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Raj sharma stories-एक और घरेलू चुदाई

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सांझ ढले सौरभ और उषा पैरो को पटकते हुए घर पहुचे उषा ने कहा कान पकड़े अगर आगे से तेरे साथ जाउ तो मैं और घर मे दाखिल हुई

सुधा- आज आने मे बहुत देर हुई

उषा ने सारा किस्सा बताया तो सुधा बोली- हो जाता है कभी कभी उषा अपने रूम मे चली गयी कपड़े चेंज करने के लिए सुधा चाइ बनाने लगी

थोड़ी देर बाद पूरा परिवार चाइ की चुस्किया लेते हुए बाते कर रहा था

सुधा- तो फिर अब खरीदारी भी हो गयी अब शादी मे थोड़े ही दिन बचे है मुझे कई रस्मे करनी होंगी तो मैं थोड़े दिन पहले जाउन्गी उषा तू अपने कॉलेज मे बोल देना करीब 10 दिन की छुट्टिया ले लेना , तू मेरे साथ ही चलेगी

उषा- पर माँ

सुधा- पर वर कुछ नही

सुधा- बेटे तुम भी अपना प्रोग्राम सेट कर लो जो काम निपटाने है वो ख़तम करो तुम्हारे मामा को ये नही लगना चाहिए कि हम शादी मे रूचि नही ले रहे है

प्रेम- जी माँ ,आप फिकर ना करे

सुधा- सौरभ को भी कह देना अपने कपड़े वग़ैरा तैयार करे

प्रेम- माँ पर वो जाएगा तो चाची के पास कॉन रहेगा

सुधा- तब तक तो तुम्हारी चाची चलने लगेगी बस कुछ ही दिनो की तो बात है अगर सब ठीक रहा तो वो भी हमारे साथ ही चलेगी , अब काम की बात आज से रात की लाइट का नंबर हैं तो तुम आज खेतो मे पानी देना

प्रेम अब रात को उषा को चोदने के चक्कर मे था तो वो बोला- माँ, मेरी तबीयत कुछ ठीक नही है सुबह से बदन और सर मे दर्द हो रहा हैं औ फिर मैं पानी मे रहा तो कही बीमार ना हो जाउ

सुधा- पर बेटे पानी देना भी तो ज़रूरी है ना खेत कई दिन से सूखे पड़े है नयी सब्ज़िया लगानी है तुम्हे तो पता ही हैं कि अपना गुज़रा तो खेती से ही होता है

प्रेम- माँ मैं सच्ची मे थोड़ा सा परेशान हूँ वरना मैं कभी मना करता हूँ क्या

सुधा- ठीक है बेटे , मैं ही चली जाउन्गी खेत पर अब किसी ना किसी को तो काम करना ही पड़ेगा ना

प्रेम- माँ , सौरभ को ले जाओ वो मदद कर देगा वैसे भी आजकल वो कामचोर हो गया हैं

सुधा ये सुनते ही थोड़ी सी रोमांचित सी हो गयी उसने कहा – ठीक है , मैं उसको बोल देती हूँ हसरते जवान हो रही थी सब अपना अपना जुगाड़ करने मे लगे हुए थे अपनी अपनी ख्वाहिशे सबको चूत की ज़रूरत रात आज फिर से रंगीन होने वाली थी

बापू को घर आया देख कर सौरभ का दिमाग़ बुरी तरह से हिल गया उसने सोचा कि यार अब बापू घर है तो फिर ताईजी सोने आएँगी नही बात कुछ आगे बढ़ नही पाएगी पर उसको क्या पता था कि किस्मत कुछ ज़्यादा ही मेहरबान हो रही है उसपर आजकल, घर का काम समेटने के बाद सुधा ने टॉर्च ली और सौरभ के घर पहुच गयी

सुधा- सौरभ, बेटे क्या कर रहा है

सौरभ- ताईजी कुछ नही

सुधा- बेटे, आज तुझे मेरे साथ खेत पर पानी देने चलना पड़ेगा प्रेम की तबीयत थोड़ी खराब हैं तो तुझे ही मदद करनी पड़ेगी

सौरभ ये सुनकर मन ही मन खुश हो गया और जल्दी से तैयार हो गया दोनो ताई बेटे खेतो के रास्ते से होते हुए कुँए की तरफ चले जा रहे थे दोनो के मन मे अपने अपने विचार घूमड़ रहे थे सौरभ सोच रहा था आज तगड़ा मोका है चूत मारने का क्या फिर इधर किसी का डर भी नही रहेगा और कोई रोक टोक भी नही है उधर सुधा सोच रही थी कि क्या सच मे प्रेम की तबीयत खराब है लग तो बिल्कुल भला चंगा रहा था आजकल इस लड़के की हरकते बड़ी अजीब सी होती जा रही है करना पड़ेगा इसका कुछ

सुधा की बलखाती गान्ड मटक रही थी चारो तरफ अंधेरा था सौरभ बार बार टॉर्च की लाइट सुधा की गान्ड पर मारता सुधा अब कोई नोसिखिया तो थी नही वो सब समझ रही थी उसके होंठो पर मंद मंद मुस्कान आ गयी उसके पाँवो मे खनकती पायल की आवाज़ सॉफ सुनी जा सकती थी सौरभ तो जैसे आज आसमान मे उड़ने को हो रहा था

 


हवा मे खामोशी छाई हुई थी पर कही ना कही अरमान सुलग रहे थे कुँए पर पहुचते ही सुधा ने सौरभ को समझाया कि खेत के कॉन से हिस्से मे पानी छोड़ना है उसने मोटर चला दी सुधा ने सोचा कि कही साड़ी खराब ना हो जाए वैसे भी रात का वक़्त है कॉन आएगा अब उसने साड़ी को उतार कर रख दिया और बस ब्लाउज और पेटिकोट मे ही सौरभ के पास चली गयी अपनी ताई को इस सेक्सी रूप मे देख कर उसका लंड एक झटके मे ही खड़ा होकर सलामी देने लगा

करीब घंटे भर तक सुधा के मस्ताने रूप को निहारते हुए सौरभ उसकी मदद करता रहा सुधा ने कहा- बस बेटा इतना बहुत रहेगा एक बार ज़मीन की प्यास मिट जाए फिर सब्ज़ी की बुवाई कर देंगे

सौरभ- जी जैसा आप ठीक समझे

सुधा पलटी और कुँए की तरफ चलने लगी उसकी 61-62 करती गान्ड को देख कर सौरभ से बिल्कुल कंट्रोल नही हो रहा था उसने अपने लंड को मसला और सुधा के पीछे पीछे चल पड़ा सुधा कुछ दूर ही गयी थी कि खेत के कीचड़ मे उसका बॅलेन्स थोड़ा सा डगमगा गया उसने फिसलने से बचने की पूरी कोशिश की पर फिर भी गिर ही गयी उसका पूरा पेटिकोट और ब्लाउज कीचड़ मे खराब हो गया

हाई रे किस्मत कहते हुए वो उठी वहाँ से

तबतक सौरभ भी पहुच गया और पूछा-क्या हुआ ताई जी

सुधा- बेटे पैर फिसल गया मेरा पता नही क्या बात है आजकल फिसलन बहुत होने लगी है उस दिन कपड़े धोते टाइम भी मैं फिसल गयी थी और आज भी ,

सोरभ को झट से वो दिन याद आ गया कि कैसे फिसलने के बाद वो और ताईजी साथ साथ नहाए थे और फिर वो सब हुआ था

वो चेहरे पर शरारती मुस्कान लाते हुए बोला कि – कोई बात नही ताई जी इन कपड़ो को धोकर सूखा दो सुबह तक रेडी हो जाएँगे

सुधा हाँ पर फिर पहनुँगी क्या

सौरभ- ताईजी मुझ से कैसी शरम मैं तो पहले भी आपको उस हाल मे देख चुका हूँ बड़ी बेशर्मी से उसने ये बात कही

सुधा के गाल लाल हो गये वो मुस्कुराइ और बोली- बड़े शैतान हो गये हो तुम आजकल अपनी ताई को नंगी देखना अच्छा लगता है क्या तुम्हे

सौरभ- ताईजी अब आप इतने सुंदर हो कि रुका भी तो नही जाता मुझसे

सुधा- इतनी अच्छी लगने लगी हूँ क्या मैं तुझे

सौरभ झेंप गया फिर दोनो कुँए पर आ गये सुधा की चूत मे सरसराहट होने लगी थी , उसने सोचा कि सौरभ के फिर से मज़े लेती हूँ कुँए पर एक बल्ब जल रहा था तो उसकी रोशनी फैली थी , सुधा ने अपने ब्लाउज को खोल दिया उसकी 38इंच की हेडलाइट्स को देख कर सौरभ के मूह मे पानी आ गया उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी सुधा ने धीरे से अपनी ब्रा को भी खोल दिया और साइड मे रख दिया

फिर उसने पूछा- ऐसे क्या देख रहा है टुकुर टुकुर

सौरभ- ताईजी वो वो

सुधा- वो क्या

सौरभ- आपके बोबे इतने बड़े बड़े कैसे है

सुधा- बेटा बहुत दिनो से किसी ने इनका दूध जो नही पिया है तो बस वो दूध ही इकट्ठा हो गया है

सुधा ने अपने पेटिकोट की डोरी को खीचा और अगले ही पल वो उसके पैरो मे पड़ा था टाई जी को ऐसे नंगे देख कर सौरभ के दिमाग़ के सारे फ्यूज़ उड़ गये अब उसका खुद से कंट्रोल ख़तम हो गया उसके दिमाग़ मे बस एक ही बात थी कि ताई जी की चूत आज मारनी ही है बस कुछ भी करके सुधा ने अपनी गान्ड सौरभ की तरफ कर ली और कपड़े धोने लगी सुधा के सुडौल चुतड़ों के कसाव को देख कर सौरभ की आँखे वासना से लाल होने लगी

 


अब उसके लिए रुकना तो मुश्किल हो रहा था पर वो थोड़ा इंतजार करने का सोच रहा था क्योंकि सुधा कपड़े धो रही थी सुधा जल्दी ही फारिग हो गयी और नंगी ही चलती सौरभ के पास आई और बोली बस कर बेटा- टाई को कब तक नज़रो से घूरेगा

सौरभ – आप की खूबसूरती को निहरना मेरे लिए सोभाग्य की बात है

सुधा- हाँ पर तुम्हारे ज़ज्बात तो कुछ और ही कह रहे है कहते हुए सुधा ने सौरभ के खड़े लंड की ओर इशारा किया जो पॅंट मे तंबू बनाए हुए था

सौरभ ने कहा – जो हाल है सब आपके कारण ही है तो सुधा बोली- चल बेटा सो जाते है और अपनी गान्ड को मटकाते हुए छप्पर मे आ गये वहाँ पर एक ही खाट थी तो दोनो उस पर लेट गये , सौरभ आज किसी तरह से इस मोके को नही जाने देना चाहता था वो उसने अपने लंड का आज़ाद कर दिया और सुधा से बिल्कुल चिपक गया सुधा अपनी गान्ड पर लंड को महसूस करते हुए बोली बेटा ये क्या नुकीली चीज़ मुझे चुभ रही है

सौरभ- मुझे क्या पता खुद ही देख लो

सुधा अपना हाथ पीछे किया और उसके लंड को पकड़ लिया ताई के हाथ की गर्मी पाते ही सौरभ का सबर टूट गया उसने सुधा को अपनी बाहों मे भर लिया और उसके रसीले होंठो को चूसने लगा सुधा ने भी अपना मूह खोल दिया और अपनी मुट्ठी उसके लंड पर कस दी

सुधा ने अपनी उंगलिया सौरभ के लंड के इर्द गिर्द लपेट ली

और उसको बुरी तरह से अपनी मुट्ठी मे भर कर दबाने लगी

ताईजी की इस हरकत से सौरभ और उत्तेजित होने लगा उसे

सुधा के बड़े बड़े खरबूजो को कस कर दबाना चालू किया तो

सुधा चाह कर भी अपनी आह को रोक ना सकी

ताईजी की सिसकारियो को सुनकर सौरभ के होंटो पर एक मुस्कान

आ गयी उसको यकीन था कि आज वो ताईजी के हुस्न के समुंदर

मे बेपनाह गोते लगाने मे कामयाब हो जाएगा सुधा के अंगूर

के दाने जीतने मोटे मोटे निप्पल्स को अपनी उंगलियों मे फसा कर वो

सुधा को दर्द भरा मज़ा दे रहा था दोनो जने अब खुल के एक

दूसरे के मादक अंगो से छेड़खानी कर रहे थे ना किसी की रोक

टोक ना किसी का डर,

सुधा किसी मछली की तरह सौरभ के आगोश से बाहर निकल

गयी और अपने आप को उसकी टाँगो के बीच मे झुका लिया

सौरभ का लंड हवा मे इधर उधर झूल रहा था सुधा ने

अपने रसीले होंठो पर जीभ फेर कर उनको थूक से गीला किया

और फिर सौरभ के सुपाडे की खाल को हाथो की सहयता से

नीचे को सरका दिया सुधा ने अपनी सप्निली जीभ बाहर

निकली और थूक से लबरेज जीभ को लंड के सुपाडे पर

घूमने लगी लिजलीज़ी जीभ की गर्माहट से सौरभ के लंड की

नसे पिघलने लगी सुधा ने किसी कुलफी की तरह से सौरभ के

लंड को चूसना शुरू कर दिया

 


और साथ ही अपने हाथ से उसके दोनो अंडकोषो को दबाने लगी

सौरभ मस्ती मे बुरी तरह से डूब चुका था उसने बस अपने

हाथ सुधा के सर पर रख दिए और सर को हल्का सा दबा दिया

ये सुधा के लिए इशारा था कि चूसो मेरा लंड सुधा की

चूत का गीलापन इतना बढ़ गया था कि उसकी दोनो जांघे

चूत के पानी से चिपचिपी हो गयी थी उसकी निगोडी चूत

पिछले कुछ दिनो से बहुत ही ज़्यादा रस छोड़ रही थी लंड

चूसते चूस्ते सुधा बार बार अपनी जाँघो को आपस मे रगड़

रही थी ताकि चूत को दबा कर वो उसकी गर्मी को कुछ कम

कर सके पर ये चूत की आग जितना वो कोशिश करे उतनी ही

उसकी चूत और गरम होती जाती

सुधा ने अब सौरभ का आधा लंड अपने मूह मे ले लिया था

उसके होटो से थूक बहकर सौरभ के लंड को चिकना कर रहा था

"ओह, ताईजी आप सच मे बहुत मस्त हो "सौरभ के मूह से

निकल गया सुधा और तेज़ी से उसके लंड को चूसने लगी जैसे

कि इसके बाद उसे लंड चूसने का फिर कभी मोका नही मिलने

वाला सौरभ के लंड की नसे फूलने पिचकने लगी थी अब

लबभग पूरा ही लंड सुधा ने अपने गले की गहराइयो मे उतार

लिया था सौरभ की टाँगे काँपने लगी थी सुधा एक बहुत ही

अनुभवी औरत थी और सौरभ उसके आगे किसी नोसखिए से

कम नही था

पर वो नही चाहता था कि वो सुधा के मूह मे ही झड जाए

उसको तो चूत मारनी थी हर हाल मे आज उसको पूरा मोका मिला

था जब सुधा जैसा गरम माल उसकी बाहों मे था पूरी रात के

लिए तो उसने अपने लंड को सुधा के मूह से बाहर निकाल लिया

और सुधा को पास की दीवार से सटा दिया और अपने मूह को

सुधा के दूध से भरे बोबो पर लगा दिया सुधा की 40इंच की

पहाड़ की चोटियो सी लहराती चूचियो मे सौरभ का चेहरा

गुम होने लगा

वो बारी बारी से ताईजी के दोनो बोबो पर अपने होटो से चुसाइ

करने लगा सुदाह के बदन मे मस्ती की उमंग छाने लगी थी

हौले हौले से वो आहे भरने लगी थी और फिर सौरभ ने

गजब ही कर दिया चूचियो से खेलते खेलते उसने सुधा की

फूली हुई चूत को अपनी मुट्ठी मे भर लिया और कस कस्के

उसको भीचने लगा सुधा तो जैसे पागल ही हो गयी थी आज

दोनो ताई बेटा हमबिस्तर होने के लिए पूरी तारह से तैयार थे

आज उनके बीच की हर दूरिया मिट जाने वाली थी सौरभ ने अब

अपने होंटो को ताई के गरम रसीले होटो से जोड़ दिया सौधा ने

धीरे से अपनी जीभ सौरभ के मूह मे फसा दी जिसे वो आराम

से चूसने लगा उसने अपने हाथो से सुधा की चूत की

पंखुड़ियो को फैलाया और अपनी बीच वाली उंगली सुधा की मस्त

चूत मे सरका दी सुधा ने अपनी टाँगो को भीच लिया और अपनी

उंगलियो को सौरभ की पीठ पर घिसने लगी सौरभ धीरे

धीरे से उसकी चूत मे उंगली करने लगा सुधा ने सौरभ के

निचले होंठ को अपने मुँह मे भर लिया और चूसने लगी

सुधा ने भी सौरभ के लंड को पकड़ लिया और अपनी चूत के

छेद पर उसको अब रगड़ने लगी चूत का स्पर्श पाते ही सौरभ

का हाल बुरा हो गया पर वो खुश भी था कि बस अब थोड़ी देर

मे वो भी चूत मारने के अपन सपने को पूरा कर ही लेगा लंड

और चूत दोनो काफ़ी चिकने हो गये थे सौरभ से अब बस

कंट्रोल नही हो रहा था उसने अब लंड को चूत पर सेट किया

और धक्का मारने ही वाला था कि तभी बाहर से किसी ने आवाज़

लगाई और दरवाजा खड़खड़ा दिया

 


बाहर से किवाड़ पीटने की आवाज़ आते ही दोनो की चुदाई की खुमारी पल भर मे ही गायब हो गयी दोनो की गान्ड बुरी तरह से फट गयी सुधा ने भाग कर अपनी साड़ी को जल्दी से अपने बदन पर लपेटा सौरभ साइड वाली खाट पर जाकर ऐसे पसर गया जैसे कि गहरी बेहोशी मे पड़ा हो बाहर से माँ माँ की आवाज़ आई तो सुधा समझ गयी कि प्रेम है पर उसके मन मे एक आशंका ने जनम ले लिया कि ये इतनी रात को यहाँ क्या करने आया है कही कोई बुरी खबर तो नही उसका दिल बुरी तरह से धड़कने लगा

सुधा ने दरवाजा खोला तो प्रेम बदहवासी मे बोला-“माँ, अभी के अभी आपको घर चलना होगा ”

सुधा हान्फते हुए- बêते क्या हुआ पहले पूरी बात बता मुझे सब ठीक तो हैं ना

प्रेम- माँ, वो मामा का फोन आया था नानाजी का आक्सिडेंट हो गया है किसी रिश्तेदार से मिल कर आ रहे थे गाड़ी को बस ने टक्कर मार दी तुम जल्दी से घर चलो हमें अभी चलना होगा

सुधा का मन बुरी तरह से बैठ गया अपने पिता के आक्सिडेंट की खबर से उसकी आँखो मे आँसू आ गये वो रोने लगी तब तक पूरा माजरा समझ कर सौरभ भी उठ गया था प्रेम ने माँ को चुप करवाया और फिर सब लोग जल्दी से घर पर आ गये उषा पहले से ही जागी हुई थी प्रेम ने घर आते ही सुधा को तसल्ली से पूरी बात बताई रात आधी से उपर हो गयी थी अब जाए कैसे तो सौरभ बोला मेरा एक दोस्त है मैं उसकी गाड़ी ले आउन्गा तब तक आप लोग तैयार हो जाओ

सुधा ने तिजोरी से कुछ रुपये निकले और कुछ कपड़े भी रख लिए सुधा ने उषा को कुछ ज़रूरी बाते बताई जवान बेटी को वो अकेले नही छोड़ना चाहती थी इतने मे सौरभ आ गया तो सुधा ने कहा कि मैं और प्रेम चले जाते है सौरभ घर संभाल लेगा एक आदमी तो चाहिए ना घर पर कोई बात होगी तो मैं तुम लोगो को बुलवा लूँगी प्रेम सुधा के साथ ही रहना चाहता था पर अब बात मजबूरी की थी तो वो मान गया प्रेम और सुधा उसी टाइम निकल लिए कहा तो सुधा थोड़ी देर पहले एक जवान लंड को चूत मे लेने वाली थी और कहाँ अब ये मनहूस खबर आ गयी थी

करीब तीन-चार घंटे का सफ़र करके सुधा और प्रेम मामा के सहर के हॉस्पिटल मे पहुँचे सुधा की रुलाई छूट पड़ी घरवालों ने जैसे तैसे करके उसको संभाला मामा ने प्रेम को बताया कि किस्मत ही थी कि जान बच गयी सर मे वैसे तो काफ़ी चोट लगी है पैर भी टूट गया है पर जान बच गयी है वो ही बहुत है

बाकी बचा टाइम बस बेचैनी मे कटा सबको नाना के होश मे आने का इंतज़ार था घर मे करीब 15 दिन बाद शादी थी, तो सबका मूड थोड़ा सा खराब सा हो गया था पर किस्मत से कॉन लड़ पाया है सुधा का अपने मायके मे बहुत मान-सम्मान था बाप के आक्सिडेंट से वो बहुत ज़्यादा विचलित हो गयी थी

इधर प्रेम और सुधा के जाने के बाद घर पर सौरभ और उषा बचे थे , सौरभ के हाथ से ताईजी को चोदने का मोका चला गया था तो उसका दिमाग़ भन्ना गया था थोड़ी देर बाद उषा ने कहा भाई मुझे नींद आ रही है मैं सोने जा रही हूँ तुम भी सो जाओ

सौरभ- दीदी मुझे अकेले मे डर लगेगा

उषा- इतने बड़े हो गये हो फिर भी डर लगता है

सौरभ- दीदी मेरे मज़ाक उड़ा रही हो

उषा- कोई बात नही मेरे भाई, आ जाओ मेरे कमरे मे ही सो जाओ

सौरभ ये सुनकर बहुत खुश हो गया उषा बाथरूम मे गयी और एक ढीली सी मॅक्सी पहन कर आ गयी उसने लाइट बंद की और दोनो भाई बहन बेड पर सो गये , मामा के फोन ने सबकी ऐसी तैसी कर दी थी दरअसल जब फोन आया तो उषा प्रेम के लंड पर कूद रही थी उसकी चूत से काम रस झर झर कर बह रहा था चुदाई के बीच मे रुक जाने से उसका मूड ऑफ हो गया था पर अब बिस्तर पर लेट ते ही उसकी चूत मे फिर से खुजली होने लगी थी कुछ ऐसा ही हाल सौरभ का भी था वो भी धीरे धीरे अपने लंड को सहला कर समझा रहा था

 


बिस्तर के दोनो कोनो पर दोनो भाई बहन अपनी अपनी आग को शांत करने का उपाय कर रहे थे थके बदन तो नींद तो आनी ही थी नींद मे सौरभ सरक कर उषा के बिल्कुल पास पहुच गया और उसने अपना एक पाँव उषा की टाँगो पर रख दिया नींद मे उसका लंड वैसे ही खड़ा था , अपनी गान्ड पर लंड को चुभने से उषा भी जाग गयी अब वो खेली खाई लड़की उसे पल भर मे ही पता चल गया कि सौरभ का लंड उसकी गान्ड पे कलाकारी कर रहा है

लंड का ख्याल आते ही उसकी चूत बुरी तरह से गीली हो गयी अच्छा बुरा सब भूलने लगी वो वो सोचने लगी कि सौरभ जाग रहा है या नींद मे है कन्फर्म करने के लिए उसने धीरे से सौरभ के पैर को अपने उपर से हटाया सौरभ सीधा होकर सो गया उषा की चूत की गर्मी बहुत बढ़ गयी थी उसने सोचा नींद मे है इसको क्या पता चलेगा और पता चले तो चले , उसने छोटे भाई का हाथ धीरे से अपने चुचो पर रखा और दबाने लगी आहह उसके मूह से धीरे से आवाज़ निकली उषा एक हाथ से सौरभ से चुचे भींचवाने लगी और दूसरे हाथ से अपनी चूत के दाने को सहलाने लगी

कामवासना मे अंधी उषा अपने एक भाई से तो चुद ही चुकी थी अब दूसरे से और ज़ोर आज़माइश करने लगी थी चूत मे उंगली करने से उसको जोश चढ़ रहा था जिस से सौरभ की नींद खुल गयी और उसको जल्दी ही माजरा समझ मे आ गया पर वो दीदी को शर्मिंदा नही करना चाहता था तो वैसे ही लेटा रहा पर वो अपने पे काबू नही रख पाया उसने भी जोश मे दीदी के बोबे को कस कर दबा दिया उषा को झटका सा लगा वो समझ गयी कि भाई जागा हुआ है वो तुरंत साइड मे हुई और सोने की आक्टिंग करने लगी

सुबह जल्दी ही उषा कॉलेज के लिए निकल गयी थी सौरभ भी मछलियो की देखभाल के लिए तालाब पर चला गया था विनीता का पति थोड़ी देर पहले ही नये काम के लिए निकला था विनीता अकेले घर बोर हो रही थी घर पर कोई भी नही था , सुधा और प्रेम तो मामा के चले गये थे, विनीता लकड़ी के सहारे नीचे आई तो उसे सौरभ का कमरा खुला दिखाई दिया तो वहाँ चली गयी

“ये लड़का भी ना, कितना बुरा हाल कर रखा है इसने कमरे का” विनीता ने कहा , और इधर उधर पड़ी चीज़ो को सही तरीके से रखने लगी, जब वो पलंग की चादर को सही कर रही थी तो उसको तकिये के नीचे से दो किताबे मिली जिन्हे देखते ही विनीता की आँखे अविष्वाश और कामुकता से चमकने लगी, सौरभ तकिये के नीचे जो किताबें रख कर भूल आया था उनमे से एक किताब अश्लील चित्रो वाली थी जिसमे औरते अलग अलग मुद्राव मे चुद रही थी लंड चूस रही थी चूत चटवा रही थी, उस किताब के चित्रो को देखते हुए विनीता की चूत मे बड़ी तेज खुजली होने लगी उसके होंठ सूखने लगे थे

फिर उसने दूसरी किताब को देखा और जैसे जैसे वो अपंनो को पलटने लगी उसकी चूत की चिकनाहट बढ़ने लगी थी, दरअसल वो पूरी किताब माँ बेटे की चुदाई की कहानियो से भरी पड़ी थी विनीता की साँसे माँ बेटे की चुदाई पढ़ते हुए भारी होने लगी , फिर वो वही पलंग पर बैठ गयी और सोचने लगी , “हो ना हो ये किताबें लाया तो सौरभ ही होगा ”

विनीता ने पिछले कुछ दिनो मे महसूस तो कर लिया था कि बेटा अब जवान हो रहा है और उसका हथियार भी ठीक है पर क्या वो भी ये कहानियाँ पढ़कर अपनी माँ को चोदना चाहता है, नही मेरा बेटा कभी मेरे बारे मे ऐसे नही सोचेगा विनीता सौरभ के बारे मे सोचते हुए अपनी चूत को सहला रही थी उसके मन मे अजीब अजीब से विचार आ रहे थे, वो बहुत गरम हो रही थी पर अभी कोई जुगाड़ नही था उसके पास वो करे तो क्या करे, विनीता उधर ही लेट गयी और उसकी आँख लग गयी

 


उधर हॉस्पिटल मे प्रेम बहुत बुरी तरह से थक गया था उसको नींद आ रही थी उसके हाल को समझ कर मामा ने कहा कि प्रेम बेटा तुम अपनी मामी के साथ घर जाओ तुम सब तक गये हो मैं इधर रुकता हूँ , तुम्हारे भाई को शाम को बेजूंगा खाना लेने के लिए तुम कल आ जाना अब शादी का घर है तो घर बिखरा पड़ा है तो उधर भी संभालना ज़रूरी है , मामा ने सुधा को भी घर जाने को कहा पर वो अपने पिता के पास ही रहना चाहती थी तो उसने मना कर दिया

प्रेम अपनी मामी सरिता के साथ घर की तरफ चल पड़ा , हॉस्पिटल से वो बस स्टॅंड आए और बस का इंतज़ार करने लगे , सरिता भी उमर के चालिसवे फेर मे चल रही थी और शरीर , सुंदरता से किसी प्रकार से भी कम नही थी, हाँ पर उसका फिगर थोड़ा सा पतला सा था, पर छातिया मजबूत थी और गान्ड भी गोल मटोल पूरे बदन पर फालतू चर्बी का कोई नामो-निशान नही था, जो कोई उसे अगर पहली बार देखे तो अंदाज़ा भी ना लगा सके कि थोड़े दिन बात इसके बेटे की शादी है प्रेम अपनी मामी से बाते करता हुआ बस के आने का इंतज़ार कर रहा था

सरिता ने एक हल्के नारंगी रंग का सूट- सलवार पहना हुआ था जिसमे उसकी सुंदरता निखर रही थी हालाँकि घर के बुज्रुर्ग के आक्सिडेंट्स से सभी डिस्टर्ब हो गये थे , करीब दस मिनिट तक बस आई, जो कि पूरी तरह से भरी हुई थी पैर रखने को जगह नही थी पर जाना तो था ही दूसरी बस ना जाने कब आए तो जैसे तैसे करके दोनो उपर चढ़े , भीड़ मे बहुत मुश्किल हो रही थी दोनो को जगह बनाने मे सरिता जो कि प्रेम से आगे खड़ी थी , बस ने जो हिचकोला खाया तो उसका बॅलेन्स बिगड़ा प्रेम ने उसको अपनी बाहों मे थाम लिया

पर इस कोशिश मे प्रेम अब बिल्कुल उसके पीछे चिपक गया उपर से भीड़ का दवाब जहाँ पैर रखने को भी जगह नही अब वो अपनी मामी की गान्ड से चिपका हुआ खड़ा था , प्रेम के लंड को गान्ड का ख्याल आते ही वो पगलाने लगा , उसके लिए तो हर एक चूत और गान्ड एक समान उसको क्या लेना कि कॉन सी गान्ड किसकी है कॉन सी चूत किसकी है सरिता अपने एक हाथ को उपर किए बस के डंडे को पकड़े खड़ी थी प्रेम के तने हुए लंड के अहसास को अपनी गान्ड पर महसूस करते ही उसके रोंगटे खड़े हो गये

ये एक ऐसी सिचुयेशन थी जिसमे दोनो कुछ नही कर सकते थे प्रेम का लंड मामी की सलवार की वजह से गान्ड की फांको पर अच्छे से सेट हो चुका था सरिता चाह कर भी प्रेम को मना भी नही कर पा रही थी पर उसको अंदाज़ा होने लगा था कि भानजे का हथियार बेहद ही मजबूत है , सरिता हालाँकि एक बहुत ही पतिव्रता औरत थी जो अपने पति के अलावा किसी से भी नही चुदि थी पर आज उसकी गान्ड अपने आप ही हिलने लगी थी प्रेम ने भी महसूस किया कि मामी की गान्ड हिल रही है

उसने अपना हाथ नीचे किया और मामी के एक चूतड़ को धीरे धीरे से मसल्ने लगा सरिता को प्रेम से ऐसी उम्मीद बिल्कुल नही थी पर वो बस मे कुछ कर भी तो नही सकती थी उपर से आज उसे क्या हुआ अपने चूतड़ पर पर पुरुष का हाथ उसे अच्छा सा लगने लगा था उसने खुद को हालात पर छोड़ दिया और अपनी गान्ड पर भानजे के लंड को फील करने लगी उसे यकीन नही हो रहा था कि चड्डी मे क़ैद उसकी चूत प्रेम के स्पर्श से गीले होने लगी थी

तभी बस एक जगह और रुकी कुछ सवारिया और बस मे चढ़ गयी थी तो भीड़ दे दवाब से प्रेम अब बुरी तारह से सरिता से चिपक गया और मोके का फ़ायदा उठाते हुए उसने अब अपनी उंगली से सरिता की गान्ड की दरार को सहलाना शुरू कर दिया सरिता ने ऐसे हालत का सामना पहले कभी नही किया था उपर से वो भी करीब महीने भर से चुदि नही थी तो उसके मन मे भी अजीब से ख्याल आने लगे तभी बस ने तेज ब्रेक लगाया और प्रेम ने बॅलेन्स बिगड़ने से बचने के लिए मामी की पतली कमर को थाम लिया , अब वो एक हाथ से उसकी गान्ड को मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी कमर को थामे हुआ था बस की ये घटना आने वाले समय मे क्या गुल खिलाने वाली थी ये तो बस वक्त ही जानता था

सौरभ जब घर आया तो दरवाजा खुला हुआ था वो दबे पाँव अपने कमरे की तरफ बढ़ा तो उसने देखा कि विनीता उसके बेड पर सोई हुई है उसके ब्लाउज के बटन पूरी तरह से खुले हुए थे, चूचिया बाहर को निकली पड़ी थी और उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी जिस से सौरभ को अपनी मम्मी की मस्त गोरी गोरी टांगे और चूत के दर्शन हो रहे थे बिना पलके झपकाए वो विनीता के हुस्न को ललचाई नज़रो से देख रहा था , जब जब विनीता साँस लेती तो उसकी छातिया उपर नीचे होती सौरभ का लंड फिर से तन गया था उसका मन करने लगा कि वो अपनी माँ को आज चोद ही डाले पर आज उसको बहुत काम था तो वो आँगन मे गया और विनीता को आवाज़ लगाने लगा

दरअसल वो नही चाहता था कि विनीता को पता चले कि उसने उसे इस हालत मे देख लिया है

मम्मी, मम्मी ” पुकारने लगा वो

उसकी आवाज़ सुनकर विनीता की आँख खुली तो उसने खुद को ऐसी नंग-धड़ंग हालत मे देखा फिर उसे याद आया कि कैसे वो चूत मे उंगली करते करते ही सो गयी थी उसने जल्दी से अपने कपड़ो को सही किया और सौरभ के पास आ गयी

“आ गये बेटे, ” पूछा उसने

सौरभ- जी माँ , आज मछली का दाम ज़्यादा मिला तगड़ा मुनाफ़ा हुआ है

सौरभ ने पैसे मम्मी को दिए और पूछा कि मम्मी अब आप को कब डॉक्टर को पैर दिखाना है

विनीता-“बस बेटा , पैर ठीक हो ही गया समझो दो चार दिन बाद डॉक्टर के पास चलेंगे, मेरी वजह से तुम्हे बहुत परेशानी हुई है ना पर अब और नही होगी ”

सौरभ विनीता के पास आकर बोला-“क्या मम्मी, आपकी सेवा करने मे भला मुझे क्या परेशानी होगी , वो तो मेरा फ़र्ज़ है ना ”

 


विनीता ने अपने बेटे को गले से लगा लिया उसकी भारी भारी चूचियो ने सौरभ के चेहरे को छुपा लिया माँ के बदन की मोहक खुश्बू से सौरभ के बदन मे तरंगे उठने लगी उसने अपनी बाहें विनीता की पीठ पर रख दी और उसको अपनी बाहों मे कस लिया , सौरभ को पता नही क्या हुआ उसने विनीता के होंठो पर चूम लिया , विनीता को इस हरकत की उम्मीद नही थी वो कुछ कहती पर उस से पहले ही सौरभ अपने कमरे मे चला गया , अपनी माँ के होंटो पर अपने लबों का स्वाद छोड़ कर ,

हैरान परेशान, विनीता सोचने लगी कि उसका बेटा क्या उसे चोदना चाहता है या फिर बस ऐसे ही भावनाओ से वशीभूत होकर उसने चुंबन ले लिया , उसके मन मे कई सवाल उमड़ने लगे थे , जबकि सौरभ भी बिस्तर पर पड़े पड़े इसी के बारे मे सोच रहा था कि कैसे अचानक से ही उसने मम्मी को किस कर दिया वो पता नही क्या सोच रही होंगी क्या मुझे उनसे माफी माँगनी चाहिए ख्यालो ख्यालो मे उसे कब नींद आ गयी पता नही चला

शाम को करीब 5 बजे की आस पास वो जगा तो देखा की उषा दीदी बरामदे मे बैठे हुए चाइ पी रही थी सफेद कलर के चूड़ीदार सूट मे वो गजब लग रही थी , उषा ने अपनी टांगे फैला रखी थी जिस से उसकी चूत वाली जगह की वी शेप एक दम मस्त फूली हुई दिख रही थी , सौरभ का दिल-ओ-दिमाग़ झन्ना गया उषा उसकी तरफ देख कर मुस्कुराइ तो वो भी मुस्कुरा दिया उसे रात की बात याद आ गयी जब कैसे दीदी ने उसके लंड को पकड़ा था

उषा-“भाई , तुझसे एक काम है ”

सौरभ- जी दीदी कहो

उषा-“भाई, मेरी सहेली की सगाई है तो तुझे उधर मेरे साथ चलना पड़ेगा ”

सौरभ- दीदी चलता मैं पक्का पर घर पे भी तो कोई चाहिए प्रेम भी नही है तो मुझे घर और खेत और बाज़ार सारे काम करने पड़ रहे है और फिर उपर से मम्मी की चोट की वजह से उनको भी संभालना पड़ता है

उषा- मुझे कुछ नही पता तुझे बस मेरे साथ चलना ही होगा

विनीता- चला जा बेटा, दीदी कहाँ अकेली जाएगी वैसे भी इसकी सहेली की सगाई शाम को है तो रात तक वापिस आ जाओगे तुम लोग

सौरभ- पर माँ, आपको छोड़ कर कैसे जा सकता हूँ

विनीता- बेटा, मैं अब पहले से बहुत बेहतर हूँ, तू आराम से जा

उषा- तो ठीक है हम कल दोपहर को चलेंगे और रात तक वापिस आ जाएँगे

दूसरी तरफ प्रेम मामा के घर पहुँचते ही सो गया था सरिता घर के कामो मे व्यस्त हो गयी थी उसको हॉस्पिटल मे लोगो के लिए खाना भी भेजना था तो उसको बहुत देर लग गयी थी दोपहर को करीब तीन बजे उसका बेटा खाना और कुछ बिस्तर लेकर वापिस हॉस्पिटल चला गया , उसने सोचा प्रेम भी कल से भूखा ही है उसे भी खाने का पूछ लेती हूँ वो कमरे मे गयी तो वो घोड़े बेच कर सोए पड़ा था सरिता ने सोचा सोने देती हूँ वैसे भी थोड़ी- बहुत देर मे खुद उठ ही जाना है उसको तबी प्रेम ने करवट ली और सीधा होकर सोने लगा

उसको शायद किसी का सपना आ रहा था उसका लंड पेंट मे उभार बनाए हुए था सरिता की निगाह उस पर पड़ी तो उसको अंदाज़ा होने लगा कि भानजे का औजार का साइज़ तगड़ा है उसके गले मे खुसकी होने लगी , वैसे तो वो एक चुदि चुदाई मेच्यूर औरत थी पर 40 के फेर मे औरतो को चुदाई का बुखार कुछ ज़्यादा ही चढ़ता है पर फिर उसने उन ख्यालो को दिमाग मे से झटक दिया और सोचा कि अब फ्री हो गयी हूँ तो पहले नहा लेती हूँ फिर थोड़ा सा सुस्ता लूँगी

घर मे कोई था नही तो सरिता थोड़ी सी बेतकलुफ हो गयी थी बाथरूम मे पहुच कर उसने पानी चलाया और अपने कपड़े खोलने लगी उसने आहिस्ता से अपनी चोली की डोरी खीची और उसके 34”” के कबूतर आज़ाद होकर फड़फड़ाने लगे उसकी चूचियो के इंच भर के निप्प्लस जैसे हर किसी को आमंत्रण दे रहे हो कि आओ हमें चूस डालो सरिता ने हल्का सा हाथ अपने उभारों पर फेरा तो उसके जिस्म मे गुदगुदी सी होने लगी

फिर उसने अपने लहंगे को भी उतार कर साइड मे रख दिया अब वो पूरी नंगी बाथरूम के बीचो- बीच खड़ी थी उसकी मांसल जांघे एक दूसरे से चिपकी हुई थी उसकी थोड़ी सी पीछे की तरफ उठी हुई गोल गान्ड ऐसे लचक रही थी कि किसी नपुंसक के लंड मे भी गर्मी भर दे उसने डिब्बे से पानी खुद के शरीर पर उडेलना शुरू किया पर अचानक से उसको बस वाली बात याद आ गयी कैसे प्रेम ने उसकी गान्ड पर अपना लंड रगड़ा था उसकी चूत ने कई दिनो से लंड नही लिया था तो उसमे सुगबुगाहट होने लगी सरिता अंजाने मे ही अपनी चूत को मसालने लगी

 
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