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Raj sharma stories-एक और घरेलू चुदाई

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सरिता की आँखे बंद थी उसके हाथ तेज़ी से उसकी चूत पर चल रहे थे दरअसल वो थोड़ी सी रिलॅक्स मूड मे आ गयी थी घर मे कोई था नही प्रेम भी सोया पड़ा था

पर.............

सरिता को पता नही था कि प्रेम जाग गया था , प्रेम का गर्मी से बुरा हाल हो रहा था

तो उसने सोचा कि नहा ही लेता हू वो कंधे पर तौलिया लटकाए बाथरूम की तरफ चलने

लगा ,सरिता के हाथ तेज़ी से उसकी चूत पर चल रहे थे उसकी मस्त मस्त आहे निकल

रही थी पर उसके सारे अरमानो पर पानी फिर गया जब प्रेम एक दम से

बाथरूम मे आ गया सरिता तो एक दम से हक्की बक्की रह गयी अब क्या करे वो दोनो

मामी भानजे एक दूसरे को आँखे फाडे देख रहे थे

मामी की रसीली जवानी को देख कर प्रेम बावला सा हो गया सरिता के बदन के अंग अंग

से जोबन टूट टूट कर बिखर रहा था प्रेम का लंड फड़फड़ाने लगा हालत की नज़ाकत

को समझते हुए सरिता ने जल्दी से पास मे लटकी अपनी साड़ी को नंगे बदन पर लपेटा

और काँपती सी आवाज़ मे बोली-“जाओ, बाहर जाओ ”

प्रेम बाथरूम से बाहर आ गया पर उसके दिमाग़ मे वो ही मामी का नंगा जिस्म घूम रहा था वो अभी भी बाथरूम के

दरवाजे पर ही खड़ा था , प्रेम को भी चूत मारे आज तीसरा दिन था उस दिन उषा को

चोद ही रहा था कि मामा का फोन आ गया था तो प्रेम के लंड की नसे फूलने पिचकने

लगी उसे चूत की सख़्त ज़रूरत थी पर मामी को सीधे सीधे चोद भी तो नही था

करीब बीस मिनिट बाद सरिता बाथरूम से बाहर निकली उसने बदन पर वो ही पतली सी

साड़ी पहनी हुई थी गीले बदन पर साड़ी चिपकी हुई थी अंदर ब्रा-पैंटी ना होने के

कारण सरिता का पूरा जोबन दिख रहा था नज़रे झुकाए वो प्रेम के पास से निकली और

अपने कमरे मे जाने लगी उसकी 61-62 करती हुई गान्ड पर जब प्रेम की नज़र गयी तो

उसका बदन हवस की गर्मी से पिघलने लगा , उसका लंड चिल्ला चिल्ला करके कह रहा था

कि सरिता को चोद दे, चोद दे सरिता को तो प्रेम भी मामी के पीछे पीछे उसके कमरे मे

चला गया

सरिता की पीठ प्रेम की तरफ थी उसके भरे हुए पिछवाड़े की उठान देख कर प्रेम के

मूह मे पानी आ गया उसने पक्का इरादा कर लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए

मामी को अभी के अभी चोद के ही रहूँगा चाहे ज़बरदस्ती क्यो ना करनी पड़े सरिता इस

बात से अंजान थोड़ा सा झुक कर अपने गीले बालो को सुलझाने लगी थी प्रेम दबे

पाँव आगे को बढ़ा और उसने मामी को अपनी मजबूत बाहों मे भर लिया एक दम से

इस हरकत से सरिता बुरी तरह से चोंक गयी और प्रेम की बाहो से निकलने की कोशिश

करने लगी

सरिता- “छोड़ो, हमें ये क्या बदतमीज़ी है अभी के अभी छोड़ो मुझे ”

प्रेम सरिता के गालो को चूमते हुए-“ओह, मामी कितनी गरम हो तुम मेरा तो बुरा हाल हो गया तुम्हे देख कर बस एक बार दे दो ”

 
अपने भानजे के मूह से अपने बारे मे ऐसी अश्लील बात सुनकर सरिता शरम से पानी

पानी हो गयी और प्रेम को अपने से दूर करने की कोशिश करने लगी पर प्रेम बेहद

ताकतवर हॅटा कटा लड़का था तो सरिता बस कसमसाने के सिवा कर भी क्या सकती थी

इसी कसमकस मे सरिता की साड़ी का पल्लू हट गया ब्रा उसने पहनी नही थी तो कमर

तक का पूरा हिस्सा नंगा हो गया मामी के जिस्म से आती मदमस्त खुश्बू से प्रेम

और गरम होने लगा

“ओह, मामी बस एक बार दे दे, सारी ज़िंदगी तेरी गुलामी करूँगा कितनी मस्त है तू बाथरूम मे उंगली कर रही थी मैं तुझे लंड दे रहा हूँ फिर क्यो नही मानती , एक बार मेरा लंड लेके तो देख ”

सरिता-”छोड़ दे कुत्ते मुझे, कम से कम तेरे मेरे रिश्ते की तो लिहाज़ कर ले माँ समान हूँ मैं तेरी ”

प्रेम- माँ होती तो भी चोद देता , मामी बस एक बार करने दो

प्रेम ने अपने हाथ से जल्दी से बाकी साड़ी को भी खोल दिया सरिता पूरी तरह से नंगी

अपने जवान भानजे की मजबूत बाहों मे किसी मछली की तरह मचल रही थी उसे अपनी

गान्ड पर प्रेम के लोड्‍े की मोजूदगी का पूरा अहसास हो रहा था आज उसकी इज़्ज़त की

धज्जिया उड़ जाने वाली थी ये सोचकर वो रोने लगी , वो बोली” मैं तेरे आगे हाथ जोड़ती

हूँ मुझे छोड़ दे मुझे खराब मत कर ”

प्रेम सरिता की चूचियो को मसल्ते हुए-“ मामी, तुम्हे भी तो लंड की ज़रूरत है वरना बाथरूम मे उंगली से काम नही चलाती, मैं तुम्हे लंड दे रहा हूँ तुम मुझे चूत दो ”

ऐसी अश्लील बाते सुनकर सरिता एक ऑर जहाँ शरम से मरी जा रही थी दूसरी ओर प्रेम

के कठोर हाथो द्वारा उसकी कोमल चूचियो के मर्दन से उसके बदन मे आग भी

लगनी शुरू हो गयी थी सरिता पर दोहरी मार पड़ रही थी , पर एक इज़्ज़त दार औरत

कैसे किसी दूसरे को अपनी चूत दे दे वो भी जब , जब उसके साथ ज़बरदस्ती हो रही हो

प्रेम ने अपने लंड को बाहर निकाल लिया और मामी की गान्ड की दरार मे सरका दिया

गरम लोड्‍े को इस तरह महसूस करके सरिता की चूत उस से बग़ावत करने लगी वो फसि

मंझधार मे एक और वो लगातार विरोध कर रही थी दूसरी ऑर प्रेम का मोटा लंड उसकी

गान्ड मे घुसने को मचल रहा था करे तो क्या करे वो

सरिता की आँखो से आँसू गिर रहे थे और चूत मे भी गीला पन आने लगा था

प्रेम लगातार उसके बोबो को दबा रहा था मसल रहा था उसके 34” के बोबे पूरी

तरह से तन चुके थे पल पल सरिता के जिस्म मे गर्मी बढ़ती जा रही थी उसका

विरोध टूटने लगा था असमंजस मे फसि वो सोच रही थी क्या करे उधर मामी के

बदन मे आई शिथिलता देख कर प्रेम समझ गया कि मामी गरम हो रही है उसने

फुर्ती से सरिता को अपनी ओर घुमाया और उसके लाल लाल होंठो पर अपने होंठ रख दिए

और किस करने लगा साथ ही वो सरिता के दोनो चुतड़ों को मसल्ने लगा सरिता उस

से अपने होंठो को छुड़ाना चाहती थी पर वो ऐसा कर नही पाई

प्रेम ने अपनी प्यारी मामी के चुतड़ों को फैलाया और मज़े से उनको मसल्ने लगा उसका

बेकाबू लंड सरिता के पेट से रगड़ खा रहा था सरिता को उसके लंड की लंबाई-

मोटाई का अंदाज़ा हो चला था उसके मन मे आया कि आज तो उसकी शामत आई अगर ये

लंड उसकी चूत मे चला गया तो चूत तो गयी काम से पर प्रेम उसको चोदे बिना

कहाँ मान ने वाला था कई देर तक वो अपनी मामी के रसीले होटो का मज़ा लूट ता रहा

फिर किस करते करते ही उसने अपनी उंगली सरिता की चूत मे सरका दी , उसकी चूत बहुत

बुरी तरह से तप रही थी सरिता की आह प्रेम के मूह मे ही दम तोड़ गयी

और इसी के साथ एक औरत वासना और इज़्ज़त की जंग मे हार गयी उसकी टांगे अपने आप

खुलती चली गयी सरिता का भी दोष नही था वो बहुत दिनो से चुदि नही थी उसको लंड

की सख़्त ज़रूरत थी प्रेम मामी की चूत मे अपनी उंगली अंदर बाहर करने लगा मोका

देख कर उसने सरिता के हाथ मे अपना लंड दे दिया, सरिता की मुट्ठी लंड पर कस गयी

उसकी आँखे उन्माद मे वैसे ही मस्त थी वो प्रेम की मुट्ठी मारने लगी तो प्रेम को भी

मज़ा आने लगा प्रेम ने सरिता को बिस्तर पर पटक दिया और उसकी टाँगो को फैला दिया

और झट से अपने मूह को चूत पर रख दिया

 


सरिता के ब्याह को करीब करीब 24 बरस होने को थे बेटा ब्याह ने वाली थी वो कुछ दिनो बाद पर आज तक उसके पति ने कभी उसकी चूत नही चाटी थी तो ये उसके लिए एक दम नयी बात थी उपर से प्रेम की जीभ ने तो जैसे जादू ही कर दिया था उसकी चूत पर सरिता की टांगे अपने आप खुलती चली गयी , थूक मे लिपटी जीभ उसकी चूत के दाने से होकर नीचे गान्ड के छेद तक जा रही थी जब जब प्रेम की जीभ उसके दाने से रगड़ खाती तो सरिता का हाल और भी बहाल हो जाता था चुदाई के लिए तड़पति सरिता की हर लाज़-शरम अब दूर होने लगी उसके दिमाग़ मे बस अब चुदाई ही थी , उसे एक लंड की सख़्त ज़रूरत थी

पाँच मिनिट तक प्रेम ने पूरे मज़े से मामी की चूत को चूसा पर वो ये नही चाहता था कि सरिता झड जाए क्योंकि क्या पता झड़ने के बाद वो उसे दे या ना दे तो उसने अब अपने लंड पर काफ़ी सारा थूक लगाया और सरिता की चूत पर लगा दिया पराए लंड को चूत पर महसूस करके ही सरिता थोड़ा सा घबरा गयी उसके अंदर की पॅटिवेर्टया नारी फिर से जागने लगी पर प्रेम ने ज़्यादा मोका दिया नही उसको और एक तेज धक्का लगाते हुए सरित की चूत मे लंड को डालने लगा, हालाँकि सरिता पूरी खेली खाई औरत थी पर फिर भी प्रेम का लंड बहुत लंबा और मोटा था तो जैसे जैसे सरिता की चूत को प्रेम के लंड का सुपाडा फैलाता जा रहा था उसको थोड़ा दर्द होने लगा

“आहह , आहह मार डाला रीईईईईईईईईईई ”

प्रेम- बस हो गया हो गया बस हो गया मामी

प्रेम का मोटा सुपाडा सरिता की चूत मे फँसा हुआ था सरिता की छूट आज से पहले इतनी चौड़ी नही हुई थी तो उसको अपनी सुहागरात का दिन याद आ गया जब प्रेम के मामा ने उसकी सील को तोड़ा था , दर्द के मारे सरिता ने अपने होंठो को आपस मे कस लिया पर फिर भी दर्द भरी आहे, उसके मूह से फुट ही पड़ी, प्रेम ने एक और झटका लगाया और सरिता की आँखो से आँसू निकल पड़े प्रेम का आधा लंड उसकी चूत मे घुस चुका था , सरिता की समझ मे आ गया था कि आज उसकी दमदार चुदाई होने वाली है वो प्रेम की बलिष्ठ बाहो मे कसमसा रही थी

प्रेम ने लंड को टोपे तक बाहर की ओर खेचा और फिर से एक तगड़ा थक्का मारा सरिता को ऐसे लगा जैसे की इस बार लंड सीधा उसकी बच्चेदानी से ही जा टकराया हो, उसका पूरा बदन काँप गया दर्द की लहर उसको छूते हुए चली गयी , प्रेम सरिता के गोरे गालो को चूमने लगा और बोला-“बस मामी,एक बार पूरा अंदर चला जाए फिर तो आपकी मौज ही मौज है ”

ये सुनकर सरिता का माथा घूम गया वो बोली- अभी भी बचा है क्या

प्रेम-हाँ अभी तो बचा है यकीन ना आए तो खुद देख लो

सरिता ने अपनी गर्दन को उचकाया और देखा , अभी भी करीब तीन इंच लंड बाहर ही था उसको यकीन नही था कि वो अब अंदर अंदर ले पाएगी पर चूत तो ठहरी चूत लंड को अंदर ले ही लेती है , सरिता को ख्यालो मे गुम सोच कर प्रेम ने सोचा कि मामी लाइन पर आ गयी है तो शुरू हो जाता हूँ , उसने सरिता के होंठो को चूसना चालू किया ना चाहते हुए भी ज़िस्म की आग के आगे मजबूर सरिता उसका साथ देने लगी प्रेम का लंड इस धक्के के साथ ही पूरी तरह मामी की चूत मे धँस गया था उसके टटटे सरिता की टांगे से जा टकराए तो उसे एहसास हुआ की पूरा लंड ले लिया है उसने

प्रेम का लंड सरिता की चूत मे अंदर बाहर होते हुए उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा था ऐसा परम सुख सरिता को आज से फेहले कभी नही मिला था , मस्ती से उसकी आँखे बंद होने लगी , उसके सोचने समझने की शक्ति पर वासना हावी होने लगी थोड़ी ही देर मे प्रेम के लंड के हिसाब से उसकी चूत फैल गयी थी तो सरिता को भी चुदने मे थोड़ी आसानी होने लगी प्रेम उसके होंठो को चूस रहा था , सरिता के होंठ खुद ब खुद खुलते चले गये, चुदाई के उन्माद मे उसकी गान्ड अपने आप प्रेम के लंड के धक्को का साथ देने लगे , सरिता की जीभ प्रेम की जीभ से टकराने लगी उसकी बाहे प्रेम की पीठ पर रेंगने लगी

प्रेम को बड़ी खुशी हो रही थी कि चलो मामी भी उसका साथ देने लगी है एक चूत का और जुगाड़ हो गया तो वो और तेज़ी से सरिता को चोदने लगा , सरिता प्रेम के नीचे लेटी हुई पिस रही थी उसकी चूत का छल्ला लंड के साथ साथ रगड़ खा रहा था प्रेम के दमदार धक्के उसके पूरे वजूद को हिला रहे थे , धीरे धीरे सरिता की टांगे अपने आप उपर की तरफ उठ ती जा रही थी कमरे मे भावनाए उमड़ उमड़ रही थी मामी- भानजे की एकाएक हुई चुदाई अब अपना रंग दिखा रही थी प्रेम ने चूत से लंड बाहर खीच लिया और सरिता को बिस्तर पर घोड़ी बना दिया

 


सरिता की गीली चूत से बहता हुआ पानी उसकी टाँगो और प्रेम के अंडकोषो को बुरी तरह से भिगो चुका था , खुद सरिता भी हैरान थी की उसकी चूत से इस तरह पानी कभी नही बहा था , वासना से उसका अंग अंग फडक रहा था प्रेम ने उसके चुतड़ों को थोड़ा सा फैलाया और झट से अपने लंड को फिर से मामी की चूत मे डाल दिया , इस प्रहार को सरिता एक दम से सह नही पाई और उसका बॅलेन्स बिगड़ गया पर प्रेम की मजबूत बाहो ने उसको थाम लिया , जैसे जैसे चूत पर झटके पे झटके लग रहे थे सरिता और प्रेम दोनो की मस्ती बढ़ती जा रही थी दोनो के जिस्मो की आग बुरी तरह से भड़क रही थी

प्रेम ने हाथो को आगे बढ़ा कर सरिता की चूचियो को पकड़ लिया और उनको कस कस कर दबाते हुए सरिता को चोदने लगा, सरिता की हालत बहुत बुरी हो गयी थी उसे एक तरफ अपने भानजे से चुदने की ग्लानि भी हो रही थी और दूसरी तरफ एक नये लोड्‍े से चुदने की खुशी सी भी हो रही थी, सरिता की साँस फूलती ही जा रही थी उसकी चूत अब बहुत ही चिकनी हो गयी थी वो पल पल झड़ने के करीब आती जा रही थी , धड़ धाड़ करके प्रेम का लंड उसकी चूत की धज्जिया उड़ा रहा था , और फिर सरिता का पूरा जिस्म काँप उठा और वो बिस्तर पर औंधी गिर गयी उसकी चूत लंड पर बुरी तरह से चिपक गयी थी

रह रह कर सरिता का जिस्म झटके ख़ाता हुआ उसको चरम सुख की प्राप्ति कर वा रहा था सरिता के झड़ने के बाद प्रेम भी उसी मुकाम की तरफ बढ़ रहा था वो अभी भी औंधी पड़ी सरिता को हुमच हुमच कर चोदे जा रहा था सरिता की चूत को चौड़ा करते हुए प्रेम ने भी कुछ मिनिट और उसको अच्छे से बजाया और फिर अपने वीर्य से उसकी गरमा गरम चूत को भरने लगा और मामी पर ही ढह गया …

 
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