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Guest
पिछले 3 साल से,,, जब से वह बोलना सीखी थी ,तब से उसने डैड की रट लगा रखी थी ।
और काम्या उससे यही कह देती थी।
कि बेटा डैड आपसे मिलने बहुत जल्दी आएंगे ।
और इस बार भी काम्या उससे यही कह कर गई थी,,, कि इस बार मैं आपके डैड को लेने जा रही हूं ।
आप आंटी के पास ठीक से रहना ,और मैं और डैड कर हम सब मिलकर अपने घर चलेंगे ।
और इस बार सौम्या को पूरा विश्वास था कि वह अपनी मॉम डैड के साथ ही रहेगी और उसके दादा-दादी के पास भी जाएगी ।
जैसे ही काम्या ने सौम्या को कुछ समझाना चाहा,,,, कि राज ने काम्या को कुछ चुप रहने का इशारा किया ।
और जब सौम्या खेलती हुई दूसरे कमरे में चली गई ,तो राज ने उसे समझाया,,,,
काम्या,,, वह बहुत छोटी बच्ची है ।
उसके सामने कोई भी बात अभी मत कहो ,,,उसे एक-दो दिन का समय दो जब हम तुम्हारे घर जाकर तुम्हारी फैमिली वालों से मिलेंगे ।
उसे अपने परिवार के और भी मेंबर मिलेंगे ,,,,तो वह उन सब में बिजी हो जाएगी।
तब तुम धीरे-धीरे सारी बातें उसे समझा देना।
इस तरह से कुछ कहोगी ,,छोटी सी बच्ची के दिमाग पर गलत असर पड़ सकता है।
जब सौम्या दोबारा राज के साथ अपने कमरे में खेलने में व्यस्त हो गई ।
तो काम्या ने अपनी मकान मालिक को धीरे धीरे सब कुछ बता दिया।
यह सचमुच बहुत बड़ा हादसा था ।
या कह सकते है ,,,कि अनहोनी थी।
इस बात की तो किसी ने उम्मीद भी नहीं की थी ।
सुनकर उन्हें भी बहुत दुख हुआ काम्या ने बताया ,,,कि अब मैं अपनी ससुराल जाऊँगी,,,,, और फिर देखते हैं क्या होता है ।
अभी तो मुझे खुद ही कुछ नहीं पता । दो-तीन दिन यहाँ पर सारा सामान पैक किया ,,,और तीनों एक बार फिर काम्या की ससुराल जाने के लिए निकल गए। सफर
कुछ लंबा था ,दो-तीन दिनों बाद पता लगाते हुए वहां पहुंचे।
मकान नंबर ,नाम और एड्रेस ,बिल्कुल सही सही मिल चुका था ।
अपनी गाड़ी थोड़ी दूर पर खड़ी करके सौम्या को गाड़ी में छोड़ कर ही।
काम्या और राज मेन दरवाजे पर पहुंचे और जब बैल बचाई ,,,,तो कुछ उम्र दराज दो व्यक्ति बाहर निकले।
शायद दोनों पति-पत्नी थे ।
जब काम्या ने ध्यान से देखा तो समझ आ गया ,,,कि यह, राजीव के मम्मी पापा है ।
काम्या तो खुद ही अपराध बोध से दबी हुई थी । कहीं ना कहीं उसे इस सब में अपना ही कसूर लग रहा था ।
बस सोच ही नहीं पा रही थी, क्या एक मां बाप को उनके के जवान
बेटे की इस दुखद मौत की बात कैसे बताऊं ।
वह राज की तरफ देख रही थी ।
और वह दोनों काम्या को ।
जब कुछ देर तक वह कुछ नहीं बोली ,तो उन्होंने ही आगे बढ़ते हुए काम्या से पूछा जी कहिए !
आपको किससे मिलना है
जी,,,जी,,, वह मुझे आपसे ही मिलना है
मुझसे बताइए क्या काम है
अब तो काम्या कुछ भी नहीं सोच पा रही थी ,कि वह
कहे क्या ,काम्या राजीव को ही याद कर रही थी।
कि वह उसे छोड़कर चला गया है।
और ये कैसा मोड़ उसके सामने आया है फूट-फूटकर रोते हुए काम्या उनके पैरों में जा गिरी ।
काम्या अंदर से बहुत भयभीत थी ।
लेकिन अब उसके पास कोई भी चारा नहीं था ।
अब तो वो वक्त आ ही गया था।
कि उसका अंजाम चाहे कुछ भी हो उसे उन लोगों को सब कुछ सच-सच बताना ही था ।
और काम्या ने शुरू से लेकर अंत तक की सारी कहानी रोते हुए उनके सामने रख दी थी।
इसमें काम्या को अपनी ही गलती लग रही थी ।
लेकिन एक मां बाप के लिए इससे बड़ा दुख और क्या हो सकता था,,, जिसे अपने बेटे की मौत के पूरे 15 दिन बाद यह पता चला है,,,, कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है ।
उन्हें तो यही लगा, कि शायद कभी-कभी वह अपने काम में इतना व्यस्त हो जाता है। कि उसे फोन करने का भी समय नहीं मिलता ,और इसी वजह से उससे बात नहीं हुई होगी ।
राजीव के माता-पिता ने कई बार उसे फोन लगाया था । लेकिन उसका फोन नॉट रिचेबल आ रहा था ।
वह राजीव को लेकर इन 15 दिनों से काफी चिंतित भी थे ।
लेकिन यह जो उन्होंने सुना ,,,यह तो उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं था। एक जवान बेटे की मौत सदमे से
भी कहीं बढ़कर होती है ।
वह सोच नहीं पा रहे थे ,यह सब है क्या लेकिन कहते हैं ना,,,, कि इंसान गुस्से में और दुख में अंधा हो जाता है।
कुछ ऐसा ही उनके साथ भी हुआ।
इस वक्त उन्हें काम्या की कोई भी बात सही नहीं लग रही थी ।
राजीव की मां तो यह सुन कर बेहोश हो गई थी ।
और राजीव के पिता अपने बेटे की मौत का गम और अपनी पत्नी की ऐसी हालत देखकर काम्या पर ही बिफर पड़े ।
उन्होंने काम्या को बहुत भला बुरा कहा यहां तक कह दिया ,,,,
कि ऐसी औरत मेरे बेटे की पत्नी हो ही नहीं सकती ।
जब मेरा बेटा इस दुनिया में नहीं है ।
तुझे तब याद आई है उसके घर की ।
इतने सालों तक अपना रिश्ता छुपा कर रखा ,,,,,तुम जो कह रही हो,,, मुझे तुम्हारी बात पर जरा सा भी विश्वास नहीं है ।
यह जरूर एक नाटक है ।
मेरे बेटे की मौत के बाद तुम उसको लेकर मनगढ़ंत कहानियां गढ़ रही हो। और यह जो तुमने प्रेग्नेंट होने की बात कही ,,,, पता नहीं ये किसका बच्चा अपनी कोख में लेकर घूम रही हो ।
और मेरे बेटे को उसका बाप बता रही हो तुम्हारी यह सब बाते यहां नहीं चलेगी। और तुम्हारे साथ कौन है
मुझे तो लगता इन सब में कहीं ना कहीं इसका भी हाथ
है ।
इसके बाद तो वह काम्या की कोई भी बात सुनने को राजी ही नहीं थे ।
काम्या उन्हें कितना कुछ कहना चाहती थी ,,,,कितना कुछ दिखाना चाहती थी। राजीव और अपने बारे में कितना कुछ बताना चाहती थी ।
पर उन्होंने उसकी कोई भी बात नहीं सुनी ।
और धमकी देते हुए कहा ,,,,
कि अगर वह तुरंत इस जगह से नहीं चली जाती,,,, तो पुलिस को बुलाने में भी वह देर नहीं करेंगे।
लेकिन जब राज ने पुलिस का नाम सुना ,,,,तो उसने यहाँ से जाना ही ठीक समझा ।
क्योंकि वह जो माहौल देख रहा था ।
अगर इसमें काम्या को रोका भी जाता तो किसी भी तरह सही नहीं होता ।
एक 5 साल की बच्ची उसके साथ में 2 महीने प्रेग्नेंट भी थी ।
इस हालत में कैसे यहाँ रह पाती।
और अगर सच में उन्होंने पुलिस को इन्फॉर्म कर दिया ,,,,
तो यहां तो राज की पहचान का भी कोई नहीं था ।
पुलिस के चक्कर काटते रहते ,,,,यही सब सोचते हुये राज ने काम्या को समझाया ,,,,,
और चुपचाप अपने साथ ले गया ।
काम्या एक बार फिर कटी पतंग की तरह गाड़ी में जाकर बैठ गई ।
देखते ही सौम्या बोली,,,,
मां क्या हुआ
क्या दादा और दादी से आपकी बात हुई हम कब जाएंगे उनके घर
क्योंकि वह सौम्या को गाड़ी के अंदर ही बैठा कर गए थे ।
उन्हें वहां साथ ले जाना ठीक नहीं लगा। गाड़ी को आगे लेते हुए कुछ देर तक राज ने गाड़ी में ही काम्या से बात की। अब तो काम्या के पास एक ही चारा था यहां से करीब डेढ़ सौ पौने 200 किलोमीटर दूर उसका गांव था ।
जहां उसके बाबा रहते थे ,अभी यही एक रास्ता नजर आ रहा था ।
और काम्या उससे यही कह देती थी।
कि बेटा डैड आपसे मिलने बहुत जल्दी आएंगे ।
और इस बार भी काम्या उससे यही कह कर गई थी,,, कि इस बार मैं आपके डैड को लेने जा रही हूं ।
आप आंटी के पास ठीक से रहना ,और मैं और डैड कर हम सब मिलकर अपने घर चलेंगे ।
और इस बार सौम्या को पूरा विश्वास था कि वह अपनी मॉम डैड के साथ ही रहेगी और उसके दादा-दादी के पास भी जाएगी ।
जैसे ही काम्या ने सौम्या को कुछ समझाना चाहा,,,, कि राज ने काम्या को कुछ चुप रहने का इशारा किया ।
और जब सौम्या खेलती हुई दूसरे कमरे में चली गई ,तो राज ने उसे समझाया,,,,
काम्या,,, वह बहुत छोटी बच्ची है ।
उसके सामने कोई भी बात अभी मत कहो ,,,उसे एक-दो दिन का समय दो जब हम तुम्हारे घर जाकर तुम्हारी फैमिली वालों से मिलेंगे ।
उसे अपने परिवार के और भी मेंबर मिलेंगे ,,,,तो वह उन सब में बिजी हो जाएगी।
तब तुम धीरे-धीरे सारी बातें उसे समझा देना।
इस तरह से कुछ कहोगी ,,छोटी सी बच्ची के दिमाग पर गलत असर पड़ सकता है।
जब सौम्या दोबारा राज के साथ अपने कमरे में खेलने में व्यस्त हो गई ।
तो काम्या ने अपनी मकान मालिक को धीरे धीरे सब कुछ बता दिया।
यह सचमुच बहुत बड़ा हादसा था ।
या कह सकते है ,,,कि अनहोनी थी।
इस बात की तो किसी ने उम्मीद भी नहीं की थी ।
सुनकर उन्हें भी बहुत दुख हुआ काम्या ने बताया ,,,कि अब मैं अपनी ससुराल जाऊँगी,,,,, और फिर देखते हैं क्या होता है ।
अभी तो मुझे खुद ही कुछ नहीं पता । दो-तीन दिन यहाँ पर सारा सामान पैक किया ,,,और तीनों एक बार फिर काम्या की ससुराल जाने के लिए निकल गए। सफर
कुछ लंबा था ,दो-तीन दिनों बाद पता लगाते हुए वहां पहुंचे।
मकान नंबर ,नाम और एड्रेस ,बिल्कुल सही सही मिल चुका था ।
अपनी गाड़ी थोड़ी दूर पर खड़ी करके सौम्या को गाड़ी में छोड़ कर ही।
काम्या और राज मेन दरवाजे पर पहुंचे और जब बैल बचाई ,,,,तो कुछ उम्र दराज दो व्यक्ति बाहर निकले।
शायद दोनों पति-पत्नी थे ।
जब काम्या ने ध्यान से देखा तो समझ आ गया ,,,कि यह, राजीव के मम्मी पापा है ।
काम्या तो खुद ही अपराध बोध से दबी हुई थी । कहीं ना कहीं उसे इस सब में अपना ही कसूर लग रहा था ।
बस सोच ही नहीं पा रही थी, क्या एक मां बाप को उनके के जवान
बेटे की इस दुखद मौत की बात कैसे बताऊं ।
वह राज की तरफ देख रही थी ।
और वह दोनों काम्या को ।
जब कुछ देर तक वह कुछ नहीं बोली ,तो उन्होंने ही आगे बढ़ते हुए काम्या से पूछा जी कहिए !
आपको किससे मिलना है
जी,,,जी,,, वह मुझे आपसे ही मिलना है
मुझसे बताइए क्या काम है
अब तो काम्या कुछ भी नहीं सोच पा रही थी ,कि वह
कहे क्या ,काम्या राजीव को ही याद कर रही थी।
कि वह उसे छोड़कर चला गया है।
और ये कैसा मोड़ उसके सामने आया है फूट-फूटकर रोते हुए काम्या उनके पैरों में जा गिरी ।
काम्या अंदर से बहुत भयभीत थी ।
लेकिन अब उसके पास कोई भी चारा नहीं था ।
अब तो वो वक्त आ ही गया था।
कि उसका अंजाम चाहे कुछ भी हो उसे उन लोगों को सब कुछ सच-सच बताना ही था ।
और काम्या ने शुरू से लेकर अंत तक की सारी कहानी रोते हुए उनके सामने रख दी थी।
इसमें काम्या को अपनी ही गलती लग रही थी ।
लेकिन एक मां बाप के लिए इससे बड़ा दुख और क्या हो सकता था,,, जिसे अपने बेटे की मौत के पूरे 15 दिन बाद यह पता चला है,,,, कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है ।
उन्हें तो यही लगा, कि शायद कभी-कभी वह अपने काम में इतना व्यस्त हो जाता है। कि उसे फोन करने का भी समय नहीं मिलता ,और इसी वजह से उससे बात नहीं हुई होगी ।
राजीव के माता-पिता ने कई बार उसे फोन लगाया था । लेकिन उसका फोन नॉट रिचेबल आ रहा था ।
वह राजीव को लेकर इन 15 दिनों से काफी चिंतित भी थे ।
लेकिन यह जो उन्होंने सुना ,,,यह तो उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं था। एक जवान बेटे की मौत सदमे से
भी कहीं बढ़कर होती है ।
वह सोच नहीं पा रहे थे ,यह सब है क्या लेकिन कहते हैं ना,,,, कि इंसान गुस्से में और दुख में अंधा हो जाता है।
कुछ ऐसा ही उनके साथ भी हुआ।
इस वक्त उन्हें काम्या की कोई भी बात सही नहीं लग रही थी ।
राजीव की मां तो यह सुन कर बेहोश हो गई थी ।
और राजीव के पिता अपने बेटे की मौत का गम और अपनी पत्नी की ऐसी हालत देखकर काम्या पर ही बिफर पड़े ।
उन्होंने काम्या को बहुत भला बुरा कहा यहां तक कह दिया ,,,,
कि ऐसी औरत मेरे बेटे की पत्नी हो ही नहीं सकती ।
जब मेरा बेटा इस दुनिया में नहीं है ।
तुझे तब याद आई है उसके घर की ।
इतने सालों तक अपना रिश्ता छुपा कर रखा ,,,,,तुम जो कह रही हो,,, मुझे तुम्हारी बात पर जरा सा भी विश्वास नहीं है ।
यह जरूर एक नाटक है ।
मेरे बेटे की मौत के बाद तुम उसको लेकर मनगढ़ंत कहानियां गढ़ रही हो। और यह जो तुमने प्रेग्नेंट होने की बात कही ,,,, पता नहीं ये किसका बच्चा अपनी कोख में लेकर घूम रही हो ।
और मेरे बेटे को उसका बाप बता रही हो तुम्हारी यह सब बाते यहां नहीं चलेगी। और तुम्हारे साथ कौन है
मुझे तो लगता इन सब में कहीं ना कहीं इसका भी हाथ
है ।
इसके बाद तो वह काम्या की कोई भी बात सुनने को राजी ही नहीं थे ।
काम्या उन्हें कितना कुछ कहना चाहती थी ,,,,कितना कुछ दिखाना चाहती थी। राजीव और अपने बारे में कितना कुछ बताना चाहती थी ।
पर उन्होंने उसकी कोई भी बात नहीं सुनी ।
और धमकी देते हुए कहा ,,,,
कि अगर वह तुरंत इस जगह से नहीं चली जाती,,,, तो पुलिस को बुलाने में भी वह देर नहीं करेंगे।
लेकिन जब राज ने पुलिस का नाम सुना ,,,,तो उसने यहाँ से जाना ही ठीक समझा ।
क्योंकि वह जो माहौल देख रहा था ।
अगर इसमें काम्या को रोका भी जाता तो किसी भी तरह सही नहीं होता ।
एक 5 साल की बच्ची उसके साथ में 2 महीने प्रेग्नेंट भी थी ।
इस हालत में कैसे यहाँ रह पाती।
और अगर सच में उन्होंने पुलिस को इन्फॉर्म कर दिया ,,,,
तो यहां तो राज की पहचान का भी कोई नहीं था ।
पुलिस के चक्कर काटते रहते ,,,,यही सब सोचते हुये राज ने काम्या को समझाया ,,,,,
और चुपचाप अपने साथ ले गया ।
काम्या एक बार फिर कटी पतंग की तरह गाड़ी में जाकर बैठ गई ।
देखते ही सौम्या बोली,,,,
मां क्या हुआ
क्या दादा और दादी से आपकी बात हुई हम कब जाएंगे उनके घर
क्योंकि वह सौम्या को गाड़ी के अंदर ही बैठा कर गए थे ।
उन्हें वहां साथ ले जाना ठीक नहीं लगा। गाड़ी को आगे लेते हुए कुछ देर तक राज ने गाड़ी में ही काम्या से बात की। अब तो काम्या के पास एक ही चारा था यहां से करीब डेढ़ सौ पौने 200 किलोमीटर दूर उसका गांव था ।
जहां उसके बाबा रहते थे ,अभी यही एक रास्ता नजर आ रहा था ।