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Romance प्रेम कहानी डॉली और राज की

पिछले 3 साल से,,, जब से वह बोलना सीखी थी ,तब से उसने डैड की रट लगा रखी थी ।

और काम्या उससे यही कह देती थी।

कि बेटा डैड आपसे मिलने बहुत जल्दी आएंगे ।

और इस बार भी काम्या उससे यही कह कर गई थी,,, कि इस बार मैं आपके डैड को लेने जा रही हूं ।

आप आंटी के पास ठीक से रहना ,और मैं और डैड कर हम सब मिलकर अपने घर चलेंगे ।

और इस बार सौम्या को पूरा विश्वास था कि वह अपनी मॉम डैड के साथ ही रहेगी और उसके दादा-दादी के पास भी जाएगी ।

जैसे ही काम्या ने सौम्या को कुछ समझाना चाहा,,,, कि राज ने काम्या को कुछ चुप रहने का इशारा किया ।

और जब सौम्या खेलती हुई दूसरे कमरे में चली गई ,तो राज ने उसे समझाया,,,,

काम्या,,, वह बहुत छोटी बच्ची है ।

उसके सामने कोई भी बात अभी मत कहो ,,,उसे एक-दो दिन का समय दो जब हम तुम्हारे घर जाकर तुम्हारी फैमिली वालों से मिलेंगे ।

उसे अपने परिवार के और भी मेंबर मिलेंगे ,,,,तो वह उन सब में बिजी हो जाएगी।

तब तुम धीरे-धीरे सारी बातें उसे समझा देना।

इस तरह से कुछ कहोगी ,,छोटी सी बच्ची के दिमाग पर गलत असर पड़ सकता है।

जब सौम्या दोबारा राज के साथ अपने कमरे में खेलने में व्यस्त हो गई ।

तो काम्या ने अपनी मकान मालिक को धीरे धीरे सब कुछ बता दिया।

यह सचमुच बहुत बड़ा हादसा था ।

या कह सकते है ,,,कि अनहोनी थी।

इस बात की तो किसी ने उम्मीद भी नहीं की थी ।

सुनकर उन्हें भी बहुत दुख हुआ काम्या ने बताया ,,,कि अब मैं अपनी ससुराल जाऊँगी,,,,, और फिर देखते हैं क्या होता है ।

अभी तो मुझे खुद ही कुछ नहीं पता । दो-तीन दिन यहाँ पर सारा सामान पैक किया ,,,और तीनों एक बार फिर काम्या की ससुराल जाने के लिए निकल गए। सफर

कुछ लंबा था ,दो-तीन दिनों बाद पता लगाते हुए वहां पहुंचे।

मकान नंबर ,नाम और एड्रेस ,बिल्कुल सही सही मिल चुका था ।

अपनी गाड़ी थोड़ी दूर पर खड़ी करके सौम्या को गाड़ी में छोड़ कर ही।

काम्या और राज मेन दरवाजे पर पहुंचे और जब बैल बचाई ,,,,तो कुछ उम्र दराज दो व्यक्ति बाहर निकले।

शायद दोनों पति-पत्नी थे ।

जब काम्या ने ध्यान से देखा तो समझ आ गया ,,,कि यह, राजीव के मम्मी पापा है ।

काम्या तो खुद ही अपराध बोध से दबी हुई थी । कहीं ना कहीं उसे इस सब में अपना ही कसूर लग रहा था ।

बस सोच ही नहीं पा रही थी, क्या एक मां बाप को उनके के जवान

बेटे की इस दुखद मौत की बात कैसे बताऊं ।

वह राज की तरफ देख रही थी ।

और वह दोनों काम्या को ।

जब कुछ देर तक वह कुछ नहीं बोली ,तो उन्होंने ही आगे बढ़ते हुए काम्या से पूछा जी कहिए !

आपको किससे मिलना है

जी,,,जी,,, वह मुझे आपसे ही मिलना है

मुझसे बताइए क्या काम है

अब तो काम्या कुछ भी नहीं सोच पा रही थी ,कि वह

कहे क्या ,काम्या राजीव को ही याद कर रही थी।

कि वह उसे छोड़कर चला गया है।

और ये कैसा मोड़ उसके सामने आया है फूट-फूटकर रोते हुए काम्या उनके पैरों में जा गिरी ।

काम्या अंदर से बहुत भयभीत थी ।

लेकिन अब उसके पास कोई भी चारा नहीं था ।

अब तो वो वक्त आ ही गया था।

कि उसका अंजाम चाहे कुछ भी हो उसे उन लोगों को सब कुछ सच-सच बताना ही था ।

और काम्या ने शुरू से लेकर अंत तक की सारी कहानी रोते हुए उनके सामने रख दी थी।

इसमें काम्या को अपनी ही गलती लग रही थी ।

लेकिन एक मां बाप के लिए इससे बड़ा दुख और क्या हो सकता था,,, जिसे अपने बेटे की मौत के पूरे 15 दिन बाद यह पता चला है,,,, कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है ।

उन्हें तो यही लगा, कि शायद कभी-कभी वह अपने काम में इतना व्यस्त हो जाता है। कि उसे फोन करने का भी समय नहीं मिलता ,और इसी वजह से उससे बात नहीं हुई होगी ।

राजीव के माता-पिता ने कई बार उसे फोन लगाया था । लेकिन उसका फोन नॉट रिचेबल आ रहा था ।

वह राजीव को लेकर इन 15 दिनों से काफी चिंतित भी थे ।

लेकिन यह जो उन्होंने सुना ,,,यह तो उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं था। एक जवान बेटे की मौत सदमे से

भी कहीं बढ़कर होती है ।

वह सोच नहीं पा रहे थे ,यह सब है क्या लेकिन कहते हैं ना,,,, कि इंसान गुस्से में और दुख में अंधा हो जाता है।

कुछ ऐसा ही उनके साथ भी हुआ।

इस वक्त उन्हें काम्या की कोई भी बात सही नहीं लग रही थी ।

राजीव की मां तो यह सुन कर बेहोश हो गई थी ।

और राजीव के पिता अपने बेटे की मौत का गम और अपनी पत्नी की ऐसी हालत देखकर काम्या पर ही बिफर पड़े ।

उन्होंने काम्या को बहुत भला बुरा कहा यहां तक कह दिया ,,,,

कि ऐसी औरत मेरे बेटे की पत्नी हो ही नहीं सकती ।

जब मेरा बेटा इस दुनिया में नहीं है ।

तुझे तब याद आई है उसके घर की ।

इतने सालों तक अपना रिश्ता छुपा कर रखा ,,,,,तुम जो कह रही हो,,, मुझे तुम्हारी बात पर जरा सा भी विश्वास नहीं है ।

यह जरूर एक नाटक है ।

मेरे बेटे की मौत के बाद तुम उसको लेकर मनगढ़ंत कहानियां गढ़ रही हो। और यह जो तुमने प्रेग्नेंट होने की बात कही ,,,, पता नहीं ये किसका बच्चा अपनी कोख में लेकर घूम रही हो ।

और मेरे बेटे को उसका बाप बता रही हो तुम्हारी यह सब बाते यहां नहीं चलेगी। और तुम्हारे साथ कौन है

मुझे तो लगता इन सब में कहीं ना कहीं इसका भी हाथ

है ।

इसके बाद तो वह काम्या की कोई भी बात सुनने को राजी ही नहीं थे ।

काम्या उन्हें कितना कुछ कहना चाहती थी ,,,,कितना कुछ दिखाना चाहती थी। राजीव और अपने बारे में कितना कुछ बताना चाहती थी ।

पर उन्होंने उसकी कोई भी बात नहीं सुनी ।

और धमकी देते हुए कहा ,,,,

कि अगर वह तुरंत इस जगह से नहीं चली जाती,,,, तो पुलिस को बुलाने में भी वह देर नहीं करेंगे।

लेकिन जब राज ने पुलिस का नाम सुना ,,,,तो उसने यहाँ से जाना ही ठीक समझा ।

क्योंकि वह जो माहौल देख रहा था ।

अगर इसमें काम्या को रोका भी जाता तो किसी भी तरह सही नहीं होता ।

एक 5 साल की बच्ची उसके साथ में 2 महीने प्रेग्नेंट भी थी ।

इस हालत में कैसे यहाँ रह पाती।

और अगर सच में उन्होंने पुलिस को इन्फॉर्म कर दिया ,,,,

तो यहां तो राज की पहचान का भी कोई नहीं था ।

पुलिस के चक्कर काटते रहते ,,,,यही सब सोचते हुये राज ने काम्या को समझाया ,,,,,

और चुपचाप अपने साथ ले गया ।

काम्या एक बार फिर कटी पतंग की तरह गाड़ी में जाकर बैठ गई ।

देखते ही सौम्या बोली,,,,

मां क्या हुआ

क्या दादा और दादी से आपकी बात हुई हम कब जाएंगे उनके घर

क्योंकि वह सौम्या को गाड़ी के अंदर ही बैठा कर गए थे ।

उन्हें वहां साथ ले जाना ठीक नहीं लगा। गाड़ी को आगे लेते हुए कुछ देर तक राज ने गाड़ी में ही काम्या से बात की। अब तो काम्या के पास एक ही चारा था यहां से करीब डेढ़ सौ पौने 200 किलोमीटर दूर उसका गांव था ।

जहां उसके बाबा रहते थे ,अभी यही एक रास्ता नजर आ रहा था ।
 
राज ने पूछा !!!!

काम्या तुमने तो कहा था ,कि तुम्हारे बाबा भी तुमसे नाराज है ।

हां पर एक बार कोशिश तो करनी ही होगी ।

हो सकता मेरे बच्चों के बारे में सुनकर शायद मुझे अपने पास रख ले ।

ठीक है ,,,काम्या टैक्सी वाले को अपने गांव का पता बता दो,,,,काम्या ने पता बताया ,,,और सेक्सी वाले ने टैक्सी तेजपुर की तरफ से ली ।

आखिरकार शाम तक दोनो तेजपुर काम्या के घर पर पहुंच चुके थे ।

जैसे ही काम्या बाहर पहुंची ,और गाड़ी बाहर खड़ी

की,,,कि बागान में काम कर रहे कुछ स्त्री और पुरुष काम्या को देखते हुए आसपास के लोगों को भी आवाजे लगाई,,,,, वह देखो,,, देखो,,,, अपनी काम्या आई है ।

और उसके टेक्सी से नीचे उतरने के साथ ही आसपास के सभी लोग काम्या को घेर कर खड़े हो गए ।

काम्या भी सब को देख रही थी।

तभी तक काम्या के घर के पास वाली महिला जल्दी से काम्या के पास आई और उसने काम्या को बताया,,,,

अच्छा किया तू यहां आ गई ,,,,

तेरे बाबा बहुत बीमार है,,, कितना याद करते हैं तुझे ,,,,

हमने डॉक्टर को भुलाकर भी दिखाया।

पर उन्होंने कहा है ,,,कि भगवान उन्हें कभी भी अपने घर बुला सकता है।

बेटा उनके दिल की बीमारी बहुत बढ़ गई है । और बताया है, कि अब ऑपरेशन भी नहीं हो पाएगा।

क्या

इतना सुनते हुए काम्या भागकर अपने घर के अंदर चली गई ।

काम्या के साथ साथ बहुत सारे लोग भी अंदर चले गए थे।

राज अब भी सौम्या के साथ बाहर कार के पास खड़ा था ।

काम्या जाकर अपने बाबा के सामने खड़ी होकर आंखों में आंसू भर कर बोली,,,,

बाबा एक बार मुझे बता दिया होता

कि आप इतनी परेशानी में है।

मैंने आपको कितने पत्र लिखे ,आपसे माफी मांगी,,, बाबा मुझे माफ कर दो।

वह अंदर से बहुत दुखी थे ।

उन्होंने काम्या से मुँह फेरते हुए कहा।

मैं मरूं ,,,या जीयू,,, तू अपनी दुनिया में खुश है ना ,,,,चली जा यहां से ।

जैसे तेरे बिना 6 साल निकाले है ,,,वैसे कुछ दिन और निकाल लूंगा ।

अब तो तेरे लिए वही सब कुछ है ना,,, तू जिसके साथ मुझे छोड़कर गई थी। लेकिन तब तक आसपास के बहुत सारे लोग अंदर इकट्ठे हो गए थे।

उन्होंने काम्या के बाबा को समझाते हुए कहा,,,,,, भाई साहब गलती तो बच्चों से ही होती है ,,मां बाप का काम है ,कि वह डांटे या सुधारे पर माफ करें ।

आज सब कुछ भूल जाओ,, अब आपको अपनी बेटी के साथ की जरुरत है।

बच्चे ही तो मां बाप की सेवा करते हैं। और देखो ना,,, अपने काम्या भागी जरूर थी ।

लेकिन उसने कुछ गलत नहीं किया।

शादी की है ।

इन्ही बातो के बीच सौम्या भागती हुई काम्या के पास आ गई थी।

जब उसने देखा ,,,कि कोई उसकी मां को डाँट रहा है ।

और काम्या लगातार रोए जा रही है।

तो वह गौर से काम्या को देखने लगी तभी कुछ और लोग भी पास बैठकर काम्या के बाबा को समझाने लगे।

बाबा बच्चों के आगे तो सभी हर जाते हैं अरे एक बार बाहर जाकर अपने दामाद को और पास खड़ी हुई अभी छोटी सी नातिन को तो देखो ।

सारे गिले-शिकवे भूल जाएंगे,,,,

जब काम्या के बच्चे आपकी गोद में खेलेंगे ।

वो जब अपने परिवार सहित घर के अंदर आएगी ।

तो कितना अच्छा लगेगा । माफ कर दो काम्या को ,,,,,,

काम्या के बाबा ने नाराज होते हुए कहा मुझे नहीं मिलना किसी से ,,,

अरे काहे का दामाड़ जो मेरी बेटी को भगाकर ले गया था ।

भाईसाब पुरानी बातों को भूल जाओ।

जो हुआ उसके बारे में नहीं ,,,जो होने वाला है,,,,उसके बारे में सोचो,,,

एक नजर अपने दामाद पर तो डालो एक सभ्य ,,,शालीन ,और हीरे की तरह दामाद मिला है आपको।

हम सब उसे देख कर आए हैं।

ऐसे लगता है कि शिवजी का रूप है उसमे।

काम्या लगातार रो रही थी।

और जब काम्या को ऐसा रोता हुआ देखा ,,,,तो सौम्या भागकर गई ।

और राज का हाथ,,,पकड़ते हुए उसे अंदर ले आई।

डैड,,, डैड,,, देखो ना मम्मी कैसी रो रही है ।

और ये बाबा जी मम्मी को डांट रहे है।

आप भी उन्हें डांटना,,,,राज सबके बीच एक मिट्टी की मूरत सा खड़ा था ।

उसे समझ नहीं आ रहा था ,कि वह कहे क्या ।

आसपास के लोग उसे काम्या का पति मान रहे थे।

कोई उसकी तारीफ कर रहा था ।

तो कोई उसे लगातार देखे जा रहा था। राज को सौम्या का डैड कहना और काम्या को मॉम कहना ।

सभी लोग इन्हें देख कर खुश भी हो रहे थे।

कि काम्या अपने अपने परिवार के साथ आई है ।

सभी काम्या को देखकर अब तो एक ही बात कह रहे थे,,,,,,

कि काम्या के बाबा ,,,, एक नजर काम्या के परिवार पर तो डालिये,,,,,

आपकी सारी बीमारी औऱ दुख दर्द दूर हो जायेगे,,,,,

और अपने दामाद को तो देखो,,,लाखों में एक है,,,,,, क्योंकि राज की भोली और मुस्कुराती सूरत ने सबको खुश कर दिया था ।

उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा देख कर जैसे तपन में ठंडक का एहसास हो रहा था ।

सब के कहने पर ,,, और अपनी नातिन की आवाज सुनकर,,, जब काम्या के

बाबा ने ,,,, सौम्या और राज को देखा तो ऐसे लगा,,, जैसे राज जैसा दामाद पाकर वो धन्य हो गए हो ।

इशारे से दोनों को अपने पास बुलाया और अपने गले से लगा लिया ।

काम्या एक बार फिर खामोश हो गई वह बहुत कुछ कहना चाहती थी ।

लेकिन बाबा को ऐसी हालत में देखकर कुछ बोल ही नही पाई ।

लेकिन तभी बगल वाले खान चाचा आ गए ,,,जो सौम्या के बाबा के सबसे अच्छे मित्र थे ।

बचपन से लेकर आज तक उन दोनों के बीच कोई भेदभाव कोई लुकाव छुपाव नही था।

काम्या भी उन्हें चाचु बुलाती थी ।

और बाबा के जैसे मान सम्मान भी देती थी।

थोड़ी देर बाद जब सब चले गए ।

और बाबा सौम्या के साथ खेलने में मस्त तो गए ।

तो काम्या ने दूसरे कमरे में जाकर राज के सामने ही खान चाचू को सब कुछ बता दिया ।

सारी सच्चाई बयां कर दी।

किस तरह गलती से राज को उसका पति मान लिया गया है ।

लेकिन ऐसा नहीं है ,,,यह तो सिर्फ इंसानियत के नाते मुझे छोड़ने आए है।

पर खान चाचू समझ चुके थे कि काम्या के बाबा के पास ज्यादा समय नहीं था। खान चाचू ने काम्या को समझाया कि तुम्हारे बाबा मुश्किल से 15,,,20 दिनों के मेहमान ही है ।

मेरे ख्याल से मरते वक्त इतना बड़ा सदमा नहीं देना चाहिए ।

अगर तुम्हारी सच्चाई सुनेंगे ,,तो यह 15 20 दिन भी,,,

तुम सब के साथ नहीं बिता पाएंगे।

बेटा अपनी जिंदगी में पहली बार उन्हें खुशी मिली है ।

उन खुश रह लेने दो ।

सिर्फ इतने दिनों की बात है ।उसके बाद मैं सब को इस बारे में बता दूंगा ।

और फिर हम राज को उनके घर भेज पाएंगे ।

खान ने हाथ जोड़ते हुए राज से विनती करते हुए कहा,,,,

बेटा एक इंसान की जिंदगी की खुशी तुम्हारे हाथ में है।

अगर तुम कुछ दिन के लिए यहां रुक जाते हो ।

तब वह निश्चिंतता से मर पाएंगे ।

अगर उन्होंने काम्या के बारे में इतना बड़ा सच जान लिया ।

तो जाते समय भी अपनी बेटी के लिए इतना बड़ा सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे हमारी तुमसे हाथ जोड़ के विनती है ।

राज के सामने सच में बहुत बड़ी दुविधा थी ।

वह कुछ सोच नहीं पा रहा था ।

कि क्या करे,,,, उसने फोन लगाकर डॉली को सारी सच्चाई बताई ।

क्योंकि पिछले तीन चार दिनों में उसकी

डॉली से बात नहीं हो पाई थी ।
 
पहाड़ी इलाकों के चलते नेटवर्क ठीक से काम नहीं कर रहा था ।

सारी बात सुनकर डॉली को भी यही लगा । कि जिसने तुम्हारे बेटे के लिए इतना बड़ा बलिदान दिया है ।

इतना बड़ा काम किया है।

हम उनके लिये इतना तो कर ही सकते है राज अगर एक मरते इंसान को हम खुशी दे पाते है।

तो इससे बड़ा पुण्य का काम हमारे लिए कुछ और हो ही नही सकता।

डॉली के कहने पर राज ने कुछ दिन यहाँ रुकने का निश्चय कर लिया था ।

स्थिति को देखते हुए और डॉली के कहने पर राज कुछ दिनों के लिए काम्या के घर पर रुक गया था ।

अपनी बेटी के परिवार को देखकर काम्या के बाबा बहुत खुश थे ।अपनी जिंदगी के आखिरी दिनों में ही सही ,पर कुछ वक्त के लिए उन्हें काफी खुशियां मिल गई थी।

धीरे धीरे काम्या के बाबा को यह भी पता चल गया था, कि वह दूसरी बार भी मां बनने वाली है ।और यह जानकर उनकी खुशी भी दुगनी हो गई थी ।

लेकिन अभी तक असल में काम्या के साथ क्या हुआ है, इस सच्चाई से वह वाकिफ नहीं थे ।

और अब उन्हें कुछ भी बताना कहीं से भी सही नहीं था ।

क्योंकि काम्या ने भी अपने आने के बाद डॉक्टर को बुला कर बाबा को दिखा दिया था,।

और उन्होंने कहा था ,यह भगवान के हाथ में है, कि वह इनकी सांसे कितनी देर ,या कितने दिनों तक और चलने देता है ।

यहां तक कि उन्हें सारी दवाइयां देना भी बंद कर दिया गया था ।

क्योंकि दवाइयों से उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ सकती थी।

काम्या तो दुहरी जिंदगी जी रही थी। एक तरफ राजीव का इतना बड़ा दुख।

जिसे वह भुला ही नहीं पा रही थी।

और दूसरी तरफ चेहरे पर झूठी खुशी जो अपने बाबा को दिखा रही थी ।

इसके साथ ही दो बच्चों के साथ अपने आने वाले फ्यूचर की चिंता ।

काम्या की एजुकेशन भी कुछ खास नहीं थी । बस स्कूल पास किया था ।

उसके बाद आगे पढ़ ही नहीं पाई।

अब उसका सहारा उसके बाबा का एक छोटा सा घर ,और एक छोटा सा बागान ही था।

इसी में उसे अपनी और अपने बच्चों की पूरी जिंदगी काटनी थी ।

काम्या चारों तरफ चिंताओं से घिरी थी जबभी बाबा के सामने आती, तो उसके चेहरे पर एक झूठी मुस्कान होती ।

क्योंकि पिछले 6 सालों से बह उन्हें सिर्फ दुखी ही तो देती आई थी ।

और इस चीज का उसको बहुत पछतावा था । जिंदगी ने उसके साथ जो किया, वह बता कर वह अपने बाबा को और दुखी नहीं करना चाहती थी।

अभी तक राज के बारे में भी खान चाचू के अलावा ,किसी औऱ को कुछ भी पता नहीं था ।

काम्य ने सोच लिया था, कि जब तक उसके बाबा जिंदा है।

वह इस बात को राज रखेगी, लेकिन उसके बाद सारी सच्चाई बता कर राज को यहां से वापस भेज देगी ।

फिर

फिर ,,,चाहे उसके लिए ,उसे किसी से भी क्यों ना लड़ना पड़े ।

आखिर उसकी अपनी जिंदगी थी ,उसके अपने फैसले थे ,और इन सब के बीच में बोलने का हक किसी को भी नहीं है ।

यही सोचते हुए दिन निकलते जा रहे थे। सौम्या इन 10,,,15 दिनों में राज से काफी घुलमिल गई थी ।

उसको इतने दिनों से अपने डैड का इंतजार जो था, और एक मासूम सी बच्ची का निश्चल प्रेम देखकर, राज भी उसके काफी करीब आ गया था ।

धीरे-धीरे काम्या के बाबा भी राज को बहुत पसंद करने लगे थे ।

उसकी ईमानदारी और सज्जनता को देखकर वह राज से बहुत प्रभावित हुए थे ।

आज सुबह से ही मौसम काफी अच्छा था ,काम्या के

बाबा भी रोज से कुछ ज्यादा ही एक्टिव और खुश लग रहे थे। अपने आप बिस्तर पर बैठते हुए उन्होंने काम्या को आवाज लगाई ,,,,

बेटा आज बहुत अच्छा दिन है ,,,,

बाबा क्यों क्या है आज

काम्या ने सवाल किया - बेटा यह तो पता नहीं क्या है ,लेकिन हां आज मैं बहुत खुश हूं ।

मेरा मन बहुत अच्छा है - तुझे तेरे परिवार के साथ खुश देख लिया है ।

अब मैं आराम से अपनी आंखें बंद कर पाऊंगा ।

तभी राज भी अंदर आया, और उन्होंने राज को बुलाकर अपने पास बिठाते हुए उसकी आंखों में देख कर कहा - बेटा मुझे फक्र है अपनी बेटी की पसंद पर अगर मुझे पहले पता होता ,कि तुम्हारे जैसा दामाद मेरी बेटी ने ढूंढा है ।

तो शायद मैं कभी इतने दिनों तुमसे दूर नहीं रह पाता ,,,,,

बेटा आज मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना है पता नहीं क्यों ,मुझे ऐसा लग रहा है

जैसे मेरे पास वक्त बहुत कम है।

मेरे बाद काम्या का कोई भी नहीं है

ना कोई रिश्तेदार ,न हीं उसका कोई भाई बहन ,,उसकी मां तो बचपन में ही उसे छोड़कर चली गई थी ।

और शायद बहुत जल्द मैं भी उसके पास पहुंच जाऊंगा ।

एक तुम ही हो मेरी काम्या का ध्यान रखने के लिए ।

मैं जानता हूं, कि इतने सालों तुमने मेरी काम्या को बहुत खुश रखा है ।

और मुझसे बादा करो, कि इसी तरह आगे भी उसका ध्यान रखोगे ।

अचानक बाबा के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर राज देखता ही रह गया। तब तक काम्या ने बात को बदलते हुए कहा- - बाबा आप इस तरह क्यों बोल रहे हैं

कुछ नहीं होगा आपको!

आप बिल्कुल ठीक हो जाएंगे -अब खाना खाकर दवाइयां खाइए ।

यह सब फालतू की बाते मत कीजिए

नहीं काम्या मुझे अपने दामाद से बातें कर लेने दो ।

पता नहीं किस वक्त मेरी सांसे रुक जाए और मेरे मन की बात मन में ही रह जाए। बेटा में नही जानता तुम्हारे घर वाले कौन है ,कहां है ,कैसे हैं,

लेकिन मैं चाहूंगा ,एक बार तुम दोनों जाकर उन्हें मना लो ,बड़े कुछ दिनों अपने बच्चो से नाराज तो रह सकते हैं लेकिन हमेशा के लिए उनसे दूर नहीं हो सकते।

जब खून की बात आती है तो अच्छे-अच्छे पत्थरों के दिल भी पिघल जाते हैं ।

अपना खून सबको प्यारा होता है ,और मुझे पूरा विश्वास है ,कि आपके माता-पिता भी आपको और मेरी काम्या को अपनी बहू के रूप में अपना लेंगे।

एक बार अगर काम्या को अपने घर ले जाओगे ।

तो वह बहुत जल्दी सबका मन जीत लेगी कोशिश

करने के बाद भी, वह अपनी बात कहते ही जा रहे थे ।

लेकिन बात करते हुए ही उनकी सांस भरने लगी,,,, शब्द लड़खड़ाने लगे ,और ऐसे लग रहा था ,जैसे बहुत कोशिश करने के बाद वह कुछ बोल पा रहे हो। उनकी सांसे तेज तेज चलने लगी थी उन्होंने राज का हाथ अपने हाथ में लिया ,और आंखों में देखकर कहने लगे ।

मुझे वचन दो ,मेरी काम्या का हमेशा ध्यान रखोगे ।

मुझसे वादा करो ,,,,,,

अभी तक आसपास के लोग घर के अंदर आ गए थे ।

ऐसे लग रहा था, जैसे कि राज के उत्तर का इंतजार कर रहे हैं ।

उनकी उल्टी सांसे शुरू हो गई थी ,लेकिन राज काम्या को देखता ,और कभी बाबा को ।

उसे खुद समझ नहीं आ रहा था ,वह क्या कहें ।

आसपास खड़े लोग,, राज के कंधे पर हाथ रख कर ,उसे समझाने लगे ।

बेटा लगता है इनकी सांसें तुम्हारे बोलने का इंतजार कर रही है ।

और कष्ट मत दो ,,तुम उन्हें दिलासा दे दो काम्या की तरफ से निश्चिंत हो जाएंगे।

तो आसानी से उनके प्राण निकल पाएंगे वह काम्या के हाथ को और कसके पकड़ते जा रहे थे ।

बेटे मेरी काम्या का ध्यान रखोगे ना

अगर तुम्हारे बाबा तुम्हें ना भी अपनाये तो तुम दोनों यहीं रह कर अपनी दुनिया बसा लेना ।

राज के सामने स्थिति ऐसी थी,, कुछ ना कुछ तो उसे बाबा से कहना ही था ।

उसने बहुत हिम्मत करते हुए कहा --बाबा मैं आपसे वादा करता हूं ,,,,

की काम्या की जिम्मेदारी मैं लेता हूं !

मैं काम्या और बच्चों की सुरक्षा का हमेशा ख्याल रखूंगा!

मैं ख्याल रखूंगा ,कि उन तीनों का भविष्य सुरक्षित कर पाऊं !

राज के मुंह से ऐसी बात सुनी तो कुछ ही पलों में उनकी आंखें बंद हो गई थी। काम्या एक बार फिर से फबक पड़ी थी

अब उसके ऊपर कोई भी नहीं था ।
 
1 महीने के अंदर ही राजीव और बाबा दोनों का हाथ उसके सिर से उठ चुका था एक बार फिर ऐसी स्थिति बनी ।

कि 13 दिनों तक राज को काम्या के साथ रहना ही पड़ा ।

अब काम्या की प्रेगनेंसी पूरे 3 महीने की हो चुकी थी ।

प्रेगनेंसी के दौरान ही इतनी सारी मुसीबतें झेल चुकी थी ,कि उसे कुछ ज्यादा ही कमजोरी आ गई ,और 13 वी के दूसरे दिन ही वह बेहोश होकर गिर पड़ी।

राज जल्दी से उसको लेकर डॉक्टर के यहां गया ।

डॉक्टर ने बताया, कि काम्या के शरीर में काफी कमजोरी है ।

आयरन, कैल्शियम, विटामिंस की भी कमी पाई गई ।

पिछले 1 महीने से तो काम्या ने खाना भी ठीक से नहीं खाया था ।

इस दौरान तो एक्स्ट्रा डाइट की जरूरत रहती है ,और उन्होंने कम से कम पूरे 2 महीने ,यानी कि काम्या के 5 महीने कंप्लीट होने तक उसे टोटल बेड रेस्ट बताया था ।

वरना बच्चा गिर सकता था।

और उसके साथ ही काम्या की जान को भी खतरा हो सकता था ।

पर राज सचमुच ऐसे दोराहे पर आ गया था ।जहां ना उससे रुकते बन रहा था। और ना ही जाते ।

लेकिन जो अच्छाई राज के दिल में थी और जितना बड़ा एहसान काम्या ने राज के ऊपर किया था ।

शायद काम्या की जगह कोई और होता तो पैसे लेने के लिए भी राज पर कई तरह के इल्जाम लगा सकता था।

और फिर बिना स्वार्थ के उसने नीलेश की कितनी बड़ी मदद की थी।

यह सब कुछ सोचते हुए एक बार फिर राज ने अपना मन पक्का करते हुए खुद को यही रोक लिया था।

धीरे-धीरे समय बीत गया ,,,इस बीच राज डॉली से बातें करता रहता था ।

उसे यहां की हर तरह की खबर देता था डॉली ने भी वहां की स्थिति देखते हुए खुद ही राज को रुकने के लिए कहा था। क्योंकि यहां डॉली सक्षम थी।

डॉली के बच्चे भी बड़े थे ,और फिर उसके साथ वहाँ छोटू था ,ढाबे के सभी लोग थे ,तो वह सब कुछ संभाल सकती थी।

लेकिन यहाँ काम्या को ऐसी स्थिति में छोड़ कर आना कहीं से भी सही नहीं था। राज- नीलेश , राजनी ,,काकी के बारे में सब कुछ पूछता रहता था ।

लेकिन उसने अभी तक डॉली को यह नहीं बताया था ।

कि वह किस जगह पर है ,और उसका सिर्फ एक ही कारण था ,कि कहीं डॉली परेशान होकर यहां ना चली आए ।

इसी तरह 5 महीने बीत गए ।

अभी तक राज के पास उसका कार्ड था कुछ पैसे भी थे।

तो यह दो-तीन महीने उन पैसों में चल गए थे ।

लेकिन अब धीरे-धीरे घर का राशन भी खत्म हो चुका था । और इस स्थिति में

काम्या अपने भी सारे काम नहीं कर पा रही थी।

राज का उसके साथ होना बहुत जरूरी था । औऱ फिर राज ने उसके बाबा से प्रॉमिस किया था ।
 
अब जुलाई का महीना आ गया था, सौम्या का एडमिशन कराना भी जरूरी था ,,,एलकेजी यूकेजी तो उसका शहर में ही हो गया था। अब पहली कक्षा का एडमिशन करवाना था ।

सौम्या पूरी तरह से मान चुकी थी, कि उसके डैड सबसे अच्छे हैं ।

सबसे बेस्ट है ।

और 1 मिनट के लिए भी उससे दूर नहीं होती थी ।

काम्या के भी 5 महीने पूरे हो गए थे।

औऱ काम्या ने एक दिन बैठकर राज से बात की,,,,

राज मेरी जिंदगी में तो परेशानियां चलती ही रहेगी ,आखिर आप कब तक अपना परिवार छोड़कर मेरा साथ देंगे। अब आपको जाना चाहिए,,जो भी होगा मैं देख लूंगी ।

धीरे-धीरे कैसे भी सबको सच बता ही दूंगी। आपने मेरे लिए जितना किया है इतना काफी है ।

अब आप और परेशान मत होइए ।

लेकिन काम्या में आपको इस तरह अकेला छोड़ कर

सौम्या के साथ ही एक ऐसे बच्चे का साथ भी है ,जो भी जन्मा भी नहीं है।

4 महीने बाद जब उसकी डिलीवरी होगी सौम्या स्कूल जाएगी ,तो कैसे संभालोगी

सबकुछ

काम्या ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया था, की बात छुपाने से या दबाने से वह सही नहीं हो जाती,,,,, मैं कब तक किसी से झूठ बोलती रहूंगी

झूठ बोलने से आप मेरे नहीं हो जाएंगे! प्लीज आप चले जाइए ,क्योंकि आप जितना यहां रुकेगे, आपके जाने के बाद सौम्या को समझाने में मुझे उतनी ही ज्यादा प्रॉब्लम आने वाली है।

प्लीज राज आप जाइए,,, अपने जितने

एहसान किये है,,, शायद मैं तो उनका बदला भी कभी

ना चुका पाऊं।

राज ने भी अपना मन पक्का कर लिया था , कि काम्या सच ही तो कह रही है आखिर उसकी जिंदगी है ,उसे ही संभालनी होगी।

एक छोटी बच्ची को कितना झूठा दिलासा दे सकता हूं मैं ,,,,

राज अपना बैग लगाने लगा ,,,उसे 2 दिन बाद का रिजर्वेशन भी मिल गया था पर उसने डॉली को अभी नहीं बताया था क्योंकि वह उसे सरप्राइस देना चाहता था लेकिन दूसरे दिन सुबह जब काम्या और राज के बीच बात चल रही थी।

कि वह यहां से 1000 बजे निकलेगा गुआहाटी तक जाएगा, फिर वहां से दूसरी ट्रेन पकड़ना ,,,,,और भी बहुत सारी बातें रास्ते को लेकर चल रही थी।

तभी सौम्या भागती हुई आके,राज के गले लग गई ,,,,,,

डैड आप कहां जा रहे हैं

मैं आपको नहीं जाने दूंगी,,,,, आप नहीं जाएंगे ,आप कितने दिनों बाद हमारे पास आए हैं ,और फिर चले जाएंगे

आप तो मेरे स्कूल भी नहीं चले,और मेरी टीचर जी से भी नहीं मिले ।

अभी तो मैंने स्कूल जाना भी शुरू नहीं किया ,मैं आपको कहीं नहीं जाने दूंगी। और राज के गले लग गई ।

काम्या बड़ी मुश्किल से उसे राज के गले से अलग कर

पाई थी ।

काम्या ने उसे बहुत समझाया ,,,

बेटा डैड को अपनी ड्यूटी पर जाना ही होगा ।अब हमारे पास और नहीं रुक सकते ।

लेकिन वह रोती रही ,,,,छोटी सी बच्ची थी इतनी बहस कैसे करती

आखिरकार थक कर सो गई!

दूसरे दिन सुबह 1000 बजे राज को निकलना था ,,,,काम्या जल्दी उठकर राज के लिए रास्ते का खाना तैयार करने लगी,,, खाना बन चुका था ।

तैयारी भी लग गई, 900 बजे जैसे ही राज जाने के लिए हुआ ,और उसने सौम्या को आवाज लगाई,,,,,

सौम्या!!! सौम्या!!!!

काम्या भी साथ मे आवाज़ लगाने लगी सौम्या,,,,,डैड जा रहे है ,बाहर आओ कुछ देर तक जब सौम्या सामने नहीं आई तो अंदर कमरे में जाकर देखा,,,

राज और काम्या तीनों चारों काम में देख चुके थे ।

वह वहां भी नहीं थी ,उसके बाद बाहर आकर उसे ढूंढने लगे ।

लेकिन वो उन्हें कहीं नहीं मिल रही थी। राज को 1000 बजे जाना था ,लेकिन 1030 बज चुके थे ।

दोनों सौम्या को ढूंढने में लगे थे ।

उनके साथ-साथ आसपास के लोग भी उसे ढूंढने लगे ,,,, तभी सौम्या की एक सहेली जो उसी की उम्र की थी।

उसने आकर अपनी तोतली भाषा में बताया ,,,,,

आंटी सौम्या ने मुझसे कहा था,,,,

कि उसके डैड,,जा रहे है ,,तो वह पहले से ट्रेन में जाकर बैठ जाएगी ।

और वह भी उनके साथ चली जाएगी। क्या

क्या कह रही है तू

सौम्या ने ऐसा कहा था

आंटी अभी जाते हुए उछने यही कहा था और अभी छुबह अपना बैग लेकर वह उस तरफ से गई है ,,,,,

उसने उंगली से इशारा करते हुए बताया क्या ,यह सुनकर सभी बेतहाशा उसी तरफ दौड़ पड़े।

उसने जिस तरफ इशारा किया ,,,,,था

कुछ लोग सौम्या को ढूढ़ते हुये स्टेशन की तरफ भी निकल गये थे।

सभी चारो तरफ जा, जाकर सौम्या को ही ढूढ़ रहे थे,।
 
काम्या बहुत परेशान थी,उसे तो डॉक्टर ने वैसे भी रिलेक्स रहने के लिए कहा था

पर भला इस स्थिति में वह रिलेक्स कैसे रह सकती थी।

दोपहर से शाम हो चुकी थी,पर अभी तक उसका कोई पता नही था,,,,,

आखिरकार पुलिस थाने में जाकर रिपोर्ट लिखवानी पड़ी,,,,और पुलिस भी सौम्या को तलाशने में लग गई,,,,ऐसे में सबको सौम्या के होने का अंदेशा स्टेशन पर ज्यादा था,,,,इसलिये वहाँ पर सबकी नजर काफी ज्याफ़ा थी,पुलिस भी सिविल ड्रेस में ही छानबीन कर

रही थी,जिससे अपराधी पुलिस को देखकर कही सतर्क न हो जाये औऱ वह,,,सौम्या को तलाशने में ना कामयाब रहे।

राज तो पागलों की तरह सुबह से ही घर से बाहर था।

सभी अपनी-अपनी तरह से सौम्या को ढूंढने में व्यस्त थे ।

स्टेशन पर सारी ट्रेनों ,और आने जाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही थी। राज भी यहां से वहां सौम्या को ढूंढ रहा था ।

कुछ ही देर में ट्रेन की एक बोगी में कुछ शोर सुनाई दिया ,और जब राज भागकर वहां पहुंचा, तो देखा देखा कि एक आदमी ने किसी बच्चे को चादर में लपेटकर कंबल में छुपा रखा था ।

और कुछ लोग उससे उस बच्ची को दिखाने की और लेने की कोशिश कर रहे थे । पर वह छुपाने की या फिर बचकर भागने की कोशिश में था ।

लेकिन सौम्या का अनाउंसमेंट स्टेशन पर हो चुका था ,,,कि एक 5 साल की बच्ची लापता है ।

और इसलिए राह चलते लोगों के कानों तक भी यह बात अच्छी तरह से पहुंच चुकी थी । और शायद इसी

को सुनकर ट्रेन में बैठे किसी आदमी ने उस पर शक किया ,और चिल्लाकर आसपास के लोगों को भी बुला लिया।

जिससे कि वह कहीं भागने ना पाए राज जैसे ही वहां पहुंचा, और उसे उस बच्ची का एक पैर दिखा, राज को पहचानने में 1 मिनट भी नहीं लगा, कि यह सौम्या है ।

राज ने जल्दी से सौम्या को उससे लिया और आसपास खड़े लोगों ने उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया ।

राज सौम्या का गाल थपथपाते हुए उसको हिलाने लगा।

तब तक आसपास और सभी लोग आ गए थे।

पुलिस समझ गई थी ,कि सौम्या को जरूर बिस्किट टॉफी में मिलाकर कुछ खिलाया गया है । और इसी की वजह से वह बेहोश है ।

चिंता की बात नहीं है ,कुछ देर बाद होश में आ जाएगी ,लेकिन सबसे बड़ी बात तो यह है ,कि समय रहते बच्ची हमें मिल गई राज सौम्या को लेकर घर आ गया था धीरे-धीरे जब उसे होश आने लगा, तो वह अब भी यही कहती जा रही थी।

डैड आप मुझे छोड़कर मत जाना ,मैं आपके पास ही रहूंगी, मैं भी आपके साथ चलूंगी ।

और राज सौम्या को समझाने लगा बेटा अपुन कही नही जायेगा ,,तेरे पास ही रहेगा,,,, कुछ देर बाद सौम्या को होश आ गया था ।

और वह भी राज की गोद से उतरने का नाम नहीं ले

रही थी ।

तभी डॉली का फोन आया ,और राज ने फोन उठा लिया ,,,कुछ देर तक दोनों के बीच वही सब रोज की बातें होती रही। राज सब कुछ पूछ रहा था।

लेकिन कुछ देर बाद धीरे-धीरे डॉली ने बताया,,, कि कॉलेज से आते वक्त राजनी का एक्सीडेंट हो गया है ।

यह सुनकर ही राज का दिमाग घूम गया था ,,,वह ज्यादा घबराता , या कुछ और पूछता ,,,उससे पहले डॉली ने समझाते हुए कहा ,,,,,राज आप परेशान मत होइए ,राजनी बिल्कुल ठीक है ।

बस एक छोटी सी मोच आई है पैर में।

डॉक्टर को भी दिखा दिया है ,और एक्स-रे भी हो गए हैं ।

कोई परेशानी नहीं है, लेकिन हां राज कुछ ऐसा हुआ है ,जिससे मैं उस छोटी सी बच्ची को भूल ही नहीं पा रही हूं ।

राजनी ने बताया की ,वह बस स्टॉप पर बस का वेट कर रही थी ,तभी पीछे बेंच पर खड़ी एक छोटी 5 साल की बच्ची राजनी को आवाज़ देने लगी,,,, दीदी,,,दीदी मेरा बैग इस बेंच में फंस गया है ,, प्लीज इसे निकाल दो ना।

और जैसे ही राजनी बैग निकालने के लिए बेंच पर चढ़ी ,,,एक बेकाबू कार ठीक उसी जगह टकरा गई, जहां पर पहले राजनी खड़ी थी।

कुछ सेकंड पहले ही राजनी उस बच्ची का बैग निकालने के लिए बेंच पर चढ़ी थी ।

राज मुझे कहते हुए भी डर लग रहा है अगर राजनी उसी जगह पर होती,,,

तो,,, तो ,,,पता नहीं क्या होता

लगता है भगवान के रूप में आकर उस बच्ची ने हमारी राजनी की रक्षा की है। क्या महारानी तू सच कह रही है

हां राज ऐसा ही हुआ है ,उसके बाद उस कार की ठोकर बेंच में लगने से राजनी के पैर में थोड़ी सी मोच आ गई ।

उसके वहीँ से राजनी ने शैलेस को फोन किया, और वह उसे लेकर हॉस्पिटल गया वहां विकास पूनम भी आ गए थे ।

मुझे सारी बातें राजनी ने अभी बताइ है जब वह हॉस्पिटल से वापस आ गई। क्योंकि पहले मुझे सब बता कर वह परेशान करना नहीं चाहती थी ।

सारी बातें सुनकर पता नहीं क्यों राज के दिमाग में यह बात आई थी।

कि उसने काम्या के मरते हुए बाबा को वचन दिया था, कि वह काम्या और उसके बच्चों का पूरी तरह से ख्याल रखेगा ।

और उसके बाद भी अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ पर जा रहा था ।

और ठीक उसी वक्त राजनी का एक्सीडेंट हुआ ।

भगवान ना करे ,,,अपुन की राजनी को अगर कुछ हो जाता ,,,तो अपन को यही लगता शायद ये अपुन की कसम तोड़ने का नतीजा ही था।

नहीं,,, नहीं ,,,अपुन अपने बच्चों पर आंच नहीं आने देगा।

चाहे इसके लिए दुनिया अपुन को कुछ भी समझे ,,,अगर अपन ने कसम ली है की काम्या और उसके बच्चों का भविष्य सुरक्षित करेगा ,,,अब उन्हें परेशानी में छोड़कर नहीं जा सकता।

चाहे कितना भी समय लग जाए ,जब तक अपुन काम्या को सेट नहीं कर देता उनकी तरफ से निश्चिंत नहीं हो जाता।

काम्या को किसी के सहारे की सख्त जरूरत है ,वह अकेले सब कुछ कैसे संभालेगी ,उसने अपने नीलेश को उसके हस्बैंड की आंखें दी है ।

अगर अपन उसको मुसीबत में छोड़ कर गया ,तो वह भले ही कुछ ना कहे।

पर कहीं ऐसा ना हो ,कि उसका दुख अपुन की नीलेश की आंखों तक पहुंचे। इस वक्त काम्या को अपुन की जरूरत है अपने नीलेश के साथ साथ काम्या के बच्चों को भी तो किसी के सहारे की जरूरत है ।

जब तक उसके बच्चे बड़े नहीं हो जाते तब तक अपन नहीं जाएगा।

वरना कहीं ना कहीं ,अपुन को कसम तोड़ने की सज़ा भगवान जरूर देगा ।

और अपन,,,, अपनी फैमिली को अपने नीलेश राजनी को किसी भी परेशानी में डालना नहीं चाहता।

चाहे इसके लिए मुझे सबकी नजरों में भले ही बुरा बनना पड़े ।

अपुन को शहज़ादी को इस बात के लिए मनाना ही होगा।

राज अपने मन में यह सारी बातें सोच चुका था ।
 
डॉली फोन रख चुकी थी ।

और राज के मन में अभी भी यही बात चल रही थी ।

वह यही कोशिश कर रहा था ,किस तरह इस बारे में बात करे।

उसे नीलेश राजनी ,और ,काकी इन सब का सहयोग चाहिए था ।

वह अपनी बात को सच कर पाता ,अपने वचन को निभा पाता ।

एक मरे हुए इंसान को वचन देना और फिर उससे मुकर जाना ,सही नहीं है ।

वह इस दुनिया में नहीं है ,उनकी आत्मा अपनी बेटी को देख रही होगी ,और अगर अपन अपने वादे पर खरा नहीं उतरा तो जरूर उनकी आह अपन को लगेगी ।

और सौम्या उसके साथ जो हुआ ,,भगवान ना करे, अगर वह गलत हाथों में पड़ जाती ,तो क्या करते, उसके साथ तो कोई भी नहीं है ।

चाहे कुछ भी हो वह तो अपुन को अपना डैडी मान रही है ना ।

उस बच्ची का दिल कैसे तोड़ू,,, अगर अपुन के जाने के बाद फिर से वह कहीं गई तो

जरूरी नहीं है ,हर बार कोई फरिश्ता बनकर उसको बचाने आ ही जाए।

अब तो चाहे कुछ भी हो ,अपुन को काम्या का भविष्य

सुरक्षित करना ही होगा।

और अपन ये कोशिश करेगा,कि जल्दी ही सब कुछ सही हो ,,जाने के बाद अपन अपनी फैमिली के पास जाए ।

राज सारी बातें निश्चय कर चुका था।

जब सौम्या सो गई ,और काम खत्म करते हुए काम्या अंदर चली गई ,तो राज टहलते हुए बाहर आया, और डॉली को फोन लगाया ,,,,

आज वह नहीं डॉली से कुछ भी छुपाना नहीं चाहता था ।

उसने सबके बारे में अच्छे से पूछा ,,,राज को यहां आए हुए 3 महीने हो चुके थे ।

और आठ 10 दिन पहले नीलेश वापस बेंगलुरु भी चला गया था ।

क्योंकि अब वह बिल्कुल सही था ।बस डॉक्टर ने कुछ प्रोटेक्शन लेने के लिए कहा था ,,,जो वह ले रहा था ।

राजनी शहर में रहकर कॉलेज जाने लगी थी । और डॉली नौकरी को घर को और काकी को अच्छे से संभाल रही थी।

कम से कम, 2 से 3 घंटे तक राज ने डॉली से बात की ,,बहुत कुछ पूछा, बहुत कुछ बताया ।

कुछ ऐसी बातें भी ,जो शायद डॉली को

पता नही थी।

कुछ ढाबे के बारे में, कुछ घर के बारे में कुछ आसपास के लोगों के बारे में।

राज बहुत लंबी बातें कर रहा था ,,

डॉली ने राज से कहा ,,,,राज कुछ दिनों बाद आप आ ही रहे हैं ,तो यह सब बातें मुझे क्यों बता रहे हैं ,आप तो आकर सब कुछ संभाल ही लेंगे न!

शहज़ादी तुझे सब बताना बहुत जरूरी है क्योंकि अब जो मैं तुझे बताने जा रहा हूं तुझे बहुत ध्यान से सुनना होगा ।

और समझना होगा ,,,अपुन को पूरा भरोसा है ,,तेरे से ज्यादा अपन को कोई नहीं समझ सकता ।

और बच्चों को भी समझाना होगा।

यह कहते हुए राज ने सारी बातें डॉली के सामने रख दीं जो वह सुबह से सोचे जा रहा था ।

कहीं ना कहीं इन सब में ही राज को अपना प्रायश्चित नजर आ रहा था।

भले ही उसकी गलती नहीं थी ,पर एक्सीडेंट तो उसी की गाड़ी से हुआ था और उसमें जिसकी मौत हुई थी ।

वह काम्या का पति ,और सौम्या का डैड था ।

काम्या 5 साल के बच्चे के साथ-साथ एक ऐसे बच्चे की मां बनने वाली थी ।

जो 4 महीने बाद इस दुनिया में आने वाला था ।

और राज ने काम्या के बाबा से जो वादा किया था।

इन सब को देख कर ही उसने यह फैसला लिया था ।

की काम्या की तरफ से निश्चिंत हो जाएगा ,,,तभी वापस आएगा ।

उसके मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी क्या कहे,,उससे पहले ही वह डॉली से वादा ले चुका था ।

कि वह राज का साथ देगी ।

जिस दिन से डॉली राज के घर में आई थी ,,,यानी कि लगभग 25 साल हो गए थे । अब तक राज ने डॉली से कभी कुछ नहीं मांगा था ।

कोई उम्मीद नहीं की थी ,कोई बंधन नहीं लगाए थे ,और ना ही कभी कोई दबाव बनाया था ।

डॉली को पूरी आजादी दी थी ,कि वह अपने सारे फैसले खुद ही करे।

बल्कि उसके फैसलों में उसका साथ दिया था । लेकिन आज राज की आवाज में एक दर्द था ।

एक मजबूरी थी ,और अगर डॉली उससे ना कहती, तो शायद राज खुद को कभी माफ नहीं कर पाता ।

क्योंकि डॉली से ज्यादा तो राज को कोई समझ ही नहीं सकता था ।

कि राज का दिल कैसा है ,और अगर राज ने यही फैसला लिया है ।

तो बहुत सोचा होगा ,बहुत समझा होगा और तब कहीं जाकर डॉली के सामने अपनी बात रख पाया ।

अपनी इच्छा को मन में दबाकर अपने दुखों को समेट कर ,अपने आंसुओं को पी कर ,,,,डॉली को राज के फैसले का सम्मान करना ही पड़ा ।

डॉली ने राज को भरोसा दिलाया ,कि वह अपने मन पर कोई बोझ ना रखे।

जो आपको सही लग रहा है ,आप वही करें ।

मैं हर कदम पर आपके साथ हूं । मैं अपने वचन से कभी नहीं मुकरूंगी।

राज मैं सब कुछ संभाल लूंगी, बच्चों को काकी, को आप बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए ।

और अगर आप इतने दिनो से अपना काम कर रहे हैं ,,,तो आपको सफलता भी जरूर मिलेगी ।

भगवान ने चाहा तो सब कुछ बहुत जल्दी ठीक हो जाएगा ।

और आप दोबारा हमारे पास आ पाएंगे और आप यकीन रखिये ,कि मै आपके बच्चों की परवरिश में कभी कोई भी कमी नहीं होने दूंगी ।

जब आप आएंगे ,तो आपको सब कुछ वैसा ही मिलेगा ,,,,जैसा हमने सोचा है डॉली !!! तुझसे से ज्यादा तो कोई मुझे समझ ही नहीं सकता ।

डॉली जानती थी कि क्या सोचकर राज ने ये कहा है ,,,इसलिए ना चाहते हुए भी अपने दिल पर पत्थर रखकर डॉली ने राज की बात को सहर्ष स्वीकार कर लिया ।
 
पूरी रात बीत गई थी, लेकिन डॉली और राज के बीच की बातें खत्म नहीं हुई। पिछले 25 साल की सारी बातें दोहरा चुके थे वह दोनों ।

डॉली बार-बार कह रही थी,,,राज हम कल बात करेंगे ,आप सो जाइए ।

नही शहज़ादी आज अपन तेरे से बहुत सारी बातें करना चाहता है ।

बातें करते हुए सुबह हो गई ,,और जब जरूरी था ,तब फोन रख कर ,दोनों अपने अपने काम में लग गए।

राज ने और नीलेश ,राजनी और काकी को भी फोन

लगाकर ढेर सारी बातें की थी ।

उन्हें समझाया था ,,उनके काम के लिए और उनकी पढ़ाई के लिए बेस्ट ऑफ लक भी बोला ।

और काकी से भी बहुत सारी बातें की। लेकिन सबको पता नहीं था ,,,,कि राज क्यों एक ही दिन में सबके साथ इतनी सारी बातें कर लेना चाहता है।

उसके बाद सभी अपने काम में लग गए राजनी कॉलेज चली गई ,नीलेश अपनी ट्रेनिंग सेंटर ,और डॉली ऑफिस ।

शाम को जब डॉली ऑफिस से आई तो उसने सबसे पहले राज को फोन लगाया लेकिन राज का फोन आउट ऑफ रेंज जा रहा था ।

वह कितनी बार कोशिश कर रही थी लेकिन फोन लग ही नहीं रहा था ।

तब निली ने सोचा ,,कि वह राज को मैसेज कर देती है ,कि आप जैसे ही फोन देखें ,मुझे फोन कर ले ।

जब व्हाट्सएप खोला, तो राज का एक बड़ा सा मैसेज पड़ा हुआ था।

जो कुछ इस तरह से था ,,,,

अपुन की महारानी!

अपन तेरे से बहुत प्यार करता है ,और हमेशा करता रहेगा, तू अपुन की है ,और अपुन की ही रहेगी ,अपन तेरे को सब कुछ बता चुका है ,कि अपन क्यों यहां रुका है ।

लेकिन आज के बाद शायद अपुन की तेरे से बात ना हो



तब तक ,जब तक अपन काम्या को उसके बच्चों के साथ सुरक्षित नहीं कर देता ।

अपन जानता है ,कि तेरे और बच्चा पार्टी के बिना अपना टाइम कैसे गुजरेगा। लेकिन अगर अपन तुम सब से बात करता रहा ,,,तो यहां रुकना मुश्किल हो जाएगा।

शहज़ादी अपन जानता है, तू सब कुछ संभाल लेगी ।

तू बहुत हिम्मतवाली है । अपन कोशिश करेगा ,कि बहुत जल्द तेरे पास आए पर तू अपन को ढूंढने की कोशिश नहीं करेगी और ना ही उसकी वजह से अपनी लाइफ को डिस्टर्ब करेंगी।

अपुन का तेरे से पक्का वादा है, अपन तेरे पास वापस जरूर आएगा,,,,

तेरा ,सिर्फ तेरा राज

डॉली इस मैसेज को सैकड़ों बार पढ़ चुकी थी। इस नंबर पर मैसेज भी किए कॉल भी लगाया,पर सब बंद था ।

उसके बाद अपने वादे के मुताबिक पूरे जी-जान से उसने अपनी नौकरी ,ढाबा बच्चे ,और काकी सब को संभाला।

डॉली को तो बचपन से ही भगवान ने ऐसी परिस्थितियां दिखाई थी।

कि वह तन से और मन से बहुत मजबूत हो गई

थी ,और जब से राज उसकी जिंदगी में आया ,अब से उसका खुद पर भरोसा और भी बढ़ गया था ।

अब इस बात को पूरे 6 साल बीत चुके थे आज वह दिन था ,जब 6 साल बाद डॉली तेजपुर के बागानों में राज से मिली थी ।

6 साल की बातें पिछले 1 घंटे से डॉली और राज के बीच चल रही थी ।

तभी डॉली फोन पर शैलेश का फोन आने लगा ,,,,डॉली ने फोन उठाया, और कहा कि बस 20 मिनट में आती है।

और फोन रख दिया,,,,

अब वो समय आ गया था ,जब उसे वापस जाना था ।

काम्या के बारे में दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई थी ।

इस वक्त डॉली को यहां से जाना ही सही लगा ,,,,क्योंकि अगर डॉली को ढूंढते हुए शैलेश यहाँ आ गया, तो बात बिगड़ सकती थी।

इसलिए उसने फोन उठाया ,और पूनम को लेकर वापस सोनितपुर आ गई।

सोनितपुर आकर डॉली ने किसी को भी इस बात का एहसास नहीं होने दिया था कि वह राज से मिलकर आई है ।

अपने वादे के मुताबिक वह राज को किसी भी उलझन में नहीं डालना चाहती थी ।

लेकिन यहां आकर भी डॉली राज के ही ख्वाबों में खोई हुई थी ।

6 साल बाद राज के गले लगने का एहसास उसे अभी भी हो रहा था ।

कितना सुकून मिला था उसे ,राज के गले लग कर ,,,जैसे जलते हुए शरीर पर किसी ने चंदन का लेप लगा दिया हो ।

भले ही वह सारी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही थी । पर उसका दिल ही जानता था ,कि वह राज के बिना अधूरी ही रहेगी ,उसकी पूर्णता राज के साथ ही है ।

आज तो दोनो अपनी ही बातों में खो गए थे । उन्हें

किसी और बात के बारे में डिस्कस करने का समय ही नहीं मिला। यहां तक कि राजनी और नीलेश के बारे में भी ज्यादा बातें नहीं हो पाई थी।

डॉली राज को बताना चाहती थी।

कि राजनी शैलेश की शादी करना है कैसे क्या करूं ,,,कब करूं सारी बातें राज के साथ करनी थी ।

और नीलेश रमैया के बारे में भी बताना था । हालांकि इस बारे में अभी तक नीलेश ने डॉली से कोई बात नहीं की थी लेकिन वह अच्छी तरह से जानती थी।

कि दोनों का रिश्ता कहां तक पहुंचा है और डॉली खुद नीलेश से इस बारे में पूछना चाहती थी ।

डॉली की बातें राज के साथ अधूरी ही रह गई थी । यही सब सोचते हुए उसने निश्चय कर लिया था। कि एक बार कल फिर वह तेजपुर जाएगी, और राज से मिलेगी ,लेकिन घर में क्या बहाना बनाती और राजनी से क्या कहती

कि एक बार जाने के बाद दोबारा जा रही है ,इस बारे में भी उसने सोच लिया था ।

रात को डिनर के समय डॉली ने अपनी बात सबके सामने रखी,,,,,,

राजनी!

शैलेश !

मैं फिर से तेजपुर जाना चाहती हूं !

फिर से

पर क्यों ,आज ही तो आप वहां घूम कर आई हो

हां राजनी ! आज मैं वहाँ घूम कर आई हूं ,,,और

इसीलिए मैं फिर से जाना चाहती हूं । क्योंकि मुझे कुछ छोटे-छोटे बच्चे मिले थे, मैं उनके साथ काफी घुलमिल गई ,और मैंने उनसे प्रॉमिस किया था,, कि मैं कल आकर उन्हें कपड़े और खिलौने दूंगी ।

वह बच्चे मुझे बागान में काम करने वाले मजदूरों के बच्चे लग रहे थे ।

उन्होंने मुझसे प्रॉमिस लिया है ,और छोटे बच्चों का दिल में कैसे तोड़ सकते हूं।

मैं कल सुबह थोड़ी सी शॉपिंग करती हुई बच्चों को खिलौने और कपड़े देना चाहती हूं ।

वैसे तो शैलेश का तेजपुर जाने का दोबारा कोई मन नहीं था ,,और राजनी को हॉस्पिटल जाना था ,,फिर भी उसने डॉली की इच्छा को देखते हुए साथ चलने के लिए कह दिया ,,,ठीक है आंटी अगर आपका मन है, तो मैं आपके साथ चला चलूंगा ।

अरे नहीं,,, नहीं,,,तुम्हे जाने की जरूरत नहीं है, बस तुम मेरे लिए अभी एक टैक्सी बुक कर दो ,और वैसे भी इन दिनों टैक्सी वाले से हमारी काफी अच्छी पहचान हो गई है ,,,मैं कल सुबह ही निकल जाऊंगी ।।

और कुछ शॉपिंग करते हुए चली जाऊंगी और हां ,चिंता मत करना, शाम होने से पहले ही मैं वापस भी आ जाऊंगी।

थोड़ी सी ना नुकुर करने के बाद राजनी और शैलेश इस बात के लिए मान गए थे। और फोन पर ही टैक्सी वाले को कल के बारे में सबकुछ समझा दिया था ।

डॉली खुश थी, कि उसका काम पूरा हो जाएगा ।
 
दूसरे दिन सुबह सवेरे ही डॉली तैयार हो गई ,और अकेले ही तेजपुर के लिए निकल आई थी।

मार्केट में गाड़ी रोकते हुए, उसने खिलौने और कपड़े लिए ,,,उसे सच में वहां पर कुछ बच्चे भी दिखे थे ।

और जिन्हें वह सब कुछ देना चाहती थी एक-दो घंटे शॉपिंग करने के बाद ,डॉली तेजपुर की तरफ बढ़ रही थी।

राज से मिलने की तड़प भी बढ़ती ही जा रही थी ।

अभी तक राज को भी इस बारे में कुछ पता नहीं था ,लेकिन डॉली को राज की बातों से इतना तो पता चल ही गया था। कि राज सुबह से शाम तक इन्हीं बागानों में काम करता है।

और वह जरूर उसे यहीं पर मिल जाएगा ।

डॉली ने कुछ दूरी पर टैक्सी खड़ी करवाई और कपड़े खिलौनों का बैग लेकर बागान की तरफ आने लगी।

आसपास खेल रहे बच्चों को आवाज लगाते हुए डॉली ने बुलाया,,, तो ढेर सारे बच्चे उसके पास आ गए ।

वह एक-एक करके बच्चों को खिलौने कपड़े ,टॉफी, बिस्किट देने लगी थी। लेकिन इन सबके बीच में ,उसकी निगाहें राज को ही ढूंढ रही थी ।

बच्चों के साथ भागते हुए वह राज को भी देख रही थी ।

सभी बच्चों को सारी चीजें मिल गई तो धीरे-धीरे बच्चे चले गए थे ।

उसके बाद डॉली बचते बचाते ठीक उसी जगह जा पहुंची,,,जहां उसे कल राज मिला था।

लेकिन आज इस वक्त राज वहाँ नहीं था वह थोड़ी उदास हुई,,, पर उसे पक्का विश्वास था ,कि वह जरूर आएगा ।

उसका विश्वास झूठा नहीं हो सकता।

कुछ ही देर में सच में राज दूर से आता हुआ दिखा ,और डॉली पेड़ों की ओट में खड़ी हो गई । आकर राज ने एक बार फिर पानी का पाइप उठाया ,,,क्योंकि कल उसका पानी देना अधूरा ही रह गया था ।

और उसे चालू करते हुए दोबारा पेड़ों में पानी देने लगा।

और धीरे-धीरे पानी का पाइप लेकर बागान के बीच में आ पहुंचा, पानी दे रहे राज को डॉली ने पीछे से अपनी बाहों में भर लिया।

राज को इस बात की उम्मीद नहीं थी उसने पलट कर देखा ,,,,,

महारानी तू यहां ! लेकिन तू आज फिर कैसे आई

राज वह सब छोड़ीये,,,बस 8 दिन के लिए मैं यहां हूं ।

4 दिन तो हो ही चुके हैं, तो सोचा एक बार और आपसे मिल लूँ ।

लेकिन राजनी और शैलेश, पूनम ,किसी ने तुमसे कुछ पूछा नहीं

मैंने कहा ना वह सब छोड़िए ,,,मैं कैसे भी करके आ गई ।

राज बहुत सारी बातें जो अधूरी रह गई थी ,,,अपनी राजनी की शादी पक्की हो गई है ,,राज क्या आपके बिना इतना बड़ा काम में कर पाऊंगी

राज ने पानी बंद करते हुए पाइप छोड़ा और डॉली के साथ एक बार फिर बागान में बैठ गया ।

शहज़ादी अपुन को इस बात पर पूरा भरोसा है ,कि तू सब कुछ कर लेगी ।

रही अपुन के आने की बात, पता नहीं अपन कुछ सोच ही नहीं पा रहा ।

अपन ने तो खुद से वादा किया था।

कि जब तक अपन काम्या को पूरी तरह से उसकी जिंदगी में सुरक्षित नहीं कर देता ,तब तक अपन अपनी फैमिली के पास वापस नहीं जाएगा ।

अगर अपन आता है, तब अपुन का वादा तो झूठा पड़ जाएगा ना ।

राज अगर हम फाइनेंशली काम्या की मदद करदें तो

शहज़ादी हम कितनी मदद कर पाएंगे फाइनेंसली,,,,,, उसके बच्चों की जिम्मेदारी ,घर का खर्चा ,,,,बच्चियां बड़ी होंगी,,, उनकी पढ़ाई लिखाई शादी और सब कैसे कर पाएगी

देख तूने प्रोमिस किया था,,, कि तू अपन से कोई भी सवाल नहीं पूछेगी ।

कोई जोर जबरदस्ती नहीं करेंगी,,,,

यह सब वक्त के ऊपर छोड़ दे ,जो भाग्य में लिखा होगा ,वही होगा ।

और मुझे नीलेश और राजनी के बारे में बहुत सारी बातें बता ,,,तेरे मोबाइल में उनकी फोटो भी होगी ना

वह दिखा ,,,,डॉली मोबाइल खोलकर बातें करते हुए राज को ढेर सारे फोटो दिखाने लगी,,, उसमें एक

फोटो डॉली के साथ रमैया की भी थी।

राज फोटो को जूम करते हुए देखने लगा अरे!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg यह तो वही टॉप मॉडल है ना ,जो अपने नीलेश के साथ स्टेज पर थी। वही है ,,,,,,राज ये ,रमैया है,,,,टॉप मॉडल के साथ-साथ बहुत अच्छी लड़की है ,मैं उससे मिल चुकी हूं।

नीलेश की बहुत अच्छी दोस्त है।

मुझे लगता है शायद ये दोनों एक-दूसरे को पसंद करते हैं ।

अभी मेरी इस बारे में कोई बात नहीं हुई ,,,लेकिन जल्द ही बात करने वाली हूं। राजनी की शादी के बाद नीलेश रमैया से भी कहूंगी,,, कि वह भी अपना घर बसा ले ।

तो मैं निश्चिंत हो जाऊं ,,शहज़ादी बात तो तू बिल्कुल सही कह रही है ।

इन दोनों की जोड़ी बहुत अच्छी लग रही है ।

जैसे अपना नीलेश लाखों में एक है।

वैसे ही ये लड़की भी बहुत प्यारी है ।

डॉली ने राज को देखते हुए कहा राज पूनम को सब कुछ पता है ,,,वह समझती है ,आपके जाने की क्या वजह है।

लेकिन अगर इस बारे में रमैया के परिवार वालों ने कुछ पूछा ,,,उन्होंने नीलेश से पूछा, कि वह उसके डैड से मिलना चाहते हैं ।

तो हम क्या जवाब देंगे

डॉली तू वही जवाब देना ,,जो दुनिया को देती आई है ।

यही कि अपुन का कोई लक्ष्य है ।

जिसके लिए अपुन घर से गया है।

और तुझे कुछ नहीं पता, कि वह कब तक पूरा होगा । और अपुन कब आयेगा पर राज

रमैया के फैमिली वाले इस बात को स्वीकार कर लेंगे ,,,क्या ऐसा हो सकता है

अगर उन्होंने इस बात पर ऑब्जेक्शन किया तो और कहीं वो ऐसा जवाब सुनकर रमैया और नीलेश की शादी के लिए तैयार नहीं होंगे तो

हमारे नीलेश का दिल टूट जाएगा ,,,
 
राज ने डॉली का चेहरा अपने हाथों में लिया ,,,और उसे समझाने लगा ,,,,

शहज़ादी तू भूल गई ,,,अपन की लव स्टोरी तेरे से अपुन कैसे सेट हुआ था।

तू अपुन के पीछे थी ,,,और ना ना करते हुए भी अपुन कैसे तेरे आगे पीछे घूमने लगा था ,नंबर वन का दीवाना बन गया तेरा ।

तेरे लिए क्या-क्या किया ,भूल गई क्या इस बार डॉली के होठों पर मुस्कुराहट आ गई थी ,,,,नहीं सिवा मैं कुछ भी नहीं भूली,,,, मुझे सब कुछ याद है ।

कैसे आप कमला बुआ के यहां आए थे और बात बनाते हुए आपने क्या क्या कहा था ।

और फिर जहां फाइनली आप मुझे ले गए थे ,,,,और वह टाइटन की वॉच

यह देखो ,आज भी मेरे हाथ में ही है।

मैं कुछ भी नहीं भूली हूं ।

तो बस फिर सब कुछ ऊपर वाले के हाथ में छोड़ दे ।

अगर अपने नीलेश का प्रेम सच्चा होगा तो ऊपर वाला उनको जरूर मिलाएगा। वो सिर्फ एक दूसरे को देखेंगे, दूसरी बातों को नहीं ।

अब ज्यादा मत सोच।

पर सबसे पहले राजनी की शादी की तैयारी करना ,,,और देख शादी में कोई कमी नहीं रहना चाहिए।

हमने अपनी राजनी के लिए जितने भी जेवर बनवाए थे ।

वह सब उसको देना ,,,,,

राज में कैसे भूल सकती हूँ।

कि जब से वो सिर्फ 10 साल की थी।

तभी आपने उसके लिए कितना सारा गोल्ड लेकर रखा था ।

और आपके हाथ का लाया हुआ सारा गोल्ड में अपनी बेटी को दूंगी।

और जो नीलेश के लिए रखा था ,वह नीलेश की बहू को ।

आपकी डॉली को आपकी सारी बातें याद है।

डॉली ने आज बहुत सारी बातें राज से कर ली थी । जो कल नहीं कर पाए थे। अब डॉली का यहां आना संभव नहीं था इसलिए आज ही वह सारी बातें कर चुकी थी।

और अब राज ने उसे जाने के लिए कहा ।

जाने से पहले डॉली एक बार फिर कस के राज के गले लग गई थी ।

राज मुझे आपकी झप्पी की बहुत जरूरत है ।

आपके हौसले और प्यार की वजह से ही मैं तक अपने काम अच्छी तरह से पूरे कर पा रही हूं ।

वरना में अकेले तो कुछ भी नहीं कर पाती । भले ही आप मेरे साथ नही थे लेकिन इन 6 सालो में मैंने आपसे प्यार को हर वक्त महसूस किया है ।

अब वापस जाने के लिए वह टैक्सी में बैठ चुकी थी ।

शाम को ठीक 600 बजे डॉली की टैक्सी बाहर आकर रुकी थी।

जैसे ही डॉली आई कि राजनी भी हॉस्पिटल से आती जा रही थी ।

अरे मां! कैसा रहा आप का टूर

राजनी बेटा बहुत अच्छा ,,मुझे बहुत अच्छा लगा वहां जाकर ,,तेजपुर बहुत खूबसूरत जगह है ।

अब जल्दी चलो ,,,,आज दिन भर से शैलेश और पूनम अकेले ही होंगे।

राजनी ने हंसते हुए कहा,,मॉम अकेले जरूर है ,,,, पर बहुत बिजी है।

क्या

पर बिजी क्यों

मॉम आज जब मैं,,, हॉस्पिटल जा रही थी ,,,तो शैलेस मुझसे बोला।

तू जा रही है ,मैं बोर हो जाऊंगा।

क्यों बोर क्यों हो जाएंगे

अरे मैं क्या करूं ,मेरे पास करने के लिए है ही क्या

अगर करना चाहो तो तुम्हारे पास बहुत

कुछ है ,,,अगर आप बोर हो रहे है ,,,तो एक काम कीजिए ,,,रात का खाना आप बनाएंगे उसके बाद भी आप के पास टाइम बचता है ,,,तो किचिन की सफाई

भी कर लेना ,,,,

क्या राजनी तू पागल है

तूने उससे ऐसा क्यों कहा

अच्छा लगता है क्या

अब वो तेरा होने वाला पति है ।

तो तुझे उसकी इज्जत करनी चाहिए।

मॉम इज्जत का तो पता नहीं ,पर मैं शैलेश से प्यार बहुत करती हूं।

राजनी यह कैसा प्यार

जहां तू सारा काम करवा रही है।

मॉम यही तो प्यार है ,,देखो उसने कभी कुछ भी नही किया ,,,अगर वह मेरे कहने पर कोई काम करता है ,,,,

तो ये प्यार ही हुआ न

जल्दी चल,,,, पता नहीं उसने क्या किया होगा

जब डॉली और राजनी अंदर पहुँची तो देखा ,,,,कि पूनम शैलेश के पीछे पीछे यह कहते हुए घूम रही थी,,,, शैलेश मैं करती हूं,,,,तेरे बस का नहीं है ,,,

तू बैठ जा,,,,,

नहीं मम्मा - आज तो मैं पूरा खाना बनाऊंगा ,उस राजनी की बच्ची ने मुझे चैलेंज दिया है।

मैं उसको बताना चाहता हूं ,कि मैं कितना अच्छा खाना बना सकता हूं ।

प्लीज आप मेरी कोई हेल्प नहीं करेंगी।

जैसे ही दोनों अंदर आई ,,,पूनम ने डॉली को देखते हुए शिकायत की,,,, डॉली देख राजनी ने इसे चेलेंज दिया,,,,

और इसने एक्सेप्ट भी कर लिया ,,,,अब पता नहीं किचन में क्या कर रहा है ।

मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा राजनी,,,हंसती हुई बोली,,,,आंटी जी आज करने दीजिए ,,,, देखते हैं ,कितना कर पाता है ।

राजनी हाथ मुँह धोकर शैलेश के पास किचिन में पहुंच गई जहां पूरा किचिन बेतरतीबी से बिखरा हुआ पड़ा था। राजनी ने मजाक करते हुए कहा,,,,

डॉक्टर शैलेश!

क्या मैं पूछ सकती हूं,,,, डिनर के लिए क्या बनाया जा रहा है

जी !

मैं पास्ता ,,,सैंडविच,,, और बिरयानी बना रहा हूँ।

Wow,,,,,इतनी सारी डिशेस

और क्या यह भी पूछ सकती हूं ,कि अभी तक आप क्या-क्या कर चुके हैं

आप देख सकती हैं ,,, सैंडविच का मसाला तैयार है ,,,बिरयानी का मसाला भी तैयार है ,और पास्ता उबल रहे हैं।

डॉ शैलेश ,,लगता है आपको मेरी जरूरत है ,,मैं आपकी हेल्प करवाती हूं ।

नो थैंक्स ,,,,डॉक्टर राजनी,,,,मैं अकेले ही सारा खाना

बनाऊंगा ,,उसके बाद आप तीनो ,खा कर बताएंगे ,,,

अभी आप बाहर जाइए ,,,

शैलेश ने राजनी का हाथ पकड़ कर उसे किचिन से बाहर भेज दिया।

और राजनी डॉली पूनम के साथ बैठकर इंतजार करने लगी थी।

कि आखिर शैलेश खाने में क्या परोसता है।
 
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