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“ये तो मैं भी पूछ सकता हूँ कि क्या तुम मुझसे नफ़रत इसलिये करती थी क्योंकि मैं धर्मी था.”
“पहले मेरे सवाल का जवाब दो ना प्लीज़. पहले मैने सवाल किया है.”
“हां आलिया झूठ नही बोलूँगा. उस वक्त अधर्मी लोगो से चिढ़ता था मैं. देश में कही भी टेररिस्ट अटॅक होता था तो बहुत गालिया देता था मैं. काई बार मन में ख़याल आता था कि मेरे पड़ोस में भी टेररिस्ट रह रहे हैं. तुम लोगो से लड़ाई और ज़्यादा नफ़रत पैदा करती थी तुम्हारे प्रति.”
“झूठ नही बोल सकते थे…इतना कड़वा सच बोलने की क्या ज़रूरत थी.” आलिया रो पड़ी बोलते-बोलते.
“जान…तुमने सवाल सच जान-ने के लिए किया था या फिर झूठ. अब तुम बताओ कि तुम क्यों नफ़रत करती तू मुझसे.”
“मुझे कभी किसी धर्मी के नज़दीक जाने की इच्छा नही होती थी, क्योंकि मुझे यही लगता था कि ये लोग हमें दबाते हैं इस देश में. माइनोरिटी होने के कारण हमारे साथ हर जगह भेदभाव होता है. कॉलेज में मेरे सभी अधर्मी फ्रेंड्स ही थे. और हम लोगो के परिवारों का लड़ाई झगड़ा होने के कारण तुमसे नफ़रत और ज़्यादा बढ़ गयी थी.”
“शुक्र है शादी होने से पहले ये राज खुल गये.” राज ने कहा.
“तो क्या अब हम शादी नही करेंगे.” आलिया ने बड़ी मासूमियत से पूछा.
“तुम बताओ क्या इरादा है तुम्हारा?”
एक पल को खामोशी छा गयी दोनो के बीच. दोनो बहुत करीब पड़े थे एक दूसरे के. कुछ कहने की बजाए दोनो एक दूसरे की आँखो में झाँक रहे थे. कब उनके होन्ट मिल गये एक दूसरे से उन्हे पता ही नही चला. दोनो के होन्ट एक साथ हरकत कर रहे थे. १० मिनिट तक बेतहाशा चूमते रहे दोनो एक दूसरे को. जब उनके होन्ट जुदा हुवे तो बड़े प्यार से देख रहे थे दोनो एक दूसरे को.
“मिल गया जवाब.” राज ने हंसते हुवे पूछा.
“हां मिल गया. यही कह सकती हूँ कि प्यार के आगे ये बातें कुछ मायने नही रखती.”
“हां हम एक दूसरे के करीब आए तो हम जान पाए एक दूसरे को. वरना तो जींदगी भर नफ़रत बनी रहती.हम एक महीना साथ रहे तो धरम की झूठी दीवार गिर गयी. दीवार गिरने के बाद हम उसके पीछे खड़े असली इंसान को देख पाए. काश इस देश में हर कोई ऐसा कर पाए. मैं अपने पहले के विचारों के लिए शर्मिंदा हूँ.”
“मैं भी शर्मिंदा हूँ राज. अच्छा हुवा जो कि हमें प्यार हुवा और हम एक दूसरे को जान पाए. प्यार में बहुत ताक़त होती है ना राज.”
“हां बहुत ज़्यादा ताक़त होती है. ये प्यार आलिया जैसी लड़की को भी किस करना सीखा देता है. ऑम्ग फिर से बहुत प्यारा चुंबन दिया तुमने.”
“हटो छोड़ो मुझे…तुम फिर से शैतानी पर उतर आए.”
राज और आलिया बिस्तर पड़े हुवे प्यार के उस कोमल अहसास को पा रहे थे जिसके लिए ज़्यादा तर लोग जीवन भर तरसते हैं. दोनो की आँखों में बहुत सारे सपने थे आने वाली जींदगी के लिए और दिलों में ढेर सारी उमंग थी.
जब दिल में बहुत ज़्यादा खुशी हो तो अक्सर आँखो की नींद खो जाती है. दिल हर वक्त बेचैन सा रहता है. ऐसा ही कुछ हो रहा था राज और आलिया के साथ.एक तो चुंबन की खुमारी थी उपर से होने वाली शादी की खुशी. दोनो पर अजीब सा नशा कर दिया था प्यार ने.
अचानक आलिया को कुछ ख़याल आया, “राज हम जब से मार्केट से आयें हैं यही पड़े हैं. क्या हमने खाना खाया?”
“अरे खा लेंगे खाना भी. जब तुम पास हो तो भूक प्यास किस कम्बख़त को लगती है.”
“अरे कैसी बात कर रहे हो. खाना खा कर हमे जल्दी सो जाना चाहिए. सुबह जल्दी उठ कर हमें तैयार भी तो होना है.” आलिया ने कहा.
“मैं तो किसी भी वक्त उठ कर मॅनेज कर लूँगा. तुम लड़कियों को ही वक्त लगता है तैयार होने में.”
“मेरी शादी हो रही है…तैयार होने में वक्त तो लगेगा ना.”
“अच्छा बाबा मैं ऑर्डर देता हूँ. तुम एक गरमा गरम चुंबन तैयार रखो. खाने के बाद स्वीट डिश की तरह काम आएगा.”
“जी हां जनाब बिल्कुल. मेरा तो यही काम रह गया है. चलिए अपना रास्ता देखिए… मुझे और भी बहुत काम हैं.”
“काम कैसा काम?”
“मुझे बहुत कुछ सोचना है कल के बारे में. मुझे ये भी नही पता अभी कि शादी के लिए तैयार कैसे होना है.”
“हो जाएगा सब…तुम चिंता मत करो…मैं खाने का ऑर्डर देता हूँ…क्या लोगि तुम.”
“मॅंगा लो कुछ भी ज़्यादा भूक तो है नही.”
“ओके.” राज ने फोन उठा कर खाने के लिए बोल दिया.
खाना खाने के बाद आलिया बिस्तर पर पसर गयी और बोली, “अब यहा कोई भी आने की जुर्रत ना करे. हमें नींद आ रही है.”
“हहहे….झूठ बोल रही हो तुम.नींद नही आने वाली आज…चाहे कुछ कर लो तुम. मेरी बाहों में रहोगी तो शायद नींद आ भी जाए. अकेले तो बिल्कुल भी नही सो पाओगी तुम”
“कुछ भी हो यहा नही आओगे तुम अब.”
“कोई बात नही जान. आज रात छोड देता हूँ तुम्हे अकेला. कल से देखता हूँ कैसे भगोगी मुझे तुम बिस्तर से.”
“कल की कल देखेंगे.” आलिया ने होंटो पर प्यारी सी मुस्कान बिखेर कर कहा.
प्यार ने धीरे धीरे एक हसीन कामुक रस भर दिया था दोनो की जींदगी में. इन्ही बातों के कारण आलिया राज से शरमाने लगी थी. हर पल उनका रिश्ता नया रूप ले रहा था और नये रंग में रंग रहा था. प्यार हर तरह के रंग भरने की कोशिश करता है प्रेमियों की जींदगी में. आलिया खुश थी मगर अपने संस्कारों के कारण झीजक और शरम उसके अस्तित्व को घेरे हुवे थी. ये बातें उसके चरित्र की सुंदरता को और ज़्यादा बढ़ाती थी. राज भी अंजान नही था अपनी आलिया के इस स्वाभाव से. मन ही मन मुस्कुराता था वो आलिया की इन बातों पर. तभी तो उसे छेड़ता था बार बार. काम रस भी प्रेमियों की जींदगी में उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की प्रेम रस.
आलिया करवटें बदलती रही रात भर. बड़ी मुश्किल से आँख लगी थी उसकी. यही हाल राज का भी था. आलिया तो सुबह ५ बजे ही उठ गयी. ६ बजे राज की आँख खुली तो उसने देखा कि आलिया गुमसुम और उदास बैठी है बिस्तर पर. राज आलिया के पास आया और बोला, “क्या हुवा जान…इतनी परेशान सी क्यों लग रही हो?”
“पहले मेरे सवाल का जवाब दो ना प्लीज़. पहले मैने सवाल किया है.”
“हां आलिया झूठ नही बोलूँगा. उस वक्त अधर्मी लोगो से चिढ़ता था मैं. देश में कही भी टेररिस्ट अटॅक होता था तो बहुत गालिया देता था मैं. काई बार मन में ख़याल आता था कि मेरे पड़ोस में भी टेररिस्ट रह रहे हैं. तुम लोगो से लड़ाई और ज़्यादा नफ़रत पैदा करती थी तुम्हारे प्रति.”
“झूठ नही बोल सकते थे…इतना कड़वा सच बोलने की क्या ज़रूरत थी.” आलिया रो पड़ी बोलते-बोलते.
“जान…तुमने सवाल सच जान-ने के लिए किया था या फिर झूठ. अब तुम बताओ कि तुम क्यों नफ़रत करती तू मुझसे.”
“मुझे कभी किसी धर्मी के नज़दीक जाने की इच्छा नही होती थी, क्योंकि मुझे यही लगता था कि ये लोग हमें दबाते हैं इस देश में. माइनोरिटी होने के कारण हमारे साथ हर जगह भेदभाव होता है. कॉलेज में मेरे सभी अधर्मी फ्रेंड्स ही थे. और हम लोगो के परिवारों का लड़ाई झगड़ा होने के कारण तुमसे नफ़रत और ज़्यादा बढ़ गयी थी.”
“शुक्र है शादी होने से पहले ये राज खुल गये.” राज ने कहा.
“तो क्या अब हम शादी नही करेंगे.” आलिया ने बड़ी मासूमियत से पूछा.
“तुम बताओ क्या इरादा है तुम्हारा?”
एक पल को खामोशी छा गयी दोनो के बीच. दोनो बहुत करीब पड़े थे एक दूसरे के. कुछ कहने की बजाए दोनो एक दूसरे की आँखो में झाँक रहे थे. कब उनके होन्ट मिल गये एक दूसरे से उन्हे पता ही नही चला. दोनो के होन्ट एक साथ हरकत कर रहे थे. १० मिनिट तक बेतहाशा चूमते रहे दोनो एक दूसरे को. जब उनके होन्ट जुदा हुवे तो बड़े प्यार से देख रहे थे दोनो एक दूसरे को.
“मिल गया जवाब.” राज ने हंसते हुवे पूछा.
“हां मिल गया. यही कह सकती हूँ कि प्यार के आगे ये बातें कुछ मायने नही रखती.”
“हां हम एक दूसरे के करीब आए तो हम जान पाए एक दूसरे को. वरना तो जींदगी भर नफ़रत बनी रहती.हम एक महीना साथ रहे तो धरम की झूठी दीवार गिर गयी. दीवार गिरने के बाद हम उसके पीछे खड़े असली इंसान को देख पाए. काश इस देश में हर कोई ऐसा कर पाए. मैं अपने पहले के विचारों के लिए शर्मिंदा हूँ.”
“मैं भी शर्मिंदा हूँ राज. अच्छा हुवा जो कि हमें प्यार हुवा और हम एक दूसरे को जान पाए. प्यार में बहुत ताक़त होती है ना राज.”
“हां बहुत ज़्यादा ताक़त होती है. ये प्यार आलिया जैसी लड़की को भी किस करना सीखा देता है. ऑम्ग फिर से बहुत प्यारा चुंबन दिया तुमने.”
“हटो छोड़ो मुझे…तुम फिर से शैतानी पर उतर आए.”
राज और आलिया बिस्तर पड़े हुवे प्यार के उस कोमल अहसास को पा रहे थे जिसके लिए ज़्यादा तर लोग जीवन भर तरसते हैं. दोनो की आँखों में बहुत सारे सपने थे आने वाली जींदगी के लिए और दिलों में ढेर सारी उमंग थी.
जब दिल में बहुत ज़्यादा खुशी हो तो अक्सर आँखो की नींद खो जाती है. दिल हर वक्त बेचैन सा रहता है. ऐसा ही कुछ हो रहा था राज और आलिया के साथ.एक तो चुंबन की खुमारी थी उपर से होने वाली शादी की खुशी. दोनो पर अजीब सा नशा कर दिया था प्यार ने.
अचानक आलिया को कुछ ख़याल आया, “राज हम जब से मार्केट से आयें हैं यही पड़े हैं. क्या हमने खाना खाया?”
“अरे खा लेंगे खाना भी. जब तुम पास हो तो भूक प्यास किस कम्बख़त को लगती है.”
“अरे कैसी बात कर रहे हो. खाना खा कर हमे जल्दी सो जाना चाहिए. सुबह जल्दी उठ कर हमें तैयार भी तो होना है.” आलिया ने कहा.
“मैं तो किसी भी वक्त उठ कर मॅनेज कर लूँगा. तुम लड़कियों को ही वक्त लगता है तैयार होने में.”
“मेरी शादी हो रही है…तैयार होने में वक्त तो लगेगा ना.”
“अच्छा बाबा मैं ऑर्डर देता हूँ. तुम एक गरमा गरम चुंबन तैयार रखो. खाने के बाद स्वीट डिश की तरह काम आएगा.”
“जी हां जनाब बिल्कुल. मेरा तो यही काम रह गया है. चलिए अपना रास्ता देखिए… मुझे और भी बहुत काम हैं.”
“काम कैसा काम?”
“मुझे बहुत कुछ सोचना है कल के बारे में. मुझे ये भी नही पता अभी कि शादी के लिए तैयार कैसे होना है.”
“हो जाएगा सब…तुम चिंता मत करो…मैं खाने का ऑर्डर देता हूँ…क्या लोगि तुम.”
“मॅंगा लो कुछ भी ज़्यादा भूक तो है नही.”
“ओके.” राज ने फोन उठा कर खाने के लिए बोल दिया.
खाना खाने के बाद आलिया बिस्तर पर पसर गयी और बोली, “अब यहा कोई भी आने की जुर्रत ना करे. हमें नींद आ रही है.”
“हहहे….झूठ बोल रही हो तुम.नींद नही आने वाली आज…चाहे कुछ कर लो तुम. मेरी बाहों में रहोगी तो शायद नींद आ भी जाए. अकेले तो बिल्कुल भी नही सो पाओगी तुम”
“कुछ भी हो यहा नही आओगे तुम अब.”
“कोई बात नही जान. आज रात छोड देता हूँ तुम्हे अकेला. कल से देखता हूँ कैसे भगोगी मुझे तुम बिस्तर से.”
“कल की कल देखेंगे.” आलिया ने होंटो पर प्यारी सी मुस्कान बिखेर कर कहा.
प्यार ने धीरे धीरे एक हसीन कामुक रस भर दिया था दोनो की जींदगी में. इन्ही बातों के कारण आलिया राज से शरमाने लगी थी. हर पल उनका रिश्ता नया रूप ले रहा था और नये रंग में रंग रहा था. प्यार हर तरह के रंग भरने की कोशिश करता है प्रेमियों की जींदगी में. आलिया खुश थी मगर अपने संस्कारों के कारण झीजक और शरम उसके अस्तित्व को घेरे हुवे थी. ये बातें उसके चरित्र की सुंदरता को और ज़्यादा बढ़ाती थी. राज भी अंजान नही था अपनी आलिया के इस स्वाभाव से. मन ही मन मुस्कुराता था वो आलिया की इन बातों पर. तभी तो उसे छेड़ता था बार बार. काम रस भी प्रेमियों की जींदगी में उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की प्रेम रस.
आलिया करवटें बदलती रही रात भर. बड़ी मुश्किल से आँख लगी थी उसकी. यही हाल राज का भी था. आलिया तो सुबह ५ बजे ही उठ गयी. ६ बजे राज की आँख खुली तो उसने देखा कि आलिया गुमसुम और उदास बैठी है बिस्तर पर. राज आलिया के पास आया और बोला, “क्या हुवा जान…इतनी परेशान सी क्यों लग रही हो?”