S
StoryPublisher
Guest
धीरे-धीरे ढाबे के बगल में ही एक झोपड़ी बनाकर हम दोनों उस में रहने लगे ,,राज खूब मेहनत और लगन से काम करता ढाबा मालिक हमेशा राज को खुश होकर कुछ ज्यादा ही पैसे दे देता था ,धीरे-धीरे राज की मेहनत और उसकी इमानदारी से ढाबे पर लोगों का आना भी बढ़ने लगा, ढावा अच्छा चलने लगा ,,,हमे यहां काम करते हुए 7 साल हो चुके थे ,अब राज 12 साल का हो गया था ,,,राज ढाबे पर काम करता और कभी-कभी ढाबा मालिक के साथ उनके खेतों पर भी चला जाता ,जहां वो ट्रैक्टर चलाते तो उनको बड़े ध्यान से देखता ,जब जब चार साल और बीत गए राज 16 साल का हो गया था ,, उसे ट्रैक्टर चलाना भी आ गया था,,, गाड़ी बस ट्रैक्टर में तो उसका दिमाग शुरू से ही बड़ा तेज था ,जब भी काम से फ्री होता खेत में ट्रैक्टर चला के सीखता,,अब वह अच्छी तरह से चलाने लगा
था ,,,दो-तीन साल और बीते तब तक पर सभी तरह के वाहन बखूबी चला लेता था चाहे वह मोटरसाइकिल हो उनकी जीप हो या फिर ट्रैक्टर ,,राज 19 साल का हो चुका था ,लेकिन उसमें एक जो सबसे बड़ी कमी थी वह यह कि उस बच्चे ने कभी भी स्कूल का मुंह नहीं देखा था, हां ढाबे का हिसाब किताब उसे सारा आता था ,जो उसने ढाबे पर ही देख देखकर सीख लिया था ,कितने लोगो का खाना बना ,कितना खाना खाया, कितनी सब्जी है , इन सब का हिसाब वह उंगलियों पर ही कर लेता ,और उसे लिखना भी आ गया था ,बस इससे ज्यादा और कुछ नहीं सीखा,,,इन 14 साल में राज को ढाबे पर जितने भी पैसे मिले उसने कभी भी एक पैसा खर्च ना किया था ,,,पास में एक छोटा सा बैंक था,, जितने भी पैसे मिलते हर महीने जाकर बैंक में जमा कर देता ,,बस दो टाइम की रोटी ही तो खानी थी ,जो हम दोनों को ढावे से ही मिल जाती थी ,,,,
1 दिन सभी ढाबे पर काम कर रहे थे, कुछ लोग खाना खा रहे थे, खाना बन रहा था मैं वहां बगल में बैठकर सब्जी काट रही थी और राज ग्राहकों को खाना देने में लगा हुआ था,,, तभी अचानक बहुत जोर की आवाज हुई,, सब लोग घबरा कर खड़े हो गए जब देखा तो रोड पर ही सामने एक कार की दुर्घटना हुई थी,,, सामने से आ रहे ट्रक से बुरी तरह से भिड़ गई थी ,,,थोड़ी ही देर में लोगों की भीड़ इकट्ठी हो चुकी थी ,,ट्रकवाला तो 2 मिनट में ही रफूचक्कर हो गया, और कार के अंदर दो लड़के थे एक कोई 19,,,20 साल का रहा होगा और
दूसरा
25 ,26 के आसपास था जो लड़का कार चला रहा था उसकी हालत तो बहुत खराब थी, पहले तो लगा कि शायद मर चुका है लेकिन जब हल्की सी सांस चलती दिखी तो उसको गाड़ी से बाहर निकाला ,,और बगल बाली सीट पर जो लड़का था ,,वैसे तो ठीक था पर वह भी बेहोश हो गया था ,,लोगों को तो समझ में नहीं आ रहा था कि यह मर चुके हैं या ,,,1020 मिनट बाद मर जाएंगे पर सबसे पहला काम था उनको अस्पताल पहुंचाना ,इन सब कामों में राज ही सबसे आगे था ,,उसने जल्दी-जल्दी लोगों से कहना शुरू किया कि फटाफट आओ इनको अस्पताल लेकर चलना है ,पर अस्पताल का नाम सुनकर ही वहाँ लोगों के नाम पर एक भी कोई नहीं बचा था ,,,उस दिन दुकान मालिक भी दुकान पर नहीं था,, और जो कुछ काम करने वाले लोग थे ,,एक्सीडेंट का नाम सुनकर ही भाग खड़े हुए थे, इतने लोगों में बस मे और राज ही वहां थे ,,,राज के पास ना तो फोन था ना ही कोई ऐसी सुविधा कि वह पुलिस को डॉक्टर को भुला सके,, पर अपना राज तो शुरू से ही दिल का सोना है ,,,,वह ऐसे कैसे छोड़ सकता था ,,,उसने जल्दी से उनकी ही कार को स्टार्ट करके देखा थोड़ी सी मेहनत के बाद कार स्टार्ट हो गई ,,,,क्योंकि चोट कार को तो ज्यादा नहीं आई थी ,,पर उसकी दमच से आगे वाले लड़के की चोट बहुत गहरी थी ,,,,राज ने दोनों लड़कों को कार में लिटाया उनके साथ मैं भी अंदर बैठ गई, करीब 2 घंटे
बाद हमें जो पहला अस्पताल मिला हम जल्दी से दोनों को अंदर ले गए ,,अस्पताल ठीक-ठाक था राज ने सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए डॉक्टर से दोनों का इलाज शुरू करने के लिए कहा ,,जब डॉक्टर ने नाम पता पूछा तो राज ने सारी बातें सारी चीजें एक-एक करके साफ-साफ बता दी, उसके बाद काम पुलिस का था पुलिस ने जब उनकी गाड़ी की तलाशी ली तो उसमें उन लड़कों के कुछ कागज निकले जिसमे उनका पहचान पत्र था जिससे उनका पता फोन नंबर सब कुछ मालूम पड़ गया ,,पुलिस ने उनके घर पर खबर की ,,करीब दो-तीन घंटे बाद दोनों लड़कों के परिवार वाले अस्पताल में आ चुके थे,,, लड़के भी अस्पताल के अंदर ही थे इलाज चल रहा था उनका ,,,,राज से जो भी पूछा गया सब कुछ सच-सच बता दिया था ,,,,,,
लड़कों को अस्पताल पहुंचाने के बाद उनका इलाज शुरू हो चुका था ,मैं और राज तभी से बिना कुछ खाए पिए बस यही इंतजार कर रहे थे कि लड़कों के घर वालों का कुछ पता चले , उनका इलाज हो और वह ठीक हो जाएआखिर वह भी किसी के कलेजे के टुकड़े होंगे ,,डॉक्टर कभी ऑपरेशन थिएटर से बाहर आते , तो कभी अंदर जाते , तो कभी नर्स को अपनी सहायता के लिए बुलाते इसी तरह से लगभग 2 घंटे बीत चुके थे,,, अभी लड़के ऑपरेशन थिएटर में ही थे तभी अस्पताल के बाहर बाहर दो बड़ी-बड़ी गाड़ियां आकर रुकी, जिनमें से उनके मां बाप ,भाई बहन ,,परिवार के और भी लोग थे दोनों गाड़ियां लोगों से खचाखच भरी हुई थी बे बहुत घबराए हुए से अंदर आए और रिसेप्शन पर आकर उनके नाम बताते हुए पूछताछ करने लगे ,,,मैं और राज समझ गये कि ये लोग लड़कों के परिवार वाले हैं तो हमने जाकर उन्हें बैठने के लिए कहा,, और फिर आराम से एक एक बात बता दी वह सभी मेरे और राज के हाथ जोड़कर शुक्रिया अदा कर रहे थे ,,कि आज के जमाने में बहुत ही कम लोग आपके जैसे होते हैं,, जो बिना किसी स्वार्थ के किसी के साथ कुछ अच्छा करते हैं,,, पर अभी इन सब बातों का वक्त नहीं था,, राज और मैंने उन्हें धीरज बंधाते हुए बस एक ही बात कही ,,कि अभी इन सब बातों का वक्त नहीं है ,,अभी हम सिर्फ भगवान से प्रार्थना कर सकते हैं,कि आपके बच्चों के साथ सब कुछ अच्छा हो उनके साथ जो दो औरतें थी उनका हाल सबसे ज्यादा बुरा था शायद वह दोनों लड़कों की मां थी,,,मैं भी उन्हें समझाने की कोशिश कर रही थी, कि ऐसी स्थिति मैं समय सिर्फ धीरज रखने का है ,,उनको आए हुए भी 1 घंटे से ऊपर हो चुका था ,तभी ऑपरेशन थिएटर का दरवाजा खुला और डॉक्टर बाहर आए ,डॉक्टर ने बताया की ऑपरेशन किया जा चुका है,, ऑपरेशन भी सक्सेस रहा लेकिन फिर भी अभी उसे होश में आने में कम से कम 1 से 2 घंटे लग सकते हैं,, और उसके बाद ही हम कुछ बता पाएंगे कि उसकी क्या कंडीशन है ,,,
ऑपरेशन तो हो चुका था लेकिन अभी भी खतरा टला नहीं था,, क्योंकि जब तक डॉक्टर होश में आने के बाद दोबारा उनका टेस्ट नहीं कर लेते ,, तब तक कुछ भी कहना मुश्किल था ,,,
अब लड़कों के परिवार वाले तो अचानक भागे ,भागे यहां आए थे ,और फिर यह एरिया उनके लिए अनजान था ,तो यहां भी मेरी और राज की ही जिम्मेदारी बनती थी कि उन लोगों के थोड़ी बहुत खाने पीने की व्यवस्था करें,,, राज उन्हीं की गाड़ी और ड्राइवर साथ लेकर ,उनके खाने-पीने की व्यवस्था करने के लिए चला गया था,थोड़ा बहुत खाना और चाय नाश्ता लेकर आ गया और उन सब का ध्यान भी रखा ,,,
डॉक्टर ने 1 से 2 घंटे बोले थे ,लेकिन अभी 4 घंटे होने को आ रहे थे, तभी नर्स ने आकर बताया कि लड़के ने अभी आंखें खोल कर देखा था ,,,,तभी सब लोग डॉक्टर की तरफ जल्दी से भागे और उन्हें इस बात की खबर दी ,,,डॉक्टर भी आ गए और उन्होंने अंदर जाकर उसका चेकअप किया और बाहर आकर बताया कि वह ठीक है,,,आप मैं से कोई भी एक जाकर उससे मिल सकता है उनके घर वालों ने लड़के की मां को वहां भेज दिया ,,,थोड़ी देर बाद जब वह वापस आई तो उन्होंने बताया कि वह ठीक है और उसने अच्छे से बात भी कर ली ,तब कहीं जाकर सबकी जान में जान आई हम सब पूरी रात वही रहे, दूसरे दिन दोनों लड़कों के सारे टेस्ट हो चुके थे,और भगवान की कृपा से सभी रिपोर्ट सही आई थी ,,,हां चोट कुछ दिनों में ठीक हो जाती लेकिन अब घबराने की कोई बात नहीं थी,,, दोनों लड़के पूरी तरह से स्वस्थ थे तीन-चार दिन हॉस्पिटल में रहने के बाद उनकी छुट्टी हुई ,,,,इन तीन-चार दिनों में ,
मैं और राज नियमित रूप से वहां आते रहे थे ,इतने दिनों में उनसे एक रिश्ता सा बन गया था ,,बातों ही बातों में बह मेरे और राज के बारे में सब कुछ जान चुके थे ,,उन्हें बहुत आश्चर्य हो रहा था कि,आज भी ऐसे लोग है जिनका खुद अपना कोई ठिकाना नहीं है फिर भी अपनी जान पर खेलकर हमारे बच्चों की जान बचाई ,,,,
राज खुद भी जब 19 वर्ष का था इतनी छोटी सी उम्र में सारी जिम्मेदारी लेते हुए उसने एक अच्छे इंसान के सारे कर्तव्य पूरीतरह से निभाये थे,,,,
था ,,,दो-तीन साल और बीते तब तक पर सभी तरह के वाहन बखूबी चला लेता था चाहे वह मोटरसाइकिल हो उनकी जीप हो या फिर ट्रैक्टर ,,राज 19 साल का हो चुका था ,लेकिन उसमें एक जो सबसे बड़ी कमी थी वह यह कि उस बच्चे ने कभी भी स्कूल का मुंह नहीं देखा था, हां ढाबे का हिसाब किताब उसे सारा आता था ,जो उसने ढाबे पर ही देख देखकर सीख लिया था ,कितने लोगो का खाना बना ,कितना खाना खाया, कितनी सब्जी है , इन सब का हिसाब वह उंगलियों पर ही कर लेता ,और उसे लिखना भी आ गया था ,बस इससे ज्यादा और कुछ नहीं सीखा,,,इन 14 साल में राज को ढाबे पर जितने भी पैसे मिले उसने कभी भी एक पैसा खर्च ना किया था ,,,पास में एक छोटा सा बैंक था,, जितने भी पैसे मिलते हर महीने जाकर बैंक में जमा कर देता ,,बस दो टाइम की रोटी ही तो खानी थी ,जो हम दोनों को ढावे से ही मिल जाती थी ,,,,
1 दिन सभी ढाबे पर काम कर रहे थे, कुछ लोग खाना खा रहे थे, खाना बन रहा था मैं वहां बगल में बैठकर सब्जी काट रही थी और राज ग्राहकों को खाना देने में लगा हुआ था,,, तभी अचानक बहुत जोर की आवाज हुई,, सब लोग घबरा कर खड़े हो गए जब देखा तो रोड पर ही सामने एक कार की दुर्घटना हुई थी,,, सामने से आ रहे ट्रक से बुरी तरह से भिड़ गई थी ,,,थोड़ी ही देर में लोगों की भीड़ इकट्ठी हो चुकी थी ,,ट्रकवाला तो 2 मिनट में ही रफूचक्कर हो गया, और कार के अंदर दो लड़के थे एक कोई 19,,,20 साल का रहा होगा और
दूसरा
25 ,26 के आसपास था जो लड़का कार चला रहा था उसकी हालत तो बहुत खराब थी, पहले तो लगा कि शायद मर चुका है लेकिन जब हल्की सी सांस चलती दिखी तो उसको गाड़ी से बाहर निकाला ,,और बगल बाली सीट पर जो लड़का था ,,वैसे तो ठीक था पर वह भी बेहोश हो गया था ,,लोगों को तो समझ में नहीं आ रहा था कि यह मर चुके हैं या ,,,1020 मिनट बाद मर जाएंगे पर सबसे पहला काम था उनको अस्पताल पहुंचाना ,इन सब कामों में राज ही सबसे आगे था ,,उसने जल्दी-जल्दी लोगों से कहना शुरू किया कि फटाफट आओ इनको अस्पताल लेकर चलना है ,पर अस्पताल का नाम सुनकर ही वहाँ लोगों के नाम पर एक भी कोई नहीं बचा था ,,,उस दिन दुकान मालिक भी दुकान पर नहीं था,, और जो कुछ काम करने वाले लोग थे ,,एक्सीडेंट का नाम सुनकर ही भाग खड़े हुए थे, इतने लोगों में बस मे और राज ही वहां थे ,,,राज के पास ना तो फोन था ना ही कोई ऐसी सुविधा कि वह पुलिस को डॉक्टर को भुला सके,, पर अपना राज तो शुरू से ही दिल का सोना है ,,,,वह ऐसे कैसे छोड़ सकता था ,,,उसने जल्दी से उनकी ही कार को स्टार्ट करके देखा थोड़ी सी मेहनत के बाद कार स्टार्ट हो गई ,,,,क्योंकि चोट कार को तो ज्यादा नहीं आई थी ,,पर उसकी दमच से आगे वाले लड़के की चोट बहुत गहरी थी ,,,,राज ने दोनों लड़कों को कार में लिटाया उनके साथ मैं भी अंदर बैठ गई, करीब 2 घंटे
बाद हमें जो पहला अस्पताल मिला हम जल्दी से दोनों को अंदर ले गए ,,अस्पताल ठीक-ठाक था राज ने सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए डॉक्टर से दोनों का इलाज शुरू करने के लिए कहा ,,जब डॉक्टर ने नाम पता पूछा तो राज ने सारी बातें सारी चीजें एक-एक करके साफ-साफ बता दी, उसके बाद काम पुलिस का था पुलिस ने जब उनकी गाड़ी की तलाशी ली तो उसमें उन लड़कों के कुछ कागज निकले जिसमे उनका पहचान पत्र था जिससे उनका पता फोन नंबर सब कुछ मालूम पड़ गया ,,पुलिस ने उनके घर पर खबर की ,,करीब दो-तीन घंटे बाद दोनों लड़कों के परिवार वाले अस्पताल में आ चुके थे,,, लड़के भी अस्पताल के अंदर ही थे इलाज चल रहा था उनका ,,,,राज से जो भी पूछा गया सब कुछ सच-सच बता दिया था ,,,,,,
लड़कों को अस्पताल पहुंचाने के बाद उनका इलाज शुरू हो चुका था ,मैं और राज तभी से बिना कुछ खाए पिए बस यही इंतजार कर रहे थे कि लड़कों के घर वालों का कुछ पता चले , उनका इलाज हो और वह ठीक हो जाएआखिर वह भी किसी के कलेजे के टुकड़े होंगे ,,डॉक्टर कभी ऑपरेशन थिएटर से बाहर आते , तो कभी अंदर जाते , तो कभी नर्स को अपनी सहायता के लिए बुलाते इसी तरह से लगभग 2 घंटे बीत चुके थे,,, अभी लड़के ऑपरेशन थिएटर में ही थे तभी अस्पताल के बाहर बाहर दो बड़ी-बड़ी गाड़ियां आकर रुकी, जिनमें से उनके मां बाप ,भाई बहन ,,परिवार के और भी लोग थे दोनों गाड़ियां लोगों से खचाखच भरी हुई थी बे बहुत घबराए हुए से अंदर आए और रिसेप्शन पर आकर उनके नाम बताते हुए पूछताछ करने लगे ,,,मैं और राज समझ गये कि ये लोग लड़कों के परिवार वाले हैं तो हमने जाकर उन्हें बैठने के लिए कहा,, और फिर आराम से एक एक बात बता दी वह सभी मेरे और राज के हाथ जोड़कर शुक्रिया अदा कर रहे थे ,,कि आज के जमाने में बहुत ही कम लोग आपके जैसे होते हैं,, जो बिना किसी स्वार्थ के किसी के साथ कुछ अच्छा करते हैं,,, पर अभी इन सब बातों का वक्त नहीं था,, राज और मैंने उन्हें धीरज बंधाते हुए बस एक ही बात कही ,,कि अभी इन सब बातों का वक्त नहीं है ,,अभी हम सिर्फ भगवान से प्रार्थना कर सकते हैं,कि आपके बच्चों के साथ सब कुछ अच्छा हो उनके साथ जो दो औरतें थी उनका हाल सबसे ज्यादा बुरा था शायद वह दोनों लड़कों की मां थी,,,मैं भी उन्हें समझाने की कोशिश कर रही थी, कि ऐसी स्थिति मैं समय सिर्फ धीरज रखने का है ,,उनको आए हुए भी 1 घंटे से ऊपर हो चुका था ,तभी ऑपरेशन थिएटर का दरवाजा खुला और डॉक्टर बाहर आए ,डॉक्टर ने बताया की ऑपरेशन किया जा चुका है,, ऑपरेशन भी सक्सेस रहा लेकिन फिर भी अभी उसे होश में आने में कम से कम 1 से 2 घंटे लग सकते हैं,, और उसके बाद ही हम कुछ बता पाएंगे कि उसकी क्या कंडीशन है ,,,
ऑपरेशन तो हो चुका था लेकिन अभी भी खतरा टला नहीं था,, क्योंकि जब तक डॉक्टर होश में आने के बाद दोबारा उनका टेस्ट नहीं कर लेते ,, तब तक कुछ भी कहना मुश्किल था ,,,
अब लड़कों के परिवार वाले तो अचानक भागे ,भागे यहां आए थे ,और फिर यह एरिया उनके लिए अनजान था ,तो यहां भी मेरी और राज की ही जिम्मेदारी बनती थी कि उन लोगों के थोड़ी बहुत खाने पीने की व्यवस्था करें,,, राज उन्हीं की गाड़ी और ड्राइवर साथ लेकर ,उनके खाने-पीने की व्यवस्था करने के लिए चला गया था,थोड़ा बहुत खाना और चाय नाश्ता लेकर आ गया और उन सब का ध्यान भी रखा ,,,
डॉक्टर ने 1 से 2 घंटे बोले थे ,लेकिन अभी 4 घंटे होने को आ रहे थे, तभी नर्स ने आकर बताया कि लड़के ने अभी आंखें खोल कर देखा था ,,,,तभी सब लोग डॉक्टर की तरफ जल्दी से भागे और उन्हें इस बात की खबर दी ,,,डॉक्टर भी आ गए और उन्होंने अंदर जाकर उसका चेकअप किया और बाहर आकर बताया कि वह ठीक है,,,आप मैं से कोई भी एक जाकर उससे मिल सकता है उनके घर वालों ने लड़के की मां को वहां भेज दिया ,,,थोड़ी देर बाद जब वह वापस आई तो उन्होंने बताया कि वह ठीक है और उसने अच्छे से बात भी कर ली ,तब कहीं जाकर सबकी जान में जान आई हम सब पूरी रात वही रहे, दूसरे दिन दोनों लड़कों के सारे टेस्ट हो चुके थे,और भगवान की कृपा से सभी रिपोर्ट सही आई थी ,,,हां चोट कुछ दिनों में ठीक हो जाती लेकिन अब घबराने की कोई बात नहीं थी,,, दोनों लड़के पूरी तरह से स्वस्थ थे तीन-चार दिन हॉस्पिटल में रहने के बाद उनकी छुट्टी हुई ,,,,इन तीन-चार दिनों में ,
मैं और राज नियमित रूप से वहां आते रहे थे ,इतने दिनों में उनसे एक रिश्ता सा बन गया था ,,बातों ही बातों में बह मेरे और राज के बारे में सब कुछ जान चुके थे ,,उन्हें बहुत आश्चर्य हो रहा था कि,आज भी ऐसे लोग है जिनका खुद अपना कोई ठिकाना नहीं है फिर भी अपनी जान पर खेलकर हमारे बच्चों की जान बचाई ,,,,
राज खुद भी जब 19 वर्ष का था इतनी छोटी सी उम्र में सारी जिम्मेदारी लेते हुए उसने एक अच्छे इंसान के सारे कर्तव्य पूरीतरह से निभाये थे,,,,