• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Romance दंगा

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
“बेटा बेशक भैया भाभी भी राज़ी नही थे इस शादी के लिए पर शादी तो हुई ना और पूरे धर्मी रिती रिवाज से हुई. तुम जल्दबाज़ी में कोई फ़ैसला मत लो. ठंडे दिमाग़ से सोच लो. अवनी बहुत अच्छी लड़की है. जितनी सेवा उसने की है तुम्हारी उतनी कोई नही कर सकता. तुम्हारे बारे में पता चलते ही वो अपनी पढ़ाई-लिखाई सब कुछ छोड कर मुंबई आ गयी थी. उसने अपना पत्नी धरम निभाया, तुम नही देख पाए लेकिन हमने देखा है. उसे ठुकराने की भूल मत करना…बहुत प्यारी बच्ची है वो. तुम्हारी जोड़ी अच्छी रहेगी.”

“बस चाचा जी प्लीज़. रहने दीजिए ये सब. मैं इस बाल-विवाह को कभी स्वीकार नही करूँगा.”

“हां बेटा मैं कौन होता हूँ, जिसकी बात तुम मानोगे.”

“नही चाचा जी आपकी हर बात मानूँगा मगर ये नही मान सकता. ७ साल पहले शादी हुई…तब मुझे होश भी नही था. बहुत बुरा लगा था मुझे उस वक्त भी कि ये क्या मज़ाक हो रहा है. पर मेरी किसी ने नही सुनी. मैने इस शादी को कभी स्वीकार नही किया और ना ही करूँगा.”

“तुम्हारे स्वीकार करने या ना करने से क्या होता है. शादी पूरे समाज के सामने हुई थी और पूरे रीति रिवाज से हुई थी. और एक बात सुन लो तुम. अवनी मुंबई अपने घर वालो से लड़ कर आई थी. किसी को उम्मीद नही थी कि तुम कोमा से निकलोगे. मगर अवनी ने उम्मीद नही छोडी. वो इतना प्यार करती है तुम्हे, पत्नी के सारे फ़र्ज़ निभाए उसने और तुम ऐसी बाते कर रहे हो. जब उसे पता लगेगा ये सब तो वो तो मर ही जाएगी. क्या कमी है उसमे जो कि तुम ऐसी बाते कर रहे हो.”

“बात कमी की नही है. मैं उस से मिलूँगा और समझा दूँगा उसे.”

“बेटा अवनी के पेरेंट्स ने किसी विश्वास के साथ भेजा था उसे मुंबई. अवनी की ज़िद्द थी वरना वो उसे कभी ना भेजते, अब तुम ऐसा बर्ताव करोगे तो तूफान आ जाएगा. वो लोग चुप नही बैठेंगे.”

“चाचा जी मुझे किसी से गिला शिकवा नही है. अवनी से मैं कभी नही मिला. बस शादी के वक्त देखा था उसे. ना ही उसके परिवार वालो से मुलाक़ात हुई बाद में कभी. मैं उनसे माफी माँग लूँगा. रिश्ते ज़बरदस्ती नही जोड़े जाते. दादा जी ने ग़लत किया था ये बाल विवाह करवा कर और मैं इस ग़लती को जींदगी भर नही धो सकता.”

“ठीक है बेटा जैसी तुम्हारी मर्ज़ी. मेरा फ़र्ज़ तो तुम्हे समझाना था. भैया भाभी जींदा होते तो वो भी यही समझाते.”

“मम्मी पापा को भी मैं यही जवाब देता. अब मैं बड़ा हो गया हूँ. २१ साल उमर है मेरी. बालिग हूँ मैं अब और अपने भले बुरे का फ़ैसला खुद कर सकता हूँ. ७ साल पहले मुझे बहला फुसला कर मंडप पर बैठाया गया था. असहाय था उस वक्त मैं पर आज नही हूँ. आज किसी के आगे नही झूकुंगा. ये मेरी जींदगी है और मैं अपने तरीके से जीने का हक़ रखता हूँ.”

“मैं चलता हूँ बेटा. खुश रहो सदा. फिर भी जाते-जाते यही कहूँगा कि एक बार सोच लेना फिर से. एक मासूम लड़की की जींदगी का सवाल है जिसने पूरा साल बिना किसी स्वार्थ के तुम्हारी सेवा की है.”

“मुझे अवनी से कोई शिकवा नही है. उसने मेरे लिए इतना कुछ किया उसके लिए आभारी हूँ. पर मैं मजबूर हूँ. मैं उस से मिलकर माफी माँग लूँगा. मुझे उम्मीद है कि वो मेरी बात समझेगी.”

“बेटा क्या तुम्हारी जींदगी में कोई और लड़की है जिसके कारण तुम अवनी को ठुकरा रहे हो. अगर ऐसा है तो जान लो..उस से बेहतर पत्नी नही मिल सकती तुम्हे. जो त्याग और समर्पण उसने दिखाया है वो हर किसी के बसकि बात नही है. सोचना दुबारा फिर से. फॅक्टरी संभाल लेना जाकर अब तुम. मेरे जो बस में था मैने किया. चलता हूँ अब.”

रामदास त्रिवेदी चेहरे पर निराशा के भाव लिए वहा से निकल गया.

रघुनाथ के जाने के बाद आलिया तुरंत भाग कर आई और बोली, “तुम शादी शुदा हो और मुझे बताया तक नही. एक महीना तुम्हारे साथ रही मैं इस घर में. अब भी लंबे सफ़र के बाद तुम्हारे साथ आई हूँ. क्या ये बात नही बता सकते थे मुझे.”

“जान…मेरे लिए उस शादी का कोई मतलब नही था. मैने कभी उस शादी को शादी नही माना. बल्कि मैं तो भूल ही गया था गुड्डे-गुड्डी के उस मज़ाक को.”

“अब क्या होगा मुझे बहुत डर लग रहा है. अवनी तुम्हारी पत्नी कैसे हो सकती है. तुम पर तो सिर्फ़ मेरा अधिकार है ना राज.” आलिया रोते हुवे बोली.

“हां मुझ पर और मेरी आत्मा पर सिर्फ़ तुम्हारा अधिकार है.”

“उसने बहुत सेवा की तुम्हारी. कही तुम्हारा दिल उसके लिए पिघल तो नही जाएगा.” आलिया सुबक्ते हुवे बोली.

“पागल हो क्या. तुम्हारे सिवा मेरी जींदगी में कोई नही आ सकता. तुमने सुनी ना सारी बाते. फिर क्यों परेशान हो रही हो.”

“अवनी से मिलने मत जाना…कही वो तुम्हे मुझसे छीन ले. वादा करो कि नही मिलोगे तुम अवनी से.”

“पागल मत बनो. उस से मिलना बहुत ज़रूरी है. उसकी क्या ग़लती है. उस से मिल कर अपना पक्ष रखूँगा तभी बात बनेगी वरना तो वो मुझे ग़लत समझेगी”

“क्या वो सुंदर है?” आलिया ने आँखो से आँसू पोंछते हुवे कहा.

“मैं मिला ही कहा हूँ उस से. बस शादी के वक्त देखा था. तब बहुत छोटी थी वो. रो रही थी मंडप में आते हुवे. जैसे मुझे ज़बरदस्ती लाया गया था मंडप में वैसे ही उसे भी ला रहे थे उसके पेरेंट्स. और सुंदर हुई भी तो क्या फरक पड़ता है, मेरी आलिया का मुक़ाबला कोई नही कर सकता.”

“मिल लेना उस से मगर देखना मत उसे बिल्कुल भी, ठीक है, वरना तुम्हारा खून पी जाऊंगी मैं….. मेरे अल्लाह ये सब हमारे साथ ही क्यों हो रहा है.” आलिया ने कहा.

आलिया सोफे पर बैठ गयी सर पकड़ कर. राज ने उसके कंधे पर हाथ रखा और बोला, “क्या हुवा जान तुम परेशान क्यों हो रही हो. मैं हूँ ना तुम्हारे साथ. तुम घबराओ मत सब ठीक है.”

“क्या ठीक है, अब जब तक तुम्हारी पहली शादी का मामला नही निपट जाता हम शादी नही कर सकते.” आलिया ने भावुक हो कर कहा.

“क्यों तुम्हे चुंबन की जल्दी पड़ी है क्या?” राज मुस्कुरा कर बोला.

“राज मज़ाक मत करो…क्या ये सब मज़ाक लग रहा है तुम्हे. किस हक़ से रहूंगी मैं अब यहा तुम्हारे साथ बताओ. अब मुझे जाना पड़ेगा ना अपने ही घर से.”

“कैसी बात कर रही हो तुम…क्यों जाना पड़ेगा तुम्हे. शादी के बिना भी ये घर तुम्हारा ही है.”

“ये तुम जानते हो, मैं जानती हूँ पर ये समाज नही जानता. तुम्हे लोग कुछ नही कहेंगे पर मेरे चरित्र की धज्जिया उड़ाई जाएँगी. लोग मुझे ग़लत नज़रो से देखेंगे. अभी तो ये भी नही पता कि धरम के ठेकेदार हमारे रिश्ते को कैसे लेंगे, उपर से ये बालविवाह का लफडा भी आ गया.राज मैं कैसे रह पाउंगी यहा…नही रह पाउंगी. तुम खुद सोच कर देखो.”

आलिया की बात बिल्कुल सही थी. उसका ऐसा सोचना स्वाभाविक था. समाज के सामने शादी किए बिना उनका साथ रहना आलिया के चरित्र को कलंकित ही करेगा. ये बात आलिया समझ रही थी मगर राज नही समझ पा रहा था.

“तो तुम मुझे और इस घर को छोड कर चली जाओगी. बहुत बढ़िया…क्या इतनी जल्दी हार मान लोगि तुम”

“एक साल तक इंतेज़ार किया मैने तुम्हारा…पूरा एक साल. हार ना कभी मानी है और ना मानूँगी. मगर मैं नही चाहती कि मैं अपने संस्कारों की धज्जियाँ उडाऊ. मेरे अम्मी-अब्बा की रूह भटकेगी अगर मैने ऐसा किया तो. मेरी परवरिश इस बात की इज़ाज़त नही देती कि मैं यहा बिना शादी किए बिना रहूं. और शादी में तो अब रुकावट आ गयी है. जब तक पहली शादी रफ़ा दफ़ा नही करते तुम तब तक दूसरी शादी कैसे करोगे.”

“आलिया किसी ने तुम्हे देखा नही है यहा आते हुवे. तुम चुपचाप यहा रह सकती हो. क्यों इतना कुछ सोच रही हो.” राज ने कहा.

“राज मैं जाना नही चाहती हूँ यहा से…पर यहा रुकना भी बहुत अजीब लग रहा है.” आलिया सुबक्ते हुवे बोली.

राज आगे बढ़ा. वो आलिया को गले लगाना चाहता था. मगर आलिया पीछे हट गयी और भाग कर अपने कमरे में आ गयी और दरवाजा बंद कर लिया.

राज भाग कर आया उसके पीछे, “जान दरवाजा खोलो यू परेशान होने से कुछ हाँसिल नही होगा. और तुम ये घर छोड कर नही जाओगी. अगर गयी तो मैं मर जाऊंगा.”

आलिया ने दरवाजा खोला और चिल्ला कर बोली, “चुप करो ऐसी बाते नही करते. मैं नही जा रही हूँ कही. मैं बस अपने परेशानी बता रही थी. तुम एक औरत की मजबूरी नही समझ सकते.”

“समझ रहा हूँ जान मगर तुम ये घर छोड कर नही जाओगी. ऐसा करते हैं, तुम यहा किरायदार बन जाओ. मैं उपर वाला कमरा झूठ मूट में दुनिया को दीखाने के लिए तुम्हे दे देता हूँ. रहोगी तुम यही नीचे हर वक्त. किसी को क्या पता चलेगा. बस बाहर से सीढ़ियाँ डलवा देता हूँ. बाहर की सीढ़ियों से उपर जाना और पीछे की सीढ़ियों से नीचे आ जाना. मैं इस बाल-विवाह के झंझट को जल्द से जल्द ख़तम करने की कोशिश करूँगा. चाहे कुछ हो जाए तुम रहोगी यही. बस मुझे रेंट देती रहना.”

“हां ये ठीक है. इस से हम साथ भी रहेंगे और दुनिया मुझे ग़लत भी नही समझेगी. पर ये रेंट का क्या चक्कर है.” आलिया अपने आँसू पोंछते हुवे बोली.

“रेंट तो भाई तुम्हे देना ही पड़ेगा.”

“हां पर कैसा रेंट.”

“रोज इस ग़रीब को अच्छा-अच्छा खाना बना कर दे देना यही रेंट है.”

“वो तो वैसे भी मैं दूँगी ही. मैं नही बनाऊंगी तो कौन बनाएगा खाना यहा” आलिया ने कहा.

“अच्छा जान तुम आराम करो मैं मार्केट से राशन ले आता हूँ. और बाहर से सीढ़ियाँ डलवाने का काम भी कल से शुरू करवा दूँगा. एक दिन में ही हो जाएगा सारा काम. फिर ४-५ दिन उसे मजबूत होने में लगेंगे फिर तुम दुनिया की नज़रो में किरायदार बन जाना. तब तक छुप कर रहो.”

“ठीक है…क्या कुछ लाओगे”

“तुम लिस्ट बना दो मैं तब तक फ्रेश हो लेता हूँ.”

“ओके…” आलिया मुस्कुरा कर बोली.

रामदास त्रिवेदी निराश-हताश घर पहुँच गया मुंबई. उनकी बीवी उन्हे देखते ही भाग कर आई उनके पास, “क्या हुवा कुछ पता चला की राज कहा है.”

“हां पता चला…” रघुनाथ बोलते-बोलते रुक गया क्योंकि उन्हे अवनी आती दीखाई दी उसकी ओर.

“चाचा जी क्या हुवा सब ठीक तो है?” अवनी ने कहा

“हां बेटा सब ठीक है. राज बिल्कुल ठीक है. आएगा तुझसे मिलने वो जल्दी ही.”

“कहा हैं वो?” अवनी ने पूछा.

“गुजरात में ही है बेटा. कुछ बहुत ज़रूरी काम था उसे जिसके कारण उसे जाना पड़ा बिना बताए.”

ये सुनते ही अवनी के चेहरे पर मुस्कान बिखर गयी. उसने मन ही मन कहा, “शुक्र है सब ठीक है.”

“चाचा जी पापा उनसे मिलने को बोल रहे थे. उन्हे मैने बताया नही है अभी की वो यहा नही हैं. आपने मना किया था ना अभी बताने से इसलिये उन्हे कुछ नही बताया, बस यही बताया है कि उन्हे होश आ गया है. अब बतायें कि क्या कहूँ पापा को. वो तो कल ही मुंबई आने को बोल रहे हैं और वो यहा नही हैं.”

“बेटा थोड़ा बैठते हैं पहले. आराम से सोचते हैं कि क्या करना है.”

“ठीक है चाचा जी. आप बैठिए आराम से, मैं चाय लाती हूँ आपके लिए… इलायची वाली.” अवनी ने कहा और कह कर चली गयी.

“कैसे बताऊंगा इस मासूम को कि जिसके लिए तुम इतना परेशान हो, जिसकी तुमने दिन रात सेवा की वो तुम्हे अपनाना ही नही चाहता. नही बता पाऊंगा इसे कुछ भी. ये काम राज को ही करना होगा.इस फूल सी बच्ची को मैं ये सब अपने मूह से नही बता सकता.” रामदास त्रिवेदी ने मन ही मन कहा.

अवनी किचन में चाय बनाती हुई बस राज को ही सोच रही थी, “आपको नींद में ही देखा मैने पूरा साल. रोज आपके चरण छू कर दिन की शुरूवात करती थी. यही दुवा करती थी मैं कि आप इस गहरी नींद से उठ जायें और आपकी गहरी नींद मुझे लग जाए. देखना चाहती थी आपको उठे हुवे. पर आप नींद से जाग कर चले भी गये यहा से और मुझे पता भी नही चला. इस से बुरा नही कर सकते थे भगवान मेरे साथ. काश दिल्ली नही जाती तो आपको देख पाती और आपके चर्नो में बैठ कर कहती की मुझे बहुत खुशी हुई आपको जागे हुवे देख कर. पता नही आप मेरे बारे में सोचते हैं कि नही पर मैं आपको बहुत प्यार करती हूँ. बचपन से ही बस आपको ही बैठा रखा है दिल में.”

“अरे अवनी चाय उबल गयी बेटा कहा खोई हो” चाची ने आवाज़ दी.

अवनी अपने विचारो से बाहर आई और तुरंत गॅस ऑफ किया, “ओह सॉरी चाची जी, ध्यान भटक गया था.”

“कोई बात नही बेटा होता है कभी-कभी. वैसे क्या सोच रही थी तुम. ज़रूर राज के बारे में ही सोच रही होगी.”

अवनी का चेहरा शरम से लाल हो गया ये सुन कर. उसने बात को टालते हुवे कहा, “आप चलिए मैं चाय लाती हूँ.”

“इतनी सुंदर और सुशील बहू हमें ढूँढे नही मिलती. अच्छा हुवा जो कि तुम बचपन में ही हमारे राज की बीवी बन गयी.” चाची ने कहा.

“चलिए ना चाची जी मैं चाय ला रही हूँ.” अवनी शरमाते हुवे बोली.

“हां ले आओ बेटा…” चाची ने कहा और चली गयी

चाची के साथ ही आरजु खड़ी थी. वो राज के चाचा, चाची की, इक-लौति संतान थी. चाची के जाने के बाद वो अवनी के पास आई और बोली, “भाभी बड़ी खुश लग रही हो. खुशी-खुशी में चाय खराब तो नही कर दी.”

“चल भाग यहा से…तुझे कौन सा चाय पीनी होती है. खराब भी हुई तो तुझे क्या फरक पड़ेगा.” अवनी ने कहा.

“वैसे भैया को ना आप देख पाई उठने के बाद और ना मैं. आप दिल्ली चली गयी और मुझे अपने कॉलेज की ट्रिप पे जाना पड़ा.” आरजु ने कहा.

“अच्छी बात ये है कि वो ठीक हैं, इन बातों से कोई फरक नही पड़ता है.” अवनी ने कहा.

“हां ये तो है…भाभी तुमने कितनी सेवा की है भैया की. कोई और इतना नही कर सकता था.”

“बस-बस…चल ये बिस्कट ले कर जा मैं चाय की ट्रे लाती हूँ.” अवनी ने कहा.

अवनी चाय लेकर आई ड्रॉयिंग रूम में तो रघुनाथ ने कहा, “बेटा मैं सोच रहा हूँ कि पहले तुम राज से मिल लो. दोनो मिल कर डिसाइड कर लो कि गोना कब करना है. फिर अपने पापा को बुला लेना.”

“नही चाचा जी कैसी बात कर रहे हैं आप. मैं कुछ डिसाइड नही कर सकती. सब कुछ मम्मी,पापा ही डिसाइड करेंगे.” अवनी ने कहा.

“वो तो ठीक है बेटा. पर वक्त बदल गया है अब. तुम दोनो एक दूसरे से मिल कर सब कुछ तैय करोगे तो अच्छा रहेगा.”

अवनी कुछ परेशान सी हो गयी ये सुन कर और चाय रख कर चली गयी वहा से.

“आप भी ना. वो कैसे करेगी बात राज से, वो भी अपने गोने के बारे में. क्या देखा नही आपने कि वो कितना शरमाती है. ज़्यादा बाते करनी आती भी नही उसे. ये बातें तो आपको ही करनी होंगी अवनी के घर वालो से. ये बच्चे क्या डिसाइड करेंगे.” चाची ने कहा

“तुम्हे नही पता भाग्यवान. आजकल के बच्चे बहुत बड़ी-बड़ी बातें करते हैं. हम जो डिसाइड करेंगे शायद वो इन्हे अच्छा ना लगे.” रघुनाथ ने धीरे से कहा.

“ऐसा क्यों बोल रहे हैं आप.” चाची ने पूछा.

रघुनाथ ने पूरी बात बता दी अपनी बीवी को.

“हे भगवान! ऐसा सोच भी कैसे सकता है राज. ऐसा हुवा तो अनर्थ हो जाएगा. मैं बात करूँगी उस से. दिमाग़ खराब हो गया है उसका जो कि ऐसी बाते कर रहा है.”

“बहुत समझाया मैने उसे मगर उसने मेरी एक नही सुनी” रघुनाथ ने कहा.

“अच्छा तभी आप दोनो को मिलने को बोल रहे थे.”

“हां मैं चाहता हूँ कि जो भी बात करनी है राज खुद करे अवनी से. मैं अपने मूह से उसे ये सब नही बता सकता.”

“राज को समझाऊंगी मैं. वो मेरी बात ज़रूर मानेगा. और अवनी को देखा नही है उसने अब तक. एक बार मिल लेगा तो पता चलेगा उसे कि वो किसे ठुकराने की सोच रहा है.”

“भगवान से यही दुवा है की अवनी के साथ कोई अनर्थ ना हो. राज का कुछ नही बिगड़ेगा… वो लड़का है, सब कुछ अवनी का ही बिगड़ेगा.”

“ऐसा कुछ नही होगा आप शांत रहें. आपको अवनी की बहुत चिंता हो रही है…बिल्कुल अपनी आरजु की तरह मानते हैं आप उसे.”

“हां मेरी बेटी ही है अवनी. देख नही पाऊंगा उसके साथ ये अनर्थ होते हुवे.” रघुनाथ ने कहा.
 
राज ने घर के बाहर सीढ़ियाँ डलवा दी और आस-पड़ोस में ये क्लियर भी कर दिया कि आलिया उसके यहा किरायदार बन कर रह रही है.

“सोच रहा हूँ कि तुम्हारे घर की भी मरम्मत करवा दूं.” राज ने कहा.

“रहने दो सबको शक हो जाएगा. ये काम शादी के बाद करेंगे. बल्कि दोनो घरो को जोड़ कर एक बना देंगे हम.” आलिया ने कहा.

“आलिया चाचा जी का टेलीग्राम आया था आज फॅक्टरी में. तुरंत बुलाया है उन्होने मुझे मुंबई अवनी से मिलने के लिए. तुम बताओ क्या करूँ.”

आलिया ने गहरी साँस ली और बोली, “जाना तो पड़ेगा ही तुम्हे. इस समस्या का हल तो करना ही है ताकि हम सुख शांति से रह सकें.”

“हां बहुत ज़रूरी है इस उलझन को दूर करना तभी हम अपने प्यार में आगे बढ़ पाएँगे.”

आलिया रह तो रही थी किरायदार के रूप में मगर आस-पड़ोस के लोग फिर भी उसे घूर-घूर कर देखते थे. जिसके कारण वो गुमसूम और परेशान रहती थी. राज के मुंबई जाने के ख्याल से वो और ज़्यादा परेशान हो गयी थी

“राज मुझे भी ले चलो साथ मुंबई. मैं यहा अकेली नही रह पाउंगी. तुम देख ही रहे हो कैसा माहोल है यहा. घूर-घूर कर देखते हैं लोग मुझे. लगता है लोगो को शक हो गया है हमारे बारे में.”

“आलिया चिंता मत करो..मैं मुंबई जा रहा हूँ ना. सब ठीक करके आऊंगा और आते ही हम शादी कर लेंगे. ज़्यादा दिन नही सहना होगा तुम्हे ये सब. फिर देखता हूँ कि कौन घूर कर देखता है तुम्हे. आक्च्युयली मैं प्रॉब्लेम ये है कि किसी को बर्दाश्त नही हो रहा होगा कि एक अधर्मी लड़की धर्मी के घर रह रही है.”

“हां यही मैं प्रॉब्लेम है. पता नही जब हम शादी करके रहेंगे फिर किस तरह रीअॅक्ट करेंगे ये लोग.”

“तब की तब देखेंगे. हमें जो करना है करना है.”

“राज मुझे भी अपने साथ मुंबई ले चलो प्लीज़. मैं यहा अकेली क्या करूँगी.”

“चलना चाहती हो तुम?”

“हां…ले चलोगे ना?”

“तुम्हारे लिए कुछ भी करूँगा जान. चलो समान पॅक करलो, तुम्हे मुंबई घुमा कर लाता हूँ.” राज ने कहा.

“बहुत खर्चा करवा रही हूँ तुम्हारा.”

“पागल हो क्या. सब तुम्हारा है. और फॅक्टरी ठीक चल रही है. और ध्यान दूँगा तो और ज़्यादा तरक्की करेंगे.”

“राज तुम बहुत अच्छे हो” आलिया ने कहा और कह कर किचन की तरफ चल दी.

“रूको कहा जा रही हो?”

“खाना बनाना है…” आलिया हंसते हुवे बोली और किचन में आ गयी.

राज भी उसके पीछे पीछे आ गया.

“राज पता नही क्यों पर डर सा लग रहा है मुझे. पता नही ये समस्या कैसे और कब दूर होगी और कब मुझे तुम्हारी पत्नी कहलाने का हक़ मिलेगा.”

“वो हक़ तो तुम्हे कब से है. फिर भी एक काम और किए देता हूँ अगर कोई डाउट है तुम्हे तो” राज ने चाकू उठाया और इस से पहले कि आलिया कुछ समझ पाती झट से अपने दायें हाथ का अंगूठा चीर दिया.

“ये क्या किया राज…पागल हो गये हो क्या.”

राज ने कुछ कहे बिना आलिया की माँग भर दी और बोला, “अब मत कहना कि तुम मेरी पत्नी नही हो. जब दिल से मान चुके हैं हम एक दूसरे को पति-पत्नी तो और क्या रह गया है.”

आलिया राज के कदमो में बैठ गयी, “राज मेरा वो मतलब नही था. हम दोनो तो ये जानते ही हैं. बात समाज की हो रही है.”

“छोड़ो आलिया हटो अब. हद होती है किसी बात की. बेकार के झंझट पाल रखें हैं तुमने अपने मन में. कितना समझाऊ तुम्हे.” राज आलिया को किचन में छोड कर बाहर आ गया. आलिया वही बैठी हुई सुबक्ती रही.

आलिया खाना बना कर राज के पास आई.

“खाना खा लो राज.”

“नही मुझे भूक नही है. तुम खा लो.”

“अच्छा सॉरी बाबा…आगे से ऐसा नही कहूँगी…खाना खा लो प्लीज़…वरना मैं भी नही खाऊंगी. वैसे बहुत सुंदर लग रही है मेरी माँग भरी हुई.”

“मैने अपने खून से माँग भर दी तुम्हारी फिर भी पता नही कौन सी दुविधा में हो. कोई मज़ाक नही किया था मैने. बहुत मान्यता है इस बात की हमारे लिए.”

“मैं जानती हूँ राज. इसी देश में पली-बढ़ी हूँ मैं. अच्छा आगे से ऐसा कुछ नही कहूँगी जिस से तुम्हे दुख पहुँचे.”

राज आलिया के करीब आया और आलिया के चेहरे पर हाथ रख कर बोला, “जान मैं तुम्हारी हर परेशानी समझता हूँ. पर तुम्हे परेशान नही देख सकता.”

“सॉरी आगे से ऐसा नही होगा…चलो खाना खाते हैं.” आलिया मुस्कुरा कर बोली.

राज और आलिया के लिए फिर से ये इम्तिहान का दौर था. पहले इम्तिहान में वो दोनो फैल हो गये थे मगर उसके बाद दोनो ने कुछ ऐसा सीखा था जो कि उन्हे जीवन भर काम आएगा. फेल्यूर कभी बेकार नही जाता. कुछ तो वो भी दे ही जाता है. ये अच्छी बात थी कि ऐसे मुश्किल दौर में दोनो एक साथ खड़े थे. यही प्यार की सबसे बड़ी डिमांड रहती है अगर आप प्यार के सफ़र पर चल रहे हैं तो.

दोनो ने शांति से खाना खाया. और खाना खाने के बाद राज ने हंसते हुवे कहा, “अब एक स्वीट डिश हो जाए.”

“स्वीट डिश नही बनाई…अभी बना कर लाती हूँ कुछ.”

“नही…नही रूको मैं मज़ाक कर रहा था. वैसे कहते हैं कि चुंबन स्वीट होता है.”

“श्रीमान वो भी उपलब्ध नही है इस समय. थोड़ा वक्त लगेगा.” आलिया मुस्कुरा कर वापिस किचन की ओर चल दी.

“कितना वक्त लगेगा तैयार होने में.?” राज ने पूछा.

“क्या स्वीट डिश या…” आलिया ने मूड कर पूछा.

“दोनो के बारे में बता दो.”

“स्वीट डिश अभी १० मिनिट में बना देती हूँ. उसमे कितना टाइम लगेगा पता नही.” आलिया हंसते हुवे किचन में घुस गयी.

“ओह आलिया कितनी प्यारी हो तुम. ऐसी ही रहना हमेशा. मुझे चुंबन की जल्दी नही है जान. बस मज़ाक कर रहा हूँ तुमसे. तुम मेरी अपनी हो ना इतना मज़ाक तो कर ही सकता हूँ. बुरा मत मान-ना.” राज ने मन ही मन कहा.

“राज मुझे शरम आने लगी है अब तुम्हारे साथ. थोड़ा डर भी लगने लगा है तुमसे. पर सब कुछ अच्छा भी लग रहा है. तुम यू ही रहना हमेशा मेरे लिए. चुंबन अगर बहुत ज़रूरी है तो ले लो. पर नाराज़ मत होना मुझसे. जी नही पाउंगी तुम्हारे बिना.” आलिया की आँखे नम हो गयी सोचते सोचते.

ये भी प्यार का अजीब सा रूप है. बिन कहे बहुत सारी बाते होती हैं और समझी भी जाती हैं. आलिया और राज लगभग एक सी बाते सोच रहे थे.

अगले दिन राज और आलिया मुंबई के लिए रवाना हो गये. दोपहर ३ बजे पहुँच गये वो मुंबई. कोलाबा में घर था राज के चाचा जी का. इसलिये वही एक होटेल में रुक गये राज और जरीना. कुछ देर आराम करने के बाद राज ने कहा, “जान मैं मिल आता हूँ अवनी से. तुम यही रूको.”

“हां मिल आओ और शांति से काम लेना. उसकी कोई ग़लती नही है. कुछ भला बुरा मत बोल देना उसे. बहुत सेवा की है उसने तुम्हारी. अपना पत्नी धरम निभाया है. मुझे यकीन है कि तुम सब ठीक करके लोटोगे. काश मैं भी चल पाती तुम्हारे साथ.” आलिया ने कहा

“पहले माहोल देख लूँ वहा का. फिर तुम्हे भी ले चलूँगा. चाचा चाची से तो तुम्हे मिलवाना ही है.” राज ने कहा.

राज आलिया को होटेल में छोड कर चाचा जी के घर की तरफ चल दिया. पैदल ही चल दिया वो. बस कोई १५ मिनिट की वॉकिंग डिस्टेन्स पर था उसके चाचा जी का घर. दिल में बहुत सारे सवाल घूम रहे थे. चेहरे पर शिकन सॉफ दीखाई दे रही थी. आलिया से ये सब छुपा रखा था उसने, क्योंकि उसे परेशान नही करना चाहता था. मगर अब उसके दिलो-दिमाग़ को चिंता और परेशानी ने घेर लिया था. उसे खुद नही पता था कि कैसे हॅंडल करना है सब कुछ, हां बस वो इतना जानता था की उसे हर हाल में इस समस्या का समाधान करना है.

राज घर पहुँचा और बेल बजाई तो उसकी चाची ने दरवाजा खोला.

“नमस्ते चाची जी” राज ने पाँव छूते हुवे कहा.

“नमस्ते तो ठीक…तुम ये बताओ समझते क्या हो तुम खुद को. बिना बताए भाग गये थे यहा से…कान खींचने पड़ेंगे तुम्हारे लगता है?” चाची बहुत गुस्से में दिख रही थी.

“चाची जी मुझे माफ़ कर दीजिए…मेरी कुछ मजबूरी थी.” राज गिड़गिदाया.

“आओ अंदर..देखती हूँ क्या मजबूरी थी तुम्हारी.” चाची ने कहा.

राज अंदर आ गया चुपचाप. चाची ने कुण्डी लगा कर आवाज़ दी, “अजी सुनते हो राज आ गया है.”

उस वक्त अवनी कमरे में सोई हुई थी. चाची की आवाज़ सुनते ही उठ गयी, “आप आ गये…”

अवनी के साथ आरजु भी थी कमरे में. अवनी ने आरजु को कंधे पर हाथ रख कर हिलाया, “उठो तुम्हारे भैया आ गये हैं.”

“राज भैया आ गये?” आरजु ने आँखे मलते हुवे कहा.

“हां आ गये हैं. जाओ मिल लो जाकर?” अवनी ने कहा.

“अरे सबसे पहले आपको मिलना चाहिए…चलिए अभी मिलवाती हूँ आप दोनो को. बल्कि आप यही रुकिये मैं भैया को खींच कर लाती हूँ यही.” आरजु ने कहा.

“नही रूको मिल लेंगे…इतनी जल्दी क्या है?”

“कैसी बाते करती हो भाभी…ज़्यादा नाटक मत किया करो.” आरजु कह कर कमरे से बाहर आ गयी.

राज चुपचाप चाचा चाची के साथ सोफे पर बैठा था. चाची डाँट पे डाँट पीलाए जा रही थी उसे, घर से चले जाने की बात को लेकर.

“मम्मी क्यों डाँट रही हो भैया को…आओ भैया भाभी इंतेज़ार कर रही है तुम्हारा.” आरजु ने कहा.

राज से कुछ भी कहे नही बना. उसके तो जैसे पैरो के नीचे से ज़मीन निकल गयी ये सुन कर.

“आरजु तुम जाओ. राज अभी आएगा थोड़ी देर में” रघुनाथ ने गंभीर आवाज़ में कहा.

“पापा बात क्या है…आप सब लोग गुमसूम क्यों हैं. भैया आपने मुझसे ठीक से बात भी नही की. सब ठीक तो है ना.”

“तुमसे कहा ना राज आ रहा है. जाओ यहा से.” रघुनाथ ने आरजु को डाँट दिया.

आरजु मूह लटका कर वहा से चली गयी.

आरजु के जाने के बाद चाची ने कहा, “बेटा क्या ये सच है कि तुम गोना नही करना चाहते. अवनी को छोड देना चाहते हो.”

“चाची जी मैने चाचा जी को सब बता दिया है.”

“हां इन्होने बताया है मुझे…मगर मैं तुमसे सुन-ना चाहती हूँ.”

“हां ये सच है. मैं ये बाल-विवाह नही निभा सकता. मैने कभी इस शादी को शादी नही माना.”

“मतलब हम सब बडो की कोई परवाह नही तुम्हे. तुम्हारे मम्मी, पापा जींदा होते तो पता नही क्या हाल होता उनका ये सब सुन कर. क्या तुम्हे अंदाज़ा भी है कि क्या ठुकराने जा रहे हो तुम. अरे हीरा है अवनी हीरा. लाखो में एक है वो.”

“मैं किसी और से प्यार करता हूँ और उसे अपनी पत्नी मानता हूँ. मैं ये गुड्डे-गुडियों का खेल नही निभा सकता.” राज ने कहा.

“ये सुनते ही चाचा और चाची की आँखे फटी रह गयी.”

“मुझे तो पहले से ही शक था इस बात का. बहुत बढ़िया बेटा.” चाचा ने कहा.

“कौन है वो करम जली जो हमारी अवनी का घर उजाड़ने पर तुली है.” चाची ने कहा.

चाची बहुत गुस्से में थी इसलिये राज ने चुप रहना ही सही समझा.

“मतलब की तुम्हारा फ़ैसला अटल है.” चाचा ने कहा.

“जी हां…मैं शादी करूँगा तो अपनी मर्ज़ी से और वो भी उस से जिसे मैं बहुत प्यार करता हूँ.इस बाल-विवाह को मैं नही मानता.” राज ने कहा.

“जाओ बेटा ये सब खुद ही कहो अवनी से जाकर. हम ये सब नही बोल पाएँगे.” रघुनाथ ने कहा और आरजु को आवाज़ दी ज़ोर से “आरजु!”

आरजु मूह लटकाए वापिस आई वहा और बोली, “जी पापा.”

“राज को ले जाओ अवनी के पास. ये कुछ ज़रूरी बात करना चाहता है उस से.”

“आओ भैया…” आरजु ने कहा.

राज चुपचाप उठ कर चल दिया वहा से.

“भैया कौन सी ज़रूरी बात है?” आरजु ने पूछा.

“छोड वो सब…तेरी पढ़ाई कैसी चल रही है.”

“अच्छी चल रही है. लीजिए आ गया भाभी का कमरा. आप दोनो बात करो मैं मम्मी, पापा के पास बैठती हूँ.” आरजु कह कर चली गयी.
 
राज कमरे में दबे पाँव दाखिल हुवा. उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था. अवनी बेड के पास खड़ी थी नज़रे झुकाए. अंजाने में ही राज की निगाह अवनी के चेहरे पर पड़ी. वो देखता ही रह गया उसे. एक आकर्षक नयन नक्स पाया था अवनी ने. चेहरे पर प्यारी सी मासूमियत थी.

राज ने उसके कदमो की तरफ देखा और बोला, “कैसी हैं आप.”

“मैं ठीक हूँ. आप कैसे हैं.” अवनी भी राज के कदमो को ही देख रही थी.

“क्या खेल खेला ना किस्मत ने. कितनी जल्दी हम दोनो की शादी हो गयी थी. उस उमर में हमें शादी का मतलब भी नही पता था. बहुत रो रही थी आप, याद है मुझे. पता नही क्या ज़रूरत थी इतनी जल्दी ये सब करने की.” राज ने अपनी बात कहने के लिए भूमिका तैयार की.

“हां हमारे अपनो ने बचपन में ही हमें इस रिश्ते में बाँध दिया.”

“आप ही बतायें बाल-विवाह कहा तक जायज़ है. गैर क़ानूनी है ये. फिर भी हम लोग नही मानते.”

“बाल-विवाह बिल्कुल जायज़ नही है.”

“तो आप मानती हैं कि हम लोगो के साथ ग़लत हुवा. देखिए अब हम बड़े हो चुके हैं. और हमें अपना जीवन साथी चुन-ने का हक़ होना चाहिए. मैं अब घुमा फिरा कर नही कहूँगा. मैं ये बाल-विवाह नही निभा सकता हूँ. आप भी इस बंधन से खुद को आज़ाद समझिए.”

ये सुनते ही अवनी के पैरो के नीचे से जैसे ज़मीन निकल गयी. बहुत कुछ कहना चाहती थी वो मगर कुछ नही बोल पाई. होन्ट जैसे सिल गये थे उसके. राज का दिल भी बहुत ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था. वो फ़ौरन वहा से भाग जाना चाहता था.

“मुझसे कोई भूल हुई हो तो मुझे माफ़ कर दीजिएगा प्लीज़. चलता हूँ मैं.” राज मूड कर जाने लगा

“सुनिए…” अवनी ने हिम्मत करके आवाज़ दी.

राज वापिस मुड़ा और बोला, “कहिए…मैं आपकी बात सुने बिना नही जाऊंगा यहा से.”

“बेशक बाल-विवाह ग़लत है और रहेगा. उस वक्त मैने भी वो खेल एंजाय नही किया. मगर मेरी परवरिश कुछ इस तरह की गयी कि आपको एक देवता बना कर मेरे दिल में बैठा दिया गया. बचपन से यही सिखाया गया कि पति परमेश्वर होता है इसलिये राज तुम्हारा परमेश्वर है. मैं सब कुछ स्वीकार करती गयी खुले मन से. कब आपसे प्यार हो गया…पता ही नही चला. और इतना प्यार कर बैठी आपसे कि अपने पेरेंट्स से लड़ बैठी आपके लिए. वो नही चाहते थे कि मैं आपके लिए मुंबई आउ. मगर मैं अपनी ज़िद पर अडी रही और उन्हे मुझे भेजना पड़ा आपके पास. मुझे एक मौका तो दे दीजिए प्लीज़. बाल-विवाह तो ग़लत है मगर मेरा प्यार ग़लत नही है. शादी चाहे जैसे भी हुई हो मगर मैं आपको तन,मन धन से अपना पति मानती हूँ.”

“ये सब कह कर तो गुनहगार बना दिया आपने मुझे. काश ये धरती फट जाए और मैं इसमें समा जाऊ.” राज सर पकड़ कर बैठ गया बिस्तर पर.

अवनी तुरंत कदमो में बैठ गयी राज के और बोली, “नही प्लीज़ ऐसा मत बोलिए. मैने कुछ ग़लत कहा तो उसके लिए माफी चाहती हूँ आपसे पर आप अपने लिए ये सब ना बोलिए.”

“अवनी उठ जाओ प्लीज़. मेरे कदमो में बैठ कर और गुनहगार मत बनाओ मुझे. सारी ग़लती मेरी ही है. काश इस शादी को मैं भी आपकी तरह शादी स्वीकार कर लेता तो आज ये दिन नही देखना पड़ता.

बहुत सुंदर हो आप. उस से भी ज़्यादा सुंदर आपका व्यक्तित्व है. कोई भी इंसान आपके जैसे जीवन साथी को पाकर खुद को धन्य महसूस करेगा. मगर मैं आज ऐसी जगह खड़ा हूँ जहा मैं चाह कर भी आपको स्वीकार नही कर सकता.”

“ऐसा क्यों है क्या बता सकते हैं मुझे.?” अवनी ने पूछा.

“जिस तरह आपने मुझे अपने दिल में बैठा रखा है उसी तरह मैने अपने दिल में आलिया को बैठा रखा है…और मैं उसके बिना जी नही सकता. वो मेरी जींदगी है. अब तुम ही बताओ मैं क्या करूँ. तुम्हार साथ बचपन में शादी हुई थी. आलिया के साथ प्यार ने शादी करवा दी मेरी. खून से माँग भरी है मैने उसकी. तुम मुझे अपना पति मानती हो. और मैं आलिया को पत्नी मानता हूँ. तुम ही बताओ अब क्या किया जाए.”

तभी अचानक राज की चाची दाखिल हुई कमरे में. चाची को देख कर अवनी फ़ौरन राज के कदमो के पास से उठ कर खड़ी हो गयी.

“मैं बताती हूँ क्या करना है. चलो अभी वापिस गुजरात. मिलना चाहती हूँ मैं इस आलिया से. देखूं तो सही क्या बला है वो, जो कि किसी और का घर उजाड़ने पर तुली है.”

“उसकी कोई ग़लती नही है चाची. सारी ग़लती मेरी है. और वो मेरे साथ ही आई है मुंबई. ”

“तो लेकर आओ उसे. या फिर हम चलते हैं होटेल में.”

“उसका इस सब से कोई लेना देना नही है. उसकी कोई ग़लती नही है.”

“बेटा जिसे तुम पत्नी मानते हो और जिस से शादी करना चाहते हो क्या उसे हमसे नही मिलवाओगे.?”

अवनी एक तरफ खड़ी चुपचाप सब सुन रही थी.

“मैं भी चाहता हूँ कि आप सब मिलें उस से. और हमारे प्यार को स्वीकार करें.” राज ने कहा.

“तो जाओ बेटा उसे अभी इसी वक्त ले आओ. हम मिलना चाहते हैं उस से.” चाची ने कहा.

“हां भैया ले आओ उसे. देखें तो सही कौन है वो जो हमारी प्यारी भाभी की जगह लेना चाहती है.” आरजु ने कहा.

“बाद में मिल लेना शांति से अभी नही.” राज ने कहा.

“ले आईए उन्हे. मैं भी उनसे मिलना चाहती हूँ.” अवनी ने कहा.

राज ने अवनी की आँखो में देखा और बोला, “क्या आप सच में मिलना चाहती हैं उस से.”

“हां..जिस से आप इतना प्यार करते हैं, उस से मिलना सौभाग्य होगा मेरे लिए.” अवनी ने कहा.

“ठीक है मैं अभी उसे लेकर आता हूँ. आप सभी को मेरी आलिया से मिल कर खुशी होगी.” राज उठ कर चल दिया.

राज के जाने के बाद चाची ने अवनी को गले से लगा लिया और बोली, “बेटा तुम चिंता मत करो. आने दो इस करम जली को. अकल ठिकाने लगाऊंगी मैं उसकी. हमारे सीधे साधे राज को फँसा लिया. सोचा होगा अच्छा पैसा है, फॅक्टरी है और क्या चाहिए. तू फिकर मत कर राज तेरा ही रहेगा. नाम से तो कोई अधर्मी लगती है. अधर्मी लड़की को तो अब बनाएँगे हम अपने घर की बहू.”

“पर चाची क्या फायदा इस सब का. वो उसे प्यार करते हैं मुझे नही”

“पागल मत बनो तुम पत्नी हो राज की और तुम्हे अपने हक़ के लिए लड़ना होगा. कयी बार अपना हक़ लड़ कर ही मिलता है.” चाची ने कहा.

“हां भाभी मम्मी ठीक कह रही हैं. हमें पता है कि भैया सिर्फ़ आपके साथ खुश रहेंगे. ये लड़की ज़रूर कोई चालबाज़ है जो कि खाता पीता घर देख कर एक शादी शुदा लड़के के पीछे पड़ गयी और अपने प्रेम जाल में फँसा लिया. देखो बेशरमी की भी हद कर दी..भैया के साथ यहा चली आई. ज़रूर उसके परिवार वाले भी शामिल होंगे उसके साथ.” आरजु ने कहा.

“मुझे कुछ समझ नही आ रहा…पता नही ऐसा मेरे साथ ही क्यों हो रहा है.”

“सब ठीक हो जाएगा बस हिम्मत मत हारना.” चाची ने कहा.

आलिया बेसब्री से इंतेज़ार कर रही थी राज के लौटने का. बार बार यही दुवा कर रही थी कि सब ठीक ठाक रहे. जब रूम की बेल बजी तो तुरंत भाग कर दरवाजा खोला उसने.

“राज तुम आ गये…सब ठीक है ना.” आलिया ने एक साँस में पूछा.

“हां लग तो सब ठीक ही रहा है. चलो तुम्हे लेने आया हूँ मैं. सब तुमसे मिलना चाहते हैं.” राज ने कहा.

आलिया थोड़ा परेशान सा हो गयी ये सुन कर. “मुझसे मिलना चाहते हैं…पर क्यों?”

“अरे मम्मी पापा के बाद अब चाचा, चाची ही मेरे सब कुछ हैं. उनसे तो मिलना ही पड़ेगा ना. हां थोड़ा गुस्से में हैं सभी. पर थोड़ा गुस्सा तो सहना ही पड़ेगा हमें. दिल के अच्छे हैं वैसे मेरे चाचा चाची. मुझे उम्मीद है कि वो हमारे प्यार को समझेंगे.” राज ने कहा.

“राज वो तो ठीक है…पर मुझे डर सा लग रहा है.”

“अरे डरने की क्या बात है, मैं हूँ ना. मेरे होते हुवे काहे का डर.”

“ठीक है मैं थोड़ा बाल-वाल संवार लू. तुम ५ मिनिट इंतजार करो.” आलिया ने कहा.

५ मिनिट बाद आलिया राज के साथ उसकी चाची के घर की तरफ जा रही थी.

“तुमने क्या बताया मेरे बारे में उन्हे.” आलिया ने कहा.
 
“कुछ नही बस इतना ही के तुम्हे बहुत प्यार करता हूँ. ज़्यादा कुछ बताने का वक्त ही नही मिला. चाचा चाची गुस्से में हैं. हो सकता है कुछ उल्टा सीधा बोल दे. तुम शांत रहना. चुपचाप सब सुन लेना. ज़्यादा देर गुस्सा नही रहेंगे वो.” राज ने कहा.

“वैसे मुझे गुस्सा आ जाता है बहुत जल्दी अगर कोई मुझे कुछ कहे तो. पर तुम्हारे लिए और इस प्यार के लिए सब सह लूँगी.” आलिया ने कहा.

“द्याट’स लाइक माइ जरीना. देखो जान वक्त हमें बहुत बुरी तरह आजमा रहा हैं. लेकिन ये वक्त बेकार नही जाएगा. कहते हैं की शांत समुंदर में नाव चला कर कोई अच्छा नाविक नही बन सकता. अच्छा नाविक बन-ने के लिए अशांत समुंदर की ज़रूरत होती है. जोखिम रहता है मानता हूँ मगर जोखिम के बिना इंसान जीना नही सीख पाएगा. भगवान किस्मत वालो को ही आजमाते हैं."

“वो तो ठीक है…इतना भी ना आजमाया जाए हमें कि टूट कर बिखर जायें हम.”

बाते करते-करते जल्दी ही पहुँच गये दोनो घर. चाची ने ही दरवाजा खोला इस बार भी.

“ह्म्म…तो तुम हो जरीना. सुंदर हो. बल्कि बहुत सुंदर हो. लगता है अपने चेहरे को ही हथियार बनाया है तुमने हमारे राज को जाल में फँसाने के लिए.” चाची ने कटाक्ष किया.

आलिया ने राज की तरफ देखा. राज ने आलिया को पाँव छूने का इशारा किया.

आलिया पाँव छूने के लिए झुकी ही थी कि चाची दो कदम पीछे हट गयी और बोली, “बस-बस नाटक मत करो … आओ अंदर.”

आलिया अंदर आ गयी चुपचाप राज के साथ. राज के चाचा सोफे पर बैठे थे.

“आलिया ये हैं मेरे चाचा जी” राज ने चाचा की तरफ हाथ से इशारा करके कहा.

आलिया उनके पाँव छूने के लिए उनकी तरफ बढ़ी पर उन्होने उसे हाथ का इशारा करके पीछे ही रोक दिया, “इसकी कोई ज़रूरत नही है.”

“चाचा जी ऐसा क्यों कह रहे हैं?” राज ने मायूसी भरे भाव में कहा.

“राज तुम अपने चाचा जी के पास बैठो हमे आलिया से अकेले में कुछ बात करनी है.” चाची ने कहा.

“चाची जी जो बात करनी है मेरे सामने कीजिए. ये कही नही जाएगी. मैं यहा आलिया को आप लोगो से मिलवाने लाया हूँ पर ये देख कर दुख हो रहा है कि आप लोग अपमान कर रहे हैं मेरे प्यार का. मेरे सामने ही इतना कुछ हो रहा है तो अकेले में तो सितम ढा देंगे आप लोग. चलो आलिया वापिस चलते हैं. किसी से कोई बात करने की ज़रूरत नही है.” राज ने कहा.

“भैया हमें बात तो करने दीजिए. हम कोई राक्षस नही हैं जो कि खा जाएँगे इन्हे. यू गुस्सा होने से बात नही बनेगी. किसी समस्या का हाल बात चीत से ही निकलता है.” आरजु ने कहा.

“तो बात चीत मेरे सामने कीजिए ना. अकेले में क्या कोई सीक्रेट बात करनी है.” राज ने कहा.

“भैया हम सब आपका भला चाहते हैं. प्लीज़ हमें बात करने दीजिए इनसे. और इनका और अवनी का मिलना ज़रूरी है. ये दोनो मिल कर इस बात का हल निकाले तो ज़्यादा अच्छा रहेगा.” आरजु ने कहा.

“हां राज आओ तुम यहा बैठो मेरे पास. ये लोग इस से कुछ बात करना चाहते हैं तो तुम्हे क्या दिक्कत है. ऐसे बच्चो की तरह बिहेव नही किया करते.” रघुनाथ ने कहा.

“ठीक है कर लो बात चीत. मगर मेरे प्यार का अपमान मत करना. मेरी जींदगी है ये और अगर इसकी आँखो में आँसू आए तो मेरा दम निकल जाएगा.” राज ने कहा.

आलिया के चेहरे पर अजीब कसम्कश थी. राज उसकी ओर देख कर उसकी हालत समझ गया और उसके चेहरे पर हाथ रख कर बोला, “सुन लो क्या कहते हैं ये लोग. हम हर हाल में एक हैं और एक रहेंगे.किसी बात की चिंता मत करना.”

जरीना, आरजु और चाची के साथ उस कमरे में आ गयी जिस मे अवनी थी. अवनी बिस्तर पर टांगे सिकोड कर घुटनो पर सर रख कर बैठी थी जब वो लोग अंदर आए.

“ये है अवनी, मेरी प्यारी भाभी. भाभी ये है जरीना.” आरजु ने दोनो को इंट्रोड्यूस करवाया.

आलिया और अवनी ने एक दूसरे को देखा मगर कुछ बोले नही. आरजु ने एक कुर्सी दे दी आलिया को बैठने के लिए.

“थॅंक यू.” आलिया ने कुर्सी पर बैठते हुवे कहा. आरजु भी आलिया के साथ ही एक दूसरी कुर्सी खींच कर बैठ गयी. चाची बिस्तर पर टाँग लटका कर बैठ गयी.

“क्या तुम अधर्मी हो?” चाची ने पूछा.

“जी हां” आलिया ने जवाब दिया.

“एक तो खून ख़राबा मचा रखा है तुम लोगो ने देश में. कभी भी कही भी बॉम्ब लगा देते हो. अब हमारे रिश्तो में भी दरार डालने लग गये तुम लोग. चाहती क्या हो तुम.” चाची ने कटाक्ष किया.

आलिया को बहुत गुस्सा आया ये सुन कर. चेहरा गुस्से से लाल हो गया उसका. गुस्सा स्वाभाविक भी था क्योंकि उसके अस्तित्व पर चोट की गयी थी. मगर वो चुप रही. कुछ नही कहा. वादा जो किया था राज से सब कुछ शांति से सुन ने का. प्यार में क्या कुछ नही सहना पड़ता.

“कब से जानती हो उनको” अवनी ने पूछा.

“ कॉलेज में थे साथ और हम दोनो के घर भी साथ साथ थे.” आलिया ने कहा.

“तो क्या तुम्हे नही पता था कि वो शादी शुदा हैं.” अवनी ने पूछा.

“ये पता होता तो मैं आज यहा नही बैठी होती और ना ही आपको ये सवाल करने की ज़रूरत पड़ती.” आलिया ने अवनी की आँखो में देखते हुवे कहा.

“झूठ कह रही हो तुम. भैया की पड़ोसी हो कर तुम उनकी शादी के बारे में नही जानती ऐसा कैसे हो सकता है” आरजु ने कहा.

“हमारे परिवारों में बनती नही थी. कभी एक दूसरे के बारे में जान-ने का मौका ही नही मिला.” आलिया ने कहा.

“फिर ये प्यार का नाटक कैसे हो गया तुम दोनो के बीच. जब ऐसा था तो” चाची ने कहा.

“प्यार की शायद कोई वजह नही होती और जहा वजह ढुंडी जाती है वहा प्यार नही होता.” आलिया ने जवाब दिया.

“वजह तो बहुत बढ़िया है तुम्हारे पास प्यार की. राज के पेरेंट्स तो मारे गये ट्रेन हादसे में. अब उसका घर और कारोबार सब कुछ तुम्हारे हाथ में आ सकता है. इन बातों के लिए इस बात को आसानी से इग्नोर किया जा सकता है की राज पहले से शादी शुदा है.” चाची ने कहा.

“क्या हम यहा इस समस्या का हल करने के लिए बैठे हैं या फिर ‘मूड स्लिंगिंग’ के लिए.” आलिया ने कहा.

“तुम्हारे हिसाब से क्या हल है इस समस्या का” अवनी ने पूछा.

“मुझे नही पता…बस इतना जानती हूँ कि राज मेरी जींदगी है.”

“तुम्हे शरम नही आती मेरे सामने ऐसी बाते करते हुवे. मेरे पति को अपनी जींदगी बताती हो. क्या ऐसी बाते करके हल धुंडोगी तुम इस समस्या का.” अवनी भड़क गयी.

“हल तुम बता दो अवनी… मुझे सच में कुछ नही पता.” आलिया ने कहा.

“हल सिर्फ़ एक ही है. मेरे पति का पीछा छोड दो. तुम्हे पहले नही पता था उनकी शादी के बारे में मान लेती हूँ मैं. मगर अब तो पता है ना. सब कुछ जान ने के बाद भी तुम क्यों हमारे बीच आना चाहती हो.” अवनी ने कहा.

“क्योंकि जीना नही छोड सकती मैं. राज मेरी जींदगी है.” आलिया ने जवाब दिया.

“बेशर्मी की हद है ये तो. क्या यही संसकार दिए हैं तुम्हारे पेरेंट्स ने तुम्हे. और कैसे पेरेंट्स हैं तुम्हारे जिन्होने तुम्हे भैया के साथ अकेले मुंबई भेज दिया. वो सब भी लगता है इस खेल में शामिल हैं.” आरजु ने कहा.

आलिया ने आरजु की तरफ देखा. कुछ कहना चाहती थी मगर इतना भावुक हो गयी थी अपने अम्मी अब्बा की बात पर कि आँखे टपक गयी उसकी, “अब क्या कहूँ तुम्हे.” आलिया बस इतना ही बोल पाई.

“सच कड़वा होता है ना जरीना…वरना तुम रोने की बजाए आरजु की बात का जवाब देती.” अवनी ने कहा.

“हां बताओ कैसे भेज दिया तुम्हारे घर वालो ने तुम्हे राज के साथ अकेले. ये तो वही लोग कर सकते हैं जिनकी कोई इज़्ज़त नही होती. दफ़ा हो जाओ हमारे राज की जींदगी से वरना वो हाल करेंगे तुम्हारा की याद रखोगी जींदगी भर. हमारे होते हुवे अवनी का हक़ कोई नही छीन सकता.”

“बस!.. बंद करो तुम सब ये बकवास.” आलिया ज़ोर से चिल्लाई. आलिया की आवाज़ बाहर रघुनाथ और राज को भी सुनाई दी.
 
“क्या जानते हो तुम लोग मेरे बारे में. पंचायत लगा कर बैठ गये हो सिर्फ़ मुझे नीचा दिखाने के लिए. मेरे पेरेंट्स और मेरी बहन दंगो में मारे गये थे. अकेली हो गयी थी मैं…बिखर चुकी थी. राज ने संभाला मुझे और जीने की उम्मीद दी. कब प्यार हो गया मुझे राज से पता ही नही चला. मगर छोडो अब ये सब. रखो अपने राज को अपने पास. मुझे नही चाहिए कुछ भी. आप सब खुश रहें.” आलिया उठ कर चल दी वहा से. मगर राज को दरवाजे पर खड़ा देख कर रुक गयी और रोने लगी.

“तो आप लोगो ने रुला ही दिया मेरी…..” राज अपना सेंटेन्स पूरा नही कर पाया क्योंकि आलिया ने थप्पड़ जड़ दिया था उसके गाल पर. थप्पड़ इतनी ज़ोर का था कि सभी को उसकी गूँज सुनाई दी.

“क्यों नही बताया मुझे कि तुम शादी शुदा हो. बता देते एक बार तो कभी ये प्यार ना करती मैं.” आलिया ने बहुत भावुक अंदाज में कहा.

राज नज़रे झुकाए खड़ा रहा. कुछ भी नही कह पाया आलिया को.

“संभालो अपनी बीवी को राज. मेरे पीछे मत आना आज के बाद. अगर आए तुम तो मेरा मरा मूह देखोगे. नही चाहिए मुझे तुम्हारा प्यार.” आलिया निकल गयी कमरे से बाहर.

राज इतना शॉक्ड था कि समझ नही पाया कि क्या करे. वही मूर्ति की तरह खड़ा रहा. राज की तरह अवनी, आरजु और चाची भी शॉक्ड थे.

राज चलने ही लगा था आलिया के पीछे की चाची ने उसका हाथ थाम लिया. “जो हुवा अच्छा हुवा राज. यही हल था इस दुविधा का. जाने दो उसे.”

“मैं मर जाऊंगा चाची जी. जी नही पाऊंगा उसके बिना. प्लीज़ छोड़िए मुझे.” राज ने कहा.

“ऐसा क्या जादू कर दिया है उसने तुम पर की तुम ये सब बोल रहे हो.”

“चाची जी मैं बाद में बात करूँगा आकर. पहले उसे रोक लूँ. अगर वो कही खो गयी तो मैं कही का नही रहूँगा.” राज ने कहा और बाहर की तरफ भागा.

राज भाग कर घर से बाहर आया मगर उसे आलिया कही दीखाई नही दी. राज सीधा होटेल पहुँचा. मगर आलिया वहा भी नही थी.

“कहा चली गयी तुम जरीना…क्या फिर से हम जुदा हो गये. क्या पहली बार की लड़ाई से हमने कुछ नही सीखा. तुम ऐसे छोड कर नही जा सकती मुझे.” राज ने कहा.

होटेल से निकल कर राज ने आलिया को हर तरफ देखा. कोलाबा का चप्पा चप्पा छान मारा मगर वो उसे कही नही मिली. थक हार कर वो वापिस चाचा के घर आ गया ये सोच कर कि क्या पता वो वापिस आ गयी हो गुस्सा थूक कर. ऐसा सोचना था तो अजीब मगर प्यार हर उम्मीद का दामन थाम लेता है.

जब राज घर आया तो अवनी वहा से जाने की तैयारी कर रही थी. राज को देख कर तुरंत आई उसके पास, “कहा है जरीना, वो ठीक तो है ना.”

“कुछ कह नही सकता. मुझे वो कही नही मिली. कोलाबा का चप्पा चप्पा छान मारा मगर उसका कही पता नही चला. होटेल भी नही पहुँची वो.”

“हे भगवान सब मेरी वजह से हुवा है. मैने भी बहुत कुछ बोल दिया उसे. आप दोनो के प्यार की पूरी कहानी नही जानती मगर इतना ज़रूर समझ गयी हूँ कि आप दोनो का प्यार इतना अनमोल है कि उसमे किसी छेड़ छाड़ की गुंजाईश नही है. मैं पापी बन गयी हूँ आप दोनो के प्यार में तूफान खड़ा करने के कारण. आप दोनो मुझे माफ़ कर दीजिएगा. मैं जा रही हूँ वापिस. अब इस बाल-विवाह नामक कृति से मैं भी आज़ाद होना चाहती हूँ. कोई शिकवा नही है आप दोनो से. बल्कि खुशी है कि इतना अनमोल प्यार देखने को मिला मुझे. आपको आलिया मिले तो मेरी तरफ से माफी माँग लेना उस से.मैने बहुत दिल दुखाया है उसका.”

“कैसे जा रही हो दिल्ली…टिकट बुक करवा रखी है क्या?” राज ने कहा.

“नही टिकट तो मिल ही जाएगी एयर पोर्ट से. दिल्ली मुंबई की ढेर सारी फ्लाइट्स होती हैं.”

“हां वो तो है. आपको छोडने चलता मगर आलिया के लिए परेशान हूँ. मुझे माफ़ कर दीजिएगा आप.मुझे यकीन है की बहुत अच्छा लाइफ पार्ट्नर मिलेगा आपको.”

“आप से अच्छा नही मिल सकता जानती हूँ. पर आपकी अभिलाषा नही करूँगी अब क्योंकि वैसा करना पाप होगा. आप आलिया के हैं और आलिया आप की है. दुख बहुत है आपको खोने का मगर आप दोनो का प्यार देख कर ये दुख खुशी में बदलता जा रहा है.

मुझे यकीन है कि आलिया जल्द मिल जाएगी आपको.”

“हां वो गुस्से में बैठी होगी कही छुप कर. मैं उसे ढूंड ही लूँगा. वापिस होटेल जा कर देखता हूँ, हो सकता है वो आ गयी हो.”

राज होटेल पहुँचा तो उसकी खुशी का ठीकाना नही रहा. रीसेपशन से उसे पता चल गया की आलिया कमरे में है.

राज खुश था कि आलिया कमरे में है. तुरंत भाग कर आया वो कमरे पर. मगर आलिया का थप्पड़ और उसकी कही बातें बार-बार उसके कानो में गूँज रही थी. राज ने रूम की बेल बजाई. आलिया उस वक्त बिस्तर पर पड़ी थी पेट के बल. आँखो से आँसुओं की नदिया बह रही थी. बेल को अनसुना कर दिया आलिया ने और ज्यों की त्यों पड़ी रही बिस्तर पर. राज बार-बार बेल बजाता रहा मगर आलिया ने दरवाजा नही खोला.

“आलिया दरवाजा खोलो…मैं बहुत परेशान हूँ. मुझे और परेशान मत करो. प्लीज़ दरवाजा खोलो…मेरा दिल बैठा जा रहा है…तुम ठीक तो हो ना…मुझे चिंता हो रही है तुम्हारी.” राज ने कहा.

आलिया धीरे से उठी बिस्तर से और लड़खड़ाते कदमो से दरवाजे की तरफ बढ़ी और दरवाजा खोला.

“क्यों आए हो यहा…अपनी बीवी के पास नही रह सकते क्या…कहा था ना मैने की मेरे पीछे आए तो मेरा मरा मूह देखोगे.?”

“आलिया प्लीज़…ऐसी बाते मत करो. तुम्हारे बिना नही जी सकता ये तुम अच्छे से जानती हो.”

“पर अब तुम्हे जीना होगा. तुम कहते हो कि तुम वो शादी नही निभा सकते और मैं कहती हूँ कि मैं ये प्यार नही निभा सकती. प्लीज़ चले जाओ यहा से. नही चाहिए तुम्हारा प्यार मुझे.”

“ये क्या पागल पन है जरीना…और…और ये हाथ में खून कैसा है.” राज की नज़र आलिया के दायें हाथ से टपकते खून पर गयी.

“सज़ा दी है खुद को तुम्हे थप्पड़ मारने की.” आलिया ने सुबक्ते हुवे कहा.

“तुम कौन होती हो खुद को यू सज़ा देने वाली. दीखाओ मुझे…ऊफफ्फ कितना खून बह रहा है.” राज ने आलिया का हाथ पकड़ने की कोशिश की.

“खबरदार जो मुझे छुवा तो…कोई हक़ नही है तुम्हारा मेरे उपर अब.”

“अगर कोई हक़ नही है तो फिर क्यों सज़ा दी तुमने खुद को. पागल मत बनो दीखाओ मुझे…कितना खून बह रहा है.”

“आइ कॅन टेक केर ऑफ माइसेल्फ मिस्टर राज. तुम अपनी बीवी को सम्भालो जाकर और अपने परिवार में खुश रहो.”

“ये क्या बकवास कर रही हो. अब मैं थप्पड़ मारूँगा तुम्हे अगर यू ही बकवास करती रही तो.”

“तो मारो ना रोका किसने है. मुझे जान से मार डालो. तुमने ही बचाया था मुझे एक दिन मरने से, तुम्हे हक़ है मुझे मारने का.”

“क्या सिर्फ़ इसलिये हक़ है क्योंकि तुम्हे मैने बचाया था. क्या प्यार का हक़ नही है.”

“वो प्यार अब बिखर चुका है राज. वो हक़ नही दूँगी तुम्हे मैं.”

“ग्रेट…तुम सच में पागल हो गयी हो. अरे अब सब कुछ ठीक हो चुका है. अवनी समझ गयी है हमारे प्यार को. वो हमारे बीच से हट गयी है.”

“मुझे ये मंजूर नही है राज.”

“क्यों मंजूर नही है तुम्हे क्या जान सकता हूँ.”

“तुमने मुझसे इतनी बड़ी बात छुपाई और अब पूछ रहे हो कि क्यों मंजूर नही है. क्या ग़लती है अवनी की?.... और क्या ग़लती है मेरी? … सब तुम्हारी ग़लती है. मुझसे इतनी बड़ी बात ना छिपाते तो ये दिन नही देखना पड़ता. मेरे चरित्र को छलनी छलनी कर दिया गया आज. कभी मुझे मेरे मज़हब के कारण जलील किया गया तो कभी मुझे लालची लड़की की संगया दी गयी जो की तुम्हारी दौलत के पीछे पड़ी है. चलो ये सब भी सह लिया. मगर मेरे अम्मी, अब्बा का क्या कसूर था. बिना सोचे समझे उन्हे भी भला बुरा कहा गया. बहुत गहरी चोट लगी है दिल पे मेरे आज…जिनके घाव कभी नही भर पाएँगे. काश उन दंगो में अपने अम्मी, अब्बा और फातिमा के साथ मैं भी मर जाती तो ये दिन तो नही देखना पड़ता.”

“जरीना!” राज चिल्लाया और थप्पड़ जड़ दिया आलिया के गाल पर.

“तुम नही जानते राज क्या बीती है मेरे दिल पर आज. तुम मेरी जगह होते तो समझते. अवनी का हक़ पहले है तुम पर. वो पहले आई थी तुम्हारी जींदगी में.”

“क्या नही समझा तुम्हारे बारे में जान जो ये सब बोल रही हो. तुम्हारे दिल में उठी हर हलचल मेरे दिलो दिमाग़ में तूफान मचा देती है. तुम ना भी कहो तब भी समझ सकता हूँ तुम्हारे दर्द को…क्योंकि हम जुड़ चुके हैं एक दूसरे से. जो चोट तुम्हारे दिल पर लगी है आज वही चोट मेरे दिल पर भी लगी है. खुद को मुझसे जुदा करके मत देखो. हम दो जिस्म एक जान है जरीना. तुम मुझसे दूर गयी तो मर जाऊंगा. मान लो की अवनी को अपना भी लूँ तो भी कभी उसे खुश नही रख पाऊंगा. घुट-घुट कर जीएगी वो मेरे साथ. क्योंकि मेरी आत्मा तुम हो जान. मेरे दिल के मंदिर में तुम्हे भगवान बना कर बैठा चुका हूँ. उस मंदिर में किसी और की तस्वीर नही लगा पाऊंगा. अवनी और मेरा रिश्ता इस समाज ने बनाया था पर तुम्हारा और मेरा रिश्ता भगवान ने बनाया है. भगवान के फ़ैसले का ही आदर करना होगा हमें. और अवनी अब समझ गयी है. उस से मेरी बात हो गयी है. अब कोई रुकावट नही है हमारी शादी में.”

“उसकी आँखो में बेईंतेहा प्यार देखा है मैने तुम्हारे लिए. अभी हम किसी बंधन में नही बँधे हैं. तुम आराम से उसके साथ अपनी जींदगी की शुरूवात कर सकते हो.” आलिया ने कहा.

“मेरी आँखो में देख कर कहना ज़रा ये बात.” राज ने कहा.
 
“राज तुम कुछ भी कहो…पर मैं ये प्यार नही निभा सकती. किसी के पति को छीन-ने का इल्ज़ाम नही लेना चाहती अपने सर पर. ना ही ये इल्ज़ाम लेना चाहतीं हू की किसी लालच के कारण पड़ी हूँ मैं पीछे तुम्हारे.”

“बंद करो ये बकवास तुम.”

“ये बकवास नही है. अपने दिल पर पत्थर रख कर बोल रही हूँ.”

“मुझे खुद से दूर करने की बजाए एक खंजर गाढ दो मेरे सीने में तो ज़्यादा अच्छा होगा. अरे मैं कैसे निभा लूँ शादी अवनी से जबकि मेरे मन मंदिर में तुम हो. तुम मेरी जींदगी हो जान. नही जी सकता हूँ तुम्हारे बिना. मर जाऊंगा तुमसे अलग हो कर तो पता चलेगा तुम्हे की क्या हो तुम मेरे लिए.”

आलिया कदमो में बैठ गयी राज के और रोने लगी, “मैं भी कहा जी सकती हूँ तुम्हारे बिना. सोच कर भी डर लगता है.पता नही ये उलझन क्यों आ गयी हमारे जीवन. बड़ी मुश्किल से तो एक साल बाद मिले थे. अभी शांति से प्यार के मीठे दो बोल भी नही बोल पाए थे एक दूसरे को की ये सब हो गया. ऐसा क्यों हो रहा है हमारे साथ राज.”

“उठो पहले तुम. मेरे कदमो में अच्छी नही लगती तुम.” राज ने आलिया को कंधे से उठाते हुवे कहा.

“क्या हम अवनी के गुनहगार नही बन जाएँगे. उस से मिली नही थी तो कुछ फरक नही पड़ता था. उस से मिली तो उसकी आँखो में तुम्हारे लिए प्यार देखा. खुद को एक लुटेरा महसूस कर रही हूँ. जिसने अचानक तुम्हारी जींदगी में आकर तुमको अवनी से छीन लिया. मैं मर जाना चाहती थी आज. पर पता नही क्यों रुक गयी. क्योंकि मेरी जींदगी पर तुम्हारा हक़ है इसलिये शायद खुद को मार नही पाई.”

“जान अगर मैं भी अवनी को चाहता तो तुम्हारा सोचना सही होता. मैने कभी इतने सालो में अवनी को सोचा तक नही…चाहने की तो दूर की बात है. अब वो मुझसे प्यार कर बैठी तो इसमे मेरा तो कोई कसूर नही है. मैं तो उस से मिला तक नही. और एक बात बता दूं. मम्मी, पापा की मौत के बाद मैं भी बिखर चुका था. तुम मिली मुझे तो जीने का हौसला सा हुवा. हम दोनो की हालत एक जैसी थी जब हम मिले थे. हम मिले और दो कदम साथ चल कर हमें एक दूसरे से प्यार हो गया. जान हम किसी कीमत पर जुदा नही हो सकते. ये तुम भी जानती हो और मैं भी जानता हूँ.”

आलिया राज के सामने थी और राज की आँखो में देख रही थी. दोनो खो गये थे एक दूसरे में. कब आँसू टपक गये दोनो के एक साथ उन्हे पता ही नही चला.

“बोलो आलिया क्या जी पाओगी मेरे बिना?”

“ऐसा सोच भी नही सकती राज….मत पूछो ऐसी बात.” आलिया सुबक्ते हुवे बोली.

“फिर क्यों भाग आई थी मुझे छोड कर वहा से तुम.”

“मरने के लिए निकली थी वहा से…जीने के लिए नही.”

राज ने आगे बढ़ कर बाहों में जाकड़ लिया आलिया को, “ओह जान कभी छोड कर मत जाना मुझे चाहे कुछ हो जाए. नही जी सकता हूँ तुम्हारे बिना ये बात समझ लो अच्छे से आज.”

“मैं भी कहा जी सकती हूँ तुम्हारे बिना. क्या हाल हुवा मेरा तुम्हे थप्पड़ मार कर सिर्फ़ मैं ही जानती हूँ. मुझे माफ़ कर दो प्लीज़.”

“माफी ऐसे नही मिलेगी”

“क्या करना होगा मुझे?”

राज ने आलिया के चेहरे को अपने दोनो हाथो में थाम लिया. आलिया सिहर उठी. वो समझ गयी थी कि राज क्या करना चाहता है. उसने अपनी आँखे बंद कर ली. उसके होन्ट खुद-ब-खुद थिरकने लगे.

राज आलिया के थिरकते होंटो को देख कर मुस्कुरा उठा, “क्या चूम लूँ इन थिरकते लबों को.”

“मुझसे मत पूछो…कुछ भी नही कह पाउंगी.” आलिया आँखे बंद किए हुवे ही बोली.

राज ने बिना वक्त गवायें अपने होन्ट आलिया के थिरकते लबों पर टीका दिए. आलिया सर से लेकर पाँव तक सिहर उठी… ऐसा लग रहा था जैसे की राज ने सितार के तार छेड़ दिए हों.

दोनो के होन्ट दहक्ते अंगारों की तरह एक दूसरे से टकरा रहे थे. दोनो के प्यार का पहला चुंबन उनके प्यार की ही तरह अद्वित्य और सुंदर था. वक्त जैसे थम सा गया था. बहुत देर तक दीवानो की तरफ चूमते रहे दोनो.

दोनो को ऐसा चुंबन करने का पूरा अधिकार था. प्यार जो करते थे बेईंतेहा एक दूसरे को. होंटो की भाषा भी बहुत प्यारी होती है. इसे भी होन्ट ही बोलते हैं और होन्ट ही सुनते हैं. चुंबन के उन पलों में दोनो के होन्ट बहुत कुछ कह रहे थे एक दूसरे को. लबों की हर हरकत कुछ कहती थी जिसे दोनो अपनी आत्मा की गहराई तक महसूस कर रहे थे.

वैसे तो कुछ भी और कहना मुश्किल हो रहा है दोनो के इस पहले चुंबन के बारे में. मगर इतना ज़रूर कह सकता हूँ की प्यार ही प्यार था दोनो के बीच चुंबन के उन पलों में जो की दोनो के प्यार को एक और गहराई दे रहा था. ये बात किस करते वक्त दोनो ही बखूबी समझ रहे थे.

चुंबन में लीन आलिया और राज दीन दुनिया सब कुछ भूल गये थे. वक्त का अहसास भी खो गया था. वो चुंबन किसी मेडिटेशन से कम नही था. जिस तरह मेडिटेशन में लीन हो कर हम अपने अंदर बहुत गहराई में उतर जाते हैं ठीक उसी तरह आलिया और राज अपने अंदर भी उतर गये थे और एक दूसरे की आत्मा को भी छू रहे थे. ये एक अद्विद्य घटना थी. वैसे ये प्यार करने वालो के साथ रोज होती है.

जब दोनो की साँसे उखाड़ने लगी तो एक दूसरे से अलग हुवे. दोनो की आँखे नम थी और साँसे बहुत तेज चल रही थी. एक दूसरे की बाहों में बने हुवे थे दोनो और बड़े प्यार से एक दूसरे को देख रहे थे. साँसे एक दूसरे से टकरा रही थी.

“आलिया चाहे कुछ हो जाए…मुझसे जुदा होने की बात सोचना भी मत. तुम जानती हो ना…मर जाऊंगा तुम्हारे बिना मैं.”

“ओह राज प्लीज़ ऐसा मत कहो…..”

दोनो ने एक दूसरे की आँखो में देखा. आँखो ही आँखो में जाने क्या बात हुई. दोनो की आँखे नम हो गयी देखते-देखते और अचानक दोनो के होन्ट फिर से खुद-ब-खुद एक दूसरे से जुड़ गये.

किसी ने सच ही कहा है, भावनाओ में बह कर दो प्रेमियों में जो प्यार होता है वो होश में रहकर कभी नही हो सकता. प्यार की गहराई में उतरने के लिए दीवानेपन की बहुत ज़रूरत होती है.

अचानक राज को कुछ ध्यान आया और उसने आलिया के होंटो से अपने होन्ट हटा लिए. “हाथ पर क्या किया तुमने?”

“चाकू से चीर दिया था.”

“पागल हो गयी थी क्या तुम… रूको मैं अभी आता हूँ.”

“राज कही मत जाओ प्लीज़…हो जाएगा ठीक अपने आप.”

राज ने आलिया की बात को अनसुना कर दिया और कमरे से बाहर आ गया. कुछ देर बाद वो वापिस आ गया. वो केमिस्ट से मरहम-पट्टी ले आया था.

“लाओ हाथ आगे करो.”

“नही डेटॉल मत लगाना बहुत जलन होती है इस से….प्लीज़” आलिया छोटे बच्चे की तरह गिड़गिडाई.

“हाथ चीरते वक्त सोचना चाहिए था ये…ये लगाना ज़रूरी है. लाओ हाथ आगे करो.”

“नही प्लीज़…” आलिया गिड़गिडाई.

राज ने हाथ पकड़ा ज़बरदस्ती और घाव को डेटॉल से सॉफ किया.

“आअहह….धीरे से बहुत जलन हो रही है.”

“दुबारा ऐसा मत करना कभी…समझी”

“समझ गयी.” आलिया ने मासूमियत से कहा.

डेटॉल से घाव साफ करने के बाद राज ने लोशन लगा कर पट्टी बाँध दी हाथ पर. “सब ठीक हो जाएगा.”

“राज मैं अवनी से मिलना चाहती हूँ.”

“छोडो अब जरीना…क्या अपनी और ज़्यादा बेज़्जती करवाना चाहती हो.”

“अवनी ने मुझे कुछ नही कहा ऐसा राज. मुझे उस से मिलकर सॉरी तो बोलना चाहिए ना. प्लीज़ कुछ करो…मैं उस से मिलना चाहती हूँ.”

“वो तो दिल्ली के लिए निकल रही थी. शायद एयर पोर्ट पहुँच भी गयी हो.”

“तो हम एयर पोर्ट ही चलते हैं. वही मिल लेंगे.”

“ठीक है फिर चलो जल्दी…वैसे तुम्हारा सॉरी बोलना नही बनता है क्योंकि सारी ग़लती मेरी है. फिर भी तुम कहती हो तो चलो.”

दोनो तुरंत होटेल से बाहर आए और एयर पोर्ट के लिए टॅक्सी लेकर चल दिए. जैसे ही वो दोनो एयर पोर्ट पहुँचे अवनी अपनी टॅक्सी से उतर रही थी. राज की नज़र उस पर पड़ गयी.

“वो रही अवनी. अच्छा हुवा की यही बाहर ही मिल गयी..आओ जल्दी” राज ने आलिया से कहा.

वो दोनो तुरंत टॅक्सी से निकल कर अवनी की तरफ बढ़े.

“अवनी!” राज ने आवाज़ दी.
 
अवनी चोंक कर रुक गयी और पीछे मूड कर देखा. आलिया और राज उसकी तरफ बढ़े आ रहे थे.

“अवनी…क्या थोड़ी देर रुक सकती हो, आलिया तुमसे कुछ बात करना चाहती है.” राज ने कहा

अवनी ने आलिया की तरफ देखा. दोनो ने आँखो ही आँखो में कुछ कहा. आलिया की आँखो में रिक्वेस्ट थी और अवनी की आँखों में उस रिक्वेस्ट के लिए मंज़ूरी.

“हां शुवर…” अवनी ने कहा.

आलिया ने राज को वहा से दूर जाने का इशारा किया. राज बात समझ कर वहा से हट गया.

आलिया अवनी के करीब आई और बोली, “मुझे माफ़ कर दो अवनी. तुम्हारा हक़ अंजाने में छीन लिया मैने. अगर कोई सज़ा देना चाहो तो दे दो मुझे. खुशी-खुशी सह लूँगी. अपने प्यार की कसम खा कर कहती हूँ कि मरने के लिए निकली थी वहा से. पर पता नही क्यों मर नही पाई. ये जींदगी राज ने दी है मुझे. उसे ही हक़ है इसे लेने का. हां पर एक हक़ तुम्हे भी है. मुझे जो सज़ा देना चाहे दे दो. पर प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.

मुझे सच में नही पता था कि राज पहले से शादी शुदा है वरना मैं हरगिज़ दिल नही लगाती राज से. और अवनी मैं किसी लालच के कारण राज के साथ नही हूँ. बस एक ही लालच है, वो है अपनी जींदगी का. जी नही सकती राज के बिना. इसलिए आज मरने जा रही थी. अब तुम बताओ मेरी क्या सज़ा है”

अवनी ने आलिया के चेहरे पर हाथ रखा और बोली, “तुम्हे आज इतना कुछ सुन-ना पड़ा वहा उस कमरे में. वो सज़ा क्या कम थी जो और माँग रही हो. तुम जब राज को थप्पड़ मार कर वहा से गयी तो मुझे रीयलाइज़ हुवा की हम लोग क्या पाप कर रहे थे. कितना गिर गये थे हम सब. मुझे खुद ना जाने क्या हो गया था. शायद चाची जी और आरजु की बातों का असर था मुझ पर. माफी तो मुझे माँगनी चाहिए तुमसे. मेरे कारण तुम्हे इतना अपमान सहना पड़ा. क्या कुछ नही सुना तुमने आज.

“अवनी तुम्हे मेरे दुख का अहसास हुवा और मुझे क्या चाहिए. मगर इस से मेरा गुनाह कम नही हो जाता. अंजाने में ही सही पर गुनाह तो हुवा है मुझसे. पता नही मैं कैसे माफ़ करूँगी खुद को.” आलिया ने कहा.

“प्यार करती हो ना राज से…तो खुद को गुनहगार मत मानो तुम. प्यार खुदा की देन है और ये किसी भी हालत में गुनाह नही हो सकता. तुम अपने दिल से ये बात निकाल दो कि मेरा कुछ छीन लिया तुमने. हां पहले-पहले मुझे भी यही लग रहा था. मगर आज जब तुम दोनो का प्यार देखा तो समझ में आया कि असल में प्यार क्या है. मैं तो राज से एक तरफ़ा प्यार करती हूँ. राज की आँखो में मैने अपने लिए कुछ नही देखा. बल्कि मेरे लिए उतनी परेशानी भी नही देखी जितनी तुम्हारी आँखो में है. ऐसे में मैं उनके गले में पड़ जाऊ ७ साल पहले हुई शादी का वास्ता दे कर तो बिल्कुल ग़लत होगा. ज़बरदस्ती रिश्ते निभाए जा सकते हैं आलिया कोई बड़ी बात नही है. ऐसा बहुत लोग कर रहे हैं दुनिया में. मगर ज़बरदस्ती बनाया हुवा रिश्ता कभी प्यार का वो फूल नही खिला पाएगा जिसकी कि एक पति पत्नी के रिश्ते में संभावना होती है. राज की नज़रो में तुम्हारे लिए बेईंतेहा प्यार देखा है मैने. तुम दोनो का साथ लिखा है भगवान ने. जाओ दोनो खुश रहो. भगवान मेरी सारी खुशीया तुम दोनो को दे दे.” आँखे टपक गयी अवनी की ये आखरी कुछ शब्द बोलते हुवे.

आलिया ने फ़ौरन अवनी के होंटो पर हाथ रख दिया, “बस…तुम्हारी और कोई खुशी नही चाहिए हमें. जितना लिया है…वही बहुत ज़्यादा हो गया है. दुवा तो मैं करती हूँ कि मेरे हिस्से की सारी खुशीया अल्लाह तुम्हे दे दे.”

“बस-बस अब और मत रुलाओ मुझे. जाओ अपने राज के पास. और तुम दोनो मुझे भूल मत जाना. मिलते रहना मुझसे. तुम दोनो से कोई गिला शिकवा नही है अब. बल्कि प्यार है तुम दोनो से. जाओ अब मैं बहुत भावुक हो रही हूँ.”

आलिया ने अवनी को गले लगा लिया और बोली, “काश दंगो में मर जाती मैं तो तुम्हे कोई भी तकलीफ़ नही होती.”

“बस थप्पड़ मारूँगी तुम्हे मैं अब. दुबारा मत कहना ऐसा.”

राज ये सब देख कर रोक नही पाया खुद को और आ गया दोनो के पास.

राज को देख कर अवनी बोली, “आप आलिया का ख्याल रखना. पता नही कैसा नाता जुड़ गया है इसके साथ. इसे हमेशा खुश रखना. ये खुश रहेगी तो मैं भी खुश रहूंगी. कोई तकलीफ़ नही होनी चाहिए मेरी आलिया को.”

ये सुन कर राज की आँखे नम हो गयी और वो भावुक आवाज़ में बोला, “थॅंक यू अवनी. थॅंक यू वेरी मच…कुछ नही सूझ रहा कि क्या कहूँ तुम्हे.”

“कुछ कहने की ज़रूरत नही है. ये बताओ की शादी कर चुके हो या करने वाले हो?”

जरीना, अवनी से अलग हुई और बोली, “ये तुम तैय करोगी अब कि हम कब शादी करें.”

“मेरी तरफ से तो आज कर लो…”

“अवनी तुम्हारे पेरेंट्स तो कोई समस्या नही करेंगे ना. कोई क़ानूनी उलझन तो पैदा नही करेंगे ना.”

“वो सब मुझ पर छोड दो. और क़ानूनी अड़चन कोई नही है तुम्हारे सामने. बाल-विवाह को कोर्ट नही मानता. सिर्फ़ एक अप्लिकेशन से सेटलमेंट हो जाएगा. तुम दोनो बिना किसी चिंता के शादी करो. कोई दिक्कत नही आने दूँगी मैं. बाल-विवाह का कोई लीगल स्टेटस नही है.”

“बहुत जानकारी है लॉ की तुम्हे?” राज ने कहा.

“लॉ स्टूडेंट हूँ ना. इसलिये” अवनी ने हंसते हुवे कहा.

“चाचा, चाची छोड़ने नही आए?”

“नही वो लोग आ रहे थे पर मैने ही मना कर दिया. अच्छा मैं लेट हो रही हूँ. कही फ्लाइट मिस ना हो जाए.” अवनी ने कहा

“हां-हां तुम निकलो…हम मिलते रहेंगे.” आलिया ने कहा.

अवनी ने आलिया के माथे को चूमा और बोली, “गॉड ब्लेस्स यू. हमेशा खुश रहना. किसी बात की चिंता मत करना.”

अवनी ने राज की तरफ देखा और बोली, “आप भी अपना और आलिया दोनो का ख़याल रखना.”

“बिल्कुल आपका हुकुम सर आँखो पर.” राज ने हंसते हुवे कहा.

अवनी चल पड़ी दोनो को वही छोड कर. राज और आलिया दोनो उसे जाते हुवे देखते रहे.

अवनी और आलिया की ये मुलाक़ात और उनकी वो बातें किसी चमत्कार से कम नही थी. कई बार चमत्कार हमें वहा देखने को मिलता है जहा पर उसकी उम्मीद तक नही होती. अवनी चली गयी थी एयर पोर्ट के अंदर. मगर जाते जाते आलिया और राज के लिए एक सुकून भरी जींदगी छोड गयी थी. वो दोनो अब बिना गिल्ट के साथ रह सकते थे. अवनी ने ना बल्कि दोनो को माफ़ किया था बल्कि खुले दिल से दोनो के प्यार को स्वीकार भी किया था. ये किसी चमत्कार से कम नही था.

जींदगी में जब तूफान आता है तो इंसान का सुख चैन सब कुछ छीन कर ले जाता है. मगर तूफान हमेशा नही रहता. तूफान के बाद शांति भी आती है.

अवनी के जाने के बाद आलिया और राज कुछ देर तक एक दूसरे की तरफ देखते रहे. दोनो की आँखो में सुकून था और चेहरे पर शांति के भाव थे. तूफान के थमने के बाद अक्सर इंसान को एक अद्भुत शांति की अनुभूति होती है. कुछ ऐसा ही आलिया और राज के साथ हो रहा था.

“चले होटेल वापिस…मेरे होन्ट बेचैन हो रहे हैं.”

“क्या मतलब?” आलिया ने हैरानी में पूछा.

“हमारी पहली किस कितनी प्यारी थी ना. खो गये थे हम एक दूसरे में.” राज ने मुस्कुराते हुवे कहा.

“प्लीज़ ऐसी बाते मत करो वरना तुम्हारे साथ होटेल जाना मुश्किल हो जाएगा.” आलिया शर्मा गयी किस की बात पर. उसके चेहरे पर उभर आई शरम की लाली देखते ही बनती थी.

“कितनी देर तक किस की थी हमने. तुम्हारे होन्ट तो अंगरों की तरह तप रहे थे. तुम्हारे होंटो की तपिस से मेरे होन्ट झुलस गये हैं क्या तुम्हे खबर भी है.”

“प्लीज़ राज और कुछ मत कहो मैं सुन नही पाउंगी.” आलिया ने अपने सीने पर हाथ रख कर कहा.

“ये नया रूप देखा तुम्हारा जो की बहुत सुंदर है. मुझे नही पता था कि मुझे गमले और हॉकी से मारने वाली शर्मा भी सकती है.” राज ने आलिया को कोहनी मार कर कहा.

“राज अब बस भी करो.”

“ठीक है…मैं टॅक्सी बुलाता हूँ. डिनर होटेल में ही करेंगे.”
 
राज ने एक टॅक्सी रोकी और दोनो उसमें बैठ कर होटेल की तरफ चल दिए. रास्ते भर आलिया गुमसूम रही. कभी-कभी राज की तरफ देख कर हल्का सा मुस्कुरा देती थी. मगर ज़्यादातर वो चुपचाप और खोई-खोई सी रही. राज जान गया था की कोई बात आलिया को परेशान कर रही है. पर उसने टॅक्सी में कुछ पूछना सही नही समझा. उसने तैय किया की वो होटेल जा कर ही आलिया से बात करेगा.

प्यार में एक दूसरे के चेहरे पर हल्की सी शिकन भी बर्दाश्त नही कर पाते प्रेमी. यही वो चीज़ है जो रिश्ते में और ज़्यादा गहराई और सुंदरता लाती है. एक दूसरे की चिंता और फिकर ही वो इंसानी जज़्बा है जो प्रेमी जोड़ो में कूट-कूट कर भरा होता है.

होटेल के रूम में घुसते ही राज ने आलिया का हाथ पकड़ लिया और बोला, “तुम कुछ परेशान सी हो जान. बात क्या है?. क्या मुझसे कोई भूल हो गयी है.”

“नही राज तुमसे कोई भूल नही हुई है. बस वक्त ही कुछ अज़ीब है.” आलिया ने कहा.

“मैं कुछ समझा नही जान…खुल कर बताओ ना क्या बात है.”

“राज…मैं शादी किए बिना वापिस अपने घर नही जाना चाहती. लोगो की नज़रो का सामना और नही कर सकती मैं. ऐसा लगता है जैसे की मैं कोई गुनहगार हूँ.”

“अरे अब तो सब सॉल्व हो गया. शादी में ज़्यादा देरी नही होगी. मैं गुजरात पहुँचते ही किसी वकील से मिल कर कोर्ट में अप्लिकेशन लगवाऊंगा.”

“कोर्ट के फ़ैसले कितनी जल्दी आते हैं ये तुम भी जानते हो और मैं भी. जब तक ये क़ानूनी अड़चन दूर नही होगी हमारी शादी नही हो सकती. तब तक अपने ही घर में रहना मेरे लिए मुश्किल रहेगा. तुम नही जानते मैं कैसे लोगो की नज़रो का सामना करती हूँ. एक तो मेरा अधर्मी होना ही गुनाह है उपर से लड़की हूँ…लोगो की नज़रो में नफ़रत और गली होती है मेरे लिए. तुम ही बताओ कैसे वापिस जाऊंगी मैं वहा.” आलिया सूबक पड़ी बोलते-बोलते.

“समझ सकता हूँ जान. तुम्हारे किसी भी दर्द से अंजान नही हूँ मैं. जो बात तुम्हे दुख पहुँचाती है वो मेरे तन बदन में भी हलचल मचा देती है. तुम चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा.”

“पर सब ठीक होने तक मैं कैसे रह पाउंगी तुम्हारे साथ.”

“तो क्या मुझे छोड कर जाना चाहती हो कही.”

“नही ऐसा तो मैं सपने में भी नही सोच सकती. रहूंगी तुम्हारे साथ ही चाहे कुछ हो जाए.”

“इस दुनिया की चिंता करेंगे तो जीना मुश्किल हो जाएगा. छोडो इन बातों को. मैं दिल्ली जा कर आउट ऑफ कोर्ट सेटल्मेंट की बात करूँगा अवनी के घर वालो से. शायद बात बन जाए. अवनी तो हमारे साथ है ही.”

“हां कुछ ऐसा करो की हम जल्द से जल्द शादी के बंधन में बँध जायें.”

“मैं तुम्हे तुम्हारे अब्दुल चाचा के यहा छोड कर दिल्ली चला जाऊंगा.”

“अकेले तो तुम्हे कही नही जाने दूँगी मैं. चाहे कुछ हो जाए.”

“अच्छा बाबा तुम भी साथ चलना.”

“वो तो चलूंगी ही.”

“अरे यार हमने ये सब पहले क्यों नही सोचा. हम अवनी के साथ ही दिल्ली जा सकते थे. चलो कोई बात नही कल चल देंगे हम दिल्ली. सही कहा तुमने ये मामला कोर्ट में अटक गया तो हमारी शादी अटक जाएगी...कोर्ट के बिना ही ये मसला हल करना होगा. अब जबकि अवनी हमारे साथ है तो कोई ज़्यादा दिक्कत नही होनी चाहिए.”

आलिया हल्का सा मुस्कुराई मगर अगले ही पल उसके चेहरे पर फिर से शिकन उभर आई.

“अब क्या हुवा जान. कोई और बात भी है क्या जो तुम्हे परेशान कर रही है.”

“नही और कुछ नही है चलो खाना खाते हैं.”

“नही कुछ तो है. तुम्हारे चेहरे पर ये शिकन इशारा कर रहा है कि कुछ और बात भी है जो की तुम्हे अंदर ही अंदर खाए जा रही है.”

“नही तुम्हे दुख होगा रहने दो.”

“बोलो ना क्या बात है जान. इस प्यारे रिश्ते में अब कोई भी बात पर्दे के पीछे नही रहनी चाहिए. बोलो ना प्लीज़ क्या बात है?”

“हमारे बीच शादी से पहले ही सेक्स शुरू हो गया. मेरे अम्मी-अब्बा ज़िंदा होते आज अगर और उन्हे इस बारे में पता चलता तो वो मुझे जान से मार देते.” आलिया नज़रे झुका कर बोली.

“क्या कहा तुमने सेक्स शुरू हो गया हाहहहाहा….. इस से ज़्यादा लोटपोट कर देने वाला चुटकुला नही सुना मैने कभी. अरे पागल हमने भावनाओं में बह कर बस किस ही तो की है एक दूसरे को. वो किस सेक्स के दायरे में नही आती.”

“तुम्हे क्या मैं बेवकूफ़ लगती हूँ या फिर तुम्हे ये लगता है कि मेरा दिमाग़ खिसका हुवा है. मेरे मज़हब ने मुझे शादी से पहले किसी बात की इज़ाज़त नही दी. किस तो बहुत बड़ी बात होती है.”

“हां मानता हूँ जान. शादी से पहले सेक्स में उतर जाना ग़लत है. पर हमारी किस पवित्र थी. उस पर कोई इल्ज़ाम बर्दाश्त नही करूँगा मैं.”

“सॉरी राज मेरी परवरिश ऐसे माहोल में हुई है जहा शादी से पहले सेक्स से जुड़ी हर चीज़ को ग्लानि से देखा जाता है.” आलिया ने कहा.

“तो क्या तुम हमारी किस को अब ग्लानि से देख रही हो?”

“नही मैं ये पाप भी नही कर सकती क्योंकि इस प्यार में वो अब तक का सबसे हसीन पल था मेरे लिए. ऐसा लग रहा था जैसे मैं तुम्हारे बाहुत करीब पहुँच गयी हूँ.”

“और क्या तुमने एक बात नोट की.”

“कौन सी बात.”

“तुमने कहा था कि मुझे चुंबन लेना नही आता मगर तुम्हारे होन्ट तो खूबसूरत चुंबन की एक दास्तान लिख रहे थे मेरे होंटो पर.”

आलिया का चेहरा लाल हो गया ये सुन कर. वो कुछ देर खामोश रही. फिर अचानक नज़रे राज के कदमो पर टिका कर बोली, “हमने कुछ ग़लत तो नही किया ना राज.”

“मैं तो इतना जानता हूँ आलिया कि प्यार भगवान है. अगर इस प्यार में बह कर हम कुछ कर बैठे तो वो हरगिज़ ग़लत नही हो सकता. बल्कि मैं तो बहुत खुश हूँ उस चुंबन के बाद. रह रह कर मेरे होंटो पर मुझे अभी तक तुम्हारे होंटो की छुवन महसूस हो रही है. बहुत प्यारा अहसास मिला है जींदगी में ये.”

“अच्छा खाना मॅंगा लो. भूक लग रही है.”

“एक बात तो तुम्हे बतानी ही पड़ेगी. चुंबन लेना कहा से सीखा तुमने.”

“हटो…मैं इस बात को लेकर परेशान हूँ और तुम्हे मज़ाक सूझ रहा है.”

“उस वक्त तो तरह-तरह से मेरे होंटो से खेल रही थी अब परेशान हो रही हो हहेहहे. मेरी आलिया गिरगिट की तरह रंग बदलती है.”

“राज अब तुम्हारी खैर नही…” आलिया ने कहा. प्यार भरा गुस्सा था उसकी आवाज़ में.

राज भाग कर टॉयलेट में घुस्स गया और कुण्डी लगा ली.

“निकलो बाहर. तुम्हारी जान ले लूँगी मैं आज.”

“उस से पहले खाना खिला दो मुझे. खाने का ऑर्डर कर दो. मैं नहा कर ही निकलूंगा बाहर अब हाहहाहा.”

आलिया पाँव पटक कर रह गयी.

प्यार हमें हर तरह के रंग दीखता है. लड़ाता भी है, हँसाता भी है, रुलाता भी है और कभी-कभी प्यारी सी नोक झोंक पैदा कर देता है रिश्ते में. प्यार का हर रंग अनमोल और अद्विद्या है. चुंबन का भी अपना ही महत्व है. चुंबन तो बस एक बहाना है प्यार का मकसद हमें ऐसी जगह ले जाना है जहा हम बस एक दूसरे में खो जायें. क्योंकि प्यार एक दूसरे में खो कर ही होता है…अपने आप में होश में रह कर नही………

राज नहा कर चुपचाप दबे पाँव बाहर निकला वॉशरूम से. आलिया बिस्तर पर आँखे बंद किए पड़ी थी.

“खाने का ऑर्डर कर दिया क्या?”

“हां कर दिया…आता ही होगा?” आलिया ने कहा.
 
राज आलिया के पास आकर बैठ गया और बोला, “क्या हुवा फिर से चेहरे पर १२ बजा रखे हैं…अब कौन सी नयी समस्या है तुम्हारी.”

“कुछ नही…बस सोच रही थी की अवनी के घर वाले मान तो जाएँगे ना.”

“बातचीत करने से हर मसला हाल हो जाता है जरीना. हम एक कोशिश करेंगे बाकी भगवान की मर्ज़ी.”

“राज तुम मुझे चिढ़ा क्यों रहे थे…तुम्हे शरम नही आती ऐसा बोलते हुवे. मैं तुमसे नाराज़ हूँ.”

“उफ्फ अभी तक नाराज़ हो. जाओ नहा कर आओ फटाफट… दीमाग ठंडा हो जाएगा. और किसी बात की चिंता मत करो सब ठीक होगा.” राज ने कहा.

अगली सुबह राज और आलिया मुंबई एयर पोर्ट के लिए निकल पड़े. दोपहर १२ बजे वो दिल्ली में थे. अवनी कारोल बाग में रहती थी. उन्होने कारोल बाग में ही एक होटेल में रूम ले लिया.

कुछ घंटे रेस्ट करने के बाद आलिया को होटेल में ही छोड कर राज अवनी के घर आ गया. अवनी घर में सब कुछ बता चुकी थी इसलिये राज का कोई ख़ास स्वागत नही हुवा.

“तो तुम अब जले पर नमक छिड़कने आए हो” अवनी के पापा ने कहा. अवनी एक तरफ खड़ी सब सुन रही थी.

“जी नही मैं माफी माँगने आया हूँ. आप मुझे माफ़ कर दीजिए. अवनी ने आपको सब कुछ बता ही दिया है. हम सभी के लिए यही अच्छा है कि हम बैठ कर आपस में ही इसका हल निकाल लें. कोर्ट जाने से हमारा वक्त ही बर्बाद होगा. मानता हूँ मेरा स्वार्थ है इसमें पर इसमें आप लोगो का भी भला ही है”

अवनी के पापा कुछ बोले बिना उठ कर चले गये. अवनी ने राज को इशारा किया मैं समझाती हूँ इन्हे तुम चिंता मत करो.

राज चुपचाप वही बैठा रहा. कोई एक घंटे बाद अवनी अवनी कमरे में दाखिल हुई.

“आप अभी जाओ…कल इसी वक्त आ जाना तब तक मैं पापा को मना लूँगी. वो मेरी बात नही टालेंगे.”

“ठीक है अवनी…सॉरी तुम लोगो को डिस्टर्ब करने के लिए पर मेरे पास कोई चारा नही था. ये मामला कोर्ट में पता नही कब तक लटका रहेगा. तुम तो लॉ स्टूडेंट हो ये बात बखूबी समझ सकती हो.”

“हां मैं समझ रही हूँ. पापा भी समझ जाएँगे. कल से आगे नही जाएगी बात.”

“थॅंक यू अवनी…चलता हूँ मैं.”

“आलिया कहा है?”

“साथ ही आई है. होटेल में छोड कर आया हूँ. वो अकेले मुझे कही जाने ही नही देती.”

“ये तो अच्छी बात है ना. उसे दिल्ली घूमाओ आप आज. कल आएँगे तो निराश नही जाएँगे यहा से.”

“जानता हूँ. आपके होते हुवे निराशा हो ही नही सकती. चलता हूँ मैं.” राज घर से बाहर निकल आया.

अगले दिन जब राज अवनी के घर पहुँचा तो अवनी के पापा ने उसे देख कर गहरी साँस ली और बोले, “ठीक है मैं कुछ लोगो को बुलाता हूँ. आज ही ये किस्सा निपटा देते हैं. और ये मैं तुम्हारे लिए नही बल्कि अपनी बेटी के लिए कर रहा हूँ. इसका भी इस बंधन से आज़ाद होना ज़रूरी है ताकि हम इसका घर बसाने की सोच सकें तुमने तो उजाड़ने में कोई कसर नही छोडी.”

राज ने चुप रहना ही सही समझा.जब आप मूह तक पानी में डूबे हों तो मूह बंद ही रखना चाहिए वरना दिक्कतें और ज़्यादा बढ़ सकती हैं. राज ये बात बखूबी समझ रहा था.

कुछ लोग इकट्ठा हुवे उस घर में और स्टॅम्प पेपर पर राज और अवनी को वैवाहिक संबंध से आज़ाद कर दिया. स्टॅम्प पेपर की एक कॉपी अवनी के पापा ने रख ली और एक राज को थमा दी.

राज अपनी खुशी छुपा नही पाया और अवनी के पापा के पाँव छू लिए आगे बढ़ कर, “ये अहसान मैं जींदगी भर नही भूलूंगा.”

“हम भी तुम्हे जींदगी भर नही भूलेंगे.”

राज को अवनी कही दीखाई नही दे रही थी. वो उसे बाइ करना चाहता था जाने से पहले. उसने अवनी के बारे में पूछना सही नही समझा क्योंकि माहोल गरम था. वो स्टॅम्प पेपर को लेकर चुपचाप बाहर आ गया.

बाहर आकर उसने पीछे मूड कर देखा तो पाया की अवनी छत पर खड़ी थी. जैसे ही दोनो की नज़रे टकराई अवनी ने हंसते हुवे हाथ हिला कर अलविदा कहा.

राज की आँखे नम हो गयी अवनी को देख कर. “मुझे माफ़ करना अवनी. तुम्हारे सच्चे प्यार को ठुकरा दिया मैने. लेकिन कोई चारा नही था अवनी. मेरे रोम-रोम में आलिया बस चुकी है. मैं चाहूं तो भी खुद को आलिया से जुदा नही कर सकता क्योंकि मर जाऊंगा उस से जुदा होते ही. यही दुवा करता हूँ की हमेशा खुश रहो तुम. जींदगी में कोई भी गम या दुख तुम्हारे पास भी ना भटक पाए. हे भगवान अवनी को हमेशा खुश रखना.”

राज आँखो में नमी लिए आगे बढ़ गया. होटेल तक पहुँचते-पहुँचते आँखो की नमी सूख चुकी थी और धीरे-धीरे उनमें एक अद्भुत चमक उभरने लगी थी. अब राज और आलिया की शादी में कोई रुकावट नही थी. राज ये बात सोच-सोच कर झूम रहा था. पाँव ज़मीन पर नही टिक रहे थे उसके.राज होटेल की तरफ बढ़ते हुवे ये गीत गुनगुना रहा था

राज ने जब होटेल के कमरे की बेल बजाई. आलिया ने भाग कर दरवाजा खोला.

“क्या हुवा राज?”

“तुम्हे क्या लगता है…”

“जल्दी बताओ ना प्लीज़…मेरी साँसे अटकी हुई हैं जान-ने के लिए.”

राज ने जेब से निकाल कर स्टॅम्प पेपर दिखाया और बोला, “अब हमारी शादी में कोई रुकावट नही है जान. हम जब जी चाहे शादी कर सकते हैं.”

“सच!” आलिया उछल पड़ी ये बात सुन कर.

“हां अब तुम जी भर कर खेलना मेरे होंटो से…जितना जी चाहे उतना झुलसा देना इन्हे अपने अंगरो से. मैं उफ्फ तक नही करूँगा. तुम्हारी किस का कोई जवाब नही.”

“राज तुम मार खाओगे अब मुझसे.”

“अपने होने वाले पति को मारोगी तुम.”

“पागल हो क्या…मज़ाक कर रही हूँ.”

“पता है मुझे…अब ये बताओ कब बनोगी मेरी दुल्हनिया.”

“आज, अभी…इसी वक्त…बनाओगे क्या बोलो.”

“खुशी-खुशी……बस एक बात बात बताओ धर्मी रीति रिवाज से शादी करना चाहोगी या फिर अधर्मी रीति रिवाज से.”

“उस से कुछ फरक पड़ेगा क्या?”

“बिल्कुल भी नही?”

“फिर क्यों पूछ रहे हो.”

“यू ही तुम्हारा व्यू लेना चाहता था इस बारे में.”

“मेरा कोई व्यू नही है इस बारे में सच कह रही हूँ मैं. तुम मुझे जैसे चाहो अपनी दुल्हन बना लो. वैसे तुम्हारे भगवान के मंदिर में शादी करना चाहती हूँ मैं तुमसे. तुम मुझे एक साल बाद मंदिर में ही तो मिले थे.”

“पक्का…”

“हां पक्का.”

“ठीक है फिर. हम दिल्ली से ही शादी करके चलते हैं. तुम अब अपने घर में मेरी दुल्हन बन कर ही प्रवेश करोगी.”

“आज जाकर दिल को सुकून मिला है. अल्लाह अब कोई और मुसीबत ना डाले हमारी शादी में.”

“कोई मुसीबत नही आएगी. बी पॉज़िटिव. जींदगी में उतार चढ़ाव तो चलते रहते हैं. तुम्हारी मौसी को भी बुला लेंगे हम.”

“नही…नही मौसी को मत बुलाओ. किसी को वहा भनक भी लग गयी तो तूफान मचा देंगे लोग. तुम नही जानते उन्हे. जीतने कम लोग हों उतना अच्छा है.”

“ह्म्म बात तो सही कह रही हो.”

“जान बस और इंतजार नही होता मुझसे. मैं अभी सब इंतजाम करके आता हूँ. हम कल सुबह शादी कर लेंगे”

“हां राज बस अब और नही. मुझे मेरा हक़ दे दो ताकि दुनिया के सामने सर उठा कर जी सकूँ.”

राज निकल तो दिया होटेल से शादी का इंतजाम करने के लिए पर उसे इस काम में बहुत भाग दौड़ करनी पड़ी. मंदिरों के पुजारी तैयार ही नही थे शादी करवाने के लिए.राज दरअसल हर जगह आलिया का नाम ले कर ग़लती कर रहा था. आलिया का नाम सुनते ही पुजारी मना कर देते थे. लेकिन दुनिया में हर तरह के लोग रहते हैं. एक जगह पुजारी ना बल्कि तैयार हुवा शादी करवाने को बल्कि बहुत खुश भी हुवा धर्मी-अधर्मी का ये प्यार देख कर.
 
राज निकल तो दिया होटेल से शादी का इंतजाम करने के लिए पर उसे इस काम में बहुत भाग दौड़ करनी पड़ी. मंदिरों के पुजारी तैयार ही नही थे शादी करवाने के लिए.राज दरअसल हर जगह आलिया का नाम ले कर ग़लती कर रहा था. आलिया का नाम सुनते ही पुजारी मना कर देते थे. लेकिन दुनिया में हर तरह के लोग रहते हैं. एक जगह पुजारी ना बल्कि तैयार हुवा शादी करवाने को बल्कि बहुत खुश भी हुवा धर्मी-अधर्मी का ये प्यार देख कर.

“बेटा मैं तो सौभाग्य समझूंगा अपना ये शादी करवा कर. तुम लोग सुबह ठीक ११ बजे आ जाना यहा.”

“पंडित जी हम दोनो यहा किसी को नही जानते. कन्या दान कैसे होगा..कोन करेगा.”

“उसका इंतजाम भी हो जाएगा. मेरे एक मित्र हैं वो खुशी खुशी कर देंगे ये काम. तुम चिंता मत करो बस वक्त से पहुँच जाना. दोपहर बाद मुझे एक पाठ करने जाना है.”

“धन्यवाद पंडित जी. आप चिंता ना करें. हम वक्त से पहुँच जाएँगे.”

मंदिर में शादी का इंतजाम करने के बाद राज कपड़ो के शोरुम में घुस गया और आलिया के लिए लाल रंग की एक साडी खरीद ली. सारी लेकर वो खुशी खुशी होटेल की तरफ चल दिया.

होटेल पहुँच कर उसने आलिया को सारी दीखाई तो आलिया ने कुछ ख़ास रेस्पॉन्स नही दिया.

“क्या हुवा…क्या सारी पसंद नही आई?”

“मैं ये नही पहन सकती. ये शेड मुझे पसंद नही”

“हद है इतने प्यार से लाया हूँ मैं आलिया और तुम ऐसे बोल रही हो.” राज सारी को बिस्तर पर फेंक कर वॉशरूम में घुस गया.

राज वॉशरूम से बाहर आया तो आलिया उस से लिपट गयी.

“नाराज़ क्यों होते हो राज. मेरी ज़ींदगी का इतना बड़ा दिन है और मैं अपनी पसंद का कुछ पहन-ना चाहती हूँ तो क्या ये ग़लत है. ये दिन जींदगी भर याद रहेगा हमें. देखो याद रखो कोई लड़ाई नही करनी है हमें. लड़ाई का परिणाम देख चुके हैं हम.”

“लड़ाई तो बेशक करेंगे जान पर एक दूसरे को छोड कर नही जाएँगे. अब हम शादी के बंधन में बँधने जा रहे हैं. ये बात गाँठ बाँध लेते हैं की कभी एक दूसरे का साथ नही छोडेंगे. क्योंकि छोडेंगे भी तो पछताना भी हमें ही पड़ेगा.”

“हां ये तो हम देख ही चुके हैं. दूसरी साडी ले लेते हैं ना राज…प्लीज़.”

“अरे पागल प्लीज़ क्यों बोल रही हो. एनिथींग फॉर यू. चलो अभी लेकर आते हैं तुम्हारी मन पसंद सारी. मेरी आलिया दुल्हन बन-ने जा रही है कोई मज़ाक नही है”

“राज बहुत खर्चा करवा रही हूँ तुम्हारा. शरम सी तो आती है पर क्या करूँ. १० लाख की एफडी है मेरे नाम…वो दहेज में दे रही हूँ तुम्हे. पूरी भरपाई कर लेना.”

“ये क्या बकवास कर रही हो जरीना. तुम्हारा मेरा क्या अलग-अलग है.”

“मुझे ताना दिया गया था इस बात का राज. बहुत बुरा लगा था मुझे. मैं कोई तुम्हारी दौलत के पीछे नही हूँ. तुम तो जानते ही हो ना, मेरे अब्बा का भी तो अच्छा कारोबार था. दंगो ने सब तबाह कर दिया.”

“मैं जानता हूँ जान. दुनिया तो कुछ भी कहती है. सचाई तो हम जानते हैं ना. चलो अब तुम्हारे लिए प्यारी सी सारी लेकर आते हैं.”

“तुम भी तो कुछ नया खरीद लो ना. शादी में पुराने कपड़े नही पहने जाते.” आलिया ने कहा.

“ऐसा है क्या…चलो फिर मैं भी खरीद लेता हूँ.”

शादी हो रही थी दोनो की. ये बात सोच कर ही झूम उठते थे दोनो. बहुत मुश्किल से ये खुशी पाने जा रहे थे दोनो. एक लंबा इंतेज़ार किया था दोनो ने. आलिया ने अपनी मन पसंद साडी खरीदी. राज ने भी अपने लिए एक नयी पॅंट शर्ट ले ली. ख़ुसनसीब थे दोनो जो की एक साथ अपनी शादी की शॉपिंग कर रहे थे. ये अवसर हमारे समाज में हर किसी को नही मिलता.

शॉपिंग करने के बाद वो जब होटेल की तरफ जा रहे थे तो एक अज़ीब सी सुंदर सी मुस्कुराहट थी दोनो के चेहरे पर. चेहरे के ये भाव उनके दिलो में बसी खुशी का इज़हार कर रहे थे.

होटेल पहुँच कर दोनो बिस्तर पर गिर गये. राज एक कोने पर था और आलिया दूसरे कोने पर. बहुत थक गये थे दोनो.

“जरीना!”

“हां राज”

“आइ लव यू सो मच.”

“आइ लव यू टू.”

“शादी तो कर रहा हूँ तुमसे मगर अब एक चिंता सता रही है.” राज ने कहा.

ये सुनते ही आलिया के चेहरे पर चिंता की लकीरे उभर आई. वो राज की तरफ मूडी और बोली, “कैसी चिंता राज.”

“रहने दो तुम्हे बुरा लगेगा” राज ने कहा.

“बोलो राज प्लीज़…मेरा दिल बैठा जा रहा है.” आलिया ने कहा.

“उस दिन के चुंबन से मेरे होन्ट अभी तक झुलस रहे हैं. शादी के बाद मेरा क्या होगा जरीना. कैसे झेलूँगा मैं तुम्हारे अंगारों को. यही चिंता सता रही है.”

“राज मैं मारूँगी तुम्हे तुमने दुबारा ऐसा मज़ाक किया तो. अब से कोई चुंबन नही होगा हमारे बीच.”

“क्यों नही होगा!...ऐसा क्यों बोल रही हो.”

“बोल दिया तो बोल दिया.”

राज ने आलिया का हाथ थाम लिया और उसे अपने तरफ झटका दिया. दोनो बहुत करीब आ गये. चेहरे बिल्कुल आमने सामने थे. साँसे टकरा रही थी दोनो की.

“छोडो मुझे राज.”

“तुम्हारे होंटो के अंगारों से झुलस जाना चाहता हूँ मैं. रख दो ये अंगारे मेरे होंटो पर जान मैं फिर से उसी अहसास को जीना चाहता हूँ.”

“ना मेरे होन्ट अंगारे हैं और ना मैं इन्हे कही रखूँगी छोडो मुझे.”

“उफ्फ गुस्से में तो तुम और भी ज़्यादा सुंदर लगती हो. मन तो कर रहा है तुम्हारे होंटो पर होन्ट रखने का पर तुम्हारी मर्ज़ी के बिना नही रखूँगा.”

“मेरी मर्ज़ी कभी नही होगी अब. तुम मज़ाक उड़ाते हो मेरा. छोडो मुझे.”

“कभी सपने में भी नही सोचा था कि इस नकचाढ़ि को प्यार करूँगा और इसके होंटो पर अपने होन्ट रखूँगा. कॉलेज टाइम में ऐसा विचार भी आता तो मुझे उल्टी आ जाती. इतनी नापसंद थी तुम मुझे.”

“ये…ये..ये…तुम बड़े मुझे पसंद थे. सर फोड़ने का मन करता था तुम्हारा.उस वक्त तुमसे प्यार का सोचने से पहले सुसाइड कर लेती मैं. बहुत ज़्यादा बेकार लगते थे तुम मुझे.”

“आज ऐसा क्या है आलिया कि हम एक साथ इस बिस्तर पर पड़े हैं एक दूसरे के इतने करीब.”

“तुमने ज़बरदस्ती रोक रखा है मुझे अपने करीब. कौन तुम्हारे करीब रहना चाहता है.”

“चलो फिर छोड दिया तुम्हारा हाथ. जाओ जहा जाना है.” राज ने आलिया का हाथ छोड दिया.

आलिया राज के पास से बिल्कुल नही हिली. आँखे बंद करके वही पड़ी रही.

“क्या हुवा जान…जाओ ना. मैने तुम्हारा हाथ छोड दिया है.”

आलिया ने राज की छाती में ज़ोर से मुक्का मारा.

“आउच…इतनी ज़ोर से क्यों मारा.” राज कराह उठा.

“तुम्हे पता है ना कि मैं तुमसे दूर नही रह सकती इसलिये ये सब मज़ाक करते हो.” आलिया ने कहा.

“अफ जान निकाल दी मेरी. बहुत ख़तरनाक हो तुम.” राज ने कहा.

आलिया ने राज की छाती पर हाथ रखा और उसे मसल्ते हुवे बोली, “ज़्यादा ज़ोर से लगी क्या?”

“तुम जब मारती हो तो ज़ोर से ही मारती हो.”

“तुम मुझे यू सताते क्यों हो फिर. शरम भी आती है किसी को ये बाते सुन कर.”

“किसको शरम आती है? इस कमरे में तुम्हारे और मेरे सीवा भी कोई है क्या.”

“राज तुम इतने शैतान निकलोगे मैने सोचा नही था.” आलिया ने कहा.

“ऐसा तो नही था कभी. तुमने दीवाना बना दिया मुझे जान. तुम मेरा पहला प्यार हो."

“जानती हूँ मैं. मेरा तो इंटेरेस्ट ही नही था किसी से दोस्ती करने में. मैं भी बस तुम्हे जानती हूँ. मेरा पहला और आखरी प्यार तुम ही हो.”

“इतनी प्यारी बात कर रही हो. एक प्यारी सी किस दे दो ना और जला दो मेरे होंटो को एक बार फिर से.”

“जल कर राख हो जाओगे रहने दो.” आलिया ने हंसते हुवे कहा.

“तुम मुझे खाक में मिला दो तो भी चलेगा. तुम्हारे हुस्न की आग में जलना चाहता हूँ मैं.”

“अच्छा.”

“हां.”

“तुम कही झुटि तारीफ़ तो नही करते मेरी.”

“लो कर लो बात. कॉलेज में तुम मशहूर थी अपने हुस्न के लिए. तुम्हारी ही चर्चा हुवा करती थी हर तरफ लड़को में. ये बात और थी की तुम मुझे बिल्कुल पसंद नही थी.”

“क्या मैं इसलिये पसंद नही थी कि मैं अधर्मी थी?”

“आलिया कैसी बात कर रही हो.”

“बोलो ना राज मैं नापसंद क्यों थी तुम्हे.”
 

Similar threads

Back
Top