थी इसलिए वह अपने होठों की चुंगल से सरला के गुलाबी होठों को आजाद कर दिया लेकिन वह खुद भी बहुत जोर से हो रहा था और जिस तरह से उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी कमर के नीचे वाला भाग अपने आप ऊपर नीचे हो रहा था और वह भी एकदम होले होले मानो ऐसा लग रहा था कि जैसे वह सरला की चुदाई कर रहा और सरला को भी इसका एहसास अच्छी तरह से हो रहा था क्योंकि उसका तंबू उसकी पैंटी के ऊपर लगातार घषृण कर रहा था। सरला भी इस घर्षण का भरपूर आनंद उठा रही थी.... वह हांफते हुए अपनी सांसो को दुरुस्त करते हुए बोली....

औहहह... शुभम तू चला जा यहां से .....यह अच्छी बात नहीं है .....जो तू मेरे साथ ऐसा कर रहा है यह तुझे नहीं करना चाहिए ..... तू मेरे बेटे की उम्र का है और मैं तेरी मां की उम्र की हु....(सरला शर्म के मारे दूसरी तरफ नजर फेरते हुए बोली)

मैं सब कुछ अच्छी तरह से जानता हूं चाची...( शुभम भी अपनी उखड़ती हुई सांसो को दुरुस्त करते हुए बोला।) मैं यह भी जानता हूं कि आप मेरी मम्मी के उम्र की है और मैं आपके बेटे की उम्र का हो लेकिन हम दोनों के बीच जो कुछ भी हो रहा है उसमें आकर्षण और जरूरत भी शामिल है.... एक मर्द का मन एक औरत पर तभी लुभाता है जब उसकी खूबसूरती उसकी आकर्षण बन जाती है और मैं तो पहले भी कह चुका हूं कि इस उमर में तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत मैंने आज तक नहीं देखा तो हम दोनों के बीच उम्र कोई मायने नहीं रखती....

तू समझने की कोशिश नहीं कर रहा है शुभम यह सब गलत है....

अगर चाची सब गलत होता तो मेरी हरकतों की वजह से तुम्हें मजा नहीं आता और अब यह मत कहना कि मुझे मजा नहीं आ रहा था.....
(शुभम की बातें सुनकर सरला उसे सवालिया नजरों से देखने लगी और बोली...)

तुझे किसने कह दिया कि मुझे मजा आ रहा है...?

चाची यह बात आप अपने मुंह से भले ना कहो लेकिन तुम्हारी गीली पैंटी (थोड़ा सा उठकर सरला की पेंटी की तरफ उंगली दिखाते हुए) सब कुछ बयां कर रही है....
(अपनी गीली पैंटी पर नजर जाते ही सरला भी शर्मिंदा हो गई....)

देख सुभम यह सब तो कुदरती है जब औरत को कुछ कुछ होता है तो यह सब बदलाव आते ही हैं....

अब जाकर पकड़ी है चाची... मैं भी तो कब से यही समझा रहा हूं यह सब कुदरती है।.... आपके प्रति मेरा आकर्षण कुदरती है मेरी हरकतों की वजह से तुम्हारे तन बदन में उत्तेजना का उठना अंग अंग में बदलाव आना यह सभी कुदरती है तो क्यों ना हम दोनों कुदरत के आधीन होकर वह सब कर ले जो एक औरत और मर्द करते हैं.....
(शुभम अपनी बातों के जादू में सरला को पूरी तरह से उलझाने की कोशिश कर रहा था और सरला भी शुभम की बयानबाजी से अंदर ही अंदर संतुष्ट नजर आ रही थी लेकिन अब कैसे कह दे कि जो कुछ भी तो कह रहा है सच है वह बार-बार उसे समझाने की कोशिश करते हुए बोली...)

शुभम तो पागल हो गया है तो अगर किसी लड़की को यह कहता तो शायद यह सब सही होता लेकिन तुम मुझे कह रहा है मेरी उम्र देख और तेरी उम्र देख... जमीन आसमान का फर्क है....

लेकिन चाची उम्र में भले ही जमीन आसमान का फर्क है लेकिन हम दोनों के अंगों में किसी भी प्रकार का फर्क नहीं है कुदरत ने जो एक औरत को देना चाहिए था वही आपको भी दिया है और जो मर्द को देना चाहिए था वही अंग मुझे भी दिया है। आपके पास बुर है...(प्यासी नजरों से सरला की पेंटी की तरफ देखते हुए..) और मेरे पास एक दमदार लंड है (अपने मोटे तगड़े लंड को तंबू की शक्ल में उंगली से सरला को दिखाते हुए....सरला तो शुभम के मुंह से इस तरह के खुले शब्द सुनकर एकदम से उत्तेजना के मारे गनगना गई.....शुभम के मुंह से लंड बुर खुले शब्दों में सुनकर उसकी बुर कचोरी की तरह फुल गई.... और उसकी निगाह शुभम के तंबू पर कुछ सेकंड के लिए जम गई तने हुए तंबू को देखकर सरला के तन बदन में हलचल पैदा होने लगी ... सरला की दोनों दशहरी आम हिलोरे मारने लगे....

यह कैसी बातें कर रहा है तो तुझे शर्म नहीं आ रही है इस तरह से खुले शब्दों में मेरे सामने बोल रहा है (सरला शर्मा के मारे फिर से दूसरी तरफ नजर खेलते हुए बोली ‌)

शर्म कैसी चाची... अभी अभी आप ही तो कह रही थी यह सब कुदरती है कुदरत का ही दिया हुआ है तो कुदरती रूप से जो इसमें बदलाव आ रहे हैं उसे हम रोक तो नहीं सकते...(. पेंट के ऊपर से जानबूझकर अपने लंड को मसलते हुए) यह आपकी अच्छी तरह से जानती है कि कुदरती रूप से ही आपकी खूबसूरत जवानी मदमस्त बदन देखकर ही मेरा लंड खड़ा हुआ है ....(शुभम की यह बात सुनकर सरला ना चाहते हुए भी एक बार फिर से नजर घुमाकर शुभम के तंबू को देखने लगी जो कि शुभम इस तरह उसके सामने बेशर्म की तरह मसल रहा था...यह देखकर उत्तेजना के मारे सरला का गला सूखने लगा और वह फिर से अपनी नजर फेर ली उसे शर्मिंदगी का अहसास हो रहा था लेकिन अंदर ही अंदर जी भर कर शुभम के पेंट में तना हुआ उसका मुसल देखने की इच्छा हो रही थी....)

शुभम यह सब कहना ठीक नहीं है तू एक अच्छा लड़का है पढ़ा लिखा है तेरा भविष्य अच्छा है अभी से यह सब के चक्कर में पड़कर अपना वापस खराब कर लेगा....

चाची में एक बात कहूं मुझे भविष्य की बिल्कुल भी फिकर नहीं है मैं तो वर्तमान में मानता हूं और इस समय मेरी आंखों के सामने आप जैसी खूबसूरत औरत बिस्तर पर अधनंगी लेटी हुई है... अगर मैं अपने संस्कार की वजह से अपनी मर्यादा को देखते हुए नजर फेर कर इस कमरे से चला जाता हूं तो आपके द्वारा मिलने वाला अद्भुत सुख खो देता हूं और आपको इस तरह से प्यासा छोड़ कर जाने से भी मुझे पाप लगेगा.....

तुझे यह किसने कहा कि मैं प्यासी हूं....( शुभम की बात सुनकर चाटते हुए सरला बोली)

चाची शब्द झूठे हो सकते हैं लेकिन जो इस समय मेरी आंखें देख रही है वह झूठी नहीं हो सकती....(शुभम उसी तरह से अपने लंड को पेंट के ऊपर से मसलते हुए सरला की टांगों के बीच की गीली पैंटी को देखते हुए बोला..(

क्या क्या.... क्या क.....देख रहे तेरी आंखें....?

मेरी आंखें साफ देख रही है कि तुम्हारी बुर पानी छोड़ रही है ....(शुभम एकदम खुले शब्दों में एकदम बेशर्म बनता हुआ बोला)

हे भगवान कितना हरामी लड़का है रे तू मैं तुझे कितना अच्छा समझती थी लेकिन तु बहुत ही ज्यादा हरामी है कोई इस तरह से मेरी उम्र की औरत को बोलता है और चल गईली है तो क्या हुआ इससे क्या मैं प्यासी हो गई...(सरला को भी अब इस तरह की अश्लील बातें करने में मजा आ रही थी वह जानबूझकर गुस्से का नाटक करते हुए शुभम से बोल रही थी...)

चाची सही बताऊ तो मे हरामी नहीं हूं ना तो मैं हारामी टाइप का लड़का हूं मैं बस खूबसूरती का दीवाना और इस समय मैं आपकी खूबसूरती का दीवाना हो गया हूं और रही बात प्यास की तो मैं सही कह रहा हूं कि आप इस समय प्यासी है।मैं आपसे पहले भी कह चुका हूं कि औरतों के बारे में मुझे बहुत ज्यादा ज्ञान है और मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि इस तरह से आपकी बुर् का पानी छोड़ना सामान्य नहीं है यह कुदरती है और आप अच्छी तरह से जानती है कि बुर पानी कब छोड़ती है...?

कब छोड़ती है....?(सरला भी शुभम के रंग में रंगने लगी थी इसलिए उसकी आंखों में आंखें डाल कर थोड़ा सा शर्मिंदगी का अहसास लिए बोली)

औरतों की बुर पानी तब छोड़ती है जब वह एकदम चुदवासी हो जाती है जब उन्हें अपनी बुर के अंदर मोटे तगड़े लंड की चाहत होने लगती है....

छी.... छी.... कितनी गंदी बातें करता है तू.... अब मैं तेरी एक नहीं सुनने वाली तू चला जा यहां से.... (इतना कहते हुए वह बिस्तर से खड़ी होने लगी) अगर किसी को इस बात की भनक भी लग गई कि इतनी दोपहर में तू मेरे साथ और वह भी इस अवस्था में है तो गजब हो जाएगा मैं तो बदनाम हो जाऊंगी तू चला जा यहां से.. (इतना कहने के साथ ही वह फिर से खड़ी हो गई.... लेकिन उसके ठीक है आगे शुभम खड़ा था और उसके खड़े होने के साथ ही शुभम एक कदम आगे बढ़कर उसे अपनी बाहों में कस लिया और उसकी आंखों में आंखें डाल कर देखते हुए बोला...)

चाची किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा मैं आपके कमरे में हूं इसकी भनक किसी को कानों कान तक नहीं होगी हां लेकिन अगर आपको मजा नहीं आ रहा है अच्छा नहीं लग रहा है तो मैं अभी इसी वक्त चला जाऊंगा....(इतना कहने के साथ ही शुभम अपने दोनों हाथ को एक बार फिर से नीचे की तरफ ले जाकर सरला के बड़े-बड़े नेताओं को अपने दोनों हथेलियों में दबाकर अपनी तरफ खींचा जिससे उसके पेंट में बना तंबू सीधे उसकी पेंटी से टकराने लगा और उसके बुर के ऊपरी सतह पर घर्षण करने लगा ....वह कुछ देर तक ऐसे ही अपने लंड की रगड़ उसकी बुर को देता रहा जिससे उसकी बुर पुरी तरह से गर्मा गई.... एक बार फिर से उसके चेहरे के हाव-भाव बदलने लगा उसकी सांसे भारी होने लगी और शुभम को इसी पल का इंतजार था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि लोहा गरम होने पर ही हथोड़ा मारना उचित होता है और तब भी वह बोला.....)
Sarla or Shubham



क्या कहती हो चाची कहो तो मैं चला जाऊं...(सरला की बड़ी बड़ी गांड को अपनी हथेली में भर कर मसलते हुए) और कहो तो मे रुक जाऊ आप की प्यास बुझाने के लिए.....मेरा लंड पूरी तरह से तैयार है आपके बुर में घुसने के लिए और सच कहूं तो चाची तुम्हारी बुर भी मचल रही है मेरे लंड को अपने अंदर लेने के लिए (शुभम जानबूझकर इस तरह की भाषा का प्रयोग करके उसे मादकता की गर्मी प्रदान कर रहा था और इसका असर उसके दिलो-दिमाग पर बुरी तरह हो रहा था वह भी अब जल्द से जल्द शुभम के लंड को अपनी बुर के अंदर ले लेना चाहती थी लेकिन कुछ बोल नहीं पा रही थी एक बार फिर से पूछे जाने पर सरला को कोई जवाब नहीं सूझा तो वह बोली...)

मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है शुभम....( उत्तेजना के मारे थुक को अपने गले में निगलते हुए बोली।)

तो चाची ऐसा करिए कि आप कुछ मत कहिए जो होता है हो जाने दो मुझे अपने अंदर समा जाने दो मैं भी देखना चाहता हूं कि आपके उम्र की औरत के बदन की गर्मी मेरे जैसे जवान लड़के को कितनी देर में पिघला देती है...

(शुभम की यह बात सुनकर सरला अंदर ही अंदर प्रसन्न होने लगी क्योंकि उसकी यह बात से पता चल रहा था कि शुभम इस उम्र में भी उसका पूरी तरह से दीवाना हो चुका था और वह भी मचल रही थी शुभम की मर्दाना ताकत को महसूस करने के लिए और वह भी बरसों के बाद इसलिए उसकी चाहत को ज्यादा ही बढ़ती जा रही थी वह कुछ बोल नहीं पाई बस मूर्ति की तरह खड़ी रही अब सारा काम शुभम को यह करना था उसे खुद अपनी मंजिल पर पहुंचना था इसलिए वह मौके की नजाकत को समझते हुए और ज्यादा वक्त ना गंवाते हुए इस बार अपने होंठ को सरला के गुलाबी होठ पर ले जाने के बजाय सरला की मदमस्त दशहरी आम की चॉकलेटी निप्पल पर लेकर आओ और उसे मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया... सरला के लिए कोई विकल्प नहीं बचा था क्योंकि उसकी चूची को मुंह में लेते हैं सरला का अंग अंग फुदकने लगा....अच्छी तरह से जानती थी कि इतनी तपती दोपहरी में किसी को क्या पड़ी है एक दूसरे के घर में झांकने के लिए और वैसे भी इस वक्त उसकी बहू घर पर नहीं थे इसलिए उसके लिए भी यह सुनहरा मौका था इसलिए वह भी यही सोचे कि जो होता है हो जाने दो और जो होगा देखा जाएगा जिंदगी का मजा लूटा जाए इसलिए वह शुभम को कुछ बोली नहीं लेकिन उसकी हरकत की वजह से उसके मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी.. शुभम एक हाथ से सरला की मदमस्त सूची को मसलते हुए दूसरी चूची को मुंह में लेकर अमूल दूध की तरह पीना शुरू कर दिया था... बरसों के बाद कोई हटीला मर्द था जो सरला की चूची को मुंह में लेकर पी रहा था और उसे उसकी जवानी याद दिला रहा था इसलिए इस पल को जी लेने के लिए वह शुभम की आगोश में समाती जा रही थी....
शुभम की मदहोश हरकतों की वजह से सरला चारों खाने चित हो गई थी शुभम उसकी मदमस्त चुचियों का आनंद लूटते हुए उसे एक बार फिर से बिस्तर पर पीठ के बल लेटा दिया और दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर बारी-बारी से दशहरी आम की तरह उसके मधुर रस को पीना शुरु कर दिया। पल भर में ही उत्तेजना के असर में सरला की दशहरी आम हापुस आम की तरह कड़क हो गई जिसका आनंद शुभम दबा दबा कर और उसे मुंह में भर कर पीकर ले रहा था और सरला शुभम को पीला कर ले रही थी।

पल भर में कमरे का दृश्य एकदम मादक हो गया ऐसा लग रहा था मानो कोई पॉर्न मूवी चल रही हो... शुभम के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारियां फूट रही थी और यही हाल सरला का भी था उम्र के इस पड़ाव पर उसका खूबसूरत बदन उसे इतना ज्यादा आनंद देगा इस बारे में उसने कभी कल्पना नहीं की थी इस समय वह पीठ के बल चित लेटी हुई थी अपने नर्म नर्म बिस्तर पर अपने ऊपर शुभम को लेकर वह जवानी का मजा लूट रही थी बरसों के बाद किसी मर्द ने उसकी मद मस्त चूचियों को मुंह में लेकर पीना शुरू किया था...शुभम समझ गया था कि अब सरला के पास किसी भी प्रकार का कोई भी विकल्प नहीं बचा है वह उसकी मदहोश जवानी को अपने काबू में कर पाने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए शुभम की मर्दाना ताकत के अधीन होकर जवानी का मजा लूट रही थी.....शुभम उसकी टांगों के बीचो बीच लेटकर अपनी मर्दाना ताकत का एहसास उसकी टांगों के बीच के उस नरम नरम अंग पर महसूस करा कर.... सरला को पूरी तरह से अपनी आगोश में ले चुका था शुभम स्वर्ग का सुख भोगते हुए सरला की खूबसूरत बदन से खेल रहा था सरला के दोनों दशहरी आम बारी-बारी से शुभम के मुंह में जाकर अपना स्वाद चखा रहे थे शुभम को इस कार्य में बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी हालांकि उसने अब तक बहुत ही खूबसूरत कबूतरों को अपनी हथेली में भरकर उसे मुंह में लेकर मस्ती भरे पल का मजा ले चुका था लेकिन आज कपल और आज के दोनों फुदकते हुए कबूतर शुभम को अपनी दूसरी ही कहानी कह रहे थे जिसमें शुभम को मजा आ रहा था.... सरला के मुख से लगातार गर्म सिसकारी की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी और शुभम था कि सरला के खूबसूरत आम को जोर-जोर से दबाकर लाल टमाटर कर दिया था..... सरला भी इस तरह के स्तन मर्दन का अनुभव पहली बार ले रही थी शुभम जिस तरह से सरगोशी से ताकत लगाकर सरला की चुचियों को दबा रहा था सरला को इस तरह से स्तन मर्दन करवाने का यह पहला अनुभव था जिसमें वह पूरी तरह से डूबती चली जा रही थी....

सससहहहहहहह... औ सुभम ये क्या कर रहा है तू मुझे कुछ-कुछ हो रहा है....

मैं जानता हूं चाची कि आपको मजा आ रहा है तभी तो आपको कुछ कुछ हो रहा है इससे भी ज्यादा मजा आएगा बस आप इसी तरह से मजा लेते रहो....(इतना कहने के साथ ही शुभम फिर से चला कि दोनों दशहरी आम पर टूट पड़ा...)

आहहहहहहह .... दर्द होता है....(सरला मुंह बनाते हुए बोली)

चाची यह दर्द का एहसास ही आप को जन्नत का मजा देगा....

धत्..... तू बातें बहुत बनाता है बस अब बहुत हो गया अब तु चला जा यहां से.....(सरला यह बात ही ऊपरी मन से बोल रही थी इस बात का एहसास शुभम को अच्छी तरह से था.... क्योंकि अब वह वह अपने ऊपर लेटे शुभम को हटाने की कोशिश भी नहीं कर रही थी बस मुंह से ही बोल रही थी...)

चला जाऊंगा चाची बस एक बार अपनी मदहोश कर देने वाली मदमस्त जवानी की आगोश में मेरी मचलती जवानी को खेलने दो....

नहीं नहीं सुभम तू यहां से चला जा नहीं तो मैं तेरी मम्मी से बता दूंगी....

क्या बताओगी चाची क्या कहोगी. ‌ ... जरा सोचो आप जैसी संस्कारी औरत कभी अपने मुंह से कह पाए कि कि तुम्हारा बेटा मुझे झूठ नहीं आया था क्या आप इतने गंदे शब्द अपने होंठ पर ला सकते हैं क्या अपनी जबान से यह कह सकती हो कि शुभम मेरी मदमस्त चुचियों को मुंह में लेकर पी रहा था (यह कहते हुए शुभम फिर से सरला के लाजवाब निप्पल को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया... एक बार फिर से सरला के तन बदन में आग लग गई उसका अंग-अंग पिघलने लगा...)

सससहहहहहहह.... शुभम मैं शायद तेरी मम्मी से ऐसा बोल नहीं पाऊं लेकिन जो कुछ भी तू कर रहा है मुझे शर्म आ रही है.....

शर्म कैसी चाची है तो औरतों का हक है जैसे धूप लगती है जैसे बदन को भी भूख लगती है... तुम्हारी इस ....(एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर पैंटी के ऊपर से ही बुर को टटोलते हुए) बुर को भी भूख लगती है और वह कैसी लंड़ की जो कि मैं आपकी भूख मिटा सकता हूं.. ‌क्योंकि मेरे पास मोटा तगड़ा लेंगे जो कि आपकी बुर में बराबर समा जाएगा और आप को जन्नत का मजा देगा....

(शुभम की यह अश्लील बहुत ही ज्यादा गंदी बात सुनकर सरला शर्म से पानी पानी हो गई..)

शुभम तो कितना गंदा है रे कैसी कैसी बातें कर रहा है....

मैं जो कुछ भी कह रहा हूं चाची बिल्कुल सही कह रहा हूं आप देखना मैं आपको ऐसा सुख दूंगा कि आप तृप्त हो जाओगी...(इतना कहने के साथ है यह शुभम सरला के दोनों कबूतर को अपनी हथेली की गिरफ्त से आजाद कर दिया. . शुभम की गिरफ्त से आजाद होते हैं सरला की दशहरी आम दोनों पानी भरे गुब्बारे की तरह लहराने लगे वाकई में सरला कीमत मस्त चूचियों को देख कर किसी का भी लंड पानी फेंक दे....)

Sarla ki lete huye

नहीं सुभम पास यहीं पर रुक जा अभी से आकर पढ़ने की ना तो मेरे में हिम्मत है और ना ही मैं चाहती हूं कि तू आगे बढे...

(सरला ऊपरी मन से केवल दिखावा कर रही थी... शुभम अच्छी तरह से जानता था औरतों के अंगों में उनके चेहरे पर आए भाव को अब वह अच्छी तरह से पहचान चुका था सरला के बदलते हाव भाव को देखकर शुभम अच्छी तरह से समझता था कि जितना उसे बुर की तरह है उससे कहीं ज्यादा सरला को उसके मोटी तक में लंड की आग सुलगा रही है। शुभम अब सरला की बात पर बिल्कुल भी ध्यान देना नहीं चाहता था वह आगे बढ़ना चाहता था इसलिए बिस्तर पर बैठ गया था और अपनी उंगलियों के पोरों से सरला के खूबसूरत करो चिकनी पेट पर फिर आकर उसे मस्ती के आलम में लिए जा रहा था.... सरला की कीले पेंटी शुभम की आंखों के सामने थी जिसे देख कर उसके पैंट में गदर मच रहा था। ऐसे हाल और ऐसे माहौल में शुभम क्या कोई भी मर्द अपने आप पर काबू कर सकने में असमर्थ ही होता है यह पल पीछे जाने के लिए नहीं बल्कि आगे बढ़ने के लिए होता है.... और शुभम शर्मा के मदन रस से भीगी हुई पेंटी को देखकर अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और अपना हाथ आगे बढ़ाकर उंगलियों के पोरों से बुर की ऊपरी सतह को स्पर्श करने लगा..... शुभम की मर्दाना उंगलियों को अपनी बुर परमहसूस करते ही सरला के मुख से फिर से गर्म सिसकारी फूट पड़ी और वह शर्म के मारे दूसरी तरफ अपना मुंह घुमा ली सरला की हरकत देखकर शुभम समझ गया कि उसके लिए रास्ता एकदम साफ हो चुका है और वह बिना रुके आगे बढ़ने की ठान लिया और वैसे भी जवानी के टेढ़े मेढे पथ पर रुका नहीं जाता बल्कि आगे बढ़ता ही चले जाना एक असली मर्द की मर्दानगी की निशानी होती है.... उसे बंद देखते ही देखते अपने देखते हुए होंठ को सरला की गहरी नाभि मे घुसा कर चाटना शुरू कर दिया और एक हाथ को धीरे से पेट के नीचे की तरफ ले जाकर उसे धीरे-धीरे पेंटी के अंदर सरकाना शुरु कर दिया....

सरला अपने ऊपर दोहरा आक्रमण सहन नहीं कर पा रही थी... एक तो जिंदगी में पहली बार कोई मर्द उसकी गहरी नाभि पर इस तरह से लालायित हुआ था उसे मुंह में भरकर चाट रहा था इससे वह पूरी तरह से कसमसाने लगी.... और दूसरी तरफ शुभम की सरकती हुई उंगलियां पेंटी के अंदर हलचल मचाई हुई थी।। देखते ही देखते शुभम अपनी उंगलियों की गिरफ्त में सलाह के मदमस्त जवानी से भरपूर गुलाबी पंखुड़ियों से सुशोभित बुर को लेकर सहलाना और मसलना शुरू कर दिया.... अब सरला के बस में कुछ भी नहीं था... वह उत्तेजना के मारे बिस्तर पर छटपटा रही थी ‌‌.... देखते ही देखते शुभम की उंगलियां सरला के मदन रस में भीगने लगी... वह जोर-जोर से पेंटी के अंदर हाथ डालकर सरला की बुर को मसलना शुरू कर दिया था जिससे सरला की हालत खराब होते जा रही थी... वह पूरी तरह से बिस्तर पर छटपटा रही थी मानो किसी मछली को जल्द से बाहर जमीन पर रख दिया गया हो।
Shubham ki sawari karti huyi sarla

औहहहहहह.... शुभम .. ।।औ सुभम मुझे कुछ हो रहा है मैं मर जाऊंगी ....मुझे बचा ले.... मुझे संभाल यह मुझे क्या हो रहा है।

सरला की यह बातें सुनकर मानो शुभम को इसी पल का बेसब्री से इंतजार था.... वह अच्छी तरह से समझ गया था कि सरला पूरी तरह से गर्म हो चुकी है.... और वह तुरंत अपनी दिशा बदल कर बिस्तर के नीचे उतर गया और सरला के पैंटी को दोनों हाथों से पकड़कर उसे एक झटके में नीचे खींचने की कोशिश किया लेकिन....सरला की भारी-भरकम गांड के भजन की वजह से पेंटी नीचे की तरफ नहीं सरक पाई लेकिन घड़ी के छठवे भाग में ही जैसे सरला को इस बात का अंदाजा हो गया कि शुभम उसकी पेंटी उतारना चाहता है इसलिए सरला ना चाहते हुए भी अपने आप ही उसकी मदमस्त खूबसूरत भारी-भरकम गांड खुद-ब-खुद हल्के से ऊपर की तरफ उठ गई....और मौके की नजाकत को समझते हुए शुभम तुरंत सरला की पेंटी को नीचे की तरफ खींच लिया और उसके खूबसूरत पैरों में से बाहर निकाल कर उसे फर्स पर फेंक दिया....पल भर में ही साला बिस्तर पर एकदम नंगी हो गई शुभम की आंखों के सामने एक खूबसूरत औरत उम्र के इस पड़ाव पर अपनी खूबसूरती बिखेरते हुए एकदम नंगी पड़ी हुई थी ....सरला को इस बात का आभास हो गया कि वह शुभम की आंखों के सामने एकदम नंगी पड़ी है सरला को भी अपनी इस हरकत पर बेहद आश्चर्य हुआ कि वह कैसे अपनी गांड को ऊपर उठाकर उसका सहकार करने लगी.... वह अपने बेटे के उम्र के लड़के के सामने बेहद शर्मिंदगी महसूस कर रही थी और अपनी नजरों को छुपाने की कोशिश कर रही थी और दूसरी तरफ शुभम सरला जो कि उसकी मां की उम्र की औरत थी उसके अंदर सुख ढूंढने की कोशिश करते हुए उसकी दोनों टांगों अपने हाथों से पकड़कर फैला दिया अब इसकी आंखों के सामने हल्के हल्के रेशमी मुलायम बालों से गिरी हुई गुलाबी पत्ती से सुशोभित सरला की बुर उसे आमंत्रण दे रही थी... और शुभम इस आमंत्रण से इनकार नहीं कर पाया और देखते ही देखते उसके होंठ सरला की दोनों टांगों के बीच आ गया जैसे ही सरला ने अपनी दहकती हुई बुर पर शुभम के होंठ का स्पर्श का अनुभव कि उसका पूरा बदन एक अजीब से सुख की झनझनाहट में पूरी तरह से मचलने लगा एक पल के लिए तो उसे इस बात पर विश्वास ही नहीं हुआ कि जिस पल का वह अनुभव कर रही है वह पल हकीकत में वह जी रही हैं उसे सब कुछ अपना सा लग रहा था .. लेकिन हल्की सी गर्दन को ऊपर उठाकर जैसे ही अपनी टांगों के बीच नजर घुमाई तो उधर का नजारा देखकर वह पूरी तरह से मस्त हो गई उसकी आंखों के सामने ही शुभम उसकी मदमस्त रसीली मदन रस से भरी हुई बुर को अपने जीभ से चाट रहा था....

आहहहहहहह ..... शुभम यह क्या कर रहा है इतना गंदा काम है....( सरला यह बात अपने ऊपर मन से कह दो रही थी लेकिन शुभम को हटने के लिए बिल्कुल भी हिदायत नहीं दे रही थी।) भगवान के लिए ऐसा मत कर कितना गंदा काम कर रहा है तु क्या कोई ऐसा भी करता है.....

क्यों नहीं चाची ( शुभम अपनी ऊखड़ती हुई सांसो को दुरुस्त करते हुए) क्या आपने कभी ऐसा अनुभव नहीं लि ......

मेरी सुहागरात की रात को तेरे चाचा ने बिल्कुल तेरे जैसे ही हरकत की थी लेकिन मैं बिल्कुल भी तैयार नहीं थी मुझे यह बिल्कुल गंदा लग रहा था और मैं तेरे चाचा को इनकार कर दी और उन्हें अपनी कसम दे दी कि आइंदा इस तरह की हरकत ना करें और तब से तेरे चाचा ने दोबारा यह हरकत कभी मेरे साथ नहीं किया....

चाची आप बिल्कुल पागल हो आप नहीं जानती कि इसमें मर्दों के साथ-साथ औरतों को कितना सुख मिलता है। जब एक मर्द अपनी जीभ से औरत की बुर को चाटता है तो औरत एकदम मस्त हो जाती है...सच कहूं तो चाची किसी किसी औरत को तो चुदवाने से ज्यादा चटवाने में मजा आता है....

धत कभी क्या ऐसा होता है मुझे तो बहुत गंदा लगता है....(सरला भी इस अनुभव का बेहद आनंद लेना चाहती थी लेकिन फिर भी अपनी तरफ से नाराजगी दर्शा रही थी..)

मेरी बात मानो चाची मैं पहले ही कह चुका हूं कि उर्दू के बारे में मैं बहुत कुछ जानता हूं इसलिए बस आप आंखें बंद करके मजा लीजिए ...(और इतना कहने के साथ ही शुभम एक बार फिर से सरला की बुर्के गुलाबी पत्तियों को अपने मुंह में लेकर उसे चूसना शुरू कर दिया... शुभम के कहे अनुसार पल भर में ही सरला को तारे नजर आने लगे उसने ऐसा सुख कभी भी महसूस नहीं की थी उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि इस तरह से बुर चटवाने में मजा आता है ..... उसके मुख से लगातार गर्म सिसकारी फूट रही थी जो कि पूरे कमरे के माहौल को मादक बना रही थी। पल भर में ही वह बिस्तर पर जल बिन मछली की तरह छटपटा रही थी रह रहे कर उसकी पूरी से पानी का फव्वारा फूट रहा था... ना चाहते हुए भी उसके मुख से कर्म सिसकारी की आवाज के साथ साथ गंदी गंदी बातें निकलने लगी।

औहहहह सुभम यह क्या कर रहा है हरामजादे मैं तुझे कितना अच्छा लड़का समझ रही थी... । लेकिन तू तो... आज्हहहहहह.... तूने मुझे मस्त कर दिया मैं .... ऊममममममम.....कभी सोच भी नहीं सकती थी कि बुर चटवाने में इतना मजा आता है ऐसे ही चाट ....चाटता रह मुझे बहुत मजा आ रहा है अपनी जीभ डाल डाल कर चाट आहहहहहहहह ...सुभम ....

सरला की बातें सुनकर शुभम पूरी तरह से गर्म हो गया वह जानता था कि हथोड़ा का वार लोहे पर तभी करना चाहिए जब लोहा पूरी तरह से गर्म हो जाए और इस समय लोहा पूरी तरह से गर्म हो चुका था वह जानता था कि आप हथौड़े का प्रहार करना बहुत जरूरी है....इसलिए देखते ही देखते सरला की आंखों के सामने शुभम अपने सारे कपड़े निकाल कर एकदम नंगा हो गया और सरला की आंखों के सामने शुभम का झूलता हुआ मोटा तगड़ा लंड कहर ढा रहा था....सरला ने जिंदगी में इस तरह का मोटा तगड़ा और मर्दाना ताकत से भरपूर लंड का दर्शन कभी नहीं कि थी...इसलिए शुभम की टांगों के बीच खड़े लंड को देखकर वह पूरी तरह से भौंचक्की रह गई उसका मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया.....

बाप रे बाप इतना बड़ा......

तो क्या चाची मुझे ऐरा गेरा समझी थी क्या..... एक बार जिसकी बुर में जाता है...(अपने लंड को जोर-जोर से ऊपर नीचे करके हीलाते हुए) उसे पूरी तरह से अपना दीवाना बना लेता है अब देखना मैं कैसे तुम्हें अपना दीवाना बनाता हूं.....(इतना कहने के साथ ही शुभम अपने लंड को हिलाते हुए आगे बढ़ा...और सरला की सांसे तिरुपति से चलने लगी थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि आप सुबह में का मोटा लंड उसकी बुर में जाने वाला है लेकिन उसकी मोटाई देखकर उसके माथे पर पसीना आ रहा था लेकिन उत्सुकता भी बरकरार थे वह भी जिंदगी में पहली बार मोटी तगड़ी लंड से चुदने का अनुभव लेना चाहती थी....और देखते ही देखते शुभम उसकी दोनों टांगों के बीच आ गया सुकून भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बुर वर्षों से छोटे से लंड को भी अपने अंदर नहीं लिए इसलिए उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी कसी हुई बुर के लिए कुछ ज्यादा ही मोटा नजर आ रहा था... इसलिए ढेर सारा थूक लगाकर वह अपने लंड को पूरी तरह से चिकना कर लिया और एक तकिया सरला की गांड के नीचे लगाकर उसे थोड़ा हल्के से ऊपर कर लिया और अपनी मोटे तगड़े लंड की सुपाड़े को गुलाबी पत्तियों के बीच टीकाकर हल्के से धक्का लगाया और अगले ही पल लंड का मोटा सुपाड़ा बुर में उतर गया.... सरला की सांसे तेज चलने लगी उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी बरसों के बाद उसकी बुर्का एक बार फिर से उद्घाटन हुआ था शुभम के मोटे तगड़े लंड के सुपाड़े को अपनी बुर में महसूस करके वह मस्त हुए जा रही थी.... उत्तेजना के मारे उसका गला सूखने लगा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि शुभम अपना मोटा तगड़ा लंड उसकी कसी हुई बुर में डाल देगा... इसलिए सरला एक बार अपनी शंका का समाधान ढूंढने के लिए शुभम से बोली....

आहहहहहहह .... शुभम बहुत मोटा है....

आप चिंता मत करो चाची मैं संभाल लूंगा।...
(और इतना कहने के साथ ही शुभम सरला की सभी चिंताओं को दूर करते हुए धीरे-धीरे अपने मोटे तगड़े लंड को हल्के हल्के धक्के लगा कर इंच दर इंच बुर में सरकाने लगा...जैसे-जैसे शुभम का मोटा तगड़ा लंड बुर की गहराई में जा रहा था वैसे वैसे सरला के चेहरे का भाव दर्द के कारण बदलता जा रहा था उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच कर भी एक नौजवान लड़के के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में लेकर उसे दर्द महसूस हो रहा था इस बात के एहसास से ही शुभम को गर्व अनुभव हो रहा था। ... शुभम की भी सांसें उखड़ रही थी वह भी एक नई दुनिया का अनुभव कर रहा था वह जैसे जैसे अपने लंड को सरला की बुर की गहराई में उतार रहा था वैसे वैसे उसे एक अद्भुत आनंद की अनुभूति हो रही थी...
जितना लंड सरला की बुर में घुसा हुआ था सरला को यह भी अधिक लग रहा था इस बार शुभम कचकचा कर धक्का लगाया और शुभम का मोटा तगड़ा लंड बुर के अंदर की सारी अड़चनों को दूर करता हुआ ... बुर की गहराई में उतर गया...
इस तरह से एकाएक हुए प्रहार से वह पूरी तरह से आहत हो गई... वह दर्द से बिलबिला उठी उसे उम्मीद नहीं था कि शुभम इस तरह से जोर लगा देगा... उसका मुंह दर्द से खुला का खुला रह गया वह अपनी बुर की गहराई में शुभम के मोटे तगड़े लंड को अच्छी तरह से महसूस कर रही थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी.... सरला मछली की तरह तड़प रही थी उससे रहा नहीं जा रहा था उससे शुभम के मोटे लंड की घर्षण अपनी बुर की गहराई अपने बुर की दीवारों पर सहन नहीं हो रही थी...

शुभम तु निकाल.... निकालो अपने लंड को मुझे बहुत दर्द हो रहा है मुझसे रहा नहीं जा रहा है..... मुझे कुछ हो जाएगा....(सरला दर्द से बिलबिला रही थी उसे बार-बार अपना लंड बाहर निकालने के लिए बोल रही थी लेकिन शुरू अच्छी तरह से जानता था कि एक बार लैंड दूर से बाहर आ गया तो सुभम उसे दोबारा सरला की बुर में नहीं डाल पाएगा... इसलिए वह शर्मा का ध्यान भटकाते हुए बोला...)

कुछ नहीं होगा क्या चीज मुझ पर भरोसा रखो जब मैं आपको मंजिल के इतने करीब ला सकता हूं तो आप को मंजिल तक पहुंचा भी सकता हूं बस मेरे पर भरोसा रखिए (और इतना कहने के साथ ही शुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर एक बार फिर से चला के दोनों दशहरी आम को अपने हाथों में थाम लिया। और उसे फिर से दबाना शुरू कर दिया एक बार सरला फिर से मस्त होने लगी उसके बदन में फिर से जवानी फूटने लगे थोड़ी ही देर में सरला को महसूस होने लगा कि शुभम अपनी कमर हिलाते हुए उसे चोदना शुरू कर दिया है लेकिन उसे दर्द नहीं बल्कि मजा आ रहा है और देखते ही देखते वह पूरी तरह से आनंदित होने लगी..शुभम हल्के हल्के अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए सरला को चोद रहा था एक अद्भुत नजारा पूरे कमरे को मादक बना रहा था सरला पूरी तरह से नंगी अपने बिस्तर पर लेटी अपने बेटे की उम्र के लड़के से चुदवाने का मजा लूट रही थी... और शुभम अपने ही पड़ोस में विजयी झंडा लहरा रहा था।
Shubham k sath mast hoti huyi sarla

सरला को मजा आ रहा था और सुबह में एक बार फिर से अपनी कामयाबी पर मंद मंद मुस्कुराते हुए धक्के पर धक्के लगा रहा था उसकी कमर की हलचल कुछ ज्यादा ही गतिमान हो गई वह इतनी जोर जोर से कमर हिलाना शुरू कर दिया कि पलंग चरमराने लगी.... शुभम पूरी तरह से सरला के ऊपर छा जाना चाहता था यह अपने पहले संभोग के असर में पूरी तरह से उसे नहला देना चाहता था ताकि वह उसकी दीवानी हो जाए और वह उसके ऊपर झुककर बारी-बारी से दोनों चूचियों को मुंह में भर भर कर पीना शुरू कर दिया जिससे सरला को और ज्यादा मजा आने लगा सरला को आनंद की अनुभूति इतनी ज्यादा हो रही थी कि वह शुभम को अपनी बाहों में लेकर उसे सहला रही थी और अपने दोनों हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर शुभम के नितंब को दबा दबा कर उसका जोश बढ़ा रही थी।
औरतों के साथ रासलीला मैं काबिल और माहिर होने के बावजूद भी सरला की मदमस्त जवानी और उसकी हरकतों की वजह से इस बार शुभम ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया लेकिन जब तक जितना भी टीका उतने में ही सरला का काम तमाम हो चुका था
एक बार शुभम चढ़ा था लेकिन दो बार सरला को झाड़ चुका था... सरला की सांसें उखड़ रही थी जिंदगी में पहली बार वह चुदाई की तृप्ति का अहसास और सुख भोग रही थी।
और शुभम गहरी गहरी सांस लेता हुआ सरला पर पसर गया था।
 
सरला की आंखें बंद थी गुलाबी होंठ खुले के खुले रह गए थे और मुंह में से गर्म आहें रह रह कर बाहर आ रही थी.... और शुभम सरला की मदमस्त गुब्बारे जैसी गोल जवानी पर सर रखकर गहरी सांस ले रहा था और उसका लंड अभी भी सरला की बुर के अंदर अपनी जवानी का सैलाब उगल रहा था ‌ .... रह-रहकर शुभम की कमर लहरा उठती थी...
शुभम को उम्मीद तो बिल्कुल भी नहीं थी कि सरला जैसी उम्र दराज औरत उससे चुद पाएगी उसके नीचे होगी लेकिन उसे अपनी मर्दानगी पर पूरा विश्वास था कि एक बार उसका मोटा तगड़ा लंड का दीदार करने के बाद सरला अपने आपको रोक भी नहीं पाएगी और वही हुआ ..सरला अपने बेटे की उम्र के जवान लड़के के साथ संभोग सुख का आनंद लेकर एक दम मस्त हो चुकी थी तृप्ति का अहसास क्या होता है जिंदगी में आज पहली बार उसे इसका अनुभव हुआ था और इस अनुभव के साथ वह बेहद खुश नजर आ रही थी उसके चेहरे की लालिमा साफ बयां कर रही थी कि आज अपने ही कमरे में अपने ही बेटे के उम्र के लड़के के साथ चुदाई करवाई उसे जरा भी झिझक एहसास नहीं हुआ बल्कि उसे मजा ही मजा आया था.. गहरी सांसे लेते हुए सरला शुभम की नंगी पीठ सहला रही थी और शुभम रूई जैसी मुलायम को तो आज चुचियों पर सिर रखकर गरम आहें भर रहा था।
दोनों के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव साफ नजर आ रहे थे सरला की चुदाई करके एक तरह से शुभम ने एक तीर से दो निशाना साधा था एक तो जिस तरह से वह शुभम पर और उसकी मां पर दोनों के बीच अवैध संबंध को लेकर शंका करती थी वही अब शुभम सरला की चुदाई करने के बाद पूरी तरह से निश्चिंत हो गया था कि अगर भविष्य में कभी उसे यह बात पता भी चलती है कि शुभम और निर्मला दोनों के बीच अवैध संबंध है तो इस बात को लेकर चिंता करने वाली कोई बात नहीं थी क्योंकि शुभम उसकी चुदाई करके खुद उसका मुंह बंद कर चुका था और दूसरी बात की आज उम्रदराज औरत से संभोग सुख की प्राप्ति करके वह बेहद खुश नजर आ रहा था।
सरला की रसीली बुर पर शुभम अपना लंड टीका हुआ।


कैसा लगा चाची...(शुभम उसी तरह से सरला के बदन पर लेटे-लेटे ही बोला)

पागल हो गया है क्या तु.... यह भी कोई पूछने वाली बात है। ( सरला शर्मा कर दूसरी तरफ नजर फिरते हुए बोली।)

पूछने वाली बात तो है चाची आखिरकार आपको खुश करने में इतनी मेहनत जो लगी है देख नहीं रही हो मेरा पूरा बदन पसीने में भीग चुका है.....

वाह रे मेहनत मुझे पागल समझता है क्या .... ऊठ मेरे ऊपर से कि ऐसे ही लेटा रहेगा... ...

उठने का मन नहीं कर रहा है चाची....

क्यों अभी तेरा मन नहीं भरा क्या....?

पूछ तो ऐसे रही हो चाची की लगता है कि एक बार फिर से लेने का मन है......
(शुभम की यह बात सुनकर सरला आंखें बड़ी कर कर उसे देखने लगी और फिर मंद मंद मुस्कुराने लगी जो कि इस बात का इशारा था कि जो वह कह रहा है वह भी वह मन ही मन चाह रही थी....)

नहीं मेरा ऐसा कोई भी मन नहीं है अब तू जा यहां मत रुक....(शुभम को अपने ऊपर से हटाते हुए बोली)

रुको रुको रुको रुको चाची। ......(अपनी कमर को हल्के से ऊपर की तरफ उठाते हुए) पहले ईसे तो निकाल लेने दो....(शुभम के इतना कहते ही सरला की नजर खुद ब खुद अपनी टांगों के बीच चली गई जहां पर उसे साफ नजर आ रहा था कि शुभम अपने लंड को उसकी बुर से बाहर निकाल रहा है. ‌ जोकि उसके बुर के मदन रस में पूरी तरह से भीग चुका था.... सरला यह नजारा देखकर अंदर ही अंदर शर्मसार हुए जा रही थी की एक नौजवान लड़का उसकी बुर में लंड डालकर और अपना गरम लावा उगल कर अपना लंड बाहर निकाल रहा है सरला यह देखकर एकदम हैरान थी कि इस समय भी उसका लंड लगभग खड़ा ही था जो कि जिस तरह से वह बाहर की तरफ खींच रहा था उसकी रगड़ बुर् के अंदरूनी दीवारों पर महसूस करके उसे फिर से मस्ती छाने लगी थी... तभी पुक्क की आवाज के साथ शुभम का पूरा लंड बुर से बाहर आ गया.... लंड के बाहर आते ही शुभम सरला के बगल में पसर गया। .. जो कि अभी भी उसका लंड छत की तरफ मुंह करके खड़ा था.... शुभम अच्छी तरह से जानता था कि साला चोर नजरों से अभी भी उसके लंड पर नजर गड़ाए हुए हैं इसलिए वह अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड को जड़ से पकड़कर हवा में लहराने लगा जो कि बेहद लुभावना और मादक लग रहा था उस नजारे को देखकर सरला के तन बदन में फिर से सुरसुरी मचने लगी. ‌ और वैसे भी शुभम का एक बार में मन नहीं भरता... और यह बात शुभम अच्छी तरह से जानता था कि सरला जैसी प्यासी औरत एक बार में तृप्त होने वाली नहीं थी भले ही तृप्ति का अहसास उसे मादकता में सराबोर कर दिया हो लेकिन लगातार दो तीन बार की चुदाई के बाद ही वह पूरी तरह से उसके अधीन हो जाएगी।

औरतों के साथ पोजीशन बदल बदल कर चुदाई करने की आदत थी .... और अभी तो सरला को केवल एक ही आसन में लगातार धक्के पर धक्के देकर चुदाई किया था अभी तो आसन बदलना जरूरी था ताकि सरला को इस बात का एहसास होगी औरत की चुदाई हर आसन में अत्यधिक आनंद देती है। हो सकता था कि सरला शर्म के मारे या एक बार अपनी गलती का एहसास होने के नाते दोबारा संभोग करने के लिए राजी ना हो और उसे घर से बाहर भेज दी लेकिन शुभम अच्छी तरह से जानता था कि यह पल ऐसा होता है अगर वह कमजोर पड़ गया तो सरला दुबारा संभोग के लिए राजी नहीं होगी इसलिए तो वह सरला के मन से खेलने के उद्देश्य से उसकी आंखों के सामने ही अपने लंड को जड़ से पकड़ कर हिला रहा था और यह देखकर सरला का मन फिर से बहकने लगा था...
शुभम और सरला कुछ इस तरह से


देख रही हो चाची (अपने लंड को हिलाते हुए )मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि यह तुम्हारी गरम बुर की गरम दीवारों से रगड़ रगड़ कर तुम्हारी बुर की गहराई को छू कर बाहर आया है....(इस तरह की गरम बातें सुनकर सरला पर सुरूर चढ़ने लगा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह कल का लौंडा ऐसी अजीब अजीब गंदी गंदी बातें कर रहा है क्योंकि जिस तरह से वह अश्लील बातें कर रहा था उस तरह से उसने अपने पति के मुंह से भी इतनी गंदी बातें नहीं सुनी थी तभी तो उसके तन बदन में अजीब सुरूर चढ़ने लगा था आंखो में खुमारी छाने लगी थी.... इसलिए वह बोली)

तेरे मासूम चेहरे को देखकर लगता नहीं है कि तू इतना बड़ा शैतान होगा कितनी गंदी गंदी बातें करता है ...(शुभम के लहराते हुए लंड को चोर नजरों से देखते हुए)

चाची जी अब तो चेहरा देखकर पता करना मुश्किल होता है कि इस के मन में क्या चल रहा है और वैसे भी देखो ना कल जब आप घर से बाहर निकलोगी तो कोई आपके खूबसूरत चेहरे को देखकर यह नहीं समझ पाएगा कि आप खुद अपने कमरे में अपने पड़ोसी के लड़के से जी भर कर चुदवाई की है।....

दैया रे दैया तु कितना बेशर्म है रे....?

बेशर्म नहीं चाची दीवाने हो गए हैं आपके....(एक हाथ सरला की चूची पर रख कर बोला)

हरामखोर तेरी उम्र देख और मेरी उम्र देख।

अगर उम्र ही देखता तो तुम्हारी जमकर चचदाई नहीं करता और चाची सच कहूं तो अगर तुम भी उम्र की मर्यादा को देखती तो एक जवान लंड का स्वाद नहीं चख पाती.... देखी नही कितना लहरा लहरा कर ले रही थी...(सरला की मदमस्त चुचियों पर एक बार फिर से छाता हुआ बोला...)

सच कहूं तो सुभम मैंने जिंदगी में आज तक तेरे जैसा बेशर्म लड़का नहीं देखा मैं तेरे बारे में क्या-क्या सोचती थी... लेकिन तू तो एकदम बेशर्म निकला...

चाची अगर मैं बेशर्म नहीं होता ना तो तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत को अपने नीचे नहीं ला पाता... (शुभम अपनी हथेलियों को सख्ती से सरला के दशहरी आम पर वापस कसने लगा और दूसरे हाथ से अपने लंड को हिलाता रहा जोकि सरला चोर नजरों से बराबर देख रही थी... और यह देखकर शुभम बोला)

देखने से अच्छा अगर चाची इसको पकड़कर हीलाओगी ना तो और ज्यादा मजा आएगा....
(शुभम की बात सुनकर सरला एकदम से झेंप गई)

धत्त कैसी बातें करता है तु.... (इतना कहकर वह बिस्तर से उठने लगी और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) मैं जा रही हूं कपड़े पहनने तू भी अब यहां से चला जा मैं नहीं चाहती कि किसी को इस बात का पता चले और मेरी बदनामी हो जाए....(इतना कहकर वह बिस्तर से उठ नहीं जा रही थी कि शुभम फुर्ती दिखाते हुए तुरंत उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा हुआ जिससे नंगी सरला एक बार फिर से अपने खूबसूरत बदन को संभालने के चक्कर में शुभम के ऊपर गिर गई और शुभम उसे कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया.... शुभम एकाएक एकदम उत्तेजित हो गया था क्योंकि जब वो उठने को हुई तो सरला की भारी-भरकम गांड जो कि पहले से ही शुभम की कमजोरी रही है उसे देखते ही शुभम के तन बदन में सुरसुरी पैदा हो गई और वह अपनी उत्तेजना को काबू में नहीं कर पाया और सरला को अपनी तरफ खींच लिया सरला इस समय उसके ऊपर पेट के बल पसरी हुई थी और वह उठने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं कर रही थी जिससे साफ प्रतीत हो रहा था कि वह भी यही चाहती थी शुभम तुरंत अपने दोनों हाथ उसके चिकने पीठ से होते हुए नीचे की तरफ ले आया और अपनी हथेलियों में उसके दोनों खरबूजे जैसे नितंबों की फांक को पकड़कर तुरंत दबाना शुरू कर दिया....जिससे एक बार फिर से सरला के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ में लगी और उसके मुख से गर्म सिसकारी निकल गई।

ससससससहहहहहह ईईईई..... शुभम क्या कर रहा है मुझे जाने दे...

ऐसे कैसे जाने दूं मेरी जान..... (शुभम के मुंह से जान शब्द सुनकर सरला पहले तो चौक गई लेकिन उसे सुनकर उसके तन बदन में कुछ कुछ होने लगा जान शब्द सुनकर उसे ऐसा लगने लगा कि उसके बदन में जवानी फिर लौट आई है और शुभम उसे अपना प्रेमी नजर आने लगा लेकिन फिर भी उसकी इस बात का विरोध करते हुए बोली...)

यह क्या कह रहा है तू तुझे जरा भी एहसास है कि तू मुझे क्या कह रहा है।

मैं अच्छी तरह से जानता हूं सरला डार्लिंग मैं तुम्हें चाची कह सकता हूं लेकिन मुझे तुम इस समय अपनी प्रेमिका की तरह लग रही हो.....(इतना कहते हुए वह लगातार सरला की बड़ी बड़ी गांड से खेल रहा था और नीचे से अपने मोटे तगड़े लंड की रगड़ को एक बार फिर से सरला की बुर पर घर्षण करके उसे गर्म कर रहा था....)

तू छोड़ सुबह मुझे जाने दे एक बार हो गया सो हो गया दोबारा मुझे ऐसी गलती नहीं करनी है...

लेकिन मुझे तो करनी है चाची क्या करूं तुम्हारी मदहोश जवानी मुझे पागल कर रही है तभी तो देखो ना एक बार जमकर चुदाई करने के बाद भी मेरा लंड खड़ा का खड़ा है....

तो इसमें मैं क्या कर सकती हूं मैं तेरे लंड को ठंडा करने का क्या मैंने ठेका ले कर रखी हूं। (सरला भी उसी के रंग में रंगने लगी उसे भी अश्लील बातें करने में मजा आने लगा)

तुम कुछ भी कहो चाची लेकिन मैं शांत रहने वाला नहीं हूं तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड ( दोनों हाथों से गांड पर चपत लगाते हुए) मुझे पागल कर रही है मुझसे रहा नहीं जा रहा है....

आहहहहहहह .... दुखता है......

लेकिन मजा भी तो आ रहा है चाची.....

लेकिन मुझे नहीं आ रहा है मुझे जाने दे और तू चला जा नहीं तो मैं तेरी मम्मी को फोन कर कर इधर बुला लूंगी....

तो बुला लो बुला लो मम्मी को तो भी अपनी आंखों से देखे कि उनका लड़का जवान हो गया है और जवानी का जोश सरला चाची पर उतार रहा है....

बाप रे कितना हरामि हो गया है तू धीरे-धीरे करके तेरे बारे में समझ में आ रहा है कि तू कितना बड़ा दुष्ट है ....(फिर से शुभम की पकड़ से अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करते हुए)

धीरे-धीरे सब समझ में आ जाएगा मेरी जान....(सरला जैसी उम्रदराज औरत को जान कहने में शुभम को अत्यधिक सुख की अनुभूति हो रही थी जिस तरह से वह उसकी गांड को जोर-जोर से चपत लगाते हुए मसाल रहा था उससे शुभम की उत्तेजना निरंतर बढ़ती जा रही थी और यही हाल सरला का भी हो रहा था.... शुभम भी अच्छी तरह से समझ रहा था कि सरला का भी मन दोबारा लेने का हो रहा है लेकिन वह अपने मुंह से कह नहीं पा रही है इसलिए वह पूरी तरह से उत्तेजित होकर सरला को अपनी बाहों में लेते हुए पलट गया और वह सरला के ऊपर आ गया और सरला पेट के बल चीत हो गई और धीरे-धीरे वह नीचे की तरफ आते हुए एक बार फिर से सरला की टांगों के बीच में आ गया और अपने होंठ को सरला की चुदी हुई बुर के ऊपर रखकर चाटना शुरु कर दिया.... शुभम को सरला के नमकीन पानी और अपने लावा का मिलाजुला मिश्रण का स्वाद मिल रहा था लेकिन सरला शुभम की इस हरकत से एकदम से उत्तेजित होने लगे और एक बार फिर से शुरू में लंड को बुर में लेने की इच्छा जागने लगी शुभम के मन में कुछ और चल रहा था शुभम सरला को अपना लंड चटवाना चाहता था....और वो जानता था कि सरला इसे तैयार नहीं होगी इसके लिए उसे एकदम मदहोश करना जरूरी है उसकी आंखों में खुमारी भर देना जरूरी है और इसीलिए वह सरला को पूरी तरह से अपनी जीभ से मस्त कर देना चाहता था और वह जितना हो सकता था उतना जीभ सरला की बुर में डालकर उसके मदन रस को चाटना शुरू कर दिया था.... शुभम पागलों की तरह बुर रूपी कटोरी में से सरला के मदन रस को दूध की तरह चाटना शुरु कर दिया शुभम की इस हरकत की वजह से सरला बिस्तर पर छटपटा रही थी उसका पूरा बदन कसमसा रहा था उसकी मदमस्त बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह लहरा रही थी..एक बार फिर से सरला का कमरा सरला की मदहोश कर देने वाली सिसकारीयो से गुंजने लगा.... शुभम गहरी गहरी सांसे ले लेकर सरला की बुर चाटने में लगा हुआ था बरसों बाद सरला को ऐसा सुख प्राप्त हो रहा था कि इस उम्र के दौरान कोई नौजवान लड़का उसकी बुर पर स्वाद ले रहा था और उसे भी बुर चटाई का पूरा मजा दे रहा था सरला तो मस्त हुए जा रही थी वह बिस्तर पर सर पटक पटक कर आनंद ले रही थी दोनों इस समय कमरे में संपूर्ण नग्ना अवस्था में थे....

सरला की गर्म सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी...
सससहहहहहहह... आहहहहहहह ... आहहहहहहह शुभम और चाट जी भरकर चाट.... आज्हहहहहहहभमुझे मजा आ रहा है बहुत मजा आ रहा है तूने तो मुझे मस्त कर दिया ऐसे ही चाट.... ऊममममममम ......(गरम सिसकारियां लेते हुए सरला अपने दोनों हाथ को शुभम के रेशमी बालों में उलझा कर उसका मुंह और जोर से अपनी बुर पर दबाना शुरू कर दी सरला की हरकत देखकर शुभम समझ गया कि अब सरला उसका लंड मुंह में लेने के लिए तैयार हो जाएगी इसलिए वह सरला की बुर पर से अपना मुंह हटाया और सरला को दिखाते हुए अपना लंड हिलाते हुए बोला....

मेरी जान सरला चाची मैं आपको पूरा मजा दूंगा लेकिन आप अभी एक बार मेरा लंड मुंह में लेकर मुझे तृप्त कर दो मुझे मस्त कर दो चाची....
(शुभम की यह बात सुनकर सरला अंदर तक सिहर उठे उसके मन में अनजान डर फैलने लगा वह आश्चर्य से शुभम की तरफ देखते हुए बोली)..

नहीं नहीं सुबह मुझसे यह बिल्कुल भी नहीं होगा (शुभम के हाथों में झूलते हुए लंड को देखते हुए )मैंने आज तक कभी भी इसे अपने मुंह में नहीं ली....

मैं जानता हूं चाची तभी तो कह रहा हूं कि बस इसे एक बार अपने मुंह में लेकर देखो इतना मजा आएगा कि सारे सुख इसके आगे फीका लगने लगेंगे बस एक बार अपने मुंह में ले लो मेरी बात मानो चाची( ऐसा कहते हुए सब घुटनों के बल आगे बढ़ने लगा और सरला उसे रोकते हुए बोली...)

नहीं नहीं सुभम मुझे डर लगता है मुझसे ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा....

कैसे नहीं हो पर चाची बस एक बार कोशिश तो करो सब कुछ हो जाएगा इतना मजा आएगा कि पूछो मत (ऐसा कहते हुए शुभम घुटनों के बल चलते हुए उसके बेहद करीब पहुंच गया इतना करीब कि उसका लहराता हुआ लंड उसके होंठ के केवल दो अंगुल दूर रह गया..एक मोटे तगड़े लंड को अपनी आंखों से इतने नजदीक लहराता हुआ देखकर सरला के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फुटने लगी उत्सुकता बढ़ने लगी वह भी अपने मन में सोच रही थी कि एक बार ऐसा अनुभव लेने में कोई हर्ज नहीं है और यह वास्तविक था कि उसने आज तक किसी के भी लंड़कों मुंह मे नहीं ली थी ना जाने क्यों उसे लंड को मुंह में लेने में घिन्न आती थी।लेकिन बार-बार शुभम के समझाने की वजह से वह तैयार हो गई और अपना हाथ आगे बढ़ाकर शुभम के लंऊ को अपने हाथ में पकड़ ली.... पहली बार बरसों के बाद वह किसी के लंड को हाथ में ले रही थी अजीब सा सुख अजीब सा अहसास उसके तन बदन को झकझोर के रख दें रहा था। उसकी उंगलियां कांप पर हुई थी लेकिन मजा बहुत आ रहा था... सरला की नरम नरम उंगलियों के आगोश में अपने लंड को देखकर शुभम के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी।

लो ना चाची....
(शुभम की बात सुनकर भाई शुभम की तरफ नजर उठा कर देखने लगी शुभम की आंखों में लंड चुसाए जाने की उत्तेजना साफ नजर आ रही थी... सरला के होंठ फड़क रहे थे... वह धीरे-धीरे अपने होंठ को आगे लाकर जैसे ही उसे शुभम के मोटे लंड के सुपाड़े का स्पर्श हुआ उसका तन बदन में जैसे बिजली दौड़ गई हो.... उसका पूरा बदन झनझना गया.... लैंड को मुंह में लेने से पहले ही सरला को इस बात का आभास हो गया कि वास्तव में मुंह में लंड लेने से औरतों को अत्यधिक आनंद की अनुभूति होती है इसलिए वह अपने होंठ खोल कर तुरंत शुभम के लंड के सुपाड़े को मुंह में भर लीपहले तो उसे अजीब सा लगा लेकिन धीरे-धीरे उसे मजा आने लगा और आहिस्ता आहिस्ता मैं शुभम के संपूर्ण मोटे तगड़े लंड को गले तक उतार कर चूसना शुरू कर दी कुछ ही पल में उसे शुभम के लंड चूसने में बेहद आनंद की अनुभूति होने लगी शुभम भी धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए सरला को अपना लंड चूसने में मदद कर रहा था।
पंखा चालू होने के बावजूद भी दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे दीवार पर टांगने घड़ी में 3:00 का समय हो रहा था।दुनिया से बेखबर दोनों अपनी उम्र की मर्यादा को भूल कर एक दूसरे को आनंद देने में लगे हुए थे। देखते ही देखते सरला लंड चूसने में माहिर नजर आने लगी वह बड़ी शिद्दत से शुभम के मोटे तगड़े लंड को ऊपर से लेकर नीचे तक बराबर जीव लगा कर चाट रही थी... उसके लंड चाटने की अदा से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे युद्ध से पहले तलवार में धार दी जा रही हो...

तकरीबन 20 मिनट की लंड चुसाई के बाद शुभम को ऐसा लगने लगा कि कहीं वह सरला के मुंह में ही ना झड़ जाए और वह इतनी जल्दी झड़ना नहीं चाहता था इसलिए वह तुरंत सलाह के मुंह में से लंड बाहर खींच लिया और बोलो....

वाह चाची मुझसे झूठ बोल रही थी कहती हो कि मैंने जिंदगी में कभी भी लंड मुंह में नहीं ली हूं और जिस तरह से तुम मेरे लंड को चूस रही हो मे यकीन नहीं कर सकता कि तुम कभी भी लंड को मुंह में लेकर चूसी नहीं हो....
(शुभम की बातों में शर्मिला को अपने लिए तारीफ के बोल नजर आ रहे थे इसलिए अंदर ही अंदर खुश हो रही थी और वह अपनी सफाई पेश करते हुए बोली)

मैं सच कह रही हूं शुभम आज यह मेरा पहला तजुर्बा था इससे पहले मैंने कभी भी लंड को मुंह में नहीं लिया हो तो तेरे कहने पर मैंने आज यह अनुभवलेली....

अगर तुम कह रही है तो मैं मान जाता हूं लेकिन चाची साफ-साफ बताना कि तुम्हें मजा आया कि नहीं...
(शुभम की बात सुनकर जवाब देने की बजाय सरला शर्म से नजर दूसरी तरफ फैर ली जिससे साबित हो रहा था कि उसे भी मजा आ रहा था। और वह चोर नजरों से अपने तो और लार में भीगे हुए शुभम के लहराते हुए लंड को देखकर मन ही मन प्रसन्न होने लगी वास्तव में सरला के थोक में भेजा हुआ शुभम का लंड भयानक लग रहा था एक बार देखने के बाद किसी भी औरत का मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह जाए....शुभम के मोटे तगड़े लंड को देख कर एक बार हर औरत के मन में शंका जरूर पैदा हो जाएगा कि यह उसके मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में ले पाएगी कि नहीं...और सरला एक बार अपनी बुर की गहराई में शुभम के मोटे तगड़े लंड का अनुभव लेने के बावजूद भी अभी उसके लहराते हुए लंड को देखकर फिर से शंकासील हो गई थी.... एक बार फिर से उत्तेजना के मारे सरला का गला सूखने लगा था.... शुभम सरला के द्वारा लंड चुसाई का मजा लेकर एकदम तृप्त हो गया था उसकी सांसे तेज चल रही थी.... वह अब सरला को चोदने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुका था।.....

सरला चाची तैयार हो जाओ मैं इस बार तुम्हारी पीछे से लूंगा.....

पीछे से.....( सरला आश्चर्य से बोली)

हां मेरी रानी अब मैं तुम्हें घोड़ी बनाकर चोदुंगा....

(अब इतना तो सरला समझती है थी कि शुभम क्या कहना चाह रहा है और वह मुस्कुराते हुए घुटनों के बल ऊकड़ु होकर बैठ गई... और अपनी गांड को हल कैसे ऊपर हवा में उठा कर हिलाना शुरू कर दी जिसको देखा कर शुभम समझ गया कि सरला के बदन में सुरूर अपना असर दिखा रहे हैं सरला धीरे-धीरे शुभम के सामने खुलने लगी थी वह अब धीरे-धीरे बेशर्म होते जा रही थी वैसे भी वह इस उमर में बेशर्मी की सारी हदें तभी पार कर चुकी थी जब वह टांगे फैलाकर शुभम को अपने ऊपर चढ़ा ली थी...
हवा में सरला की लहराती हुई बड़ी बड़ी गांड देखकर शुभम कमर दौड़ने लगा उसके मुंह में पानी आने लगा इस उम्र में सरला की मदहोश जवानी देखकर शुभम के लंड से भी रहा नहीं गया और वह ऊपर नीचे होकर सरला की मदमस्त जवानी को सलाम करने लगा.... शुभम से ज्यादा शुभम का लंड उतावला था सरला की बुर में घुसने के लिए... जैसे स्वादिष्ट व्यंजन को देख कर मुंह में पानी आता है उसी तरह से सर लागे मदहोश मदमस्त बड़ी-बड़ी तरबूज देसी गांड देखकर लगातार शुभम के लंड से लार टपक रहा था....शुभम से रहा नहीं जा रहा कि पढ़कर साला की बड़ी बड़ी गांड को अपने दोनों हाथों में थाम लिया और अगले ही पल अपने लंड के मोटे सुपाड़े को सरला की गीली बुर के मुख्य द्वार पर लगा कर हल्के से धक्का लगाया और सरला की बुर गीली होने की वजह से इस बार शुभम के मोटे लंड का मोटा सुपाड़ा आराम से सरला की बुर में समा गया... लेकिन फिर भी सरला के मुंह से हल्की कराहने की आवाज निकल गई इसमें सरला की कोई गलती नहीं थी क्योंकि बरसों के बाद उसकी बुर में किसी मोटी तगड़ी लंड के लिए अपनी गुलाबी पत्तियों के पंख को फैला कर उसको पूरी तरह से अपने अंदर लेने की कोशिश की थी जिसकी वजह से दर्द का एहसास होना लाजमी था....

शुभम और सरला कुछ इस तरह से



धीरे-धीरे थोड़ा-थोड़ा करके शुभम अपने मोटे तगड़े लंड को एक बार फिर से सरला की लहराती गांड को अपने दोनों हाथों से थामे उसकी रसीली कचोरी जैसे फूली हुई बुर की गहराई में उतार दिया था...
शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर के अंदर महसूस करके सरला आसमान में उड़ रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जो कुछ भी उसके साथ हो रहा है वह हकीकत है उसे सब कुछ सपना रख रहा था और ऐसा सपना जिसमें दुनिया के सर्व सुख निहित थे... सरला की प्रसन्नता का कोई ठिकाना ना था शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर के अंदर लेकर सरला को इस बात का एहसास हो गया था कि संभोग में उम्र की कोई मर्यादा और सीमा नहीं होती.... संभोग की परिभाषा से मर्यादा संस्कार सीमाएं उम्र के बंधन सब कुछ परे हैं...
शुभम एक बार फिर से अपने आपको बेहद भाग्यशाली समझ रहा था क्योंकि इस वक्त वह तपती दोपहरी में सरला के कमरे में सरला के बेडरूम में और उसके ही बिस्तर पर उसे पूरी तरह से नंगी करके उसे घोड़ी बना कर पीछे से चोद रहा था वाकई में यह सब एक सपने जैसा ही है क्योंकि सरला जैसी उम्रदराज औरत उसकी मर्दाना ताकत के अधीन होकर अपने संस्कार और मर्यादा भूल कर इस तरह से नंगी होकर बिस्तर पर और वह भी घोड़ी बनकर शुभम के मोटे तगड़े लंन से चुदने का आनंद लेगी यह सब एक सपने जैसा ही लगता है....

कुछ ही सेकंड में कमरे में फिर से सरला की गरम सिसकारी गुजरने लगी इस बार शुभम पूरी तैयारी में था क्योंकि एक बार उसका पानी निकल चुका था और दोबारा निकलने में काफी वक्त लेता था इसलिए वह इत्मीनान से सरला की चुदाई करने की मन में ठान लिया था वह हल्के हल्के धक्के लगाते हुए सरला को स्वर्ग के आनंद की अनुभूति करा रहा था और वैसे भी शुभम का लंड इतना ज्यादा अत्यधिक मोटा था कि सरला जैसी उम्रदराज औरत को भी अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों पर उसके मोटे तगड़े लंड का घर्षण बराबर महसूस हो रहा था....
सरला की गीली पुर इतनी ज्यादा पनिया गई थी कि शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपने अंदर लेकर उसमें से चप्प चप्प की आवाज आना शुरू हो गई थी..... उत्तेजना के मारे साला का मुखारविंद टमाटर की तरह लाल हो गया था.... वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि इस तरह से वह एक नौजवान लड़के से चुदवाएगी.... शुभम उत्तेजना के मारे सपना की बड़ी बड़ी गांड पर अपने दोनों हाथों से चपत लगाते हुए अपने लंड को उसकी बुर के अंदर बाहर कर रहा था वह पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबने लगा था उसे बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी....

औहहहहहह ....चाची मैंने कभी सोचा नहीं था कि तुम को चोदने में मुझे इतना मजा आएगा मुझे बहुत मजा आया है तुम्हारी बुर ईस उम्र में भी कितनी कसी हुई है.... आहहहहहहह ... ऐसा लग रहा है कि जैसे मैं किसी जवान औरत को चोद रहा हूं बहुत मजा आ रहा है चाची.....
(शुभम की बातें सुनकर सरला को मजा आ रहा था क्योंकि वह बातों ही बातों में एक तरह से उसकी तारीफ ही कर रहा था और दुनिया में ऐसी कौन सी औरत होगी जिसे अपनी तारीफ सुनना पसंद नहीं होगा... इसलिए वह मन ही मन प्रसन्न होते हुए बोली....)

बरसों से संभाल के रखी हूं तभी जाकर इतनी कसी हुई है वरना दूसरी औरतों की तरह ढीली हो जाती...

(सरला के मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर शुभम समझ गया था कि उसके ऊपर भी मादकता पूरी तरह से अपना असर दिखा रही थी उसके बदन में भी नशा छाने लगा था इसलिए वह इस तरह से बातें कर रही थी और इसमें शुभम को भी मजा आ रहा था।)

सच चाची..... सही कह रही हो तभी तुम्हारी बुर इतनी कसी हुई है.... और मुझे इतना मजा आ रहा है बरसों से लगता है कि तुमने किसी भी लंड़ के लिए अपनी बुर का द्वार नहीं खोली हो...(इतना कहने के साथ ही शुभम उत्तेजना के मारे लगातार चार पांच धक्के बड़ी तेजी से लगा दिया जिससे सरला के मुंह से कराहने की आवाज निकल गई...)

आहहहहहहह .... आहहहहहहह ..... तेरे चाचा के बाद तो पहला लड़का है जिसके लिए मैंने आज सचमुच अपनी टांगे खोल दि हुं....

मैं बहुत भाग्यशाली हूं चाची कि आपने मुझे ऐसा शुभ अवसर दिया है कि मैं तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत की चुदाई कर रहा हूं.....
(शुभम कि इस तरह की बातें सुनने में सरला को बेहद मजा आ रहा था लेकिन इस समय उसे उसके मोटे तगड़े लंड का मजा लेना था जो कि निरंतर उसे आनंद के सागर में लिए जा रहा था और वह इस आनंद के अनुभव को अपने आप से अलग नहीं होने देना चाहती थी इसलिए वह अपना पूरा ध्यान बस जुदाई में लगा देना चाहती थी इसलिए वह शुभम से बोली....)

तू बातें बड़ी अच्छी अच्छी करता है मुझे यकीन नहीं होता कि इतनी कम उम्र में तुझे औरतों के बारे में इतना ज्यादा ज्ञान है लेकिन तू अभी कुछ बोल मत मुझे बहुत मजा आ रहा है बस ऐसे ही मेरी बुर में अपना लंड पेल...... (इतना कहते हुए सरला पीछे की तरफ नजर घुमाकर मदमस्त गांड निहारने लगी जो कि इस समय शुभम के हाथों में थी जिसे सुमन जोर जोर से दबाते हुए धक्के पर धक्के लगा रहा था और सरला की इस तरह की जोश भरी बातें सुनकर उसका जोश और ज्यादा बढ़ने लगा और वह अपनी कमर को लगातार उसकी रफ्तार बढ़ाते हुए अपने लंड को उसकी बुर के अंदर बाहर करने लगा रह रहे करवर इतनी तेज धक्के लगा देता कि सरला अपने आप को संभाल नहीं पाती और आगे की तरफ लुढ़क जाती लेकिन शुभम इतना फुर्तीला था कि तुरंत उसकी कमर अपने दोनों हाथों से थाम कर उसे फिर से संभाल लेता था काफी देर हो चुकी थी उसे इस तरह से पीछे से चोदते हुए शुभम अब अपना आसन बदलना चाहता था इसलिए उसकी रसीली कसी हुई बुर से अपना लंड बाहर खींच कर बाहर कर लिया.... इस तरह से अपनी बुर से लंड निकाले जाने पर सरला आश्चर्य से शुभम की तरफ देखते हुए बोली...

निकाल क्यों लिया....?
(ऐसा कहते हुए सरला की आंखों में शुभम के मोटे तगड़े लंड की प्यास साफ नजर आ रही थी उसकी आंखों में देख कर शुभम अच्छी तरह से समझ गया था कि अभी से बराबर है लंड चाहिए इसलिए वह एक बार फिर से उसकी हवा में लहराती हुई गांड पर जोर से चपत लगाते हुए बोला।)

थोड़ा सब्र करो मेरी रानी अब तुम्हें दूसरे आसन में चोदना चाहता हूं...
(शुभम की बात साला समझी कि नहीं समझी इस बात पर ध्यान दिए बिना शुभम बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया और उसका लंड एकदम टन टनाया हुआ था उसके काम रस में डूबा हुआ बड़ा मादक और भयानक लग रहा था जिसे देख कर सरला के मुंह में पानी आ रहा था।

शुभम उत्तेजना में पूरी तरह से डूब चुका था मस्ती के सागर में अपने आप को डूबता हुआ देखकर उसकी आंखें मूंदने लगी थी लेकिन अपने आप पर काबू करके वह अपने लंड को हिलाते हुए सल्ला को इशारे में उसे अपने ऊपर बैठने के लिए बोला... उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी सरला को शुभम का इशारा समझ में आ गया और वह काफी उत्साहित भी हो गई शुभम के ऊपर चढ़ाने के लिए क्योंकि यह भी उसका पहला ही मौका था जब वह किसी लंड की सवारी करने जा रही थी। शुभम का मात्र इशारा भर पाकर सरला तुरंत अपनी भारी भरकम गांड लहराते हुए अपनी मोटी मांसल टांगों को घुटने के बल मोड़ कर शुभम के कमर के इर्द-गिर्द हो गई और एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर शुभम के मोटे लंड को पकड़ कर उसके मोटे सुपारी को अपनी बुर की गुलाब की पत्तियों के बीचो-बीच सटाकर उसे अंदर लेने का प्रयास करने लगी जिसमें वह जल्द ही कामयाबी प्राप्त कर ली सरला का काम बस रास्ता दिखाना था बाकी का काम शुभम खुद करने वाला था और जैसे ही सरला में बुर के मुख्य द्वार पर लंड का सुपाड़ा रखकर शुभम को रास्ता दिखाई शुभम सरपट दौड़ पड़ा...अपने आप ही शुभम की कमर ऊपर की तरफ लपकी और अगले ही पल सुभम का मोटा तगड़ा लंड एक बार फिर से सरला की बुर की गहराई नापने लगा अब शुभम कहां मानने वाला था दोनों हाथ ऊपर की तरफ ले जाकर सलाह के लटकते दोनों दशहरी आम को थाम करवा नीचे से अपनी कमर हिलाने लगा शुभम के हर एक धक्के पर सरला की आह निकल जा रही थी....वह कितना भी अपने आप पर काबू करने की कोशिश करती लेकिन वह खुद बेकाबू हो गई थी देखते ही देखते कब उसकी कमर अपने आप ऊपर नीचे होने लगी उसे पता ही नहीं चला शुभम कभी दोनों हाथ नीचे की तरफ ले जाकर सरला की भारी-भरकम गांव को अपनी हथेलियों में थाम लेता तो कभी वही हथेलियों में सरला की चुचियों को पकड़ कर दबाना शुरु कर देता अब दोनों को चुदाई में बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी सरला ऊपर से तो शुभम नीचे से धक्के पर धक्के लगा रहा था देखते ही देखते दोनों चरम सुख के करीब पहुंचने लगे तो शुभम उत्तेजना वसरला की कमर थाम कर अपने लंड को उसकी बुर में घुसाए हुए ही उसकी कमर थाम कर उसे तुरंत पलट दिया और उसके ऊपर सवार हो गया अब सरला पीठ के बल चित्त लेटी हुई थी और शुभम उसके ऊपर चढ़ा हुआ था जो कि अभी भी उसका लंड उसकी बुर की गहराई नाप रहा था.... सरला शुभम की तरफ से इस तरह की किसी भी हरकत के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी इसलिए वो एकदम से झेप गई उसे समझ में नहीं आया कि घड़ी के छठे भाग में यह क्या हो गया देखते ही देखते हो बिस्तर पर लेटी हुई थी और शुभम उसके ऊपर चढ़ा हुआ था। शुभम को अपना पसंदीदा आसन प्राप्त हो चुका था और वैसे भी सरला को कुछ आसन का सुख दे चुका था अब बारी थी घमासान युद्ध की वह दोनों हाथ आगे बढ़ा कर सरला की दशहरी आम को फिर से अपने दोनों हाथों की हथेलियों में कस लिया और कमर हिलाना शुरू कर दिया। अब शुभम रुकने वाला नहीं था ना ही अपनी रफ्तार को किसी भी हालत में कम करने वाला था वह एक ही लाइन में लगातार अपनी कमर को हिलाता रहा और इस तरह से सरला दम मदमस्त होने लगी वह हर एक धक्के पर सिसकारी की आवाज निकाल रही थी जिससे कमरे का पूरा वातावरण मादक होता जा रहा था दोनों की सांसो की गति तेज होने लगी थी सरला रह-रहकर नीचे से अपनी कमर ऊपर की तरफ उछाल दे रही थी....
दोनों अपने चरम सुख के करीब पहुंच रहे थे। और देखते ही देखते सरला का बदन अकड़ने लगा शुभम को समझते देर नहीं लगी कि सरला झड़ने वाली है इसलिए वह उसे अपनी बांहों में कस कर धक्के पर धक्के लगाने लगा। और एक अद्भुत चीख के साथ सरला का मदन रस निकलने लगा और कुछ ही धक्कों में शुभम भी झड़ गया....

अद्भुत संभोग की तृप्ति का अहसास लिए दोनों नींद की आगोश में एक दूसरे की बाहों में बाहें डाले नग्न अवस्था में भी नींद की आगोश में चले गए शाम को तकरीबन 5:00 बजे जब शुभम की नींद खुली तो वह हड़बड़ा कर उठ गया वह अभी भी पूरी तरह से नंगा था और सरला अभी भी दोनों टांग को सीकोड़े बिस्तर पर नंगी लेटी हुई थी.... सरला की बड़ी बड़ी गांड देखकर एक बार फिर से शुभम के लंड में झुनझुनाहट होने लगी...लेकिन एक बार फिर से चला कि चुदाई का शुभम के पास बिल्कुल भी समय नहीं था इसलिए वसरला को जगा कर कपड़े पहन कर छत के रास्ते से अपनी छत पर आ गया और सरला भी नींद की आगोश से बाहर आकर अपने नंगे बदन को कपड़े से ढक कर बाथरूम की तरफ चली गई।
 
शुभम छत के रास्ते होकर अपने छत पर जानबूझकर आया था क्योंकि संभोग की सुख तृप्ति में वह इस कदर खो गया कि कब शाम के 5:00 बज गए उसे पता ही नहीं चला और वह नहीं चाहता था कि इस समय कोई सरला के घर से निकलता हुआ उसे देखें इसलिए वह छत के रास्ते से अपने छत पर पहुंच गया और वहां थोड़ा बहुत कसरत करके फ्रेश होने चला गया...
शुभम के जगह पर जाने पर सरला उठकर नग्न अवस्था में ही चलते हुए बाथरूम में गई.... उसके बदन में उत्तेजना का असर अभी भी बरकरार था टांगों के बीच के उस मखमली अंग में हल्का हल्का मीठा दर्द हो रहा था जोकि मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर की गहराई तक उतार ले जाने की कसक महसूस करा रहा था... सरला बाथरूम का सावर चालू करके नहाना शुरू कर दी और अपनी खुली हुई बुर में साबुन लगा लगा कर उसे साफ करने लगे जिसमें से अभी भी दोनों के नमकीन रस का बहाव हो रहा था। सरला बेहद खुश नजर आ रही थी जिंदगी में पहली बार उसने इस तरह के कदम उठाए थे जिसमें उसे बेहद सुख की अनुभूति हुई थी लेकिन यह सुख भी कैसा था जो सारी मर्यादाओं और शर्म को त्याग कर प्राप्त होता था लेकिन फिर भी सरला को इस बात का एहसास हो रहा था कि.. समय-समय पर औरत को भी अपने सुख का ख्याल रखना चाहिए वह मन ही मन शुभम को धन्यवाद कर रही थी क्योंकि उसकी बदौलत ही आज वह औरत के असली सुख को प्राप्त कर पाई थी... वरना उसकी जिंदगी भी ऐसे ही चल रही थी ना कोई रंग था ना कोई उमंग थी लेकिन अब उसे जिंदगी जीने का एक सहारा मिल गया था वह नहाते हुए हर उस पल को याद कर रही थी जो कुछ देर पहले वह भी चुकी थी बार-बार उसकी आंखों के सामने वही दृश्य नजर आ रहा था जब शुभम पीछे से उसकी बड़ी बड़ी गांड को पकड़कर अपना लंड बड़ी तेजी से उसकी बुर में पेल रहा था.... शुभम की मर्दाना ताकत से वह पूरी तरह से अवगत हो चुकी थी वह समझ चुकी थी कि शुभम के लंड में जितनी ताकत है शायद ही किसी के लंड में होगी.. वह अपनी बुर को पानी से धोते हुए यही सब सोच रही थी और यह सोच कर उसकी प्यास फिर से बढ़ते जा रही थी वैसे भी बदन की प्यास वासना का बुखार लंबे समय तक इंसान को परेशान करता रहता है और सरला की तो अब शुरुआत हो चुकी थी वैसे भी जिस तरह से उसने अपने मोटे तगड़े लंड से सरला की बुर का आकार और उसका भूगोल बदल कर रख दिया था उसका एहसास ही सरला को बार-बार शुभम के नीचे आने के लिए विवश कर रहा था। ....
सरला शुभम से चुदवाने लिए तड़प रही थी।


कुछ दिन तक सब कुछ सामान्य चलता रहा शुभम जानबूझकर सरला से कम मुलाकात करने लगा क्योंकि उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था वह एक बात अच्छी तरह से जानता था कि अगर काफी समय बाद औरत की बुर में लंड जाता है तो वह दोबारा जल्दी ना मिलने पर तड़प उठती है....
और शुभम यही चाहता था कि एक बार के संभोग से जिस तरह से वह तृप्त हुई है उस तृप्ति का अहसास उसे एक बार फिर से चुदने के लिए तड़पाए... और ऐसा हो भी रहा था सरला की नजरें अब शुभम को ही ढूंढती रहती थी क्योंकि बार-बार उसकी आंखों के सामने वही मंजर नजर आता था जब वह उसकी बड़ी बड़ी गांड को पकड़कर अपना लंड उसकी बुर में पेलता था... शुभम के जबरदस्त धक्कों का एहसास मुझे फिर से विवस कर रहा था शुभम से चुदवाने के लिए ..... वह सब जानती थी कि ये जो कुछ भी हो रहा है वह गलत है लेकिन फिर भी लंड का स्वाद चख चुकी सरला अब अपने काबू में बिल्कुल भी नहीं थी वह सुभम से फिर से चुदवाना चाहती थी और इसी ताक में लगी रहती थी लेकिन सुभम से उसकी मुलाकात नहीं हो पा रही थी शुभम उसे अभी और ज्यादा तड़पाना चाहता था। और सही मायने में वह खुद सरला को फिर से चोदना चाहता था क्योंकि उसे भी सरला की बड़ी बड़ी गांड पकड़कर उसे चोदने में उसे बहुत ही आनंद की अनुभूति हुई थी और वह एक बार फिर से उस आनंद के मदहोश कर देने वाले सागर में डुबकी लगा देना चाहता था।.....
और ऐसे ही 1 दिन बाजार से आते समय सरला की नजर शुभम पर पड़ गई और वह तुरंत शुभम को रोककर जोकी अपनी बाइक स्टार्ट कर कर जाने वाला था... उसकी बाइक के पीछे बैठ कर बोली...

क्या बात है आजकल तेरे दर्शन नहीं हो रहे हैं....

क्या कहूं चाची एग्जाम की तैयारी में लगा हुआ हूं इसके लिए मुलाकात नहीं हो पा रही है...

सरला शुभम के साथ बिताए हुए पल को याद करके उत्तेजित हुए जा रही थी


शुभम बेटा मैं तो कहती हूं कि तू बहुत अच्छे से पढ़ाई करें ताकि कोई अफसर बन जाए....

(सरला की बात सुनकर शुभम मन ही मन प्रसन्न हो रहा था और इस बात का उसे एहसास हो गया था कि सरला कुछ ज्यादा ही तड़प रही थी उसका संसर्ग पाने के लिए वह अभी भी उसी तरह से बाइक पर बैठ कर खड़ा था बाइक स्टार्ट थी लेकिन एक्सीलेटर नहीं दे रहा था तो सरला बोली...)

अब यही खड़ा रहेगा कि चलेगा भी...

आप बैठ जाइए ठीक से मैं चलाता हूं...

मैं बैठ गई हूं अब चल....
(इतना सुनते ही शुभम एक्सीलेटल देकर अपनी बाइक आगे बढ़ा दिया....)

कुछ खरीदने आई थी क्या चाची....?

हरी हरी सब्जियां खरीदने आई थी और जो खरीदना चाहती थी वह तो खुद ही तु मुझे खरीद कर दे चुका है...(सरला शरारती अंदाज में बोली)

अच्छा सही सही बताना चाची मेरी दी हुई ब्रा पेंटी आपको कैसी लगी...?

बहुत अच्छी लगी बल्कि मैं तो सोच भी नहीं सकती कि बिना नाम लिए और बिना नाप जाने ही तुने इतनी फीट ब्रा और पेंटी खरीद कैसे लिया...

मैं पहले ही बता चुका हूं चाची कि मैं औरतों के बारे में बहुत कुछ जानता हूं.... (शुभम को इस बात का आभास हो गया था कि सरला फिर से उसके मोटे तगड़े लंड के लिए तड़प रही है इसलिए वह अपनी बात को आगे बनाते हुए बोला.) चाची अगर आप बुरा ना मानो तो एक बात कहूं....

कह दे जो भी कहना है अब तेरे से कैसा बुरा मानू...

चाची मेरा लंड आपको कैसा लगा....

धत्.... यह भी कोई सवाल हुआ....?

क्यों क्या हुआ चाची बताओ तो सही मेरा लंड आपको कैसा लगा...?

मैं ठीक से देखी कहां थी....

मुंह में लेकर चूस रही थी लेकिन देखी नहीं थी...

छी कितनी गंदी बातें करता है तो तुझे शर्म नहीं आती मुझसे इस तरह की बातें करते हुए....

चाची मैं आपको पहले भी बता चुका हूं कि अगर शर्म करता तो आपके जैसी खूबसूरत औरत को चोदने का सुख नहीं मिल पाता....
(शुभम की यह बात सुनकर सरला कुछ बोली नहीं बस होंठों ही होठों में मुस्कुरा रही थी... और यह नजारा शुभम आगे के सीसे मैं अच्छी तरह से देख रहा था...)

बोलो ना चाची शरमाओ मत आप मुझसे कैसा शर्माना सब कुछ तो हो चुका है...

मैं जानती हूं सब कुछ हो चुका है लेकिन शर्म आती है... वैसे भी मैं कोई तेरी गर्लफ्रेंड या तेरी बीवी नहीं हूं तेरी मां की उम्र की एक औरत हूं मुझे यह सब कहने में शर्म तो आएगी....

आह आह हा .... टांगे फैला फैला कर और गांड को हवा में लहरा लहरा कर जब मेरा लंड ले रही थी तब शर्म नहीं आ रही थी....(शुभम एकदम बेशर्मी दिखाते हुए बोला)

तू पागल हो गया है क्या ऐसी कैसी बातें कर रहा है तुझे शर्म नहीं आ रही है और वैसे भी उस समय की बात कुछ और थी...

मतलब....(शुभम जानबूझकर बोला)

अब सब बातें बताना जरूरी नहीं है... जो हो गया सो हो गया हो सब भूल जा...

कैसे भूल जाऊं चाची आपकी मदहोश कर देने वाली जवानी मदमस्त बदन नशीली आंखें गुलाबी होंठ बड़े बड़े दूध मोटी मोटी चिकनी जांगे तरबूज जेसी गोल गोल गांड और मधुर रस से भरी हुई तुम्हारी रसीली बुर.... सससहहहहहहह ..... चाची अगर भूलना चाहूं तो भी नहीं भूल पाऊंगा...
(शुभम के मुंह से अपनी खूबसूरत बदन की अंगों के बारे में इस तरह की बातें सुनकर वो गर्म होने लगी थी... चाहे कुछ भी हो शुभम कि इस तरह की गंदी अश्लील बातें उसकी तन बदन को झकझोर कर रख देती थी.... और इस समय भी उसकी बातें सुनकर उसकी टांगों के बीच से पतली दरार में से मदन रस बहना शुरू हो गया था...)

तू नहीं सुधरेगा....

कैसे सुधर जाऊंगा वाला जब मेरी आंखों के सामने इतनी खूबसूरत औरत तो मन तो बहक जाएगा ही... बताओ ना चाची जब मेरा मोटा लंड तुम्हारी बुर में अंदर बाहर हो रहा था तो तुम्हें मजा आ रहा था ना। (शुभम को भी मजा आ रहा था लेकिन इसी सवाल के साथ सरला का घर आ गया था और सरला छठ से बाइक से उतर गई उसके चेहरे पर उत्तेजना के भाव साफ नजर आ रहे थे जब वह उतरी तो सुभम एक बार फिर से बोला...)

बताओ ना चाची कैसा लगा...

तुझे जानना है कैसा लगा...

हां चाची मैं जानना चाहता हूं कि आपको कैसा लगा...?

रात को 11:00 बजे के बाद छत पर आना मैं सब कुछ बता दूंगी...

छत पर .....लेकिन छत पर क्यों...?(शुभम आश्चर्य से बोला...)

चांदनी रात आसमान में टिमटिमाते तारे शीतल हवाएं और ऐसे माहौल में छत पर मैं और तू सब कुछ पता चल जाएगा रात को आना 11:00 बजे के बाद...( इतना कहकर सरला अपने घर में चली गई... और शुभम की नजर सरला की मदमस्त बड़ी-बड़ी मटकती हुई गांड पर ही टीकी हुई थी और शुभम उसे तब तक देखता रहा जब तक कि वह दरवाजा खोलकर घर में नहीं चली गई...)
 
सरला के द्वारा शुभम रात के 11:00 बजे छत पर आने का निमंत्रण पाकर मन ही मन खुश होने लगा क्योंकि उसे अच्छी तरह से मालूम था कि इस तरह से रात को 11:00 बजे छत पर बुलाने का क्या मतलब है.. सरला का निमंत्रण पाते ही शुभम के अंडरवियर में गदर मचने लगा वह प्यासी नजरों से सरला को घर के अंदर गांड मटका आते हुए प्रवेश करते हुए देखता रहा और वह अपने घर की तरफ आ गया....

शुभम के तन बदन में आग लगी थी क्योंकि प्रथम चुदाई के बाद से वह सरला से जानबूझकर दूर रहने लगा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि एक बार उसके लंड का स्वाद चखने के बाद कोई भी औरत दुबारा उससे चुदे बिना नहीं रह सकती थी। और महिला की हालत को देखते हुए सुभम की यह युक्ति एकदम काम कर गई थी। सब कुछ शुभम को अपने नियंत्रण में लग रहा था उसे बेसब्री से रात होने का इंतजार था.. कुछ दिन के लिए वह अपनी मां की मदमस्त जवानी और उसकी खूबसूरती को भूल चुका था उसकी आंखों के सामने इस समय मात्र सरला ही नजर आ रही थी... वैसे भी मर्दों को पराई औरतों में पहले से ही ज्यादा दिलचस्पी रहती है...
वैसे भी कुछ दिनों से शुभम के पापा घर पर रात के समय मौजूद ही रहते थे जिससे शुभम चाह कर भी अपनी मां की चुदाई नहीं कर पाता था और निर्मला अपने पति से चुदकर असंतुष्ट होने के बावजूद भी संतुष्टि का नाटक मात्र करती थी...
दीवार पर टमी घड़ी की सुई की टिक टिक की आवाज के साथ साथ शुभम के दिल की धड़कन भी लय से लर मिलाते हुए धड़क रहीे थी। जैसे-जैसे घंटे वाली सुई 11 की तरफ बड़े रही थी वैसे वैसे सुबह की हालत खराब होती जा रही थी वैसे भी तकरीबन 10:00 का समय हो रहा था और वह अपने कमरे में बैठकर 11:00 बजने का इंतजार कर रहा था उससे रहा नहीं जा रहा था अशोक की उपस्थिति में तीनों साथ मिलकर खाना खा चुके थे और निर्मला और उसके पापा दोनों कमरे में सोने के लिए चले गए थे जोकि शुभम अच्छी तरह से जानता था कि इस समय दोनों सो नहीं रहे होंगे बल्कि एक दूसरे से अपनी प्यास बुझा रहे होंगे...
सरला की मदमसृत बड़ी बड़ी गांड को याद करके शुभम के पजामे में तंबू बन गया था। शुभम के लंड की नसें अत्यधिक रक्त के प्रवाह की वजह से फूल गई थी... वह बड़ी बेसब्री से रात का 11:00 बजने का इंतजार कर रहा था और दूसरी तरफ सरला भी बार-बार घड़ी की तरफ टकटकी लगाए हुए थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि इस समय घर पर उसके अलावा कोई नहीं था और यही मौका था अपनी दोस्ती हुई जवानी को हवा देने के लिए उम्र के इस पड़ाव पर मोटे तगडे जवान लंड़ का स्वाद चख कर सरला पूरी तरह से बहकने लगी थी। वक्त मानो दोनों की बेचैनी और उनके सब्र का इम्तिहान ले रही हो लेकिन कहते हैं कि वक्त अच्छा हो या बुरा कट ही जाता है और देखते-देखते दोनों के शब्र का फल मीठा होता नजर आने लगा आखिरकार धीरे-धीरे घड़ी की सुई होने 11 के अलार्म को आगाज दे ही दिया....

एक बार फिर से शुभम से शारीरिक सुख भोगने की उत्सुकता की वजह से सरला के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी जिसकी वजह से उसकी टांगों के बीच की वह पत्नी दरार जो कि एक बार फिर से उसे जवानी के दिन याद दिला दी थी उसमें से मदन रस बह रहा था और पेंटी गीली हो चुकी थी।
अपनी मदमस्त जवानी कौ अपनी उत्सुकता की बाहों में लपेट कर वह धड़कते दिल के साथ रे धीरे सीढ़ियां चढ़ने लगी देखते देखते वह छत पर आ गई चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा नजर आ रहा था दूर-दूर बिल्डिंगों में ट्यूबलाइट की रोशनी कि आभा पूरे शहर को जगमगा रही थी आसमान में तारे टीमटीमा रहे थे कुल मिलाकर शहर का वातावरण सरला के लिए एकदम मादक हो चुका था। उसकी नजरें बार बार छत पर सुभम को ढुढ रही थी वह सुभम से मिलने के लिए एकदम बेचैन नजर आ रही थी। वह पहले से ही सारी तैयारी कर चुकी थी इसलिए वह एक नरम नरम गद्दे को जो की छत पर बिछाया जा सके उसे छत पर पहुंचा चुकी थी जिसे वह अपने हाथों से छत पर बिछा रही थी वैसे भी गर्मी का मौसम था और सरला कभी कबार छत पर सोने के लिए आ जाया करती थी उसकी इंतजार की घड़ी अब खत्म हुई जब छत पर से कम नजर आया जो कि जिस समय एक टी-शर्ट और हाफ पेंट पहना हुआ था...वह शुभम को देखकर खुश हो गई... सरला कुछ बोल पाती इससे पहले ही शुभम उसकी तरफ आगे बढ़ता हुआ बोला...

रात के 11:00 बजे इस तरह से एक जवान लड़के को छत पर बुलाना...... मुझे आपकी नियत कुछ ठीक नहीं लग रही है।
( छत पर बनी रेलिग को अपने हाथों से पकड़कर आसमान की तरफ देखते हुए बोला... सरला भी उसी अंदाज में छत की रेलिंग को पकड़कर अपनी बड़ी बड़ी मदमस्त गांड को हल्के से बाहर की तरफ उभारकर ताकि शुभम की नजर उस पर पड़े इस अंदाज में खड़ी होकर वह आसमान की तरफ देखते हुए बोली।)

नियत का क्या है शुभम नियत तो बिना पेंदे की लौटे की तरह होती है जो कि एक जगह स्थिर होकर कभी नहीं रह सकती...
( यह बात कहते हुए जैसा वह चाह रही थी ठीक वैसा ही हुआ किसी लोहचुंबक की तरह सरला की मदमस्त बड़ी बड़ी गांड़ शुभम की नजरों को अपनी तरफ आकर्षित कर ही ली... शुभम की ललचाए आंखें सरला की मदमस्त गांड पर टिकी हुई थी जिसे देखकर हाफ पेंट में शुभम का लंड़ ऊबाल मारने लगा। शुभम की नजर को अपनी गांड पर टिकी हुई देखकर सरला जानबूझकर अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हवा में लहराते हुए हिलाने लगी। यह देखकर शुभम के सब्र का बांध टूटने लगा..
शुभम की हालत को देखकर सरला को अपने आप पर गर्व महसूस होने लगा कि इस उम्र के दौरान भी उसके मदमस्त जवानी बरकरार है कि एक जवान लड़के को अपनी तरफ आकर्षित करने में पूरी तरह से सक्षम है.. सरला की लहराती हुई गाड़ को देखते हुए शुभम थूक को गले में निगलते हुए बोला।

चाची सच कहूं तो मुझे यकीन नहीं होता लेकिन यह बात माननी पड़ेगी कि इस उम्र में भी आपकी जवानी एकदम बरकरार है.. ( शुभम ललचाए आंखों से सरला की बड़ी बड़ी गांड को देखते हुए बोला जो कि सरला अभी भी अपनी कसी हुई साड़ी में कैद अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हिला रही थी.... शुभम की बात सुनकर वो मुस्कुरा दी।)
 
शुभम की बातें सरला को हमेशा से ही अच्छी लगती थी और खास करके जब वह बातों ही बातों में उसके बदन की खूबसूरती की तारीफ कर देता था तो सरला अंदर तक प्रसन्नता महसूस करती थी... शुभम की बातें सुनकर सरला की बड़ी बड़ी गांड में मस्ती की लहर छाने लगी... जिसका ज्यादातर असर सरला को अपनी टांगों के बीच की दरार में महसूस हो रहा था जिसकी बदौलत आज उम्र के इस पड़ाव पर इस तरह की हरकत करने को मजबूर हो गई थी..
पल-पल सुभम की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी सरला को अपने बेहद करीब खड़ी देखकर शुभम अपने ऊपर का काबू खोता हुआ महसूस कर रहा था हालांकि एक बार वह सरला की जमकर चुदाई कर चुका था लेकिन दोबारा उसे चोदने के लिए पागल हुआ जा रहा था। सरला कुछ बोल नहीं रही थी बस उसे तिरछी नजरों से देख कर मुस्कुरा भर दे रही थी इसलिए बातों का दौर खुद ही शुरु करता हुआ शुभम बोला....

चाची आप इतनी रात को मुझे छत पर अकेले खाली इस तरह से खड़े रहने के लिए बुलाई हो या और भी कुछ है....

है तो बहुत कुछ लेकिन समझ में नहीं आ रहा है कि शुरू कहां से करूं... ( सरला फिर से मुस्कुराते हुए बोली एक और शुभम उसे इस तरह से मुस्कुराता हुआ देखकर पागल हुआ जा रहा था बार-बार उसका मन कर रहा था कि आंखें बंद कर कर लाखों अपनी बाहों में भर ले लेकिन बहुत मुश्किल से वह अपने मन को संभाले हुए था क्योंकि वह भले ही एक बार उसकी खूबसूरत बदन को भोग चुका था लेकिन वह एक बार फिर से धीरे-धीरे ही आगे बढ़ना चाह रहा था।)

वहीं से शुरू करो जहां से कल छोड़ गई थी और जहां तक मैं जानता हूं वही बात कहने के लिए आप मुझे 11:00 बजे रात को छत पर बुलाई हो.....

मुझे कुछ याद नहीं है तू ही जरा याद दिला दे... ( सरला बहाना बनाते हुए बोली... )

चलो कोई बात नहीं मैं ही याद दिला देता हूं.... ( शुभम अच्छी तरह से सोच विचार कर बोला क्योंकि वह यह बात तो जानता ही था कि पहला के साथ में संभोग सुख प्राप्त करके पूरा खुल चुका था इसलिए उसके सामने गंदी बात करने में उसे जरा भी झिझक नहीं हो रही थी इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।)

मैं कल आपसे कुछ पूछा था और जिसका जवाब देने के लिए ही आप मुझे रात को यहां बुलाई हो।

मैं शायद भूल चुकी हूं कि कल तुमने मुझसे क्या पूछा था.. ( सरला चोर नजरों से सुभभ के हाफपेंट में बने तंबू को देखते हुए)

यही पूछा था कि... (सरला की मदमस्त बड़ी-बड़ी गाड़ पर हाथ फिराते हुए) मुझसे चुदवाकर तुम्हें कैसा लगा.... ( शुभम एकदम तपाक से बोला क्योंकि उसके मन से डर बिल्कुल निकल चुका था और वैसे भी जब कोई भी मर्द किसी औरत को चोद कर मस्त कर देता है तो उसके सामने उसकी सारी झिझक खत्म हो जाती है.. अपने बेटे के उम्र के लड़के के मुंह से अपने लिए ही इतनी गंदी बात सुनकर सरल के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ लगी.. )

तू तो एकदम बेशर्म होता जा रहा है जरा भी शर्म नहीं करता।

शर्म करके किसका भला हुआ है और वैसे भी शर्म करने वालों का हमेशा से घाटा ही होता है... ( साड़ी के ऊपर से ही सरला की बड़ी-बड़ी गाड का काफी हिस्सा अपनी हथेली में जोर से दबोच ते हुए बोला ।)

आहहहहहह...... (जानबूझकर दर्द का बहाना करते हुए उसके मुंह से हल्की सी कराहने की आवाज निकल गई) तेरा कौन सा फायदा हुआ है शर्म ना करके....

अगर शर्म किया होता तो आज मैं तुम्हारी गांड पर इस तरह से अपना हाथ ना फेर रहा होता... (एक बार फिर से सरला की गांड को अपनी हथेली से दबाते हुए.. )

आहहहहहहह..... बड़ा बदतमीज है तू.... (सरला को मजा आने लगा था उसके द्वारा इस तरह की छेड़छाड़ उसे अच्छी लग रही थी... एक बार फिर से सरला की बुर में नमकीन पानी का सैलाब उठ रहा था एक बार फिर से वह शुभम के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तड़प उठी। शुभम से सरला की मद मस्त जवानी की कसक बर्दाश्त नहीं हुई और वह उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचते हुए अपनी बाहों में भर लिया और उसके गुलाबी होठों के बिल्कुल करीब अपने होंठ को ले जाकर बोला।)

चाची..... आपकी इस उमर में खेलती हुई जवानी मुझे बदतमीज बनाती है मैं अपने आप को बहुत संभालने की कोशिश करता हूं लेकिन आपकी जो यह बड़ी बड़ी गांड है.. ( अपने दोनों हाथों की हथेली को उसकी चिकनी पीठ पर फिराते हुए नीचे की तरफ ले जाकर उसकी मदमस्त बड़ी-बड़ी उभारदार गाड को अपनी हथेली में दबाकर उसे अपनी तरफ खींचते हुए) मुझे आपके साथ गुस्ताखी करने पर मजबूर कर देती है.. ( शुभम के द्वारा इस हरकत की उम्मीद सरला को बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन उसकी इस हरकत की वजह से सरला के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी सोले का रूप लेने लगी... सरला की आंखों में भी खुमारी साफ-साफ नजर आ रही थी। उसकी सांसों की गति तेज होने लगी उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी लगातार शुभम की मदहोश कर देने वाली आंखों में देखे जा रही थी जिसमें उसके लिए वासना साफ नजर आ रही थी।
और शुभम लगातार की बड़ी-बड़ी गांड़ को अपनी हथेली से दबाते हुए उसे और भी ज्यादा मस्त किए जा रहा था। साला अब कुछ भी कहने लायक नहीं थे कि तन बदन में आग लगी हुई थी क्योंकि जिस तरह से वह सरला को अपनी बाहों में भरा हुआ था उससे उसके हाफ पेंट में बना हुआ तंबू लगातार उसकी टांगों के बीच ठोकर लगा रहा था मानो ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई अजनबी इंसान दरवाजे पर दस्तक दे रहा हो बार-बार शुभम के मोटे तगड़े लंड को हाफ पैंट के ऊपर से ही अपनी बुर पर महसूस करके उसकी बुर पूरी कचोरी की तरह फूल गई थी जिसमें से चटनी की तरह मदन रस बाहर निकल रहा था... शुभम को भी इस बात का एहसास था कि उसके लंड का स्पर्स ठीक सरला की बुर पर हो रहा था जिससे उसके तन बदन में भी आग लगी हुई थी और भी जल्द से जल्द सरला की बुर में समा जाना चाहता था... उसका बस चलता तो साड़ी के ऊपर से अपने लंड को उसकी बुर में डाल दिया होता... लेकिन मजबूर था क्योंकि वह भी अच्छी तरह से जानता था कि औरतों के साथ किस तरह से पेश आना है.... शुभम लगातार सरला के नितंबों से खेल रहा था और साथ ही उसकी मद भरी सी गहरी आंखों में अपने आप को डूबता हुआ महसूस कर रहा था दोनों एक दूसरे की आंखों में आंखें डाल कर देख रहे थे मौके की नजाकत को समझते हुए शुभम तुरंत अपने होंठ को उसके गुलाबी होंठ पर रखकर उसका चुंबन लेने लगा... शुभम की इस हरकत की वजह से सरला के बदन में तपिश बढ़ने लगी...
आखिरकार सरला भी एक औरत थी और कब तक अपनी भावनाओं पर काबू करके बैठी रहती और वैसे भी एक बार मर्यादा की दीवार लांघने के बाद अब वापस आना उसके लिए भी मुश्किल हुआ जा रहा था इसलिए वह भी शुभम का साथ देते हुए अपने दोनों हाथ को उसकी पीठ पर रखकर उसे उकसाने लगी। शुभम पागलों की तरह सरला के हॉट को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा मानो कि जैसे कोई मधुर रस से भरी हुई मिठाई खा रहा हो...

मानो ऐसा लग रहा था कि सरला चारों तरफ से घिर गई हो क्योंकि ऊपर से उसके गुलाबी होठों की चुसाई और नितंबों की दबाई के साथ-साथ टांगों के बीच की कचोरी जैसी फुली हुई बुर पै लंड की दस्तक उसे मदहोश किए जा रही थी। सरला से रहा नहीं गया और वह अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर हाफ पैंट के ऊपर से ही सुभम के लंड को अपनी हथेली में दबोच ली......

सससससहहहहहह......... ( लंड़ को हाथ में लेते ही सरला के मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी... क्योंकि शुभम का लंड़ पूरी तरह से तैयार हो चुका था वह मदहोश होने लगी और बेतहाशा शुभम का साथ देते हुए एक हाथ से उसका लंड दबा रही थी और उसके होठों का स्वाद चख रही थी। शुभम भी सरला के होठ चुसाई में पूरी तरह से मशगुल हो गया था। सरला की हालत को देखते हुए शुभम को छत पर बुलाने का जवाब सरला के द्वारा मिल चुका था... )

ओहहहहह...... शुभम यह तूने क्या कर दिया है कि मुझसे रहा नहीं जाता मैं अपने आपको संभाल नहीं पा रही हूं तू मुझे पागल कर दिया है.....

मेरी भी हालत खराब हो गई है चाची पता नहीं क्यों ना चाहते हुए भी मैं आपकी तरफ खींचा चला आता हु। तुम्हारी मदहोश कर देने वाली जवानी मुझे पागल बना देती है और तुम्हारी दोनों यह चूचियां न जाने कैसा आकर्षण है कि इन्हें छूने का मन करता है ।( ऐसा कहने के साथ ही शुभम अपने दोनों हाथ ऊपर की तरफ लाकर ब्लाउज के ऊपर से ही उसके दोनों कबूतरों को थाम लिया.... और जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया सरला को बहुत मजा आ रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह दबा दबा कर चूची से सारा दूध निचोड़ ड़ालैगा... श्रद्धा को दर्द हो रहा था लेकिन मजा भी उतना आ रहा था जितनी जोर से शुभम उसकी चूचियों को दबाता सरला उतनी ही जोर से अपनी हथेली का कसाव लंड़ पर बढ़ा देती जिससे दोनों को अत्यधिक उत्तेजना और आनंद की अनुभूति हो रही थी.... शुभम अब ज्यादा समय नहीं लेना चाहता था इसलिए एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर धीरे-धीरे सरला की साड़ी को उपर की तरफ उठाने लगा... और जैसे ही साड़ी घुटनों के ऊपर तक आई तो सुभम उसकी मोटी मोटी जाघ पकड़कर थोड़ा ऊपर उठा दिया और तुरंत दोनों हाथ को उसके नितंबों पर रखकर अपनी तरफ खींच लिया जिससे उसके हाफ पेंट में बना तंबु सीधे-सीधे उसकी बुर के मुख्य द्वार पर ठोकर मारने लगा.... एक बार फिर से सरला के मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी..... इस पोजीशन में नितंबों को दबाते हुए शुभम को सरला के गुलाबी होठों को चुसने मैं कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था।

दुनिया से बेखबर होकर सरला अपनी उम्र की सीमा पार करके अपने ही बेटे के उम्र के लड़के के साथ जवानी का मजा लूट रही थी... इसमें सरला की रत्ती भर भी गलती नहीं थी किंतु चुदाई का जो आनंद उसका मजा होता है... उस आनंद को लूटने के लिए बड़े-बड़े महापुरुषों का पैर डगमगा जाता है तो सरला जैसी साधारण औरत के लिए यह बहुत ही मामूली बात थी।
हालात बदलते देर नहीं लगता कुछ दिन पहले जो औरत शुभम को शक की निगाहों से देखती थी आज वह खुद उसकी बाहों में मचल रही थी उसमें समाने के लिए... सरला भले ही थोड़ी मोटी थी लेकिन इस समय शुभम के लिए वह स्वर्ग से उतरी हुई किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी उसकी भारी भरकम गाड को पकड़कर उसे जो सुख महसूस हो रहा था वह शायद ही सरला को लेकर कल्पना किया होगा उसके लंड़ में रक्त का प्रवाह इतनी तेजी से हो रहा था कि मानो अभी उसका लंड फट जाएगा। दोनों एक दूसरे के अंगों से खेलते हुए मदहोश हुए जा रहे थे... शुभम सरला के होठों के चुंबन का आनंद लेते हुए एक हाथ उसकी टांगों के बीच ले जाकर टटोलते हुए महसूस किया कि सरला ने पैंटी नहीं पहनी हुई थी जिसका मतलब साफ था कि वह पहले से ही पूरी तैयारी करके आई.. थी... पल भर में ही सुभम की हथेली सरला के मदन रस से गीली हो गई.... अपनी उंगलियों पर सरला के गीलेपन का एहसास होते हैं शुभम की प्यास बढ़ गई। वह तुरंत सरला को रेलिंग के सहारे खड़ा कर दिया और तुरंत घुटनों के बल बैठ गया देखते ही देखते वह सरला की साड़ी को कमर तक उठा दिया और उसकी कमर से नीचे के नंगे बदन को देखकर उत्तेजित होने लगा... सरला की कचोरी जैसी फुली हुई बुर को देखकर उसकी आंखों मैं चमक आ गई और वह अपने होठों को ऊस पर रखकर उसका स्वाद चखे बिना नहीं रह सका....
सरला को इतनी जल्दी यह सब होगा इसकी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए शुभम की हरकत की वजह से वह पूरी तरह से मचल गई वह इस सब के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी इसलिए उसके पूरे बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी और वह पागलों की तरह गर्म सिसकारी लेने लगी....

सरला कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उम्र के इस पड़ाव पर अपने ही छत पर इस तरह से आधी रात को अपने ही बेटे की उम्र के लड़के के साथ मस्ती भरे पल बिताएगी... शुभम पूरी तरह से मदहोश होकर अपनी जीभ जितना हो सकता था उतना बाहर निकाल कर सरला की बुर को चाट रहा था।
सरला को ईस समय इस बात की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी कि उसे कोई देख लेगा तो क्या कहेगा सारे सोसाइटी में समाज में उसकी बदनामी हो जाएगी लेकिन इसकी परवाह उसे बिल्कुल भी नहीं थी उसे तो बस आनंद लूटना था और वह लूट रही थी...

धीरे-धीरे समय आगे बढ़ रहा था तकरीबन 12:00 बजे से ज्यादा का समय हो रहा था और शुभम पूरी तरह से उसकी बुर चाटने में मस़त था। किसी दूसरे के देखे जाने का डर सरला को इसलिए नहीं था क्योंकि सरला की छत और शुभम की छत दोनों बाकी के घरों की छत के मुकाबले काफी ऊंचाई पर थे जिससे किसी दूसरे के देखे जाने की शंका बिल्कुल भी नहीं थी...
आहहहहहहह..... शुभम तूने तो मेरी बुर में आग लगा दीया है मुझसे रहा नहीं जा रहा है। शुभम अब तो बिल्कुल भी देर मत कर अपनी मोटे लंड को मेरी बुर में डालकर मेरी मस्त चुदाई कर दे।( वासना की आग में जलना पूरी तरह से जलने लगी थी उसे किसी की भी इस समय वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी उसे जमाने की समाज की ना तो शुभम के मां-बाप की बिल्कुल भी चिंता नहीं थी वह बस मस्त होना चाह रही थी।
मदहोशी के नशे में अपने मुंह से गंदी गंदी बातें बोल रही थी जिसे सुनकर तो बंद ही पूरी तरह से नष्ट हो चुका था उससे भी अब एक पल भी सब्र करना मुश्किल हुए जा रहा था... इसलिए शुभम शुक्ला को छत पर बिछे गधे की तरफ चलने के लिए इशारा करने लगा.. शुभम भी तुरंत अपनी कमीज निकालकर छत पर फेंक दिया... और देखते ही देखते सरला की आंखों के सामने अपना हाफ पैंट निकालकर पूरी तरह से नंगा हो गया सरला की आंखों के सामने अब सुभम का मोटा तगड़ा लंड हवा में लहराता हुआ नजर आ रहा था जिसे देख कर उसकी फुली हुई कचोरी जैसी बुर फुदकने लगी....
अपने मोटे तगड़े लेने को देखकर सरला की आंखों में आई चमक शुभम को साफ नजर आ रही थी शुभम आगे बढ़कर अपने दोनों हाथों से उसकी ब्लाउज के बटन खोलने लगा देखते ही देखते सरला के दोनों कबूतर ब्लाउज की कैद से आजाद हो चुके थे... चांदनी रात में शीतल हवा की छुअन से सरला के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी शोले का रूप धारण करने लगी सरला पीठ के बल लेट गई और शुभम धीरे धीरे उसकी साड़ी खोलने लगा तो सरला अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसे रोकते हुए बोली।

पूरी तरह से नंगी करेगा क्या ऐसे ही कर ले मेरे कपड़े मत उतार...

पागल हो गई हो क्या चाची बिना कपड़े उतारे कैसे मजा आएगा और किसी को आता हो तो मैं नहीं जानता लेकिन मुझे तो बिल्कुल भी मजा नहीं आता जब तक में औरतों के सारे कपड़े उतार कर उसे नंगी ना कर दूं.. तब तक मुझे उसे चोदने में बिल्कुल भी मजा नहीं आता...
( चाहती तो सरला भी यही थी कि सुभम उसे पूरी तरह से नंगी करके चोदे लेकिन ऊसे ईस बात का ड़र था की कहीं उसकी मां ना आ जाए इसलिए वह बोली... )

अगर तेरी मम्मी आ गई तो...

मम्मी नहीं आएगी मैं जानता हूं छत पर ममम्मी कभी नहीं आती।..(और इतना कहने के साथ शुभम चला कि साड़ी खोलकर उसे एक साइड रख दिया और देखते ही देखते पेटीकोट की डोरी खोल कर ऊसे नंगी कर दिया... अपने बेटे के उम्र के लड़के के सामने पूरी तरह से नंगी होने के बावजूद भी सरला के चेहरे पर उससे शर्माने के भाव बिल्कुल भी नहीं थी बल्कि वह तो एकदम उत्सुक और ललायित थी सुभम से पूरी तरह से मजे लेने के लिए।)
 
12:00 बजे से अधिक समय हो रहा था शुभम और सरला दोनों रात के अंधेरे का फायदा उठाकर अपनी छत पर संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में एक दूसरे की आंखों में झांक रहे थे। सरला के मोटे ताजे बदन को देखकर शुभम के मुंह के साथ-साथ उसके लंड में भी पानी आ रहा था। सरला की मदमस्त गदराई जवानी को देखकर सुभम की हालत खराब होने लगी।एक बार पहले ही सरला की जवानी का मजा पूरी तरह से लुट चुका था लेकिन अपनी आंखों के सामने एक बार फिर से सरला को नंगी प्ले करें उसका लंड पूरी तरह से टन टना कर खड़ा हो गया।

कहीं तेरी मम्मी आ गई तो शुभम लेने के देने पड़ जाएंगे (सरल आशंका जताते हुए बोली)

कुछ नहीं होगा चाची में पहले ही बोल चुका हूं कि मम्मी रात को कभी भी छत पर नहीं आती । (अपने खड़े लंड को एक हाथ से पकड़ कर हिलाते हुए बोला.. और यह देखकर सरला की बुर पनियाने लगी।)

बस अब देर मत करो मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया है बस एक बार इसे अपने मुंह में लेकर चूस लो ताकि मैं मस्त हो जाऊं....

छी.... मुझे अच्छा नहीं लगता। ( सुभम के मोटे तगड़े लंड को मुंह में लेकर चूसने की इच्छा तो सरला की भी हो रही थी लेकिन यु एकाएक तैयार होने में उसे शर्म महसूस हो रही थी इसलिए नाटक करते हुए बोली)

Sarlaa ki raseeli chut


अब ज्यादा नाटक ना करो चाची मुझे मालूम है कि आपको भी मेरा लंड चूसने में काफी मजा आया था।( शुभम उसी तरह से अपने लंड को एक हाथ से पकड़ कर हिलाते हुए बोला ।यह नजारा सरला के लिए बेहद मादकता से भरा हुआ था इस नजारे को देखकर सरला कुछ भी करने को तैयार थी...इसलिए शुभम को कुछ ज्यादा मशक्कत करने की जरूरत नहीं पड़ी और देखते ही देखते सरला खुद ही बैठ गई और घुटनों के बल होकर शुभम के मोटे तगड़े लंड को पकड़कर मुंह में लेकर चूसने लगी... सरला जैसी उम्र दराज औरत के मुंह में अपने मोटे तगड़े लंड को महसूस करते ही शुभम को चांद तारे नजर आने लगे।
शुभम को यकीन नहीं हो पा रहा था कि सरला जैसी औरत इतने अच्छे से लंड चूसाई कर लेती होगी... कुछ भी हो शुभम को तो स्वर्ग का सुख प्राप्त हो रहा था उसे तो बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए सरला के मुंह को ही चोद रहा था।
अद्भुत सुख का अनुभव करते हुए शुभम की आंखें बंद हो गई थी वह आनंद में सरोबोर हुआ जा रहा था साथ ही सरला को भी बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी जिंदगी में पहली बार उसने इस तरह के मोटे तगड़े लंड को चूसने का अनुभव प्राप्त की थी । उसे बहुत मजा आ रहा था।

Sarlaa ki bharibharkam lekin khubsurat gaand

सरला के लिए उसकी जिंदगी में यह पहला मौका था जब वह चांदनी रात में इस तरह से छत पर एकदम नंगी होकर अपने ही बेटे की उम्र के लड़के के साथ मस्ती कर रही थी। शुभम लगातार अपनी कमर को हीलाए जा रहा था।

चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था दूरदराज के और आस-पड़ोस के घरों में भी लालटे बंद हो चुकी थी केवल खिड़की से हल्की-हल्की डीम लाइट के जलने की प्रतिबिंब नजर आ रही थी। धीरे-धीरे छत पर चांदनी बिखरने लगी थी जो कि मौसम को और भी ज्यादा मादक बना रहा था।
आहहहहहह,,,,,,चाची बस ऐसे ही पूरा मुंह में लेकर चूसो गले तक उतार दो बहुत मजा आ रहा है चाची आहहहहहह,,,,आहहहह,,,ऊमममममम,,,,,( शुभम पागल हुआ जा रहा था वह जोर जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया था कुछ देर के लिए उसे ऐसा महसूस होने लगा कि जैसे यह सरला का मुंह नहीं बल्कि उसकी रसीली बुर है। शुभम की सांसो की गति तेज चलने लगी थी साथ ही सरला की भी हालत खराब हो रही थी क्योंकि जिस तरह से सुभम धक्के पर धक्के लगा रहा था उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी लेकिन फिर भी आनंद की अनुभूति में वह सब कुछ भूल चुकी थी। इसमें उसके अंदर इतना मादकता भरा हुआ था कि वह चाहती थी कि जितना हो सके वह सुभम के लंड को अपने गले के अंदर उतार ले। लेकिन तभी शुभम को महसूस होने लगा कि अगर वह इसी तरह से धक्के पर धक्के लगाता रहा तो उसका पानी निकल जाएगा और वह इतना जल्दी अपना पानी निकालना नहीं चाहता था इसलिए वह तुरंत अपने लंड को वापस सरला के मुंह में से खींच लिया.. तब जाकर सरला को राहत महसूस होने लगी उसकी सांसे बड़ी तेज गति से और बहुत ही भारी चल रही थी वह जोर-जोर से सांस ले रही थी लेकिन उसकी आंखों में खुमारी का नशा साफ नजर आ रहा था वह कभी ललचाए आंखों से शुभम की मोटे तगड़े लंड को तो कभी शुभम की आंखों में देख रही थी।

मजा आ गया चाची में कभी सोचा नहीं था कि आप इतने अच्छे से खंड चुस पाओगी..... ( शुभम अपनी भारी चल रही सांसो के साथ बोला। शुभम जानता था कि अब उसे क्या करना हैऔर सरला भी अच्छी तरह से जानती थी कि इसके बाद क्या होने वाला है इसलिए वह धीरे-धीरे वापस पीठ के बल लेट गई। लेकिन अभी भीवह अपनी दोनों टांगों को आपस में सटाए हुए लेटी थी जिससे ज्यादा कुछ तो नहीं लेकिन सरला की टांगों के ऊपरी छोर के कटाव के बीचो-बीच हल्के हल्के रेसमी बाल नजर आ रहे थे। शुभम की उत्तेजना को बढ़ावा देने के लिए इतना नजारा काफी था वह धीरे-धीरे खुद घुटनों के बल बैठ गया और अपने दोनों हाथों से सरला की मदमस्त चिकनी जांघों को पकड़कर उसे फैलाना शुरू कर दिया... देखते ही देखते शुभम की आंखों के सामने शर्मा की हल्के बालों से सुशोभित गुलाबी पत्तियों वाली बुर नजर आने लगी जिसे देखकर शुभम के मोटे तगड़े लंड ने सरला की मदमस्त जवानी को सलामी भरते हुए ऊपर नीचे होकर उसका पूरी तरह से दीवाना होने का ऐलान कर दिया।

उत्तेजना के मारे सरला का गला सूखता जा रहा था क्योंकि उसे अच्छी तरह से मालूम था कि जिस मोटे तगड़े लंड को वह प्यासी नजरों से देख रही है कुछ ही देर बाद वह पूरा का पूरा उसकी बुर में समाने वाला है।
इस बात का अहसास ही सरला को मदमस्त अंगड़ाई लेने पर मजबूर कर दे रहा था उसका पूरा बदन कसमसा रहा था हल्का हल्का दर्द पूरे बदन में मीठी लहर को और भी ज्यादा बढ़ा रहा था। सरला अपनी जिंदगी में कई ज्यादा पतझड़ सावन देख चुकी थी लेकिन अब जाकर उसकी जिंदगी में जो सावन की घटा लहराई थी। वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी।

दोनों काफी उत्सुक नजर आ रहे थे दोनों की आंखों में नशा छा रहा था चांदनी रात में दोनों संभोग सुख के सागर में डूबने के लिए लालायित हुए जा रहे थे। सरला की आंखों के सामने शुभम का मोटा तगड़ा लंड अंगड़ाई ले रहा था। अब शुभम से भी रहा नहीं जा रहा था वह थोड़ा और सरला की टांगों को फैला कर अपने लिए जगह बनाने लगा थूक लगाने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि उसमें से लगातार मदन रह रहा था जिसकी वजह से सरला की बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। सरला की गुलाबी छेद को देखने पर यही लग रहा था कि शुभम के मोटे लंड का सुपाड़ा सरला की गुलाबी बुरके छेद के आगे कुछ ज्यादा ही मोटा था लेकिन एक बार शुभम ने अपने पूरे लंड को उसकी बुर में डालकर अच्छे से चुदाई कर चुका था इस लिए शुभम के लंड के लिए सरला की बुर के अंदर जगह बन चुकी थी।

इस बार शुभम को सरला की गुलाबी बुरके छेद में अपना मोटा लंड का सुपाड़ा डालने में कुछ ज्यादा मशक्कत करने की आवश्यकता नहीं पड़ी देखते ही देखते शुभम अपने मोटे सुपाड़े के साथ-साथ अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया। इस समय शुभम का समूचा लंड सरला की बुर के अंदर समाया हुआ था जिससे सरला की बुर के अंदर मीठा मीठा दर्द उठने लगा था लेकिन यह दर्द ,,,,,,दर्द कम आनंद अधिक दे रहा था।
अपनी बुर के अंदर सुभम के मोटे तगड़े लंड को देखने की इच्छा वह अपने मन में दबा न सकी इसलिए अपने हाथों की कुहानियों का सहारा लेकर अपनी गर्दन उठाकर अपनी टांगों के बीच की उस जगह को देखने लगी जहां पर शुभम का पूरा लंड उसकी बुर की फांकों के बीच घुसा हुआ था। यह नजारा देखते ही बन रहा था।

सरला के मुख से गर्म सिसकारियां फूट रही थी।

सससहहहहह ,,,, आहहहहहह,,,,,ऊईईईईईईईई,,,,,मां,,,,,आहहहहहह,,, क्या डाल दिया है रे तूने ,,,,,ऊफफफफ,,,,,,

सरला की गर्म सिसकारियो की आवाज और उसके मुख से इस तरह की बातें सुनकर शुभम की हालत और ज्यादा खराब होने लगी साथ ही उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी.... अपनी उत्तेजना को काबू में करने के लिए शुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर सरला के बड़े-बड़े झूलते हुए खरबूजे को अपनी हथेली में दबोच लिया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया देखते ही देखते शुभम का मोटा तगड़ा सरला की गुलाबी बुरके के अंदर बाहर होने लगा। शुभम अपना घोड़ा दौड़ा ना शुरू कर दिया था उसे बहुत ही आनंद की अनुभूति हो रही थी चांदनी रात में छत के ऊपर वह अपनी पड़ोसन सरला की चुदाई कर रहा था जिसमें सरला उसका पूरा साथ दे रही थी। शुभम जितना जोर लगा कर उसकी चूचियों को दबाता सरला को उतना ही ज्यादा मजा आता हर धक्के के साथ सरला पीछे की तरफ लुढ़क जा रही थी उसके लिए जाती हुई चूचियां किसी फड़फड़ाते हुए कबूतर की तरह नजर आ रहे थे जो कि शिकारी के हाथ लग गए थे। शुभम बिना रुके धक्के पर धक्के लगाए जा रहा था।
छत पर किसी के भी आने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी शुभम अच्छी तरह से जानता था कि रात के वक्त उसके बाद कभी भी छत पर नहीं आती थी इसलिए वह पूरी तरह से निश्चिंत होकर सरला की चुदाई में मगन हो गया था।

हर धक्के के साथ सरला के मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ रही थी जो कि शुभम का हर धक्का काफी तगड़ा मालूम पड़ रहा था। अगर यही चुदाई वह पलंग पर करता तो पलंग चरमराने लगता। फच्च फच्च की आवाज और गर्म सिसकारियों की मधुर ध्वनि पूरे छत पर सुनाई दे रही।
थी। जितनी तेजी से वह बिना रुके अपनी कमर हिला रहा था सरला यह देखकर एकदम दंग रह गई इसलिए क्योंकि कोई भी मर्द होता तो इतनी तेज धक्के और इतनी देर तक लगाने के बाद वह जरूर थक जाता लेकिन शुभम पर इसका किसी भी प्रकार से कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा था वह जिस लय में पहले शुरू किया था उसी लय पर लगातार उसकी चुदाई जारी रखे हुए था।
सरला को चोदतेसमय वह कभी दाईं चूची को मुंह में लेकर पीने लगता है तो कभी बाय दोनों चुचियों का एक साथ मजा लेते लेते वहां सरला की जबरदस्त चुदाई करने में लगा हुआ था। थोड़ी ही देर में सरला के मुख से निकलने वाली गर्म शिकारियों की आवाज तेज हो गई शुभम को समझते देर नहीं लगी कि सरला झड़ने वाली थी इसलिए वहां तुरंत अपने दोनों हाथ को उसकी पीठ के पीछे ले जाकर उसे कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया और जोर-जोर से कमर हिलाना शुरू कर दिया ऐसा करने में सरकार को काफी उत्तेजना और आनंद की अनुभूति होने लगी वह भी अपने बांहों मैं शुभम को जकड़ कर उसे से चुदवाने का आनंद लूटने लगी।

आहहहहहह,,,,आहहहहहह,,,आहहहहहह,,,सुभम,,,,,ओहहहहहह ,,,,,में झड़ने वाली हूं,,,,आहहहहहह,,,, शुभम और जोर से धक्के लगा और जोर से,,,,(सरला के मुंह से इस तरह की बात सुनकर सुभमम अपनी रफ्तार और ज्यादा बढ़ा दिया...सरला शुभम के इतने तेज धक्कों को बर्दाश्त नहीं कर पाई और भलभलाकर झड़ने लगी... सरला एक बार झड़ चुकी थी लेकिन शुभम अभी भी झड़ने का नाम नहीं ले रहा था इसलिए शुभम अपनी स्थिति को बदलते हुए सरला को घुटनों के बल बैठाकर घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी कमर थाम के पीछे से उसकी बुर में लंडडालकर चोदना शुरु कर दिया थोड़ी ही देर में सरला फिर से तैयार हो गई और घोड़ी बनकर शुभम से चुदवाने का मजा लेने लगी। तकरीबन 15 मिनट की जबरदस्ती चुदाई* के बाद शुभम भी सरला की बुर में झड़ गया। शुभम छत पर अंधेरे का फायदा उठाकर सरला को सुबह के 4:00 बजे तक चोदता रहा। सरला एक दम मस्त हो चुकी थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह सारी रात अपने ही बेटे की उम्र के लड़के के साथ चुदवाने* का आनंद ले रही थी।

अब यह सिलसिला शुरू हो चुका था शुभम का सरला के घर आना-जाना शुरू हो गया था और वह कभी भी सरला के घर जाकर उसकी चुदाई कर देता था सरला को भी अब शुभम की आदत पड़ चुकी थी। लेकिन कुछ दिनों से सरला का मन उदास रहने लगा था।सरला की उदासी शुभम को भी नजर आ रही थी लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार सरला उदास क्यों है ऐसे ही एक दिन सरला शुभम से संभोगरत हुए शुभम को अपनी उदासी का कारण बता दि लेकिन उसकी उदासी का कारण जानकर शुभम काफी खुश हो गया लेकिन अपनी खुशी अपने चेहरे पर जाहीर नहीं होने दिया। सरला की उदासी का कारण थी रुची जो कि अब वापस आना चाहती थी और वह भी रविवार को लेकिन सरला को अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि उसे अब शुभम की आदत पड़ चुकी थी जो कि रुचि के आने के बाद से वह कभी भी शुभम से संभोग का सुख नहीं भोग पाती। इसी बात से सरला उदास थी लेकिन शुभम रुचि के आने की खबर सुनकर अंदर ही अंदर खुश होने लगा क्योंकि रुचि को लेने के लिए उसे ही जाना था अब उसे बेसब्री से रविवार का इंतजार होने लगा।
 
सरला की बात सुनकर शुभम काफी खुश नजर आ रहा था हालांकि यह बात सरला के लिए अच्छी तो बिल्कुल भी नहीं थी अभी के हालात को देखते हुए क्योंकि सरला को अब सुभम के मोटे तगड़े लंड से चुदने की आदत हो चुकी है जो कि रुचि के आ जाने के बाद से यह सिलसिला खत्म होता नजर आ रहा था लेकिन कर भी क्या सकती थीं,, रुचिका वह अपना घर था वह जब चाहे तब अपने घर आ जा सकती थी।
लेकिन अब कर भी क्या सकती थी कैसे भी करके वह अपना मन मार कर रहने के लिए तैयार हो गई थी लेकिन अपनी मर में निश्चय कर ली थी कि मौका जब भी उसे मिलेगा वह शुभम से संभोग सुख जरूर प्राप्त करेगी.... क्योंकि सरला अच्छी तरह से समझ रही थी और महसूस कर रही थी कि जब जब शुभम उसकी बुर में लंड डालकर चुदाई करता था तब तब उसे एक नया ही अनुभव और आनंद प्राप्त होता था जैसा कि आज तक उसे कभी भी नहीं हुआ था ।इसलिए तो वह शुभम के साथ संभोग रत होकर सारी दुनिया को भूल जाती थी वह यह भी भूल जाती थी कि सुभम और उसके बीच की उम्र की जो खाई है वह कभी भी पूरी होने वाली नहीं थी दोनों के बीच की उम्र की सीमा लगभग मां बेटे के सामान ही थी लेकिन फिर भी अपनी वासना और जरूरत के आधीन होकर ऊसने जो कदम आगे बढ़ा कर शुभम से चुदवाने काकार्यक्रम प्रारंभ की थी व लगता नहीं था कि वह इतनी जल्दी समाप्त हो जाएगा।
शुरु शुरु में सरला को शुभम से संपूर्ण रूप से नंगी होकर चुदवाने में थोड़ी सी झिझक होती थी लेकिन धीरे-धीरे यह झिझक पूरी तरह से खत्म हो गई थी अब तो उसकी आदत हो चुकी थी कि शुभम से एकदम नंगी होकर चुदाई करवाने की।

दूसरी तरफ शुभम अपने कमरे में बैठकर अपनी जिंदगी में बीत चुके पर के बारे में सोच रहा था कि उसकी जिंदगी इस तरह से मोड़ लेगी ,,उसे यकीन नहीं था। वह भी बहुत सीधा-साधा दूसरे लड़कों की तरह धीरे-धीरे उसके अंदर असामान्य ज़ोकी सामान्य ही थे लेकिन जिस तरह के बदलाव आना शुरू हुआ उस पर खुद उसे यकीन नहीं हो रहा था।
बिस्तर पर लेटे लेटे यही सब याद कर रहा था।उसे सब कुछ अच्छी तरह से याद आ रहा था क्या हुआ पहली पहली बार अपनी मां के प्रति आकर्षित होना शुरू हुआ था उसे सब कुछ याद था जब वह शीतल मैडम की पार्टी में अपनी कार से जा रहे थे और रास्ते में ही बारिश पर जाने की वजह से पेड़ के नीचे रात भर जिस तरह से दोनों के बीच के पवित्र रिश्ते तार-तार हुए थे। तूफानी बारिश में पेड़ के नीचे के संभोगनिय दृश्य को याद करके इस समय भी वह काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था। शुभम को यह बात अच्छी तरह से मालूम थी कि उसकी मां बहुत ही ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी थी जिस वजह से मोहल्ले के सभी उसकी ताक में लगे रहते थे। सुभम कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत उसे चोदने को मिलेगी और जो कि उसकी मा ही थी। उस समय के हालात को देखते हुए शुभम इतना तो समझ गया था कि यह खान से कभी भी ताली नहीं बजती अगर उसकी मां की प्रति उसके अंदर आकर्षण था तो उसकी मां भी अपनी प्यासी जवानी को लेकर परेशान थी तभी तो दोनों के बीच इस तरह के रिश्ते कायम हुए। दोनों के अंदर शारीरीक जरूरतों की वजह से ही वासना के बीज पनपने शुरू हुए थे जो कि इस समय एक वृक्ष की तरह मजबूत हो चुका था। और इसी सबके जरूरतों के चलते शुभम को वह सब कुछ मिला जो एक जवान होते लड़के को जवानी के दिनों में मिलना चाहिए था। शुभम को सब कुछ अच्छी तरह से याद था जब वह पहली बार अपनी मां की रसीली बुर के दर्शन किया था। पहली बार जब वह अपनी मां की बुर के दर्शन किया था तो उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी आंखों ने ये कौन सा दृश्य देख लिया है कौन सा अंग देख लिया है उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था अपनी मां की रसीली बुर को देखते ही उस पर मदहोशी छाने लगी थी मानो कई बोतलों का नशा करके बैठा हो। और उसे यह भी याद है कि जैसा असर उस पर हो रहा था ठीक वैसा ही असर उसकी मां पर भी हो रहा था क्योंकि वह भी उसके मोटे तगड़े लंड को देखकर एकदम मचल उठी थी उसे अपनी बुर के अंदर लेने के लिए और सही मायने में देखा जाए तो उसकी मां ने ही उसे उकसाई थी उसकी बुर में लंड लेने के लिए शुभम को तो संभोग का का खा गा घा भी नहीं आता था। एक औरत के साथ कैसे संभोग किया जाता है एक मर्द को औरत के साथ क्या करना चाहिए वह सब कुछ शुभम को उसकी मां ने ही सिखाई थी। यह सब सोचकर शुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था और पिछली घटनाओं को लेकर उसके मन में किसी भी प्रकार का पछतावा नहीं था क्योंकि जो कुछ भी उन दोनों मां-बेटे के बीच हुआ था वह दोनों की रजामंदी से हुआ था।
Shubham ko apni ma ki badi badi gaand or uski raseeli boor yaad a rahi thi..

रात के करीब 9:00 बज रहे थे और शुभम अपने बिस्तर पर लेट कर यह सब सोच रहा था और अपनी मां के साथ बिताए हुए पल को याद करके वह पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबता चला जा रहा था उसके पजामे में संपूर्ण रूप से तंबू बन चुका था। इस समय से एक बुर की जरूरत थी वह बुर में लंड डालकर अपनी गर्मी को शांत करना चाह रहा था। लेकिन इस समय उसके पास बुर् का जुगाड़ बिल्कुल भी नहीं था।
उसकी मां थी जोकी इस समय रसोई में खाना बना रही होगी। एक बार तो मन में आया कि रसोई में जाकर अपनीकी मां की चुदाई कर दे। लेकिन तभी ख्याल आया कि इस समय उसके पापा घर पर ही होंगे इसलिए अपने इस ख्याल को मन में से निकाल दिया वह जानता था कि कुछ दिनों से उसके पापा घर पर एकदम समय से पहुंच जाते हैं और कुछ दिनों से वह पड़ोस की सरला चाची में ही व्यस्त हो गया था इसलिए अपनी मां पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाया और वैसे भी चाहता तो भी वह अपनी मां की चुदाई नहीं कर पाता क्योंकि रात को उसके पापा के साथ ही सोती थी।
Shubham acchi tarah se janta tha ki uski ma ki gaand duniya ki sabse khubsurat gaand he

ऐसे में शुभम को बुरका स्वाद पड़ोस की सरला चाची के पास मिल सकती थी लेकिन अभी खाना खाने का समय हो रहा था इसलिए अभी जाना ठीक नहीं था वह मन में सोचा कि खाना खाने के बाद मैं किसी न किसी बहाने से चला जाएगा। यही सोचकर वह पजामे के ऊपर से ही अपने खड़े लंड को दबाना शुरू कर दिया कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।

शुभम बेटा खाना तैयार हो गया है मैं टेबल पर लगा दी हूं जल्दी से हाथ मुंह धो कर आ जा ओ।

ठीक है मम्मी आप चलो मैं आता हूं

जल्दी आना । (इतना कहकर निर्मला वापस चली गई.. लेकिन अपनी सुरीली मधुर आवाज के साथ ही शुभम के तन बदन में खलबली मचा गई। शुभम एक बार फिर से अपने मन में सोचने लगा कि वाकई में उसकी मां दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत है क्योंकि अब तक वा ना जाने कितनी औरतों की चुदाई कर चुका था लेकिन जो मजा उसकी मां के साथ संभोग रत होने में उसे आता था ऐसा मजा उसे किसी भी औरत के साथ नहीं आया था इसलिए तो वह अपनी मां का पूरी तरह से दीवाना हो चुका था और इस समय जो कि उसका लंड पूरी औकात में आ चुका था उसकी इच्छा हो रही थी कि अपनी मां की चुदाई कर दे लेकिन घर पर उसका बाप मौजूद था यह ख्याल मन में आते ही उसकी सारी दीवानगी की फुरृर हो गई। थोड़ी देर बाद वह बेमन से फ्रेश होकर खाने के टेबल पर पहुंचा तो देखा कि कुर्सी पर केवल उसकी मां ही बेठी हुई थी और उसके पापा दिखाई नहीं दे रहे थे तो वह अपनी मां की तरफ देखते हुए कुर्सी पर बैठते हुए बोला।)

पापा कहां है मम्मी....?

आज तेरे पापा घर पर नहीं आएंगे वह ऑफिस में ही रुकेंगे उन्हें कोई जरूरी काम है।(निर्मला कामुक मुस्कान बिखेरते हुए बोली... शुभम अपनी मां की इस तरह की मुस्कान का मतलब अच्छी तरह से समझता था। निर्मला का इस तरह से मुस्कुराने का मतलब साफ था कि रास्ता पूरी तरह से किलियर है और यह बात सुभम अच्छी तरह से समझ गया था इसलिए अपनी मां की बात सुनकर एकदम से चहकते हुए बोला)

क्या बात कर रही हो मम्मी सच में आज पापा घर पर नहीं आएंगे।

हां तेरे पापा आज रात घर पर नहींआएंगे लेकिन तू क्यों इतना खुश हो रहा है।( खाने की प्लेट को सुभम की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोली।)

खुश होने वाली बात तो है ही मम्मी काफी दिनों बाद हम दोनों को आज मौका जो मिला है।

मौका तो तेरे पापा जब घर पर होते थे तो भी तेरे पास होता था लेकिन तू ही उस मौके का फायदा नहीं उठा पा रहा था ना जाने इन दिनों तेरा ध्यान कहां पर लग गया है कि तूने मुझ पर जरा भी ध्यान ही नहीं दिया।
( निवाला मुंह में डालते हुए बोली।)

मेरा ध्यान तो मम्मी तुम्हारे ऊपर ही था लेकिन मुझे डर लगा रहता था कि कुछ कर ले जाऊंगा और पापा देख लिए तो मुसीबत हो जाएगी।

चल कोई बात नहीं जल्दी जल्दी खाना खा ले और सारा काम हो जाने के बाद मेरे कमरे में आना तुझे कुछ दिखाना है।
( अपनी मां की बातें सुनकर सुभम के सोए हुए लंड में एक बार फिर से तूफान सा उठने लगा जो कि बड़ी मुश्किल से वह शांत करके कमरे से बाहर आया था जिस तरह की हालत शुभम की थी उसी तरह की हालत उसकी मां की भी थी काफी दिनों बाद वह भी आजअपने बेटे के मोटे तगड़े लंड से चुदने का आनंद लेगी काफी दिनों से वह अपने पति के छोटे लंड से बेमन से चदाई करवा कर अतृप्त हो चुकी थी। आज फिर से वह अपने बेटे से जमकर चुदाई करवा कर अपनी प्यास बुझा ना जाती थी। इसलिए दोनों ने ही जल्दी से अपना खाना खत्म कर लिया शुभम कुछ देर के लिए अपने कमरे में चला गया और निर्मला रसोई का काम निपटा कर अपने कमरे में चली गई। शुभम बेसब्री हुआ जा रहा था अपनी मां के कमरे में जाने के लिए और निर्मला भी अपने बेटे का इंतजार कर रही थी कब दरवाजा खुला और उसका बेटा कमरे में दाखिल हो जाए। रात के 10:30 बज रहे थे और शुभम समझ गया कि उसकी मां सारा काम निपटा कर अपने कमरे में होगी इसलिए वह अपनी मां के कमरे में जाने के लिए अपने कमरे से बाहर आ गया और अपनी मां की कमरे की तरफ जाने लगा।
 
शुभम धीरे-धीरे अपनी मां के कमरे की तरफ जा रहा था। उसका दिल जोरों से धड़क रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां क्या दिखाने के लिए उसे रात को अपने कमरे में बुलाई है लेकिन इतना तो वह जानता ही था कि इस तरह से अपने कमरे में बुलाने का उसका इरादा क्या है और वैसे शुभम का भी वही इरादा था क्योंकि घर पर उसके पापा नहीं थे और घर में केवल शुभम और उसकी मा ही थी ऐसे में शुभम को आज फिर से एक बार अपनी मां की खूबसूरत रसीली बुर् का स्वाद चखने का मौका मिल जाएगा। इसलिए तो आने वाले पल के बारे में सोच कर ही उसके पजामे में तंबू तन गया था। कुछ भी हो शुभम का काम तो बन गया था वैसे भी उसे रसीदी फूली हुई कचोरी जैसी बुर की सख्त जरूरत थी और वह आवश्यकता इस समय उसकी मां की पूरी कर सकती थी। अपनी मां के कमरे के करीब पहुंचते-पहुंचते शुभम लगातार पजामे के ऊपर से ही अपने तने हुए लंड को दबा रहा था।
शुभम यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी असली जरूरत केवल उसकी मां ही पूरी कर सकती थी और वही पूरी करती आ रही थी बाकी सब औरतों के साथ तो वह केवल मस्ती की उम्मीद से ही उनके साथ संभोग करता है लेकिन असली संभोग का मजा जो उसकी मां के साथ आता है जैसा मजा उसे किसी के साथ नहीं मिलता।

जो हाल शुभम का कमरे के बाहर हो रहा था वही हाल निर्मला का कमरे के अंदर हो रहा था। कुछ दिनों से अपने पति से बेमन से उसके छोटे लंड से चुद कर वह एकदम अतृप्त हो चुकी थी उसमें प्यास कुछ ज्यादा ही बढ़ चुकी थी और वह अपनी प्यास बुझाने के लिए आज पूरी तरह से उत्सुकऔर कार्यरत हो चुकी थी आज वह अपने बेटे को एक बार फिर उसे अपनी बाहों में भर कर उससे प्यार करना चाहती थी अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को जो कि अब उसकी बुर के अंदर अपना सांचा बना चुका है एक बार फिर से उसी सांचे में अपनी बुर की गहराई को ढालना चाह रही थी। निर्मला को अपने बेटे के साथ किए गए हर एक संभोग का हर एक पल का का एहसास अभी तक उसके तन बदन में हलचल मचाए हुए। उसे अच्छी तरह से याद है कि जब उसका बेटा पीछे से उसकी चिकनी कमरथामकर उसकी बड़ी-बड़ी गांड़ पर लंड का दबाव देते हुए जबरदस्त धक्के लगाता था तब वह सातवें आसमान में उड़ने लगती थी उसे अपने बेटे से चुदाई करवाने में एहसास होता था कि जैसे वह कोई पंछी हो और आसमान में आजादी की हवा का आनंद ले रही हो।

उन्हीं पल को याद करके निर्मला की हालत खराब हुए जा रही थी उसकी टांगों के बीच की उस पतली सी दरार में से मदन रस बह रहा था जिससे उसकी पेंटी गीली हो रही थी । निर्मला भी आईने के सामने अपने आप को तैयार कर रही थी और इस तरह से तैयार होना भी तो शुभम की ही वजह से वह दुबारा सीख पाई थी वरना जिंदगी में आए उतार-चढ़ाव की वजह से वह ना खुश होकर अपनी जिंदगी को बस जिए जा रही थी।
धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए शुभम कुछ ही देर में अपनी मां के कमरे के सामने खड़ा हो गया कमरे में से आ रही हल्की रोशनी की वजह से उसे समझते देर नहीं लगी कि उसकी मां ने उसके लिए कमरे का दरवाजा खुला ही छोड़ रखी थी बस उसे धक्का लगा कर उसे खोलने की जरूरत थी।और धड़कते दिल के साथ शुभम अपनी मां के कमरे के दरवाजे को हल्के से धक्का लगाया कि दरवाजा खुद-ब-खुद पूरा खुल गया।... कमरे का दरवाजा खोलते ही सदन की नजरें कमरे के अंदर चारों तरफ दौड़ने लगी और तुरंत उसकी नजरों ने जो नजारा देखा उसे देखते ही शुभम के होश उड़ गए उसके तन बदन में मानो करंट सा लग गया है उत्तेजना और मादकता के एहसास में उसका गला सूखने लगा उसने आज तक अपनी मां को इस अवस्था में बिल्कुल भी नहीं देखा था हालांकि वह अपनी मां को संपूर्ण रूप से नंगी और खुद ही अपने हाथों से नंगी कर चुका था लेकिन आज जो नजारा उसकी आंखों के सामने था उसे देखते ही उसे पोर्न मूवी की कोई मदमस्त कर देने वाली हीरोइन याद आ गई।
कई दिनों बाद अपनी मां की मद मस्त जवानी देख कर सुभम की आंखें फटी की फटी रह गई। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी आंखें जो देख रही है वह वाकई में सच उसे सब कुछ सपना सा लग रहा था।
सुभम दरवाजे पर खड़ा का खड़ा रह गया ऐसा लग रहा था कि जैसे मानो देहलीज पर उसके पांव जम गए हो। आज ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी मां को पहली बार देख रहा हो उसके अंदर की उत्तेजना उन्माद उत्सुकता सब कुछ पहले दिन की तरह महसूस हो रही थी।
आखिर शुभम की यह दशा भला क्यों ना हो उसकी आंखों के सामने मंजर ही कुछ ऐसा उन्माद और मादकता से भरा हुआ था कि उसकी जगह कोई भी होता उसकी वही हालत होती।

शुभम की आंखों के सामने दुनिया की सबसे खूबसूरत और सेक्सी औरत उसकी मां खड़ी थी,, जिसकी पीठ दरवाजे की तरफ थी और वह अपने बालों को संवार रही थी उसके बदन पर वस्त्र होते हुए भी ना के बराबर थे। क्योंकि निर्मला ने कपड़े ही कुछ इस तरह की पहन रखे थे कि ना चाहते हुए भी उसके बदन का हर एक वह हिस्सा नजर आ रहा था जिसको देखने के लिए दुनिया का हर मर्द लालायित रहता है।
निर्मला इस समय लाल ट्रांसपेरेंट छोटी सी नाइट ड्रेस पहनी हुई थी । जो की बहुत ही छोटी थी ऐसा लग रहा था मानो किसी छोटी बच्ची के लिए ही वह ड्रेस बनी हुई है बस थोड़ा सा उसका फैलाव ज्यादा था। शुभम अपनी फटी आंखों से सब कुछ देख रहा था अपनी मां की मद मस्त जवानी देखकर उसकी आंखें चौंधिया जा रही थी ऐसा नहीं था कि वह अपनी मां को पहली बार देख रहा है पहले भी वह देख चुका था लेकिन आज का नजारा कुछ और था। नाईट ड्रेस ट्रांसपेरेंट होने की वजह से उसकी मां के बदन का हर किस्सा बहुत ही साफ तौर पर नजर आ रहा था वस्त्र में होने के बावजूद भी ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में निर्मला का खूबसूरत बदन और भी ज्यादा चमक रहा है। वैसे भी निर्मला की खूबसूरत बदन का हर एक कटाव बेहतरीन मादकता के सांचे में ढाला हुआ था। निर्मला के बदन के हर एक अंग में से मदन रस झर रहा था।
निर्मला खनकी से अपनी रेशमी बालों को संभाल नहीं थी जिसकी वजह से उसके दोनों हाथ ऊपर की तरफ थे और उसकी नाइट ड्रेस इतनी ज्यादा छोटी सी थी जिससे पूरी की पूरी उसके गोलाकार नितंबों के आधे भाग के ऊपर तक ड्रेस की किनारी पहुंच गई थी जिसकी वजह से निर्मला की मदमस्त गांड का आधा से ज्यादा भाग साफ साफ नजर आ रहा था। अपनी मां की गोलाकार गोरी गोरी गांव की खबर शुभम की सांसे थम गई एक पल के लिए उसे ऐसा लगा कि जैसे उसकी मां ऊस छोटी सी ड्रेस के अंदर बिल्कुल नंगी है लेकिन तभी उसे हल्की सी पेंटिं की ऊपरी सतह की डोरी नजर आई तब जाकर उसे एहसास हुआ कि उसकी मां ने आज पेंटी भी एकदम पोर्न मूवी की हीरोइन की तरह ही पहनी हुई है जोकि पेंटिं की पतली सी डोरी उसकी गोलाकार गांड के बड़े-बड़े दोनों फांकों के बीच की गहराई में जाकर छुप गई है। इस बात का अहसास होते ही सुभम के पजामे मैं उसका लंड गदर मचाने लगा जो कि पूरा का पूरा तंबू की शक्ल में आ चुका था। शुभम बड़ी मुश्किल से अपने आप को संभाले हुए था अपनी मां की मदमस्त जवानी के जबरदस्त बवंडर के हिचकोले से अपने आप को वह बड़ी मुश्किल से निकाला ही था कि उस पर उसकी मां की खूबसूरत मदमस्त जवानी का एक और हमला हुआ जब शुभम की नजर धीरे-धीरे उसके बदन के ऊपरी सतह पर गई तब उसे इस बात का अहसास हो गया कि उसकी मां ने ब्रा नहीं पहनी हुई थी मतलब कि उसके दोनों खरबूजे एकदम अपनी औकात में आ चुके थे। इस बात का अहसास होते ही सुभम की हालत ज्यादा खराब होने लगी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसके पांव आगे नहीं बढ़ रहे थे। उसके धड़कनों की गति तेज हो गई थी।ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि इतनी देर से दरवाजे पर खड़े शुभम के आने का एहसास निर्मला को ना हुआ हो जैसे ही दरवाजे पर शुभम पहुंचा था उसे इस बात का एहसास हो गया था कि उसका जाने बहार आ गया है और उसे आया हुआ देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी।
दरवाजे पर खड़े शुभम के आने के एहसास से ही निर्मला की बुर गीली होने लगी थी । आईने में शुभम के चेहरे के बदले हुए हाव भाव को देखकर निर्मला समझ गई थी कि उसकी छोटी सी ड्रेस को देखकर शुभम की आंखें फटी की फटी रह गई है उसके होश उड़ गए हैं। अपने बेटे की इस हालत कोदेखकर वह अंदर ही अंदर खुश होने लगी ऐसी खुशी उसे उस पल की याद दिला दी जब वह पहली बार तूफानी बारिश में पेड़ के नीचे अपनी कार खड़ी करके अपने बेटे के सामने ही अपनी साड़ी उठाकर अपनी बुर से पेशाब की धार मारते हुए पेशाब कर रही थी और उस उस नजारे को देखकर शुभम की हालत एकदम खराब हो गई थी।
Ek baar for se shubham or normal a ka is tarah se milan hone Walla tha

निर्मला लगातार अपने गीले बालों को कंघी से सवार रही थी शुभम को समझते देर नहीं लगी कि उसकी मां कमरे में आने से पहले एकदम नहा कर आई है। तभी तो उसके गीले बालों में से आ रही है खुशबू पूरे कमरे में फैली हुई थी। अब शुभम से वही दरवाजे पर खड़े रहना मुश्किलों में जा रहा था इसलिए वह दरवाजे पर दस्तक देते हुए बोला।

क्या मम्मी ने अंदर आ सकता हूं।
( अपने बेटे की इस बात को सुनकर निर्मला अपनी गर्दन घुमा कर आश्चर्य से अपने बेटे की तरफ देखते हूए बोली।)

क्या बात है आज बहुत है शालीनता से इजाजत मांग रहा है मेरे कमरे में आने के लिए मुझे तो लग रहा था कि जैसे कमरे में आते हैं तो मुझे अपनी बाहों में भर लेगा और शुरू हो जाएगा। ( इतना कहने के साथ ही हो वापस आईने की तरह खुल गई और फिर से अपने गीले बालों को सवारने लगी।)
Nirmal a ko shubham se piche se chudwane me maja aata tha.


कमरे में आने से पहले इरादा कुछ मेरा भी इसी तरह का था लेकिन कमरे के अंदर का नजारा देखकर मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूं। ( इतना कहने के साथ ही सुगम कमरे में दाखिल हुआ और कमरे के दरवाजे को बंद करने लगा तो वापस निर्मला उसे टोकते हुए बोली।)

क्या तुझे लगता है कि आज कमरे का दरवाजा बंद करना जरूरी है वैसे भी घर में मेरे और तेरे सिवा तीसरा कोई भी नहीं है।

लगता तो ऐसा कुछ भी नहीं है लेकिन फिर भी दरवाजा बंद करने में ही भलाई है ।(और इतना कहने के साथ ही वह कमरे के दरवाजे को लॉक कर दिया।)

मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि जो कुछ भी मैं देख रहा हूं वह सच है ,,,,, मुझे तो सब कुछ सपना जैसा लग रहा है।( शुभम अपनी मां की तरफ आगे बढ़ता हुआ बोला और उसकी यह बात सुनकर निर्मला मंद मंद मुस्कुरा रही थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि वह क्या कहना चाह रहा है।)

क्या देख रहा है तू? और तुझे क्या सपना जैसा लग रहा है?

यही कि मम्मी आप इतनी छोटी सी ड्रेस पहनी हुई है मुझे तो बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा है और सच कहूं तो मुझे ऐसा लग रहा है कि जैसे मेरी आंखों के सामने किसी पोर्न मूवी की हीरोइन खड़ी है।
( अपने बेटे के मुंह से अपनी छोटी सी ड्रेस और अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर निर्मला मंद मंद मुस्कुरा रही थी उसे अपने बेटे के मुंह से तारीफ सुनना पहले से ही अच्छा लगता था।)

क्यों क्या मैं इस छोटे से ड्रेस में तुझे अच्छी नहीं लग रही हुं।( निर्मला अपने बेटे की तरफ नजर घुमा कर देखते हुए बोली।)

बहुत खूबसूरत लग रही हो मम्मी और सेक्सी भी मैं तो हमेशा से चाहता था कि आप इसी तरह की छोटी ड्रेस पहनकर मेरे सामने आया करें।
( निर्मला अपने बेटे की बातें सुनकर खुश हो रही थी और वह अपने बालों को संवार चुकी थी । शुभम अपनी मां के बेहद करीब खड़ा था और इसलिए निर्मला का दिल जोरों से धड़क रहा था ना जाने क्यों उसे आज अपने बेटे का इस तरह से करीब आना एक अजीब सा एहसास करा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसका बेटा इस तरह के मादक माहौल में पहली बार उसके करीब आ रहा है। उत्तेजना के मारे निर्मला की रसीली बुर बार-बार पानी छोड़ रही थी। शुभम की भी हालत बदतर में जा रही थी अपनी मां की मदमस्त जवानी देख देख कर उसका हर एक अंग उत्तेजना की लहर में डूबता चला जा रहा था उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था। शुभम को इस बात का एहसास अच्छी तरह से हो रहा था कि उसके लंड की हर एक नसों में रक्त का प्रवाह बड़ी तेजी से हो रहा है।सरदार इस बात का था कि कहीं उसका लंड उत्तेजना के मारे फट ना जाए क्योंकि उसमें हल्का हल्का दर्द होने लगा था जो कि वह अच्छी तरह से जानता था कि बिना उसकी मां की बुर में डाले उसके लंड का दर्द शांत होने वाला नहीं है। लेकिन अभी उसे मंजिल तक पहुंचने में थोड़ा वक्त था क्योंकि इस बात का अहसासअच्छी तरह से था कि धीरे-धीरे आगे बढ़ने में ही उसकी मां को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति होती है और वह अपनी मां की आनंद को इस तरह से अपने उतावलापन की वजह से खत्म नहीं करना चाहता था। और अपनी मां के कमरे में आकर उसे छोटे से ड्रेस में देख कर वह इस बात को भी अच्छी तरह से समझ गया था कि उसकी मां क्या दिखाने के लिए उसे अपने कमरे में बुलाई थी और यह बात बताने की आवश्यकता शायद निर्मला को भी अब बिल्कुल भी नहीं रह गई थी वह भी समझ गई थी कि वह जिस चीज को दिखाना चाहती थी उसका बेटा देख कर समझ गया होगा दोनों की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी रात को रंगीन करने में। धीरे-धीरे कमरे का वातावरण पूरी तरह से मादकता से भरता चला जा रहा था ।
आईने के सामने निर्मला खड़ी थी और ठीक उसके पीछे सुभम जोकी
अपनी मां को आईने में देखते हुए पजामे के ऊपर से ही अपने खड़े लंड को दबाकर अपनी उत्तेजना का एहसास अपनी मां को करा रहा था।
निर्मला भी अपने बेटे की हरकत को आईने में देखकर उत्तेजित हुए जा रही थी। अपने अंदर की उत्तेजना और अपने बेटे की उत्तेजना को देखकर निर्मला अच्छी तरह से समझ गई कि आज की रात को ज्यादा ही रंगीन होने वाली है।
 
शुभम अपनी मां के ठीक पीछे खड़ा था जहां से उसे अपनी मां की खूबसूरत बदन का हर एक हिस्सा साफ तौर पर नजर आ रहा था।
अपने बेटे को अपने बेहद करीब खड़ा हुआ देखकरनिर्मला एकदम से शर्मा गई वह अपनी नजरें इधर-उधर घुमा कर अपने शर्म को दबाने की कोशिश कर रही थी लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था निर्मला अपने बदन में अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी जिससे उसकी बुर गिली होने लगी थी साथ ही उसकी पतली डोरी जैसी पेंटी भी गीलेपन के एहसास से निर्मला की खूबसूरत चिकने मखमली बदन पर से फिसलने के लिए मचल रही थी। शुभम अपनी मां को आईने में एकटक देखे जा रहा था उसे इस तरह से देखता हूआ पाकर निर्मला से रहा नहीं जा रहा था वह उत्तेजित स्वर में बोली।

ऐसे क्या देख रहा है?

मैं देख रहा हूं कि आज आप इतनी ज्यादा खूबसूरत लग रही हो सच कहूं तो खूबसूरत शब्द भी आपकी खूबसूरती के आगे कम पड़ जाएगा बहुत ही ज्यादा सेक्सी लग रही हो। ( शुभम आईने में अपनी मां की आंखों में झांकते हुए बोला।)
Nirmala ki madmast gaand..

तो क्या

मैं पहले तुझे खूबसूरत नहीं लगती थी।

नहीं मेरे कहने का यह मतलब नहीं था। मैं यह कहना चाह रहा था कि आज आप छोटे से नाईट ड्रेस में बला की खूबसूरत लग रही हो।मैंने इससे पहले कभी भी आपको इतने छोटे से ड्रेस में नहीं देखा हूं।

बिना कपड़ों के तो देखा है ना ...(निर्मला मादक स्वर में बोली)

बिना कपड़ों में तो आप एकदम कयामत लगती हो मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि दुनिया में आपके जैसी खूबसूरत औरत दूसरी कोई भी नहीं होगी। (इतना कहने के साथ शुभम अपने दोनों हाथ ऊपर की तरफ उठाकर अपनी मां के कंधों पर रख दिया और उसे हल्के से दबाते हुए) सच कहूं तो मम्मी आपके खूबसूरत बदन पर यह छोटा सा ड्रेस और भी ज्यादा फब रहा है। ( इतना कहते हुए शुभमअपनी मां के गर्दन को चुमना शुरू कर दिया और साथ ही गहरी गहरी सांसे लेकर अपनी मां के खूबसूरत बदन की खुशबू को अपने अंदर समाने लगा।अपने बेटे की हरकत की वजह से निर्मला पूरी तरह से बावली हुए जा रही थी उसके अंदर तूफान सा उठ रहा था,,उसकी हालत खराब हुए जा रही थी।
उत्तेजना के मारे निर्मला की सांसो की गति तेज हुए जा रही थी।
कई दिनों बाद आजनिर्मला और सुभम का मिलन होने जा रहा था इसलिए आज ना जाने क्यों निर्मला को शर्म सी महसूस हो रही थी सुभम पीछे से उसके कंधों को हल्के हल्के दबाते हुए अपने होंठों से उसके गरदन को चुमे जा रहा था। और निर्मल आखिर की शर्म के मारे अपने बदन को समेटे जा रही थी।
निर्मला अपने अक्स को आईने में देखकर अपने आप पर गर्व महसूस कर रही थी छोटी सी ट्रांसपेरेंट ड्रेस में वह बला की खूबसूरत लग रही थी इस बात को वह भी मानती थी उसकी मोटी मोटी चिकनी जांघें पूरी की पूरी नंगी दिख रही थी और जिस तरह की उसने पैंटी पहनी थी उसे पहनने के बाद निर्मला अपने अंदर कुछ ज्यादा ही उत्तेजना महसूस कर रही थी। वह जानबूझकर ब्रा नहीं पहनी थी ताकि सुभम उस के दर्शन एकदम आराम से कर सके... वैसे तो शुभम किसी भी तरह से उसके दोनों खरबुजो के दर्शन बड़े आराम से कर सकता था लेकिन निर्मला के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था वह आज कुछ ज्यादा ही मादक मूड में थी आज का कुछ ज्यादा ही खुद पर मजा लेना चाहती थी इसलिए तो इस तरह की छोटी सी ड्रेस पहनी हुई थी।
Nirmala ki nangi jawani

धीरे-धीरे कमरे का माहौल बदलने लगा था शुभम के ऊपर अपनी मां की मदमस्त जवानी का नशा छाने लगा था इसलिए तो अपने दोनों हाथों को कंधों पर से नीचे की तरफ लाते हुए ट्रांसपेरेंट ड्रेस के ऊपर से ही अपनी मां के दोनों कबुतरो को अपने दोनों हथेलियों में थाम कर ऊन्हे खिलाने लगा। निर्मला को आईने में सब कुछ साफ साफ नजर आ रहा था अपने ही बेटे के हाथों में अपने दोनों चुचियों को देखकर निर्मला शर्म से पानी पानी होने के साथ-साथ मदहोश होने लगी।शुभम कुछ ज्यादा ही जोर लगाकर ड्रेस के ऊपर से ही अपनी मां की दोनों चूचियों को कस के पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया था मानो ऐसा लग रहा था कि जैसे आटा गूथ रहा हो। शुभम अपनी मां की चूचियों के साथ जितना अधिक शख्ती दिखाता उतना ही अधिक आनंद की प्राप्ति निर्मला को हो रही थी साथ ही उसकी गरम सिसकारी की हल्की आह सुनाई देने लगी थी।
शुभम अपनी मां के बदन से पूरा सट गया था जिसकी वजह से उसके पहचाने में तना हुआ तंबू ठीक निर्मला की मदमस्त नितंबों के बीचो बीच रगड़ खाने लगा।

सससहहह,,,,आहहहहहह,,सुभम,,,,ऊफफफफ,,,,,, (निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज आने लगी साथ ही वह अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ ठेलकर अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड से रगड़वाने लगी । कमरे का माहौल पूरी तरह से बदलता चला जा रहा था दोनों की तेज चलती सांसो से मादकता की खुशबू आ रही थी ,,,,, निर्मला की नाईट ड्रेस काफी छोटी होने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी मदमस्त गांड अच्छे से शुभम के मौटे तगड़े लंड को महसूस कर पा रही थी। )
Nirmala apni badi badi hand dikhakar Shubham ko lalcha rahi thi


ओहहहहहह ,,,,,मम्मी छोटे से ड्रेस में आप तो जवानी की बौछार मार रही हो,,,, मैं तो आपकी मदमस्त जवानी की बारिश में पूरा का पूरा भीग गया।( शुभम उसी तरह से अपनी मां की गर्दन को चुमते हुए और उसकी दोनों छलकती हुई जवानी को अपने हाथों से दबाते हुए बोला।)

औहहहह सुभम क्या सच में मैं इस छोटे से ड्रेस में ज्यादा खूबसूरत लगती हुं? ( निर्मला ठंडी आहें भरते हुए बोली।)

बहुत खूबसूरत मम्मी इतनी खूबसूरत कि मैं बता नहीं सकता... अगर विश्वास ना हो तो यह छोटी सी ड्रेस पहन कर केवल अपने गेट पर खड़े रहना देखना आते जाते सब का लंड खड़ा ना हो जाए तो मेरा नाम बदल देना। जिस की भी नजर आप पर पड़ेगी वह तुम्हें चोदने के लिए तड़प उठेगा उसकी जिंदगी की बस एक ही ख्वाहिश होगी कि अपने लंड को बस एक बार तुम्हारी बुर में डाल कर तुम्हें चौद दे। ( इतनी गंदी बातें करते हुए शुभम अपनी मां की दोनों चुचियों को जोर जोर से दबा रहा था और अपने बेटे के मुंह से अपने लिए इतनी गंदी बात सुनकर और दूसरी तरफ अपने स्तन मर्दन की वजह से वह पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबती चली जा रही थी।)

संसहहहहहह ,,,,आहहहहहह,,,, कितना गंदा बोलता है तू क्या कोई बेटा अपनी मां के लिए इतनी गंदी बातें करता है।

अगर तुम्हारी जैसी खूबसूरत और सेक्सी मां होती तो वह जरूर गंदी बातें करेगा।

आहहहहहहह,,,,, छोड़ मुझे कितना खड़ा हो गया और मेरी गांड में धंस रहा है।

तुम्हारी गांड में धंसाने के लिए ही तो मैंने अपना लंड खड़ा किया हूं... मेरा तो बस नहीं चलता वरना मैं पेंटिं सहीत में लंड को तुम्हारी गांड में डाल देता,,,,,( शुभमअपनी पर जाने के ऊपर से ही अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड़ पर रगड़ते हुए बोला।)

धत्,,,,, पागल हो गया है तू ,,,,।

पागल मैं नहीं हो गया हूं पागल तुम बना देती हो अपनी खूबसूरती के जाल में फंसा कर तुम्हारा मदमस्त जवानी से भरा हुआ बदन देखकर मैं पागल हो जाता हूं।आहहहहहह,,,,कसम से मेरा बस चले तो दिन रात तुम्हारी खूबसूरत बदन से खेलता रहूं तुम्हारी मस्त मस्त चूची को दबा कर अपने मुंह में भर कर पीता रहुं। ( शुभम अपने एक हाथ को अपनी मां की चूची पर से हटा कर उसे नीचे की तरफ ले जाकर निर्मला की टांगों के बीच की मखमली दरार पर रखकर ऊसे दबाते हुए बोला।)

सससहहहहह ,,,,,,आहहहहहह,,,,, पागल तो तू मुझे बना दे रहा है शुभम.... ऊफफफफ,,,,,, तु मुझे मदहोश कर रहा है मुझे पागल बना रहा है,,,,( निर्मला अपने बेटे के द्वारा अपनी बुर मसलने की वजह से पूरी तरह से पागल हुए जा रही थी। और अपनी मां की हालत को देखकर सुभम और जोर जोर से अपनी मां की बुर को मसलने लगा,,,,)

आआआआआहहहहहह,,,,,,थोड़ा धीरे आज तुझ पर कुछ ज्यादा ही नशा सवार हो गया है।

् मम्मी यह सब तुम्हारे छोटे से ड्रेस का नशा है आज पहली बार तुम्हें छोटे से ड्रेस में देख कर मुझे पता नहीं क्या हो रहा है ऐसा लग रहा है जैसे कई बोतलों का नशा मुझे हो रहा है। ये ड्रेस तुमने कब खरीदी। मम्मी,,,,? ( शुभम एक साथ अपनी मम्मी के खूबसूरत बदन से खेलते हुए बोला ,,,,वह एक हाथ से उसकी चूची दबा रहा था तो दूसरे हाथ से उसकी मखमली दरार से खेल रहा था और साथ ही पीछे से अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की गांड पर रगड़ रहा था ,,,तीनों तरफ से निर्मला अपने बेटे की हरकत की वजह से एकदम चुदवासी हुई जा रही थी ,,,, निर्मला अपने बेटे की बात सुनकर कांपते हुए और मादक स्वर में बोली।)

ये ड्रेस और पेंटिं तेरे पापा लाकर दिए हैं।

लगता है यह ड्रेस और पेंटी देकर पापा रात भर तुम्हारी लेते होंगे,,,,

नहीं रे जैसा तू सोच रहा है वैसे बिल्कुल भी नहीं है तेरे पापा को एक ही बार में थक जाते हैं और दोबारा के लिए तैयार ही नहीं हो पाते तु तो अच्छी तरह से जानता है कि तेरे पापा के लंड से चुदवाने में मुझे बिल्कुल भी मजा नहीं आता क्योकी तेरे पापा का लंड तेरे से आधा भी नहीं है और मेरी तो आदत पड़ चुकी है तेरे इस (अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने बेटे के लंड को पर जाने के ऊपर से ही पकड़ते हुए) मोटे तगड़े लंड से चुदवाने की और सच कहूं तो ऐसा लगता है कि मेरी कसी हुई बुर में तेरे लंड का सांचा बन चुका है जो कि जब तक तेरा लंड नहीं जाता तब तक मजा नहीं आता।
( शुभम तो अपनी मां के मुंह से अपनी लिए इस तरह की गंदी लेकिन तारीफ भरी बातें सुनकर एकदम गर्व से फुलने लगा,,, आप वहां अपनी कमर को हल्के हल्के धक्के लगाते हुए बोला।)

तो पापा से बोल क्यों नहीं रही थी मेरी जान कि तुम्हारा बेटा तुम्हारी चुदाई करता है,,, और मैं तुम्हारी बेटे के लंड से चुदकर मस्त हो जाती हूं अब मुझे तुम्हारी जरूरत नहीं है,,,,,।

पागल हो गया है क्या तू अगर तेरे पापा हम दोनों के बारे में जरा सी भी भनक लगी ना तो हम दोनों को घर से निकाल देंगे। ,,,,,,

कुछ नहीं होगा मेरी रानी (इतना कहते हुए शुभम फुर्ती दिखाते हुए अपनी मां की दोनों बांहों को थामकर उसे घुमा कर अपनी तरफ खड़ी कर दिया और निर्मला कुछ समझ पाती इससे पहले ही अपने होंठ को अपनी मां के गुलाबी होंठ पर रखकर चूसना शुरू कर दिया...कुछ ही सेकंड में अपने बेटे की हरकत की वजह से निर्मला के तन बदन में आग लगने लगी...वह भी अपने बेटे का साथ देते हुए अपनी गुलाबी होठों को खोल दि और अपने बेटे की जीभ को मुंह में भरकर चूसना शुरु कर दी.... कमरे का माहौल पूरी तरह से उन्मादक हुए जा रहा था।एक तरफ से कम अपनी मां के गुलाबी होठों को चूसने में लगा था और दूसरी तरफ से वह अपने दोनों हाथों को अपनी मां के बड़े-बड़े गांड पर रखकर उसे जोर जोर से दबाने में लगा हुआ था और वही निर्मला एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर पजामे में हाथ डालकर अपने बेटे के लंड को दबा रही थी दोनों एक दूसरे के अंगों से मनचाहा आनंद ले रहे थे।

कई दिनों बाद आज निर्मला सुभम की बाहों में थी और सुभम इस बात से काफी उत्साहित और उत्तेजित नजर आ रहा था। दोनों के नजरों से निकल रही गर्म सांसे एक दूसरे के चेहरे को और भी ज्यादा गर्म कर रहा था । निर्मला से रहा नहीं जा रहा था क्योंकि कुछ दिनों से वह अपने पति के छोटे से लंड से खेल कर वह निरूत्साह और कहीं ज्यादा प्यासी हो चुकी थी। दोनों मां-बेटे चुंबन का आनंद लेते हुए एक दूसरे के बदन को टटोल रहे थे । हर पल निर्मला की हालत खराब होती जा रही थी। उससे रहा नहीं जा रहा था। वह पजामें के अंदर ही हाथ डाल कर सुभम के लंड को जोर जोर से हिला रही थी। उत्तेजना के मारे शुभम का गला सूखता जा रहा था।

शुभम निर्मला के गुलाबी होठों को चूसने में मस्त था लेकिन निर्मला के मन में कुछ और ही चल रहा था वह शुभम के मोटे लंड की गरमाहट को अपनी हथेली में महसूस करके वह खुद काफी गर्म हो चुकी थी इसलिए देखते ही देखते हो अपने घुटनों के बल बैठ गई और शुभम के पजामे को अपने हाथों से खींचकर घुटनों तक सरका कर उसके लहराते हुए लंड को अपने हाथ में पकड़ कर उसे अपनी गुलाबी होठों के बीच दबा ली और उसने चूसना शुरु कर दी।,, शुभम अपनी मां की तरफ से इस तरह की हरकत के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं था इसलिए वह अपनी मां को लंड चूसता हुआ देखकर एकदम मस्त हो गया और उसके मुख से ना चाहते हुए भी गर्म सिसकारी फूट पड़ी।
Nirmala shubham k lund no chuste huye

सससहहहहह,,,,,आहहहहहह,,,, मम्मी,,,,,,,,ऊहहहहह,, तुम तो मुझे पागल कर दे रही हो मुझे यकीन नहीं हो रहा है कितनी जल्दी तुम मेरा लंड मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दोगी ......

क्या करूं अभी आठ-दस दिन जैसा ही हुआ है,,, तेरे लंड से नहीं चुदी हुं,,, लेकिन ऐसा लगता है कि जैसे बरसोंबीत गया हो इसीलिए तो मैं तेरे को अपने मुंह में लेने के लिए इतना तड़प रही हूं सच कहूं तो तेरे लंड को आज हाथ में पकड़ कर ही मेरी बुर में आग लग गई और मेरी बुर से पानी छूटने लगा।( इतना कहने के बाद निर्मला वापस अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,, कुछ भी हो शुभम को तो इतना मजा आ रहा था कि जैसे लग रहा था कि वह सातवें आसमान में उड़ रहा हो ,,,,वह पागलों की तरह हल्के-हल्के कमर को आगे पीछे करते हुए अपनी मां के मुंह को चोदना शुरू कर दिया कई दिनों बाद आज शुभम को भी काफी उत्तेजना का अनुभव हो रहा था हालांकि वो आठ दस दिन सरला आंटी की चुत से ही काम चला रहा था लेकिन यह बात उसे अच्छी तरह से मालूम था कि जो मजा उसकी मां की बुर देती हैं वह कीसी ओर की बुर में नहीं मिलता। निर्मला पर वासना पूरी तरह से सवार हो चुकी थी वह अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को आइसक्रीम कौन की तरह मुंह में लेकर चूस रही थी।शुभम भी मस्ती के सागर में गोते लगाते हुए अपनी कमर को हल्के हल्के आगे पीछे करते हुए अपनी मां के मुंह में लंड को अंदर बाहर कर रहा था। दोनों को काफी मजा आ रहा था । पंखा चालू होने के बावजूद भी कुछ ही देर में दोनों का बदन पसीने से तरबतर हो गया। उत्तेजना बस निर्मला अपने बेटे के मोटे लंड को पूरा का पूरा मुंह में लेकर चूसने का आनंद ले रही थी जिससे उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी लेकिन फिर भी वह अपनी आनंद में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दे रही थी साथ ही अपने बेटे को भी उतना ही मजा दे रही थी जितना कि वह ले रही थी।
जैसे-जैसे निर्मला अपना मुंह आगे पीछे करके अपने बेटे के लंड को चूसने का मजा ले रही थी वैसे वैसे उसके हीलते हुए बदन के साथ-साथ उसके दोनों चूचियां पेड़ पर लटके हुए आम की तरह झूल रहे थे जिसे देखकर शुभम के मुंह में पानी आ गया और वह नीचे झुककर अपने दोनों हाथों से दोनों चूचियों को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया जिससे दोनों के आनंद में और ज्यादा वृद्धि हो गई। दोनों को इस खेल में बहुत मजा आ रहा था दोनों अपनी-अपनी तरह से आनंद ले रहे थे कुछ देर तक दोनों ऐसे ही मजे लेते रहे उसके बाद शुभम अपना लंड अपनी मां के मुंह में से बाहर खींच लिया उसे डर था कि कहीं उसका पानी उसके मुंह में ना निकल जाए। निर्मला को लग रहा था कि उसका बेटा अब उस की चुदाई करेगा लेकिनशुभम का इरादा कुछ और था शुभम निर्मला का हाथ पकड़कर उसे खड़ी किया और निर्मला कुछ समझ पाती इससे पहले ही उसे अपनी गोद में उठा लिया।शुभम का बदन बेहद गठीला और कसरती था इसलिए वह अपनी भारी-भरकम मां को बिना दीक्कत के अपनी गोद में उठा लिया वैसे भी वह काफी उत्तेजित अवस्था में था इसलिए वह उत्तेजना बस जो चाहता था वह कर लेता था लेकिन इस तरह से निर्मला डर गई और वह बोली।



अरे ये क्या कर रहा है मैं गिर जाऊंगी,,,,,,,

मुझ पर तुमको विश्वास नहीं है मम्मी मैं भला कैसे तुमको गिरने दे सकता हूं। ( वह अपनी मां को गोदी में उठाए हुए ही आगे बढ़ा और बिस्तर पर ले जाकर क्यों पटक दिया बिस्तर पर नरम गरम गद्दा बिछा हुआ था इसलिए निर्मला को बिल्कुल भी चोट नहीं लगी लेकिन वह अपने बेटे की इस तरह की हरकत और उसकी ताकत को देखकर पूरी तरह से उत्तेजित हो गई और उसकी बुर पानी फेंकने लगी,, निर्मला पूरी तरह से चुदवासी हो गई थी ,,,वहजल्द से जल्द अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड अपनी बुर के अंदर ले लेना चाहती थी इसलिए वह बिस्तर पर गिरते ही अपनी दोनों टांगों को फैला दि यह एक तरह का शुभम के लिए आमंत्रण था और शुभम भी इस आमंत्रण को स्वीकार करते हुए तुरंत बिस्तर पर चढ़ गया और अपनी टीशर्ट निकाल कर फेंक दिया।,,,,शुभम भी काफी उत्तेजित और उतावला नजर आ रहा था इसलिए वह अपनी मां की दोनों मोटी मोटी जांघों को पकड़कर फैला दीया,,,,वह बिना अपनी मां की पेंटिं निकाले एक हाथ से धीरे से पेंटिं की डोरी को पकड़कर ऊसकी कचोरी जैसी फुली हुई बुर के एक तरफ कर दिया जिससे निर्मला की रसीली बुर एकदम शुभम की आंखों के सामने अपने गीले रस की वजह से चमकने लगी और शुभम एक पल की देर किए बिना ही अपना मुंह अपनी मां की बुर में ले दीया ब और जितना हो सकता था उतना उसके अंदर गहराई तक डाल कर उसकी बुर चाटना शुरू कर दिया।शुभम का यह अंदाज निर्मला को बेहद अच्छा लगा ऐसा वह पहले भी कर चुका है शुभम कख ऊतावलापन देखकर निर्मला की हालत खराब होने लगी।
क्योंकि यह बात निर्मला अच्छी तरह से जानती थी कि जब जब उसका बेटा इतना उतावलापन दिखाता है तब तक वह उस की जबरदस्त चुदाई करता है इस बात का अहसास होते ही निर्मला की रसीली बुर जिसमें उसके बेटे की जीभ घुसी हुई थी वह खुशी के मारे फूलने पिचकने लगी।
शुभम पागलों की तरहअपनी मां की बुर चाट रहा था और निर्मला बड़ी मस्ती के साथ अपनी गांड उपर उछाल उछालकर अपने बेटे का साथ दे रही थी।
Shubhsm apni ma ki boor chat te huye

सससहहहहह आहहहहहह ऊईईईईईईईई,,,ऊमममममम,,,,, ऐसे ही ऐसे ही बेटा पूरी जीभ अंदर डाल कर चाट ,,,,आहहहहहहह,,,,,,
( ऐसा कहते हुए निर्मला जोर-जोर से अपनी कमर ऊपर उछाल रही थी और अपनी मां की हरकत देखकर शुभम की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी वह एक हाथ से अपना लंड ही लाते हुए अपनी मां की बुर चाटने की मस्ती में पूरी तरह से खोने लगा। कुछ देर तक वह अपनी मां की बुर चाटकर अपनी मां की उत्तेजना को बढ़ाता रहा ,,,उसकी मां पूरी तरह से चुदवासी हो गई थी अब उसे अपनी बुर के अंदर अपने बेटे की जीभ नहीं बल्कि उसका मोटा तगड़ा लंड महसूस करता हुआ देखने की इच्छा हो रही थी इसलिए वह बोली।)

आहहहहहह,,,,,,,बेटा,,,,,बस,,,, मुझसे रहा नहीं जा रहा है अब अपना मोटा लंड मेरी बुर में डाल कर चोद,,,,आहहहहहह,,,,( ऐसा कहते हुए निर्मला अपना सर दाएं बाएं पटक रही थी वह पुरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी। शुभम अपनी मां की उत्तेजना देख कर समझ गया था कि उसकी मां चुदवाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गई है इसलिए वह भी मौके का फायदा उठाते हुए तुरंत अपना मुंह अपनी मां की बुर पर से हटाकर अपने लिए अपनी मां की दोनों टांगों के बीच जगह बनाते हुए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर अपनी मां की पतली सी पेंटिं की डोरी को अपने हाथों से थाम लिया अपने बेटे की हरकत को देखते हुए निर्मला समझ गई कि अब उसे क्या करना है इसलिए बिना बोले ही अपनी भारी भरकम को गांड को ऊपर हवा में उठा दी शुभम एक पल की भी देरी किए बिना ही पेंटी को अपनी मां की गोरी गोरी चिकनी गांड पर से उतार कर नीचे फर्श पर फेंक दिया बचा कुचा काम खुद निर्मला कर दी अपनी ट्रांसपेरेंट ड्रेस को उतारकर वह भी उसे फर्श पर फेंक दि,,, अब वह बिस्तर पर अपने बेटे के सामने एकदम नंगी लेटी हुई थी अपनी दोनों टांगों को फैलाए हुए और शुभम भी अपने पजामे को उतारकर एकदम नंगा हो गया उसका मोटा तगड़ा लंड हवा में लहराने लगा जिसे देखकर निर्मला के मुंह के साथ-साथ उसकी बुर में भी पानी आ गया।
शुभम के लिए अब रास्ता साफ हो चुका था उसे अपनी मंजिल अपनी आंखों के सामने नजर आ रही थी इसलिए अपनी मंजिल की तरफ आगे बढ़ते हुएवह अपनी मां की दोनों टांगों को खींचकर अपनी दोनों टांगों पर चढ़ा दिया और अपने मोटे तगड़े लंड़ के सुपाड़े को अपनी मां की गुलाबी बुर के गुलाबी छेद पर रखकर हल्का सा धक्का लगाया बुर पहले से ही पूरी तरह से गीली हो चुकी थी इसलिए शुभम का मोटा तगड़ा सुपाड़ा फटाक से निर्मला की बुर के अंदर समा गया,,,,, काफी दिनों बाद निर्मला को मर्दाना ताकत से भरे हुए असली लंड की गर्मी अपनी बुर के अंदर महसूस हुई थी,,, इसलिए मैं पूरी तरह से गन गना गई,,,, शुभम भी काफी दिनों बाद अपनी मां की रसीली बुर पाकर एक दम खुश हो गया। देखते ही देखते शुभम अपने मोटे तगड़े लंबे लंड को पूरा का पूरा अपनी मां की बुर की गहराई में डाल दिया और उसकी बड़ी बड़ी चूची पकड़कर अपना कमर हिलाते हुए उसे चोदना शुरू कर दिया हर धक्के के साथ निर्मला के मुंह से आह निकल जा रही है अपनी मां की उत्तेजना और उसकी मस्ती देखकर शुभम कुछ ज्यादा जोर से ही धक्के लगा रहा था।
Nirmala chudai ka maja lete huye

दोनों मां बेटे असली चुदाई का खेल खेल रहे थे। दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे निर्मला की गर्म सिसकारी से पूरा कमरा गूंज रहा था उसके बदन की मादक खुशबू शुभम की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा रही थी दोनों लगातार एक दूसरे का साथ देते हुए चुदाई का आनंद लूट रहे थे शुभम ऊपर से धक्के लगा रहा था और निर्मला नीचे से अपनी गांड उठा कर अपने बेटे का साथ दे रही थी कई दिनों की कसर आज की रात निर्मला निकाल लेना चाहती थी ।सुभम के धक्कों की गति कुछ ज्यादा ही तेज गति से चल रही थी वह किसी मशीन की तरह अपनी कमर हिला रहा था और निर्मला को ऐसा लग रहा था कि उसकी रसीली बुर उसके बेटे के लिए ही बनी है। क्योंकि शुभम का मोटा तगड़ा लंडनिर्मला की कसी हुई बुर में एकदम रगड़ के अंदर घुसता था जिससे निर्मला को अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों पर अपने बेटे के लंड की रगड़ अत्यधिक आनंद प्रदान कर दी थी।।शुभम की जांघें निर्मला की मोटी मोटी जांघों से टकराकर मधुर ध्वनि उत्पन्न कर रही थी जिसकी वजह से कमरे का पूरा माहौल मादकता से भर जा रहा था। निर्मला अपने बेटे के हर धक्के
का जवाब मादकता के भरी सिसकारी से दे रही थी। जिससे शुभम और भी ज्यादा चुदवासा होकर धक्के पे धक्के पेल रहा था। धीरे-धीरे दोनों अपनी मंजिल के करीब पहुंच रहे थे दोनों चरम सुख पाने की दिशा में आगे बढ़ रहे थे देखते ही देखते निर्मला के सांसों की गति के साथ-साथ उसकी गरम सिसकारी की आवाज भी तेज हो गई शुभम को समझते देर नहीं लगी थी उसकी मां झढ़ने वाली है इसलिए उसे अपनी बाहों में कस के अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया देखते ही देखते कुछ ही देर में दोनों का पानी निकल गया दोनों झढ़कर मस्त होकर एक दूसरे की बाहों में कुछ देर तक यूं ही लेटे रहे।
लेकिन यह चुदाई का सिलसिला बस इतने से खत्म नहीं हुआ निर्मला अपने बेटे को रात भर सोने नहीं दी कभी वह उसके ऊपर तो कभी शुभम उसके ऊपर लगातार दोनों की चुदाई का कार्यक्रम चलता रहा और देखते ही देखते सुबह हो गई।
 
सुबह में निर्मला की नींद खुली तो उसने महसूस की कि वह शुभम की बाहों में थी जो कि वह उसे पीछे से जकड़े हुए थे। और रात की जबरदस्त चुदाई के बाद दोनों बिना कपड़े पहने ही एकदम नंगे ही सो गए थे जिसकी वजह से निर्मला को साफ तौर पर महसूस हो रहा था कि उसकी बड़ी बड़ी गांड की दरारों के बीच शुभम का मोटा तगड़ा लंड फंसा हुआ था। निर्मला को महसूस हो रहा था कि उसके बेटे का लंड पूरी तरह से उत्तेजित अवस्था में नहीं था लेकिन फिर भी जितना खड़र में जाने के लिए काफी था। एक बार फिर से सुबह की पहली किरण के साथ ही खिड़की से आ रही शीतल हवाओं के झोंकों की वजह से और लग्न अवस्था में अपने बेटे से चिपके होने की वजह से निर्मला के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उससे रहा नहीं गया और वह अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे से ही अपने बेटे के लंड पर रगड़ना शुरू हो गई। बड़ी बड़ी मद मस्त गांड की गर्माहट को शुभम ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाया और अपनी मां की मस्त गांड की गर्मी की वजह से उसकी नींद खुल गई,,, नींद खुलते ही देखा कि उसकी मां अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे ठलते हुए उसके मोटे तगड़े बड़े लंड पर रगड़ रही है यह देखते ही उसकी मदमस्त बर्दाश्त के बाहर कर देने वाली जवानी की गर्मी से उसका पूरा बदन उत्तेजना में अकड़ने लगा,,,,,
Nirmala ki khubsurat gaand jise dekhkar sab mast ho jate he

जिस तरह से स्वर्ग की अप्सरा एक तपस्वी की तपस्या को भंग कर देती है उसी तरह से निर्मला भी अपने बेटे की नींद को अपनी मद मस्त जवानी की गर्मी से भंग कर दी थी लेकिन इसमें निर्मला के साथ-साथ उसके बेटे का भी फायदा था अपनी मां की हरकत को देखकर शुभम से रहा नहीं गया और वह अपने दोनों हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर जोर जोर से चपत लगाने लगा।


आहहहह,,,,,ऊठ गया तू ,,,, मुझे लगा कि तू सोया ही रहेगा,,,,,

ऐसा कैसे हो सकता है मेरी रानी कि तुम प्यासी रहो और मैं चैन की नींद सोता रहुं। मुझसे तुम्हारी यह तड़प देखी नहीं जाती इसीलिए तो जाग गया हूं और साथ ही देखो मेरा लंड जाग गया है। ,,,,,

जाग गया हैं तो देर किस बात की है मेरे राजा इसे इसकी गुफ़ा का रास्ता दिखाओ।( निर्मला एकदम मादक स्वर में अपने बेटे की तरफ देखते हूए बोली,,, शुभम तो अपनी मां की इस बात पर एकदम कायल हो गया,,,,, और वह पीछे से ही अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को एक हाथ से फैलाते हुए अपने लिए रास्ता बनाते हुए बोला।,,,,, )
Nirmla or Shubham


ससससहहहह,,,,,, मेरी जान मेरा शेर तेरी गुफा में घुसने के लिए पूरा तैयार हो गया है,,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी मां की मोटी मोटी जांघ को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाया और निर्मला भी अपने बेटे के इस इशारे को समझ गई और खुद ही अपनी टांग को घुटनों से मोड़कर ऊपर की तरफ उठा दी जिससे उसके गुलाबी रंग का गुलाबी छेद शुभम के लंड के ठीक सामने आ गया और जैसे शुभम का लंड ईसी ताक में था जैसे ही गुलाबी बुरका गुलाबी छेद नजर आया वैसे ही वह सीधा जाकर छेद पर टिक गया,,,, एक बार फिर से निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारी छूट गई,,, अपनी मां की गरम सिसकारी की आवाज सुनकर शुभम की उत्तेजना बढ़ने लगी और वह एक हाथ से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को थामकर हल्के से अपनी कमर को आगे की तरफ ठलने लगा,,,, देखते ही देखते शुभम का मोटा तगड़ा लंड एक बार फिर से उसकी मां की गुलाबी बुर के अंदर समा गया था। सुबह-सुबह निर्मला का दिन बन गया था वह नहीं जानती थी कि आज सुबह सुबह ही दिन की शुरुआत ही अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड से होगी वह काफी उत्तेजित नजर आ रही थी। शुभम अभी अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की बुर के अंदर डाला ही था कि वह खुद ही अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ से धकेलते हुए अपने उतावले पन को प्रदर्शित कर रही थी जिसे देखते हुए शुभम भी अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से थाम कर धीरे-धीरे धक्के लगाना शुरू कर दिया। निर्मला की सांसो की गति होले होले तेज होती जा रही थी। उत्तेजना के मारे निर्मला की कसमसाहट बढ़ती जा रही थी।
Nirmla or Shubham


शुभम को इस बात की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी कि इस तरह से सुबह-सुबह ही आज उसे अपनी मां की बुर चोदने को मिल जाएगी लेकिन आज उसे उम्मीद से अधिक मिल रहा था। खिड़की से आ रही ठंडी भरी हवाएं शुभम और निर्मला दोनों के बदन को तरोताजा कर दे रही थी लेकिन फिर भी शुभम के माथे पर पसीने की बूंदें उपस रही थी क्योंकि जितनी ठंडी हवा खिड़की से अंदर आ रही थी उतनी ही गरमाहट उसे अपनी मां की खूबसूरत बदन से मिल रही थी। ठंडी हवाओं के साथ साथ अपनी मां की गरम सिसकारी की आवाज का आनंद उठाते हुए शुभम धीरे-धीरे अपनी मां को चोद रहा था। और निर्मला थी कि अपनी कसी हुई बुर में अपने बेटे के मोटे लंड को महसूस करके गरम आहें भर रही थी। शुभम बड़े आराम से अपनी मां की चुदाई कर रहा था वह धीरे-धीरे अपना पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में डालता और आपस धीरे-धीरे उसे बाहर की तरफ खींचता ऐसा करने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी। जैसे-जैसे शुभम का मोटा लंड रगड़ता हुआ निर्मला की बुर के अंदर तक जाता अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों पर अपने बेटे के लंड की रगड़ को महसूस करके निर्मला का पूरा बदन उत्तेजना के मारे अकड़ने लगता और उसकी बुर की अंदरूनी दीवारों से नमकीन रस पानी बनकर रिसने लगता।
Nirmla ko chudai karta Shubham


आहहहह,,,,आहहहह,,,, शुभम मेरे राजा बहुत मजा आ रहा है तेरा मोटा लंड है मेरी बुर की धज्जियां उड़ा दे रहा है।आआआहहहह,,,, आज का दिन बहुत अच्छा जाएगा क्योंकि आज दिन की शुरुआत ही तेरे लंड से हुई है बस ऐसे ही मुझे चोदता रह,,,,,,आआआहहहह,,,, मेरे राजा जोर जोर से धक्के लगा फाड़ दे मेरी बुर को अंदर तक घुसा दे,,,,आहहहहह,,,,,, ससससहहहह,,,, बहुत मजा आ रहा है बहुत मजा आ रहा है मेरे राजा,,,,,,( निर्मला पर चुदाई की मदहोशी पूरी तरह से छा चुकी थी वह पागलों की तरह उत्तेजना के मारे मुंह से गंदी गंदी बातें बोल रही थीं और उससे गंदी बातों को सुनकर शुभम की हालत खराब हो रही थी उसकी भी उत्तेजना निरंतर बढ़ती जा रही थी हल्के हल्के धक्कों की जगह अब तेज गति और जबरदस्त धक्कों ने ले लिया। शुभम की कमर अब रफ्तार से आगे पीछे होने लगी वह इतनी जोर जोर से धक्के लगाने लगा कि पूरा पलंग चरमरने लगा,,,,,
Nirmala shubham se chudwati huyi


निर्मला अपने बेटे के साथ चुदाई का असली सुख भोग रही थी। उसे मालूम था कि चुदाई का असली मजा उसके बेटे के साथ ही आता है इसलिए वह बिस्तर पर मस्त होकर अपने बेटे से चुदाई का आनंद ले रही थी उसके हर एक धक्के का स्वागत वह अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ धकेल कर दे रही थी। शुभम भी लगातार छक्के लगाते हो मेरे लेकर अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर जोर का चपत लगा दे रहा था जिससे वातावरण में मादकता और दोनों का आनंद दोनों बढ़ जा रहा था। अपनी मां की मदमस्त जवानी का सुख भोगते हुए शुभम की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वह इस तरह से लेटे लेटे ज्यादा जोर से धक्के नहीं लगा पा रहा था इसलिए वह तुरंत उठा और अपनी मां की दोनों टांगों को फैलात हुआ ऊसे कमर से पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और अपने लंड को एक बार फिर उसकी बुर के अंदर डालकर लगातार धक्के पर धक्के पेलता रहा। अब शुभम रुकने वाला नहीं था क्योंकि वह अपने लिए जगह बना लिया था निर्मला भी अब पुरी तरह से मस्त हो चुकी थी उसे मालूम था कि इस पोजीशन में उसका बेटा उसकी जबरदस्त चुदाई करेगा,,, और उसके सोचने के मुताबिक ही शुभम अपनी कमर हिला रहा था सुबह के वातावरण में ठंडक का अहसास होते हुए भी दोनों के बदन से पसीने की बूदें टपक रही थी दोनों अपनी मदमस्त जवानी की गर्माहट में पूरी तरह से गर्म हो चुके थे ।
Nirmala ki jabaradast chudai


निर्मला अपने बेटे के जबरदस्त धक्कों को तो झेल ले रही थी लेकिन उसकी जबरदस्त मदहोश कर देने वाली चुदाई के आगे व ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई और भल भला कर झड़ गई थोड़ी देर बाद शुभम भी झड़ गया।
Nirmla maje leti huyi


वासना का तूफान थमते ही निर्मला बिस्तर पर से उठी और अपने बेटे के होठों पर चुंबन करके बिना कपड़े पहने उसी तरह से एकदम नंगी ही कमरे से बाहर जाने लगी। शुभम अपनी मां की मदद की जाए देखकर मन ही मन प्रसन्न होने लगा यह सोच कर कि वाकई में इसकी मां दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत औरत है।


शुभम को रविवार का इंतजार बड़ी बेसब्री से था वह उतावला था और उसी के घर जाकर उसे वापस लाने के लिए क्योंकि वह जानता था कि जब वह उसे उसके घर छोड़ने गया था तब वहां उसके द्वारा दिखाया गया नजारा रुचि के मन पर जरूर असर किया होगा और वह उस असर का क्या परिणाम आता है यह देखने के लिए उतावला था आखिरकार उसके सब्र का फल मीठा होता नजर आने लगा,,,, उसके इंतजार की घड़ी खत्म हुई और रविवार आ गया सुबह सुबह जल्दी से वह तैयार होकर रुचि के मायके उसे लेने के लिए चला गया।
 
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