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Romance प्रेम कहानी डॉली और राज की

तो डॉली आज उन्ही तैयारियों में लगी थी।

आज सेटरडे की छुट्टी थी ,और कल संडे तो मूड भी काफी रिलैक्स था।

अब तक पिंकी सब की चाय बना कर ले आई थी ,चाय के साथ कुछ हाई प्रोटीन बिस्किट और कुछ लो कैलोरी जो काकी और डॉली के लिए थे।

पिंकी ने जब चाय की ट्रे टेबल पर रखी डॉली ने प्यार से राजनी के सिर पर हाथ फेरते हुए उठाया ,,,,,,

राजनी बेटा चाय आ गई है,,,या अभी और सोना है

जब अदरक वाली चाय की महक राजनी की नाक

तक पहुंची तो बिना देर किए ,,,,

वह सोफे पर बैठ गई ,रात के तेल से चुपड़े हुए बाल ,उसके पूरे चेहरे पर आ रहे थे ।

जैसे ही उसने चाय का कप उठाने के लिए हाथ बढ़ाया ,,,,,

डॉली ने उसका हाथ पकड़ कर पीछे रखते हुए कहा,,,,,

राजनी दिस इज नॉट फेयर,,,,,

पहले आप जाकर ब्रश करके आइए उसके बाद ही आप चाय पिएंगी।

राजनी को पता था ,कि मम्मा ने जो कह दिया ,वह तो उसे करना ही पड़ेगा फटा फट गई और मुंह धोते हुए जल्दी से अंदर आ गई ।

चाय का कप उठाते हुए कहा!

मम्मा अब तो डेफिनेटली में इसे पी सकती हूं ।

अब आप इसे पी सकती है ! और हां चाय पी कर आपको दोबारा नहीं सोना है आज लंच पर पूनम और विकास शैलेश गौरी को लेकर आ रहे हैं ।

तो मैं चाहती हूं ,तू फटाफट उठ के नहा ले ,और अपने तेल से सने बाल भी धो ले ओ,,,,नो,,,, मम्मा आप भी न मुझे रिलैक्स नहीं करने दोगी।

पूनम आंटी विकास और गौरी तो ठीक है ,,,परे शैलेश यह फिर मेरे पीछे चिपकू की तरह पड़ जाएगा ।

और मुझे डिस्टर्ब करता ही रहेगा,राजनी बेटा ऐसे नहीं कहते ,,,वो कितना ध्यान रखता है तेरा, कॉलेज में किसी चीज की कमी होने देता है क्या तुझे कभी

तू ऐसे क्यों कहती रहती है उसके बारे में शैलेश एक

बहुत अच्छा लड़का है।

हां मम्मा तो मैंने कब कहा कि वह बुरा है पर अच्छे के साथ साथ वेरी-वेरी चिपकू

राजनी देख मैं शैलेश की कोई भी बुराई नहीं सुन सकती ।

मेरे लिए वह एक बेस्ट पर्सन है ।

उसमें ढूंढने से भी कोई बुराई नहीं निकाल सकते, और एक अच्छे इंसान के साथ साथ बहुत इंटेलिजेंट भी ,पूरे 5 साल तक हर बार उसी ने कॉलेज टॉप किया है ,और तेरी कितनी हेल्प करता है फिर भी तू उसके बारे में ऐसा बोलती रहती है।

ठीक है मेरी प्यारी मम्मा ,,,कुछ नहीं बोलूंगी ,,, डॉली ने बिस्किट की प्लेट राजनी की तरफ बढ़ाई ,,,,और जैसे ही सबकी चाय खत्म हुई डॉली टॉवल उठाकर नहाने बाथरूम में गई ।

लेकिन जाने से पहले राजनी से भी कह कर गई ,,,राजनी एक बार फिर से सुन ले सब लोग 100 बजे तक यहां आ जाएंगे ,और मैं चाहती हूं कि उससे पहले हमारे सारे काम रेडी हो जाए ।

डॉली ने इतना कहा ,कि पिंकी भी साथ में सारी बात समझ गई ,और वह फटाफट दोपहर के लंच की तैयारी करने लगी,,,,

डॉली जब नहा कर निकली ,तो देखा कि सुमन भी आ चुकी है ,सुमन यानी कि पिंकी की मां ,और छोटू की वाइफ, डॉली को जब भी कोई एक्स्ट्रा काम होता था तो वह सुमन को बुला लेती थी ।

और सुमन हंसी-खुशी फटाफट डॉली के साथ सारे काम करवा लेती ।

सुमन इंतजार कर ही रही थी ,कि डॉली आकर बताए, कि क्या करना है

डॉली बाथरूम से निकली, और किचन में गई, उसके पीछे-पीछे सुमन भी चली गई थी ।

डॉली ने सुमन को इशारा करते हुए सारे काम समझा दिए ,प्याज की कचोरीया बनेंगे, पुलाव बनेंगे ,कढ़ाई पनीर बनेगा और हां राजनी के फेवरेट दाल चावल तो बनना ही है।

जब वो लोग आ जाएंगे ,तो गरम-गरम चपाती भी सेक देना ।

और मीठे में क्या बनेगा डॉली दीदी

मीठे में तो तू काकी से ही पूछ ले, कि क्या क्या बनना है।

यह तो काकी ही बताएंगी, सुमन ने बड़े ध्यान से डॉली की सारी बातें सुनी ,और साथ में पिंकी को भी समझाया ,कि उन्हें क्या-क्या करना है ।

डॉली ने पूजा के लिए ताबे के लोटे में पानी भरा ,और कान्हा जी के मंदिर की तरफ जाने लगी, जाते-जाते उसने कहा कि तुम तैयारी करो ,मैं बस आधे घंटे में कान्हा जी को नहला कर और खाना खिला कर आती हूं ।

डॉली चली गई ,और सुमन ने काकी से पूछते हुये,कि मीठे में क्या बनेगा ,,,,

काकी ने दो तीन चीजों के फटाफट नाम बताए ,,,,कि हलवा हां ,,, शैलेश को अपने यहाँ का मेवे वाला हलवा बहुत पसंद है ।

और गौरी बिटिया को खीर, यह दोनों चीजें चाहिए, राजनी ! वह तो मीठे से दूरी भागती है, उसे तो बस उसके पसंद के दाल चावल खिला दो ,उसके बाद उसकी कोई तमन्ना ही नहीं रहती ,तीनों बच्चों की पसंद का खाना हो गया।

हम लोग तो उसी में कुछ ना कुछ खा लेंगे ,और फिर डॉली तो तुझे बता ही गई होगी ,कि क्या क्या बनना है ।

सुमन ने प्याज काटते हुए कहा ,,,,

जी काकी डॉली दीदी ने मुझे सब कुछ बता दिया है ।

और आप चिंता मत कीजिए, उनके आने से पहले ही मैं सब कुछ तैयार कर लूंगी और फिर डॉली दीदी तो आ

ही रही है। भला उन्हें चैन पड़ेगा कि वह बैठ जाए मुझसे पहले आधा काम वो ही कर लेंगी और शैलेश भाई को तो डॉली दीदी के हाथ का हलवा ही ज्यादा पसंद आता है। हां गोरी बिटिया को जरूर मेरे हाथ की खीर अच्छी लगती है ,,,,

तो खीर तो मैंने चढ़ा दी है ,काकी धीरे धीरे चलती हुई आई ,और एक बार किचन का मुआयना करने लगी, कि सब कुछ ठीक से हो रहा है या नहीं।

सुमन और पिंकी काफी साफ-सुथरे तरीके से ,और नहा धोकर ही रसोई में आती थी ,क्योंकि शुरू से ही जैसे ही रसोई बनती है ,तो पहली थाली कान्हा जी के लिए निकाली जाती है ,और काकी को यह बिल्कुल मंजूर नहीं था, कि उनकी रसोई में कोई बिना नहाए धोए कदम भी रखे।

और फिर डॉली ,वह भला काकी के खिलाफ कभी जा सकती थी ,थोड़ी देर में डॉली भी पूजा करके आ गई थी ,खाने की खुशबू की महक पूरे घर में फैल रही थी ,अब तक मिक्स वेज ,कड़ाही पनीर दाल चावल, पुलाव ,खीर ,और हलवा सब कुछ बनाया जा चुका था ।

डॉली ने सुमन से कहा ,सुमन जल्दी से पूरियां तल दे ,तो सबसे पहले मैं कान्हा जी का भोग लगा दूँ ,,,दीदी कचोरियां भी टलनी है

सुमन ,तुझे याद नहीं रहता ,कान्हा जी को प्याज के खाने का भोग नहीं लगाया जाता ।

कचोरी हम बाद में तल लेंगे ,पहले तू पूरी निलाक दे,

मैंने थाली लगा ली है।

सुमन ने जल्दी से छोटी-छोटी चार पूरियां निकाल कर डॉली को दे दीं।

डॉली ने कान्हा जी के प्रसाद की थाली में पुरिया रखते हुए, एक बार फिर से जल का लोटा भरा ,और कान्हा जी का प्रसाद लगाने चली गई ।

अब तक सारा इंतजाम हो चुका था दोपहर के 100 बज गए थे, विकास और पूनम बस आने ही वाले थे ।

कहने को तो दोपहर के 100 बज गए थे ।

पर फरवरी का महीना था ,तो दिन भी काफी छोटी होते थे ,लेकिन हां इस समय की धूप अच्छी लग रही थी।

सारा काम हो गया ,तो डॉली ने गाउन चेंज करते हुए एक हल्का सा सूट ,और दुपट्टा पहन लिया था ।

राजनी अब तक ऊपर ही थी , डॉली ने नीचे से ही राजनी को आवाज लगाई राजनी तूने नहाया ,कि नहीं

कि अभी भी अपनी पढ़ाई में लगी है ।

इतना ही कहा ,कि राजनी फटाफट सीढियों से उतरती हुई नीचे आ गई।

मम्मा,,,,,राजनी ने घुटनों तक की एक फुल स्लीव्स फ्रॉक पहनी हुई थी।

जो काफी स्टाइलिश थी, उसके धुले हुए बाल इधर से उधर उड़ रहे थे ,और काले घुंघराले बालों में उसका चेहरा और भी खूबसूरत नजर आ रहा था ,डॉली ने एक नजर ऊपर से नीचे तक डाली, और कहा राजनी अभी मौसम इतना भी गरम नहीं है, कि तू एक हल्का सा

स्वेटर ना डाल पाए। बेटा एक पतला स्वेटर पहन ले

यह ठंड लग जाती है ,राजनी ने लापरवाही से डॉली की बात को इग्नोर करते हुए ,डॉली के गले में बाहें डाल दी,और कहने लगी, मम्मा मुझे ठंड नहीं लगेगी ,,,,रैयली आज मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

वेदर देखो ना, आपने देखा अभी दोपहर के 100 बजे हैं, 25 टेंपरेचर ! भला इस में ठंड कैसे लग सकती है

और फिर आप ही ने कहा ना, कि शैलेश आने वाला है ,तुम अच्छे से तैयार हो जाओ ,तो इसलिए मैंने स्वेटर नहीं पहना और अपनी ही बात पर खिलखिला कर हंसदी,,,,,,

डॉली ने घड़ी पर निगाह डालते हुए फोन उठाया ,और पूनम को फोन करने लगी पहली ही बैल में पूनम ने फोन उठा लिया हां डॉली बोल ! अरे क्या बोलूं ,तुम लोग अभी तक आए नहीं ,हम कब से वेट कर रहे हैं ,और अब तो मुझे भूख भी लगने लगी।

हम लोग रास्ते में हैं ,बस 10 मिनट के अंदर ही तुम्हारे घर के अंदर होंगे ।

ठीक है फिर जल्दी आ जा मैं खाना लगवाती हूं ,और सबसे पहले आकर खाना ही खाएंगे ।

उसके बाद कोई दूसरी बात होगी ,हां ठीक है मैडम जी तू खाना रेडी कर हम बस पहुंचते हैं।

डॉली ने सुमन और पिंकी से टेबल पर खाना लगाने के लिए कहा, और राजनी का हाथ पकड़कर ,खींचते हुए उसे गार्डन में ले आई ,राजनी जब तक वो लोग आ रहे हैं ,तब तक धूप में खड़ी हो जा ,तेरे बाल भी हल्के

हल्के गीले है।

सूख जाने देना अच्छे से ,राजनी कुछ कहती ,इससे पहले डॉली ने कस के उसके हाथ पर पकड़ बना रखी थी।

और गार्डन में पास ही लगी बेंच पर जबरदस्ती उसको अपने पास बैठा लिया उसके बालों में हाथ फिरा कर देखने लगी,,,,,, कितने अच्छे लग रहे हैं,तेरे बाल ।

सच में बिल्कुल रेशम की तरह चमक रहे है, तेल की अच्छी तरह से मसाज करने पर एक ही दिन में फर्क पड़ जाता है ।

तेरे बाल,,,,, राजनी डॉली में कुछ और बातें होती, तब तक विकास पूनम गौरी और शैलेश को साथ लेकर गार्डन के अंदर आ चुके थे ।

राजनी ने जैसे ही देखा ,दौड़कर जाकर पूनम के गले लग गई ,,,,

पूनम ने भी राजनी को कस के गले लगाया ,और उसका चेहरा अपने हाथों में लेते हुए कहा ,राजनी डॉली सच ही कह रही थी ,सच में तू पहले से बहुत दुबली लग रही है, ठीक से खाती क्यों नहीं

पूनम कुछ और कहती इससे पहले गौरी भी आकर राजनी के गले लग गई ,दीदी मैंने आपको कितना मिस किया है ।

पिछले 1 महीने से तो आप हमारे घर पर भी नहीं आई ,हां गौरी सच में मैं बहुत बिजी थी ,यहां काकी भी मुझसे बहुत गुस्सा है ,और वहां तू भी मुझसे गुस्सा है। अब तक शैलेश प्यार भरी निगाहों से राजनी को देखे

जा रहा था ।

सब से मिलने के बाद राजनी मुस्कुराती हुई धीरे से शैलेश के पास गई, और बोली मिस्टर चिपकू आप भी तो कुछ कहिए! आपको तो जरूर में मोटी ही दिखूंगी । आप कभी कह ही नहीं सकते, कि मैं पतली हो गई हूं ,,,,हां मोटू तू हमेशा मोटी ही रहेगी, जैसी बचपन में थी गोल मटोल ,,,मोटू,,,,,

मम्मा देखो ना ,,,राजनी ने चिढ़ते हुए कहा ,,,,,

पूनम ने धीरे से शैलेश को एक चपत लगाई ,और उसे डांटने लगी,,,,

शैलेश! खबरदार जो मेरी राजनी को मोटू कहा ,देख ना वह कितनी पतली हो गई है ।

मैं तो कहती हूं उसे अपना थोड़ा सा वेट बढ़ाना चाहिए।

मैं ठीक हूं! पूनम आंटी प्लीज मैंने कितनी मुश्किल से अपना वेट कंट्रोल किया है , अब मुझे दोबारा मोटी नहीं होंना,,,,,,

ठीक है मत होना,,,,,

बातें चल रही थी, कि डॉली ने पूनम का हाथ पकड़ते हुए कहा ,अब अंदर भी चले लंच टेबल पर लग गया होगा ,और अब मुझसे और कंट्रोल नहीं हो रहा ,,,

और काकी को तू जानती है ना ,जब तक तुम लोग नहीं आ जाते ,तब वह एक और भी नहीं खाएगी ,वह तो बड़ी मुश्किल से मना कर मैंने उन्हें नाश्ते में थोड़ी सा दलिया खिला कर दवाई दे दी थी ।

वरना अभी तक तो दवाई के लिए भी बैठी रहती, इतना कहने के साथ ही शैलेश ,डॉली, पूनम, और गौरी

जल्दी से घर के अंदर आ गए।

राजनी जानबूझकर सबसे पीछे रुक गई थी ,जब उसने देखा, कि चारों लोग घर के अंदर जा चुके हैं ।

तो वह जल्दी से विकास के पास गई ,और कुछ बातें करने लगी ।

विकास डॉली की बातों का जवाब देते जा रहा था । दोनों जानबूझकर एक-एक कदम बढ़ाते हुए घर के अंदर आ रहे थे। क्योंकि उनके बीच कुछ जरूरी बातें हो रही थी ,शायद कुछ ऐसी बातें ,जो किसी को भी पता नहीं थी ।

जब राजनी ने देखा ,कि वह घर के अंदर ही आने वाले हैं ,तो उसने मुस्कुराकर कहा ,थैंक यू सो मच अंकल ,अगर आपका साथ रहा ,तो सब कुछ बहुत जल्द पॉसिबल हो पाएगा ।

विकास ने राजनी के सिर पर हाथ रखते हुये कहा, राजनी बेटा मैं हमेशा आपके साथ हूं ।

आपको जब भी मेरी जरूरत होगी, आप मुझे अपने सामने खड़ा पाओगी,और हां मैंने तुम्हें कुछ पेपर्स दिए थे ,उसके बारे में एक बार अच्छे से स्टडी कर लेना, क्योंकि मुझे वह फाइल आगे बढ़ानी होगी जी अंकल ! वैसे वह फाइल मैंने देख ली है, और अगर आपको ठीक लग रही हो तो इट्स ओके, मुझे तो ठीक ही लगी और दोनो ,अंदर आकर टेबल पर लंच करने बैठ गए थे ।

लंच टेबल पर भी शैलेश राजनी को चिढ़ाने से बाज नहीं आ रहा था।

कभी कुछ कहता ,तो कभी कुछ, सबकी नजर बचाते

हुए राजनी कभी शैलेश के पैर पर अपना पैर दे मारती, और कभी धीरे से उसे चिकोटि काट लेती,,,,

राजनी ने धीरे से कहा मिस्टर चिपकू तुम कभी सुधरोगे नहीं ,,,,,

सबके बीच लंच करते हुए बातें भी होती जा रही थी ,और जो सबसे मेन मुद्दा था वह यही था ,के एग्जाम के बाद राजनी के एम एस की क्या प्लानिंग है ।

एमएस के लिए शैलेश ने भी इस साल ड्राप लेकर तैयारी कर रहा था ।

और वह पूरी मेहनत से पढ़ाई कर रहा था तो बस इसी को लेकर सबके बीच बातें शुरू हो गई,,,,,,,,,,,,

( पार्ट-5 )

PG, की प्लानिंग

डॉली का यही मन था ,ms के लिए राजनी और शैलेश दोनों को एक ही कॉलेज एडमिशन मिल जाए ,तो कितना अच्छा होगा ,उसे राजनी की चिंता भी नहीं रहेगी ,फिर जब शैलेश उसके साथ रहेगा ,तो राजनी को भी हर तरह से हेल्प मिलती रहेगी।

लंबी बातें करने के बाद ,सब लोग इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे ,कि MS की तैयारी के लिए राजनी को शहर में ही रहना चाहिए ,वो और शैलेश एक साथ पढ़ाई करेंगे ,तो तैयारी करना आसान हो जाएगा ,जैसे ही यह बात निकली ,,,साथ में गौरी भी बोल पड़ी, मां राजनी दीदी हमारे साथ रहेंगी तो कितना अच्छा लगेगा

में और दीदी मेरे रूम में !

हम दोनों साथ साथ रहेंगे, कितना मजा आएगा ,,,,,

गौरी की इस बात पर पूनम डॉली की तरफ देखने लगी, डॉली ने सबको खीर परोसेते हुए कहा ,,,,,,

पूनम इस बात के लिए मुझे थोड़ा वक्त चाहिए ,अभी तो राजनी के फाइनल एग्जाम मै भी 3 महीने बाकि है,तब तक इस बारे में,में काकी से भी बात करूंगी ,और

उसके बाद ही मैं कोई जवाब दे पाऊँगी,,, क्या फर्क पड़ता है राजनी तुम्हारे साथ रहे ,या आसपास कहीं pg में ,,,,तैयारी तो उसे शैलेस के साथ ही करनी है ।

इस तरह शादी के पहले तेरे यहाँ घर पर रहना ,कुछ अजीब लग रहा है।

पूनम ने भी कहा ,डॉली तुझे जैसा ठीक लगे,, तू समझ के बता देना ।

पर जरा जल्दी ही, डिसीजन ले लेना । क्योंकि 10 महीने बाद ही, ms का एग्जाम होने वाला है।

और मैं चाहती हूं ,इस एग्जाम में तो दोनों को निकल ही जाना चाहिए।

हमारे पास इतना समय नहीं है, कि ज़रा भी टाइम भी वेस्ट किया जाए।

इस बार राजनी जरा सीरियस हो गई थी ।

मम्मा मैं तो कह रही हूं ,,,पूनम आन्टी अभी से मेरे लिए अच्छा सा pg देख ही लें।

जो आंटी के घर के पास ही हो,

तो आने-जाने में भी प्रॉब्लम नही होगी सच बात है, अगर पढ़ाई शुरु करना है

तो फिर देर करना ठीक नही है ।

राजनी,,,, पहले लंच कर लो, एक बार काकी दादी से बात करके, हम भी डिसीजन ले लेते हैं।

Ok मॉम,,, कहते हुए सब लोग लंच करने लगे ।

लंच के बाद राजनी ,शैलेश, और गौरी ऊपर के रूम में चले गए थे ।

और पिंकी भी उनके पीछे पीछे ऊपर पहुंच गई,,,

डॉली,,, पूनम और विकास के साथ नीचे ही बैठी थी।

दोनों के बीच एक बार फिर से राजनी के रहने को लेकर बातें होने लगी।

डॉली ने साफ स्पष्ट शब्दों में कह दिया था,,,, कि पूनम, शायद राजनी का तुम्हारे साथ रहना ,काकी दादी को पसंद ना आये, इसलिए तुम अपने घर के पास ही उसके लिए कोई अच्छा सा pg देख लो ,,,ज़िम्मेदारी तो सारी तुम्हारी ही रहेगी राजनी की जिम्मेदारी !

तुम्हारे पास छोड़ रही हूँ उसे,,,, पूनम ने भी डॉली का हाथ, अपने हाथ में लेकर कहा तुम्हें कहने की जरूरत नहीं है डॉली,,,,राजनी मेरी ही है।

मैं उसका पूरा ध्यान रखूँगी, उनके बीच बातें चलती रहीं।

इसी बीच काकी भी वहाँ पर आ गई।

और डॉली ने काफी को भी राजनी के बारे में सब कुछ बता दिया ,काकी तो जानती ही थी,,, कि राजनी को पढ़ने शहर जाना है ।

उन्होंने भी अपनी हामी भर दी।

उन्हें भी विकास पूनम पर पूरा भरोसा था रात को विकास पूनम को निकालना था। राजनी ने कहा दिया था कि जब तक उसके फाइनल एग्जाम खत्म होंगे ,तब तक आँटी उसके लिए कोई pg भी देख लेगी।

यह सारी बातें सबके बीच हो चुकी थी। रात 800 बजे तक विकास पूनम जा चुके थे।

डॉली काकी और राजनी के बीच एक बार फिर से अपनी बातें होने लगी थी। काकी ने राजनी को

समझाते हुए कहा राजनी तू शहर पढ़ने तो जा रही है।

पर मुझसे वादा कर अपनी सेहत का ठीक से ध्यान रखेगी।

और पूनम विकास जो कहेंगे वो करेगी।

हां काकी दादी अंकल जैसा कहेंगे मैं वैसा करुंगी ,डोंट वरी,,,,मम्मा आप एक काम कीजिए, काफी दादी को मेरे साथ ही भेज दीजिए।

ये मेरी मालिश करती रहेगी ,अपने हाथों से मुझे खिलाती रहेगी ,तो इनकी चिंता भी दूर हो जाएगी,,,,,

डॉली हस पड़ी, हां और तेरी चिंता करते करते काकी दादी खुद बीमार पड़ जाएंगी तू अपना ध्यान रख ले इतना ही काफी है।

दादी का क्या खास रखेगी

मम्मा पक्का में दादी का ध्यान रख लूँगी उनको टाइम पर दवाइयां देना, उनको खाना खिलाना ,हां यही करती रहेगी

और पढ़ाई पढ़ाई कब करेगी ।

हां मम्मा यह तो मैंने सोचा ही नहीं

लेकिन जब 2 साल बाद मैं अपना MS कम्प्लीट कर लूँगी , तब डेफिनेटली काकी दादी को अपने साथ ही रखूंगी और अच्छे से उनका ध्यान भी रखूँगी तब काकी भी बीच में बोल पड़ी।

रहने से 2 साल बाद तू पढ़ाई खत्म करके शैलेश के साथ शादी कर ले

और अपनी गृहस्थी बसा ले ,मेरे लिए इतना ही काफी है, मेरा ध्यान रखने के लिए तेरी मां है ,अब तो बस मेरी

बूढ़ी आंखें तेरी गृहस्थी बसते देखना चाहती हैं और एक छोटा सा नन्ना मुन्ना तेरी गोद में देखना चाहती हे।

इससे ज्यादा तो मेरी कोई इच्छा नहीं रही ।

काकी दादी अब फिर उसी बात को लेकर बैठ गई ।
 
मैंने कहा ना, कि जैसे ही मेरी पढ़ाई पूरी होती है ,आपको ये सब कुछ मिल जाएगा ।

लेकिन उससे पहले नहीं ,हां ठीक है बेटा तभी तो मैं कह रही हूं, कि तू मन लगाकर अपनी पढ़ाई कर ,और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे।

बातें करते हुए रात के 1000 बज चुके थे ।

डॉली हमेशा टाइम पर ही सो जाती थी और काकी को भी दवाई खिला कर टाइम पर ही सुला देती थी।

डॉली ने राजनी से भी कहा!

राजनी बेटा अब तुम्हें ऊपर जाना चाहिए ,अगर काकी दादी से इसी तरह बातें करती रही ,तो वह बीमार पड़ जाएंगी,,, हां मामा मैं जा ही रही हूँ।

गुड नाईट काकी दादी,,, गुड नाईट मम्मा राजनी में दोनों के गले के बाहे डालते होगे गुड नाईट किया ,और ऊपर चली गई ।

जैसे ही राजनी ऊपर गई कि पिंकी भी फटाफट काम समेटते हुए उसके पीछे ऊपर चली गई,,,,,,

दूसरे दिन सुबह डॉली तो हमेशा की तरह 600 बजे उठ गई थी ।

उसने अपनी दिनचर्या के अनुसार गार्डन के फूलों में पानी दिया, थोड़ी देरी योग प्राणायाम किया, और फिर अंदर आकर सबके लिए चाय भी बनने रख दी।

आज भी संडे था, तो ऑफिस जाने की कोई जल्दी नहीं थी ,डॉली ने जैसे ही काकी को आवाज़ लगाई ,कि तब तक पिंकी नीचे आ चुकी थी ।

डॉली ने कहा ,पिंकी मैंने चाय बनने रख दी है ,तू काकी दादी को उठा दे ,,,,

मैं भी राजनी को उठाने जाती हूं ।

तभी पिंकी ने रोकते हुए कहा ।

नहीं आँटी राजनी दीदी ने मना किया है कि उन्हें 10 बजे से पहले मत उठाना, क्योंकि रात को 400 बजे तक उन्होंने पढ़ाई की है ।

और उसके बाद ही सोई है।

सीढ़ियों पर जाते हुए डॉली के कदम वापस हॉल में आ गए ।

उसने कहा ,मैं जानती थी एग्जाम में अभी 3 महीने बाकि है ,कि ms की तैयारी करने के लिए यह लड़की अभी से सोचने लगी है ,,,,,सोने दे उसे, और तू भी मत उठाना,,,,,,

जी आंटी जी ,मैं ऊपर नहीं जाऊंगी ,,,,

सब लोग नीचे चाय पी चुके थे । साफ-सफाई डॉली ने कल ही कर ली थी तो आज कोई खास काम नहीं थे ।

बस आज तो उसे राजनी के साथ शहर जाने की तैयारियां ही लगानी थी ,क्योंकि एक बार फिर वह शहर जाकर फाइनल एग्जाम की पढ़ाई करने वाली थी।

छोटे-मोटे काम करते हुए 1100 बज चुके थे ,डॉली ने अब तो राजनी को उठाना ही ठीक समझा ,पिंकी नीचे नाश्ते की तैयारी कर रही थी ,काकी tv पर भजन सुन

रही थी ।

और डॉली राजनी को उठाने ऊपर चली गई ,,,ऊपर गई ,तो सीढ़ियों से ही डॉली के कानों में उसी गाने की लाइने सुनाई दी जो राजनी हमेशा सुनती रहती थी।

जब भी वह यहां आती, अपना फेवरेट सॉन्ग हमेशा सुनती थी ,,,,,

रोते रोते हंसना सीखो

हंसते हँसते रोना

जितनी चाबी भरी राम ने

उतना चले खिलौना ,,,,,,

रोते-रोते हंसना सीखो

हंसते हंसते रोना,,,,,,,,

डॉली धीरे-धीरे एक एक कदम ऊपर की तरफ़ बढ़ा रही थी ,जब उसने कमरे में जाना चाहा ,और दरवाजा खटखटाया तो देखा कि दरवाजा खुला ही है।

बह अंदर पहुंच गई,,,,जहाँ राजनी बिस्तर में उल्टी पड़ी हुई ,,,म्यूज़िक सिस्टम पर यह गाना सुन रही थी।

डॉली धीरे से उसके पास आकर बैठ गई और उसके बालों में अपनी उंगलियां घुमाने लगी, तब राजनी ने पलट कर देखा ,कि डॉली उसके सिरहाने बैठी है ,तो जल्दी से डॉली की गोद मे अपना सिर रख लिया ,औऱ कस के डॉली को पकड़ लिया ।

बहुत देर तक मां बेटी के बीच कुछ मौन बातें होती रही, दोनो ही समझ रही थी कि वह एक दूसरे से क्या कहना चाहती है ,और गाना एक बार खत्म होकर

ऑटोमेटिक दोबारा फिर शुरू हो गया था।

डॉली ने धीरे से म्यूज़िक सिस्टम ऑफ किया ,और राजनी की आंखों में देखकर कहने लगी ,राजनी मैं तुझसे यह नहीं कहूंगी ,तू यह सॉन्ग मत सुन क्योंकि यह तेरा और तेरे डैड का सबसे फेवरेट सॉन्ग है,,,,,

हां मम्मा मेरी और डैड की कितनी सारी बातें सेम है ना, हम दोनों का फेवरेट सॉन्ग एक ,हम दोनों का टेस्ट भी सेम हम दोनो ही हमेशा ब्रांडेड कपड़े पहनते हैं ,और सब लोग कहते हैं मैं बिल्कुल अपने डैड की बेटी लगती हूँ।

मम्मा आपको याद है ,जब आपका मेरा मूड खराब होता था ,तो डैड हम दोनों को कहां ले जाते थे,,,,

डॉली ने मुस्कुराते हुए कहा।

कैसे भूल सकती हूं,,,,,उसी तालाब पर उसी नाव में , जिस में बैठकर तुझे घूमना बहुत अच्छा लगता था ।

हां मम्मा डैड की तरह मेरी भी वो सबसे फेबरेट जगह थी।

इसी तरह बात करते हुए राजनी ने धीरे से कहा ,,,,

मेरा और डैड का सपना भी तो एक है।

राजनी तुम मुझे अपना सपना बताती क्यों नहीं

मम्मा क्योंकि मेरा और डैड का सीक्रेट है और में आपको ये सीक्रेट नही बता सकती ,,,,,, अच्छा ठीक है मत बताओ इसी तरह बातें करते हुए ,राजनी ने एक बार फिर से डॉली की गोद में अपना सिर रख लिया।

राजनी के सिर पर हाथ फिराते हुये डॉली के सामने सालों पुरानी यादें एक बार फिर से ताजा हो गई,,,,,,,,,

एक बार फिर से डॉली अपने अतीत में पहुंच चुकी थी।

26 साल पहले

डॉली की शादी के दूसरे दिन की सुबह,,, डॉली तो हमेशा की तरह कैसे भी सुबह 600 बजे उठ गई ,और राज के मना करने के बाद भी ,वह जल्दी से अपनी साड़ी और अपने बालों को ठीक करते हुए ,बाहर आ गई ,,,,

जहां पर अभी भी पडौस के 4,6 लोग रुके हुये थे।

काकी और राज का रिश्तेदार तो कोई था नहीं , तो मोहल्ले के 4,6 भाभियों और अपनी सहेलियों को काकी ने अपने यहाँ रोक लिया था ।

क्योंकि आज भी डॉली और राज के बहुत सारे रस्मो रिवाज होने बाकी थे।

डॉली बाहर आ चुकी थी ,काकी ने डॉली को देखा तो डॉली ने निगाहे झुका लीं।

और मुस्कुराती हुई रसोई की तरफ बढ़ गई ,उसने रसोई में से ही काकी से कहा काकी, मैं चाय बनने रखती हूँ।

बेटा तू यह सब काम रहने दे, पहले तो तू जाकर नहा धो ले ,भले ही तू इस घर में पिछले 5 साल से रह रही है, लेकिन एक बहू होने के नाते ,तेरी इस घर में पहली सुबह है,कुछ मीठा बनाने का नेग करना ही, हमारे आस पास जो बड़े बूढ़े है,उनको अपने हाथ का बना कुछ मीठा खिला देना ।

सगुन तो पूरे करने ही होंगे, जी कहते हुए डॉली नहाने

चली गई।

नहा-धोकर आई ,तो रसोई में देखा कि काकी ने रसोई को पहले से ही साफ सुथरा करके रखा था ।

क्योंकि कान्हा जी का प्रसाद जो बनने वाला था ।

डॉली ने हलुआ ,खीर ,राज की पसंद की मिर्ची की पकौड़ी ,,सभी कुछ बना लिया था।

वह एक बहु होने के सारे फर्ज निभा रही थी । और बहुत खुश थी।

काकी जैसा उससे कहा रही थी ,वह बैसा करती जाती,,,,

अब तक 900 बज चुके थे ।

काकी ने डॉली से राज को उठाने के लिए भी कहा !

बेटा राज को भी उठा ले ,और तुम दोनों एक साथ जाकर कान्हा जी का प्रसाद लगाना ,और हां उसके बाद मंदिर जाकर हमें कथा भी करवानी है ,और भी कुछ रस्में है ,जो हम आज ही पूरी कर लेंगे क्योंकि उसके बाद कल तो,,,,

काकी कल क्या

मुझे ना पता राज कुछ कह रहा था,,

अब बेटा तू ही पूछना क्या कह रहा था डॉली सोचती रह गई ,कि अभी तो मेरी 8 दिन की छुट्टीयां और है ,उसके बाद ही में सुपरवाइजर की ड्यूटी जॉइन करूगी।

तो फिर कल क्या करना है खैर ,,,,

वह राज को उठाने उसके रुम में चली गई ,जब देखा तो राज तो हमेशा की तरह आराम से उल्टा पड़ा सो

रहा था

जब डॉली ने उठाना चाहा ,तो उसके कान पे तो जूं ही नहीं रेग रही थी।

डॉली ने धीरे से राज का कंधा पकड़कर हिलाते हुए कहा !

राज उठ जाइये हमें कान्हा जी का प्रसाद लगाना है ।

और मैं प्रसाद बनाकर भी रख आई हूं जैसे ही डॉली राज के करीब आई ,तो राज ने कस के डॉली को अपनी बाहों में भर लिया ,और मुस्कुराता हुआ बोला सहजादी तुझे क्या लगता ,,,अपुन सोया है,,,,,,,

अरे अपुन तेरे कमरे में से जाने के साथ ही उठ गया था ।

और अपुन को पता था ,कि डेफिनेटली तू उठाने आएगी ,और बस मे इसी बात का इंतजार कर रहा था ।

डॉली ने शर्माते हुये कहा,,, अच्छा जी अब आपका इंतजार खत्म हो गया,,, उठ कर नहा लीजिए और फिर हमें कान्हा जी को प्रसाद लगाने के बाद ,मंदिर भी जाना है ,काकी ने कहा है,,,,,

राज किसी अच्छे बच्चे की तरह नहा धोकर सफेद कुर्ता पजामा पहने हुए काकी के सामने आ गया था ,और काकी भी राज को देख कर खुश हो गई, इतना प्यारा लग रहा है मेरा बच्चा ।

तुझे नजर ना लगे किसी की ,काकी राज को निहार ही रही थी, कि तभी डॉली भी अपने कमरे से तैयार होकर बाहर आ गई पीले रंग की खूबसूरत सी चुन्नी प्रिंट की साड़ी, जिस पर बहुत ही खूबसूरत ज़री की लेस लगी हुई थी, उस पर रेड ब्लाउज कानों में झुमके, और एक बहू होने के नाते सिर पर पल्ला, डॉली के चेहरे पर खुशी तो बहुत थी ,लेकिन उसके साथ साथ शर्म उससे भी ज्यादा।

जहां तक अभी वह एक बेनाम रिश्ते के साथ 5 साल से इस घर में रह रही थी। वही अब राज की पत्नी बनने का गौरव उसे मिला था ,जो पिछले कई महीनों से उसका सपना था ,और आज जब बह राज को पूरी तरह से पा चुकी थी, तो एक मिली जुली फीलिंग उसके पूरे अस्तित्व पर दिख रही थी ।

चाहे वह उसका तन हो या उसका मन मोहल्ले की

भाभी और बहने आंखों ही आंखों में डॉली से हजार तरह के सवाल कर नहीं थी। वह जान लेना चाहती थी डॉली और राज के मिलन की रात के बारे में ,और डॉली उन्हें इशरी में चुप रहने के लिए कह रही थी ,क्योंकि उनके साथ साथ काकी और भी बड़े लोगों की निगाहें डॉली और राज पर थी, जब से दोनों की लव स्टोरी सबके सामने आई थी।

सब बड़े ही गौर से डॉली और राज के बारे में सब कुछ जान लेना चाहते थे। काकी के साथ जब राज की निगाहे डॉली पर गई, तो वह भी अपनी निगाहे उस पर से हटा नहीं पा रहा था ।

बार-बार घूम फिर के डॉली को ही देखने लगता। काकी का सपना आज पूरा हो रहा था, डॉली आज उनके आंगन में राज की नई नवेली दुल्हन बनकर आ गई थी ,पैरों में मेहंदी ,महावर, पायल बिछुडे साथ छम छम करती हुई पूरे घर में घूम रही थी।

उसकी पायल के घुघरुओ की मधुर ध्वनि पूरे घर में एक पॉजिटिव एनर्जी का संचार कर रही थी ।

वह काकी से पूछते हुए मंदिर जाने के लिए पूजा की थाली लगाने में व्यस्त थी और वही राज इस फिराक में, कि वह डॉली को एक पल के लिए भी अपनी आंखों से दूर ना होने दे।

जब उसने देखा कि काकी किसी से बात करने में व्यस्त हो गई है ,तो जल्दी से डॉली के पीछे रसोई में चला गया ,जहां पर डॉली क प्रसाद की थाली कान्हा जी के लिए लगा रही थी।

जब वह डॉली के पास पहुंचा, तो एक नज़र दरवाजे पर डाली ,और झट से डॉली को बाहों में ले लिया,,,,,

शहज़ादी तू ना अपुन को कुछ अलग रही है, वो क्या कहते हैं, इस घर की मालकिन और अपन को डिट्टो वही वाली फीलिंग आ रही है, जैसी फिल्मों में आती है!!!!

डॉली ने थाली लगाते हुए मुस्कुराकर कर कहा कैसी वाली

शहज़ादी वो शादी हो जाती है, तो फिर वो आती है ना वह अपनी बीवी की सारी बात मानता है, उसे उस को क्या कहते हैं

,,,,, हां जोरू का गुलाम अब तो तू अपन को भाव ही नहीं दे रही ,अपन साला कब से तेरे आगे पीछे घूमता है ,कि तू मुझसे बात कर ले,,, पर तू,,,,तू,,, अपने काम में ही बिजी है,,,, अब तेरे अंदर ना ,कोई डर नहीं दिख रहा आपने वास्ते ,,,,

तू एक बात बता ,तू भी अपन को जोरु का गुलाम तो नहीं बना लेगी

डॉली ने हंसते हुए कहा, राज पहले आप खुद से पूछिए, क्या आप जोरू का गुलाम बनना चाहते हैं

यह सब अपन को नहीं पता, पर इसका डेफिनेटली मीनिंग क्या होता है

पहले तू यह बता ,,,,

राज इसका सीधा सा मतलब होता है जो अपनी बीवी की सारी बातें मानता हो लोग उसको जोरू का गुलाम कहने लगते हैं। बस इससे ज्यादा और कुछ नहीं ,और

बताइए कि आप मेरी बातें मानेगे कि नहीं महारानी तू यह घुमा फिरा के क्या बोल गई है, सीधा बोल ना, कि तू भी अपुन को जोरू का गुलाम बनाने का सोच रही है। डॉली ने जोर से खिलखिलाते हुये कहा,राज अभी तो हमारी शादी को एक ही दिन हुआ है, और आप इतना डरने लगे, तो आगे क्या होगा

अच्छा ठीक है अगर आप मेरी बात नहीं मानोगे ,तो मैं आपकी सारी बातें मान लूँगी, और पहली बार होगा सब कोई बीबी अपने शौहर की गुलाम बन जाएगी अब खुश

राज ने डॉली को एक बार फिर से अपनी बाहों में भर लिया,,,,,,

नहीं शहज़ादी पहले वाला ही ठीक है

वह जोरु का गुलाम,,,,,

देख तूने अपुन के वास्ते वो शर्त रखी अपन ने पूरी की ,,,,,,

अपन तेरी शर्त नहीं मानता, तो अपुन को वो वाली फीलिग़ कहां से आती

और तूने अपन से प्यार करने वाली बात कही थी, वो भी सही थी ,अगर तू नहीं कहती ,तो क्या आज तू मेरे पास होती

तो यह भी ठीक, और तीसरी बात तू 5 साल पहले अपुन के घर में आई, अपन के घर का सारा नक्शा ही पलट दिया और अपना घर ,घर लगने लगा ,पहले तो साल कबूतर खाना लगता था ।

यहां सामान वहां ,वहाँ का यहाँ,,,

तो तेरी यह बात भी सही,,,और चौथी,,,,,, डॉली ने बीच में रोकते हुए कहा,,, राज बाकी बातें बाद में पहले चलकर कान्हा जी को प्रसाद लगा देते हैं हां तो चलना,,,तू भी पता नहीं घंटे भर से क्या कर रही है ,,,,

पर सुन पहली वाली बात ही सही है।

अगर तू शौहर की गुलाम बन गई ना, तो साला सब उल्टा पुल्टा हो जाएगा ।

अपन जो कहेगा तू मानेगी तो गड़बड़ मामला होगा, इसलिए अपुन तेरा कहना ही मानेगा, और तभी अपनी गाड़ी सही चलेगी ,इसलिए आज से अपुन

जोरू का गुलाम,,,,,
 
डॉली ने थाली पटे पर रखी और , राज की तरफ घूम कर राज का चेहरा अपने हाथों में लेते हुए कहा,,,,

राज मुझे आपको जोरू का गुलाम नहीं बनाना ,मैं तो आपके प्यार में डूब जाना चाहती हूं, हम दोनों ,,,हम दोनों, एक दूसरे के पूरक बनेगे, में हर कदम पर आपका साथ दूंगी,ठीक उसी तरह से जैसे आज तक बिना कहे, हर कदम पर आपने मेरा साथ दिया है।

डॉली ने दोनों पैर ऊपर करते हुए राज के माथे को चूमना चाहा,,,,

पर उसकी कोशिश बेकार गई,छोटी सी डॉली,,,,,, लंबे से राज तक कैसे पहुंच पाती,,, दो-तीन बार कोशिश करने के बाद भी, जब वह राज के माथे को नहीं चूम पाई,तो राज ने उसे अपनी बाहों में उठाते हुये ऊपर कर लिया ,और बोला महारानी अब तू अपना आइटम बिंदास अपन को दे दे ,जो तू देना चाहती है,डॉली ने

इधर-उधर देखते हुए राज के माथे को चूम लिया,,,,,

और जल्दी से नीचे खड़ी हो गई,,,,

तब तक काकी की आवाज आई ,,,राज डॉली,,,, अगर तुम लोगो की थाली लग गई हो ,तो जल्दी से बाहर आ जाओ।

डॉली थाली उठाते हुए जल्दी से बाहर आ गई,,,,पर ये क्या सब सिवा को ही देख कर हंस रहे थे।

राज ने भाभियों को डांटते हुये कहा ! क्या लगातार बेकार हंसते ही जा रहे हो अपुन क्या कोई जोकर है, जो इधर ही देखे जा रही हो,,,,,,

डॉली राज से आगे थी ,और उसने ठीक से राज को देखा ही नहीं,,,, कि डॉली के होठों की छाप, राज के माथे पर बन गई थी ।

और सब उसे ही देख रहे थे।

तभी एक भाभी ने छोटा सा सीसा उठा कर उसे राज के सामने कर दिया ,और उसमें डॉली के होंठो की लिपस्टिक के निशान अपने माथे पर राज को दिखे।

तब उसे समझ में आया, कि लोग क्यों उस पर हंस रहे थे ।

अरे ऐसा कुछ नहीं है,,,, जो तुम लोग समझ रही हो ना,,, वैसा कुछ नहीं है।

हां राज भैया तो कैसा है

अभी ये मत कहना ,कि डॉली की लिपस्टिक उठाके आपने अपने माथे पर लगा रखी है ,क्योंकि यह बात हजम होने वाली नही है, ,,राज ने झट से अपनी जेब से रुमाल निकाला ,और अपने माथे को साफ करते

हुए सबको डांटने लगा,,, तुम लोग भी न बस खुद को मत देखना अभी बोलूं क्या,,,,,

ठीक से पोल पट्टी खोलूँ क्या

यह बात सुनकर सच में सारी भाभियां डर गई ,,,,क्योंकि उन्हें पता था, कि यह राज है, किसी के सामने कुछ भी बोल सकते है ,,,और राज के ढावे से उनके हस्बैंड छुप-छुप के उनके लिए घर मे जो रबड़ी, रसगुल्ले ,और कचौड़ी ,समोसे अपने बीवीओ के लिए ले जाते थे।

वो किस्सा अभी तक किसी की सासोमाँ को पता नहीं था, और इससे सभी एक साथ ही चुप हो गई,,,,,,

काकी भी समझ गई थी, पर उसने बात संभालते हुए कहा,,,,

अब सभी दांत निकालना बंद करो, और जल्दी से मंदिर चलने की तैयारी लगाओ ,,,डॉली और राज कान्हा जी का प्रसाद लगा रहे है ।

बस इसके बाद ही हम मंदिर के लिए निकलेंगे,,, सत्यनारायण की कथा करवाने के लीये,,,,, हमें आज ही अपने सारे काम निपटाने होंगे ।

काकी के मुंह से एक बार फिर यह बात सुनकर ,कि आज ही सारे काम निपटाने होंगे ,,,,

डॉली सोच में पड़ गई,,, कि काकी को इतनी जल्दी क्यों हो रही है, मैं कहीं भाग थोड़ी ना रही हूं ,आराम से सब कुछ हो जाएगा ,,,,

राज डॉली ने कान्हा जी को साथ मे प्रसाद लगाया,,, और डॉली के लिए तो यह सबसे बड़ा दिन था ,उसने

जी भर के कान्हा जी को धन्यवाद दिया ,और अपने आने वाले जीवन के लिए आशीर्वाद मांगा जब कान्हा जी का प्रसाद लग चुका ,तो सभी मंदिर के लिए बाहर आ गए ।

राज डॉली , काकी और दो भाभियां कन्हैया के साथ , मंदिर जाने के लिए जीप में बैठ रहे थे ।

थोड़ी देर बाद सभी मंदिर पहुंच गए पंडित जी ,,,भी पहले से वहाँ पर आ चुके थे।

शादी के बाद मंदिर में हाथे लगाए गए और पूजा समाप्त करके ,,3,,4 घंटे बाद सब घर वापस घर आ चुके थे।

घर आकर सबसे पहले डॉली के हाथ से सबको मीठा परोसा गया ,,,और काकी के आने से पहले ही, घर पर खाना भी बन चुका था ।

तो डॉली ने सब को खाना भी परोसा और इस तरह डॉली के सारे रस्मों रिवाज संपन्न हो चुके थे ।

यह होते-होते शाम के 600 बज चुके थे। जेसे ही सब काम से फ्री हो गए ,

तो सब लोग अपने घर जा चुके थे। राज ने छोटू को बुलाकर ,फटाफट सारे घर की साफ-सफाई करवाई ,और काकी को भी आराम करने के लिए कह दिया।

अब घर में कोई भी नहीं था।

राज डॉली भी काफी थक चुके थे।

सब के जाने के बाद डॉली ने चाय बनाई और दोनों बाहर के कमरे में ही चाय पीने लगे।

तभी विकास का फोन आया ,,,डॉली ने फोन उठाया ,,,क्योंकि फोन डॉली के फोन पर आया था ।

तो विकास ने कहा डॉली ,,,राज भैया फोन क्यों नहीं उठा रहे।

कब से लगा रहा हूं ,,,डॉली ने राज की तरफ देखते हुए कहां ।

सिवा का फोन तो यही है ,पर शायद उसमें आपका फोन आया ही नहीं,, बताइए ना बात क्या है

सिवा मेरे पास ही बैठे हैं!

डॉली राज तुम्हारे पास ही है

हां विकास, सिवा मेरे सामने ही बैठे हैं। डॉली तुम्हारी सारी तैयारी हो चुकी है तैयारी ,,,,मतलब

तब तक पूनम ने विकास के हाथ से फोन लेते हुए कहा ,,,

विकास लगता है डॉली को कुछ पता नहीं है, आप मुझे फोन दीजिए,,,

मैं डॉली को सब कुछ अच्छे से समझा देती हूं ,और डॉली ने विकास से फोन लेकर कहा,,,, डॉली लगता है राज तुम्हें बहुत बड़ा सरप्राइस देना चाहते थे।

और इसलिये अभी तक उनने तुम्हें कुछ नहीं बताया,,,,

तो सुनो ,मैं तुम्हें बताती हूं,, हम चारों ही यानी कि मैं, विकास, तू और राज अपने हनीमून के लिए दार्जिलिंग जाने वाले हैं ।

अब भले ही राज तुम्हे सरप्राइस देना चाहते हो ,,पर अब तो तुम्हें बताना ही होगा ।

और तुम फटाफट अपनी पैकिंग कर लो मैं तो कबसे

अपनी पैकिंग कर भी कर चुकी हूं ।

डॉली शादी के लिए मैंने भी छुट्टी ली है और तुमने भी 8 दिन की छुट्टी ली है ।

तो इससे अच्छा मौका हमारे पास दूसरा नहीं था ,,,

तो हम चारों ही एक साथ दार्जिलिंग जाने वाले हैं ,,,,डॉली मैं तो सोच कार ही बहुत एक्साइटिड हूं ,,,सो रोमांटिक,,,,

कितना अच्छा होगा वहां का मौसम ,अरे तुझे पता है ,हम चारों वहां पर प्लेन से जाने वाले हैं ,एरोप्लेन से,,,,,

डॉली में पहली बार प्लेन में बैठ रही हूँ मुझे तो सोच कर ही बहुत अच्छा लग रहा है ।

कि जब हम बादलों के बीच उड़ेंगे तो कैसा लगेगा ,,,,

चल अपने तुझसे ज्यादा बात नहीं करती अब जल्दी तू अपनी और राज की पैकिंग कर ले,,,,,

और हां वहां पर ठंड बहुत है ,, तो कपड़े भी अच्छे से रख लेना, हम पूरे पूरे 8 दिनों के लिए वहां पर जाने वाले हैं।

डॉली अब मैं फोन रखती हूं ,तू फटाफट अपनी पैकिंग कर,,,,

हां पूनम ठीक है निली ने कहा और फोन रख दिया ,,,,डॉली को सच में इस बारे में कुछ भी पता नहीं था ।

उसने राज की गोद में बैठते हुए उसके गले में अपनी बाहें डाल दी।

अच्छा जी,,,, तो आप मुझे इतना बड़ा सरप्राइज देने

वाले थे।

कि हम हनीमून पर जा रहे हैं,,, मुझे बताया क्यों नहीं ,मेरी जगह किसी और को लेकर जाने वाले थे क्या,

अरे शहज़ादी अपुन सच में तेरे को सरप्राइस देने वाला था ,,,

और सुन!!! रही पैकिंग की बात तो वह अपन ने मस्त कर ली है ।

अच्छा आपने पैकिंग में किया क्या है

मेरे सारे कपड़े तो मेरे पास ही है ।

अरे तू वह सब छोड़,,, तू वहां पर यह साड़ी वाड़ी नही पहनेगी,,, अपुन तेरे वास्ते मस्त जीन्स, फ्रॉक ,और भी बहुत सारे कपड़े ले के आया हूं ।

वहां पर तू वही सब पहनेगी ,,,जैसे फिल्मों में पहनते हैं । वह मस्त-मस्त कपड़े पहनते हैं ,तो अपन वह सब तेरे वास्ते ले आया है ।

अपन तुझे बिल्कुल अलग रुप मे देखना चाहता है,,,,जैसा तुझे कभी नहीं देखा। ,,,,वैसा ,,,,

डॉली ने हंसते हुए कहा ,,,,

राज मुझे यकीन नहीं हो रहा ,कि आपने ये सब किया है ।

आप इतना अच्छा कैसे सोच सकते हैं

एक और सरप्राइज,,,, एक के बाद दूसरा और अब इतना बड़ा तीसरा ,,,

मैं बहुत खुश हूँ,,,

मुझे ना आप पर बहुत प्यार आ रहा है। अच्छा तो

बिंदास तू अपना प्यार अपुन को दे डाल ,,,,,अब तो कोई फटे में टांग अढ़ाने वाला भी नहीं है ।

ऐसा कहते हुए राज ने डॉली को अपने और करीब खींच लिया ,,,,

और कुछ देर बाद डॉली को अपने साथ कमरे में ले गया,,,,

और वहां पर उसे वह सारे कपड़े दिखाने लगा ,,,जो उसने डॉली के लिए खरीदे थे

डॉली कपड़ों को देखकर खुश तो बहुत हो गई ,,,,साथ ही उसे शर्म भी आ रही थी ।

राज मैंने कभी यह कपड़े पहने है क्या

मैं कैसे पहनूंगी ,,,,

और फिर विकास पूनम भी हमारे साथ होंगे ,,,,

अरे तो वह तो हमारे दोस्त है ना ।

तू वह सब छोड़ ,तू यही सब पहनेगी

और मैं तुझे इन कपड़ों में देखना चाहता हूं ।

देख शादी एक बार होती है ।

हनीमून भी एक ही बार होता है ।

महारानी तुझे नहीं लगता ,कि जैसे फिल्म में हीरो हीरोइन अच्छे-अच्छे कपड़े पहनते हैं ,,, अच्छी-अच्छी जगहों पर घूमने जाते हैं। फ़ोटो खिंचवाते है।

तो हम भी बैसा ही करे,,,,,

देख शादी हो गई,,,बच्चा पार्टी भी आ जाएगी ,,,फिर तू अपनी नौकरी में बिज़ी मैं अपने ढाबे में ,,,,फिर इन सबके लिए अपने पास टाइम भी नहीं रहेगा,,,,

इसलिए अभी जो करना है, बिंदास कर ले ,,,,,

ठीक है राज अगर आपको अच्छा लग रहा है ,तो ये सब मैं पहन लूँगी।

देर रात दोनों की पैकिंग हो चुकी थी। काकी को तो राज ने पहले से बता ही दिया था ।

इसलिए काकी सुबह जल्दी उठ गई ,और रास्ते के लिए अच्छे से नाश्ता-पानी भी बना के रख दिया था।

सुबह 800 बजे ही कन्हैया डॉली और राज को छोड़ने शहर जा रहा था । विकास और पूनम सीधे एयरपोर्ट पर ही मिलने वाले थे। दोपहर तक चारों एयरपोर्ट पर भी पहुंच चुके थे, बस कुछ देर बाद उनका प्लेन उड़ान भरने वाला था ।

आखिरकार वो सब एयरपोर्ट पहुच चुके और कुछ देर बाद ही,उनका विमान ऊंचे आसमान में उड़ने लगा ,,,,

राज डॉली आगे कि सीट पर और उससे ठीक दो सीट पीछे पूनम और विकास आंख में हाथ डाले हुए ,अपने हनीमून के बारे में सोच सोच कर खुश हो रहे थे।

यह मौका होता ही इतना खूबसूरत है कि सभी की जिंदगी में एक अच्छी याद बन के रह जाता है।

कुछ घंटो बाद सभी यहां से एक अलग मौसम ,दार्जिलिंग की हरी-भरी वादियों में थे ।

एयरपोर्ट से बाहर निकलकर इन्होंने टैक्सी की और अपने बुक किए गए रिसॉर्ट में पहुंच गए ।

वो भी काफी सुंदर था, एक छोटा सा रिसोर्ट था।

या कहिये कि एक रिसोर्ट में वन BHK के कुछ फ्लैट बने हुए थे ।

एक बैडरूम ,किचन ,आगे बालकनी और बालकनी से दिखती ऊँछी ऊंची हरी-भरी पहाड़िया ,,,

होटल पहुंचते-पहुंचते शाम के 700 बज चुके थे ।

बालकनी से देखा, तो चारों तरफ छाया हुआ कोहरा ,उसके बीच में चमकती मद्धम लाइट ,,,,इतना सुंदर वातावरण था ,जिसने मन को मोह लिया था ।

डॉली और राज बालकनी में खड़े होकर इस खूबसूरत से मौसम के नजारे ले रहे थे ।

जब ठंडी हवा का झोका आता ,तो डॉली से राज के सीने से लग जाती ।

और राज ने भी उसे अपनी बाहों में छुपा रखा था । इन खूबसूरत लम्हों में दोनों एक दूसरे के साथ का एहसास पूरी तरह से पा लेना चाहते थे ।

अपने कंधे पर डाले हुये शॉल से राज ने अच्छे से डॉली को भी ढक लिया था।

एक ही शॉल में लिपटे हुए दोनो काफी देर तक बाहर देखते रहे,,,,

सब कुछ उनके मन के अनुरुप था बिल्कुल उनके सपनों की दुनिया के जैसे कभी-कभी तो डॉली की आंखें नम हो जाती थी,,,, ये सोचते हुए,,,कि उसकी सौतेली मां का साया ,,और इतना बुरा वो समय ,जब उसकी मां और मामू उसे बेच देना चाहते थे।

फिर कैसे उसे राज और काकी का साथ मिला ,और राज ,काकी भगवान के रूप में मिले उसे ।

उन्होंने उसकी पूरी दुनिया ही बदल दी आज डॉली कामयाब है,,, तो सिर्फ राज की बजह से,,,,

अगर राज उसके जीवन में नही होता तो

लेकिन अब जब उसे इतनी सारी खुशियां मिल गई है ,,तो भी कभी कभी तो उसे डर लगने लगता है,,,कि उनकी खुशियों को कहीं किसी की नजर न लग जाए। उसने टच वुड करते हुए वहां लगी लकडी की रेलिंग को कसके अपने हाथ में पकड़ लिया।

जब राज ने आंखों में देख कर उससे सवाल किया ! तो डॉली बिना कुछ कहे और भी कस के राज के गले लग गई। राज कभी-कभी तो मुझे डर लगने लगता है ,कि मेरी खुशियों को किसी की नजर ना लग जाए ।

मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था ,,

कि मुझ जैसी अनाथ लड़की को इतनी खुशियां मिलेंगी,,,,

राज आप मुझसे वादा कीजिए, आप मुझसे जिंदगी में कभी नाराज नहीं होगे कभी मुझसे दूर नहीं जाएंगे।

ऐ,,,शहज़ादी तू ये क्या बोले जा रही है अपुन ऐसा क्यों करेगा

और सुन यह कोई सपना नहीं है।

यह सब कुछ सच है ,,,अच्छा अपुन तेरे को इस बात का बिलीव दिलाता है।

और सिवा ने कसके एक किस डॉली के गाल पर कर लिया,,,,

अब तो तेरे को पक्का यकीन हो गया होगा ,कि यह सब सच है,,,,

अब अंदर चल, बहुत ठंड हो रही है

नहीं राज मुझे अच्छा लग रहा है।

अभी चल ,,,मैं जानता हूं कि ठंड तुझसे सहन नहीं होती ।

कहीं बीमार पड़ गई ना ,तो वह काकी अलग अपुन की जान खा जाएगी,,,

तूने अपननी डॉली को बीमार कर दिया यह कहते हुए,राज ने डॉली को गोद में उठा लिया,,,और अंदर ले गया,,,,,,

वहाँ पूनम और विकास भी एक दूसरे के प्यार में डूबे हुए थे ।

सच में भगवान भी जोड़ियां ऊपर से बनाकर भेजता है,,, क्या होने वाला था और क्या हो गया ।

लेकिन जो हुआ, सब कुछ अच्छा ही हुआ ,,विकास पूनम एक दूसरे को दिल से पसंद करने लगे थे।

पूरे 8 दिनों तक चारों ने खूब घूमा,,
 
मस्ती की ,,सुंदर सुंदर फोटो क्लिक करवाएं ,,पैराशूट पर उड़ान भरी और डॉली ने राज की लाई हुई सारी ड्रेस पहनी जिसमें वह बहुत खूबसूरत ,और एक नए अंदाज में दिख रही थी ।

चारों ने ,8 दिनों के 24 घंटे एक दूसरे के साथ प्यार में डूब कर बिताए थे ।

एक दूसरे को समझा था ,जाना था,,,

माना कि डॉली और राज एक दूसरे को काफी टाइम से जानते थे।

पर विकास पूनम के लिए उनका हनीमून बहुत तक एक दूसरे को समझने के लिए सहायक था ।

पूरे 10 दिन बात अपने सो रोमांटिक हनीमून से दोनों अपने शहर वापस लौट रहे थे ।

लौटने में भी इनका रिजर्वेशन एरोप्लेन से ही था ।

विकास औऱ पूनम अपने घर चले गए,, और कन्हैया,, दुबारा डॉली राज को लेने एयरपोर्ट पहुंच गया था।

तो वहीं से दोनों को लेकर वापस घर आ चुका था,,,,,,,

हनीमून से आकर राज वापस अपने ढाबे के काम में लग गया था ।

और डॉली ने सुपरवाइजर की ड्यूटी जॉइन कर ली थी ,विकास और पूनम भी शहर जाकर रहने लगे थे ।

पूनम कभी अपनी मां के यहां रुक कर आंगनबाड़ी चली जाती ,और कभी-कभी शहर से विकास के साथ आ जाती थी। क्योंकि विकास का काम भी अक्सर आउटडोर मीटिंग का ही रहता था ।

काकी को अपना घर पूरी तरह से घर लगने लगा था ,उसके सिवा की जिंदगी में डॉली आ चुकी थी ,और काकी बहुत खुश थी ।

डॉली और राज का प्रेम बिल्कुल पहले की तरह ही था ,सिर्फ एक ही अंतर आया था ,जहां पहले डॉली राज से डरती थी ,अब वही राज डॉली से डरने लगा था । और कुछ भी नहीं बदला

राज का चिढ़ाना ,,,डॉली का रूठ जाना दोनों का एक दूसरे के लिए ढेर सारा प्यार ,एक-दूसरे की केयर, और

काकी का लाल बढ़ता ही जा रहा था।

डॉली आंगनबाड़ी जाने से पहले ही राज और काकी को अच्छी तरह से नाश्ता करा कर, और घर के सारे काम करवा कर ही आंगनबाड़ी के लिए निकलती थी कभी अगर आस पास जाना हो तो राज उसे साथ ले जाता था ,और अगर दूर जाना हो ,तो सरकारी गाड़ी लेने के लिए आ जाती थी ।

और शाम होते होते डॉली वापस घर आती और आकर फिर अपनी घर गृहस्ती संभालती,,,,,

इसी तरह चारों की शादी हुए करीब 3 महीने बीत चुके थे ।

और 1 दिन डॉली के पास पूनम का फोन आया ,कि वह मां बनने वाली है ।

यह खुशखबरी पूनम और विकास के लिए बहुत बड़ी थी ।

काकी ने सुना तो वह भी बहुत खुशी क्योंकि वह भी विकास और पूनम को अपने बच्चों की तरह ही मानती थी । लेकिन फिर भी कहीं ना कहीं काकी को यह लगा, कि उसकी डॉली और राज की जिंदगी में भी यह दिन जल्दी आना चाहिए ,,,,

उसने कुछ कहा तो नहीं ,पर उसके चेहरे पर एक सवाल आ गया था।

डॉली मैं भी खुश खबरी सुनना चाहती हूं तू मुझे कब सुनाएगी

डॉली समझ गई ,और उसने कहा,, काकी मैं समझ रही हूं ,कि आप क्या पूछना चाहती है ,काकी मेरा यकीन

मानिए ,मेरी तरफ से कोई भी फैमिली प्लानिंग नहीं है।

बस यह सब ऊपर वाले के हाथ में है

वह जब मुझे मां बनने का सौभाग्य देगा मैं उसे खुशी-खुशी अपना लूंगी,,, मुझे कोई भी प्रॉब्लम नहीं है ।

यह सुनकर काकी के कलेजे में ठंडक पड़ गई ,क्योंकि वह जानती थी ,कि आजकल के बच्चे अपनी नौकरी और अपने काम के लिए सालों तक बच्चों के बारे में नहीं सोचते ।

पर ऐसा कुछ नहीं था ,डॉली ने अच्छे से काकी को समझा दिया था।

इसी तरह हंसी खुशी और अपना काम करते हुए पूनम के 9 महीने पूरे हो चुके थे अब तो उसने मेटरनिटी लीव भी ले ली थी ।

और एक दिन अचानक डॉली के फोन पर फोन आया ,कि पूनम को लेबर पेन शुरू हो गए हैं ,सबसे करीब उनके डॉली और राज ही तो थे।

राज ने जल्दी से अपनी जीप निकाली और काकी डॉली को लेकर अस्पताल पहुंच गया ।

लगभग 2 घंटे बाद डॉक्टर बाहर आए और उन्होंने बताया,,, पूनम एक स्वस्थ और सुंदर बेटे की मां बन चुकी है।

यानी कि पूनम और विकास का बेटा इस दुनिया में आ चुका है ।

कुछ देर में विकास के बुआ फूफा जी भी यहां चुके थे ।

ठीक उसी वक्त नर्स बच्चे को भी बाहर लेकर

आई,,,,सभी बच्चे को देखकर बहुत खुश थे ।

बड़ा ही प्यारा गोल मटोल सुंदर बेटा था पूनम का ,,एक-एक करके सभी उसे अपनी गोद में लेने लगे,,,

काकी ने कान्हा जी को धन्यवाद देते हुए डॉली के लिए भी मन्नत मांगी, कि भगवान मेरी डॉली की गोद भी जल्दी भर दो ,मैं भी अपनी डॉली और राज के बच्चों का मुंह देखना चाहती हूं ।

और सच में काकी की दुआ काम कर गई कान्हा जी ने डॉली और राज को भी मां बाप बनने का सौभाग्य दिया, और इसके अगले महीने ही डॉली ने खुशखबरी सुनाई ,कि वह भी मां बनने वाली है।

अब तो समझो के काकी ने चारों धाम कर लिए थे ,राज और काकी 24 घंटे डॉली के आगे पीछे घूमते ,उसकी हर चीज का ख्याल रखते ,उसका खाना पीना ,सोना, हर काम से करवाते ।

डॉली ऑफिस जाती थी ,पर उसने ज्यादा दूर दूर जाना बंद कर दिया था ,और कभी जाना हो तो राज उसे खुद अपने साथ लेकर जाता।

आखिरकार डॉली के 9 महीने भी पूरे हो चुके थे ,और 1 दिन वह आया जब डॉली को भी लेबर पेन शुरू हो गए ।

और ऐसे वक्त राज ने जीप से जाना ठीक नहीं समझा, बल्कि जननी सुरक्षा योजना के तहत एंबुलेंस को फोन किया और बस 20 मिनट बाद एंबुलेंस उनके दरवाजे पर थी।

राज और काकी ने कमला बुआ को भी अपने साथ लिया ,और चारों शहर के लिए निकल गए ,कुछ देर बाद विकास पूनम भी हॉस्पिटल आ चुके थे ।

उनका बेटा उनकी गोद में था ,जो पूरे 10 महीने का हो चुका था ।

डॉक्टर ने डॉली को चेक करके बताया कि सब कुछ नॉर्मल है ,और डिलीवरी भी नॉर्मल ही हो जाएगी, बस हमें कुछ देर इंतजार करना होगा ,,,,

लेकिन कहते हैं ना, कि डॉक्टर भी भगवान नहीं होता ,,,डॉक्टर का इतना कहना था ,की अंदर से नर्स ने आवाज लगाई ,,,डॉक्टर साहब जल्दी अंदर आइये, डिलीवरी तो होने लगी है ।

और बस 20 मिनट बाद ही नर्स बहुत खुश होकर बाहर निकली ,और उसने एक नहीं बल्कि दो-दो खुशखबरी राज को सुनाई कि आप बहुत ही प्यारे प्यारे दो बच्चों के पिता बन चुके हैं ,एक बेटा और एक बेटी ,और दोनों बच्चे और बच्चों की मां पूरी तरह से स्वस्थ है।

राज और काकी की तो जैसे खुशी का ठिकाना ही नहीं था ,राज खुश होकर चिल्लाया ,,,होय अपुन के घर में बच्चा पार्टी आ गई ,,, अपन डैड बन गया,, काकी अपन ने तुझसे कहा था ना ,कि अपनी बच्चा पार्टी अपन से डेडू कहेगी ड जैसे शहरों में कहते हैं ना बड़े लोगों के बच्चे बिल्कुल वैसे ही ।

और डॉक्टर क्या अपन शहज़ादी से मिल सकता है ,और बच्चा पार्टी से भी

नर्स ने मुस्कुराते हुए कहा ,,,,

सबर कीजिए मिस्टर राज ,डॉली और बच्चों का कुछ चेकअप पूरा करना है उन्हें कुछ इंजेक्शंस दिए जा रहे हैं

सारी फॉर्मेलिटी पूरी हो जाने दीजिए

फिर मैं खुद बच्चों को बाहर लेकर आती हूँ,,,, अरे तू कब बाहर लेकर आएगी

और कब क्या होगा, बस अपन एक बार सबको देखना चाहता है ,,,

शहज़ादी तो ठीक है ना

हां मिस्टर राज डॉली जी बिल्कुल ठीक है ,,,,तो क्या एक बार अपुन उनको नज़दीक से देख सकता है।

मिस्टर राज प्लीज समझने की कोशिश कीजिए ,अभी मैं आपको अंदर जाने की परमिशन नहीं दे सकती,,,,,

डॉक्टर अपना काम कर रहे हैं ,बस कुछ ही देर बाद आप अपनी वाइफ और अपने दोनों बच्चों से मिल सकते हैं।

अच्छा ठीक है तू कहती है ,तो अपन रुक जाता है ,लेकिन देख 20 मिनट से ज्यादा नहीं ,,,,ऐ,,,, काकी तूने सुना क्या कहा उसने !

हां राज मैंने सब कुछ सुन लिया,,,

काकी अब तू तैयार हो जा दोनों बच्चों की सुसु पॉटी ,उनका खाना ,उनका उधम तुझे नाती पोते चाहिए थे ना

तो कान्हा जी ने एक बार मैं तेरी दोनों डिमाइंड सुन ली है ।

और तुझे दोनों मिल गए हैं ,,,

राज मैं सब कुछ संभाल लूंगी ,कान्हा जी का लाख-लाख शुक्र है ,कि मेरी डॉली और दोनों बच्चे ठीक है ,,,,
 
विकास पूनम और राज के कुछ मिलने वाले भी आ गए थे ,सभी एक दूसरे को बधाइयां दे रहे थे ,आज काकी की सारी मन्नते पूरी हो चुकी थी ।

अब उसकी कोई ख्वाहिश नहीं थी

अब तो बस वह राज के बच्चों में रच बस जाना चाहती थी ।

उनके लिए जीना चाहती थी।

अब तो यह 20 मिनट भी राज और काकी के बीच बड़ी मुश्किल से कट रहे थे ।

आखिरकार 20 मिनट निकले और तभी नर्स दोनों बच्चों को बाहर लेकर आई।

एक बच्चे को राज ने लिया और एक को काकी ने, यह दिन राज की जिंदगी का सबसे बड़ा और सबसे खुशी का दिन था । जब उसे एक नहीं दो दो खुशखबरी मिली थी ।

राज कभी अपनी बेटी को देखता, और कभी बेटे को ,,,राज ने नर्स से पूछा

ओय मैडम जी,,,,अपन महारानी से मिलना चाहता है,,,,

जी आप मिल सकते हो,,,,

राज ने बच्चे को पूनम को दिया ,और अंदर डॉली से मिलने चला गया ।

डॉली बेड पर चुपचाप लेटी थी

राज डॉली के पास गया,,,,और माथे पर प्यार से हाथ फेरते हुए पूछा,,,

शहज़ादी तू ठीक है ना

डॉली के चेहरे पर एक संतोष भरी मुस्कान थी ।

हां राज मैं बिल्कुल ठीक हूं ,,,,

सहजादी तूने देखा ,,,तू कह रही थी ना कि तुझे बेटा चाहिए, और मुझे बेटी

और देख कान्हा जी ने हम दोनों के साथ बराबरी का व्यवहार किया है।

हम दोंनो की ही ख्वाहिश पूरी हुई

अब तू देखना अपनी बच्चा पार्टी के लिए अपुन क्या-क्या करता है।

अपन ने तुझसे प्रॉमिस किया था ना ,,,वो वाला अपन सब बराबर संभाल लेगा ,,,,तुझे टेंशन लेने का नहीं,,,

ये सुनकर डॉली मुस्कुरा दी, और राज ने इधर उधर देखते हुये ,,,झट से एक किस डॉली के गाल पर कर लिया

डॉली कुछ कहती ,इससे पहले दूसरा किस भी दे दिया,,,,,

शहज़ादी अब तुझे हर चीज डबल ही मिलेगी ,,,,तूने अपन को डबल खुशी दी है ना ,तो अपन तेरे वास्ते सब कुछ डबल लेकर आएगा ।

क्योंकि अब अपन को डबल लाने की आदत डालनी पड़ेगी ।

देख दो झूले ,दो बच्चों की छोटी छोटी साइकिल , दो

दूध के डब्बे ,दो बोतल

अरे साला अपन को सब कुछ दो ही तो लाना पड़ेगा ,,,,क्या बात है !!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

राज अपनी खुशी में खो चुका था,,,,

बस दो-तीन दिनों बाद राज डॉली और अपने दोनों बच्चों को लेकर घर आ चुका था ।

और राज और काकी डॉली के साथ बच्चों की देखरेख में पूरी तरह से खो चुके थे ।

24 घंटो घर में बच्चों की किलकारियां गूंजती ,,,तीनों मिलकर दोनों बच्चों को पाल रहे थे ।

उनकी अच्छे से देखरेख करते ,डॉली अभी तो 6 महीने की मैटरनिटी लीव पर थी।

तो सब कुछ आराम से हो रहा था ।

और घर के कामों में सहायता के लिए राज ने छोटू की मां से कह दिया था

छोटू ढाबे पर आता ,तो अपनी मां को भी साथ ले आता, क्योंकि उसके घर में काम करने के लिए उसकी बहन थी।

और उसकी मां डॉली के यहाँ सुबह से शाम तक रहती,,,,

और घर के सभी कामों में डॉली और काकी की मदद करवा देती थी।

इसी तरह धीरे-धीरे दोनों बच्चे 5 साल के हो चुके थे।

उधर विकास और पूनम का बेटा शैलेश भी 6 साल का हो चुका था।

और एक साल पहले उसने स्कूल जाना भी शुरू कर दिया ,,,

वह शहर के अच्छे स्कूल में पढ़ता था और विकाश पूनम की बेटी गौरी जो शैलेश से 5 साल छोटी थी।

वह भी 1 साल की हो चुकी थी।

यानी कि राज और विकास दोनों के दो दो बच्चे हो गए थे ।

जब दोनों बच्चों के एडमिशन का टाइम आया ,,,तो राज ने विकास और पूनम से बात की ,और उन्होंने राज को भी वही स्कूल बताया,,,,जिसमें शैलेश जाता था ।

राज ने जाकर वह स्कूल देखा ,और डॉली को भी दिखाया ,दोनों को वह स्कूल काफी अच्छा लगा था ।

थोड़ी सी फॉर्मेलिटीज के बाद राज ने अपने दोनों बच्चों का एडमिशन भी उसी स्कूल में करवा दिया था ।

डॉली अपनी ड्यूटी पर जाती और राज दोनों बच्चों को स्कूल छोड़ देता ।

और शहर से आते हुये डॉली दोनों बच्चों को वापस ले लेती,,,,

क्योंकि राज के ढाबे और काकी की वजह से शहर में रहना तो मुमकिन नहीं था । लेकिन हां जब कभी कोई जरूरत पड़ती ,तो विकास और पूनम डॉली और राज के लिए हमेशा तैयार रहते ,,,

बस इस तरह से हंसते खेलते चारों बच्चे बड़े होने लगे थे,,,,,,

जिंदगी अपनी पूरी रफ्तार पर थी।

सबके काम अच्छी गति से चल रहे थे। चाहे विकास और पूनम हो ,या फिर डॉली और राज इनकी जिंदगी में सिर्फ खुशियां ही खुशियां थी ।

विकास पूनम डॉली और राज चारों बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे ।

अक्सर एक-दूसरे के घर इनका आना जाना लगा रहता ।

कई त्योहारों पर दोनों एक साथ मिलकर ही सेलिब्रेशन करते थे।

डॉली और राज अपने दोनों बच्चों को पालने में ,और अपने काम में पूरी तरह से व्यस्त थे ।

राज आज भी डॉली काकी और अपने दोनों बच्चों का पूरी तरह से ध्यान रखता था ।

डॉली को कभी एहसास ही नहीं हुआ कि उसे अपनी जॉब के साथ अपने घर गृहस्ती संभालने में कोई परेशानी हो रही है ।

क्योंकि हर कदम पर राज उसके साथ था । डॉली के कुछ चाहने से या मांगने से पहले ही उसकी वह ख्वाहिश पूरी हो जाती ।

राज अपने दोनों बच्चों के भी बहुत करीब था ,जैसा की राज को पहले से ही बहुत शौक था ।

कि उसके दोनों बच्चे उससे डैड कहे।

तो बचपन से उसने बच्चों को डैड कहना ही सिखाया था।

और अब वह राजनी और नीलेश का डैड ही बन चुका था ।

कहते हैं न ,कि बच्चों को कितना भी सिखाओ ,लेकिन उनकी कुछ आदतें और नेचर गॉड गिफ्ट ही होता है।

तो बस ऐसा ही कुछ राज के बच्चों में भी था । जहां राजनी एक पढ़ी लिखी समझदार और सलीके पसंद लड़की थी बिल्कुल डॉली की तरह ,,,,

वही नीलेश बिल्कुल राज के जैसा मस्त मौजी ,अल्हड़, और पढ़ाई में भी एवरेज ही था ।

पर हां उनकी पर्सनैलिटी ऐसी थी

कि 100 लोगों में खड़े होने पर भी वह अलग ही दिखता था ।

राज के जैसा स्मार्ट,,, 17 साल की उम्र में भी 5 फिट 10 इंच हाइट ,फिट बॉडी राज की तरह ही चुस्त तंदुरुस्त,,,,

और गाड़ियों में भी उसे कुछ खास ही रुचि थी ।

बात पर यकीन करना जरा मुश्किल होगा लेकिन सिर्फ बारह तेरह साल से ही राज उसे कार ड्राइविंग अच्छे से

सिखा दी थी हां यह बात अलग थी ,कि उसे खुद कभी कार दी नहीं ।

अब दोनों बच्चे 17 साल के हो चुके थे। और इस साल उनके ट्वेल्थ के एग्जाम होने वाले थे ।

जहां से राजनी बायो से पढ़ाई कर रही थी । वही नीलेश ने कॉमर्स विषय चुना था अपने लिए ।

क्योंकि उसे पढ़ाई से कोई खास लगाव नहीं था ।

बस उसका तो एक ही सपना था। मॉडलिंग करने का ,उसी हिसाब से खुद को फिट एंड फाइन रखता था ।

स्कूल की सारी लड़कियां मरती थी नीलेश पर ,और राजनी यह देख कर मन ही मन कसमसा कर रह जाती,,,

और घर आकर डॉली और राज से उसकी शिकायत भी करती,,,

मॉम! डैड!

देखिए ना भाई का पढ़ाई से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है ,स्कूल में जाकर भी लड़कियों के आगे पीछे घूमते रहते हैं।

तब नीलेश राजनी की बात काटते हुए कहता ,,,,ओ,,,राजनी की बच्ची अपन उनके आगे पीछे नहीं घूमता ,वह अपन के आगे पीछे घूमती है, समझी क्या!

और तू मुझसे इतना जलती क्यों है

तू मोटी ,पढ़ाकू ,चश्मिश ,,,,

अपुन की पर्सनैलिटी देखकर खुन्नस खा जाती है ।

और भाई तू कैसे बोलता रहता है,,,

मम्मा भाई को देखो ना ,अभी इनकी स्कूलिंग भी पूरी नहीं हुई ,,,

इनका हेयर स्टाइल, इनका ड्रेसअप ,ये सब अच्छा लगता है क्या,

इनसे कहिए ना ,कि किसी स्कूल बॉय की तरह रहे ,किसी कॉलेज के लड़कों की तरह नहीं ।

जरा पढ़ाई पर भी ध्यान दे दे ,,,

ये,,,,राजनी तू तो लगती है नानी,,,,

अपुन भी लगेगा नाना

अगर अपुन ने तेरी बात मानी,,,,

अपन तो टॉप मॉडल बनेगा,,, दोनों में बहस चल ही रही थी ,तब तक राज भी ढावे से आ गया ,और राजनी ने राज के पास आकर उससे शिकायत करते हुए कहा !

डैड देखिए ना ,,,भाई फिर मुझे मोटू और चश्मिश कहके चिढ़ा रहे हैं।

ओय नीलेश के बच्चे ,क्या हुआ

तूने फिर अपनी राजनी को चिढ़ाया नहीं डैड मैंने इसको नहीं चिढ़ाया

वही हमेशा की तरह पढ़ाई का लेक्चर देना और मेरी पर्सनैलिटी से जलना,,,

डैड चश्मिश से बोल दीजिए ,,,

कि ये अपुन के फटे में टांग न अड़ाए,,,

नही तो अपुन इसको बराबर सुनाएगा राज ने नीलेश को समझाते हुए कहा,,, देख राज जहाँ तक पढ़ाई की बात है उसमें अपनी राजनी की कोई बराबरी नहीं कर सकता ,,,,और तुझे भी राजनी की बात मानना चाहिए ,अपनी पढ़ाई पर बराबर ध्यान देना चाहिए ।

डैड आपको तो पता है ना!

मुझे मॉडलिंग करना है ,और जैसे ही मेरा 12th होता है आपने प्रॉमिस किया था ,कि आप मुझे मॉडलिग, सीखने के लिए,,, पर्सनालिटी डेवलपमेंट क्लासेस जॉइन करवाएंगे ,,और उसके लिए अपन को मुंबई जाना होगा।
 
नीलेश अपन ने तेरे से प्रॉमिस किया था तो अपन तेरे को मुंबई भेजेगा ।

लेकिन उससे पहले 12वीं में अच्छे से पढ़ाई करने का ।

डैड 12th तो मैं अच्छे से पास कर लूंगा डोंट वरी,,,, बस आप अपना प्रॉमिस याद रखना ।

तब तक डॉली अंदर से सबके लिए कॉफी लेकर आ गई थी।

उसने हमेशा की तरह सबको डांटते हुए कहा ,,,,

नीलेश!

राजनी !

अभी लड़ना बंद करो ,और कॉफी पियो और राज आप भी

इन दोनों के साथ बातें करने लगते हैं नीलेश को आपने ही बिगाड़ा है ,यह कह कर के कि मेरा बेटा तो लाखों में

एक है। इसकी पर्सनैलिटी बहुत अच्छी है ,यह तो मॉडल दिखता है ,,,,

और इसका नतीजा देखा आपने!

बचपन से ही उसके सर पर मॉडलिग का भूत सवार हो गया ,,,,

हीरो बनेगा ,,हीरो ,,,,,

महारानी तू काय को फ़िक्र करती है

अरे अपना नीलेश हीरो ही बनेगा ।

देख इसमें कोई कमी है क्या

हां राज वो सब ठीक है ,पर सबसे पहले पढ़ाई जरूरी होती है ।

नीलेश ने भी डॉली की तरफ देखते हुए कहा ,,,मॉम कर तो रहा हूं पढ़ाई

और देखो मैंने टेंथ 1th क्लास पास किया था ।

और ट्वेल्थ में भी 1th क्लास ही आऊंगा और मेरे लिए इतना काफी है ।

मैं फर्स्ट डिवीजन पास हो जाऊं।

तब राजनी ने चिढ़ाते हुए कहा ,,,

हां आया था टेंथ में 1th क्लास ,,,ओनली 61% ,और मेरे मेरे भी बता दे जरा ,,,

हां ,,हां,, पता है, पता है ,चश्मिश मोटो तूने स्कूल टॉप किया था ।

और 97% आये थे तेरे 10th में।

यह बात याद दिलाने की जरूरत नहीं है जब से 97 टाइम तो,तू यह बता चुकी होगी ।

तुझे काम ही क्या है !

24 घंटे किताब लेकर बैठी रहती है।

मॉम मैंने फर्स्ट क्लास का प्रॉमिस किया था आपसे ,तो मैं ट्वेल्थ में फर्स्ट क्लास ले आऊंगा । अब खुश लेकिन उसके बाद आप और डैड अपना प्रॉमिस नहीं भूलेंगे मुझे मुंबई भेजेंगे ।

ठीक है नीलेश भेज देंगे ,लेकिन अभी तुम लोगों के एग्जाम के सिर्फ 3 महीने बचे हैं ,उसके बाद 12th के फाइनल एग्जाम है ,और मैं चाहती हूं कि 3 महीनों में तुम दोनों पूरे मन लगाकर पढ़ाई करो। नो लड़ाई ,नो झगड़ा, और नो बहस राजनी ! नीलेश एक बात और तीन महीनों तक तुम दोनों अलग-अलग रूम में रहोगे ,,,,

मॉम मतलब,,, नीलेश ने डॉली को देखते हुए कहा,,,,,

मतलब की राजनी मेरे साथ मेरे रूम में रहेगी, और तुम डैड के साथ दूसरे रूम में तभी राज जल्दी से उठते हुए बोला,,, महारानी तू यह क्या कह रही है

ऐसा नहीं ,,,अपुन को किसी और के रूम में नींद नहीं आती ,,अपन अपने ही रूम में अच्छा है,,,,,

तो फिर एक काम कीजिए,,,

हमारे रुम में आप नीलेश के साथ रह

लीजिये,,,, और मैं राजनी के रूम में राजनी के साथ रह लेती हूं।

राज फिर बोला,,,,,महारानी अपुन को नहीं पता ये बच्चा पार्टी को तू ही सभांल,,,अपुन तेरे साथ अपने

रूम में ही रहेगा।

अरे तू समझती कायको को नहीं ,,

यह रात तक पढ़ाई करते हैं ,और अपन को तो सोना मांगता है ना ।

सुबह ढावे पर भी जाना होता है ।

तो अपन तेरे साथ ही सोयेगा,,,,

मेरा मतलब कि अपुन अपने ही रूम में सोयेगा,,,,,,

नीलेश राजनी इस बात पर भी बहस करने लगे थे ।

तब तक राज डॉली के पास आकर बैठ गया ,और धीरे से कहा,,,,

ये शहज़ादी तू समझती कायको नही

अपुन को तेरे बिना नींद नहीं आती।

तू अपुन को कायको दूसरे रूम में भेजने का

तू एक बात ध्यान से सुन,,,,

अपुन अपना रूम छोड़ के नहीं जाएगा और बच्चा पार्टी !

इसको तू ही सँभाल,,,,,

राज,,, राज ,,आप भी ना बच्चों को सारी बातों के लिए हां कह देते हैं ।

उनसे बड़े-बड़े प्रॉमिस कर लेते हैं ।

और जब वो ज़िद करते है ।

तुम मुझे आगे कर देते हैं ,आपने ना दोनों बच्चों को बिगाड़ रखा है ।

देखी अभी भी कैसे लड़ रहे हैं ।

राज इनके 12th के एग्जाम हैं, आपको पता

है ,,पढ़ाई का सारा बेस 12th से ही बनता है ।

राज बहुत ज़रूरी है, कि दोनो के 12th

में अच्छे नंबर आने चाहिए।

राजनी का तो मुझे पता है ,वह अच्छे से

पढ़ाई कर लेगी, ,,,,

पर नीलेश इसके लिये बहुत जरूरी है

कि यह ठीक से पढ़ाई करे।

तब राज ने डॉली को समझाते हुए कहा,,,,,तू कायको दिमाग पर जोर डालती रहती है,,,, अच्छा एक बात बता क्या अपुन पढ़ा लिखा है

नहीं ना!

फिर भी अपने में कोई कमी है ।

अपन बराबर बिंदास हीरो ,अपने पास पैसा ,,,,,सब कुछ है न,,,,

तो अपना नीलेश भी कुछ न कुछ कर ही लेगा,,,, देखना क्या दिखता है अपुन का हीरो,,,, अभी स्कूल की सारी लड़कियां उसके आगे पीछे घूमती है ।

तो देख शादी तो उसका पक्का हो जाएगा ,,,,और रही बात काम धंदे की,,,,तो अगर उसको मॉडलिंग करनी है तो,,,कर लेने दे,,,वो भी एक काम ही है और अपनी नज़र में कोई भी काम बुरा नही है।

देख इंसान जो भी काम दिल से करता है, वही काम उसके लिए सही होता है।

हमे उस पर कोई भी काम थोपना नहीं चाहिए ।

और अगर हमारा नीलेश चाहता है

कि वह मॉडेल बनेगा,,,,

तो हमे उसका साथ देना चाहिए,,,,

राज आपने ठीक कहा पर वो अभी सिर्फ 17 साल का ही है।

कम से कम उसका ग्रेजुएशन तो हो ही जाना चाहिए ,,,,

करेगा डॉली उसने कहा हूं ना ,,,

कि वो मॉडलिंग के साथ-साथ अपना ग्रेजुएशन भी कंपलीट करेगा।

जी डैड मैंने जो प्रॉमिस किया है ।

में उसे पूरा करूंगा ,,,

हम उसे मुंबई भेजेंगे तो वह मन लगा कर अपना काम कर पायेगा।

प्रॉमिस करने के बाद, बच्चों का दिल तोड़ना सही नहीं है ।

नीलेश और राजनी जो चाहेगे हम वही करेंगे ।

तू टेंसन लेने का नहीं,,,

अच्छा सुन तुझसे एक काम की बात करना तो भूल ही गया ।

एक मैंने कुछ सोचा है ,,,

मैं क्या कह रहा हूं,,,,

कि अभी 3 महीने बाद इन दोनों के एग्जाम है,, और तू भी ऑफिस में बहुत बिज़ी है ,,ऐसा करते हैं, कि तीन चार महीनों के लिए मैं शहर नहीं एक छोटा सा फ्लैट रेंट पर ले लेता हूं ।

तो तू काकी और दोनों बच्चों को लेके 3 महीने तक

वही रह,,,,,

में शहर में रहूं

और आप आप यहां अकेले क्या करेंगे अरे मेरी पूरी बात तो सुन,,,,

तू कह रही थी ना ।

कि हमें अपने घर में कुछ नया करना चाहिए,,,,,

कुछ सजावट और कुछ बदलाव,,,

तो मैंने वह सारी बात कर ली है, तो इन तीन चार महीनों में हम अपना घर ठीक करवा लेंगे ,और बच्चों की पढ़ाई भी अच्छे से हो जाएगी,,, काकी को अपने साथ ही ले जाना,,, मैं तो ढावे में ही सो जाया करूंगा ,,,,

तो बस हम कल ही चलते हैं शहर में मकान देख लेते हैं ।

और जब तीन चार महीने बाद तू यहाँ आएगी ,,, तब तुझे अपना घर चकाचक मिलेगा ,,,,हां राज ये idea बुरा नही है यह सुनकर दोनों बच्चे भी एक्साइटेड हो गए ,,,,,

डैड हमारा घर रेनुवेट दो रहा है,,,

पर देखिये मुझे अपना कमरा ऊपर चाहिए ,और बिल्कुल अलग,,,

इस नीलेश के साथ तो में 1 दिन भी नहीं रहूँगी,,,, नीलेश तुरंत खड़ा हो गया ,,

डैड मेरे कमरे में छोटा सा जिम भी होना चाहिए ।

और पीछे वाली बॉल पर,,,,,हां ,,हां,,, राजनी ,नीलेश कल इंटीरियर डेकोरेटर आने वाला है ,,,,तो तुम दोनों

को मिलवा दूंगा ,,,तुम्हें अपना कमरा जैसा चाहिए उसको बता देना ।

वाओ डैड,,,,आई लव यू

आपने बहुत अच्छा सोचा,,, में कब से अपने कमरे को अपनी तरह से डेकोरेट करवाना चाहती थी।
 
दूसरे दिन जब डेकोरेटर आया ,तो सब ने अपनी ,अपनी च्वाइस उसके सामने रख दी।

गार्डन में एक शानदार डिजाइनिंग रेलिंग

ऊपर नीलेश और राजनी का कमरा सारे कमरों में फर्नीचर,,, मॉड्यूलर किचन

मतलब राज का घर पूरी तरह से नया होने वाला था ।

जब डेकोरेटर ने यहाँ आकर पूरी बात समझ ली,,,,तो 3,4 दिनों में ही उस घर को खाली करने के लिए कहा।

राज ने शहर में फ्लैट देखकर थोड़े से सामान के साथ सबको वहाँ पहुंचा दिया और बाकी सामान ,,, बांधकर एक कमरे में बंद करवा दिया,,,,

डॉली काकी और दोनों बच्चों के साथ शहर में रहने चली गई थी।

राज यहाँ रहकर,,,,ढावे और अपने घर के रेनोवेशन को देख रहा था,,,,,

डॉली को शहर आए हुए 10 ,15 दिन हो चुके थे ।

वह गांव में डॉली के घर रेनोवेशन का काम भी अच्छी रफ्तार से चल रहा था। नीचे फर्नीचर का काम चालू था ,और ऊपर नीलेश और राजनी के रुम बनाये जा रहे थे

आज सुबह जब राज सोकर उठा तो देखा कि उसके फोन पर विकास के दो मिस कॉल पड़े हुये है।

जब उसने whatsapp ऑन किया तो मैसेज भी पढ़ा था ।

लिखा था राज मैंने आप को फोन किए है ,शायद आप सो रहे होंगे । इसलिए डिस्टर्ब ना करते हुए मैंने आपको मैसेज छोड़ दिया है ।

आज ढावे का काम निपटा कर।

शाम तक शहर आ जाना, मैंने डॉली और बच्चों से भी बोल दिया है।

सबके लिए सरप्राइज है ,और रात को मेरे घर पर सभी का डिनर भी।

वैसे तो मैं फोन पर बता सकता था लेकिन मैं आप सब को सामने से ही बताना चाहता हूं।

राज विकास का मैसेज पढ़ चुका था।

उसने फोन करने के बारे में सोचा।

पर कोई फायदा नहीं था, क्योंकि विकास उन्हें सरप्राइज देना चाहता था और अब तो ,जो भी खुशखबरी है

वह वहां जाकर पता चलने वाली थी।

तो बस जल्दी से ढावे के काम में लग गया ।

जिससे वह शाम तक ढावे के काम करवा कर टाइम से शहर पहुँच जाये।

शाम को 5 बजे राज शहर घर पर आ गया था।

घर पहुँच कर, कुछ देर बाद राज ने डॉली को फोन किया ।

और डॉली को भी विकास के मैसेज के बारे में बताया,, डॉली को भी विकास ने वही सब कहा था ।

जो राज को बताया था ।

ठीक है राज आप आ जाइए ,,थोड़ा टाइम घर में बिताने के बाद ,हम पूनम के यहां डिनर पर चलेंगे ।

राज ने डॉली को बताया नहीं था ।

कि वह शहर आ चुका है, क्यों वह भी डॉली को सरप्राइस देना चाहता था।

उसने कहा ,ठीक है ,जैसे ही अपुन काम फिनिश करता है, शहर आता है

और,,,, बच्चा पार्टी कैसी है

राज वो दोनों ठीक है ।

यहाँ मैंने दोनों को अलग रुप में शिफ्ट किया है । मैं कोशिश करती हूं,कि उन दोनों के बीच कोई बात भी न

हो ।

वरना लड़कर फालतू टाइम वेस्ट करते हैं और काकी कैसी है

राज काकी भी ठीक है ,,जब में ऑफिस जाती हूं ,तो काकी को जिम्मेदारी देकर जाती हूं, कि दोनों अपने रूम में ही रहे ।

ठीक है महारानी ,,, तू वहां है तो अपुन को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। फिर भी देख ,बच्चा पार्टी को ज्यादा भी मत डाँटना।

राज उन्हें डाँटना बहुत ज़रूरी है

अगर आपकी तरह मैं भी उन्हें प्यार करके बिगाड़ूगी न तो सर पर चढ़ जायगे आप जो हो न उन्हें बिगाड़ने के लिए।

तो मुझे डांट लेने दीजिए।

देखें मैं तो तुझसे कभी नहीं कहता कि तू दोनो को प्यार कर।

तो तू भी मुझे मत रोक कि मैं उन्हें प्यार न करूँ।

राज मैं बस इतना चाहती हूं, कि एक बार दोनो का अच्छे कॉलेज में एडमिशन हो जाए किसी

अच्छी जगह एडमिशन मिल जाए फिर मैं फ्री हो जाऊँगी

उसके बाद आपको अपने बच्चों पर जितना लाड़ दिखाना हो ,आप दिखा लेना ।

फिर मैं कभी नहीं रोकूँगी,,,

जब तक उनका एडमिशन किसी अच्छे कॉलेज में नही

हुआ ।

तब तक उन पर ध्यान देने की बहुत जरुरत है।

चल ठीक है ,,अपन को पता है, कि तू सबका ध्यान अच्छे से रखती है।

लेकिन इसके साथ साथ तू अपना ध्यान भी रखती है कि नही

ऑफिस नाश्ता करके जाती है ना

हां राज में ठीक से नाश्ता कर के जाती हूं । और आप भी तो सबका ध्यान रखते हैं ,,,पर आपने नाश्ता किया कि नहीं

शहज़ादी देख तुझे विडियो कॉलिंग करके दिखाऊ क्या

छोटू अपन की प्लेट लगा रहा है ।

आज अपुन पोहे और जलेबी का नाश्ता कर रहा है।

ठीक है राज मैं शाम को आपका इंतज़ार करती हूं।

ओके महारानी ,,,अपुन टाइम से आ जाएगा शाम को ।

अभी घर में काफी शांति थी।

राज जाकर काकी के पास हॉल में ही बैठ गया। जहाँ काकी बैठकर tv देख रही थी । और दोनों बच्चे अपने अपने कमरों में पढ़ाई कर रहे थे ।

राज आ गया तू, मैं चाय बनाती हूँ।

काकी तू आराम से बैठ,शहज़ादी आ ही रही होगी,,,

उसे आ जाने दे,फिर एक साथ ही पियेंगे राज का इतना कहना था,कि देखा डॉली भी घर आ चुकी है।

उसने देखते कहा राज आप आ गये

पर अभी तो हमारी बात हुई थी।

और आपने कहा था ,आप रास्ते मे हैं।

शहज़ादी अपुन तेरे को सरप्राइज देना चाहता था।

कितनी देर हो गई आपको आये हुये

मैं चाय के साथ कुछ खाने के लिए भी बनाती हूं ।

राज पूरे 9 दिन बाद शहर या रहा था।

राज ने देखा ,कि काकी tv देखते में व्यस्त हो गई है ।

तो वह भी डॉली के पीछे पीछे किचन में आ गया ।

शहज़ादी अपन भी तेरे साथ आता है

तेरे को हेल्प की जरुरत होगी न

डॉली समझ गई कि राज कौन सी हेल्प करने किचन में आ रहे हैं ।

और उसने मुस्कुराते हुए कहा,,,,,,

राज आपको किचिन में आने की जरुरत नहीं है ।

आप थके हुए हैं,आप आराम से tv देखिये मैं आपके लिए चाय नाश्ता बाहर लेकर आती हूं।

तब तक राज किचिन में आ चुका था ।

आते साथ ही उसने डॉली को बाहों में भर लिया ।

डॉली ने गैस सिम की ,और हमेशा की तरह पलटकर राज की तरफ देखने लगी राज आप कभी नहीं बदलेगें।

आपके दोनों बच्चे 17 साल के हो गए हैं और आपको अभी भी किचिन में रोमांस सूझता है ।

शहज़ादी अपुन को तेरी बहुत याद आती है।

क्या तुझे मेरी याद नहीं आती

लाइफ में पहली बार अपुन तुझसे इतने दिनों के दूर हुआ है ।

डॉली ने राज के गले में बाहें डालते हुए कहा !!!!

अच्छा इसका मतलब कि आपको मेरी याद आ रही है ,इसलिए आप इतने उदास लग रहे हो ।

अपुन बिंदास बोले तो हां, तेरी बहुत याद आ रही है ।

राज याद तो मुझे भी आपकी बहुत आती है । पर आप तो जानते हैं ना

कि अपने बच्चों के पीछे मां-बाप कुछ भी कर सकते हैं ।

और राजनी नीलेश के पीछे ही तो मैं शहर में रह रही हूं।

आप भी तो यही चाहते थे ।

बस 3 महीने की बात है ,हमारा घर भी पूरा हो जाएगा ,और सब वापस वही आ जाएंगे।

और आप भी तो ढावा नहीं छोड़ सकते मैं तो कहती हूं ,अगर आपको मेरी याद आ रही है ,तो आप क्यों नहीं यहां रुक जाते

शहज़ादी तू तो तो जानती हैं ना

हमारे ढावे से कितने लोग जुड़े हैं

अगर अपन नहीं जाएगा ,तो अपन को कुछ खाली खाली सा लगेगा ।

और सबके बारे में भी तो सोचना पड़ेगा

पर सच कहूँ तेरे ना होने से ,घर बहुत खाली खाली सा लगता है अपन को। अपन को अपनी पूरी बच्चा पार्टी ही अपने पास मागता है ।

इतना कहते हुए राज ने डॉली को अपने गले लगा लिया ।
 
थोड़ी देर के लिए डॉली भी सब कुछ भूल चुकी थी।

राज के सीने से लगे हुये ,कुछ देर बाद उसे होश आया ,कि चाय गैस पर उबल उबल कर काढ़ा हो रही हूं।

उसने राज को देखते हुए कहा ,,,

राज इससे पहले कि चाय की रबड़ी बन जाये,,,, जाए अब मुझे चाय छान लेना चाहिए ।

और तभी काकी भी पानी लेने किचन में आ गई ,,,,,काकी देखते ही बोली मैं जानती थी, कि तू ज़रूर किचन में आके डॉली के साथ चाय बनवा रहा होगा।

डॉली राज से दूर खड़ी हो गई जी,,,, काकी वो राज पानी लेने आए थे।

काकी ने चश्मे से झाँकते हुये कहा!

हां,,, हां ,,,डॉली तुझे बताने की जरुरत नहीं है ,मैं पिछले 19 सालों से देखती आ रही हूं ,,कि जब तू किचिन में होती है।

राज को तभी प्यास लगती है ।

और वह तभी पानी लेने आता है

राज पी ले आराम से पानी पी ले ।

मैं अपना पानी लेकर जाती हूं ।

और काकी बाहर चली गई

और जाते जाते कह कर गई,,,,

अब मैं जा रही हूं ,जब चाय बन जाए तो लेकर बाहर

आ जाना ।

जब काकी बाहर गई तो डॉली ने राज को घूरते हुये कहा!!!

राज आप भी न

हमेशा ऐसी सिचुएशन पैदा करते हैं

कि काकी सब कुछ समझ जाती है। आपको तो बिल्कुल भी शर्म नहीं है

इतने बड़े-बड़े दो बच्चों के बाप गए हैं और अभी भी वही हरकतें हैं ,जो 17 साल पहले थी ,,,,

शहज़ादी तू कहना क्या चाहती है

क्या बाप बनने के बाद अपनी बीवी को प्यार करना छोड़ देना चाहिए ।

अरे बाप क्या अपुन दादा बन जाएगा ना तब भी अपन तेरे पास किचन में आकर तुझे प्यार करेगा ही करेगा ।

ठीक है राज, लेकिन एक बार आप टाइम भी देख लीजिये,,,,

630 बज चुके हैं ,अभी हम तैयार होगे और हमें विकास के यहाँ पहुंचते-पहुंचते 800 बज जाएंगे।

हमेशा की तरह ही पूनम फिर से नाराज हो जायगी,कि हम बिल्कुल टाइम पर आते हैं ।

और डिनर करके जल्दी से वापस चले जाते,,,,,

हमें जल्दी से तैयार हो जाना चाहिए

राज मैं चाय लेकर आती हूं ,तब तक आप बच्चों को बुलाइए ।

चाय पीने के बाद वह दोनों भी तैयार हो जाएंगे ,,,,,

अरे महारानी ,उन्हें पढ़ने दे ना ।

उनको कायको डिस्टर्ब करती है

हम दोनो ही चलते हैं ना!

राज बच्चे चौबीसों घंटे पड़ ही तो रहे हैं और खाना खाने को घर में भी उठेंगे अगर वहां जाएंगे ,तो उनका भी मूड फ्रेश हो जाएगा ।

वहाँ शैलेश है, गौरी है ,बच्चे आपस में थोड़ी इंजॉय कर लेंगे,,,,,

आप समझा कीजिए

अच्छा ठीक है, तू जो कह रही है वह सही ।

अपन जाके बच्चा पार्टी को बुलाता है ।

तू चाय लेकर आ जा,,,,,

जब राज बच्चों को बुलाने उनके कमरे में गया तो दोनों बच्चे खुशी से चहक उठे ओ,,,डैड,व्हाट अ सरप्राइज़!!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

आप कब आए

डैड आप अचानक

अरे नहीं अपन अचानक नहीं आया विकास का फोन सुबह ही आ गया था मतलब कि हम सभी विकास पूनम के यहां रात को डिनर पर जाने वाले हैं।

और तुम्हारी मॉम ने चाय भी बना ली है

चलो फटाफट चलकर चाय पियो ,और जल्दी से तैयार हो जाओ ।

ओके डैड मैं अभी रेडी होता हूं ।

वही राजनी ने मुंह बना लिया था।

डैड मुझे नहीं जाना ,शैलेश फिर मुझे चिढ़ाएगा,,,,

इडियट!

जब देखो मुझसे मोटी मोटी कहता रहता है ,,,,,राजनी ! बेटा अपन तेरे साथ है ना और अपुन के सामने किसी की हिम्मत है जो तुझसे कुछ कह सके ।

चला जा पंचाल इसको भी देख लेता है

अगर ऐसा कुछ हुआ तो अपन तेरे सामने ही शैलेश को डांट लगायेगा,,,,,

आज के बाद मेरी राजनी को मोटू कहना भूल जाएगा।

नीलेश जोर से ताली देकर हंस पड़ा,,,

डैड इसका मतलब आप भी राजनी को मोटू कह रहे हैं

नीलेश अब तो तू पिटेगा,,,,

राजनी तू इसकी बात पर ध्यान मत दे तैयार होकर जल्दी से बाहर आजा।

ठीक है डैड।

सबने एक साथ चाय पी ,और डिनर के लिए रेडी भी हो गए।

कुछ देर बाद ,ही राज डॉली , काकी और दोनों बच्चों को लेकर पूनम विकास के घर पहुंच चुका था।

पूनम और विकास बेसब्री से सभी का इंतजार कर रहे थे ।

जैसे ही पहुंचे सब ने एक दूसरे से बातें की ,हंसी मजाक किया ,,,,

पर जिस बात का सबसे ज्यादा इंतजार था । वह था वो सर प्राइज़ जो विकास सबको देने वाला था।

लेकिन अभी तक उसने उस बारे में कुछ भी नहीं बताया था।

राज ने पूछा भी, पर विकास ने कहा बताते हैं ,सब कुछ बताते हैं ।

पहले लंच कर लो, उसके बाद एक छोटा सा केक काटकर हम अपनी खुशखबरी भी सेलिब्रेट करेंगे ।

खुशखबरी

इसका मतलब जो सरप्राइस है वह एक खुशखबरी है

हां राज ,,,एक खुशखबरी भी है । जिसका इंतजार हम सब को कब से था और आज हमारा इंतजार पूरा हुआ है।

यह सुनकर सभी जल्दी ही डिनर खत्म करने की कोशिश करने लगे।

डिनर हुआ ,उसके बाद सभी ऊपर शैलेश के कमरे में पहुंच गए थे ।

जहां पर पूनम ने एक बड़ी सी टेबल को डेकोरेट करके उस पर एक छोटा सा केक रखा था ।

शैलेश ने केक काटा ,सब को खिलाया और पूनम खुशखबरी का अनाउंस करने लगी,,,,,,,,,,,,

एवरीवन सुनो ,सुनो ,सुनो, आज मैं एक बहुत बड़ी खुशखबरी आप सभी को बताने जा रही हूं।

और विकास ने पूनम के बगल में खड़े होते हुए कहा! जी हां और उसके साथ एक छोटी सी खुशखबरी मैं भी आपको बताने जा रहा हूं।

तो आप पहले कौन सी सुनना चाहेंगे बड़ी,,,,बड़ी ,,,,सब लोग एक साथ कहने लगे ।

पूनम ने मुस्कुराते हुए कहा !

तो सुनिए दिल थाम के ,,,

बड़ी खुशखबरी यह है,कि हमारे मिस्टर शैलेश जी का एम बी बी एस के लिए सिलेक्शन हो गया है ।

और इसका रिजल्ट कल आ चुका है

और तो और शैलेश ने पूरे शहर में तीसरी रैंक हासिल की है ।

बस अब कॉलेज मिलने की देर है ,कॉलेज किस शहर में मिलता है ।

भगवान करे अगर यही पर इसका एडमिशन हो जाए ,तो हम सब पांच सालों के लिए निश्चित हो जाएंगे



लेकिन फिर भी अभी हमारे लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है।

कि सिर्फ 1 साल की ड्रॉप के बाद ही शैलेश ने बहुत अच्छी रैंक हासिल की है इतना सुनने के बाद सबसे ज्यादा खुश तो राजनी ही हो गई थी ।

उसने आगे आते हुये केक का एक बहुत बड़ा सा टुकड़ा शैलेश के मुंह में रखना चाहा ,जिसे शैलेश आधा ही खा पाया और आधा बचा हुआ, राजनी ने उसके चेहरे और उसके बालों पर लगा दिया था यह देख कर शैलेश ने राजनी के ऊपर भी अच्छे से केक लगा दिया ।

तब डॉली ने दोनो को शांत करते हुए कहा ।

बच्चों क्या तुम दोनो ही सारा केक खत्म कर लोगे ,कि हम लोगों के लिए भी कुछ छोड़ोगे,,,,

हमें भी मुंह मीठा करने दो ।

डॉली ने प्यार से शैलेश को आशीर्वाद देते हुए कहा, शैलेस बेटा दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करो ।

हम सबकी शुभकामनाएं तुम्हारे साथ हैं।

डॉली के बाद ,नीलेश और राज भी शैलेश को बधाई देने लगे।

तब राज ने विकास को देखते हुए कहा विकास तूने एक खुशखबरी तो सुना दी सच में यह बहुत ही मस्त वाली है ।

लेकिन तू अपन को छोटी वाली खुशखबरी भी सुना दे।

राज भैया वो खुशखबरी भी बता रहा हूं वो यह है ,,,,कि महिला बाल विकास अधिकारी की पोस्ट के लिए गवर्नमेंट ने अनाउंस कर दिया है ।

यानि कि सालों की रुकी हुई वैकेंसी निकल आई है ।

और यह भी हमारे लिए एक खुशखबरी ही है ।

विकास ने डॉली को देखकर कहा डॉली अब तुम जल्दी से बच्चों के साथ अपनी पढ़ाई में भी लग जाओ।

साल बाद वैकेंसी निकल रही है

पिछली बार तो तुम्हारे दोनों बच्चे काफी छोटे से ।

और इस वजह से तुम तैयारी ही नहीं कर पाई थी।

लेकिन 3 महीने बाद नीलेश राजनी भी स्कूल की परीक्षा से फ्री हो जाएंगे ।

और मेरे ख्याल से अब तुम्हें अपनी पढ़ाई डिले नहीं करनी चाहिए।

राज ने डॉली को देखते हुए कहा!

शहज़ादी यह सच में बहुत बड़ी खुशी है विकास बिल्कुल सही कह रहा है ।

देख अब बच्चा पार्टी भी बड़ी हो गई है वह अपनी पढ़ाई खुद ही कर लेंगे ।

और दो महीने बाद हमारे घर का काम भी हो जाएगा ।

उसके बाद तो तू फ्री हो जाएगी ।

तो फिर जी जान से तू अपनी पढ़ाई में लग जा ।

डॉली ने विकास से पूछा विकास ! कब है इसका एग्जाम , मेरा मतलब कि मेरे पास कितना समय है ,पढ़ाई के लिये।

डॉली अभी यह तो नहीं पता, बस मुझे इतना पता

है ,कि कल गवर्नमेंट ने इसकी घोषणा कर दी है ।

कि महिला बाल विकास की खाली पोस्ट जल्दी भरने वाली है ।

हो सकता है ,एक 8,10 महीने या इससे भी ज्यादा समय लग जाए।

पर मेरे ख्याल से तुम्हे तैयारी शुरू कर देनी चाहिए ।

ठीक है विकास, अब मैं टाइम वेस्ट ना करते हुए ,अपनी तैयारी शुरू कर दूंगी और इस बार मैं पूरी कोशिश करूंगी कि यह इज़ाम निकाल लूँ।

तब राज ने भी डॉली का साथ दिया

शहज़ादी कोशिश ही नहीं अपन को पूरा यकीन है ,कि तू इसे निकाल ही लेगी ।

देख तुझे जिस भी तरह की ज़रुरत हो वह सारा इंतजाम अपन देख लेगा।

लेकिन तुझे ये एग्जाम निकलना ही है ठीक है राज आप भरोसा रखिए ,मैं अपना 100% दूंगी।

इसी के साथ सभी एक दूसरे को केक खिलाने लगे ।

और राजनी शैलेश से pmt की तैयारी के बारे में भी काफी कुछ पूछ रही थी क्योंकि 12th के बाद उसे भी pmt की तैयारी करनी थी।

इसके बाद शैलेश की काउंसलिंग शुरू हो गई थी, राजनी और नीलेश अपने एग्जाम की तैयारियों में बिजी थे ।

और डॉली भी ऑफिस के साथ-साथ अपनी पढ़ाई में

लग गई थी ।

इधर गांव में राज के घर का काम भी जोरों पर था।

राजनी और नीलेश का कमरा भी ऊपर बन चुका था , पेंट का और इंटीरियर का काम भी शुरू हो गया , इसी तरह 3 महीने बीत चुके थे ।

राजनी और नीलेश के 3 सब्जेक्ट के एग्जाम हो चुके ,दो ही बाकी थे ।

और अब तक शैलेश को भी इसी शहर के कॉलेज में एमबीबीएस करने के लिए एडमिशन मिल चुका था ।

इधर जैसे ही राज के घर का काम कंप्लीट हुआ ,तब तक नीलेश और राजनी के एग्जाम भी खत्म हो चुके थे। और सब लोग वापस अपने गांव आ गए अब इंतजार था ,तो नीलेश और राजनी के रिजल्ट का ।

और रिजल्ट के ऊपर ही डिपेंड था

कि उन दोनों को कहां ,और कैसे क्या करना है।

खैर राजनी ने तो कोचिंग की तलाश भी शुरू कर दी थी ।

वैसे तो फाइनल ही था ,कि जहां पर शैलेश ने कोचिंग ली है, वह भी उसी इस्टीट्यूट में जाएगी, पर उसके साथ साथ कुछ और भी इंस्टिट्यूट की छानबीन कर रही थी ।

और नीलेश भी मुंबई ,बेंगलूर ,और पुणे में किसी अच्छी सी मॉडलिंग एजेंसी के बारे में पता कर रहा था ।

जो मॉडल बनने की ट्रेनिंग भी देते हो यानी कि सबकी जिंदगी एक अच्छी स्पीड के साथ चल रही थी ।

आखिरकार 3 महीने और हो चुके।

और आज नीलेश राजनी का रिजल्ट भी आ गया था।

जब राज ने सुना,तो राज खुशी से घर आया ,,,, बच्चा पार्टी,,,, जल्दी से अपना रिजल्ट देखो ,अभी अभी अपन को ढाबे पर एक लड़के ने बताया ,की 12वीं का रिजल्ट आ गया है ।

इतना सुनना था ,कि दोनों अपने अपने मोबाइल निकाल कर अपना रोल नंबर एंटर करने लगे ।

और एक साथ ही दोनों के मोबाइल पर उनका रिजल्ट शो हो गया।

निलेश ने 68% मार्क के साथ 12th पास कर लिया था ।

और वही राजनी ,उसकी तो बात ही अलग थी ,उसने पूरे 93% मार्क्स बायो सब्जेक्ट में लाए थे ।

डॉली और राज दोनों बच्चों के रिजल्ट से काफी खुश थे ।

आज उनकी मेहनत सफल हो गई थी। अब तो डॉली और भी खुशी के साथ अपनी पढ़ाई में लग गई ।

क्योंकि अब उसे किसी तरह की कोई भी टेंशन नहीं थी ।

और राजनी ने भी टाइम वेस्ट ना करते हुए उसी कोचिंग में जाने का निश्चय कर लिया ,जिस कोचिंग से शैलेश ने पढ़ा था और उसने वहां पर PG भी देख लिया 1 दिन राज और डॉली जाकर उसको पीजी में शिफ्ट भी कर आये।

और राजनी की जिम्मेदारी विकास पूनम को दे दी थी ।

और फिर शैलेश तो उसके लिए था ही जो हर तरह से

उसे गाइड करता ।

शैलेश ने भी कॉलेज जाना शुरू कर दिया था ।

और राजनी भी पूरी तरह से अपनी पढ़ाई में लग गई थी ।
 
लगभग 1 महीने बाद नीलेश का भी दो-तीन कॉलेज में सिलेक्शन हो गया था और बहुत देखने समझने के बाद, निलेश को बेंगलुरु के इंस्टिट्यूट में दाखिला दिलवा दिया ।

जहां पर मॉडल बनने की ट्रेनिंग दी जाती थी । उसके साथ-साथ मॉडलिंग के मौके भी दिए जाते थे।

कुछ दिनों बाद ही राज ,विकास ,और डॉली ,तीनों जाकर निलेश को बेंगलुरु छोड़ आए ।

यानी कि तीनों बच्चों ने अपनी अपनी लाइन पकड़ ली थी ।

बस गौरी सबसे छोटी थी ,वह इस बार 10th क्लास में थी ,और उसका सपना तो एक ही था, कि कॉमर्स लेकर सीए की तैयारी करेगी।

तो वह उसी तरह से पढ़ाई कर रही थी । अब तक डॉली ने महिला बाल विकास अधिकारी का फॉर्म भी भर दिया था ।

और 4 महीने बाद उसकी एग्जाम डेट भी आ गई थी ।

तो डॉली पूरे जोर-शोर से पढ़ाई की तैयारियों में लग गई ,और राज

वह तो शुरू से लेकर अभी तक हर कदम पर डॉली के साथ ही था।

उसका तो सपना यही था, कि वह डॉली को महिला

बाल विकास अधिकारी बनता हुआ देखे।

और अब वह समय भी नजदीक आ रहा था ।

जब राज का सपना डॉली पूरा करती।

डॉली अपनी पढ़ाई के साथ ही काकी और राज का पूरा ध्यान देती थी।

और काकी राज ,डॉली का ।

यानी कि अगर 18 साल पहले बाली कोई बात थी ,तो वह यही थी ,कि डॉली काकी और राज का रिश्ता ,अभी भी एक अटूट बंधन में बंधा था ।

और तीनों हमेशा एक साथ एक रास्ते पर खड़े थे ।

पर कहते हैं ना

कि जब खुशियां हद से ज्यादा मिलने लगती है ।

तो कुछ बुरा होने का डर मन में समा जाता है ।

शायद इन खुशियों को किसी की नजर लग जाती है ।

और कुछ ऐसा ही होने वाला था ,डॉली और राज की जिंदगी में ,,,,,

पर क्या

पर वह क्या था यह तो आपको आगे की कहानी पढ़ने के बाद ही पता चलेगा ।

नई जिंदगी

मीलों तक फैले चाय के हरे भरे बागान उसमें सैकड़ों की तादात में काम करते लोग ।

तेजपुर (असम ) यहां पर अक्टूबर के महीने में लगभग 20 से 22 टेंपरेचर रहता है ।

जिसमें यहां के मजदूर सुबह से शाम तक आराम से चाय के बागानों में पत्तियां तुड़ाई का काम करते हैं ।

और उनका काम आराम से हो जाता है,,, यानी कि ना सर्दी और ना ही गर्मी आसमान काफी साफ और सुंदर दिखता है, लगता है ,जैसे बागानों से मिलने के लिए बादल उनके ऊपर ही मंडरा रहे हो ।

दूर से देखने पर चाय के हरे भरे बागान किसी नरम बिछे गलीचे की तरह नजर आते हैं।

अपनी पीठ पर बांस की टोकरी बांधे हुये लड़के ,लड़कियां ,औरतें जिनका मुख्य रूप से चाय पत्ती तोड़ने का ही काम होता है ।

और इसी में वो अपनी रोजी रोटी कमाते हैं ।

वहीं कुछ लोगों के कुछ छोटे-छोटे चाय के बागान भी

होते हैं ।

जिनको या तो वह किराए पर दे देते हैं।

या फिर खुद ही उनमें खेती करते हैं

इन चाय के बागानों के आसपास ,ही कुछ 1 मंजिला ,और कुछ दो मंजिला मकान भी बनाए गए है।

और अधिकतर छोटे-छोटे बागानों के मालिक उन्हीं मकानों में रहते है।

जहां से वह अपने बागानों की देखरेख अच्छी तरह से कर पाए ।

यहां के मजदूरों का काम सूर्य उदय से ही शुरू हो जाता था ।

और सूर्यास्त होते होते सभी अपने घरों के लिए वापस लौट जाते थे ।

पर जिनके घर बागान के पास ही थे

वह इस बात का फायदा उठाते हुए कुछ देर तक और अपने बागानों में काम कर लेते थे ,क्योंकि उनके बीवी बच्चे और उनका घर उनके सामने ही होता था।

तो वह इस बात से निश्चिंत रहते थे

कि वह समय पर घर पहुंच जाएं ।

अभी शाम के 400 बजे थे।

सूरज की रोशनी मद्धम पड़ गई थी क्योंकि कुछ ही देर में सूर्यास्त होने वाला था ।

अक्टूबर के माह में यहां पर ठंड पड़ने लगती है ।

सभी अपने घर जाने की तैयारियां करने लगे थे ।

बागानों में कहीं चाय की पत्ती तौली जा रही थी ,तो कोई अपनी डलिया को उतारकर रख रहा था ।

कहीं बागान मालिक मजदूरों को पैसे देकर हिसाब कर रहे थे।

और कहीं जो लोग सारे कामों से फ्री हो गए थे ,वह एक दूसरे से बातों में उलझे हुए थे।

तभी अचानक एक 5 वर्षीय बहुत ही प्यारी सी बच्ची ,,,,, तेज आवाज में चिल्लाती हुई डैडु,,,,डैडु ,,,,कहती बागान की तरफ दौड़कर आ रही थी ।

और उसके पीछे थी उसकी 10 वर्षीय बहन ,,,,,लेकिन रेस अभी खत्म नहीं हुई थी ।

सबसे पीछे इन दोनों की मां (काम्या) जहां सबसे छोटी बच्ची (शुभी )भागती हुई किसी शिकायत को लेकर आ रही थी वही उसके पीछे उसकी 10 वर्षीय बहन (सौम्या) शुभी की शिकायत पर अपनी सफाई पेश करने के लिए आ रही थी।

और सबसे पीछे इनकी मां काम्या जो दोनों बच्चियों को समझाने के लिए उनके पीछे भाग रही थी ।

यह देख कर वहां पर खड़े सभी लोग हंसने लगे ।

क्योंकि उन्हें पता था ,कि यह तो रोज का काम है ,जब शाम होती है ,और बच्चियां अपनी पढ़ाई लिखाई और ट्यूशन से फ्री हो जाती है।

फिर उनके मस्ती करने का समय होता है और उनकी मस्ती वही पूरी नहीं होती।

वह किसी भी बात पर आपस में लड़ जाती हैं ।

और उनकी सुलह करवाते हैं ,उनके प्यारे डैडु तो बस शुभी बेतहाशा अपनी दीदी की शिकायत करने अपने

डैडु के पास आ रही थी ।

वह भागती हुई अपने डैडु को ढूंढने की कोशिश कर रही थी ।

और आसपास खड़े लोग इस बात पर हंस रहे थे ।

वह साथ ही शुभी को चिढ़ा भी रहे थे। शुभी देख वो रहे तेरे डैडु ,,,,

तो सुभी कभी यहाँ जाती और कभी वहाँ तब तक कोई और कहता ,,,,

अरे नहीं,,, नहीं,,, तेरे डैडु तो वह उस तरफ है।

अपने डैडु को ढूढ़ते हुये एक बार फिर पूरी जोर से आवाज लगाई,,,,,

डैडु आप कहां हो

देखो ना सौम्या दीदी फिर से मुझे परेशान कर रही है ।

मुझे चिढ़ा रही है ,,,और मोटू भी कह रही है ।

अब आप मेरे सामने ही इसकी पिटाई लगाएंगे ।

वही काम्या भी शुभी के पीछे आ रही थी कि कहीं सुभी गिर न जाये।

उसे कोई चोट ना लग जाए ।

आखिरकार शुभी को अपने डैड मिल ही गए ।

और इससे पहले कि सौम्या उस तक पहुंचे ,,,,,,

उसके डैड ने झट से उसे अपनी गोद में उठा लिया ।

और से समझाने लगा,,,,

कोई बात नहीं बेटा ,आने दो तेरी दीदी को ,आज अपुन उसको अच्छे से समझायेगा,,,,

नही डैड आप उसकी पिटाई करने का।

पर मम्मी भी उसके पीछे आ रही है। मम्मी भी अपुन

को डांट रही है।

क्यों मम्मी तेरे को क्यों डाँट रही है।

तूने क्या किया

क्योंकि अपुन ने दीदी की चोटी खींची थी ।

सुभी यह तूने मिस्टेक किया ना

तुझे दीदी की छोटी नहीं खींचनी चाहिए थी ।

पर डैड वो अपुन को मोटी कहता है ना !

इसीलिए अपन ने उसकी चोटी खींची बेटा कुछ भी हो, वह तेरी दीदी है ।

तब तक सौम्या भी वहां आ गई थी।

और वी भी अपने डैडी का हाथ पकड़ कर कहने लगी,,,,,

डैडी आप हमेशा इसकी साइड लेते हो देखो ना मैं इसकी दीदी हूं ।

फिर भी यह मेरी चोटी खींच कर आई है पर सौम्या बेटा आपने सुभी को मोटी क्यों कहा

डैड क्योंकि ये मोटी है ,,,,,

दोनों आपस में लड़ने लगी,,,

तब तक काम्या भी वहां आ गई थी। काम्या की उम्र यही कोई 35, 40 के बीच की रही होगी ।

काम्या भी अपनी दोनों बेटियों की तरह बहुत खूबसूरत थी ।

बिल्कुल किसी पहाड़ी सुंदरी की तरह उसकी गोरी महींन खूबसूरत स्किन

और चेहरे का गुलाबीपन कोई भी काम्या को देखकर

बता सकता था ।

कि काम्या पहाड़ी है ।

उसकी दोनों बेटियां भी बिल्कुल काम्या की तरह ही खूबसूरत थी।

जैसे ही काम्या वहां पहुंची,,,,

कि उसने भी शिकायत शुरू कर दी।

राज आप भी न ,,,आपने दोनों बच्चियों को सिर पर चढ़ा कर रखा है।

भला अपने बच्चों को बिगाड़ने में किसी के डैडी का भी इतना बड़ा हाथ हो सकता है।

कि उनको अपने बच्चों की गलतियां नजर ही नहीं आती,,,,

देखीये ना दोनों में पूरे 5 साल का अंतर है ,फिर भी दिनभर लड़ती हैं ।

आप तो सुबह ही बागान में आ जाते हैं और मुझे इनसे दिनभर निबटना पड़ता है कभी सुभी शिकायत करती है।

तो कभी सौम्या,,,,

आपने देखा कैसे बेतहाशा दौड़ती हुई आपके पास आ रही थी।

अभी पिछले हफ्ते ही गिरकर इसने अपने दोनों घुटनों में चोट लगा ली थी तीन-चार दिन तक ठीक रही ।

उसके बाद फिर वही हाल।
 
दोनों बच्चों के प्यारे डैड यानी कि हमारा राज उस ने मुस्कुराते हुए कहा!

काम्या अपन तेरे को कितना समझाता है कि तू टेंशन

लेने का नहीं ।

अरे बिगड़ी है ,तो बड़े होकर सुधर जाएगी ।

सौम्या ,सुभी चलो अपनी मम्मी से जल्दी से सॉरी बोलने का ।

जल्दी !!! नहीं तो फिर अपन तेरे को समझ गई ना

ठीक है डैडु सुभी ने मुंह बनाते हुए कहा और अपने नन्हे नन्हे हाथों से अपने दोनों कान पकड़ कर काम्या से माफी मांगने लगी।

अब काम्या के होठों पर भी मुस्कुराहट आ गई थी ।

जब उसने सुभी का मासूम चेहरा देखा कि वह सॉरी बोल रही है ।

तो उसे झट से अपनी गोदी में उठा लिया और उसके गालों पर ढेर सारी पप्पीयां दे दीं।

यह देखकर राज भी हंस पड़ा ,और उसने बच्चियों को समझाते हुए कहा देखो आपकी मम्मा कितना परेशान हो जाती है ।

तो फिर क्यों टेंशन देने का ।

तब तक शुभी बोल पड़ी डैडु अपन ने सॉरी बोला ना

अब अपन मम्मी को टेंशन नहीं देने का अपुन प्रॉमिस करता है ,,,,,

काम्या ने शुभी को गोद मे लिया, और राज को देखते हुए कहा !

आब आप चलिए ,,,,आप तो 2 मिनट के लिए भी सांस नहीं लेते ।

आज खाना खाने भी घर नहीं आए।

मैं पूरा खाना बना कर आई हूं,,,

हां तुम चलो अपुन बस थोड़ा सा काम फिनिश करके आता है ।

नहीं आगे आप चलेंगे ,आपके पीछे में आऊंगी ।

अगर मैं आपको यहां छोड़ कर गई तो 10 मिनट की जगह पूरे 2 घंटे लगा देंगे अब कोई जरूरत नहीं है और काम करने की ।

राज के हाथ में कुछ बागान कुछ बागान में काम आने वाली चीजें थी।

उनको नीचे रख दिया ।

तभी सौम्या भी बोल पड़ी डैडी चलिए ना हमें भी भूख लग रही है ।

और आपको तो पता है ,जब आप खाना खाएंगे ,तभी हम खाएंगे ।

अच्छा अच्छा ठीक है मेरा बच्चा,,,

इसका मतलब कि तू भूखा है

हां डैडी मुझे बहुत भूख लग रही है। राजनी ने सामान एक तरफ रखा और सौम्या को भी अपनी गोद में उठा लिया राज की उम्र चाहे कितनी भी हो गई थी।

पर उसका शरीर अभी भी चुस्त तंदुरुस्त ही था।

वह सारे कामो को मेहनत और लगन से ही करता था।

काम्या की गोद में सुभी थी ।

और राज की गोद में सौम्या, यहां से उनका घर सामने ही दिख रहा था ।

बस 5 मिनट बाद ही दोनों अपने घर के अंदर आ चुके थे।

राज और काम्या अंदर आकर खाना खाने लगे ।

काम्या खाना परोसने लगी,और राज के साथ दोनों बच्चों ने हाथ धोए ,और चटाई बिछाकर खाने का इंतजार करने लगे। लेकिन इस दौरान भी शुभी और सौम्या में बहस चल रही थी ,और वह थी सोने को लेकर।

कि आज अपने डैड के साथ सुभी सोएगी ,,,,,तो सौम्या की जिद थी

कि नहीं, सुभी कल सोई थी ।

आज मैं सोऊंगी।

अच्छा ठीक है ,जो अच्छे से अपना खाना फिनिश करेगा ,वह अपुन के साथ सोएगा ।

यह सुनते ही सौम्या और सुभी जोर-शोर से काम्या को आवाज लगाने लगी।

मम्मी ,,,,,जल्दी खाना लाओ आज मैं ज्यादा खाना खाऊंगी ,,,,,

तो सुभी भी पीछे नहीं थी ,,,

नहीं मम्मी आज आप अपुन की थाली बड़ी वाली

लगाना ।

अपुन ज्यादा खाना खाएगा ।

इसी शोरगुल के बीच काम्या सबकी थालिया लेकर आ चुकी थी।

जैसे ही शुभी और सौम्या ने थाली देखी तो उछल पड़ी, क्योंकि उनका पसंदीदा और वहां का सबसे स्वादिष्ट खाना,,,

खार बनाया था ।

खार यानी कि कई चीजों को मिलाकर बनाई गई एक स्वादिष्ट कढ़ी।

जिसे केले के पत्तों के अंदर रख कर पकाया जाता है ।

और उसका टेस्ट बहुत ही बेहतरीन आता है ।

मम्मी आज आपने खार बनाया है

वाओ !

अच्छा चलो राज ने खुश होते हुए कहा चलो ,,,चलो ,,,जल्दी से अपना अपना खाना खत्म करो ।

राज आप भी तो खाइए !

हां ,,,हां,,,, खा लेगा पहले बच्चा पार्टी को तो शुरू करने दो ।

सौम्या और सुभि अपनी सारी लड़ाई भूल कर खाना खाने में व्यस्त हो गई थी। क्योंकि खार उनका सबसे पसंदीदा खाना जो था ।

दोनो बच्चों के बाद राज भी खाना शुरु कर चुका था।

और उसने काम्या से कहा ,काम्या तुम भी आकर खा लो।

हां राज मैं भी खा लूंगी ,पहले आप तो खाइए ।

जब तीनों खाना खा चुके ,फिर काम्या भी खाना खाने बैठ गई।

खाना जैसे ही खत्म हुआ ,कि दोनों की बहस फिर शुरू हो गई थी।

कि राज के साथ कौन सोएगा ।

राज ने दोनों को चुप कराते हुए अपने साथ लिटा लिया ।

अच्छा ठीक है ,आज तुम दोनों ही अपुन के साथ सोएंगी।

राज ! आप दोनों के साथ ठीक से सो भी नही पाएंगे,,,,काम्या मुस्कुरा उठी।

उसने खाने के झूठे बर्तन समेटते हुए कमरा साफ किया ।

और रसोई में बर्तन धोने लगी।

राज दिन भर का थका हारा रहता था तो रात को जल्दी ही सो जाता था। क्योंकि सुबह भी उसे सूर्योदय के साथ बागान पहुंचना होता था ।

और काम्या इस बात को अच्छी तरह से जानती थी।

इसलिए उसने राज के लेटते साथ ही लाइट बंद की ,और अंदर जाकर अपने काम करने लगी।

असम तेजपुर ,,,,,में काम्या के पिता का एक छोटा सा बागान था ।

और उसी बागान के अंदर काम्या का घर भी बना था।

कन्या अपने पिता की इकलौती बेटी थी ,और जाने से पहले उन्होंने बागान और मकान काम्या को दे दिया था । और उसके बाद राज खुद ही बागान में अच्छे से मेहनत करता ,और यही कोई 8,10 मजदूर भी लगा रखे थे।

जो बागान के काम मे राज की मदद कर देते थे।

बागान से इनको इतनी आमदनी तो हो ही जाती थी ,कि इनके घर परिवार का खर्चा ठीक ठाक चल सके ।

काम्या घर और बच्चों को संभालती थी इसी के साथ वह कुछ पारंपरिक परिधानों को भी घर में तैयार करती थी जिससे उसे कुछ और एक्स्ट्रा आमदनी भी हो जाती थी ।

बड़ी बेटी सौम्या कक्षा पांचवी में थी, और छोटी बेटी सुभी का एडमिशन इसी साल कक्षा पहली में हुआ था ।

लोगों की नजर में यह एक सुखी परिवार था ,जिसमें चारों लोग बहुत खुशी-खुशी रहते थे ।

लेकिन सच्चाई क्या थी

यह तो काम्या और राज ही जानते थे।

रोज की तरह सुबह 600 बजे राज उठ गया था ।

और इससे पहले कि बागान के लिए निकलता ,काम्या ने राज को रोकते हुए चाय के साथ नाश्ता दिया ,और कहा! राज आप नाश्ता करके ही ,निकलिए मुझे पता है ,एक बार बागान जाने के बाद आपको किसी चीज

का होश नहीं रहता ।

राज ने नाश्ता खत्म किया।

और बागान चला गया ,,,,

राज के बागान पहुँचते ही उसका काम शुरु हो चुका था ।

6,,7 मजदूरों को पत्तियां तोड़ने के लिए लगाया ,और खुद भी सारा काम देखने लगा ।

पत्तियों को तुलवाना , हिसाब लिखना और उनको बाहर भिजवाना ।

पेड़ों की कटाई छटाई ,,,सफाई का काम राज को ही देखना पड़ता था ।

इधर काम्या भी घर के कामों में व्यस्त हो गई थी ।

दोनों बच्चों को उठाकर उन्हें स्कूल भेजा बच्चों का स्कूल घर से बस थोड़ी ही दूर थाल

काम्या उन्हें खुद छोड़ने और लेने जाती थी ।

और बच्चों को स्कूल छोड़ने के बाद, घर के काम खत्म करते हुए, वह कुछ अधूरी पोशाकों को पूरा करने में लग गई।

दोपहर के 200 बजे ,तो बच्चों के स्कूल से वापस लेने गई, और आकर खाना खिलाकर जैसे ही फ्री हुई ,तो बच्चों के ट्यूशन टीचर उन्हें पढ़ाने आ जाती थी। उसके बाद वह राज का खाना लेकर खुद ही राज के पास पहुंच जाती थी। क्योंकि राज को इतना टाइम नहीं होता था,कि वह घर आ सके।

और शाम के 500 बजे ,जब बच्चे अपने होमवर्क

औऱ ट्यूशन से फ्री होते तो रोज की तरह दौड़ते भागते राज के पास चले आते।

और फिर काम्या राज के साथ बागान का बचा हुआ सारा काम में खत्म करवाने लगती।

जब काम खत्म होता तो दोनों वापस घर चले आते ।

यह सारी चीजें इन की दिनचर्या में शामिल थी ।

जो अपने ढ़र्रे पर चल रही थी।

राज और काम्या को साथ रहते हुए सालों बीत चुके थे।

लेकिन अभी तक उन्हें मंजिल नहीं मिली थी ।

जिसकी तलाश में वो दिन रात एक कर रहे थे ।

कभी काम्या तो कभी राज अपनी तरह से सबकुछ जानने की कोशिश कर चुके थे।

कि उन्हें अपनी मंजिल का कोई एक रास्ता तो नजर आए ।

लेकिन सारे रास्तों में इतना अंधेरा था। जहां से कुछ भी देख पाना संभव नहीं था जब भी कोई रोशनी की किरण नजर आती ,और वह आगे बढ़ने की कोशिश करते ।

कि कुछ देर बाद फिर से उनकी आंखों के सामने अंधेरा छा जाता।

और उन्हें निराश होना पड़ता।

लेकिन कुछ भी हो ,जिंदगी तो अपनी गति से चलती ही रहती है।

रुकने का नहीं ,चलने का नाम ही जिंदगी है ।

और भला इसे चलने से कौन रोक पाया है । वक्त का

पहिया तो हमेशा घूमता है कभी तेज, तो कभी धीमा।

ये तो संसार की नियति है । कि वक्त से पहले ,और किस्मत से ज्यादा ,ना किसी को कभी कुछ मिला है ।

और ना मिलेगा।

कभी-कभी बड़े-बड़े फैसले भी वक्त के ऊपर छोड़ देना चाहिए ।

और सही वक्त आने पर वो अपने आप ही पूरे हो जाते हैं ।

और ऐसा ही हुआ था ,राज डॉली और काम्या की ज़िंदगी में ।

उन सभी ने अपने फैसले वक्त के उपर ही छोड़ रखे थे ।

कि हम सब तो वक्त के हाथों की कठपुतलियां है ,और वही हमें नचा रहा है हमारे लिए यही सही है, कि बहती हुई धारा के साथ ही ,हमें बहते जाना चाहिए।

अगर आपने रुकने की कोशिश की तो मंजिल कभी मिल ही नहीं पाएगी।

बस इसी को देखते हुए ,सभी समय के साथ समान रुप से चलते जा रहे थे,,,,,

प्रिय दोस्तों

इस बात को तो आप सभी अच्छी तरह से समझते होंगे ,कि हम जैसा चाहते हैं

वैसा नहीं होता ,और यह बात सटीक बैठती है ।

कि हम वक्त के हाथों की कठपुतलियां जो हम सब की

जिंदगी पर लागू होती है ।

तो बस ऐसा ही कुछ राज की जिंदगी में भी था ।
 
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