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Romance चाहत

चारो एक दूसरे के अगल बगल बैठ गए और खाना खाने लगे। चाहत ने देखा वहा प्लेट रखी है और खाने को बीच में सजाया गया है। आज छोले और आलू की मसाले वाली सब्जी बनी थी। साथ में रोटी ,चावल , फ्राई दाल ,अचार और सलाद भी था। जिसे खुद से निकाल कर खाना था चाहत ने खाना निकाला और बाकी सब भी खाना निकाल कर खाने लगे ।

जैसे ही चाहत ने पहला निवाला मुंह में रखा उसके आंख बंद हो गई। इससे ज्यादा फिका खाना शायद ही उसने खाया होगा। उसने नजर इधर उधर हुई सारी लड़कियां खाना चुपचाप खा रही थीं। चाहत को ऐसे देख डॉली ने उसके हाथ पर हाथ रखा फिर नमक की डिब्बी उसकी तरफ बढ़ा दी। और आंखो के इशारे से उसे खाने में डालने को कहा । चाहत

ने भी खाने में नमक मिलाया फिर एक निवाला खाया ।

खाना अब थोड़ा खाने के लायक था उसने आंखो से डॉली की तरफ थैंक्यू का इशारा किया तो डॉली ने अपने पल्के झपका दी और बिना आवाज़ किए मुंह चला कर उसे "खाओ" कहा।

चाहत ने जैसे तैसे खाना ख़तम किया उसने अपने प्लेट उठाई ही थी तभी वहा मि. एंड मिसेज गर्ग आ गए चाहत वहीं रुक गई।

मि. गर्ग जबरदती मुस्कुराते हुए - अच्छा लगा खाना..

सबने बस हा में सिर हिला दिया।

मि. गर्ग शायद जानते थे सारे बच्चे झूठ बोल रहे है इसीलिए उन्होंने आगे पूछना जरूरी नहीं समझा उन्होंने सभी लड़कियों को देख कर कहा - तो बच्चो ... कल से आप सभी के कॉलेज स्टार्ट होने ....चुकीं आप सभी फर्स्ट ईयर वाले है....तो आप सभी की क्लासेज 9:40 से होगी तो आप सभी 8:30 तक रेडी हो जाना..तब तक यहां नाश्ता लग जाएगा...और ठीक 9:20 में हॉस्टल की बस आप सभी को कॉलेज छोड़ कर आयेगी...और ठीक 3:20 में आपको कॉलेज गेट पर लेने आ जायेगी.. तब तक आप सभी को अपने ब्लॉक के सामने आकर खड़े रहना है.. ये बोल मि. गर्ग

ने अपने बगल में देखा जहा राजू खड़ा था।

उसकी तरफ इशारा कर मि. गर्ग ने कहा - ये आप सभी को कॉलेज छोड़ेगा और वापस भी लाएगा... कल ये आप सभी को अपना नंबर दे देगा आप सभी को कभी कॉलेज लेट या जल्दी जाना होगा तो आप इससे कॉन्टैक्ट कर सकते है।

उनकी बात सुन सभी ने हा में सिर हिला दिया और तभी मिसेज गर्ग - आप सभी को सुबह नाश्ता मिलेगा साथ में यहां पराठा और सब्जी भी मिलेगी जो आप टिफिन में रख सकते है....साथ में चावल, दाल और सलाद भी होगा .. अगर आप चाहे तो यही खा सकते है....या फिर कॉलेज से आने के बाद खाए ये आप पर निर्भर करता है...ये बोल उन्होंने एक नजर सभी को देखा फिर मुस्कुराते हुए गुड नाईट बोल कर वहा से चले गई।

चाहत का खाना पूरा हो चुका था तो उसने अपनी प्लेट उठाई और वाशबेसिन की तरफ बढ़ गई वहा उसने अपनी प्लेट साफ़ की फिर हाथ धोकर खड़ी हो गई डॉली , निशा और शिखा खाना खा रहे थें। ये एक ऐसा होस्टल था जहा सारे स्टूडेंट फर्स्ट ईयर के थें । जिनका एडमिशन होने में लेट हुए था या फिर कॉलेज में होस्टल फूल हो चुका था। ऐसी ही सिचुएशन के चलते वो यहां पर थे। चाहत का एडमिशन लेट

हुआ था जिस कारण उसे होस्टल में जगह नहीं मिली थी इसीलिए उसे यहां रहना पड़ रहा था।

चाहत ने बाकी लड़कियों की तरफ देखा जो खाना खा रही थी चाहत सभी के चेहरे देख रही थी वो ऐसा इसीलिए कर रही थी क्यू की अब एक इंसान अकेले खड़े कर भी क्या सकता है इसीलिए वो उन लड़कियों को ताड़ रही थी।

चाहत ने देखा निशा , डॉली , और शिखा खाना खा चुके थे । वो तीनो चाहत के पास आए फिर तीनो सीढ़ियों से होते हुए अपने रूम आ गए। चाहत का मोबाइल बार बार रिंग हो रहा था। चाहत ने देखा कॉल रीमा जी का था।

उसने झट से मोबाइल उठा लिया और छत की तरफ चल दी छत में रात 11 बजे तक घुमा जा सकता था फिर मिसेज गर्ग राजू से कह कर छत पर ताला लगवा देती थी। ये बात चाहत को उसी दिन बताया गया था जब वो होस्टल देखने आईं थी।
 
चाहत छत पर पहुंची उसने मोबाइल में टाइम देखा जो 9:30 का टाइम बता रही थीं । चाहत ने कॉल अटेन कर मोबाइल अपने कान से लगा लिया ।

चाहत - हेल्लो....

रीमा जी ने ये सुन कर अपने सीने पर हाथ रख लिया फिर धीरे से कहा - चाहत बेटू...

चाहत को उनकी आवाज़ में आई कर्कशता को पहचान लिया उसने अपनी आंखें बंद की फिर जबरदस्ती हस्ते हुए बोली - हा मम्मी... क्या कर रहे हो....खाना खा लिए क्या...

चाहत की आवाज़ में आई उदासी को रीमा जी ने भी पहचान लिया था पर उसे दुखी नहीं करना चाहती थी इसीलिए उन्होंने भी मुस्कुराने की कोशिश कर के कहा - हा बेटू...कुछ नहीं....बस ऐसे ही बैठे थे.. थोड़ी देर पहले तेरे पापा आए ...अभी वो फ्रेश होने गए है....उनके आने के बाद हम खाना खा लेंगे...

चाहत ये सुन - पर पापा को इतना लेट कैसे हो गया...वो तो जल्दी निकल गए थे।

रीमा जी - कुछ नहीं बेटू...वो ट्रेन लेट थीं तो....

चाहत - अच्छा..

रीमा जी - वो सब छोड़ ये बताओ...तुमने खाना खाया....क्या सब्जी बनी थी... तुम्हारी रूम मेट कैसी है.. तुम दोनों ने बात की ....

चाहत रीमा जी को टोकते हुए - अरे मम्मी रुको....आप बिल्कुल ट्रेन की तरह भाग रहे हो... चाहत की ये बात सुन रीमा जी मुस्कुराने लगीं।

चाहत अपनी बात जारी रखते हुए - मैंने खाना खा लिया है..आज आलू और छोले बने थे....मेरी रूम मेट बहुत अच्छी है....और हम दोनों एक दूसरे से घुल मिल गए है..अब चाहत ने गहरी सांस की और कहा - हाश....सारे क्वेश्चन के आंसर दे दिए...

रीमा जी अब हसने लगीं उसी समय शिव जी बाहर आए उन्होंने रीमा जी को हस्ते हुए देखा तो वो समझ गए जरूर चाहत का कॉल आया होगा। वो रीमा जी के पास आ गए उन्होंने रीमा जी से मोबाइल लिया। उसे स्पीकर पर रख दिया ।

अब शिव जी और आर्यन एक साथ - हेल्लो चाहत...हेल्लो दी..

चाहत - हेल्लो...

आर्यन उछालते हुए - दी बताओ ना...कैसा है वहा सब...आप बोर तो नहीं हो रहे ना...आपको मेरी याद..

आर्यन ने जैसे ही ये कहा शिव जी ने झट से मोबाइल ले लिया और आर्यन को चुप रहने का इशारा किया।

आर्यन गीली आंखो के साथ सिर हिला कर चुप हो गया।

इधर चाहत की भी आंखे गीली हो चुकी थी। चाहत ने अपने

गले को साफ करते हुए कहा - यहां सब ठीक है सोनपापड़ी....सब अच्छे है ...और मैं बोर भी नहीं हो रही हूं..और तुझे तो याद ही नहीं कर रही... ये बोल चाहत हसने लगीं उसे हस्ते हुए सुन कर शिव जी, रीमा जी, और आर्यन भी हसने लगे।

चाहत ने हस्ते हुए कहा - अच्छा चलो गुड नाईट..

तीनो ने चाहत को गुड नाईट कहा । चाहत ने कॉल कट कर के देखा तो अंश के दो- तीन मिस कॉल थे।

चाहत ने अंश को कॉल लगाया ।

अंश कॉल उठा कर नौटंकी करते हुए - हेल्लो जी...

चाहत मुस्कुराते हुए - हेल्लो

अंश - आपका मोबाइल तो बिज़ी था... हाम्म...किस्से बात हो रही है...

चाहत हस्ते हुए - मम्मी से....

अंश - ओह नो....दिल तोड़ दिया यार...तुमने तो...

चाहत हसने लगीं।

अंश भी हसने हुए - अब बताओ कितना रोई तुम...चाहत ये सुन एकदम चुप हो गई अंश अपनी बात जारी रखते हुए - अगर रोई हो तो .... तो it was your first and last time इसके बाद तुम ऐसा कुछ नहीं करोगी ....

चाहत - हा ..

चाहत चुप हो गई तो अंश ने कहा - और बताओ.... छप्पन भोग खाया या नहीं ...

चाहत मुस्कुराते हुए - हा खाया ना ....वो भी बिना नमक के ...

अंश हस्ते हुए - होता है बेटा... होता है....

चाहत - तुमने खाया ...

अंश - हा खा लिया..

चाहत मुस्कुराते हुए - ठीक है तो फिर बाय... गुड नाईट...और उसे भी कह देना जो तुम्हारे सामने मुंह में हाथ रख कर हस रहा है...

अंश एकदम से - मेरे सामने तो कोई नहीं है...तुम क्या बोल रही हो... मुझे तो समझ ही नहीं....

तभी चाहत उसे टोकते हुए - चार साल से जानती हूं उसे...और महसूस भी कर सकती हूं...उसे कह देना मै खुश हूं ...उसके बिना....

अंश - चाहत...

चाहत - गूड नाईट अंश ....

अंश गहरी सांस लेते हुए - गुड नाईट एंड टेक केयर..

अब दोनो ने कॉल कट कर दिया।

अब अंश ने मुड़ कर देखा तो अध्यन हाथ बांधे मुस्कुरा रहा था। अंश ने अध्यन को देख जैसे ही कुछ कहना चाहा वैसे ही अध्यन ने कहा - चल बहुत रात हो गई है ...मै भी चलता हूं... और वहा से जाने लगता है( ।

अंश - अध्यन.. अध्यन रुक गया तो अंश उसके पास आकर उसे गले लगा कर कहता है - तू चाहत को सच बता क्यू नहीं देता....

अध्यन उससे दूर होते हुए - अभी टाइम नहीं आया है... और मुड़ कर जाने लगा।

अंश - और अगर चाहत ने गुस्से में तुम्हे भुला दिया तो...

अध्यन - वो मुझे कभी भी भूल नहीं सकती.. फिर अपनी उंगली दिखाते हुए - और ना ही मै उसे भूलने दूंगा। ये बोल अध्यन वहा से बाहर आ गया।

अंश उसे जाते हुए देखते रहा फिर उसने गहरी सांस ली और दरवाज़ा बंद कर दिया।
 
इधर गिस्टेल में चाहत कॉल कट करने के बाद सामने रोड पर चल रही गाड़ियों को देख रही थी तभी किसी के गला साफ़ करने की आवाज़ आई चाहत ने मुड़ कर देखा तो डॉली खड़ी थीं । वो चाहत के पास आकर खड़ी हो गई।

डॉली भी रोड को देखते हुए - घर को मिस कर रही हो...

चाहत ने हा में सिर हिलाया।

डॉली उसके कंधो पर हाथ रख - मुझे तो बता दिया..आगे से किसी को भी मत बताना.... चाहत ने जब उसकी बात सुनी तो हैरानी से उसकी तरफ देखने लगी। डॉली ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - हमे कभी अपनी कमजोरी किसी को नहीं बतानी चाहिए...क्युकी लोग कमजोरी पर ही वार करते है... तुम्हारी कमजोरी तुम्हारी फैमिली है..

चाहत ने उसकी बात समझ कर हा में सिर हिला दिया।

थोड़ी देर दोनो यूहीं खड़े रहें । तभी डॉली - नीचे चले बहुत रात हो चुकी है..

चाहत ने हा कहा और दोनो नीचे आ गए।

दोनों चाहत के रूम पहुंचे तो देखा निशा बेड पर बैठी बुक पढ़ है।

चाहत निशा को देख - तुम सोई नहीं....

निशा - नींद ही नहीं आ रही ...वो मै कभी अकेले सोई नहीं... ये बोल वह चुप हो गई।

चाहत उसे देखती रही फिर उसके पास गई और कहा - उठो...ये सुन निशा उसे देखने लगीं तभी चाहत ने एक बार फिर उसे उठने को कहा । निशा उठ गई तो चाहत ने बेड का

एक तरफ का हिस्सा पकड़ा और निशा को इशारा किया पर निशा ने ना समझ पाने के कारण कुछ नहीं कहा।

तब चाहत - अरे .. बेड के उस हिस्से को पकड़ो...

निशा ने दूसरे हिस्से को पकड़ लिया फ़िर दोनो ने मिल कर उस बेड को चाहत के बेड के पास लाकर रख दिया।

दोनों बेड अब जुड़ चुके थे और बड़ा बेड बन गया था। चाहत और निशा ने एक दूसरे को हाई फाई दी । फिर दोनो अपने अपने बेड पर लेट गए फिर चाहत ने लाइट बंद कर दी। थोड़ी देर बाद निशा ने अपना एक पैर और हाथ चाहत के ऊपर रख दिया और चाहत से लिपट कर सो गई। चाहत ने भी उसे नहीं हटाया। उसने अपना मोबाइल देखा जिस पर उसकी रीमा जी, शिव जी, और आर्यन की तस्वीर थी। उसने उस फोटो पर अपना हाथ फेरा और सो गई।

................................

अगली सुबह

गर्ग गर्ल हॉस्टल

चाहत की नींद खुली और चाहत ने हमेशा की तरह अपने खिड़की की तरफ देखा आज वहा विंड चाइम नहीं थी तभी चाहत को याद आया कि ये उसके घर की खिड़की नहीं है जहा विंड चाइम हो। उसने सिर झ्टका और बेड से उठ गई। उसने अपने बिखरे बाल समेटे और बाथरूम की तरफ चले गई।

थोड़े देर बाद वो नहा कर वापस आई उसने अपना बिस्तर ठीक किया तभी निशा उठ गई ।

निशा अपनी आंखें मसलते हुए - गुड मॉर्निंग चाहत...

चाहत मुस्कुराते हुए - गुड मॉर्निंग.....

निशा अपना ब्लैंकेट उठाते हुए - मै थोड़ी देर में नहा कर आई.....तुम मेरा वेट करना....साथ में पूजा करेंगे..

चाहत ने हा में सिर हिला दिया।

निशा के चले जाने के बाद चाहत खिड़की के बाहर देखने लगी। सुबह की सर्दी में बाहर से आती हल्की धूप गर्माहट का अहसास करवा रही थीं । खिड़की के पास छोटी छोटी चिड़िया बैठी थी चाहत ने उन्हें देखा और उनके पास आ गईं। उन्हे देख वो कुछ पल के लिए अतीत की यादों में खो गई।
 
फ्लैशबैक

स्कूल

अध्यन आज स्कूल पहुंचा तो देखा चाहत साइकिल स्टैंड के पास खडी है । अध्यन उसके पास आकर - क्या हुआ ऐसे क्यों खड़ी हो.....

चाहत ने सामने की दीवार की तरफ इशारा किया। अध्यन ने सामने देखा तो स्कूल के बाउंड्री के ऊपर लगे तारो में एक चिड़िया फसी थी।

उसे देखते हुए चाहत ने कहा - वो वहा कब से फसी है... पता है मै वहा गई थी.... पर मेरा हाथ उस तक नहीं जा रहा..... ये बोल उसने अपना सिर अध्यन की तरफ किया।

अध्यन उसे देख आगे बढ़ गया। उसने अपना हाथ आगे किया और चिड़िया को निकालने लगा। जब अध्यन ने उस तार को हटाकर चिड़िया को निकालने की कोशिश की तो तार का नुकीला हिस्सा अध्यन के हाथो में घुस गया चाहत ने जैसे ही उसे देखा वो उसके करीब आई और उसका हाथ पकड़ कर देखने लगी।

अध्यन ने अपना दूसरा हाथ आगे किया और चिड़िया को बाहर निकाल लिया। चाहत ने अभी भी उसका हाथ पकड़ रखा था अध्यन ने अपना हाथ आगे कर चाहत को पुकारा पर चाहत उसे तो होश ही नहीं था वो बस अध्यन के हाथो को देख रही थी।

अध्यन ने मुस्कुराते हुए अपने हाथ जिसे चाहत ने पकड़ रखा था उसी हाथ से चाहत के हाथ पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए एक बार फ़िर पुकारा "चाहत" चाहत ने अपनी पल्को को उठा कर अध्यन की तरफ देखा ।

तो अध्यन अपना दूसरा हाथ आगे कर दिया चाहत ने पहले तो ध्यान नहीं दिया पर जब ध्यान दिया तो खुश हो गई। उसने अपना हाथ आगे किया और उंगलियों से उस चिड़िया को छू कर देखा।

चाहत को उस चिड़िया की धड़कने महसूस हुई उसने झट से अपना हाथ पीछे खींच लिया। चाहत की ये हरकत देख अध्यन ने उसका हाथ अपने एक हाथ से पकड़ खींच कर उसकी हथेली अपने हथेली के ऊपर रख कर अपना दूसरी हथेली उसके हथेली पर रख दी। चाहत ने सिर उठा कर अध्यन को देखा। अध्यन ने अपनी पलके झपका दी।

चाहत की हथेली को पकड़े हुए अध्यन ने उसकी उंगलियों को चिड़िया के पंखों के ऊपर चलाया चाहत को उसके नर्म पंख को छूकर बहुत अच्छा लगा। उसे एक बार फ़िर उसकी धड़कने महसूस हुई पर इस बार वो डरी नहीं।

चाहत ने अब अध्यन का हाथ देखा जिसकी उंगली में तार लगने की वजह से लाल निशान पड़ गए थे । चाहत ने अध्यन की हथेली को अपने दोनो हथेलियों के बीच रखा और उसे मलने लगी। थोड़ी देर यूहीं मलते रहने के बाद उसका हाथ थोड़ा नॉर्मल हुआ। और हमारे अध्यन जी तो चाहत के हाथो में अपना हाथ देख कर ही खुश थे।

चाहत ने उसका हाथ छोड़ उस चिड़िया को देखा जिसके पैर के पास हल्का सा कट गया था और उसमें से खून निकल कर सुख चुका था। चाहत ने उसे अपने हाथ में लिया और सीधा

मेडिकल रूम पहुंची अध्यन उसके पीछे चला गया।

चाहत मेडिकल रूम पहुंच कर उसने अपना हाथ जिस पर उसने चिड़िया पकड़ी थीं उसे पीछे छुपा लिया।

चाहत मैम से - गुड मॉर्निंग मैम.....

मैम ने सिर झुकाए हुए ही गुड मॉर्निंग का रिप्लाई दिया।

चाहत - मैम मुझे ऑइन्मेट चाहिए थी।

अब मैम ने सिर उठा चाहत को देखा । और बॉक्स आगे बढ़ाते हुए बोली - चोट किसे लगी है.....

चाहत को पता था अगर वो चिड़िया का नाम लेगी तो उसे ऑइन्मेंट नहीं मिलेगी। उसने अपने बगल में अध्यन को देखा फिर उसका हाथ उठा कर आगे करते हुए कहा - अध्यन को..... ये देखिए....

मैम ने अध्यन का हाथ देखा जिस पर लाल निशान था।

मैम ने चाहत को बॉक्स दे दिया।

चाहत ने बॉक्स में से ऑइन्मेट लिया और अध्यन के हाथ में लगाते हुए थोड़ा सा अपने हाथ में ले लिया। फिर उसने बॉक्स मैम की तरफ बढ़ा दिया। और मुस्कुराते हुए अध्यन के साथ बाहर आ गई।

अध्यन और चाहत ग्राउंड में आ गए। चाहत ने अपना हाथ आगे किया और उस चिड़िया पर ऑइन्मेट लगने लगी। पर बाया हाथ होने के कारण वो ठीक से लगा नहीं पा रही थी। अध्यन ने देखा तो उसने अपना हाथ बढ़ा कर चाहत के उंगलियों से ऑइन्मेट लिया और उसे चिड़िया के कटे हुए हिस्से पर लगा दिया। फिर चिड़िया को अपने हाथ में पकड़ उसे सहलाने लगा।

चाहत ये देख मुस्कुरा दी फिर उसने अपनी बोतल के ढक्कन में पानी लिया और उसे अपनी हथेली पर रख कर अध्यन की ओर बढ़ा दिया। अध्यन ने उस चिड़िया को चाहत के हाथ पर रख कर उसे पानी पिलाया। थोड़े देर में प्रेयर बेल बजी तो अध्यन ने उस चिड़िया को पास के पेड़ रख दिया।

चाहत मुस्कुराते हुए उस चिड़िया को देख रही थी और उसी तरह अध्यन चाहत को देख रहा था।

चाहत ने मुड़ कर अध्यन को देखा। अध्यन ने उसके पास आकर कहा - तुम खुश हो..

चाहत ने मुस्कुराते हुए हा में सिर हिलाया।

अध्यन उसे देखते हुए - बस यही तो मै चाहता हूं..

चाहत ने उसकी बात सुनी और मुस्कुराने लगी।
 
वर्तमान समय

चाहत यूहीं ख्यालों में खोई थी कि तभी निशा वॉशरूम से बाहर आ गई । उसने चाहत को खिड़की के पास देखा उसने चाहत को आवाज़ लगाई।

वहीं चाहत उन चिड़ियों को देखते हुए - मै कितनी भी कोशिश कर लू.... तुम्हे भूल ही नहीं पाती.... क्यू आए तुम मेरी जिंदगी में..... जब दूर जाना ही था ..

ये सोचते ही उसकी आंखो में नमी आ गईं । तभी निशा की आवाज़ सुन वर्तमान में आई। उसने अपनी आंखों को साफ किया ।

उसने पलट कर पीछे देखा और निशा के पास आ गई।

निशा उसे देखते हुए - चलों पूजा करते है....

चाहत ने हा में सिर हिलाया।

दोनों टेबल के पास आ गए चाहत ने अगरबत्ती जलाई और मूर्तियों के सामने घुमाने लगीं फिर उसने अगरबत्ती निशा की तरफ बढ़ा दी निशा ने भी अगरबत्ती ली और उसे घुमाने लगीं। जब दोनो ने ये कर लिया तब चाहत ने अगरबत्ती ली

और उसे स्टैंड पर लगा दिया।

अब चाहत ने अपनी आंखे बंद कर लिए और कहा - भगवान जी..... आज से मेरी जिंदगी में नये सफर की शुरुआत हो रही है.. जिसमें ना जाने कितने पड़ाव होंगे ..कितनी ही परीक्षाएं होंगे ..... मुझे आपसे किसी भी तरह की हेल्प नहीं चाहिए... मै बस आपका साथ चाहती हूं..... बस मेरा साथ दे देना...

ये बोल चाहत ने अपनी आंखे खोली। चाहत में आज पर्पल कलर की कुर्ती और व्हाइट लगी पहनी थी ये पूरी तरह से पर्पल घुटनो तक की हाई नेक कुर्ती थी। उसने अपने एक हाथ में घड़ी पहनी। बालो को खोला और उसे सुलझाने लगी।

निशा ने चाहत के बालो को देखा तो उसने अपने मुंह पर हाथ रख लिया। निशा चाहत को देखते हुए - तुम्हारे बाल कितने लंबे बाल है।

चाहत सुन मुस्कुरा दी । और बाल सुलझा कर उसने जुड़ा बना लिया।

निशा ने भी पीली कुर्ती और रेड लैगी पहनी । दोनों ने अपना टिफिन पकड़ा और रूम से बाहर आ गई । नीचे सब नाश्ते के लिए बैठ गए थे । चाहत और निशा भी नीचे आए निशा ने

थी। उसने चाहत की तरफ देखा फिर चेहरे पर गंभीरता लाते हुए कहा - चाहत ..लाइफ इस बस की तरह है...अगर पहली सीट तुम्हे ना मिली तो कोई नहीं.. बस में और भी सीट है.. यू खड़े रहना कहीं की समझदारी नहीं....

चाहत उसकी बात सुन - मुझे पता है...पर मुझे लगा ....निशा

डॉली उसकी बात काटते हुए - क्यू लगा तुम्हे ऐसा.. because वो तुम्हारी रूम मेट है इसीलिए... चाहत ने कुछ नहीं कहा तब डॉली बात आगे बढ़ाते हुए - ये दुनिया जितनी खूबसूरती लिए बैठी है.. उतनी ही बदसूरत भी है....एक बात हमेशा याद रखना ....करना वहीं जो तुम्हे लगे सही... आगे से ये जो तुम सैक्रफाइज कर रही थीं ना वो दुबारा नहीं होना चाहिए.... समझी ।

चाहत ने हा में सिर हिलाया तो डॉली - अभी तुम्हे बुरा लगा।

चाहत ने ना में सिर हिला दिया।

डॉली - क्यू..

चाहत कंफ्यूज होकर - मतलब....

डॉली - मतलब ये कि मै तो कोई नहीं हूं तुम्हारी....तुम अभी ही मुझसे मिली हो...और अभी ही तुमने मेरी बात सुनना और अमल करना शुरू कर दिया..

लगी। उसने नज़रे उठा साइड में देखा तो डॉली ब्लू पटियाला पहने दुपट्टा संभाल रही है।

चाहत ने डॉली के हाथ से बॉटल ली और कहा - तुम इसे ठीक करो । मै तब तक बॉटल भर देती हूं...

डॉली ने हा में सिर हिला दिया और अपना दुपट्टा ठीक करने लगी। चाहत ने बोतल भरी फिर डॉली को दे दी।

डॉली मुस्कुरा दी।

चाहत निशा और डॉली अपने रूम में आए। तीनो ने अपने बैग्स में टिफिन रखा और बाहर आ गए। बस पूरी तरह से पैक हो गई थी चाहत ने देखा सामने एक ही सीट है उसने निशा की तरफ देखा उसे लगा अगर वो इस सीट पर बैठ गई तो निशा कहा बैठेगी ये सोच वह रुक गई।

तभी निशा आगे बढ़ उस सीट में बैठ गई। और चाहत को मुस्कुराते हुए देखने लगी । अब चाहत ने इधर उधर देखना शुरू किया उसे सीट मिल ही नहीं रही थी। तभी डॉली ने एक सीट देखी और उसने चाहत का हाथ पकड़ा और उसे अपने साथ उस सीट पर ले गई।

ये सीट बस की सबसे पीछे वाली सीट थी। चाहत पीछे की सीट पर डॉली के साथ बैठ गई। डॉली खिड़की के पास बैठी

चाहत वैसे ही चुप रही उसे समझ ही नहीं आ रहा था क्या कहे तभी डॉली - तुम बहुत साफ़ हो .... बिल्कुल कोरे कागज की तरह .... और तुम समझदार भी हो... पर तुम्हारी एक कमजोरी है....वो ये कि तुम बहुत जल्दी लोगो की बातो में आ जाती हो... बस यही गलत हो तुम .... लोगो की बातो में आकर उनकी हर बात पर हा करना गलत होता है.... तुम खुद 16 साल की हो समझदार हो.... समझो चीज़ों को ...किसी की भी बातो को तब तक मानो जब तक वो सही हो...

चाहत जो पहले कंफ्यूज थी अब डॉली को अजीब नज़रों से देखने लगी उसे ऐसा करते देख डॉली खिलखिला कर हंसने लगीं। चाहत अब तो पूरी तरह से ब्लैक हो कर डॉली को देखने लगी तब डॉली ने हस्ते हुए अपने सिर पर हाथ रखा और कहा - बिल्कुल बच्ची हो तुम... तुम्हे तो सब सीखना पड़ेगा...

चाहत ने फिर से मासूम फेस बना लिया । डॉली ने ये देख उसके गाल खींचे और मुस्कुराते हुए कहा - ओह मेरा बच्चा...

चाहत डॉली को ऐसे हस्ते देख कंफ्यूज तो थी ही पर उसे अभी भी ये समझ में आ रहा था कि उसने गलती क्या की थी। जो डॉली उसे ऐसे समझा रही थी। वो अपनी सोच में

गुम ही थी कि तभी उसके मोबाइल पर किसी की कॉल आई चाहत ने देखा घर से कॉल आई है तो उसने कॉल अटेंड की ।

चाहत - हा मम्मी .... हा अभी बस में हूं .... निकल रही है.... हा कर लिया...चिला बना था.. ठीक है.... हा बाय...

वो बात कर के डॉली को देखने लगी जो खिड़की से बाहर देख रही थीं चाहत ने बाहर देखा तो बस कॉलेज कैंपस के नजदीक थी। बाहर से एक बड़ा सा गेट जिसके ऊपर लिखा था छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ( काल्पनिक नाम )

चाहत की बस जैसे ही कैंपस में इंटर हुई गेट के पास खड़े गार्ड ने गेट खोल दिया। बस अंदर चली गई। क्रीम और ब्लू कलर की चार बिल्डिंग्स थी। जिसमे हर बिल्डिंग में लगभग चार फ्लोर थे। चारो तरफ बस पेड़ ही पेड़ पूरी तरह से हरियाली से युक्त कैंपस के सेंटर में बना गार्डन बना था इसके ठीक बीचमे एक चबूतरा बना था। जिस पर सर्व पल्ली श्री राधा कृषणन की मूर्ति थी।

यहां की बिल्डिंग एक सीमित दूरी पर थी। रैगिंग ना हो इसीलिए सभी बिल्डिंग को ईयर वाइस डिवाइड किया गया था। जैसे कि फर्स्ट ईयर बिल्डिंग वालो की अलग बिल्डिंग

और सेकंड थर्ड और फाइनल ईयर वालो की अलग बिल्डिंग।

चारो बिल्डिंग के बीच में एक चार फ्लोर वाला ऑफिस था जहा सबसे नीचे ग्राउंड फ्लोर और ऑडिटोरियम था। फर्स्ट फ्लोर पर सारे ऑफिशियल काम होते थे। साथ में कॉलेज के प्रिंसिपल का रूम था। थर्ड फ्लोर पर लाइब्रेरी थी।

ये लाइब्रेरी काफी बड़ी लाइब्रेरी थी जो कि थर्ड से फोर्थ फ्लोर तक फैली थी। इस लाइब्रेरी में टेक्निकल और नॉन टेक दोनो की बुक्स थी। ब्रांच वाइस सभी की बुक को अलग अलग सेक्शन में डिवाइड किया गया था । साथ में सभी के बैठने के लिए चेयर और टेबल्स लगे थे।
 
इन पांचों बिल्डिंग्स के लेफ्ट साइड कुछ छोटे घर बने थे। जिसे लैब के रूप में यूज किया जाता था। यहां electrical , machanical ,civil, computer science हर ब्रांच के लैब थे । गवर्मेंट कॉलेज होने के बावजूद यहां हर बिल्डिंग में ac की सुविधा थी। वर्कशॉप को छोड़ कर ।

चाहत की बस सबसे बड़ी बिल्डिंग के पास रूकी। ये फर्स्ट ईयर का ब्लॉक था ब्लॉक A इस ब्लॉक में सारे फर्स्ट सेमेस्टर के बच्चे थे जिस कारण यह और बिडिंग के मुकाबले बड़ी थी।

सब धीरे धीरे बस से उतरने लगे चाहत और डॉली भी उतर गए अपनी बिल्डिंग को उन्होंने देखा नीचे ग्राउंड फ्लोर था और फिर तकरीबन 15 सीढ़ियों के बाद एक बड़ा सा लकड़ी का गेट था जिस पर कांच लगे थे।

सब अंदर आ गए कुछ दूर चलने के बाद सभी को अपनी अपनी क्लास मिल गई। यहां क्लास के बाहर दरवाजे पर ब्रांच और ईयर लिखा था तो ढूंढने में परेशानी नहीं हुई। चाहत ने भी अपनी क्लास के पास जाकर देखा गेट के ऊपर लिखा था "Civil 1st year" चाहत ने गहरी सांस ली और अंदर आ गई।

क्लास में लगभग 20 लड़के और 20 लड़कियां थी। चाहत भी वहीं सेकंड बेंच पर बैठ गई। इस क्लास में एक साइड स्मार्ट बोर्ड और दूसरी साइड ग्रीन बोर्ड लगा था। चाहत ने देखा सारी चेयर्स ग्रीन बोर्ड की तरफ थी। वो भी उसी तरफ देखने लगी। तभी उसके बगल में दो लड़कियां आई और उसे देख मुस्कुरा दी। चाहत भी उन्हें देख मुस्कुरा दी।

दोनों लड़कियां उसी के हॉस्टल की थी पर फ्लोर अलग होने के कारण उनकी बात नहीं हो पाई थी। दोनों ने चाहत की

तरफ देख उसे अपना नाम बताया चाहत ने भी उन्हें अपना नाम बताया और बाते करने लगीं ।

चाहत ने देखा कोई अंदर आ रहा है तभी एक मिडिल एज की एक औरत क्लास में आई जिसे देख चाहत और बाकी क्लास मेट खड़े हो गए । ये थी फर्स्ट ईयर की HOD " स्वाति चौबे" जितनी खूबसूरत उतनी ही कड़क । बात करने का तरीका बिल्कुल सपाट पिंक कलर और ब्लू बॉर्डर की कड़क सुती साड़ी पहने माथे पर लाल गोल बिंदी लगाए एक हाथ में ग्रीन फाइल पहने खड़ी थी।

कॉलेज में होने वाली हर एक्टिविटीज की इंफॉर्मेशन देने के बाद वह बाहर चले गई। कुछ देर में एक फैकेल्टी हाथो में फाइल पकड़े अंदर आई। उसने अपना इंट्रो देते हुए कहा - good morning class..... I'm hritu Desai ..... I'm your communication teacher.... आप सभी से मिल कर खुशी हुई ... सो आज आपका पहला दिन है तो चलिए दिन कि शुरुआत आप सभी के इंट्रोडक्शन से करते है सब एक एक कर के अपना इंट्रो देंगे....

सभी ने एक एक कर के इंट्रो दिया सभी को सूट में देख ऋतु मैम मुस्कुराई फिर कहा - आप सभी यहां न्यू है...अगर किसी को कोई भी प्रोबलम हो तो आप सभी मुझसे या किसी भी फैकेल्टी से पूछ सकते है.... इसके बाद उन्होंने syllabus के बारे में बताया। और किसी तरह ये क्लास पूरी हुई ।

ऐसे ही लगातार तीन क्लासेज के बाद लंच हुआ। चाहत ने अपना टिफिन निकला उसकी बगल में बैठी लड़कियों ने भी अपने टिफिन निकाल लिए। तीनो ने एक दूसरे को देखा फिर हसने लगे। बात हसने वाली ही थी। तीनो एक ही हॉस्टल से थे तो तीनो ने टिफिन में एक ही तरह की सब्जी और रोटी रखी थी। चाहत ने अपना लंच किया। तभी उसका मोबाइल बजा।

चाहत ने कॉल अटेंड कर कहा - हा ....ठीक है....आती हूं...ये बोल उसने टिफिन बंद किया और एक हाथ में मोबाइल पकड़ बाहर आ गई।

ठीक उसी समय डॉली भी अपनी क्लास से बाहर आई । डॉली मैकेनिकल वाली थी तो उसकी क्लास अलग थी। उसने चाहत को बाहर देखा वो उसके पीछे जाने लगी। तभी डॉली ने देखा चाहत बाहर किसी लड़के के पास रुक गई।

और उससे बात करने लगी।

डॉली को समझ नहीं आया तो वो चाहत के पीछे चले गई।
 
चाहत उस लड़के के पास पहुंचीं।

चाहत उसकी तरफ देखने लगी उस लड़के की पीठ चाहत की तरफ थी।

चाहत ने उसकी पीठ पर हल्के से थपथपाते हुए कहा -" इशांत"

इशांत जिसने व्हाइट टी शर्ट पर ब्लैक जैकेट पहनी थी और नीचे ब्लैक जीन्स पहनी थी । उसने पलट कर चाहत की तरफ देखा फिर कहा - ओह चाहत... हाय

चाहत उसे देख मुस्कुरा दी ।

इशांत ने मुस्कुराते हुए कहा - हा काफी बड़ी हो गई हो..... और बोलने भी लगी हो...... लगता है.... जबान भी बड़ी हो गई है.....

ये सुन चाहत ने अपने हाथ बांधते हुए कहा - अच्छा ... ये बोल उसने अपनी एक आइब्रो उठा दी

इशांत ने बेग से बुक्स निकालते हुए कहा - अच्छा ठीक है... बड़ी हो गई हो तुम... मान गया मै.. ये बोल उसने बुक्स चाहत की तरफ बढ़ा दिए - ये लो ये इस सेमेस्टर की बुक्स .... मैंने अपने लाइब्रेरी कार्ड से issue करवाए है.... अभी थोड़ा टाइम लगेगा तुम्हारा लाइब्रेरी कार्ड बनने में... तब तक इन्हीं से काम चला लो.....

चाहत ने बुक्स ली फिर कहा - थैंक्यू..... बट मैंने आपको इसके लिए नहीं बुलाया था..... आप के कारण ही मेरा यहां एडमिशन हुआ है... तो सोचा आपसे एक बार मिल लू.....

इशांत ने कहा - ओह "थैंक्यू" इतना बड़ा वर्ड.... वैसे जो मैंने किया.... वो कोई भी करता.... तुम खुद ही ये जगह डिजर्व करती थी...... मैंने तो बस तुम्हे रास्ता दिखाया है.....

चाहत ने गहरी सांस ली फिर कहा - आप सोच भी नहीं सकते अपने मेरे लिए जो किया है...... वो उस वक़्त कितना

इशांत ने जैसे ही चाहत को मुस्कुराते हुए देखा वैसे ही सोचने लगा - तीन सालों बाद तुम्हे देख रहा हूं.... सब कुछ बदल गया है..... पर तुम्हारी मुस्कुराहट अभी भी वहीं..

चाहत ने देखा इशांत अभी भी उसे देख रहा है पर बोल कुछ नहीं रहा। ये देख उसने इशांत के सामने अपना हाथ हिलाया और पूछा - इशांत...... कहा खो गए.....

चाहत के ऐसे हाथ हिलाने से इशांत होश में आया उसने चाहत को देख सिर हिलाते हुए ना कहा फिर अपने कंधो पर रखे बेग को नीचे उतरते हुए कहने लगा - कहीं नहीं..... बस तुम्हे देख रखा था.....

चाहत ने ये सुना तो उसने तुरंत पूछा - क्या......

इशांत को अब अहसास हुआ कि उसने क्या कह दिया उसने अपने बेग की चेन खोलते हुए कहा - अरे मेरा मतलब था...... मै ये देख रहा था ......अभी भी वैसे ही हो.... छोटी सी.... ये बोल वो हसने लगा।

चाहत उसकी बात सुन - नहीं..... फिर उसके बगल में खड़े होकर - देखो आपके कंधों तक आती हूं....

ये सुन इशांत ने सामने देखा जहा खिड़की पर मिरर लगा था और उस मिरर में वो और चाहत दिख रहे थे। जिसे देख

से देखा चाहत ने उसकी बात को समझते हुए कहा - डॉली है... मेरी फ्रेंड....

इशांत उसे देखते हुए -hmm... न्यू फ्रेंड... अमेजिंग...

चाहत ने आंखे बड़ी कर इशांत को देखा तो वो चुप हो गया।

डॉली उनके पास आई और मुस्कुराते हुए उसने अपना हाथ इशांत की तरफ किया फिर कहा - हाय... डॉली..

इशांत ने मुस्कुराते हुए उससे हाथ मिलाया फिर कहा - इशांत ....

डॉली ने हाथ छोड़ते हुए कहा - तो आप चाहत के फ्रेंड है...

इशांत ने की तरफ देख कर कहा - are we..??

चाहत को समझ ही नहीं आया उसे क्या कहना चाहिए क्युकी उसने कभी भी इशांत को फ्रेंड नहीं कहा था वो तो बस उसे इसीलिए जानती थीं क्युकी वो मिनी का भाई था।

डॉली ने देखा चाहत कुछ बोल ही नहीं रही तो उसने इशांत की तरफ देखते हुए कहा - mechanical 1st sem and you..

इशांत ने भी मुस्कुराते हुए कहा - mechanical 7th sem

अब डॉली शॉक्ड होकर इशांत को देखने लगी उसने धीरे से अपने कान पकड़े फिर कहा - सो...सॉरी सर...

इशांत ने उसके हाथो को नीचे कर कहा - अरे...don't be वैसे भी engineer girls ऐसे ऐटिट्यूड में ही अच्छी लगती

जरूरी था..... उस दर्द को भूलने के लिए....यहां आना और पढ़ना .... ये मेरी सबसे ज्यादा मदद यही करेगा......

चाहत की बात सुन इशांत ने उसकी आंखो में देखा जहां एक तरह का खालीपन और नमी थी।

इशांत ने उसकी आंखो में देखते हुए कहा - तुम अध्यन से बात क्यू नहीं कर लेती... सारी प्रोबलम सॉल्व हो जाएगी।

चाहत ने इशांत की तरफ देखा फिर फीका सा मुस्कुराते हुए बोली - बात उनसे की जाती है... जो कुछ सुने.... पर वो तो ..... ये बोल चाहत चुप हो गई फिर एक गहरी सांस लेकर कहा - देखती हूं....

इशांत कुछ बोला नहीं बस चाहत के चेहरे पर उभरे दर्द को देख रहा था। उसके मन में एक बार तो ये आया की वो जा कर अध्यन का मुंह ही तोड़ दे पर शायद हालत से वो भी वाकिफ था उसने कुछ देर बाद कहा - फिर भी तुम्हे अध्यन से एक बार बात कर लेनी चाहिए... वो इससे ज्यादा कुछ कह पाता।

तभी पीछे से एक आवाज़ आई - कौन अध्यन...??

चाहत और इशांत ने आवाज़ की दिशा में देखा तो डॉली मुस्कुराते हुए आ रही थी।

उसे ऐसे आते देख इशांत ने चाहत की तरफ सवालिया नज़रों

है..

ये बोल उसने चाहत को देखा फिर कहा - मैंने जो कहा उसके बारे में सोचना जरूर... ये बोल उसने चाहत को बाय कहा और वहा से मेन गेट की तरफ चला गया।

चाहत ने मुड़ कर अपनी बगल में देखा तो डॉली अभी भी शॉक में थी। और एकटक उस ओर देख रही थी जिधर इशांत गया था चाहत को उसे देख हसी आने लगी पर किसी तरह उसने खुद को कंट्रोल कर डॉली के कंधो हाथ रख कर उसे हिलाया डॉली तो जैसे सपने से जागी। चाहत ने उसे यू चौकते हुए देखा फिर कहा - तुम ठीक तो हो..

डॉली ने चाहत को देखा फिर आह भरते हुए बोली - हाय कितना स्मार्ट है...और ऊपर से सीनियर भी है...ये तो सोने पे सुहागा हो गया...

फिर उसने चाहत के कंधो को पकड़ कर कहा - सच बताना तुम दोनों के बीच...

चाहत ने एकदम से कहा - नहीं ऐसा कुछ नहीं है... ये मेरे भाई की फ्रेंड के भैया है...तो इसी वजह से मै इन्हे जानती हूं... और हमारे बीच ऐसा कुछ नहीं है...चाहत ने एक सांस में ही अपनी बात कह दी।

डॉली चाहत की बात सुन - सच में ना..

चाहत ने पलके झपका हा में सिर हिलाया। दोनों अब अपनी क्लास की तरफ चले गए।
 
इधर इशांत उस बिल्डिंग के गेट के पास आकर उसने अपना सिर पीछे घुमाया उसने देखा चाहत अपनी क्लास की तरफ जा रही थीं। उसने गहरी सांस ली फिर कहा - काश मै तुम्हे वो बता पाता...पर मै मजबुर हूं...

ये बोल वो कुछ सोचने लगा।

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फ्लैशबैक

इशांत का रूम...

टिपिकल ब्वॉयज वाला रूम था इस रूम में बेड दीवार से सटा हुआ था और उसी से सट कर एक अलमारी थीं अलमारी के बगल में ढेर सारे जूते रखे थे। पर सभी जूते एकदम अच्छे से रखे थे जैसे परेड ग्राउंड में सभी एक सिध में खड़े रहते है उसकी बगल में एक फुटबॉल और टेनिस रैकेट रखा था। बेड के दूसरी तरफ एक स्टडी टेबल था जिसमें बुक्स और नोट्स के साथ एक लैंप, पेन स्टैंड, अलार्म क्लॉक और एक फोटो फ्रेम थी जिसमे इशांत एक लड़की के साथ

खड़ा था।

इशांत बेड पर औधे मुंह लेटा था शायद वो गहरी नींद में था। उसने ब्लैक इनर जो कि स्लीव लेस थी और ग्रे ट्रैक पैंट पहनी थी। तभी

"दिल को तुमसे प्यार हुआ...

पहली बार हुआ..

तुमसे प्यार हुआ..."

ये उसके मोबाइल की रिंग टोन थी जिसने उसकी नींद खराब कर दी। इशांत ने गुस्से में अपना मोबाइल पकड़ा और कान से लगाने के बाद बोला - कौन है भाई....

दूसरी तरफ से एक रौबदार आदमी की आवाज आई - इशांत..

इशांत उसकी आवाज़ सुन कर बेड पर ही बैठ गया। फिर उसने कहा - जी अंकल..

दूसरी तरफ से आवाज़ आई - इशांत ... कोई तुमसे मिलने आया है नीचे आओ..

इशांत - हा अंकल ... अभी आया।

ये अंकल इशांत के मकान मालिक थे। इशांत जल्दी से उठा

और सीधे बाथरूम गया । फ्रेश होकर बाहर आया। उसकी नजर अपने स्टडी टेबल पर गई उसने वहा रखे फोटो फ्रेम को उठाया फिर उस पर हाथ फेरा और मुस्कुरा दिया। उसने अपना मोबाइल पकड़ा और डोर को लॉक कर इशांत नीचे आ गया।

इशांत अपने मकान मालिक यानी की वो अंकल उनके पास गया। जो उस मकान में बने अपने ऑफिस में चेयर पर बैठ कुछ कैलकुलेट कर रहे थे। अंकल थोड़े मोटे थे उन्होंने हल्के क्रीम कलर की शर्ट पहनी थी और नीचे ब्राउन पैंट पहनी थी । बालो पर उन्होंने जरूरत से ज्यादा तेल लगा कर चिपका रखा था। साथ ही उनके नाक पर थोड़े नीचे तक उन्होंने चश्मा लगा रखा था। दिखने में थोड़े खडूस दिखते थे और शायद थे भी ।

इशांत उनके पास आकर - good morning...

Uncle

अंकल ने सिर झुकाए हुए ही कहा - hmm

इशांत को ऐसे ही जवाब की उम्मीद थी उसने सिर झटकते हुए कहा - अंकल मुझसे कोई मिलने आया था... इससे ज्यादा वो कुछ बोलता उससे पहले ही अंकल ने सामने की तरफ इशारा कर दिया।

इशांत ने पलट कर देखा तो वो चौक गया। वहा सोफे पर एक लड़का बैठा था जिसने ब्लैक शर्ट और ग्रे फॉर्मल पेंट पहनी थीं। पैर में ब्लैक शूज पहने थे। उसने अपनी शर्ट की स्लीव्स को कोहनी तक मोड़ रखा था। इशांत ने उस लड़के को थोड़ी देर तक देखा फिर उसकी तरफ बढ़ गया। अपने हाथ मोड़ कर वो उस लड़के के सामने खड़ा हो गया। लड़का उसे देख कर खड़ा हो गया।

इशांत ने अपनी एक आइब्रो उठा कर उसे घूरते हुए कहा - तुम यहां..

उस लड़के ने इशांत को देखा फिर पीछे बैठे अंकल को देखा जो उन दोनों को घुर रहे थे। उस लड़के ने कहा - क्या हम अकेले में बात कर सकते है....

इशांत दो पल के लिए चुप हो गया फिर उसने पलट कर अंकल से कहा - अंकल मै अभी आया।

अंकल ने सिर हिलाया फिर कहा - ठीक है।

अब वे दोनो बाहर आ गए । उस लड़के ने जैसे ही कुछ बोलने के लिए मुंह खोला इशांत ने झट से कहा - यहां आगे एक कॉफी शॉप है.... वहा चले ..

उस लड़के ने इशांत की बात सुन गहरी सांस ली फिर हा में

सिर हिला दिया उसने देखा इशांत आगे चल रहा है तो वो भी उसके पीछे चलने लगा।

दोनों कॉफी शॉप पहुंचे । इशांत ने उस लड़के को देख सामने टेबल की तरफ इशारा किया। वो लड़का बिना कुछ बोले उस टेबल पर बैठ गया। इशांत ने वहा पर खड़े वेटर को इशारा और कॉफी का ऑर्डर किया।

इशांत अब उस लड़के को देखते हुए - मुझसे इस तरह मिलने की कोई खास वजह..

लड़का चेयर पर थोड़ा तन कर बैठ गया फिर अपने सीधे हाथ को टेबल पर रख कर बोला - मुझे आपसे एक काम था..

इशांत उसकी तरफ देख अपनी आइब्रो उठाते हुए - और तुम्हे क्यू लगता है...मै तुम्हारा कोई काम करूंगा..

वो लड़का हल्की मुस्कान के साथ - मुझे लगता नहीं ... बल्कि मै sure हूं ....आप ये काम जरूर करेंगे....

इशांत ने उसकी तरफ देखा फिर अपने जेब से कुछ पैसे निकाले और टेबल पर रख अपनी चेयर से उठ कर जाने लगा।

तभी पीछे से वो लड़का - अगर बात चाहत की हो तब भी

आप .... वो इतना ही बोल पाया था तभी इशांत रुक गया। उसने मुड़ कर उस लड़के को देखा फिर वापस चेयर पर बैठ गया ।

इशांत अपने हाथ को टेबल पर रख गहरी सांस लेते हुए बोला - अध्यन.. आखिर तुम चाहते क्या हो...

अध्यन ने मुस्कुराते हुए कहा - आपको पता तो होगा.. आपके कहने पर ही चाहत ने का cgpet एग्जाम दिलाया था..

इशांत ने तुरंत कहा - हा और उसका रैंक काफी अच्छा आया है..मैंने सुना था.. पर तुम ये..

अध्यन उसे टोकते हुए - जब हम counseling के लिए गए थे तो उसे cit मिला यानी आपका कॉलेज....

इशांत तुरंत खुश होते हुए - अरे वाह ...ये तो बहुत अच्छा हुआ.. अब वो यही रहेगी ....मेरे पा.. वो इससे आगे कुछ बोल ही नहीं पाया उसने अध्यन की तरफ देखा जो उसे घुर रहा था। इशांत ने अपनी बात को बदलते हुए कहा - तो इन सब में तुम... मुझसे क्या चाहते हो..

अध्यन ने कहा - आप चाहत को यहां रहने के लिए हेल्प करेंगे ... आप यहां सीनियर है और इस जगह से वाकिफ भी है.. तो .... ये बोल अध्यन ने इशांत को देखते हुए कहा -

बस यही चाहिए मुझे.. वो यहां अकेलापन फील ना करे.... और कोई हो जो उसे प्रोटेक्ट कर सके...

इशांत ने उसकी बात सुन कर कहा - पर इन सब के लिए मै क्यू.. तुम्हे तो मेरा उसके पास रहना पसंद भी नहीं फिर मुझे क्यू...

अध्यन ने मुस्कुराते हुए कहा - क्युकी एक आप ही है... जो उसकी हेल्प कर सकते हैं.. आपको यहां की सारी नॉलेज होगी... जो चाहत के लिए हेल्पफुल होगी.. इससे उसे यहां कोई दिक्कत भी नहीं होगी.. और साथ ही इस अनजाने शहर में आप ही होंगे जिससे शायद वो अपने दुख भी बाट ले.. ये बोल अध्यन ने अपना हाथ आगे कर इशांत के हाथ पर रख कहा - और शायद मेरे बाद एक आप ही है... जिससे चाहत बेझिझक अपनी बाते करती हैं...

अध्यन की बात सुनते हुए ही इशांत ने उसकी आंखो में देखा जिसमे चाहत के लिए प्यार साफ़ झलक रहा था वो थोड़े देर चुप रहा फिर कहा - ठीक है मै करूंगा पर....

अध्यन ने इशांत की तरफ देखते हुए कहा - पर...???

इशांत - पर चाहत ने जब भी मुझसे कुछ भी पूछा तो ... मै उसे झूट नहीं बोलूंगा.. सब सच बताऊंगा....

अध्यन ने मुस्कुराते हुए कहा हा ठीक है....

तब तक उनकी कॉफी भी आ गई। दोनों कॉफी पीने लगे।
 
दोनों कुछ देर के लिए चुप हो गए। इशांत कुछ सोचने लगा उसने कहा - तुमने इस काम के लिए मुझे क्यू चुना....

अध्यन ने इशांत को देखते हुए कहा - क्युकी मुझे पता है... आप चाहत का ख्याल रखेंगे.... बिना उसे हर्ट करे..

इशांत ये सुन मुस्कुरा दिया उसने कहा - बहुत चाहते हो.... ना चाहत को....

अध्यन ने कुछ नहीं कहा तो इशांत ने कहा - जनता हूं.. चाहते तो हो.... वरना राजनांदगांव से रायपुर बस यू ही नहीं आते.... मुझे जिसे तुम पसंद भी नहीं करते.... उससे ऐसे बात भी नहीं करते .... जब प्यार है तो बोल भी दो यार.. ऐसे खुद में छुपाए रखना ठीक नहीं...

अध्यन ने इशांत को देखते हुए कहा - मेरे मन में उसके लिए जो भी है...वो मै उसे अभी नहीं.. सही वक़्त आने पर बताऊंगा.... और आप भी सही वक्त का इंतज़ार करो.... आपको भी सारे क्वेशनस के आंसर मिलेंगे....

फिर अध्यन ने काफी ख़तम की ओर अपनी चेयर से उठ गया उसने इशांत को देखा जो कॉफी ख़तम कर उठने लगा।

इशांत ने बिल पे किया और दोनो बाहर आ गए। अध्यन ने अपना एक हाथ इशांत के आगे किया इशांत ने भी अपना हाथ आगे कर उससे हाथ मिला लिया ।

अब अध्यन जाने के लिए मुड़ गया तभी इशांत। पीछे से - तुम चाहत को ऐसे अकेला छोड़ रहे हो...अगर यहां उसे कोई और .....

इशांत ने बस इतना ही कहा था तभी अध्यन झटके से मुड़ा और इशांत की तरफ देखते हुए बोला - वो उन लड़कियों में से नहीं है..जो पल भर में किसी को भुला दे... अगर मै उससे 10 साल भी दूर रहूं तब भी वो मुझे नहीं भुला पाएगी... फिर वो इशांत के करीब आकर उसके सीने पर अपनी उंगली रख कर - यहां हूं मै .. वो चाहे तब भी मुझे यहां से निकाल नहीं सकती.. ये बोल उसने कदम पीछे लिए और वहा से चला गया।

इशांत उसे जाते हुए देखने लगा। उसने कहा - मुझे तो लगता था... दर्द बस एकतरफा इश्क करने वालो आशिकों को ही होता होगा.. पर यहां तो हम भी प्यासे और वो भी प्यासे.. ये बोल वो भी अपने पीजी आ गया।

वर्तमान समय

इशांत ये सब सोचते हुए लाइब्रेरी आ गया और वहा बैठ कर बुक पढ़ने लगा। फाइनल ईयर में होने के कारण उसकी क्लासेज लंच तक होती थी जिसके बाद फाइनल ईयर स्टूडेंट अपने मेजर प्रोजेक्ट पर ध्यान देते थे। इशांत के पास कोई काम नहीं था तो वो लाइब्रेरी में बैठ बुक पढ़ रहा था। वो काफी देर तक बुक पढ़ता रहा फिर उसने बुक साइड में रखी और लाइब्रेरी से बाहर निकल आया।

इधर चाहत की भी क्लासेज ख़तम हो गई। चाहत अपने क्लास से बाहर निकल गई। वो कॉरिडोर से होते हुए बाहर हि जा रही थी। तभी किसी ने उसका हाथ पकड़ा चाहत ने पलट कर देखा तो वहा डॉली थी। डॉली ने उसका हाथ पकड़ रखा था और लगभग खिचते हुए उसे अपने साथ लेकर जा रही हैं दोनो अपने ब्लॉक से बाहर आई तो देखा बस पहले से ही उनका इंतज़ार कर रही है। चाहत और डॉली दोनो ने बस को देखा और उसमे चढ गई।

डॉली ने अंदर आकर पहली सीट पर अपना कब्जा जमा लिया। और चाहत को भी अपने साथ खींच लिया। दोनों अब

बाकी सभी का इंतज़ार करने लगे। थोड़े देर में निशा आई उसने चाहत को डॉली के साथ बैठे देखा तो मुंह बना कर चली गईं । उसे ऐसा करते देख डॉली हसने लगी। चाहत ने उसकी तरफ हैरानी से देखा और फिर हाथ के इशारे से पूछा "क्या हुआ" डॉली ने कुछ नहीं कहा बस ना में अपना सिर हिला दिया ।

थोड़ी देर में दो लड़कियां बस में चढ़ी उन दोनों ने चाहत की सीट की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए पीछे की सीट की तरफ चले गई। डॉली ने जब उन्हें ऐसा करते देखा तो चाहत को सवालिया नज़रों से देखने लगी चाहत ने उसको नज़रों को समझते हुए कहा - ये मेरी क्लासमेट्स है... मै आज ही इनसे मिली....ये हमारे ही हॉस्टल में है... जो लंबी थी वो है प्रिया.... और जो छोटी है.... वो है तापसी....

चाहत की बात सुन डॉली ने सिर हिलाया और एक नजर पीछे मार आगे देखने लगीं।

थोड़े देर में सारे लोग बस में आ गए थे। फिर ड्राइवर ने भी बस आगे बढ़ा दी। बस कॉलेज गेट से बाहर निकली और चौक पर आ गई। चाहत खिड़की से बाहर ही देख रही थी तभी उसे इशांत दिखा वो चौक पर चाय की टपरी पर अपने कुछ दोस्तों के साथ खड़ा बाते कर रहा था। चाहत उसे देखने

लगी। तभी बस की हॉर्न सुन इशांत ने सिर उठा कर सामने देखा उसकी नजर चाहत पर पड़ी और वो उसे देख मुस्कुराने लगा। चाहत भी मुस्कुरा दी।

डॉली ने जब चाहत को ऐसे मुस्कुराते देखा तो वो भी उस तरफ देखने लगी। पर जैसे ही उसने इशांत को देखा । डॉली ने अपनी पलके झुका ली। इशांत को उसका ऐसे डरना बहुत प्यारा लगा। वो बस मुस्कुरा दिया।

अब बस ने उस चौक को क्रॉस किया फिर अपनी मंजिल की तरफ बढ़ गई।

इसी तरह दिन बितने लगे। चाहत अपनी पढ़ाई में खुद को बिज़ी रखती । उसने खुद को पूरी तरह से पढ़ाई में ही डूबा रखा था। इशांत भी हफ्ते में उससे मिलता और उसकी परेशानी दूर करता। इन नए माहौल में चाहत ने खुद को ढाल लिया था। चाहत किसी भी तरह से अध्यन को भूलना चाहती थी। पर शायद अध्यन ने सही कहा था वो दूसरी लड़कियों की तरह नहीं थी जो पल भर में किसी को भी भूल जाए वो अलग थी और खास भी उसके लिए किसी को भूलना इतना आसान नहीं था। पर फिर भी वो कोशिश कर रही थी ।

इन सब चीजों में ये बात अच्छी हुई थी चाहत और डॉली की दोस्ती वो बहुत अच्छी हो गई थीं। दोनों अलग क्लास में होते हुए भी एक दूसरे के बहुत पास आ गए थे। शायद लोग सही कहते है मैकेनिकल और सिविल के बीच की बॉन्डिंग कोई नहीं तोड़ सकता ठीक ऐसा ही कुछ दोनो के बीच हुआ था।

जहा डॉली को चाहत की सिंपली सिटी और उसका साफ़ दिल भा गया था वहीं चाहत को डॉली की चुलबुलाहट और

बेबाकी ने आकर्षित किया था। कहते है ना opposite attract low यहां वहीं apply हुआ था।

ऐसे एक दिन

ये सैटर्डे का दिन था आज कॉलेज में हाफ डे था चाहत ने कॉलेज से आकर खाना खाया और फिर सो गई। शाम को डॉली उसके रूम पहुंची। उसने चाहत को उठाया चाहत उठी और फ्रेश होने चले गई। वापस आकर देखा तो डॉली दो कॉफी मग लिए बैठी थी।

चाहत ने उसकी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोली - तुम आज फिर चाय ले आई... तुम्हे पता है ना मै चाय नहीं पीती..... बस बिस्किट्स भीगा कर खाती हूं....

डॉली ने दोनो कप को हिलाते हुए कहा - जानती हूं .... बट दोनो कप में चाय लेने का फायदा ये है.... तुम तो चाय पीती नहीं.... तो तुम्हारे हिस्से की चाय मै पी लिया करती हूं....ये बोल उसने एक कप से आधी चाय दूसरे कप में डाल दिया।

यही तो हाल होता है हर हॉस्टल में रहने वालो का । खाना

लगता .....

डॉली जोर से हस्ते हुए - मतलब जलती है.. मुझसे...

चाहत उसके पास बैठ कर - नहीं वो जलती नहीं है.....बस उसे इस बात का डर रहता है.... कहीं मै तुम्हारे लिए उससे दूर ना हो जाऊ....

डॉली उसे देखते हुए - पर ऐसा तो नहीं है... तुम्हारी रूम मेट होने के नाते उसका हक ज्यादा है तुम पर....

चाहत - पर वो ऐसा नहीं सोचती .... वो अभी इतनी मैच्योर नहीं है .. उसे लगता है हमारी बॉन्डिंग के कारण कहीं मै उसे भूल तो नहीं जाऊंगी या वो हम दोनों के बीच आ तो नहीं रही ..चाहत ने गहरी सांस ली फिर कहा - देखना तुम.... उसे धीरे धीरे सब समझ में आ जाएगा।

डॉली ने बस हा में सिर हिलाया फिर बिस्किट्स निकालने लगी।

चाहत ने डॉली को देखा जो कप में बिस्कुट्स भीगा कर खा रही थी। उसने भी अपने अलमारी से बिस्किट्स और टोस्ट निकाल लिया और डॉली के साथ बैठ गई। दोनों चाय बिस्किट्स और टोस्ट खाने लगे।

ऐसा की गले से नीचे ना उतरे तो बचा सिर्फ चाय जिसे वो काफी मग में डाल लिया जाता था और कप भर चाय पिया जाता था।

चाहत और डॉली को ऐसे देख निशा उठी वो वहीं अपने बेड पर बैठी थी और उसने डॉली को देखते हुए चाहत से कहा - चाहत मुझे प्रिया से कुछ काम है.... मै अभी आई.... ये बोल वो बाहर चले गई।

उसके जाते ही डॉली जोर जोर से हसने लगीं। चाहत ने उसे ऐसे करते देख कहा - डॉली.....

डॉली मुस्कुराते हुए - क्या...

चाहत उसके सामने हाथ बांधते हुए - ऐसे नहीं करते

डॉली अंजान बनते हुए - मैंने क्या किया....

चाहत उसके सिर पर थपकी मारते हुए - तुम्हे निशा का मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए...

डॉली सिर सहलाते हुए - इसमें मेरी क्या गलती है.... वो खुद जलती है मुझसे.... अगर उसे प्रोबलम है तो बोले..... बट नहीं बोलना भी नहीं है... और ऊपर से मुंह बना कर जाना भी है....

चाहत उसके सिर को सहलाते हुए - तुम जानती हो ना.... वो ऐसी ही है... तुम्हारा मेरे साथ हमेशा रहना उसे अच्छा नहीं

लूकिंग लड़की से थोड़ा सा बात भी कर लो तो ..... वो कुछ भी करेगी.... तो मि. रेहान अंसारी तुम गलत हो .... हर लड़की एक जैसी नहीं होती..... दोबारा मुझे कॉल या मैसेज किया.... तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा..... समझे तुम....

ये बोल चाहत ने कॉल कट कर दी और गुस्से में यहां वहा घूमने लगी। और साथ में बड़बड़ाए जा रही थी - कुछ भी सोचते है लोग... आखिर अपने आप को समझते क्या है.... खुद अच्छे दिखते है तो किसी को कुछ भी बोलेंगे....

डॉली ने चाहत की बात सुनी फिर वो उठ कर बाथरूम गई वहा उसने अपने हाथ धोए और बाहर आ गई । उसने पानी की बोतल चाहत की तरफ बढ़ाते हुए कहा - ये पी लो..... और रिलैक्स हो जाओ ।

चाहत ने पानी पिया फिर गहरी सांस लेकर सामने देखा डॉली उसे सवालिया निगाहों से देख रही थी।

चाहत ने डॉली को देख कर कहा - वो रेहान था मेरा क्लासमेट.. पहले उसने मुझसे असाइनमेंट के बारे में पूछा तो ... मैंने कहा मैंने कंप्लीट कर लिया... तो उसने कहा सेंड कर दो ना ... वो मैंने उस दिन की क्लासेज अटेंड नहीं की तो क्वेश्चन समझ ही नहीं आया ... मैंने भी सोचा उसकी हेल्प कर देती हूं... उसे हा कहा पर... उसे लगता है मै उस पर चांस मार रही हूं......

इतने में ही चाहत का मोबाइल बजने लगा। चाहत ने देखा अननोन नंबर है तो उसने कॉल उठाते ही कहा - हेल्लो कौन....??? अच्छा हा बोलो..... हा मिला था ना .... मंडे को समिट करना है.... हा मेरा हो गया... ठीक है .... कर देती हूं ....

तभी डॉली चाहत को उसके हाथो पर मारती है। चाहत ने पलट कर देखा तो डॉली उससे इशारे से और टोस्ट देने के लिए बोल रही थीं।

चाहत ने देखा टोस्ट ख़तम हो गया है तो उसने मोबाइल से कान लगाए हुए ही अलमारी खोली और उसमे से टोस्ट निकाल कर डॉली को मुस्कुराते हुए देने लगी पर अचानक चाहत के चेहरे का रंग बदला और मुस्कुराहट की जगह गुस्से ने ले ली। चाहत ने टोस्ट डॉली को दिया।

फिर मोबाइल को कान से हटा कर उसने स्क्रीन पर टैब किया और फिर मोबाइल कान से लगा कर कहा - हेल्लो.... रेहान क्या कहा तुमने... मै तुम पर चांस मार रही हूं.... तुम्हे इसीलिए असाइनमेंट दे रही हूं.... क्युकी मुझे तुम में इंटरेस्ट है..... तो कान खोल कर सुन लो..... मुझे तुममें कोई इंटरेस्ट नहीं है.... मुझे लगा था तुम उस दिन क्लास नहीं आए थे .. तो मुझे तुम्हारी हेल्प कर देनी चाहिए..... पर नहीं तुम तो इस लायक हो ही नहीं.... और क्या कहा मुझ जैसी एवरेज

डॉली उसे टोकते हुए - पर तुम्हे कैसे पता चला.....?

चाहत - उसने मुझे बाय कहा.... बट कॉल कट करना भूल गया.... वो शायद अपने रूम में अपने दोस्तो के साथ था...कॉल कट ना होने के कारण उसकी सारी बाते मुझे सुनाई दे रही थी...... उसने बड़े ही ऐटिट्यूड मे कहा - देखा..... कोई भी लड़की क्यू ना हो वो रेहान के चार्म से बच नहीं सकती... देखा कैसे एक बार ने मान गई..... लगता है चांस मार रही थी... और वैसे भी ये एवरेज लुकिंग गर्ल्स ना यार..... ऐसी ही होती है..... बस थोड़ा सा प्यार से बात कर लो तुम्हारे लिए कुछ भी करेंगी... समझ रहे हो ना "कुछ भी"

फिर क्या मैंने इतना ही सुना तो... मुझे गुस्सा आया..... फिर मैंने भी उसे कॉल कर के सुना दिया....

डॉली ने चाहत ऐसे गुस्से में पहली बार देखा था उसने चाहत को देखते हुए कहा - तुमने अभी तक मे... पहली बार गुस्सा किया है...क्या डांटा है तुमने उसे... मै तो फैन ही हो गई..

चाहत जो अभी तक गुस्से में थी डॉली की बात सुन मुस्कुराने लगीं डॉली ने बात जारी रखते हुए कहा - सच में यार .. तुम्हे देख कर कोई नहीं कह सकता... इतना ज्यादा गुस्सा भी होती होगी....

ये सुन चाहत बोली - मै हर किसी पर गुस्सा नहीं करती.. बस

जब कोई कुछ गलत बोले तो ... गुस्सा आ जाता है..

डॉली ये सुन हस्ते हुए - पर यार जो भी हो.. बड़ी हिम्मत वाली हो तुम.. बिना डरे चमका दिया तुमने बच्चे को... यार कसम से क्या लताड़ा है...

चाहत उसकी तारीफे सुनती रही फिर कहा - अब बस भी करो ...

डॉली उसने तो जैसे सुना ही नहीं उसने खुद की पीठ थपथपाते हुए कहा - proud of you डॉली.. तुमने क्या बेस्ट फ्रेंड चुनी है..

चाहत ने सुना फिर कहा - क्या बेस्ट फ्रेंड..?

डॉली उसकी बात सुन - हा बेस्ट फ्रेंड... क्यू नही हो क्या???

चाहत ने कप उठा कर वॉशरूम के पास रखते हुए कहा - नहीं.... मै बेस्ट फ्रेंड नहीं बनती...
 
डॉली को लगा चाहत मज़ाक कर रही है - उसने कहा क्यू... ओह अच्छा... मै तुम्हारे जितनी ब्रेव नहीं हूं ... इसीलिए ना.... डोंट वरी मै तुम्हारे साथ रह कर सीख जाऊंगी.... वो बोलते हुए पलटी तो देखा चाहत सपाट चेहरे के साथ खिड़की के बाहर देख रही है। उसके आंखो में अजीब सा खालीपन है।

डॉली उसके पास आई और चाहत के कंधो पर हाथ रख कर

कहा - क्या हुआ..

चाहत ने मुड़ कर डॉली कि तरफ देखा फिर कहा - मै बेस्ट फ्रेंड नहीं बनती.. क्युकी मेरी लाइफ में अगर मैं किसी को फ्रेंड से ज्यादा बड़ा ओहदा देंती हूं.... तो वो मुझे छोड़ कर चला जाता हैं....

डॉली को ये बात समझ नहीं आई उसने चाहत की तरफ देखते हुए पूछा - मतलब...

चाहत खिड़की की तरफ देखते हुए बोली - स्कूल में मेरे तीन फ्रेड थे... काजल , अंश और....

डॉली उसे देखते हुए - और..

चाहत गहरी सांस लेते हुए - और अध्यन...

फ़्लैश बैक

चाहत आज स्कूल से घर आई तो देखा आर्यन सोफे पर बैठा टीवी देख रहा है चाहत भी फ्रेश होकर अपनी पढ़ाई करने लगी । वो 10th में थी और बोर्ड क्लास होने के कारण उसने अपनी पढ़ाई का टाइम बढ़ा दिया था। चाहत शाम 7बजे तक पढ़ती रही तभी उसके मोबाइल पर किसी की कॉल आने

लगी। चाहत ने मोबाइल देखा तो उसमे कामना जी का कॉल था । कामना जी काजल की मम्मी थी।

चाहत ने कॉल अटेंड कर मोबाइल कान से लगा लिया।

कामना जी एकदम घबराई हुई आवाज़ में - हेल्लो चाहत बेटा...

चाहत अपने बुक्स को देखते हुए - हा आंटी बोलिए..

कामना जी - काजल वहा आई है क्या..

चाहत - नहीं आंटी ....क्यू..

कामना जी - वो अभी तक घर नहीं लौटी है....तो मुझे लगा शायद तुम्हारे साथ होगी....

चाहत - नहीं आंटी.. छुट्टी के बाद तो हम साथ ही निकले थे.. देखिए आंटी थोड़े देर में आती होगी.... या फिर कुछ काम से कहीं फस गई होगी...

कामना जी - अच्छा ठीक है....शायद तुम सही कह रही हो..... रखती हूं... आए तो बताना....

चाहत - हा ठीक है...

चाहत सोचने लगी - मेरे साथ ही तो निकलीं थी....पता नहीं कहा रह गई... शायद साइकिल पंचर हो गई होगी...

वो ये सोच ही रही थी तभी आर्यन आया उसके हाथ में नाश्ते की प्लेट थी चाहत ने नाश्ता किया फिर अपनी पढ़ाई करने

लगी। वो पढ़ाई में इस कदर खो गई की उसे होश ही नहीं रहा कब 9बज गए । रीमा जी ने चाहत को आवाज़ लगाई तब चाहत नीचे आई उसने डिनर किया फिर ऊपर आ गई।

चाहत बेड पर लेटी ही थी तभी उसे कामना जी की याद आ गई। उसने अपना मोबाइल उठाया फिर कामना जी को कॉल किया ।

कामना जी - हा चाहत...

चाहत - हा आंटी.. वो काजल...काजल आ गई क्या....

कामना जी- हा आ गई....

चाहत - थैंक गॉड वो आ गई.. मैंने कहा था ना .. कुछ काम आ गया होगा ....आप खामोखा फिक्र कर रही थी....

कामना जी - हा बेटा ....तुमने सही कहा था ...चलो अब मै जाती हूं...

चाहत - जी आंटी...

चाहत ने कॉल कट की फिर सो गई।

अगली सुबह

स्कूल

10th "A"

चाहत क्लास पहुंची तो देखा एक टीचर क्लास में थे। चाहत ने उन्हें देखा और दरवाज़े पर ही रुक गईं। टीचर ने चाहत को देखा तो इशारे से उसे अंदर आने को कहा । चाहत उनका इशारा पाकर अंदर आ गई।

चाहत ने देखा वे लोग क्लास में लगे कैमरे को निकाल रहे है। शायद कैमरे में कोई प्रोबलम थी।

चाहत ने अपना बेग अपनी चेयर पर रखा और बैठ गई। थोड़ी देर में अध्यन क्लास में आया।

अध्यन ने मुस्कुराते हुए अपना बेग साइड में रखा और चाहत के पास आ गया। दोनो बाते करने लगें। दोनों की दोस्ती को एक साल से ऊपर हो गया था पर आज भी ना चाहत ने कुछ कहा था और ना ही अध्यन ने पर उनके बीच का दोस्ती का रिश्ता वो और भी गहरा हो गया था। दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे फिर भी अभी तक किसी ने पहल नहीं की थी ।

इतने में अंश दोनो के पास आकर - अरे मेरे लव बर्डस... अगर तुम दोनों की प्यार भरी बातें ख़तम हो गई हो तो...फिर अध्यन की तरफ देख कर - अध्यन जी क्या आप मेरे साथ

चलेंगे....

अध्यन ने मुंह बनाते हुए कहा - नहीं...

अंश सिर पर हाथ रख - जानता था तू यहीं कहेगा.... पर जाना तो होगा.. कोच का फरमान आया है..

अध्यन ने चाहत की तरफ देख कर कहा - आता हूं...

चाहत ने भी हा में सिर हिला दिया।

अध्यन के जाने बाद चाहत वैसे ही बैठे हुए इधर उधर देखा तभी उसकी नज़र काजल पर पड़ी जो टेबल पर बैठ उसे ही घुर रही थीं। चाहत ने देखा काजल की आंखे लाल थी जैसे रात भर सोई ना हो चाहत ने सोचा उससे बात कर लू तभी प्रेयर बेल बजी। चाहत को मज़बूरी में क्लास के बाहर खड़ा रहना पड़ा।

चाहत सभी को क्लास से बाहर निकलते हुए देखने लगी तभी काजल आई । चाहत ने काजल को देखा फिर उसके पास जाने लगी पर वो उसके पास जाती इससे पहले ही काजल मुंह मोड़ कर चले गई। चाहत को अजीब तो लगा पर फिर भी उसने ध्यान नहीं दिया और वो भी प्रेयर ग्राउंड चले आई ।

प्रेयर हो जाने के बाद सारे बच्चे क्लास आ गए चाहत भी आ गई। चाहत क्लास में आई फिर थोड़ी देर इंतज़ार करने के

बाद भी जब कोई नहीं आया तो उसने सभी बच्चो का अटेंडेंस लिया। सारे बच्चे टीचर के एबसेंट होने के कारण मस्ती कर रहे थे चाहत बोर्ड के पास गई फिर उसने कहा - बात करना है तो करो... पर कोई शोर नहीं होना चाहिए..

सबने हा कहा और अपना अपना काम करने लगे।

चाहत ने बोर्ड के पास ही खड़े होकर काजल को देखा फिर वो काजल के पास चले गई।

चाहत ने काजल के कंधो पर हाथ रखा और कहा - क्या हुआ...???

काजल ने उसका हाथ झटकते हुए गुस्से से कहा - कुछ नहीं...

चाहत ने उसे ऐसे करते देखा तो उसके साथ वाली चेयर पर बैठ गई फिर काजल का हाथ पकड़ते हुए बोली - क्या हुआ ... मिष्टी..

काजल ने जैसे ही ये सुना हाथ झटकते हुए ज़ोर से बोली - क्यू .... क्या तुझे नहीं पता क्या हुआ है..?

चाहत को समझ ही नहीं काजल को ऐसे चिल्लाता देख पूरी क्लास उन दोनों को देखने लगी।

काजल अपने चेयर से उठते हुए बोली - बोल चाहत तुझे नहीं पता क्या हुआ है...?

चाहत भी चेयर से उठ उसके पास जाती हुई बोली - तू क्या बोल रही है.... मुझे कैसे पता होगा .. क्या हुआ है..

काजल ताली बजाते हुए - वाह इसे कहते है... नौ सौ चूहे खा कर... बिल्ली हज को चली.... तुझसे तो बात ही नहीं करनी मुझे..

चाहत को समझ ही नहीं आ रहा था फिर भी उसने कहा - क्या हुआ है काजल .... कुछ बता तो सही....

काजल ने गुस्से में कहा - ohh really.... तुझे नहीं पता .. ठीक है तो मै बताती हूं... कल तेरे पास मेरी मम्मी का कॉल आया था... तो तूने क्या कहा था ....

चाहत याद करते हुए - बस इतना... शायद तू किसी काम में फस गई होगी ... इसीलिए लेट हो गई होगी....

काजल चीखते हुए - नहीं तूने ये नहीं कहा था... तूने उन्हें ये कहा मै और तू साथ में निकले थे ... और तूने मुझे उसके बाद देखा ही नहीं...

चाहत ने कहा - हा सही तो कहा था मैंने ... तू और मै साथ में ही तो निकले थे...

चाहत ने बस इतना ही कहा था । तभी काजल - हा हम साथ ही निकले थे.. बट तूने मम्मी को जिस तरह से बताया उस

वजह से मम्मी को मुझ पर शक हुआ.. वो मुझे ढूंढने निकल गई.... जब मै घर आई तो पापा ने मुझ पर हाथ उठा दिया..उन्होंने मुझे अनिल के साथ देख लिया था.... और पता है इतने में भी तेरा मन नहीं भरा तूने फिर कॉल की ... और फिर कुछ कहा.... मम्मी ने जिस वजह से मुझसे ये तक कह दिया कि स्कूल अकेले जाने की जरुरत नहीं... अब से पापा तुझे छोड़ने जाएंगे... और वहीं तुझे लेने आयेंगे...

चाहत ने आगे बढ़ कर कहा - नहीं काजल ऐसा नहीं है....तू गलत सोच रही है....मै तो बस

काजल ने अपना हाथ चाहत की तरफ दिखाया जिसे देख चाहत चुप हो गई।

हर्ष जो कब से ये सब सुन रहा था उसने काजल की तरफ देखते हुए कहा - काजल ये क्या कर रही हो तुम... अगर कोई भी प्रोबलम है तो .... बात कर के सॉल्व कर लो.. ऐसे तमाशा मत करो....

काजल ने एक नजर हर्ष को देखा फिर कहा - देखो हर्ष ये हमारे बीच की बात है....तुम तो दूर ही रहो...

अब हर्ष को भी गुस्सा आया उसने काजल को घूरते हुए कहा - वहीं तो मै कह रहा हूं....अगर कोई भी बात है तो....अकेले में सॉल्व कर लो...

काजल ने उसकी बात को पूरी तरह से इग्नोर करते हुए

कहना जारी रखा - सब तेरी वजह से हुआ... ना तूने कुछ कहा होता ... ना ये सब हुआ होता.. जलती हो तु मुझसे....

अध्यन और अंश दोनो किनारे में खड़े सुन रहे थे। जब काजल के मुंह से ये बात सुनी तो अंश का गुस्सा और वो काजल की तरफ बढ़ गया । उसने काजल का हाथ पकड़ा और गुस्से में कहा - कुछ भी बकवास किए जा रही हो... जो भी हुआ तुम्हारी गलती थी... तुम अनिल के साथ गई थी.... चाहत को तो पता भी नहीं था...

काजल ने अपना हाथ छुड़ा कर कहा - नहीं... चाहत ने मुझे देखा था अनिल के साथ जाते हुए ....फिर चाहत की तरफ मुड़ कर - तुमने देखा था ना मुझे...

चाहत ने झट से कहा - नहीं मैंने नहीं देखा था...तुझे गलत फहमी हुई है...मैंने तुझे नहीं ...

काजल उसकी बात काटते हुए - झूट मत बोल ...तूने देखा था..तू जलती है मुझसे..

अब चाहत की आंखो में आंसू आ गए उसने भरी आवाज़ में कहा - कसम से यार....मैंने तुझे नहीं देखा था... मुझे अगर पता होता तो मै जरूर तेरा साथ देती... मुझे नहीं पता था....और हा पहला कॉल आंटी का आया था..उन्होंने घबराते हुए मुझसे पूछा तो मैंने भी वहीं बताया जो हुआ था.... मुझे तेरी फिक्र हो रही थी इसीलिए मैंने कॉल किया

था.... और मैंने बस इतना पूछा की तू घर पहुंच गई क्या ...इससे ज्यादा मैंने कुछ नहीं कहा ।

काजल ने चाहत को देखते हुए कहा - झूठ फिर झूठ....अनिल सही कहता है ....तु जलती हो मुझसे ...

अब अध्यन से रहा नहीं गया वो सीधा काजल के पास पहुंचा फिर कहा - बस.. अब और नहीं... जब वो कह रही है... उसने ऐसा कुछ नहीं किया ....तो तुम मान क्यू नही लेती....और जो ये तुम बार बार कह रही हो..वो तुमसे जलती है... तुम बताओ वो क्यू जलेगी तुमसे... ऐसी क्या बात है तुम में जिससे वो जले...

काजल ने अध्यन की बात सुनी फिर हस्ते हुए बोली - तुम तो इसका साथ दोगे ही... क्युकी तुम तो इसे... खैर छोड़ो... ये बोल काजल रुक गई, अध्यन ने जब ये सुना तो उसने अपनी मुट्ठियां भींच ली काजल ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - और क्या कहा तुमने क्यों जलेगी...तो सुनो.... ये मुझसे जलती है...क्युकी मेरे पास कोई है जो मुझसे प्यार करता है.. जो मेरी केयर करता है.... जिसके लिए मै इंपॉर्टेंट हूं.... इसीलिए ये मुझसे जलती है.... क्युकी इसके पास ऐसा कोई नहीं है...

वो चल कर चाहत के पास आई चाहत उसे तो जैसे होश ही

नहीं था वो काजल की बात सुन वो शॉक्ड हो गई थी काजल चाहत को देखते हुए - अनिल हमेशा कहता था...तू हम दोनों को एक दिन अलग कर ही देगी ... पर मैंने आज तक उसकी बात नहीं मानी...पर अब मुझे यकीन हो गया है... वो सही कहता था।

अंश उसकी बात सुन वो काजल के पास आकर गुस्से से - कुछ भी बोले जा रही हो... तुम्हे पता भी है तुम क्या कह रही हो... इन सबमें चाहत ने कुछ नहीं किया... तुम गई थी अनिल के साथ... घर तुम लेट से पहुंची... चाहत ने तो बस कॉल कर के तुम्हारे बारे में पूछा .... क्युकी उसे तुम्हारी फिक्र थी..बेवकूफ लड़की...

चाहत जो कब से चुप थी पीछे से अंश के आगे आकर कहा - रहने दो अंश.. कोई फायदा नहीं बात बढ़ाने का... अभी वो गुस्से में है.... तुम्हारी कोई बात नहीं सुनेगी.... ये बोल उसने अंश का हाथ पकड़ा और अध्यन के पास जाने लगी।

तभी काजल पीछे से - सही है यार.... तेरा ही सही है ...कभी अंश , कभी अध्यन तो कभी इशांत... जब तेरे पास इतने ही लोग है.... तब भी तू मुझसे क्यू जल रही थी.. मेरी लव लाइफ क्यू ख़तम की.... आई मीन कमी थोड़ी ना है...तुझे किसी...वो इससे आगे कुछ बोल पाती तो उससे पहले चाहत पलटी और उसने एक थप्पड़ खींच कर काजल के गाल पर

मारा....

पूरी क्लास जो मजे से ये ड्रामा देख रही थी सब सन्न रह गए। चाहत के थप्पड़ की आवाज़ इतनी तेज की सब डर गए। चाहत ने अपनी उंगली ऊपर दिखाते हुए काजल से कहा - बस अब एक भी वर्ड नहीं... मुझे पहले लगा था तु दर्द में है... शायद इसीलिए गुस्सा है... पर नहीं... तू तो ... तू मुझ पर इल्ज़ाम लगा रही है... मै जलती हूं तुझसे ... तो सुन मुझे किसी से किसी भी तरह की जलन नहीं है... मैंने हमेशा से ही तुझे सपोर्ट किया... हमेशा तुझे समझाया ... मानती हूं मै... मुझे अनिल पसंद नहीं ... पर ये भी सच है... मैंने कभी तुझसे जलन जैसी भावना नहीं रखी... ना ही मै कभी रखूंगी....तू जानती है क्यू... क्युकी मैंने तुझे हमेशा अपनी बहन माना.... हमेशा तेरी फिक्र की है...

फिर चाहत अपना हाथ जोड़कर - गलती कर दी मैंने तेरी फिक्र कर के... मैंने सोचा पता नहीं तू कहा होगी... इसीलिए आंटी के पास कॉल किया..बस ये जानने के लिए ...तू पहुंची या नहीं...पर नहीं .. तुझे तो बस अनिल की कहीं बात याद है... हमारा 10 सालो का साथ... वो भूल गई तू... हर दर्द और तकलीफ में मै तेरे साथ थी.. हर बार बिना किसी स्वार्थ के मैंने तेरी हेल्प की.... पर तू... ये बोल चाहत की आंखे फिर गीली हुई उसने खुद को संभालते हुए कहा - और रही बात

अंश और अध्यन की .. तो वो मेरे दोस्त है... जब तूने मुझे इतना कुछ कहा... तो ये ओबियस सी बात है उन्हें बुरा लगा इसीलिए वो आए.... पर इसका मतलब ये नहीं .... मेरा उनके साथ कोई गलत रिश्ता है... मै तेरी तरह नहीं हूं.... जो बिना सोचे समझे किसी को कुछ भी बोल दू... ये बोल चाहत सीधा बाहर आ गई।
 
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