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mastram kahani एक अधूरी प्यास.... 2

शुभम काफी खुश नजर आ रहा था। उसे मालूम था कि जिस तरह से सरला चाची उसके हाथ लग गई उसी तरह से रूचि भी जल्द ही उसके नीचे आ जाएगी क्योंकि उसे इस बात का आभास हो गया था कि जब वह रुचि के मायके में बाथरूम के अंदर पेशाब करने गया था और जिस तरह से अनजाने में ही रुचि की नजर उसके मोटे तगड़े खड़े लंड पर पड़ गई थी और जिस तरह के भाव उसके चेहरे पर उसके तगड़े लंड को देखकर आई थी,, शुभम ने यह भांप लिया था कि जल्द ही उसकी बुर में उसका लंड होगा। इसलिए तो वह रुचि को लेने जाने के लिए इतना ज्यादा उत्साहित था।
रविवार का दिन था वह अपनी मां को जरूरी काम से जाने के लिए कि कल घर से निकल गया था सुहावना मौसम ठंडी ठंडी हवा बह रही थी और वैसे भी शुभम को सुबह सुबह अपनी मोटरसाइकिल चलाना कुछ ज्यादा ही अच्छा लगता था और आज तो उसे कम से कम 30 40 किलोमीटर दूर जाना था,,,, भले ही यह सफर 30 40 किलोमीटर के अंतराल पर ही था अगर यह तीन सौ 400 किलोमीटर के अंतराल पर भी होता तो भी शुभम वहां जाने से बिल्कुल भी नहीं जी सकता क्योंकि वहां जाने से उसका मतलब साफ था उसे एक बार फिर से मदमस्त कर देने वाली नव जवान औरत की रसीली बुर जो पाना था। उम्र दराज औरतों की बुर तो उसे बहुत बार चोदने को मिली थी आज पहली बार उसे जवान औरत की रसीली बुर की चाह जगी थी जो कि जल्द ही उसकी चाह पूरी होने वाली थी। और इतना तो वह रुचि से बात करके समझ गया था कि उसका पति उसे पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाता है इसलिए तो उसे अपनी राह आसान नजर आ रही थी क्योंकि जहां प्यास होती है वहां पानी की जरूरत कुछ ज्यादा ही होती है क्योंकि प्यासे लोग ही पानी की असली कीमत को पहचान पाते हैं और शुभम तो इस समय प्यासी औरतों के लिए एक कुंआ के समान था जो कि हर कोई अपनी प्यास बुझाना चाहता था और वह भी सभी प्यासों की प्यास बुझाने के लिए हमेशा तत्पर रहता था।
आज का मौसम कुछ ज्यादा ही सुहावना था हल्के हल्के बादल आसमान में छाने लगे था। ऐसा लग रहा था कि आज बारिश जमकर होगी,,, वैसे भी शुभम को बारिश का मौसम कुछ ज्यादा ही पसंद था क्योंकि ऐसे में औरतों के बेहद करीब रहने से मादकता का एहसास कुछ ज्यादा ही होता है बिना पिए ही नशा होने लगता है। वह मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि रुचि को मोटरसाइकिल पर बैठाकर लाते समय अगर तेज बारिश हो जाए तो मजा आ जाए।
Ruuchi ki madmast jawani

मौसम का मजा लेते हुए आखिरकार शुभम रुचि के घर पहुंच ही गया ,,,,,रुचि को उसकी सास ने फोन पर सब कुछ बता दी थी और वह है शुभम का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। शुभम जब रुचि के घर पर पहुंचा तो रूचि छत पर खड़ी होकर उसी की राह देख रही थीं और शुभम पर नजर पड़ते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी अपने आप उठने लगी,,, रुचि को यह समझ में बीलकुल भी नहीं आ रहा था कि शुभम को देखते ही उसके तन बदन में अचानक बदलाव कैसा आने लगा जबकि इसका कारण साफ था रुचि ने अपनी आंखों से शुभम के नंगे खड़े बेहद मोटे लंड के दर्शन जो कर लिए थे। लेकिन रुचि का इस बारे में बिल्कुल भी ध्यान नहीं गया,,, फिर भी वह इस पल का आनंद ले रही थी।

शुभम रुचि के घर पर पहुंचकर कुछ देर तक आराम किया,,, उसके परिवार वालों वहीं रुका शाम होने वाली थी अब निकलना जरूरी था ,,, इसलिए शुभम इजाजत लेकर उसी से चलने के लिए कहा,,,,,इसके बाद रुचि तैयार होकर अपने ससुराल जाने के लिए आई उसे देख कर शुभम के तन बदन में अचानक उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी पीले रंग की साड़ी में रुचि का खूबसूरत गोरा बदन बेहद फब रहा था वह खूबसूरत होने के साथ साथ बेहद सेक्सी नजर आ रही थी। ऐसा लग रहा था मानो स्वर्ग से कोई परी नीचे जमीन पर उतर आई हो। रुचि के खूबसूरत बदन को देखते हैं शुभम के पेंट के अंदर उसका मोटा तगड़ा लंड जो कि सोया हुआ था वह अंगड़ाई लेने लगा। शुभम तो उसे एकटक देखता ही रह गया,,, शुभम को यूं टकटकी बांधे अपनी तरफ देख कर रुचि शरमा गई,,,, रुचि ही शुभम का ध्यान भंग करते हुए उसे बोली।

अब चलोगे या यहीं बैठे रहने का इरादा है,,( रुचि की आवाज सुनकर सुभम का ध्यान भंग हुआ तो वह हढ बढ़ाते हुए बोला।)

हहहह,,हांं,,,,, चलना है ना ।(और इतना कहकर वह सोफे से उठ गया और उसके घरवालों से इजाजत लेकर बाहर आ गया,,, अपनी मोटरसाइकिल स्टार्ट कर के वह रुची के बैठने का इंतजार करने लगा,,,, आज उसी रुचि को अपनी बाइक पर एक बार फिर से बैठ आते समय उसके तन बदन में अजीब सी हलचल मच रही थी उसका बदन उत्तेजना के मारे कसमसा रहा था जिस तरह की साड़ी और उस साड़ि में खूबसूरती की मिसाल लग रही रुचि के बदन को अपने बदन से सटने का इंतजार उसे बड़ी बेसब्री से हो रहा था। आखिरकार उसकी बेसब्री जल्दी ही खत्म हो गई और वह उसके कंधे का सहारा लेकर उसके मोटरसाइकिल के पीछे बैठ गई जैसे ही उसका खूबसूरत बदन शुभम के बदन से टकराया ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे रुचि के खूबसूरत बदन की गर्माहट और उसकी रगड़ की वजह से उसके बदन से चिंगारी निकल रही हो वह एकदम से उत्तेजना के सागर में डूबता चला गया।

शुभम अपनी मोटरसाइकिल का एक्सीलेटर देकर उसे आगे बढ़ाने लगा कुछ ही देर में शुभम की मोटरसाइकिल मुख्य सड़क पर आ गई लेकिन शुभम अपनी मोटरसाइकिल की स्पीड बढ़ा नहीं रहा था वह आराम से चला रहा था क्योंकि वह नहीं चाहता था कि यह सफर इतनी जल्दी खत्म हो जाए,,,, उसे इस सफर का पूरा आनंद लेना था। शुभम रुचि से बात करना चाह रहा था लेकिन शुरुआत कहां से करें उसे समझ में नहीं आ रहा था कि तभी रुचि अपने आप को एडजस्ट करने के उद्देश्य से शुभम के कंधे का सहारा दे तभी शुभम मौके का फायदा उठाते हुए बोला।
Shubham or ruchi bike par jate buye


मुझे पकड़ कर बैठ ना कहीं गिर ना जाओ,,,

मुझे इतनी कमजोर समझे हो कि मैं गिर जाऊंगी तुम चलाते रहो मैं आराम से बैठी हूं।

नहीं मैं तो यूं ही कह रहा था अगर गिर गई तो सरला चाची मुझे डालेंगे की मेरे बहु का ख्याल भी नहीं रख पाया,,,,,

तुम्हें मेरा ख्याल ज्यादा है कि सरला चाची का,,,

सच कहूं तो मुझे तुम दोनों का ज्यादा ख्याल रहता है क्योंकि तुम दोनों मेरे पड़ोसी हो और पड़ोसी का साथ देना उनकी मदद करना एक पड़ोसी का धर्म होता है,,,

बहुत धर्म कर्म की बातें करने लगा है,,,,

अब क्या करूं भाभी अब इस उमर में ज्यादा कुछ तो हो नहीं रहा है तो सोच रहा हूं कि धर्म कर्म ही कर लु,,,,

इरादा तो तेरा बहुत कुछ होता है लेकिन,,,,( शुभम की धर्म कर्म की बात सुनकर रुचि को उस दिन की बात याद आ गई जब वह बाथरूम में पेशाब कर रहा था और उसी समय वहां जाने में दरवाजा खोलकर उसका कड़क लंबा मोटा तगड़ा लैंड अपनी आंखों से देख ली थी लेकिन इतना कहने से ज्यादा कुछ बोल नहीं पाई और खामोश हो गई)

मेरे इरादे के बारे में आपको कैसे पता चल रहा है मैंने तो ऐसा वैसा कुछ किया कि नहीं कि मेरे इरादे के बारे में आपको भनक तक लगे,,,

चल अब ज्यादा बातें मत बना मैं तेरे को अच्छी तरह से जानती हूं कि तू क्या चीज है,,,,,

ओहहहहह,,, बहुत जल्दी मेरे इरादे के बारे में और मैं क्या चीज हूं इस बारे में तुम जान गई मुझे तो यकीन नहींं हो रहा है,,,,

( सुभम की यह बातें सुनकर रुचि उसके इस बात का जवाब दिए बिना खामोश रही,,, जिस तरह की हलचल को सुबह महसूस कर रहा था उससे कहीं ज्यादा हलचल रुचि अपने बदन में महसूस कर रही थी एक पराए मर्द के बगल में बैठकर राज उसे काफी उत्तेजना का अनुभव हो रहा था और यह उत्तेजना ऐसे ही नहीं थी इसका यही कारण था कि रुचि अपनी आंखों से शुभम के दमदार हथियार के दर्शन कर ली थी जिसके आगे उसके पति का लंड कुछ भी नहीं था इसलिए तो उसे ना जाने कैसी कशमसाहट अपने बदन में महसूस हो रही थी और उसकी टांगों के बीच की उस पतली दरार में से गिले पन का रिसाव हो रहा था जो की ऋची को इसका अहसास एकदम साफ तौर पर हो रहा था।,, शुभम भी खामोश था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आगे की बात कैसे करें वैसे तो रूचि के चेहरे पर बदलती भाव को भागते हुए वह अपने आप से बातें कर रहा था कि उसे अपने दिल की बात सीधे तौर पर नहीं तो इशारों में कह ही देनी चाहिए।,,,,, तभी ऐसा लगा कि मौसम भी उसका साथ दे रहा है और बादलो की गड़गड़ाहट होने लगी,,, रुचि के मन में भी यही सब चल रहा था वह भी इस सफर को इतनी जल्दी खत्म नहीं होने देना चाह रही थी। ना जाने क्यों शुभम का साथ उसे अच्छा लगने लगा था एक तरह से वह अपने मन में शुभम को लेकर यही कल्पना करती रहती थी कि काश उसका पति शुभम ही होता तो कितना अच्छा होता,,,,, बादलों की गड़गड़ाहट सुनकर उसके मन में भी यही होने लगा की काश बारिश हो जाती तो बहुत अच्छा होता पहली बार किसी गैर मर्द के साथ भीगने में कैसा आनंद आता है इसका अनुभव लेना चाहती थी ,,, और शायद भगवान भी उसके मन की पुकार को सुन लिए थे और हल्की हल्की बारिश होना शुरू हो गई,,, और शुभम को यही मौका सही लग रहा था क्योकि जिस रास्ते से वह लोग जा रहे थे कुछ देर तक गांव का कच्चा रास्ता पड़ता था जहां पर लोगों का आना जाना बहुत ही कम होता था। धीरे-धीरे दोनों भीगना शुरू कर दिए थे। शुभम मौके की नजाकत को देखते हुए बोला ,,,,।

भाभी में एक बात कहूं तुम बुरा तो नहीं मानोगी,,,

क्यों नहीं अगर बुरा मानने वाली बात होगी तो जरूर मानूंगी (रूचि ऊपर ही मन से बोली लेकिन अंदर से वह यही चाह रही थी कि शुभम कुछ इधर-उधर की बातें करें,,)

चलो कोई बात नहीं अगर बुरा मानने वाली बात होगी तो मुझे दो चार बातें कह लेना या मन में आए तो दो चार थप्पड़ लगा लेना इससे ज्यादा क्या करोगी,,,,,

बातें बहुत बनाते हो,,,,,

क्या करूं मेरी आदत ही कुछ ऐसी है ,,,,अच्छा तो मैं यह कह रहा था कि,,,, भाभी उस दिन वाली बात से कहीं आप नाराज तो नहीं हो,,,

किस दिन वाली बात से,,,, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है तु क्या कहना चाह रहा है।( रूचि को इतना तो समझ में आई गया कि शुभम कौन सी बात कर रहा है लेकिन फिर भी जानबूझकर नाटक करते हुए वह बोली)

अरे भाभी उस दिन वाली बात जब मैं तुम्हें घर छोड़ने आया था और पेशाब करने के लिए बाथरूम गया था और अनजाने में तुम बाथरुम में आ गई थी,,,( शुभम बिना रुके सब कुछ बोल दिया।)

तो इसमें क्या हो गया,,,(रुचि जानबूझकर इतने आराम से यह बात कह रही थी कि जैसे वास्तव में उसे कुछ भी फर्क नहीं पड़ता हो,,, लेकिन इतना तो शुभम समझता ही था कि बाथरूम का नजारा देखकर रूचि के मन में क्या असर हुआ होगा)

क्या बात कर रही हो भाभी आपको बिल्कुल भी फर्क नहीं पढ़ा था उस वाक्ये के बाद।

नहीं तो मुझे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ा था,,,( रुचि जानबूझकर झूठ बोल रही थी यह तो वह अच्छी तरह से जानती थी कि उस नजारे को देखने के बाद से रुचि की हालत कितनी खराब होने लगी थी ,,, शुभम के मोटे तगड़े लंड को देखो करो वह अपने हाथ से ही अपनी प्यास बुझाने की नाकाम कोशिश करती रही लेकिन उसकी प्यास बुझने के बजाय और भी ज्यादा भड़कने लगी थी।)

क्या भाभी मुझे तो लगा था कि उस दिन के बाद से तुम मुझसे नाराज रहोगी मुझसे बातें नहीं करोगी इसलिए तो मुझे अंदर ही अंदर यह डर सता रहा था कि आपसे बात किए बिना मुझे अच्छा नहीं लगेगा ,,,
( शुभम की यह बातें सुनकर रुची को अंदर ही अंदर प्रसन्नता हो रहीं थी कि वह इस बात से परेशान था कि मैं उससे बात नहीं करूंगी इसका मतलब मेरे लिए उसके दिल में कुछ कुछ जरूर होता है। वह शुभम की यह बात सुनकर बोली।)

मैं भला तुमसे नाराज क्यों होने लगुंगी कोई इतनी बड़ी तो गलती कीए नहीं थे कि मैं तुमसे नाराज हो जाऊं वैसे भी मेरी ही गलती थी मैं बिना दरवाजे पर दस्तक दिए बिना ही अंदर घुस गई थी।,,, ( रुचि भले यह बात अपने मुंह से बोल रही थी लेकिन उसका दीदी जानता था कि अपनी इस गलती की वजह से वह अंदर ही अंदर शुभम के प्रति कितना आकर्षित होने लगी थी और उसे अपनी है गलती बहुत ही ज्यादा अच्छी भी लग रही थी क्योंकि उस गलती की वजह से ही उसे इस बात का अहसास हुआ कि मर्द का लैंड उसके पति की तरह नहीं करती शुभम की तरह होता है। रुचि भले यह बात अपने मुंह से बोल रही थी लेकिन उसका दील ही जानता था कि अपनी इस गलती की वजह से वह अंदर ही अंदर शुभम के प्रति कितना आकर्षित होने लगी थी और उसे अपनी है गलती बहुत ही ज्यादा अच्छी भी लग रही थी क्योंकि उस गलती की वजह से ही उसे इस बात का अहसास हुआ कि मर्द का लंड उसके पति की तरह नहीं बल्कि शुभम की तरह होता है।)

लेकिन भाभी सही कहूं तो गलती मेरी ही थी मैंने दरवाजे को लोक नहीं किया था जबकि मुझे यह करना चाहिए था और सबसे बड़ी गलती तो मेरी यही थी कि तुम मेरे सामने खड़ी हो कर देख रही थी और मैं तुम्हें देखते हुए भी अपने लंड को छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था बल्कि ना जाने क्यो मैं उस समय तुम्हारी आंखों के सामने उसे हिला रहा था और तो और सामान्य तौर पर वह ढीला भी नहीं था बल्कि एकदम खड़ा था इसलिए मुझे अपनी गलती का एहसास हो रहा है।( शुभम जानबूझकर इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हुए अपनी बात बता रहा था जो कि इस तरह के शब्द और शुभम की गंदी बातें सुनकर रुचि के तन बदन में आग लग रही थी एक तो धीरे-धीरे बारिश की बूंदों की वजह से दोनों पूरी तरह से भीगने लगे थे और धीरे-धीरे बारिश का जोर तेज होता जा रहा था साथ ही बादलों की गड़गड़ाहट बढ़ती जा रही थी ।)

हां यह बात तो माननी पड़ेगी कि कुछ गलती तुम्हारी भी है मैं अनजाने में बाथरूम में घुस गई थी लेकिन तुमने अपने लंड को छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं किए थे ।(रुचि जानबूझकर अब खुले तौर पर लंड शब्द का प्रयोग कर रही थी क्योंकि वह पूरी उत्तेजना ग्रस्त हो चुकी थी । इस तरह के सबके को सुनने में और कहने में अब उसे आनंद की प्राप्ति हो रही थी रुचि के मुंह से इस तरह की गंदी बात सुनकर शुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो गया और धीरे-धीरे बाइक आगे बढ़ा रहा था और साथ ही रह रह कर उंचे नीचे गडडो की वजह से ब्रेक लगा ले रहा था ,, ना चाहते हुए भी रुचि का बदन शुभम से और ज्यादा शट जा रहा था जिसकी वजह से उसकी दोनों गोलाईया शुभम की पीठ पर अच्छी तरह से महसूस हो रही थी इस तरह से दोनों की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी..,,,)

मैं मानता हूं भाभी की मुझसे गलती हुई थीं लेकिन सब कुछ अनजाने में ही हुआ था कोई जानबूझकर मैंने नहीं किया था।,,,,,

चलो कोई बात नहीं मैं मानती हो कि सब कुछ अनजाने में ही हुआ था तो कि मुझे यह समझ में नहीं आ रहा था कि सब कुछ सामान्य होते हुए भी तुम्हारा लंड इतना खड़ा क्यों था जैसे कि पूरा तैयार हो,,,
( रुचि के मुंह से यह सब गंदे शब्द निकलते जा रहे थे लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब शब्द उसके मुंह से निकल कैसे जा रहे हैं यह सब शुभम के साथ का कमाल था जो कि वह उसके दमदार हथियार को देखकर उसकी जबरदस्त एहसांस को अभी तक अपने अंदर महसूस कर रही थी और उसकी वजह से वह शुभम के आगे इतना खुल गई थी और इस सफर का आनंद लेते हुए गंदे शब्दों के साथ एकदम गंदी बातें कर रही थी।,,, शुभम को अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था कि रूसी जैसी औरत जबकि यह बात अच्छी तरह से जानता था कि रुचि बहुत ही प्यासी औरत थी लेकिन वह अभी तक पूरी तरह से संस्कार के सांचे में ढली हुई थी उससे बाहर नहीं निकली थी लेकिन इतनी जल्दी उसके मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनने को मिलेगी इसलिए उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था। लेकिन जो कुछ भी हो रहा था वह अच्छा ही हो रहा था और उसी में उसकी भलाई थी और लाभ भी। लेकिन उस के ईस सवाल के साथ ही उसकी सिट्टी पिट्टी गुम हो गई क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि जो रुचि कह रही थी वह बिल्कुल सही था सामान्य तौर पर कभी भी मर्द का लंड खड़ा नहीं होता कुछ मादक या उत्तेजनापूर्ण वस्तु देखने के बाद ही मर्द का लंड खड़ा होता है,,, और सबसे बड़ी उत्तेजनात्मक वस्तु उस समय उसकी आंखों के सामने रूचि ही थी लेकिन वह अपने मुंह से कैसे कह दें कि तुम्हें देखकर लंड खड़ा हुआ था। शुभम को इस तरह से खामोश देखकर रुचि अपने सवाल को वापिस दोहराते हुए बोली ।)
Ruchi barsaat me bhigne k bad uski gaand kuch is tarah se dikh rahi thi

क्या हुआ चुप क्यों हो गया मेरे सवाल का जवाब क्यो नहीं देता,,
( शुभम को समझ मे नहीं आ रहा था कि क्या बोले दूसरी तरफ बारिश का जोर बढ़ता जा रहा था अब इतनी तेज बारिश हो रही थी कि उसे आगे का रास्ता ठीक से नजर नहीं आ रहा था और साथ ही तेज हवा चल रही थी और तो और बादल की गड़गड़ाहट से पूरा वातावरण डरावना होता जा रहा था शाम ढल चुकी थी बारिश की वजह से अंधेरा लगने लगा था,, ऐसे हालात में आगे बढ़ना ठीक नहीं था इसलिए वह रुचि से बोला।)

भाभी हमें कहीं जगह देख कर कुछ देर के लिए रुकना पड़ेगा जब तक की बारिश नहीं थम जाती क्योंकि बारिश कितनी तेज हो रही है और साथ ही हवा भी तेज है ऐसे में आगे मोटरसाइकिल चला कर ले जा पाना बड़ा ही मुश्किल है ऐसे में गिरने का डर ज्यादा है क्या कहती हो,,,,

रुक तो जाए लेकिन रुकेंगे कहां यहां तो कुछ नजर भी नहीं आ रहा है सब जगह केवल खेत ही खेत दिखाई दे रहे हैं,,,(रुचि को भी इस बात का एहसास अच्छी तरह से हो गया था कि ऐसे में सफर करना ठीक नहीं था इसलिए मौके की नजाकत को देखते हुए वह बोली.)

बात तो तुम ठीक कह रही हो भाभी कहीं कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा है,,,
( शुभम इतना बोला घर था कि तभी रुचि की नजर पास में ही एक झोपड़ी पर पड़ी जो कि खाली ही लग रही थी उस पर नजर पड़ते ही रुचि खुशी के मारे बोली)
शुभम और रुची कुछ इस तरह से


वह देखो शुभम,,,, औ रही झोपड़ी,,,, खाली ही लग रही है चलो उसमें चलते हैं,,,( इतना सुनते ही शुभम उस तरफ देखकर तसल्ली कर लेने के बाद अपनी मोटरसाइकिल बंद कर दिया और तुरंत रुचि मोटरसाइकिल से नीचे उतरकर उस झोपड़ी की तरफ जाने लगी शुभम उसे जाते हुए देख रहा था जो कि इस समय पूरी तरह से भीग चुकी थी और उसकी पीले रंग की पतली साड़ी के साथ-साथ उसकी ब्लाउज भीग कर गोरे गोरे बदन से चिपक गई थी जिसमें से लाल रंग की ब्रा की पट्टी साफ नजर आ रही थी और साथ ही उसकी सारी पूरी तरह से खत्म होने की वजह से हल्की हल्की उसकी पैंटी की पट्टी साफ तौर पर उसकी गोलाकार नितंबो से चिपकी हुई नजर आ रही थी या देखते ही शुभम के लंदन में हरकत होना शुरू हो गया और वह अपनी मोटरसाइकिल खड़ी करके उसके पीछे पी2छे जाने लगा कुछ ही देर में वह दोनों झोपड़ी के अंदर आ चुके थे,,,।
Barish me bhigne k baad ruchi kuch is tarah se khubsurar or jyada sexy Lagne...
 
बरसात अपने जोरों पर थी। ऐसा लग रहा था पीछे से भगवान ने दोनों की सुन लिया हो तभी तो रास्ते में इस तरह की तूफानी बारिश शुरू हो गई। बारिश इतनी तूफानी होगी इसका अंदाजा दोनों को बिल्कुल भी नहीं था दोनों पूरी तरह से भीग चुके थे रुचि की तो हालत खराब हो गई थी रूचि का पूरा बदन बरसात के पानी में भीग चुका था। उसके पीले रंग की साड़ी उसके बदन से एकदम चिपक से गई थी और पानी की वजह से उसकी साड़ी पूरी तरह से ट्रांसपेरेंट नजर आने लगी थी जिसमें से उसके बदन का हर एक अंग और उसका कटाव और साफ साफ नजर आ रहा था। तभी तो मोटरसाइकिल पर से उतर कर आगे आगे जा रही रुचि की गोलाकार मदमस्त गांव और उस पर सारी चिपकने की वजह से उसमें से दिख रही उसकी पैंटी की पट्टी साफ नजर आ रही थी। और साथ ही लाल रंग की ब्रा की पट्टी के साथ-साथ उसका पूरा स्ट्रक्चर दिखाई दे रहा था यह देखकर शुभम के तन बदन में आग लग गई,,,,, औरत जितनी ज्यादा खूबसूरत सामान्य तौर पर होती है उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी भीगने के बाद हो जाती है वहीं कुछ रुचि के साथ भी हो रहा था वह जितनी ज्यादा खूबसूरत थी,, बरसात के पानी में भीगने के बाद से तो वह स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा लग रही थी। रूचि की मादकता भरी जवानी देख कर शुभम का मतवाला लंड अंगड़ाई लेने लगा। ,,,,
रुची की मदहोश जवानी


लगातार बादलों की गड़गड़ाहट हो रही थी जिससे रुचि को थोड़ा डर लग रहा था साथ ही बिजली की चमक और तेज हवाओं के साथ तूफानी बारिश ,,,,,सब कुछ डरावना सा था लेकिन ना जाने क्यों इस डरावने माहौल में भी रुचि को शुभम का साथ होने की वजह से अत्यधिक पूरा माहौल खुशनुमा लग रहा था बदन में मदहोशी की लहर दौड़ रही थी। एक औरत होने के नाते अपनी पूरे बदन के भूगोल से वह पूरी तरह से वाकिफ थी इसलिए उसे इस बात का भी ज्ञात अच्छी तरह से था कि बारिश के पानी में भीगने की वजह से उसकी साड़ी बदन से चिपक गई थी और जिसकी वजह से ना चाहते हुए भी उसके बदन का हर हीस्सा साफ तौर पर नजर आ रहा था जिस पर चोर नजरों से सुभम की नजर पड़ ही जा रही थी और इस बात का एहसास उसे अंदर तक उत्तेजित कर दे रहा था।
रुचि के बदन से खेलता शुभम


दोनों झोपड़ी के अंदर खड़े थे झोंपड़ी के बाहर का माहौल पूरी तरह से बरसात से नहाया हुआ था साथ ही तूफानी हवा सब कुछ झकझोर के रख दे रही थी। रुचि अपने साड़ी के पल्लू से पानी को लूछने का काम कर रही थी,,, वह साड़ी के पल्लू को गोल गोल घुमा का उसमें से पानी लूछ रही थी। जिसकी वजह से रुचि का ध्यान नहीं गया और उसकी छाती पर से साड़ी का पल्लू हट गया जिसकी वजह से शुभम को रुचि की चूची के ऊपर वाला हिस्सा जो कि काफी गोल सतह पर उभरा हुआ और उसमें दोनों के बीच गहरी पतली दरार एकदम साफ नजर आने लगी। यह देखकर शुभम के लंड ने रुचि की मदमस्त जवानी को सलामी भरते हुए ऊपर नीचे हरकत किया और रूचि जो कि इस बात का आभास होता है कि शुभम की नजर उसकी दोनों गोलाईयो पर है वह अंदर ही अंदर एकदम मस्त होने लगी और उसी तरह से अपनी छातियों को साड़ी से ढकने की बिल्कुल भी चेष्टा ना करते हुए उसी तरह से पानी लूछते हुए वह शुभम से बोली।,,,

तू बताया नहीं,,,,

क्या,,,,? ( एक टक बेशर्म की तरह रुचि की झांकियों को घूरते हुए बोला।)

यही की सब कुछ सामान्य होते हुए भी बाथरूम के अंदर तेरा लंड क्यों खड़ा था,,,,( रुचि अब लंड शब्द इतने सहज भाव से बोल रही थी कि जैसे कोई चरित्रवान औरत ना हो करके कोई गंदी औरत हो और शुभम उसके मुंह से लंड शब्द सुनकर हमारे उत्तेजना के फूले नही समा रहा था,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दें वह भी एक दम बेशर्म बनना चाहता था और उसके सवाल के साथ ही बादलों की गड़गड़ाहट की आवाज कुछ ज्यादा ही तेज होने लगी तो,, रुचि की नजर इधर उधर आसमान में घूमने लगी उसे थोड़ा बहुत डर लग रहा था। शुभम रुचि के सवाल का जवाब देते हुए बोला।)
रुची और शुभम


क्या तुम सच में जानना चाहती हो कि सामान्य होने के बावजूद भी मेरा लंड खड़ा क्यों था,,,? ( इतना कहते हो गए शुभम की नजर रुचि के ऊपर पड़ी तो देखा की रुची नजरे नीचे करके उसके पेंट में बने तंबू को ही देख रही थी जो कि काफ़ी उभरा हुआ था। यह देखकर शुभम जानबूझकर अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड को पेंट के ऊपर से ही दबाने लगा और रूचि यह देखकर उत्तेजना के मारे एकदम गनगना गई,,,,)

हां मैं जानना चाहती हूं,,,( रुचि के तन बदन में उत्तेजना का असर साफ नजर आ रहा था क्योंकि यह जानते हुए भी कि शुभम की नजर उसके ऊपर थी जो कि वह उसके पेंट में बने तंबू को देख रही थी फिर भी वह उसी को घूरते हुए ही जवाब दी,,,, रुचिका इतना कहना था कि तभी जोर की बादल की गड़गड़ाहट हुई और रुचि एकदम से घबराकर शुभम से सट गई और शुभम भी मौके का फ़ायदा उठाते हुए उसे तुरंत अपनी बाहों में भर लिया,,, रुचि इस समय पूरी तरह से शुभम की बाहों में समाई हुई थी शुभम उसे ज़ोर से अपनी बाहों में जकड़े हुए था कुछ देर तक बादलों की गड़गड़ाहट की आवाज पूरे वातावरण में गूंजती रही और डर के मारे रुचि अपनी आंखों को बंद कर ली थी ,,, कुछ सेकंड के बाद बादलों की गड़गड़ाहट की आवाज जब शांत हुई तो उसे इस बात का आभास हुआ कि वह शुभम की बाहों में है और शुभम उसे जोर से अपनी बाहों में जकड़े हुए हैं वह जानबूझकर ऊपर ही मन से उस से छूटने की कोशिश करने लगी लेकिन शुभम अपनी बाहों का दबाव उसके बदन पर कुछ ज्यादा ही जोर से दिए हुए था।,,, रुचि की खूबसूरत बदन को अपनी बाहों में लेकर शुभम उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो गया था उसके पेंट में बना तंबू कुछ ज्यादा ही अकड़ कर खड़ा हो गया था जो कि इस समय रुचि को अपनी बाहों में लेने की वजह से उसका तंबू ठीक ऊसकी टांगों के बीच की दरार पर धंसने लगा था ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे वह रुचि के बुर के दरवाजे पर बाहर से दस्तक दे रहा हो और रुचि भी अपनी टांगों के बीच की उस पतली दरार पर शुभम के मोटे तगड़े लंड के बने तंबू की ठोकर को महसूस करके एकदम कामोत्तेजना से तृप्त हुए जा रही थी।,,,,, रूची अपने आप पर बड़ी मुश्किल से कंट्रोल किए हुए थी वरना किसी भी पल उसके मुख से गर्म सिसकारी की आवाज निकल जाती। ,,,, कुछ ही देर में शुभम के मर्दाना ताकत भरे अंग की ठोकर से वह काम व्हीवल हो गई,,,, और अब वह शुभम की बांहों से आजाद होने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी बल्कि शुभम की चोरी छातियों में अपने आप को और ज्यादा छुपाने की कोशिश कर रही थी। दोनों के नथूनों से निकल रही गर्म सांसों की गर्मी दोनों के चेहरे पर महसूस होने लगी,,, झोपड़ी के अंदर का नजारा पूरी तरह से बदलना शुरू हो गया था लेकिन झोपड़ी के बाहर का नजारा और वातावरण उसी तरह से तूफानी हो चला था।,,,, रुचि को अपनी बाहों में भर कर शुभम की हिम्मत और ज्यादा आगे बढ़ने लगी थी अब वह समझ गया था कि मंजिल उसके हाथ में ही है।
धीरे-धीरे शुभम अपनी हथेली को रुचि की चिकनी पीठ पर ऊपर से नीचे फिराने लगा,,,,, शुभम की हरकत की वजह से रुचि शर्म के मारे पानी-पानी हुए जा रही थी लेकिन कर भी क्या सकती थी वह भी अपने पति से अतृप्त थी,, उसका पति उसकी काम भावना को किसी भी तरह से शांत करने में सक्षम साबित हो रहा था ना तो उसका मर्दाना अंग ही उसके काबिल था और ना ही वह खुद,, इस बात का एहसास उसे शुभम से मिलने के बाद और अनजाने में ही उसके लंड को देखने के बाद से होने लगा था। रुचि अपने आप को शुभम के गर्म जिस्म में पिघलता हुआ महसूस कर रही थी। ,,,,, शुभम को इस बात का पूरी तरह से विश्वास हो गया कि आज उसने फिर से एक उड़ती चिड़िया को पिंजरे में क़ैद कर लिया था अब वह जैसा चाहे वैसा ही होगा इस बात का उसे पक्का विश्वास हो गया था इसलिए वह धीरे से फुसफुसाते हुए रुचि से बोला,,,।

भाभी क्या तुम सच में अभी भी जानना चाहती हो कि मेरा लैंड खड़ा क्यों था,,,?
रुची की जवानी से खेलता सुभम


शुभम की बात सुनकर जवाब में रुचि के मुंह से एक भी शब्द नहीं फूटे इसलिए वह इशारों में ही अपना सिर हिलाकर हामी भर दी।,,,,
( रुचि की तरफ से इशारा पाते ही सुगम से रहा नहीं गया उसे समझ में आ गया की रुचि की तरफ से उसे हरी झंडी मिल गई है इसलिए अब देर करना अच्छी बात नहीं थी,, इसलिए वह भी पूरी तरह से काम होते जीत होकर अपने दोनों हथेलियों को रुचि की चिकनी पेट से नीचे की तरफ से लाते हो लेकर आ और कमर के नीचे के उसके नितंबों के उभार को साड़ी के ऊपर से ही अपनी हथेली में दबाते हुए अपनी तरफ खींच कर बोला,,,,।)
Shubham or ruchi..


सच सच कहूं तो भाभी मेरा लंड सिर्फ तुम्हारी वजह से खड़ा हुआ था।,,, भाभी तुम सच में बहुत खूबसूरत हो ऐसा लगता है कि जैसे कोई अप्सरा स्वर्ग से नीचे जमीन पर उतर आई हो।,,, तुम्हारी मदमस्त कर देने वाली जवानी मुझे मदहोश कर देती है जब भी कभी तो मेरे पास मेरे करीब होती हो तो मुझे ना जाने क्या होने लगता है और ऐसा ही उस दिन हुआ था जब मैं तुम्हें तुम्हारी मार के छोड़ने गया था तुम्हें इतना करीब महसूस करके मुझसे रहा नहीं गया और मेरा लंड खड़ा हो गया।,,, और अनजाने में ही तुमने मेरे लंड को देख ली और सच कहूं तो तुम्हें उस हालात में देखकर कोई भी होता तो अपने लंड को छुपाने की कोशिश करता लेकिन ना जाने तुम्हारे बदन में तुम्हारी खूबसूरती में कैसी कशिश थी कि मैं ऐसा नहीं कर पाया और अपना लंड हिलाते हुए तुम्हें दिखाता रहा,,( शुभम रुचि की मदमस्त जवानी में पागल होकर जो भी मन में आया सब कुछ एक सांस में ही बोल दिया और साथ ही यह सब बोलते बोलते लगातार अपने दोनों हथेलियों को जितना हो सकता था उतना रुचि की मदमस्त गांड के उभार को उस में भरकर दबाता रहा जिससे रूचि के तन बदन में मादकता का सुरूर चढ़ने लगा ,, वह भी अपनी तारीफ में शुभम के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर एकदम मदहोश होने लगी और साथ ही उसकी हरकत की वजह से अब वह पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी थी ,,,,, शुभम की बातें सुनकर उसके पास बोलने लायक कोई शब्द नहीं थे वह खामोश रहे और उस खामोशी का फायदा उठाकर शुभम अपने दोनों हाथ को ऊपर की तरफ लाकर उसके खूबसूरत गोल चेहरे को अपनी हथेली में लेकर ऊपर उठाया और उसके लजरते हुए लाल लाल होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसना शुरू कर दिया,,
शुभम को नहीं मालूम था कि उसकी इस हरकत का रुचि पर क्या असर पड़ेगा बस वह जो मन में आया वह करना शुरू हो गया मौके की नजाकत भी यही कहती थी।,,, लेकिन रुचि की तरफ से किसी भी प्रकार का विरोध नहीं हो रहा था बल्कि वह कुछ ही देर में उसका साथ देते हुए खुद ही उसके होठों को मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दी और उसके दोनों हाथ खुद-ब-खुद शुभम की पीठ पर चले गए शुभम पागलों की तरह उसके लाल लाल होंठों को चूसना शुरू कर दिया था मानो जैसे एक भंवरा खूबसूरत फूल की मीठा उसको चूसता हो।,,,, दोनों काफी उत्तेजित हो चुके थे झोपड़ी के अंदर का पूरा माहौल मादक हो चुका था और बाहर बारिश अभी भी अपना जोर दिखा रही थी।,,,, शाम के तकरीबन 5:30 का समय हो रहा था लेकिन बारिश और बादलों की वजह से अंधेरा सा होने लगा था,,, लेकिन इतना भी अंधेरा नहीं हुआ था कि एक खूबसूरत औरत के जिस्म को देखा ना जा सके शुभम को सब कुछ साफ-साफ ने दिया था रुचि के बदन का हर एक हिस्सा शुभम की आंखों में चमक भर दे रहा था।,,,, रह रह कर बादलों की गड़गड़ाहट तेज हो जा रही थी,,,, थोड़ा डरावना माहौल होने के बावजूद भी दोनों उस माहौल के बिल्कुल विपरीत होकर एक दूसरे में समाने की कोशिश कर रहे थे। ,,, शुभम समझ गया था कि उस दिन लैंड खड़ा होने का जो उसने कारण बताया था उससे रुचि को किसी भी प्रकार की आपत्ति नहीं थी फिर भी वह अपनी मन की शंका को दूर करने के हेतु बोला।,,,
Shubham or ruchi..


भाभी जो मैंने कहा उसे से तुम नाराज तो नहीं हो,,

नननन,,, नहीं,,,,( रुचि उत्तेजना के मारे सिसकते हुए बोली,, वैसे भी भला इसमें उसे क्यों एतराज होने लगा था,,, काफी समय हो गया था किसी मर्द के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनें शुभम की बातें उसे पहले से ही अच्छी लगती थी और इस तरह की बातें सुनकर तो वह उसकी पूरी तरह से दीवानी हो गई थी इसलिए तो उसकी बाहों में एकदम मचल रही थी। रुचि का जवाब सुनकर शुभम की हिम्मत बढ़ने लगी झोपड़ी के अंदर आज अपने मन की मुराद पूरी कर लेना चाहता था इसलिए वह एक हाथ ऊपर की तरफ ले आकर ब्लाउज के ऊपर से ही रुचि की चूची को दबाना शुरू कर दिया उत्तेजना के मारे वह इतनी कसके रुचि की चूची को पकड़ा था कि रुचि के मुंह से आह निकल गई,,, रुचि के पास आज शुभम के आगे समर्पण करने के अलावा दूसरा कोई भी रास्ता नहीं था वैसे भी मन में वह भी अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी शुभम को पूरी तरह से समर्पण करने के लिए आज वह अपने मन की प्यास अपने तन की प्यास सब कुछ पूछा देना चाहती थी शादी हुई तब से वह अपने बदन की प्यास को पूरी तरह से बुझा नहीं पाई थी और उसके पति के द्वारा तो उसकी प्यास और बढ़ती जाती थी बस अपने आचरण और संस्कार की वजह से ही अपने पैर को रोके रखी थी लेकिन आज इस बारिश के माहौल में सुनसान झोपड़ी के अंदर अपने तन की प्यास बुझाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गई थी।,,,

ओहहहहह,,,, भाभी तुम्हारी गोल-गोल चूचियां इसे देखने के लिए मैं कब से तड़प रहा था ,,, तुम्हारी दोनों चुचियों को मुंह में भर कर पीना चाहता हूं इनसे खेलना चाहता हूं ,,,,( ऐसा कहते हुए सुभम अपना दूसरा हाथ भी उठा कर ब्लाउज के ऊपर से ही दोनों संतरे को दबाना शुरू कर दिया,,)

ससससहहहह,,,,,आहहहहह,,,,, कोई आ गया तो,,,(स्तन मर्दन की वजह से गुरुजी पूरी तरह से गरमाने लगी थी और गर्म सिसकारी लेते हुए शंका जताते हुए बोली.,,,, रुचि का यह कहना कि कोई आ गया तो यह इस बात का सबूत था कि वह पूरी तरह से तैयार थी शुभम से छुड़वाने के लिए पर यह बात तो हम भी उसकी बातों के जरिए जान गया था इसलिए वह ब्लाउज के बटन को खोलते हुए बोला,,,)

भाभी ये गांव है और सड़क पर इतनी तूफानी बारिश मे गांव वाले कभी नहीं आने वाले क्योंकि मैं भी गांव में रह चुका हूं मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि ऐसी बारिश में और वह भी शाम ढलने के बाद कोई गांव वाला घर से बाहर नहीं निकलता इसलिए तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो यहां पर हमें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी,,,( इतना कहते हुए शुभम बात ही बात में रुचि के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया रुचि को भी इस बात का आभास नहीं हुआ कि कब शुभम ने फुर्ती दिखाते हुए उसके ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया ,,ब्लाउज के बटन खुलते ही उसकी आंखों के सामने लाल रंग की ब्रा नजर आई जिसमें रुचि की संतरे जैसी चूची बहुत ही खूबसूरत लग रही थी।,,,, रुचि की ख़ूबसूरत संतरे जैसी चूची देखकर सुभम की आंखों में चमक आ गई ,,,, दूसरी तरफ रुची का दिल जोरों से धड़क रहा था,,,, शुभम जिस तरह से फुर्ती दिखाते हुए उसका ब्लाउज खोला था उसे देखते हुए रुचि को लग रहा था कि वह उसकी ब्रा भी ना खोल दें लेकिन चाहतीं तो वह भी यहीं थी कि वह उसकी ब्रा भी खोल दे लेकिन फिर भी उसे डर था कि कहीं कोई आ ना जाए क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि कोई वहां आ जाए और लेने के देने पड़ जाए ,,, लेकिन फिर भी शुभम की बात सुनकर उसे भी तूफानी बारिश देखकर यही लग रहा था कि उसे मैं वहां कोई आने वाला नहीं है लेकिन फिर भी एक औरत होने के नाते उसे डर तो लग ही रहा था लेकिन मजा भी उतना आ रहा था,,,,
ruchi shubham k upar chadh kar chudai ka maja lete huye..
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दोनों की सांसो की गति ते
[ज चल रही थी शुभम मदहोश होकर रूचि की लाल रंग की ब्रा के अंदर झांक रहा था और रुचि शुभम की आंखों में अपनी खूबसूरत बदन को लेकर जो चमक नजर आ रहीं थी उससे उसके अंदर काफी प्रसन्नता का एहसास हो रहा था क्योंकि उसे इस बात का अंदाजा लग रहा था कि शुभम जरूर उसकी प्यास बुझा पाएगा,,, शुभम तुरंत उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपने दोनों हाथों से उसके ब्लाउज को उसके खूबसूरत चिकनी हाथों में से निकालने लगा लो जी का दिल जोरों से धड़क रहा था जिस तरह से होगा धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था रुचि को एहसास हो रहा था कि कुछ बहुत ही अच्छा होने वाला है देखते ही देखते हैं शुभम ने रुचि के ब्लाउज को उतार कर नीचे फेंक दिया,,,,, शुभम की मदहोशी देखते हुए रुचि को एहसास हो गया कि वह उसकी ब्रा भी उतार देगा इसलिए वह पहले ही बोली,,,


नहीं सुभम मेरी ब्रा मत उतारना पहनने में दिक्कत होगी,,,

कोई दिक्कत नहीं होगी भाभी में जिस तरह से उतार रहा हूं उसी तरह से पहना भी दूंगा,,, (इतना कहते हुए शुभम पीछे से रुचि की ब्रा का हुक खोलने लगा और देखते ही देखते रुचि के बदन से ब्र कब अलग हो गई यह रूचि को भी पता नहीं चला,,,,,,, ब्रा के उतरते ही शुभम की आंखों में चमक आ गई और वह पीछे से रुचि को अपनी बाहों में भरकर अपने दोनों हथेली में उसके दोनों संतरो को पकड़कर जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया इतना जोर से वह पागलों की तरह रुचि की चूची दबा रहा था कि रुचि से रहा नहीं गया और वह दर्द से कराहने लगी,,,,,

आहहहहह,,,,, शुभम दर्द कर रहा है,,,

चिंता मत करो भाभी थोड़ी ही देर में मजा आने लगेगा लगता है कि भैया ठीक तरह से आपकी चुची पर मेहनत नहीं कीए है इसीलिए आप इस तरह से चिल्ला रही हो वरना इस तरह से चिल्लाती नहीं बल्कि मजे लेकर और दबवाती ,,,,

ससससहहहह,,,,आहहहह,,,, सच कह रहा है तू शुभम अगर मेरे पति इस पर मेहनत कीए होते तो सच में मैं मजे लेकर चिल्लाती दर्द से नहीं,,,,(रुचि दर्द से कराहते हुए बोली,,,,,)

लेकिन कोई बात नहीं भाभी अाप भी थोड़ी देर में ही आपको मजा आने लगेगा और आप भी सिसकारी ले ले कर मजे लेंगी,,,,। (शुभम रुचि की चूची पर मेहनत करते हुए मजे लेने लगा,,,, शुभम के हाथों में अधिकतर अभी तक बड़ी-बड़ी चूचियां ही आई थी लेकिन आज पहली बार एकदम संतरे के साइज की गोल-गोल चूचियां आई थी जिसे दबाने में शुभम को काफी उत्तेजना और आनंद की अनुभूति हो रही थी वह पागलों की तरह रुचि के गले पर चुंबनों की बौछार करते हुए लगातार उसकी चूची से खेल रहा था और साथ ही अपने पैंट में बने तंबू को हल्के हल्के उसके नितंबों से रगड़ रहा था जिससे रुची के बदन की गर्मी और ज्यादा बढ़ती जा रही थी ,,,,, शुभम की सूझबूझ के कारण थोड़ी ही देर में रुचि के मुंह से मादकता भरी सिसकारी छूटने लगी ,,,

ससससहहहह,,,,,आहहहहह,,,,,ऊऊऊऊऊहहहहह,,,,

देखा भाभी मैंने कहा था ना कि तुम्हें भी मजा आने लगेगा तो तुम्हारे मुंह से चिल्लाने की जगह गरम सिसकारी की आवाज निकलने लगेगी,,,

हारे तो सच कहा था अब मुझे दर्द बिल्कुल भी नहीं हो रहा है बल्कि मजा आ रहा है इस तरह से तो मेरे पति ने आज तक मेरी चूचियों से नहीं,,खेला,,,

पागल है भैया जो ईतनी खूबसूरत औरत के साथ मस्ती भरी रात नहीं गुजारते,,, ना तो तुम्हारी खूबसूरत है जिस्म से खेलते हैं,,,,( इतना कहते हुए शुभम अपनी हरकत को जारी रखते हुए बार-बार अपने पेंट में बना तंबू उसकी मदमस्त गोल गोल गाल पर कुछ ज्यादा ही जोर जोर से रगड़ रहा था जिससे रुचि को अपनी गांड के बीचो-बीच कोई मोटी लकड़ा की तरह चुभता हुआ महसूस हो रहा था इसलिए वह बोली,,,,)

शुभम तेरा लंड है कि मुसल मेरी गांड में बहुत जोरों से चुभ रहा है।,,,,,

भाभी मेरा बस चले तो साड़ी के ऊपर से ही तुम्हारी गांड में मेरा लंड पेल दुं,, ( शुभम मारे उत्तेजना के पागल हुआ जा रहा था वह इतनी जोर जोर से रूचि की चूची को मसल रहा था कि वह एकदम लाल टमाटर की तरह हो गई थी ,,, लेकिन इसमें रुचि को बहुत ही आनंद की अनुभूति हो रही थी झोपड़ी के बाहर अभी भी लगातार बारिश बहुत जोरों की पड़ रही थी देखते ही देखते खेतों में पानी नजर आने लगा जो कि बहुत ही तेजी से खेतों में पानी भर रहा था,,, रुचि स्तन मर्दन का मजा लेते हुए गरम सिसकारी की आवाज के साथ बोली।)

शुभम ये बारिश बंद होगी भी कि नहीं होगी,,,

भाभी मुझे तो लगता है कि यह बारिश तभी बंद होगी जब तक कि मैं तुम्हारी प्यास नहीं बुझा देता,,,,,

तो देर क्यों कर रहा है मेरी प्यास तो बढ़ती जा रही है बुझा जल्दी से मेरी प्यास बुझा,,,,( रुचि एकदम मदहोश होते हुए यह बात कहने के साथ ही एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर शुभम की लंड को पजामे के ऊपर से ही पकड़ कर उसका जायजा लेने लगी,,,)
Pahli bar ruchi chudai ka bharpur Majaa le rahMajaa


ससससहहहह ,,,,आहहहहह,,,,, भाभी और जोर जोर से दबाओ तुम्हारा इस तरह से लंड दबाना अच्छा लग रहा है,,,,
( इतना सुनते ही रुचि और जोर जोर से दबाना शुरू कर दी जिससे शुभम को मजा आने लगा और काफी उत्तेजना का एहसास होने लगा वह जितनी जोर से पजामे के ऊपर से उसके लंड को दबा रही थी शुभम इतनी जोर लगाते हुए उसकी चूची को दबा रहा था,,,,, लेकिन रूसी की हालत खराब होती जा रही थी क्योंकि उसे अपनी हथेली के अंदर शुभम का लंड को ज्यादा यह मोटा महसूस हो रहा था और जिसे अपनी बुर के अंदर लेने के लिए वह मचल रही थी इसलिए वह बोली,)

सुभम मुझसे रहा नहीं जा रहा है तो कुछ कर,,,,,,
( शुभम समझ गया कि रुचि अब उसका लंड अपनी बुर में लेने के लिए पूरी तरह से तैयार है लेकिन शुभम हाथ में आया मौका इतनी जल्दी हाथ में आया मौका खत्म नहीं करना चाहता था इसलिए वाह चूची पर से हाथ हटाते हुए बोला,,,)

मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है भाभी में भी तुम्हारी बुर देखने के लिए तड़प रहा हूं ,,,(और इतना कहने के साथ ही वह झोपड़ी के अंदर इधर-उधर देखने लगा तभी उसे घास का ढेर सारा गठ्ठर नजर आया और वह उसे लाकर वहीं पर बिछा दिया ताकि रुचि को उस पर लिटाने में कोई दिक्कत ना हो,,, शुभम को यह करते देखकर रुची इतना तो समझ गई थी कि वह क्या करने वाला है इसलिए बिना कुछ बोले वहीं खड़ी रही तो शुभम उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ लाया और उसे धीरे से उस घास के ढेर पर लिटा दिया,,, रुचि की सांसो की गति बहुत तेज चल रही थी उसका बदन कसमसा रहा था वह आराम से घास के ढेर पर लेट गई,,,, बाहर तूफानी बारिश को देखते हुए रुचि इतना तो समझ गई थी कि वाकई में ऐसी तूफानी बारिश में अब वहां कोई आने वाला नहीं था और वैसे भी धीरे-धीरे अंधेरा होना शुरू हो गया था लेकिन अभी भी सब कुछ नजर आ रहा था,,, धीरे-धीरे शुभम रुचि की साड़ी को ऊपर उठाने लगा जैसे जैसे साड़ी ऊपर की तरह ऊठ रही थी वैसे वैसे रुची का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह जानती थी अगले पल क्या होने वाला है और देखते-देखते सुभम रुची की साड़ी को उसकी कमर तक उठा दिया और कमर तक साड़ी के उठते ही उसकी लाल रंग की पैंटी नजर आने लगी और उसकी पानी में भीग चुकी है लाल रंग की पैंटी को देखकर शुभम का लंड एक बार फिर से रुची की मदमस्त कर देने वाली जवानी को सलामी देते हुए ऊपर-नीचे हुआ,,
दोनों की सांसो की गति बड़ी तेजी से चल रही थी,,, दोनों एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे दोनों की आंखों में खुमारी साफ नजर आ रही थी दोनों को इस बात का ज्ञान अच्छी तरह से था कि इसके आगे क्या होने वाला है और क्या करना चाहिए इसलिए शुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर धीरे से रुची की लाल रंग की पैंटी को पकड़ लिया और उसे धीरे-धीरे नीचे खींचने लगा कि तभी रुचि उसका सहयोग देते हुए अपनी गोल गोल गांड को ऊपर की तरफ उठा ली जिससे शुभम को उसकी पैंटी उतारने में किसी भी प्रकार की दिक्कत ना आए और देखते ही देखते शुभम उसकी पैंटी को उतार कर उसी घास के ढेर में फेंक दिया शुभम की आंखों के सामने रूचि अब एकदम नंगी थी केवल उसके बदन पर उसकी साड़ी थी जो कि वह भी कमर तक उठी हुई थी,,,,


शुभम अपनी आंखों से रूचि की नंगी बुर को साफ-साफ देख पा रहा था उसे साफ साफ दिखाई दे रहा था कि रुचि की बुर एकदम चिकनी थी ऐसा लग रहा था कि मानो आज ही उसने क्रीम लगाकर उसे साफ की हो यह देख कर उसके मुंह में पानी आ गया और बिना कुछ बोले सीधा अपने प्यासे होंठों को उसकी बुर पर रखकर उसे चाटना शुरु कर दिया,,

रुचि शुभम के द्वारा इस तरह के हमले के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी इसलिए शुभम की इस हरकत की वजह से उसके पूरे बदन में जैसे कि करंट लग गया हो उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,, वह पागलों की तरह एकाएक पूरी तरह से काम उत्तेजित होकर अपनी कमर को ऊपर उठा दी और शुभम भी फुर्ती दिखाते हुए उसके कमर को अपने दोनों हाथों से थामकर अपनी जीभ कोउसके गुलाबी बुर की गहराई में उतार कर चाटना शुरू कर दिया,,
उत्तेजना के मारे रुचि का गला सूख रहा था वो पागलों की तरह अपना सर दाएं बाएं पटक रही थी उसे इतना ज्यादा मजा आ रहा था कि इस तरह का मजा उसने अपनी जिंदगी में कभी भी नहीं प्राप्त की थी,,, अपने दोनों हाथों को शुभम के सर पर रख कर और जोर जोर से अपनी बुर पर दबा रही थी और जितना वह उसे दबा रही थी सुबह इतनी तेजी से उसकी बुर को चाट रहा था,,,, शुभम की जीभ के कमाल के आगे रुचि ज्यादा देर तक टिक नहीं पाए और गर्म सिसकारी देते हुए एक बार बड़ी तेजी से पानी छोड़ दी,, ,, शुभम एक बार रुचि को झाड़ चुका था और अब उसकी बारी थी इसलिए वह अपनी पेंट उतार कर पूरा नंगा हो गया रुचि की आंखों के सामने शुभम का मोटा तगड़ा नंगा लंड लहरा रहा था जिसे देखकर उत्तेजना के मारे रुचि की बुर फुलने पीचकने लगी,,,, शुभम एक हाथ में अपना लंड पकड़ कर
धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा रुचि शादीशुदा होने के नाते इतना तो समझ ही गई थी कि शुभम के मन में क्या चल रहा है इसलिए वह बिना किसी दिक्कत के जिस तरह से शुभम ने अपने मोटे लंड को उसके मुंह में डालना चाहा उसी तरह से रूचि मुंह खोल कर उसके लंड का स्वागत करते हुए उसे अपने मुंह में लेकर तुरंत लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरु कर दी लंड इतना ज्यादा मोटा था कि उसका मुंह में पूरा भर चुका था और उसका मुंह जीरो की शेप में हो गया था,, जिंदगी में पहली बार उसे मोटा लंड चूसने में मजा आ रहा था वरना अपने पति के छोटे लंड को मुंह में लेकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह किस तरह से लंड चूसे,,,
शुभम रुचि के सूज भुज के द्वारा जिस तरह से वह उसका लंड चूस रही थी उससे वह काफी प्रभावित हो गया और जल्द ही अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करने लगा इसलिए उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि कहीं उसका लंड उसके मुंह में ही पानी ना छोड़ दिया इसलिए तुरंत उसके मुंह में से अपना लंड वापस खींच लिया,,,,

जिस पल के लिए रुचि को बड़ी बेसब्री से इंतजार था वह बना चुका था घास के ढेर पर घुटने के बल बैठकर रुचि की टांगों को फैला था हुआ शुभम अपने लिए जगह बना रहा था,, शुभम अपने मोटे तगड़े लंड को हाथ में लेकर धीरे-धीरे रुचि की गीली दूर के ऊपर सटा कर धीरे धीरे अंदर करने लगा,,, शुभम को इस बात का एहसास हो गया कि रुचि की बुर जीतनी खुलनी चाहिए थी अभी उतनी खुली नहीं है वह काफी कसी हुई थी,,, इसलिए मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा और देखते ही देखते उसे कामयाबी मिलने लगी और वह अपना आधा लंड गुरुजी की बुर में डाल चुका था लेकिन इस मशक्कत में रुचि को काफी दर्द भी हो रहा था लेकिन वह अपने इस दर्द को अपने दांतों तले दबा आए हुए थी। क्योंकि इसी दर्द के लिए तो वह तड़प रही थी जो कि इस तरह का दर्द उसके पति के द्वारा संभोग करने में कभी भी उसे प्राप्त नहीं हुआ धीरे-धीरे हिम्मत दिखाते हुए रुचि शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर की गहराई तक अंदर ले ली,,,, हालांकि अभी भी रुचि को काफी दर्द हो रहा था लेकिन उसे पता था कि इसके आगे आनंद ही आनंद है इसलिए वह आने वाले पल का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी,,,, कहते हैं सब्र का फल बहुत मीठा होता है देखते ही देखते रुचि को भी इस बात का एहसास होने लगा क्योंकि शुभम शुरू शुरू में धीरे-धीरे उसकी कमर थाम कर अपने कमर हिला रहा था लेकिन थोड़ी ही देर बाद जब लगने लगा कि रुचि को दर्द काम और मजा आने लगा है तब वह अपनी स्पीड बढ़ा,,दीया,,, देखते ही देखते शुभम की कमर तेज रफ्तार में आगे पीछे होने लगी वह रुचि की दोनों चूचियों को अपने हाथों में थाम कर अपनी कमर हिला कर धक्के देने लगा,, तूफानी बारिश में बादलों की गड़गड़ाहट के बीच रुचि की सिसकारी भरी आवाज और उसकी चीख झोपड़ी के माहौल को पूरी तरह से मादक बना रही थी,,, रुचि पूरी तरह से खुल चुकी थी वह अपनी दोनों टांगों को ऊपर उठा कर शुभम की कमर पर लपेट ली और ऊसे ऊकसाने लगी जोर जोर से धक्के लगाने के लिए,,
रुचि की बात सुनकर और उसकी कामोत्तेजना देखकर शुभम से भी रहा नहीं गया और वह दोनों हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर रुचि को पूरी तरह से अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपनी कमर की रफ्तार बढ़ाते हुए उसे चोदना शुरू कर दिया,, तकरीबन तूफानी बारिश में बादलों की गड़गड़ाहट के बीच शुभम ने उसकी 40 मिनट तक जमकर चुदाई किया इसके बाद रुचि की सांसों की गति के साथ-साथ उसकी गरम सिसकारी की आवाज भी,, तेज होने लगी क्योंकि उसे मालूम था कि इस तूफानी बारिश में उसकी चीख-पुकार कोई सुनने वाला नहीं है इसलिए वह मजे लेकर एकदम खुलकर चिल्ला रही थी उसे आज चुदाई का भरपूर आनंद मिल रहा था,,,, शुभम के जबरदस्त धक्कों के प्रहार के कारण रुचि का पानी एक बार फिर से झड़ गया,,, कुछ धक्कों के बाद शुभम भी अपना गरम पानी रुचि की बुर में डाल दिया दोनों झड़ चुके थे,,, वासना का तूफान शांत हो चुका था और धीरे-धीरे बरसात का मौसम भी खुशनुमा होने लगा था तूफानी बारिश कमजोर पड़ गई थी जिसकी जगह धीरे-धीरे बूंदें गिरने लगी थी बाहर अंधेरा छाने लगा था इसलिए दोनों जल्दी से अपने कपड़े पहन कर झोपड़ी से बाहर आए और शुभम मोटरसाइकिल चालू करके रुचि को बिठा लिया और घर की तरफ निकल गया,,,
 
शुभम को रुचि को लेकर उसके घर पहुंचने में काफी देर हो चुकी थी,, शुभम उसे दरवाज़े पर छोड़कर तुरंत वहां से अपने घर चला गया क्योंकि वह नहीं चाहता था कि,, उसकी मां को जरा सा भी भनक लगे कि वह काम के वजह से नहीं बल्कि सरला चाची की बहू को लेने उसके मायके गया हुआ था वरना खामखा बात का बतंगड़ हो जाएगा,,,,,
रुचि को भीगा हुआ देखकर सरला कोई इतना तो समझ में आ गया कि उन लोगों को किस लिए इतनी देर लगी,,, लेकिन पहली बार ऐसा हो रहा था कि अपनी बहू को देखकर सरला को थोड़ा गुस्सा आ रहा था क्योंकि वह जानती थी कि उसके बहू के होते हुए अब वह शुभम से चुदाई नहीं करवा पाएंगी,, अब उसे भी शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में लेने की आदत पड़ गई थी,,, सरला शुभम के साथ बिताए हुए हर पल को याद करके अपने आपको काफी चुदवासी महसूस करने लगी थी,,, उसे सब कुछ अच्छी तरह से याद था कि उसकी हर एक धक्के पर उसकी गरम सिसकारी छूट पडती थी,,,, अब वह बहू के होते हुए किस तरह से संभोग सुख भोग पाएगी इस बात की चिंता है उसे हर पल सताए जा रही थी,,

वहीं दूसरी तरफ रुचि के खुशी का ठिकाना ना था,,, आज पहली बार उसे शादी के बाद औरत होने पर गर्व होता था,,, क्योंकि जिंदगी में पहली बार उसने संभोग सुख को इतनी अत्यधिक तृप्ति पूर्वक भोगी थी,,, प्यासी बुर के अंदर जब एक मोटा लंड घुसता है तो एक औरत को कैसा महसूस होता है यह एहसास उसे जिंदगी में पहली बार हुआ था । अब वह शुभम की पूरी तरह से दीवानी हो चुकी थी,,, एक मर्द औरत की बुर को इतनी जबर्दस्त प्रहार के साथ चोद सकता है या उसे पहली बार ज्ञात हुआ था,,, वरना अब तक उसने अपनें पति के द्वारा छोटे से लंड से हल्के हल्के धक्को के साथ ही चुदाई करवाई थी लेकिन उसमें उसे जरा भी आनंद की अनुभूति नहीं हुई थी बल्कि अपने पति से चुदने के बाद उसकी चुदने की प्यास और ज्यादा बढ़ जाती थी लेकिन वह अपनी प्यास को बुझा नहीं पाती थी जिंदगी में पहली बार वह अपनी मर्यादा को लांघ कर किसी गैर मर्द के साथ शारीरिक संबंध बनाई थी और उसमें उसे सफलता प्राप्त हुई थी। रुचि काफी खुश थी लेकिन दूसरे दिन उसे चलने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी क्योंकि पहली बार उसकी रसीली कसी हुई बुर के अंदर छोटे से लंड की जगह बहुत ज्यादा मोटा और लंबा लंड गया था जो कि उसका आकार बदल के रख दिया था इसलिए उसे चलने में तकलीफ हो रही थी सरला के द्वारा पूछे जाने पर वह बारिश में पांव फिसल जाने का बहाना बनाकर साफ निकल गई,,,,, उसे अभी भी अपनी बुर में हल्का हल्का दर्द महसूस होता था लेकिन यह दर्द,,,, दर्द की जगह आनंद ही दे रहा था लेकिन अब उसकी हालत और ज्यादा खराब होने लगी थी क्योंकि अब उसकी इच्छा शुभम से दुबारा चुदने की हो रही थी लेकिन उसे कोई मौका नहीं मिल रहा था और वह मौके की तलाश में थी,,,,

शुभम की काफी खुश नजर आ रहा था धीरे-धीरे वह हर एक किले पर फतेह का झंडा गाड़ता चला जा रहा था।,,, उड़ती चिड़िया को कैसे अपने कैद में करना है यह कला में वह पूरी तरह से माहिर हो चुका था।,, उम्र दराज औरतों के साथ साथ उसने जवान औरत के साथ संभोग सुख का आनंद ले कर अपने आप पर गर्व महसूस कर रहा था।,, चूची की बुर में अपना लंड डालते हुए शुभम को इस बात का ज्ञान हो गया था कि रुचि की बुर शादीशुदा होने के बावजूद भी काफी कसी हुई थी,,, लेकिन इस बात से उसे इतमिनान था कि अब उसकी बुर उसके लंड के सांचे में ढल चुकी थी उसका आकार बदल चुका था जब चाहे तब वह बड़े आराम से रुचि की चुदाई कर सकता था,,,,, उसकी भी प्यास बढ़ रही थी रुचि की चुदाई करने के लिए लेकिन अब उसके सामने बहुत बड़ा प्रश्न था कि सरला के होते हुए वह उसकी बहू की कैसे चुदाई करें और रुचि के होते हुए वसरला चाची की बुर में अपना लंड कैसे डालें अब हर एक कदम संभाल कर रखना था,,, इसलिए वह कुछ दिन उन दोनों पर ध्यान ना दे कर अपनी पढ़ाई में ध्यान देने लगा जो कि उसका मन तो नहीं लगता था लेकिन क्या करें अब फाइनल एग्जाम जो आने वाला था इसलिए पढ़ाई करना भी जरूरी था।,,,, हालांकि उसकी जरूरत घर में पूरी हो जाती थी और वह भी अपनी मां की मदमस्त बुर की चुदाई करके तो वह एकदम मस्त हो जाता था क्योंकि दूसरी औरतों की चुदाई करने में उसका लालच भर था लेकिन जुदाई का असली सुख उसे निर्मला ही दे पाती थी।

दूसरी तरफ सास बहू दोनों शुभम के संसर्ग के लिए तड़प रही थी लेकिन उन्हें कोई मौका हाथ नहीं लग रहा था,,, वह मौका तलाश कर अपनी इच्छा को अंजाम दे पाती इससे पहले ही उनके इरादे पर पानी फिर गया क्योंकि सरला का बेटा बिना बताएं घर वापस आ गया था,, पहली बार ऐसा हुआ था कि ना तो एक मां को ही अच्छा लगा था कि उसका बेटा घर पर आया है और ना ही एक पत्नी को ही अच्छा लगा था कि उसका पति घर वापस आया है दोनों उसे देख कर मन ही मन उदास होने लगे,,,, लेकिन क्या करें चेहरे पर खुशी व्यक्त करना बहुत जरूरी था इसलिए दोनों सामान्य तौर पर खुश होने का नाटक करने लगे,,,
कुछ दिन यूंही ही बीत गया दोनों सास बहू शुभम की झलक देखने के लिए तरसने लगे क्योंकि शुभम इन दिनों सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दे रहा था,,,, निर्मला काफी खुश थी कि उसका बेटा पढ़ाई के साथ-साथ उस पर भी ध्यान दे रहा था क्योंकि आए दिन अशोक घर के बाहर रहता था और जब वह घर के बाहर रहता था ऐसे में शुभम कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देता था वह रात भर अपनी मां की जमकर चुदाई करता था और स्कूल जाने के बाद घर पर आते ही पढ़ना शुरु कर देता था,,

कुछ दिनों से सरला काफी परेशान नजर आ रही थी और उसकी परेशानी का कारण यही था कि अब तक वह दादी नहीं बन पाई थी और आए दिन पड़ोस की औरतें उसे इस बात के लिए जरूर तो खा कर दी थी कि अब तक तुम शादी क्यों नहीं बन पाई हो अगर कोई तकलीफ हो तो उन्हें डॉक्टर को दिखाओ ताकि बाद में चलकर ज्यादा तकलीफ ना हो,,,, यही बात सोच सोचकर सरला परेशान हुए जा रही थी लेकिन अब उसने फ़ैसला कर ली थी कि उसकी बहू और उसके बेटे दोनों की जांच करवाएगी क्योंकि अब वह ज्यादा इंतज़ार नहीं कर सकती थी,,,, वह इस बारे में अपने बाबू से बात की तो,, वह अपनी सास के आगे कुछ बोली तो नहीं लेकिन मन में यही सोच रही थी कि सारी कमी तुम्हारे बेटे में ही है जब वह उसे ठीक से चोद ही नहीं पाता तो बाप कहां से बन पाएगा,,,, उसका स्त्रीत्व ईस बात के लिए कभी तैयार नहीं हो पा रहा था कि वह इस चीज की जांच करवाए की वह मां बन सकती है कि नहीं,,, उसे अपने स्त्रीत्व पर पूरा विश्वास था कि वह मां बनने में पूरी तरह से सक्षम है उसका पति ही उसे मां बनाने में सक्षम नहीं है,,, लेकिन एक मर्यादा सील औरत होने के नाते उसे अपनी सास की यह बात माननी ही पड़ी,,,,, वह अपनी जांच कराने के लिए तैयार हो गई और अपने पति को भी मनाली,,, दोनों क्लीनिक जाकर अपना टेस्ट करवा आए लेकिन,, दूसरे दिन संडे होने की वजह से रिपोर्ट 1 दिन बाद मिलनी थी,, और शनिवार को ही कंपनी का फोन आने की वजह से सरला के बेटे को शाम को ही जाना पड़ा,,,,,
 
रविवार का दिन था निर्मला बहुत ही सवेरे उठ गई थी,,, वह बाथरूम में नहाने के लिए चली गई,,, अशोक घर पर नहीं था घर पर केवल शुभम और निर्मला ही थे इसलिए निर्मला एकदम भेजिए बाथरूम का दरवाजा खोल कर अंदर घुस गई और देखते ही देखते अपने खूबसूरत बदन पर से अपने एक एक वस्त्र उतारकर बाथरूम के हैंगर में टांगने लगी देखते ही देखते निर्मला बाथरूम के अंदर संपूर्ण रूप से नंगी हो गई,,,,, बाथरूम में ट्यूब लाइट जल रही थी जिसकी सफेद दूधिया उजाले में निर्मला का गोरा बदन चमक रहा था और तो और बाथरूम में लगी महंगी संगमरमर की टाइल्स में उसके नंगे बदन की परछाई साफ नजर आ रही थी मानो कि आई ना लगा हो,,,, अपने कठिन है और सजीले बदन पर निर्मला को गर्व महसूस होने लगा था और गर्व करने वाली बात नहीं थी क्योंकि इस उम्र के पड़ाव पर भी एक जवान लड़का उसका पूरी तरह से दीवाना हो चुका था जवान लड़का क्या आए दिन बड़े बूढ़ों की नजर भी उसके खूबसूरत बदन पर ऊपर से नीचे की तरफ घूमती रहती थी इस बात का अंदाजा उसे बहुत पहले से ही था ,,,,
वह खूबसूरत गीत गुनगुनाते हुए अपने खूबसूरत बदन पर महंगा साबुन लगाने लगी जिसके झाग को वह अपने पूरे बदन पर लगाते हुए,,, मस्त हुए जा रही थी। देखते ही देखते निर्मला अपने पूरे बदन पर साबुन का झाग लगाकर अपने बदन को और भी ज्यादा चिकना करने लगी,,, निर्मला की आदत हमेशा से यही रही थी कि वह बदन के हर हिस्से से ज्यादा वह साबुन को अपनी टांगों के बीच ज्यादा घिसती थी,,,, पहले उसके लिए उस जगह को साफ करना औपचारिकता बस ही था लेकिन जब से वह अपने बेटे से संभोग के सुख को भोगना शुरू करी थी तब से अब उसकी बुर पर पानी और साबुन लगाकर उसे अच्छी तरह से साफ करना उसके लिए बेहद जरूरी हो चुका था क्योंकि यह वही अंग था जिसके लिए शुभम उसका दीवाना हुआ था,,,, उसमें से आती हुई मादकता भरी खुशबू उसके बेटे को एक अलग दुनिया में ले जाती थी,,, वैसे तो निर्मला का अपना पूरा बदन बहुत खूबसूरत और गर्व प्रदान करता था लेकिन उसे अपनी दूर कुछ ज्यादा ही गर्वित करने वाला अंग लगता था क्योंकि वह इसी अंग के जरिए किसी को भी अपना गुलाम बनाने में पूरी तरह से सक्षम थी।,,
Nirmala ki khubsurat madmast jawani se bharpur bad an

सावर का नोब घूमाते ही सावर में से ठंडे ठंडे पानी की बौछार निकल कर उसके खूबसूरत बदन पर पड़ने लगी जो कि ठंडक प्रदान कर रहे थे ऐसा लग रहा था कि बरसात रही हो उसे इस तरह से नहाने में बहुत अच्छा लगता था खास करके बरसात के पानी में भीगना,,, वह दिन कुछ और था जब वह बरसात में खुले तौर पर नहा कर अपने बदन को ठंडक प्रदान करती थी शादी के बाद से वह अपनी इस इच्छा को केवल सावर में नहा कर ही पूरा कर रही थी,,,,।
वह नहा चुकी थी, टॉवल से अपने बदन को अच्छे से पोछ कर वह टावल लपेटकर बाथरुम से बाहर निकल गई और अपने कमरे में चली गई,,,,, वह अलमारी खोलकर अपनी ब्रा और पेंटी को ढूंढने लगी वह चाहती थी कि आज वह अपनी सबसे खास गुलाबी रंग की पेंटिं को पहने,,, इसलिए वो अलमारी में इधर-उधर अपनी गुलाबी रंग की पैंटी को ढुढने लगी जो कि थोड़ी देर में उसे अपनी फेवरेट पेंटी मिल ही गई,,, वह अच्छा सा गीत गुनगुनाते हुए,,,, खुशी के मारे अपनी पेंटी को हाथ में लेकर इधर-उधर करके उसे देखने लगी कि तभी उसकी सारी खुशी क्षण भर में हवा में फुरॅर हो गई,,,, अपनी सबसे पसंदीदा पेंटी में उसे छोटा सा छेद नजर आने लगा,,,,, अपनी पेंटी में हुए छोटे से छेद को देखकर उसका दिल बैठ गया,,, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी पेंटी में इस तरह से छेद कैसे पड़ गया क्योंकि आज तक उसके किसी पेंटी में छेद नहीं पड़ा था और छेद पड़ने से पहले ही निर्मला अपनी पैंटी को बदल देती थी,,,,, कुछ देर तक निर्मला यूं ही अपनी पेंटिं को हाथ में लिए इधर-उधर करके देखती रही उसे बहुत दुख हो रहा था क्योंकि यह पहनती उसे बेहद पसंद थी,,,,, फिर भी आज उसकी ख्वाहिश यही थी कि वह गुलाबी रंग की पैंटी को पहले इसलिए अपनी इस ख्वाहिश को दबा नहीं पाई और भले ही पहनती में छोटा सा छेद पड़ गया था उसे ही वह अपनी गोरी चिकनी टांगों में डालकर पहन ली,,,, पहनने के बाद उसे इस बात का भान हुआ कि उसकी पैंटी में पड़ा छोटा सा छेद ठीक उस की रसीली बुर के ऊपर ही बना हुआ था,, और यह देखकर ना चाहते हुए भी उसके होठों पर मुस्कुराहट आ गई,,,, जैसे तैसे करके उसने पैंटी तो पहन ली उसके बाद वह अपने सारे कपड़े पहन कर तैयार हो गई आईने के सामने अपने रूप को देखकर वह मंद मंद मुस्कुराने लगी क्योंकि ऐसा लग रहा था कि मानो उसकी खूबसूरती देखकर आईना भी शर्मा रहा हो,,,
Uuffff kya mast jawani he.

वह तैयार हो चुकी थी उसे मंदिर जाना था पूजा करने इसलिए वह शुभम को उठाए बिना ही वह अकेली पूजा की थाली लेकर मंदिर चली गई और तकरीबन वहां से पौना घंटा बाद वापस लौटी,,, वापस लौट कर देखी तो शुभम नहा धोकर तैयार होकर बैठा हुआ था उसे नाश्ता करना था,,, अपने बेटे को इस तरह से इंतजार करता हुआ देखकर निर्मला बोली,,

सॉरी मुझे आज बहुत देर हो गई मैं जल्दी से तेरे लिए नाश्ता बना देती हूं तो 2 मिनट बैठ,,,,( इतना कहकर वह किचन में चली गई शुभम अपनी मां को किचन में जाते हुए देखता रहा क्योंकि सुबह सुबह नहाने के बाद गीले बालों में वह और भी ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी लग रही थी जिसे देखने के बाद शुभम के पजामे में हरकत होने लगी लेकिन वह अपने आप को संभाले हुए था,,,, फिर भी वह पजामे के ऊपर से ही अपने खड़े होते लंड को मसल कर अपना मन मसोसकर रह गया,,,,,

थोड़ी देर बाद निर्मला नाश्ते की प्लेट लगाकर तुरंत किचन से बाहर आ गई,,, उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी बला की खूबसूरत लग रही थी,, लाल-लाल होठों पर और ज्यादा लालिमा उभर आई थी,,, शुभम का दिल कर रहा था कि अभी इसी वक्त डाइनिंग टेबल पर झुका कर उसकी पीछे से ले ले लेकिन अभी शायद वह अपने आप पर बहुत कंट्रोल किए हुए था,,, निर्मला कुर्सी पर बैठते हुए नाश्ते की प्लेट को शुभम की तरफ बढ़ाकर और चाय का कप आगे बढ़ाते हुए उसे नाश्ता करने के लिए बोली और खुद भी नाश्ता करने लगी,,,,

शुभम तुझे कहीं जाना तो नहीं है ,,,,,

नहीं मम्मी मुझे कहीं नहीं जाना है क्यों ऐसा पूछ रही हो,,,

क्योंकि मुझे मॉल जाना है,,,

मॉल लेकिन मॉल किस लिए ,,,(चाय की चुस्की लेते हुए)

तू सवाल बहुत पूछता है अगर मुझे ,, जाना है तो जाना तो पड़ेगा ही इसमें तो इतना सवाल क्यों पूछ रहा है,,,( निर्मला ब्रेड का टुकड़ा दांतों से काट कर चाय की चुस्की लेते हुए बोली,,,)

नहीं मम्मी मुझे कोई एतराज नहीं है मैं तो ऐसे ही पूछ रहा था क्योंकि आप जल्दी जाति नहीं है मॉल इसके लिए,,
aaaaahhhh.. Kya mast gaand he nirmala ki..


हां में जानती हुं,,, मैं जल्दी मॉल नहीं जाती लेकिन मुझे कुछ खरीदना है,, इसलिए मुझे आज मॉल जाना ही पड़ेगा,,

ऐसा क्या खरीदना है कि आपको युं एकाएक मॉल जाना पड़ रहा है मुझे भी तो बताइए,,,,( शुभम चाय की चुस्की लेते हुए अपनी मां को आंख मारते हुए बोला ,,,,)

तू बड़ा शैतान है तु नहीं सुधरने वाला,,,,
( थोड़ी देर दोनों में खामोशी छाई रही दोनों अपना-अपना नाश्ता करके टेबल से उठ गए तो अपना हाथ रुमाल से साफ करते हुए सुभम एक बार फिर अपनी मां से बोला,,,)
nirmala ki gulabi rang ki panty.

मम्मी बता तो दो कि तुम्हें क्या लेने जाना है,,,, मैं भी अपने लिए कपड़े ले लूंगा,,,,

तुझे बहुत ज्यादा पड़ी है कि मैं क्या लेने के लिए मौल जा रही हुं चुपचाप मेरे साथ चल नहीं सकता,,, वही चल कर बता दूंगी कि मुझे क्या चाहिए,,,,( इतना कहते हुए निर्मला मन ही मन खुश हो रही थी क्योंकि उसे पता था कि उसका लड़का क्या सोच रहा है वह जरूर यही सोच रहा होगा कि उसकी मां अपने लिए अंतर्वस्त्र ही खरीदने जा रही है इसीलिए तो वह इतना जोर देकर पूछ रहा था यही ख्याल निर्मला के मन में आ रहा था और वह अंदर ही अंदर खुश हो रही थी,,,,,)

अरे मम्मी बता दोगी तो कोई पहाड़ नहीं टूट पड़ेगा ,,,(इतना कहकर वह अपनी मां को बड़े गौर से देखने लगा,,, निर्मला भी अपने बेटे की आंखों में देखने लगी उसे अपने बेटे के चेहरे के देखकर उसकी उत्सुकता का पता चल रहा था,, निर्मल आप अपने बेटे को और ज्यादा परेशान होता नहीं देख सकती थी इसलिए वह अपने होंठों को दांतो से काटते हुए बोली,,,।)

तु जानना चाहता है ना कि मैं मॉल में क्या खरीदने के लिए जा रही हुं,,( इतना कहकर वो अपने बेटे ,, की तरफ मादक मुस्कान में करते हुए बोली,,,, निर्मला को अपने बेटे की आंखों में खुमारी साफ तौर पर नजर आ रही थी,, निर्मला को भी अपने बदन में हलचल सी महसूस हो रही थी,,,, आपकी बात सुनकर सुभम बोला कुछ नहीं बस हां में सिर हिला दिया और अपने बेटे की तरफ से उसका इशारा पाकर निर्मला धीरे-धीरे अपने बेटे की आंखों के सामने ही अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगे यह देखकर शुभम के होश उड़ गए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां क्या कर रही,, है,,,, देखते ही देखते निर्मला अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठा दी और साड़ी के कमर तक उठते ही उसकी गुलाबी रंग की पैंटी शुभम की आंखों के सामने नजर आने लगी यह देखकर सुभम के पजामे में हरकत होने लगी,,,, और अपनी साड़ी को कमर तक उठाए हुए ही वह बोली,,,,

कुछ दिखाई दिया ,,,,,

हां मुझे तुम्हारी गुलाबी रंग की पेंटी दिख रही हैं।,,,

और कुछ दिखाई ,दिया,,,,( निर्मला फिर से उसी अंदाज़ में अपने बेटे से बोली,,,)

हां मम्मी मुझे तुम्हारी बुर जों की कचोरी की तरह फुली हुई है पेंटी के ऊपर से साफ साफ नजर आ रही है,,,( यह सब कहते हुए शुभम के बदन में खुमारी छाने लगी वह धीरे-धीरे अपनी मां की तरफ आगे बढ़ रहा था,,,)

धत्,,,,, यह नहीं तुझे और कुछ नहीं दिखाई दे रहा है,,,

तुम्हारी खूबसूरती से भरी हुई मोटी मोटी जांघ जिसे देखकर हमेशा मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,( शुभम पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को मसलते हुए बोला)

तू सच में पागल हो गया है देख नहीं रहा है कि फटी हुई है,,

बुर,,,,, अब मेरा इतना मोटा लंबा लंड जाएगा तब तो तुम्हारी बुर फटेगी ही ना,,,,

हे भगवान अब मैं तुझे कैसे समझाऊं तेरे दिमाग में 24 घंटा बस यही सब चलता रहता है और कुछ दिखाई नहीं दे रहा है,,
( निर्मला का यह कहना था कि तभी शुभम की नजर पेंटिं में पड़े उस छोटे से छेद पर गई जिसमें से उसकी झांट के रेशमी बाल हल्के हल्के बाहर निकले हुए थे उस पर नजर पड़ते ही शुभम की आंखों में चमक आ गई और वह चहकते हुए बोला,,,)

मम्मी तुम्हारी पेंटी तो,,, फटी हुई है और इसमें से तुम्हारे झांट के बाल बाहर दिखाई दे रहे हैं लगता है बहुत दिनों से तुम ने अपनी झांट के बाल क्रीम लगाकर साफ नहीं कि हो,,,

चल अब मेरे झांट के बाल इतने भी बड़े नहीं हो गए कि उन्हें साफ करना पड़े,,, अभी बराबर है,,,,,, लेकिन मेरी पैंटी बराबर नहीं है तू तो जानता है कि मुझे मेरी यह गुलाबी रंग की पैंटी कितनी पसंद है और आज बहुत पहनने का मन कर रहा था लेकिन जब इससे अलमारी में से बाहर निकालिए तो देखी इस में छेद हो गया है,,

मेरे लंड के साइज़ का छेद हुआ है मम्मी मुझे तो लगता है कि पेंटी सहीत में तुम्हारी बुर में डालने की कोशिश कर रहा था तभी तुम्हारी पेंटी फट गई है,( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी मां के बेहद करीब पहुंच गया और अपनी बीच वाली उंगली को अपनी मां की पेंटी के उस छोटे से छेद में डाल दिया जो कि एकदम बुर् के उपर हुआ था जिसमें से सीधा उसकी उंगली निर्मला की रसीली बुर के अंदर प्रवेश कर गई,,

आहहहहह,,,,, क्या कर रहा है रे,,? ( निर्मला को इस बात का आभास तक नहीं था कि शुभम इतनी जल्दबाजी दिखाएगा इसलिए एकाएक अपनी पुर के अंदर उंगली घुसने की वजह से उसे दर्द सा महसूस होने लगा जिससे उसकी कराहने की आवाज निकल गई,, और वो झट से अपना हाथ से सुभम का हाथ पकड़ कर उसे दूर झटक दी और अपनी साड़ी को वापस नीचे गिरा दी,,)

क्या मम्मी तुम से ऐसे चिल्ला रही हो जैसे उंगली नहीं मेरा लंड घुस गया हो,,,

तेरी उंगली भी तेरे लंड से कम नहीं है,, अब चल यह सब छोड़ जल्दी से तैयार हो जा हमें अभी जाना है,,,( निर्मला खाली प्लेट टेबल पर से उठाते हुए बोली,,)

क्या मम्मी तुम भी इतनी जल्दबाजी दिखा रही हो पेटी में छेद होने की वजह से ऐसा नहीं है कि कोई उस में लंड डाल देगा,,, ( निर्मला खाली प्लेट उठाने की वजह से डाइनिंग टेबल पर थोड़ा सा झुकी हुई थी जिसकी वजह से शुभम साड़ी के ऊपर से ही अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर दो चपत लगाते हुए बोला,,)

आहहहहह,,,,, बहुत बेशर्म हो गया है तू कोई अपनी मम्मी से इस तरह से बात करता है क्या,,? ( निर्मला खाली प्लेट को हाथ में लेकर उसे किचन की तरफ जाने लगी तो पीछे से शुभम बोला,)

कहो तो मम्मी तुम्हारी पेंटी में जो छेद बना हुआ है तुम्हारी पेंटिं बिना उतारे उसी छेद में से अपने लंड को तुम्हारी बुर में डालकर तुम्हारी चुदाई कर दुं,,,,,( शुभम पर जाने के ऊपर से अपनी खड़े लंड को मसलते हुए बोला,,।)

इतनी तकलीफ उठाने के लिए रहने दे अभी कुछ भी नहीं होने वाला है तो जल्दी से तैयार हो जा,,( इतना कहकर वह बर्तन साफ करने के लिए किचन में चली गई सुभम ऊसे जाता हुआ देखता रहा,, अपनी मां की मटकती हुई बड़ी बड़ी गांड देखकर शुभम एकदम उत्तेजना से भरने लगा था लेकिन वह जानता था कि अभी कुछ होने वाला नहीं है इसलिए वह भी अपना मन मार के अपने कमरे में कपड़े बदलने के लिए चला गया,,,,,

कुछ ही देर में दोनों मां-बेटे मॉल में पहुंच गए और इधर-उधर घूम कर कपड़े खरीदने लगे,,, मॉल में पहुंचते ही निर्मला ने सबसे पहले अपने लिए ब्रा और पेंटी खरीदी और शुभम भी अपने लिए जींस और टीशर्ट खरीद लिया,,, दोनों मिलकर काफी खरीदी कर चुके थे और काउंटर पर पहुंचकर दोनों बिल बनवाने लगे तो तकरीबन 15000 तक की खरीदी दोनों मां-बेटे मिलकर कर चुके थे,,, निर्मला अपने पर्स मे, पैसे निकालने के लिए उसकी चैन खोलकर अंदर देखने लगी तो अंदर पैसे थे ही नहीं वह इधर-उधर करके अपना एटीएम भी देखने लगी लेकिन वह भी नहीं था,, पल भर में उसका चेहरा मुरझा गया तो शुभम बोला,,

क्या हुआ मम्मी,,?

बेटा मैं पर्स तो लाई लेकिन पर्स में पैसा रखना भूल गई और तो और आज एटीएम भी मैं नहीं लाई जल्दबाजी में सब गड़बड़ हो गया,,,,

क्या कह रही हो मम्मी ऐसे कैसे हो गया,,

( दोनों की बात काउंटर मेन सुन रहा था तो वह पैसे ना होने पर गुस्सा दिखाते हुए बोला,,)

मैं अच्छी तरह से जानता हूं मैडम आप लोगों को आप लोग केवल मॉल में टाइम पास करने के लिए आते हो ऐसी की हवा खाते हो और बिना कुछ खरीदे ही निकल जाते हो अपने बाप का बगीचा समझे हो,,

आप यह कैसी बातें कर रहे हैं आपको चेहरा भी तमीज नहीं है एक औरत से किस तरह से बात की जाती है,,,

मैं अच्छी तरह से जानता हूं मैडम एक औरत से किस तरह से बात की जाती है लेकिन आप जैसे लोगों से इसी तरह से बात की जाती है ,,,
(इतना सुनते हैं शुभम का खून खोलने लगा,, उससे अपनी मां की इस तरह की बेइज्जती बर्दाश्त नहीं हुआ ओर वह काउंटरमेन का गिरेबान पकड़कर बाहर खींच लिया और वह काउंटर से होता हुआ नीचे आकर गिरा,,, इस हाथापाई को देखकर निर्मला घबरा गई और अपने बेटे को उसे छोड़ने के लिए बोलने लगी इस तरह की अफरा-तफरी होता देखकर उसी मॉल में आई शीतल की नजर निर्मला और शुभम पर पड़ गई तो वह तुरंत दौड़कर उन लोगों के पास गई,, तब तक वहां पर कुछ और लोग भी जमा हो गए जो इस हाथापाई को बस मजे ले कर देख रहे थे,, थोड़ी ही देर में शीतल को पता चल गया कि सारा माजरा क्या है और वह काउंटर मेंन पर बिगड़ते हुए बोली,,,

तुम्हें शर्म नहीं आती है एक औरत से इस तरह से बातें करते हुए और तुम जानते हो यह कौन है यह टीचर है यह लोगों को शिक्षा देती हैं और तुम इन पर इल्जाम लगा रहे हो, यह शहर के जाने-माने बिजनेसमैन की बीवी है अगर चाहे तो इन से बदतमीजी करने के एवज में तुम्हें जेल भिजवा सकती हैं और तो और तुम्हारी नौकरी भी जा सकती है तुम्हें शर्म आनी चाहिए,,, माफी मांगो इनसे,,
( शीतल की बात सुनकर उस काउंटर मैन को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह निर्मला से माफी मांगते हुए बोला,,,)

मुझे माफ कर दीजिए मैडम मेरा यह कहने का मतलब बिल्कुल भी नहीं था लेकिन आज कल इसी तरह का वाक्या हो रहा है जिससे हम लोग खुद परेशान हो चुके हैं,,,,

उसकी बात सुनकर निर्मला ने उसे माफ कर दी और शीतल बिल कि रकम को अपने पास से अदा कर दी जो कि शीतल कि इस मदद को लेने से निर्मला इंकार कर रही थी लेकिन वह इसकी एक भी नहीं सुनी,,,,,,
 
बैगनी रंग की ट्रांसपेरेंट साड़ी में शीतल क़यामत लग रही थी सुभम तो सबकुछ भुल के ऊसे ही देखे जा रहा था,,,,, कुछ ही मिनट में सब अपने अपने काम पर लग गए थे ,,, निर्मला के लिए पल बेहद शर्मनाक था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें एक तरफ हो शीतल से बेहद नफरत करने लगी थी लेकिन आज जिस तरह से उसने उसकी मदद की थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह शीतल को धन्यवाद दे या मुंह फेर ले लेकिन एक शिक्षिका होने के नाते उससे इस तरह की उम्मीद ना तो शीतल को ही थी ना ही निर्मला को खुद,,,,, शीतल द्वारा मदद किए जाने की वजह से निर्मला शर्म से पानी-पानी हुई जा रही थी,,,, जब किसी तलवारा इस तरह की मदद किए जाने की वजह से शुभम का आकर्षण शीतल के प्रति और भी ज्यादा बढ़ता चला जा रहा था और यही हाल शीतल का भी था,, शीतल ने कुछ ही दूरी पर खड़े होकर शुभम के द्वारा अपनी मर्दानगी भरी ताकत दिखाने वाला नजारा देख चुकी थी तब से शीतल के तन बदन में शुभम को पाने की इच्छा और भी ज्यादा बढ़ने लगी,,, थी,,।
Shubham ki mardaanaa taakat ko dekhkar sheetalk tanbadan me hulchul ho na shuru ho gayi thi..

आओ निर्मला खड़ी क्यो हो,,? ( शीतल आगे बढ़ते हुए निर्मला से बोले क्योंकि वह उसी तरह से वही खड़ी रह गई थी,, अपनी मां के चेहरे पर बदलते भाव को देखकर शुभम समझ गया था कि उसके मां के मन में क्या चल रहा है इसलिए वह खुद अपनी मां से बोला,,।)

आओ मम्मी,,,,,( इतना कहकर शुभम भी धीरे से अपना कदम आगे बढ़ाया और शीतल आगे बढ़ चली दोनों मां-बेटे शीतल के पीछे पीछे जा रहे थे वही मॉल में बने रेस्टोरेंट में शीतल प्रवेश कर गई और पीछे निर्मला और शुभम भी,,,, निर्मला का तो मन बिल्कुल भी नहीं जाने को कर रहा था लेकिन क्या करें आज शीतल ने उसे बेहद शर्मनाक स्थिति से बचा जो ली थी इसलिए ना चाहते हुए भी उसके पीछे-पीछे जाना पड़ा,,,,, शीतल टेबल के करीब रही हो कुर्सी को आगे की तरफ बढ़ाकर निर्मला को बैठने के लिए कहीं और शुभम को इशारे में बैठने के लिए कहकर खुद कुर्सी पर बैठ गई अब इतना आग्रह करने पर निर्मला अपने आप को रोक नहीं पाई और कुर्सी पर बैठ गई,,)

शीतल में तुम्हें किस तरह से शुक्रिया अदा करूं यह मुझे समझ में नहीं आ रहा है,,,( निर्मला शीतल से नजरे मिलाए है बिना इधर-उधर देखते हुए धीरे-धीरे बोली,,) अगर आज तुम ना होती तो पता नहीं क्या हो जाता,,।

अरे कुछ नहीं होता,,,,( इतना कहकर शीतल अपना हाथ आगे बढ़ाकर निर्मला के हाथ को अपनी हथेली में भरकर उसे हल्के से दबा दी,, निर्मला शीतल की इस हरकत की वजह से एकदम से चौंक गई क्योंकि उसे पुराने दिन याद आ गए इसी तरह से शीतल बार-बार उसका सहारा बनती आ रही थी लेकिन जब से शुभम वाली शर्मनाक हरकत करते हुए शीतल को अपनी आंखों से देख कर उसे पकड़ ली थी तब से वह शीतल के प्रति नफरत करने लगी थी लेकिन आज महीनों बाद जब उसी तरह से शीतल को अपना हाथ पकड़ते देखी तो वह खुशी के मारे गदगद हो गई,,,) मैं जानती हूं तुम बहुत ही अच्छी औरत हो तुम्हारा दिल एकदम साफ है और तुम्हारे साथ इसीलिए कभी गलत नहीं हो सकता क्योंकि आज तक तुमने किसी का गलत ना तो की हो और ना ही सोची हो,, ( शीतल निर्मला की आंखों में देखते हुए उसकी बढ़ाई कर रही थी और अपनी तारीफ सुनकर निर्मला शर्म से बस मुस्कुरा भर दी,, निर्मला के होठों पर आई मुस्कान इस बात का सबूत था कि सब कुछ अच्छा हो सकता है यह मुस्कान देखकर शीतल के मन में तसल्ली होने लगी और उसे विश्वास होने लगा कि वह अपना रिश्ता एक बार फिर से मजबूत कर सकती है,, इसलिए ऐसा बर्ताव करने लगी कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं है और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए निर्मला से बोली,, लेकिन इन सब के दौरान वह शुभम पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही थी,,, क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि आप से उसी से कोई ऐसी गलती हो कि वह एक बार फिर से निर्मला और सुभम दोनों से दूर हो जाए,,,,)
sheetal ki iccha ho rahi thi ki shubham ko apni Saree uthakar apni madmast badi badi gaand k darshan Kara De..

वैसे शीतल आज दोनों मां-बेटे मिलकर ऐसी क्या खरीदी कर ली है कि 15,000 का बिल बन गया,,,,( निर्मला कुछ कहती से पहले ही शीतल टेबल पर पड़े थेले को अपने हाथ में लेकर अंदर देखने लगी कि निर्मला ने क्या खरीदी की है कि तभी उसकी नजर ब्रा और पेंटी के पैकेट पर गई और उसे देख कर वो मुस्कुरा दी,,, अपनी नाजुक नाजुक उंगलियों से ब्रा पेंटी के पैकेट को इधर-उधर करके अंदर झांकने लगी कि कौन से रंग की ब्रा और पैंटी है,,,, कुछ ही सेकंड में उसे इस बात का पता चल गया कि निर्मला ने कौन से रंग की पैंटी खरीदी है और वह मुस्कुराते हुए निर्मला की तरफ देख कर बोली,,,।)

क्या बात है निर्मला अभी तक अपनी फेवरेट चीज यूज करती हो,,( शीतल की बात सुनते ही शुभम को झटका सा लगा कि शीतल को भी पता है कि उसकी मां की पसंदीदा पेंटिं कौन सी है,,, इस बात से ही शुभम को ख्याल आ गया कि दोनों की दोस्ती कितनी गहरी थी लेकिन उनकी एक गलती की वजह से दोनों की दोस्ती में दरार पड़ गई थी वह मन ही मन भगवान से प्रार्थना करने लगा कि एक बार फिर से दोनों की दोस्ती कायम हो जाए,,, दूसरी तरफ सीकर के मुंह से यह बात सुनकर निर्मला के चेहरे पर शर्म की लकीरें साफ नजर आने लगी वह शीतल की बात सुनकर शुभम के सामने शर्मा गई थी,,,)

क्या शीतल तू भी,,,

देखो निर्मला मेरे से तुम्हारी कोई भी बात छुपी नहीं है इसलिए मुझसे छुपाने की कोशिश भी मत करना मैं तुम्हारे रग-रग से वाकिफ हूं एक तरह से तुम शरीर हों तो मैं तुम्हारी साया हूं,,,( शीतल की बातें सुनकर निर्मला फांसी दी और जवाब में शीतल भी मुस्कुरा दी दोनों की मुस्कुराहट देखकर शुभम के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,,, हालात और माहौल को देखते हुए शीतल को लगने लगा था कि एक बार फिर से वह अपनी बिगड़े हुए संबंधों को बना लेगी,,, और ईसी के जरिए वो अपनी अधूरी प्यास को एक बार फिर से शुभम के साथ मिलकर बुझाएगी,,,, वैसे भी शीतल की किस्मत बहुत तेज थी वह ट्रांसपेरेंट साड़ी के साथ-साथ लो कट ब्लाउज पहनी हुई थी जिसकी वजह से साड़ी छातियों पर रखी होने के बावजूद भी उसके दोनों कबूतरों का आधे से ज्यादा हिस्सा बाहर को ही नजर आ रहा था जिस पर रह रहे कर चोर नजरों से शुभम देख ही लेता था,,,, शीतल को इस तरह से अपनी चुचियों का प्रदर्शन करने में काफी आनंद के साथ-साथ उत्तेजना का अनुभव होता था खास करके जब वह शुभम के सामने होती थी और इस समय भी उसके तन बदन में आई हलचल और बदलाव हो रहा,, था,, जब-जब समाज और नजरों से उसकी छातियों की तरफ देखता तब तक शीतल के बदन में हलचल सी होने लगती थी जिसका ज्यादा तरह सालों से अपनी दोनों टांगों के बीच की उस पतली दरार में हो रही थी जोकि धीरे-धीरे अब गीली होने लगी थी,, ,, शीतल अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही थी कि निर्मला के दिन में एक बार फिर से अपने लिए जगह बना ले और अपने टूटे हुए रिश्ते को एक बार फिर से जोड़ सकें और इसी उधेड़बुन में वह हंस हंस के निर्मला से बातें किए जा रही थी कि तभी रेस्टोरेंट का वेटर आर्डर लेने के लिए टेबल के करीब आकर खड़ा हो गया,,,)
 
टेबल के पास वेटर को आया हुआ देखकर शीतल उसे दो समोसे के साथ-साथ कोल्ड ड्रिंक्स का आर्डर कर दी,,,(होटल लेकर वेदर चला गया लेकिन निर्मला बोली,,,,)

यह सब की क्या जरूरत है शीतल,,?

जरूर किसी ने मुझसे कहा जितनी खुशी का दिन है मेरे लिए तो बहुत ही खास दिन है और यह बात तुम भी अच्छी तरह से जानती हो कि मेरे लिए खास दिन क्यों है,,? (निर्मला कुछ बोलती से पहले ही अपने ही सवाल का जवाब खुद देते हुए शीतल आगे बोली..) क्योंकि आज महीनों बाद मेरी सहेली वापस लौट आई है निर्मला मैं नहीं बता सकती कि मैं आज कितना खुश हूं तुमसे दूर रहकर मुझे एक सच्ची सहेली की अहमियत का पता चला है,,,,
( शीतल की बात सुनकर निर्मला बोल कुछ नहीं रही थी बस उसकी बात सुने जा रही थी। शीतल एक बार फिर से अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर निर्मला का हाथ अपने हाथ में लेकर उसे हल्के से दबाते हुए बोली,,)
निर्मला मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि उस दिन मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई कि क्या करूं मैं अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर सकी और जो नहीं होना था वह हो ने दिया लेकिन सही किया जो तुमने ऐन मौके पर आकर सबकुछ रोक दिया वरना मैं अपने आप को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाती,,,( शीतल निर्मला की आंखों में आंखें डाल कर अपनी गलती का एहसास उसे करा रही थी,,) मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि मुझे वह सब नहीं करना चाहिए था लेकिन तुम तो मेरी हकीकत जानती हो इसलिए मुझसे सब्र नहीं हुआ,,,( शुभम शीतल की बात सुनकर अपनी मां के सामने शर्म से गड़ आ जा रहा था इसलिए वह अपनी नजरें नीचे झुकाकर केवल उसकी बात सुन रहा था,,,) हमें तुमसे वादा करती हूं कि आगे से ऐसा कुछ भी नहीं होगा जिसके लिए मुझे और तुम्हें हम दोनों को शर्मिंदा होना पड़े और हम दोनों की दोस्ती टूट जाए मैं कभी भी इस तरह की गलती दोहराने के बारे में सोच भी नहीं सकती,, और निर्मला मुझे पूरी उम्मीद है कि तुम मेरी गलती को माफ करके मुझे फिर से अपना लोगी तुम्हारे बिना मैं एकदम अधूरी हूं,,,,,( इतना कहते हुए शीतल की आंखों में आंसू आ गए जो कि निर्मला को साफ साफ नजर आ रहा था शीतल अभी भी निर्मला के हाथ को अपने हाथ में लेकर उसे हल्के से दबाकर उसे एहसास दिला रही थी कि वह पूरी तरह से शर्मिंदा है अपनी गलती के लिए निर्मला जो कि कभी भी शीतल को माफ कर सकने की स्थिति में नहीं थी लेकिन शीतल को इस तरह से अपनी गलती का एहसास होता देखकर और उसकी आंखों में आंसू देख कर निर्मला का दिल पिघलने लगा और वह अपना एक हाथ उसके हाथ पर रख कर उसे हल्के से दबाते हुए बोली,,)

मुझे इस बात की खुशी है कि तुम्हें इस बात का एहसास तो हुआ कि तुमने जो की थी वह तुम्हारी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी वैसे तो मैं तुम्हें कभी माफ नहीं करना चाहती थी लेकिन तुम्हें इस बात का एहसास हो गया मेरे लिए वही बड़ी बात है मैं तुम्हें माफ करती हूं लेकिन आइंदा से इस तरह की गलती कभी मत करना हमेशा अपनी भावनाओं पर काबू करके रखना,,,,, ( इतना कहकर निर्मला मुस्कुरा दे क्योंकि उसे भी अच्छा लगा था इस तरह से शीतल का अपनी गलती मानना और उसे इस बात की भी खुशी थी कि इसी तरह घर फिर से उसकी जिंदगी में वापस लौट आई थी,, । तीनों बहुत खुश नजर आ रहे थे शुभम को शायद इस बात से ज्यादा ही खुशी हुई थी क्योंकि अब उसे शीतल के करीब रहने का मौका जो मिलने वाला था,,,, वेटर आर्डर किया हुआ नाश्ता लेकर आता इससे पहले निर्मला को बहुत जोरों की पेशाब लग गई और वह शीतल से बोली,,,,,

तुम लोग यहीं बैठो मैं 2 मिनट में बाथरूम में जाकर आती हुं।( इतना कहकर वह कुर्सी पर से उठी और बाथरूम की तरफ चली गई शुभम अपनी मां को बाथरूम की तरफ गांड मटकाते जाते हुए देखता रहा ,, जैसे ही निर्मला आंखों से ओझल भी वैसे ही सीतल टेबल के नीचे से अपना पैर शुभम के पेर पर मारकर आंख मारते हुए बोली,,,)

देखा सुभम मेरी एक्टिंग ,,,,

क्या कह रही हो शीतल मैडम यह सब तुम एक्टिंग कर रही थी ,,,,,

नहीं तो और क्या मेरे राजा बिना एक्टिंग कीए मैं तुम्हारी मां को कैसे मना सकती थी और तुम्हारे करीब आने का दोबारा मौका कैसे मिल सकता था,,,, मैं तो तेरी दीवानी हो गई हूं रे जिस तरह से तूने काउंटर मेन को काउंटर से खींच कर बाहर पटका ना मुझे ऐसा लगा कि काश तु मुझे ऐसे ही बिस्तर पर पटक कर मेरी चुदाई कर देता मजा आ जाता,,,,

कहो तो अभी कर दूं शीतल मैडम मेरा लंड अभी भी पूरी तरह से खड़ा है,,,,

फड़फडाते हुए कबूतरों को देखेगा( अपने छातियों की तरफ दोनों हाथ से इशारा करते हुए) तो लंड तो खड़ा होगा ही,,,

क्या तुम्हें पता था कि मैं तुम्हारी चूची देख रहा था,,,

मेरे राजा तु चोरी छुपे मेरा क्या क्या देखता है मुझे सब कुछ पता है,,,, ( इतना कहने के साथ ही शीतल मौका देख कर अपना पैर उठाकर सीधे शुभम की टांगों के बीच उस हिस्से पर रख दी जहां पर शुभम का अच्छा खासा तंबू बना हुआ था। उस तंबू पर पैर रखते ही शीतल को समझ में आ गया कि शुभम पूरी तरह से चुदवासा हो गया है तभी तो उसका लंड पूरा खड़ा है अपने पैरों पर उसके तंबू के स्पर्श का एहसास ही उसके तन बदन में झुर झुरी सा पैदा कर गया,,,)

आहहहह,,,, क्या कर रही हो मैडम कोई देख लेगा ,,,,

पागल है क्या टेबल के नीचे कोन देख,, लेगा,,,,

मम्मी आ गई तो फिर वही हो जाएगा जो मैं नहीं चाहता,,,

क्या नही चाहता,,,,

यही तुमसे दूर रहना नहीं चाहता,,,,

तो आजा मेरे घर पर खुश कर दूंगी तुझे,,,,( शीतल उत्तेजना बस अपने लाल-लाल होठों को अपने दांत से काटते हुए बोली,,, इतना कहते हुए शीतल अपने पैर का दबाव शुभम के तंबू पर जोर से बढ़ा दी तो शुभम कराहते हुए बोला)

क्या कर रही हो शीतल दर्द हो रहा है मम्मी आ जाएगी,,

तेरी मम्मी इतनी जल्दी नहीं आएगी मैं जानती हूं तेरी मम्मी बाथरूम गई है मुतने,,,( शीतल अपने होठों पर मादक मुस्कान बिखेरते हुए बोली,, वह जानबूझकर सदन के सामने उसकी मां का मुतने वाला शब्द प्रयोग की थी क्योंकि वह शुभम को उकसाना चाहती थी उसकी मां के प्रति इस तरह की बातें करके लेकिन वह इस बात से अंजान थी कि शुभम को इन सब बातों से अब कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वह तो अपनी मां से कई बार शारीरिक संपर्क बनाकर उसके खूबसूरत बदन का सुख भोग चुका है,,, फिर भी वह ऐसा बर्ताव नहीं करना चाहता था कि शीतल के द्वारा इस तरह की गंदी बातें बोलने पर भी उस पर कोई प्रभाव ना पड़े इसलिए वह जानबूझकर गुस्सा दिखाते हुए बोला,,,,,।

क्या कहती हो शीतल मैडम इस तरह की गंदी बातें मेरी मां के बारे में और मुझसे कह रही हो,,

, बुद्धू इसमें कौन सी गंदी बात है क्या तुझे पता नहीं है कि बाथरूम में औरतें क्या करने जाती हैं,, तेरी मां मुतने गई है पेशाब करने जैसा कि सब औरतें करती हैं मैं भी जाती हूं बाथरूम में पेशाब करने,,,, लेकिन जरा तू सोच अपने दिमाग़ में तेरी मां बाथरूम में गई होगी,,, अपनी साड़ी धीरे-धीरे उठाकर अपनी पैंटी नीचे लाई होगी तो सोच क्या नजर आया होगा,,,,( शुभम से पूछने वाले अंदाज में बोली,,)

क्या मैडम इस तरह की बातें कर रही हो मुझे अच्छा नहीं लग रहा है इस तरह की बातें मत करो,,,,( जानबूझकर शुभम अपनी नजर को इधर-उधर घुमा कर शर्माने का नाटक करने लगा,,)

तु ईतना शर्मा क्यों रहा है मेरी बात तो सुन,,, ( शीतल अपने मन की बात उसे बताना चाहती थी और अभी उसकी मां के बारे में गंदी गंदी बातें करके उसे उत्तेजित करना चाहती थी ताकि एक बार फिर से उसके लिए उसके तन बदन में उसे पाने की लालसा बढने लगे,, लेकिन शीतल शायद ये नहीं जानती थी कि शुभम हमेशा से नई औरतों का दीवाना रहा है खास करके शीतल को पाने की इच्छा कुछ ज्यादा ही उसके अंदर प्रबल होती थी क्योंकि शीतल का भी बदन कुछ-कुछ उसकी मां की तरह ही था बड़ी बड़ी गांड बड़ी बड़ी चूचियां खूबसूरती में भी वह किसी से कम नहीं थी और एकदम गोरी होने के साथ-साथ एकदम सेक्सी भी थी जिसके साथ संभोग सुख भोगकर शुभम को परमानंद की अनुभूति होती,, फिर भी वह ऊपरी मन से ऐतराज जताते हुए शीतल की गंदी बातों का आनंद ले रहा था और साथ ही बाथरूम की तरफ नजर गड़ाए हुए था ताकि उसकी मां यह सब देख ना ले,,,, शीतल अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए पूरी देख मेरी बात सुन कितना अच्छा लगता होगा जब तेरी मां,,, अपनी पैंटी को उतार दी होगी तो सीधे उसकी रसीली कसी हुई बुर नजर आती होगी जिसमें लंड डालने के लिए ना जाने कितने मनचले लड़के रोज तेरी मां को लेकर कल्पना करते होंगे,,( यह सब शुभम के लिए नया नहीं था लेकिन शीतल जैसी औरत के मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर शुभम के तन बदन में सुरूर जाने लगा और वह भी कल्पना की दुनिया में खोने लगा था वह भी अपने मन में कल्पना कर रहा था हालांकि वह अपनी मां को कल्पना करते हुए क्या हकीकत में पेशाब करते हुए देख चुका था और बहुत कुछ कर चुका था लेकिन फिर भी इस समय की बात कुछ और थी और यह बात भी शीतल ने सच ही कही थी कि उसकी मां को लेकर मनचले लड़के कल्पना में ना जाने क्या क्या हरकत उसकी मां के साथ करते होंगे,,)

धत्,,,, मैडम ऐसा क्या बातें कर रही है मुझसे कोई सुन लेगा तो,,,

कोई नहीं सुनेगा ,,,,,, कीतनी रसीली और खूबसूरत बुर है तेरी मां की ,,,, में अच्छी तरह से जानती हूं कि तेरी मां की बुर बहुत खूबसूरत होगी लाखों में एक जिसमें तेरे पापा जब लंड डालते होंगे तो उन्हें जन्नत का मज़ा मिलता होगा,,

क्या करती हो सीतल मैडम,,,,( शुभम को भी शीतल के हमसे अपनी मां की गंदी बातें सुनने में मजा आ रहा था,,)

सोते समय तेरी मैं अपनी दोनों टांगें फैलाकर पेशाब कर रही होगी अपनी ओर से पेशाब की धार मार रही होगी यह नजारा देखकर कितने मर्दों का तो खड़े-खड़े पानी निकल जाए इतनी सेक्सी है तेरी मां,,
( शीतल यह सब बातें बोली जा रही थी और अपनी टांगों से शुभम के पेंट में बने तंबू को रगड़े जा रही थी जिससे शुभम को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,)

सुन शुभम यह सब मैं तो मैं तुझे जरूरी बात बताना भूल ही गई,, हम दोनो जने जो गलती पहले की थी अब ऐसी गलती कभी नहीं करना है,,,

मतलब,,,

मतलब यही कि हम दोनों अब जल्दी एक दूसरे से बात नहीं करेंगे हम दोनों का मिलना जुलना बातें करना सब कुछ बंद खास करके तेरी मां की उपस्थिति में हां मौका मिलते ही हम दोनों बातचीत तो करेंगे ही,,, अगर किस्मत साथ दिया तो बहुत कुछ कर लेंगे,,( शीतल के कहने का मतलब शुभम अच्छी तरह से समझता था इसलिए मन ही मन प्रसन्न होने लगा,,) और हां अभी तो मुझसे जरा भी बात भी मत करना ना ही मैं तेरी तरफ देखूंगी और ना ही तुझसे कोई बात करूंगी समझ गया ना तु,,

समझ गया मैडम जी,,,(इतना कहने के साथ ही शुभम फुर्ती दिखाते अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर जो पैर शीतल उठाकर उसके लंड पर रखी हुई थी उसने अपना हाथ डालकर शीतल की चिकनी चिकनी टांगों का आनंद लेते हुए अपनी हथेली को आगे तक जागो तक बढ़ा दिया, शुभम के मर्दाना हाथों का स्पर्श पाते ही शीतल के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसकी बुर उत्तेजना के मारे फुलने में पीचकने लगी,,,, लेकिन शीतल अपनी टांग को वापस खींचने की जरा भी तस्दी नहीं ली उसे आनंद आ रहा था और दूसरों से नजरे बचाए हुए थी,,, शुभम की सांसो की गति तेज होती जा रही थी,,, शुभम शीतल की मोटी मोटी जागो की गर्माहट अपनी हथेली पर साफ तौर पर महसूस कर रहा था, मौका देखकर शुभम थोड़ा आगे की तरफ सड़क आया और सीधा अपनी हथेली को उसके कानों के बीच उसकी पैंटी के ऊपर रखकर हल्के से उसकी बुर वाली जगह को मसल दिया जो कि इस समय पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और तुरंत अपना हाथ वापस ले लिया यह पल भर में ही हुआ था लेकिन इतना शीतल के लिए काफी था वह पूरी तरह से गरमा गई और शुभम के इस तरह की हरकत और उसकी उंगलियों का स्पर्श अपनी बुर पर पाकर शीतल से अपनी उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हुई और वह तुरंत झड़ गई,,,,, इन सभी हरकत के दौरान उसके माथे पर पसीने की बूंदें उपस आई जिसे वह अपने पर्स में से रुमाल निकाल कर साफ करने लगी कि तभी सामने से निर्मला आती दिखाई दी और दोनों चौकन्ने हो गए,,,,

तुम लोगों ने अभी तक नाश्ता खाना शुरू नहीं किया,,

तुम्हारे बिना कैसे शुरू कर सकते थे अब तुम आ गई हो तो नाश्ता भी खाना शुरू कर देंगे बैठो और जल्दी से नाश्ता खत्म करो,,( शीतल का इतना कहना था कि निर्मला कुर्सी पर बैठ गई और तीनों नाश्ता करने लगे तीनों काफी खुश नजर आ रहे थे इस दौरान बार-बार शीतल अपने पैर को शुभम के पेर पर मारकर उसे इशारा कर देती थी शुभम को उसका यह इशारा करना बहुत अच्छा लग रहा था,,

आखिरकार तीनों ने नाश्ता खत्म कर लिया और टेबल से उठ गए,,, इस दौरान ना तो शुभम शीतल की तरफ देखा और ना ही शीतल शुभम की तरफ देखी,,, और यह बात निर्मला को साफ तौर पर नजर आ रही थी कि दोनों एक दूसरे में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं ले रहे थे जिससे वह मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,

शीतल तुम्हारा एहसान में कभी नहीं भूल पाऊंगी आज तुमने एन मौके पर मेरी मदद की हो मैं कल स्कूल में तुम्हारी 15000 लौटा दूंगी ,,,( निर्मला मॉल के बाहर पार्किंग में खड़े होकर शीतल से बोली)

पर इसमें कौन सी बड़ी बात है उसे लौटाने की जरूरत नहीं है,,

नहीं-नहीं सीतल 15000 की बात है मैं जरूर कल स्कूल में लौटा दूंगी,,, अच्छा तो अब मैं चलती हूं,,,,,
(इतना सुनकर शीतल निर्मला के कान में धीरे से बोली,,)

घर पर जाकर अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाना और अपनी पसंदीदा गुलाबी रंग की पैंटी पहन कर जरूर आईने में अपने रूप को देखना बहुत खूबसूरत लगोगी,,
( शीतल अपनी आदत के अनुसार बोल दी यह बात सुनते ही निर्मला शर्म के मारे बोली,,)

धत्,,,, पागल हो गई है क्या इस तरह की बातें करती है,,

मैं तो शुरु से पागल हूं तुम्हारे पीछे ,,,,(इतना कहकर सीधे हंसने लगी और जवाब में निर्मला भी मुस्कुरा कर,, गाड़ी में बैठ गई और गाड़ी स्टार्ट कर के रास्ते पर दौड़ाने लगी,,, शीतल की हरकत और उसका रंग रूप देखकर उसका कसा हुआ भरावदार बदन देखकर एक बार फिर से शीतल को पाने की लालसा सर उनके मन में जागरूक हो गई,,

दूसरी तरफ रुचि शुभम के मोटे तगड़े लंड को एक बार फिर से अपनी बुर में लेने के लिए तड़प रही थी जो कि अभी भी,, शुभम के मोटे तगड़े मंडे को अपनी कसी हुई बुर में लेकर जिस तरह से उसने अपनी पुर का आकार बदल वाली थी उसे शुभम के मोटे तगड़े लंड की मोटाई के सांचे में ढाल ली थी उसकी वजह से उसके हर धक्के का दर्द उसे अभी भी अपने बदन में महसूस हो रहा था जिसकी वजह से वह थोड़ा सा लंगड़ा कर अपनी टांगों को फैला कर चल रही थी जो कि उसकी यह चाल सरला देखकर उसे इस बार में पूछी तो वह बारिश में फिसलने का बहाना बना चुकी,, थी। शुभम के द्वारा दिए गए संभोग के असली सुख की तृप्ति महसूस करके वह पूरी तरह से मदहोश में जा रही थी उसे अब ऐसा लग रहा था कि शुभम की आदत बनती जा रही है वह सुकून से एक बार फिर से चुदवाना चाहती थी जो कि मौका नहीं मिल पा रहा था,,, और यही हाल सरला का था,,, रुचि तो पहली बार ही सुभम के लंड को अपनी बुर मे ली थी लेकिन सरला तो जब तक रुचि नहीं थी तब तक सुगम के लंड से चूत कर एक दम मस्त हो चुकी थी वह पूरी तरह से शुभम के मोटे तगड़े लंड की आदी बन चुकी थी और यही तड़प उसे आज बहुत तड़पा रही थी वह शुभम से चुदवाना चाहती थी उसके हर धक्के को अपने बड़े-बड़े नितंबों पर महसूस करना चाहती थी उसके लंड की मोटाई को अपनी बुर की गहराई से नापना चाहती थी,, जिसके लिए वह मौके की तलाश में थी उसे अच्छी तरह से मालूम था कि शाम को छत पर शुभम जरूर कसरत करने के लिए आता है इसलिए शुभम से मुलाकात करने के लिए छत पर उसका इंतजार करने लगी,,,
थोड़ी ही देर में वहां शुभम भी आ गया,, सरला को देखते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ में लगी क्योंकि जिस तरह की हरकत मॉल में शीतल ने अपनी टांगों से उसके लंड पर की थी उसका असर उसे अभी तक अपने बदन में महसूस हो रहा था उसे बुर की जरूरत थी जिसमें अपना लंड डाल के जबरदस्त धक्कों के साथ अपनी गर्मी शांत कर सकता था,,,, वह सरला को देखते ही तुरंत उसके पास आ गया,,, और बोला,,।,,,

सरला चाची आप यहां छत पर क्या करने आई है सूखे हुए कपड़े उतारने अब तो आपकी बहू आ गई है आप क्यों इतनी तकलीफ उठा रही हैं,,,,( सरला से बातें करते हुए जानबूझकर अपने पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को मसल ना शुरू कर दिया जो कि सरला अच्छी तरह से शुभम की इस हरकत को देख रही थी और उसकी इस हरकत की वजह से अपने बदन में गर्माहट का अनुभव कर रही थी,,)

तकलीफ तो मैं तेरी वजह से उठाकर मैं यहां आई हूं ,,,

मेरी वजह से मैं कुछ समझा नहीं,,,,

जबसे बहू को लेकर तू घर पर आया है तब से तो मुझसे मिलने नहीं आया तो नहीं जानता कि आप मुझे तेरे बिना नहीं रहा जाता तेरे मोटे लंड से चुदाई करवाए बिना मुझे नींद नहीं आती,,,
( सरला की यह बातें सुनते ही शुभम के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और टांगों के बीच उसके लंबे तगड़े लंदन में हरकत होने लगी,,,जोकि धीरे-धीरे खड़ा होने लगा,, और पजामे में ऊभरता हुआ लंड शीतल को साफ नजर आने लगा और उसकी वजह से शीतल को अपनी बुर पसीजते हुए महसूस होने लगी,,,)

मैं कर भी क्या सकता हूं चाची मन तो मेरा भी बहुत करता है लेकिन रुचि भाभी के वजह से मैं कुछ करना चाहूं तो भी नहीं कर सकता,,,

तभी तो मैं यहां आई हूं यहां कोई आने वाला नहीं है,,

यहां पर छत पर अो भी इस वक्त यह कैसे हो सकता है,,, चाची,,,,

,
 
,, छत पर हो सकता है सब कुछ हो सकता है रात को जैसे हुआ था अभी भी हो सकता है,,,

चाची आप समझने की कोशिश क्यों नहीं करती हो यह साम का वक्त है रात का अंधेरा नहीं यहां कैसे हो सकता है (शुभम का भी मन अब सरला को चोदने के लिए करने लगा था,, सुभम सब कुछ कर सकता था,,,लेकिन वह देखना चाहता था कि सरला जैसी उम्र दराज औरत अपनी बदन की प्यास बुझाने के लिए क्या कर सकती है,,)

तेरा लंड,,, छत पर आते ही और मुझे देखकर जिस तरह से खड़ा हो गया है,,, उसी तरह से सब कुछ हो सकता है,, ( सरला अपने बदन की प्यास बुझाने के लिए एकदम पागल हुए जा रही थी उसकी बातों से लग रहा था वह कुछ भी करने को तैयार थी,, लेकिन शुभम जानबूझकर ना नुकुर कर रहा था वह भी सरला की बुर में अपना लंड डाल कर अपने बदन की गर्मी को शांत करना चाहता था लेकिन थोड़ी देर इसी तरह से वह सरला को और ज्यादा उकसा रहा था,)
Shubham sarlaa ki chut masalte huye

समझने की कोशिश क्यों नहीं करती चाची यहां पर हम लोग कुछ भी करेंगे तो कोई भी देख सकता है कोई भी आ सकता है,,, मेरी मम्मी तो चलो नहीं आएंगी लेकिन तुम्हारी बहू हो तो आ सकती है,,,,

नहीं आएगी वह अपने कमरे में आराम कर रही है और यही मौका है हम दोनों को एक बार फिर से अपने बदन की गर्मी शांत करने के लिए ,,,देख तू ज्यादा बातें मत बना,, मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,( और इतना कहने के साथ ही सरला हिम्मत दिखाते हुए शुभम की तरफ आगे बढ़ी और पजामे के ऊपर से जिस लंड़ को पकड़कर शुभम उसकी आंखों में देखते हुए मसल रहा था उसका हाथ हठाकर सरला सीधे-सीधे उसके पजामे में अपना हाथ डाल कर उसके कड़क लंड को पकड़ ली सरला चाची की इस हिम्मत को देखकर शुभम उत्तेजना के मारे एकदम गन गना गया,,,,

आहहहहहहह,,,,,, चाची ये क्या कर रही हो ,,,,
Sarlaa shubham k sath masti karte huye..

Ufff sarlaa....

. N
Sarlaa ki badi badi gaand se khelta hua shubham

वही जो तू करने में डर रहा है देख ,, हम दोनों की छत यहां सबसे ज्यादा उंची है इसलिए कोई देखना भी चाहे तो हम लोगों की छत पर नहीं देख सकता इसलिए तू बिल्कुल भी मत डर,,( इतना कहने के साथ ही सरला पूरी मानवता और मदहोशी में आगे बढ़ती चली जा रही थी वह शुभम का एक हाथ पकड़ कर अपनी बड़ी बड़ी चूची पर रख दे और उसे लड़के से दबा दी ताकि इशारा पाकर शुभम उस पर टूट पड़े और ऐसा हुआ भी अब शुभम से बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हुआ जा रहा था उसे सरला चाची जैसी उम्र दराज औरत से इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन सरला जिस तरह की हिम्मत दिखाते हुए अपनी मदहोश जवानी शुभम के ऊपर लुटा रही थी उसे देखकर शुभम एकदम उत्तेजित हो,, गया,,,, शुभम अब पागलों की तरह सरला की बड़ी बड़ी चुचियों को ब्लाउज ऊपर से दबाना शुरू कर दिया था जिससे सरला के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज छूटने लगी सरला को भी अब एहसास हो गया कि आज छत पर शुभम उसकी जुदाई जरूर करेगा और उसकी बदन की गर्मी को शांत करेगा,,,, दोनों जितना हो सकता था एक दूसरे के बदन से खेलना शुरू कर दिए सरला पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी वह शुभम का लंड लेने के लिए इतनी ज्यादा उतावली हुए जा रही है कि उसे इस बात का डर बिल्कुल भी नहीं था कि छत पर कपड़े सूखने के लिए रखे हुए थे और शाम के वक्त ही रुचि छत पर से सूखे हुए कपड़े उतारने के लिए आती है,,,, वह तो पागलों की तरह से धमकी पजामी में बना हाथ डाल कर उसके टन टनाए हुए लंड को अपनी हथेली में भरकर उसे आगे पीछे करके हिला रही थी जिसका एहसास उसे पूरी तरह से गीली किए जा रहा था,,,
ससससहहहह,,आहहहहह,,, शुभम तू बिल्कुल भी मत रुकना मेरी बुर तेरे लंड के लिए तड़प रही है पता नहीं क्या हो गया है मेरी बुर को कि जब तक तेरे लंड को अपने अंदर नहीं लेती तब तक इस में खुजली होती रहती है,,,,,

मेरे लंड का भी कुछ ऐसा ही हाल है चाची,, जब तक तुम्हारी कसी हुई बुर में नहीं जाता तब तक यह खड़ा का खड़ा रहता है इसलिए तो देखो तुम्हें देखते ही खड़ा हो गया था,,,,

तो देर किस बात की है शुभम बेटा डाल दे मेरी बुर में और कर ले अपनी इच्छा पूरी,,,,,( सरला अपने आप पर बिल्कुल भी कंट्रोल कर पाने की स्थिति में नहीं थी,,, शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपने हाथ में पकड़ कर उसे अपनी बुर के अंदर कुछ ज्यादा ही खुजली महसूस हो रही थी जिसे मिटाना अब उसके हाथ में था,,,, दोनों को इस समय अब जिस चीज की जरूरत थी उस चीज को हासिल किए बिना दोनों को चैन मिलने वाला नहीं,,था,, काफी दिनों से सरला अपनी बुर के अंदर से बनकर लंड की मोटाई को महसूस नहीं कर पा रही थी इसके लिए मैं कुछ दिनों से एकदम बेचैन रहती थी और अपनी बेचैनी को शांत करने का उसके पास अब यही एक मौका और तरीका था,, और शुभम जी शीतल की मदमस्त आ जाओ और उसकी गरम हरकत की वजह से पूरी तरह से गरमा गया था जिससे उसे भी रसीली बुर की आवश्यकता थी और उस जरूरत को इस समय सरला चाहिए पूरी कर सकती थी इसलिए दोनों एकदम पागल की तरह छत के ऊपर शाम के वक्त बिना किसी डर के संभोग सुख में रत होने जा रहे थे,, सरला की गरम गहरी चलती सांसो की आवाज से पता चल रहा था कि सरला को कितनी जल्दी थी शुभम के मोटे लंड को अपनी बुर में लेने के लिए इसलिए तो वह तुरंत शुभम का हाथ पकड़कर जहां पर साड़ी सूख रही थी उसके पीछे चली गई जहां पर वह साड़ी उन लोगों के लिए पर्दे का काम कर रही थी।,,
शुभम को पता था कि आप क्या होने वाला है और उसके सोचने के मुताबिक ही,,, सरला दोनों हाथ से अपनी साड़ी उठाते हुए अपनी कमर तक ला दी जिससे उसकी बड़ी-बड़ी को एकदम शुरू की आंखों के सामने चमकने लगी,, सरला उम्रदराज होने के बावजूद भी उसकी गोरी गोरी गाल काफी कसी हुई थी जिससे लगता ही नहीं था कि वह उम्र दराज औरत है बल्कि उसकी गोरी गोरी बड़ी बड़ी गांड देखकर शुभम के तन बदन में और ज्यादा आग लग गई,, सरला दीवाल का सहारा लेकर झुक कर खड़ी हो गई और कुछ ज्यादा ही अपनी बड़ी बड़ी गांड को पर की तरह उठाकर शुभम के सामने परोस दी,,,, साड़ी के अंदर सरला कुछ भी नहीं पहने हुए थी जिसे देखकर शुभम समझ गया कि सरला पूरी तैयारी के साथ , छत पर आई थी,, सरला की हरकत देखकर शुभम की सांसों की गति तेज होती चली जा रही थी और साथ ही उसका गला सूख रहा था वह तो उसे अपने गले को गिला करने की कोशिश कर रहा था,,,, अब उसकी बारी थी उसने भी अपने पर पजामे को तुरंत नीचे सरकाकर उसे घुटनों तक कर दिया उसका खड़ा लंड हवा में लहरा रहा था ,,, सरला से रहा नहीं जा रहा था और प्यासी नजरों से पीछे नजर घुमाकर शुभम को और उसके द्वारा होने वाली हरकत को बड़े गौर से देख रही थी,,


शुभम बिताओ में आ चुका था वह तुरंत सपना की बड़ी बड़ी गांड पकड़कर अपने एक हाथ से अपना लंड उसकी बुर में सटाकर हल्के से धक्का मारा और लंड भक्क सए अंदर घुस गया,, सरला की बुर पहले से ही गिरी थी और शुभम ने कुछ दिनों से इसकी जबरदस्त चुदाई करके उसकी बुर के अंदर अपने लंड का नाप पूरी तरह से बना लिया था इसलिए उसे ज्यादा मशक्कत नहीं उठाना पड़ा और अगले ही पल शुभम का मोटा तगड़ा करने सरला की बुर के अंदर था,,,, सरला मस्त हुए जा रही थी शुभम का लंड को एक बार फिर से अपनी बुर की गहराई में महसूस करके उसके मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज आने लगी,,, शुभम भी जल्दबाजी दिखाते हुए जल्दी-जल्दी अपनी कमर को आगे पीछे करके सरला की चुदाई करना शुरू कर दिया,, शुभम अभी 15 मिनट ही उसे चोद पाया था और इस 15 मिनट की चुदाई में सरला एक बार झड़ चुकी थी,,, दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे शुभम पागलों की तरह धक्के पर धक्के लगाए जा रहा था लेकिन,,, सरला कि यह सब चला कि कुछ काम नहीं आई क्योंकि रूचि सूखे के कपड़े उतारने के लिए छत पर धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़कर आ रही थी,,, अभी वह पूरी सीढ़ी चढ़ी नहीं थी कि उसे औरतों की गरम सिसकारी की आवाज अपनी छत पर आते सुनाई दी और वह चौकन्नी हो गई,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह गर्म सिसकारी की आवाज उसकी छत पर से कहां से आ रही है इसलिए धीरे-धीरे अपने कदम आगे बढ़ाने लगी और वहां पर शुभम अपनी ताल में ताल मिलाता हुआ अपना लंड सरला की बुर में ठोक रहा था,, रुचि धीरे-धीरे छत पर आ चुकी थी और उसे समझते देर नहीं लगी कि साड़ी के पीछे से ही इस तरह की आवाज आ रही थी,,,,

ओहहहहह ,,,,सुभम ,,, और जोर से धक्के लगा कर चोद बेटा मेरी बुर को फाड दे,,पुरा लंड मेरी बुर में घुसा दे,,, आहहहहह,,, बहुत मजा आ रहा है ,,,
Sarla piche se shubham ka lete huye

यह आवाज रुचि के कानों में पड़ते ही रुचि के पांव तले जमीन खिसकने लगी,, उसे समझते देर नहीं लगी कि यह सिसकारी की आवाज उसकी सास की ही आ रही थी जो कि शुभम से रंगरेलियां मना रही थी,,,, रुचि इतना तो समझ ही गई थी कि साड़ी के पीछे ही शुभम और उसकी सास दोनों चुदाई का आनंद लूट रहे थे लेकिन उसे नजर कुछ नहीं आ रहा,, था,,, वह कुछ देर तक अपने धड़कते दिल के साथ वहीं खड़ी रही तो हल्की हल्की हवा के झोंकों से साड़ी इधर उधर हो रही थी जिससे उसे कुछ कुछ नजर आ रहा था शुभम की हिलती हुई कमर और उसकी सास की बड़ी बड़ी गांड यह सब देखकर रुचि के तन बदन में भी आग लगने लगी,,, रुचि और शिवम इस बात से अनजान की पर्ची उन्हें संभव करत होता हुआ दिख रही है वह दोनों अपने ही मस्ती में मस्त होकर एक दूसरे के बदन से मजे ले रहे थे शुभम जोर-जोर से अपना लंड सरला की बुर में पेलता हुआ चुदाई का आनंद ले रहा था,,,। यह कार्यक्रम लगभग 30 मिनट तक और ज्यादा चला और रुचि वही खड़ी होकर सब कुछ देखती रही इस दौरान वह पूरी तरह से गीली हो चुकी थी जब उसे पता चला कि दोनों का कार्यक्रम खत्म हुआ है तो वह दबे पांव सीडी से वापस नीचे चली गई,,
 
अद्भुत और अदम्य साहस का परिचय दिखाते हुए सरला ने जो हिम्मत भरा कदम उठाकर संभोग सुख प्राप्त की थी इसे देखकर शुभम एकदम दंग रह गया था,, वैसे भी मनुष्य जाति की पहले से ही आदत रही है कि वह किसी काम में अपना दमखम दिखाएं या ना दिखाएं लेकिन जहां एक औरत को मर्द से और मर्द को औरत के द्वारा संभोग सुख प्राप्त करना होता है तो वहां पर वह अपने बदन की सारी ताकत सारी हिम्मत लगा देता है,, और वही सरला ने भी की थी यह जानते हुए भी कि उसकी बहू घर में है और संध्या का समय हो रहा है ऐसे में वह हिम्मत दिखाते हुए छत पर गई और वहां पर शुभम से जबरदस्त चुदाई का आनंद ली।
सरला का यही दमखम देखकर शुभम पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में गोते लगाने लगा था और इस अनोखे पल का आनंद उठाते हुए संध्या के समय छत पर भरपूर उजाला होने के बावजूद और किसी के देखे जाने का खतरा बने होने के बाद भी वह सरला जैसी उम्र दराज बड़ी बड़ी गांड वाली औरत को चोदने से अपने मन के लालच को रोक नही पाया,,, सरला भी काफी दिनों से शुभम से शारीरिक संबंध बनाने के लिए तड़प रही थी क्योंकि उसे शुभम की आदत पड़ चुकी थी और वही शुभम की खासियत भी थी वजह से औरत के साथ संबंध बनाता था अपनी मर्दाना ताकत का परिचय उसे बराबर कर आता था और उसी मर्दाना ताकत का अनुभव दोबारा अपने बदन में महसूस करने के लिए औरत तड़प होती थी और यही सरला के साथ भी हुआ था,,, रुचि की अनुपस्थिति में सरला को वह हर तरह से शारीरिक सुख दिया था,,, और ऐसा सुख दिया था कि उसके हर धक्के का एहसास सरला को हमेशा होता रहता था जिससे वह भी शुभम से दोबारा शारीरिक संबंध बनाने से अपने आप को रोक नहीं पाी,,, उम्र के इस पड़ाव पर और एक बहू होने के बावजूद भी वह अपनी वासना को अपने अंदर दबा नहीं,, पाई थी और एक नौजवान औरत की तरह अपनी शारीरिक भूख मिटाने के लिए वह इस हद तक चली गई,,,
Ruchi ki madmast jawani..

Or uski laajawab chuchiya

सरला की जबरदस्त चुदाई करने के बाद सुभम तो छत पर से नीचे नहीं गया वह छत पर ही रुक गया क्योंकि उसे कसरत करना था वैसे भी उसका कसरत हो चुका था सरला की जबरदस्त चुदाई करके,,, वैसे भी जितना पसीना वह कसरत करके बहाता ऊससे कही ज्यादा पसीना वह सरला को चोदकर बहा चुका था,,,, आप उसे कसरत करने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन फिर भी वह अपनी आदत के अनुसार वहीं रुका रहा,,,, लेकिन सरला जोकि तृप्ति भरे एहसास के साथ पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी अपनी चरम सुख को बड़ी सफलता पूर्वक प्राप्त करने के बाद उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव साफ झलक रहे थे,,, वह पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी,,, और वह साड़ी को वापस अपनी कमर से नीचे गिरा कर अपने कपड़े को दुरुस्त करके वहां से अपनी गांड मटकाते हुए छत से नीचे चली गई,,, इस बात से अनजान कि उसकी काम दिला को उसकी बहू रुचि ने अपनी आंखों से देख ली है, वह पूरी तरह से निश्चिंत होकर नीचे जाकर अपना काम करने लगी,,,
रुचि को तो अभी भी अपनी आंखों पर अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि जो उसकी आंखों ने खुद देखि है और खुद उसके कानों ने सुना है वह सच भी हो सकता है,,
वह अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर बैठ गई थी उसके दिल की धड़कन अभी भी जोरों से धड़क रही थी क्योंकि उसकी आंखों में जो कुछ भी देखा था उसे उसे अभी तक विश्वास नहीं हो रहा था और ना ही इसकी कभी उसे उम्मीद थी,,
उस वह अपने आप से ही बातें करते हुए कह रही थी कि उसकी सास ऐसी है उसे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है,,, इस उम्र में वह कैसे बेशर्म की तरह छत पर जाकर अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपनी बड़ी बड़ी गांड हिलाते हुए एक अपने ही बेटे के उम्र के लड़के से कैसे चुदवा रही थी,,, अपने आप से किए गए बातों से ही वह खुद शर्मा जा रही थी। उसे अपनी सास पर गुस्सा तो आ रहा था लेकिन अपनी सास को इस तरह से एक जवान लड़के से चुदवाते हुए देखकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर भी दौड़ने लगी थी,,,, जिस तरह से शुभम जोर-जोर से अपनी कमर हिलाते हुए धक्के पर धक्के लगा रहा था वह नजारा उसकी आंखों मे बस गया था, क्योंकि एक औरत होने के नाते उसे इतना तो अनुभव था ही कि जब एक मर्द इतनी जोर जोर से अपनी कमर हिलाते हुए धक्के लगाता है तो औरत को कितना अधिक आनंद आता है,, यही सोचकर उसे अब जलन होने लगी थी कि शुभम के द्वारा लगाए गए धन को का उसके साथ कितने बजे लेकर आनंद लूट रही थी तभी तो उसके मुंह से गर्म सिसकारी क्यों आज इतनी तेज आ रही थी कि उसे सीढ़ी यो तक उसके कानों में सुनाई दे रही थी और जिस उत्तेजना और जोश के साथ वह शुभम को उकसाते हुए उसे और जोर जोर से चोदने के लिए कह रही थी इससे यही साबित होता है कि उसकी सास कितनी ज्यादा प्यासी औरत है जो कि इस बात का अभी तक रुचि को अहसास तक नहीं, था,,।
अपनी सास को इस तरह से चुदवाते हुए देखकर और हुआ चोदने वाला कोई और नहीं शुभम ही था इस बात को जानकर रुचि को पक्का यकीन हो गया था कि शुभम सीधा-साधा लड़का नहीं बल्कि एक औरत बाद लड़का, है।
लेकिन मैं इस बात से भी इनकार नहीं कर सकती थी कि सुभम में जरूर ऐसी बात है कि औरत तुरंत उसके साथ सोने के लिए उसके साथ संभोग सुख भोगने के लिए तैयार हो जाती है यह उसकी मर्दाना ताकत का ही कमाल है,, जिस वजह से वह खुद शुभम की दीवानी हो गई है,, इसलिए तो जिस दिन से वह उस की जबरदस्त चुदाई किया था वह भी तूफानी बारिश में उस दिन से लेकर आज तक वह शुभम से दोबारा चुदवाने के लिए तड़प रही थी और इस मामले में अपनी सास को आगे होता देख कर उसे अपनी सास से जलन होने लगी थी,,, वह मन ही मन में आगे का प्लान बनाने लगी थी क्योंकि उसके दिमाग की बत्ती जल गई थी उसे इस बात का एहसास हुआ कि जो नजारा उसने अपनी आंखों से देखी है वह नजारा ही उसके लिए आशीर्वाद बन कर साबित होने वाला था,, बस उसे मौका देख कर सही पासा फेंकने की जरूरत थी वह अपने मन में आए इस ख्याल से खुश नजर आने लगी,,,,
Sarlaa ka bharawdaar bad an

दूसरी तरफ सीतल जो कभी सोचा नहीं था कि इस तरह से मॉल में उसकी मुलाकात निर्मला हो शुभम से होगी वह इस मुलाकात से बेहद खुश नजर आ रही थी,,, शीतल शुभम के मर्दाना अंग से तो पूरी तरह से वाकिफ थी लेकिन मॉल में उसकी मर्दाना ताकत से भी वाकिफ हो गई थी,, शीतल शुभम की बाजू में अपने आप को समाया हुआ देखना चाहती थी उसके मर्दाना अंग को अपने नाजुक अंग में हरकत करता हुआ देखना चाहती थी,, और शुभम के बारे में ही कल्पना करते हुए हुआ बिस्तर पर एक-एक करके अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई थी शीतल को भी अपने बदन पर बेहद नाज और गर्व था क्योंकि वह जानती थी कि जो एक खूबसूरत औरत के पास जिस तरह के अंग होने चाहिए उसी तरह के अंग उसके पास भी थे बस थोड़ी किस्मत खराब थी,, पर किस्मत इसलिए खराब थी कि वह दूसरी औरतों की तरह गंदी नहीं थी भले ही गंदे शब्दों से वह अपने सहेली और अपने चाहने वालों से बात कर लेती थी लेकिन उसने भी संस्कार और उसके गुण थे और अपनी मर्यादा को लांघना नहीं चाहती थी लेकिन शुभम से मुलाकात के बाद वह अपनी मर्यादा की लकीर को और भी ज्यादा पतली होती महसूस करने लगी थी,, और उसी के चलते ही आज वह अपने बिस्तर पर दम नंगी लेटी हुई थी और अपने हाथ से ही अपने नाजुक अंगों से खेल रही थी,,, वह अपने कमरे में आते समय किचन में से फ्रिज खोल कर उसमें से एक लंबा तगड़ा काकडी लेकर आई थी जो कि शुभम के मर्दाना अंग की तरह ही था,,, वह अपनी दोनों टांगें खोलकर शुभम की कल्पना करके उसका कड़ी को अपनी बुर के अंदर बाहर करते हुए चुदाई का आनंद ले रही थी और यह कल्पना कर रही थी कि उसकी बुर के अंदर काकडी नहीं बल्कि सुगन का मोटा तगड़ा लंड है और इस कल्पना के चलते वह कुछ ही देर में जबरदस्त तरीके से पानी छोड़ दी,, और उसके बाद वह गहरी नींद में सो गई,,
Sheetal..


Sheetal chut se khelte huye..


Khud apne bad an ki pyas bujhate huye kakadi. Apni chut me daalte huye
 
शुभम मुझे तो बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा है किसी कल खुद मुझसे इस तरह से माफी मांगी है,,( डाइनिंग टेबल पर वेट कर शुभम की मां रोटी तोड़कर निवाला मुंह में डालते हुए शुभम से बोली,,,)

मम्मी यकीन करो कि ना करो लेकिन जो कुछ भी हुआ वह हकीकत ही है शीतल मैडम आपसे माफी मांग चुकी हैं,,
(शुभम भी मुंह में निवाला डालते हुए बोला..)

चलो इतना तो अच्छा ही हुआ कि शीतल मुझसे माफी मांग ली और हम दोनों का रिश्ता पहले की तरह हो गया,,,,

मतलब यह मम्मी की जो कुछ भी हुआ था मैं गुस्से में हुआ था आप नहीं चाहती थी उससे रिश्ता तोड़ना,,

तू सच कह रहा है शुभम मैं कभी भी शीतल से अपनी दोस्ती का रिश्ता नहीं तोड़ना चाहती थी क्योंकि मेरी तन्हाई की सच्ची साथी थी जिसे मैं सब कुछ बताती थी उसे सब कुछ शेयर करती थी सिवा तेरे,,,

मम्मी जो कुछ भी हुआ भावनाओं में बहकर हुआ मैं ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहता था लेकिन उस समय ना जाने क्या हो गया था जो हम दोनों से गलती हो गई और उस दिन से मुझे उस बात का पछतावा भी बहुत है,,(शुभम अपनी मां की बात सुनकर उसे दिलासा देते हुए बोला,,,)

मैं यही चाहती हूं बेटा कि तू इस तरह दोबारा ऐसी कोई भी गलती ना करें,,,, मैं सब कुछ बर्दाश्त कर सकती हूं लेकिन तू किसी और के साथ हो जाए यह बर्दाश्त नही कर सकती,,, जिंदगी में चाहे कुछ भी हो जाए लेकिन मैं तुझे किसी और औरत से बांटना नहीं चाहती इतना तू ध्यान रख लेना,,( निर्मला सब्जी की प्लेट को शुभम की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोली,, सोनिया बात अच्छी तरह से जानता था कि एक औरत सब कुछ बर्दाश्त कर सकती है,, लेकिन अपने प्यार को उस बार देखो जो उसकी शारीरिक जरूरतों को पूरी करता है उसे कभी नहीं बांट सकती इसलिए वह अपने मां को तसल्ली दिलाते हुए बोला,,,)

मम्मी मैं मानता हूं मुझसे गलती हुई थी मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था लेकिन उसके लिए मैं आपसे माफी मांग चुका हूं और आइंदा इस तरह की गलती नहीं होगी मैं वादा भी कर चुका हूं,,, ( शुभम वापस निवाला मुंह में डालते हुए बोला,,)

मुझे तुझ पर भरोसा है शुभम इसलिए तो तुझसे यह सब बात कह रही हूं वैसे तो शीतल बहुत अच्छी औरत है लेकिन मुझे भी यकीन नहीं होता कि उस दिन यह सब कैसे हो गया,, शायद वह हालात की मारी है जैसे कि मैं पहले थी लेकिन तेरे आने के बाद सब कुछ सही हो गया,,,,,
( निर्मला क्या कहना चाहती है सुबह में अच्छी तरह से जानता था लेकिन बात को आगे बढ़ाना नहीं चाहता था इसलिए वह कुछ बोला नहीं,,)

देख सकता हूं मैं तुझसे रिक्वेस्ट करती हूं,,, शीतल मेरी सबसे अच्छी और सच्ची सहेली है जिसके साथ मैंने जिंदगी के इतने साल गुजार दिए वह मेरी बेस्ट फ्रेंड है उस दिन जो कुछ भी हुआ मैं नहीं चाहती कि तू उसके साथ कभी भी दोहराए क्योंकि मैं अब उसे नहीं खोना चाहती,, अगर जिंदगी में कभी भी उस तरह का फिर से मौका आए या फिर से शीतल कभी इस तरह की भावनाओं में बहकर तुझ से शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करें तो तो मेरी बात जरूर याद रखना उसके बहकने के बावजूद तो कभी मत भेजना क्योंकि अब मैं नहीं चाहती कि तुझसे उस दिन की तरह दोबारा गलती हो,,,,( अपनी मां की बात सुनकर शुभम बनी मन में सोचने लगा कि दुनिया में ऐसा कौन सा मर्द होगा जो इस तरह का मौका मिलने पर मुह फेर लेगा या औरत को मना कर देगा वह दुनिया का सबसे बड़ा बेवकूफ ही होगा जो इतने सुनहरे मौके को हाथ से जाने देगा,, लेकिन फिर भी अपनी मां की बात को रखते हुए वह उसे दिलासा बताते हुए बोला,,,।

मुझ पर भरोसा रखिए मम्मी मैं आपका ही बेटा हूं दोबारा कभी भी ऐसा कोई काम नहीं करूंगा जिससे आपको तकलीफ हो,,,, सच कहूं तो शीतल,,, से कहीं ज्यादा आप खूबसूरत हो आपका हर एक अंग बेहद खूबसूरत है आपके सामने शीतल कोई मायने नहीं रखती,,,( अपने बेटे के मुंह से इस तरह की तारीफ सुनकर निर्मला मंद मंद मुस्कुराने लगी,,, ना जाने क्यों मर्द की फितरत को जानते हुए भी निर्मला को अपने बेटे पर भरोसा हो रहा था जबकि यह बात तो अच्छी तरह से जानती थी कि अच्छे-अच्छे मर्द अच्छी बीवी पास में होने के बावजूद भी दूसरी और तुम की चिकनाई पर फिसल जाते हैं,,,, फिर भी वह अपने आप को तसल्ली देकर खाना खाने लगी,,

मम्मी तुमने तो मुझे नहीं दिखाई कि तुम किस तरह की गुलाबी रंग की पेंटी और ब्रा खरीदी हो मैं भी देखना चाहता हूं,,( शुभम पानी का ग्लास उठाकर उसे पीते हुए बोला।।)

देख लेना अभी तो सारी रात बाकी है,,, ( निर्मला कामुक मुस्कान होंठों पर लाते हुए बोली,,,, थोड़ी ही देर में दोनों ने खाना खत्म कर लिया निर्मला किचन में जाकर सारे झूठे बर्तन साफ करके बाथरूम में फ्रेश होने के लिए चली गई,,
शुभम वही डाइनिंग टेबल पर बैठा आज दिनभर की घटनाओं के बारे में सोच रहा था,,, बार-बार उसे बैंगनी रंग की ट्रांसपेरेंट में कयामत ढा रही शीतल याद आ रही थी। छोटे से ब्लाउज में उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ऐसा लग रहा था कि जैसे बड़े-बड़े खरबूजे को जबरदस्ती किसी थैले में भर दिया गया,, गया हो,, sheetal ki badi badi chuchiya


Sheetal ki gol gol gaand


मटके जैसी बड़ी बड़ी गांड जिसे देखते ही अपनी प्यास बुझाने की इच्छा हो जाए कुल मिलाकर शीतल एकदम पटाखा थी,,, जिसे चोदना शुभम के लिए सौभाग्य की बात होती ऐसा वह अपने मन में सोच रहा था जो कि अभी भी उसकी मां ने हिदायत दी कि शीतल से हमेशा दूर रहना उसकी मां की देवी सारी हिदायतें धरी की धरी रह गई क्योंकि एक मर्द की जाती है ऐसी होती है कि जाओ खूबसूरत औरत देखे नहीं लार टपकाते हुए पीछे पड़ जाते हैं लेकिन यहां तो खुद खूबसूरत औरत शीतल खुद शुभम के पीछे पड़ी हुई थी इसलिए हाथ में आया हुआ लड्डू किसी भी हाल में शुभम जाने नहीं देना चाहता था,,,, कसी हुई साड़ी के अंदर पानी भरे गुब्बारे की तरह लहराती हुई गांड को याद करके सुभम का लंड खड़ा होने लगा था,,,, बची कुची कसर सरला चाची पूरी कर दी थी शाम वाली घटना याद आते हैं एक बार फिर से उसके तन बदन में चुदाई करने की इच्छा जागरुक हो गई,,,, सरला की बड़ी-बड़ी गांड याद आते ही उसके लंड की ऐंठन बढ़ने लगी,,,,, वह अपनी पजामें में माथा उठा रहा अपने लंड को अपने हाथ से मसलकर उसे बैठाने की कोशिश करने लगा कि तभी उसे सीढ़ियों पर से पैरो की आहट सुनाई दी,,, जब वह पलट कर उस दिशा में देखा तो उधर का नजारा देखकर एकदम दंग रह गया,,,, उसके बदन में रक्त संचार एकदम कमजोर पड़ने लगा उसकी सांसों की गति तेज होने लगी ऐसा लग रहा था मानो उसका पूरा बदन ठंड के मारे जमने लगा हो कर भी क्या सकता था सामने का नजारा ही कुछ ऐसा था कि जिसे देखने के बाद दुनिया का हर मर्द सांसे लेना भूल जाए,,,, निर्मला के भजन पर केवल आज ही मॉल में से खरीद कर लाई गई गुलाबी रंग की ब्रा और पैंटी थी जो कि उसकी पसंदीदा,, थी,,, अपनी मां को देखते ही शुभम समझ गया कि उसकी मां बाथरूम में नहा कर आई है क्योंकि उसके बाल गीले थे और उसके किलो वालों में से पानी की ठंडी बूंदे मोतियों के दाने की तरह उसके खूबसूरत बदन पर फिसल रही थी,,, गुलाबी रंग की ब्रा में निर्मला के दोनों कबूतर फड़फड़ा रहे थे दोनों को ऐसा लग रहा था कि आजादी चाहिए थी,, चिकना खूबसूरत गोरा बदन ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी मे एकदम नहाया हुआ लग रहा था,,,,, शुभम को अपने दिमाग और बदन को उत्तेजना आत्मक स्थिति में लाने के लिए किसी प्रकार की आवश्यकता बिल्कुल भी नहीं थी अपनी मां के खूबसूरत बदन को देखते ही उसके पजामे में तंबू ने अपना बंबु खींचना शुरू कर दिया था,,,, गुलाबी रंग की पेंटी आगे से एकदम गर्म तेल के कढ़ाई में तलकर फुलाई गई कचोरी की तरह फुली हुई लग रही थी,,, जिसे देखते ही शुभम के मुंह में पानी आ गया,,,,, निर्मला सीढ़ियां उतरते समय अपने बेटे के चेहरे के बदलते हाव-भाव को गौर से देख रही थी और वह मन ही मन प्रसन्न भी हो रही थी क्योंकि वह जानती थी कि उसे इस हालत में देख कर उसके तन बदन में कैसी आग लग रही थी,, उसे साफ साफ दिखाई दे रहा था कि शुभम के पेजामे में उसका तंबू एकदम तन चुका था,,,, उस पर नजर पड़ते ही निर्मला के मुंह के साथ-साथ उसकी बुर में भी पानी आ गया,,,
Nirmala ki badi badi kharbujhe jesi madmast chuchiya

कैसी लग रही हूं गुलाबी रंग की ब्रा और पेंटी में ,,,,,( निर्मला अर्धनग्न अवस्था में एकदम ठंडे लहजे में अपने बेटे से बोली,,,)

एकदम कयामत लग रही हो मम्मी मैं तो ऐसा लग रहा है कि स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा देख रहा हूं,,,,, ( शुभम अपने पजामे को थोड़ा सा नीचे की तरफ सरका कर अपने खड़े लंड को अपने हाथ में लेकर अपनी मां की तरफ देखते हुए ऊसे हिलाते हुए बोला,,) देख लो मेरा लंड तुम्हारी मदमस्त जवानी को सलामी दे रहा है इसकी सलामी कबूल करो,,,
( निर्मला अपने बेटे की इस बात को सुनकर एकदम से हंस दी,, निर्मला हंस रही थी लेकिन उसे यह नहीं मालूम था कि उसकी मुस्कुराहट और उसकी कातिल जवानी उसके बेटे के दिल पर छुरियां चला रही थी वह अंदर ही अंदर आग बबूला हुआ जा रहा था अपनी मां कीमत मस्त जवानी को अपनी बांहों में भरकर उसे फिर से निचोड़ने के,, लिए,,, उसकी मां अपने गुलाबी होठों पर मुस्कुराहट लिए धीरे-धीरे अपने लंबे लंबे चिकनी टांगों को सिढिया दर सिढिया रखकर नीचे उतर रही थी और शुभम अपनी मां की तरफ देखकर उत्तेजना के मारे जोर जोर से अपने लंड को मुठीयाना शुरू कर दिया था,,, निर्मल को अपने बेटे की यह हरकत पूरी तरह से काम उत्तेजना से भर दी,,,, वह धीरे-धीरे अपने बेटे के बेहद करीब पहुंच गई और अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे की कड़ी लंड को पकड़ कर उसे रोकते हुए बोली,,)

इस तरह से हिला हिला कर पानी निकाल देगा की कुछ और भी करेगा,,,

तुम्हारे लिए तो मैं सब कुछ करुंगा मेरी रानी,,,( उत्तेजना के मारे सुपर एकदम दीवाना हो गया था वह अपनी मां को मदहोशी भरे लहजे में उत्तेजनात्मक बातें कह रहा था,, और निर्मला अपने बेटे की इस तरह की बातें सुनकर इतनी मदहोश हुए जा रही थी कि वह जवाब में अपने बेटे से बोली)

हाय मेरे राजा तेरी इसी अदा पर तो मैं अपनी दोनों टांगें खोल देती हूं,,,,( ऐसा कहते हुए अपने बेटे के खड़े लंड को अपने हाथ से हिलाने लगी और दूसरे हाथ की हथेली से पैंटी के ऊपर से ही अपनी रसभरी बुर को सहलाने लगी, अपनी मां की मादकता भरी हरकत को देखकर सुभम से रहा नहीं गया और वह अपने तपते होठों को अपनी मां के गुलाबी होठों पर रखकर उसे चूसना शुरू कर दिया पलभर में ही दोनों एकदम मदहोश होने लगे और निर्मला भी अपने बेटे का साथ देते हुए तुरंत अपने होठों को खोल कर उसके होंठ को मुंह में भरकर चूसना शुरु कर दी,,,,,,

ससससहहहह,,,,आहहहहहहह,,,,, शुभम तुमने मुझे पागल कर दिया है रे,,,,

तो तूने ही कब मुझे छोड़ा है तूने तो मुझे अपना दीवाना बना लिया है,,,,( ऐसा कहते ही सुभम अपने दोनों हाथ को अपनी मां की चिकनी पीठ पर से फिसलाते हुए नीचे की तरफ ले गया और उसके मदमस्त बड़े-बड़े गांड के उभार को पकड़कर दोनों हाथों से दबाना शुरू कर दिया,,)

ओहहहह मम्मी तुम्हें इस रूप में देखकर मेरी काम आओ ना और ज्यादा बढ़ गई है मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरा लंड फट जाएगा,,,,,,

ससससहहहह,,,आहहहहह,,,, ऐसा गजब मत होने देना तेरा लंड फट गया तो मैं क्या करूंगी कहां जाऊंगी इससे तो तू मेरी बुर फाड़ दे,,, मेरी बुर के अंदर तक अपने लंड को डालकर मेरी चुदाई कर,,,,

ऐसा ही होगा मम्मी मेरा लंड तुम्हारी बुर के लिए बना है यह तुम्हारी बुर की सेवा करता रहेगा,,,,,( ऐसा कहते हुए सुभम अपने दोनों हाथ को ऊपर की तरफ लाकर अपनी मां के ब्रा के हुक को खोल दिया और देखते ही देखते उसकी मां की कसी हुई ब्रा दोनों फड़फड़ाते हुए कबूतर पर से अपनी पकड़ ढीली करते हुए बड़ी फुर्ती के साथ शुभम के हाथों से निर्मला के दोनों खूबसूरत बाजूओ से निकलकर डाइनिंग टेबल पर बिखर गया,,,, शुभम की आंखों के सामने उसकी मां की खूबसूरत चुचियों का जोड़ा था जो कि शुभम के हाथों में आने के लिए तड़प रहा था,, निर्मला यही चाहती थी कि शुभम उसकी दोनों चूचियों को मसल मसल कर उसके साथ प्यार करे उससे खेले,,,,, क्योंकि काफी दिन हो गए थे शुभम उसकी चुचियों के साथ जी भर कर खेला नहीं था इसलिए निर्मला अपने दोनों हाथों में अपनी बड़ी बड़ी खरबूजे जैसे चुचियों को हथेली से ऊपर की तरफ उठाते हुए मानो किसी स्वादिष्ट व्यंजन की तरह उसे किसी थाली में परोस कर अपने बेटे के सामने प्रस्तुत कर रही थी जिसे देखकर शुभम के तन बदन में आग लग गई और वह आगे बढ़कर अपने दोनों हाथों में अपनी मां की दोनों चुचियों को थाम लिया ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी चूचियां नहीं बल्कि निर्मला द्वारा दी जाने वाली कोई पुरस्कार हो,,, लेकिन निर्मला की तरफ से वास्तव में शुभम को उसके हाथों में थाम आने वाली उसकी चूचियां किसी पुरस्कार से कम नहीं थी जो कि शुभम की मदमस्त मर्दाना ताकत से भरी हुई जवानी को देखकर उसकी मां उसे पुरस्कृत कर रही थी,,, यह पल किसी भी जवान लड़के के लिए बेहद अनोखा और अद्भुत होता है जिसकी तुलना वह किसी भी पल से नहीं कर सकता क्योंकि एक औरत तभी अपनी दोनों चुचियों को एक मर्द के हाथ में सौंपती है जब उसे उस मर्द पर उससे संतुष्टि भरी एहसास को पाने की आशा होती है और उसे विश्वास होता है जो कि यह आशा और विश्वास निर्मला अपने बेटे शुभम में बराबर देखती थी,,,,,

अपनी मां के विश्वास पर खरा उतरता हुआ शुभम अपनी मां की दोनों खरबूजा जैसी बड़ी बड़ी चूचियों को अपने हाथों में थाम कर उसे जोर जोर से किसी हापुस आम की तरह दबाना शुरू कर दिया,, जैसे आम के सीजन में लोग आम को अपने दोनों हाथों से चुस चुस कर उसके मीठे रस को पीते हैं उसी तरह से शुभम भी अपनी मां की चुचियों को आम की तरह दबा दबा कर उसके निप्पल को मुंह में लेकर उसके रस को पी रहा था,,,,, निर्मला मदहोश में जा रही थी क्योंकि बड़ी शक्ति के साथ हुआ है उसकी चूचियों को दबा रहा था वह पागल हुए जा रही थी उसके मुंह से लगातार गर्म सिसकारी की आवाज छूट रही थी,, पहली बार वह इस तरह से डाइनिंग रूम में अपनी मदहोश जवानी अपने बेटे के हाथों से लूटवा रही थी,,, अपने बंगले में अपने कमरे में नहीं बल्कि डाइनिंग हॉल में इस तरह से अपने बेटे से रास लीला रचाते हुए उसे अद्भुत सुख का अहसास हो रहा था उसके तन बदन में रचना की चिंगारी और ज्यादा फूट रही थी,,,,
शुभम पागल हुए जा रहा था ऐसा लग रहा था कि उसके पजामा फाड़ कर उसका लंड बाहर आ जाएगा,,, वह किसी तरह से एक हाथ से पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को दबाने की कोशिश कर रहा था जिसमें वह नाकाम साबित हो रहा था उसे इस बात का डर था कि ज्यादा उत्तेजना के कारण उसका लंड समय से पहले कहीं पानी ना छोड़ दे क्योंकि आज उसके तन बदन में कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का आभास हो रहा था,, निर्मला के तन बदन में मदहोशी अपना असर पूरी तरह से दिखा रही थी उसकी आंखों में खुमारी छाई हुई थी,,, वह पागलों की तरह अपने बेटे के द्वारा स्तन मर्दन और उसकी चुसाई का आनंद ले रही थी वह छोटे बच्चे की तरह अपने बेटे को दूध पिला रही थी,,,,, और शुभम जी अपनी मां की चूची पीने में पूरी तरह से माग्न हो गया था,,,,,
निर्मला अच्छी तरह से जानती थी कि उसका पति घर पर आने वाला नहीं था इसलिए तो वह आज अपने कमरे से बाहर निकल कर इस जगह पर अपनी जवानी को और भी ज्यादा पानी देना चाहती थी,, इसलिए तो निर्मला पजामे के ऊपर से ही अपने बेटे के लंड को पकड़ कर उसे जोर जोर से मसल रही थी और शुभम मदहोशी भरे आलम में पूरी तरह से लिप्त होकर एक हाथ अपनी मां की पेंटिं में डालकर उसकी कचोरी जैसी फुली हुई बुर मसल रहा था,,,। जिस से लगातार निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज निकल रही थी और वह पूरे घर में गूंज रही थी लेकिन उसे सुनने वाला उन दोनों के सिवा तीसरा कोई भी नहीं,,,,,,,
बहुत ही जल्द निर्मला अपने बेटे की गरम हरकतों के कारण घुटने टेक दिए उसी अपनी बुर के अंदर कुछ ज्यादा ही खुशी महसूस होने लगी थी वह जल्द से जल्द अपने बेटे के खड़े लंड को अपनी बुर में लेकर चुदवाना चाहती थी और अपनी खुजली को मिटाना चाहती थी,, इसलिए वह उत्तेजना के मारे अपने होठों से शब्द ना निकल सकने की स्थिति में भी टूटे-फूटे शब्दों के साथ अपने बेटे से लगभग गिडगिडाते हुए बोली,,,,

ओहहहह ,,,,, शुभम मेरे राजा मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है मेरी बुर पानी छोड़ रही है और तेरा लंड पूरा खड़ा हो गया है अब देर मत कर जल्दी जल्दी से मेरी बुर में डालकर मेरी चुदाई कर दे,,,,,सहहहहह,,,,आहहहहहहह,,, शुभम मेरे लाल देर मत कर,,,,

( सुभम समझ गया था कि उसकी मां को उसके मोटे तगड़े लंड की जरूरत है और वह जल्द से जल्द चुदवाना चाहती है लेकिन शुभम इतनी जल्दी चुदाई का कार्यक्रम शुरू करने की स्थिति में नहीं था वह आज अपनी मां को गुलाबी रंग की ब्रा और पैंटी में देखकर कुछ ज्यादा ही मदहोश हो गया था इसलिए वह अपनी मां के खूबसूरत बदन के साथ कुछ देर तक और खेलना चाहता था उसे मस्ती करना चाहता था उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था इसलिए वह तुरंत अपनी स्थिति बदलते हुए,, अपनी मां को अपने दोनों हाथों से पकड़कर उसे डाइनिंग टेबल की तरफ कर दिया और उसे डाइनिंग टेबल पर झुका दिया,,,, अब हालात और स्थिति दोनों बदल गए थे निर्मला को ऐसा लग रहा था कि शुभम पीछे से उसकी बुर में डालेगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था,,, शुभम के दिमाग में कुछ और चल रहा था ना कुछ और करना चाहता था डायनिंग टेबल पर झुकने की वजह से है निर्मला की बड़ी-बड़ी गांड हवा में कुछ ज्यादा ही उठ गई थी जिसे देखकर सुभम के मुंह में पानी आ गया और वह गुलाबी रंग की पैंटी के ऊपर से ही दो चार चपत अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर लगा दिया जिससे निर्मला के मुंह से हल्की कराहने की आवाज के साथ साथ गर्म सिसकारी की आवाज भी फूट पड़ी,,,,,
Nirmala ki madmast gaand

आहहहहहहह,,,ससईईईईईई,,,, क्या कर रहा है रे दर्द होता है,,

ज्यादा दर्द ना हो इसीलिए तो यह सब कर हूं मेरी रानी इतना कहने के साथ ही शुभम घुटनों के बल नीचे बैठ गया,, और अपना हाथ आगे बढ़ाकर धीरे-धीरे अपनी मां की पेंटिं को पकड़कर नीचे उतारने लगा,,, निर्मला प्यासी नजरों से नजरें पीछे की तरफ करके अपने बेटे की हरकत को देखकर और ज्यादा मस्त हो रही थी,,,
 
निर्मला के घर का नजारा बेहद गर्म कर देने वाला था,, अभी रात के 11:00 ही बजे थे कि दोनों की कामलीला की शुरुआत हो चुकी थी,, पहली बार निर्मला अपने कमरे में नहीं बल्कि कमरे से बाहर डाइनिंग हॉल में डाइनिंग टेबल पर अपने खूबसूरत बदन की गर्मी अपने बेटे के द्वारा पिघलाने में जुटी हुई थी,,,, निर्मला बेहद गर्म हो चुकी थी उसके तन बदन में अपने बेटे का लंड लेने की इच्छा ज्यादा बलवंत हो चुकी थी,,,, निर्मला के खूबसूरत भरे हुए बदन से वासियों की चिंगारी फूट गई थी जिसमें शुभम अपने आपको पिघलता हुआ महसूस कर रहा था,,, निर्मला को लगा था कि उसका बेटा अब पीछे से उसकी लेने वाला है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था शुभम के मन में कुछ और चल रहा था वह अपने घुटनों के बल बैठ कर अपनी मां की पेंटी को दोनों हाथों से धीरे-धीरे करके नीचे की तरफ खींचते हुए उसे उतार रहा था,,,, और निर्मला आशा भरी निगाहों से अपने बेटे की तरफ देख कर मन में यह सोच रही थी कि आप उसका बेटा उसकी पैंटी उतार कर उसे संपूर्ण रूप से नंगी कर देगा और अपने मोटे तगड़े लंड को उसके गुलाबी बुर के गुलाबी छेद पर रखकर धक्का लगा कर उसे अंदर तक उतार देगा,,,,, लेकिन शुभम के मन में कुछ और था वह देखते ही देखते अपनी मां की गुलाबी रंग की पैंटी जो कि उसकी मां की पसंदीदा पेंटी थी उसे उतारकर एकदम नंगी कर दिया इस समय शुभम घुटनों के बल बैठा हुआ था और उसकी मां डाइनिंग टेबल पर झुककर उसकी आंखों के सामने अपनी बड़ी बड़ी मादकता से भरी हुई गांड को हिला रही थी जिसे देखकर शुभम के लंड में हरकत होने लगी थी,,,, दोनों की सांसो की गति तेज चल रही थी,,, निर्मला इतनी ज्यादा प्यासी हो चुकी थी कि वह अपना एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर बाहर बार अपनी गोरी गोरी बड़ी बड़ी गांड पर जोर जोर से चपत लगा रही थी ,,,जो कि यह चपत सुभम के लिए इशारा था कि अब वह अपना काम शुरू करें,, अपनी मां के उतावलापन को देखकर शिवम भी अब ज्यादा देर नहीं लगाना चाहता था इसलिए अपने दोनों हाथों से अपनी मां की बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी जानकी आंखों को पकड़कर उसे हल्के से फैलाने लगा जिससे निर्मला की गांड के फांक के बीचो-बीच उसकी गुलाबी रंग की गुलाबी पत्ती नजर आने लगी साथ ही उसके नीचे छोटा सा भूरे रंग का छेद नजर आने लगा,, सुभम भूरे रंग का छेद कुछ ज्यादा ही गोलाई लिए हुए था उसे देखते ही ना जाने क्यों शुभम के तन बदन में उत्तेजना कुछ ज्यादा ही असर दिखाने लगी,, अभी भी निर्मला पीछे नजर करके अपने बेटे की हरकत को देख रही थी जो कि ठीक उसकी गांड के नीचे बैठा हुआ था,, बड़ा ही मादक नजारा था यह नजारा निर्मला के तन बदन में भी आग लगा रहा था,,, वह पूरी तरह से नंगी डाइनिंग टेबल पर चुप कर खड़ी थी और उसका बेटा पजामा पहन कर घुटनों के बल बैठा हुआ था और यह बात वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसे ईस हाल में देखकर उसके बेटे का लंड पजामे के अंदर गदर मचा रहा होगा,,,,
Nirmala ki khubsurat badi badi chuchiya

शुभम इस सुभम काफी भूखा था और उसके सामने बदन रूपी स्वादिष्ट व्यंजन परोसी हुई थी जिसे देखते ही उसके मुंह में पानी आ गया और उसे ज्यादा सब्र नहीं हुआ,,, और वह अपने दोनों हाथों से अपनी मां की गांड को कस के पकड़ के उसे पके हुए फल की तरह फैलाते हुए अपना मुंह उसके गुलाबी बुर की गुलाबी पत्ती पर दे मारा जैसे ही शुभम की जीभ निर्मला को अपनी बुर की गुलाबी पत्ती पर महसूस हुई उसका बदन अंदर तक सिहर उठा और उसके मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,

ससईईईईईई,,,,,आहहहहहहह ,,,, सुभम,,,,
( फिर क्या था शुभम अपनी मां की गुलाबी बुर पर टूट पड़ा वह उसे मलाई की तरह जीभ से चाटे जा रहा था,,,, शुभम अपनी मां को एकदम मस्त किए जा रहा था लेकिन सिर्फ गुलाबी बुर की गुलाबी पत्ती को चाटना ही उसका मकसद आज बिल्कुल नहीं था आज वह कुछ और करने के मूड में था इसलिए वह अपनी जीभ को थोड़ा सा नीचे की तरफ लेकर आया और अपनी प्यासी जीभ को अपनी मां की गांड की भुरे रंग के छेद पर रख कर उसे गोल-गोल घुमाना शुरू कर दिया,,,,,

आहहहहहहह,,,सहहहहहह,,,,,ऊफफफ,,,,, क्या है यह,,,, गजब,,,,,, अद्भुत,,,,,,ऊहहहहहहह,,,,,( निर्मला अपनी कांड के छोटे से छेद पर अपने बेटे की जीभ की रगड़ को महसूस करते ही उसके मुंह से यह सब बातें अपने आप निकलने लगी,,,, उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसका बेटा जो कि अब तक उसकी गुलाबी बुर को ही चाट कर उसे मस्त करता था आज उसकी गांड के छोटे से छेद को चाट कर उसे सातवें आसमान पर लिए जा रहा है,,,, गजब का एहसास ऐसा स्पर्श उसने आज तक अपने बदन पर किसी कोने पर महसूस नहीं की थी जिस तरह का स्पर्श होते ही आज उसे अपने तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फुटते हुए महसूस हो रही थी,,,, शुभम को साफ महसूस हो रही थी कि उसकी मां की गांड की भूरे रंग के छेद में से मादकता भरी खुशबू आ रही थी और वह खुशबू से एकदम मस्त हुए जा रहा था,, धीरे-धीरे उसे कसेला सवाद एकदम मधुर लगने लगा ,,,वो पागलों की तरह अपनी मां की गांड के छेद में अपनी जीभ के पोर को अंदर तक डालकर उसे चाटना शुरू कर दिया,,,,, आज शुभम को अपनी मां की बुर चाटने से ज्यादा उसकी गांड चाटने में मजा आ रहा था,,,, दोनों मदहोश हुए जा रहे थे निर्मला किसी भी तरह से अपने बेटे को उसकी गांड के छेद को चाटने के लिए मना नहीं कर रही थी,, बल्कि वह उसे और ज्यादा ऊकसाते हुए अपनी गांड को गोल-गोल उसके चेहरे पर घुमा रही थी जिससे उसके तन बदन में और ज्यादा मदहोशी छाने लगी थी निर्मला को अपने बदन में नशा सा महसूस हो रहा था,,,,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूखता चला जा रहा था बार-बार वह अपने थुक से अपने गले को गीला करने की कोशिश कर रही थी वह इतनी ज्यादा मदहोशी के आलम में डुबती चली जा रही थी कि अपने दोनों हाथों से ही अपनी दोनों चूचियों को पकड़ कर खुद ही दबाना शुरू कर दी थी,,
shubham nirmala chuchiyo ka deewana

ससससहहहह,,,,आहहहहहहह,,, सुभम,,, मेरे बेटे यह क्या कर रहा है तू मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि तू मेरी गांड चाट रहा,,, है,,, (गोल गोल गांड घुमाते हुए) सच में तू किसी को भी अपना दीवाना बना ले तो उसमें औरत को खुश करने का हर एक कला है तू अब इस खेल में एकदम पक्का खिलाड़ी हो गया रे,,,( अपनी मां की बात सुनकर सुबह कुछ ज्यादा ही जोश में आकर अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से थोड़ा और ज्यादा फैलाते हुए अपनी जीभ को हल्के से अपनी मां की बड़ी गांड के भूरे रंग के छेद में उतार दिया जिससे निर्मला एकदम सिहर उठी,,) आहहहहहहह,,, मार ही डालेगा क्या रे,,,,( अपनी मां की गरम सिस्कारी और उसकी बातों का जवाब सुभम बिना कुछ बोले अपनी हरकत और अपनी जीभ से दे रहा था,, वो एकदम पागल हुए जा रहा था उसे अपनी मां की गांड चाटने में बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी और उत्तेजना के मारे ऊपर से निर्मला की रसीली कसी हुई बुर पसीजती चली जा रही थी,,, जिसमें से मदन रस धीरे-धीरे बुंद बनकर नीचे टपक रही थी और वह सीधा शुभम के होठों पर गिर रही थी जिसे शुभम अपनी जीभ से चाट कर अपने आनंद को दोगुना कर दे रहा था।,,, वह पागलों की तरह अपनी मां की गांड को चाटते हुए कभी-कभी अपनी मां की गुलाबी बुर पर भी जीभ रखकर ऊसे चाट ले रहा था जिससे निर्मला के बदन में कसमसाहट के साथ-साथ उत्तेजना की लहर दौड़ने लग रही थी,,,,,।
धीरे-धीरे कमरे का दृश्य बेहद उस्मा कारक होता जा रहा,, निर्मला लगातार अपने बड़े बड़े नितंबों को गोल-गोल घुमाते हुए उसे अपने बेटे के मुंह पर रगड़ रही थी,,,, जिस का आनंद लेते हुए शुभम लगातार अपनी मम्मी की गांड को चाटे जा रहा था,,, पूरे घर में निर्मला की गर्म सिसकारी की आवाज गूंज रही थी जिसे सुनने वाला उन दोनों के सिवा तीसरा कोई भी नहीं था,,,, शुभम लगभग 25 मिनट तक अपनी अपनी खूबसूरत मां की मदमस्त गांड से उलझा रहा,,, निर्मला को भी आज अपनी बुरर चटवाने से कहीं ज्यादा अत्यधिक आनंद गांड चटवाने में आ रहा था ,,, निर्मला बराबर अपने बेटे का सहयोग दे रही थी वह डाइनिंग टेबल पर झुक कर अपनी गांड को गोल-गोल घुमाते हुए अपनी दोनों चूचियों से खेल रही थी जो कि बेहद खूबसूरत और किसी पोर्न मूवी की एक्टर से कम नहीं लग रही थी,,,,
Shubham nirmala ki chut chaat ta hua

निर्मला की मदमस्त गांड से आ रही माधव खुशबू शुभम को पूरी तरह से मदहोशी के आलम में लिए जा रही थी,,,, शुभम ठीक अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड के नीचे घुटनों के बल बैठा हुआ था उसकी सांसों की गति बड़ी तीव्र गति से चल रही थी अनहद ऊन्मादक स्थिति में वह अपने आप पर कंट्रोल किए हुए था, वरना जिस तरह से उसकी मां उत्तेजित होकर उसे अपना लंड उसकी बुर में डालने के लिए बोल रही थी शुभम की जगह दूसरा कोई लड़का होता तो कब से उसकी बुर में डालकर पानी छोड़ दिया होता लेकिन यह शुभम था जो कि बड़े ही शिद्दत और धीरे-धीरे संभव है कि हर प्रक्रिया का मजा,, लेता था किस लिए तो तकरीबन 45 मिनट के बाद भी वह संभोग सुख से वंचित अपनी मां को और भी ज्यादा चुदवासा बनाए जा रहा था और खुद अपनी मां के खूबसूरत बदन के हर एक अंग का आनंद लेते हुए उत्तेजनात्माक स्थिति में हर एक पल का मजा ले रहा था,,,
कुछ पल के लिए शुभम अपने जीव को अपनी मां की गांड के भूरे रंग के छेद पर से हटा कर उसे तेज चलती सांसों के साथ अच्छे से देखने लगा, ,,, शुभम अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड के घेराव को देखकर पूरी तरह से प्रसन्नता से भर गया ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी मां की गांड नहीं किसी नई दुनिया को देख रहा है,,,, उसने अब तक न जाने कितनी औरतों की गांड को देख चुका था लेकिन जिस तरह की बनावट उसकी खुद की मां की गांड की थी वैसी गांड उसने आज तक किसी औरत के लिए देखा था इसलिए तो वह अपनी मां की गांड देखते इतना अत्यधिक उत्तेजना से भर जाता था,, उसकी आंखों के सामने मदन रस से भीगी हुई उसकी मां की गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियां जिस पर मदन रस की बूंदे किसी मोती की तरह चमक रही थी वह बिल्कुल साफ नजर आ रही थी,,, साथ ही उसके दो अंगूल नीचे गांड का भुरे रंग का छेद जो कि किसी चॉकलेट के कलर का ही लग रहा था वह ऐसा लग रहा था मानो कि उसे आमंत्रित कर रहा हो,,,, उत्तेजना के मारे शुभम का गला सूख रहा था और निर्मला प्यासी नजरों से शुभम की तरफ आस बांधे देख रही थी,,, शुभम कभी अपनी मां की तरफ देखता तो कभी उसकी गोरी गोरी गांड के गुलाबी छेद और उसके भुरे रंग की छेद की तरफ,,,,, निर्मला की आंखों में अपने बेटे के लंड को अपने बुर में लेने की प्यास साफ नजर आ रही थी,,
अपनी मां की हालत को देखकर शुभम की भी हालत खराब होने लगी उसके भी सब्र का बांध टूटता हुआ नजर आने लगा लेकिन वह इतनी जल्दी टूटने नहीं देना चाहता था इसलिए अपने दोनों हाथों से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को एक बार फिर से थाम लिया,,, और हल्के से उसे एक बार फिर से फैलाने लगा जिससे उसकी गुलाबी बुर्के गुलाबी पत्तियों के साथ-साथ उसके भूरे रंग का छोटा सा छेद भी हल्का सा खुल,, गया,,, जिसे देखते ही उसकी आंखों में चमक आ गई और वह अपने एक उंगली को,, थूक लगाकर धीरे-धीरे उसे अंदर की तरफ डालने लगा जैसे ही निर्मल आप इस बात का आभास हुआ कि उसका बेटा उसकी गांड के छोटे से छेद में उंगली डालना चाहता है वह अपने बदन को आगे की तरफ सिकुड़ने लगी और उसे रोकने की कोशिश करते हुए बोली,,

नहीं नहीं बेटा ऐसा बिल्कुल मत कर मुझे दर्द होता है,,

बस एक बार मम्मी कुछ नहीं होगा बस एक बार अंदर डालने दो उंगली,,,( ऐसा कहते हुए वह दोबारा कोशिश करने लगा लेकिन फिर से उसे निर्मला रोकते हुए, बोली,,)

नहीं सुबह में ऐसा मत कर दो तू जानता है मुझे बहुत दर्द करता,, है,,,

लेकिन कोशिश तो करने दो मम्मी कोशिश करने में क्या जाता है,,,( शुभम अच्छी तरह से जानता था कि अगर वह रुक गया तो उसकी मां कभी भी आगे नहीं बढ़ने देगी इसलिए वह बातों में उलझा ते हुए तुरंत अपनी उंगली के आगे वाले भाग को अपनी मां की गांड के अंदर उतार दिया,, जिससे तुरंत निर्मला के मुंह से हल्की कराह की आवाज निकल गई,,,।)
nirmala ki badi badi gaand jiska shubham hamesha se deewana tha.

आहहहहह,,,, सुभम,,,,ऊमममममम,,,,,नही,,,,,( निर्मला अपनी बड़ी बड़ी गांड को हल्के हल्के इधर-उधर घुमा कर उसकी उंगली निकालने की नाकाम कोशिश करने लगी,, लेकिन आज निर्मला की इच्छा भी ना जाने क्यों गांड से छेड़छाड़ करने की बढ़ती जा रही थी,, क्योंकि जिस तरह से आज वह उसकी मदमस्त गार्ड के छोटे से छेद को चाट कर से मस्त किया था उसे देखते हुए निर्मला को लग रहा था कि सुबह मुझसे कुछ ज्यादा ही मजा देगा लेकिन फिर भी उसके मन में डर बना हुआ था ले इसलिए वह उसे ना नुकुर कर रही थी और अंदर से वह यही चाहती थी कि सुभम ऊससे जबरदस्ती करते हुए उसकी गांड से छेड़छाड़ जारी रखें,, और यही शुभम कर भी रहा था वह अपनी आधे से थोड़ी कम उंगली को अपनी मां की गांड के छेद में डाल चुका था,,)

कुछ नहीं होगा मम्मी बस थोड़ा सा सब्र रखो मैं तुम्हें विश्वास दिलाता हूं कि तुम्हें बहुत मजा आएगा बस मुझे थोड़ी सी मेहनत करने दो,,,( और इतना कहते हुए शुभम अपनी उंगली को थोड़ा और ज्यादा अपनी मां की गांड में डाल दिया देखते ही देखते अपनी मां के कराहने की आवाज सुनकर वह धीरे-धीरे करके अपनी पूरी उंगली को अपनी मां की गांड में डाल दिया,,, और उसकी मां आहह ,,,ऊहहह,,,उई मां करते-करते पूरी उंगली अंदर ले ली,, निर्मला का दिल जोरों से धड़क रहा था दर्द के मारे उसके मुंह से कराहने की आवाज रह-रहकर निकल जा रही थीं लेकिन उसे ना जाने क्यों आनंद भी आ रहा था,,,, उत्तेजना के मारे शुभम का गला सूख रहा था अपनी उंगली को पूरी तरह से अपनी मां की गांड में डाल चुका था और उसके उसी तरह से रहने दिया था वह देखना चाहता था कि उसकी मां अब क्या कहती है लेकिन वह कुछ बोली नहीं,,, जिससे उसकी हिम्मत बढ़ने लगी और वह एक हाथ से अपनी मां की गांड की एक फांक को पकड़कर जोर जोर से दबा दा हुआ अपनी उंगली को अपनी मां की गांड के अंदर बाहर धीरे धीरे करना शुरू कर,,, दीया,,,, थोड़ी ही देर में अपने बेटे की उंगली से ही निर्मला को मजा आने लगा और थोड़ी देर पहले जो कराहने की आवाज उसके मुंह से आ रही थी अब हल्की-हल्की सिसकारी की आवाज आने लगी,,,, अपनी मां की गांड के छोटे से छेद में उंगली को अंदर बाहर करते हुए शुभम को लगने लगा कि अब उसका रास्ता साफ होता नजर आ रहा है,, अब उसके मन की इच्छा पूरी हो जाएगी,,
Shubham nirmala ki gaand Marta hua

शुभम के ऊपर वासना और उत्तेजना पूरी तरह से सवार हो चुकी थी उसका लंड पजामे के अंदर बौखलाया हुआ था वह अपने लिए जगह बनाने की बार-बार कोशिश कर रहा था ऐसा लग रहा था कि मानो कि अभी उसका पैजामा फाड़ कर बाहर आ जाएगा,,,,, निर्मला की गांड के छोटे से खूबसूरत भूरे रंग के खेत में शुभम की उंगली आराम से अंदर बाहर हो रही थी शुभम उसे बार-बार गोल गोल घुमा कर अंदर बाहर करके मजा ले रहा था साथ ही निर्मला भी आनंदित होकर अपने गांड को गोल-गोल घुमा कर ऐसा लग रहा था कि जैसे वह शुभम की उंगलियों पर अपनी गांड को नचा रही थी,,,,, निर्मला पूरी तरह से मदहोशी से ग्रस्त हो चुकी थी,, आनंदमय होकर वह अपनी आंखों को मूंदकर उस पल का मजा ले रही थी,,

ससससहहहह,,,,आहहहह,,,,, शुभम बहुत मजा आ रहा है,,,, ऊफफफ,,,,,,

मैं कहता था ना मम्मी मजा नहीं आए तो बोलना,,,,( ऐसा कहते हुए शुभम अपनी उंगली को अपनी मां की बहन के छोटे से छेद में गोल-गोल घुमाते हुए उसे और ज्यादा आनंदित करने लगा,, निर्मला को ऐसा लग रहा था कि शुभम उसकी गांड में उंगली डालकर गोल-गोल घुमाते हुए उसे आनंद दे रहा है,,, लेकिन शुभम अपने लिए जगह बना रहा था,,, इसलिए तो वह थोड़ी ही देर में अपनी दूसरी उंगली भी धीरे धीरे अंदर की तरफ सरका ने लगा निर्मला को इस बात का आभास हो गया लेकिन वह शुभम को उसकी दूसरी उंगली उसकी गांड में डालने से रोक नहीं पाई,,,,,,,, और निर्मला के मुख से दर्द भरी कराह के साथ-साथ मस्ती भरी सिसकारी निकल गई,,
nirmala ki gaand ka chend challa jesa ho gaya.

ससससहहहह,,,आहहहहह,,,,ओहहहह,,, सुभम,,,,,,,,
तूने यह क्या कर दिया है मुझसे रहा नहीं जा रहा है शुभम,,,
आहहहहहहह,,,,,
(शुभम को अपनी मां की गर्म सिसकारी और भी ज्यादा उकसा रही थी अपनी मां को अत्यधिक आनंद प्रदान करने,, के लिए,,, व्हाट्सएप पर भी अपनी तरफ से पूरी प्रयास कर रहा था अपनी मां को मस्त कर देने के लिए इसलिए तो वह लगातार अपनी दोनों ऊंगलियो को अपनी मां की गांड के छोटे से छेद में गोल-गोल घुमाते हुए उसे अंदर बाहर कर रहा था,, आज उसे अपनी मां की गुलाबी बुर से ज्यादा अपनी मां की गांड का भुरा रंग का छेद मजा दे रहा था,,,,, रह-रहकर शुभम अपनी दोनों उंगलियों को जोर से अपनी मां की गांड के अंदर ठेल देता था वह देखना चाहता था कि उसकी मां उसके लंड के तेज झटकों को अपनी गांड के अंदर सहन कर पाती है कि नहीं लेकिन जब जब वह अपनी उंगली को तेज झटका देकर अंदर की तरफ ठेलता तब तब उसकी मां के मुंह से दर्द भरी आह निकल जाती थी लेकिन इस बारे में उसकी मां ने उससे किसी भी प्रकार की शिकायत नहीं की जिसका मतलब साफ था कि उसे भी तेज धक्कों में मजा ही आ रहा,,,,,,
nirmala shubham k lund par chadhkar maje lete huye


अपने बेटे की संगत और अपनी वासना और शारीरिक जरूरतों को पूरी करने के लिए एक शिक्षिका होने के बावजूद भी निर्मला एकदम गंदी औरतों की तरह ही अपने बेटे के साथ व्यवहार करने लगी थी,,,,, निर्मला शुरू से मोटे तगड़े लंड की प्यासी थी लेकिन अपने संस्कार एक मर्यादाओं की वजह से वह कभी भी खुलकर अपने पति से नहीं कह पाए थे कि उसे जबरदस्त चुदाई की प्यास है लेकिन समय जैसे जैसे गुजरता गया वैसे वैसे निर्मला की जरूरतों की वजह से वह अपने बेटे के प्रति आकर्षित होने लगी और देखते ही देखते दोनों में,,,, शारीरिक संबंध स्थापित हो गया एक बार अपनी मर्यादा की दीवार लांघने के बाद निर्मला कभी भी मुडकर वापस नहीं देख पाई और इस दलदल में फंसती चली गई हालांकि उसे जिंदगी का असली सुख अपने बेटे से प्राप्त होने लगा और शुभम भी इस रिश्ते से बेहद खुश और संतुष्ट था,, इसलिए ऐसी समय भी दोनों बेशर्म होकर अपने घर में डाइनिंग टेबल पर मजे लेते हुए,, आगे बढ़ रहे थे,, इस समय निर्मला संपूर्ण नग्न अवस्था में डाइनिंग टेबल पर झुकी हुई थी और उसकी बड़ी-बड़ी नितंबों के ठीक नीचे उसका बेटा शुभम बैठा हुआ था,,,, और अपनी दोनों उंगलियों की अपनी मां की गांड के छोटे से छेद में डालकर उसे अंदर बाहर करते हुए उसकी गांड मार रहा था,,,,, दोनों की गर्म सांसे वातावरण को और भी ज्यादा उत्तेजक बना रही थी,, पूरे घर में निर्मला की गरम सिसकारियां गुंज रही थी,,।
जिस हालात में निर्मला एकदम नंगी होकर डाइनिंग टेबल पर झुक कर अपने बेटे से मजे ले रही थी इस समय निर्मला सबसे बेशर्म औरत नजर आ रही थी हालांकि औरतों को मजा तभी आता है जब वह शारीरिक संबंध बनाते समय एकदम बेशर्म हो जाती है और वही निर्मला भी कर रही थी बेशर्मी की भी अपनी हद होती है जोकि निर्मला अपनी सारी हदों को पार कर चुकी थी,,

तकरीबन आधे घंटे तक वह अपनी मां की गांड के भूरे रंग के छेद में जुटा रहा सिर्फ और सिर्फ अपनी मां के दर्द को कम करने के लिए ताकि जब उसका लंड उसकी मां की गांड में जाए तो उसे ज्यादा दर्द ना हो और अपनी दोनों ऊंगलियों से अपने लंड के लिए जगह बना रहा था जो कि अब काफी हद तक उसकी गांड का भुरा रंग का छेद कुछ कुछ खुल चुका था,,,, अब समय आ गया था असली खेल खेलने का अब तक तो सिर्फ रियाज किया जा रहा था जिससे उसे आत्मविश्वास जा गया था कि वह अपने काम में जरूर सफल हो पाएगा,, परिश्रम ही सफलता की कुंजी होती है यह बात सार्थक करते हुए शुभम अपनी दोनों उंगलियों को अपनी मां की गांड के भूरे रंग के छेद में से निकाल कर खड़ा हो गया,,,, जैसे ही शुभम अपनी जगह पर खड़ा होगा उसकी मां एकदम लालायित होकर पीछे नजर करके उसे ही देख रही थी और उसकी नजर खास करके उसके पजामे पर टिकी हुई थी जिसमें अच्छा खासा तंबू बना हुआ था शुभम जल्दबाजी दिखाते हुए अपने पजामे को उतारकर एकदम नंगा हो गया,,, और जैसे ही उसके बदन से पहचाना निकल कर फर्श पर गिरा वैसे ही उसका मोटा तगड़ा जबरदस्त दमदार लंड हवा में हिचकोले खाने लगा जिसे देखकर उत्तेजना के मारे निर्मला की रसीली बुर फुलने पीचकने लगी और साथ ही उसके तन बदन में उसे पाने की ललस और ज्यादा बढ़ गई,,,,, निर्मला को लग रहा था कि अब उसकी गुलाबी बुर की खुजली मिटने वाली है लेकिन शुभम के मन में कुछ और चल रहा था तभी तो वह आज उसकी मद मस्त गांड के छोटे से छेद पर इतनी मेहनत किया था,,,,,
निर्मला की आंखों में खुमारी भरने लगी थी दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी क्योंकि शुभम अपने मोटे तगड़े लंड को हाथ में लेकर उसे ऊपर नीचे करके हिला रहा था जो कि इस समय बेहद भयानक लग रहा था,,,, उत्तेजना के मारे शुभम का गला सूखता जा रहा था बार-बार वह थुक से अपने गले को गीले करने की कोशिश कर रहा था,, ,,
शुभम को अपनी मंजिल नजरों के सामने नजर आ रही थी आज उसे अपनी मां की गुलाबी रंग की बुर नहीं बल्कि भुरे रंग का छोटा सा छेद नजर आ रहा था जिसे उसमें आनंद ही आनंद मिलने वाला था,,, शुभम के बदन में कामोत्तेजना अपना असर दिखा रहा था सुभम एक हाथ से अपना लंड थामे हुए था,,,दूसरे से अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पकड़कर उसे जोर जोर से दबा रहा था,,,,,

ससससहहहह,,, क्या मस्त गांड है तेरी,,, इसे देखते ही मुझे नशा होने लगता है अब तो जी भर के मजा, लूंगा,,,,, मेरी रानी ,,,(इतना कहने के साथ ही सुभम अपना लंड धीरे से आगे की तरफ बढ़ाया और अपनी मां रसीली बुर के ऊपर रखकर हल्की-हल्की रगड़ना शुरु कर दिया,,,, जैसे ही निर्मला अपने बेटे के लंड का स्पर्श अपने बुर के ऊपर महसूस की वैसे ही उसके मुख से गर्म संस्कारी फूट पड़ी,,

ससससहहहह,,,,आहहहहह, शुभम डाल दे रे मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,

मुझसे भी कहां रहा जा रहा है मेरी जान तेरी बड़ी बड़ी गांड मेरे होश उड़ा रही है ऐसा लग रहा है कि मुझे कुछ हो गया है चार बोतल का नशा सा होने लगा,,, है,,, तू औरत नहीं है स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा है,,ऊहहहहहहह,,,, मेरी रानी (इतना कहते-कहते शुभम अपनी मां की गुलाबी बुर के ऊपर से अपने लंड को हटाकर अपनी मां की गांड के भूरे रंग के छेद पर सटा दिया,,, और उस जगह पर हल्का सा दबाव बनाया अपने बेटे की इस हरकत को भापकर निर्मला समझ गई कि उसका इरादा क्या है इसलिए,, वह घबरा गई और शुभम अपना एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर उसे ठेलते हुए बोली,,,,

नहीं नहीं ऐसा कुछ मत करना उंगली तक ठीक था अपना लंड मत डालना,,,,,

कुछ नहीं होगा मम्मी मुझपे भरोसा रखो,,, मैं बड़े आराम से तुम्हारी गांड में डालूंगा की तुम्हें पता भी नहीं चलेगा बस देखना इतना मजा आएगा कि पूछो मत,,,

नहीं नहीं बेटा ऐसा मत कर मुझे डर लग रहा है ऊंगली तक ठीक थी,, मुझे डर लग रहा है ऐसा बिल्कुल भी मत कर,,

मम्मी डरो मत बस एक बार ज्यादा कुछ भी नहीं होगा बस मजा ही मजा आएगा( इतना कहते हुए शुभम जबरदस्ती अपनी मां का हाथ उसकी गांड पर से हटाते हुए,, अपने लंड कै सुपाड़े का बक्ष दबाव अपनी मां की गांड पर छोटे से छेद पर बढा दिया,,,, चाट चाट कर सुभम पहले से ही अपनी मां की गांड को एकदम गिला कर दिया था जिससे एक झटके में ही शुभम के लंड का आगे वाला भाग निर्मला की गांड में समा गया,,,,, शुभम इतने मे ही रुक गया,,,, क्योंकि उसको अपनी मां के चेहरे पर आए दर्द की झलक साफ नजर आ रही थी,,, जो कि वह शुभम की तरफ ही देख रही थी,,, दर्द से उसने अपनी आंखों को बंद कर ली थी अपने दांतो को दबा ली थी,,,,, निर्मला की आंखों से साफ पता चल रहा था कि वह अपने बेटे को उसके मोटे तगड़े लंड उसकी गांड के छेद में से निकालने के लिए कह रहे थे लेकिन उसके मुंह से शब्द नहीं पूछ रहे थे उसके मोटे तगड़े लंड को उसकी गांड के छेद में से निकालने के लिए कह रहे थे लेकिन उसके मुंह से शब्द नहीं फुट रहे थे ,,,,


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लेकिन उससे लगा था कि उसका बेटा रुकेगा नहीं इसलिए अपनी गर्दन ना में हिला कर उसे रोकने का इशारा भर कर रही थी जिसे मानते हुए शुभम उसी स्थिति में, रुका रह गया,,, वह अपनी मां के दर्द को समझता था,,, वह अपनी मां को ज्यादा दर्द नहीं देना चाहता था इसलिए स्थिति को समझते हुए अपने लंड की सुपाड़े भर को अपनी मां की गांड के छेद में डालकर रुका रह गया,,,, शुभम यह अनुभव लेते हुए एकदम उत्तेजना से भर गया था जो लंड अब तक उसकी मां की गुलाबी चूत में गदर मचा रहा था,,, अब वह उसकी गांड में हलचल मचाने के लिए पूरी तरह से तैयार था,,,,
स्थिति सामान्य बिल्कुल भी नहीं थी आधी रात का समय हो रहा था और निर्मला संपूर्ण रूप से नंगी होकर डाइनिंग टेबल पर झुकी हुई थी और पीछे से उसका बेटा शुभम अपने मोटे तगड़े लंड का अग्रभाग अपनी मां की गांड के भूरे रंग के छेद में डाल चुका था जिससे उस निर्मला को अत्यधिक पीड़ा का अनुभव हो रहा था,, लेकिन उत्तेजना का अनुभव दोनों के बदन में अत्यधिक मात्रा में महसूस हो रहा था,,,

बस बस मम्मी थोड़ा सा सहन कर लो उसके बाद मजा ही मजा है,,,

लेकिन तेरे इस मजे में तो मेरी जान निकल जाएगी बहुत दर्द हो रहा है रे,,,

मुंह घुस गया है बस पूरा शरीर घुस ना बाकी है यह समझ लो,,,,

मैं अच्छी तरह से जानती हूं बेटा तेरा मुंह कैसा है तेरे लंड का सुपाड़ा इतना मोटा है कि किसी की भी बुर फट जाए और तू तो उसे गांड में डाल दिया है सोच मेरी क्या हालत होती होगी,,

मम्मी समझने की कोशिश करो अगर दर्द ज्यादा होगा तो मजा भी तो उतना ही आएगा,,,( शुभम होले होले से अपनी मां की नंगी पीठ पर दोनों हथेलियां रखकर उसे सहलाते हुए बोला,,, वह ईस तरह से अपनी मां का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा था,,)

मुझसे यह तेरे मोटे तगड़े लंड का वजन मेरी गांड के छेद में सहा नहीं जाएगा तु इसे बाहर निकाल दे (निर्मला अपनी बड़ी बड़ी गांड को बाय-बाय हिलाते हुए उसे बाहर निकालने की कोशिश करते हुए बोली )

कुछ नहीं होगा मम्मी मुझ पर विश्वास रखो मैंने आज तक आपको दर्द दिया है मजा ही दूंगा,,,( इतना कहते हुए शुभम जितना लंड उसकी मां की गांड में घुसा हुआ था उतना ही आगे पीछे करके हल्के हल्के कमर हिलाना शुरू कर दिया,, जो कि इसका आभास निर्मला को अच्छी तरह से हो रहा था लेकिन इतने दर्द के बावजूद भी उसके मन के किसी कोने में उसे अपनी गांड के छेद में पूरा ले लेने की लालसा जागरूक हो रही थी, जो कि इसका आभास निर्मला को अच्छी तरह से हो रहा था लेकिन इतने दर्द के बावजूद भी उसके मन के किसी कोने में उसे अपनी गांड के छेद में पूरा ले लेने की लालसा जागरूक हो रही थी,,, वह उसे अपने ऊपरी मन से रोक रही थी बल्कि अंदर से तो वही चाहती थी कि उसका बेटा पूरा का पूरा लंड उसकी गांड के छोटे से छेद की गहराई मे उतारकर उसे जमकर चोदे और उसे एक नया अनुभव दे,,,, जो की शुभम इस कार्य में कार्यरत था,,,, शुभम के दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी ,,, वह लगातार अपनी मां की पीठ को सहला रहा था और हल्के हल्के अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया, वह लगातार अपनी मां की पीठ को सहला रहा था और हल्के हल्के अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था,,, एक बार फिर से माहौल बनता नजर आ रहा था क्योंकि अब निर्मला की तरफ से किसी भी प्रकार का विरोध होता दिखाई नहीं दे रहा था,,,, शुभम अपनी कमर को हल्के हल्के आगे पीछे करके हिला रहा था उसे इस बात का आभास होने लगा था कि जरा सा धक्का मारने पर उसका आधे से ज्यादा लंड उसकी मां की गांड में समा जाएगा,,,,, निर्मला गहरी गहरी सांसे लेते हुए अपने बेटे की तरफ ही देख रही थी,,, मानो कह रही हो कि अब क्यों रुका है पूरा पेल दे गांड में,,,,
पर ऐसा लग रहा था कि मानो सुभम अपनी मां की मन की बात को सुन रहा हो और अगले ही पल एक जोरदार झटका मारा,,, और उसका आधे से ज्यादा लंड उसकी मां की गांड के छोटे से छेद की गहराई में घुस गया इस बार उसने इतना जोर से धक्का मारा था कि निर्मला की छोटे से छेद को चीरता हुआ शुभम का लंड उसकी गांड की गहराई में घुस गया था,,, निर्मला एकदम दर्द से बिलबिला उठी वह अपने दर्द को दबा नहीं पाई और उसके मुंह से चीख निकल गई लेकिन तुरंत शुभम जैसे कि इसी ताक में था और तुरंत अपने मुंह को झटके के साथ अपनी मां के चेहरे की तरफ ले जाकर अपने होंठ से उसके गुलाबी होठों को दबा लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया ,,,,,, निर्मला की गांड में उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंड आधे से ज्यादा जा चुका था,, और उसे उसकी मां बाहर निकालने के लिए बोल रही थी शुभम अच्छी तरह से जानता था कि बाहर निकालने का मतलब था कि दोबारा प्रवेश नहीं करा पाना,, जोकि बड़ी मुश्किल से शुभम को ऐसा मौका मिला था,,,,, लेकिन औरतों के मामले में बहुत होशियार हो चुका था औरतों को कैसे कब अपने बस में करना है यह उसे अच्छी तरह से आता था,, शुभम लगातार अपनी मां के गुलाबी होंठों को चूसना शुरू कर दिया था,,, जिसमें काफी रस भरा हुआ था और इससे देखते ही देखते निर्मला को अपनी गांड के छोटे से छेद का जबर्दस्त दर्द कम होता महसूस होने लगा क्योंकि बड़ी मस्ती के साथ सुबह में अपनी मां के होंठों को चूस रहा था और साथ ही अपने दोनों हाथों को आगे की तरफ लाकर अपनी मां के दोनों खरबूजे को पकड़कर उसे दबाता हुआ अपनी मां के दर्द को कम करके उसे मस्ती के सागर मे लिए जा रहा था,,,,,,


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शुभम को जैसे ही लगने लगा कि उसकी मां का दर्द कम हो गया है तो वह हल्के हल्के फिर से अपनी कमर आगे पीछे करके अपनी मां की गांड मारना शुरू कर दिया,, थोड़ी ही देर में निर्मला के बदन में मस्ती की लहर छाने लगी,,, क्योंकि अब वह खुद शुभम के होंठों को अपने होंठो के बीच रखकर चूसना शुरू कर दी थी और बड़ी शिद्दत से होठो की चुसाई शुरु कर दी थी,,, निर्मला के नथूनों से निकल रही घर में शोक की लहर शुभम को अपने चेहरे पर महसूस हो रही थी जिससे उसके बदन की गर्मी और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,, आप बड़े आराम से जितना लंड शुभम का उसकी मां की गांड में घुसा हुआ था वह बराबर अंदर बाहर हो रहा था लेकिन उसकी रगड़ निर्मला को अपने अंदर तक महसूस हो रही थी,,,, सुभम बड़े आराम से अपनी कमर हिला तो वह अपनी मां की गांड मार रहा था और निर्मला अपने बेटे के होंठ को चूसते हुए डाइनिंग टेबल पर झुक कर उसकी चुदाई का मजा ले रही थी,,,।,,

कैसा लग रहा है मम्मी सच सच बताना,,,( शुभम अपनी कमर को आगे पीछे हिलाता हुआ बोला वैसे तो उसकी मां को कैसा लग रहा है उसकी गरम सिसकारियां ही बता रही थी लेकिन फिर भी वह उसके मुंह से सुनना चाहता था,,)

बहुत अच्छा लग रहा है बेटा अब दर्द नहीं अब दर्द नहीं अब तो मजा आ रहा अब दर्द नहीं अब तो मजा आ रहा है अब दर्द नहीं अब तो मजा आ रहा है मुझे अब दर्द नहीं अब तो मजा आ रहा है मुझे यकीन नहीं हो,, रहा है की गांड मराने में कितना मजा आता है,,, ससससहहहह,,,, आहहहहहहह,,, शुभम ऐसे ही करते रहे,,,

( अपनी मां की संतुष्टि भरी बातें सुनकर शुभम को यकीन हो गया कि अब वह पल आ चुका है जब वो अपना पूरा लंड़ ऊसकी गांड की गहराई में डालकर उसे अंदर बाहर करके उसकी गांड मारने की शुरुआत करें क्योंकि अब उसकी मां को मजा आ रहा था,, इसलिए आए थे खाना खाओ इस बार शुभम अपने लंड को खींचकर बाहर तक लाया और फिर उसी स्थिति में इतनी जोरदार तेज धक्का मारा कि उसका रिमांड निर्मला की गांड को चीरता हुआ पूरा का पूरा उसकी गहराई में उतर गया निर्मला को ऐसा महसूस हुआ कि कहीं उसका लंड उसकी बुर से बाहर ना जाए,,, लेकिन ऐसा लगता था कि निर्मला पहले से ही अपने बेटे के हर जबरदस्त धक्के के लिए तैयार थी इसीलिए तो इतनी जबर्दस्त प्रहार के बावजूद उसके मुंह से हल्की चीख निकली और वह शांत हो गई,,,,,, शुभम का काम बन चुका था शुभम आज फिर से फतेह हासिल कर लिया था,, अपनी मां के खूबसूरत पहाड़ी रूपी बदन पर आगे से तो वह अपना झंडा गाड़ी दिया था लेकिन आज वह पीछे से बीच चढाई करके फतेह हासिल कर लिया था ,,, अब असली गांड मारने का कार्यक्रम शुरू हुआ था जबर्दस्त प्रहार के साथ शुभम जोर जोर से अपनी मां की गांड मार रहा था उसके धक्के इतनी तेज हो जा रहे थे कि रह-रहकर डाइनिंग टेबल हिल जा रहा था,, जिसमें निर्मला को कोई भी दिक्कत नहीं बल्कि आनंद ही आनंद प्राप्त हो रहा था वह हर धक्के के साथ जोर से चीख पजती थी लेकिन उस चीख के पीछे आनंद की परिभाषा भी छुपी हुई थी,,,,,

ओ मेरी रानी आज तो मजा आ गया मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि आज मैंने तुम्हारी गांड भी मार लिया,, सच पूछो तो शुरु से मेरी यही इच्छा रही थी कि जब बुर चोदने में इतना मजा आता है तो तुम्हारी गांड मारने में कितना मजा आएगा,, और देखो मेरी रानी आज वह पल आ गया जब मैं तुम्हारी गांड मार रहा हूं,,

ऊहहहहहहह,,,,, सच कहूं तो तेरा नंबर देखकर मुझे बहुत डर लगता था कि मेरे छोटे से छेद में कैसे जाएगा लेकिन तू बहुत चालाक हो गया है तू और तो के मामले में इतना ज्यादा अनुभवी हो गया है कि औरतों को कैसे अपने बस में किया जाता है पूरा सीख गया,,, है,, मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि तू मेरे छोटे से छेद में अपना इतना मोटा तगड़ा डंडे डालकर मेरी गांड मार रहा है,,,,,,सहहहहहहह,,,,बेटा,,,,,ऊहहहहहहह,,, ऐसे ही जोर जोर से धक्के लगा बहुत मजा आ रहा है,,,
( निर्मला के नाम से इस तरह की बातें सुनकर शुभम को यकीन हो गया कि उसकी मां को गांड मरवाने में आज बहुत मजा आ रहा है जो कि इस के चेहरे से साफ पता चल रहा,, था,,, उसके चेहरे पर उत्तेजना और वासना का मिलाजुला असर साफ देखने को मिल रहा था उत्तेजना के मारे उसका चेहरा लाल टमाटर की तरह हो गया था,,,, शुभम अपनी मां की कमर को पकड़ कर अपना लंड पेल रहा था,,, देखते ही देखते दीवार मे टंगी घड़ी की सुई एक बजाने का निर्देश करते हुए घंटी की आवाज आने लगी,,,, दोनो के बदन में थकावट का नामोनिशान बिल्कुल भी नजर नहीं आ रहा था दोनों अभी ताजा तंदुरुस्त एक दूसरे को आनंद देने में लगे हुए थे, दोनों के बदन में थकावट का नामोनिशान बिल्कुल भी नजर नहीं आ रहा था दोनों अभी ताजा तंदुरुस्त एक दूसरे को आनंद देने में लगे हुए थे,,,,, लगातार शुभम का मोटा तगड़ा लंड उसकी मां की गांड के छोटे से छेद में अंदर बाहर हो रहा था जिसकी वजह से निर्मला का वह छोटा सा भूरे रंग का छेद अब शुभम के लिंग की मोटाई के सांचे में ढल चुका था और वह छल्ले की तरह नजर आने लगा था,,
तकरीबन 30 मिनट तक शुभम अपनी मां की गांड उसी स्थिति में मारता रहा,, उसकी कमर लगातार किसी उसकी कमर लगातार किसी मशीन की तरह आगे पीछे हो रहा था लेकिन उसे जरा भी दर्द का आभास नहीं हो रहा था बल्कि उसे तो इसमें आनंद ही आनंद प्राप्त हो रहा,,था,,, लेकिन शुभम आज इस पल का इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहता था इसलिए अपनी लंड को उसकी गांड के छेद में से बाहर निकालता हुआ वह गहरी गहरी सांसे लेने लगा,, उसे इस तरह से अपना लंड बाहर निकाल कर खड़े होता देखकर निर्मला उससे बोली,,

क्या हुआ कि तुम बाहर क्यों निकाल लिया इतना मजा आ रहा था थक गया है क्या तू,,,

तुम्हारी चुदाई करते समय मुझे चेहरा भी थकावट नहीं लगती बल्कि मेरे में और जोश और ताकत आ जाती है,,

तो अपना यह लंड (शुभम के खड़े लंड की तरफ उंगली से इशारा करते हुए) इसे क्यों बाहर निकाल दिया,,,,

चिंता मत कर मेरी रानी जिस तरह से तेरी मां का भोसड़ा बनाया उसी तरह तेरी गांड का छेद बड़ा कर दूंगा बस थोड़ा सब्र रख मजा ही मजा आएगा,,( और ऐसा कहते हुए शुभम डायनिंग टेबल पर जाकर पीठ के बल चित लेट गया उसे देखकर निर्मला समझ गई कि उसे क्या करना है लेकिन फिर भी वह अपने बेटे का इशारा पाना चाहती थी इसलिए वह खड़ी रही,,)

अब खड़ी क्या है मेरी जान आकर इस लंड पर बैठ जा अपनी बड़ी बड़ी गांड रखकर मैं भी तो देखूं तेरे में कितना दम है,,,,,( अपनी गर्दन को थोड़ा उठाकर अपने लंड को हाथ से हीलाते हुए अपनी मां की तरफ देखते हूए बोला,, निर्मला अपने बेटे की इस हरकत पर आफरीन हो गई,, क्योंकि आज उसे फिर से एक बार एक नया अनुभव होने वाला था वह काफी उत्साहित नजर आने लगी और कुर्सी पर पांव रखकर वह डाइनिंग टेबल पर चढ गई,,, और देखते ही देखते अपने लिए जगह बनाते हुए एक हाथ से अपने बेटे के खड़े लंड को पकड़ कर धीरे धीरे अपनी बड़ी-बड़ी तरबूज जैसी गांड को अपने बेटे के लंड पर रखकर धीरे-धीरे उसे अपनी गांड के भूरे रंग के छेद में जो कि अब छल्ले जैसा हो गया था धीरे-धीरे उसमे अंदर तक लेना शुरू कर दी,,,,

बस ऐसे ही मेरी रानी,,,, बस ,,,बस ऐसे ही धीरे-धीरे ,,,,अंदर ले धीरे-धीरे,,,, बहुत गजब का ,,,,गजब का ,,,,क्या मस्त औरत है तू,,,,, ऐसे ही पूरा अंदर ले ले,, अरे गजब गजब मेरी रानी तू तो कमाल है,,,
( अपने बेटे के द्वारा दिशा निर्देश पाकर निर्मला धीरे-धीरे अपने बेटे के खड़े लंड को अपनी गांड के छोटे से छेद की गहराई में अंदर तक ले ली देखते ही देखते हैं उसके बेटे का बड़ा लंड उसकी गांड की गहराई में खो गया,,,, अब खेल में और ज्यादा मजा आने वाला था शुभम अपने दोनों हाथ को आगे बढ़ा कर अपनी मां के दोनों खरबूजे जैसी चूचियों को पकड़ कर जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,,,

ससससहहहह,,आहहहहहहह,,,,सुभम,,,,,(निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज फूट रही थी उसे अब मालूम था कि क्या करना है ,,, वह धीरे-धीरे अपनी गांड को ऊपर नीचे करके अपनी बड़ी बड़ी गांड को अपने बेटे को लंड पर पटकना शुरू कर दी,,,, निर्मला का भी मजा दुगुना होता जा रहा था अभी से ऐसा लग रहा था कि जैसे शुभम नहीं बल्कि वह उसे चोद रही है,, नीचे से शुभम अपनी कमर हिला रहा था ओर ऊपर से निर्मला अपना जलवा बिखेर रही थी दोनों को आनंद हीं आनंद आ रहा था,,, फच्च फच्च की आवाज से पूरा घर गुजरने लगा लेकिन निर्मला को इस बात का अहसास था कि उसकी आवाज घर से बाहर जाने वाली नहीं है इसलिए वह जी भर के आज गर्म सिसकारी के साथ जोर जोर से आवाजें निकाल रही थी,,
दोनों का बदन पसीने से तरबतर हो चुका था निर्मला की मोटी मोटी जांघ से उसकी जांघ पर आ रही थी जिसे एक मधुर संगीत पैदा हो रही थी,,,, शुभम लगाकर अपनी मां की दोनों सूचियों को दबाता हुआ नीचे से धक्के पर धक्के लगा रहा था और निर्मला ऊपर से अपनी गांड में अपने बेटे के लंड को पेलते हुए ऊपर नीचे ऊठ बैठ रही थी,,,, दोनों की सांसो की गति बड़ी तेज चल रही थी दोनों को इस बात का अहसास हो गया था कि दोनों झड़ने वाले हैं इसलिए निर्मला नीचे झुककर अपने बेटे को अपनी बाहों में भर कर जोर जोर से अपनी बड़ी बड़ी गांड को उसके लंबे लंड पर पटकना शुरू कर दी,,,,, और अगले ही पल निर्मला के मुंह से तेज चीख की आवाज निकल गई और वह भल भलाकर झड़ने लगी और यही हाल शुभम का भी हुआ,,,, दोनों झड़ते हुए एक दूसरे की बाहों में कुछ देर तक यूं ही डाइनिंग टेबल पर लेटे रहे थोड़ी देर बाद दोनों अपनी सांसो को तेरी फिकर के डाइनिंग टेबल पर से नीचे उतरे,, ,, दोनों आनंद से सराबोर हो चुके थे जो कि उनके चेहरे साफ बयान कर रहे थे,,,,, निर्मला फर्श पर बिखरी अपनी ब्रा और पेंटी उठा ली और उसे पहनने लगी,,, जब निर्मला अपनी गुलाबी रंग की पेंटी को पहन रही थी तो शुभम अपने पजामे को पहनते हुए बोला,,,,

मम्मी आज तो आपकी गुलाबी रंग की पेंटी ने कमाल ही कर दी,,,

क्यों ,,,,?(निर्मला अपनी पेंटी को बराबर पहनते हुए बोली)

क्योंकि आज इसी पेंटी ने तुम्हारी बुर के साथ-साथ तुम्हारी गांड भी दिला दी,,,( शुभम हंसते हुए बोला तभी निर्मला की नजर खिड़की पर से खुले हुए पर्दे पर पड़ी तो वह जल्दी से पर्दे के करीब जाकर पर्दा लगाते हुए बोली।)

अच्छा हुआ कि सरला की नजर अभी नहीं पड़ गई वरना उसे शंका नहीं होता बल्कि वह सब कुछ देख कर पूरी सोसाइटी में हल्ला मचा दी होती,, और सब कुछ बर्बाद हो जाता,,, तु यह सब ध्यान दिया कर,, खिड़की खुली है की नहीं खुली है,,, पर्दे लगे हैं कि नहीं लगे हैं,,,। बस चोदना शुरू कर देता है,,,

अपनी मां की बात सुनकर उसका मन तो हो रहा था कि अपनी मां से बोल दे कि अगर वह अपनी आंखों से सब कुछ देख ही लेती तो किसी से कहें कि नहीं लेकिन ऐसा कहना उचित नहीं था इसलिए बोला कुछ नहीं,, दोनों अपनी-अपनी कमरे में जाकर सो गए क्योंकि उन्हें मालूम था कि अब दूसरे राउंड के लिए वो लोग बिल्कुल तैयार नहीं थी क्योंकि दोनों थक चुके थे,,
 
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