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rajsharmastories मेरी चाची की कहानी compleet

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मेरी चाची की कहानी



दोस्तो मे यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और नई कहानी मेरी चाची की कहानी लेकर हाजिर हूँ दोस्तो हर आदमी के बचपन मे कभी ना कभी कोई ऐसा वक़्त आता है जब वो सेक्स को समझने लगता है. ठीक उसी तरह मे बचपन मे, चाची के साथ हुए कुछ हादसों को देख कर मे भी सेक्स के प्रति आकर्षित हुआ.

ये एक रियल स्टोरी है मेरी सग़ी चाची की, जो अभी देल्ही मे रहती है, चाचा सेबी मे जॉब पर है. थोड़ी चाची के बारे मे आप लोगो को बता दू, मेरी चाची का नाम कोमल है, अभी चाची की उमर 40 साल. है पर उस वक़्त उनकी उमर 28 य्र. थी, दिखने मे एक दम नॉर्थ इंडियन घरेलू औरत की तरह है, रंग गोरा, कद 5.2 इंच. ज़्यादा लंबी नही है, सरीर से थोड़ी हेल्ती है, चेहरा एक दम गोल, बूब्स थोड़े बड़े, कमर थोड़ी मोटी, उनकी खास बात ये है कि वो बहुत ज़्यादा भोली है और थोड़ी भुलक्कड़ है, इसीलये चाचा हमेशा उन्हे डाँट ते रहते है, उनके दो बेटे है और देल्ही मे पढ़ते है बड़ा बेटा विकाश 15साल का और छोटा राजीव 10साल का है. चाची हमेशा सारी पहनती है और घर मे छोटी बहू होने के कारण, सर पर हमेशा पल्लू रखती है और सारा बदन हमेशा सारी से ढका रहता है. अब थोड़ा चाचा पे नज़र डाली जाए मेरा पिताजी (फादर) के 3 भाई और एक सिस्टर है. पिताजी सबसे बड़े, प्रकाश चाचा मझले है, इनके बाद एक छोटे चाचा प्रेम और बुआ कमल. मेरी पूरी फॅमिली मे प्रकाश चाचा पढ़ने मे सबसे ज़्यादा तेज और किताबी कीड़े है (बुक वर्म), पढ़ाई की वजह से आँखो पे मोटा चस्मा आ गया है मेरी उनके साथ बहुत बनती है, क्यूंकी बचपन से उन्होने मुझे बहुत खिलाया है मैं बचपन मे उनके साथ ही सोता था और उन्हे छोटे बाबूजी कह कर बुलाता था.

अब स्टोरी पर आता हूँ, किस तरह अंजाने मे चाची ने मुझे सेक्स का मतलब बता दिया. ये बात उन दिनो की जब मेरी उमर 12साल. की थी, हम सब प्रेम चाचा की शादी मे अपने गाओं गये थे वान्हा पर हमारा पुस्तेनि घर है, जो 2 फ्लोर का है, ग्राउंड फ्लोर मे 5 कमरे है, किचन, स्टोर रूम, छोटे चाचा का कमरा, दादा दाई और गेस्ट रूम है, गेस्ट रूम के बीच एक डोर है जो दालान मे खुलता है, दालान जान्हा खेती के समान, गाये और भैंसे (काउ & बफेलो) रखे जाते है.

और दालान की देखभाल के लिए हमारा नौकर भूरा था जिसकी उमर तकरीबन 40 साल होगी उस वक़्त और वो वन्हि दालान मे रहता था., सिफ खाना खाने ही घर मे आता था. भूरा एक दम हटा कटा ताकतवर मर्द था, हम जैसे 3, 4 बच्चो को तो वो एक हाथ मे ही उठा लेता था पर वो थोड़ा मंद बुधि का था, बचपन मे उसके मा बाप गुजर गये थे, दादाजी ने उसे अपने पास रख लिया, वो घर के सब काम कर देता था और दादा जी की बहुत सेवा करता था.

सेकेंड फ्लोर पे हमारा रूम, चाची का और चाचा का स्टडी रूम था और दो कमरे हमेशा बंद रहते थे जिसमे कोई रहता नही हा, जब हमारी कमल बुआ या कोई रिलेटिव आते थे उसी मे रुक ते थे और उपर छत (टेरेस) थी, जान्हा से दालान और गाओं साफ दिखता था. साल दो साल मे एक बार हम गाओं जाते थे, दादा दादी हमे देख कर काफ़ी खुस होते थे, हमे भी वान्हा काफ़ी अछा लगता था, दिन भर गाओं, खेत मे घूमना और नदी मे नहाते और मस्ती करते और वैसे भी वान्हा पर किसी भी तरह की कोई रोक टोक नही थी.

घर मे शादी का महॉल था सब काफ़ी खुश थे, बहुत सारे रिलेटिव और मेहमान आए हुए थे, हमारी बुआ (कमल) और फूफा (राजेश) (माइ फादर्स सिस्टर & हर हज़्बेंड) भी आए हुए थे, ये सब शादी एक 4, 5 दिन पहले ही आगाये थे, घर मे पैर रखने की जगह नही थी, हम सब बच्चो को रात को छत (टेरेस) पर सोना पड़ता था. गाओं मे रात बहुत जल्दी हो जाती थी, रात होते ही हम सब दालान मे घुस जाते और खूब हो हल्ला करते. हां और एक ख़ास्स बात आप लोगो को बता दू उस वक़्त हमारे गाओं मे बिजली नही थी, गाओं मे सब लालटेन और दिया ही इस्तेमाल करते थे. हम रात मे अक्सर छुपा छुपी (हाइड & सीक) खेलते.

दोपहर का समय था, आज रात प्रेम चाचा का तिलक आने वाला था (इस रसम मे लड़की के घर वाले दहेज का समान ले कर आते है और लड़के को तिलक लगाते है). तिलक मे आने वाले लोगो के रुकने का बंदोबस्त दालान मे ही किया गया था. सब लोग काफ़ी बिज़ी थे, मैं भी तिलक मे आने वाले लोगो के लिए चेर और बेड का बंदोबस्त कर रहा था, मेरे साथ गाओं के कुछ लड़के और भूरा भी था. फूफा वन्हि पर मिठाई वाले के साथ बैठे थे और कुछ बाते कर रहे थे, तभी मैने देखा गाओं के लड़के जो हमारी मदद कर रहे थे बार बार छत की तरफ देख रहे थे और कुछ कानाफुसी कर रहे थे, मैने भी छत की तरफ देखा, देखा तो चाची छत पर नीचे झुक कर कुछ सूखा रही थी चाची ने सारी को घुटनो तक उठा के कमर से बँधी हुई थी और नीचे झुकने से उनकी गोरी गोरी जंघे (थाइस) और चूतर का निचला हिस्सा काफ़ी साफ दिख रहा था. चाची तो अपने कम मे बिज़ी थी, भूरा भी तिरछी नज़र से ऊपर देख रहा था और अपने पॅंट पर हाथ घुमा रहा था, ये देख कर लड़के उसे पर हस्ने लगे तभी फूफा की नज़र लड़को की तरफ पड़ी और वो भी ऊपर देखने लगे फूफा की आँखे बड़ी हो गयी पर पास मे मिठाई वाला था इसीलिए फूफा ने ज़ोर से आवाज़ दी और कहा "भूरा जल्दी जल्दी चेर लगा दो और अभी और भी काम है" इतने मे फूफा के आवाज़ सुन कर चाची ने नीचे देखा, फूफा उन्हे देख कर मुस्कुरा रहे थे चाची ने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया और सारी नीचे कर दी.
 
मैं कुछ चेर गेस्ट रूम मे रखने गया तभी वो लड़के आपस मे कुछ बाते कर रहे थे.

1-लड़का: "अर्रे तुमने देखा किस तरह भूरा अपना लंड हिला रहा था विकी (विकाश) की मा के चूतर देख कर"

2-लड़का: "उसे बेचारे की क्या ग़लती है, विकी की मा की चूतर है ही इतने मस्त की किसी का भी खड़ा हो जाए"

1-लड़का: "और उस बेचारे भूरा को भी तो बहुत दिनो से चूत के दर्शन नही हुए है..जब तक लाली थी, तब तक भूराने बड़े मज़े किए, अब तो वो भी शादी करके चले गयी है पता नही कब आएगी"

3-लड़का: "मुझे पता है तुम लोगो ने भी भूरा के नाम पर लाली को चोदा था....जब वो खेत मे काम कर रही थी तब"

2-लड़का: "नही यार ट्राइ तो बहुत किया था पर हाथ नही आई, बोलने लगी "तुम जैसे माचिस की तिलियों से ये आग नही लगेगी"

3-लड़का: "मतलब"

2-लड़का: "मतलब.. तुम अभी बच्चे हो और तुम्हारा बहुत छोटा है मुझे नही चोद पाएँगे"

1-लड़का: "हां साली...हमारा क्यूँ लेती..इस पगले भूरा का मूसल लंड (बिग कॉक) लेने की आदत जो पड़ गयी थी"

3-लड़का: "हां यार मैने भी सुना है उसका बहुत लंबा और मोटा है"

1-लड़का: "अर्रे तुझे पता नही इन पागलो का बहुत लंबा होता है..और साले थकते भी नही...तुझे पता है वो अपना कुम्हार है ना.. जो मट्टी के बर्तन बनाता है उस की बीवी एक बार खेत मे टाय्लेट के लिए गयी तभी ये उस पर चढ़ गया और 1 घंटे. तक चोदता रहा, कुम्हार की बीवी उसे छोड़ने के लिए बोल रही थी पर वो सुन नही रहा था जब वो दर्द से चिल्लाने लगी और गाओं के लोग आवाज़ सुन वहाँ आने लगे तब वो वहाँ से भागा...और पता है आज भी कुम्हार की बीवी अपने पति के साथ टाय्लेट जाती है.....हा..हहा ...हा हा"

3-लड़का: "और वो मलिन, फूल वाले की बीवी, उसे तो इसने पेट से कर दिया था"

2-लड़का: "हाँ यार इस पगले का कोई भरोसा नही है..कब किस को पकड़ ले"

मैं तो उनकी बाते सुन वान्हा खड़ा ही रह गया, कुछ समझ मे नही आ रहा था..मूसल लंड, चोद दिया, पेट से कर दिया... मैं इन सब बातो को समझ नही पा रह था, ये वर्ड्स मैं पहली बार सुन रहा था, पर इतना ज़रूर समझ रह था कि ये भूरा औरतों के साथ कुछ ग़लत करता है इसीलिए ये लड़के भूरा के बारे मे बात कर रहे है. पता नही उस दिन से मुझे भूरा से डर लगने लगा मे उस के पास बहुत कम जाने लगा वो बुलाता, पर मे बहाने बना कर भाग जाता.

मैं दालान मे आ गया, मुझे देख कर वो लड़के चुप हो गये और बोले "राज कल नदी (रिवर) पर चलेगा..तुझे आम और जामुन खिलाएँगे" मैं बोला "हाँ..चलूँगा", वो लड़के मुझ से काफ़ी बड़े थे तकरीबन 16 या 17 साल के थे, पर मेरा बहुत ख़याल रखते थे क्यूँ की मैं उन्हे अक्सर डेरी मिल्क चॉक्लेट दिया करता था, वो चॉक्लेट वहाँ नही मिलते थे और कुछ पैसे भी कभी कभी खर्च कर देता था इस लालच से वो मेरा ख़याल रखते थे.

मुझे याद है वो एक बार मुझे नदी पर ले गये थे, नदी हमारे गाओं से 10मिनट. की दूरी पर थी, खेत और कच्चे रास्तों से होते हुए हम नदी तक पंहूचते थे. मे नदी के किनारे ही खेलता क्यूँ कि उसे वक़्त मुझे तैरना (स्विम्मिंग) नही आती थी. ये लड़के स्विम्मिंग कम करते थे और गाओं की लड़कियों को नहाते हुए ज़्यादा देखते थे, और वो लड़किया इनको गाली दे कर भगा देती पर मुझ कुछ नही कहती थी क्यूँ कि मे उनसे काफ़ी छोटा था और उनमे से कुछ लड़कियों को जानता भी था, जैसे रेणु, पायल, सीमा और इनको मे दीदी कह कर बुला ता था और वैसे भी इन सब लड़कियों का मेरे घर आना जाना लगा रहता था. उसे दिन ये लड़के नदी मे खेल रहे थे पर मे किनारे बैठा उन्हे देख रहा था, तभी मेरे पास से कुछ गाओं की लड़कियाँ गुज़री उनमे रेणु भी थी, उसने मुझसे पूछा "क्यूँ राज तुम नहा नही रहे हो..!" मे बोला "दीदी मुझे स्वीमिंग नही आती और पानी भी बहुत गहरा है" वो बोलने लगी तुम हुमरे साथ आ जाओ हम तुम्हे स्विम्मिंग सिखाते है. मे उनके साथ चला गया, वो कुछ दूरी पर नहाती थी जहाँ पर कोई आता जाता नही था. वो सब झाड़ियों (स्माल ट्रीस) के पीछे अपने कपड़े निकालने लगी, कुछ ने सारी पहनी थी और कुछ ने सलवार कमीज़. जिन लड़कियों ने सलवार कमीज़ पहना था उन्होने सलवार निकाली और जिन्होने सारी पहनी थी उन्होने सारी और ब्लाउस निकाल दिया और पेटिकट को चुचियों के उपर बाँध लिया, मे ये सब देख रहा था पर मुझे कुछ महसूस नही हो रहा था. फिर वो सब नदी मे उतरने लगी मुझे भी बुलाने लगी पर मैने भी अपनी टी-शर्ट निकाली पर जीन्स नही निकाला और पानी मे उतरने लगा वो बोलने लगी "अर्रे राज जीन्स तो निकाल दो"

मे: "दीदी मे अपनी हाफ पॅंट नही लाया हूँ.."

रेणु: "कोई बात नही राज..तुम अपनी जीन्स निकाल के आ जाओ"

मे: "नही मुझे शरम आती है"

रेणु: "अर्रे हमसे कैसी शरम, हम तो तेरी दीदी है" इतना बोलते ही एक लड़की ने मेरा जीन्स खोल दी, मे सिर्फ़ अंडरवेयीर पर था, ये देख कर लड़कियाँ हस्ने लगी.

मे: "तुम लोग क्यूँ हंस रही हो?..मुझे नही नहाना मे जा रहा हूँ"

रेणु: "अर्रे राज रुक जाओ..ये सब पागल तुझे अंडरवेयीर पहना देख कर हंस रही है"

मे: "क्यूँ..तुम सब नही पहनती?" वो फिर हस्ने लगी.

लड़कियाँ: "अर्रे राज ऐसी कोई बात नही है....गाओं मे तेरी उमर के लड़के अंडरवेयीर नही पहाते इसलिए ये सब हंस रही हैं..मे इन्हे मना कर्दुन्गि ये अबसे नही हँसेगी, तुम आ जाओ”
 


फिर मे पानी मे उतरा, रेणु मुझे पकड़ कर थोड़े गहरे पानी मे ले गयी, मे उन्हे देख रहा था पानी मे उनके कमीज़ और पेटिकट उपर होगये थे और अंदर उनकी कसी हुई चुचियाँ और गोरे गोरे जाँघ (थाइस) और उनकी चूत के बाल (हेर) दिख रहे थे, रेणु ने कहा "राज हम तुम्हे पकड़ते है तुम अपने पैर उपर कर लो और तेज़ी पानी पर मारो" मे वैसे ही करने लगा उन्होने मेरे पेट और पेनिस पर अपना हाथ रखा हुआ थे, मे फिर पानी मे पैर मारने लगा ,मुझे ऐसा करते देख कर उन्होने मुझे छोड़ दिया मे डूबने लगा और हाथ पानी पर मारने लगा, मे डर गया था और रेणु को कस कर पकड़ लिया और रेणु से लिपट गया, रेणु ने पेटिकट पहना हुआ था और वो पेटिकट कमर के उपर आ चुका था और वो अंदर से पूरी तरह नगी थी मे उसके नंगे चूतर और कमर को कस के पकड़ा हुआ था. दूसरी लड़कियाँ पास मे खड़ी कुछ बोल रही थी और हंस रही थी मैने सुना वो कह रही थी "रेणु को तो देख बड़े मज़े से चिपकी हुई है राज से, लगता है लिए बिना छोड़ेगी नही उसे" दूसरी लड़की बोली "राज है भी तो इतना खूबसूरत कि कोई भी लड़की चिपक जाए".. "अर्रे शहरी लड़का है खूबसूरत हो होगा ही...और सहर मे खूबसूरत लड़कियों की क्या कमी है जो हम जैसो को देखेगा, इन गाओं के लड़को की तरह नही है कि लड़की देखी और डंडा खड़ा कर लिया" मैने तुरंत उसे छोड़ दिया और बाहर जाने लगा तब रेणु बोली "क्या हुआ राज तैरना नही सीखना" मे बोला "नही तुम सब मेरा मज़ाक कर रही हो" रेणु बोली "आरे इनकी बात का बुरा मत मान इनकी तो आदत है बकबक करने की तू आजा" मे वापस पानी मे उतरा और रेणु के पास गया, रेणु ने कहा "जब तुम पैर मारने लगॉगे तो मे तुम्हे छोड़ूँगी और तुम हाथ भी पानी मे मारना जिसे तुम पानी मे आगे की तरफ बढ़ने लगॉगे और इसी तरह करते रहना, तुम तैरना सीख जाओगे. मे उसी तरह करने लगा पर बार बार पानी मे डूब जाता और रेणु पानी से बाहर निकालती, एक बार तो मेरी अंडरवेर घुटनो की नीचे उतर गई और मुझे पता भी नही चला, मैने दोनो हाथो से रेणु की कमर को पकड़ा हुआ था और मेरा चेहरा उसकी चुचि पर और मेरा छोटा लंड रेणु चूत से चिपका हुआ था. रेणु भी उसे महसूस कर आयी थी पर शायद उसे भी मज़ा आ रहा था इसीलिए कुछ बोल भी नही रही थी, इस दरमियाँ मैने कई बार उसकी नगी चूत और चूतर को छुआ था और उसने कई बार मेरे छोटे से लंड को छुआ था. मे पहली बार किसी लड़की के जिस्म को महसूस कर रहा था और मेरे अंदर एक अजीबसी हुलचल हो रही थी, मुझे पानी के अंदर भी पसीना आ रहा था. कुछ देर बाद लड़कियाँ बाहर निकलने लगी मे भी बाहर आके बैठ गया, लड़कियाँ झाड़ियों के पीछे कपड़े बदलने लगी, पर मेरी नज़र तो रेणु पर ही थी, रेणु की उमर तकरीबन 17 या 18 साल होगी पूरी तरह से जवान और गदराई हुई थी, उसने मेरे सामने ही पेटिकट की डोरी खोल दी और पेटिकट नीचे गिर गयी, रेणु पूरी तरह से नंगी मेरे सामने खड़ी थी, गोरा बदन, घुंघराले बाल, कसी हुई चुचि और गोरी चूत पर थोड़े हल्के काले बाल ऐसा लग रहा था जैसे कोई जलपरी पानी से बाहर निकल आई हो. फिर वो अपने साथ लाए हुए कपड़े सलवार कमीज़ पहनने लगी, मे देखा उसने ब्रा और पॅंटी नही पहनी.

और फिर मेरे करीब आकर बोली "राज तुम हमारे साथ चलोगे या, इन लड़को के साथ आओगे" मे बोला "मे भी आप लोगो के साथ आता हूँ" मुझे पता नही मैने ऐसा क्यूँ बोला शायद मुझे रेणु का साथ अछा लग रहा था, मे उनके साथ चलने लगा.

क्रमशः.............

Meri Chachi Ki kahaani

dosto me yaani aapka dost raj sharma ek our nai kahaani meri chaachi ki kahaani lekar haajir hun dosto Har aadmi ke bachpan me kabhi na kabhi koi aisa waqt aata hai jab wo sex ko samjhne lagata hai. Thik usi tarah me bachpan me, chachi ke sath hue kuch hadson ko dekh kar me bhi sex ke prati aakarshit hua.

Ye ek real story hai meri Sagi Chachi ki, jo abhi Delhi me rahti hai, Chacha SEBI me job par hai. Thodi Chachi ke bare me aap logo ko bata du, Meri Chachi ka nam Komal hai, abhi Chachi ki umar 40 saal. Hai par us waqt unki umar 28 yr. thi, dikhne me ek dam North Indian Gharelu Aurat ki tarah hai, rang gora, kad 5.2 inch. Jyaada lambi nahi hai, sarir se thodi healthy hai, chehara ek dam gol, boobs thode bade, kamar thodi moti, unki khas bat ye hai ki wo bahut jyaada bholi hai aur thodi bhulakkad hai, isilye Chacha hamesha unhe daant te rahte hai, unke do bete hai aur delhi me padhte hai bada beta Vikash 15saal ka aur chota Rajiv 10saal ka hai. Chachi hamesha sari pahnti hai aur ghar me choti bahu hone ke karan, sar par hamesha pallu rakhti hai aur sara badan hamesha sari se dhaka rahat hai. Ab thoda Chacha pe nazar dali jaye mera Pithaji (Father) ke 3 bhai aur ek sister hai. Pithaji sabse bade, Prakash Chacha majhale hai, inke bad ek chote chacha Prem aur Bua Kamal. Meri puri family me Prakash Chacha padhne me sabse jyaada tej aur kitabi kide hai (Book worm), padhaai ki wajah se aankho pe mota chasma aa gaya hai meri unke sath bahut banti hai, kyunki bachpan se unhone mujhe bahut khilaya hai main bachpan me unke sath hi sota tha aur unhe Chote Babuji kah kar bulata tha.

Ab stroy par aata hun, Kis tarah anjaane me Chachi ne mujhe sex ka matlab bata diya. Ye bat un dino ki jab meri umar 12saal. ki thi, hum sab Pream chacha ki shadi me apne gaon gaye the wanha par humra pusteni ghar hai, jo 2 floor ka hai, ground floor me 5 kamre hai, Kitchem, Store room, Chote chacha ka Kamara, dada dai aur guest room hai, guest room ke biche ek door hai jo Dalan me khulta hai, Dalan janha Kheti ke saman, Gaye aur Bhainse (Cow & buffalo) rakhe jaye hai.

Aur Dalan ki dekhbhal ke liye humra naukar Bhura tha jiski umar takriban 40 saal hogi us waqt aur wo wanhi dalan me rahta tha., sif khana khane hi ghar me aata tha. Bhura ek dam hataa kataa takatwar mard tha, hum jaise 3, 4 bachcho ko to wo ek haath me hi utha leta tha par wo thoda Mand budhi ka tha, bachpan me uke maa baap gujar gaye the, dadaji ne use apne pass rakh liya, wo ghar ke sab kam kar deta tha aur dada ji ki bahut seva karta tha.

Second floor pe humara room, chachi ka aur chacha ka study room tha aur do kamre hamesha band rahte the jisme koi rahata nahi ha, jab hamari kamal bua ya koi relative aate the usi me ruk te the aur upar chat (terrace) thi, janha se dalan aur gaon saf dikhta tha. Sal do sal me ek bar hum gaon jate the, dada dadi hume dekh kar kafi khus hote the, hume bhi wanha kafi acha lagata tha, din bhar gaon, khet me gumna aur nadi me nahate aur masti karte aur waise bhi wanha par kisi bhi tarah ki koi rok tok nahi thi.

Ghar me Shaadi ka mahol tha sab kafi khush the, bahut sare relative aur mehman aaye hue the, humari Bua (Kamal) aur fufa (Rajesh) (my fathers sister & her husband) bhi aaye hue the, ye sab shadi ek 4, 5 din pahle hi aagaye the, ghar me pair rakhne ki jagah nahi thi, hume sab bachcho ko raat ko chat (terrace) par sona padta tha. Gaon me raat bahut jaldi ho jati thi, raat hote hi hum sab dalan me ghus jate aur khub ho halla karte. Haan aur ek khass bat aap logo ko bata du use waqt humare gaon me bijali nahi thi, gaon me sab lalten aur diya hi istemal karte the. Hum raat me aksar chupa chupi (hide & seek) khelte.

Dophar ka samay tha, aaj raat prem chacha ka Tilak aane wala tha (Is rasam me ldaki ke ghar wale Dahej ka saman le kar aate hai aur ladke ko Tilak lagate hai). Tilak me aane wale logo ke rukne ka bandobast Dalan me hi kiya gaya tha. Sab log kafi busy the, main bhi Tilak me aane wale logo ke liye Chair aur Bed ka bandobast kar raha tha, mere sath Gaon ke kuch ladke aur Bhura bhi tha. Fufa wanhi par Mithai wale ke sath baithhe the aur kuch baate kar rahe the, tabhi maine dekha Gaon ke ladke jo humari madad kar rahe the bar bar chat ki taraf dekh rahe the aur kuch kanafusi kar rahe the, maine bhi chat ki taraf deka, dekha to chachi chat par niche jhuk kar kuch sukha rahi thi chachi ne sari ko ghutno tak utha ke kamar se bandhi hui thi aur niche jhukne se unki gori gori janghe (thighs) aur chutar ka nichala hissa kafi saf dikh raha tha. Chachi to apne kam me busy thi, bhura bhi tirchi nazar se oopar dekh raha tha aur apne pant par haath ghuma raha tha, ye dekh kar ladke use par hasene lage tabhi fufa hi nazar ladko ki taraf padi aur wo bhi oopar dekhne lahe fufa ki aankhe badi ho gayi par pass me mithaai vala tha isiliye fufa ne jor se awaz di aur kaha "Bhura jaldi jaldi chair laga do aur abhi aur bhi kam hai" intne me fufa ke awaz sun kar chachi ne niche dekha, fufa unhe dekh kar muskura rahe the chachi ne bhi muskura kar jawab diya aur sari niche kar di. Main kuch chair guest room me rakhane gaya tabhi wo ladke aapas me kuch baate kar rahe the.

1-Ladka: "arre tumne dekha kis tarah Bhura apna lund hila raha tha vicky (Vikash) ki maa ke chutar dekh kar"

2-Ladkaa: "use bechare ki kya galti hai, vicky ki maa ki chutar hai hi itnai mast ki kisis ka bhi khada ho jaye"

1-Ladka: "aur use bechare Bhura ko bhi to bahut dino se chut ke darshan nahi huye hai..jab tak Lali thi, tab tak Bhurane bade maze kiye, ab to wo bhi shadi karke chale gayi hai pata nahi kab aayegi"

3-Ladka: "mujhe pata hai tum logo ne bhi Bhura ke nam par Lali ko choda tha....jab wo khet me kam kar rahi thi tab"

2-Ladka: "nahi yaar try to bahut kiya tha par haath nahi aai, bolne lagi "tum jaise machis ki Tiliyon se ye aag nahi lagegi"

3-Ladka: "Matlab"

2-Ladka: "matlab.. tum abhi bachche ho aur tumhara bahut chota hai mujhe nahi chod payenge"

1-Ladka: "haan sali...humara kyun leti..is pagle Bhura ka musal lund (Big Cock) lene ki aadat jo pad gayi thi"

3-Ladka: "haan yaar maine bhi suna hai uska bahut lamba aur mota hai"

1-Ladka: "arre tujhe pata nahi in paglo ka bahut lamba hota hai..aur saale thakte bhi nahi...tujhe pata hai wo apna kumhaar hai na.. jo matti ke bartan banat hai us ki biwi ek bar khet me toilet ke liye gayi tabhi ye us par chadh gaya aur 1 ghante. tak chodataa raha, kumhaar ki biwi ne use chodane ke liye bol rahi thi par wo sun nahi raha tha jab wo dard se chillane lagi aur gaon ke log awaz sun wnaha aane lage tab wo wanaha se bhaga...aur pata hai aaj bhi kumhar ki biwi apne pati ke sath toilet jati hai.....ha..haha ...haa haa"

3-Ladka: "aur wo Malin, phool wale ki biwi, use to isne pet se kar diya tha"

2-Ladka: "han yaar is pagle ka koi bharosa nahi hai..kab kis ko pakad le"

Main to unki baate sun wanha khada hi rah gaya, kuch samjh me nahi aa raha tha..musal lund, chod diya, pet se kar diya... main in sab bato ko samjh nahi paa rah tha, ye words main pahli bar sun raha tha, par itna jarur samjh rah tha ki ye Bhura aurton ke sath kuch galat karta hai isiliye ye ladke Bhura ke bare me bat kar rahe hai. Pata nahi us din se mujhe Bhura se dar lagne laga me us ke pass bahut kam jane laga wo bulata, par me bahane bana kar bhag jata.

Main Dalan me aa gaya, mujhe dekh kar wo ladke chup ho gaye aur bole "Raj kal nadi (River) par chalega..tujhe aam aur jamun khilaayenge" main bola "han..chalunga", wo ladke mujh se kafi bade the takriban 16 ya 17 saal ke the, par mera bahut khayal rakhte the kyun ki main unhe aksar Dairy milk Chocolate diya karta tha, wo Chocolate wanah nahi milte the aur kuch paise bhi kabhi kabhi kharch kar deta tha is lalach se wo mera khayal rakhte the.

Mujhe yaad hai wo ek bar mujhe Nadi par le gaye the, Nadi humare gaon se 10minat. ki duri par thi, khet aur kache raston se hote huye hum nadi tak panhuchte the. Me nadi ke kinare hi khelta kyun ki use waqt mujhe tairna (Swimminatg) nahi aati thi. Ye ladke Swimminatg kam karte the aur gaon ki ladkiyon ki nahata huye jyada dekhte the, aur wo ladkiya inko gali de kar bhaga deti par mujh kuch nahi kahati thi kyun ki me unse kafi chita tha aur unme se kuch ladkiyon ko janta bhi tha, jaise Renu, Payal, Seema aur inko me didi kah kar bula ta tha aur wasie bhi in sab ladkiyon ka mere ghar aana jan laga rahta tha. Use din ye ladke nadi me khel rahe the par me kinare baitha unhe dekh raha tha, tabhi mere pass se kuch gaon ki ladkiyan gujari unme Renu bhi thi, unse mujhse pucha "kyun Raj tum naha nahi rahe ho..!" me bola "didi mujhe Swimminatg nahi aati aur pani bhi bahut gahara hai" wo bolne lagi tum humre sath aa jao hum tumhe Swimminatg sikhate hai. Me unke sath chala gaya, wo kuch duri par nahati thi jahan par koi aata jata nahi tha. Wo sab jhadiyon (small trees) ke piche apne kapde nikalne lagi, kuchne sari pahani thi aur kuch ne Salwar kamiz. Jin ladkiyon ne Salwar kamiz pahana tha unhone salwar nikal aur Jinhone sari pahni thi unhone sari aur blouse nikal diya aur petticote ko chuchiyon ke upar bandh liya, me ye sab dekh raha tha par mujhe kuch mahsus nahi ho rah tha. Phir wo sab nadi me utharne lagi mujhe bhi bulane lagi par maine bhi apni T-shirt nikali par Jeans nahi nikala aur pani me utharne laga wo bolne lagi "arre Raj Jeans to nikal do"

Me: "didi me apni half pant nahi laya hun.."

Renu: "koi bat nahi Raj..tum apni jeans nikal ke aajao"

Me: "nahi mujhe sharam aati hai"

Renu: "arre humse kaisi sharam, hum to teri didi hai" Itna bolte hi ek ladki ne mera jeans khol di, me sirf underwaer par tha, ye dekh kar ladkiyan hasne lagi.

Me: "tum log kyun hans rahi ho?..mujhe nahi nahana me ja raha hun"

Renu: "arre Raj ruk jao..ye sab pagal tujhe underwaer pehana dekh kar hans rahi"

Me: "kyun..tum sab nahi pahaathi?" wo phir hasne lagi.

Ladkiyan: "arre Raj aisi koi bat nahi hai....gaon me tere umar ke ladke underwaer nahi pahaathe isliye ye sab hans rahi hain..me inhe mana kardungi ye abse nahi hansegi, tum aa jao”

Phir me pani me uthara, Renu mujhe pakad kar thode gahare pani me le gayi, me unhe dekh raha tha pani me unke kamiz aur petticote upar hogaye the aur andar unki kasi hui chuchiyan aur gore gore jangh (thighs) aur unke chut ke bal (hair) dikh rahe the, Renu ne kaha "Raj hum tumhe pakadte hai tum apne pair upar kar lo aur tezi pani par maro" me waise hi karne laga unhone mere pet aur penis par apna haath rakha hua the, me phir pani me pair marne laga ,mujhe aisa karte dekh kar unhone mujhe chod diya me dubne laga aur haath pani par marne laga, me dar gay tha aur Renu ko kas kar pakad liya aur Renu se lipat gaya, Renu ne petticote pahna hua tha aur wo petticote kamar ke upar aa chuka tha aur wo andar se puri tarah nagi thi me uske nage chutar aur kamar ko kas ke pakada hua tha. Dusri ladkiyan pass me khadi kuch bol rahi thi aur hans rahi thi me sunna wo kah rahi thi "Renu ko to dekh bade maze se chipki hui hai Raj se, lagta hai liye bina chodegi nahi use" dusri ladki boli "Raj hai bhi to itna khubsurat ki koi bhi ladki chipak jaye".. "arre sahari ladka hai khubsurat ho hoga hi...aur sahar me khubsurat ladkiyon ki kya kami hai jo hum jaiso ko dekhega, in gaon ke ladko ki tarah nahi hai ki ladki dekhi aur danda khada kar liya" maine turant use chod diya aur bahar jane laga tan Renu boli "kya hua Raj tairna nahi sikhana" me bola "nahi tum sab mera mazak kar rahi ho" Renu boli "aare inki bat ka bura mat man inki to adat hai bakabk karne ki tu aaja" me wapas pani me uthara aur Renu ke pass gaya, Renu ne kaha "jab tum pair marne lagoge to me tumhe chodungi aur tum haath bhi pani me marna jise tum pani me aage ki taraf badne lagoge aur isi tarah karte rahana, tum tairna **** jaoge. Me usi tarah karne laga par bar bar pani me dub jata aur Renu pani se bahar nikalti, ek bar to meri underwear ghutno ki niche utar gai aur mujhe pata bhi nahi chala, maine done haatho se Renu ke kamar ko pakda hua tha aur mera chehra uski chuchi par aur mera chota lund Renu chut se chipka hua tha. Renu bhi use mahsus kar ahi thi par shaayad use bhi maza aa raha tha isiliye kuch bol bhi nahi rahi thi, is darmiyan maine kai bar uski nagi chut aur chutar ko chua tha aur usne kai bar mere chote se lund ko chua tha. Me pahli bar kisi ladki ke jism ko mahsus kar raha tha aur mere andar ek ajibsi hulchal ho rahi thi, mujhe pani ke andar bhi pasina aa raha tha. Kuch der bad ladkiyan bahar nikalne lagi me bhi bahar aake baith gaya, ladkiaya jhadiyon ke piche kapde badalne lagi, par meri nazar to Renu par hi th, Renu ki umar takriban 17 ya 18 saal hogi puri tarah se jawan aur gadrai hui thi, usne mere samne hi petticote ki dori khol di aur petticote niche gir gayi, Renu puri tarah se nagi mere samne khadi thi, gora badan, ghunghrale bal, kasi hui chuchi aur gori chut par thode halke kale bal aisa lag raha tha jaise koi Jalpari pani se bahar nikal aai ho. Phir usne apne sath laye huye kapde salwar kamiz pahane lagi, me dekha usne bra aur panty nahi pahani.

Aur phir mere karib aakar boli "Raj tum humre sath chaloge ya, in ladko ke sath aaoge" me bola "me bhi aap logo ke sath aata hun" mujhe pataa nahi maine aisa kyun bola shaayad mujhe Renu ka sath acha lag raha tha, me unke sath chalne laga.

kramashah.............

 
गतान्क से आगे..............

रेणु: "राज तुम ने तो बॉम्बे मे बहुत फिल्मी हीरो और हेरोइन देखे होंगे"

मे: "हाँ देखे तो है पर सब को नही"

मे: "हमारी एक बार स्कूल की पिक्निक फिल्मसिटी गयी थी, तब मे 2, 4 हीरो और हेरोइन को देखा था"

रेणु: "किस किस को देखा था"

मे: "गोविंदा, मिथुन, मधुरी दीक्षित, डिंपल और भी बहुत सारी"

रेणु: "वो क्या हमसे ज़्यादा खूबसूरत होती है"

मे: "अर्रे नही दीदी वो तो मेक अप करके खूबसूरत बनती है"

रेणु: "तुझे कैसे पता"

मे: "मा कहती है"

रेणु: "राज तुम कोन्से क्लास मे पढ़ते हो"

मे: "6थ स्टॅंडर्ड मे...और दीदी तुम?"

रेणु: "मे मेट्रिक मे हूँ"

मे: "मतलब?"

रेणु:"10थ स्टॅंडर्ड मे"

मे: "दीदी आपको स्कूल कहाँ है?"

रेणु: "काफ़ी दूर है बस से जाना पड़ता है"

इस तरह हम काफ़ी देर चलते चलते बाते करते रहे और फिर घर पहुँच गये जाते समय रेणु ने कहा "राज तुम कल आओगे नदी पर" मे बोला "अगर आप मुझे तैरना सिखाओगि तो ज़रूर आउन्गा" फिर रेणु मेरे गाल पर हाथ फेरते हुए अपने घर चली गई.

धीरे धीरे शाम होने लगी और सभी मेहमान और रिस्तेदार दालान मे जमा होने लगे कुछ देर बाद पता चला लड़कीवाले भी आ गये है, दादाजी, पिताजी, चाचा सब उनका स्वागत के लिए दालान के डोर पे खड़े थे, थोड़ी देर बाद सभी मेहमआनो की खातिरदारी सुरू हो गई. थोड़ी देर बाद दादाजी ने सब का परिचय हमसे करवाया और तिलक की रसम सुरू हो गई.

तिलक की रसम सुरू होने वाली थी, ये सब हमारे घर के आँगन मे होनेवाला था, सारा गाओं जैसे हमारे घर मे आ गया था घर एक दम खचा खच भरा हुया था. आँगन के बीच मे एक छोटसा मंडप बनाया गया था, मंडप के चारो तरफ हमारे रिस्तेदार और गाओं के लोग जमा थे. घर की औरते ये सब ग्राउंड फ्लोर के कमरों से देख रही और गाओं की औरते ये सब सेकेंड फ्लोर से देख रही थी. मे भी नीचे एक कोने मे खड़ा था और वही से या सब देख रहा था, कुछ देर मे लड़की वाले आने लगे और मंडप के एक तरफ बैठने लगे, मंडप के बीच मे पंडितजी बैठे ही थे, उन्होने चाचा को बुलाने को कहा. चाचा फिर अपने कमरे से निकले और मंडप मे बैठ गये और पंडितजी ने रसम सुरू की. तभी मेरी नज़र उपर रेणु पर पड़ी मैने उसे हाथ दिखाया और रेणु ने मुझे उपर आने का इशारा किया, मैने इशारे से कहा आता हूँ. जैसे ही मे उपर जाने लगा, देखा फूफा दादाजी के कमरे के पास खड़े है और चाची से बाते कर रहे है, फूफा काफ़ी हंस हंस कर बाते कर रहे थे जैसे ही मे वहाँ से गुजरा चाचीने पूछा "कहाँ जा रहे हो?" मे बोला "चाची मे उपर जा रहा हूँ" चाची बोली "अर्रे उपर मत जाओ बहुत लोग है, तुम यही से देखो". फिर मे वहीं रुक गया, लेकिन मुझे कुछ दिखाई नही दे रहा था तो मे कमरे के अंदर जा कर एक टेबल पर खड़ा हो गया और खिड़की से देखने लगा अब सब साफ दिख रहा था.
 


आप लोगो को बता दू, फूफा का मेरी मा, चाची और पापा की कज़िन सिस्टर से मज़ाक वाला रिस्ता था, घर के इक्लोते दामाद थे, तो उनका मान (रेस्पेक्ट) भी बहुत करते थे. मा और चाची फूफा से बहुत मज़ाक करती, लेकिन फूफा कभी बुरा नही मानते थे वो भी लगे हाथ मज़ाक कर लेते. चाची फूफा के एक दम पास खड़ी थी, उनके आगे बहुत सारी गाओं की औरते और मर्द खड़े थे, जिसकी वजह से चाची को मंडप नही दिख रहा था वो बार बार लोगो के उपर से देखने की कोसिस कर रही थी पर कुछ भी ठीक से नही दिख रहा था, फूफा ने कहा "कोमल्जी आप मेरे पास खड़े हो जाइए, शायद यहाँ आप को दिखेगा" चाची उन्हे पास खड़ी हो गयी और फूफा ने एक दो लोगो को थोड़ा हटने को कहा अब वहाँ से चाची को कुछ साफ दिख रहा था पर चाची फूफा से काफ़ी चिपकी हुई थी उनकी चूतर फूफा के हाथ को छू रही थी, क्यूँ की वनहा पर काफ़ी भीड़ थी और सब लोग मंडप मे तिलक देखने के लिए बेताब थे और सबकी नज़र मंडप पर थी.

चाची: "सुक्रिया, राजेसजी"

फूफा: "अर्रे इसमे सुक्रिया की क्या बात है, आप कहे तो आप को उठा लू"

चाची: "कमल तो उठती नही, हमे क्या उठाएँगे"

फूफा: "क्यूँ..आप क्या कमल से भी भारी है"

चाचीने कुछ जवाब नही दिया और मुस्कुराने लगी, फिर फूफा की शरारत सुरू हुई वो धीरे धीरे चाची के पीछे आगाये, पर फूफा लंबे थे इसीलये वो उनका लंड चाची के चूतर के उपर था, चाची तो बेफिकर मॅडप की तरफ देखा रही थी, फूफा अब धीरे धीरे अपने राइट हॅंड से उनकी चूतर को छू रहे, पर उनकी नज़र तो चाची की चूंचियों पर थी, फूफा लंबे थे इसीलिए वो काफ़ी अच्‍छी तरह से चाची की चुचियों का मज़ा ले रहे थे. अचानक मेरे पिताजी वहाँ गुज़रे, चाची ने देखा और तुरंत वहाँ से हट गयी और अंदर आ गयी, कुछ देर बाद बाहर आई पर चाची जहाँ खड़ी थी वहाँ पर कोई और खड़ा होगया, फूफा ने देखा और कहा "कोमल्जी आप कोई टेबल लाकर, उसपर खड़ी हो जाओ, आप को साफ दिखेगा" पर वहाँ पर कोई भी टेबल या चेर नही था फिर फूफा ने कोने से एक लकड़ी का छोटा सा बॉक्स लाकर अपने पास रख दिया और बोले "इस पर खड़ी हो जाओ" चाची ने खड़े होने की कोसिस की पर वो हिलने लगा चाची उतर गयी.

फूफा: "क्या हुआ"

चाची" "नही मे इस पर से गिर जाउन्गि"

फूफा: "अर्रे नही गिरोगि"

चाची: "नही ये हिल रहा है"

फूफा : "तुम खड़ी हो जाओ मे तुम्हे पीछे से पकड़ लेता हूँ.."

चाची: "अर्रे नही मुझे शरम आती है, और कोई देखेगा तो क्या कहेगा"

फूफा: "ठीक है फिर वही खड़े रहो"

चाची के पास कोई दूसरा चारा नही था, वो उसे पर खड़ी हो गयी और फूफा ने पीछे से पकड़ लिया, अब चाची की चूतर फूफा के लंड के शीध मे थी. फूफा ने पीछेसे चाची की कमर को पकड़ा हुआ था पर उनकी उंगलिया (फिंगर) चाची के नाभि (नेवेल) को छू रही थी. चाची का ध्यान तो मंडप पर था, मे ये सब खिड़की के पास से देख रहा था, बाकी लोगो का भी ध्यान मॅडप पर ही था, हम काफ़ी पीछे थे इसीलिए कोई हमे देख नही सकता था.

फूफा का लंड काफ़ी तन गया था, पॅंट की उभार साफ दिख रही थी और फूफा बड़े मज़े से चाची की चूतर को अपने लंड से दबा रहे थे, अचानक चाची थोड़ी सहम गयी शायद चाची फूफा के लंड को महसूस कर रही थी उन्होने एक दो बार पीछे भी मूड कर देखा पर कुछ बोली नही, पर बोलती भी क्या.

चाची: "राजेसजी..लड़कीवाले तो बड़े कंजूष निकले, समान बहुत कम दिया है"

फूफा: "अर्रे लड़की दे रहे है और क्या चाहिए..पर आपके से तो ज़्यादा दहेज दे रहे है"

चाची: "अर्रे..वो तो बड़े भैया ने दहेज के लिए हां करदी थी नही तो वो भी नही मिलती, पिताजी तो दहेज के खिलाफ थे और इतनी खूबसूरत लड़की दे रहे थे और क्या चाहिए था"

फूफा: "बात तो ठीक कह रही है आप...अगर हम प्रकाश की जगह होते तो, हम दहेज देते आपको..आख़िर आप हो ही इतनी खूबसूरत"

चाची: "अब हमारी फिरकी मत लीजिए"

फूफा: "क्यूँ..तुम खूबसूरत नही हो"

चाची: "हमे क्या पता"

फूफा: "क्यूँ प्रकाश ने कभी कहा नही"

चाची: "अर्रे उनके पास हमारे लिए वक़्त कहाँ, ऑफीस से आए और किताब मे घुसे गये"

फूफा: "बेवकूफ़ है..."

 


चाची ने सिफ मुस्कुराते हुए जवाब दिया, इस दौरान बातों बातों मे फूफा ने अपने लेफ्ट हॅंड को थोड़ा उपर कर दिया, और चाची की चुचियों को उंगलियों से छू रहे थे. फूफा ने पूछा "क्यूँ कोमल्जी..अछा लग रहा है ना?" चाची ने कुछ जवाब नही दिया, इस पर फूफा की हिम्मत और भी बढ़ गयी वो अपने चेहरे को चाची के गर्दन के पास ले आए ऐसा लग रहा था जैसे वो चाची के सरीर की खुसबु ले रहे हो, चाची ये सब महसूस कर रही थी. फूफा ने फिर चाची के कान के पास अपने गाल लगाए और पूछा "कोमल्जी सब दिख रहा है ना?" चाची ने सर को हिलाते हुए हां बोला. फूफा का चेहर एक दम लाल होगया था अब उनसे भी कंट्रोल नही हो रहा था अगर अकेले होते तो आज चाची चुद गयी होती पर क्या करते इतने सारे लोग थे इसे ज़्यादा कुछ कर भी नही सकते थे. इस बार फूफा ने कुछ ज़्यादा ही हिम्मत दिखाई, अपने लेफ्ट हॅंड को उनकी ब्लाउस और राइट हॅंड को सारी के अंदर डालने की कोसिस करने लगे पर अब चाची से रहा नही गया, चाची फूफा के हाथ को हटाते हुए नीचे उतर गयी, इस दौरान चाची ने फूफा के तने हुए लंड को रगड़ दिया और उसे महसूस भी किया. चाची का चेहरा लाल हो गया और पसीना भी आ रहा था शायद वो फूफा के लंड की रगड़ से गरम हो गयी थी, वो बेड पर आ कर बैठ गयी और जग से पानी निकाल कर पीने लगी, फूफा दूर पर ही खड़े थे जब उन्होने चाची को पानी पीते देखा तो बोले "अर्रे कोमल्जी हमे भी पीला दीजिए, हम भी बहुत प्यासे है" चाची इतनी भी भोली नही थी कि फूफा की डबल मीनिंग वाली बात ना समझ सके, चाची ने मज़ाक मे कहा "इतनी भी गर्मी नही है कि आपको प्यास लग जाए"

फूफा: "अर्रे इतनी देर से आपको पकड़ के रखा था, थ्कुगा नही?"

चाची: "इतनी जल्दी थक गये, आप तो हमे उठाने वाले थे, इतने मे ही हवा निकल गयी

फूफा: "अगर ताक़त आज़माना है तो आजओ..हम पीछे नही हटेंगे"

चाची: "ठीक है फिर कभी देख लेंगे आपकी हिम्मत"

ये कहते हुए चाची ने फूफा को पानी ग्लास दिया फूफा ने पानी पिया और फिर डोर के पास खड़े हो गये. अभी तिलक की रसम ख़तम नही हुई थी, चाची बड़ी हिम्मत कर के फूफा के पास खड़ी हो गई पर उस लकड़ी के बॅक्स पे चढ़ने की हिम्मत नही हो रही थी, फूफा ने पूछा "क्यूँ तिलक नही देखना" चाची ने कहा "रहने दीजिए आप थक जाएँगे", इस बार फूफा ने बड़ी शरारती मुस्कान देते हुए चाची को देखा, चाची शरम कर नीचे देखने लगी शायद चाची को भी ये सब अछा लग रहा था पर डर भी था कि कोई अगर देख लेगा तो बदनामी हो जाएगी. तिलक की रसम तो ख़तम होगयि पर फूफा बेचारे प्यासे रह गये.

शादी के पहले हल्दी की रसम थी, घर मे तो जैसे होली का महॉल हो गया था, जो भी प्रेम चाचा को हल्दी लगाने जाता उसे हल्दिसे पीला कर्दिया जाता. मा और गाओं की कुछ औरते फूफा को हल्दी लगाने के लिए उनके पीछे भागी फूफा प्रेम चाचा के कमरे मे घुसे गये पर वहाँ भी बचने वाले नही थे क्यूँ कि वान्हा पहले से चाची और कुछ औरते हल्दी लिए खड़ी थी, सब ने मिल कर फूफा को जम कर हल्दी लगाई. जब मा और बाकी औरते कमरेसे से निकलने लगी फूफा ने थोड़ी हल्दी ली और चाची को पीछेसे पकड़ कर गाल और पीठ (बॅक) पर हल्दी लगाने लगे चाची जैसे ही पीछे घूमी फूफा ने कमर मे हाथ डाल कर पकड़ लिया और अपने गाल पर लगी हल्दी को उनके गालों पर मलने लगे इस दौरान चाची की चुचियाँ बुरी तरह से फूफा के शीने से दबी हुई थी, चाचीने जैसे तैसे अपने को उनसे अलग किया और एक कोने मे खड़ी होगयि "हाए राम...कोई इस तरह पकड़ता है, कोई देख लेता तो?"

क्रमशः.............

 
gataank se aage..............

Renu: "Raj tum ne to Bombay me bahut filmi Hero aur heroin dekhe honge"

Me: "haan dekhe to hai par sab ko nahi"

Me: "humari ek bar school ki picnic filmcity gayi thi, tab me 2, 4 hero aur heroin ko dekha tha"

Renu: "kis kis ko dekha tha"

Me: "Govinda, Mithun, Madhuri dikshit, Dimple aur bhi bahut sari"

Renu: "wo kya humse jyada khubsurat hoti hai"

Me: "arre nahi didi wo to make up karke khubsurat banti hai"

Renu: "tujhe kaise pata"

Me: "maa kahti hai"

Renu: "Raj tum konse class me padte ho"

Me: "6th standard me...aur didi tum?"

Renu: "me Matric me hun"

Me: "matlab?"

Renu:"10th Standard me"

Me: "didi aapko school kanha hai?"

Renu: "kafi dur hai bus se jana padta hai"

Is tarah hum kafi der chalte chalte baate karte rahe aur phir ghar pahunch gaye jate samay Renu ne kaha "Raj tum kal aaoge nadi par" me bola "agar aap mujhe tairna sikhaogi to jarur aaounga" phir Renu mere gal par haath fairte huye apne ghar chali gai.

Dheere dheere sham hone lagi aur sabhi mehman aur ristedhar Dalan me jama hone lage kuch der bad pata chala Ladkiwale bhi aa gaye hai, Dadaji, Pithaji, Chacha sab unka swagat ke liye Dalan ke door pe khade the, thodi der bad sabhi mehmano ki khatirdari suru hogai. Thodi der bad dadaji ne sab ka prichay humse karvaya aur Tilak ki rasam suru ho gai.

Tilak ki rasam suru hone wali thi, ye sab hamre ghar ke aangan me honewala tha, sara gaon jaise humre ki ghar me aa gaya tha ghar ek dam khacha khach bhara huya tha. Aangan ke bich me ek chotasa mandap banaya gay tha, mandap ke charo taraf humre ristedar aur gaon ke log jama the. Ghar ki ourate ye sab ground floor ke kamron se dekh rahi aur gaon ki ourate ye sab second floor se dekh rahi thi. Me bhi niche ek kone me khada tha aur wanhi se ya sab dekh raha tha, kuch der me ladkliwale aane lage aur mandap ke ek taraf baithne lage, mandap ke bich me panditji baithhein hye the, unhone Chacha ko bulane ko kaha. Chacha phir apne kamare se nikale aur mandap me baith gaye aur panditji ne rasam suru ki. Tabhi meri nazar upar Renu par padi maine use haath dikhaya aur Renu ne mujhe upar aane ka isara kiya, maine isara se kaha aata hun. Jaise hi me upar jane laga, dekha Fufa dadaji ke kamare ke pass khade hai aur chachi se baate kar rahe hai, fufa kafi hans hans kar baate kar rahe the jaise hi me wanha se gujra chachine pucha "kanha jar rahe ho?" me bola "chachi me upar ja raha hun" chachi boli "arre upar mat jao bahut log hai, tum yanhise dekho". Phir me wanhi ruk gaya, lekin mujhe kuch dikhai nahi de raha tha to me kamre ke andar jaa kar ek table par khada ho gaya aur khidki se dekhane laga ab sab saf dikh raha tha.

Aap logo ko bata du, fufa ka meri maa, chachi aur papa ki cousin sister se mazak wala rista tha, ghar ke iklote damad the, to unka maan (respect) bhi bahut karte the. Maa aur chachi fufa se bahut mazak karti, lekin fufa kabhi bura nahi mant the wo bhi lage haath mazak kar lete. Chachi fufa ke ek dam pass khadi thi, unke aage bhaut sari gaon ki ourate aur mard khade the, jisiski wajah se chachi ko mandap nahi dikh raha tha wo bar bar logo ke uapar se dekhnae ki kosis kar rahi thi par kuch bhi thik se nahi dikh rahat tha, fufa ne kaha "komalji aap mere pass khade ho jaiye, shaayad yanhase aap ko dikhega" chachi unhe pass khadi ho gayi aur Buafa ne ek do logo ko thoda hatne ko kaha ab wahan se chachi ko kuch saf dikh raha tha par chachi Buaf se kafi chipki hui thi unki chutar fufa ke haath ko chu rahi thi, kyun ki wnaha par kafi bheed thi aur sab log mandap me Tilak dekhane ke liye betab the aur sabki nazar mandap par thi.

Chachi: "sukria, Rajeshji"

Fufa: "arre isme sukria ki kya bat hai, app kanhe to aap ko utha lu"

Chachi: "Kamal to uthati nahi, hume kya uthayenge"

Fufa: "kyun..aap kya Kamal se bhi bhari hai"

Chachine kuch jawab nahi diya aur muskurane lagi, phir fufa ki shararat suru hui wo dheere dheere chachi ke piche aagaye, par fufa lambe the isilye wo unka lund chachi ke chutar ke upar tha, chachi to befikar madap ki taraf dekha rahi thi, fufa ab dhire dhire apne right hand se unki chutar ko chu rahe, par unki nazar to chachi ki chunchiyon par thi, fufa lambe the isiliye wo kafi achi tarah se chachi ki chuchiyon ka maza le rahe the. Achanak mere pithaji wanhase gujare, chachi ne dekha aur turant waahse hat gayi aur andar aa gayi, kuch der bad bahar aai par chachi janha khadi thi wanha par koi aur khada hogaya, fufa ne dekha aur kaha "Komalji app koi table lakar, uspar khadi ho jao, aap ko saf dikhega" par wanha par koi bhi table ya chair nahi tha phir fufa ne kone se ek lakdi ka chota sa box laakar apne pass rakh diya aur bole "is par khadi ho jao" chachi ne khade hone ki kosis ki par wo hilne laga chachi utar gayi.

Fufa: "kya hua"

Chach" "nahi me is par se gir jaaungi"

Fufa: "arre nahi girogi"

Chachi: "nahi ye hil raha hai"

Fufa : "tum khadi ho jao me tumhe pichse pakad leta hun.."

Chachi: "arre nahi mujhe sharam aati hi, aur koi dekhega to kya kahega"

Fufa: "thik hai fir wanhi khade raho"

Chachi ke pass koi dusra chara nahi tha, wo use par khadi ho gayi aur fufa ne piche se pakad liya, ab chachi ki chutar fufa ke lund ke shidh me thi. Fufa ne pichese chachi ki kamar ko pakada hua tha par unki ungaliya (Finger) chachi ke nabhi (Navel) ko chu rahi thi. Chachi ka dhyan to mandap par tha, me ye sab khidki ke pass se dekh raha tha, baki logo ka bhi dhyan madap par hi tha, hum kafi piche the isislye koi humein dekh nahi sakta tha.

Fufa ka lund kafi tan gaya tha, pant ki ubhar saf dikh rahi thi aur fufa bade maze se chachi ki chutar ko apne lund se daba rahe the, achanak chachi thodi saham gayi shaayad chachi fufa ke lund ko mahsus kar rahi thi unhone ek do bar piche bhi mud kar dekha par kuch boli nahi, par bolti bhi kya.

Chachi: "Rajeshji..Ladkiwale to bade kanjush nikale, saman bahut kam diya hai"

Fufa: "arre ladki de rahe hai aur kya chahiye..par aapke se to jyada dahej de rahe hai"

Chachi: "arre..wo to bade bhaiya ne dahej ke liye haan kardi thi nahi to wo bhi nahi milti, pithaji to dahej ke khilaf the aur itni khubsurat ladki de rahe the aur kya chahiye tha"

Fufa: "bat to thik kah rahi hai aap...agar hum Prakash ki jagah hote to, hum dahej dete aapko..akhir aap ho hi itni khubsurat"

Chachi: "ab humri firki mat lijiye"

Fufa: "kyun..tum khubsurat nahi ho"

Chachi: "hume kya pata"

Fufa: "kyun Prakash ne kabhi kaha nahi"

Chachi: "arre unke pass humre liye waqt kanaha, office se aaye aur kitab me ghuse gaye"

Fufa: "bevkoof hai..."

Chachi ne sif muskurate huye jawab diya, is dauran baton baton me fufa ne apne left hand ko thoda upar kar diya, aur chachi ki chuchiyon ko ungliyon se chu rahe the. Fufane pucha "kyun Komalji..acha lag rah hai na?" chachi ne kuch jawab nahi diya, is par fufa ki himmat aur bhi badh gayi unhone apne chehare ko chachi ke gardan ke pass le aaye aisa lag raha tha jaise wo chachi ke sarir ki khusbu le rahe ho, chachi ye sab mahsus kar rahi thi. Fufa ne phir chachi ke kan ke pass apne gal legaye aur pucha "Komalji sab dikh rah hai na?" chachi ne sar ko hilate huye haan bola. Fufa ka chehar ek dam lal hogaya tha ab unse bhi control nahi ho rah tha agar akele hote to aaj chachi chud gayi hoti par kya karte itne sare log the ise jyada kuch kar bhi nahi sakte the. Is bar fufa ne kuch jyada hi himmat dikhai, apne left hand ko unki blouse aur right hand ko sari ke andar dalne ki kosis karne lage par ab chachi se rah nahi gay, Chachi ne fufa ke haath ko hatate huye niche uthar gayi, is dauran chachi ne fufa ke tane huye lund ko ragad diya aur use mahsus bhi kiya. Chachi ka chehra lal ho gaya aur pasina bhi aa raha tha shaayad wo Buafa ke lund ki ragad se garam ho gayi thi, wo bed par aa kar baith gayi aur jugse pani niakal kar pine lagi, fufa door par hi khade the jab nhone chachi ko pani pithe dekha to bole "arre Komalji hume bhi pila dijiye, hum bhi bahut pyasse hai" chachi itni bhi bholi nahithi ki fufa ke duble menaing wali bat naa samjh sake, Chachi ne mazak me kaha "itni bhi garmi nahi hai ki aapko pyass lag jaye"

Fufa: "arre itni der se aapko pakad ke rakha tha, thakunga nahi?"

Chachi: "itni jaldi thak gaye, aapto humein uthane wale the, itne me hi hawa nikal gayi

Fufa: "agar takat aazmana hai to aajao..hum piche nahi hatenge"

Chachi: "thik hai phir kabhi dekh lenege aapki himmat"

Ye kahte huye chachi ne fufa ko pani glass diya fufa ne pani piya aur phir door ke pass khade hoagye. Abhi Tilak ki rasam khatam nahi hui thi, chachi ne badi himmat kar ke fufa ke pass khadi ho gai par use lakdi ke bax pe chadhne ki himmat nahi ho rahi thi, fufa ne pucha "kyun tilak nahi dekhna" Chachi ne kaha "rahne dijiye aap thak jayenge", is bar fufa ne badi shararti muskan dete huye chachi ko dekha, chachi sharam kar niche dekhane lagi shaayad chachi ko bhi ye sab acha lag raha tha par dar bhi tha ki koi agar dekh lega to badnami ho jayegi. Tilak ki rasam to khatam hogayi par fufa bechare pyase rah gaye.

Shadi ke pahle haldi ki rasam thi, ghar me to jaise holi ka mahol ho gaya tha, jo bhi Prem chacha ko haldi lagane jata use haldise pila kardiya jata. Maa aur Gaon ki kuch ourate fufa ko haldi lagne ke liye unke piche bhagi fufa Prem chacha ke kamare me ghuse gaye par wanha bhi bachche wale nahi the kyun ki wanha pahle se chachi aur kuch ourate haldi liye khadi thi, sab ne mil kar fufa ko jam kar haldi lagai. Jab maa aur baki ourate kamrese se nikalne lagi fufa ne thodi haldi lee aur chachi ko pichese pakada kar gal aur pith (back) par haldi lane lage chachi jaise hi piche ghumi fufa ne kamar me haath dal kar pakad liya aur apne gal par lage haldise unki galon par malne lage is dauran chachi ki chuchiyan buri tarah se fufa ke shine se dabi hui thi, Chachine jaise taise apne ko unse alag kiya aur ek kone me khadi hogayi "haye Ram...koi is tarah pakadta hai, koi dekh leta to?"

kramashah.............

 
गतान्क से आगे..............

फूफा: "तो क्या..कह देते हल्दी लगा रहे थे"

चाची: "हमे नही लगवानी आपसे हल्दी...हमारी तो जान ही निकल दी आपने"

फूफा: "तुम्हारा इतने मे ही दम निकल गया...अगर थोड़ी देर और पकड़ के रखता तो?"

चाची: "हम तो बेहोश ही हो जाते"

फूफा: "अर्रे पकड़ने से भी कोई बेहोश होता है, उसके लिए तो हमे और भी कुछ करना पड़ता"

चाची: "छी कितनी गंदी बाते करते है आप..बड़े बेशरम हो"

इतना बोलते हुए चाची भी कमरे बाहर निकल आई पर नज़र फूफा पर ही थी फूफा भी मुस्कुराते हुए चाची को ही देख रहे थे, मे समझ नही पा रहा था कि चाची को ये सब अच्छा लग है या चाची बड़ी भोली है. थी. हल्दी से फूफा का चेहरा पहचान मे नही आ रहा था, हम सब बच्चे वान्हा मज़े कर रहे थे और बाकी लोगो को हल्दी लगाने मे हेल्प कर रहे थे बड़ा मज़ा आ रहा था, धीरे धीरे शाम होने आई और सब लोग शांत होने लगे और अपना अपना चेहरा धोने लगे, फूफा नल के पास खड़े थे और साबुन (सोप) माँग रहे थे, तभी मैने चाची से कहा फूफा साबुन माँग रहे है, चाची साबुन ले कर नल के पास पहुँची फूफा को देख कर हस्ने लगी.

चाची: "दूल्हे से ज़्यादा हल्दी तो आप को ही लगी है राजेसजी"

फूफा: "लगाने वाली भी तो तुम ही हो"

चाची: "तो क्या कमल से लगवाना था"

फूफा: "कमल एक बार लगा भी देती तो क्या फरक पड़ता, हम तो कमल को रोज लगाते है"

चाची: "हाए..राजेसजी ये क्या कह रहे है आप"

फूफा: "अर्रे मे तो हल्दी की बात कर रहा हूँ तुमने क्या समझ लिया"

चाची: "जी..कुछ नही..अप बड़े वो है"

और चाची वान्हा से शर्मा के भागने लगी, फूफा ने चाची का हाथ पकड़ लिया रोका और कहा "अर्रे जा कहाँ रही हो, ज़रा इस हल्दी को तो साफ करने मे मदद कर दो, थोड़ा पानी दो ताकि मे अपना चेहरा धोलु" चाची नल से एक लोटे मे पानी लेकर उन्हे हाथ पर पानी डाल रही थी और फूफा चेहरा धो रहे थे, पानी डालते समय चाची नीचे झुकी हुई थी और उनका पल्लू नीचे हो गया था जिसे उनकी गोरी गोरी चूंची (बूब्स क्लीवेज) दिख रही थी, झुकने कारण बूब्स और भी बड़े दिख रहे थे, फूफा भी झुक कर अपना चेहरा धो रहे थे और उनकी नज़र बार बार चाची के चूंची पर जा रही था, फिर चाची को एहसास हुआ कि उनकी चूंची ब्लाउस से बार आ रही है तो उन्होने तुरंत पल्लू से ढक लिया, इस दरमियाँ फूफा और चाची की नज़र एक दूसरे मिल गयी फूफा मुस्कुरा रहे थे, चाची तो शरम से पानी पानी हो रही और चाची ने एक टवल फूफा को दिया, पर फूफा ने जान बूझ कर टवल लेते समय गिरा दिया चाची फाटसे लेने के लिए नीचे झुकी और उनकी चूंचिया का दर्शन फिर से फूफा को हुआ. चाची शरमाते हुए बोली "राजेसजी आप भी ना. बहुत परेशन करते है" फूफा बोले "ठीक है अगली बार परेशन करने से पहले पूछ लूँगा... कि आप को करूँ या नही?"

फूफा दुबले मीनिंग मे बात कर रहे थे, जो चाची सब समझ रही थी.

चाची: "हमे परेशान करने के लिए पहले से कोई है"

फूफा: "कॉन है..जो आपको परेशान करता हमे बताओ उसकी खबर लेते है"

चाची: "आए बड़े खबर लेने वाले, साल मे एक बार तो चेहरा दिखाते है, आप देल्ही अपने भाई के ससुराल आए थे, हफ्ते भर वान्हा रहे पर एक बार भी हमारे घर नही आए"

फूफा: "अर्रे वो..मे घूमने नही आया था छोटे भाई के ससुर हॉस्पितल मे अड्मिट थे इस लिए उन्हे देखने गया था"

चाची: "तो क्या एक दिन भी आपको समय नही मिला"

फूफा: "अर्रे नाराज़ क्यूँ होती हो, इस बार आउन्गा मे और हफ्ते भर रहूँगा देखता हू कितनी खातिरदारी होती है"

चाची: "वो तो आने पर हो पता चलेगा"

तभी मा ने उपर से आवाज़ दी, चाची फिर उपर सीढ़ियों से जाने लगी फूफा वन्हि खड़े उनके मोटे चूतर और कमर को हिलता हुआ देख रहे थे, मे वन्हि खड़ा ये सब देख रहा था.फिर फूफा दालान मे चले गये. इस के बाद भी कई बार फूफा को चाची से मज़ाक करते देखा पर मुझे ये सब नॉर्मल लगा.
 


पर एक दिन मे उनका ये मज़ाक समझ नही पाया, मे बुआ के कमरे था फूफा भी टेबल पर बैठ कर कुछ लिख रहे थे, मे उनसे काफ़ी दूरी पर था और खिड़की से नीचे दालान की तरफ देख रहा था, तभी चाची वान्हा आई शायद उन्हे कुछ लेना था, अंदर आते ही उनकी नज़र फूफा पर पड़ी उन्होने एक शरारती मुस्कान देते हुए फूफा के पास से गुज़री फूफा भी मुस्कुराते हुए देख रहे थे, चाची नीचे झुक कर एक बोरे से चने की दाल निकाल रही थी, झुकने से उनके चूतर काफ़ी कामुक लग रहे थे और चूतर की दरार (आस क्रॅक) दिख रही थी. फूफा की तो नज़र ही नही हट रही थी उनके चूतर से, चाचीने भी एक दो बार घूम कर फूफा को देखा, फूफा ने पूछा "क्या निकाल रही हो?"

चाची: "दाल.."

फूफा:"क्या दाल?"

चाची" "अर्रे.. चने की दाल"

फूफा: "अछा दाल..मे तो कुछ और ही समझ रहा था"

चाची: "आप तो हमेशा, कुछ और ही समझ लेते है" इतना बोलते हुए वहाँ से गुज़री तब तक फूफा ने उनकी कमर पर चींटी ले लेली और उनका हाथ पकड़ लिया.

चाची: "हाए राजेसजी..आप तो बड़े बेशरम हो.."

फूफा: "बेशरम बोलही दिया है तो बेशरम भी बन जाते है"

चाची: "राजेसजी.. मेरा हाथ छोड़िएना, कोई देख लेगा तो क्या कहेगा"

फूफा: "किसीकि मज़ाल जो हमे कुछ कहदे"

चाची: "छोड़िएना...."

फूफा: "एक शर्त पर..मैने बहुत दिनो से मालिश नही करवाया है, तुम्हे मेरी मालिश करनी होगी...और वैसे भी हमारी बीवी के पास वक़्त नही है"

चाची: "तो क्या आपने हमे बेकार समझ रखा है"

फूफा: "अर्रे नही आप तो बड़े काम की चीज़ है..पर प्लीज़ ज़रा मेरी मालिश करदो"

चाची: "अभी?..यहाँ?...नही नही रात को कर दूँगी"

फूफा: "अर्रे आपको को रात को कहाँ फ़ुर्सत मिलेगी...प्रकासजी छोड़ेगा ही नही"

चाची: "अर्रे ऐसी कोई बात नही..वैसे भी आज कल वो शादी के काम मे बहुत बिज़ी है"

फूफा: "अछा तो साले को टाइम नही है.. इतना बड़ा काम छोड़ कर बेकार के काम करता है"

चाची: "राजेसजी छोड़ दीजिए ना..देर हो रही है दीदी इंतज़ार कर रही होगी..मैने आपकी रात को ज़रूर मालिश कर्दुन्गि"

फूफा: "ठीक है छोड़ देता हूँ...पर रात को हम आपको इंतज़ार करेंगे"

चाची: "जी ज़रूर आउन्गि"

ये बोल कर चाची वान्हा से चली गयी पर मे सोच रहा था, चाचीने कभी चाचा की मालिश नही की और फूफा की मालिश के लिए हां बोल दिया, पता नही मेरे अंदर एक अजीब सी कुलबुलाहट हो रही मैने सोचा क्यूँ न आज फूफा पे नज़र रखी जाए.

 


गाओं मे लोग रात को जल्दी ही सो जाते है, रात के 8 बजे होंगे सब लोगोने खाना खा लिया था और सोने की तैयारी कर रहे थे. मैने देखा फूफा छत पर सोने जा रहे थे, छत पर सिर्फ़ छोटे बच्चे ही सोते थे, औरते घर मे और ज़्यादा तर मर्द लोग दालान मे ही सोते थे. फूफा ने टेरेस के एक कोने की तरफ अपना बिस्तर लगा दिया था, पर उन्हे नीद नही आ रही थी उन्होने अपने जेब से सिगरेट का पॅकेट निकाला और पीने लगे, मे और चाची का बड़ा बेटा विकाश उनके पास के बिस्तर पर ही सो रहे थे, फिर फूफा ने अपनी कमीज़ और पॅंट निकाली और लूँगी पहन ली. तकरीबन 1घंटे. के बाद मुझे किसी के आने की आहट सुनाई दी मैने तुरंत अपनी आँखे बंद करली और महसूस किया कि कोई हमारे पास खड़ा है, टेरेस पर लाइट नही थी पूरा अंधेरा था मैने धीरे से अपनी आँख खोली देखा चाची हमारे उपर चादर डाल रही थी, फिर चाची हमारे पास बैठ गयी और देखने लगी की हम सोए है की नही फिर कुछ देर मे वो उठी और फूफा के बिस्तर पास जा रही थी, चाची के हाथ मे एक तैल की सीसी थी, चाची फूफा के बिस्तर पर बैठ गयी और उन्हे जगाया.

फूफा: "अर्रे तुम आगाई.."

चाची: "हमे बुला कर खुद घोड़े बेच कर सो रहे हैं"

फूफा: "अर्रे नही मे तो आप का इंतज़ार कर रहा था..मुझे लगा आप नही आएँगी"

चाची: "कैसे नही आती..पहली बार तो आपने हम से कुछ माँगा है"

फूफा: "तो फिर सुरू हो जाओ"

फूफा उल्टा लेट गये और चाचीने सीसी से टेल निकाल कर अपने हाथों पर लिया और फूफा के पीठ (बॅक) पर लगाने लगी, फूफा ने कहा "कोमल्जी आपके हाथ बड़े मुलायम है"

चाची: "वैसे भी औरतों के हाथ मर्दो को मुलायम ही लगते है"

फूफा: "पर आप के हाथ की बात ही कुछ निराली है..आपके हाथो मे तो जादू है..प्रकाश बड़ा नसीब्वाला है"

चाची: "अब ज़्यादा तारीफ करने की कोई ज़रूरत नही"

फूफा: "ठीक है नही करता..लेकिन क्या रात भर आप मेरे पीठ की ही मालिश करोगी"

चाची: "तो घूम जाइए ना"

फूफा घूम गये और चाची उनके सीने और हाथ पर मालिश करने लगी, फूफा लगातार चाची को घूर रहे थे, चाची उन्हे देख कर शरमा गयी और चेहरा नीचे करके मालिश करने लगी. चाची के कोमल हाथ फूफा के पूरे सीने पर फिर रहे थे, फूफा भी थोड़े गरम हो गये थे उनका लंड काफ़ी तन गया था और लुगी भी थोड़ी सरक गयी थी, लंड का उभार शायद चाची ने भी देखा था पर वो चुप चाप फूफा की मालिश कर रही थी, तभी फूफा ने कहा “कोमल्जी ज़रा पैरो की भी मालिश कर दो” चाची बिना कुछ बोले उनके पैरों की मालिश करने लगी, कुछ देर बाद फूफा बोले “कोमल्जी जर उपर जाँघ (थाइस) की तरफ भी तैल लगा दो” चाची एक दम सहम गयी, थाइस पर कैसे हाथ रखती उनका अंडरवेयीर तो तना हुआ था पर चाची हिम्मत कर करके उनके थाइस पर मालिश करने लगी शायद चाची पहली बार की गैर मर्द के थाइस को छू रही, फूफा का लंड तो कपड़े फाड़ कर बाहर आने को तैयार था. थाइस पर मालिश करते समय चाची हाथ एक दो बार उनके अंडरवेर को छू गया था, जिससे फूफा और भी गरम हो गये थे. शायद चाची भी फूफा के पैर के घने बालो (हेर) का मज़ा ले रही थी, कुछ देर बाद फूफा ने चाची के थिग्स पर हाथ रख कर कहा “कोमल्जी ज़रा ज़ोर्से दबाइएना बड़ा अछा लग रहा है” चाची फूफा के हाथ को अपनी थाइस पर महसूस कर थी, चाची भी शायद कुछ हद तक गरम हो रही थी शायद शादी के दौरान उनका संभोग (सेक्स) चाचा से नही हुआ हो. फूफा फिर अपना हाथ उनके थाइस से हटा कर चाची की कमर पर प्यार से फिराने लगे, चाची बोली “गुदगुदी हो रही है”

फूफा: “आप तो अपने नाम से भी ज़्यादा कोमल है”

चाची: “कोमल तो हूँ, देखिए दोपहर मे जो आपने चींटी ली थी उसका निशान अभी भी है”

फूफा: “कहाँ..बताइए?”

चाची अपनी सारी को हटा कर कमर दिखाने लगी, फूफा को मौका ही चाहिए था, वो हाथ से उनकी कमर को सहलाने लगे और हाथ को थोडा पीछे करके सारी के अंदर हाथ डाल दिया, हाथ पूरी तरह अंदर नही गया था, पर वो चाची के चूतर को ज़रूर छू रहे थे.

क्रमशः.............

 
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