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काजल ने चाहत की बात सुनी तो उसे अहसास हुआ वो गलत कह रही थीं । वो बाहर जाने को हुई तो अंश ने उसका हाथ पकड़ा और और क्लास की ही एक लड़की रीना के पास ले जाकर - अनिल का तुमसे क्या रिश्ता है..???
रीना ने कुछ नहीं कहा तो अंश ने उसे घूरते हुए कहा -plz बोलो..
रीना ने झट से कहा - बॉय फ्रेंड है मेरा....
काजल ने सुना तो उसका दिल ही टूट गया वो लाचारी के साथ अंश को देखने लगी।
तो अंश - ये बात मै और चाहत... बहुत पहले से जानते थे.. पर हमने तुम्हे बताया नहीं...क्युकी चाहत तुम्हे हर्ट नहीं करना चाहती थी...
काजल ये सुन बाहर की तरफ जाने लगी जहा चाहत गई थी तब अंश ने उसे रोक कर कहा - दूर रहो उससे... पहले ही तुमने उसे बहुत हर्ट कर दिया है... अब और नहीं...
काजल रुक गई अब उसके आंखो में पश्चाताप के आंसू थे।
चाहत दौड़ते हुए ग्राउंड में आई । वो वहीं लगी टेबल पर बैठ गई। और रोने लगी। अध्यन उसके पीछे आया ही था तभी उसने देखा मि अरोड़ा ग्राउंड के पास से ही जा रहे है। उन्हे आता देख अध्यन रुक गया। मि अरोड़ा की नजर चाहत पर पड़ गई थी। वो चाहत के पास बैठ गए । चाहत सिर झुकाए बैठी थीं और बस रोए जा रही थी। थोड़ी देर बाद चाहत का रोना सिसकियों में बदल गया । उसने सिर उठाया फिर सीधा देखने लगी। उसके दिमाग में यही चल रहा था आखिर उसने कहा गलती कर दी काजल की सोच उसके लिए ऐसी क्यू थी जबकि वो तो उसकी बेस्ट फ्रेंड थी ना वो भी दस सालो से। एक बार फिर उसकी आंखे भीग गई।
तभी उसकी तरफ एक रुमाल आया। चाहत ने पहले रुमाल को देखा फिर अपनी साइड में देखा जहा मि. अरोड़ा बैठे थे चाहत झट से उठ गई और कहा - good afternoon sir.. उसने जल्दी से अपने हाथो को आंसू पोछने के लिए उठाया तभी मि अरोड़ा ने कहा - चाहत .... फिर आंखो से रुमाल की तरफ इशारा किया।
चाहत ने रुमाल लिया और चेहरा साफ कर रुमाल पकड़े हुए सुबकते हुए कहा - सर इसे मै साफ़ कर के वापस कर दूंगी...
मि. अरोड़ा ये सुन मुस्कुराते हुए बोले - ठीक है ...
फिर वो चाहत को कुछ देर देखते रहें थोड़े देर बाद उन्होंने उंगली से चेयर की तरह इशारा करते हुए कहा कहा - यहां बैठो...
चाहत ने कोई सवाल नही किया वो चुप चाप उनके बगल में बैठ गई।
मि अरोड़ा चाहत को देखते हुए बोले - चाहत बेटा वो शीशम का पेड़ देख रही हो... ये बोल उन्होंने अपनी उंगली सामने लगे पेड़ की तरफ कर दी । चाहत भी उधर देखने लगी।
मि . अरोड़ा बात जारी रखते हुए - उस पेड़ को मैंने तब लगाया था.. जब मै तुम्हारी ऐज का था.. चाहत उनकी तरफ हैरानी से देखने लगीं तो वो मुस्कुराते हुए बोले - ये बात बहुत कम लोग जानते है ...मै इस स्कूल का एक्स स्टूडेंट रह चुका हूं.. फिर चाहत की तरफ पलट कर बोले - जब मैंने वो पेड़ लगाया था तो उसे लगाते हुए मैंने अपने पापा से सवाल किया ....आप इसे क्यू लगा रहे है...इसका तो कोई यूज ही नहीं... मेरे पापा तब यहां मैथ्स के टीचर थे। उन्होंने कहा कभी कभी हमे कुछ चीज़े बिना किसी उम्मीद से करना
चाहिए ... क्योंकि हम उम्मीद लगा कर बैठते है... तो उसके पूरे होने की संभावना कम होती है... इसीलिए हमें उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
चाहत को उनकी बात समझ तो आई पर उसे ये समझ नहीं आ रहा था सर कहना क्या चाहते है...और अभी क्यू कह रहे है.... मि अरोड़ा ने बात जारी रखते हुए कहा - मुझे भी उनकी बाते उस टाइम समझ नहीं आई थी..जैसे अभी तुम्हे नहीं आ रही.....फिर मैंने उनकी बात मानी और वो पेड़ लगा दिया .. पर उस पेड़ के आस पास ढेर सारे फूलों के पौधे लगा दिए.. मुझे वो पेड़ पसंद नहीं था तो मै अक्सर उस पेड़ को इतना टाइम नहीं देता था.. जितना मै उन पौधों को देता था.. बस पानी दे दिया करता था.. फिर पलट कर उसकी तरफ देखता ही नहीं था.. पर फिर भी वो धीरे धीरे बढ़ने लगा... बाकी पौधे भी उसके साथ बढ़ने लगे... पर तुम्हे पता है.... वो फूल के पौधे बहुत नाज़ुक थे.... वो ना मौसम की मार सह पाते थे.. ना बच्चो की मस्ती.... वो बस हर बार मुरझा जाते थे.... मुझे बार बार उनका ख्याल रखना पड़ता था... एक दिन मैंने देखा मेरा लगाया शीशम का पेड़ बढ़ने लगा है... उसे अब मुझे सिंचने की जरूरत नहीं वो बस बढ़ता ही जा रहा है.. मैंने उसके पास और भी बहुत सारे पौधे लगाए .. जो एक तय सीमा तक रहे फिर मुरझा गए.. पर वो शीशम का पेड़ ऐसे ही रहा ...जैसा आज है...बड़े होते ही इसने लोगों को
छाव और ठंडी हवा देना शुरू कर दिया.. पहले यहां ये बाउंड्री नहीं थी तो सारे राहगीर यही इसी पेड़ के पास रुक कर आराम किया करते थे.... उन सभी लोगों को आराम करते देख मुझे अजीब सी खुशी मिलती थी।....
इतना बोल मि. अरोड़ा चाहत की तरफ मुड़े फिर उसके गालों पर आए आंसुओ कि एक बूंद को साफ़ करते हुए बोले - बेटा अगर तुम्हे बनना है तो .... उस पेड़ की तरह बनो ... जिसे इस बात से फर्क नहीं पड़ता कोई उसका ख्याल रख रहा है या नहीं... उसे बस खुद को आगे बढ़ना है ये याद था... उसे किसी से कोई उम्मीद नहीं थी... जो मिला जितना मिला वो उसी में खुश होकर निरंतर बढ़ता रहा .... सभी को छाव और ठंडी हवा देते हुए .. और आज देखो वो कितनी दृढ़ता के साथ खड़ा है..
मि अरोड़ा ने फिर अपनी उंगली को चारो तरफ घुमाते हुए बोले - ये सारे पेड़ मैंने बाद में लगाए है... पर जो सुकून मुझे वो शीशम का पेड़ देता है... वो ये सब नहीं देते... जानती हो क्यू... उनके ऐसा कहते ही चाहत ने सिर ना में हिलाया तो मि अरोड़ा मुस्कुराते हुए बोले - क्युकी मैंने उसे बिना किसी उम्मीद के यू ही लगाया था.... पर उसने उम्मीद से भी बढ़ कर काम किया ...
पहुंची फिर उनको गले से लगा लिया। चाहत की हाइट उस समय काफी छोटी थी वो मुश्किल से ही उनके सीने तक पहुंच रही थीं। चाहत के ऐसे गले लगने से मि. अरोड़ा थोड़ा सा असहज हो गए पर जब उन्होंने सिर झुका कर चाहत के चेहरे को देखा जिसमे सुकून के भाव थे ये देख उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई। चाहत उनसे दूर हुई और फिर कहा - थैंक यू सर फिर उसने झट से अपनी पलके नीची करते हुए कहा - एंस सॉरी भी .. वो मैंने आपको ऐसे बिना पूछे गले लगा लिया उसके लिए..
मि.अरोड़ा वो चाहत की मासूमियत भरी बात सुन मुस्कुराए फिर चाहत के सिर पर हाथ फेर अपने केबिन की तरफ चले गए...
चाहत ने अब अच्छा महसूस किया। जब वो मि अरोड़ा के गले लगी थी उसे लगा जैसे उसने शिव जी को गले लगाया हो। उसके चेहरे पर बहुत बड़ी स्माइल आ गईं उसी स्माइल के साथ वो पीछे मुड़ी तो देखा अध्यन हाथ बांधे खड़ा था और चाहत को मुस्कुराते हुए देख रहा था। चाहत उसके पास आई फिर उसने मुस्कुराते हुए कहा - चले....
चाहत ने भी हा में सिर हिला दिया और उसके साथ चलने लगी।
वो थोड़ी देर रुक गए और चाहत को देखने लगे शायद वो चाहत के चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रहे थे उन्होंने थोड़ी देर बाद कहा - चाहत ये पेड़ की इच्छा थी... उसे कैसे खुद को ढालना है.. वो ऐसा था जिसे किसी के कुछ कहने से फर्क ना पड़े... जो हर तरह के मौसम की मार को सहे... पर अपनी गति ना रोके... और ना ही सामने वाले से किसी तरह की उम्मीद करे... उम्मीद वो खुद से करे .. की कैसे वो खुद को इतना निखार सके जिससे उसकी लोग उसकी खूबसूरती के साथ उसकी शीतलता को भी महसूस कर सकें ।
मि. अरोड़ा चाहत की आंखो में देखते हुए - बच्चे ये लाइफ है..... यहां हर कदम में मुश्किलें और तकलीफे है... पर सुकून भी यही है.. तो उस सुकून, उस खुशी के साथ रहो.. और जो हो रहा है उसे होने दो...
चाहत अब उनकी पूरी बात समझ चुकीं थी उसने हा में सिर हिलाया मि अरोड़ा ने भी उसके सिर पर हाथ फेरा फिर कहा - गुड गर्ल .... चलो अब क्लास में जाओ.. ये बोल वो वहा से जाने लगे।
तभी पीछे से चाहत - सर ...
मि अरोड़ा ने मुड़ कर उसे देखा तो वो भागते हुए उनके पास
दोनों थोड़ी देर में क्लास पहुंचे चाहत सीधा अपने चेयर के पास आ गई और अपनी कॉपी निकाल कर बैठ गई।
अंश दौड़ कर अध्यन के पास आया। उसने अध्यन से कहा - क्या वो अब ठीक है...
अध्यन ने हा में सिर हिलाया। अंश ने राहत की सांस ली अध्यन उसे देख कर - भाई मुझसे ज्यादा तो तू परेशान हो रहा था..
अंश अध्यन को देख कर चिढ़ते हुए - तो क्या... नहीं होऊ... एक तो उसकी गलती नहीं ... फिर उस पर ऐसे इल्ज़ाम.... भाई तू बर्दाश्त कर सकता होगा ... मै नहीं समझा...
अध्यन अंश के कंधे पर हाथ रखते हुए उसने अंश को देखा फिर अपनी आई विंक करते हुए बोला - हा भाई समझता हूं.... फिर हसने लगता है।
अंश उसका हाथ झटकते हुए - भाग यहां से...और फिर वो चाहत के पास जाने लगा। उसने देखा काजल दोबारा चाहत के पास जा रही है अंश ये देख गुस्से से चाहत की तरफ जाने लगा तो अध्यन ने उसे रोक कर कहा - नहीं वो खुद हैंडल कर लेगी... अंश ने उसे हैरानी से देखने लगा तो उसने पलके झपका दी।
तुझसे.... ये बोलते हुए उसने अपनी नजर उठाई तो देखा चाहत सपाट चेहरा लिए उसे शांत नज़रों के साथ देख रही थीं। उसका ऐसे देखना काजल को समझ नहीं आया। उसने आगे बढ़ कर चाहत के हाथ पर अपना हाथ रखते हुए पूछा - क्या हुआ... माही...
चाहत ने मुस्कुराते हुए कहा - काजल तुझे याद है... जब हम 7th standard में थे तो हिंदी की बुक में एक दोहा था.. काजल ने उसकी बात सुनी पर उसे समझ नहीं आया कि चाहत किस दोहे की बात कर रही है। उसने वैसे ही चाहत को देखा तो चाहत ने कहा -
"रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाए,,
टूट पे फिर ना जुरे, जूरे गांठ परी जाय "
मतलब ये कि "रहीम दस" जी कहते है कि प्रेम का नाता नाजुक होता है यदि यह प्रेम का धागा एक बार टूट जाता है तो फिर इसे मिलना कठिन होता है, और यदि मिल भी जाए तो टूट हुए धागो के बीच गांठ पर जाती हैं।
ठीक ऐसी ही थी हमारी दोस्ती पर जब तूने मुझे गलत समझा
इधर काजल चाहत के पास पहुंची चाहत कॉपी निकाल कर कुछ पढ़ रही थी काजल ने चाहत को पुकारा तो चाहत ने उसे देखा काजल उसके सामने आकर - आई एम् सॉरी... वो...इससे ज्यादा कुछ बोल पाती उससे पहले चाहत ने कहा - इट्स ओके..और दोबारा अपनी कॉपी की तरफ देखने लगी।
काजल को थोड़ा अजीब लगा उसने चाहत के कंधो पर हाथ रखा तो उसने सिर उठा कर पूछा - कुछ और भी कहना है तुझे... काजल ने ये सुन हा ने सिर हिलाया।
तो चाहत कॉपी बंद करते हुए बोली - ठीक है बोल...
काजल ने पहले गहरी सांस ली फिर कहा - मुझे अनिल की असलियत पता नहीं थी.. उसने जो भी कहा मै मान गई... जब उसने मुझे तेरे बारे में बताया तो मुझे लगा शायद वो सही कह रहा है.. पर मुझे तेरी बातो पर भरोसा करना था ... आई एम रियली सॉरी.... ऐसे बोलते ही उसकी आंखे गीली हो गई।
इन सब के उलट चाहत एकदम नॉर्मल थी वो बस काजल को देख रही थी काजल के आंसू देख उसके दिल में हुक सी उठी पर उसने खुद को संभाल लिया। काजल ने अपने आंसु साफ़ करते हुए बोली - बट अब नहीं .... अब से मै कभी भी किसी की भी बातो में नहीं आउंगी... हम हमेशा साथ रहेंगे.. और मै
तो .... इस दोस्ती के धागे में गांठ पड़ गई.... अब अगर इसे दोबारा मिलाया गया तो ... वो गांठ हमे दोबारा मिलने नहीं देगी... इसीलिए हमारी दोस्ती आज अभी यही ख़तम होती है।
काजल अवाक होकर उसे देखते रही उसने कहा - पर चाहत एक गलती तो हर कोई माफ करता है... तो तुम मुझे माफ़ भी नहीं करोगी...
चाहत ने उसकी तरफ देखते हुए कहा - माफ तो मैंने तुझे ... कब का कर दिया... पर अब हमारा रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा... तूने एक बार नहीं बल्कि दो बार मुझे गलत समझा... मैंने तब भी तुझे माफ कर दिया.... पर तेरे साथ मै दुबारा से वैसे ही behave नहीं कर पाऊंगी .....
काजल ने उसके बगल में बैठ कर कहा - पर....
तभी चाहत उसे टोकते हुए - तू खुद बता.... अगर यही हरकत मैंने की होती तो ... क्या तू मुझे माफ़ कर पाती.. काजल एक लड़की सब बर्दाश्त कर सकती है पर... जब कोई उसके charecter पर उंगली उठाए.... वो ये कभी बर्दाश्त नहीं कर सकती... सो plz अब नहीं....
काजल ने फिर कुछ नहीं कहा बस वहा से उठ कर अपने डेस्क के पास आ गई। शायद उसे ये समझ आ गया था उसने क्या किया था.....
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वर्तमान समय...
चाहत और डॉली अब बेड पर खामोश बैठ गए ।
डॉली ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा - उसके बाद क्या तुमने.. कभी काजल से बात नहीं की....
चाहत गहरी सांस लेते हुए - नहीं ऐसा नहीं है.... हमारी बाते होती थी... पर जो रिश्ता पहले था ... अब वो नहीं रहा.... उसके बाद वो जगह ..... वो बेस्ट फ्रेंड वाली जगह मैंने फिर किसी को नहीं दी.. या यूं कहें तो जरुरत ही नहीं पड़ी.... अध्यन और अंश ने फिर कभी मुझे इस बात का अहसास ही नहीं करवाया .... की मेरी कोई बेस्ट फ्रेंड नहीं है... वो हर जगह .... हर समय मेरे साथ रहे .... कभी भी मुझे किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी... हर बार मेरी हर बात को बिना कहे ही समझ जाते थे..
ये बोल चाहत ने डॉली को देखा जो उसे ही देख रही थी । डॉली ने चाहत का हाथ पकड़ कर उसे कहा - पर इसका
मतलब ये तो नहीं ना ... की तुम इस खूबसूरत रिश्ते से मुंह ही मोड़ दो... चाहत दोस्ती बहुत खास होती है.... ये एक ऐसा गिफ्ट है .... जो हर कोई खुद को देता है .... जो बहुत अनमोल होता है...
चाहत ने मुस्कुराते हुए कहा - ये बात मै जानती हूं.... इसीलिए मेरे बहुत से दोस्त है... पर मै इस बेस्ट फ्रेंड वाले कॉन्सेप्ट से दूर रहती हूं.... तुम तो जानती हो.... दूध का जला छाज भी फूक मार कर पिता है....
डॉली ने फिर कुछ कहना चाहा तभी डिनर बेल बजी । चाहत ने डॉली की तरफ देखा और उसके मुंह पर हाथ रखा। फिर दूसरे हाथ से उसे खींचते हुए बाहर ले जाते हुए बोली - अब बस no more questions ... अब हम नीचे जाएंगे और खाना खायेंगे...
डॉली भी उसके पीछे चलने लगी उसने सोचते हुए कहा - don't वरी स्वीटहार्ट..... मै तुम्हारे मन में दोस्ती के लिए जो डर है ना... उसे मै बाहर जरूर निकालूंगी...
ये सोच वो उसके पीछे चलने लगी।
दोनों डिनर टेबल पर गए और प्लेट में चावल और रोटी निकाल कर जैसे ही सब्जी की तरफ देखा .... दोनों ने मुंह बना लिया । क्युकी आज भिंडी बनी थी।
दोनों ने खाना खाया और अपने रूम आ गईं। डॉली भी अपने रूम चले गई थोड़े देर बाद जब वो चाहत के रूम आई तो देखा चाहत बाल खोले बैठी है उसके बाल बहुत घने और मोटे है.. जिन पर वो तेल लगा रही थी। डॉली उसके पास गई फिर उसकी हाथ से तेल की बोतल छीन ली। चाहत ने उसे ऐसा करते देख कर कहा - डॉली क्या कर रही हो.... मेरी बोतल वापस करो....
ये सुन डॉली ने ना में सिर हिला कर कहा - नहीं....
चाहत ने हैरानी से कहा - क्यू... दो ना यार .... कल सन्डे है.... फिर कल बाल भी धोना है....
डॉली ने बोतल हिलाते हुए कहा - एक शर्त पर....
चाहत ने झट से कहा - कैसी शर्त...
तो डॉली - तो शर्त ये है कि.... तुम्हारे बालों में तेल मै लगाऊंगी .... बोलो मजुर है..?
चाहत ने हा में सिर हिलाते हुए कहा - हा मंज़ूर है....
चाहत का बस इतना ही कहना था कि डॉली हस्ते हुए उसके बेड में चढ गई चाहत भी बेड के पास चटाई बिछा कर बैठ गई । डॉली उसे देख कर मुस्कुराई उसने चाहत का सिर अपने गोद में रखा फिर मालिश करते हुए ऑयलिंग करने लगीं। चाहत को तो जैसे बहुत दिनों बाद सुकून मिला हो वो
बस इस सुकून को महसूस करने लगी।
निशा थोड़े देर में जब रूम में आई तो दोनो को देख दरवाज़े पर ही रुक गईं। उसने कुछ नहीं कहा सीधे बेड पर बैठी और उनके तरफ मुंह कर लेट गई। डॉली ये देख हसने लगीं तो चाहत ने उसे हाथ पर मारा और फिर चुप रहने का इशारा किया। डॉली ऑयलिंग कर ही रही थी पर चाहत को नींद आने लगी तो उसने डॉली का हाथ पकड़ कर कहा - अब बस नींद आ रही हैं मुझे....
डॉली भी उठी और हाथ साफ करने बाथरूम चले गईं। जब वो बाहर आई तो उसने देखा चाहत नें अपने बाल बांध लिए है और बिस्तर ठीक कर रही है ये देख वो बाहर की तरफ जाने लगी उसे यू बाहर जाता देख चाहत ने कहा - डॉली....
डॉली पलटी तो चाहत - तुम बहुत अच्छी हो... और आज के thanks and good night...
डॉली भी उसकी बात सुन मुस्कुरा दी उसने भी good night कहा और वहा से चली गई।
चाहत ने लाइट बंद की और बेड पर आकर लेट गई थोड़ी देर बाद निशा का हाथ उसके पेट पर आ गया। चाहत ने भी उसके हाथ पर अपना हाथ रखा और मुस्कुराते हुए सो गई।
अगली सुबह
हॉस्टल में सन्डे की सुबह के क्या कहने। आज के दिन यहां हर कोई सूरज के सिर पर चढ़ने तक सोता है। और फिर बनते है काम वाली बाई क्युकी आज ही उनको टाइम मिलता है जिसमें वो कपड़ों से लेकर खुद के कमरे सब की सफाई करते हैं। चाहत भी उठी और अपने सारे काम करने लगी सारे काम करने के बाद वो नहा कर बाहर आई तो देखा निशा और डॉली बेड पर बैठे गप्पे मार रही है।
उसने अपने बोलो को पोछा और उनके पास आकर बोली - तुम लोगो ने नाश्ता किया.....
डॉली ने कहा - बस तुम्हारा ही इंतजार कर रहे थे...
अब तीनो नीचे आ गए आज नाश्ते में लहसुन के पत्तो के चिले और इमली की चटनी थी। चाहत के मुंह तो नाश्ता देख कर ही पानी आ गया।
तीनो ने नाश्ता किया और पेट भर खा कर वापस आए।
रीना ने कुछ नहीं कहा तो अंश ने उसे घूरते हुए कहा -plz बोलो..
रीना ने झट से कहा - बॉय फ्रेंड है मेरा....
काजल ने सुना तो उसका दिल ही टूट गया वो लाचारी के साथ अंश को देखने लगी।
तो अंश - ये बात मै और चाहत... बहुत पहले से जानते थे.. पर हमने तुम्हे बताया नहीं...क्युकी चाहत तुम्हे हर्ट नहीं करना चाहती थी...
काजल ये सुन बाहर की तरफ जाने लगी जहा चाहत गई थी तब अंश ने उसे रोक कर कहा - दूर रहो उससे... पहले ही तुमने उसे बहुत हर्ट कर दिया है... अब और नहीं...
काजल रुक गई अब उसके आंखो में पश्चाताप के आंसू थे।
चाहत दौड़ते हुए ग्राउंड में आई । वो वहीं लगी टेबल पर बैठ गई। और रोने लगी। अध्यन उसके पीछे आया ही था तभी उसने देखा मि अरोड़ा ग्राउंड के पास से ही जा रहे है। उन्हे आता देख अध्यन रुक गया। मि अरोड़ा की नजर चाहत पर पड़ गई थी। वो चाहत के पास बैठ गए । चाहत सिर झुकाए बैठी थीं और बस रोए जा रही थी। थोड़ी देर बाद चाहत का रोना सिसकियों में बदल गया । उसने सिर उठाया फिर सीधा देखने लगी। उसके दिमाग में यही चल रहा था आखिर उसने कहा गलती कर दी काजल की सोच उसके लिए ऐसी क्यू थी जबकि वो तो उसकी बेस्ट फ्रेंड थी ना वो भी दस सालो से। एक बार फिर उसकी आंखे भीग गई।
तभी उसकी तरफ एक रुमाल आया। चाहत ने पहले रुमाल को देखा फिर अपनी साइड में देखा जहा मि. अरोड़ा बैठे थे चाहत झट से उठ गई और कहा - good afternoon sir.. उसने जल्दी से अपने हाथो को आंसू पोछने के लिए उठाया तभी मि अरोड़ा ने कहा - चाहत .... फिर आंखो से रुमाल की तरफ इशारा किया।
चाहत ने रुमाल लिया और चेहरा साफ कर रुमाल पकड़े हुए सुबकते हुए कहा - सर इसे मै साफ़ कर के वापस कर दूंगी...
मि. अरोड़ा ये सुन मुस्कुराते हुए बोले - ठीक है ...
फिर वो चाहत को कुछ देर देखते रहें थोड़े देर बाद उन्होंने उंगली से चेयर की तरह इशारा करते हुए कहा कहा - यहां बैठो...
चाहत ने कोई सवाल नही किया वो चुप चाप उनके बगल में बैठ गई।
मि अरोड़ा चाहत को देखते हुए बोले - चाहत बेटा वो शीशम का पेड़ देख रही हो... ये बोल उन्होंने अपनी उंगली सामने लगे पेड़ की तरफ कर दी । चाहत भी उधर देखने लगी।
मि . अरोड़ा बात जारी रखते हुए - उस पेड़ को मैंने तब लगाया था.. जब मै तुम्हारी ऐज का था.. चाहत उनकी तरफ हैरानी से देखने लगीं तो वो मुस्कुराते हुए बोले - ये बात बहुत कम लोग जानते है ...मै इस स्कूल का एक्स स्टूडेंट रह चुका हूं.. फिर चाहत की तरफ पलट कर बोले - जब मैंने वो पेड़ लगाया था तो उसे लगाते हुए मैंने अपने पापा से सवाल किया ....आप इसे क्यू लगा रहे है...इसका तो कोई यूज ही नहीं... मेरे पापा तब यहां मैथ्स के टीचर थे। उन्होंने कहा कभी कभी हमे कुछ चीज़े बिना किसी उम्मीद से करना
चाहिए ... क्योंकि हम उम्मीद लगा कर बैठते है... तो उसके पूरे होने की संभावना कम होती है... इसीलिए हमें उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
चाहत को उनकी बात समझ तो आई पर उसे ये समझ नहीं आ रहा था सर कहना क्या चाहते है...और अभी क्यू कह रहे है.... मि अरोड़ा ने बात जारी रखते हुए कहा - मुझे भी उनकी बाते उस टाइम समझ नहीं आई थी..जैसे अभी तुम्हे नहीं आ रही.....फिर मैंने उनकी बात मानी और वो पेड़ लगा दिया .. पर उस पेड़ के आस पास ढेर सारे फूलों के पौधे लगा दिए.. मुझे वो पेड़ पसंद नहीं था तो मै अक्सर उस पेड़ को इतना टाइम नहीं देता था.. जितना मै उन पौधों को देता था.. बस पानी दे दिया करता था.. फिर पलट कर उसकी तरफ देखता ही नहीं था.. पर फिर भी वो धीरे धीरे बढ़ने लगा... बाकी पौधे भी उसके साथ बढ़ने लगे... पर तुम्हे पता है.... वो फूल के पौधे बहुत नाज़ुक थे.... वो ना मौसम की मार सह पाते थे.. ना बच्चो की मस्ती.... वो बस हर बार मुरझा जाते थे.... मुझे बार बार उनका ख्याल रखना पड़ता था... एक दिन मैंने देखा मेरा लगाया शीशम का पेड़ बढ़ने लगा है... उसे अब मुझे सिंचने की जरूरत नहीं वो बस बढ़ता ही जा रहा है.. मैंने उसके पास और भी बहुत सारे पौधे लगाए .. जो एक तय सीमा तक रहे फिर मुरझा गए.. पर वो शीशम का पेड़ ऐसे ही रहा ...जैसा आज है...बड़े होते ही इसने लोगों को
छाव और ठंडी हवा देना शुरू कर दिया.. पहले यहां ये बाउंड्री नहीं थी तो सारे राहगीर यही इसी पेड़ के पास रुक कर आराम किया करते थे.... उन सभी लोगों को आराम करते देख मुझे अजीब सी खुशी मिलती थी।....
इतना बोल मि. अरोड़ा चाहत की तरफ मुड़े फिर उसके गालों पर आए आंसुओ कि एक बूंद को साफ़ करते हुए बोले - बेटा अगर तुम्हे बनना है तो .... उस पेड़ की तरह बनो ... जिसे इस बात से फर्क नहीं पड़ता कोई उसका ख्याल रख रहा है या नहीं... उसे बस खुद को आगे बढ़ना है ये याद था... उसे किसी से कोई उम्मीद नहीं थी... जो मिला जितना मिला वो उसी में खुश होकर निरंतर बढ़ता रहा .... सभी को छाव और ठंडी हवा देते हुए .. और आज देखो वो कितनी दृढ़ता के साथ खड़ा है..
मि अरोड़ा ने फिर अपनी उंगली को चारो तरफ घुमाते हुए बोले - ये सारे पेड़ मैंने बाद में लगाए है... पर जो सुकून मुझे वो शीशम का पेड़ देता है... वो ये सब नहीं देते... जानती हो क्यू... उनके ऐसा कहते ही चाहत ने सिर ना में हिलाया तो मि अरोड़ा मुस्कुराते हुए बोले - क्युकी मैंने उसे बिना किसी उम्मीद के यू ही लगाया था.... पर उसने उम्मीद से भी बढ़ कर काम किया ...
पहुंची फिर उनको गले से लगा लिया। चाहत की हाइट उस समय काफी छोटी थी वो मुश्किल से ही उनके सीने तक पहुंच रही थीं। चाहत के ऐसे गले लगने से मि. अरोड़ा थोड़ा सा असहज हो गए पर जब उन्होंने सिर झुका कर चाहत के चेहरे को देखा जिसमे सुकून के भाव थे ये देख उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई। चाहत उनसे दूर हुई और फिर कहा - थैंक यू सर फिर उसने झट से अपनी पलके नीची करते हुए कहा - एंस सॉरी भी .. वो मैंने आपको ऐसे बिना पूछे गले लगा लिया उसके लिए..
मि.अरोड़ा वो चाहत की मासूमियत भरी बात सुन मुस्कुराए फिर चाहत के सिर पर हाथ फेर अपने केबिन की तरफ चले गए...
चाहत ने अब अच्छा महसूस किया। जब वो मि अरोड़ा के गले लगी थी उसे लगा जैसे उसने शिव जी को गले लगाया हो। उसके चेहरे पर बहुत बड़ी स्माइल आ गईं उसी स्माइल के साथ वो पीछे मुड़ी तो देखा अध्यन हाथ बांधे खड़ा था और चाहत को मुस्कुराते हुए देख रहा था। चाहत उसके पास आई फिर उसने मुस्कुराते हुए कहा - चले....
चाहत ने भी हा में सिर हिला दिया और उसके साथ चलने लगी।
वो थोड़ी देर रुक गए और चाहत को देखने लगे शायद वो चाहत के चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रहे थे उन्होंने थोड़ी देर बाद कहा - चाहत ये पेड़ की इच्छा थी... उसे कैसे खुद को ढालना है.. वो ऐसा था जिसे किसी के कुछ कहने से फर्क ना पड़े... जो हर तरह के मौसम की मार को सहे... पर अपनी गति ना रोके... और ना ही सामने वाले से किसी तरह की उम्मीद करे... उम्मीद वो खुद से करे .. की कैसे वो खुद को इतना निखार सके जिससे उसकी लोग उसकी खूबसूरती के साथ उसकी शीतलता को भी महसूस कर सकें ।
मि. अरोड़ा चाहत की आंखो में देखते हुए - बच्चे ये लाइफ है..... यहां हर कदम में मुश्किलें और तकलीफे है... पर सुकून भी यही है.. तो उस सुकून, उस खुशी के साथ रहो.. और जो हो रहा है उसे होने दो...
चाहत अब उनकी पूरी बात समझ चुकीं थी उसने हा में सिर हिलाया मि अरोड़ा ने भी उसके सिर पर हाथ फेरा फिर कहा - गुड गर्ल .... चलो अब क्लास में जाओ.. ये बोल वो वहा से जाने लगे।
तभी पीछे से चाहत - सर ...
मि अरोड़ा ने मुड़ कर उसे देखा तो वो भागते हुए उनके पास
दोनों थोड़ी देर में क्लास पहुंचे चाहत सीधा अपने चेयर के पास आ गई और अपनी कॉपी निकाल कर बैठ गई।
अंश दौड़ कर अध्यन के पास आया। उसने अध्यन से कहा - क्या वो अब ठीक है...
अध्यन ने हा में सिर हिलाया। अंश ने राहत की सांस ली अध्यन उसे देख कर - भाई मुझसे ज्यादा तो तू परेशान हो रहा था..
अंश अध्यन को देख कर चिढ़ते हुए - तो क्या... नहीं होऊ... एक तो उसकी गलती नहीं ... फिर उस पर ऐसे इल्ज़ाम.... भाई तू बर्दाश्त कर सकता होगा ... मै नहीं समझा...
अध्यन अंश के कंधे पर हाथ रखते हुए उसने अंश को देखा फिर अपनी आई विंक करते हुए बोला - हा भाई समझता हूं.... फिर हसने लगता है।
अंश उसका हाथ झटकते हुए - भाग यहां से...और फिर वो चाहत के पास जाने लगा। उसने देखा काजल दोबारा चाहत के पास जा रही है अंश ये देख गुस्से से चाहत की तरफ जाने लगा तो अध्यन ने उसे रोक कर कहा - नहीं वो खुद हैंडल कर लेगी... अंश ने उसे हैरानी से देखने लगा तो उसने पलके झपका दी।
तुझसे.... ये बोलते हुए उसने अपनी नजर उठाई तो देखा चाहत सपाट चेहरा लिए उसे शांत नज़रों के साथ देख रही थीं। उसका ऐसे देखना काजल को समझ नहीं आया। उसने आगे बढ़ कर चाहत के हाथ पर अपना हाथ रखते हुए पूछा - क्या हुआ... माही...
चाहत ने मुस्कुराते हुए कहा - काजल तुझे याद है... जब हम 7th standard में थे तो हिंदी की बुक में एक दोहा था.. काजल ने उसकी बात सुनी पर उसे समझ नहीं आया कि चाहत किस दोहे की बात कर रही है। उसने वैसे ही चाहत को देखा तो चाहत ने कहा -
"रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाए,,
टूट पे फिर ना जुरे, जूरे गांठ परी जाय "
मतलब ये कि "रहीम दस" जी कहते है कि प्रेम का नाता नाजुक होता है यदि यह प्रेम का धागा एक बार टूट जाता है तो फिर इसे मिलना कठिन होता है, और यदि मिल भी जाए तो टूट हुए धागो के बीच गांठ पर जाती हैं।
ठीक ऐसी ही थी हमारी दोस्ती पर जब तूने मुझे गलत समझा
इधर काजल चाहत के पास पहुंची चाहत कॉपी निकाल कर कुछ पढ़ रही थी काजल ने चाहत को पुकारा तो चाहत ने उसे देखा काजल उसके सामने आकर - आई एम् सॉरी... वो...इससे ज्यादा कुछ बोल पाती उससे पहले चाहत ने कहा - इट्स ओके..और दोबारा अपनी कॉपी की तरफ देखने लगी।
काजल को थोड़ा अजीब लगा उसने चाहत के कंधो पर हाथ रखा तो उसने सिर उठा कर पूछा - कुछ और भी कहना है तुझे... काजल ने ये सुन हा ने सिर हिलाया।
तो चाहत कॉपी बंद करते हुए बोली - ठीक है बोल...
काजल ने पहले गहरी सांस ली फिर कहा - मुझे अनिल की असलियत पता नहीं थी.. उसने जो भी कहा मै मान गई... जब उसने मुझे तेरे बारे में बताया तो मुझे लगा शायद वो सही कह रहा है.. पर मुझे तेरी बातो पर भरोसा करना था ... आई एम रियली सॉरी.... ऐसे बोलते ही उसकी आंखे गीली हो गई।
इन सब के उलट चाहत एकदम नॉर्मल थी वो बस काजल को देख रही थी काजल के आंसू देख उसके दिल में हुक सी उठी पर उसने खुद को संभाल लिया। काजल ने अपने आंसु साफ़ करते हुए बोली - बट अब नहीं .... अब से मै कभी भी किसी की भी बातो में नहीं आउंगी... हम हमेशा साथ रहेंगे.. और मै
तो .... इस दोस्ती के धागे में गांठ पड़ गई.... अब अगर इसे दोबारा मिलाया गया तो ... वो गांठ हमे दोबारा मिलने नहीं देगी... इसीलिए हमारी दोस्ती आज अभी यही ख़तम होती है।
काजल अवाक होकर उसे देखते रही उसने कहा - पर चाहत एक गलती तो हर कोई माफ करता है... तो तुम मुझे माफ़ भी नहीं करोगी...
चाहत ने उसकी तरफ देखते हुए कहा - माफ तो मैंने तुझे ... कब का कर दिया... पर अब हमारा रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा... तूने एक बार नहीं बल्कि दो बार मुझे गलत समझा... मैंने तब भी तुझे माफ कर दिया.... पर तेरे साथ मै दुबारा से वैसे ही behave नहीं कर पाऊंगी .....
काजल ने उसके बगल में बैठ कर कहा - पर....
तभी चाहत उसे टोकते हुए - तू खुद बता.... अगर यही हरकत मैंने की होती तो ... क्या तू मुझे माफ़ कर पाती.. काजल एक लड़की सब बर्दाश्त कर सकती है पर... जब कोई उसके charecter पर उंगली उठाए.... वो ये कभी बर्दाश्त नहीं कर सकती... सो plz अब नहीं....
काजल ने फिर कुछ नहीं कहा बस वहा से उठ कर अपने डेस्क के पास आ गई। शायद उसे ये समझ आ गया था उसने क्या किया था.....
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वर्तमान समय...
चाहत और डॉली अब बेड पर खामोश बैठ गए ।
डॉली ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा - उसके बाद क्या तुमने.. कभी काजल से बात नहीं की....
चाहत गहरी सांस लेते हुए - नहीं ऐसा नहीं है.... हमारी बाते होती थी... पर जो रिश्ता पहले था ... अब वो नहीं रहा.... उसके बाद वो जगह ..... वो बेस्ट फ्रेंड वाली जगह मैंने फिर किसी को नहीं दी.. या यूं कहें तो जरुरत ही नहीं पड़ी.... अध्यन और अंश ने फिर कभी मुझे इस बात का अहसास ही नहीं करवाया .... की मेरी कोई बेस्ट फ्रेंड नहीं है... वो हर जगह .... हर समय मेरे साथ रहे .... कभी भी मुझे किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी... हर बार मेरी हर बात को बिना कहे ही समझ जाते थे..
ये बोल चाहत ने डॉली को देखा जो उसे ही देख रही थी । डॉली ने चाहत का हाथ पकड़ कर उसे कहा - पर इसका
मतलब ये तो नहीं ना ... की तुम इस खूबसूरत रिश्ते से मुंह ही मोड़ दो... चाहत दोस्ती बहुत खास होती है.... ये एक ऐसा गिफ्ट है .... जो हर कोई खुद को देता है .... जो बहुत अनमोल होता है...
चाहत ने मुस्कुराते हुए कहा - ये बात मै जानती हूं.... इसीलिए मेरे बहुत से दोस्त है... पर मै इस बेस्ट फ्रेंड वाले कॉन्सेप्ट से दूर रहती हूं.... तुम तो जानती हो.... दूध का जला छाज भी फूक मार कर पिता है....
डॉली ने फिर कुछ कहना चाहा तभी डिनर बेल बजी । चाहत ने डॉली की तरफ देखा और उसके मुंह पर हाथ रखा। फिर दूसरे हाथ से उसे खींचते हुए बाहर ले जाते हुए बोली - अब बस no more questions ... अब हम नीचे जाएंगे और खाना खायेंगे...
डॉली भी उसके पीछे चलने लगी उसने सोचते हुए कहा - don't वरी स्वीटहार्ट..... मै तुम्हारे मन में दोस्ती के लिए जो डर है ना... उसे मै बाहर जरूर निकालूंगी...
ये सोच वो उसके पीछे चलने लगी।
दोनों डिनर टेबल पर गए और प्लेट में चावल और रोटी निकाल कर जैसे ही सब्जी की तरफ देखा .... दोनों ने मुंह बना लिया । क्युकी आज भिंडी बनी थी।
दोनों ने खाना खाया और अपने रूम आ गईं। डॉली भी अपने रूम चले गई थोड़े देर बाद जब वो चाहत के रूम आई तो देखा चाहत बाल खोले बैठी है उसके बाल बहुत घने और मोटे है.. जिन पर वो तेल लगा रही थी। डॉली उसके पास गई फिर उसकी हाथ से तेल की बोतल छीन ली। चाहत ने उसे ऐसा करते देख कर कहा - डॉली क्या कर रही हो.... मेरी बोतल वापस करो....
ये सुन डॉली ने ना में सिर हिला कर कहा - नहीं....
चाहत ने हैरानी से कहा - क्यू... दो ना यार .... कल सन्डे है.... फिर कल बाल भी धोना है....
डॉली ने बोतल हिलाते हुए कहा - एक शर्त पर....
चाहत ने झट से कहा - कैसी शर्त...
तो डॉली - तो शर्त ये है कि.... तुम्हारे बालों में तेल मै लगाऊंगी .... बोलो मजुर है..?
चाहत ने हा में सिर हिलाते हुए कहा - हा मंज़ूर है....
चाहत का बस इतना ही कहना था कि डॉली हस्ते हुए उसके बेड में चढ गई चाहत भी बेड के पास चटाई बिछा कर बैठ गई । डॉली उसे देख कर मुस्कुराई उसने चाहत का सिर अपने गोद में रखा फिर मालिश करते हुए ऑयलिंग करने लगीं। चाहत को तो जैसे बहुत दिनों बाद सुकून मिला हो वो
बस इस सुकून को महसूस करने लगी।
निशा थोड़े देर में जब रूम में आई तो दोनो को देख दरवाज़े पर ही रुक गईं। उसने कुछ नहीं कहा सीधे बेड पर बैठी और उनके तरफ मुंह कर लेट गई। डॉली ये देख हसने लगीं तो चाहत ने उसे हाथ पर मारा और फिर चुप रहने का इशारा किया। डॉली ऑयलिंग कर ही रही थी पर चाहत को नींद आने लगी तो उसने डॉली का हाथ पकड़ कर कहा - अब बस नींद आ रही हैं मुझे....
डॉली भी उठी और हाथ साफ करने बाथरूम चले गईं। जब वो बाहर आई तो उसने देखा चाहत नें अपने बाल बांध लिए है और बिस्तर ठीक कर रही है ये देख वो बाहर की तरफ जाने लगी उसे यू बाहर जाता देख चाहत ने कहा - डॉली....
डॉली पलटी तो चाहत - तुम बहुत अच्छी हो... और आज के thanks and good night...
डॉली भी उसकी बात सुन मुस्कुरा दी उसने भी good night कहा और वहा से चली गई।
चाहत ने लाइट बंद की और बेड पर आकर लेट गई थोड़ी देर बाद निशा का हाथ उसके पेट पर आ गया। चाहत ने भी उसके हाथ पर अपना हाथ रखा और मुस्कुराते हुए सो गई।
अगली सुबह
हॉस्टल में सन्डे की सुबह के क्या कहने। आज के दिन यहां हर कोई सूरज के सिर पर चढ़ने तक सोता है। और फिर बनते है काम वाली बाई क्युकी आज ही उनको टाइम मिलता है जिसमें वो कपड़ों से लेकर खुद के कमरे सब की सफाई करते हैं। चाहत भी उठी और अपने सारे काम करने लगी सारे काम करने के बाद वो नहा कर बाहर आई तो देखा निशा और डॉली बेड पर बैठे गप्पे मार रही है।
उसने अपने बोलो को पोछा और उनके पास आकर बोली - तुम लोगो ने नाश्ता किया.....
डॉली ने कहा - बस तुम्हारा ही इंतजार कर रहे थे...
अब तीनो नीचे आ गए आज नाश्ते में लहसुन के पत्तो के चिले और इमली की चटनी थी। चाहत के मुंह तो नाश्ता देख कर ही पानी आ गया।
तीनो ने नाश्ता किया और पेट भर खा कर वापस आए।