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Romance चाहत

काजल ने चाहत की बात सुनी तो उसे अहसास हुआ वो गलत कह रही थीं । वो बाहर जाने को हुई तो अंश ने उसका हाथ पकड़ा और और क्लास की ही एक लड़की रीना के पास ले जाकर - अनिल का तुमसे क्या रिश्ता है..???

रीना ने कुछ नहीं कहा तो अंश ने उसे घूरते हुए कहा -plz बोलो..

रीना ने झट से कहा - बॉय फ्रेंड है मेरा....

काजल ने सुना तो उसका दिल ही टूट गया वो लाचारी के साथ अंश को देखने लगी।

तो अंश - ये बात मै और चाहत... बहुत पहले से जानते थे.. पर हमने तुम्हे बताया नहीं...क्युकी चाहत तुम्हे हर्ट नहीं करना चाहती थी...

काजल ये सुन बाहर की तरफ जाने लगी जहा चाहत गई थी तब अंश ने उसे रोक कर कहा - दूर रहो उससे... पहले ही तुमने उसे बहुत हर्ट कर दिया है... अब और नहीं...

काजल रुक गई अब उसके आंखो में पश्चाताप के आंसू थे।

चाहत दौड़ते हुए ग्राउंड में आई । वो वहीं लगी टेबल पर बैठ गई। और रोने लगी। अध्यन उसके पीछे आया ही था तभी उसने देखा मि अरोड़ा ग्राउंड के पास से ही जा रहे है। उन्हे आता देख अध्यन रुक गया। मि अरोड़ा की नजर चाहत पर पड़ गई थी। वो चाहत के पास बैठ गए । चाहत सिर झुकाए बैठी थीं और बस रोए जा रही थी। थोड़ी देर बाद चाहत का रोना सिसकियों में बदल गया । उसने सिर उठाया फिर सीधा देखने लगी। उसके दिमाग में यही चल रहा था आखिर उसने कहा गलती कर दी काजल की सोच उसके लिए ऐसी क्यू थी जबकि वो तो उसकी बेस्ट फ्रेंड थी ना वो भी दस सालो से। एक बार फिर उसकी आंखे भीग गई।

तभी उसकी तरफ एक रुमाल आया। चाहत ने पहले रुमाल को देखा फिर अपनी साइड में देखा जहा मि. अरोड़ा बैठे थे चाहत झट से उठ गई और कहा - good afternoon sir.. उसने जल्दी से अपने हाथो को आंसू पोछने के लिए उठाया तभी मि अरोड़ा ने कहा - चाहत .... फिर आंखो से रुमाल की तरफ इशारा किया।

चाहत ने रुमाल लिया और चेहरा साफ कर रुमाल पकड़े हुए सुबकते हुए कहा - सर इसे मै साफ़ कर के वापस कर दूंगी...

मि. अरोड़ा ये सुन मुस्कुराते हुए बोले - ठीक है ...

फिर वो चाहत को कुछ देर देखते रहें थोड़े देर बाद उन्होंने उंगली से चेयर की तरह इशारा करते हुए कहा कहा - यहां बैठो...

चाहत ने कोई सवाल नही किया वो चुप चाप उनके बगल में बैठ गई।

मि अरोड़ा चाहत को देखते हुए बोले - चाहत बेटा वो शीशम का पेड़ देख रही हो... ये बोल उन्होंने अपनी उंगली सामने लगे पेड़ की तरफ कर दी । चाहत भी उधर देखने लगी।

मि . अरोड़ा बात जारी रखते हुए - उस पेड़ को मैंने तब लगाया था.. जब मै तुम्हारी ऐज का था.. चाहत उनकी तरफ हैरानी से देखने लगीं तो वो मुस्कुराते हुए बोले - ये बात बहुत कम लोग जानते है ...मै इस स्कूल का एक्स स्टूडेंट रह चुका हूं.. फिर चाहत की तरफ पलट कर बोले - जब मैंने वो पेड़ लगाया था तो उसे लगाते हुए मैंने अपने पापा से सवाल किया ....आप इसे क्यू लगा रहे है...इसका तो कोई यूज ही नहीं... मेरे पापा तब यहां मैथ्स के टीचर थे। उन्होंने कहा कभी कभी हमे कुछ चीज़े बिना किसी उम्मीद से करना

चाहिए ... क्योंकि हम उम्मीद लगा कर बैठते है... तो उसके पूरे होने की संभावना कम होती है... इसीलिए हमें उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

चाहत को उनकी बात समझ तो आई पर उसे ये समझ नहीं आ रहा था सर कहना क्या चाहते है...और अभी क्यू कह रहे है.... मि अरोड़ा ने बात जारी रखते हुए कहा - मुझे भी उनकी बाते उस टाइम समझ नहीं आई थी..जैसे अभी तुम्हे नहीं आ रही.....फिर मैंने उनकी बात मानी और वो पेड़ लगा दिया .. पर उस पेड़ के आस पास ढेर सारे फूलों के पौधे लगा दिए.. मुझे वो पेड़ पसंद नहीं था तो मै अक्सर उस पेड़ को इतना टाइम नहीं देता था.. जितना मै उन पौधों को देता था.. बस पानी दे दिया करता था.. फिर पलट कर उसकी तरफ देखता ही नहीं था.. पर फिर भी वो धीरे धीरे बढ़ने लगा... बाकी पौधे भी उसके साथ बढ़ने लगे... पर तुम्हे पता है.... वो फूल के पौधे बहुत नाज़ुक थे.... वो ना मौसम की मार सह पाते थे.. ना बच्चो की मस्ती.... वो बस हर बार मुरझा जाते थे.... मुझे बार बार उनका ख्याल रखना पड़ता था... एक दिन मैंने देखा मेरा लगाया शीशम का पेड़ बढ़ने लगा है... उसे अब मुझे सिंचने की जरूरत नहीं वो बस बढ़ता ही जा रहा है.. मैंने उसके पास और भी बहुत सारे पौधे लगाए .. जो एक तय सीमा तक रहे फिर मुरझा गए.. पर वो शीशम का पेड़ ऐसे ही रहा ...जैसा आज है...बड़े होते ही इसने लोगों को

छाव और ठंडी हवा देना शुरू कर दिया.. पहले यहां ये बाउंड्री नहीं थी तो सारे राहगीर यही इसी पेड़ के पास रुक कर आराम किया करते थे.... उन सभी लोगों को आराम करते देख मुझे अजीब सी खुशी मिलती थी।....

इतना बोल मि. अरोड़ा चाहत की तरफ मुड़े फिर उसके गालों पर आए आंसुओ कि एक बूंद को साफ़ करते हुए बोले - बेटा अगर तुम्हे बनना है तो .... उस पेड़ की तरह बनो ... जिसे इस बात से फर्क नहीं पड़ता कोई उसका ख्याल रख रहा है या नहीं... उसे बस खुद को आगे बढ़ना है ये याद था... उसे किसी से कोई उम्मीद नहीं थी... जो मिला जितना मिला वो उसी में खुश होकर निरंतर बढ़ता रहा .... सभी को छाव और ठंडी हवा देते हुए .. और आज देखो वो कितनी दृढ़ता के साथ खड़ा है..

मि अरोड़ा ने फिर अपनी उंगली को चारो तरफ घुमाते हुए बोले - ये सारे पेड़ मैंने बाद में लगाए है... पर जो सुकून मुझे वो शीशम का पेड़ देता है... वो ये सब नहीं देते... जानती हो क्यू... उनके ऐसा कहते ही चाहत ने सिर ना में हिलाया तो मि अरोड़ा मुस्कुराते हुए बोले - क्युकी मैंने उसे बिना किसी उम्मीद के यू ही लगाया था.... पर उसने उम्मीद से भी बढ़ कर काम किया ...

पहुंची फिर उनको गले से लगा लिया। चाहत की हाइट उस समय काफी छोटी थी वो मुश्किल से ही उनके सीने तक पहुंच रही थीं। चाहत के ऐसे गले लगने से मि. अरोड़ा थोड़ा सा असहज हो गए पर जब उन्होंने सिर झुका कर चाहत के चेहरे को देखा जिसमे सुकून के भाव थे ये देख उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई। चाहत उनसे दूर हुई और फिर कहा - थैंक यू सर फिर उसने झट से अपनी पलके नीची करते हुए कहा - एंस सॉरी भी .. वो मैंने आपको ऐसे बिना पूछे गले लगा लिया उसके लिए..

मि.अरोड़ा वो चाहत की मासूमियत भरी बात सुन मुस्कुराए फिर चाहत के सिर पर हाथ फेर अपने केबिन की तरफ चले गए...

चाहत ने अब अच्छा महसूस किया। जब वो मि अरोड़ा के गले लगी थी उसे लगा जैसे उसने शिव जी को गले लगाया हो। उसके चेहरे पर बहुत बड़ी स्माइल आ गईं उसी स्माइल के साथ वो पीछे मुड़ी तो देखा अध्यन हाथ बांधे खड़ा था और चाहत को मुस्कुराते हुए देख रहा था। चाहत उसके पास आई फिर उसने मुस्कुराते हुए कहा - चले....

चाहत ने भी हा में सिर हिला दिया और उसके साथ चलने लगी।

वो थोड़ी देर रुक गए और चाहत को देखने लगे शायद वो चाहत के चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रहे थे उन्होंने थोड़ी देर बाद कहा - चाहत ये पेड़ की इच्छा थी... उसे कैसे खुद को ढालना है.. वो ऐसा था जिसे किसी के कुछ कहने से फर्क ना पड़े... जो हर तरह के मौसम की मार को सहे... पर अपनी गति ना रोके... और ना ही सामने वाले से किसी तरह की उम्मीद करे... उम्मीद वो खुद से करे .. की कैसे वो खुद को इतना निखार सके जिससे उसकी लोग उसकी खूबसूरती के साथ उसकी शीतलता को भी महसूस कर सकें ।

मि. अरोड़ा चाहत की आंखो में देखते हुए - बच्चे ये लाइफ है..... यहां हर कदम में मुश्किलें और तकलीफे है... पर सुकून भी यही है.. तो उस सुकून, उस खुशी के साथ रहो.. और जो हो रहा है उसे होने दो...

चाहत अब उनकी पूरी बात समझ चुकीं थी उसने हा में सिर हिलाया मि अरोड़ा ने भी उसके सिर पर हाथ फेरा फिर कहा - गुड गर्ल .... चलो अब क्लास में जाओ.. ये बोल वो वहा से जाने लगे।

तभी पीछे से चाहत - सर ...

मि अरोड़ा ने मुड़ कर उसे देखा तो वो भागते हुए उनके पास

दोनों थोड़ी देर में क्लास पहुंचे चाहत सीधा अपने चेयर के पास आ गई और अपनी कॉपी निकाल कर बैठ गई।

अंश दौड़ कर अध्यन के पास आया। उसने अध्यन से कहा - क्या वो अब ठीक है...

अध्यन ने हा में सिर हिलाया। अंश ने राहत की सांस ली अध्यन उसे देख कर - भाई मुझसे ज्यादा तो तू परेशान हो रहा था..

अंश अध्यन को देख कर चिढ़ते हुए - तो क्या... नहीं होऊ... एक तो उसकी गलती नहीं ... फिर उस पर ऐसे इल्ज़ाम.... भाई तू बर्दाश्त कर सकता होगा ... मै नहीं समझा...

अध्यन अंश के कंधे पर हाथ रखते हुए उसने अंश को देखा फिर अपनी आई विंक करते हुए बोला - हा भाई समझता हूं.... फिर हसने लगता है।

अंश उसका हाथ झटकते हुए - भाग यहां से...और फिर वो चाहत के पास जाने लगा। उसने देखा काजल दोबारा चाहत के पास जा रही है अंश ये देख गुस्से से चाहत की तरफ जाने लगा तो अध्यन ने उसे रोक कर कहा - नहीं वो खुद हैंडल कर लेगी... अंश ने उसे हैरानी से देखने लगा तो उसने पलके झपका दी।

तुझसे.... ये बोलते हुए उसने अपनी नजर उठाई तो देखा चाहत सपाट चेहरा लिए उसे शांत नज़रों के साथ देख रही थीं। उसका ऐसे देखना काजल को समझ नहीं आया। उसने आगे बढ़ कर चाहत के हाथ पर अपना हाथ रखते हुए पूछा - क्या हुआ... माही...

चाहत ने मुस्कुराते हुए कहा - काजल तुझे याद है... जब हम 7th standard में थे तो हिंदी की बुक में एक दोहा था.. काजल ने उसकी बात सुनी पर उसे समझ नहीं आया कि चाहत किस दोहे की बात कर रही है। उसने वैसे ही चाहत को देखा तो चाहत ने कहा -

"रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाए,,

टूट पे फिर ना जुरे, जूरे गांठ परी जाय "

मतलब ये कि "रहीम दस" जी कहते है कि प्रेम का नाता नाजुक होता है यदि यह प्रेम का धागा एक बार टूट जाता है तो फिर इसे मिलना कठिन होता है, और यदि मिल भी जाए तो टूट हुए धागो के बीच गांठ पर जाती हैं।

ठीक ऐसी ही थी हमारी दोस्ती पर जब तूने मुझे गलत समझा

इधर काजल चाहत के पास पहुंची चाहत कॉपी निकाल कर कुछ पढ़ रही थी काजल ने चाहत को पुकारा तो चाहत ने उसे देखा काजल उसके सामने आकर - आई एम् सॉरी... वो...इससे ज्यादा कुछ बोल पाती उससे पहले चाहत ने कहा - इट्स ओके..और दोबारा अपनी कॉपी की तरफ देखने लगी।

काजल को थोड़ा अजीब लगा उसने चाहत के कंधो पर हाथ रखा तो उसने सिर उठा कर पूछा - कुछ और भी कहना है तुझे... काजल ने ये सुन हा ने सिर हिलाया।

तो चाहत कॉपी बंद करते हुए बोली - ठीक है बोल...

काजल ने पहले गहरी सांस ली फिर कहा - मुझे अनिल की असलियत पता नहीं थी.. उसने जो भी कहा मै मान गई... जब उसने मुझे तेरे बारे में बताया तो मुझे लगा शायद वो सही कह रहा है.. पर मुझे तेरी बातो पर भरोसा करना था ... आई एम रियली सॉरी.... ऐसे बोलते ही उसकी आंखे गीली हो गई।

इन सब के उलट चाहत एकदम नॉर्मल थी वो बस काजल को देख रही थी काजल के आंसू देख उसके दिल में हुक सी उठी पर उसने खुद को संभाल लिया। काजल ने अपने आंसु साफ़ करते हुए बोली - बट अब नहीं .... अब से मै कभी भी किसी की भी बातो में नहीं आउंगी... हम हमेशा साथ रहेंगे.. और मै

तो .... इस दोस्ती के धागे में गांठ पड़ गई.... अब अगर इसे दोबारा मिलाया गया तो ... वो गांठ हमे दोबारा मिलने नहीं देगी... इसीलिए हमारी दोस्ती आज अभी यही ख़तम होती है।

काजल अवाक होकर उसे देखते रही उसने कहा - पर चाहत एक गलती तो हर कोई माफ करता है... तो तुम मुझे माफ़ भी नहीं करोगी...

चाहत ने उसकी तरफ देखते हुए कहा - माफ तो मैंने तुझे ... कब का कर दिया... पर अब हमारा रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा... तूने एक बार नहीं बल्कि दो बार मुझे गलत समझा... मैंने तब भी तुझे माफ कर दिया.... पर तेरे साथ मै दुबारा से वैसे ही behave नहीं कर पाऊंगी .....

काजल ने उसके बगल में बैठ कर कहा - पर....

तभी चाहत उसे टोकते हुए - तू खुद बता.... अगर यही हरकत मैंने की होती तो ... क्या तू मुझे माफ़ कर पाती.. काजल एक लड़की सब बर्दाश्त कर सकती है पर... जब कोई उसके charecter पर उंगली उठाए.... वो ये कभी बर्दाश्त नहीं कर सकती... सो plz अब नहीं....

काजल ने फिर कुछ नहीं कहा बस वहा से उठ कर अपने डेस्क के पास आ गई। शायद उसे ये समझ आ गया था उसने क्या किया था.....

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वर्तमान समय...

चाहत और डॉली अब बेड पर खामोश बैठ गए ।

डॉली ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा - उसके बाद क्या तुमने.. कभी काजल से बात नहीं की....

चाहत गहरी सांस लेते हुए - नहीं ऐसा नहीं है.... हमारी बाते होती थी... पर जो रिश्ता पहले था ... अब वो नहीं रहा.... उसके बाद वो जगह ..... वो बेस्ट फ्रेंड वाली जगह मैंने फिर किसी को नहीं दी.. या यूं कहें तो जरुरत ही नहीं पड़ी.... अध्यन और अंश ने फिर कभी मुझे इस बात का अहसास ही नहीं करवाया .... की मेरी कोई बेस्ट फ्रेंड नहीं है... वो हर जगह .... हर समय मेरे साथ रहे .... कभी भी मुझे किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी... हर बार मेरी हर बात को बिना कहे ही समझ जाते थे..

ये बोल चाहत ने डॉली को देखा जो उसे ही देख रही थी । डॉली ने चाहत का हाथ पकड़ कर उसे कहा - पर इसका

मतलब ये तो नहीं ना ... की तुम इस खूबसूरत रिश्ते से मुंह ही मोड़ दो... चाहत दोस्ती बहुत खास होती है.... ये एक ऐसा गिफ्ट है .... जो हर कोई खुद को देता है .... जो बहुत अनमोल होता है...

चाहत ने मुस्कुराते हुए कहा - ये बात मै जानती हूं.... इसीलिए मेरे बहुत से दोस्त है... पर मै इस बेस्ट फ्रेंड वाले कॉन्सेप्ट से दूर रहती हूं.... तुम तो जानती हो.... दूध का जला छाज भी फूक मार कर पिता है....

डॉली ने फिर कुछ कहना चाहा तभी डिनर बेल बजी । चाहत ने डॉली की तरफ देखा और उसके मुंह पर हाथ रखा। फिर दूसरे हाथ से उसे खींचते हुए बाहर ले जाते हुए बोली - अब बस no more questions ... अब हम नीचे जाएंगे और खाना खायेंगे...

डॉली भी उसके पीछे चलने लगी उसने सोचते हुए कहा - don't वरी स्वीटहार्ट..... मै तुम्हारे मन में दोस्ती के लिए जो डर है ना... उसे मै बाहर जरूर निकालूंगी...

ये सोच वो उसके पीछे चलने लगी।

दोनों डिनर टेबल पर गए और प्लेट में चावल और रोटी निकाल कर जैसे ही सब्जी की तरफ देखा .... दोनों ने मुंह बना लिया । क्युकी आज भिंडी बनी थी।

दोनों ने खाना खाया और अपने रूम आ गईं। डॉली भी अपने रूम चले गई थोड़े देर बाद जब वो चाहत के रूम आई तो देखा चाहत बाल खोले बैठी है उसके बाल बहुत घने और मोटे है.. जिन पर वो तेल लगा रही थी। डॉली उसके पास गई फिर उसकी हाथ से तेल की बोतल छीन ली। चाहत ने उसे ऐसा करते देख कर कहा - डॉली क्या कर रही हो.... मेरी बोतल वापस करो....

ये सुन डॉली ने ना में सिर हिला कर कहा - नहीं....

चाहत ने हैरानी से कहा - क्यू... दो ना यार .... कल सन्डे है.... फिर कल बाल भी धोना है....

डॉली ने बोतल हिलाते हुए कहा - एक शर्त पर....

चाहत ने झट से कहा - कैसी शर्त...

तो डॉली - तो शर्त ये है कि.... तुम्हारे बालों में तेल मै लगाऊंगी .... बोलो मजुर है..?

चाहत ने हा में सिर हिलाते हुए कहा - हा मंज़ूर है....

चाहत का बस इतना ही कहना था कि डॉली हस्ते हुए उसके बेड में चढ गई चाहत भी बेड के पास चटाई बिछा कर बैठ गई । डॉली उसे देख कर मुस्कुराई उसने चाहत का सिर अपने गोद में रखा फिर मालिश करते हुए ऑयलिंग करने लगीं। चाहत को तो जैसे बहुत दिनों बाद सुकून मिला हो वो

बस इस सुकून को महसूस करने लगी।

निशा थोड़े देर में जब रूम में आई तो दोनो को देख दरवाज़े पर ही रुक गईं। उसने कुछ नहीं कहा सीधे बेड पर बैठी और उनके तरफ मुंह कर लेट गई। डॉली ये देख हसने लगीं तो चाहत ने उसे हाथ पर मारा और फिर चुप रहने का इशारा किया। डॉली ऑयलिंग कर ही रही थी पर चाहत को नींद आने लगी तो उसने डॉली का हाथ पकड़ कर कहा - अब बस नींद आ रही हैं मुझे....

डॉली भी उठी और हाथ साफ करने बाथरूम चले गईं। जब वो बाहर आई तो उसने देखा चाहत नें अपने बाल बांध लिए है और बिस्तर ठीक कर रही है ये देख वो बाहर की तरफ जाने लगी उसे यू बाहर जाता देख चाहत ने कहा - डॉली....

डॉली पलटी तो चाहत - तुम बहुत अच्छी हो... और आज के thanks and good night...

डॉली भी उसकी बात सुन मुस्कुरा दी उसने भी good night कहा और वहा से चली गई।

चाहत ने लाइट बंद की और बेड पर आकर लेट गई थोड़ी देर बाद निशा का हाथ उसके पेट पर आ गया। चाहत ने भी उसके हाथ पर अपना हाथ रखा और मुस्कुराते हुए सो गई।

अगली सुबह

हॉस्टल में सन्डे की सुबह के क्या कहने। आज के दिन यहां हर कोई सूरज के सिर पर चढ़ने तक सोता है। और फिर बनते है काम वाली बाई क्युकी आज ही उनको टाइम मिलता है जिसमें वो कपड़ों से लेकर खुद के कमरे सब की सफाई करते हैं। चाहत भी उठी और अपने सारे काम करने लगी सारे काम करने के बाद वो नहा कर बाहर आई तो देखा निशा और डॉली बेड पर बैठे गप्पे मार रही है।

उसने अपने बोलो को पोछा और उनके पास आकर बोली - तुम लोगो ने नाश्ता किया.....

डॉली ने कहा - बस तुम्हारा ही इंतजार कर रहे थे...

अब तीनो नीचे आ गए आज नाश्ते में लहसुन के पत्तो के चिले और इमली की चटनी थी। चाहत के मुंह तो नाश्ता देख कर ही पानी आ गया।

तीनो ने नाश्ता किया और पेट भर खा कर वापस आए।
 
चाहत, डॉली और निशा तीनो काफी थक गए थे तो तीनो सो गए। आज डॉली भी निशा के साथ उसी बेड पर सोई थी। तीनो एकदुसरे को पकड़े हुए सोए थे। और शायद गहरी नींद में भी थे तभी चाहत का मोबाइल बजने लगा चाहत गहरी नींद में थी उसने बिना स्क्रीन में देखे ही कॉल अटेंड कर मोबाइल कान से लगा लिया ।

चाहत नींद में - हेल्लो....

दूसरी तरफ से कोई आवाज़ नहीं आई चाहत ने एक बार फिर हेल्लो बोला। अब चाहत को अजीब लगा और वो उठ कर बैठ गई दूसरी तरफ से कोई आवाज़ नहीं आई थोड़ी देर के लिए चाहत भी खामोश हो गई वो बस दूसरी तरफ से आती सांसो की आवाज़ को सुनने लगी। उन सांसों को उसने पहले भी महसूस किया था चाहत ने अपना एक हाथ दिल पर रख कर कहा - अध्यन...

सामने से कोई जवाब नहीं आया लगभग 10 सेकंड तक ये खामोशी यू ही रही...थोड़ी देर बाद.... बीप की आवाज़ आई...... जो कॉल के कट होने का आवाज़ थी.......

चाहत कुछ देर तक मोबाइल को ऐसे ही देखते रही फिर उसे टेबल पर रखा और वॉशरूम आ गई। उसने वॉशरूम का दरवाज़ा बंद किया और नल को ऑन कर दिया। उसने सामने लगे मिरर में खुद को देखा और फिर रोने लगी..... ना

जाने कब तक वो ऐसे ही रोती रही... पर जब उसे थोड़ा हल्का फील हुआ तब वो वॉशरूम से चेहरा धोकर बाहर आई। उसने टावेल से चेहरा पोछा और बेड पर लेट गई। रोने के कारण उसे फिर नींद आ गई.....

किसी तरह ये सन्डे का दिन बीता । शाम को चाहत खाना खा कर छत पर आ गई। डॉली ने देखा चाहत दोपहर के बाद से उदास थीं वो चाहत के पीछे ही छत पर आ गई उसने देखा चाहत छत से सामने रोड पर चलने वाली गाड़ियों को देख रही थी। ये मेन रोड था इसीलिए पूरी रात यहां ट्रैक , कार और भी बहुत सी गाडियां चलती रहती थी। चाहत भी उन गाड़ियों को देख रही थी। डॉली चाहत के बगल में खड़े होकर - ऐसे अकेले खड़े रहकर खुद में ही कुछ सोचना... तुम्हे इस काम में बहुत मज़ा आता है ना...

चाहत ने डॉली को देखा पर कहा कुछ नहीं। डॉली उसके कंधो पर हाथ रखती है चाहत उसे पलट कर देखती है तो डॉली उसका हाथ पकड़ छत पर बनी सीमेंट की चेयर पर बैठा देती है।

डॉली चाहत के हाथो को पकड़ कर - चाहत कुछ पूछू...

चाहत जो अभी तक शांत थी वो सिर उठा कर बोलती है - हा पूछो..

डॉली गहरी सांस लेते हुए - मैंने जब भी तुम्हे देखा है.. तुम्हारी आंखों में अजीब सा खालीपन पाया है... तुम खुश भी होती हो... तब भी ये खालीपन तुम्हारी आंखों में यू ही पसरा रहता है... क्या मै इसकी वजह जान सकती हूं....

चाहत ने कुछ नहीं कहा तो डॉली खुद ही उसे देखते हुए - ठीक है मत बताओ... पर मै जानना चाहती हूं...तुम्हे और तुम्हारी आंखो की इस उदासी को भी...ये बोल डॉली चेयर से उठी और जाने लगी ।

भले ही चाहत को डॉली से मिले कुछ एक महीना ही हुआ था पर पता नहीं क्यों वो उसकी बाते जल्दी मान जाती थी। चाहत ने डॉली को पुकारा - डॉली...

डॉली उसकी आवाज़ सुन रुक गई। चाहत डॉली के पास आकर - वो सारी यादें बहुत दर्द देती है.. उसे मेरे अंदर ही रहने दो.. ये बोल वो दरवाज़े की तरफ जाने लगी।

तभी पीछे से डॉली - चाहत मैंने सुना था .... दर्द बाटने से कम होता है.. अगर तुम चाहो तो... दर्द बांट सकती हो मुझसे..

चाहत दरवाज़े पर ही रुक गई उसने डॉली की तरफ देखा फिर मुस्कुराते हुए बोली - तुम मानोगी नहीं ना...

डॉली दांत दिखाते हुए ना में सिर हिलाते हुए - नहीं..

तभी राजू वहा आ गया उसने चाहत और डॉली की तरफ देखते हुए अपना सिर नीचे झुका कर कहा - आप लोग नीचे चलिए ... मुझे गेट बंद करना है...

डॉली सिर पकड़ कर - तुम्हे भी अभी आना था... ले दे कर तो ये लड़की मानी थीं.. तुम ना...वो इससे ज्यादा कुछ बोलती उससे पहले ही चाहत ने उसका हाथ पकड़ा और अपने साथ नीचे ले आई। राजू ने भी हॉस्टल का गेट बन्द कर दिया।

डॉली पैर पटकते हुए चल रही थी चाहत अपने रूम आई तो उसने देखा निशा सो चुकी है। उसने निशा को ब्लैंकेट ओढ़ा दिया और डॉली की तरफ पलट कर कहा - स्टोरी लम्बी है... पता नहीं कब तक चलेगी...

डॉली ये सुन कर बेड पर आ गई उसने चाहत के ब्लैंकेट को उठाया और निशा के बगल में बैठ गई उसने चाहत को बैठने का इशारा किया ।

चाहत भी उसके पास आकर बैठ गई। डॉली ने दोनो के पैरो में ब्लैंकेट डालते हुए कहा - वैसे मुझे लम्बी स्टोरीज उतनी

प्रतियगिता, क्विज प्रतियोगिता इन सब में पार्टिसिपेट किया। और तीनो में जीती भी और बदले में सभी को आइसक्रीम पार्टी भी दी। अध्यन और अंश हर स्पोर्ट्स में पार्टिसिपेट करते पर जीते वो सिर्फ फुटबॉल में ही थे।

काजल ने भी मेहदी ड्राइंग रंगोली इं सब में पार्टिसिपेट किया और उसने भी दो तीन ट्राफी तो अपने नाम करवा ली । देखते ही देखते एनुअल फंक्शन का दिन भी आ गया। चाहत काजल और उसकी क्लास की दो और लड़कियों को आज स्कूल जल्दी बुलाया गया था ।चाहत ने भी स्कूल ड्रेस पहन कर स्कूल चले गई।

स्कूल

चाहत, काजल और वो दो लड़कियां जल्दी पहुंची उन सभी को आज सरस्वती वंदना करना था और उन्हें बस एक दिन पहले ही इसकी जानकारी मिली थी दरअसल बात कुछ ऐसी थी कि जिसे वंदना गानी थी उन दीदी की तबीयत अचानक खराब हो गई थी । तो जल्दी जल्दी में काजल और चाहत को कहा गया था। इसीलिए वो सभी सुबह से स्कूल पहुंच गए थे। चारो प्रैक्टिस करने लगे।

थोड़े देर बाद फंक्शन स्टार्ट हुआ सबसे पहले सरस्वती वंदना

पसंद नहीं.. पर तुम्हारे लिए तो कुछ भी...

चाहत मुस्कुराई और उसने तकिया अपने पीछे लगा लिया और दीवार से टीक कर बैठ गई और डॉली भी उसके बगल में बैठ गई। चाहत कुछ बोलती उससे पहले डॉली - रुको... ये बोल उसने रूम के लाइट को बंद कर दिया और एक पीली रोशनी वाले बल्ब को जला दिया ।

चाहत ने जब उसे ऐसा करते हुए देखा तो वो उसे अजीब नजरो से देखने लगी। तब डॉली ने कहा - अरे यार थोड़ा माहौल तो बनाने दे..

चाहत ने अपना सिर पीट लिया तब डॉली ने झट से कहा - अब मै कोई नौटंकी नहीं करूंगी ... तो चलो शुरू से बताओ...

चाहत ने स्टोरी स्टार्ट की और धीरे धीरे उसे सब चीज़े बताने लगी।

फ्लैशबैक....

(पार्ट -31 के बाद)

अगला मैच भी अध्यन की टीम ने है जीता था। अध्यन बहुत खुश था साथ ही चाहत , काजल, और अंश भी स्प्रोट्स वीक के बाद अब कल्चरल वीक स्टार्ट हुआ सभी ने उसमे भी हिस्सा लिया। चाहत ने निबंध प्रतियोगिता, वाद विवाद

ही की जानी थीं स्टेज पर सरस्वती जी की फोटो रखी गई उसके सामने एक बड़ी सी कैंडल रखी गई और दोनो तरफ दिए रखे गए। मि. अरोड़ा भी नीचे खड़े थे। बाकी सभी स्टूडेंट को बाकी वालंटियर उनके जगह पर बैठा रहे थे।

चाहत बैक स्टेज खड़ी हो गई थी । वो पूरी तरह से रेडी थी उसने व्हाइट कुर्ती और व्हाइट दुपट्टा लगा रखा था। ये व्हाइट कुर्ती फूल स्लीव्स वाली हाईनेक कुर्ती थी जिसके नीचे उसने रेड कलर की लैगी पहनी थी आज पहली बार काजल के कहने पर उसने काजल और हल्की गुलाबी लिपस्टिक लगाई थी बालो को हमेशा की तरह कस कर बांध रखा था। पर उसके कुछ छोटे बाल सिल्की होने के कारण बार बार माथे पर आ रहे थे उन छोटे बालो को वो बड़े ही सलीके से पीछे कर रही थी।

तभी किसी ने कहा - वाव.

चाहत ने सुना और पलट कर देखा तो वहा इशांत खड़ा था ब्लैक पैंट , व्हाइट शर्ट पर ब्लैक ब्लेजर के साथ बालो को सिम्पल ही रखा था चेहरा बिल्कुल क्लीन जैसे अभी ही सेव कर के आया हो । उसने अपने ब्लैक ब्लेजर के बटन को बंद नहीं किया था साथ ही उसके अंदर पहनी हुई शर्ट के बटन भी बंद नहीं थे। वो एक लड़की के साथ थे जिसने व्हाइट लोग कुती पहनी थी जिस पर उसने रेड दुपट्टा लगाया था

बाल खुले थे और नीचे से कर्ल थे। भरपूर मेकअप में वो सूट में भी कहर ढा रही थी।

जब चाहत ने इशांत को देखा तो उसने पूछा - आप यहां..

इशांत जो खोया हुआ सा चाहत को देखे जा रहा था उसने चाहत का सवाल सुना ही नहीं। चाहत ने फिर एक बार अपना सवाल दोहराया इस पर भी जब इशांत ने कोई जवाब नहीं दिया । तब उसकी बगल में खड़ी उस लड़की ने अपनी कोहनी से इशांत के पेट पर धीरे के मारा तब इशांत को होश आया।

इशांत चाहत को देखते हुए - आ... ह... हा... कुछ कहा तुमने...

चाहत और इशांत के बगल में खड़ी लड़की उसे यू हकलाते देख मुस्कुराने लगीं । फिर वो लड़की मुस्कुराते हुए बोली - बस यही देखना बाकी रह गया था... हमारे हमेशा कूल रहने वाले इशांत... आज फिसल ही गए...

इशांत ये सुन थोड़ा सा सकपका गया ।

इशांत ने उस लड़की की तरफ देखते हुए कहा - यार नेहा... देख पहली बार है ना ... इसीलिए नर्वस हूं.... समझ ना....

नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा - होता है .. पहली बार ऐसा ही

इशांत ने चाहत की मुस्कुराहट और पलको को देख कर कहा - ये मुस्कान .... बस यही तो है... बिना तलवार के ही दिल चिर देती है.. इशांत ने ये कहा और चाहत की तरफ देखा। जो बार बार पीछे देख रही थी ।

चाहत ने सुना ही नहीं वो बस पीछे देख रही थी।

इशांत उस तरफ देखा तो वहा कोई नहीं था इशांत चाहत से - क्या हुआ....

चाहत इशांत की तरफ देखते हुए - वो मेरे फ्रेंड्स.. उनको देख रही हूं...

इशांत - क्यू देख रही हो..

चाहत उसी तरफ देखते हुए - अरे वो.... आज हम सभी को मिल कर सरस्वती वंदना करनी है... और ये लोग अभी तक नहीं आई...

इशांत ने कहा - ओह अच्छा...

तभी स्टेज से एक लड़की दौड़ती हुई आई और उसने चिल्ला कर कहा - इशांत यहां क्या कर रहे हो..?? चलो....

इशांत उसकी बात सुन जाने को हुआ तभी चाहत - ऑल द बेस्ट इशांत... इशांत जो वहा से जा रहा था उसने अपने कदम रोक लिए और फिर पलट कर चाहत की तरफ देखने लगा । चाहत बस उसे देख मुस्कुरा दी।

होता है.... ये बोल उसने चाहत को देखते हुए आई विंक की ।

चाहत अजीब नज़रों से दोनो को देखने लगीं तब इशांत ने नेहा से कहा - तूने अपना माइक चेक किया ...

नेहा ने झट से कहा - नहीं, यार... ये बोल वो वहां से भाग गई।

इशांत ने राहत की सांस ली फिर चाहत की तरफ देख कर कहा - वो आज मै ,एंकरिंग... करने वाला हूं ना तो... थोड़ा सा नर्वस हूं...

चाहत ने कहा - डोंट वरी.. सब अच्छा होगा...

इशांत ने मन में कहा - पहले तो लगा नहीं था.. पर अब जब तुम्हे देख लिया तो sure हूं... अच्छा ही होगा..

चाहत ने उसे एक बार फिर देखा इशांत फिर से खोया था तो उसने इशांत के चेहरे के सामने हाथ हिला कर कहा - कहा खो गए..

इशांत फिर होश में आया और उसने कहा - कहीं नहीं बस यू ही...

चाहत ने उसे देखा फिर मुस्कुराते हुए बोली - इतना टैंशन मत लीजिए... आपसे हो जाएगा... ये बोल चाहत ने अपनी बड़ी पलको को झपका दिया।

और इशांत उसकी मुस्कुराहट अपने साथ लिए स्टेज की तरफ चला गया।

स्टेज के पास पहुंच कर इशांत ने एक बार फिर चाहत को देखा पता नहीं क्यू वो चाहत के लिए तरह का खिचाव महसूस कर रहा था। जब से उसने चाहत को गिफ्ट शॉप पर देखा था तब से वो उसे कुछ अलग लगी थी कुछ तो अलग था उसमे जो इशांत उसे ऐसे देखते हुए खो जाता था। इशांत भी इस बात को समझना चाहता था पर चाह कर भी समझ नहीं पा रहा था।

इशांत लेफ्ट और नेहा राइट साइड से स्टेज पर आ गए। इशांत ने माइक को पकड़ कर कहना शुरू किया - good evening everyone.. I Ishant rajput... ये कह कर उसने माइक नेहा को दी फिर नेहा ने कहा - I Neha rav

अब इशांत ने कहा - today, on behalf of our school , we welcome you all to this annual day ...

फिर नेहा ने माइक लेते हुए कहा - I feel extreamely honoured to introduce the chief guest tonight Mr. A.R. Arora... Who is a social worker, a

teacher and ex student of our school..

सभी ने तालियां बजाकर उनका अभिवादन किया।

तभी इशांत - now I invite him to light the lamp ... Before we proceed with the event..

ये बोल वो दोनो वहा से बैक स्टेज आ गए।

मि. अरोड़ा भी स्टेज पर आ गए । कुछ वालंटियर ने उनको जलती हुई कैंडल दी।

इधर चाहत काजल और बाकी लड़कियों का वेट कर रही थी पर वो अभी तक पहुंची नहीं थी। तभी वो स्टेज वाली लड़की चाहत को देख - तुम सरस्वती वंदना वाली हो ना ....

चाहत ने हा में सिर हिलाया तो उन्होंने कहा - चलो जल्दी..

चाहत ने कहा - पर मेरे साथ जो गाने वाले थे वो तो नहीं है.

वो लड़की - ओह नहीं... कोई नहीं तुम तो हो .. तुम ही चलो...

चाहत उनके साथ स्टेज पर आ गई। मि. अरोड़ा ने जैसे ही कैंडल जलाया वैसे ही ।

चाहत स्टेज पर आई उसने माइक पकड़ा और गाने लगी...

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या

वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।।

चाहत के इतना गाते ही अध्यन जो हॉल के गेट पर था वहीं रुक गया सभी लोग यहां तक कि अंश भी आगे चला गया पर अध्यन चाहत को देख रहा था जो व्हाइट कुर्ती में आंखे बंद किए गा रही है। अध्यन दरवाज़े के सहारे ही खड़ा हो गया उसे तो बस चाहत की आवाज़ ही सुनाई दे रही थी। वो बस सुन रहा था और महसूस कर रहा था उस आवाज़ की मिठास को ।

सिर्फ अध्यन ही नहीं वहा पर मौजूद सभी लोग चाहत की आवाज़ में खो गए थे। इशांत भी बस आंखे बंद किए सुने जा रहा था। अंश ने पलट कर अध्यन को देखा उसने अपना हाथ अपने सिर पर दे मारा । वो उसके पास आया और उसे खींचते हुए चेयर के पास पर ले आया। अंश मुस्कुराते हुए - मजनू कहीं का...,,

शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम्

परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥

चाहत ने गाया और बाहर जाने को हुई तभी मि. अरोड़ा - चाहत बेटा...

चाहत रुक गई । वो मुड़ कर मि अरोड़ा को देख रही थी । तो मि. अरोड़ा - इधर आओ...

चाहत उनके पास गई तो उन्होंने चाहत के सिर पर हाथ रख कर कहा - तुम्हारी आवाज़ बहुत प्यारी है... इसे हमेशा सहेज कर रखना...

चाहत मुस्कुरा दी और स्टेज से होते हुए पीछे आ गई।
 
सटेज के पीछे काजल और वो दो लड़कियां खड़ी थीं। चाहत उन्हें देख - कहां थे तुम लोग... तुम लोग नहीं थे तो मुझे अकेले जाना पड़ा....

तीनो ने सिर झुका कर कहा - सॉरी... वो हम रेडी हो रहे थे तो...

चाहत उन्हें देख कर - इट्स ओके ।

चाहत वहा से निकलीं उसने अपना दुपट्टा उतरा और अपना स्कूल वाला ब्लेजर पहन लिया। वो बाहर आई। उसने काजल को अपने साथ चलने को कहा और दोनो मिल कर अध्यन और अंश को ढूढने लगी।

दोनो अंश और अध्यन को एक चेयर पर बैठे देखते है तो उनके पास आ जाते है। अध्यन चाहत को देख खुश हो जाता है। वो चेयर से उठ कर उन्हें अपने पास बुलाता है । दोनो उनके पास पहुंचते है। दो चेयर बस खाली होते हैं अध्यन और अंश एक साइड बैठे हुए थे। चाहत दूसरी तरफ बैठने को होती है तो अध्यन कहता है - सुनो ....

चाहत उसे देखते हुए - हा....

अध्यन - मेरे पास बैठो ना...

चाहत अध्यन को देखने लगती है तो अध्यन - कुछ बात करनी थी...

चाहत हा में सिर हिलाते हुए उसके पास बैठ जाती हैं।

चाहत प्रोग्राम देखने लगती है। वहीं अध्यन चाहत को देखने लगता है। अध्यन चाहत को देखते हुए - तुम गाती भी हो... तुमने कभी बताया नहीं...

चाहत सामने देखते हुए - इसमें बताने वाली क्या बात है.. बस ऐसे ही शौक़ के लिए गा लेती हूं...

अध्यन उसके हाथ पर हाथ रख - पर तुम .. उसके हाथ रखते ही चाहत उसकी तरफ देखने लगती है.... तो अध्यन अपनी बात जारी रखते हुए - पर तुम्हारी आवाज़ यार.. कितनी प्यारी है ... तुम्हारी आवाज़ सीधे दिल पर उतरती

है... तुम्हारा हर शब्द ... इतना ...इतना

अध्यन को आगे के वर्ड्स याद नहीं आते ।

तभी अंश पीछे से - इतना स्पष्ट...वो स्पष्ट कहना चाहता है...

अध्यन पलट कर अंश को देखते है और अंश को गुस्से से कहता है - चुप रह... और अपने कानो पर हाथ रख ... समझा...

अंश उसे घूरते हुए - क्यू ... तू धीरे भी तो बोल सकता है ना...

अध्यन उसकी तरफ आंखे दिखाते हुए - जितना बोला है ना... उतना कर समझा...

अंश उसे देख मुंह बनाते हुए चुप हो जाता है।

अध्यन फिर से चाहत को देखते हुए - इतना स्पष्ट है... और वो राग... सच में यार... कमाल हो तुम...

चाहत उसकी बात सुन शर्मा जाती है और मुस्कुराते हुए सामने देखने लगती है।

थोड़े देर बाद प्राइस डिस्ट्रीब्यूशन होने लगा चाहत और काजल को भी प्राइस मिला । ।अध्यन और अंश को भी फुटबाल के लिए ट्रॉफी मिला । इसके बाद डांस और सिंगिंग भी हुआ । किसी तरह से ये सब कंप्लीट हुआ और सब जाने लगे।

चाहत और अध्यन भी अपनी सीट से उठ गए। चाहत वालंटियर थी तो उसे बैक स्टेज जाना था । चाहत अध्यन की था कि तरफ देखते हुए - मुझे कुछ काम है.. तुम लोग मेरा वेट मत करो ... घर चले जाओ...

काजल ने हा कहा और वो तुरंत वहा से चली गई।

अंश उसे देखते हुए - ये लड़की ना...फिर चाहत को देख - ये लड़की तुम्हारा साथ कभी नहीं देगी... देख लेना..

चाहत ने कुछ नहीं कहा वो स्टेज की तरफ जाने लगी तभी अध्यन - चाहत ...

चाहत रुक गई उसने अध्यन की तरफ देखा फिर कहा - हम भी चलते है... तुम्हारे काम हो जाने के बाद वापस आ जाएंगे...

चाहत ने कुछ कहना चाहा तभी अध्यन ने अंश की तरफ देखते हुए कहा - तुझे देर तो नहीं होगी... ना...

अंश ने कहा - अरे नहीं...

तीनो बैक स्टेज आए चाहत वहा से इंचार्ज के पास गई और उनसे कहा वो घर जा रही है तो उन्होंने कहा - चाहत ... बस इन बचे हुए ट्राफी को रखवा दो... मै तब तक स्टेज का सामान अंदर करवाता हूं...

चाहत ने हा में सिर हिला दिया।

उसने एक नजर अध्यन के तरफ देखा तो अध्यन ने इशारे से हाथ दिखाते हुए कहा - तुम अपना काम करो ... हम यही है....

चाहत भी मुस्कुरा दी।

कुछ ही दूरी पर इशांत अपने एक हाथ में ब्लेजर पकड़े हुए आया । उसने जब चाहत को काम करते हुए देखा तो उसके पास जाने को हुआ। । तभी उसके दोस्तों ने उसे रोक लिया वो वहीं बैठ गया। पर उसकी नजर अभी भी चाहत पर थी।

इशांत दिखने में काफी स्मार्ट था टॉपर होने के साथ वह स्कूल की हर एक्टिविटी में पार्टिसिपेट करता था। जिस वजह से वो लड़कियों में काफी फेमस था। एक और वजह थी उसके फेमस होने की वो थी उसकी थी उसकी आवाज़ । उसकी आवाज़ में थोड़ी मिठास और थोड़ी सी भारी थी सुनने वाले को उसकी आवाज़ पहली बार में शायद पसंद ना आए पर गहराई से सुनने पर वो उसे समझ पाएगा ।

इशांत 12th में था इसीलिए ये उसका आखरी साल था थोड़ी देर में सारे टीचर्स बाहर आने लगें तो इशांत उनके पास

गया । वो सभी टीचर्स और क्लासमेट्स के साथ खड़ा होकर फोटोस क्लिक करवा रहा था। उसका मेन रीजन वहा खड़े रहना क्युकी वो वहा से चाहत को देख पा रहा था।

अंश ने जब इशांत को चाहत को घूरते हुए पाया तो अध्यन से - देख उधर...

अध्यन जिसकी नजर चाहत पर थी उसने चाहत को देखते हुए कहा - किधर..

अंश ने देखा अध्यन उसकी बातो पर ध्यान नहीं दे रहा तो उसने अध्यन का चेहरा पकड़ा और सामने की तरफ इशारा करते हुए बोला - उधर...

अध्यन ने एक नजर इशांत को देखा फिर वापस चाहत को देखने लगा। ।

तभी उसने देखा इशांत भागते हुए चाहत के पास जा रहा है ।

इधर इशांत चाहत के पास पहुंचा चाहत ने सारे ट्राफीज़ रखवा दी थी अब वो घर जाने वाली थी। इशांत उसके पास आकर खड़ा हो गया। चाहत मुड़ी तो सामने इशांत को देख उसने कहा - अरे आप... यहां .. कुछ काम था क्या...

इशांत ने कहा - हा एक काम था...

चाहत ने कहा - बोलिए...

इशांत सिर झुका कर - वो..वो क्या तुम...मेरा मतलब...

चाहत उसे ऐसा करते देख कर बोली - आप इतना घबरा क्यू रहे है बोलिए ना....

इशांत ने गहरी सांस ली उसने अपनी आंखो और मुट्ठियों को कस कर बंद के लूटा फिर कहा - क्या तुम मेरे साथ....एक फोटो ....मेरा मतलब क्या मै और तुम... यानी हम मिलकर एक फोटो क्लिक करें...

चाहत ने पहले इशांत को देखा फिर मुस्कुरा कर हा कहा । इशांत ने अपने दोस्त को पास आने का इशारा किया। वो दोस्त उनके पास आया अब इशांत और चाहत एक साथ खड़े हो गए। इस लड़के ने दोनो की फोटो खींची और वहा से चले गया,।

इशांत फोटो क्लिक करने के बाद चाहत की तरफ देखते हुए - थैंक्यू...

चाहत भी बदले में मुस्कुरा दी । अध्यन ये सब देख रहा था पर उसने कहा कुछ नहीं । चाहत और इशांत को ऐसे बात करते देख उसे भी अच्छा नहीं लग रहा था पर बेचारा कर भी क्या सकता था...

अंश उसकी हालत देखते हुए चाहत को आवाज़ लगाई और इशारे से उसे आने को कहा। चाहत भी आवाज़ सुन इशांत की तरफ मुड़ कर बोली - अच्छा चलती हूं.. बाय...

इशांत ने भी बाय कहा। चाहत मुड़ी और अध्यन की तरफ जाने लगी वो कुछ ही कदम चली होगी तभी इशांत ने उसका एक हाथ पकड़ा और गले से लगा लिया...

इशांत के हाथ चाहत के कमर को कस कर थामे हुए थे और चाहत के हाथ इशांत के सीने में थे और उसने अपनी आंखे बंद कर रखी थी...
 
चाहत आंखे बंद किए खड़ी थी। अध्यन ने जब ये देखा उसकी आंखे गुस्से से लाल हो गई वो उठ कर चाहत की तरफ बढ़ने लगा। तभी चाहत जहा पर खड़ी थी इशांत ने उसे वैसे ही पकड़े हुए दूसरी तरफ घुमा दिया। और उनके नजदीक ही स्टेज के पास लगी लाइट नीचे गिरी। अगर इशांत ने चाहत को ऐसे पकड़ कर वहा से हटाया नहीं होता तो वो लाइट चाहत पर गिरती। चाहत की ये खुश किस्मती थी कि वो बच गई थी। अध्यन का दिल और उसके पैर धक के साथ कुछ देर के लिए रुक गया । वो भागते हुए चाहत के पास पहुंचा । इशांत ने चाहत को खुद से दूर किया। इशांत ने चाहत के चेहरे पर हाथ रख कर पूछा - क्या तुम ठीक हो... चाहत ने हा में सिर हिलाया।

अब तक अध्यन चाहत के पास पहुंच चुका था उसने चाहत को देखते हुए उस गिरी हुई लाइट को देखा जो नीचे गिर के कई हिस्सों में टूट चुकी थी। जिसे देख कोई भी अंदाज़ा लगा सकता था यदि वो लाइट चाहत पर गिरती तो पता नहीं क्या होता । अध्यन ये सोच कर ही कांप उठा था। अंश भी अब

जाने लगा तभी कुछ लड़कियां चाहत का बेग लेकर आई । चाहत ने उन्हें थैंक्स कहा और अध्यन का हाथ थामे चलने लगी।

अध्यन उसे अपने साथ पार्किंग साइड ले आया उसने चाहत का हाथ छोड़ा और अपना हाथ आगे बढाया और बिना उसकी तरफ देखे कहा - चाबी..

चाहत एक ही बार में उसकी बातो को समझते हुए चाबी अध्यन के हाथ में दे दी। अध्यन ने चाबी अंश की तरफ उछल दी।

अंश चाबी पकड़ कर साइकिल स्टैण्ड की तरफ चला गया। अध्यन बाइक पर बैठ गया और फिर चाहत को देखने लगा चाहत भी उसके देखने से समझ गई थी। वो अध्यन की तरफ जाने लगी। तभी इशांत पीछे से बाइक निकालते हुए - अध्यन ....

अध्यन अब उसे देखने लगा तो इशांत - तुम्हे दिक्कत होगी... तो मै चाहत छोड़ देता हूं ... हमारा रूट भी सेम है...

अध्यन ने ये सुन एक नजर चाहत को देखा जो बस चुप चाप खड़ी थी। फिर उसने इशांत की तरफ देखते हुए कहा - नहीं... मै छोड़ दूंगा...

ये बोल वो चाहत को देखने लगा इशांत ने कुछ कहने के लिए मुंह खोला ही था तभी चाहत अध्यन की बात सुन कर

चुपचाप उसकी बाइक पर बैठ गई।

अध्यन ने अब इशांत को देखा जो दोनों को देखे जा रहा था उसने बाइक स्टार्ट की और आगे निकल गया। इशांत बस उसे जाते हुए देखता रहा।

अध्यन बाइक बहुत तेज चला रहा था। चाहत उसके पीछे दोनो पैरो को क्रॉस कर के बैठी थी। अध्यन गुस्से में बाइक चला रहा है ये देख चाहत ने कुछ कहना जरूरी नहीं समझा वो बस पीछे बैठी आगे रास्ते को देख रही थी।

तभी चाहत की नजर साइड में लगे मिरर पर गई जिस पर से अध्यन उसे देखे जा रहा था। अध्यन उसे अजीब नज़रों से देख रहा था चाहत को उसकी नज़रे बर्दाश्त नहीं हो रही थी उसने अध्यन को देखते हुए कहा - बाइक रोको...

अध्यन ने भी उसकी बात को अनसुना कर दिया और बाइक चला ही रहा था अब चाहत को भी गुस्सा आने लगा उसने एक बार फिर कहा - बाइक रोको...

उसके इतना कहते ही अध्यन ने बाइक और तेज़ कर ली अब चाहत को समझ नहीं आया तो उसने अध्यन के कंधे पर हाथ रख कर उसे झंझोर कर कहा - तुम सुन क्यू नहीं रहे ...

बाइक रोको...

अध्यन ने झटके से बाइक रोकी चुकी बाइक की स्पीड बहुत तेज़ थी तो ऐसे अचानक ब्रेक लगाने से बाइक का पिछला हिस्सा उठ गया था। जिससे चाहत अध्यन के करीब आ गई उसने दोनो हाथो को अध्यन के कमर के इर्द गिर्द कस बांध लिया था। चाहत ने डर से अपनी आंखे बंद कर ली थी।

अध्यन ने जब चाहत के हाथो को अपने कमर के ऊपर महसूस किया तब उसे बहुत अच्छा लगा । उसने अपनी आंखें बंद कर ली और अपने पैरो से बाइक को संभाले रखा उसने अपना एक हाथ चाहत के हाथो पर रख लिया । चाहत अभी भी अध्यन को जकड़े हुए बैठी थी।चाहत को जब लगा वो ठीक है और कुछ हुआ ही नहीं है तब वो उससे दूर होने के लिए हाथ पीछे करने लगी। तब अध्यन ने चाहत के हाथो पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए उसे ऐसा करने से रोका ।

अध्यन चाहत के हाथो को थामे हुए बोला - आज बहुत डर गया था मै... तुम्हे ऐसे देखना ... मुझे बहुत बुरा लगा ... ऐसा लगा जैसे... जैसे तुम्हे खो दूंगा ... तभी चाहत को अपने हाथो पर नमी का अहसास हुआ वो समझ गई अध्यन रो रहा है उसने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।

अध्यन ने फिर से अपने अपनी पकड़ मजबूत करते हुए कहा

- जैसे कोई तुम्हे मुझसे दूर ले जा रहा है... जहां तुमने अभी हाथ रखा है... वहा ही सबसे पहले दर्द हुआ था...अगर तुम मुझसे दूर हुई तो .... मै ये नहीं कहता मै मर जाऊंगा... पर जिंदा रहने की कोई उम्मीद भी खतम हो जाएगी..

चाहत ने जब ये सुना तो लगा उसकी धड़कने अब बन्द ही हो जाएगी । उसने कुछ नहीं कहा बस अपना सिर अध्यन के कंधो पर रख दिया।

थोड़ी देर तक दोनो इस पल को महसूस करते रहे चाहत और अध्यन दोनो ने आंखे बंद की हुए थी। फिर चाहत ने ऐसे ही बंद आंखो से अध्यन को कहा - अध्यन..

अध्यन वैसे ही आंखे बन्द किए हुए - हा..

चाहत - मै तुम्हे कभी छोड़ कर नहीं जाऊंगी... चाहे कुछ भी हो जाए.... I'll always there for you.

अध्यन ये सुन मुस्कुरा दिया उसने अपना हाथ हटाते हुए कहा - चलो अब घर चले ... वैसे भी रात बहुत हो गई है... चाहत ने वैसे ही उसे पकड़े हुए कहा - हा... अब चलते है...

अध्यन ने बाइक आगे बढ़ा दी।
 
अब अध्यन की बाइक अपनी नॉर्मल स्पीड से चल रही थी। ठंडी हवा चल रही थी चाहत के बाल उड़ते हुए उसके चेहरे पर आ रहे थे । उसके चेहरे को अध्यन अभी भी मिरर पर देख पा रहा था। चाहत का सिर अभी भी अध्यन के कंधे पर था और अध्यन का एक हाथ अभी भी चाहत के हाथ पर वैसे ही था। अक्सर छोटे शहरों में रात को ज्यादा गाडियां नहीं चलती थी तो रोड सुनसान था ।

चाहत का घर आने वाला था तभी अध्यन ने बाइक रोक कर चाहत को आवाज़ लगाई - चाहत.

चाहत वैसे ही - हा...

अध्यन उसके हाथ पर से अपना हाथ हटाते हुए - छोड़ो मुझे...

चाहत सिर उठा कर मासूम चेहरे के साथ - क्यू ..

अध्यन उसके चेहरे को देख कर उसे लगा जैसे वो वैसे ही उसे पकड़े बैठे रहे और वो उसे देखता रहे पर ये तो होने से रहा। उसने चाहत के नाक को अपनी उंगलियों से पकड़ते हुए कहा - क्युकी तुम्हारा घर आने वाला है...और अगर आर्यन या आंटी ने मुझे ऐसे देख लिया ना तो फिर ...

चाहत उसे देखते हुए - तो तुम उनसे डरते हो..

अध्यन मुस्कुराते हुए - नहीं... पर तुम्हे खोने से जरूर डरता हूं....

चाहत ने जैसे ही ये सुना तो पलके झुका कर बोली - क्यू डरते हो... हम आपके है कौन...?

बिल्कुल किसी औरत की तरह कहीं।

चाहत जो अभी भी बाइक पर बैठी थी अंश की ऐसी हरकत देख हसने लगीं । अंश ने फिर से मुंह बना लिया।

चाहत ने अध्यन के कंधो पर हाथ रखा और बाइक से उतर गई। अंश फट से उसके जगह पर बैठ गया। अध्यन जो पहले ही चिढ़ा हुआ था और चिढ़ गया ।

चाहत अध्यन के चेहरे को देखने लगी फिर उसने अंश की तरह अपना हाथ बढ़ाते हुए कहा - चाबी...

तो अंश ने जेब से चाबी निकाली और चाहत के हाथ पर रख दी।

चाहत ने चाबी को मुट्ठी में बंद करते हुए कहा - रात बहुत हो गई है... तो चलो अब तुम दोनों जाओ... गुड नाईट... ये बोल चाहत साइकिल का लॉक खोलने लगी तभी उसे अध्यन ने आवाज़ दी ।

चाहत पलट कर अध्यन के साथ तरफ देखने लगी तो अध्यन ने उसे पास आने का इशारा किया । चाहत साइकिल का लॉक खोल कर उसके पास गई तो अध्यन ने उसके हाथ को अपने हाथो में लेकर देखा फिर कहा - मैंने ज्यादा जोर से तो नहीं पकड़ा था ना...

अध्यन उसके चेहरे के पास आकर - बता दू...

चाहत ने पलके उठा ली। वो दोनो एक दुसरे के आंखो में देख रहे थे। चाहत की बड़ी पलको ने झपकना बन्द कर दिया था। वो बस आज अध्यन के मुंह से वो सुनना चाहती थी जो उसने इतने दिनों से महसूस किया था। दोनो कुछ देर बस एक दूसरे को देखे ही जा रहे थे। कुछ देर बाद अध्यन ने जैसे ही कुछ कहना चाहा ।

तभी किसी ने पीछे से ज़ोर से हॉर्न बजाया। अध्यन चाहत से दूर हुआ। चाहत ने भी अध्यन के कमर के ऊपर से अपना हाथ हटा दिया। अध्यन ने बाइक आगे बढ़ा दी।

दोनो अब चाहत के घर के पास पहुंचे तो देखा अंश चाहत की साइकिल को साइड में रख कर वहीं खड़ा है । अंश बाइक के रुकते ही उसने अपना एक हाथ कमर पर रख बिल्कुल आंटी की तरह कहा - आ गए मेरे बच्चो.. बड़ी जल्दी आ गए ... इतनी भी क्या जल्दी थी.. थोड़ा देर से ही आ जाते...

अध्यन मुंह बनाते हुए - यार... तू ये औरतों जैसे बाते मत किया कर...

अंश उसकी तरफ देख अपने बालो को हाथ से ऊपर करते हुए बोला - अब मेरे बच्चे ही ऐसी हरकतें करेंगे... जैसे कि देर से आना तो मुझे तो टैंशन होगी ना.. ये बात उसने

को देखा और फिर गुड नाईट बोल कर अपनी साइकिल के पास पहुंची और उसे अंदर ले जाने लगी तभी अध्यन ने चाहत को पुकारा तो चाहत ने मुड़ कर उसकी तरफ देखा अध्यन ने मुस्कुराते हुए कहा - गुड नाईट...

चाहत ने कुछ नहीं कहा बस मुस्कुरा दी।

अंश उन दोनों को देखने लगा चाहत अपने घर के गेट के पास गई उसने साइकिल अंदर की और एक बार फिर अध्यन को देखा जो बाइक में खड़ा उसे ही देख रहा था। चाहत ने अपना हाथ उठा कर दोनो को बाय कहा और घर के अंदर आ गई।

पर अध्यन वो तो वैसे ही खड़ा था। उसे देख अंश ने अपने हाथ जोड़कर कहा - भाई चल ना घर... तुम दोनों का तो ये रोज़ का है... मेरा तो सोच...

अध्यन ने उसकी तरफ घूरते हुए कहा - जरूरत से ज्यादा ना... बोला मत कर तू... नहीं तो यही छोड़ जाऊंगा ... फिर आते रहना अकेले...

अंश ने उसकी बात सुन कर कहा - ठीक है... मान गया अब चल ...

अध्यन ने बाइक स्टार्ट की और बाइक आगे बढ़ा दी ।
 
चाहत का घर

चाहत अंदर आई उसने अपना बेग साइड में रखा और सोफे पर बैठ गई उसने अपना ब्लेजर उतरा और उसे मोड़ने लगी मोड़ते हुए उसने जैसे ही ब्लेजर को ऊपर उठाया उसे अजीब सी खुशबू महसूस हुई उसने ब्लेजर को अपने नाक के पास ले जाकर कर एक बार फिर उसे सूंघा तो उसे फिर से वही खुशबू महसूस हुई चाहत ने इस खुशबू को पहचान लिया ये अध्यन की खुशबू थी।

चाहत ने मुस्कुराते हुए उस ब्लेजर को पकड़ा और बेग उठा कर अपने रूम की तरफ चले गई।

चाहत ने ब्लेजर को साइड में रखा और फिर फ्रेश होने चले गई। थोड़ी देर बाद वो बाहर आई उसने अपने बालो को खोला फिर उसका जुड़ा बना लिया । चाहत ने अपना बेग खोला और उसमे से सारे ट्राफी को निकाल कर रूम में सजाने लगीं तभी रीमा जी ने चाहत को आवाज़ दी । उन्होंने चाहत को नीचे आने को कहा चाहत नीचे जाने लगी तो खिड़की पर लगी विंड चाइम् ने आवाज़ की चाहत ने विंड चाइम की तरफ देखा और मुस्कुरा दी। और नीचे आ गई।

इधर अध्यन ने अंश को घर के बाहर छोड़ा और जाने के लिए

मुड़ ही रहा था तो अंश ने कहा - अध्यन..

अध्यन रुक गया अंश उसे देखते हुए - आज गुस्सा थोड़ा ज्यादा नहीं हो गया था...

अध्यन ने बाइक की चाबी घुमाई और बाइक को बंद करते हुए बोला - हा ज्यादा तो हो गया था ... पर करता भी क्या... जब चाहत को इशांत की बाहों में देखा ... तो रोक नहीं पाया खुद को...इसलिए ये सब कर दिया... ये कहकर अध्यन उसने अंश की तरफ देखते हुए कहा - पर अब आगे से मै ऐसी कोई हरकत नहीं करूंगा..

अंश ने कहा - हा ये भी ठीक है... पर मुझे तुझसे एक और बात कहनी थी...

अध्यन - जानता हूं... तू किस के बारे में बोल रहा है...

अंश उसकी तरफ देखने लगा तो अध्यन ने कहा - तू इशांत की बात कर रहा है ना...

अंश ने हा में सिर हिलाया और कहा - मैंने उनकी आंखो में ... वो...

तब अध्यन ने उसकी बातो को पूरा करते हुए कहा - वो चाहत को पसंद करते है...

अंश ने अब हैरानी से अध्यन से देखा।

तो अध्यन ने कहा - हा मै जानता हूं... उनकी आंखो से ही

पता चलता है... जब भी वो चाहत को देखते है... उनका तरीका बिल्कुल भी गलत नहीं होता ... हम जहां भी हो अगर वो हमारे पास से गुज़रे तो एक नजर वो चाहत को देख ही लेते है.... फिर अध्यन मुस्कुराते हुए - उनकी नज़र भी बस चाहत पर टिकी रहती हैं...

अंश उसे देखने लगा तो अध्यन ने कहा - क्या हुआ... ऐसे क्यू देख रहा है...

अंश उसकी तरफ देखते हुए - पहली बार ऐसा इंसान देख रहा हूं... जिसे इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ता की ... कोई उसके प्यार से प्यार करे... उल्टा वो मुस्कुराते हुए ये सारी बाते बता रहा है... फिर उसने अध्यन के कंधो पर हाथ रख कर कहा - भाई तू किस मिट्टी का बना है...

अध्यन मुस्कुराते हुए - मै नॉर्मल इंसान ही हूं... कुछ गलत नहीं कहा मैंने... चाहत को हर लड़का पसंद नहीं कर सकता.... उसे पसंद करने के लिए थोड़ा अलग होना जरूरी है...

अंश कंफ्यूज होकर - मतलब

अध्यन उसके सिर पर थपकी मारते हुए - मतलब ये ...की चाहत दूसरी लड़कियों की तरह नहीं है... वो ना बहुत गोरी है.. और ना ही ज्यादा चुलबुली... वो ना ही ज्यादा बोलती

है... ना ही किसी की बात ज्यादा सुनती है... उसे चाशनी में घोल कर ज्यादा बाते करना पसंद नहीं... अगर उसकी खूबसूरती की बात करे तो बस उसके चेहरे की मुस्कुराहट और उनकी झपकती बड़ी पलके ही है... जो दूसरो से अलग है... वो पूरी तरह से pure है... कोई भी मिलावट नहीं है उसमे...

अध्यन अब थोड़ी देर के ,लिए रुक गया उसने फिर कहा - ये सारी अंदरुनी चीज़े है ... जो तब ही दिखती हैं... जब देखने वाले की नजर पारखी हो... जब लोग सामने वाले की अच्छाई को देखे ना कि उसकी बाहरी खूबसूरती ... ऐसे लोग सच में अच्छे होते है... और जहा तक बात इशांत की है... अगर वो चाहत को पसंद करते है... तो वो सच में अच्छे है... क्युकी उन्हें दिखावा नहीं... अंदरुनी खूबसूरती ज्यादा पसंद है... और अगर ऐसा कोई इंसान चाहत को पसंद करे तो ... मुझे बुरा क्यू लगेगा... बल्कि मै उसकी पसंद को देख कर ही खुश हो जाऊंगा...

अंश उसकी बात मूह खोले सुनता रहा फिर उसने अध्यन के सिर पर हाथ रख कर कहा - भाई तेरी तबीयत तो ठीक है ना...

अध्यन ने इसका हाथ हटाते हुए कहा - हा... मै ठीक हूं... पर तू ऐसी बाते क्यूं कर रहा है...

अंश - क्युकी तू बहकी बहकी बाते कर रहा है..

अध्यन - इसमें बहकने जैसी कौन सी बात बोल दी मैंने.. ठीक ही तो कहा मैंने...

अंश - हा ठीक कह रहा है तू.. पर सोच अगर उसने तुझसे पहले चाहत को बोल दिया... और उसने भी हा कह दिया तो... तो तू क्या करेगा...

अध्यन उसकी बात सुन हसने लगा फिर थोड़ा सीरियस होकर कहा - नहीं ... ऐसा नहीं हो सकता...

अंश अपने दोनों हाथ मोड़ते हुए - क्यू नही हो सकता...

अध्यन - क्युकी भले ही .... इशांत की नज़रों में चाहत के लिए प्यार या जो भी हो... पर चाहत की आंखो में..बातो में... यहां तक कि उसकी रूह में भी मेरा ही नाम है... था और रहेगा....समझा..

अंश ने हा में अपना सिर हिला दिया।

अध्यन ने फिर अंश के बालों में अपना हाथ फेरा फिर बाइक स्टार्ट करते हुए आगे निकल गया। अंश उसे जाते हुए देखते रहा जब तक वो उसकी आंखो से ओझल ना हो गया हो। उसने गहरी सांस ली फिर आसमान ली तरफ देख कर कहा - भले कुछ नहीं हो जाए... पर इनको अलग मत करना भगवान... नहीं तो ये बेवकूफ रह नहीं पायेगा... ये बोल वह भी अपने घर आ गया।

अध्यन का घर

अध्यन घर पहुंचा तो सबसे पहले गौरी जी से मिला उसने गौरी जी को देखते ही अपने गोद में उठा लिया फिर उन्हें गोल गोल घुमाने लगा। गौरी जी उसकी इस हरकत से चौक कर चिल्लाने लगी।

उन्होंने अध्यन के पीठ पर मरते हुए कहा - उतारो मुझे...अध्यन क्या कर रहे हो... मुझे नीचे उतारो ...

गौरी जी की चिल्लाने की आवाज़ सुन कर देव जी जो अपने रूम में थे वो भी बाहर आ गए। उन्होंने अध्यन को देखा जो अपनी मॉम की गोद में उठाए घूम रहा था।

उन्होंने अध्यन को इतना खुश पहले कभी नहीं देखा था वो बस उसके चेहरे की खुशी देख रहे थे। अध्यन की ये हसीं देव जी को सुकून दे रही थी। कुछ देर तक वो अध्यन को ऐसे ही देखते रहे... थोड़े देर बाद उन्होंने अध्यन को देखते हुए कहा - अरे.. अध्यन क्या कर रहे हो... नीचे उतारो उन्हें..

देव जी की बात सुन अध्यन ने गौरी जी को नीचे उतार दिया फिर उसने देव जी को गले लगाते हुए कहा - डेड हम फुटबाल में जीते थे ना.. तो प्रिसिपल सर ने मुझे ट्राफी दी.. और ... हमारी टीम को भी ट्राफी मिली .. इतना कह कर उसने अपने बेग से ट्राफी निकलीं और फिर अपने पापा को दिखाते हुए बोला - ये देखिए...

देव जी ने ट्राफी को देखा फिर अध्यन के कंधो पर हाथ रख कर कहा - प्राउड आफ यूं...

अध्यन ने भी मुस्कुराते हुए कहा - थैंक्यू...

फिर अध्यन उनसे दूर हुआ और उसने देव जी से कहा - चलों अब मै फ्रेश होकर आया .. फिर पलट कर गौरी जी को देख कर कहा - मॉम खाना लगा दो...

गौरी जी ने भी हा में सिर हिलाया फिर अध्यन अपनी रूम के तरफ चला गया ।

वो रूम में आया और फ्रेश होने वाशरूम चला गया जब वो वापस आया तो अपने चेहरे को टावेल से साफ करते हुए उसने खुद को मिरर में देखा । वो अपनी आखों को देखने लगा जिसमे उसे अभी भी चाहत का अश्क नजर आ रहा था। चाहत को याद करते ही उसके चेहरे पर स्माइल आ गई।

वो ऐसे ही मुस्कुरा रहा था तभी गौरी जी ने उसे आवाज़ दी तो वो बाहर आ गया । अध्यन देव जी और गौरी जी के साथ खाना खाने के लिए डायनिंग टेबल पर बैठ गया। वो खाना खाने लगा और आज हुए फंक्शन के बारे में गौरी जी और देव जी को बताने लगा। अध्यन की हर बात भले ही कहीं से शुरू हुई हो पर वो ख़तम तो चाहत पर जा कर ही होती थी चाहे वो उसका गाना गाना हो । या उसका प्राइज जीतना... सब कुछ बस चाहत पर ही ख़तम हो रहा था। गौरी जी भी ये बात नोटिस कर रही थी। उन्होंने देव जी की तरफ देखा जो इसी बात को सोचते हुए मुस्कुरा रहे थे।

अध्यन ने अपना खाना ख़तम किया तो गौरी जी ने कहा - अध्यन ..

अध्यन ने पलट कर गौरी जी की तरफ देखा तो गौरी जी ने कहा - कभी हमे भी मिलाना... अपनी चा... फिर थोड़ा संभल कर - मेरा मतलब था अपने दोस्तो से.. अध्यन ने कुछ नहीं कहा वो बस गौरी जी को देखने लगा जो ये बोल वापस किचेन की तरफ जाने लगीं ।

अध्यन बस उनकी तरफ देखे जा रहा था तभी किसी ने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा तो अध्यन ने सिर उठा कर देखा तो वहा पर देव जी खड़े थे। अध्यन उनको देखने लगा

तो देव जी बोले - आखिर है तो तुम्हारी ही मा ... जितना तुम खुद को नहीं जानते ... उतना वो तुम्हे जानती है...

तब अध्यन झट से - नहीं पापा वो..

तब देव जी - बेटा अब मुझसे झूट मत बोलना... क्युकी जब बेटा बड़ा होता है ना... तो सबसे पहले बाप को ही पता चलता है...

अध्यन ने ज्यादा कुछ नहीं कहा बस वहा से उठ कर अपने रूम आ गया।

उसने अपनी डायरी निकली फिर आज हुई बातो को लिखने लगा। उसे लिखते हुए वो पल याद आया जब चाहत ने उसे पकड़ कर रखा था ... उसने डायरी में हर बात वैसे ही लिखी जैसे हुई थी। फिर डायरी से चाहत की फोटो निकाल कर उसे देखते हुए बोला ... " आज शायद इजहार भी हो जाता तुमसे... पर उफ्फ ये जमाने वाले... कोई नहीं किसी और दिन हम तुम्हे अपने दिल का हाल बताएंगे "... ये बोल उसने फोटो डायरी में रखी और फिर आंखे बंद कर नींद की आगोश में चला गया।
 
मिनी का घर

इशांत घर पहुंचा तो देखा मिनी और मैथिली जी (मिनी की मम्मी) सोफे पर बैठे हुए है। इशांत ने दोनो को देखते हुए अपने रूम की तरफ जाने लगा तभी मैथिली जी - अरे इशू बेटा.. आ गए तुम.. जाओ जल्दी से फ्रेश होकर आओ... मै तब तक खाना गर्म करती हूं...

इशांत उन्हें देखते हुए - नहीं मामी.. भूख नहीं है...

ये बोल इशांत अपने कमरे की जाने लगा।

तभी मैथिली जी उसके हाथ को पकड़ कर रोक लेती हैं फिर अपना हाथ इशांत के माथे से लगा कर कहती है - क्या हुआ... इशू... बाबू तुम ठीक तो हो ना...

इशांत उनके हाथ पर हाथ रखते हुए - मै ठीक हूं... मुझे कुछ नहीं हुआ... बस अभी खाने का मन नहीं है...

इशांत के इतना कहने के बाद मैथिली जी ने उसे कुछ नहीं कहा वो सोफे पर बैठी मिनी को देखते हुए बोली - और तुम... तुम्हे देर नहीं हो रही ... जाओ सोने...

पर मिनी ने उनकी बात को पूरी तरह से इग्नोर कर दिया। मैथिली जी ने देखा मिनी नहीं उठी तो उन्होंने अपनी कमर पर हाथ रख कर कहा - उठ रही हो या फिर पापा को

बुलाऊं... मिनी उनकी बात सुन डर गई वहा से भाग कर अपने रूम चले गई।

मैथिली जी ने अब एक नजर इशांत को देखा फिर कहा - इशू... मै खाना फ्रिज में रख देती हूं... अगर रात को भूख लगे तो खा लेना.. ये बोल वो जाने लगी तो इशांत ने उन्हें पीछे से गले से लगा लिया और अपना सिर उनके कंधों में रख लिया मैथिली जी को कुछ समझ नहीं आया उन्होंने अपना हाथ पीछे बढाया और इशांत के चेहरे को छूते हुए बोली - इशू क्या हुआ.. किसी ने कुछ कहा क्या... ये बोल वो चुप हो गई ।

थोड़ी देर तक मैथिली जी को कुछ समझ ही नहीं आया। क्युकी इशांत कुछ बोल ही नहीं रहा था। मैथिली जी पलट कर उसका चेहरा हाथो में लेकर बोली - क्या हुआ...बोलो इशू... तुम ऐसे क्यू.. कुछ तो कहो... अब भी इशांत ने कुछ नहीं कहा उसने कस कर मैथिली जी को गले से लगा लिया तब मैथिली जी को कुछ कुछ समझ में आया उन्होंने उसके पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा - क्या हुआ बेटा.. बताओ मुझे... अपनी मामी को नहीं बताओगे... बोलो...ना...

अच्छी पढ़ाई के लिए उसे राजनांदगांव भेज दिया।

यहां आकर वो थोड़ा बदलने लगा मैथिली जी और मिनी ने उसे बदलने में और यह के माहौल में एडजस्ट होने में मदद की। मैथिली जी तो उसे अपना बेटे की तरह ही मानती थी। शायद इसीलिए उसने फिर से मुस्कुराना सीख लिया था।

मैथिली जी उसके दर्द को अच्छे से समझती थीं । इसलिए उन्होंने उसे कुछ नहीं कहा। कुछ देर बाद वो इशांत से अलग हुई उन्होंने इशांत का हाथ पकड़ा और उसे डायनिंग टेबल पर बैठाया फिर किचेन के अंदर चले गई । इशांत टेबल पर सिर झुकाए हुए बैठा था। थोड़ी देर बाद मैथिली जी हाथ में एक थाली लिए आई उन्होंने उस प्लेट में खाना रखा हुआ था। उन्होंने उस खाने के प्लेट को इशांत की तरफ बढ़ाया पर इशांत ने खाने के प्लेट को देखते हुए ना में सिर हिला दिया । तब मैथिली जी ने इशांत को खाना खिलाने के लिए हाथ आगे बढ़ाया और खाने का एक निवाला इशांत की तरफ बढ़ाया तो इशांत मना नहीं कर पाया उसने खाना खाया। थोड़ी देर बाद उसने खाना ख़तम किया ।

मैथिली जी ने प्लेट को साइड में रखा और इशांत के हाथ पर हाथ रख कर बोली - इशू.. मुझे पता है ... तुम अपनी मम्मी

इशांत वैसे ही उनको गले लगाए हुए - मा की याद आ रही है...

अब मैथिली जी ने उससे कुछ नहीं कहा बस उसे गले से लगाए हुए खड़ी रही ।

इशांत की मा नहीं थी उनका देहांत तब ही हो गया था जब वो सिर्फ दस साल का था। इशांत के पिता जी का राजनादगांव के पास ही एक गांव में ही फार्म था। ये फार्म काफी बड़ा था। वहा सब्जी उगाई जाती थी , मुर्गी पालन , मछली पालन और साथ ही फलो के बागान भी थे।

इशांत की मा के देहांत के बाद इशांत का बर्ताव थोड़ा अजीब हो गया था। उसने अपने आप को अकेला कर लिया था वो ये सब समझने के लिए बहुत छोटा था। इशांत के पिता जी शुरू से ही अपने काम के वजह से उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते थे। पर इसका मतलब ये नहीं था वो उससे प्यार नहीं करते थे।

वो उससे बहुत प्यार करते थे पर उन्हें जाहिर करने का मौका कभी मिला ही नहीं था । इशांत शुरू से बहुत खुशमिजाज बच्चा रहा था। पर अपनी मा के देहांत के बाद उसकी हसीं कहीं खो गई थीं । वो बस अपने में ही रहता था। किसी तरह से उसे 5th तक की पढ़ाई की । फिर उनके पिता जी ने

को बहुत मिस करते हो... जब भी उनकी याद आए तो तुम मेरे पास आ सकते हो.. मै तुम्हारे साथ हूं... हमेशा..

इशांत ने कुछ नहीं कहा तो रीमा जी ने उसके बाल पर हाथ फेर कर वहा से चले गई ।

कुछ देर बाद इशांत भी वहा से उठ कर अपने कमरे में आ गया। उसने कपडे बदले फिर अपने कैमरे को लैपटॉप से कनेक्ट कर आज की फोटोस को देखने लगा।

फोटोस देखते हुए उसके हाथ रुक गए सामने उसकी और चाहत की साथ वाली फोटो थी। उसने उस फोटो को देखते हुए कहा - काश मै तुमसे पहले मिला होता ... तो इतनी तकलीफ नहीं होती.. ये बोल उसने लैपटॉप को स्क्रीन पर हाथ फेरा फिर लैपटॉप को साइड में रख कर और बेड पर लेट गया...

थोड़ी देर बाद उसे नींद आ गई और वो सो गया...

अगले दिन

स्कूल

आज अध्यन स्कूल जल्दी पहुंचा तो उसने देखा आज क्लास में कोई है । वहा कोई लड़का बैठा है। वो लड़का स्कूल ड्रेस पहने उसके ही चेयर पर बैठा था। अध्यन उसके पास गया और उसने उस लड़के का कंधा थपथपाया तो वो लड़का पीछे मूड गया।

अध्यन ने देखा वो कोई और नहीं बल्कि इशांत है। इशांत उसे देख कर उस चेयर से उठ गया उसने अध्यन को देखते हुए कहा - ओह तो तुम आ गए... मै तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था...

अध्यन ने बेग किनारे पर रखते हुए कहा - आप मेरा इंतज़ार कर रहे थे... पर कयू...

इशांत ने कहा - वो तुमसे ... कुछ बात करनी थी..

अध्यन ने बेग डेस्क पर रखी फिर कहा - कहिए...

इशांत ने देखा सभी बच्चे क्लास में आ रहे है तो उसने अध्यन की तरफ देखते हुए कहा - यहां नहीं.. कहीं बाहर चले...

अध्यन ने भी हा में सिर हिला दिया। फिर दोनो बाहर आ गए।

दोनो ग्राउंड में आ गए। इशांत पास ही रखे बेंच के पास खड़ा हो गया। अध्यन भी उसके बगल में खड़ा हो गया उसने सामने देखते हुए इशांत से कहा - आपको कुछ कहना था...

इशांत सामने देखते हुए - कल रात जब तुम चाहत को छोड़ने जा रहे थे तो... तो ... वो आगे बोल ही नहीं पा रहा था तो ...

अध्यन उसे टोकते हुए - तो आप हमारे पीछे आए थे...

इशांत ने अब चौकते हुए मुड़ा और उसने अध्यन को देखा फिर कहा - तुम्हे पता है...

अध्यन ने घूम कर कहा - हा मुझे पता है... मैंने आपको साइड मिरर से देख लिया था...

इशांत ने हैरानी से उसकी तरफ देखा फिर कहा - पूछोगे नहीं क्यू आया था...

अध्यन ने बिना किसी भाव के कहा - चाहत के लिए..

इशांत ने अब एक गहरी सांस ली फिर कहा - तो तुम ये भी जानते होंगे ... की मै चाहत को...

अध्यन ने इशांत को टोकते हुए - हा जानता हूं..

इशांत ने जैसे ही ये सुना वो एक सेकंड के लिए रुक गया फिर अध्यन को देखने लगा वो काफी देर तक उसे देख ही रहा था। अध्यन ने पहले तो कुछ नहीं कहा पर जब इशांत ने उसे देखना बंद नहीं किया तो उसने खीझ कर कहा - क्या

है... ऐसे देख रहे हो जैसे... मै हीं चाहत हूं...

जब इशांत ने ये सुना तो उसे आंखे बड़ी कर अध्यन को और घूरने लगा उसने कहा - क्या तुम्हे सच में फर्क नहीं पड़ता..

अध्यन ने कहा - पड़ता है... बहुत फर्क पड़ता है... पर मै किसी की फीलिंग्स को रोक भी तो नहीं सकता ना... आप चाहत को पसंद करते है.... ना ही मै इसमें कुछ कर सकता हूं ना आप.. अब इसमें आपका क्या दोष..ना ही चाहत का कोई दोष है और ना ही मेरा...

इशांत ने अध्यन को देखा जिसकी आंखो से ही पता चल रहा था वो सच कह रहा है इशांत ने उसे देखते हुए कहा - इतना प्यार करते हो उससे...

अध्यन ने कहा - नहीं इतना नहीं... बल्कि इससे भी ज्यादा...मै बहुत चाहता हूं .. उसे... बहुत ज्यादा... ये बोल अध्यन मुस्कुरा दिया...

तब इशांत ने कहा - मै जब भी तुम्हे चाहत के साथ देखता था तो मुझे बहुत बुरा लगता था......मुझे आज तक ये समझ नहीं आया कि मै क्यों तुमसे इतना जलता हूं... क्यों ?? .. पर कल जब तुमने मेरे सामने उसका हाथ पकड़ा ... तो अजब सा दर्द हुआ मुझे.. सच कहूं तो मुझे लगा उसका हाथ तुम्हारे

हाथ से छुड़ा कर मुक्का मरू तुम्हे... ऐसा लगा जैसे तुम उसके साथ कोई जबरदस्ती कर रहे हो... ऐसा लगा जैसे कोई मेरी चीज मुझसे छीन कर ले जा रहा हो...

अध्यन अब भी मुस्कुराते हुए उसकी बातें सुन रहा था इशांत ने गौर से अध्यन को देखा फिर वो भी मुस्कुरा दिया उसने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - इसीलिए मै तुम्हारे पीछे आया ... और जब तुम पार्किंग में चाहत के साथ थे... तो मै चाहत को तुम्हारे पास से ले जाने ही आया था.. पर जब मेरे पूछने पर भी चाहत ने कुछ नहीं कहा और चुपचाप तुम्हारे साथ बैठ गई... तो बहुत दर्द के साथ ऐसा लगा जैसे कुछ टूट गया हो मेरे अंदर... अब इशांत की आंखे नम हो चली।

अध्यन उसके करीब आया और इशांत की पीठ सहलाने लगा इशांत ने फिर से कहा - मेरा दिल तो वहीं टूट ही गया था.. पर पता नहीं.. फिर भी मै इस सच को एक्सेप्ट नहीं कर पा रहा था.. किसी तरह हिम्मत जुटा कर मैंने फिर से तुम्हारा पीछा किया.. तुमने अपनी बाइक की स्पीड बढ़ाई ... चाहत का तुम्हे रोकना .. तुम्हारा ना रुकना .. सब मै देख रहा था... पर जब तुमने ब्रेक लगाई .. उसके बाद की जब वो सारी बाते सुनी ... तब मुझे लगा... नहीं यार ये मुझे ये नहीं करना था... जो दिल अब तक टूटा था ... तुम दोनों की बाते सुन बिखर गया...

इशांत ने अध्यन की तरफ देखते हुए कहा - मुझे कभी प्यार का अहसास नहीं हुआ... मेरे पास कई लड़कियां रही ... पर मैंने कभी उन्हें दोस्त से ज्यादा नहीं माना... यहां तक कि जब भी किसी ने मुझे प्रपोज किया तब भी मैंने उन्हें मना कर दिया... पर पता नहीं जब चाहत ने मुझे भैया कहने के लिए अपना मुंह खोला तो मैंने उसे रोक दिया.. चाहत मुझसे छोटी है... फिर भी... फिर भी मुझे वो पसंद है... उसकी बड़ी पलके मुझे पसंद है... उसकी वो मुस्कुराहट मुझे पसंद है.. उसका ज्यादा ना बोलना मुझे पसंद है...

अब इशांत के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई उसने मुस्कुराते हुए कहा - तुम जानते हो क्यों... क्युकी उसकी मुस्कुराहट मेरी मम्मी की तरह है... बिना किसी मिलावट के ... एकदम साफ... जब मैंने उसे मिनी के बर्थडे के दिन अपनी बाइक पर बैठाया था.. तो उसके बालो की खुशबू.. बिल्कुल मम्मी की तरह ही थी... उसका गाना.. उसकी आवाज़... उसकी आंखो की मासूमियत बिल्कुल मा जैसी ही है... मुझसे कोई रिश्ता ना होते हुए भी मुझे all the best कहना ... सब कुछ... सब कुछ ... इस सब ने मुझे अट्रैक्ट किया...

जैसे ही इशांत ने ये कहा अध्यन उसे खा जाने वाली नज़रों से देखने लगा तब इशांत ने कहा - मुझे पता है... तुम्हे ये सब

सुन कर बुरा लग रहा होगा.. पर मै खुद ही नहीं बता सकता ...कब मै ये सब फील करने लगा... मुझे कब उससे प्यार हो गया.. मुझे भी उसका हाथ पकड़ कर अपने दिल का हाल कहना था... पर जब इस बात का अहसास हुआ...तब तक बहुत देर हो चुकी थी.. उसकी आवाज़ सुनी और उसे व्हाइट सूट में देखा तो लगा बस आज अपने दिल की बात कह दूंगा उससे .. पर अब ... अब ये हो नहीं सकता... खैर जो हुआ सो हुआ... मुझे इस बात का कोई ग़म नहीं... क्युकी वो अभी जिसके साथ है... वो उसे शायद मुझसे भी ज्यादा प्यार देगा... मुझसे भी ज्यादा उसकी केयर करेगा..

ये बोल उसने अपना हाथ अध्यन की तरफ करते हुए कहा - पर तुमसे एक वादा चाहता हूं..

अध्यन ने कहा - कैसा वादा...

इशांत हस्ते हुए - डोंट वरी... चाहत को नहीं मांग रहा.. मै बस इतना चाहता हूं .. तुम कभी भी चाहत को कोई तकलीफ नहीं होने दोगे.. उसका ख्याल रखो गे.. बोलो करोगे ना...

इशांत की बात सुन अध्यन ने कहा - हा रखूंगा... पर आप भी ये वादा करो ... आप भी अपनी लाइफ में आगे बढ़ोगे...

इशांत ने भी मुस्कुराते हुए हा में सिर हिला दिया।

इशांत ने हाथ हटाते हुए कहा - पर अगर तुम इसके फेल हुए तो...

अध्यन उसकी तरफ देखते हुए - तो...

इशांत ने कहा - तो तुम ... चुपचाप उसकी जिंदगी से चले जाओगे... बिना उसे तकलीफ पहुंचाए... मंजूर है...

अध्यन ने कहा - मंजूर है...

अब इशांत ने कहा - ओके तो क्लास में चले...

अध्यन - हम्म कहा और आगे जाने लगा... दोनों अपनी अपनी क्लास की तरफ मुड़ गए...

इसके बाद फिर इशांत ने चाहत से ज्यादा बात नहीं की पर जब भी वो अध्यन से मिलता वो उसे अपने वादे के बारे में याद दिलाता । अध्यन जानता था इशांत उसे ये सब बस सताने के लिए बोल रहा है। फिर भी वो चिढ़ जाता था। अब प्यार करता है तो उसे खोने के बात से ही डर जाता था यही वजह थी उसके चिढ़ने की।

कहीं ना कहीं उसे भी इस बात का अहसास हो गया था कि इशांत चाहत को इतनी जल्दी नहीं भूल सकता ।
 
इधर इशांत भी पूरी कोशिश कर रहा था पर पहला प्यार भूलना आसान नहीं था। वो कही भी हो पर चाहत की हर

बात से वाकिफ था। अगर चाहत को चोट भी लगती थी तो उसे पता चल जाता था। वो क्या है ना इन लडको का ना हर जगह जुगाड होता है। बस ऐसा ही कुछ इशांत ने भी कर रखा था।

ऐसे ही दिन निकालने लगे । चाहत, अंश, काजल और अध्यन की दोस्ती ऐसे ही बनी थी... पर प्यार का इजहार वो अभी भी बाकी था...

नोक झोक और मस्तियों से भरा ये साल कब निकला ... किसी को पता भी नहीं चला... अध्यन ने चाहत से इजहार किया नहीं था पर "आंखे" उनका क्या करे... वो तो बस एक दूसरे को देख कर ही सारी बाते कह जाती थी...

इशांत ने jee के एग्जाम दिए उसका फर्स्ट पेपर तो क्लियर हो गया पर advance वो निकाल नहीं पाया। फिर भी उसने हार नहीं मानी cgpet ( chattishgarh pre engineering test) का एग्जाम दिया अब जिस इंसान jee main क्लियर कर लिया था उसके लिए cgpet क्लियर करना ज्यादा मुश्किल नहीं था।

चाहत , अध्यन, अंश और काजल चारो 10th में आ गए थे। पहले तो बोर्ड की क्लास इसीलिए चारो ने पढ़ाई के लिए कमर कस ली थी। इसी बीच अंश और चाहत ने एक दिन अपने क्लास की ही एक लड़की को अनिल के साथ देख लिया था। दोनों ने जब पता लगाया तो पता चला दोनों रिलेशनशिप में है।

एक दिन क्लास में...

अंश चाहत से - चाहत हमें काजल को बता देना चाहिए...

चाहत - नहीं अंश... अभी नहीं...

अंश - क्यों ...?

चाहत - क्युकी अभी वो हमारी बात नहीं मानेगी...

अंश - पर..

चाहत - देखो अंश... अगर हम उसे अभी ये बात बताएंगे ... तो वो मानेगी नहीं... क्युकी उसे ये लगेगा की हम बस उसे अनिल से दूर करना चाहते है... और वो हमे गलत समझेगी... सच का पता उसे खुद चले तो बेहतर होगा...

अंश को चाहत की बात सही लगी दोनों ंवहीं रुके और बात करने लगे।

तभी की prayer बेल बजी सभी बच्चे ग्राउंड चले गए।prayer के ख़तम होते ही सारे बच्चों ने देखा प्रिसिपल सर स्टेज पर चढ रहे है।

मि अरोड़ा स्टेज के सेंटर मे आ कर - गुड मॉर्नंग...

सभी बच्चे एक साथ - गुड मॉर्निंग..

मि. अरोड़ा - आज आप सभी को मुझे बताते हुए .. खुशी हो रही हैं ... हमारे स्कूल के कुछ बच्चे जिन्होंने jee और cgpet एग्जाम दिए थे ... उनमें से 25 बच्चों का सिलेक्शन हुआ है... ये मेरे और हमारे स्कूल के लिए प्राउड का मोमेंट है..

इसके बाद सिलेक्टेड बच्चे स्टेज पर आए। सभी ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया। उनमें इशांत भी था।

सारे बच्चों ने स्कूल के साथ बिताए मोमेंट को शेयर किया और साथ ही बाकी बच्चों को पढ़ाई कैसे करे उसके बारे में भी बताया। इन सब के बाद सभी बच्चों को उनके क्लास में भेज दिया गया।

इशांत भी अपने सभी टीचर्स से मिल कर ऑफिस पहुंचा वहां से उसने अपने सारे डॉक्युमेंट्स कलेक्ट किए। और वो बाहर आ गया। उसने स्कूल को एक नजर देखा फिर ग्राउंड से होते हुए स्कूल से बाहर की तरफ जाने लगा।

ठीक उसी टाइम में लंच हुआ सभी बच्चे बाहर आ गए जब इशांत बाहर जाने लगा तभी उसकी नजर ग्राउंड में बैठे अध्यन और चाहत पर पड़ी । जहा चाहत मुस्कुराते हुए अध्यन और अंश से बात कर रही थी।

इतने दिन से इशांत ने खुद को रोक कर रखा था आज फिर से चाहत को देख कर फिर से उसकी दबी भावनाए फिर उभरने लगी थी। इशांत थोड़े देर वहीं खड़े होकर चाहत को देखने लगा। उसका मुस्कुराता चेहरा बस यही... एक यही चीज थीं जिसे वो अपने दिल में बसाए हुए जाने वाला था।

अध्यन ने अपने नज़रे सामने की तरफ की और उसने इशांत को देखा । उसने देखा इशांत चाहत को देखे ही जा रहा है। अध्यन को ये बात अच्छे से पता थी कि अब के बाद इशांत शायद ही चाहत को देख पाएगा इसलिए कुछ सोचते हुए वो अपनी जगह से उठा और इशांत की तरफ चला गया। अंश के अलावा किसी ने भी उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया।

अध्यन इशांत की तरफ आया। उसने इशांत को खोए हुए देखा तो अपना हाथ इशांत के कंधे पर रख दिया। इशांत जो कि चाहत को देखने में गुम था उसने हाथ की तरफ देखा फिर सामने देखा तो अध्यन मुस्कुराते हुए उसे देख रहा था।

इशांत भी उसे देख मुस्कुराने लगा। अध्यन ने मुस्कुराते हुए अपना हाथ आगे करते हुए कहा - कंग्रॅजुलेशन...

इशांत ने भी उससे हाथ मिलाते हुए कहा - थैंक्यू...

अध्यन ने इशांत को देखा जिसके चेहरे पर मायूसी साफ

दिख रही थीं । जिसे देख अध्यन से रहा नहीं गया । उसने इशांत से कहा - अगर आप चाहो तो चाहत से मिल सकते हो...

इशांत ने ना में सिर हिलाते हुए कहा - नहीं...

अध्यन ने कहा - क्यों...

इशांत ने पलट कर चाहत को देखते हुए कहा - अगर उससे मिल लिया ना... तो जाना मुश्किल हो जाएगा मेरा...

अध्यन उसका दर्द समझ सकता था पर वो कुछ नहीं कर पा रहा था। अध्यन को कुछ गलत सा महसूस होने लगा।

अध्यन ने कुछ नहीं सोचा बस इशांत का हाथ पकड़ा और उसे खींचते हुए चलने लगा। इशांत अपने हाथो को देखते हुए - अध्यन ये क्या कर रहे हो...

अध्यन वैसे ही ज़ोर लगाते हुए - वहीं जो मुझे अभी तक कर लेना चाहिए था....

इशांत उसे देख गुस्से में - पागल मत बनो... अध्यन... ये बोल उसने हाथ छुड़ाने की कोशिश की पर अध्यन वो मानने को तैयार ही नहीं था उसने हाथ छुड़ाने की बहुत कोशिश की पर छुड़ा नहीं पाया । उसकी इस हरकत पर अध्यन ने उसे और कस कर पकड़ लिया।

अध्यन सीधा चाहत के पास जा कर रुका। उसने इशांत का

हाथ छोड़ते हुए कहा - लीजिए... मिल लीजिए....

इशांत अब क्या कहता वो कुछ बोल ही नहीं पा रहा था वो बस चाहत को देख रहा था और चाहत उसे ।

चाहत ने इशांत को देखते ही कहा - कंग्रॅजुलेशन... और अपना हाथ इशांत की तरफ बढ़ा दिया।

इशांत ने कुछ नहीं कहा बस उसे देखता रहा तभी अध्यन ने उसके कंधो पर हाथ रखते हुए धीरे से कहा - मेरी है.. उसने जैसे ही ये कहा इशांत को होश आया उसने चाहत से हाथ मिलाते हुए कहा - थैंक्यू...

चाहत मुस्कुराते हुए बोली - तो अब तो आप रायपुर वाले हो गए हो...

इशांत ने कुछ नहीं कहा बस मुस्कुरा दिया।

तो चाहत भी मुस्कुराते हुए बोली - वहां जाओगे तो हमे तो भूल भी जाओगे...

इशांत ने खोए हुए अंदाज़ में कहा - तुम्हे तो कभी भूल ही नहीं सकता...

वाह खड़े अंश , काजल और चाहत इशांत को घूरने लगे।

तब इशांत ने मुस्कुराते हुए कहा - तुम ही तो हो... जो जुबान होते हुए भी बोलती नहीं... और कोई कुछ पूछे तो बस सिर हिलाते हुए जवाब देती हो... ऐसी एंटीक पीस को भला कोई भूल सकता है क्या...

इशांत इस बात पर हसने लगा उसके साथ बाकी लोग भी हसने लगे। चाहत ने उसे घुर कर देखा तो इशांत ने मुस्कुराते हुए अपने कान पकड़ लिए। चाहत उसकी ये हरकत देख मुस्कुरा दी।

इशांत ने ज्यादा कुछ नहीं कहा बस चाहत को देखने लगा फिर कहा - चाहत सुनो...

चाहत भी उसकी तरफ देखने लगी। तो इशांत - मैंने मिनी के बर्थडे के दिन तुमसे कुछ कहा था ... याद है...

चाहत ने हा में सिर हिलाया तो इशांत ने कहा - मैंने अपनी बुक्स मिनी के पास छोड़ दिए है... तुम उससे ले लेना... और कोई भी दिक्कत हो तो मुझे बस कॉल कर देना... उन बुक्स से तुम फिजिक्स और कैमिस्ट्री पढ़ लेना... और बाकी तुम्हारे मेन सब्जेक्ट के अकॉर्डिंग बुक चाहिए होगा तो बताना... मै अरेंज करवा दूंगा...

चाहत ने फिर हा में सिर हिला दिया। तो इशांत ने फिर उसे देख मुस्कुराते हुए कहा - ऐसे ही रहना... कभी खुद को बदलना मत... तुम्हारी simplicity ही तुम्हे दूसरों से अलग बनाती है...

चाहत ने फिर हा में सिर हिला दिया।
 
ये देख इशांत ने अपने सिर पर हाथ रख लिया फिर उसने कहा - फिर से नहीं...

इशांत ने एक नजर चाहत को देखा फिर कहा - मुंह खोलो...

चाहत को समझ आ गया अब इशांत उसे क्या कहेगा इसीलिए वो मुस्कुराने लगीं।

अंश ये सब देख कर इशांत से - क्यों ... मुंह खोले वो... कुछ लाए हो क्या आप...

इशांत ने अंश को पूरी तरह से इग्नोर करते हुए चाहत से एक बार फिर कहा - मुंह खोलो...

चाहत ने भी मुस्कुराते हुए मुंह खोल दिया । इशांत ने उसके मुंह में देखते हुए अंश से कहा - देख रहा था.. जुबान है ना... है तो ...

फिर चाहत से - जब जुबान है तो... उसके बोलने से पहले ही चाहत ने कहा - क्युकी... जब आपके काम की बात हो रही हो... तो चुप रहना ही बेहतर होता है... ताकि सारी बाते हम समझ सके ... फिर इशांत के थोड़ा पास आकर उसकी आंखो में देखते हुए - समझे...

चाहत के इतने करीब आने ने इशांत फिर एक बार खो गया।

इशांत चुप हो गया चाहत कुछ सेकंड ही वहां रुकी और फिर

से अपनी जगह पर आ गई। इशांत वो तो बस ठगा सा रह गया। चाहत और काजल उसकी तरफ देख हसने लगे। तब कहीं जाकर उसे होश आया । इशांत ने चाहत की तरफ अपना हाथ बढ़ा कर उसके गाल थपथपाते हुए बोला - बदमाश...

चाहत ने कुछ नहीं कहा बस हल्के से मुस्कुरा दी पर अब चाहत अध्यन को देखने लगीं जो ये सब बड़े हीं आराम से देख रहा था।

चाहत को लगा शायद अध्यन को बुरा लगा होगा पर अध्यन के रिएक्शन से ऐसा नहीं लग रहा था। थोड़ी देर चाहत और इशांत की बाते होने लगी। तभी स्कूल की बेल बजी। चाहत ने इशांत की तरफ देखते हुए कहा - अब जाने का वक़्त आ गया... तो मै चलू...

इशांत का बिल्कुल भी मन नहीं था वो चाहत को रोक लेना चाहता था। पर किस हक से रोकता उसने कुछ नहीं कहा बस हा में सिर हिला दिया।

चाहत जाने लगी थोड़ी देर चलने के बाद फिर पता नहीं उसे क्या हुआ वो भागते हुए इशांत के पास आई उसने इशांत का हाथ अपने हाथ में लेकर बोली - उस दिन अपने मुझे बचाया था... खुद की फिक्र किए बिना... मै उस दिन तो कुछ बोल

ही नहीं पाई थी... पर आज कहती हूं... थैंक्यू... थैंक्यू सो मच ... उस दिन के लिए... अगर आप नहीं होते तो शायद मै... वो इससे ज्यादा कुछ बोल पाती उससे पहले इशांत ने अपना दूसरा हाथ उसके मुंह पर रखते हुए कहा - नहीं...plz कभी ऐसा मत बोलना...

चाहत ने एक हाथ से पहले तो इशांत का हाथ हटाया फिर कहा - ठीक है... नहीं बोलूंगी... पर आपको फिर से एक बार...कहूंगी...all the best for your future... May your all dream come true...

इशांत ने भी चाहत की आंखो में एक बार फिर देखा बस इस उम्मीद से कहीं उसकी आंखो में अपने लिए प्यार देख पाए पर चाहत उसकी आंखो में तो इशांत के लिए बस इज्जत थी। वो बस उसे अपनेपन से देख रही थी। उसकी आंखो में बस अपनापन था और प्यार... उसका तो नामो निशान ही नहीं था...

इशांत ने भी उसे देखते हुए कहा - थैंक्यू... वैसे तो मुझे कहने की जरूरत नहीं पर फिर भी कहूंगा... अपना ख्याल रखना....

चाहत ने भी मुस्कुराते हुए कहा - आप भी...

ये बोल चाहत ने इशांत का हाथ छोड़ दिया और मुस्कुराते हुए

उसने काजल का हाथ पकड़ा और वहां से चले गई।

इशांत ने चाहत को तब तक देखा जब तक वो आंखों से ओझल नहीं हुई उसने अपना हाथ देखा और उसे चूम लिया। फिर उसे माथे से लगा कर कहा - क्यों... आखिर मेरे साथ ही क्यों... ये बोल वो वहीं ग्राउंड में बैठ गया और फिर उसकी आंखे बहने लगी... बेतहाशा बहने नहीं आज वो आंखे बहकर ही अपना दर्द कम करना चाहते थे पर ये आंसु दर्द कम नहीं कर रहे थे बल्कि उसे और बढ़ा रहे थे।

अध्यन और अंश अभी भी वहीं थे उसे ऐसे रोते देख दोनों को अच्छा नहीं लगा। वो नीचे बैठ गए इशांत वो वैसे ही रो रहा था। अध्यन उसके पास बैठ उसने अपना हाथ आगे बढ़ा इशांत के कंधो पर रख दिया।

इशांत ने अब अध्यन को गले से लगा लिया और रोते हुए बोला - मेरे साथ ही क्यों... आखिर ये मेरे साथ ही क्यों हुआ... जिसे भी मैंने चाहा ... वो मुझसे दूर क्यों... क्यों हो जाता है... पहले मा... और अब चाहत ... आखिर क्यों...क्यों...

अध्यन को भी कुछ समझ नहीं आया उसने इशांत से कुछ नहीं कहा बस उसका पीठ सहलाने लगा।

थोड़ी देर बाद उसने इशांत को खुद से दूर करते हुए बोला - मै कुछ नहीं कहूंगा... क्युकी मुझे भी नहीं पता कि आपको कैसा फील हो रहा होगा... पर फिर भी. . जो होता है... अच्छे के लिए होता है... शायद भगवान जी यही चाहते थे... जो भी हुआ... उसमे आपके लिए कुछ अच्छा हीं लिखा हो ...उसे हम नहीं बदल सकते पर... आगे ... आगे सब ठीक होने की उम्मीद तो कर सकते है ना... आप बस सब भूलने की कोशिश कीजिए...

इशांत ने ये सुना तो गुस्से से कहा - तुम नहीं समझोगे... कोई नहीं समझेगा...जब तक तुम खुद इस दर्द से नहीं गुजरोगे ... तुम समझ नहीं पाओगे... ये बोल वो सीधा मेन गेट से बाहर चले गया। अध्यन और अंश उसे देखते रह गए...

अध्यन बस गेट की तरफ देखने लगा। तब अंश - कैसे है ये... तू इनको समझा रहा था... और एक ये है ... जिनको कोई मतलब ही नहीं... तुम नहीं समझोगे... बोल के चले गए... तू अगर नहीं समझता तो इस तरह उन्हें सिंपैथी नहीं देता...

अंश की बाद सुनते हुए अध्यन ने कहा - सही कहा आपने.... शायद मै आपकी सिट्यूएशन नहीं समझ सकता...

अंश उसे देख - अध्यन क्या बोल रहा है तू...

अध्यन गेट की तरफ देखते हुए - सही तो कहा उन्होंने...

किसी से प्यार करना फिर उससे दूर हो जाना.... उसे हर पल किसी और के साथ देखना ... इस ख्याल से तो मेरी रूह भी कांप उठती है... वो तो ये सब कर भी रहे है... सोच उनका दर्द कितना बड़ा होगा... ये बोल उसने अंश की तरफ देखा जो बस अध्यन की बातो को सुनते हुए कुछ सोच रहा था...

अध्यन ने उसके कंधो पर हाथ रखते हुए कहा - क्या सोच रहा है...?

अंश गेट को देखते हुए - क्या सच में प्यार इतना दर्द होता है...

अध्यन मुस्कुराते हुए - हा प्यार में इतना तो सहना ही पड़ता है... तूने वो शेर नहीं सुना क्या...

"ये इश्क़ नहीं आसान बस इतना समझ लो...

एक आग का दरिया है और डूब के जाना है..."

अंश - पर तूने कभी सोचा है... अगर तुझे चाहत को छोड़ना पड़ेगा तब... तू क्या करेगा...

अध्यन ने जैसे ही ये सुना उसे ऐसा लगा जैसे उसका दिल ही बाहर आ जायेगा। उसने अंश को एक नजर देखा फिर कहा - मै ऐसा तभी करूंगा जब वजह बहुत बड़ी हो... वरना चाहत से दूर जाने के बारे में मै सपने में भी सोच नहीं

सकता.... दुआ कर ऐसा ना हो...

अंश ने मुस्कुराते हुए कहा - नहीं मै ये दुआ नहीं करूंगा... बल्कि मै तो ये दुआ करूंगा ... भगवान तुझे सद्बुद्धि दे... और थोड़ी हिम्मत भी... ताकि तू चाहत अपने दिल की बात बोल सके...

अध्यन मुस्कुरा दिया तो अंश उसे घूरते हुए - भाई मुस्कुराने से कुछ नहीं होगा... तुझे बोलना पड़ेगा...

अध्यन उसे देख - तुझे क्या लगता है... मुझे बोलने की जरूरत है..?

अंश ने कहा - जरूरत तो तीनों टाइम खाने की भी नहीं होती... फिर भी तू खाता है ना...वैसे ही कहना जरूरी नहीं है... पर एक तरह से जरूरी भी है .... तो बोल भी दे यार...

अध्यन अब अंश को घूरने लगा।

अंश adhyan की तरफ देखते हुए - सच में.... बोल दे भाई...

ये सुन अध्यन ने कहा - कम बोल लिया कर थोड़ा...

अंश ने सुना पर कुछ नहीं कहा दोनों क्लास में आ गए और क्लास अटेंड करने लगे। किसी तरह ऐसे ही सारी क्लासेज हुई और स्कूल की छुट्टी भी ही गई।

सब बाहर आ गए। चाहत , अंश ,काजल और अध्यन ने एक दूसरे को बाय कहा और अपने घर की तरफ चले गए।

काजल और चाहत एक साथ साइकिल चला रहे थे तभी काजल - तुझे नहीं लगता कि ... इशांत तुझे पसंद करते है....

चाहत मुस्कुराते हुए - वाह कुछ भी... ऐसा कुछ नहीं है...

काजल - पर आज वो जिस तरह से तुझे देख रहे थे.. I think he likes you..तू क्या बोलती है...

चाहत उसे देखते हुए - मै ये बोलती हूं... तू हो गई है पागल.. ऐसा कुछ नही है...

काजल पैडल मारते हुए - क्यों नहीं है...

चाहत - क्युकी... काजल वो बहुत स्मार्ट है पर मुझे देख... उनकी आधी भी नहीं हु... वो मुझे पसंद थोड़े ना करेंगे....

चाहत मन में - अब सब अध्यन जैसे तो हो नहीं सकते...

काजल - हा बात तो तेरी भी सही है... पर फिर भी ऐसा हुआ तो..

चाहत उसे गुस्से में घूरते हुए - नहीं ऐसा नहीं है... तू ज्यादा मत सोच..

काजल ने अपनी बात ख़तम करना जरूरी समझा - ओके .. जैसा तू बोले वही सही है.... फिर सामने की तरफ इशारा कर

के - चल अब... बाय...

चाहत ने भी उसे बाय कहा और अपने घर की गली की तरफ मुड़ गई।

10th क्लास ने ही चाहत को समझा दिया था कि कैसे कैसे लोग होते है दुनिया में।

जिस काजल के साथ उसने अपनी जिंदगी के 9 साल गुजारे से उसने ही उसे गलत समझा था। ये जिंदगी ऐसी ही होती है जो नहीं होना चाहिए वहीं होता है। काजल से दोस्ती टूट जाने के बाद चाहत अकेली हो गई थी। वो ना तो किसी से ज्यादा बात करती थीं ना किसी से मतलब रखती थी । अपनी पढ़ाई में उसने खुद को झोंक दिया था।
 
अध्यन और अंश दोनों को उसे ऐसे देख कर अच्छा नहीं लग रहा था। एक दिन दोनों ने डिसाइड किया अब वो चाहत को ऐसे नहीं रहने देंगे। दोनों उसके पास गए।

इस टाइम लंच टाइम था। सब लोग अपना टिफिन निकाल कर लंच के लिए बैठे थे। काजल भी कुछ लंच लेकर बैठी थी। वो बार बार चाहत को देख रही थी पर चाहत बस सिर झुकाए हुए लंच कर रही थी।

अध्यन और अंश चाहत के पास आ गए अंश चाहत के टिफिन से पराठा लेते हुए - बहुत दिन हो गए... तुम्हारे घर के पराठे खाए ... ये बोल उसने पराठा लिया और खाने लगा।

चाहत ने एक नजर उसे देखा फिर वापस पराठा खाने लगी। अंश बस पराठे खाने में मस्त था। और अध्यन चाहत को देखने में।

चाहत ने एक बाइट ली फिर दूसरा भी खाने लगी। खाते हुए उसने अध्यन को देखा जो उसे ही देख रहा था। चाहत की नज़रे उससे मिली तो उसने अपनी पलकें झुका ली। अध्यन ने उसके हाथो को पकड़ कर कहा - क्या बात है..?

चाहत वैसे ही पलकें झुकाए हुए - कुछ नहीं...

अध्यन उसके हाथो को मजबूती से पकड़ कर - झूठ तो बोलो मत... बताओ क्या बात है...

चाहत ने कुछ नहीं कहा बस एक नजर अध्यन को देखा फिर उसने पलकें झुका ली । अध्यन उसे देखते हुए अंश से बोला - अंश अगर मुझे चोट लगी ... और तू सामने है... तो तू क्या करेगा...

अंश पराठा खाते हुए - तेरे पास आऊंगा और पूछूंगा... क्या

हुआ मेरे जिगर के छिलके... ये कब करवा लिया...

अध्यन - क्यों...

अंश उसकी तरफ देखते हुए - क्या क्यों..?? दोस्त हूं तेरा पूछना... हक है मेरा... फिर अपनी बात पर खुश होते हुए - वाह.. क्या बात कही मैंने... "दोस्त हूं तेरा पूछना हक है मेरा"... फिर उसने अपनी पीठ खुद ही थपथपाते हुए कहा - शाबास...

अध्यन ने उसकी हरकतों को इग्नोर करते हुए चाहत की तरफ देख कर - अब बोलोगी...

चाहत ने अब पलकें उठाई फिर कहा - कुछ नहीं बस काजल को देख...

चाहत ने जैसे ही ये कहा अध्यन - उसे देख कर क्या...

चाहत अध्यन को देखते हुए - उसे देख कर ... पुरानी यादें ताज़ा हो गई... फिर उसने अपना दूसरा हाथ अध्यन के हाथ पर रख कर कहा - कहीं मुझसे कुछ गलत... ये बोल वो चुप हो गई।

अध्यन ने उसकी बात सुनी और मुस्कुराते हुए बोला - नहीं तुमसे कुछ गलत नहीं हुआ... जो भी हुआ ... वो होना तय था... फिर थोड़ा रुक कर उसने कहा -

देखो चाहत ... उस रिश्ते से दूर हो जाना चाहिए.. जिस रिश्ते में ट्रस्ट ही ना हो..

चाहत अध्यन की बात काटते हुए - पर वो मेरी दोस्त थी... वो .. ये बोल वह रुक गई.. फिर उसने कहा - हमारा साथ 10 साल का था.. मै ऐसे कैसे ..

अध्यन ने अपने हाथ चाहत के हाथ से निकलते हुए कहा - चाहत .. रिश्ता चाहे पुराना हो... या नया ... पर जब ट्रस्ट ही ना हो तो रिश्ते का क्या फायदा बोलो...

चाहत को अब अध्यन ने बात समझ में आई उसने कुछ नहीं कहा।

चाहत को इस तरह चुप देख अध्यन ने उसके सिर पर हाथ रख उसका माथा सहला कर बोला - इतना स्ट्रेस मत लो.. तुमने कुछ गलत नहीं किया... उस टाइम ये करना जरूरी था...

चाहत ने हा में सिर हिला दिया।

जब तक अध्यन और चाहत ये सारी बाते कर रहे थे तब तक अंश ने दो पराठे खा लिए फिर वो चाहत की तरफ देख कर बोला - देखो चाहत ... तुम खामखां सोच रही थी.. तुम्हारे सोचने तक .. मैंने दो पराठे भी ख़तम कर लिए...

अध्यन और चाहत ने उसकी तरफ देखा तो उसने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - और वैसे भी ... क्या वो इकलौती

तुम्हारी दोस्त थी... हम कुछ भी नहीं ...

चाहत अंश की बात सुन बोली - नहीं..

अंश ने चाहत की बात सुन हैरानी से कहा - क्या..??

उसका चेहरा देख अध्यन और चाहत भी हसने लगे।

इस दिन के बाद उनमें दोस्ती और भी पक्की हो गई। इन तीनों की तिगड़ी फिर पूरे स्कूल में फेमस हो गई थी। अंश और अध्यन के रहते चाहत ने कभी अकेलापन महसूस नहीं किया था। तीनों एक दूसरे का बर्थडे से लेकर एग्जाम की तैयारी हर काम साथ किया करते थे। ऐसे ही उनके बोर्ड एग्जाम ख़तम हुए ।

चाहत ने हमेशा की तरह टॉप किया और अंश सेकंड था। पर इस बार कुछ नया था वो था अध्यन का थर्ड आना। सबने सोचा भी नहीं था जो लड़का मुश्किल से पास होता है वो बोर्ड में थर्ड आयेगा। एक ओर सॉकिंग न्यूज थी। वो कुछ ऐसी थी जिसमे काजल का कोई भी रैंक ना आना था।

चाहत ने जब काजल का रिजल्ट सुना तो उसे भी बुरा लगा पर वो कुछ नहीं बोली । अब चाहत अध्यन और अंश 11th में आ गए थे। तीनो ने मैथ्स सब्जेक्ट लेना पसंद किया । और अब तीनो साथ पढ़ने लगे।

ऐसे ही एक दिन क्लास में अध्यन ने देखा चाहत अंश की बातो को सुन कर मुस्कुरा रही थी। अध्यन उसे वैसे ही खड़े हो कर देख रहा था। चाहत ने हमेशा की तरह दो चोटी बनाई हुई थी। मोटे घने बालों की मोटी मोटी चोटिया जो दिनों कंधो से होते हुए कमर तक आ रही थी।

तभी अध्यन के कंधे पर किसी ने हाथ रखा अध्यन ने मूड कर देखा तो सोनिया थी। उसे देख अध्यन ने कहा - हा.. सोनी.. ये बोल उसने एक नजर सोनिया को देखा फिर चाहत को देखने लगा।

सोनिया अध्यन के चेहरे को देख रही थी उसने देखा अध्यन की नजर चाहत पर ही जमी हुई है।

सोनिया उसे देख कर - जब प्यार है.. तो कहते क्यों नहीं...

सोनिया की ये बात सुन अध्यन उसे देखने लगा । इस पर सोनिया ने मुस्कुराते हुए कहा - ऐसे मत देखो... सिर्फ मुझे ही नहीं... क्लास के हर बच्चे को .. तुम्हारे और चाहत के बारे में पता है.. फिर सोनिया एक नजर चाहत को देख कर - और शायद चाहत भी इस बात से अनजान नहीं है..

फिर उसने अध्यन से कहा - बोल दो अध्यन ... कहीं देर.. देर

ना हो जाए.. ये बोलते वक्त उसकी आंखो में नमी थी। उसकी आंखो को देख ऐसा लग रहा था मानो अभी ही छलक उठेंगी।

अध्यन ने सोनिया के चेहरे को देखा फिर अचानक उसकी नजर उसके ड्रेस पर गई। सोनिया आज अपने स्कूल ड्रेस में नहीं थी उसने ब्लैंक जींस और पिंक टॉप पहन रखा था।

अध्यन ने उसे देखते हुए कहा - आज तुमने स्कूल ड्रेस क्यों नहीं पहना.. एक सेकंड.. ये बोल उसने बोर्ड की तरफ देखा फिर कहा - आज तो तुम्हारा बर्थडे भी नहीं है.. तो फिर तुम ऐसे क्यों..

सोनिया उसकी बात सुन मुस्कुरा दी और फिर बोली - वो इसलिए क्युकी.. आज मेरा इस स्कूल में लास्ट डे है... आज के बाद मै स्कूल नहीं आउंगी...

अध्यन ये बात सुन ने सोनिया को देखा फिर कहा - पर क्यों... तुम ऐसे कहा जा सकती हो... मेरा मतलब है ... अभी तो हम 11th में आए है ... और तुम अभी ही...

उसने इतना ही कहा था तभी सोनिया उसकी बात काटते हुए - मेरा एडमिशन प्रयास स्कूल में हो गया है..

अध्यन चौकते हुए - पर वहां तो...

सोनिया उसे टोकते हुए - हा.. मुझे पता है .. पर मै मानपुर से

हूं ... तो मेरा एडमिशन हो गया..

प्रयास आवासीय विद्यालय बिलासपुर (2015) बिलासपुर, छत्तीसगढ़, भारत में आदिवासी छात्रों के लिए एक स्कूल है। यह विद्यालय आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों के लिए पूरी तरह से नि: शुल्क है।
 
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