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Romance प्यार ही काफी है मेरे लिए

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जय और राज ने पीछे मुड़कर देखा तो उनके होश उड़ गए, सामने वार्डन खड़ा था ।

वॉर्डन - कहां से आ रहे हो दोनों?

राज ( हडबडा कर ) - वो.वह.. सर हम.

जय - सर वह बस यही से आ रहे हैं ।

वॉर्डन - यहीं का मतलब कहां से आ रहे हो ? मैंने तो तुम्हें बहुत देर से नहीं देखा । सच सच बताओ , कहां थे ?

राज - सर सच कह रहे हैं , हम तो यहीं थे ।

वार्डन (गुस्से में )- तुम दोनों ऐसे नहीं मानोगे , चलो मेरे साथ यह सुनते ही अब जय और राज परेशान हो एक दूसरे को देखने लगे कि तभी पीछे से मंजीत भागता आया - अरे तुम दोनों ने अपना काम कर दिया ?

जय और राज के साथ-साथ वार्डन भी चौक , पर मंजीत को देखने लगा - क्या मतलब है तुम्हारा? क्या काम किया इन्होंने ?

मंजीत -सर वह कैप्टन ने मुझे कहा था कि पूरे कैम्प को एक बार चेक करके आओ कि सब कुछ ठीक-ठाक हो गया या नहीं , कहीं कोई चूक तो नहीं है तो मैं कैंप को चेक कर रहा था अकेला कि मुझे कुछ काम आ गया था तो मैंने इन दोनों को भेज दिया चेक करने के लिए तो वही पूछ रहा हूं कि ढंग से चेक किया या नहीं ?

वार्डन अब जय और राज की ओर देखा - तो पहले क्यों नहीं बताया तुम लोगों ने ?

राज - वह सर हम डर गए थे थोड़ा कि आप कहीं यह ना कह दे कि जब काम मंजीत का था तो तुम क्यों कर रहे थे - कहते हुए उसने उदास होने का नाटक किया।

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वार्डन - अच्छा ठीक है , अगली बार मुझे बताए बिना कहीं नहीं जाओगे और मंजीत , तुम अपना काम खुद करना सीखो समझे ।

मंजीत - जी सर।

वार्डन अब वहां से चला गया , उसके आंखों से ओझल होते ही तीनों ने चैन की सांस ली ।

राज (गुस्से में ) - कहां चला गया था तू मंजीत? एक काम भी नहीं हुआ । आज पकड़े जाते ?

जय ने मंजीत को चुप रहने का इशारा किया और बोला - शांत हो जाओ राज , सब ठीक है । अगर बात बिगड़ी थी तो मंजीत ने आकर सही समय पर संभाल भी ली ।

मंजीत - रहने दे जय , किस गधे को समझा रहा है और मुझे सच में कैंप्टन सर ने पूरा कैम्प चैक , करने को भेजा था। मुझे ही पता है कितनी मुश्किल से मैं काम खत्म कर वहां से यहां आया हूं ।

राज - ठीक है , चलो यहां से इससे पहले कि कोई और देख ले।

अब तीनों जाकर बाकी लोगों के साथ बैठ गए ।

ललिता , डॉली आपस में गप्पे लड़ा रही थी ।

डॉली - तुझे क्या लगता है , वह दोनों पकड़े तो नहीं गए ना?

ललिता - पता नहीं लेकिन पकड़े गए तो सजा जरूर मिलेगी। मैंने सुना है , आर्मी वाले बड़े सख्त होते हैं ।

डॉली - मेरी वजह से इतना खतरा लिया इन्होंने , , मैं तो अब मना कर दूंगी कि कोई जरूरत नहीं है आने की।

यह सुन ललिता थोड़ी बेचैन हो गई कि अगर यह मना कर देगी तो वह जय को फिर कैसे देख पाएगी फिर अगले ही पल वो खुद की सोच पर हैरान रह गई कि वह ऐसा क्यों सोच रही है ? जय को देखकर उसे करना भी क्या है ?

डॉली ने ललिता को चुप देखा तो बोली - क्या हुआ? कहां खो गई ??

ललिता - कहीं नहीं , मैं सोच रही थी कि अगर तु मना कर देगी तो फिर राज से कैसे मिलेगी ।

डॉली - लेकिन यार अपनी खुशी के लिए उसे तो खतरे में नहीं डाल सकते , कुछ समझ नहीं आ रहा क्या करूं ? इससे अच्छा तो मैं अकेली ही ठीक थी , ना कोई चिंता ना कोई फिक्र।

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ललिता (कुछ सोचते हुए) - अगर उन्हें इधर आने में रिस्क उठाना पड़ता है तो हम उन का रिस्क कम तो कर ही सकते हैं।

डॉली (चौक कर) - वह कैसे ?

ललिता - देख, अभी दोनों को आने जाने की परेशानी है तो एक काम करते हैं कि हम उनके कैंप के पास चलेंगे और मौका देखकर वह भी आ जाएंगे । कैंप के आसपास होने से यह फायदा होगा कि अगर उन्हें जरा भी गड़बड़ लगी तो आसानी से और जल्दी ही वापस कैंप में पहुंच जाएंगे ।

डॉली -वाह यार तूने तो कमाल ही कर दिया !यह तो बहुत ही अच्छा आईडिया है ।

ललिता -देखा , मुझमें भी दिमाग है ।

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डॉली (हंसते हुए )- दिल भी तो है तुझ में । सच बता कैसा लगा जय ?

ललिता (मुस्कुरा कर ) - अच्छा लड़का है । समझदार है , शांत है ।

डॉली - हाँ वो तो है और बातें भी अच्छी कर लेता है

ललिता - हां , तुझी से तो बात करता है । मुझे तो ढंग से देखा भी नहीं ।

डॉली - कोई बात नहीं , अब की बार तू खूब बात कर लेना उससे - कहती हुई डॉली हंस पड़ी।

ललिता - चल आजा , थोड़ा आराम कर ले और बाद में फोन कर राज से पूछ लेना कि सब कुछ ठीक है या नहीं ?

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डॉली - हां पूछ लूंगी।

रात में कैंप की सुरक्षा की जिम्मेदारी बाकी कुछ लोगों के साथ जय , मंजीत और राज पर भी थी। तीन-तीन लोगों की टोली बनाकर उन्हें कैंप में अलग-अलग दिशाओं पर अलग-अलग हिस्से पर नजर रखने को भेजा गया।

जय आराम से जमीन पर बैठा आसमान में चमकते हुए तारों को देख रहा था और राज मंजीत आपस में बातें करने में बिजी थे ।

मनजीत - तो कैसा रहा राज तुम्हारा आज का दिन?

राज - अरे यार सारा टाइम कैसे पलक झपकते ही निकल गया , पता ही नहीं चला । पहले हम , लोगों ने बैठकर थोड़ी देर बातें की फिर मूवी देखने गए और अब यहां लेकिन यार क्या करू? जितना भी समय बिताओ, कम ही लगता है।

मंजीत ( हंसते हुए ) - वह तो है । ऐसा ही मुझे लगता है कि अपने परिवार और बच्चे के साथ वक्त बिताऊं । अब दोनों ने शांत बैठे जय की ओर देखा और जाकर उसके अगल बगल में बैठ गए ।

मंजीत - क्या बात है कबीरे , किस सोच में डूबा हुआ है ?

राज - लगता है , हम दोनों को खुश देखकर अब इसका भी मन कर रहा है कोई अच्छी सी लड़की ढूंढने का ।

जय ( हंसते हुए ) - ऐसा है , मैं अकेला ही खुश हूं । खुद को देखो, दोनों के पास अपने पार्टनर है फिर भी खुश नहीं हो। हर वक्त उनके ख्यालों में डूबे रहते हो और एक ही शिकायत कि , टाइम नहीं मिलता लेकिन मुझे देखो , मैं बड़े सुकून से खुले आसमान के नीचे आराम से बैठा हूं ।-तो बताओ कौन ज्यादा खुश है - तुम दोनों या मैं ?

मंजीत (हंसते हुए) - कबीरे तेरी बात में दम तो है ।अकेले होते हैं तो जैसा चाहो , करो। यह टेंशन नहीं होती कि अभी इस को फोन करना है या इसके सामने ऐसा करना है या वैसा कहना है । एकदम आजाद ।

राज मुस्कुरा उठा - हां सुकून सा चला जाता है ।

जय - तो तुम दोनों मान ही गए कि मैं तुम दोनों से ज्यादा खुश हूं अकेले ही?

राज - नहीं नहीं ऐसा कब कहा? हर चीज का अपना मजा होता है। अब लड़की साथ होती है तो फिर केयर भी बहुत करती है प्यार भी बहुत करती है तो लगता है कि हाँ, कोई है जिसे हमारी , . फिक्र है।

जय - रहने दे । अपनी फिक्र में खुद कर सकता हूं अभी और मेरे लिए मेरी माँ ही काफी है मेरा ध्यान रखने के लिए।

मंजीत - कह तो सही रहा है कबीरे ।

राज - चुप रहा कर कबीरे के मंजीते । अरे अपनी कोई खुद की राय है भी या नहीं तेरी ? या जो भी जय बोलेगा , उसमें में बैल की तरह सिर हिला देता है ।

मंजीत - तो क्या करूं , मेरा दोस्त कभी कुछ गलत बोलता ही नहीं ।

राज - तुझसे नहीं जीता जा सकता , कहते हुए वह खड़ा हुआ और आगे बढ़ गया ।

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जय - कहां जा रहा है ?

मंजीत (हंसी को छुपाते हुए) - और कहां जा रहा होगा,हमारी भाभी को फोन करने के लिए जा रहा है ।

यह सुनकर राज ने हंसते हुए पीछे देखा - हां उसी को फोन कर रहा हूं , थोड़ा टहलना भी हो जाएगा - कहते हुए वह फोन पर बातें करता हुआ कुछ ही दूर पर खड़ा हो गया

जय - चल एक बार देख ले , सब ठीक है या नहीं ।

अब दोनों उठ खड़े हुए और अपने आसपास की सुरक्षा देखने लगे।

डॉली - तुम दोनों सही सलामत पहुंच गए थे ना , और किसी ने पकडा तो नहीं ?

राज - नहीं यार पर बाल बाल बचे । वार्डन ने पकड़ लिया था, वो तो एन वक्त पर मंजीत ने आकर बात सम्भाल ली ।

डॉली (उदास हो ) - मेरी वजह से तुम लोगों को बहुत परेशानी हुई ना ?

राज ( हंसते हुए) - अरे जब तक रिस्क ना हो , तब तक जीने का मजा ही क्या ? कम से कम तुम 10 लोगों से कह तो सकोगी कि राज तुम्हारे लिए कितना खतरा उठा कर मिलने आता था ।

यह सुनकर डॉली हंसने लगी - वह तो उन्हें वैसे भी पता पड़ जाएगा , जब उन्हें पता चलेगा कि तुम आर्मी वाले हो ।

राज - हां यह भी सही है ।

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डॉली - अच्छा हमने कुछ सोचा है इसी वजह से ।

राज - हमने मतलब?

डॉली - मतलब मैंने और ललिता नें सोचा हैं कि कल हम लोग तुम्हारे कैंप की तरफ ही आ जाएंगे जिससे शाम को तुम आसानी से हम से मिल सकोगे और कुछ भी टेंशन हुई तो आराम से वापस भी जा पाओगे ।

राज ( मुस्कुराते हुए) - अरे वाह तुम तो बड़ी सयानी निकली।

डॉली - ललिता का प्लान है यह ।

राज - ओह, तो ललिता का खुराफाती दिमाग है यह , कह कर वह हंसने लगा ।

उसे ऐसे देख मंजीत ने जय से कहा - देख तो, , लड़के की हँसी रूकने का नाम नहीं ले रही है ।

जय - वही देख रहा हूं ।

मंजीत - जाकर तंग करूँ क्या ?

जय - तुझे भी चैन नहीं पड़ता, जब तक एक बार उससे बहस ना कर से, कहते हुए लेते हुए वह एक पेड़ के नीचे पीठ लगा कर बैठ गया ।

मंजीत भी उसके पास आकर बैठ गया और राज को पुकारा - राज थोड़ा आराम कर ले हम , तू तब तक ध्यान रखना।

राज ने हां में सिर हिला दिया।

मंजीत जय की गोद में सिर रख सो गया ।
 
जय ( हंसते हुए ) - मंजीते, क्या बात है ? मां की याद आ रही है या भाभी जी की?

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मनजीत हंसते हुए बोला - याद तब आएगी जब भूलेंगे लेकिन हम फौजियों के लिए यहां अपने दोस्त ही मां- बाप, भाई - बहन सब कुछ है , जमीन हमारी बिस्तर है ,दोस्तों की गोद तकिया और ये खुला आसमान चादर । हम लोगों को और चाहिए भी क्या ? घर तो उसी दिन छूट जाता है जिस दिन पहली बार ये वर्दी पहनते हैं ।

जय - सही कहा । इस वर्दी के साथ जीना मरना भी बड़े गर्व की बात होती है ।

मंजीत - वह सब तो ठीक है पर कभी-कभी डर लगता है अपने बेटे के लिए । अगर मुझे कुछ हुआ तो वह बिना बाप के कैसे जिएगा?

जय - हम्म, समझ सकता हूं । बिना बाप के जीना कितना बुरा होता है , कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है पर तू फिक्र ना कर ऐसा कुछ नहीं होगा । भगवान ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे ।

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राज - तुम्हें डर तो नहीं लगता ना ?

डॉली - डर किस बात से ?

राज - यही कि शायद तुमनें गलत आदमी से प्यार कर लिया, हूँ तो एक फौजी ही । पता नहीं कब क्या हो जाए। अगर मुझे कुछ हो गया तो क्या तुम मुझे भूलकर आगे बढ़ पाओगी ?

डॉली - तुम ऐसी बातें क्यों कर रहे हो ? कुछ नहीं होगा तुम्हें, देख लेना । मैंने सिर्फ तुमसे ही प्यार किया है , किसी और के लिए इस दिल में कभी कोई जगह नहीं बन सकती । मुझे तो गर्व है कि मेरा राज फौज में है और तुम हो कि ऐसी बातें करते हो ?

राज हंसने लगा ।

डॉली - मुझे लगता है कि तुम बहुत थक गए हो , इसीलिए ऐसी बहकी बहकी बातें कर रहे हो ।

राज ने अब जय और मंजीत की ओर देखा तो वह दोनों सो चुके थे , यह देख उसके चेहरे पर मुस्कुराहट तैर गई।

डॉली - तुम सुन रहे हो राज ?

राज अब एकदम से होश में आया - हां सुन रहा हूं ।

डॉली - झूठ । लगता है , मैं तुम्हें बोर कर रही हूं । मेरी बातें तभी नहीं सुन रहे तुम।

राज - अरे ऐसी बात नहीं है यार, दरअसल मेरा ध्यान मंजीत और जय की तरफ चला गया था । कुछ देर पहले ही दोनों बातें कर रहे थे और अब सो गए हैं ।

, डॉली - अच्छा ठीक है , तुम भी सो जाओ । कल बता देना कि हम लोग कब तुम्हारे कैंप की तरफ आए।

राज - जरूर , कल तुम्हारी कोचिंग क्लास भी तो है ना मेन एग्जाम की तैयारी के लिए ?

डॉली - हां ।

राज - तुम भी सो जाओ । डॉली ने अब फोन रख दिया ।

राज अब धीरे से जय के दूसरी और बैठ गया । उनका एक और साथी आया, राज नेे इशारे से उसे धीरे बोलने को कहा। उसने बताया कि तुम्हारी ड्यूटी अब खत्म हो गई है ,अब दूसरी टोली की बारी है । तुम अब सो सकते हो , कहते हुए वह चला गया।

राज ने मंजीत को जय की गोद में सिर रख कर सोते देखा तो हंसते हुए बडबडाया कि जौंक की , तरह चिपक गया है जय से, एकदम सौतन वाला काम है इसका । अब मै कहाँ सिर रखकर सोँऊ? कहते हुए वह परेशान सा इधर उधर देखने लगा कि जय की आवाज उसके कानों में पड़ी - इधर उधर मत देख, मेरे कंधे पर सिर रख कर सोजा ।

राज ने हैरानी से जय को देखा, उसने आँखें खोली और मुस्कुरा दिया।

राज - तु सोया नहीं?

जय -कैसे सो सकता हूं ? ये मंजीत पहले ही सो गया था और तू फोन पर बिजी था। अब किसी को तो ड्यूटी करनी पड़ेगी ना

राज ( हंसते हुए ) - क्या यार, मैं तो डर ही गया था कि सोते हुए किससे बड़बड़ा रहा है ये लडका ।

राज ने जय के कंधे पर सिर टिकाया और दोनों , सो गए ।

अगले दिन दो माकँ ड्रिल खत्म होते-होते दोपहर हो गई , सभी पसीने से लथपथ फौजी बैठकर आराम करने लगे।

राज - यार सुबह-सुबह अच्छी कसरत हो गई ।

जय ( हाँफते हुए ) - हां सही कहा ।

राज नेे कल रात ललिता वाला प्लान जय को बताया कि वो दोनों इधर ही आ जाएंगी।

दोनों अभी बात कर ही रहे थे कि वार्डन आया - जय कुछ सामान है जो मार्केट से लेकर आना है, ये लो लिस्ट और बाइक की चाबी - यह कहते हुए उसने लिस्ट और चाबी जय को थमा दी ।

जय -जी सर।

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वार्डन वहां से चला गया ।

राज - यार इतना भी सीधा मत बना कि कोई दूसरा काम निकला नहीं कि जय की याद आई नहीं ।

जय - अच्छा है , थोड़ा घूम आऊंगा इसी बहाने।

तभी राज को कुछ याद आया - अच्छा तुझे कितना टाइम लगेगा अभी निकलने में ?

जय - 10 मिनट में निकल ही रहा हूँ ।

राज - तो डॉली के लिए चिठ्ठी लिख रहा हूँ , उसे देते आना।

जय - पागल है क्या ? फोन से बात कर लेना।

, . राज - जो मजा पुराने जमाने की चिट्ठियां लिखने में है , वह फोन में कहां ?

जय - चल मैं तैयार होने जा रहा हूं , जब तक तुझे जो लिखना है लिख ले ।

राज मैं बस 5 मिनट में आया, कहते हुए वह भाग गया ।
 
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