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Romance प्रेम कहानी डॉली और राज की

धीरे-धीरे ढाबे के बगल में ही एक झोपड़ी बनाकर हम दोनों उस में रहने लगे ,,राज खूब मेहनत और लगन से काम करता ढाबा मालिक हमेशा राज को खुश होकर कुछ ज्यादा ही पैसे दे देता था ,धीरे-धीरे राज की मेहनत और उसकी इमानदारी से ढाबे पर लोगों का आना भी बढ़ने लगा, ढावा अच्छा चलने लगा ,,,हमे यहां काम करते हुए 7 साल हो चुके थे ,अब राज 12 साल का हो गया था ,,,राज ढाबे पर काम करता और कभी-कभी ढाबा मालिक के साथ उनके खेतों पर भी चला जाता ,जहां वो ट्रैक्टर चलाते तो उनको बड़े ध्यान से देखता ,जब जब चार साल और बीत गए राज 16 साल का हो गया था ,, उसे ट्रैक्टर चलाना भी आ गया था,,, गाड़ी बस ट्रैक्टर में तो उसका दिमाग शुरू से ही बड़ा तेज था ,जब भी काम से फ्री होता खेत में ट्रैक्टर चला के सीखता,,अब वह अच्छी तरह से चलाने लगा

था ,,,दो-तीन साल और बीते तब तक पर सभी तरह के वाहन बखूबी चला लेता था चाहे वह मोटरसाइकिल हो उनकी जीप हो या फिर ट्रैक्टर ,,राज 19 साल का हो चुका था ,लेकिन उसमें एक जो सबसे बड़ी कमी थी वह यह कि उस बच्चे ने कभी भी स्कूल का मुंह नहीं देखा था, हां ढाबे का हिसाब किताब उसे सारा आता था ,जो उसने ढाबे पर ही देख देखकर सीख लिया था ,कितने लोगो का खाना बना ,कितना खाना खाया, कितनी सब्जी है , इन सब का हिसाब वह उंगलियों पर ही कर लेता ,और उसे लिखना भी आ गया था ,बस इससे ज्यादा और कुछ नहीं सीखा,,,इन 14 साल में राज को ढाबे पर जितने भी पैसे मिले उसने कभी भी एक पैसा खर्च ना किया था ,,,पास में एक छोटा सा बैंक था,, जितने भी पैसे मिलते हर महीने जाकर बैंक में जमा कर देता ,,बस दो टाइम की रोटी ही तो खानी थी ,जो हम दोनों को ढावे से ही मिल जाती थी ,,,,

1 दिन सभी ढाबे पर काम कर रहे थे, कुछ लोग खाना खा रहे थे, खाना बन रहा था मैं वहां बगल में बैठकर सब्जी काट रही थी और राज ग्राहकों को खाना देने में लगा हुआ था,,, तभी अचानक बहुत जोर की आवाज हुई,, सब लोग घबरा कर खड़े हो गए जब देखा तो रोड पर ही सामने एक कार की दुर्घटना हुई थी,,, सामने से आ रहे ट्रक से बुरी तरह से भिड़ गई थी ,,,थोड़ी ही देर में लोगों की भीड़ इकट्ठी हो चुकी थी ,,ट्रकवाला तो 2 मिनट में ही रफूचक्कर हो गया, और कार के अंदर दो लड़के थे एक कोई 19,,,20 साल का रहा होगा और

दूसरा

25 ,26 के आसपास था जो लड़का कार चला रहा था उसकी हालत तो बहुत खराब थी, पहले तो लगा कि शायद मर चुका है लेकिन जब हल्की सी सांस चलती दिखी तो उसको गाड़ी से बाहर निकाला ,,और बगल बाली सीट पर जो लड़का था ,,वैसे तो ठीक था पर वह भी बेहोश हो गया था ,,लोगों को तो समझ में नहीं आ रहा था कि यह मर चुके हैं या ,,,1020 मिनट बाद मर जाएंगे पर सबसे पहला काम था उनको अस्पताल पहुंचाना ,इन सब कामों में राज ही सबसे आगे था ,,उसने जल्दी-जल्दी लोगों से कहना शुरू किया कि फटाफट आओ इनको अस्पताल लेकर चलना है ,पर अस्पताल का नाम सुनकर ही वहाँ लोगों के नाम पर एक भी कोई नहीं बचा था ,,,उस दिन दुकान मालिक भी दुकान पर नहीं था,, और जो कुछ काम करने वाले लोग थे ,,एक्सीडेंट का नाम सुनकर ही भाग खड़े हुए थे, इतने लोगों में बस मे और राज ही वहां थे ,,,राज के पास ना तो फोन था ना ही कोई ऐसी सुविधा कि वह पुलिस को डॉक्टर को भुला सके,, पर अपना राज तो शुरू से ही दिल का सोना है ,,,,वह ऐसे कैसे छोड़ सकता था ,,,उसने जल्दी से उनकी ही कार को स्टार्ट करके देखा थोड़ी सी मेहनत के बाद कार स्टार्ट हो गई ,,,,क्योंकि चोट कार को तो ज्यादा नहीं आई थी ,,पर उसकी दमच से आगे वाले लड़के की चोट बहुत गहरी थी ,,,,राज ने दोनों लड़कों को कार में लिटाया उनके साथ मैं भी अंदर बैठ गई, करीब 2 घंटे

बाद हमें जो पहला अस्पताल मिला हम जल्दी से दोनों को अंदर ले गए ,,अस्पताल ठीक-ठाक था राज ने सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए डॉक्टर से दोनों का इलाज शुरू करने के लिए कहा ,,जब डॉक्टर ने नाम पता पूछा तो राज ने सारी बातें सारी चीजें एक-एक करके साफ-साफ बता दी, उसके बाद काम पुलिस का था पुलिस ने जब उनकी गाड़ी की तलाशी ली तो उसमें उन लड़कों के कुछ कागज निकले जिसमे उनका पहचान पत्र था जिससे उनका पता फोन नंबर सब कुछ मालूम पड़ गया ,,पुलिस ने उनके घर पर खबर की ,,करीब दो-तीन घंटे बाद दोनों लड़कों के परिवार वाले अस्पताल में आ चुके थे,,, लड़के भी अस्पताल के अंदर ही थे इलाज चल रहा था उनका ,,,,राज से जो भी पूछा गया सब कुछ सच-सच बता दिया था ,,,,,,

लड़कों को अस्पताल पहुंचाने के बाद उनका इलाज शुरू हो चुका था ,मैं और राज तभी से बिना कुछ खाए पिए बस यही इंतजार कर रहे थे कि लड़कों के घर वालों का कुछ पता चले , उनका इलाज हो और वह ठीक हो जाएआखिर वह भी किसी के कलेजे के टुकड़े होंगे ,,डॉक्टर कभी ऑपरेशन थिएटर से बाहर आते , तो कभी अंदर जाते , तो कभी नर्स को अपनी सहायता के लिए बुलाते इसी तरह से लगभग 2 घंटे बीत चुके थे,,, अभी लड़के ऑपरेशन थिएटर में ही थे तभी अस्पताल के बाहर बाहर दो बड़ी-बड़ी गाड़ियां आकर रुकी, जिनमें से उनके मां बाप ,भाई बहन ,,परिवार के और भी लोग थे दोनों गाड़ियां लोगों से खचाखच भरी हुई थी बे बहुत घबराए हुए से अंदर आए और रिसेप्शन पर आकर उनके नाम बताते हुए पूछताछ करने लगे ,,,मैं और राज समझ गये कि ये लोग लड़कों के परिवार वाले हैं तो हमने जाकर उन्हें बैठने के लिए कहा,, और फिर आराम से एक एक बात बता दी वह सभी मेरे और राज के हाथ जोड़कर शुक्रिया अदा कर रहे थे ,,कि आज के जमाने में बहुत ही कम लोग आपके जैसे होते हैं,, जो बिना किसी स्वार्थ के किसी के साथ कुछ अच्छा करते हैं,,, पर अभी इन सब बातों का वक्त नहीं था,, राज और मैंने उन्हें धीरज बंधाते हुए बस एक ही बात कही ,,कि अभी इन सब बातों का वक्त नहीं है ,,अभी हम सिर्फ भगवान से प्रार्थना कर सकते हैं,कि आपके बच्चों के साथ सब कुछ अच्छा हो उनके साथ जो दो औरतें थी उनका हाल सबसे ज्यादा बुरा था शायद वह दोनों लड़कों की मां थी,,,मैं भी उन्हें समझाने की कोशिश कर रही थी, कि ऐसी स्थिति मैं समय सिर्फ धीरज रखने का है ,,उनको आए हुए भी 1 घंटे से ऊपर हो चुका था ,तभी ऑपरेशन थिएटर का दरवाजा खुला और डॉक्टर बाहर आए ,डॉक्टर ने बताया की ऑपरेशन किया जा चुका है,, ऑपरेशन भी सक्सेस रहा लेकिन फिर भी अभी उसे होश में आने में कम से कम 1 से 2 घंटे लग सकते हैं,, और उसके बाद ही हम कुछ बता पाएंगे कि उसकी क्या कंडीशन है ,,,

ऑपरेशन तो हो चुका था लेकिन अभी भी खतरा टला नहीं था,, क्योंकि जब तक डॉक्टर होश में आने के बाद दोबारा उनका टेस्ट नहीं कर लेते ,, तब तक कुछ भी कहना मुश्किल था ,,,

अब लड़कों के परिवार वाले तो अचानक भागे ,भागे यहां आए थे ,और फिर यह एरिया उनके लिए अनजान था ,तो यहां भी मेरी और राज की ही जिम्मेदारी बनती थी कि उन लोगों के थोड़ी बहुत खाने पीने की व्यवस्था करें,,, राज उन्हीं की गाड़ी और ड्राइवर साथ लेकर ,उनके खाने-पीने की व्यवस्था करने के लिए चला गया था,थोड़ा बहुत खाना और चाय नाश्ता लेकर आ गया और उन सब का ध्यान भी रखा ,,,

डॉक्टर ने 1 से 2 घंटे बोले थे ,लेकिन अभी 4 घंटे होने को आ रहे थे, तभी नर्स ने आकर बताया कि लड़के ने अभी आंखें खोल कर देखा था ,,,,तभी सब लोग डॉक्टर की तरफ जल्दी से भागे और उन्हें इस बात की खबर दी ,,,डॉक्टर भी आ गए और उन्होंने अंदर जाकर उसका चेकअप किया और बाहर आकर बताया कि वह ठीक है,,,आप मैं से कोई भी एक जाकर उससे मिल सकता है उनके घर वालों ने लड़के की मां को वहां भेज दिया ,,,थोड़ी देर बाद जब वह वापस आई तो उन्होंने बताया कि वह ठीक है और उसने अच्छे से बात भी कर ली ,तब कहीं जाकर सबकी जान में जान आई हम सब पूरी रात वही रहे, दूसरे दिन दोनों लड़कों के सारे टेस्ट हो चुके थे,और भगवान की कृपा से सभी रिपोर्ट सही आई थी ,,,हां चोट कुछ दिनों में ठीक हो जाती लेकिन अब घबराने की कोई बात नहीं थी,,, दोनों लड़के पूरी तरह से स्वस्थ थे तीन-चार दिन हॉस्पिटल में रहने के बाद उनकी छुट्टी हुई ,,,,इन तीन-चार दिनों में ,

मैं और राज नियमित रूप से वहां आते रहे थे ,इतने दिनों में उनसे एक रिश्ता सा बन गया था ,,बातों ही बातों में बह मेरे और राज के बारे में सब कुछ जान चुके थे ,,उन्हें बहुत आश्चर्य हो रहा था कि,आज भी ऐसे लोग है जिनका खुद अपना कोई ठिकाना नहीं है फिर भी अपनी जान पर खेलकर हमारे बच्चों की जान बचाई ,,,,

राज खुद भी जब 19 वर्ष का था इतनी छोटी सी उम्र में सारी जिम्मेदारी लेते हुए उसने एक अच्छे इंसान के सारे कर्तव्य पूरीतरह से निभाये थे,,,,
 
वह सभी इस बात से बहुत खुश थे, जब उनके जाने का टाइम आया,तो दोनों ने खुश होकर राज को इनाम देना चाहा,राज ने सोचा कि शायद कुछ छोटा मोटा गिफ्ट होगा तो उसने वह पैकेट ले लिया,,, लेकिन जब उसने उस पैकेट को खोला तो उसमें 5 लाख का चेक और हमारे ढाबे से लगभग 2 किलोमीटर आगे एक छोटी सी जमीन का टुकड़ा था,,,,क्योंकि उन्हें राज के और मेरे बारे में सब कुछ पता था कि हम किस हालात में किसी ढाबे पर काम करते हैं ,,तो उन्होंने राज से खुद का काम शुरू करने के लिए कहा और उसके लिए ही वह पैसे व जमीन का टुकड़ा राज को उपहार स्वरूप दिया था पर अपना राज तो शुरु से ही स्वाभिमानी था,,,, आखिर किसी की जान बचाने के बदले बह पैसे कैसे ले सकता था,,,उनके लाख कहने के बावजूद भी राज ने उन्हें बह सब कुछ लौटा दिया ,,,,

सच बताऊ मेरा भी मन था ,,, कि राज उनके दिए हुए उपहार रख ले ,,,क्योंकि वह बहुत बड़े लोग थे5 लाख तो उनके लिए 5 सिक्कों के जैसे थे अगर रख भी लेता तो राज का भला हो जाता, पर उसने ऐसा नहीं किया और वह सारे पैसे उन्हें लौटा कर हम वापस अपने काम पर अपने ढाबे पर आ गए ,और फिर से अपने उसी काम में लग गए,,

लगभग 5 से 6 महीने बीत चुके थे, हम पूरी ईमानदारी से अपना काम कर रहे थे, ढाबे का मालिक ढावे से दूर शहर में रहता था और कभी-कभी राज को किसी काम से उसके यहां जाना पड़ता था ,,,

अपना राज दिखता तो शुरू से ही किसी फिल्मी हीरो की तरह था,, उम्र के साथ-साथ उसका कद ऊंचा हो गया,,,,,बचपन से ही उसे कसरत का और भागदौड़ का बड़ा शौक था ,तो इस उम्र तक आते-आते उसने अपने शरीर को चुस्त तंदुरुस्त और बलवान बना लिया था,,, मेरा राज हजार लोगों में भी खड़ा हो तो अलग दिखता था ,,

उसके शरीर की सुंदरता और चेहरे का भोलापन किसी को भी आकर्षित कर लेता था,,, पर उसे हमेशा सिर्फ और सिर्फ अपने काम से ही मतलब रहा है,,,

पर मैं कुछ दिनों से देख रही थी कि जब भी वह मालिक के यहाँ जाता ,तो उसकी औरत राज को किसी ना किसी बहाने बार-बार अपने घर बुलाने लगी थी,,,

मैंने राज से पूछा भी पर वह मन का भोला कुछ न समझ पाया,,,

और 1 दिन राज फिर किसी काम से उनके घर गया, तो उसके घर पर उसकी औरत के अलावा कोई और ना था,,उसने राज के सामने राज को पाने की इच्छा जाहिर की,, यह सुनकर राज घबरा गया क्योंकि उसने तो हमेशा ही दुकान मालिक को अपने पिता का दर्जा दिया था उसी तरह से उनकी बात मानी थी, राज वहाँ से घबराता हुआ कैसे भी जल्दी से निकल कर ढाबे आ गया ,,,वहां से चला तो आया,,, लेकिन उसकी जो सबसे बड़ी गलती थी ,,कि राज ने आकर यह बात मुझे नहीं बताई, इस बात को कुछ दिन बीत गए फिर 1 दिन दुबारा किसी काम से मालिक ने उसे अपने घर भेजा ,,,राज ने थोड़ी ना नुकुर की पर काम कुछ ऐसा था कि उसे जाना ही पड़ा और इत्तेफाक था कि उस दिन भी घर पर वह अकेली थी,,, वह फिर राज से अपनी बात मनवाने के लिए जबरदस्ती करने लगी जब बात बहुत बढ़ गई तो ,राज ने उसे धक्का दिया और भला बुरा कह के यहां चला आया ,,,,,और राज ने यह सारी बातें मालिक को बताने की धमकी भी दी ,,,पर यह बात सुनकर वह और भी बौखला गई थी ,,,और उसे डर भी था कि कहीं सच में राज यह बातें उसके पति को ना बता दे, फिर क्या राज के ढाबे लौटने से पहले ही उसने ढाबा मालिक को फोन करके राज के बारे में उल्टी-सीधी बातें लगाते हुए शिकायत कर दी,, कि राज ने उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की है ,,और मारपीट करते हुए चोरी भी की ,,,,,

राज जैसे ही ढाबे पर आया ढाबा मालिक का गुस्से से खून ख़ौल रहा था,,,

राज के आते ही उसने राज की बुरी तरह से पिटाई की,,, भला बुरा कहते हुए पुलिस को भी बुला लिया,,, मैं रोती रही पर हमारी बात सुनने वाला था कौन,,,

हमारी सालों की मेहनत ईमानदारी और हमारे दिल की सच्चाई सब एक झटके में खत्म हो चुकी थी,,, उसे राज के मासूम से चेहरे की सच्चाई बिल्कुल भी नहीं दिखाई दी ढाबा मालिक बुरी तरह चिढ़ गया था,,

और उसने सोच लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए वह राज को बर्बाद करके ही रहेगा पुलिस के आने से पहले उसने राज को ढाबे में बांधकर उसे शराब पिलाई ,,

जिससे राज के खिलाफ की गई रिपोर्ट को सही साबित किया जा सके, और पुलिस के आने के बाद सारे झूठे बयान लिखवा दिए कि शराब के नशे में राज ने उसकी पत्नी के साथ गलत करने की कोशिश की है ,,,

और उसके घर से चोरी भी कि ,,,

पहली बार शराब राज के शरीर के अंदर गई थी,,, पुलिस के आने के बाद जब पुलिस ने कुछ भी पूछा तो राज बेहोशी की हालत में कुछ भी नहीं बोल पाया ,,,इसलिए उन्हें भी यकीन हो गया था ,कि यह रिपोर्ट सही है और वह राज को पकड़कर थाने ले गए,,,

राज पुलिस को थाने ले जा रही थी ,और मैं रोती बिलखती दूसरों से मदद की गुहार लगाती पुलिस की गाड़ी के पीछे भाग रही थी, लेकिन उस एरिया में ढाबे के मालिक की ही चलती थी, और सबको यही लग रहा था कि राज ने सच में यह सब कुछ किया है पुलिस राज को थाने ले जा चुकी थी, और मैं भी उसके पीछे जाती हुई थाने तक पहुंच गई , मैंने पुलिस के हाथ पैर जोड़े उनसे सारी सच्चाई भी बताई ,पर मेरी वहां कौन सुनने वाला था,, पुलिस ने मेरी किसी भी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और राज की मारपीट करते हुए उसे थाने में बंद कर दिया,,,

ढाबा मालिक ने लगभग दो-तीन पेज की एक बड़ी सी रिपोर्ट राज के खिलाफ लिखवाई थी ,,जिसमें उसको शराब पीकर उसकी बीवी की इज्जत पर हाथ डालने का और चोरी करने का आरोप दिया गया था,,, मुझे थाने में बैठे-बैठे रात हो गई मुझे थाने से बाहर निकाल दिया गया ,मैं बाहर बैठ कर रोती रही गिड़गिड़ाती रही पर मेरी किसी ने कोई बात नहीं सुनी ,फिर मैं घर आई और इस उम्मीद से कि कोई मेरी मदद करेगा बस्ती के आसपास जितने भी घर थे हर घर में जाकर मैंने राज

को बचाने की विनती की कि ,कोई उसकी जमानत दे दो, उसकी मदद करो आप सब तो जानते हो कि अपना सिवा कैसा है ,,उस पर यह सारे झूठे आरोप लगाए गए हैं ,पर किसी ने भी मेरी बात पर विश्वास नहीं किया और मुझे भी अपने घर से भगा दिया,,, इसी तरह से लगभग 15 दिन निकल चुके थे ,,राज थाने में ही बंद था और हमारी कहीं पर भी कोई सुनवाई नहीं थी ,अब मैं ढाबे में भी काम नहीं करती थी, मैं थोड़ा बहुत खाना बनाती और खाने का डिब्बा लेकर राज के पास जाती थी,, कि इस बहाने कम से कम मैं उसे देख तो सकूं, कुछ दिन तो मुझे थाने के अंदर जाने ही नहीं दिया ,,पर वहां भगवान ने किसी एक भले आदमी को भेज दिया था ,,वह मेरी स्थिति देखता रहा और एक दिन जब उसने देखा कि बड़े साब थाने में नहीं है, तो चुपचाप मुझसे कहा कि मैं दोपहर में 100 से 200 के बीच जाऊं तब वह खाना खाने जाते हैं तो मैं राज को उस टाइम खाना खिला सकती हूं,, फिर मैं ऐसा ही करने लगी थी ,,इसी बीच उनसे मेरी कुछ बात भी हो जाती थी ,और फिर उन्होंने मुझे बताया कि अगर तुम्हारी कोई सुनवाई नहीं हुई ,,या तुमने अपनी तरफ से कोई वकील नहीं किया ,तो राज कभी नहीं छूट पाएगा,, क्योंकि उस पर एक महिला के साथ दुर्व्यवहार करने का केस लगा है,, और इस केस में फंसे लोग इतनी आसानी से नहीं छूटते,,,,

मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं , दूसरे दिन जब मैं खाना बनाने को बैठी तो घर

की लगभग सारी चीजें खत्म हो चुकी थी ,और मेरे पास जो कुछ थोड़े बहुत पैसे थे ,वह भी खत्म हो चुके थे ,, मैं बक्से में और डिब्बे में पैसे ढूंढ रही थी ,,कि कहीं कुछ मिल जाए तो आज के खाने का इंतजाम हो सके, तभी एक छोटा सा बटुआ दिखा ,,जिसमें मुझे कुछ पैसे मिले और एक कार्ड भी मिला,, कार्ड अंग्रेजी में था तो मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था ,कि यह क्या है ,,,हां लेकिन दिमाग पर जोर डालने के बाद मुझे याद आया कि यह कार्ड उन लड़कों के घर वालों ने मुझे अस्पताल में दिया था,,,

हां पक्का यह वही कार्ड है,,, जब राज ने वह पैसे और वह जमीन का टुकड़ा लेने से इनकार कर दिया और हम वहां से आने लगे राज मुझ से थोड़ा आगे निकल आया था तो उस लड़के के पिताजी ने मुझे रोकते हुए यह कार्ड मेरे हाथ पर रख दिया था,, कि अगर आपको कभी भी किसी वक्त किसी भी काम के लिए मेरी जरूरत पड़े तो ,इसमें मेरा फोन नंबर और मेरा पता लिखा हुआ है ,आप मुझसे इस पर बात कर सकती हैं ,,,

और यकीन मानिए आपको जब भी मेरी मदद की जरूरत होगी तो मैं आपकी मदद जरूर करूंगा, और मुझे आपकी मदद करने में खुशी होगी,,,

बस अंधेरे में मुझे एक आशा की किरण दिखने लगी थी ,,,पर इस वक्त तो मेरे पास कोई फोन भी नहीं था ,मैंने वो कार्ड अपनी साड़ी के छोर में बांधा, और जैसे तैसे खाने का इंतजाम करके खाने का डब्बा ले

थाने पहुंच गई,,,,
 
रोज की तरह आज भी थाने के बड़े अफसर अपने घर खाना खाने गए थे,, मैंने राज को खाने का डब्बा दिया और उस भले आदमी को सारी बात बताते हुए उनसे एक फोन करने की मदद मांगी,, उन्होंने बिना किसी बहस के अपनी जेब से फोन निकाला और जल्दी से नंबर लगाकर मुझे फोन दे दिया कि मैं बाहर जाकर उन्हें सारी बात अच्छे से समझा दूं, और मैंने ऐसा ही किया सारी बात करने के बाद बड़े साहब के आने से पहले ही उनका फोन वापस करके घर आ गई,, मैंने जैसे ही मालिक को फोन किया और राज का नाम बताया तो उन्हें 1 मिनट भी नहीं लगा हमें पहचानने में वह हमारे बारे में पूछने लगे कि हम कैसे हैं ,,,,बताने से पहले मैं उनके सामने जी भर के रो ली थी पिछले 15,,,,20 दिनों में पहली बार कोई ऐसा मिला था जिसने हमारी खैरियत पूछी हो ,,,वर्ना तो सब मेरी परछाई से भी दूर हो रहे थे , उन्होंने मुझे शांत करा कर सारी बात पूछी और मुझसे कल ही मिलने का वादा करके फोन रख दिया ,,,,

दूसरे दिन जब मैं खाना लेकर थाने पहुंची तो मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि उन दोनों लड़कों के पिता और उनके साथ उनका एक वकील थाने में बैठे हुए थे ,,,मेरे लिए उनका आना किसी अचंभे से कम ना था ,मैंने सोचा भी नहीं था कि आज भी कुछ लोग ऐसे होंगे जो किसी के दुख दर्द को इस तरह से समझ पाएंगे,, उनको देखते ही मैं बुरी तरह से फूट पड़ी थी,,

मेरे आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे,,,, वह बहुत बड़े लोग थे और शहर से बहुत बड़ा वकील उनके साथ आया था ,,ढाबा मालिक तो उनके पैर की धूल भी ना था ,,जब उन्होंने थाने में सारी सच्चाई बताई और राज की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए इस घटना की दोबारा जांच करने के लिए कहा ,,,और ऐसा ना करने पर बड़े अफसर से शिकायत करने की धमकी भी दी तो थाने के बड़े अफसर भी बुरी तरह से डर गए ,और जब उनने अपनी पूरी टीम को ढाबा मालिक के यहाँ भेजा और सख्ती से पूछताछ की ,,,,राज के आने जाने का टाइम देखा , आसपास राज के बारे में पूछताछ की बात की थी ,तो उसकी सारी सच्चाई ,सामने आते देर न लगी , और जब हकीकत सामने आ गई तो फिर उसकी औरत को भी अपनी सच्चाई कबूल करनी पड़ी आखिरकार 20 ,,,25 दिन के बाद राज को छोड़ दिया गया,,,

उसके बाद राज घर आ गया जब एक मुसीबत खत्म हुई तो यहां दूसरी मुसीबत ने जन्म ले लिया था ,,सारी बस्ती में से कोई भी हम से सीधे मुंह बात करने को तैयार ना था राज पर ठरकी होने का ठप्पा लग चुका था सब यही कह रहे थे कि बिन मां बाप की औलाद अनाथ ,आवारा ,यही तो करेगा शराब और दारू पीकर ही तो बड़ा हुआ होगा,,, जिस मालिक ने इसे सहारा दिया उसी के घर में इसने ऐसा काम किया,,,

और उसके बाद उस बस्ती में सब राज को ठरकी के नाम से ही बुलाने लगे थे ,,ऐसी बातें सुनकर मेरा

कलेजा मुंह को आता था जिस बच्चे ने पूरी जिंदगी में शराब को कभी छुआ भी नहीं, उसे ठरकी कहकर बुलाया जाने लगा था ,,,राज ने अपने बारे में बहुत सफाई दी सबको बहुत समझाया,, पर किसी ने उसकी एक न सुनी ,,

तब से ही मेरा राज ऐसा हो गया लोगों के लिए उसके मन में एक गुस्सा भर चुका था लोगों के मुंह से अपने लिए ऐसी बातें सुनता तो उसकी आंखों में खून उतर आता ,,और तब से उसके मन में लोगों की प्यार की जगह जिद और नफरत ने ले ली ,,अब हमें वहां पर कोई काम भी नहीं देता था,,राज के पास जो थोड़े पैसे थे जो उसने बैंक में इखट्टे किए थे ,,,उसी से हम अपना खर्चा चला रहे थे,, पर आखिर ऐसा कब तक चलता, एक डेढ़ महीने बाद एक दिन अचानक ही हमारी खैरियत पूछने के लिए उन्हीं लड़कों के पिता ने हमें फोन किया उस वक्त राज घर पर नहीं था,, तो फोन मेंने ही उठाया उस दिन मैं बहुत ज्यादा परेशान थी ,और फिर जब उन्होंने अपनापन से पूछा तो मैंने उन्हें सारी बात बता दी ,,अपनी सारी परेशानियां एक-एक करके उनके सामने रख दी,

मेरी इस बात पर वह हमसे काफी नाराज थे कि उनके इतना कहने के बाद भी हमने अपनी परेशानी उन्हें नहीं बताई उसके बाद दूसरे ही दिन ,, फिर हमारे पास हमारे घर पहुंच गए ,,,और इस बार उन्होंने राज को अपने पास बिठाकर बिल्कुल अपने बेटे की तरह प्यार से समझाया ,उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा बेटा

अगर आज तुम्हारे पिता जिंदा होते तो क्या तुम उन का दिया हुआ कुछ भी नहीं लेते,,,क्या मुझे अपना पिता नहीं मानोगे ,,,ऐसा कैसे हो सकता है कि किसी का बेटा मुसीबत में हो और उसका पिता उसके लिए कुछ भी ना करें,,,,

जो लिफाफा में तुझे दे रहा था वह आज भी मेरे पास बिल्कुल वैसा ही रखा हुआ है,,,, क्योंकि मैं तुम्हें दे चुका था ,,,और दी हुई चीज कभी वापस नहीं ली जाती ,,,अब अगर तुम नहीं लोगे तो मैं समझूंगा कि तुम मुझे अपना पिता नहीं मानते ,,,और अगर इसे लेकर अपना नया जीवन शुरू करोगे तो मुझे बहुत खुशी होगी ,,,,,

देखो राज बर्बादी, बदनामी ,और जिद हमेशा किसी इंसान को बुरे रास्ते पर ले जाती है ,,,लेकिन इन पैसों से अगर तुम अपनी अच्छी जिंदगी शुरू करोगे तो तुम्हारे और काकी के लिए अच्छा होगा ,,,

और मुझे भी अच्छा लगेगा जब उन्होंने इतना समझाया और फिर मैंने भी उनके सामने ही राज को अच्छे से डांट लगाई कि बड़ों का अनादर क्यों कर रहा है इस तरह से ,,,

आखिर वह तुमसे बड़े हैं उनके पैर छूकर पिता का आशीर्वाद समझकर यह लिफाफा रख ले,,,,,, और शायद तब यह बात राज की समझ में आ गई थी ,,,और उसने सब की बात मान ली ,,उसने सोच लिया था कि वह इस बस्ती को छोड़कर कहीं दूर जाकर नए तरीके से अपनी जिंदगी शुरु करेगा ,,,,,,,

राज ने सब के समझाने पर उन लोगों से ₹5 लाख और जमीन के टुकड़े के कागजात रख लिए थे , तब राज को सच में उनमें अपने पिता ही नजर आ रहे थे, जिन्होंने पूरे अधिकार के साथ राज को वह लिफाफा दिया था ,और जब राज इस बात के लिए राजी हो गया, तो उन्होंने उसी वक्त हमसे सामान बांधने के लिए कहा,

क्योंकि वह सुबह से शाम तक यहीं थे और इतने टाइम में देख रहे थे कि कोई भी हमारे यहां ना आ रहा है ,ना हमसे बात कर रहा है मदद करना तो बहुत दूर की बात है, जब यहां आकर उन्होंने बस्ती में राज का घर पूछा था ,तब भी लोगों ने हंसते हुए राज का मजाक उड़ाया ,और कहा आप राज का घर पूछ रहे हैं ,या ठरकी का जिसने अपने मालिक का नमक खाया और उन्हीं के साथ ऐसा काम किया ,वह तो ठरकी है और ठरकी को पीने के बाद होश ही कहां रहता है ,कि वह क्या कर रहा है,,,

सब की राज के बारे में यही राय थी ,सब उसे राज की जगह ठरकी ही बुलाने लगे थे लेकिन उन्होंने कुछ ना कहते हुए हमारे घर का पता लगाया और घर तक आ

गए ,,

वह स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ थे, कि राज का अब यहाँ रहना ठीक नहीं है,, अगर वह यहां रहा तो यही सब बातें सुन सुनकर और ज्यादा परेशान हो जाएगा उन्होंने जबरदस्ती हमारा सामान बधवाया सामान था ही क्या ,सिर्फ थोड़े से कपड़े और कुछ रसोई का सामान, टूटी हुई निमाड़ के दो पलंग जो उन्होंने, यहीं पर छोड़ने के लिए कहे थे ,,जरा सा सामान उनकी बड़ी सी गाड़ी के ऊपर और पीछे डिग्गी में ही आ गया था ,,अब चारों वही चल पड़े थे जहां पर उन्होंने राज को वह जमीन का टुकड़ा दिया था ,वह जगह पास ही थी बस कुछ ही देर में सब लोग वहां पर पहुंच गए थे,,

जेसे ही वहां पहुंचकर गाड़ी से उतरे तो आसपास के कुछ लोग उनसे मिलने आ गए थे ,वहां के लोग उन्हें जानते थे क्योंकि यहां पर बहुत सारी जमीन उनकी थी, और कभी-कभी जमीन के सिलसिले में उनका आना जाना यहां हो जाता था ,सब लोग उनके पास आए तो उन्होंने राज से सब का परिचय करवाया ,और राज को अपना खास बताकर सबसे यहां पर राज का का साथ देने की बात कही, उन्होंने यह भी बताया कि राज बहुत मेहनती लड़का है ,और जो भी करेगा इसमें आप सब इसका साथ दे तो आपका भी फायदा होगा ,,जब उन्होंने राज की इतनी तरफदारी की, और उसके बारे में इतनी सारी अच्छी बातें बताई तो वहां के लोगों ने इस बात को मान कर राज का अपनी बस्ती में स्वागत किया,,,,
 
जगह तो मेन रोड पर थी, पर गांव के नाम पर वहां यही कोई 40, 50 घर बने हुए थे जिनमें लोग रहते थे और आसपास पड़ी जमीन में अपनी खेती करते थे ,उसी जमीन में वह जमीन का टुकड़ा था जो उन्होंने राज के नाम कर दिया था ,,

अभी तो वह जमीन एक खेत के रूप में ही थी उसमें रहने के लिए कुछ भी नहीं था, तो वहां पास ही खड़े एक व्यक्ति ने हमें अपने यहाँ रहने के लिए दो कमरे दे दिए थे, उन्होंने राज का सारा सामान उनके यहाँ रखवाया और जब आने लगे तो राज के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा ,कि उसे जब भी किसी चीज की जरूरत हो वह बिना किसी संकोच के कभी भी उनसे मदद ले सकता है ,,

पर राज के लिए तो उनकी यही मदद बहुत ज्यादा थी ,जिसे वह जिंदगी भर नहीं भूलता और जाते वक्त उन्होंने एक बात और कहीं कि ,,मैं तुम्हें अपने बेटे की तरह आशीर्वाद के रूप में यह चीजें दे रहा हूं,, खबरदार जो कभी किसी एहसान को सोचते हुए तुमने चीजों के बारे में सोचा,, बस अब तुम यहां रह कर अपना कोई भी कम शुरू कर सकते हो ,और फिर बो लोग चले गए, अब राज की ही जिम्मेदारी थी ,कि वह खुद को कैसे साबित करता , और अपनी जिंदगी को कैसे आगे तक ले जाता ,,,

जब राज ने देखा कि यह रोड भी काफी चलती है और दोनों तरफ से शहरों से जुड़ी हुई है , इस पर ट्रक और शहर से आने जाने वाले लोग पूरा दिन और रात गुजरते

ही रहते हैं ,और फिर आसपास कोई ढाबा भी नहीं था ,,क्योंकि राज को ढाबे का काम आता भी अच्छी तरह से था, तो उसने यहां पर अपनी जमीन के आगे वाले हिस्से में अपने हाथों से ही से एक बड़ी सी झोपड़ी बना ली थी और उनके दिए गए पैसों से कुछ सामान लाकर ढाबे का काम शुरू कर दिया अपनी मदद के लिए, गांव से कुछ लोगों को भी अपने यहां काम पर रख लिया था ,,

चूँकि राज को खाना बनाने का ज्यादा अंदाज नहीं था ,पर हिसाब किताब करना सामान लाना ,लोगों को खिलाना, उनसे पैसे लेना ,यह सारे काम उसे अच्छी तरह से आते थे ,तो अंदर खाना बनाने का काम में संभालती , राज ने दो औरतों को और एक दो लड़कों को भी लगा दिया था मेरे साथ काम के लिए ,,,झोपड़ी से राज ने एक पक्की सी दालान बनाई ,उसके बाद अंदर दो कमरे बनाए ,कुछ पैसा उसका बैंक में था कुछ ढाबे से आता था ,और जो पैसा उन्होंने दिया था ,,,,तो धीरे धीरे बाकी पड़ी जमीन में बाउंड्री उठाते हुए पीछे भी एक कमरा बनवा लिया था ,अब हम अपनी जमीन के कमरे में ही रहने लगे थे,, उसके बाद हमने वहां पर पेड़ पौधे लगाना शुरू किया ,जो आज बड़े होकर फलदार वृक्ष बन चुके है,,

सबसे आगे ढाबा था ,उसके पीछे कुछ जगह छूटी हुई थी जिसमें तरह-तरह की सब्जियां फूल और अमरूद के पेड़ लगा लिए थे,, ढाबे पर दूध की बहुत ज्यादा खपत थी ,,चाय बनाना ,दही की लस्सी बनाना ,पनीर

बनाना तो इन सब के लिए शहर जाना पड़ता था दूध लाने को,,, इसको देखते हुए उसने 6,7 भेंसे भी पाल ली,, जिनकी देखरेख के लिए दो लड़के आते ,जो भैसों का दूध निकालना उनको नहलाना, और चारा देना ,सब कुछ करते थे ,राज मेहनती तो था ही, साथ ही उसका मैनेजमेंट भी बहुत तगड़ा था, चाहे भले ही वह कभी स्कूल ना गया हो पर अपने व्यवहार और अपनी मेहनत से चार पांच साल में ही उसने इतना पैसा कमा लिया था कि वह अपना मकान बनवा सके ,और फिर पीछे पड़ी हुई जमीन में 6,,7 कमरों का ये बड़ा सा मकान भी बनवा लिया था ,

जिसमें 5 कमरे नीचे और दो कमरे ऊपर थे ऊपर बाकी जगह खाली पड़ी हुई थी, जिसमें एक बड़ी सी छत थी,,,

आज के दिन राज के पास किसी चीज की कमी नहीं है, मेन रोड पर होने के कारण और राज की बेशुमार मेहनत से उसका ढाबा बहुत अच्छा चल निकला ,,,

अब तो उसने ढाबा पूरी तरह से संभाल लिया था ,,और वह मुझे आराम देना चाहता है,,,,उसने मुझसे कहा कि बस में घर के काम ही देखू,,,, बाकी ढाबे का सारा काम राज ही देख लेता है,,,,

जब राज के ढाबे का शुभारंभ हुआ और बोर्ड बन कर आया तो उस पर बड़े बड़े अक्षरों में ,,ठरकी दा ढाबा,,, लिखा हुआ था ,,,में तो पढ़ नहीं पाती थी,, मैं बोर्ड देखकर खुश हो गई ,,,

और जब वह ऊपर टांग चुका था तो गांव वालों ने पढ़ा

और पूछा भैया यह कैसा नाम दिया है आपने,,,,, राज दा ढाबा कितना अच्छा नाम लगता ,यही लिखवादो ना और जैसे ही राज कुछ कहता ,तो मैने उसका हाथ पकड़कर इशारा करते हुए राज को कुछ भी कहने के लिए मना किया,मैं नहीं चाहती थी कि राज की बात सुनकर कोई उसे दुबारा गलत समझे, और उनके मन में किसी तरह का शक हो ,इसलिए मैंने उसको पुरानी कोई भी बात बताने से मना कर दिया मेरे कहने पर राज चुप हो गया,,,

लेकिन उसके बाद उसने एक ही बात कही थी,,, कि मैंने यह नाम इसलिए रखा है क्योंकि यह नाम मुझे हमेशा याद दिलाएगा कि दुनिया में कभी भी कुछ भी हो सकता है जिसे हम जैसा समझते हैं ,वह बैसा नही होता,,, जिसे हम रात समझते हैं ,वहीँ सवेरा हो जाता है ,,तो बस आज के बाद मैं दुनिया को इसी नजरिए से देखना शुरू करूंगा,,, उसके बाद राज के ढाबे को सब ठरकी दा ढाबा के नाम से ही जानने लगे थे ,,लेकिन इस बस्ती में सब राज को बहुत प्यार करते हैं ,बहुत इज्जत करते हैं उसकी राज भी बस्ती वालों के लिए हमेशा खड़ा रहता है,, बस हमारी जिंदगी इसी तरह से चल रही थी जब भगवान का दिया हमारे पास सब कुछ हो गया, तो मैंने राज से कितनी बार कहा कि अब तू अपना ब्याह कर ले ,मेरे लिए बहु ला दे मैं ,भी चाहती हूं कि तेरे बच्चों का मुंह देखूं ,,,उसने कभी भी मेरी इस बात का जवाब नहीं दिया ,जब मैं उससे बहुत कहती हूं ,,तो मेरी बात हंसी में टाल देता और कहता काकी तू

ज्यादा सपने मत देख,, तेरे इस ठरकी की को कौन अपनी बेटी देगा ,,,

तब मैं कहती हूं आग लगे उनको कीड़े पड़े उनके मुंह में ,जो तुझे ठरकी कहते है, तूने तो कभी शराब का स्वाद भी ना चखा होगा और इतना बड़ा इल्जाम लगाते हुए लोगों की जबान क्यों नहीं सड़ी ,,,,

वह बस अपने काम से काम रखता है, और ढावे के सिवा उसे कुछ दिखता ही नहीं,,

मैं तरस गई हूं कि मेरे घर में भी एक बहू होती ,,राज के छोटे-छोटे बच्चे होते,, तो मेरा समय कैसे निकल जाता पता ही नहीं चलता पर भगवान को जो मंजूर हो वही होता है,, बहु ना सही पर उसके बाद बेटी के रूप में मुझे तू मिल गई और उसके बाद तो तुझे सब पता ही है ,कि क्या चल रहा है,,,,, काकी ने अपनी बात को खत्म करते हुए डॉली से कहा यह सारी बातें मैंने तुझे इसलिए बताई है, कि जहां तू सिर्फ इस बात से हार मान रही है कि बच्चे तुझे कक्षा में सबसे बड़ी देखकर तुझ पर हंसते हैं ,तो फिर राज के बारे में सोच उसने इन सब चीजों को कैसे झेंला होगा लेकिन फिर भी इन सब को पीछे छोड़कर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ा ,और उसने वह सब कर दिखाया जो वह कर सकता था,,, इसलिए तू भी सारी बातों को भूलकर सिर्फ उस काम को ध्यान से देख जो तुझे करना है तेरी पढ़ाई ,,,,,अरे बच्चे हंसते हैं तो हंसने दे बच्चे ही तो है ,,बच्चों के साथ तू भी थोड़ा हंस लिया कर,,, काकी ने हंसते हुए डॉली से कहा ,,,तो डॉली भी साथ में हंसने लगी, और डॉली

ने काकी को भरोसा दिलाया की काकी आज के बाद स्कूल में चाहे कुछ भी हो, पर मैं उस बात को लेकर कभी भी परेशान नहीं होंऊँगी, मैं बस अपनी पढ़ाई करूंगी और कुछ नहीं,,,,
 
अब तक डॉली को जहां राज से डर लगता था ,अब वही उसे राज के बारे में सोच कर बहुत बुरा लग रहा था ,और राज के सामने उसे अपने दुख कम लगने लगे थे उसने तो सिर्फ अपनी सौतेली मां की मार ही खाई थी,,,पर राज ने तो गालियां और बदनामी भी झेली है ,जो इंसान को अंदर तक तोड़ कर रख देती है,,,पता नहीं क्यों पर एक ही दिन में डॉली के लिए राज का डर बिल्कुल कम हो गया था ,,,,

काकी डॉली को राज की पूरी कहानी सुना चुकी थी, बचपन से आज तक उसके साथ जो भी हुआ ,जैसे हुआ, और फिर उसने कैसे कैसे अपने मेहनत के दम पर ही यह सब कुछ हासिल किया था, अपने व्यवहार से बस्ती में अपनी इज्जत बनाई ,पर एक ही चीज थी जो काकी को हमेशा परेशान करती थी, बह थी राज की जिद और उसका गुस्सा यह गुस्सा उन लोगों के लिए था,जिसने राज के साथ गलत किया था ,जो वह बस्ती में बताता तो नहीं था, लेकिन उसकी आंखों में हमेशा ही नजर आता था, राज यह बात किसी से कहता तो नहीं था, पर यह उसकी आंखों में दिखता था, काकी को हमेशा एक ही चिंता सताती थी ,कि उनके जाने के बाद राज का ध्यान कौन रखेगा ,वह तो अभी भी ठीक से अपना ध्यान नहीं रख पाता, इतना बड़ा हो गया है पर अब भी जब तक काकी थाली लगाकर ना दे ,उसके मुंह में निवाला नहीं जाता था , काफी जब भी किसी मंदिर मस्जिद में जाती तो एक ही दुआ मांगती कि भगवान उसके राज का घर बसा दे ,यह सारी बातें काकी अपने मन में ही रखती थी किसे कहती , कौन था राज के ऊपर हाथ रखने वाला ,जो

उसकी गृहस्थी बसा देता,

यह सारी बातें काकी डॉली को बता चुकी थी ,और उसने डॉली से कसम ली थी कि आज से वह सिर्फ और सिर्फ अपने बारे में सोचेगी, दुनिया उस पर हंसती है या कुछ कहती है, इन सब के बारे में कोई भी मतलब ना रखेगी, और डॉली ने भी यह निश्चय कर लिया था, कि वह सिर्फ अपने बारे में सोचे अगर काकी और राज ने उसका साथ दिया है ,तो वह उस पर खरी होकर दिखाएगी ,इसी तरह से बातें करते हुए दिन खत्म हो गया, और रात होते-होते दोनों सो गई,,,

दूसरे दिन फिर डॉली उठी और आज भी वह पूरे मन से तैयार हुई ,और टाइम पर स्कूल के लिए निकल गई थी, स्कूल जाते ही आज भी डॉली के साथ वही हुआ ,कुछ बच्चे डॉली पर हंसे ,तो कुछ बच्चों ने उसे दीदी दीदी कहकर चिढ़ाया ,कई बार उसे क्लास में कुछ समझने में दिक्कत हुई और जब उसने मैम से पूछा तो भी बच्चों ने उसका मजाक बनाया कि आप तो सबसे बड़ी हो फिर भी कुछ नहीं आता ,,,डॉली को थोड़ी बुरा तो लगा पर वह अपनी बातों से पीछे नहीं हटी, इसी तरह से स्कूल जाते हुए और मेहनत करते हुए डॉली को 3 महीने बीत चुके थे, राज उसे रोज स्कूल छोड़ता ,और लेने भी पहुच जाता हालांकि स्कूल बहुत ज्यादा दूर नहीं था यही कोई 1 से डेढ़ किलोमीटर की दूरी थी घर से स्कूल की ,अगर कभी राज को कोई काम होता तो ,वह गांव के बच्चों के साथ भी स्कूल से घर आ जाती थी ,,पर उसने कभी भी स्कूल की कोई छुट्टी नहीं

की, वह घर आकर भी पूरी मेहनत से पढ़ती रहती थी ,,

1 दिन डॉली कुछ पढ़ रही थी ,और उसे समझ में नहीं आया, वह बार-बार एक ही चीज को फिर याद करने की कोशिश करती फिर उसे पेपर पर लिखती, और परेशान होती ,,,राजनी डॉली को बड़े ध्यान से देख रहा था ,,,आखिर राज ने पूछ ही लिया,,,, महारानी तेरे को हुआ क्या है क्यों बार-बार पन्ने पलट रही है ,तब डॉली ने कहा कि मैं बहुत कोशिश कर रही हूं, पर ये सवाल मेरी समझ में नहीं आ रहा,,, राज भी विचारा क्या कर सकता था, उसे तो हिंदी ,गणित इंग्लिश की एबीसीडी भी नहीं आती थी, उस वक्त तो वह कुछ नहीं बोला लेकिन दूसरे ही दिन एक लड़के को घर लेकर आया,, डॉली से उसका परिचय करवाते हुए कहा महारानी यह तेरे को सब कुछ बता देगा ,जो भी तेरे को नहीं आएगा ,,वह कुछ भी हो यह मास्टर आदमी है, इसको पढ़ाई लिखाई का सब कुछ आता है ,तू जो भी चाहे इससे बिंदास पूछ लेना क्यों रे मास्टर! सब बता देगा न ,,,उस लड़के ने हंसते हुए कहा हां भैया मैं डॉली को अच्छे से पढ़ा दूंगा, वह लड़का गांव में पास ही रहता था ,और कॉलेज में पढ़ रहा था ,राज उसको ले आया था क्योंकि ट्यूशन से उसके पैसों का भी कुछ गुजारा हो जाता और फिर डॉली भी पढ़ लेती,,,

स्कूल से आने के बाद वह भी डॉली को पढ़ाने लगा था, डॉली कि जो भी स्कूल में समझ में नहीं आता वह आकर अच्छे से बता देता ,,,,और इससे डॉली की पढ़ाई में बहुत सहायता मिली थी,, ट्यूटर के जाने के

बाद भी डॉली रात रात तक अपनी चीजों को याद करती , उन्हें रटती और कॉपियों पर लिखती आखिर 8 साल की छूटी हुई पढ़ाई इतनी आसानी से कहां आने वाली थी ,,डॉली जब रात को पढ़ती तो काकी उसका पूरा ध्यान रखती थी , कभी उसको गर्म दूध देती तो कभी कुछ खाने को देती,,, डॉली कितना कहती कि काकी आप जाकर आराम करो में पड़ लूंगी पर काकी कहां मानने वाली थी उसने तो जैसे ठान लिया था कि वह अपनी डॉली को पास करा कर ही रहेगी,,, जब एडमिशन हुआ था तब परीक्षा के लिए 4 महीने बाकी थे,,, 3 महीने बीत गए उसके बाद डॉली का ट्यूशन लगा और अब एक महीना ट्यूटर को पढ़ाते हुए हो गया था ,बस दो-चार दिनों में ही डॉली के एग्जाम शुरू होने वाले थे ,जब डॉली का पहला पेपर था तो काकी ने उसे आशीर्वाद दिया दही शक्कर खिलाकर कान्हा जी को माथा टेकने के लिए कहा ,और उसे छोड़ने बाहर तक आ गई ,,,,,राज पहले से ही तैयार होकर जीप में बैठा हुआ था, जब डॉली गाड़ी में बैठ गई और राज ने गाड़ी स्टार्ट की तो देखा कि डॉली बहुत घबराई हुई सी लग रही है, राज ने 2 मिनट के लिए बीच रास्ते में गाड़ी बंद की ,,,डॉली की तरफ देख कर कहा महारानी डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है ,देख तूने बिंदास मेहनत की है ,और मेहनत का फल अच्छा ही मिलता है ,फिर वह तेरे कान्हा जी है ना उनसे तू बोल कर आई है, तो वह तेरी हेल्प करेंगे ,तेरी परीक्षा देने में ,,,डॉली ने कहा हां मैं पूरी कोशिश करूंगी कि मैं

अच्छे से परीक्षा दूं, पर फिर भी मुझे थोड़ा डर लग रहा है ,राज ने फिर नहीं डॉली की तरफ देखते हुए कहा!!

मैंने कहा ना तू डर मत बस बिंदास ओके परीक्षा दे ,,,, ठीक है अगर तुझे डर लग रहा है ,तो चल इधर आ डॉली राज की इस बात पर भी थोड़ा डर गई थी ,जब डॉली उतरी नहीं तो राज गाड़ी की दूसरी तरफ गया और डॉली का हाथ पकड़कर खींचते हुए नहर के पास ले आया ,उसने डॉली से आंखें बंद करने के लिए कहा ,,,

जब डॉली ने आंखें बंद कर ली, तो नहर में से एक छोटा सा पत्थर उठाकर डॉली के हाथ पर रख दिया, और कहा तेरी जो भी मन्नत हो तू लपेट दे इस पत्थर में ,और आंखें बंद करके पानी में फेंक, यह कहकर चुपचाप बगल में खड़ा हो गया ,डॉली ने कस के उस पथ्थर को अपनी मुट्ठी में दबा लिया और कुछ बुदबुदाते हुए वापस पानी में फेंक दिया जब आंखें खोली तो राज बगल में खड़ा हुआ मुस्कुरा रहा था ,उसने नीले से पूछा,,तेरा डर कुछ कम हुआ, तब डॉली भी मुस्कुरा उठी थी, उसने हां में सर हिलाया और फिर गाड़ी की तरफ जाते हुये उसने कहा ठीक है चल अब जल्दी से गाड़ी में बैठ वरना हम तेरी परीक्षा के लिए लेट हो जाएंगे राज ने बताया कि बचपन से ही जब उसे किसी भी चीज से डर लगता है , या उसे किसी चीज की मन्नत होती है तो वो ऐसे ही मुट्ठी में पत्थर बंद करके नहर में फेंक देता है और उसकी बह मन्नत जरूर पूरी होती है और साला डर भी खत्म हो

जाता है,,,

तूने ऐसा किया अब देखना तेरी मन्नत भी पूरी होगी,,,, डॉली को राज के मुंह से ऐसी बात सुनकर बहुत अच्छा लगा , उसका मन बहुत हल्का हो गया , और उसके होठों पर मुस्कान भी आ गई थी ,आज उसने राज का एक अलग ही रूप देखा था ,तभी स्कूल आ गया राज ने उसको गाड़ी से उतारा और फिर से बोला बेस्ट आफ लक डॉली ने मुस्कुराते हुए सेवा से कहा थैंक्यू और स्कूल के अंदर चली गई ,इसी तरह से डॉली के सारे पेपर खत्म हो गए थे, हर पेपर में राज उसको छोड़ने आता ,उसे बेस्ट आफ लक कहता ,और फिर लेने आता तब भी पूछता कि उसने परीक्षा कैसी दी परीक्षा के बाद 15 दिन इंतजार किया और आज वह समय आ गया ,जब डॉली का रिजल्ट आने वाला था काकी, डॉली और राज तीनों उसका रिजल्ट लेने स्कूल जा रहे थे ,सारे बच्चे क्लास में लाइन से अपने माता पिता के साथ बैठे थे और मैडम जी रोल नंबर के अनुसार एक एक करके बच्चों को अपनी टेबल के पास बुलाकर उन की मार्कशीट देती जा रही थी अब वह समय भी आ गया जब मैडम जी ने डॉली का नाम बोला जैसे ही मैडम जी ने

डॉली को अपने पास बुलाया, डॉली थोड़ा नर्वस हो गई थी, पर काकी ने कस के नीले का हाथ थामा और उसको लेकर मैडम जी के पास गई,, और सामने खड़े होकर अपने रिजल्ट का इंतजार करने लगी,,,

मैडम ने कुछ मार्कशीट ऊपर नीचे की और डॉली का

नाम देखकर मार्कशीट निकालते हुए एक हल्की सी मुस्कान के साथ डॉली की पीठ थपथपाई ,और मार्कशीट राज के हाथ में पकड़ा दी ,,राज बड़े ध्यान से मैडम को देख रहा था ,उसने डायरेक्ट मैम से बोला अपुन को बस ये जानना है कि महारानी पास तो हो गई ,,,
 
तब मैडम मुस्कुराई और उन्होंने इत्मीनान से कहा !

हां राज डॉली पास हो गई है ,डॉली पैर ऊपर कर कर के राज के हाथ में पकड़ी हुई मार्कशीट को बार-बार देख रही थी ,कोशिश कर रही थी कि अपने सारे नंबर देख सके तब राज ने मार्कशीट डॉली ले हाथ में पकड़ाई ,और बोला अगर देखना है तो ठीक से देख लेना ,यह क्या आड़ी, टेढ़ी हो रही है पर नम्बर देखकर डॉली ज्यादा खुश नहीं थी क्योंकि उसको सिर्फ पासिंग मार्क नंबर ही मिल पाए थे,, हां हिंदी में उसके नम्बर काफी अच्छे थे, लेकिन इंग्लिश गणित और विज्ञान में वह बॉर्डर पर ही थी ,,जब राज ने देखा कि डॉली उदास है, तो उसने घबराते हुए पूछा ,महारानी तू पास तो हो गई है ना कि,,, मैडम जी को कुछ गलतफहमी हो गई ,मैडम डॉली के अंदर की बात समझ चुकी थी,,, उन्होंने डॉली को अपने पास बुलाया और उसे समझा कर कहा ,डॉली अगर तुम पास हो गई हो तो भी हमारे लिए यह बहुत बड़ी बात है ,तुम जानती हो बहुत सारे ऐसे बच्चे भी फेल हुए हैं ,जो लगातार रोज स्कूल आ रहे हैं तुम्हें तो स्कूल छोड़े हुए 8 साल हो चुके, डॉली यह तुम्हारी बहुत बड़ी उपलब्धि है कि तुमने सिर्फ 4

महीने में पास हो कर दिखा दिया ,तुम्हें बिल्कुल भी उदास होने की जरूरत नहीं है ,और मैं यह बात गारंटी के साथ कह सकती हूं ,कि तुम आगे नौवीं कक्षा में बहुत अच्छा कर पाओगी पर हां जैसे मेहनत अभी की है इसी तरह से आगे करते रहना ,जब मैडम की इतनी अच्छी बातें राज और काकी ने सुनी तो वे दोनों भी बहुत खुश हो गए ,,,और राज ने फिर कहा शहज़ादी तू पास हो गई है, यही मेरे लिए बहुत बड़ी बात है, अब चल तेरे पास होने की पार्टी मनाएंगे राज ने मैडम जी को धन्यवाद दिया और डॉली और काकी के साथ घर आ गया, काकी और राज तो बहुत खुश थे, कि कम से कम डॉली पास हो गई और 9वीं कक्षा में उसका एडमिशन हो जाएगा, उनके लिए यही काफी था ,घर आकर राज ने कहा तू बता तेरे को पास होने का क्या चाहिए ,

अपुन तुझे लाकर देगा,,, डॉली ने कहा मुझे कुछ भी नहीं चाहिए मेरे पास सब कुछ है,, हां अगर आप शहर जाएं तो मेरे कान्हा जी के लिए कपड़े ले आइएगा ,उनके दोनों कपड़े पुराने हो गए हैं,,,

बस इतनी सी बात ,तो चल ठीक है मैं आज ही शहर जा रहा हूं ,तू और काकी भी मेरे साथ चल ,,तेरे कान्हा जी के साथ साथ हम सब के नए कपड़े आएंगे ,और फिर तेरी वह नवी कक्षा की किताबें भी तो लेना है ,तो हम देर क्यों करें आज ही ले आते हैं स्कूल चाहे जब खूलें तू आज से ही पढ़ना शुरू कर दे किताबों की बात सुनकर डॉली खुश हो गई थी ,उसने और काकी ने

जल्दी से खाने-पीने का काम निपटाया ,और शहर जाने के लिए तैयार हो गई ,

डॉली ने आज राज का एक नया ही रूप देखा था ,उसका समझाना उसका खुश होना ,डॉली को आज बहुत अच्छा लग रहा था,, तीनो शहर पहुंच चुके थे वहां से सबसे पहले कान्हा जी के लिए कपड़े खरीदे ,कान्हा जी भी डॉली की गोद में ही थे उनके लिए कपड़े लेने दे तो उनको तो साथ लेकर आना ही था, डॉली के लिए भी कपड़े लिए ,काकी के लिए एक अच्छी सी साड़ी ली और राज के लिए डॉली ने अपनी पसंद की एक हाफ जैकेट और जींस लिया ,डॉली की सारी किताबें और कुछ घर का सामान ,राज जब भी एक दो महीने में शहर जाता था, तो घर का सारा जरूरी सामान वहीं से लेकर आता था ,अब डॉली आ गई थी तो घर में और

भी तरह-तरह का सामान आने लगा था धीरे-धीरे डॉली सारे घर में नए-नए पर्दे लगा दिए थे ,एक बड़ा सा फूल दान कोने में रखा रख दिया ,कुछ नई बेड शीट्स, सोफा कबर डॉली जब भी राज के साथ शहर जाती तो हर बार घर के लिए कोई ना कोई सामान जरूर लाती थी ,धीरे-धीरे राज का घर बहुत साफ सुथरा और जमा हुआ लगने लगा था कोई भी आता तो डॉली की तारीफ किए बिना ना रहता, कि किसी ने सच ही कहा है लड़कियों के रहने से घर में रौनक आ जाती है ,और ऐसा ही कुछ काकी के यहाँ हुआ था जबसे डॉली आई थी, घर घर लगने लगा था डॉली राज की भी सारी चीजों का ध्यान अच्छे से रखती थी ,उसकी कौन सी चीज टूट रही है, कौन सी फट रही है ,उसको किस चीज की जरूरत है ,क्योंकि वह तो शुरू से ही अपने लिए लापरवाह रहा है, वह हमेशा ढाबे के काम में ही लगा रहता था ,पर डॉली उसका पूरा ध्यान रखती थी, हां बह राज से बात जरूर नहीं करती ,, लेकिन उसको अच्छे से समझने लगी थी ,आज भी राज के सामने कुछ कहने की हिम्मत उसकी नहीं होती थी, भले ही राज ने उससे कभी कुछ ना कहा हो ,उसकी हर बात मानी हो,उसका पूरा ध्यान रखा हो ,,,पर फिर भी बह राज के सामने ज्यादा नहीं बोलती थी, सब लोग सारा सामान लेकर बाजार से घर आ चुके थे ,,,

अब डॉली की नौवीं कक्षा की सारी किताबें कॉपियां सब कुछ आ गया था ,सब लोग बाजार से सारी खरीदारी करके घर आ गए थे, डॉली आज बहुत खुश थी ,और सबसे ज्यादा खुशी तो उसे इस बात की थी उसके कान्हा जी के लिए नए कपड़े आ गए और वह भी कान्हा जी को साथ ले जाकर,

उसने अच्छे से उनके लिए खरीदारी की डॉली ने नवी कक्षा के लिए अभी से पढ़ाई चालू कर दी थी, अभी स्कूल खुलने में 10,15 दिन थे ,पर वह अपनी किताबों को सजाने लगी थी ,उन तक कबर चढ़ाना, नेम चिट लगाना ,और अच्छे से जमाना ,

15 दिन बाद स्कूल खुलें और डॉली स्कूल भी जाने लगी,,,,

डॉली आठवीं कक्षा में 4 महीने के लिए स्कूल गई थी, तब तक उसने अपने व्यवहार और हंसमुख स्वभाव से सारे बच्चों से दोस्ती कर ली थी ,पहले जहां बच्चे उसे चिढ़ाते थे अब डॉली दीदी कह कर उसके आसपास मंडराते रहते हैं, वह बच्चों के काम के लिए हमेशा आगे रहती है ,सबकी मदद करना, स्कूल का कोई भी

काम हो उसमें भागीदारी लेना उसकी इन्हीं सभी आदतों से डॉली को स्कूल के टीचर पसंद करते थे, भले ही पढ़ने में बहुत होशियार नहीं थी ,पर उसकी मेहनत और लगन सब को बहुत पसंद आती, सब लोग देख रहे थे कि किस तरह से 8 साल से छूटी हुई पढ़ाई को डॉली ने मेहनत के साथ एक नया रंग दिया है ,और सिर्फ 4 महीने की पढ़ाई से पास हो कर दिखाया है, लेकिन अब नौवीं कक्षा में डॉली बहुत मेहनत कर रही थी डॉली 1 दिन भी स्कूल नहीं छोड़ती चाहे कितनी भी गर्मी हो ,सर्दी हो, बारिश हो किसी भी कीमत पर स्कूल जरूर जाती थी और राज भी उसका पूरा साथ दे रहा था अभी भी उसको स्कूल लाना ले जाना उसकी हर तरह की मदद करना उसका ध्यान रखना राज की रोजमर्रा की ज़िंदगी में शामिल हो गया था ,इसी तरह से धीरे-धीरे साल निकल चुका था, और एग्जाम भी स्टार्ट होने वाले थे परीक्षा खत्म हुई और जब रिजल्ट का दिन आया ,तो फिर सभी रिजल्ट लेने स्कूल गए इस बार डॉली अच्छे से पास हो गई थी हां गड़ित में उसके सिर्फ पासिंग मार्क थे ,लेकिन विज्ञान और इंग्लिश में उसने आठवीं कक्षा की अपेक्षा काफी तरक्की की थी ,और हिंदी में तो वह पहले से ही अच्छी थी ,अब बस डॉली को दसवी की तैयारी अच्छे से करनी थी,,, जो कि स्कूल में मैडम ने राज को समझा दिया था ,कि इस बार डॉली की बोर्ड की परीक्षा होगी , पेपर बाहर से आते हैं ,और कॉपी भी जांचने के लिए बाहर ही भेजी जाती हैं ,,,

तो यह साल बच्चों के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहता है,,,इसलिए डॉली की पढ़ाई पर खास ध्यान रखें ,,मैडम की कही हुई बात तो जैसे राज के लिए पत्थर की लकीर होती थी डॉली जैसे ही गाड़ी में बैठी ,,राज ने उसे उपदेश देना शुरू कर दिया,,,

देख महारानी अब तू जो यह फालतू के काम करती रहती है, ना घर की साफ सफाई जाले छूटाना , कपड़े धोना ,यह सब बंद कर दे ,,सीधा साधा पढ़ाई पर ध्यान दे ,सभी मैडम लोग जानती है अपुन को,, अगर तू फेल हुई तो तूने सोचा है कि अपुन की कितनी बदनामी होगी,,,, अरे किसी को क्या जवाब देगा अपुन,,,सब यही कहेंगे ना कि राज मैडम से अच्छी बनती थी ,तो 8वी और 9वी में डॉली को पास करवा दिया, और जब बोर्ड की परीक्षा आई तो तूने सब कचरा कर दिया,,, देख किसी भी तरह तुझे यह बोर्ड की परीक्षा पास करनी ही है ,,मैडम जी ने बताया था मुझे यह सबसे कठिन परीक्षा होती है,, अब बस तू सारे काम छोड़ कर सिर्फ पढ़ाई करेगी,,, दूसरे दिन जाकर ही डॉली की दशमी की सारी किताबें कॉपियां दिला दीं, और उसे पढ़ाई के लिए कहता रहता,, डॉली ने भी एक भी दिन स्कूल जाना मिस नहीं किया ,,गर्मी हो बरसात या सर्दी डॉली पूरे नियम और टाइम से स्कूल जाती थी, स्कूल की पढ़ाई घर में पढ़ती और सारा काम याद करके ले जाती,,,,
 
जब आधा साल निकल गया उसके बाद डॉली का ट्यूशन भी लगवा दिया गया था, जिससे कि उसे पढ़ाई

में किसी तरह की दिक्कत ना हो, क्योंकि पढ़ाने के नाम पर राज को तो एबीसीडी आती नहीं थी, और ना ही काकी पढ़ी लिखी थी, तो डॉली को अगर कुछ जरूरत होती फिर वह परेशान होती थी, इसी को देखते हुए रोज घर पर मास्टर उसे पढ़ाने आने लगा, डॉली अपनी पढ़ाई में कोई कमी नहीं कर रही थी,, हां राज के लाख रोकने के बाद ,बह घर के काम जरूर कर लेती थी, जैसे ही राज जाता, झट से अंदर से कुंडी बंद करती और काकी के साथ फटाफट घर के सारे काम करवा लेती, काकी जब उसे रोकती तो कहटी ,,,,,काकी मैं पढ़ पढ़ कर भी बोर हो जाती हूं ,,जब तेरे साथ काम करती हूं तो मेरा मूड एकदम फ्रेश हो जाता है ,,और फिर पढ़ाई में भी मन लगता,,,,

तो काकी हंसते हुए उसका साथ दे देती ठीक है बेटा तुझे जैसा अच्छा लगे वैसा कर ,,,, इसी तरह पूरा साल निकल गया था दसवीं बोर्ड के एग्जाम मार्च में ही शुरू हो गए थे ,दसवीं बोर्ड में 9वी से कुछ कम सब्जेक्ट हो जाते हैं, तो सिर्फ 5 पेपर हि थे ,,,

डॉली पढ़ने में भले ही बहुत होशियार नही थी, लेकिन उसकी मेहनत में उसने कभी कोई कमी नहीं छोड़ी ,, हर पेपर पर पूरी पूरी रात जागकर मेहनत की और अच्छे से पेपर दिए ,आखिर वह दिन भी आ गया जब डॉली का रिजल्ट आने वाला था ,डॉली के हाथ पैर बुरी तरह से कांप रहे थे,, और शायद उससे ज्यादा परेशान राज था उसने डॉली से कुछ कहा तो नहीं पर मन में उसके भीतर डर बैठा हुआ था ,कि कहीं डॉली फेल ना

हो जाए ,,, डॉली का रोल नंबर देखने का भी समय आ गया,, अब तो रिजल्ट कंप्यूटर पर भी देखे जा सकते हैं ,जैसे ही डॉली का नंबर ओपन हुआ तो,,

डॉली खुशी से चीख पड़ी ,वह सारे विषय में अच्छे से पास थी,, हां गणित विषय में उसके पासिंग मार्क से सिर्फ चार पांच नंबर ही ज्यादा थे, लेकिन यह भी उसके लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी ,उसने सोचा भी नहीं था कि वह बोर्ड की परीक्षा पास कर लेगी, डॉली के साथ राज भी रिजल्ट देखने गया था डॉली ने जैसे ही देखा कि वह पास है ,,

तो पास ही खड़े राज के गले लग गई,,, और जोर जोर से बोलने लगी मैं पास हो गई मैं पास हो गई ,,राज भी बहुत खुश था ,राज वैसे ही खड़ा था और देख रहा था कि डॉली कितनी खुश है ,,,,उसके बाद डॉली जल्दी से बाहर दौड़ी ,,,, यह कहते हुए कि यह खुशखबरी काकी को भी देनी है ,

राज ने उसके रोल नंबर का कागज निकलवाया ,और खुश होते हुए वह भी डॉली के पीछे-पीछे घर आ गया, जब घर आकर देखा तो डॉली काकी के हाथ पकड़ कर जोर जोर से घूम रही थी,,, काकी मैं पास हो गई और मैं अब अपने मनपसंद के विषयों से ल 11 वीं कक्षा की पढ़ाई कर पाऊंगी,, काकी काकी अब मुझे पूरा विश्वास है कि मैं 11वीं और 12वीं की परीक्षा भी अच्छे से पास कर लूंगी ,,,अचानक घूमते हुए जैसे ही राज को देखती है ,तो वहीं खड़ी हो जाती है ,राज अपने हाथ में पकड़ा हुआ मिठाई का डब्बा और कंप्यूटर से

निकला डॉली के पास होने का कागज़ , काकी को देता है ,,

काकी को देकर कहता है काकी महारानी के लड्डू गोपाल को भी तो खुशखबरी सुना दो और हां एक कागज दिखा देना ,और लड्डू खिला देना ,,,,

और काकी जब मिठाई का डिब्बा लेकर कान्हा जी का भोग लगाने गई ,,तो राज ने डॉली से कहा!

महारानी आज मैं बहुत खुश हूं आज तूने इस बस्ती में अपुन की इज्जत बढ़ा दी है अपुन पढ़ा लिखा नहीं है, तो ना सही कम से कम अपुन के घर का कोई सदस्य तो ऐसा है जो पढ़ लिख कर नाम ऊंचा करेगा,,

मैं चाहता हूं कि तू बहुत पड़े और देख वह बारहवी से आगे भी जो बड़ी पढ़ाई होती है ना कॉलेज की पढ़ाई ,अगर तू अच्छे से 12वीं पास कर लेगी ,तो फिर मैं वह भी तुझे पढ़ा दूंगा ,,तू बस अपना पूरा मन लगाना पढ़ाई में ,,,तब डॉली ने राज की आंखों में देखते हुए कहा ,,,

जी मैं पूरी कोशिश करूंगी कि आपको कभी भी मेरी पढ़ाई से निराशा ना हो ,और हां आज सिर्फ मैं ही पास नहीं हुई हूं ,मेरे साथ आपने और काकी ने मुझसे ज्यादा मेहनत की है ,मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था कि मैं दोबारा स्कूल जा पाऊंगी ,पिछले 8 सालों में तो मैंने सिर्फ झाड़ू पोछा बर्तन ही किया है लेकिन भगवान ने मेरी मदद के लिए आपको और काकी को मुझसे मिलवाया अब मैं अपनी पढ़ाई से पीछे नहीं हटूगी, अब मैं और ज्यादा मेहनत करूंगी,,, मैंने मोबाइल में पता

किया है कि कॉमर्स विषय लेकर अच्छे से लिखा पढ़ी का काम किया जा सकता है, हिसाब किताब जोड़ने का काम इसी विषय से अच्छे से होता है ,तो मैं भी कॉमर्स लेकर ही पडूंगी, जिससे आगे चलकर ढाबे का काम में बखूबी कर पाऊं ,,

डॉली कि इस बात पर राज आश्चर्य से बोला क्या तू ढाबे का काम करेगी

तू क्यों करने लगी ढावे का काम ,वह मेरा काम है ,और मैं संभाल लूंगा ,तुझे कोई जरूरत नहीं काम करने की,,,

तभी काकी मिठाई का डब्बा लेकर आ गई थी,,, डॉली और राज को लड्डू खिलाते हुए खुद भी लड्डू खाने लगी,,,

तीनों ही डॉली की आगे की पढ़ाई के सपने देख रहे थे ,,अब डॉली का एडमिशन कक्षा ग्यारहवीं में हो चुका था ,,और वह अभी से पढ़ाई करने लगी थी,, 11वी की परीक्षा भी वह पास कर चुकी थी,,,,,

अब उसके लिए सबसे कठिन 12वी की परीक्षा थी जो, हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होती है ,क्योंकि उससे ही कई नौकरियों का चुनाव भी होता है,, अपनी डॉली को पढ़ने की आदत लग चुकी थी,, वह आसानी से चीजों को पढ़कर समझ जाती थी ,यहां तक कि आसपास के छोटे बच्चे भी कई बार डॉली से मदद लेने आते ,तो बड़े ही प्यार से और सहजता से उनको सब कुछ समझा देती थी,,,, अब मोहल्ले की लड़कियों में डॉली सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी लड़की मानी जाती

थी ,,,
 
डॉली सुंदर और समझदर तो थी ही,, वह उन्नीस की पूरी हो के बीसवीं में चलने लगी थी,,,,डॉली की 12वीं की परीक्षा शुरू होने वाली थी ,,,,जब डॉली 4 साल पहले यहां आई थी अब उसमें और आज की डॉली में जमीन आसमान का फर्क हो गया था ,

जहां पहले की डॉली कमजोर दुबली-पतली और डरी हुई बच्ची थी ,,वही अब 20 साल की एक खूबसूरत समझदर और पढ़ी-लिखी लड़की हो गई थी,

डॉली ने अपने व्यवहार से और अपनी होशियारी से पूरे मोहल्ले को अपना बना लिया था ,,किसी का कोई लिखाई पढ़ाई का काम हो ,,किसी को मोबाइल में कुछ करवाना हो ,,बच्चे को कुछ समझाना हो ,,तो डॉली को

बुलाया जाता था डॉली की 12वीं की परीक्षा शुरू हो गई थी काकी और राज हर बात का पूरा ध्यान रखते ,रात में जागकर उसके लिए चाय कॉफी दूध देते ,और सुबह परीक्षा के लिए राज डॉली को छोड़ने और लेने जाता,,, राज का व्यवहार अभी नीले के लिए बिल्कुल वैसा ही था, जैसा कि 4 साल पहले था ,,,बह डॉली को अभी भी एक बच्ची समझता था,, और हमेशा उसे महारानी करके ही पुकारता ,,,वह शुरू से ही जानता था कि ,डॉली कैसी बस्ती में रहती थी और क्या काम करती थी, पर डॉली की आदते बहुत अच्छी थी, जैसे कि वह किसी बहुत बड़े घर की बेटी हो ,और यह देखते हुए ही उसने डॉली को महारानी करना शुरू किया था ,,,पर इन 4 सालों में डॉली के लिए राज के मायने थोड़े से बदल चुके थे ,बह राज की बहुत इज्जत करती, उसके मान सम्मान का और उसकी जरूरतों का पूरा ध्यान रखती और कोई ऐसा काम नहीं करती की बस्ती वाले डॉली के ऊपर उंगली उठा सके,,,,

आज डॉली का 12वीं का रिजल्ट आने वाला था , अब डॉली इतनी होशियार हो चुकी थी ,कि अपना सारा काम मोबाइल से खुद ही कर लेती थी ,जैसे ही उसने टीवी पर न्यूज़ सुनी की 12वीं कक्षा का रिजल्ट आ चुका है ,तो वह अपना रिजल्ट देखने के लिए बेचैन हो उठी थी, लेकिन राज अभी ढाबे पर ही था, तो वह जल्दी से राज से मोबाइल लेने ढाबे की तरफ दौड़ी,, और वहां जाकर बताया कि मेरा रिजल्ट आ चुका है, जैसे ही राज ने डॉली के रिजल्ट की बात सुनी, उसने फटाफट अपनी पॉकेट से मोबाइल निकाला और डॉली को देते हुए कहा,, यह ले सहज़ादी और जल्दी से अपना रिजल्ट देख कर बता,,, डॉली ने मोबाइल लिया और नेट ओपन करके अपना रोल नंबर डालकर रिजल्ट देखने लगी ,राज और ढावे पर काम करने वाले सारे लड़के एकटक डॉली की तरफ देख रहे थे, कि वह रिजल्ट देख कर क्या कहने वाली है, सबको डॉली के रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार था ,डॉली ने अपना रोल नंबर फोन में एंटर कर दिया था, सर्वर घूम रहा था, बस कुछ ही देर में डॉली का रिजल्ट आने वाला था , और

अब डॉली का रिजल्ट फोन स्क्रीन पर आ चुका था ,,

वह 58% मार्क्स के साथ 12वीं में पास हो गई थी, डॉली के लिए यह उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी, और शायद उससे कहीं ज्यादा राज के लिए,, राज ने डॉली का सपना अपनी आंखों में बसा रखा था, रिजल्ट देख कर डॉली खुशी से चीख पड़ी और मोबाइल में राज को दिखाते हुए कहा !

देखिए मैं बहुत अच्छे नंबरों से पास हो गई हूं राज भी दिमाग पर जोर देकर रिजल्ट को समझने की कोशिश कर रहा था ,लेकिन उसके पल्ले कुछ पढ़ा नहीं ,क्योंकि रिजल्ट इंग्लिश में था, पर जब डॉली ने कहा कि वह पास हो गई है, राज के लिए इतना ही काफी था, राज ने ढावे पर जोर से चिल्लाते हुए कहा ,,होय अपनी महारानी पास हो गई है ये स्कूल की सारी पढ़ाई कर चुकी है ,,आज मेरी तरफ से अपने ढावे के भाइयों के लिए मस्त शानदार पार्टी होगी ,और छोटू तू सबका आर्डर लेले जिसको जो खाना होगा वह बनेगा,,, राज खुश होते हुए घर की तरफ गया कि वह काकी को भी यह खुशखबरी देदे,, उसने अंदर जाकर काकी को गोद में उठाया और घूम गया, राज बहुत खुश था ,उसने कहा काकी देख अपनी महारानी पूरे गांव में सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी लड़की बन गई है,, इसके जितना कोई भी नहीं पड़ा ,,अपनी महारानी पास हो गई है ,,तभी राज के पीछे पीछे डॉली भी अंदर आ गई थी,, डॉली जब भी राज और काकी को देखती ,तो उसे लगता उसने जरूर पिछले जन्म में कोई बहुत अच्छे

कर्म किए होंगे ,बहुत पुण्य किए होंगे, जो उसे काकी और राज का साथ मिला, इतना तो कोई अपनों के लिए भी नहीं करता, जितना यह दोनों मेरे लिए कर रहे हैं ,,अब डॉली बड़ी हो गई थी, अच्छे बुरे का और सही गलत का भेद कर सकती थी ,और वह समझ रही थी कि काकी और राज की भावनाएं डॉली के लिए क्या है , राज इतना खुश तो अपनी जीत पर भी नहीं हुआ होगा, जितना खुश डॉली के पास होने पर हो रहा था ,काकी ने राज से कहा राज अगर तेरी खुशी पूरी हो गई हो ,,तो मुझे नीचे उतार दे ,,और सुन मैंने पास के गांव में जो देवी जी का मंदिर है वहां पर मन्नत मांगी थी, कि जब अपनी डॉली स्कूल की पढ़ाई पूरी कर लेगी, और पास हो जाएगी ,तो हम मां के दर्शनों के लिए जाएंगे अब मैं नहीं चाहती कि इसमें देर हो, हम कल सुबह ही मंदिर के लिए निकल चलेंगे,, बचपन में अक्सर हर नवदुर्गा में मैं तुझे लेकर वहां जाती थी ,लेकिन जब से तू बड़ा हुआ अपने काम में ऐसा उलझा की मां को भूल ही गए हैं, तुझे भी मां का आशीर्वाद मिल जाएगा ,अभी जो भी काम करना है रात को जरा जल्दी निपटा कर सो जाना ,,

सुबह 500 बजे ही हमें वहां के लिए निकलना होगा,,,, रात को सभी ढाबे वालों की पार्टी हुई, जिसको जो खाना था राज ने सब कुछ छूट दे रखी थी ,,बाद में आइसक्रीम और केक भी सब को खिलाया गया,,,, कभी-कभी डॉली को अपनी खुशियों से डर लगने लगता था ,,कि जहां 8 साल उसने नर्क की जिंदगी

भोगी है, वही एक साथ इतनी खुशियां और देवता स्वरूप राज और काकी

जो उसकी हर खुशी का ध्यान रखते हैं, उसके लिए कितना करते हैं ,यह सब देख कर कभी-कभी डॉली का दिल भर आता और खुशी से उसकी आंखें नम हो जाती, कि उसने तो ऐसा कुछ भी नहीं किया , कोई भी स्वार्थ ना होते हुए मेरे लिए कितना किया है,, रात को सबने पास होने की खुशी मनाई और खा पीकर 1112 बजे तक सभी सोने चले गए थे, सुबह 400 बजे ही काकी डॉली और राज को उठाने लगी,, सभी नहा धोकर तैयार होने लगे थे, और कम से कम 500 बजे तक यहां से निकलना था, मंदिर पहुंचने में भी 2 घंटे लगते हैं, सभी जल्दी उठ गए और नहा धोकर तैयार होने लगे ,

राज प्रसाद का सामान और पानी लेकर जीप में बैठ चुका था ,काकी भी एक थैला लेते हुए जल्दी से बाहर निकली और बाहर आकर डॉली को आवाज़ लगाने लगी,,,

डॉली बेटा जल्दी से बाहर आ, हम लेट हो रहे हैं और हां आते-आते एक बार गैस को चेक कर लेना ,,डॉली ना अंदर से ही आवाज लगाई हां काकी बस आ ही रही हूं,,,

जब डॉली जल्दी जल्दी अपने कान्हा जी को लेकर बाहर निकली,और ताला लगाकर गाड़ी में बैठने लगी,, तो राज ने देखा कि डॉली ने साड़ी पहन रखी थी ,तैयार होकर हल्का सा मेकअप भी था ,और खुले

बालों में वह डॉली लग ही नहीं रही थी ,

बड़ी ,समझदार ,और बहुत खूबसूरत दिख रही थी ,,

राज ने डॉली से नजर हटाते हुये कार स्टार्ट की और उसको जल्दी बैठने के लिए कहा ,,पर डॉली ने साड़ी पहन रखी थी तो वह ठीक से बैठ भी नहीं पा रही थी,, और राज की तरफ देखते हुए उसने इशारा किया कि वह उसकी हेल्प करें , राज खींजते हुए गाड़ी से उतरा और कहने लगा महारानी जब यह तेरे बस का नहीं था तो तुझे साड़ी पहनने की जरूरत ही क्या थी, जो कपड़े रोज पहनती है वही नहीं पहन सकती थी क्या उसका हाथ पकड़कर गाड़ी में बिठाया और डोर बंद करके गाड़ी स्टार्ट करने लगा,,

राज अब भी बोलता ही जा रहा था की काकी इससे कहो ना यह सब पहनने की जरूरत नहीं है ,जो रोज

पहनती है सलवार और कुर्ता वही ठीक है इसके लिए ,अरे बच्ची है बच्चों जैसा रहना चाहिए ना, यह सब साड़ी पहनने की क्या जरूरत है ,,

तब काकी ने हंसते हुए कहा राज अब हमारी डॉली बच्ची नहीं है ,,

वह बड़ी हो चुकी है ,20 साल की हो गई है और अब तो उसने 12वीं की परीक्षा भी पास कर ली है ,अरे अब साड़ी नहीं पहनेगी तो कब पहनेगी ,,कुछ दिनों बाद इसकी शादी भी होगी, तो साड़ी पहनना तो इसे सीखना ही पड़ेगा ,राज ने गाड़ी चलाते हुए ही कहा काकी तुझसे यह किसने कह दिया कि शादी के बाद लड़कियों को साड़ी ही पहनना चाहिए ,और आपने क्या यह अभी से इसकी शादी की रट लगा रखी है ,अभी तो इसको और पढ़ना है ,पढ़ लिख कर अपने पैरों पर खड़ा हो जाने दो ,उसके बाद इसकी शादी के बारे में सोचेंगे,,,,,,,,,,,

काकी राज डॉली तीनों मंदिर पहुंचने ही वाले थे ,गर्मियों के दिन थे सुबह 600 बजे का सफर काफी अच्छा लग रहा था, खुली हुई जीप में तेज़ ठंडी हवा और आसपास के नजारे, मन को सुकून देने वाले थे ,आगे गाड़ी में बैठे हुए डॉली के बाल उड़ उड़ कर उसके चेहरे पर आ रहे थे ,,डॉली साड़ी में बहुत ही खूबसूरत दिख रही थी ,और खूबसूरत क्यों नहीं दिखती उसे आज अपने पास होने की खुशी थी, जो उसके चेहरे पर भर भर के आ रही थी ,कानों में झुमके और लहराता हुआ साड़ी का पल्ला उसे बड़े होने का एहसास करा रहा था ,डॉली ने पहली बार साड़ी पहनी थी ,और साड़ी को संभालते हुए वह बच्ची से एकदम बड़ी दिखने लगी थी तीनों मंदिर पहुंच चुके थे, राज ने गाड़ी रोकी और गाड़ी से सामान निकालते हुए काकी और डॉली को नीचे उतारा ,,,

मंदिर के लिए थोड़ी सा चलना पड़ रहा था क्योंकि भीड़भाड़ के कारण गाड़ी मंदिर से थोड़ी पहले ही रोक दी जाती थी, काकी के हाथ में एक थैला और डॉली के हाथ में फूलों के गजरे की थाली थी, डॉली ठीक से नहीं चल पा रही थी ,कभी उसका पल्ला उसके हाथ में

उलझता, तो कभी उसके खुले हुए बाल उसके चेहरे पर आने लगते और कभी-कभी साड़ी पैरों में उलझती उसके दोनों हाथों में फूलों की थाली थी ,कभी वह थाली पकड़ती तो दूसरे हाथ से पल्ला ,कुल मिलाकर वह चलते हुए बड़ी अस्त-व्यस्त सी लग रही थी ,और मंदिर आने जाने वाले लोग भी उसे देख रहे थे ,लेकिन डॉली को यह समझ नहीं आ रहा था कि वह खूबसूरत लग रही है, इसलिए लोग उसे देख रहे हैं या फिर कुछ अटपटी , शायद खूबसूरती लग रही होगी ,क्योंकि खूबसूरत लड़कियां जो भी करती हैं, वह सबको पसंद आता है ,लेकिन इस तरह से लोगों का मुड़ मुड़ के डॉली को देखना राज को बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था ,,उसने डॉली के हाथों से थाली ली और डांटते हुए बोला महारानी थाली मुझे पकड़ा और जरा ठीक से चल, क्या ये उल्टा सीधा कुछ भी करती रहती है ,,डॉली राज कि इस बात पर जरा गुस्सा हो गई थी ,कि वह इतनी सुंदर लग रही है ,और राज ने एक भी बार उसकी तारीफ तो की नहीं ,उल्टा उसे डांट लगा दी डॉली ने गुस्से में राज को थाली दी और काकी की तरफ देखते हुए कहने लगी!!! काकी चाहे हम कितने भी अच्छे लगे कुछ लोग ऐसे होते हैं जो कभी किसी दूसरे की तारीफ कर ही नहीं सकते ,,,

क्या राज ने डॉली की तरफ देख कर कहा ! तू क्या मुझे सुना रही है , अरे तू चलती फिरती नौटंकी लग रही है ,,,

तू ,तू ,,क्या समझती है कि तू बड़ी सुंदर लग रही है

इसलिए लोग तुझे देख रहे हैं,, नहीं तू कार्टून लग रही है ,और इसलिए वह पलट पलट के तुझे देख रहे हैं ,,डॉली ने कुछ नहीं कहा ,और पैर पटकती हुई जल्दी-जल्दी आगे चलने लगी,डॉली के गुस्से को देखकर राज काकी की तरफ देख कर हंस गया,,, और धीरे से काकी के कान में आकर बोला काकी यह महारानी जब गुस्सा हो जाती है ना तब किसी ततैया से कम नहीं लगती,, काकी राज को डांटने लगी कि वह कितनी खुश है ,अच्छे नंबरों से पास हुई है ,तो क्यों उसको चिड़ा रहा है , काकी ने आवाज देते हुए कहा डॉली बेटा आराम से चल अब सीढ़ियां आ गई है, तो गिर मत जाना ,डॉली एक एक सीढ़ी आराम से चढ़ने लगी, उसने अपने हाथों से अपनी साड़ी को पकड़ रखा था ,और एक-एक कदम धीरे-धीरे रख रही थी ,राज और काकी उससे काफी आगे निकल चुके थे ,जब काफी ने ध्यान दिया कि डॉली उनसे पीछे रह गई है, तो राज को कहा! राज मैंने तो ध्यान नहीं दिया तू भी नहीं उसका ध्यान नहीं रखता देख वो कितने पीछे रह गई है, बेचारी कैसे आएगी साड़ी पहन के ,जा उसकी मदद कर और उसको हाथ पकड़ के ऊपर ले आ ,राज बही रुककर उसका इंतजार करने लगा ,,

डॉली बहुत धीरे-धीरे ऊपर आ रही थी,तो राज बड़ी बड़ी डगे भरते हुए डॉली के पास पहुंचा ,और उसका हाथ पकड़ कर उसे ऊपर चढ़ाने लगा ,थोड़ी ही देर बाद तीनों मंदिर पहुंच गए थे, मंदिर पहुंचकर काकी ने पूजा का सामान निकाला पंडित जी से पूजा करवाई ,डॉली

और राज को उनका आशीर्वाद दिलवाकर,, कन्यायो को खाना खिला कर वापस घर के लिए निकल आए,, घर पहुंचकर सबसे पहले डॉली ने कपड़े चेंज किये, साड़ी में चलते-चलते बह बहुत थक चुकी थी ,और फिर तीनों मंदिर का प्रसाद खाने लगे, खाना खाते खाते राज ने डॉली से उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा ,,कि आगे अब क्या करना है ,,और डॉली की तरफ देख कर कहा कॉलेज के फार्म भरने लगे हैं ,तू कहे तो जाकर मैं एक तेरे लिए भी ले आऊँ, खाना खाते हुए ही डॉली बोली पर कॉलेज तो यहां से बहुत दूर है ,उसके लिए तो शहर जाना पड़ेगा ,और फिर मैं कैसे जाऊंगी शहर यहां से रोज-रोज,,

तव राज ने बोला ,तुझे चिंता करने की क्या जरूरत है ,,अपने ढावे के बाहर से ही बस निकलती है ,मैं बस वाले से बोल दूंगा वह तुझे कॉलेज तक छोड़ देगा ,और वहां से लेकर भी आ जाएगा ,,,

पर इस तरह से रोज रोज बस में जाने का डॉली का मन नहीं हो रहा था, अब उसे खुद से भी पढ़ना आ गया था ,वह BA करना चाहती थी ,और उनके सारे विषयों की पढ़ाई घर पर भी बखूबी हो सकती थी, तो डॉली ने निर्णय लिया कि वह प्राइवेट फॉर्म भर के सिर्फ परीक्षा देने ही शहर जाएगी, और उससे पहले उसने नौकरी करने की इच्छा बताई कि अपने गांव में अभी एक भी आंगनबाड़ी नहीं है ,और मैंने कल ही पड़ा है कि आंगनवाड़ी की जगह निकलने वाली है उसमें अपने गांव का भी नाम जरूर होगा मैं ठीक से पता लगाती

हूं ,और अगर ऐसी कोई जगह अपने गांव के लिए होगी तो मैं कोशिश करूंगी कि उसमें नौकरी कर लूँ, राज का मन था ,कि अभी डॉली पूरी तरह से अपनी पढ़ाई में ध्यान दें ,इसलिए वह थोड़ी आनाकानी कर रहा था ,कि तुझे अभी से नौकरी करने की क्या जरूरत है ,तू बस अपनी पढ़ाई पूरी कर ,उसके बाद नौकरी तो लग ही जाएगी ,,,

तब डॉली ने समझाया ,,की काकी ऐसे मौके रोज-रोज नहीं आते ,अगर गांव में एक बार आंगनबाड़ी खुल गई तो फिर सालों बाद ही कोई दूसरी वैकेंसी आ पाएगी ,और फिर इस गांव में तो मैं सबसे ज्यादा पढ़ी लिखी हूं, तो मुझे नौकरी मिलने में भी कोई कठिनाई ना होगी, और हां काकी अब तो आंगनबाड़ी की तनख्वाह भी 12 से 15 हज़ार हो गई है फिर हमें अपने ही गांव के छोटे बच्चों और महिलाओं के विकास करने का मौका भी मिलेगा ,उनके लिए कुछ करना मुझे बहुत अच्छा लगेगा ,,काकी यह नौकरी के साथ-साथ एक समाज सेवा भी होती है जिसमें हम अपने गांव के बच्चों और महिलाओं को अच्छी शिक्षा के साथ साथ उनके खान-पान का भी पूरा ध्यान रख सकते हैं, उनको खाने पीने का सामान बांटना, बीमे की सुविधाएं देना,, सब कुछ समझाना ये सारे काम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के ही अंडर आते हैं, और मुझे खुशी होगी कि मैं ऐसे लोगों के लिए कुछ कर पाऊं, और उन्हें सही सीख दे पाऊं ,काकी सिर्फ नौकरी नहीं है ,यह मेरा सपना है कि मैं अपने गांव के लिए कुछ करूं, और फिर मैं कहां कह

रही हूं कि मैं पड़ूंगी नहीं,,, मैं अपनी पढ़ाई भी करूंगी प्राइवेट फॉर्म भर कर ,,

बीए करना इतना कठिन नहीं होता जितना हमें लग रहा है ,मैं आपको विश्वास दिलाती हूं कि नौकरी की वजह से अपनी पढ़ाई को पीछे नहीं करूंगी ,बस एक बार मैं अच्छे से पता कर लेती हूं ,,कि नौकरी के लिए हमें किन-किन कागजों की जरूरत पड़ेगी, डॉली ने इतने अच्छे से समझाया तो काफी और राज को उसकी बात अच्छे से समझ में आ गई ,,,, और राज डॉली की नौकरी के लिए राजी हो गया ,,,

डॉली ने दूसरे दिन जाकर साइबर कैफे पर पता किया ,तो बताया गया कि फॉर्म भरे जा रहे हैं,, और इस गांव में भी एक वैकेंसी है फिर क्या था डॉली ने जल्दी से सारा प्रोसीजर समझा और अपने सारे कागज लेकर पहुंच गई फॉर्म भरने के लिए ,,एक छोटी सी परीक्षा भी होती थी तो फॉर्म भरकर डॉली अपनी परीक्षा की तैयारी में लग गई वह चाहती थी कि अगर काकी और राज ने उसकी इतनी मदद की है,, इतना साथ दिया इतना हौसला बढ़ाया तो वह भी कुछ करके दिखाएं ,बस एक महीने बाद ही उनकी परीक्षा थी जिसमें डॉली को कैसे भी निकालना ही था ,,आखिर एक महीना भी बीत गया वह पूरी तैयारी के साथ परीक्षा देने जा रही थी, काकी ने उसे चम्मच से दही चक्कर खिलाया और उसके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी ,जब शाम को डॉली परीक्षा देकर आई तो वह काफी खुश लग रही थी क्योंकि उसका पेपर

बहुत अच्छा गया था और फिर इस गांव में वह सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी लड़की थी ,तो उसे पूरा विश्वास था कि यह नौकरी उसे ही मिलेगी,,,,
 
† आखिरकार डॉली को परीक्षा दिए हुए 2 महीने बीत चुके थे ,और 1 दिन गांव के मुखिया ने आकर बताया कि डॉली का आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के लिए नाम आया है खबर गांव की मुखिया को ही दी जाती थी जिससे वह डॉली के बारे में सही जानकारी दे पाए, उस वक्त राज ढाबे पर काम कर रहा था ,,जब उसने यह खबर सुनी तो सरपंच साहब को लेकर अंदर घर आ गया ,और घर आकर डॉली को नौकरी की बात बताई, यह सुनकर तो डॉली के पैर जमीन पर ही नहीं पढ़ रहे थे ,क्योंकि आज काकी और राज की मेहनत का फल डॉली को मिला था

राज ने मुखिया जी की अच्छे से आवभगत की उनका मुंह मीठा करवाया ,और उन्हें खबर देने के लिए धन्यवाद भी किया, मुखिया साहब ने कुछ जरूरी पूछताछ की हालांकि डॉली के पास सारे पेपर तैयार थे तो डॉली फॉर्म भरकर मुखिया जी को दिया मुखिया जी ने अपने साइन किये, और सील लगा दी ,कि डॉली इस पद के लिए बिल्कुल योग्य उम्मीदवार है ,और सच ही था डॉली अपनी नौकरी से पहले ही सभी की दिल खोलकर मदद करती थी ,लगभग एक महीने बाद डॉली का आंगनबाड़ी केंद्र खुल चुका था जिसमें 2 सहायकाऐ और एक हेल्पर डॉली को मिले थे,

आंगनबाड़ी की हेड डॉली ही थी धीरे-धीरे अपनी समझदारी और होशियारी से अपनी आंगनबाड़ी का काफी विकास कर लिया था ,

आंगनवाड़ी को बहुत सुंदर तरीके से सजाया ,उसके आगे छोटा सा गार्डन था, जिसमें झूले और खेलने के बहुत सारे सामान बच्चों के लिए लाए गए थे

,बच्चों को टाइम पर खाना देना,

उनकी पढ़ाई की व्यवस्था करना,

उन्हें खिलाना

,गर्भवती महिलाओं की देखरेख करना ,

उन्हें पोषित आहार देना ,

उनका नामांकन करना ,

बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट बनाना ,

जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की जांच करवाना ,

डॉली सारे काम बखूबी कर रही थी, गांव की औरतें और बच्चे पहले से ज्यादा समझदार हो गए थे डॉली

समय-समय पर उनके घर भी जाती और उनको साफ सफाई के बारे में भी बताती , कुल मिलाकर बह सारे फर्ज बखूबी निभा रही थी ,जो एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को निभाने चाहिए ,कुल मिलाकर डॉली अभी जिम्मेदार महिला बन चुकी थी ,,

जब तक वह घर में रहती घर के सारे फर्ज बखूबी निभाती,,, काकी के साथ घर के काम में पूरा हाथ बटाना ,राज का जो थोक का सामान आता उसका सारा हिसाब किताब रखना ,घर की सारी जिम्मेदारियों को समझना, डॉली के ही कंधों पर था,और वह अपनी जिम्मेदारी को किसी बोझ की तरह नहीं ,बल्कि फर्ज की तरह खुशी-खुशी निभाती थी ,और जैसे ही घर से निकलती तो फिर पूरी तरह से आंगनबाड़ी के काम में खुद को समर्पित कर लेती ,,डॉली को मेहनत की आदत तो बचपन से ही थी, पर उसने अपनी इस आदत को कम नहीं होने दिया बल्कि इसको और बढ़ाया ,,ढाबे के भी कई बातों में राज डॉली कि सलाह लेता था, डॉली ऑनलाइन सामान देखकर उसका भी ऑर्डर दे देती थी, इससे काफी कम रेट में और अच्छा सामान आ जाता ,,इसलिए राज को शहर के चक्कर कम ही लगाना पढ़ते थे अगर कहा जाए कि डॉली के बिना राज और काकी की जिंदगी अधूरी थी तो यह कहना गलत नहीं होगा,,,,,,,,

अब काकी और राज दोनों डॉली की तरफ से निश्चिंत हो गए थे, क्योंकि उन्होंने जितनी मेहनत डॉली के साथ की थी वह सफल हो चुकी थी, शुरुआत छोटी ही सही मगर डॉली अपने पैरों पर खड़ी हो गई ,और सबसे अच्छी बात तो यह थी कि छोटी सी नौकरी को भी डॉली ने एक अलग नजर से देखा और वह नौकरी से ज्यादा इस गांव के अनपढ़ और गरीब लोगों की मदद करने के लिए तैयार रहती थी, महिलाएं बच्चे जब भी किसी को कोई दिक्कत होती तो बेझिझक डॉली के पास अपनी परेशानी लेकर पहुंच जाते, और जितना होता डॉली उनकी समस्या को हल करने की कोशिश करती, आंगनबाड़ी की जांच करने जब भी बड़े ऑफिसर आते तो डॉली के काम से हमेशा खुश होकर ही जाते थे, डॉली ने आंगनबाड़ी के सामान में कभी भी कोई बेईमानी नहीं कि पूरी ईमानदारी के साथ बच्चों को उनके हिस्से का राशन पानी और सुविधाएं हमेशा दीं,और गर्भवती महिलाओं को भी वह हमेशा समझाती कि तुम्हें कितने पोषण की जरूरत है ,और क्या क्या सावधानियां रखनी चाहिए, जिस तरह काकी और राज अपने काम में ईमानदार थे ,ठीक वही संस्कार

डॉली के अंदर भी आए, डॉली भले ही बस्ती में रहती थी, पर बचपन से उसमें अपनी मां के संस्कार थे ,और जब बड़ी होकर काकी के यहां आई तो राज की ईमानदारी काकी की मेहनत और दोनों की लगन, डॉली ने सारे गुणों को अपने अंदर समाहित किया, जब भी कोई डॉली की तारीफ करता तो राज का सीना चौड़ा हो जाता ,यह जानकर उसकी महारानी कितनी सही तरीके से आगे बढ़ रही है, उसने डॉली से जितनी उम्मीद की थी, डॉली ने उससे कहीं ज्यादा करके दिखाया ,डॉली कहने को तो 20 साल की हो चुकी थी, 21वी मैं चल रही थी ,पर उसकी समझदारी बिल्कुल परिपक्व महिला की तरह ही थी ,उसे अच्छे बुरे की समझ थी ,उसमें दूर दृष्टि थी इंसान के चेहरे से बह समझ जाती थी, कि यह कैसा है ,और शायद इतनी ज्यादा समझदारी डॉली को अपनी परेशानियों के चलते ही आई थी ,हमेशा ही उसने अपनी उम्र से ज्यादा काम का बोझ अपने कंधों पर उठाया था ,लेकिन जब से वह काकी के पास आई तब से उसने खुशी खुशी और अपने हौसले को आगे बढाया था, और उसने कर दिखाया था कि अगर हम चाहे तो दुनिया की कोई भी ताकत हमें आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती, परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, हमें हिम्मत से काम लेनाचाहिए, बहुत सारे ऐसे काम थे जिनकी तरफ से काकी और राज निश्चिंत हो गए थे ,,,,//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svgअपनी डॉली को नौकरी करते 1 साल हो चुका

था ,जिंदगी अपनी पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी, डॉली भी 21 साल की हो चुकी थी ,और चाहे वह कितनी भी समझदार हो जाए कितनी भी बड़ी हो जाए पर राज हमेशा उसका ध्यान रखता ,उसकी नजर से बच नहीं पाता था कि कोई डॉली को किस नजर से देख रहा है, वह खुश है या दुखी है जिस दिन से डॉली उसके घर में आई, उस दिन से आज तक, राज की आंखों का सुरक्षा कवच हमेशा उसके आसपास होता था, उसने डॉली को खुलकर जीने की आजादी दे दी थी, कि वह पूरी तरह से अपने पंख फैला कर उड़ सकती है, लेकिन साथ ही उसका ख्याल भी रखता की बहन निडर होकर अपनी उड़ान को पूरा करे,,

और डॉली ने भी ऐसा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी, गांव के सभी बच्चे और महिलाएं डॉली के पास अपनी परेशानियों को लेकर आते ,और वह जितना हो सकता कोशिश करती थी सबको सही सलाह दे सके ,डॉली की आंगनबाड़ी में जब भी कोई ऑफिसर चेक करने आता तो वह हमेशा डॉली के काम से खुश होकर ही यहां से वापस जाता था ,वह देखता था कि किस तरह से डॉली ने आंगनबाड़ी की परिभाषा बदल कर रख दी है ,,,जहां पहले आंगनबाड़ी को लोग गरीबों का केंद्र समझते थे, वहां जाने में उन्हें संकोच लगता था, पर डॉली ने अपनी आंगनबाड़ी का विकाश इतने अच्छे से किया था ,कि गांव के अच्छे ,बड़े ,,छोटे ऊंचे नीचे सभी लोग आगनबाडी में आकर अपने बच्चे का और गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन करवाते,,

क्योंकि उन्हें पता था कि डॉली अपनी रिस्पांसिबिलिटी को बखूबी निभाती है ,बच्चों का या महिलाओं का हक डॉली ने कभी भी उन से वंचित नहीं होने दिया था, जिसके हिस्से में जितना भी आता वह उन तक ज़रूर पहुंचाती थी, यहां तक कि उनके घर घर जाकर भी साफ सफाई स्वच्छता और पोषण का महत्व उन्हें समझाती,, चार पांच साल तक के बच्चों का विकास जब आंगनबाड़ी में हो जाता तो उसके बाद उन्हें कक्षा एक से स्कूल भेजना ठीक था ,पर डॉली ने देखा कि गांव में स्कूल ना होने की वजह से आंगनबाड़ी के बाद बच्चा घर में ही रहता है, तो उसे बहुत दुख होता था ,क्योंकि डॉली ने जिस स्कूल से शिक्षा ली थी वहां से 3,4 किलोमीटर दूर था और छोटे बच्चों के लिए यह दूरी काफी थी जो बड़े बच्चे थे वह तो खुद साईकिल से या फिर इकट्ठे होकर स्कूल चले जाते ,लेकिन कक्षा चौथी तक के बच्चे खासकर ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता स्कूल भेजने में सक्रिय नहीं है ,वह घर पर ही रह जाते थे, या तो उनकी पढ़ाई लेट होती थी, या फिर छूट जाती थी ,इन सब बातों को देखकर कब से डॉली के मन में चल रहा था कि वह कक्षा एक से चौथी तक के लिए गांव में एक स्कूल खुलवाए ,इसके लिए डॉली ने जिला कलेक्टर को भी ऑनलाइन एप्लीकेशन दे दी थी, और गांव के मुखिया के पास भी लिखित में समस्याओं के बारे में बता कर अर्जी लगा चुकी थी, डॉली इसी काम के लिए भागदौड़ कर रही थी ,,उसकी पहल को देखते हुए गांव के कुछ समझदार लोग भी

डॉली के साथ हो गए थे, और डॉली ने इस बारे में राज से भी बात कर ली,,, राज ने भी कह दिया था कि उसकी मदद की जरूरत होगी वह जरूर करेगा,, डॉली आंगनबाड़ी के साथ-साथ,,

राज का भी पूरा ध्यान रखती थी, खासकर आंगनवाड़ी जाने से पहले राज और काकी को अच्छे से नाश्ता और फल खिलाकर ही जाती थी ,क्योंकि उसे पता था कि एक बार वह चली गई और अगर राज का नाश्ता रह गया, तो काकी भी काम में लग जाएगी और राज को तो ढावे के अलावा कुछ दिखता ही नहीं ,,,अगर कभी राज नाश्ता किए बिना ढाबे पर चला जाता ,तो वह उसकी प्लेट लगाकर उसके पीछे ढाबे पर पहुंच जाती ,और जब तक अपनी आंखों से नहीं देख लेती कि राज ने पूरी प्लेट खत्म कर ली है ,अब तक वहीं खड़ी रहती, राज भी डॉली कि बात को समझता था ,इसलिए काम करते करते हुए भी वह अपनी प्लेट जल्दी से खत्म करता ,और वापस उसे देते हुए कहता सहजादी अब घूरना बंद कर और आंगनबाड़ी जा,अपुन का टाइम भी खोटा हो रहा है ,और डॉली राज से प्लेट लेकर चुपचाप रखकर आंगनबाड़ी चली जाती ं,,,,,,,,,,

डॉली ने कॉमर्स विषय के साथ पढ़ाई की थी तो वह लेन-देन का हिसाब काफी अच्छे से समझती थी ,और जब से उसने आंगनबाड़ी में काम करना शुरू किया तो अपने जीवन को सुरक्षित बनाना, उसको सही तरीके से चलाने का हुनर उसमें आ गया था ,क्योंकि आंगनबाड़ी

की मीटिंग में समय-समय पर यह सारी बातें बताई जाती है ,इसी को देखते हुए डॉली ने राज के ढाबे का और राज का बीमा भी करवा दिया था ,उनकी किस्तों की याद दिलवाना और समय पर किस्त भरना भी डॉली की जिम्मेदारी में ही आता था, डॉली जब भी ढाबे पर जाती तो वहां काम करने वाले लड़के समझ जाते कि जरूर राज भैया ने कोई ऐसा काम किया है जो वह भूल गये है ,और वह डॉली को देखकर ही राज को चिढ़ाने लगते कि राज भैया तैयार हो जाइए ,डॉली दीदी आपकी डांट लगाने आ रही हैं ,राज सच में सोचने लगता कि कौन सा काम ऐसा है जो छूट गया और जिसके लिए महारानी उसे सुनाने ढाबे पर आ रही है,,, पर वह रौब झाड़ते हुए कहता अपुन डरता है ,क्या महारानी से ,आने दे उसे अभी एक डांट लगाऊंगा तो उल्टे पांव यहां से चली जाएगी ,लेकिन जैसे ही डॉली आकर अपनी बात उसके सामने रखती, तो उसकी बात इतनी सही होती कि राज चुप रह जाता,,,,

गांव के सभी लोग जानते थे कि डॉली और राज का रिश्ता बिल्कुल पानी की तरह है निर्मल और पवित्र जिसके आर पार अच्छी तरह से देखा जा सकता है ,कहने को तो डॉली और राज के बीच ऐसा कोई भी रिश्ता नहीं था ,जिसे नाम दिया जा सके,पर कुछ बेनाम रिश्ते भी इतनी मजबूती से बंध जाते हैं कि उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता, कुछ ऐसा ही रिश्ता था राज का डॉली के साथ ,,,,कहने को

राज भी 31 साल का हो चुका था, अपनी जिम्मेदारियों का एहसास भी उसे बहुत अच्छे से था, पर उसके अंदर अभी भी एक बच्चा छुपा था जो कभी-कभी जब कुछ भी लापरवाह और अल्हड़ था, और जिस को संभालना सिर्फ डॉली को आता था,,,,,

डॉली को इस गांव में आए हुए 5 साल बीत चुके थे ,जब डॉली आई तब यहां कुछ सौ सवा सौ के आसपास धर थे ,लेकिन 5 साल बाद गांव का काफी विकास हो चुका था, और अब यहां करीब 200 से ढाई सौ के बीच घर बन चुके थे ,और उनमें लोग भी रहने लगे थे ,लोगों की जरूरत को देखते हुए कुछ दुकानें भी खुल गई थी ,और इसी आबादी की वजह से यहां आंगनबाड़ी का खुलना भी संभव हो पाया था ,यह गांव चुकी शहर से पास ही है ,जब शुरू में गांव बना तो लोग खेती की जमीन के आसपास रहने आ गए ,और तब इस गांव का कुछ नाम भी नहीं था ,लेकिन जब लोग रहने आए उन्होंने अपना पता बताया ,उनका आधार कार्ड बना और गांव को नगर निगम की मान्यता मिली तब इस जगह का नाम परमपुर रखा गया था गांव के लोगों ने ही मिलकर यह नाम बताया था ,क्योंकि उन्हें ऐसा लगता था कि यहां पर परमात्मा का वास है ,और परम आनंद है चारों तरफ हरे-भरे लहराते खेत ऊंची पहाड़ियां पीछे बहती हुई बड़ी सी नहर इस जगह की खूबसूरती को बढ़ाती थी और हाईवे पर होने के कारण दिनभर रोड चालू रहता था ,जिसकी वजह से विकास के भी अच्छे अवसर थे , सभी अपनी जिंदगी में व्यस्त

थे ,जहां राज अपने ढाबे को अच्छे से चलाता ,वही डॉली अपनी आंगनबाड़ी और घर परिवार के कामों में उल्झी रहती ,उसे 1 मिनट का भी टाइम नहीं था कि वह किन्हीं फालतू चीजों से जुड़े ,,,,



आज शाम को जब राज घर आया तो उसने डॉली और काकी को बताया कि परसों उसके ढाबे पर एक छोटी सी पार्टी रखी गई है ,मतलब शहर से यही कोई 25 ,30 लोग आ रहे हैं ,जो अपनी बर्थडे की पार्टी यहाँ मनाना चाहते हैं ,पार्टी दोपहर के खाने की ही है ,,और हां महारानी उन्होंने कुछ जंक फूड के ऑर्डर दिए हैं ,वह पास्ता ,मंचूरियन ,करारे चिप्स और पनीर टिक्का ,अगर तू यह सब कर पाए तो मैं उनका यह वाला आर्डर ले लूं नहीं तो फिर मैं स्टार्टर के लिए मना कर देता हूँ,,,,डॉली ने रोटी बेलते हुए रसोई से ही बताया नहीं नहीं आपको मना करने की जरूरत नहीं है ,मैं सब कुछ कर लूंगी ,परसों वैसे भी आंगनवाड़ी की छुट्टी है तो मुझे कोई परेशानी नहीं है, आप उनको हां बोल दीजिए ठीक है! फिर मैं उनको फोन करके बता दूंगा ,और हां इसके लिए जो भी सामान लगेगा उसकी लिस्ट तू अपुन को कल सुबह दे देना ,,,

डॉली रोटियां सेकती जा रही थी और राज की बातों का जवाब भी दे रही थी उसने कहा नहीं आप बस मुझे बता दीजिए कितने लोगों का खाना बनना है ,मैं सारा सामान ऑनलाइन मंगवा लूंगी, और हां अब तो बहुत फास्ट डिलीवरी हो गई है, एक ही दिन में हमारे पास सारा सामान आ जाएगा मैं कल ही सारा मंगवा लेती हूं ,,

डॉली हमेशा राज को आप करके ही बुलाती और राज डॉली को महारानी ,,,,

दूसरे दिन डॉली ने ऑर्डर किया जो जंक फ़ूड के लिए चाहिए था, और अब वह कल की तैयारी करने लगी थी, क्योंकि कल वैसे भी आंगनबाड़ी की छुट्टी थी तो उसका मूड एकदम फ्रेश था ,और जल्दी जल्दी काम निपटा कर तीनों सो गए ,,,,

क्योंकि सुबह भी उन्हें जल्दी उठना था

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सुबह 600 बजे ही डॉली उठी और घर के काम निबटाने लगी, नहा धोकर फटाफट पराठे सेके ,,, तब तक काकी भी उठ कर पूजा करने लगी थी, डॉली ने जल्दी से दो छोटे-छोटे पराठे और दही की प्लेट लगाकर काकी को दी ,कि पहले कान्हा जी का भोग लगा दे ,उसके बाद हम सभी भी नाश्ता कर लेंगे ,क्योंकि हमें जल्दी ढाबे पर पहुंचना होगा, जब तक राज नहा धोकर आया और काकी ने पूजा की तब तक डॉली ने राज की मनपसंद अरबी की सब्जी ,पराठे ,और मीठा दही बना कर तैयार रखा था, जैसे कि राज आया डॉली ने राज को नाश्ते की प्लेट दी और बाद में अपनी और काकी की प्लेट लेकर भी बाहर आ गई, तब तक काकी भी पूजा करके आ चुकी थी, तीनों ने जल्दी से नाश्ता खत्म किया, और ढाबे पर निकल गए जाते साथ ही डॉली तैयारी में लग गई थी खाना तो ढाबे पर अच्छी तरह से बन जाता बस जंक फूड की तैयारी डॉली को करनी थी दोपहर के 1100 बज चुके थे ,अब तक डॉली के सारे काम खत्म हो गए, बस अब उन लोगों का इंतजार था ,कि जैसे ही वह आये, डॉली स्टार्टर उन्हें सर्व करवा कर फ्री हो जाए ,तब तक देखा कि 5 गाड़ियां बाहर आ चुकी है ,राज ने सब को अंदर बुलाया और उनको देखते ही सब फटाफट अपने काम में लग गए, वैसे वह सब राज की जान पहचान वाले थे ,वह अक्सर यहां का खुला नजारा आसपास की हरियाली और राज के ढाबे में लगे हुए रंग-बिरंगे फूलों को देख कर कुछ समय के लिए सुकून लेने यहां पर चले आते थे ,और फिर यहाँ ढाबे का खाना भी बहुत अच्छा होता था ,,राज ने जल्दी से अंदर आकर, कहा!!! छोटू फटाफट 15,,20 पानी की बोतल लेकर बाहर आ और डॉली भी सबके लिए स्टार्टर की प्लेटस लगवाने लगी थी,,,,,,//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg
 
राज के ढाबे पर कुछ लोग शहर से एक छोटी सी पार्टी करने आ रहे थे ,यही कोई 25 ,30 लोग थे जिसमें 8,10 लेडीस या लड़कियां और कुछ लड़के ,उस पार्टी के लिए जंक फूड की सारी तैयारी डॉली को करनी थी ,आज संडे था ,डॉली की छुट्टी थी ,तो वह पूरी तरह से फ्री भी थी,वह जाकर सारी चीजों की तैयारी करने लगी अब तक तैयारी हो चुकी थी ,और पार्टी के लिए भी लोग शहर से आ गए थे सबसे पहले उन्हें जंक फूड की प्लेटस दी गई, जिसमें करारे चिप्स ,मंचूरियन ,पनीर टिक्का और मोमोज थे ,डॉली ने बड़ी ही मेहनत और लगन से सारा खाना बहुत टेस्टी बनाया था, और अंदर से फटाफट प्लेट्स लगवाते हुये बाहर उन लोगों तक पहुंचा भी दी, उसके बाद डॉली का काम खत्म हो चुका था, लेकिन अभी भी बह ढावे पर काम करवा रही थी ,क्योंकि आज वैसे भी उसके पास कोई काम नहीं था ,राज भी अंदर बाहर जाते हुए सारा काम देख रहा था ,तभी उनमें से यही कोई तीन चार लोग उठकर अंदर आए क्योंकि उन्हें खाने के बारे में अंदर कुछ बताना था ,और अंदर आ कर देखने लगे कि वह किससे बात करें ,तब उन्हें समझ में आया कि यहां का सारा काम

यह मैडम जी संभाल रही है, मतलब कि; तो उन्होंने डॉली के पास जाते हुए अपना आर्डर; बता दिया, कि दो दाल बिल्कुल सिंपल और बिना मिर्ची की चाहिए, और हां रोटियां भी विदाउट बटर , डॉली ने उनकी बात को नोट कर लिया और कह दिया ठीक है, जैसा आपने कहा है वैसा ही हो जाएगा ,उसमें से एक लड़का बड़े ही गौर से डॉली को देख रहा था, जो शायद उन लोगों के साथ पहली बार ही ढावे पर आया था ,वह अभी डॉली को पहचानता नहीं था ,कि यह कौन है और ढाबे पर क्या संभालती हैं ,थोड़ी ही देर बाद वह दोबारा किसी बात के बहाने अंदर आ पहुंचा, इस बार उसने फिर डॉली से बात करने की कोशिश की, कि मैडम अगर हो सके तो दो प्लेट मीठा और सादा दही भी आप खाने में ऐड कर दीजिए, डॉली ने उनके इस आर्डर को भी नोट कर लिया था ,सभी अपने काम में पूरी तरह से व्यस्त थे, बाहर स्टार्टर खत्म हो गया था, और अब बैठकर थोड़ी हंसी मजाक कर रहे थे ,,,,

राज भी बाहर उनकी टेबल देख रहा था कि कितने लोग हैं, और कितनी टेवल्स लगवानी है ,तो वह सारा अरेंजमेंट राज कर रहा था ,,,और डॉली अंदर दूसरे कामों में लगी हुई थी ,पर ऐसे लग रहा था जैसे कि वह लड़का बार-बार डॉली से बात करने का बहाना ढूंढ रहा हो, वह किसी ना किसी बहाने अंदर आ रहा था, राज ने थोड़ी देर बाद इस बात को नोटिस किया और उसने डॉली से घर जाने के लिए कहा!!!

डॉली; जानती थी कि राज को बस एक ही बात की चिंता रहती है, कि वह ढाबे पर या दूसरी चीजों में कम से कम समय दे , सिर्फ अपनी पढ़ाई देखें ,क्योंकि राज जानता था कि ,डॉली के पास वैसे भी टाइम नहीं रहता ,इसलिए वह संडे को अच्छे से पढ़ाई कर लेती थी ,और अब चूँकि डॉली को ढाबे पर कोई काम भी नहीं था,,राज की बात को इग्नोर करते हुए वह यहां के कामों में मदद करवाती रही ,राज ने भी ध्यान नहीं दिया कि डॉली घर गई , या नहीं इसी बीच करीब 2 घंटे बीत चुके थे, उन सब का खाना भी हो चुका था ,और सब यहां के अरेंजमेंट से बहुत खुश थे ,जितना अच्छा स्टार्टर उतनी ही अच्छी बैठने की व्यवस्था और उतना ही बढ़िया तड़के दार और साफ सुथरा यहां का खाना ,,,,

उन्होंने राज की तारीफ भी की और बिल पेय करते हुए दोबारा आने की इच्छा भी जाहिर की, अब तक सब कुछ खत्म हो चुका था ,डॉली अंदर का काम समेटने में लगी हुई थी,,,,,लेकिन तभी फिर से वह दोनों लड़के अंदर आये और जाते-जाते डॉली से उसका मोबाइल नंबर पूछने लगे ,डॉली ने बड़ी ही सहजता से कहा देखिए अगर आपको हमारे ढावे से कोई कांटेक्ट करना है ,और आपको नंबर चाहिए तो बाहर बोर्ड पर नंबर लिखा हुआ है ,और आप जाकर ,बाहर राज यानी की ढाबे के मालिक से भी बात कर सकते हैं, वह आपको यहां का ऑफिशियल नंबर दे देंगे जिस पर आपकी बात आराम से हो जाएगी ,पर उन लड़कों ने फिर अपनी इच्छा जाहिर की मैडम एक्चुली हमें आपका ही नंबर चाहिए, हमें आप की व्यवस्था बहुत अच्छी लगी ,और हम चाहते हैं कि अगर हमारे यहां कोई पार्टी हो, तो आप उस का अरेंजमेंट देखें, और उनकी इस बात का भी जवाब डॉली ने बहुत समझदारी से दिया ,,,

कि सर मैं किसी के घर नहीं जाती हूं क्योंकि यह ढाबा मेरे घर का है, अगर कभी मुझे टाइम होता है, तो यहां थोड़ी बहूत हेल्प करवा लेती हूं ,,,अदरवाइज ढावे की सारी व्यवस्था राज जी ही देखते हैं ,,,आपको जो भी बात करनी है आप उनसे कर सकते हैं ,,मैं आपको पहले भी बता चुकी हूं ,,,

लेकिन वह डॉली की बात समझ ही नहीं रहे थे ,शायद उनमें से एक लड़का जो डॉली को देखकर अट्रैक्ट हो गया था ,और वह डॉली से दोस्ती का हाथ बढ़ाने के लिए ही उसका नंबर मांग रहा था ,उसे डॉली बहुत ही समझदार सुंदर और पढ़ी-लिखी लड़की लगी, और डॉली की एक्टिव नेस को देखते हुए वह कुछ ही देर में डॉली से काफी इंप्रेस हो गया था उसने कोई बदतमीजी तो नहीं की ,पर फिर भी मैं बार-बार नहीं डॉली से उसका नंबर लेने की जिद करने लगा,,

अंदर की आवाज राज के कानों में पड़ी कि वह किसी को किसी बात के लिए मना कर रही है, तो राज सीधा अंदर आया और उसने देखा कि जो दो लड़के है, उनमें से एक लड़का डॉली से किसी तरह की जबरदस्ती कर रहा है ,और डॉली से कोई कुछ कहे यह तो राज की

बर्दाश्त से बाहर था, वह भी उसके होते हुए ,उसके ढाबे पर किसकी इतनी हिम्मत हो गई जो डॉली से तरह से बात कर सके,,

राज को देखकर ही डॉली समझ गई कि राज को यह सब अच्छा नहीं लगा और अगर बात जरा भी बड़ी,तो उसका गुस्सा बेकाबू हो जाएगा ,,इसलिए डॉली ने समझदारी से काम लेते हुये,,,नॉर्मल होकर लड़कों से कहा लीजिए आपको ढाबे का कांटेक्ट चाहिए था ,और ये आ गए ढाबे के मालिक ,आप इनसे कांटेक्ट ले सकते हैं,,

पर उस लड़के ने कहा मैडम मुझे आपका नंबर चाहिए, इनका नहीं ,

जब यह बात राज के कानों में पड़ी तो राज ने उसका कॉलर पकड़ते हुए उसको पीछे धकेला,,,,

कि आपको समझ में नहीं आ रहा जब उसने एक बार मना कर दिया आपको नंबर की क्या जरूरत है,,

डॉली समझ चुकी थी कि राज को गुस्सा आ रहा है,, डॉली जल्दी से राज को उससे अलग करने लगी ,,

तब तक दुकान के लड़के भी आ गए उन्होंने अलग करते हुए उन लड़कों से माफी मांगी, और उन्हें यहां से जाने के लिए कहा ,पर वह लड़के भी कहां चुप रहने वाले थे,,

वह जाते-जाते कहने लगे ,,,

अगर मैं मैडम से नंबर मांग रहा हूं तो आपको क्या प्रॉब्लम हो रही है ,अरे मैं तो मैडम का नंबर ही मांग रहा हूं ,,

आपकी बीवी का तो नहीं जो आप मुझे रोक रहे हैं ,,

आखिरी ये आपकी है ही कौन

बीबी या बहन ,अगर बहन है तो उसे अपनी मर्जी से अपनी जिंदगी जीने का हक है ,क्या वह किसी से फ्रेंडशिप नहीं कर सकती , आजकल तो सभी लड़के लड़कियां अपनी पसंद से अपनी फ्रेंडशिप करते हैं, और हां अगर यह आपकी बीवी है तो मुझे खुद ही इसका नंबर नहीं चाहिए ,आपकी बीवी आपको ही मुबारक हो ,,,,,

तब तक उस लड़के के साथ वाले लोग भी बाहर से आ गए थे ,और उन्होंने उसे पकड़कर गाड़ी में बैठाया ,और उसके बाद राज से इस बात के लिए माफी भी मांगी ,वो लोग जा चुके थे, कहने को तो यहां पर सारी बात खत्म हो चुकी थी लेकिन उस लड़के की कही हुई बात ने राज और डॉली के दिमाग में उथल पुथल मचा दी थी, उसकी बातों पर पहले तो राज का खून ख़ौल रहा था,

जैसे ही वह गये राज ने डॉली से दोबारा घर जाने के लिए कहा ,

और ढाबे में वापस छोटू को एक चाय बनाने के लिए कह कर बाहर पड़ी हुई टेबल पर बैठ गया,,तभी राज का बचपन का दोस्त कन्हैया ,,, आ चुका था उसे शायद किसी ने फोन करके सारी बात बता दी थी, एक वही था जो राज का सबसे अच्छा साथी था,,

राज उसके साथ अपनी हर अच्छी बुरी बात शेयर करता था, कन्हैया ने आके राज के कंधे पर हाथ

रखा ,और कहा क्यों रे क्या बात हो गई थी ऐसी, कि तूने उसकी कॉलर पकड़ ली ,अरे कस्टमर के साथ ऐसा करेगा, तो कैसे चलेगा, और फिर वह नंबर ही तो मांग रहा था ,

तो मना कर देता, इस तरह से उस पर बरसने की क्या जरूरत थी, तब सिवा ने कन्हैया पर अपनी झुंझलाहट निकालते हुए कहा ,वह डॉली से उसका नंबर मांग रहा था,,,जब डॉली मना कर रही थी , और वह उसके पीछे पड़ा ,,,

और तुझे यह एक साधारण सी बात दिख रही है ,,,

तब कन्हैया ने कहा हां आजकल ऐसे नम्बर मानना साधारण ही बात होती है, सब दोस्त होने के नाते एक दूसरे को अपना नंबर दे भी देते हैं और तुझे बीच में पड़ने की क्या जरूरत थी, डॉली का मन होता ,हो सकता है डॉली भी उससे फ्रेंडशिप करना चाह रही हो ,,या मना भी कर दिया तो वह खुद ही कर देती ,,देख कन्हैया तू मेरा बचपन का दोस्त है ,पर इसका यह मतलब नहीं कि तू कुछ भी बोलता रहता रहे,,,

डॉली अभी बड़ी हो चुकी है,, उसे अच्छे बुरे की समझ है ,,,,,

कन्हैया अपनी बात खत्म करता इससे पहले ही राज बोल पड़ा ,,जब मेरे सामने कोई उसके साथ ऐसी बदतमीजी करेगा ,तो मुझे तो बोलना पड़ेगा ना अरे डॉली अभी बच्ची है उसे अच्छे बुरे की समझ नहीं है,,,,

कन्हैया ने फिर अपनी बात रखी ,सुन पहले तू यह बात

अपने दिमाग से निकाल दे ,कि डॉली बच्ची है, वह एक समझदार और पढ़ी-लिखी लड़की हो गई है ,वह अब बड़ी हो चुकी है, और अपना अच्छा बुरा अच्छे से समझती है ,तुझे बीच में बोलने की बहुत पड़ती है ,जब उस लड़के ने तो उससे पूछा कि यह कौन है तेरी बहन या वीबी , तू कोई जवाब दे पाया इस बात का क्या जवाब था तेरे पास कभी सोचा है तूने खुद से

कन्हैया तू यह कैसी बातें कर रहा है एक तू ही तो है जो मुझे समझता है, अरे तुझे तो पता है कि डॉली से मेरा क्या रिश्ता है कैसे बह यहाँ आकर रहने लगी ,,कन्हैया पूरे गांव को पता है कि डॉली से तेरा क्या रिश्ता है,,,

लेकिन समझने की जरूरत सिर्फ तुझे है अगर कल के दिन तुझसे कोई पूछे तो तू क्या बताएगा कि क्या रिश्ता है डॉली से तेरा ,और उसकी आगे की जिंदगी के बारे में कुछ सोचा है ,डॉली 21 साल की हो गई है ,लेकिन 3,4 साल बाद डॉली शादी करके भी चली जाएगी, अगर कल के दिन उसे कोई लड़का पसंद करता है या उसके सामने अपनी बात रखता है तो क्या तू उस पर इस तरह से भड़क जाएगा,,

देख कन्हैया मुझे तेरी ये फालतू की बातें कुछ समझ में नहीं आ रही, तू कहना क्या चाहता है, बस मेरे सामने कोई डॉली से इस तरह की बात करे,मुझे बर्दाश्त नहीं है ,,

राज मैं तुझसे सिर्फ यह कहना चाहता हूं कि, आखिर तेरा डॉली से रिश्ता क्या है तेरे दिल में डॉली के लिए कौन सी जगह है ,अभी तक राज खुद भी नहीं सोच

पाया था, कि वह डॉली को किस तरह से देखता है, उसके लिए तो डॉली एक बच्ची थी ,जो पढ़ाई लिखाई करके थोड़ी बड़ी हो गई ,और उसने आकर राज का पूरा घर संभाल लिया ,इससे ज्यादा उसने कभी कुछ सोचा ही नहीं था ,,

अब तक कन्हैया ने चाय पीली और चाय पी कर वह जाने लगा ,लेकिन जाते-जाते उसने एक ही बात बोली,, राज अब वह वक्त आ गया है, जब तुझे डॉली के बारे में कोई फैसला लेना ही होगा ,,

और कन्हैया की इस बात का असर राज के दिमाग पर पड़ चुका था ,वह सोचने के लिए मजबूर हो गया था,,,,,

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ढाबे पर जबसे वह बात हुई राज के मन में काफी उथल-पुथल मची हुई थी, राज आज दोपहर में भी खाना खाने घर नहीं गया, अब तो शाम होने को आई ,और धीरे-धीरे रात हो गई ,राज रात को 1000 बजे तक ढावे पर बैठता था, फिर जो रात के कस्टमर होते थे उन्हें दुकान के लड़के ही संभाल लेते थे,,, लेकिन आज पता नहीं क्यों राज का मन घर जाने का बिल्कुल भी नहीं कर रहा था बह घर जाकर डॉली से क्या कहेगा कैसे नजरें मिलाएगा उसे तो खुद ही समझ नहीं आ रहा था ,कि आखिर डॉली से उसका रिश्ता क्या है ,उसने तो इंसानियत के अलावा कुछ और सोचा ही नहीं था ,क्या यह जरूरी है कि किसी इंसान से हमारा कोई रिश्ता हो तभी हम उसके लिए फिकर मंद हों,,,

नहीं ऐसा नही है,अगर हम दिल से किसी की परवाह करते हैं ,तो जरूरी नहीं है कि उसे रिश्ते का नाम ही दिया जाए ,लेकिन फिर भी उस लड़के ने जो कहा उसकी बात तो सोचने लायक थी, आखिर कब तक ऐसा चलेगा, डॉली की आगे की जिंदगी के बारे में तो

उसे सोचना ही होगा!

अब डॉली पढ़ लिखकर अपने पैरो पर भी खड़ी हो गई थी,आखिर एक दिन तो आएगा ही जब वह अपना जीवन साथी चुनेगी ,और ये तो होता ही चला आया है,कि हर लड़की एक दिन अपने घर जाती ही है,,,

, जब काफ़ी टाइम हो गया ,और राज घर नहीं आया ,तो काकी उसे बुलाने ढाबे पर आ गई ,राज ने काकी से कहा , कि तू जाकर सो जा मैंने ढाबे पर ही खाना खा लिया है जैसे ही काम ख़तम होता है ,अपुन आकर सो जाएगा, तू अपुन के पीछे तेरी नींद खोटी मत कर ,पर ऐसा कैसे हो सकता था कि जब तक काकी अपने हाथों से एक निवाला राज को ना खिला दे ,वह खुद कैसे खा सकती थी डॉली ने सुबह की सारी बात काकी को बता दी थी, और तब से काकी भी इसी बात का इंतजार कर रही थी, कि राज घर आए और वह उसको समझाए, कि दुनिया चाहे कुछ भी सोचे ,हम तीनों का ही कुछ रिश्ता ना होते हुए भी सबसे बड़ा जो रिश्ता है ,वह है दिल का रिश्ता ,और उस से मजबूत कोई भी रिश्ता इस दुनिया में नहीं होता ,इसलिए लोगों की फालतू बातों पर ध्यान ना दें, और बस अपने काम में मन लगाए ,,

जब तक राज और काकी घर नहीं आए थे डॉली को भी कहा नींद आने वाली थी, वह भी इन दोनों का इंतजार कर रही थी ,की आकर खाना खाएं और फिर वह सोए, डॉली के अंदर भी एक अंतर्द्वंद चल रहा

था ,जिससे वह बाहर ही नहीं निकल पा रही थी, आज वह भी सोच रही थी कि आखिर क्या रिश्ता है उसका राज से ,उसने तो अभी तक यह सोचा ही नहीं था ,और उसके दिमाग में भी यही सवाल चल रहा था, कि किसी रिश्ते को नाम देना जरूरी है

क्या इतना काफी नहीं है ,कि वह तीनों एक दूसरे के लिए जी रहे हैं ,और एक दूसरे का साथ पाकर उनकी अधूरी जिंदगी पूरी हुई है हां इतना जरूर था, कि डॉली हर वह बात करना चाहती थी जो राज के लिए सही हो

राज से जुड़ी हर बात की डॉली को चिंता रहती थी, उसके फ्यूचर के लिए और उसके लिए वह हमेशा अच्छा सोचती थी ,

राज भी हमेशा एक बच्ची की तरह ध्यान रखता था डॉली का, उसकी हर जरूरत को पूरा करता था ,और

काकी बिल्कुल एक मां की तरह डॉली की देखरेख करती थी, डॉली को खुद से ज्यादा भरोसा राज पर था ,उसे खुद से ज्यादा परवाह काकी की थी,

और डॉली के भविष्य के बारे में राज से ज्यादा चिंता किसी को नहीं थी,,

क्या इतना काफी नहीं था कि तीनों के बीच एक अनजान रिश्ता भी मजबूत डोरी से बंध चुका था ,काकी राज को लेकर अंदर आ चुकी ,डॉली ने काकी के आते ही जल्दी से खाना लगाया ,और चटाई बिछाकर थालिया कमरे में रख ली,, किसी से बिना कुछ कहे ही, उनने खाना शुरु कर दिया था, खाना खत्म किया और चुपचाप अपने अपने कमरों में सोने चले गए, किसी के बीच कोई भी बात नहीं हुई थी ,लेकिन कमरे में जाकर नींद का नामोनिशान ना तो राज की आंखों में था और ना ही डॉली की,,,,

डॉली जहां इस बात से परेशान थी कि राज पता नहीं क्या सोच रहे होंगे ,वह ठीक है या नहीं वही ,राज को सिर्फ और सिर्फ डॉली के भविष्य की चिंता थी ,कि अब तक उसके साथ सब कुछ अच्छा हुआ है ,तो उसके फ्यूचर में आगे भी सब कुछ अच्छा होना चाहिए ,देररात तक सोचते हुए दोनों सो गए थे,,,,,

डॉली जब सुबह सोकर उठी ,तो रोज की तरह अपने कामों में लग गई ,आज तो उसे टाइम से आंगनबाड़ी पहुंचना ही था, लेकिन राज आज अभी तक नहीं उठा था,,,

अब तो 900 बज चुके थे ,और थोड़ी ही देर में उसे ढाबे पर जाना होगा, क्योंकि सुबह से ही काम शुरू हो जाता था ,अब तक डॉली नहा धोकर कान्हा जी को प्रसाद लगाते हुए सारा नाश्ता और खाना भी बना चुकी थी उसने जल्दी से एक कप चाय बनाई ,और लेकर राज के कमरे में चली गई , राज को आवाज देते हुए कहा 900 बज चुके हैं, आप को ढावे पर नहीं जाना क्या

उठ जाइए ,चाय भी ठंडी हो रही है ,राज ने आंखें खोल कर देखा तो सच में घड़ी 900 बजा रही थी ,उसने डॉली से कहा महारानी यही चाय तू अपुन को 1 घंटे पहले नहीं दे सकती थी क्या, मुझे लेट करवा दिया ना डॉली ने कहा अभी कोई देर नहीं हुई है ,आप जल्दी से नहा कर आइए नाश्ता खाना सब कुछ बनकर तैयार है ,मैं आपकी प्लेट लगा देती हूं,,,,

और मैं रसोई में आकर सबके लिए नाश्ता लगाने लगी, जब नाश्ते की प्लेट बाहर लाई तो काकी ने अंदर आते हुए कहा ,डॉली आज पीछे वाले शर्मा जी के यहां शिवपुराण की कथा शुरू हो रही है ,तो तू कोशिश करना कि आंगनबाड़ी से आधे घंटे पहले ही आ जाए ,तेरा टाइम तो 400 बजे खत्म होता है उसके बाद भी तू 500 बजे तक घर आ पाती है, तो मेरे साथ तू भी शिव पुराण सुनने चलना ,वरना हमेशा काम में ही लगी रहती है कभी कहीं आती जाती ही नहीं ,डॉली ने नाश्ता करते हुए ही कहा ,काकी पहले आकर आप नाश्ता कर लो ,,,

हां ठीक है वह तो मैं कर ही लूंगीं पहले मैंने जो पूछा उसका तो जवाब दे दे ,,,

काकी मैं अभी कोई जवाब नहीं दे सकती आंगनबाड़ी में काम बहुत है ,अगर टाइम से खत्म हो जाता है ,तो मैं आ जाऊंगी ,,

ठीक है मैं पहले ही जानती थी कि तू अपने काम के आगे किसी और बात को देखती ही नहीं ,,,सबका नाश्ता खत्म हो चुका था ,

राज ढाबे पर निकल गया ,और डॉली आंगनबाड़ी आने लगी, लेकिन उससे पहले उसने काकी के गले में बाहें डाल कर हंसते हुए कहा, मेरी प्यारी सी काकी इस तरह से मुंह फुलाने की जरूरत नहीं है,

मैं आंगनबाड़ी से आ जाऊंगी ,और आपके साथ शिव पुराण सुनने भी चलूंगी, खुश!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg डॉली की आवाज सुनकर काकी सच में हंस गई थी,,,,

डॉली आंगनवाड़ी चली गई और काकी भी घर का काम समेट कर थोड़ी बहुत रात के खाने की तैयारी करने लगी थी, क्योंकि पुराण का टाइम शाम को 500 बजे से 800 बजे तक का था ,और जब एक बार पुराण शुरू होता है तो काकी तो फिर उठने का नाम ही नहीं लेती ,जब तक समापन होकर आरती नहीं हो जाती, तब तक काकी को उठना अच्छा ही नहीं लगता था,

शाम के 400 बजे तक डॉली भी घर आ चुकी थी, घर आकर चाय पी और काकी का इंतजार करने लगी,काकी साड़ी पहन रहीं थी उन्होंने डॉली से भी तैयार होने के लिए कहा तू भी कुछ ढंग का पहन ले , तू

तो हर कहीं आंगनबाड़ी की बहन जी बनके ही चलती है काकी के बहुत जोर जबरदस्ती करने पर डॉली ने सुंदर सा पटियाला सूट निकालकर पहन लिया, डॉली और काकी तैयार होकर राज को ढाबे पर घर की चाबी देकर पीछे वाली गली में शिव पुराण सुनने चली गई,

जब गई तो वहां पर काफी भीड़ भाड़ हो गई थी ,एक सुंदर सा मंच बनाकर उसको सजाया गया ,

उस पर बाहर से आए हुए पंडित जी शिव पुराण का वर्णन करने जा रहे थे ,और एक छोटा सा पंडाल लगाया गया था जिसमें सभी सुनने वाले कतार से बैठे हुए थे आगे थोड़ी सी जगह दिखी तो काकी ने जल्दी से डॉली का हाथ खींचते हुए आगे जगह बनाकर वहीं बैठ गए,,

अब कथा शुरू होने ही वाली थी ,

शिव पुराण में सती के दुखद अंत के बाद पुनः गौरी के पुनर्जन्म को दिखाते हुए बड़े होकर शिव को प्राप्त करने

की लालसा को दिखाया , कि कैसे बालपन से ही उनके मन में शिव के लिए अपार श्रद्धा और प्रेम समाया हुआ था, आज की इसी कथा को पंडित जी विस्तार से बताने वाले थे,,,,,

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डॉली और काकी कथा सुनने के लिए पंडाल में आगे बैठ चुकी थी ,और कुछ एक मंत्रों के साथ ही पंडित जी कथा शुरू करने वाले थे कथा सबको अच्छी तरह से सुनाई दे, इसके लिए चारों तरफ माइक का भी प्रबंध किया गया था ,साथ में मधुर संगीत वादक भी थे मुख्य अतिथि ने आकर दीप प्रज्वलित किया और मंत्रों का उपचार करते हुए पंडित जी ने कथा प्रारंभ की.......

ओम नमः राजय //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33a.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33a.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f33a.svg

सभी श्रोता गणों से अनुरोध है, कृपया ध्यान पूर्वक और प्रेम पूर्वक श्री शिव पार्वती की कथा का श्रवण करें ,,,

जब राजा दक्ष के यहां बिना बुलाए मां सती का आगमन हुआ,, और यह देखते हुए दक्ष उनकी अवहेलना करते हैं , मां सती के प्राणनाथ ,उनके प्रिय शिव का भी अनादर करते हैं, मां सती इस बात को सहन नहीं कर पाई, और अग्नि कुंड में कूद कर खुद को भस्म कर लिया ,जैसे ही यह समाचार त्रिलोक पति महाशंभू शिव को मिला तो क्रोध और दुख से उनका तीसरा नेत्र खुल गया और प्रभु ने तांडव करना शुरू कर दिया स्वर्ग के

सारे देवताओं ने मिलकर श्री हरि विष्णु को आगे किया ,और बड़ी मुश्किलों के बाद श्री हरि शिवजी को शांत कर पाये, जब उनका क्रोध उतरा ,तो वे धरती लोक पर आए ,और सती की निर्जीह देह को उठाकर यहां से वहां भटकते हुए पृथ्वी पर ही विचरण करने लगे,,, श्री शिव ने पूरी तरह से बैरागी रूप धारण कर लिया था ,पर उनकी यह दशा श्री हरि विष्णु से देखी ना गई जिनसे पूरे संसार का संचालन होता है ,उनका इस तरह से बिचरना उचित नहीं था , अतः उन्होंने मां सती की देह का अंत अपना सुदर्शन चला कर दिया, और फिर जहां-जहां मां सती के अंग गिरे वही वही शक्तिपीठ का स्थान माना गया ,और उनके अंग गिरने के अनुसार इनके नाम भी रखे गए ,,,,,,

इन सबके बाद भी शिव के ह्रदय में दुख और पश्चाताप कम ना हुआ था, तब मां सती की अदृश्य शक्ति ने आकर उनसे प्रार्थना की,

कि वह अपने पहले के रूप में आए और और अपने नित्य कार्यों का सहज रूप से निर्वाह करे, वह पुनः नैना देवी की पुत्री के रूप में पुनर्जन्म लेंगी जिन्हें उमा और गौरी के नाम से जाना जाएगा ,जब सती ने साक्षात आकर शिव जी को यह सारी बातें कहीं तो उनके मन से क्षोभ निकल चुका था ,और वह वापस कैलाश पर आकर अपनी तपस्या में लीन हो गए ,उसके बाद गौरी मैया ने नैना देवी की कोख से पुनर्जन्म लिया, और उनके आंगन में अपने शुभ चरण कमल रखे ,मां गौरी के आने से उनका पूरा महल पवित्र हो चुका था ,चारों

तरफ राग उल्लास छा गया था, लेकिन जैसे ही मां गौरी बड़ी होने लगी तो उनके मन में शिव जी के प्रति अपार श्रद्धा उत्पन्न होती गई ,बचपन से ही वह एक बड़ी शिव भक्त बन चुकी थी, शिव की पूजा अर्चना में ही उनका समय व्यतीत होता था और 1 दिन वह आया जब धीरे-धीरे उन्हें ज्ञात हुआ वह सिर्फ शिव भक्ति ही नहीं है बल्कि वह तो शिव शंभू को अपने पति के रूप में पाना चाहती हैं ,शिव के प्रति उनकी श्रद्धा ही उनका प्रेम है,

शिव के प्रति आस्था ,उस प्रेम को पाने की ललक है

शिव के दर्शन की लालसा ,उनसे मिलने की तड़प है

शिव के बिना उनका जीवन अधूरा है

धीरे धीरे गौरा को पूर्ण रूप से ज्ञात हो चुका था, कि राज ही उनके जीवन का आधार है और शिव के बिना वह अधूरी है, निराकार है अब तक कथा को सुनाते हुए डेढ़ से 2 घंटे बीत चुके थे ,आगे की कथा का वर्णन अगले दिन किया जाएगा ,,,,

इसी के साथ कथा संपन्न हुई आरती हुई प्रसाद वितरण हुआ ,और डॉली काकी के साथ घर आ गई ,डॉली ने शिव पुराण पहली बार सुना था, उसे यह सारी बाते पता नहीं थी ,उसके पास तो बस उसके कान्हा जी ही थे जिनको वह हमेशा अपने साथ रखती थी बचपन से लेकर आज तक ,और जब वह राज के घर आई ,उसके बाद राज एक सुंदर सा मंदिर कान्हा जी के लिए ले आया था , तब से कान्हा जी का स्थान उस मंदिर में हो गया ,घर आकर डॉली काकी से कई सवाल पूछ रही थी,,,,

काकी जब पार्वती मैया शिव की पूजा करती थी, तो फिर उन्होंने यह कैसे सोच लिया कि वह उन्हें पति के रूप में पाना चाहती हैं

तब काकी ने डॉली को समझाया बेटा जब हमें किसी से प्रेम हो जाता है, और जब वह प्रेम बड़ता हुआ हमारे दिल में उतर जाता है तो हमें उसे पाने की लालसा हो जाती है,

पर काकी गौरी मैया को यह कैसे पता चला कि उन्हें प्रेम हो गया है ,या फिर उन्हें राज को प्रेम करना चाहिए ,वह कैसे समझी थीं

काकी ने कहा, डॉली प्रेम को हमेशा महसूस किया जाता है ,और यह बातें हमें हमारे दिल से ही पता चलती हैं ,पर काकी गौरी मैया तो कभी शिव से मिली भी नहीं ,फिर उन्हें प्रेम कैसे हो गया

हां बेटा गौरी मैया राज से मिली नहीं थी ,पर उन्हें पिछले जन्म की सारी बातें अच्छी तरह से ज्ञात थी,कि शिव उनके पति थे , उनको याद था कि कैसे उनके पिता दक्ष ने शिव का अपमान किया था ,,दक्ष उन्हें हमेशा ओगड़ अघोरी कहते थे, लेकिन राज के लिए सती के दिल में अपार श्रद्धा थी , सती उनसे अटूट प्रेम करती थी, सिक्का तभी तो वह शिव का अपमान सहन ना कर पाई और उन्होंने अग्निकुंड में खुद को भस्म कर लिया ,,

काकी क्या तू जानती है कि हमें यह कैसे पता चलता है, कि हम किसी से प्रेम करते हैं

बेटा यह तो बहुत ही साधारण सी बात है जिसके लिए

हमारे मन में इज्जत हो ,मान सम्मान हो ,जो हमारी देखभाल करता हो जिसके लिए हम हमेशा अच्छा सोचते हो जिसके साथ हम हमेशा रहना चाहते हो, जो हमारी हर बात का ख्याल रखता हो ,जो दुनिया से हमें बचाना चाहता हो, जिसकी हम बुराई नहीं सुन सकते , बस ऐसे ही दो लोगों के बीच प्रेम होता है ,यह प्रेम ही होता है, जिसकी वजह से यह सारी बातें हमें उसके लिए सोचने पर मजबूर कर देती है और श्री शिव के लिए गौरी मैया के मन में यह सारी बातें थी, और हां इन सब के साथ-साथ एक बात और जिसे छोड़ कर हम कभी नहीं जाना चाहते ,जिसके साथ अपनी पूरी जिंदगी रहना चाहते हैं ,उसी को प्रेम कहते हैं

काकी एक बात और पूछूं

अब तक काकी रसोई में आ गई थी ,और खाने की कुछ तैयारी जो कर कर गई उससे आगे की तैयारी करने लगी थी, लेकिन डॉली अभी भी काकी के पीछे ही लगी थी ,हां पूछ अगर तुझसे मना भी करूंगी जब तक तू पूछ न लेगी तू मानेगी क्या ,

काकी यह सारी बातें तो मुझे तेरे साथ भी लगती है ,तो क्या मुझे तुझ से प्रेम हो गया है तब काकी ने हंसते हुए कहा!!!

डॉली तू भी ना ,राज सही कहता है कि हमेशा बच्चे ही रहेगी ,अरे मुझ बुड़िया से प्रेम करके कहां जाएगी तू ,,

काकी ने डॉली को समझाया ,हां बेटा यह भी प्रेमी होता है ,हम अपने मां बाप, भाई बहन सब से प्रेम करते हैं, और यह सारी बातें सबके साथ महसूस होती हैं ,लेकिन

जब यही बातें किसी अजनबी के साथ महसूस हो यानी कि कोई ऐसा इंसान जिससे हमारा कोई खून का रिश्ता ना हो ,और फिर भी हम उसकी इन सारी चीजों की चिंता करते हो उससे दूर जाने का कभी मन ना करे,हमेशा उसके साथ रहने का, उसके पास रहने का मन करे ,तो इसी को प्रेम कहते हैं, और ऐसे ही प्रेम को आगे चलके हम अपने जीवन साथी के रूप में देखना चाहते हैं

चल अब तू जा जल्दी से कपड़े बदल ले राज भी आता ही होगा ,खाना खा लेंगे

और हां अगर और कुछ जानना है तो कल भी आंगनबाड़ी से टाइम पर आ जाना और मेरे साथ चलना , डॉली ने अपने दुपट्टे को निकाल कर हाथ में लिया, और झुमके उतारते हुए बोली ,हां काकी मैं जरूर चलूंगी अब तो मुझे शिव और पार्वती के बारे में हर बात जानना है ,कि आखिर मां पार्वती को शिव जी से प्रेम कैसे हुआ ,और कैसे उन्होंने इसे महसूस किया,, डॉली जब तक कमरे में से कपड़े बदल कर आई, तब तक राज भी आ चुका था ,डॉली जल्दी से रसोई में गई और काकी की मदद करवाते हुए खाने की थाली लगाकर कमरे में ले आई ,उसने थाली राज को देते हुए कहा ,आपको पता आज मैं काकी के साथ पीछे पुराण में गई थी ,और मुझे बहुत अच्छा लगा ,अगर आपको टाइम हो तो कल आ जाइए, राज ने जोर से हंसते हुए कहा ,महारानी तू काकी के साथ जाकर एक ही दिन में पंडित बन गई, अपुन को भी को भी जाने के लिए कह

रही है ,वह भी कथा में, तेरे को क्या लगता है कि तू कहेगी और मैं आकर वहां बैठ जाऊंगा ,इतना ही बहुत है कि इस घर से 2 लोग ज्ञान लेने जा रहे हैं ,,,
 
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