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Romance प्रेम कहानी डॉली और राज की

आज सुबह से राज जो ढाबे पर गया तो सीधा रात को ही आया ,डॉली काफी दिनों से बीमार थी, और फिर का काकी से तो इतना काम बनता नहीं था

तो आज डॉली ने धीरे-धीरे सारे घर की अच्छे से सफाई कर ली थी, और रात का खाना बनाकर राज का इंतजार कर रही थी

राज ने आते साथ ही बाहर से ही डॉली को आवाज लगाई ,सहजादी अपुन को बहुत तेज भूख लग रही है, जल्दी से खाने की थाली लेकर आ ,,,राज की भूख का तो पता नहीं ,पर जल्दी से इसका मतलब यही था जिससे उसे डॉली के साथ कम से कम टाइम बिताना पड़े

राज ने हाथ मुंह धो कर कपड़े बदले तब तक डॉली खाने की थाली लगाकर बाहर आ गई ,दोनों ने खाना खाया

खाने के दौरान राज कुछ भी नहीं बोला खाना खाकर जैसे ही डॉली ने टीवी ऑन किया ,तो टीवी पर गाना भी डॉली के मतलब का ही चलता हुआ मिला

बाहों में चले आओ

हमसे सनम क्या पर्दा ,,,,,,

डॉली ने राज की तरफ देखा

और कहा पुराने गाने भी कितने अच्छे लगते थे ना

और यह तो मेरा सबसे फेवरेट गाना है

अभी तक राज का ध्यान गाने पर नहीं था पर डॉली के कहने के बाद ,जैसे ही उसने टीवी पर निगाहें डाली डॉली कि बात समझते उसे देर नहीं लगी

और उसने लापरवाही से डॉली की तरफ बिना देखे ही कहा, अपुन को ये सब पसंद नहीं है ,,यह साले पुराने गाने

पुरानी फिल्में भी बेकार ,,,,

साले रोते ज्यादा है

बात कम करते हैं

अपुन को तो साउथ की मूवी ही मस्त लगती है ,इससे पहले कि डॉली कुछ और कहे अपने कमरे की तरफ बढ़ गया

सहजादी तू टीवी का बोलियम जरा कम कर ले ,अपुन को नशे वाली नींद आ रही है

ढाबे पर 2 मिनट के लिए भी चैन नहीं मिला सारा दिन आना जाना लगा रहा

अपन सोएगा !,

डॉली ने राज के पास आते हुए बड़ी मासूमियत से कहा !

आप थक गए हैं

आपको सच में नींद आ रही है

हां हां तो क्या अपन झूठ कह रहा है

नहीं मेरे कहने का मतलब था कि अगर आप थक गए हैं, तो मैं आपकी चंपी कर दूं नारियल के तेल से आपके बालों में अच्छे से मालिश कर देती हूं

आपकी थकान भी दूर हो जाएगी ,और नींद भी अच्छी आएगी ,,,,,

नहीं नहीं राज को जैसे 440 वोल्ट का करंट लग गया हो,,,

तू अपन से दूर रह, अपन अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद करके सोने वाला है

और सुन तू अपन को डिस्टर्ब ना करते हुए जल्दी ही सो जाना ,ज्यादा देर तक जागना तेरी सेहत के लिए ठीक नहीं है

हां राज तभी तो मैं आपसे कह रही हूं

जब से काकी गई है

मुझे पिछले 2 दिनों से ठीक से नींद ही नहीं आई ,और एक आप है कि समझते ही नहीं राज जल्दी से अपने कमरे के अंदर गया और कुंडी लगाकर लेट गया

नींद तो राज को भी नहीं आ रही थी

पर डॉली से पीछा छुड़ाने का उसे बस एक ही रास्ता नजर आया था

सच में तो उसे भी डॉली की बहुत चिंता हो रही थी ,कि अगर ये ठीक से सोई नहीं तो उसे फिर से कमजोरी आ सकती है

और इसलिए बीच-बीच में एकाध बार धीरे से दरवाजा

खोल कर झांक लेता था

डॉली सो रही है ,या नहीं ,और राज को भी अच्छी तरह पता था ,कि डॉली सच में रात को डर जाती है

चाहे वह मेंढक की टर्र टर्र की आवाज हो या दीवाल पर चिपकी हुई छिपकली

और फिर चिल्लाकर रात को ही पूरे घर में हंगामा मचा देती है

यह सोचकर राज को भी नींद नहीं आ रही थी ,तकरीबन एक डेड घंटे बाद जब राज ने फिर से दरवाजा खोल कर देखा की टीवी चल रही है ,पर डॉली अच्छे से चादर से ओढ़कर सोफे पर सोई हुई है

वह दबे पांव कमरे से बाहर निकला और रिमोट से टीवी बंद कर दी

अब तक डॉली सच में सो चुकी थी

जब राज ने देख लिया कि डॉली सो गई है तो अपने कमरे का दरवाजा धीरे से बंद करके ,ऐसे ही लटका दिया और वह भी सो गया

सुबह जब राज सोकर उठा फ्रेस होने के बाद राज ने अपनी एक्सरसाइज शुरू की और डॉली घर के दूसरे काम देखने लगी

कुछ देर बाद देखा तो काकी दरवाजे से अंदर आती जा रही थी

राज अभी भी अपनी एक्सरसाइज में बिजी था ,काकी ने आते साथ ही कहा उठ गया तू जब राज

ने देखा कि काकी उसके सामने खड़ी है ,तो खुश हो गया ,उसके चेहरे पर इक निश्चिंतता दिखने लगी थी

वहीं से चिल्लाते हुए डॉली को आवाज लगाई ,सहजादी देख काकी आ गई

इसके लिए भी चाय बना लेना

क्या

डॉली भी हाथ पोछते हुए रसोई से बाहर निकली ,और काकी के गले लग गई

काकी ने डॉली के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा ,,,क्या हुआ मेरी बिटिया को

तेरी काकी सिर्फ दो ही दिन के लिए तो गई थी ,,,पहले यह बता कहीं राज ने तुझे डाटा तो नहीं

तखत पर बैठते हुए राज की तरफ देख कर कहा!

राज तूने मेरी डॉली को परेशान तो नहीं किया ,मैं जानती हूं वो सीधी सादी बच्ची तेरे आगे एक शब्द भी नहीं बोल पाती

और तू है इस पर बिना वजह चिल्लाता ही रहता है ,,,,

डॉली मुस्कुराते हुए राज के मजे ले रही थी बहुत भोलेपन से काकी से कहा

नहीं काकी ऐसी कोई बात नहीं है

मैं ठीक हूं ,बस आपकी बहुत याद आ रही थी ,,कुछ ही देर में डॉली चाय लेकर भी आ गई ,तीनों एक साथ बैठकर चाय पीने लगे काकी ने फिर से राज को ही सुनाते हुए कहा ,,,राज देखा दो दिन में मेरी बच्ची कितनी उदास हो गई है

इसमें जरूर तेरी ही गलती रही होगी

तुझे तो इतना समय ही नहीं रहता होगा कि डॉली के पास बैठकर उससे चार बातें कर सकें ,,,,

बिचारी घर में अकेली परेशान हो जाती होगी काकी की तरफ देखते हुए कहा

ओ,,, ओ,,, ओ ,,काकी यह बेचारी नहीं है किस एंगल से तुझे बेचारी लगती है

अरे इसने तो,,,,,,,,,,

यहीं पर राज का मुंह बन्द हो गया था काकी ने राज की तरफ देखा और कहा इसने तो ,,,,,

अरे इसने क्या किया,,,,,

काकी तुझे क्या बताऊं उसने क्या

अरे तू जितना समझती है ना इसको कि यह सीधी है ,यह सबकी दादी अम्मा है

इसके बारे में आपको बहुत बड़ी गलतफहमी है ,,,,

चाय पीते हुये काकी ने कहा

राज तू यह क्या बोले जा रहा है

कुछ साफ-साफ भी बताएगा

कि क्या हुआ है ,थोड़ी देर बाद जब राज को समझ आया ,कि वह काकी से क्या कहता जा रहा है ,तो चुप हो गया ,काकी अपने बैग में से कुछ निकाल रही थी

इसी बात का फायदा उठाते हुए डॉली ने राज की तरफ देख कर कहा

हां राज अब बताइए ना काकी को क्या हुआ आखिर मैंने ऐसा क्या किया है जिससे आप इतना गुस्सा है

किस बात में परेशान किया है मैंने आपको आज आप काकी को बता ही दीजिए

अब राज के पास बोलने के लिए शब्द ही नहीं थे ,जब उसे लगा की डॉली पर इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ रहा

वह खुद ही काकी से सब कुछ बताने के लिए कह रही है ,तो राज की बोलती बंद हो गई क्योंकि वह अच्छी तरह से इस बात को समझ रहा था, कि अगर उसने काकी के सामने सब कुछ बता दिया ,फिर तो डॉली को काकी का भी डर नहीं रहेगा,फिर वह और भी निडर होकर उसे परेशान करेगी

कम से कम जब तक काकी को इस बात का पता नहीं है, तब तक उसे काकी की आड़ है

और राज ने अपने मुंह से निकलने निकलते बात को वही रोक लिया

लेकिन डॉली इतनी आसानी से राज का पीछा छोड़ने वाली नहीं थी

राज भले ही चुप रह गया था ,लेकिन डॉली ने काकी के सामने फिर से बात शुरू की काकी आपको याद है

मैंने आपसे एक बात पूछी थी

कौन सी

अरे काकी एक बात पूछी थी ना आपसे

अरे डॉली तू दिन भर मुझसे कितनी ही बातें पूछती है ,मुझे कैसे याद होगा कौन सी

कुछ बताएगी भी ,,,,,

काकी वह अपनी सहेली के बारे में पूछा था ना कि वह किसी लड़के को पसंद करती है लेकिन उससे अपने दिल की बात नहीं कह पा रही ,,,,,

और आप ही ने मुझे बताया था कि उस लड़की को उस लड़के से सब कुछ साफ-साफ कह देना चाहिए

काकी आपको पता है ,मेरे कहने पर मेरी उस सहेली ने उस लड़के से सब कुछ साफ-साफ कह दिया है

काकी डॉली की तरफ देख कर मुस्कुराई फिर क्या हुआ

अरे काकी होना क्या था ,वह लड़का ना एकदम बुद्धू है, डरपोक ,नंबर वन का फट्टू राज डॉली को देखकर गुस्से में बुरे बुरे मुंह बना रहा था ,और चिल्लाते हुए डॉली पर बरस पड़ा ,,,

काकी यह सब क्या फालतू की बातें करती रहती है ,और तू उसे रोकती भी नहीं

तू भी ना ,,,तू ने ही इसे सर पर चढ़ा रखा है इसलिए इतनी बिगड़ गई है

काकी ने कहा!!!! राज यह सब बातें करने से तेरे ऊपर कौन सी आफत टूट पड़ी

अरे मेरे बीच की बात है ,,,

हां काकी पता। क्या हुआ

काकी मेरी सहेली ने उसे सब कुछ साफ-साफ कह दिया, यहां तक कि आपने बोला था ना, कि अंग्रेजी वाला आई लव यू वो भी बोल दिया,,,

अच्छा फिर क्या हुआ डॉली की तरफ देखते हुए काकी ने कहा

काकी वह लड़का बुरी तरह से डर गया

यहां तक कि डर के मारे कांपने लगा

और जमीन पर लुढ़क गया

राज बीच मे ही बोल पड़ा, भला ऐसे कोई नहीं डरता ,मेरे ख्याल से जरूर उस लड़की ने कोई हरकत की होगी

तुझे कैसे पता डॉली की सहेली की बात है जो कुछ बता रही है ,वही सही होगा

तू क्यों बीच बीच में बोल रहा है

काकी क्योंकि अपुन जानता है

कि वह लड़का सही होगा ,यह लड़कीयां ही ना कुछ उटपटांग हरकतें कर रही होगी

अरे लड़कियां तो होती ही ऐसी हैं

डॉली ने भोला चेहरा बनाते हुए राज की तरफ देख कर कहा

अच्छा राज आप बताइए एक लड़की एक लड़की को बहुत प्यार करती है

और उससे आई लव यू भी बोल दिया

अगर फिर भी वह लड़का उस लड़की की बात नहीं मान रहा ,तो उसे क्या करना चाहिए ,,,,,

राज ने खुश होते हुए कहा

यह हुई ना बात, अब आई है ना तू सही पॉइंट पर ,अरे क्या करना चाहिए

उसे अपने काम में मन लगाना चाहिए अपनी पढ़ाई लिखाई में मन लगाना चाहिए यह सब फालतू के काम है ,यह सब तो जो लुच्चे लफंगे लड़कियां होती है ना

वह करते हैं ,तू अपनी सहेली को समझा कि वह अपनी पढ़ाई में मन लगाए

अच्छा राज आपको कैसे पता कि मेरी सहेली अभी

पढ़ रही है,,,,,

अरे मतलब मेरे कहने का मतलब है

कि जब वह तेरी सहेली है ,तो तेरे बराबर ही होगी ना ,तो वह भी पढ़ रही होगी

तब काकी ने बीच में बोलते हुए कहा

राज तू यह क्या फालतू की बातें कर रहा है सबको अपने जैसा समझता है क्या

कि एक बार काम धंधे में मन लगा लिया तो सारी चीजों से मुंह मोड़ लिया

अरे कब की उमर हो गई है तेरी ,इस समय तक तो मुझे 4,4 पोते पोतियो का मुंह देखने को मिल जाता ,पर तू तो सिर्फ अपने काम धंधे में ही रमा हुआ है

अरे पढ़ाई के साथ-साथ और भी चीजें ऐसी होती हैं ,जहां मन लगाना चाहिए

और सुन डॉली को ये उल्टी-सीधी बातें मत समझा वह पढ़ लिख गई है, समझदार है और उसकी उम्र हो गई है प्यार को समझने की ,और प्यार करने की

उसे अपने जैसा मत बना दें ,कि 24 घंटे काम के अलावा तुझे कुछ दिखता ही नहीं डॉली ने राज की तरफ मुंडी हिलाते हुए कहा,,,,

देखिए राज काकी क्या कह रही है

काकी की बात तो आप मानते ही हैं ना

वह तो हमसे बड़ी हैं ,सच ही कह रही होंगी

जैसी तू और वैसे ही तेरी काकी

ये काकी भी ना इस उमर में सठिया गई है उल्टी-सीधी

बातें करती है

अरे डॉली को समझाना तो दूर उसे उल्टी पट्टी पढ़ा रही है ,देख सहजादी तू अपने काम से काम रख ज्यादा फालतू की बातें करने की जरूरत नहीं है तुझे

काकी अभी भी अपने बैग को टटोलते हुए उसमें वहां का बंधा हुआ नाश्ता और गिफ्ट निकालने में लगी थी ,और बीच-बीच में ब्याह की बातें भी बताती जा रही थी

काकी की नजरे बचाते हुए डॉली राज के पास आई और जोर से उसके पैर में चिकोटी काट ली,,, जैसे ही राज की चीख निकली और काकी ने देखा,,,,

तो डॉली ने झट से कहा

काकी लगता है राज को किसी चींटी ने काट लिया ,,क्यों राज ,,,आपको चींटी ने ही काटा है ना

राज डॉली का चेहरा देखते हुए बिल्कुल चुप था......
 
डॉली राज के जितना करीब जाने की कोशिश करती ,राज उतना ही डर के डॉली से दूर भागता ,डॉली की सारी कोशिशें बेकार जा रही थी ,पर वह भी मानने वाली नहीं थी आखिर उसने राज को पूरे मन से अपने लिए चुन लिया था ,तो हार कैसे मानती अक्सर मौका देखकर सिवा को छेड़ती रहती, और राज काकी की आड़ लेकर खुद को बचाने की कोशिश करता रहता

लेकिन अभी तक उसने काकी को डॉली कि कोई भी बात नहीं बताई थी

उसे डर था कि अगर काकी को एक बार यह सब पता चल गया ,तो हो सकता वह डॉली का ही साथ दे ,और फिर तो वह बिल्कुल अकेला पड़ जाएगा ,तो डॉली को संभालना और भी मुश्किल हो जाएगा

इसलिए वह इस बात को छुपाकर ही रखना चाहता था ,और काकी ही क्या उसने इस बात को किसी के भी सामने जाहिर नहीं होने दिया था

राज के इतना पीछे हटने के बाद भी डॉली तो उसके प्यार में डूबती ही जा रही थी

भले ही राज ने अपने प्यार का इजहार डॉली से नहीं

किया था, लेकिन उसकी आंखों में और उसकी केयर में डॉली को अपने लिए राज का प्यार ही नजर आता था ऐसे ही डॉली राज को मनाती रही और राज पीछे हटता रहा ........

इस तरह से करीब 7 महीने बीत चुके थे

पर डॉली का प्यार राज के लिए ज़रा भी कम नहीं हुआ था ,वह तो अपना दिलों जान उस पर लुटा चुकी थी , अपना सर्वस्व निछावर कर चुकी थी

आज काकी किसी के घर पर पूजा में गई वहां से आते आते उसे शाम हो गई

और दिन भर की बैठी हुई वह काफी थक भी चुकी थी ,तो रात को 78 बजे ही वह अपने कमरे में सोने चली गई, और डॉली से राज को खाना देने के लिए कह दिया था

डॉली TV देखते हुए राज का इंतजार कर रही थी ,राज जैसी ही आया ,तो रोज की तरह ही, हाथ मुँह धोते ही डॉली ने राज को खाना दिया , खाना खाने के ,कुछ देर बाद तक दोंनो ने टीवी देखी ,,,लेकिन डॉली अभी बिल्कुल चुप थी

जब राज ऊपर स्टोर रूम में कुछ उठाने के लिए जाने लगा ,तो यह कहते हुये कि वह अपने कमरे में सोने जा रही है

और डॉली राज के सामने ही अपने कमरे में चली गई ,डॉली के जाते ही ,राज को एक शांति मिल गई

थी ,उसने स्टोर रूम में जा कर सामान उठाया ,और उसे लाकर नीचे कमरे में ही रख दिया, क्योंकि छोटू को सुबह-सुबह ही ढाबे के लिए सामान की जरूरत थी

पूरे घर को अच्छी तरह से एक बार चेक किया ,और कुंडली लगाते हुए अपने कमरे में चला गया ,जैसे ही कमरे में गया कि ,,, दरवाजे के पीछे छिपी हुई डॉली अचानक से राज की पीठ पर दोनों हाथ रखते हुये

हू,, हू,, करके उसे डराना चाहा,,,

राज सच में बुरी तरह चौक गया था

पर जब उसने डॉली को देखा तो उसकी जान में जान आई ,उसने ठंडी सांस ली और डॉली को भी डांटने लगा ,तू यहां क्या कर रही है ,तू तो अपने कमरे में सोने चली गई थी अब यहां से जा ,मुझे सोना है

और हाथ पकड़ते हुए डॉली को कमरे से बाहर निकालने लगा पर डॉली अपना हाथ छुड़ाते हुए वापस कमरे में आ गई

और आराम से राज के बेड पर बैठ गई राज जल्दी से बैड के पास आया, और डॉली को वापस कमरे से भगाने लगा महारानी तू आधी रात को क्यों अपन का भेजा खा रही है

तू चुपचाप अपने कमरे में जाकर सोजा राज मुझे आपसे बात करना है

मुझे नींद भी नहीं आ रही, और अगर मैंने कमरे में जाकर मोबाइल चलाया ,या कुछ भी किया ,तो काकी की नींद खराब होगी

और काकी वैसे भी आज बहुत थक गई है इसलिए मैं

यही बैठूंगी,,,

राज अपना गुस्सा पीकर चुपचाप अपने बेड पर बैठ गया , जब राज आराम से बैठ गया तो धीरे धीरे डॉली उसके पास आई और राज के पैरों पर अपने पैर रख दिये

राज ने चौकते हुये अपने पैर हटाए

और डॉली को घूरने लगा ,सजाहदी तू अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगी

आखिर तू चाहती क्या है

राज मैं आपका प्यार चाहती हूं, मैं चाहती हूं आप मुझे अपनी बाहों में भरे ,मुझे प्यार करें मुझे अपने गले से लगाये ,और भी बहुत कुछ चाहती हूं मैं ,लेकिन आप समझते ही नहीं राज के चेहरे पर गुस्सा दिख रहा था

अपुन नहीं समझता तू कहना क्या चाहती है अरे समझती तो तू नहीं, तेरे दिमाग में भूसा भरा हुआ है, तेरे को समझ में क्यों नहीं आता कि इस तरह मेरे कमरे में आना सही नहीं है ,और जो यह सब कर रही है

वह भी सही नहीं है ,अरे अगर कल के दिन किसी को इस बारे में पता चला, या काकी ने कुछ देख लिया ,तो अपुन तो किसी को मुंह दिखाने लायक भी नहीं रहेगा, कि अपन साला तेरे साथ ,,,,,,,,,

पर तुझे अपनी इज्जत का कचरा करने में मजा आ रहा है ,डॉली की आंखों में डर बिल्कुल भी नहीं था ,उसने राज की तरफ देखते हुए कहा

राज यह आपसे किसने कहा है ,कि प्यार करने से इज्जत का कचरा होता है

मैं आपसे प्यार करती हूं ,अरे आप इतनी सी बात समझते क्यों नहीं है ,और प्यार करना कहीं भी किसी ने भी गलत नहीं कहा है कृष्ण ने राधा से प्रेम किया था

पार्वती ने शिवजी से प्रेम किया था

सीता ने राम से प्रेम किया था

और मैं आप से प्रेम करती हूं

तो इसमें गलत क्या है ,आखिर आपको किस बात में और किस चीज में गलती नजर आती है ,क्या मैं अच्छी लड़की नहीं हूं

क्या मैं खूबसूरत नहीं हूं ,और क्या मैं आपके लायक नहीं हूं

आखिर कोई तो ऐसी बात होगी ,जिस वजह से आप मुझसे इतना दूर भाग रहे हैं

राज में आपको पाना चाहती हूं ,अपना बनाना चाहती हूं ,आपके साथ पूरी जिंदगी साथ रहना चाहती हूं ,और अगर आपको यह लगता है ,कि आपकी बदनामी होगी या हमारे रिश्ते को लेकर लोग उंगली उठाएंगे

तो सिर्फ एक ही चारा है

आप मुझसे शादी कर लीजिए, और पति पत्नी के रिश्ते पर तो कोई उंगली नहीं उठा सकता ,पति पत्नी का रिश्ता तो 7 जन्मों का बंधन होता है, मैं अपने घर में आपकी पत्नी बन के रहूंगी ,फिर तो आपको किसी का डर नहीं है

राज मैं आपके घर में आपकी दुल्हन बनके आना चाहती हूं ,आपका प्यार पाना चाहती हूं ,और आपके छोटे छोटे बच्चों की मां बनना चाहती हूं, यह बात कहते

हुए डॉली के होठों पर मुस्कान आ गई थी

वह अपने दिल की सारी बातें राज के सामने उड़ेल चुकी थी

डॉली जमीन में नजर गड़ा कर ,शर्माती हुई राज से सारी बातें कहती जा रही थी

डॉली के मुंह से यह बातें सुनकर राज का गुस्सा सिर से ऊपर जा चुका था

उसने एक जोरदार तमाचा डॉली के मुंह पर जड़ दिया, और गुस्से में डॉली पर बरस पड़ा यह क्या तू कुछ भी बोले जा रही है

अरे शुरू में मैंने समझा कि तू नादान है

बच्ची है ,किसी के बहकावे में आकर इस तरह की बातें कर रही है, पर मैं देख रहा हूं कि दिन पर दिन तेरी गलतियां बढ़ती ही जा रही है ,हर रोज एक नया हंगामा कर देती है तुझे होश तो है ,तू यह सब क्या कह रही है बस अब बहुत हो चुका ,आज के बाद मैं तेरी कोई भी बात बर्दाश्त नहीं करूंगा

और तू भी कान खोल कर सुन ले

कि आज के बाद तू इस तरह की बातें नहीं करेगी ,कभी नहीं करेगी

सिर्फ अपनी पढ़ाई में, और अपने काम में मन लगायगी

डॉली राज को घूरती जा रही थी

उसकी आंखों से मोटे मोटे आंसू ज़मीन गीली कर रहे थे ,वह मुड़ी और अपने कमरे में चली गई ,डॉली के जाते ही राज को अपने किए पर होश आया ,कि उसने यह क्या कर दिया ,,,,,,

डॉली पर हाथ उठाया ,आखिर क्यों

उसने ऐसा क्या कर दिया, राज हाथ को बार-बार दीवाल पर मार रहा था

उसे खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था

कि उसने ऐसा क्यों किया ,और अगर ऐसा कर दिया ,तो फिर उसे गुस्सा क्यों आ रही है सब कुछ जानते हुए भी ,समझते हुए भी पता नहीं ऐसी कौन सी बात थी ,जो राज को यह सब करने से रोक रही थी

आखिर वह क्यों खुद को डॉली के लायक नहीं समझता था, जबकि उसकी सारी सच्चाई डॉली जानती थी

राज के बारे में हर बात डॉली को पता थी और राज भी जानता था

कि डॉली उसे कितना प्यार करती है

पर शायद राज की नजरों में डॉली की जगह इस गांव में नहीं थी ,वह तो यही सोचता था कि डॉली पढ़ लिखकर अच्छी नौकरी करेगी तो उसकी दुनिया उसका फ्यूचर और भी बेहतर होगा ,इसलिए वह डॉली को लगातार खुद से दूर करने की कोशिश कर रहा था उसका मन हो रहा था, कि अभी डॉली के पास जाकर उसे मनाए ,उससे सॉरी बोले लेकिन वह डॉली के कमरे में नहीं गया

उसने अपने दिल पर पत्थर रख लिया था की हो सकता इस राज की इस हरकत से डॉली का मन राज से हट जाए

और वह अपनी दुनिया में मस्त होकर अपने काम में

मन लगाने लगे

दूसरे दिन जब सुबह डॉली उठी तो राज और काकी पहले ही उठ चुके थे

डॉली के उठते ही राज ने उसे गौर से देखा गाल पर उंगलियों के निशान अब भी नजर आ रहे थे

शायद काकी का ध्यान डॉली के चेहरे पर नहीं गया था ,डॉली के गाल पर उंगलियों के निशान देखकर राज का मन रो उठा था

उसे खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था

फिर भी उसने डॉली से कुछ नहीं कहा

रोज की तरह नाश्ता करके ढाबे के लिए निकल गया ,,,

डॉली भी अपना काम खत्म करके आंगनबाड़ी चली गई ,लेकिन वहां से जल्दी वापस भी आ गई ,काम कुछ बहुत जरूरी था ,इसलिए उसने घर आकर राज को फोन लगाया ,डॉली का फोन देखकर राज ने तुरंत फोन उठाया तो , डॉली ने उसे घर आने के लिए कहा

जब राज घर आया तो डॉली ने बताया उसे अर्जेंट में एक फाइल आज ही शहर में जमा कराना होगी, क्योंकि उसे अभी पता चला है कि आज फ़ाइल भिजवाने की लास्ट डेट है और अगर ऐसा नहीं किया तो उसकी सैलरी का इंप्रूवमेंट भी रुक सकता है ,और उसकी रिपोर्ट भी खराब जा सकती है

डॉली के किसी काम में कोई दिक्कत हो

ऐसा तो राज होने ही नहीं दे सकता था उसने डॉली से काम समझा और छोटू को लेकर जीप से फाइल देने से शहर चला गया शहर के ऑफिस में पहुंच कर देखा ,तो

काफी भीड़ लगी हुई थी, लेकिन कर भी क्या सकता था ,राज भी जा कर बैठ गया

और अपनी फाइल कतार में लगा दी

वह इंतज़ार ही कर रहा था ,कि उसका नंबर आए ,और वह फाइल जमा करके गांव वापस जाये

लाइन काफी लंबी थी, लेकिन तभी अंदर से चपरासी आया ,और उसने राज का नाम पुकारा ,वैसे तो राज को यहां कोई नहीं जानता था ,क्योंकि फाइल भी डॉली के नाम से जमा कर रहा था, राज को थोड़ा अजीब लगा ,लेकिन वह खड़ा होकर चपरासी की तरफ देख कर बोला ,,,,

अपन ही राज है ,,तू कइको को आवाज देता है,,,

जी आपको साब ने अंदर बुलाया है

यह सुनकर राज भी चपरासी के पीछे अंदर चला गया ,,जब अंदर जाकर देखा तो सामने बैठे ऑफिसर ने खड़े होकर राज से नमस्ते की ,और आगे बढ़ कर मुस्कुराते हुए हाथ मिलाया ,जब राज ने ध्यान से देखा

तो वह कुछ पहचाना हुआ सा लगा

राज ने दिमाग पर जोर देते हुए कहा

होय मास्टर तू यहां

हां राज भैया ,,,

मैं विक्की ! राज ने हंसकर उसे अपने गले से लगा लिया ,मास्टर तू यहां कैसे

राज भैया मैंने एग्जाम पास किया था

और उसके बाद यह ऑफिसर की पोस्ट मुझे मिली है

में आंगनबाड़ी में महिला एवं बाल विकास अधिकारी

हूं ,राज ने उसके दोनों कंधे पकड़ते हुए कहा , मास्टर तेरी इतनी बड़ी नौकरी लग गई ,पर कब हुआ ऐसा

राज भैया 2 साल हो गए हैं ,और तब से मैं यहीं पर पोस्टेड हूं, राज ने मुस्कुराते हुए कहा अपन को तो तेरे बारे में कुछ खबर ही नहीं थी ,तू 4 साल पहले अपनी डॉली को गणित पढ़ाने आता था ,और तेरी वजह से ही वह आगे बढ़ पाई थी

उसके बाद तू गांव छोड़कर चला गया था

तब से तू ने किसी की खबर ही नहीं ली

हां भैया कुछ ऐसा बिजी हुआ ,कि कभी आने का मौका ही नहीं मिला

पर भैया आप सुनाइए ,आप यहां कैसे

अरे हां अपन तो तेरे से बात करने में भूल ही गया, कि अपन यहाँ काय के वास्ते आया था वह अपनी डॉली है ना ,वह भी आंगनबाड़ी में नौकरी करने लगी है ,तो बस उसी की कोई फाइल जमा करनी थी

उसने अपन को अभी बताया कि आज उसकी लास्ट डेट है ,तो वही देने आया था उसने मुस्कुराते हुए कहा ,,,,

अपनी डॉली आंगनवाड़ी में जॉब करने लगी है ,भैया यह तो बहुत अच्छी बात है

हां और तुझे पता है पढ़ाई भी कर रही है

बस इस साल उसका बी०ए० पूरा हो जाएगा ,तब तक राज की नजर टेबल पर रखी नेम प्लेट पर गई, विकास पटेरिया, और राज ने नेम प्लेट हाथ में लेकर कहा

तो तेरा नाम विकास पटेरिया है//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

अच्छा नाम है , अपन तो तेरे से मास्टर या फिर विक्की ही कहता था

शायद सबके मुंह से तेरे लिए विक्की ही सुना था ,अपुन को तेरा रियल नाम तो पता ही नहीं था, विक्की ने मुस्कुराते हुए कहा भैया फाइल लाइये ,पहले में सबमिट कर लूं

अदर वाइज ऑफिस का टाइम हो जाएगा राज ने बाहर टेबल पर रखी हुई फाइल उठाई ,और लाकर विकास को दे दी

विकास फाइल उलट-पुलट करके देखने लगा जिसमें डॉली की सारी डिग्रियां और उसकी फोटो भी थी ,उसने मुस्कुराते हुए कहा राज भैया डॉली इतनी बड़ी हो गई है

आज से 5 साल पहले की डॉली ही याद है मुझे तो

वह डॉली की मार्कशीट को हाथ मे लेकर देखने लगा, काफी अच्छे नंबर है

काफी इंप्रूवमेंट किया है उसने खुद में

राज ने मुस्कुराते हुए कहा ,हां मास्टर अपनी डॉली बड़ी ही होशियार है

हर काम में अब्बल रहती है ,और अपनी नौकरी में भी पूरा मन लगाकर काम करती है विकास अब भी डॉली की फाइल देख रहा था ,उसने कहा भैया डॉली के सारे रिकॉर्ड बहुत ही अच्छे हैं

पूरी फाइल देखकर बंद की, और राज को भरोसा दिलाया ,कि वह फाइल जमा कर देगा ,आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, विकास से हाथ मिलाते

हुए राज बापस गांव की तरफ निकल आया था,,, //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg

राज जब शहर से वापस आया, तो उसने बड़े ही उत्साहित होकर डॉली को बताया कि वह वहां पर मास्टर से मिला था

डॉली कुछ देर तक राज का मुंह देखते रह गई, शायद वह समझी नहीं थी कि राज किसके बारे में बात कर रहे है

राज ने टॉवल से मुंह पोछते हुए कहा

अरे शहज़ादी तू भूल गई क्या

अपना वह मास्टर जो तेरे को गणित की ट्यूशन पढ़ाने आता था ,अरे वह बहुत बड़ा ऑफिसर बन गया है ,अपन तेरी फाइल जमा करने गया, और जब अंदर जाकर देखा तो ऑफिसर की कुर्सी पर अपना मास्टर यानी कि विक्की ही बैठा था

कितना बदल गया है, उसने हंसकर मुझसे नमस्ते किया, हाथ मिलाया, और मेरे पैर भी छुए ,जितना मस्त पहले था

अपन को तो बिल्कुल वैसा ही अब भी लगा ज़रा भी नहीं बदला ,हां उस की हैसियत जरूर बदल गई है ,उसके ऑफिस के बाहर एक चपरासी रहता

है ,ऑफिस से चार पहिया गाड़ी भी मिली है ,और तनख्वा भी बढ़िया है ,और एक इंसान को जरुरत के लिए और क्या चाहिए ,उसने अपनी मेहनत के दम पर ही सब कुछ किया है

डॉली राज की बातें सुन रही थी

राज ने हंसते हुए कहा, शहज़ादी तुझे पता है ,जब उसने तेरी फाइल देखी, तो है देख कर बहुत खुश हुआ ,बड़ी तारीफ कर रहा था तेरी, कि तूने जरूर अच्छी मेहनत की होगी इसलिए तेरे अच्छे नंबर आए है

और तेरी नौकरी लगी है ,और उसने कहा है कि डॉली को जरूरत होगी,तो वह उससे मदद ले सकती है, अरे उसने तो अपना फोन नंबर भी दे दिया है , ले ये पकड़ और

राज ने एक पर्ची निकालते हुए

विकी का फोन नंबर डॉली के हाथ मे पकड़ा दिया ,,डॉली ने कहा पर मुझे नंबर की जरूरत नहीं है ,मैं अपना काम बखूबी करती हूं ,मेरे लिए यहीं काफी है

राज फिर बोला महारानी तू समझती क्यों नहीं ,अरे तेरे ही विभाग में ऑफिसर है

तो हमें तो सारे कामों में जरूरत पढ़ती ही है ,,,वह पिछले 1 या 2 साल से यही पर है और हो सकता कुछ दिन बाद टूर पर

सारी आंगनवाडियो को चेक करने भी आए तेरे लिए तो अच्छा है ना ,अपनी जान पहचान का बंदा आएगा, तेरी आंगनबाड़ी का रिकार्ड भी वहां पर अच्छा पहुंचेगा

इसको अपने मोबाइल में सेव कर ले

डॉली ने वो पर्ची लेकर अपने बैग में डाल दी

पर राज की बात का उसने कोई भी जवाब नहीं दिया

उस दिन के बाद से डॉली चुप हो गई थी

राज से सिर्फ काम की बात ही करती थी

डॉली के चुप रहने से राज को अच्छा नहीं लग रहा था, उसे तो पहले वाली डॉली ही अच्छी लगती थी ,पटर,पटर बोलती रहती थी पर राज दुबारा अपने मन की बात कह कर अपने गले आफत मोल नहीं लेना चाहता था
 
उन दोनों के बीच में ऐसा ही चलता रहा करीब दो तीन महीने और गुजर गए थे

एक दिन अचानक विकी अपनी टीम के साथ गांव में आगनबाडी चेक करने के लिए आ गया ,वह जैसे ही डॉली की आगनबाडी पर गया , डॉली अपनी सहायिका के साथ

आंगनवाड़ी पर बच्चों को खिलाने के साथ साथ पढ़ाई करवा रही थी

उसकी आंगनबाड़ी भी काफी साफ सुंदर और स्वच्छ थी, और आंगनवाडी के बच्चे भी काफी है ,हेल्दी दिख रहे थे

आंगनबाड़ी की रसोई ,गुसलखाना ,पार्क हर चीज

व्यवस्थित ,और साफ़ सुथरी थी

अभी बच्चों का खाना शुरु नहीं हुआ था रसोई में पक रहा था ,वो भी सरकार के दिए राशन के अनुसार ही ,हेल्दी व प्रचुर मात्रा में ही था, विकी को सारी चीजें अपनी सोच के अनुसार उपस्थित मिली,वह तो डॉली को देखते ही पहचान गया था

पर शायद डॉली का ध्यान उस पर नहीं गया वह पहले से काफी बदल चुका था

उसका कद ऊँचा,और शरीर भरा हुआ लग रहा था , जहां पहले क्लीन सेब रहता था वही अब फ्रेंच कट स्टाइल में वह काफी स्मार्ट लग रहा था

सब कुछ चेक करने के बाद उसने डॉली की तरफ़ मुस्कुराते हुए देखा,,,

हाय डॉली मैं विकास, विकी,

डॉली उसके चेहरे की तरफ देख कर रह गई

उसने हंसते हुए कहा, डॉली क्या मुझे भूल गई हो

पुरे एक साल तक आपने मुझसे मैथ्स की ट्यूशन ली थी, और मेरे ख्याल से आपने पूरे मन लगाकर पढ़ाई भी की ,,,

और आज ये उसी का नतीजा है

कि आपकी आंगनबाड़ी को इस जिले में सबसे ज्यादा पॉइंट मिले हैं

चाहे वो साफ सफाई की व्यवस्था हो

या बच्चों की हैल्थ की , मैंने पिछले 2 सालों के सारे रिकॉर्ड चेक किये है

उनमें कहीं भी ,कोई भी गलती नहीं है

और यह हमारा आखिरी राउंड था

तो इसमें भी आपकी आंगनबाड़ी को परफेक्ट पाया गया है

सारी फाइल बन चुकी है, और आपके लिए गुड न्यूज़ है,कि आपको कलेक्टर द्वारा

बेस्ट आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का सर्टिफिकेट दिया जाएगा ,,15 अगस्त आने वाला है

तो 15 अगस्त को जिले कलेक्टर के हाथों

ये सर्टिफिकेट आपको सौंपा जाएगा

और इसके लिए कोंग्रेचुलेशंस !!!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

यह सुनकर तो डॉली सच में खुश हो गई

उसे तो अपने सपना पूरा होता दिख रहा था और उसका सपना था ,कि वह अपने काम को पूरे मन और लगन से करे

और यह मन लगा कर काम करने का ही नतीजा था ,विकास ने एक बार फिर आगे हाथ बढ़ाया,,, मिस डॉली अब तो हाथ मिला ही लीजिए ,आपको इतना बड़ा सम्मान मिलने वाला है

डॉली ने विकास से हाथ मिलाया ,और थैंक्यू कहते हुये , घर चलकर कॉफी पीने के लिए भी कहा ,वैसे तो विकास लेट हो रहा था लेकिन फिर भी वह डॉली के साथ जाने को तैयार हो गया......

क्योंकि वह जब डॉली को ट्यूशन पढ़ाने जाता था ,तो काकी एक बेटे की तरह ही उसकी देखरेख ,करती , कभी पकौड़ी

कभी आलू के पराठे ,तो कभी हलवा

हमेशा कुछ न कुछ उसको बनाकर खिलाती और उसको भी काकी में अपनी मां नजर आती थी ,विकास की मां बचपन में ही गुजर गई थी , उसने अपनी बुआ के यहां रह कर पढ़ाई की , ट्यूशन पढ़ा कर अपनी पढ़ाई के खर्चे पूरे किए, और आज ये उसकी मेहनत का ही नतीजा था , कि वह इतनी अच्छी पोस्ट पर पोस्टेड हो गया था

तो बस उसने डॉली को कॉफी के लिए हां कह दिया ,जिससे कि वह काकी से भी मिल सके , डॉली विकास के साथ ही उसकी गाड़ी में बैठ कर घर पर आ गई

जब गाड़ी ढावे के बाहर आकर रुकी तो राज काम मे व्यस्त था

पर जैसे ही उसने डॉली और विक्की को गाड़ी से उतरते देखा, तो भाग कर गाड़ी के पास आ गया ,और खुशी-खुशी विकास को अंदर ले जाकर काकी से मिलवाया

काकी खुश हो गई ,सबने मिल बैठकर चाय नाश्ता किया ,और डॉली के बारे में खुशखबरी सुनकर विकास शहर चला गया जाते जाते उसने दुबारा 15 अगस्त के दिन सब को मिलने के लिए बोल दिया था

काकी तो विकास की तारीफ करते नहीं थक रही थी ,कि कितना अच्छा लड़का है

अपनी मेहनत लगन के बल पर कहां से कहां पहुंच गया ,तब राज ने डॉली को देखते हुए कहा, कि हमारी महारानी भी किसी से कम नहीं है ,,यह भी

अपनी मेहनत की दम पर आगे बढ़ी है ,और देखना एक दिन बहुत आगे जाएगी ,विकास की तरह ही बड़ी ऑफिसर बनेगी ,इसके लिए भी चार पहिए की गाड़ी आएगी ,और जब उसकी गाड़ी अपुन के ढावे के सामने आकर रुकेगी

ना तो अपुन सलूट करेगा,,,

डॉली तू बिंदास 15 अगस्त की तैयारी कर मैं तुझे और काकी को लेकर चलूंगा

और हां जब कलेक्टर साहब तुझे प्रमाण पत्र देंगे ,,अपुन तेरी लाइव शूटिंग भी करवाएगा तेरा वीडियो बनाएगा

और उस वीडियो को पूरे गांव को दिखाएगा की ये अपुन की डॉली ,है राज की डॉली

काकी तुझे पता है ,अपनी डॉली को पूरे गांव में पहली बार कलेक्टर के द्वारा सर्टिफिकेट मिल रहा है ,डॉली तेरी पेपर में भी फोटो निकलेगी ,राज डॉली के उज्जवल भविष्य के सपने देखता जा रहा था

और डॉली राज की आंखों में देखते हुये राज से यही कहना चाहती थी

कि राज तुम मेरी आंखों में सब कुछ देख सकते हो ,लेकिन तुम यह क्यों नहीं देख पा रहे ,कि मेरा भविष्य तुम हो

मेरी सारी खुशियां तुमसे ही जुड़ी हैं

विकास को यहाँ से गये हुये छः सात दिन बीत गए थे, बस एक महीने बाद थी 15 अगस्त आने वाला था ,,,,

आज अचानक डॉली के फोन पर विकास का फोन आया , डॉली ने विकास का नंबर सेव किया ही नहीं था ,पर शायद विकास ने फाइल में से डॉली का नम्बर देखकर उससे कांटेक्ट किया

विकास में थोड़ी से हालचाल पूछते हुए डॉली से कुछ बात की ,और उसे बताया कि सर्टिफिकेट बनाने के लिए डॉली के कुछ फोटो और कुस जरूरी पेपर्स की नीड है

तो विकास के whatsapp नंबर पर सेंड कर दे ,डॉली ने फोटो और पेपर्स विकास के कहे अनुसार उसके नंबर पर सेंड कर दिये अब तो डॉली को विकास का नंबर सेव करना ही था ,जिससे वह ज़रूरी बात कर सके, ज़रूरी बातों के साथ-साथ विकास कभी-कभी डॉली को गुड मॉर्निंग या

गुड नाईट भी बोल देता, और बीच ,बीच मे कुछ मैसेज भी कर देता

बदले में कभी-कभी डॉली भी उसका जवाब दे देती

15 अगस्त आते आते विकास और डॉली के बीच काफी बातें हो चुकी थी

आज 14 अगस्त था ,और बस कल ही डॉली काकी और राज के साथ जिले में कलेक्टर के द्वारा सर्टिफिकेट लेने जा रही थी

जब रात को सोने से पहले डॉली ने अपना मोबाइल चेक किया, तो विकास का मैसेज पढ़ा हुआ था

डियर डॉली

रैयली आई एम सो हैप्पी

कि कि तुम्हें कलेक्टर के द्वारा यह सर्टिफिकेट दिया जा रहा है ,तुम्हारी सारी इच्छाएं पूरी हो ,और भगवान तुम्हें खूब तरक्की दे ,मैं कल तुम्हारा वेट करूंगा

विकास

इस तरह से विकास का मैसेज पहली बार आया था, डॉली को देखकर कुछ अजीब लगा ,पर उसने इस बात को ज्यादा सोचा नहीं ,और इसका आंसर भी नहीं दिया

बह सो गई ,सुबह से जल्दी उठना था

सुबह राज ,डॉली ,और काकी तीनों अच्छी तरह से तैयार हो चुके थे

राज ने पहले ही डॉली को केसरिया हरा और सफेद तीनों कलर का एक मिलाजुला खूबसूरत सा सलवार सूट दिला दिया था जिसमें तिरंगे के तीनों रंग एक साथ थे

राज ने भी सफेद कुर्ता पजामा और काकी ने हरी बॉर्डर की सफेद रंग की कॉटन साड़ी पहनी हुई थी

तीनों जाने के लिए तैयार होकर जीप में बैठ गए ,और टाइम से मुख्यालय पर पहुंच चुके थे ,डॉली काकी और राज के साथ सामने डली कुर्सियों पर बैठ गई

नाम अनाउंस होने के साथ ही डॉली को स्टेज पर जाना था, प्रोग्राम शुरू हो गया भव्य स्टेज बनाई गई थी ,उस पर मुख्यालय के गणमान्य व्यक्ति बैठे हुए थे

झंडारोहण हुआ, सलामी दी गई, और उसके बाद शुरू हुआ सबके नाम का एनाउंसमेन्ट सबके नाम अनाउंस किए जा रहे थे

और सभी एक एक कर स्टेज पर जाते हुए अपने-अपने चेक, सर्टिफिकेट और शील्ड लेते जा रहे थे ,यह सारी चीजें कई क्षेत्रों मे दीं जा रही थी

आखिरकार 1 घंटे इंतजार करने के बाद डॉली का नाम भी स्टेज पर लिया गया

कुछ देर के लिए तो डॉली घबरा गई

क्योंकि वह पहली बार किसी इतने बड़े समारोह में आई थी, राज डॉली के चेहरे की घबराहट देख चुका था

उसने डॉली के हाथ पर अपना हाथ रखते हुए उसकी आंखों में देखा

और समझाया कि घबराने की जरूरत नहीं है ,मैं हर कदम पर तुम्हारे साथ हूं

डॉली ने एक बार राज की आंखों में देखा और हल्की सी कपकपाहट के साथ स्टेज की तरफ बढ़ने लगी ,,,

जब डॉली स्टेज पर गई तो वहां बैठे लोगों ने देखा कि, इतनी छोटी सी लड़की जिसकी उम्र यही कोई 20 ,21 साल है

और इतनी जिम्मेदारी का ,और इतना अच्छा काम किया है ,सब आश्चर्य से डॉली को देख रहे थे ,कलेक्टर साहब ने अपनी कुर्सी से उठते हुए शील्ड और प्रमाण पत्र डॉली के हाथ पर रखा ,और उसकी पीठ ठोकते हुए बहुत ही गर्व के साथ तालियां बजाना शुरू किया ,उसके बाद एक जोरदार तालियों की आवाज ग्राउंड में गूंज उठी

कलेक्टर साहब ने माइक अपने पास लिया और कहां ,,,,

डॉली जैसी लड़की को देखकर हमें बहुत कुछ सीखना चाहिए, एक इतनी छोटी बच्ची जिसकी अभी पढ़ाई भी पूरी नहीं हुई है नौकरी लगने के साथ ही 2 साल में अपनी आंगनबाड़ी को नंबर वन पर ला दिया है अगर हम सभी इसी तरह ईमानदारी

और पूरी मेहनत के साथ अपना काम करते रहे ,तो वह दिन दूर नहीं ,जब हमारे देश के भविष्य ,हमारे नन्हे मुन्ने बच्चे ,एक अच्छी ग्रोथ के साथ आगे बढ़ेंगे

कलेक्टर साहब एक उम्रदराज व्यक्ति थे

डॉली ने सर्टिफिकेट को टेबल पर रखते हुए दोनों हाथों से उनके पैर छुए

और धन्यवाद कहते हुए अपने सर्टिफिकेट लेकर स्टेज से नीचे आ गई

राज इकटक, लगातार ,बेसब्री से डॉली को देख रहा था ,एक एक पल उसे रोमांचित कर रहा था ,डॉली को आगे बढ़ता देख राज का सीना खुशी से चौड़ा हो गया था

डॉली जैसे ही स्टेज से उतरी राज अपनी कुर्सी से खड़ा हुआ ,और उसे हाथ देते हुए नीचे उतार लिया

डॉली वापस अपनी कुर्सी पर बैठ गई

डॉली और राज ,दोनों की ही आंखें भीगी हुई थी ,लेकिन वह एक दूसरे से कुछ बोल नहीं पा रहे थे,,,,,,
 
( दो महीने बाद )

डॉली को 15 अगस्त के समारोह में सर्टिफिकेट मिले हुए पूरे 2 महीने हो चुके थे अब तो डॉली का कॉन्फिडेंस और भी बढ़ गया था ,वह और भी ज्यादा मन लगाकर काम करने लगी थी ,इस बीच विकास अक्सर डॉली से कांटेक्ट करता रहता था कभी किसी फाइल को लेने के लिए ,कभी आंगनबाड़ी की एक्टिविटीज को पूछने के लिए ,तो कभी राज या काकी का हाल जानने के लिए ,इसके साथ साथ यह कोशिश भी करता, कि डॉली अपने काम में आगे बढ़े ,और बखूबी अपने काम को करे डॉली और राज के बीच सब कुछ सामान्य था ,यानी कि अब डॉली राज के नजदीक जाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं करती और राज इस बात से खुश था, कि डॉली पिछली बातों को भूलकर धीरे-धीरे अपने काम में आगे बढ़ रही है ,लेकिन डॉली के मन में क्या चल रहा था ,यह तो उसे ही पता था वह बिल्कुल पहले की तरह राज की देखरेख करती थी, उसकी चीजों की केयर

करती थी , उसका ध्यान रखती थी

पर जो बात राज को पसंद नहीं थी, कि डॉली उसके पास आए ,और उसके और अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने की कोशिश करे वह सारी कोशिशें डॉली ने बंद कर दीं थी

डॉली आज जब सुबह सो कर उठी तो विकास का मैसेजे फोन पर पड़ा हुआ था और शायद दो या तीन मिस कॉल भी थे डॉली मैसेज पढ़ने लगी

डियर डॉली!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

तुम्हें एक बहुत ही जरूरी इंफॉर्मेशन देनी थी आंगनबाड़ी में बहुत सारी वैकेंसी निकली हुई है, जिसमें कुछ अधिकारी है

सुपरवाइजर ,और भी कई तरह की वैकेंसी दी गई है ,तुम्हारा ग्रेजुएशन पूरा हो चुका है और फिर तुम्हारे पास आंगनबाड़ी का भी दो-तीन साल का एक्सपीरियंस है

तो इस बेस पर तुम्हें कुछ एक्स्ट्रा मार्क्स भी मिल जाएंगे ,मैं तुम्हें लिंक भेज रहा हूं

तुम सारा डिटेल एक बार अच्छी तरह से पढ़ लो ,और अपने हिसाब से सारे फॉर्म सबमिट कर दो, यह एक अच्छा मौका है

जब तुम अपनी जिंदगी में आगे बढ़ सकती हो ,और हां एक बार फॉर्म भरने के बाद मुझसे कांटेक्ट करना ,इस से रिलेटेड जो भी हेल्प होगी ,मैं कर दूंगा ,मैंने भी इसकी तैयारी की थी ,तो मुझे इसका अच्छा खासा

एक्सपीरियंस है ,,और मेरे पास इससे रिलेटेड जो भी बुक्स है, उसका भी कलेक्शन है, तो वह सारी बुक्स मुझसे ले लेना ,अगर कोई भी प्रॉब्लम हो

तो मुझे कॉल करना ,,,,,,

विकास

डॉली के लिए सच में यह बहुत अच्छी न्यूज़ थी ,उसने लिंक खोलकर देखी ,अच्छे से समझते हुए शाम को आंगनबाड़ी से आकर साइबर कैफे गई और ,और अपने मतलब के तीन चार फॉर्म सबमिट कर दिये

जब फॉर्म सबमिट कर के आई ,तो उसने विकास को कॉल किया और बताया कि जैसा आपने कहा था ,उसी के अनुसार मैंने फॉर्म सबमिट कर दीये है

पर सच बात तो यह है, कि मुझे अभी इन सब का कोई एक्सपीरियंस नहीं है

इसकी तैयारी कैसे और कितनी करना है इन सब में आपको ही मेरी हेल्प करनी होगी

विकास ने डॉली को भरोसा देते हुए कहा डॉली तुम्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है ,मैं बस समय मिलते ही दो-चार दिनों में तुम्हारे पास आता हूं ,और तुम्हें सब कुछ समझा दूंगा ,कि किस तरह से और कैसे इसके लिए तैयारी करनी होगी ,जहां तक मेरा ख्याल है ,तुम्हारे लिए सुपरवाइजर की जॉब के लिए तैयारी करना ज्यादा अच्छा होगा ,क्योंकि आंगनवाड़ी कोटे की वजह से तुम्हे उस में रिजर्वेशन भी मिलेगा ,और तुम्हारे काम और सैलरी में भी अच्छा खासा इंप्रूवमेंट होगा

जब डॉली ने राज को यह बात बताई तो राज भी बहुत खुश हुआ,,,

हां डॉली अपुन ने कहा था ना ,कि विकास सच में बहुत अच्छा लड़का है ,वह तेरी हर तरह से हेल्प करने के लिए तैयार है

देख तुझे जो भी परेशानी हो, जो भी पूछना हो ,तू उससे बिंदास कहना ,और सुन आज के बाद तुझे घर के कोई भी काम करने की जरूरत नहीं है ,2 महीने बाद तेरी परीक्षा है तो बस पूरे तन ,मन, धन से तो उसी की तैयारी में लग जा ,घर के काम में अपुन काकी की हेल्प करेगा ,और हां अपन छोटू की मां से भी बोल देगा ,घर के और जो भी काम होंगे ,उसमें वह काकी की हेल्प कर दिया करेगी ,पर तू अपने कमरे में रहकर इसकी पढ़ाई ही करेगी ,अपुन को विकास ने बताया था ,कि इसके लिए बहुत ज्यादा पढ़ाई की जरूरत होती है

24 घंटे मेहनत करनी पड़ती है ,तभी परीक्षा पास कर सकते हैं ,तो बस तेरी पढ़ाई भी आज से ही शुरू हो जाना चाहिए ,और हां इसके लिए तुझे जिन भी किताबों की जरूरत हो , बता देना ,अपन तेरे वास्ते सारी ले आएगा ,और अगर तू चाहे तो मेरे साथ शहर चल कर खुद ही ले लेना ,,,,,

डॉली ने कहा इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि विकास ने कहां है

कि वह आकर मेरी हेल्प कर देंगे ,अच्छा फिर तो ठीक है ,उसे तो इस सब की बहुत अच्छी जानकारी

होगी ,अगर वह सब कुछ बताएगा, तो तेरा परीक्षा पास करना पक्का ही है ,,,,,,,

और आज से ही डॉली पूरे तन मन धन से अपनी पढ़ाई में लग गई थी

डॉली सुबह 500 बजे ही उठ जाती, और फ्रेश होने के बाद 3,4 घंटे पढ़ाई करते हुये उसके बाद तैयार होकर आंगनबाड़ी जाती आंगनबाड़ी को शाम से 500 बजे आकर थोड़ी देर काकी के पास बैठती ,चाय नाश्ता करके फिर पढ़ने बैठ जाती , रात को सिर्फ खाना खाने ही बाहर के कमरे में आती थी खाना खाने के बाद रात को 1200 से 100 या कभी-कभी 200 तक अपनी पढ़ाई को कंटिन्यू करती रखती ,इस बीच राज भी कई बार आकर डॉली को कभी चाय तो कभी कॉफी देता ,कभी-कभी तो डॉली हाथ में किताब लेकर ही सो जाती, राज उसकी किताब अलग रखता ,और उसे चादर उड़ाते हुए लाइट बंद कर देता,,,,,

काकी और राज डॉली का पूरा ध्यान रख रहे थे ,,राज ने छोटू की मां से कह कर उसे भी घर के काम के लिए बुला लिया था

तो वह काकी का अच्छे से हाथ बटा देती थी

अब परीक्षा के लिए कुल 8 दिन ही बचे थे यह 2 महीने कैसे निकल गए ,पता ही नहीं चला ,इस बीच विकास भी तीन चार बार शहर से डॉली के पास आ चुका था अच्छी-अच्छी किताबें डॉली के लिए लाता तो कभी नोट्स बना कर दे जाता ,कैसे परीक्षा देना है ,कितना

लिखना है, किस तरह से समझाना है, वह सब कुछ निली को समझा रहा था , वह जब भी आता दो-तीन घंटे की एक अच्छी सी ट्यूशन डॉली को दे जाता था जिस तरह से विकास ने मैथ्स पढाने में डॉली की हेल्प की थी, और डॉली आगे बढ़ी थी ठीक इसी तरह एक बार फिर से विकास उसकी हेल्प कर रहा था,,,,,

आखिर वह दिन आ ही गया, जब डॉली तैयार हो गई थी ,शहर जाकर परीक्षा देने के लिए, राज डॉली के साथ यहां से निकल चुका था ,और विकास का भी फोन आ गया था ,कि वह परीक्षा केंद्र के बाहर डॉली को बेस्ट ऑफ लक कहने के लिए खड़ा है और आप दोनों का वेट कर रहा है

जब राज डॉली को लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचा तो विकास सच में ,वहां पहले से मौजूद था उसने एक बार डॉली को फिर से समझाया उसे हौसला दिया, और उसकी परीक्षा के लिए बेस्ट ऑफ लक बोला,,,,

दूर खड़ा राज यह सब देख रहा था

लेकिन परीक्षा केंद्र के अंदर जाते जाते ही एक बार डॉली ने मुड़कर राज को देखा

और दौड़कर राज के पास आ गई

राज घबराते हुए बोला , महारानी क्या हुआ तू ऐसे वापस क्यों आ गई

डॉली झुकी और राज के पैर के पास पड़ा हुआ एक पत्थर अपनी मुट्ठी में बंद किया और कैंपस में लगे हुए फाउंटेन के पास पहुंचकर उल्टी खड़ी हो गई ,उसने

पत्थर को कस के अपनी मुट्ठी में बंद कर रखा था

और आंखें मूंदकर अपनी विश मांगने लगी थोड़ी ही देर बाद उस पत्थर को अपने पीछे फेंक दिया, जो उसके पीछे लगे हुए फाउंटेन के पानी में जाकर गिरा ,,,,,,

यह देखकर राज के होठों पर मुस्कान आ गई ,,, महारानी यह बात तुझे अभी तक याद है ,कि जब तू पहली बार परीक्षा देने जा रही थी ,और डर रही थी ,,,,,,,

तभी डॉली बीच में बोल पड़ी,,,

हां राज मुझे अभी तक याद है, और आपने मुझसे कहा था कि इस पत्थर को टेंशन समझ और इसे खुद से दूर कर दे

फिर तेरे साथ सब कुछ अच्छा ही अच्छा होगा, और मैं जब भी परीक्षा देने जाती हूं

तो हमेशा ऐसे ही करती हूँ

यह सुनकर राज के होठों पर मुस्कान आ गई थी ,अब तक परीक्षा केंद्र का सटर भी बंद होने लगा था ,राज ने हाथ पकड़ते हुए जल्दी से डॉली को शटर के अंदर भेजा

और और जब डॉली अंदर चली गई तो एक चैन की सांस ली ।

राज को शहर में कुछ काम भी थे ,और डॉली की परीक्षा में पूरे पूरे 3 घंटे लगने वाले थे ,राज को शहर की तरफ तो जाना ही था इसलिए विकास भी उसके साथ ही जीप में बैठ गया ,,,

राज डॉली को आगे बढ़ता देखना चाहता था

और विकास इसमें डॉली की हेल्प कर रहा था

राज डॉली की जितनी तारीफ करता विकास डॉली के बारे में सोचकर उतना ही खुश होता

राज ने विकास को बताया था ,कि डॉली ने कितनी मेहनत की है ,और कैसे अपनी ही मेहनत के दम पर वह आगे बढ़ी है

और विकास इस चीज को अच्छी तरह से समझता था, क्योंकि वह खुद भी मेहनत करके इस मुकाम पर पहुंचा था

बातों के दौरान राज को नजर आ रहा था कि विकास डॉली की कितनी चिंता कर रहा है ,और उसकी खुशी से कितना खुश है

राज विकास के चेहरे में देखते हुए बार-बार कुछ समझने की कोशिश कर रहा था

वह देखना चाहता था ,कि विकास के दिल में डॉली के लिए कितनी जगह है

राज देख रहा था, कि डॉली की बातें करते हुए विकास के चेहरे पर खुशी आ जाती है और इस साफ दिख रहा था ,कि वह डॉली के लिए कितना कुछ कर रहा है

यह भी बातें करते विकास और राज मार्केट में आ गए थे ,अब राज को यहां पर कुछ काम था ,और विकास के भी ऑफिस का टाइम हो रहा था, तो उसने राज से इजाजत ली और ऑफिस के लिए निकल गया ,राज ने कुछ ढाबे की ,और घर के जरूरी सामान की शॉपिंग की ,और डॉली की परीक्षा खत्म होने के कुछ समय

पहले ही वापस डॉली को लेने सेंटर जा पहुंचा

जैसे ही घंटी बजी, सारे बच्चे एक एक करके बाहर निकलने लगे थे, राज की आंखें डॉली को देख रही थी

थोड़ी देर बाद डॉली थी बाहर आती हुई दिखी, राज का ध्यान तो डॉली के चेहरे पर ही था ,कि वह खुश लग रही है या नही क्योंकि डॉली के अंदर जो भी होता था

सब कुछ उसके चेहरे पर आ जाता था लेकिन जब राज ने देखा कि वह काफी संतुष्ट और खुश दिख रही है

तो हंसते हुए कहा, महारानी तेरी परीक्षा अच्छी गई है न

डॉली ने खुश होते हुए कहा हां,,,,

एग्जाम तो बहुत अच्छा गया है, पर फिर भी परिणाम क्या होता है ,यह तो कुछ दिनों बाद ही पता चलेगा,,,,,

महारानी तू इस परीक्षा में निकाल ही गई आप ऐसा कैसे कर सकते हैं

यह मैं नहीं मेरा दिल कह रहा है

अरे तूने दिन रात मेहनत की है , तेरी मेहनत ऐसे ही थोड़ी ना बर्बाद हो जाएगी

सुबह 1000 बजे से , अभी दोपहर के 100 बज चुके थे

राज समझ गया था , कि डॉली ने जाते समय तो कुछ खाया नहीं था, अभी वह जरूर भूखी हो गई होगी, लेकिन अगर यहां पर रुकता तो गांव पहुंचने में देर हो जाती ,,,इसलिए वह बाजार से आते वक्त ही डॉली के लिए उसकी पसंद का ढेर सारा खाना पैक करा कर ले

आया था

डॉली भूख से परेशान हो रही थी

पर जब गाड़ी में पीछे की सीट पर सारी अपनी पसंद की चीजें उसने देखी, तो सबसे पहले हाथ धोकर वही खाना खाने बैठ गई जल्दी जल्दी से उसने सारी चीजों को चख लिया था ,जब भूख थोड़ी कम हुई तब उसे याद आया की राज ने भी कुछ नहीं खाया होगा, और एक प्लेट लगाते हुए राज की तरफ़ बढ़ाई, राज बड़े ध्यान से उसके चेहरे की तरफ देखते हुए हंस रहा था

महारानी पहले तू ठीक से खा ले ,मुझे इतनी भूख नहीं है ,,,,,

हां आपको भूख क्यों होगी

अभी दोपहर के सिर्फ एक ही तो बजे हैं

और अब तक तो आप तीन चार बार खा चुके होंगे ,डॉली जरा गुस्से में राज से बोल रही थी,,, प्लेट राज के हाथ पर रखी और वापस खाना खाने लगी, जब जी भर के डॉली खाना खा चुकी,,,,

तब उसने कहा राज अब हम घर चलते हैं राज ने गाड़ी बढ़ाई और अपने गांव की तरफ चल दिया,,,, शाम को 45 बजे तक दोनों घर आ चुके थे

काकी तो डॉली को देख कर ही समझ गई थी ,कि इसका पेपर बहुत अच्छा गया है थोड़ी देर बाद विकास का भी फोन आ गया था ,वह भी डॉली से परीक्षा के बारे में पूछ रहा था, कि डॉली दोपहर में ,तो मैं ऑफिस में बिजी रहा ,इसलिए तुमसे बात ही नहीं हो पाई ,सब कुछ सही तो रहा

हां विकास मेरा पेपर बहुत अच्छा गया है बाकी तो रिजल्ट के बाद ही पता चलेगा आपने बिल्कुल जैसा समझाया था ,मैं सब कुछ वैसा ही करके आई हूं ,और सच में आप के नोट्स तो कमाल के थे, उसमें से बहुत सारे क्वेश्चन मेरी परीक्षा में आए हैं

और मुझे बहुत हेल्प मिली है उनसे

विकास समझ चुका था, कि डॉली का पेपर अच्छा गया है ,उसने भी कहा डॉली जहां तक मैं समझता हूं , आप परीक्षा जरूर पास करोगी ,,,,,

फिर क्या उस दिन के बाद डॉली, काकी राज और विकास चारों को डॉली के रिजल्ट का इंतजार हो गया था

आजकल तो रिजल्ट ऑनलाइन ही आ जाता है ,तो ज्यादा टाइम नहीं लगता ,बस एक महीने बाद ही डॉली का रिजल्ट आ गया था डॉली आंगनबाड़ी में थी, और तभी विकास का फोन आया ,,डॉली तुम्हारा रिजल्ट आ चुका है,जल्दी से चेक करो,,,,,,,,,

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डॉली आंगनबाड़ी में थी तभी , विकास का फोन आया ,और विकास ने डॉली को बताया डॉली तुम्हारा रिजल्ट आ चुका है

जल्दी से चेक करो, डॉली और राज के जितना एक्साइटमेंट डॉली के रिजल्ट का विकास को भी था ,अच्छा !डॉली भी रिजल्ट की बात सुनकर एक्साइटेड हो गई थी

उसने कहा विकास मैं रिजल्ट देख कर आप से बात करती हूं ,और फोन बंद करके जल्दी से अपना एडमिट कार्ड बैग मै से निकाला और रोल नंबर देखते हुए रिजल्ट चेक करने लगी।

रिजल्ट ओपन हो रहा था ,जैसे ही आया एंटर योर रोल नंबर ,डॉली ने जल्दी से 1,1 नंबर मिलाते हुए अपना नंबर एंटर किया और बस कुछ ही सेकंड में डॉली का रिजल्ट उसके सामने था ,डॉली का नाम ,उसकी फोटो ,एग्जाम सेंटर, सब कुछ आ चुका था और राइट साइड बॉटम में लिखा हुआ था क्वालिफाइड डॉली खुशी से उछल पड़ी उसने जल्दी से एक स्क्रीनशॉट लिया और दोबारा विकास को फोन लगाने लगी,

क्योंकि उसमें क्वालिफाइड तो लिखा था

लेकिन डॉली को अभी तक ठीक से समझ में नहीं आया था ,कि सिर्फ क्वालीफाई करने से ही क्या उसको नौकरी मिल जाएगी, या फिर इसके लिए कोई और एग्जाम या फिर मेरिट लिस्ट बनेगी ,इसलिए उसने जल्दी से वह स्क्रीनशॉट विकास को भेजा, और उसका फोन भी ट्राई करने लगी, विकास भी डॉली के फोन के इंतजार में ही था

जैसे ही डॉली का फोन आया विकास ने पहली ही रंग में फोन उठा लिया

हां डॉली, बोलो क्या हुआ ,अभी तक डॉली कंफर्म नहीं थी ,इसलिए बहुत आराम से बोली, विकास मैंने अपने रिजल्ट का स्क्रीनशॉट लेकर आपके व्हाट्सएप पर सेंड किया है ,प्लीज आप उसको एक बार चेक करके मुझे बताइए ,मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा ,बात करते हुए ही विकास ने व्हाट्सएप चेक किया, और जब देखा कि क्वालीफाई है , तो खुशी से चीखते हुए कहा डॉली तुम पास हो गई हो !!!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

विकास सच में !!!

अरे पागल लड़की इतना भी नहीं पता सीधा सीधा लिखा हुआ है ,कि क्वालीफाई !!विकास को अपने कहे शब्द याद आए उसने कहा सॉरी डॉली मैं कुछ ज्यादा ही एक्साइटेड हो गया था ,और तुम्हें पागल कह दिया, डॉली ने हँसते हुए कहा विकास मैंने बुरा नहीं माना ,पर पहले आप यह बताइए कि सिर्फ पास होना

हां हां डॉली इसमें सिर्फ क्वालीफाई या अनक्वालिफाइड ही आता है, सुपरवाइजर की सीधी भर्ती होती है ,तुम हंड्रेड परसेंट पास हो, बस अब में जल्दी से तुम्हारे घर आ रहा हूँ ,तो मेरे लिए अच्छी सी मिठाई का इंतजाम कर लो ,डॉली ने कहा

बिल्कुल ,,,, पर इसका उतना ही श्रेय आपको भी जाता है ,आपने भी मेरी बहुत हेल्प की है अगर आप मेरी हेल्प नहीं करते, तो शायद मैं यह परीक्षा पास नहीं कर पाती, आप जब मुझे ट्यूशन पढ़ाने आते थे ,उसके बाद ही मेरा मैथ्स में इम्प्रूव मेन्ट हुआ था

और कहीं ना कहीं आपका ही हाथ था

और इसमें भी आपका ही हाथ है

मैं अकेले कुछ भी नहीं कर पाती, मुझे तो यह भी पता नहीं था ,की वैकेंसी आ गई है अगर आपने उस दिन मुझे मैसेज ना किया होता ,तो मैं तो फॉर्म ही नहीं डालती, आपने फॉर्म डालने के लिए कहा ,मेरा हौसला बढ़ाया ,और मुझे अपने सारे नोट्स भी दिए और तभी मैं क्वालीफाई कर पाई हूं

थैंक यू सो मच !!!!!!

जब डॉली ने बात खत्म की ,तो देखा कि डॉली के पीछे खड़ा राज मुस्कुरा रहा है राज भी डॉली के रिजल्ट की बात सुनकर ही ढावे से सीधे ही डॉली के पास आंगनबाड़ी आ गया था ,जिससे कि वह उसे बता सके कि उसका रिजल्ट आ चुका है

पर जब उसने देखा कि डॉली विकास से बात कर रही है ,तो वह भी सुनने लगा, और उसने सुन लिया था ,कि

डॉली इस एग्जाम में पास हो गई है ,डॉली राज की तरफ देख रही थी ,राज ने आगे बढ़ते हुए डॉली का हाथ पकड़कर उसे घुमा दिया ,और खुशी से खुद भी उछल पड़ा ,महारानी तू पास हो गई है ,अपन ने अभी सुना ,,,अब तो तू सीधे ऑफिसर बन जाएगी ,अरे कई आंगनबाड़ी तेरे अंडर में होंगी, डॉली मैं बहुत खुश हूं ।

अच्छा बता इस खुशी के मौके पर तुझे क्या चाहिए ,यह बात सुनकर डॉली का चेहरा शांत हो गया , उसने राज की तरफ देखते हुए कहा ,राज मैं जो चाहती हूं ,वह आप मुझे दे नहीं सकते ,और जो जो आप दे सकते हैं ,वह सब कुछ मेरे पास पहले से है मुझे किसी भी चीज की कमी नहीं है

आपने मेरे मांगने से पहले ही मेरी हर जरूरत को पूरा किया है ।

तभी राज ने डॉली का पर्स उठाया और कहां डॉली पहले घर चल ,काफी को भी ये खुशखबरी सुनाना है , राज डॉली का हाथ पकड़कर खींचता जा रहा था

और डॉली राज से कह रही थी

राज अभी आधा घंटा बाक़ी है आंगनबाड़ी बंद होने में ,मैं आ जाऊंगी ना ,आप जाइए

नहीं सहजादी आधा घंटा ही तो है ,यह जो दूसरी बहन जी हैं, वह सब संभाल लेंगी तू घर चल ,और डॉली को अपने साथ घर ले आया ,,,राज बाहर से ही काकी को आवाज लगाते हुए अंदर आ गया ,काकी देख अपनी

डॉली पास हो गई है ,और तुझे पता अभी यह ऑफिसर कह लाएगी, अब ऐसी कई आंगनबाड़ी इसके अंडर में रहेगी

इसकी सैलरी के पैसे भी बहुत बढ़ जाएंगे और सब इसके आगे पीछे घूमेंगे

अरे ये इतनी बड़ी ऑफिसर बन गई है ,इसको पैदल थोड़ी ना आँगनबाड़ी भेजूंगा ,और कुछ दिनों बाद शायद इसे गाड़ी भी मिल जाए ।

डॉली राज की बाते सुनते हुए चुपचाप सोफे पर बैठ गई थी ,राज के बिना तो उसकी हर खुशी अधूरी थी ,जब राज बोल चुका ,तो डॉली ने एक गिलास पानी का भरते हुए राज को दिया ,और बोली राज ऐसा कुछ नहीं है ,अभी मुझे सरकार की तरफ से कार,वार कुछ नहीं मिलेगी ।

हां पर सुपरवाइजर की पोस्ट भी बहुत अच्छी होती है ,मेरी सैलरी में काफी इंप्रूवमेंट होगा ,और इसके बाद हम लगातार और बड़ी पोस्ट के लिए भी परीक्षा दे सकते हैं

और धीरे-धीरे मैं और ऊपर पहुंच सकती हूं राज ने जल्दी से अपना हाथ आगे बढ़ाया और डॉली से कहा ,डॉली अपना हाथ मेरे हाथ के ऊपर रखकर कसम खा ,कि तू अपनी जिंदगी में हमेशा आगे बढ़ने के बारे में सोचेगी ,कभी पीछे मुड़कर नहीं देखेगी

अपन तेरे को टॉप पोजीशन पर देखना चाहता है ,जैसे वह विकास है ना

बिल्कुल वैसे ही ,डॉली अगर विकास तेरा साथ देता

रहा ना ,तो 1 दिन तू उसकी बराबरी पर पहुंच जाएगी।

इस बात पर डॉली गुस्से से उठी ,और राज को घूरते हुए अंदर चली गई

लेकिन राज ने डॉली को देखा ही नहीं

वह तो डॉली के लिए सपने देखने में लगा था
 
दूसरे दिन शाम को जैसे ही डॉली घर आई तो देखा ,कि सरकारी गाड़ी बाहर खड़ी थी उसमें ड्राइवर के साथ ,एक और बंदा बैठा था ,डॉली को कुछ समझ नहीं आया वह जल्दी से घर के अंदर गई ,तो देखा कि विकास, राज और काकी के साथ बैठकर डॉली की ही बात कर रहा था

डॉली को देखते ही विकास ने मुस्कुराते हुए कहा कांग्रेचुलेशन डॉली ,,,,मैं बिलीव ही नहीं कर पा रहा हूं ,कि सिर्फ दो-तीन महीने की पढ़ाई से ही तुमने, exam क्लियर कर लिया है ,कुछ बच्चे तो सालों की ट्यूशंस के बाद भी ,,इस एग्जाम को नहीं निकाल पाते ।

डॉली मुझे पूरा भरोसा है ,कि तुम बहुत आगे जाओगी, अगर तुमने सिर्फ 2 महीने की पढ़ाई में इसे क्लियर किया है, तो यकीन मानो आगे के एग्जाम भी तुम्हारे लिए मुश्किल नहीं होंगे, डॉली मैं इंतजार करूंगा कि तुम्हें अपनी बगल वाली सीट पर बैठा हुआ देखू,,, यह बात कहते हुए विकास का चेहरा, उसकी आंखें, बहुत

कुछ कह रही थी इस एक बात के पीछे बहुत सारे मतलब छुपे हुए थे ,जब उसने अपनी बात पर गौर किया तो थोड़ी शर्मिंदा होते हुए बात को संभालते हुये बोला ,डॉली मेरे कहने का मतलब है

कि बहुत जल्द ही तुम

महिला बाल विकास अधिकारी

की पोस्ट पर भी पहुंच पाओगी, एक्सपीरियंस के साथ साथ तुम्हारे नॉलेज में भी इप्रूवमेंट होगा,,,,

थैंक्यू कहते हुए डॉली भी सामने डले सोफे पर काकी के पास बैठ गई थी

काकी ने डॉली की चाय भी बना कर ही रखी थी ,क्योंकि उसे पता था कि 500 बज चुके हैं ,डॉली आने ही वाली होगी, डॉली अब आगे तुमने क्या सोचा है ,डॉली विकास का चेहरा देखने लगी,,,

मतलब मैं कुछ समझी नहीं ।

मतलब कि अगर तुम सुपरवाइजर की पोस्ट पर जाओगी ,तो यह जरूरी नहीं है ,कि वह तुम्हें इसी एरिया में पोस्टेड करें ,कहीं बाहर भी भेज सकते हैं ,और इसके लिए तुम्हें मेंटली तौर पर तैयार रहना होगा

बस 1 महीने के अंदर ही तुम्हें कॉल लेटर आ जाएगा ,और उसमें जगह का नाम और जॉइनिंग की डेट भी लिखी होगी ,मेरे कहने का मतलब है ,कि तुम इस बात के लिए तैयार रहना ,कि तुम्हें कभी भी बाहर जाना पड़ सकता है ।

तब राज ने विकास की तरफ देखते हुए कहा ,विक्की

यह तो तूने टेंशन वाली बात बता दी, अरे अपनी शहज़ादी अकेली कहां जाएगी ,यह तो कभी शहर भी अकेली नहीं गई ,तो यह कहीं पर अकेली रहेगी कैसे

नहीं ,,,नहीं ,,,मैं इसको ऐसे अकेले कहीं भी नहीं भेजूंगा ।

तब विकास ने राज को समझाते हुए कहा राज भैया ,आप चिंता मत कीजिए ,अरे आजकल तो सभी लड़कियां घर से अकेले ही बाहर रहती हैं ,अब कोई डर नहीं है

और फिर अगर डॉली को अपनी जिंदगी में तरक्की करना है ,आगे बढ़ना है ,तो उसे सब कुछ सीखना ही होगा ,आखिर कब तक आप उसके साथ रह सकते हैं !

एक दिन तो उसे यहां से जाना ही होगा

यह सुनकर राज के मन में एक टीस सी उठने लगी थी

वह विकास से नजरें चुराते हुए बोला

हां विकी तू ठीक कह रहा है ,आखिर मैं कब तक शहज़ादी का साथ दे सकता हूं

इसे खुद ही अकेला रहना ,सीखना ही होगा पर तू चिंता मत कर ,अपुन की डॉली बहुत हिम्मत वाली है ,वी सब कुछ संभाल लेंगी क्यों डॉली

जी !!!

राज डॉली के मन के डर को समझ गया था

कि वह तो रात को सोते सोते छिपकली से ही डर जाती है ,या कभी कोई बुरा सपना देखती, तो उसकी चीख निकल जाती है अकेले रहने के बारे में तो वह सोच भी नहीं सकती, कहीं डॉली ऊंचाइयों पर पहुंचने से पहले ही लड़खड़ा ना जाए ,यह सोचते हुए राज जल्दी से उठा ,और जाकर डॉली के बगल में बैठ गया ,डॉली की तरफ देखते हुए बोला ,महारानी इधर देख !

तू सच में डर रही है क्या, डॉली अभी भी सिर झुकाए बैठी थी ,राज ने अपने हाथ से डॉली का चेहरा अपनी तरफ किया ,और उसकी आंखों में देख कर बोला , ये,,,,महारानी तुझे डरने की कोई जरूरत नहीं है

अगर कोई भी बात मन में है ,बिंदास अपन के सामने रख दे, अपुन कुछ भी करेगा पर तुझे हिम्मत नहीं हारने देगा

अरे अगर ऐसी कंडीशन आती है ,कि वह तुझे जब

बाहर भेजते हैं ,तो अपुन काकी को तेरे साथ भेज देगा ,अपुन का क्या अपन तो कैसे भी यहां रह लेगा ,अपने लिए तो ये छोटू ,बंटू सभी है, अरे अपन तो ढाबे पर खाकर घर पर सो जाएगा ,इससे ज्यादा करना ही क्या है, डॉली ने अपनी बड़ी-बड़ी पलके एक बार झुकाते हुये हां में, जवाब दिया ,कि वह ठीक है ।

तब राज जल्दी से उठ कर विकास के पास गया ,और विकास से कहने लगा, अरे विकी तू डॉली के लिए कोशिश कर ना

इसका ट्रांसफर इस एरिया में हो जाए, वह इसको यही पर रहने दे ,कहते हैं कि नौकरी लगने से पहले ही यह कोशिश कर ली जाए तो मनचाही जगह मिल जाती है

तेरी तो बहुत ऊँचे तक पहुँच होगी,एक बार बात करके देख ना ,,,,

विकास ने तो ये सोचा ही नहीं था

उसने कहा राज भैया यह बात भी सही है

मैं कल ही ऑफिस पहुंचकर पता करता हूं कि अगर ऐसा हो सकता है ,तो फिर गांव के आसपास के एरिया में ही डॉली की पोस्टिंग करवाता हूं ,उसके बाद अगर डॉली को कहीं टूर के लिए जाना होगा, तो इसे ऑफिस से गाड़ी मिलेगी ,और आराम से शाम होते-होते वापस घर भी आ जाएगी, विकास की बात सुनकर राज को थोड़ी तसल्ली हुई थी,,,,,,,
 
जबसे राज और विकास के बीच नीले के ट्रांसफर को लेकर बात हुई थी

विकास लगातार कोशिश कर रहा था, कि वह डॉली का ट्रांसफर कहीं बाहर ना होने दें उसका मूल निवास ,या फिर उसके अकेली रहने की मजबूरी को दिखाते हुए उसी एरिया में उसकी पोस्ट करवा सके, इसके लिए रोज किसी न किसी ऑफिस के चक्कर लगा रहा था ,कहीं कोई पेपर कम है ,तो कहीं किसी दूसरे ऑफिस मैं जाओ ,,,यही सब चल रहा था।

ऑफिस जाने से पहले, और ऑफिस से आने के बाद, वह डॉली के काम ही कर रहा था ,15 दिन निकल चुके थे, मैं अपनी तरफ से सारी कोशिश कर चुका था।

एप्लीकेशन भी सबमिट कर दी थी, बस अब उसे इस काम में कितनी सफलता मिलती है यह तो डॉली के जॉइनिंग लेटर के बाद ही पता चलता ,इधर डॉली काकी और राज के साथ-साथ पूरा गांव भी बहुत खुश था

डॉली को लेकर ,डॉली ने काम ही ऐसा किया था, अपने नाम और अपने काम से इस गांव का नाम आगे बढ़ाया था।

इस गांव में तो सुपरवाइजर होना भी बहुत बड़ी बात थी ,जहां लड़कियां चूल्हे चौके से आगे नहीं निकलती थी, डॉली ने पढ़ लिख कर और इतनी अच्छी नौकरी करके, एक मिसाल कायम की थी ।

जब से डॉली कि नौकरी लगी, उसमें कॉन्फिडेंस आता ही जा रहा था ,और फिर उसकी ड्यूटी भी थी ,कि गाँव के सभी घरों में जाकर लोगों में पढ़ने लिखने की

साफ सफाई की ,आगे बढ़ने की जागरूकता फैलाए ,और हर तरह से उनका सपोर्ट करे। डॉली तो वैसे भी गांव वालों से बहुत करीबी से जुड़ी हुई थी ,यही तो वह गांव था

जिसने उसे सहारा दिया, ना वो धोखे से भागती हुई यहां आती ,ना उसे राज और काकी मिलते ,और ना वह ये सब कर पाती कभी-कभी तो डॉली का दिल कांप उठता था यह सोचते हुए ,कि अगर राज और काकी उसकी हेल्प ना करते, तो पता नहीं आज वह किस हाल में ,और कहां होती

तो बस इसी तरह डॉली अपने आंगनबाड़ी के काम में जी जान से लगी हुई थी आखिरकार पूरे 26 दिन बाद डॉली का

कॉल लेटर गांव में आ गया था

डाकिया जैसे ही लेटर लेकर घर आया

कि राज ने खुश होटे हुये , डॉली को अंदर से बुलाया ,डॉली ने साइन करके वह जॉइनिंग लेटर लिया,और खोलकर पड़ने लगी,,,,,

मिस डॉली वर्मा

आपको सूचित किया जाता है, कि

आपको सुपरवाइजर पोस्ट के लिए चयनित किया जाता है

आपको नीचे लिखी हुई डेट के अनुसार अपने पद का कार्यभार संभालना होगा

और इसके लिए आपके अंडर में आसपास के 10 गांव की आंगनबाड़ियां रहेंगी

जो जिला देवपुर में आती है

इन दस आंगनबाड़ियों के ,किसी भी गांव में आप अपना हेड क्वार्टर बना सकती हैं

धन्यवाद!

जैसे ही डॉली ने पढ़ना बंद किया, कि राज खुशी से उछल पड़ा ,अब डॉली इसी गांव यानी कि(धनेरा) में ही रहेगी ,पहले तो इस जगह का कोई खास नाम नहीं था

लेकिन जब से राज यहां रहने आया

ढाबे का चलना शुरू हुआ, और जब धीरे-धीरे घरों की संख्या 500 के ऊपर पहुंच गई ,तो सरकार ने यहां एक प्राइमरी स्कूल और आंगनवाड़ी खोलने की मंजूरी दे दी थी और तब यहां पर नाम का रजिस्ट्रेशन जरूरी हो गया था, इस गांव का नाम गांव के ही सभी लोगों ने मिलकर तय किया था

गांव वालों की नजर में धनेरा का मतलब होता है ,जहां पर धन धान्य की कोई कमी ना हो ,और सभी तो अपने

गांव को फलता फूलता हुआ ही देखना चाहते थे, इसलिए इस जगह का नाम धनेरा रख दिया गया था और फिर देवपुर जिला की जो 10 आंगनबाड़ियों डॉली को दी गई थी

उसमें से एक यह भी थी ,तो डॉली आराम से अपना हेड क्वार्टर यहां बना सकती थी । आखिरकार विकास की मेहनत भी सफल हो गई ,अब राज पूरी तरह से निश्चिंत हो गया था ,डॉली को कहीं बाहर आने जाने की परेशानी नहीं होगी ,और वह आराम से अपनी नौकरी कर पाएगी ,राज ने पहले से ही इस दिन के बारे में कितना कुछ सोच रखा था ,कि जैसे ही डॉली को कॉल लेटर आएगा वह पूरे गांव की एक शानदार दावत करेगा

राज ने पहले अंदर जाकर काकी को खुशखबरी सुनाई ,और फिर भागता हुआ ढाबे पर आया ,और पास ही रखी कुर्सी पर चढ़ते हुए ,हाथ में पेपर को फोल्ड करके अनाउंसमेंट करने लगा ,,,,

सुनो ,,,सुनो,,, सुनो,,, अपुन की डॉली का लेटर आ चुका है ,नौकरी के साथ-साथ एक और खुशखबरी है ,शहज़ादी की नौकरी इसी गांव में लग गई है ,अब उसे गांव छोड़कर नहीं जाना पड़ेगा ,तो बस इसी खुशी में कल गांव वालों की एक शानदार दावत होगी सुबह से घर में पूजा होगी ,भगवान शिव का अभिषेक होगा ,जो डॉली खुद अपने हाथों से करेगी ,और उसके बाद सारे गांव वालों का शानदार खाना होगा ,,,

इसकी तैयारी तो अपुन ने पहले से ही लगा रखी थी ,सारा सामान आ गया है

बस अपन अच्छे दिन का इंतजार कर रहा था अभी वैसे भी सावन का महीना चल रहा है और काकी कहती है, कि सावन के महीने में तो शिव जी कुछ जल्दी ही प्रसन्न हो जाते हैं तो बस सब कुछ कल ही होने वाला है

छोटू ,बंटू और होय सुनील तू भी सुन

तू अभी के अभी जाकर पूरे गांव में अनाउंसमेंट करवा दे, कि कल किसी के यहां चूल्हा नहीं जलेगा, सब यहीं पर खाना खाएंगे ,और हां सुबह से काम करवाने के लिए भी सबको आना है

और तुम सब भी सुनो ,,कल सुबह 500 बजे ही नहा धोकर ढाबे पर चले आना

सारा खाना ढाबे पर से ही बनेगा

ढावे के बाहर ही दो टेंट लगवा दे ,उसके नीचे सब खाना खाएंगे, पंडित जी को तो मैं पहले ही बता चुका हूं ,,,

उन्होंने कहा था कि हम पूजा किसी भी दिन करवा सकते हैं, पर पूजा सुबह सुबह ही होगी ,तो बस कल सुबह 700 बजे से शुरू होगा ,शिव पूजन ,,, और सुबह 1000 बजे तक खत्म हो जाएगा ,उसके बाद दावत शुरू तो बस अपने अपने काम अच्छे से समझ लो और उसे आपस में बांट लो

अब अपन दोबारा नहीं बताएगा ,किसको क्या करना है ,,,,

सबने खुश होते हुए राज को देखा और कहा राज भैया आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं है ,अरे अपन सब संभाल लेंगे

ठीक है ,,,,

राज खुशी-खुशी और भी इंतजाम करने ढाबे से निकल गया ,उसने गाड़ी उठाई और जिसके यहां जाने की जरूरत थी

गांव में एक चक्कर लगाकर सारे काम निपटाते हुए शाम तक घर आ चुका था

घर आकर उसने काकी और डॉली को भी सारा काम समझा दिया था

काकी तो बहुत दिनों से इस पूजा के पीछे पड़ी हुई थी ,पर कहते हैं ना, जब भगवान की मर्जी होती है ,तभी किसी काम को अंजाम मिल पाता है

और शिव पूजा का मुहूर्त शायद कल का ही होगा ,,,,

आज रात को सब जल्दी ही सो गए थे

और काकी उसको तो रात में नींद ही कहां आई , बह तो सुबह 400 बजे ही उठ गई

वह जैसे ही नहा धोकर फ्री हुई ,की ढाबे के सभी लड़के भी दरवाजे पर आकर खड़े हो गए थे ,,पर राज अभी भी गहरी नींद में था काकी ने उसे उठाना ठीक नही समझा

छोटू बंटी को ही सारा काम समझा दिया था ,बैसे भी उन्हें तो पहले से ही पता था

कि क्या होना है ,,,वह ढाबे पर जाकर मिठाइयों की तैयारी करने लगे ।

इधर डॉली भी उठ गई थी ,डॉली और काकी ने घर में पूजा की सारी तैयारियां अच्छी तरह से कर ली थी ,जब सुबह के 700 बजे तब जाकर राज को भी उठा दिया

राज उठते साथ ही काकी को बड़बड़ करने

लगा ,,काकी तू अपन को इतना लेट उठा रही है ,अरे कितनी देर हो गई ,वह पंडित भी आता होगा ,,और बढ़बढ़ाते हुए ही वह जल्दी से नहा धोकर तैयार होकर सफेद कुर्ते और पीली धोती में बाहर आ गया था

डॉली ने पूजा की तैयारी करते हुए एक नजर राज पर डाली,बिल्कुल वैसे ही पीले वस्त्र डॉली के हाथ में भी थे,जो शिव जी को पहनाने के लीये रखे थे ।

राज को देखकर काकी खुश हो गई

कितना अच्छा लग रहा था ,वह इन कपड़ो में ,,,,और बोली ,बेटा सारा काम हो चुका है तुझे चिंता करने की जरूरत नहीं है

और तब तक ठीक 715 बजे पंडित जी और दो लोगों के साथ घर के अंदर आ गए थे ढाबे पर खाने का काम चल रहा था ।

और इधर काकी के कुछ खास लोग अंदर पूजा में सम्मिलित होने के लिए आ गए

डॉली पूजा में बैठ चुकी थी, पूजा शुरू हो गई ,और पंडित जी एक एक करके डॉली को समझाने लगे ,डॉली के सामने ही काली मिट्टी से बना शिवलिंग रखा हुआ था

जिसको पीतल के एक बड़े से थाल में रखा गया ,पंडित जी शिवजी का अभिषेक करवा रहे थे ,,मंत्र उपचार करने के साथ ही डॉली को बताते जा रहे थे,,,,

कि पूजा में क्या क्या करना है,,, शिव जी को दूध चढ़ाओ, उनके हाथ जोड़कर उनका स्मरण करो ,, उनके दर्शन करो और उनके ऊपर चावल चढ़ाओ ,जैसा जैसा पंडित जी कह रहे थे,, वैसा वैसा डॉली कर रही थी लेकिन डॉली के सामने एक नही दो शिव रूप थे,,,,

एक भगवान शिव का और दूसरा राज का जो डॉली के लीये, भगवान से कम नही था जब पंडित जी उसे शिव के दर्शन करने के लिए कहते, वह एक बार शिवलिंग के दर्शन करती और दूसरी बार सामने बैठे राज के उसके मन में शिवलिंग के साथ-साथ उसके सामने बैठा हुआ राज भी था

शिव जी को चावल चढ़ाती, तो धीरे से दो-चार चावल

के दाने राज के ऊपर भी फेंक देती ,,पूरी पूजा में डॉली ने भगवान शिव से एक ही बात मांगी थी ।

जिसको वह पूरे तन मन और धन से चाहती थी ,,,,,,,

आखिरकार 1030 ,,,1100 बजे के बीच पूजा संपन्न हो चुकी थी

आरती हुई प्रसाद दिया गया ,और गांव वाले अपने परिवारों के साथ भगवान भोले का भंडारा खाने आने लगे ,भंडारे में राज ने आलू मटर की सब्जी ,पूरी ,खट्टा मीठा कद्दू रसगुल्ले ,बूंदी ,और नमकीन इसके साथ साथ रायता भी था

सारा खाना बहुत ही स्वादिष्ट और देसी घी में बनाया गया था ,पूजा होने के बाद राज दावत का काम समेटने बाहर चला गया था

भंडारा तो सुबह से शाम को 500 बजे तक चल ही रहा था,,, थे लेकिन अभी भी लोग आते ही जा रहे थे ,तभी कुछ ही देर बाद विकास की गाड़ी भी आ कर रुकी

जब राज ने विकास को देखा ,तो वह काफी खुश हो गया, विकास गाड़ी से नीचे आया ,और राज ने जैसे ही उससे हाथ मिलाया ,तो देखा कि उसके पीछे उसके बुआ और फूफा जी भी थे

राज ने शायद एकाध बार ही उनके बुआ फूफा जी को देखा था

पर उसे ठीक से याद नहीं था

जब विकास ने उनका परिचय राज से करवाया ,तो राज ने भी नमस्कार करते हुए उनके पैर छुए ,,राज

ने तीनों को खाना खाने के लिए कुर्सी पर बैठा दिया, और उन्हें पत्तल में खाना परसा जाने लगा

पर विकास की निगाहे तो डॉली को ही ढूंढ रही थी ,जब डॉली काफी देर बाहर नहीं दिखी, तो विकास ने राज से पूछ ही लिया राज भैया डॉली कहां है

क्या अभी तक वह पूजा में ही बैठी हुई है अरे नहीं !//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg पूजा तो कब की हो चुकी है बस अंदर गांव के कुछ लोग है

तो उन्ही के साथ बैठी होगी ,तुम खाना शुरू करो ,मैं अभी डॉली को बुलाता हूं

पर विकास ने राज को रोकते हुए कहा

नहीं राज भैया आप परेशान मत होइए हम खाना खाकर अंदर ही डॉली से मिल लेंगे

हां यह ठीक रहेगा ,,,,

और तीनों खाना खाने लगे ,,उसके बुआ और फूफा जी विकास से इशारे ही इशारे में कुछ कहने की कोशिश कर रहे थे

तीनों ने जल्दी से खाना खत्म किया

और अंदर डॉली से मिलने के लिए जाने लगे खाना तो सिर्फ एक फॉर्मेलिटी था

असल में तो वह डॉली से मिलने ही आए थे जैसे ही घर के अंदर गए ,तो देखा कि कमरे में काफी भीड़ है ,और डॉली उन सब में बिजी है ,किसी को प्रसाद दे रही है

तो कोई डॉली को सगुन के पैसे देते हुए उसका टीका कर रहा था ।

विकास ने जैसे ही डॉली को देखा उसके चेहरे पर एक

अलग खुशी आ गई

उसने सिर हिला के डॉली से हाय किया डॉली ने भी हाथ हिला दिया ,और जल्दी से लोगों के बीच से निकलती हुई विकास के पास आ गई ,,,,

अरे विकास जी ! आप यहां आए मुझे अच्छा लगा ,,लेकिन तभी अपने पीछे खड़े हुए अपने बुआ फूफा जी का परिचय विकास ने डॉली से करवाया, डॉली ने हाथ जोड़कर मुस्कुराते हुए उनसे नमस्ते की

और उन लोगों को सोफे पर बैठने के लिए कहा, वह तीनों सोफे पर बैठ चुके थे

डॉली अभी भी सामने खड़ी थी

क्योंकि तख़त पर तो पहले से बहुत लोग बैठे हुए थे, तभी विकास की बुआ ने सरकते हुये अपने बगल में थोड़ी सी जगह बनाई

और डॉली को पास बैठने के लिए कहा,,,,,

चहल पहल के बीच विकास की बुआ ने डॉली को अपने बगल में बैठा लिया था

और वह उससे बहुत सारी बातें करना चाह रही थी

पर भीड़ भाड़ में ना तो वह ठीक से कुछ बोल पा रही थी ,और ना ही डॉली उनकी बातों को सुन पा रही थी ।

तभी काकी वहां पर आ गई इस गांव में काकी को तो सभी जानते ही थे ।

विकास के बुआ फूफा जी भी काकी को अच्छी तरह से जानते थे, क्योंकि बस उनका गांव भी यहां से थोड़ी ही दूरी पर था ।

और फिर विकास जब डॉली को ट्यूशन पढ़ाने आता था, तो इन लोगों के बारे में अपने बुआ फूफा जी को बताया भी था विकास को देखते हुए काकी ने नमस्ते की और विकास ने भी काकी के पैर छूकर उसके बाद अपने बुआ फूफा जी का परिचय काकी से करवाया ,,,,,दो-तीन मिनट बात करने के बाद, बुआ ने काकी से बात करने की इच्छा जताई,,,चूँकि यहां भीड़ भाड़ बहुत थी ,और वह ठीक से कुछ बता नहीं पा रही थी ,,तो काकी ने उन्हें अंदर चलने के लिए कहा ,,,,,

अपने बुआ फूफा जी के साथ विकास काकी के साथ अंदर चला गया ,,,

डॉली भी उनके पीछे जाने लगी, लेकिन तभी पीछे से किसी ने डॉली को आवाज दी

कि राज उसे बाहर बुला रहा है

डॉली असमंजस में काकी की तरफ देखने लगी,तो बुआ ने कहा बेटा! तुम राज की बात सुन लो,,, असल में बात तो मुझे काकी से ही करनी है ।

इसके बाद डॉली बाहर आ गई ,काकी विकास के साथ उसके बुआ फूफा जी को अंदर अपने कमरे में ले गई ।

तीनो कमरे में पहुँचे तो बुआ ने देर ना करते हुए ,काकी से कहा,,, कि हमे पता था

कि आज आप बहुत व्यस्त है ।

ऐसे में ज्यादा समय बर्बाद करना ठीक नहीं होगा ,काकी ने जैसे ही बैठने के लिए कहा बुआ ने काकी को अपने बगल में बिठाया और उनकी तरफ देख कर बोली,,,,

बहन जी!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg मैं पिछले एक दो महीने पहले से ही आपसे कुछ बात करना चाह रही थी ,पर मौका ही नहीं मिला ,लेकिन कल विकास ने बताया कि वह पूजन मैं आपके यहां जा रहा है ,,तो बात करने का मौका मुझे कोई दूसरा नहीं दिखा ,और मैं भी बिना बुलाए ही विकास के साथ आपके यहां चली आई,,,, क्योंकि बात ही कुछ ऐसी है।

यह बात मुझसे विकास ने 2 महीने पहले ही कही थी, कि मैं आपके पास आकर आपसे इस बारे में बात

करूं,,,,,

काकी ध्यान से उनकी तरफ देखते हुए उनकी बात सुन रही थी,,,

जी बहन जी कहिए ,आप इतना क्यों सोच रही है ,अरे हम सब अपने ही है ,जो आपके मन में हो आप निसंकोच मुझसे कह सकती हैं ,,,विकास तो मेरे बेटे जैसा ही है।

हां बहन ! तो बस उसी बेटे के लिए मैं

आपकी डॉली का हांथ मागने आपके घर आई हूं ,,,,,

विकास बहुत छोटा था ,जब इसके मां-बाप इस दुनिया से चले गए थे ,विकास मेरे सगे भाई भाभी का बेटा है, उसके बाद मैंने बिल्कुल अपने बेटे की तरह इसे पाला है

माना कि मैं विकास को सबकुछ नहीं दे पाई इसने खुद ट्यूशन पढ़ा कर ,और अपनी मेहनत से यह नौकरी हासिल की है ।

अपनी छोटी बहन का ब्याह भी इसने खुद ही किया है ,बहन जी मेरी दो बेटियां थी

बडी बेटी का ब्याह तो बहुत पहले हो चुका था ,एक बेटी विकास से 3,4 साल छोटी थी जिसका ब्याह विकाश ने पिछले साल ही किया है ,,,,

विकास ने कभी भी मेरी बेटियों को अपनी सगी बहनों से कम नहीं माना ,भगवान गवाह है, कि मैंने भले ही विकास की जरूरतों को पूरा ना कर पाई हूँ,,, पर इसको प्यार देने में कभी कोई कमी नहीं रखी।

विकास मेरे भाई का बेटा तो था ही ,पर भगवान ने मुझे

दो बेटियां दी थी ।

उसके बाद विकास ने ही मेरे बेटे होने की कमी पूरी की ,सारे परिवार का जिम्मेदारी इसने अपने कंधो पर ले रखी है।

मैं आपको भरोसा दिलाती हूं, कि विकास से अच्छा दामाद तो आपको कहीं मिल ही नहीं सकता ,,,, आपकी डॉली भी लाखों में एक है और आप चिंता मत कीजिए,,,,

डॉली के बारे में हमें सब कुछ पता है ।

शायद आपसे भी कहीं ज्यादा ,क्योंकि डॉली जिस बस्ती में थी,, वहां पर मेरी बहुत ही खास सहेली रहती थी, उसने मुझे डॉली के बारे में सब कुछ बता दिया, पर मुझे डॉली कि किसी बात से कोई एतराज नहीं है।

अरे मैं तो खुश हूं ,कि उसको आप जैसा परिवार मिला, जिससे वह इतनी आगे बढ़ी और आज इस मुकाम तक पहुंची,,,

डॉली और विकास की जोड़ी बहुत अच्छी रहेगी ,,,,मेरा विकास डॉली को पसंद करता है ,,,वह इससे शादी करना चाहता है ।

आपको तो पता ही होगा ,कि वह बहुत ऊंची सरकारी नौकरी में लग गया है ,आपकी डॉली को हमारे घर में कभी कोई कमी नहीं होगी ,,,जिसने प्यार से आपने उसको पाला है ,उतने प्यार से ही हम दिल से अपने पास रखेगे,,

दोनों की जोड़ी तो लाखों में एक लगेगी वह जितना भी पढ़ना चाहेगी ,जो भी करना चाहेगी ,हमारा विकास

उसके साथ रहेगा और खासकर डॉली की पढ़ाई की लगन को देखते हुए ,उसके आगे बढ़ने के हौसले को देखते हुये ही , विकास ने उसे पसंद किया है उसे ऐसी ही लड़की की तलाश थी ।

मेरी नज़र में विकास के लिए डॉली से अच्छी लड़की तो कोई हो ही नहीं सकती बहन फिर भी फैसला तो आपका ही होगा

बैसे जहाँ तक मुझे पता है ,डॉली भी जरुर विकास को पसंद करती है।

अक्सर इन दोनों की बातें फोन पर होती रहती है ,ऑफिस के जरुरी काम से और फिर काम तो बहाना हो जाता है।

बहन ! दोनों की पढ़ाई एकसी है ,डॉली और विकास की उम्र भी सही है ,आखिर इससे अच्छी जोड़ी और क्या होगी।

दोनों का साथ हो जाएगा ,दोनो साथ में अपनी जिंदगी में और ऊंचा मुकाम हासिल करेंगे ,,,,,,, हां मैं जानती हूं कि आज आप लोग बहुत व्यस्त है ,इसलिए अब आपसे ज्यादा बातें नहीं करूंगी,,

आप आराम से सोच-समझकर डॉली से इस बारे में बात कर लेना , और मुझे जवाब दे देना,,,,अगर आप की हां होगी ।

तो हम शादी जल्दी ही करना चाहेंगे

और शादी बिल्कुल उसी तरह से होगी

जैसे आप कहेंगे ,चाहे मंदिर में से सिंपल तरीके से ,या फिर धूमधाम से ,हम हर बात में राजी है,,,और इतना

कहने के साथ ही

बुआ जी ने काकी को गले लगाया ,और उनसे बिदा ली,,,और बाहर निकल गए जाते जाते विकास ने काकी का हाथ अपने हाथों में देकर कहा ,, मैं जानता हूं ,कि आजकल सबकी अपनी पसंद होती है

और सच मानिए ,कोई जोर जबरदस्ती नहीं है ,डॉली जी पढ़ी-लिखी, समझदार लड़की है और वह मेरे ही विभाग में नौकरी करती हैं इसे ही देखते हुए मैंने शादी का प्रस्ताव उनके सामने रखा है, आपकी हां हो, या ना

पर कम से कम डॉली मेरी अच्छी दोस्त तो हमेशा रहेंगी,,, और इसके साथ विकास बाहर निकल गया ,,,,

काकी ने पीछे मुड़कर देखा, तो डॉली और राज चुपचाप सारी बातें सुन रहे थे ।

शायद वो बगल वाले दरवाजे से कमरे के अंदर आ रहे थे ,और यहाँ की बाते सुनकर दोनों दरवाजे पर ही रुक गये थे।

डॉली राज की आंखों में देखे जा रही थी और राज ध्यान से उनकी सारी बातें सुन रहा था,,, उनके जाने के साथ ही काकी जल्दी से राज के पास आई ,और उसे सब कुछ बताने की कोशिश करने लगी।

राज ने कहा काकी मैंने सब कुछ सुन लिया है ,आपकी सारी बातें जान चुका हूं।

काकी ने राज से पूछा !

राज तेरा क्या कहना है

मुझे तो विकास बहुत अच्छा लगा ,अरे अच्छी नौकरी में है, अपनी डॉली की उम्र का है ,पढ़ा-लिखा और इतने

अच्छे परिवार का मुझे तो दूर,दूर तक कोई कमी नहीं दिख रही ,,,,

डॉली गुमसुम सि कभी राज को देखती और कभी काकी को ,,,,

काकी डॉली के पास आई ,और उसका चेहरा अपने हाथों में लेकर बोली,,,,

मेरी डॉली तो है ही इतनी भाग्यवान कि इसके लिए विकाश जैसे लड़के का रिश्ता भी खुद चलकर आया है हमारे घर ।

डॉली ने काकी के हाथों को अपने चेहरे से हटाते हुए राज की तरफ देख कर कहा ! काकी भाग्य अच्छी बातों से नहीं खुलता भाग्य तो तभी खुलता है ,जब बातें हमारी इक्क्षाओ के साथ पूरी हो !

सिर्फ अच्छी बात में ही सब खुश नहीं होते,,,,,,, और जल्दी से बाहर चली गई काकी राज की तरफ देखती रह गई

यह लड़की भी ना, पता नहीं क्या कह के चली जाती है ,मेरी तो कुछ समझ में नहीं आता ,,,अरे तू भी कुछ कहेगा कि नहीं

राज ने भी कहा कि काकी आराम से सबके जाने के बाद बात करेंगे ,अभी तू बाहर जाकर देख ,बहुत सारे मेहमान बैठे हैं ।

और जल्दी से डॉली के पीछे चला गया,,,, डॉली का शरीर गुस्से में कांप रहा था

उसकी आंखें लाल हो गई थी, पर इतने लोगों के बीच वह राज से क्या कहती

उसने पुरियों से भरी हुई डलिया उठाई

और कतार में बैठे लोगों को हांफती हुई पूरीयां परोसने लगी,,, एक साथ 50,60 लोगों के पत्तर में पूरी परोसती जा रही थी राज डॉली के पीछे पीछे चल रहा था,,,,वह डॉली से बात करने की कोशिश कर रहा था ,डॉली जहाँ जाती तो

उससे बात करने की कोशिश करने लगता

शहज़ादी तू यह क्या कर रही है

मैं कह रहा हूं , तू बैठ जा ,अरे बहुत सारे लड़के हैं ,वह खाना परोस देँगे,,,

डॉली ने राज की तरफ देखते हुये सब्जी से भरी बाल्टी ली,,,और एक एक करके सबको सब्जी भी परोसने लगी,,,,

वह बिना कुछ बोले ,काम करती जा रही थी

राज उससे बात करने की कोशिश करता था पर इतनी भीड़ भाड़ के बीच आखिर उसे कैसे समझाता ,,,,

शाम 600 बजे से रात को 900 बजे तक डॉली इसी तरह लगातार बिना रुके इधर से उधर भागकर सबको खाना परोसती रही

जब राज ने देखा डॉली के आस पास कोई नहीं है,,,, उसे एक गिलास ठंडा पानी दे

दिया औऱ बैठने के लीये कहा!

शहज़ादी में कबसे तुझे मना कर रहा हूँ अपनी हालत देखी ,कैसे थक गई है ।

ये सब करने की तुझे क्या जरूरत है

राज ने इतना कहा कि डॉली एक बार फिर गर्म सब्जी

की बाल्टी लेकर लोगों के बीच पहुंच गई ,, जब भी राज उससे बात करने की कोशिश करता, तो उसका गुस्सा और बढ़ जाता ,,,जब राज ने उससे बाल्टी लेनी चाही ,तो डॉली उसे अपनी तरफ खींचने लगी

इसी बीच गर्म सब्जी डॉली के पैर पर जा गिरी ,,,,,लेकिन वह अभी भी गुस्से में यहां से वहां चलती रही ,,,,,

राज समझ चुका था , कि डॉली उसकी कोई बात नहीं मानेगी ,,,सिवा को एक ही रास्ता नजर आया ,,,काकी!!!

उसने किसी से कहकर काकी को बाहर बुलवाया ,और वह जबरदस्ती डॉली को यहाँ से ले गई।

लगभग आधा घंटे बाद खाना खत्म हो चुका था ,सब लोग जा चुके थे ।

और यही 1100 बजे तक सारा काम खत्म खत्म हो गया,,, टेंट वाले टेंट ले जा चुके थे स बचा हुआ खाना पडौस में बांट दिया गया था ।

और बाकी सब सफाई भी करवा दी थी अंदर बाहर के सारे मेहमान जा चुके थे

रात के 11 बज गए थे।

काकी दिन भर में काफी थक चुकी थी

डॉली ने अंदर आकर काकी को दवा खिला कर सोने भेज दिया।

और काकी ने भी डॉली के पैर में बरनॉल लगाकर उसे आराम करने के लिए कह दिया काकी अपने कमरे में जाकर सो गई ।

और डॉली बाहर बैठकर टीवी देख रही थी तभी अचानक बारिश की आवाज आई

डॉली ने एक बार आंगन में जाकर चेक किया कि कहीं कुछ सामान तो वहाँ पड़ा नहीं रह गया ,,,,,जैसे ही अचानक तेज बारिश होने लगी तो, राज भी घर के अंदर आ चुका था उसने देखा कि डॉली अभी सोफे पर बैठी है उसने सबसे पहले डॉली का पैर देखा, जो शायद आंगन में जाने की वजह से पानी से भीग गया था ,,,,,और उस पर लगी ही बरनॉल भी हट गई थी ,,,,,

राज ने डांटते हुए डॉली से कहा!

जरूर बारिश में बाहर गई होगी,,,,

पर बाहर जाने की क्या जरुरत थी तुझे

राज बोलता ही जा रहा था ,,,,,,

लेकिन डॉली चुप थी।

राज अंदर जाकर बरनॉल लेकर आया और दुबारा डॉली के पैर पर लगाने लगा,,,,,

और राज बरनॉल लगाते हुये अभी भी डॉली को डाँटता जा रहा था,,,,,,

मैंने कितनी बार तुझे रोका ,फिर तूने अपना पैर जला ही लिया,,,, डॉली ने अपना पैर हटाते हुए कहा ,,,,,

कोई जरूरत नहीं है आपकी हमदर्दी की मुझे!,,,,,

नहीं लगाना बरनॉल ,,,,

राज ने उसका पैर वापस खींच कर अपने घुटने के ऊपर रखा ,,,,और उसे दुबारा दवाई लगाने लगा ,,,,,

अब तू मुझे बताएगी कि तुझे क्या ज़रूरत है ! और क्या नहीं !

मुझे पता है कि तुझे जलन हो रही होगी

तेरा पैर बुरी तरह जल रहा है ।

तू नखरे क्यों कर रही है ,चुपचाप बैठ जा और खबरदार जो यहाँ से हिली,,,,,,

डॉली ने ध्यान से राज की आंखों में देखा और कहा !

अगर आप मुझसे ज्यादा मुझे समझते हैं ,तो क्यों नहीं समझ पा रहे हैं

कि आखिर में चाहती क्या हूँ,,,,,,,,,,,,

डॉली ने पागलों की तरह चिल्लाते हुए राज से कहा ,,,,,,,,,

हां ,,,,क्योंकि तू जो चाहती है,, वो रास्ता तुझे अंधेरे की तरफ ले जाता है ,,

और मैं तुझे ऐसा कभी नहीं करने दूंगा

अगर तू अपना बुरा चाहेगी!

तो क्या मैं तेरा बुरा होने दूंगा

राज डॉली को देखते हुए कहने लगा

डॉली ठीक से दवाई लगवा ले ,मैं कह रहा हूं बहुत हो गया,,,अब,,,,,

डॉली गुस्से में गहरी गहरी सांसे ले रही थी उसकी आंखों में उदासी की जगह दर्द और गुस्सा भरा हुआ था ,,,,

उसने चीखते हुए कहा ,,,,,,

राज मेरे तन से ज्यादा, मेरा मन जल रहा है और मेरे मन की जलन आप क्यों नहीं समझते ,,,,,

यह कहते हुए राज के हाथों से बरनॉल लेकर नीचे फेक दी,,,,,,

और गुस्से में भागती हुई,,,, छत पर चली गई ,जाकर ऊपर का दरवाजा खोला,,

और रात के बारह बजे ही ,बाहर हो रही तेज बारिश में भीगती हुई, छत पर जाकर खड़ी हो गई ,,,,अपना चेहरा ऊपर करके अपने गुस्से को शांत करना चाह रही थी।

बस एक ही मिनट में वह पानी में तर हो गई थी ,,,,राज उसके पीछे भागता हुआ छत पर आ गया था ,,,,सहज़ादी तू पागल हो गई है क्या

यह सब क्या है ठंड लग जाएगी तुझे

झमाझम बारिश के बीच राज ने डॉली का हाथ पकड़ा और उसे नीचे ले जाने की कोशिश करने लगा,,,,,

डॉली ने राज को धक्का दिया ,,,और खुद को पानी से सराबोर करने लगी,,,,

उसके तन की जलन तो बरनॉल से ठीक हो जाती ,,,,लेकिन उसके मन में जो आग लगी थी ,,,,शायद वो इस बारिश से कुछ कम हो यही सोचकर वह बारिश में अच्छी तरह से भीग जाना चाहती थी,बारिश का ठंडा पानी औऱ डॉली के गरम आंसू,मिलकर एक हो गये थे,पर शायद बारिश से ज्यादा डॉली आसुओं से भीगी हुई थी,,,,,,,,

तेज बारिश में खुले आसमान के नीचे खड़ी होकर डॉली पूरी तरह से सराबोर हो चुकी थी इतनी तेज़ बारिश में उसने खुद को पूरी तरह से भिगो दिया था ,पर उसके मन की जलन कम नहीं हो रही थी।

वह जो कर सकती थी ,कर चुकी थी

अब उसके हाथ में कुछ नहीं था ।

डॉली का तन-मन ,उसके शरीर का कतरा कतरा अच्छी तरह से जानता था

कि राज से ज्यादा प्यार तो डॉली को पूरी दुनिया में भी कोई नहीं कर सकता।

और ना ही डॉली राज के अलावा किसी का प्यार पाना चाहती है

पर डॉली के प्यार की रुकावट तो खुद राज ही था ,राज खुद अपने और डॉली के बीच आ रहा था ,अब बात हद से बाहर जा पहुंची थी, इतना सब करने के बाद भी !

राज डॉली कि कोई भी बात मानने के लिए तैयार नहीं था ,उसे तो बस एक ही बात में सच्चाई नज़र आ रही थी ।

कि यहां रह कर डॉली का भविष्य चौपट होगा ,वह वो सब कुछ नहीं पा पाएगी जिसकी वह हकदार है ।

अगर विकास जैसे अच्छे लड़के का साथ उसे मिला ,तो वह आसमान की ऊंचाइयों को छुएगी, उसका नाम होगा, वह हर उस मुकाम तक पहुंच पाएगी, जहां राज उसको देखना चाहता है ।

राज ने तो बचपन से ही डॉली के लिए सपना देखा था,,,,

जब राज को पता चला था, कि डॉली का पढ़ने में मन है ,तबसे उसने हर कदम पर डॉली की मदद की थी ।

हमेशा उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया था ,,हर घड़ी उस का साथ दिया था डॉली के पास होने पर ,डॉली से ज्यादा राज खुश होता था ।

राज ने अपने बचपन में जिस कमी को महसूस किया था ,वह डॉली को वो कमी नहीं होने देना चाहता था ।

राज की आंखों में डॉली के लिए सपने थे और इन सपनों की मंजिल थी! डॉली की तरक्की ,और उसका सुनहरा भविष्य

जो राज को विकास के साथ नजर आ रहा था ,वह जानता था ,कि डॉली उससे प्यार कर बैठी है ,लेकिन उसने सोच लिया था

की वह तो अभी बच्ची है ,,जब विकास के साथ जाएगी ,सारे सुख और सुविधाए उसे मिलेगी ,,,विकास जैसे अच्छे लड़के का साथ मिलेगा ,तो धीरे-धीरे सब कुछ भूल जाएगी ,और मेरा क्या है

मैं तो जैसे पहले जीता था !

वैसे आज भी जी लूंगा ,अगर मैं डॉली के बारे में कुछ सोचता हूं ,तो दुनिया तो येही कहेगी कि मैंने डॉली का फायदा उठाया है।

अपने एहसान का बदला उतार लिया है

और सच बात तो यह है ,कि मैं खुद भी नहीं चाहता ,कि डॉली इस गांव में रहकर खुद को बुलंदियों से दूर रखे।

राज के मन में यह सारी उलझने चल रही थी ।

राज ने खुद से ही यह वादा कर लिया था कि वह डॉली को सुनहरा भविष्य देकर ही रहेगा,,,,

डॉली बारिश में भीग रही थी

और राज खड़ा खड़ा ये सब कुछ सोच रहा था ।

राज ने भी डॉली को कुछ देर के लिए अकेला छोड़ना ही सही समझा था ।

थोड़ी देर बाद इससे पहले कि राज डॉली के पास जाता ,,,,,

डॉली छत से बेतहाशा दौड़ती हुई अपने कमरे में चली गई,,,

और इससे पहले कि राज उससे कुछ कहता डॉली ने दरवाजा बंद कर के कुंडी लगा दी थी ।
 
राज धीरे-धीरे डॉली को आवाज दे रहा था क्योंकि काकी सो रही थी ।

लेकिन डॉली ने कोई उत्तर नहीं दिया

दूसरे दिन सुबह रोज की तरह ही काकी और डॉली उठकर घर का काम समेटने लगी क्योंकि पूजन के बाद

घर काफी फैल चुका था ।

राज जब उठ कर आया ,तो गौर से डॉली के चेहरे को देख रहा था ,लेकिन वह एक शांत झील की तरह लग रही थी ,बस उसके चेहरे पर एक खामोशी, और सिर्फ खामोशी ही दिख रही थी ।

उसकी आंखें सूजी और चेहरा उतरा हुआ था राज ने उसका माथा छूने की कोशिश की कि कहीं उसे बुखार तो नहीं है ,पर राज डॉली को छूता इससे पहले ही ,वह उससे दूर हो गई ,,,,,

डॉली के आंगनबाड़ी जाने से पहले राज कितनी बार उससे कितनी बातें पूछ चुका था पर उसने राज की किसी भी बात का जवाब नहीं दिया था ।

और ना ही उससे कुछ पूछा था ।

उसने घर के सारे काम किए ,और रोज की तरह समय पर आंगनबाड़ी चली गई।

डॉली जब शाम को आंगनबाड़ी से आई

तो काकी ने पकौड़े और चाय के साथ हलुआ भी बना रखा था

आज भी झमाझम बारिश हो रही थी

और फिर विकास की बुआ ने इतनी बड़ी खुशखबरी सुनाई थी ,सुबह से तो काकी काम में व्यस्त थी ,डॉली और राज भी काम पर चले गए ,इसलिए काकी ने शाम को दोनों चीजें बना ली , और इंतजार करने लगी कि शाम को डॉली जब घर आएगी

तो राज को भी ढावे से बुला लेगी

और विकास की बुआ वाली बात के बारे में चर्चा कर लेगी ,,,,

जब डॉली और राज घर आ चुके तो, काकी ने पकौड़ी और चाय टेबल पर रखी

और खुश होते हुए कल की सारी बातें राज को बताने लगी ,,,,जो विकास की बुआ ने काकी से कही थी ।

सब कुछ बताने के बाद काकी ने राज की राय जाननी चाही ,,,,

राज ने डॉली की आंखों में देखा ,पर डॉली ने राज से आंखें फेर लीं,,,

काकी ने फिर पूछा

राज, डॉली तुम लोग भी कुछ बोलोगे

कि मैं ही बोलती रहूं ,अरे विकास तो डॉली का हाथ मांगने ही आया था

इसलिए डॉली तुझे तो बताना ही पड़ेगा

और राज तुझसे ज्यादा डॉली का भला कौन सोच सकता है

तो यह फैसला भी तेरा ही होगा !

कि डॉली के लिए क्या सही है

और क्या गलत

यह तुझे ही समझना होगा ,कल से अब तक तुम दोनों ने कुछ तो सोचा होगा

तुमने तो सारी बातें सुन ली थी, कि उन्होंने मुझसे क्या कहा है !

अगर मुझसे पूछ ,तो मुझे तो दूर दूर तक कोई कमी नजर नहीं आ रही, विकास से अच्छा लड़का हमारी

डॉली के लिए भला कौन हो सकता है

इतनी अच्छी नौकरी में है ,इतना मेहनती लड़का है ,और जो सबसे बड़ी बात है

वह यह है ,कि वह डॉली के विभाग मैं ही नौकरी करता है ।

उससे डॉली को भी आगे बढ़ने के अवसर मिलते रहेंगे ,,,,,,,,,

विकास ने जैसे अभी डॉली की सहायता की है ,आगे भी करेगा ,फिर हमारी डॉली ऊंचाइयों को छूती ही जाएगी ,,,,

भई मैंने तो अपना फैसला बता दिया है

मुझे तो यह रिश्ता पसंद है

काकी चाय का कप लेकर डॉली के बगल में बैठ गई ,और उसने डॉली की ठोड़ी पकड़कर उसका चेहरा ऊपर उठाया ,,,

और प्यार से पूछा ,डॉली मुझमें तू अपनी मां ही देख ,और अपने दिल की बात मुझे बता क्या तुझे विकास पसंद है

अगर तुझे विकास पसंद होगा, तो ही हम तेरी शादी उससे करवाएंगे ,बेटा कोई ज़ोर जबरदस्ती नहीं है ,तू जहां चाहेगी ,और जब चाहेगी ,हम तभी तेरा ब्याह करवाएंगे

तू सोच-समझकर अच्छी तरह से जबाब देना ,डॉली वैसे तो मैं जानती हूं

कि तू बहुत समझदर है तेरा कोई भी फैसला कभी भी गलत नहीं हो सकता ,तू अपने लिए जिसे भी चुनेगी वो

लाखों में एक होगा।

तेरे लायक होगा ,, और मुझ पर भरोसा रख डॉली तू जिससे चाहेगी में वादा करती हूं उसी से तेरी शादी करवाऊंगी ,,,,

डॉली मेरी बेटी ,यह तेरे भविष्य का सवाल है तो अच्छी तरह सोच समझकर जवाब देना इतना कहकर काकी ने राज की तरफ देखते हुए पूछा

सिवा अब तू भी कुछ सोच ले पर उससे पहले मुझे डॉली का जवाब चाहिए ।

अगर डॉली हां कहेगी ,उसके बाद बात तुझ तक आएगी ,,,,

और काकी दुबारा डॉली की तरफ देखने लगी ,,,,

डॉली की आंखों में कुछ भी नहीं था

वे भावना से ,और जज्बातों से शून्य हो चुकी थी ,,,,ना उनमें आंसू थे ,ना ही हंसी थी

डॉली के शरीर की तरह उसकी आंखें भी निर्जीव लग रही थी ।

उसने बहुत गहराई से काकी की आंखों में देखा ,और इतना ही कहा ,,,

कि आपको विकास पसंद है ,और उन सब को मैं पसंद हूं ,लेकिन मैं आखिरी फैसला राज पर छोड़ती हूं ,,,,

राज जो कहेंगे ,वही होगा ,जो फैसला मैं अपने बारे में खुद नहीं ले पाऊंगी ,वो राज ले लेंगे,,,,,राज से ज्यादा मुझे और कौन समझ पाएगा

इतना सुनकर काकी तो खुश हो गई थी

उसे यही लगा डॉली को विकास पसंद है उसने खुशी से

राज की आंखों में देखा

और पूछा, अब बस तेरी हां या ना का इंतजार है!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

मुझे जल्दी से बता दे , कि तू इस रिश्ते के लिए तैयार है

या नहीं

मैं सिर्फ एक बार तेरे मुँह से सुनना चाहती हूं और तेरे जवाब के साथ ही डॉली के ब्याह की तैयारियां शुरु हो जाएंगी,,,,

क्योंकि उनकी बुआ ने मुझे बताया था

कि शायद इस महीने विकास का ट्रांसफर हो सकता है ,इसलिए वह ब्याह इस महीने के अंदर ही करना चाहती है।

काकी ने प्लेट्स उठाते हुए कहा !

राज तू इतना क्या सोच रहा है

जल्दी बता !

क्या तुझे डॉली के लिए विकास पसंद है

या नहीं

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राज के चेहरे पर सोच विचार की गहरी रेखाएं साफ झलक रही थी।

उसकी आंखों में एक सूनापन ,चेहरे पर उदासी थी ,उसका दिल कुछ छूटता हुआ सा महसूस कर रहा था ।

उसका मन भारी हो रहा था ,ऐसे लग रहा था जैसे कि उसके एक जवाब से सब कुछ बहुत दूर जाने वाला हो।

फिर भी वह क्यों चाहता था ,कि उसकी जिंदगी में सूनापन हो जाए ,एक बार फिर अपने, सिर्फ एक जवाब के कारण

वह 6 साल पीछे जाने वाला था ।

ठीक उसी स्थिति में ,जब डॉली उसके यहां नहीं आई थी ।

तबके और आज के राज में जमीन आसमान का अंतर था ।

पहले जहां पर वह ज़िद्दी और गुस्सैल राज था ,वही अब डॉली के नखरे उठाने की आदत उसे पढ़ चुकी थी ,डॉली की बातों पर उसने हंसना सीख लिया था, डॉली से उसे बोलना आ गया था ।

उन दोनों के बीच एक ऐसा रिश्ता बंध चुका था, जिसकी गांठ बहुत मजबूत थी

जिसकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल था, राज जानता था ,कि वह जो जवाब देने वाला है ,उससे एक बार फिर उसकी जिंदगी वीरान और सूनी हो जाएगी, एक बार फिर उसकी हंसी गुम हो जाएगी ,लेकिन डॉली राज के इस फैसले से बहुत आगे तक जाएगी ।

उसका भविष्य उज्जवल होगा, उसे बहुत सारी चीजें मिलेंगी ,जिनकी वह हकदार है जो डॉली को मिलना चाहिए ,उसे वह सब कुछ मिलेगा ,अगर एक बार अपुन अपने दिल पर पत्थर रख लेगा ,तो अपुन के मन का बोझ हमेशा हमेशा के लिए अपुन के दिल से उतर जाएगा ,,,,,

शहज़ादी को उसकी नई जिंदगी मिलेगी

वह विकास के साथ सारी सुख सुविधाओं और एक अच्छी ज़िंदगी लेकर आगे बढ़ेगी विकास भी शहज़ादी का पूरा ख्याल रखेगा।

अपुन को पूरा विश्वास है विकास पर ,वह बहुत अच्छा लड़का है ।

विकास से अच्छा जीवन साथी उसे नहीं मिल सकता ,अपुन चाहे कितना भी ध्यान रखे विकास से ज्यादा खुशियां उसे कभी नहीं दे पायेगा ,,शहज़ादी को यह सब कुछ मिलना ही चाहिए ,वह इन सब की हकदार है और फिर विकास ने खुद आगे बढ़कर उसका हाथ मांगा है।

राज पता नहीं क्या क्या सोचता ही जा रहा था, तभी काकी ने राज के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा!

राज इतना क्या सोच रहा है बेटा !

क्या तुझे विकास पसंद नहीं है

जो भी बात है !

साफ-साफ बता !

तब कहीं जाकर राज अपने ख्यालों से बाहर आया ,,,,

नहीं,,, नहीं,,, काकी यह तू कैसी बात कर रही है ,, विक्की तो बहुत अच्छा लड़का है लाखों में एक है ,

शहज़ादी की उम्र का है

नौकरी भी उसकी अच्छी है ,देखने में भी अच्छा है

और सबसे बड़ी बात, कि उसने खुद आगे बढ़कर डॉली का हाथ हमसे मांगा है

काकी विकास एक समझदार लड़का है

और वह समझता है ,कि जब दो लोग एक से पढ़े लिखे ,और एक ही नौकरी में होते हैं

तो उनका साथ चलना भी अच्छा लगता है राज ये सब कहते हुए डॉली को भी देखता जा रहा था।

काकी तुझे तो पता है

पति-पत्नी गाड़ी के दो पहिए होते हैं

और दोनों पहिए बराबरी के ही होना चाहिए अगर एक छोटा एक बड़ा हो ,तो गाड़ी का बैलेंस नहीं बनता ,काकी ने राज की तरफ देखते हुए कहा !

राज मैं कुछ समझी नहीं ,तू कहना क्या चाहता है !

काकी अपुन बस यह कहना चाहता है

कि विकास हर तरह से शहज़ादी के लायक है शहज़ादी

के जितना पढ़ा लिखा है

शहज़ादी के जैसी अच्छी नौकरी भी करता है उसकी उम्र का भी है

उसमें वो सारी खूबियां हैं

जो मैं शहज़ादी के जीवन साथी के लिए देखना चाहता था ।

भला इससे अच्छा रिश्ता और क्या मिलेगा विकास में तो ढूंढने से भी कोई कमी नहीं नजर आती,,,,

काकी ने परेशान होते हुए कहा !

हां ,,हां,,, राज में यह सब जानती हूं

सब समझती हूं ,और मुझे सब कुछ पता है विकास के बारे में ,,,,,

मैं तो बस तेरा जवाब सुनना चाहती थी

की तेरा क्या जवाब है

तुझे विकास पसंद है ,कि नही !

विकास और उसके बुआ फूफा जी को डॉली पसंद है ,और डॉली ने फैसला तेरे ऊपर छोड़ा है ,,,,,

अब सिर्फ तेरी हां या ना का इंतजार है

तो क्या तू इस रिश्ते के लिए तैयार है

क्या तू डॉली और विकास की शादी के लिए तैयार है

या नहीं

मैं सिर्फ इतना जानना चाहती हूं !

तू पता नहीं क्या क्या बोले जा रहा है

यह लाइन बोलते वक्त राज का चेहरा तमतमा गया था ,,,,उसे अपने अंदर एक खिंचाव सा महसूस हो रहा था ,जैसे एक शक्ति उसे अंदर खींच रही हो ,और दूसरी

बाहर ,,,,,पर उसने आंखें बंद करके आखिर बोल ही दिया ,,,,,,

काकी अपुन को ये रिश्ता मंजूर है

अपुन को शहज़ादी और विकास की शादी मंजूर है

और अगर वह एक महीने के अंदर ही शादी करना चाहते हैं ,तो अपन को कोई दिक्कत नहीं ,,,,अपुन मैनेज कर लेगा ,,

वो जैसा कहेंगे अपुन बैसा ही करेगा ,डॉली की शादी में कोई कमी नहीं छोड़ेगा ,,,

विकास के मुंह से ऐसी बात सुनकर डॉली को ऐसे लगा ,जैसे उसके कानों में किसी ने पिघला हुआ शीशा उड़ेल दिया हो ,,,,

डॉली जड़ हो गई थी ,,उसका शरीर काकी और राज के सामने बैठा हुआ था

लेकिन आत्मा मर चुकी थी

राज के एक जवाब से वह अपना अस्तित्व खो बैठी थी।

क्या राज के बिना भी डॉली का कोई अस्तित्व है

यह बात डॉली की समझ से परे थी ।

उसे जिंदगी के हर मोड़ पर ,हर दिन

हर जगह, राज की ही जरूरत रहती थी

वह जब से इस घर में आई, उस पहले दिन से ,आज आखिरी दिन तक ,राज के बिना तो उसने एक कदम भी नहीं बढ़ाया ,,,

भले ही उसने सब कुछ अपनी मेहनत से किया हो, लेकिन हमेशा वह राज के पीछे ही चली थी,,,,

राज डॉली की आदत बन चुका था ।

जब सुबह सो कर उठती तो उसकी आंखें राज को देखना पसंद करती ,जब रात को सोने लगती ,तो राज का चेहरा देखकर ही उसे नींद आती थी ।

जब वह उसके साथ होता ,तो वह खुद को भूल जाती थी ,,उसके आसपास क्या हो रहा है ,क्या नहीं ,इस चिंता से वह बेफिक्र होती थी ,डॉली का खाना पीना ,सोना जागना उठना बैठना, सब कुछ राज के बिना अधूरा था ,,,,,

राज उसकी आदत बन चुका था ,डॉली को लग रहा था ,काश यह कोई बुरा सपना हो और कुछ ही देर में काकी उसे हिला कर जगा दे ,,,पर बहुत इंतजार करने के बाद भी वह नींद से नहीं जागी थी ।

अपने जवाब के बाद राज ने एक बार भी डॉली से आंखें नहीं मिलाई थी ।

पर डॉली अब भी सूनी आंखों से राज को देखे जा रही थी ।

राज तेजी के साथ वहां से उठा ,और यह कहता हुआ वहां से चला गया ,,,,

काकी तू यह खुशखबरी जाकर सबको सुना दे ,और हां विकास के बुआ फूफा जी को भी फोन करके बता दे, कि हमें रिश्ता मंजूर है और 1 महीने के अंदर ही हम उनकी बताई गई तारीख में शादी भी कर देंगे,,,,,,

कुछ ही देर में डॉली एक चाबी की गुड़िया बनकर रह

गई थी ,जैसे कि किसी ने उसमें चाबी भर दी हो ,और वह लगातार चलती जा रही हो,,,,,,

राज का जवाब सुनकर काकी बहुत खुश थी ,उसने डॉली के चेहरे को अपने हाथों में लिया, और खुशी से उसका माथा चूम लिया उसको गले लगा कर बोली ,,,

मेरी बच्ची ! तू बहुत ऊंचा भाग लिखवा कर लाई है ,कि इतना अच्छा लड़का खुद सामने से चलकर आया तेरा हाथ मांगने,,,

तू बहुत खुशनसीब है ,जो इतना अच्छा जीवन साथी मिल रहा है तुझे,,,,

काकी ने जोर से डॉली को अपने गले लगा लिया,,, और उसकी आंखों में खुशी के आंसू आने लगे ,उसकी आवाज भर्रा गई थी।

डॉली ! मेरी बच्ची ,,6 साल तेरे साथ कैसे निकल गए ,,पता ही नहीं चला ,लगता है

जैसे कल की ही बात हो ,जब तू इतनी सी स्कर्ट टॉप पहन कर दो चोटी बांधे हुये

अपने कान्हा जी को गोद में लेकर हमारे घर आई थी ,,,,6 साल ,6 दिन की तरह ही निकल गए ,और इतनी जल्दी वह दिन भी आ गया,,,,

जब तू बड़ी हो गई ,और दुल्हन बनके अपने पिया के घर भी चली जाएगी ,,,,

मैं कैसे जिऊंगी तेरे बिना ,पहले तो यह घर मकान था ,इस घर को घर तो तूने बनाया है तेरे आने से मेरी

और राज की जिंदगी ही बदल गई ,पहले जहां घर खाने को दौड़ता था अब उसी घर में रौनक लगी रहती है

सारा दिन कैसे निकल जाता ,पता ही नहीं चलता, पूरे घर को स्वर्ग जैसा चमका दिया है तूने ,हर चीज जगह पर व्यवस्थित करीने से रखी हुई है ।

तूने हम सबकी जिंदगी बदल दी ।

तेरे जाने के बाद एक बार फिर मैं और राज ही रह जाएंगे ,और पहले की तरह ही राज सुबह से अपने काम पर चला जाएगा ।

और मैं बचूँगी घर में अकेली,, तेरी बहुत याद आएगी डॉली,,,,

तेरे आने से मैंने राज में कितना बदलाव देखा है ,,,तेरे आने से हमेशा तेरे पीछे पड़ा रहता है ,,तुझे चिढ़ाना ,तेरी टांग खींचना

और तेरा राज पर गुस्सा होना, यह सारी बातें पीछे छूट जाएंगी, पर फिर भी तेरी खुशी में ही ,मेरी और राज की खुशी है।

तुझे सब कुछ अच्छा मिल रहा है

मैं और राज तो कैसे भी काट लेंगे ,अपनी जिंदगी ,बस तू सुखी रहे ,हमेशा हंसती मुस्कुराती रहे ,,,,तेरी जिंदगी में खुशियां आ जाए ,तू जो चाहे तुझे वही मिले ,मैं तो बस भोलेनाथ से यही दुआ करती हूं ।

कि तुझे वो सारी खुशियां मिले जो तूने चाही है, काकी का इतना कहना था ,,,

डॉली और जोर से काकी के गले लग गई जहां एक

तरफ काकी की आंखों में खुशी के आंसू बह रहे थे ,और दूसरी तरफ डॉली अपने दिल का सारा दर्द आंसुओं में बहा कर निकाल रही थी ।

डॉली का कंधा काकी के खुशी के आंसुओं से भीग रहा था ।

और काकी का डॉली के दर्द भरे आंसुओं से दोनों एक दूसरे के गले लग कर अपना दर्द एक दूसरे से कह रही थी ।

पर यह डॉली का ऐसा दर्द था ,जिसे ना काकी समझ पा रही थी ,और ना डॉली अपने मुंह से कह पा रही थी,,,,,,,,,

राज के जाने के बाद डॉली और काकी एक दूसरे के गले लग कर देर तक रोते रहे ।

काकी की आंखों में डॉली से बिछड़ने के आंसू थे ,तो डॉली की आंखों में उस दर्द के जिन्हें प्यार समझ कर राज उसे दे रहा था। राज आज रात में भी घर नहीं आया ,काकी ने फोन किया ,तो उसने कहा कि वह अपने किसी दोस्त के यहाँ है ।

तो सुबह ही आ पाएगा ,,,,,

होगा कोई जरूरी काम

काकी ने भी ज्यादा पूछना ठीक नहीं समझा यह रात काकी और डॉली के बीच ही कटी थी ।

सुबह जब राज ने देखा कि 800 बज चुके हैं ,और 910 बजे तक डॉली आंगनबाड़ी चली जाती है ,तो ठीक उसी टाइम वह घर आ गया ,रोज की तरह डॉली आंगनबाड़ी जाने के लिए तैयार हो रही थी ,और काकी घर के बाकी बचे हुए काम समेट रही थी ।

वैसे तो बस एक महीने बाद ही डॉली की सुपरवाइजर के लिए पोस्टिंग होने वाली थी लेकिन तब तक डॉली को आंगनवाड़ी के कुछ छूटे हुए काम पूरे करने

थे ,इसलिए वह रूटीन से रोज आंगनवाड़ी जाती थी ।

डॉली के आंगनवाड़ी जाने के बाद राज ने काकी से पूछा !

काकी तूने विकास के बुआ फूफा को फोन किया

काकी रसोई में कुछ काम कर रही थी ,उसने वहीं से उत्तर दिया ,,,,नहीं राज रात को समय ही नहीं मिला ,और एकदम सुबह सुबह फोन करना किसी को अच्छा नहीं लगता ,तो इसलिए सोचा कि तू घर आ जाए तो उसके बाद उनसे बात कर लूंगी, अब जब तू आ ही गया है ,तो एक काम कर तू ही विकास के फूफा जी को फोन लगाकर उन्हें बता दे ,कि हमें विकास पसंद है ,और हम इस रिश्ते के लिए तैयार है ,,,,,

काकी पर अपुन ,अच्छा लगेगा क्या यह सब कहते हुए ,,,,अरे अपुन को नहीं आती यह सब बात करना,,,,, तू बोल ना तू इस घर की बड़ी है ,,,अपन ने कहीं कुछ उल्टा सीधा बोल दिया ,तो क्या सोचेंगे ,कि अपुन को बात करना ही नहीं आता,,,,

नहीं ,,,नहीं,,,, अपुन फोन लगा के देता है न तू बात कर!!!!

काकी ने राज के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा ,अरे राज तू इस घर का मर्द है

जब सारे फैसले तू ही लेता है ,तो फोन भी तू ही करेगा ,,,,

रही फोन लगाने की बात ,तो वह तो मैं भी लगा लेती हूं ,,,,

विकास का कार्ड मेरे पास रखा है ,उसमें से देखकर मैं

नंबर लगा देती हूं ,काकी ने जल्दी से अपना की पैड वाला मोबाइल उठाया

और विकास का कार्ड निकाल कर उसमें से एक एक नंबर बोलते हुए लगाने लगी

97643 ,,,राज आगे देख कर बताना क्या लिखा है ,,,मुझे ठीक से कुछ दिख नहीं रहा विकास ने आगे के पांच नंबर भी देखकर काफी को बता दिए,,,,,

जैसे ही नंबर पूरा हुआ, और घंटी गई

कि काकी ने फोन राज के हाथ में पकड़ा दिया ,राज फोन काफी को दे रहा था ।

और काकी वापस राज के हाथ में ही फोन पकड़ा रही थी ,,,,

राज ! बात तू ही कर ,,अरे तू समझदार है बड़ा है ,,,तुझसे ज्यादा समझदार भला कौन होगा ,,,,

चल ,चल ,जल्दी कर ,मुझे लगता है कि उनने फोन उठा लिया है ,,,

और सच में वहां से फोन उठ चुका था

वहां से विकास की बुआ की आवाज आई हेलो ,,,,राज ने भी यहां से हक

लाते हुए कहा !

हेलो!!! हेलो !!!!

हां बेटा किससे बात करनी है आपको

बुआ ,,, ,मेरा मतलब विक्की की बुआ !

अपुन को तेरे से ही बात करनी है !

काकी ने राज को आंखें दिखाते हुए कहा और धीरे से

बुदबुदाई,,,,राज तू कैसे बात कर रहा है

अरे वह हमारे होने वाले समधि है ।

उनसे आप करके बात कर!

राज ने काकी को हाथ देते हुए इशारा किया ,कि हां आगे से वह ठीक से बात करेगा ,,,,

और अपनी बात संभालते हुए बोला !

हां हां बुआ जी मेरा मतलब कि अपन को आपसे ही बात करनी है ,,,

अरे वह तूने महारानी के वास्ते विक्की की बात की थी ना काकी से ,तो बस अपुन ने उसी की बात करने को फोन लगाया है

उधर विकास की बुआ भी राज की बातों से कुछ परेशान थी ,,,वह राज की बातों को समझ नहीं पा रही थी ,कि यह किस तरह से बात कर रहा है ,,,,

राज ने फिर कान पकड़ते हुये जीभ निकाली, और फोन पर ही कहने लगा ,,,

सॉरी बुआ जी,,,,अपुन के मुंह से बार-बार यह सब कुछ निकल जाता है ,पर अपुन का इंटेंशन गलत नहीं है ,,,

अपुन सबसे बचपन से ही इसी तरह बात करता है ,,,अपुन काकी से भी बराबर ऐसे ही बोलता है ,,,,

तब बुआ जी हंसी ,,,और उन्होंने कहा

कोई बात नहीं बेटा प्यार हमारे मन में होना चाहिए, सिर्फ बोलने से कुछ नहीं होता

पर बेटा बताओ ,कैसे फोन किया

जी बुआ जी ,अपन तो यह कहने वाला था की अपुन ने महारानी की शादी तेरे विक्की के साथ फिक्स कर दी

है ,,,

मेरा मतलब की आपने जो बोला था ना

कि आपको महारानी पसंद है ,,,,

बुआ जी सोच में पड़ गई ,और उन्होंने राज की बात दोहराई ,,,

बेटा तुम यह सब क्या कह रहे हो

महारानी

यह महारानी कौन है

हमने तो डॉली के बारे में बात की थी

हां,,, हां ,,वही,,, वही,,, अपुन डॉली को महारानी ही कहता है ,वह क्या है जब अपने यहाँ वो आई थी ना ,तो इतनी सी थी

और उसके नखरे ! बिल्कुल महारानी के जैसे ही थे ,तो तब से अपन उसको शहज़ादी ही कहने लगा ,,,,

अच्छा ,,अच्छा ,,,ठीक है,,,

बुआ जी तू बराबर समझ तो गई ना कि अपन क्या कह रहा है राज बहुत ध्यान से सारी बातें बुआ से कह रहा था ,उसे लग रहा था ,कि वह बहुत समझदारी के साथ विकास की बुआ से बात कर रहा है ,और उसे अपने आप पर गुरुर हो रहा था ,बुआ जी ने राज से कहा !

हां,, हां ,,सब समझ गई बेटा

तेरी सारी बातें समझ गई हूं !आगे बोल

बस मेरा मतलब की अपुन शहज़ादी और विकास की शादी 1 महीने के अंदर करने के लिए तैयार है ,,,,,

यह बात सुनकर बुआ जी के कलेजे में शांति पड़ी,,,

और उन्होंने खुश होते हुए कहा !

राज बेटा यह तो तुमने बहुत बड़ी खुशखबरी दी है ,मैं तुम्हारे इसी फोन का इंतजार कर रही थी ,अगर तुम्हें रिश्ता मंजूर है ,और 1 महीने के अंदर शादी करने के लिए भी तैयार हो, तो इस इतवार को जब विकास की छुट्टी होगी ,वह भी घर पर आ जाएगा और तुम भी आ जाना ,तो हम मिलकर सारी बातें कर लेंगे, कि कब और किस तरह शादी के सारे फंक्शन रखना है ,,,,

हां बुआ जी ठीक है ,अपन संडे को आता है ना फिर ,,

बाय ,,,,बुआ जी ने भी हंसते हुए कहा

बाई बेटा बाई,,,,,,,

जैसे ही वहां से बुआ जी ने फोन काटा कि राज ने अपने सीने पर हाथ रखकर एक गहरी और ठंडी सांस ली ,,,काकी बड़े ध्यान से राज को देख रही थी

काकी ने पूछा !

बेटा हो गई सारी बात

हां ,,,हां ,,,अपन ने सारी बात कर ली अरे तू क्या समझती है, कि अपुन को कुछ आता नहीं ,अपन ने बराबर मामला फिक्स कर दिया है, बस अब उसने संडे को अपन को बुलाया है ,और मेरे साथ तू भी चलेगी

तो वह शादी का होता है ना ,वह हल्दी

शादी और क्या-क्या

वह सब कैसे करना है ,तेरी और विक्की की बुआ के बीच में सारी बातें फिक्स हो जाएगी

हां ,,,हां,, ठीक है ,चलूंगी एक बार चलने की नोबत तो आने दे ,,,अगर जाने की नौबत आई ,तो जरूर चलूंगी,,,,
 
जब राज का दिमाग काकी की बात पर गया ,तो उसने पलटते हुए कहा, काकी तूने क्या कहा

काकी अपनी बात छुपाते हुए बोली,,

यही की सन्डे आने दे चलूंगी ,,,

नहीं ,,नहीं ,,उसके बाद तूने क्या कहा

उसके बाद ,उसके बाद मुझे तो कुछ याद नहीं ,,,,

काकी तूने कुछ ऐसा बोला ,कि नौबत आने दे तो चलेंगे ,,,मतलब

अरे मतलब, मेरे कहने का यह है ,कि कहीं इस बीच उन्हें यहां कोई काम आन पड़ा तो हम उन्हें यही बुला लेते हैं

तो फिर हमारे जाने की नौबत ही नहीं आएगी ,,,,

हां ,,काकी ,यह भी ठीक है ,यह तो अपन साला भूल ही गया ,अपन विक्की से कहेगा कि अगर वह अपने बुआ फूफा जी को यहां लेकर आ जाए ,तो यही बात हो जाएगी,,,

पर राज ने कुछ सोचा ,और कहा !

अरे नहीं ,,नहीं ,,, वह लड़के वाले हैं

और फिर एक बार शादी से पहले महारानी की ससुराल में भी तो देख कर आना पड़ेगा कि वहां सब कैसा है ,चल ठीक है ,हम दोनों ही संडे को चलेंगे,,,,,

राज और काकी के बीच सारी बातें हो चुकी थी,,,कि वह सन्डे को विकास के यहाँ जाकर शादी के फक्शन

के बारे में सारी बाते पक्की कर लेंगे की कब क्या करना है,यहाँ तक कि

शादी की तारीख ,जगह,और मेहमानों की लिस्ट भी,,,,,

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आज संडे था ,और सुबह से ही घर में तैयारी चल रही थी ,काकी और राज की विकास की बुआ के यहां जाने के लिए।

डॉली बिना कुछ कहे एक गुड़िया की तरह घर के काम निबटाते हुए किसी गहरी सोच में थी ।

डॉली के चेहरे पर ना कोई दुख था ,ना खुशी थी ना ही कोई प्रश्न थे ,और ना ही वह किसी से कोई उत्तर चाहती थी ।

ऐसे लग रहा था ,जैसे सुबह से शाम तक की भगवान नेउसमें चाबी भर दी हो ,और वह चलती जा रही हो ।

लेकिन अब राज डॉली से दूर-दूर सा रहने लगा था ।

ना उसके पास जाता ,ना उसे चिढ़ाता, और ना ही कोई बात करता ,पर हां इतना जरूर था ,कि वह चाहे काकी से पूछ कर, या खुद देख कर ,यह देख लेता, कि डॉली ठीक है। उसने खाना खाया है, कि नहीं खाया

उसकी तबीयत ठीक है ,कि नहीं ,इससे ज्यादा राज डॉली से कुछ नहीं कहता था राज ने जीप तैयार कर ली थी ।

और काकी भी तैयार होकर बाहर आ गई थी

बस गाड़ी में बैठ कर उनके यहां जाने की ही देर थी।

बस कुछ ही देर बाद राज और काकी जीप में बैठे ,और विकास के यहां जाने के लिए निकल गए, उनका गांव यहीं से कोई दो या ढाई घंटे की दूरी पर था ।

चूँकि मिलने की बात पहले से ही हो चुकी थी कि संडे को विकास भी अपने बुआ फूफा जी के साथ घर पर ही मिलेगा ।

काकी और राज जैसे ही विकास के यहां पहुंचे ,वह इनके इंतजार में ही बैठे थे।

विकास के घर पर उसकी बुआ फूफा जी के साथ उसकी दोनों बहने भी आ गई थी ।

उनके भाई की शादी की बात जो होने वाली थी ,सब लोग बैठ कर इन्हीं सारी बातों के बारे में डिस्कस कर रहे थे, कि कब कैसे कौन से फंक्शन किए जाए ,लेकिन उससे पहले जो जरूरी बात थी ,वह यह थी ,कि पंडित को बुलाकर पहले दोनों की शादी का मुहूर्त निकलवा लिया जाए।

यह 1 महीने के अंदर कौन से दिन और कौन सा मुहूर्त सही रहेगा ,पंडित से इस बारे में पूछना था।

काकी को यह तो पहले से ही पता था

कि इस महीने छह-सात दिन शादी के मुहूर्त है ,और उन में से कोई भी एक निकल सकता है ।

थोड़ी देर बाद विकास की बुआ पंडित जी को भी बुला चुकी थी।

पंडित जी ने विकास और डॉली का नाम देखते हुये

महीने की 3 तारीखों में इनके विवाह का शुभ मुहूर्त बताया ,कि तीनों तारीख ही अति शुभ है ।

आप किसी भी 1 तारीख में इनका विवाह कर सकते हैं ।

आज रविवार था ,और ब्याह का एक मुहूर्त दो रविवार छोड़ तीसरे रविवार को पढ़ रहा था ।

यानी कि पूरे 21 दिन बाद

दूसरा मुहूर्त उसके 2 दिन बाद सोमवार को और तीसरा मुहूर्त उसके 4 दिन बाद शुक्रवार को ।

यह तीनों तारीखे ही सही थी ,पंडित जी ने कह दिया था, कि आप जिस भी तारीख में चाहे विवाह कर सकते हैं ।

लेकिन विकास और डॉली की ड्यूटी को देखते हुए ,सबको रविवार का दिन ही सही लगा ,यानी कि आज से ठीक 21 दिन बाद और जैसे ही वह रविवार के दिन पर अपनी मुहर लगाने लगे ,कि काकी ने रोकते हुए कहा !

नहीं ,,नहीं,,, मेरा मन तो सोमवार का है सोमवार का दिन हर काम के लिए शुभ माना जाता है ,डॉली भी बचपन से शिव मंदिर जाती रही है ,और शिव पर उसकी अटूट आस्था भी है ,तो क्यों ना हम यह शादी सोमवार को ही रखें ।

अगर काकी को सोमवार पसन्द था।

तो भला किसी को क्या एतराज हो सकता था ,आखिर आज से ठीक 22 वे दिन सोमवार को डॉली और विकास की शादी फिक्स हो गई ।

उसके 1 दिन पहले हल्दी

2 दिन पहले तेल और मंडप

और उससे भी 8 दिन पहले दोनों की सगाई यानी कि पूरा प्रोग्राम 8 दिन का फिक्स हो चुका था ।

अब इसके लिए एक ही बात तय होना बाकी रह गई थी ,और वह थी जगह, कि इन दोनों की शादी के सारे फंक्शन कहां से किए जाएं

जहां बुआ को उनका ही गांव सही लग रहा था ,वहीं विकास का कहना यह था

की सगाई ,हल्दी, लगुन भले ही घर से हो जाए, लेकिन शादी शहर के एक अच्छे मैरिज हॉल से होना चाहिए ,क्योंकि उसके ऑफिस के काफी बड़े बड़े ऑफिसर उसमें शामिल होने वाले हैं ,और फिर गांव में सब को आने में परेशानी भी हो सकती है।

इसलिए यह शादी शहर से ही रखी जाए

पर काकी का मन था ,की शादी उनके गांव से ही रखी जाए।

डॉली जब से इस गांव में आई है ,गांव के सभी लोगों ने उसको अपनी बेटी की तरह ही माना है ।

भला गांव के इतने सारे लोग एक साथ शहर कैसे जा पाएंगे ,और ऐसा कोई भी नहीं है

जो डॉली की शादी में शामिल होना ना चाहे इसलिए मेरा मन है, कि डॉली की शादी गांव से ही हो ।

विकास बेटा ! मैं जानती हूं ,कि आपके बहुत सारे अरमान होंगे ,पर मेरे लिए और डॉली के लिए आप मेरी

सिर्फ एक बात मान लीजिए कि डॉली की शादी हमारे गांव से ही होने दीजिए ।

देखिए आपने 1 महीने के अंदर शादी करने के लिए कहा, पर हमें कोई एतराज नहीं है हम आपकी बात को सम्मान देते हैं ।

पर बेटा मेरे ख्याल से डॉली की खुशी गांव से शादी में ही होगी , उसको अच्छा लगेगा

कि गांव के सभी लोग उसे आशीर्वाद देने आये,,, और आप इसकी बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए ,हम आपके स्वागत सत्कार में कोई भी कमी नहीं छोड़ेंगे ।

सारा इंतजाम बहुत अच्छे से होगा ,आप तो हमारे सिवा को जानते ही हैं ,बचपन से खाने-पीने का काम कर रहा है ,और इसकी व्यवस्था तो ऐसी होती है ,कि कोई ढूंढ कर भी उसमें कमी नहीं निकाल पाएगा ।

जब विकास ने ऐसी बात सुनी ,तो उसने काकी की बात को सहमति दे दी ।

काकी अगर आप लोग ऐसा चाहते हैं, तो ऐसा ही होगा ,मुझे कोई परेशानी नहीं है काकी के पूछने पर विकास की बुआ ने लेखा-जोखा करके बता दिया था ।

कि उनके यहां से यही कोई 200 के करीब बराती आएंगे ,राज बड़े ध्यान से सब की बातें सुनता जा रहा था,पर वह अपनी तरफ से कुछ भी नहीं बोला ,उसकी मंजूरी सारी बातों पर थी।

अब रही सगाई की बात ,उसके लिए काकी ने वही शिव मंदिर चुना था ,जिसमें अक्सर वह डॉली को लेकर जाती थी ।

काकी का कहना था ,सगाई में सिर्फ परिवार के लोग ही होंगे ,और हम मंदिर में जाकर लड़के लड़की को अंगूठी बदलवा देंगे ।

क्योंकि 8 दिन बाद ही शादी है, तो सगाई में ज्यादा लोगों को जोड़ने की जरूरत नहीं है विकास इस बात पर भी राजी हो गया था बाकी बचे मेहंदी और संगीत ,जो लड़के और लड़की के अपने-अपने घर पर ही होने वाले थे।

जब सारी बातें साफ हो गई ,और काकी राज वहां से निकलने लगे ,तो राज का मन बहुत भारी हो रहा था ।

उसे लग रहा था ,जैसे उसने अपनी किसी सबसे प्यारी चीज का सौदा कर डाला हो।

वह विकास के हाथ अपने हाथों में लेकर कहने लगा ,,,,मास्टर तू अपन से वादा कर की महारानी को हमेशा खुश रखेगा !

उसके आगे बढ़ने में हमेशा उसकी सहायता करेगा, कोई ऐसी बात नहीं करेगा ,जिससे उसे दुख हो ,अब इसे तू अपन की रिक्वेस्ट समझ ,या फिर अपुन का आर्डर ,पर अपुन सिर्फ और सिर्फ महारानी की खुशी ही चाहता है ।

उसे कभी कोई तकलीफ नहीं होने देगा विकास ने भी राज के हाथों को मजबूती से पकड़ते हुए कहा!

हां राज भैया मैं डॉली को कभी कोई तकलीफ नहीं होने दूंगा, और नई तो है ही इतनी इंटेलिजेंट ,कि वह बहुत आगे बढ़ेगी फिर मैं हूं ना उसके साथ, हर कदम पर उसका साथ दूंगा ,आपको कभी शिकायत का

मौका नहीं मिलेगा,,,,,

मैं आपसे वादा करता हूं राज भैया ,आपकी डॉली मेरे पास हमेशा खुश रहेगी ,,,,,

तब तक काकी जाने के लिए खड़ी हो गई थी उसने एक बार ध्यान से दोनों के चेहरे को देखा ,और मुस्कुराते हुए कहा!

राज ! विकास!, खुशी तो इंसान के अंदर होती है ,कोई भी किसी दूसरे इंसान को खुशी नहीं दे सकता ,खुशियों की तलाश इंसान को खुद ही करनी पड़ती है ।

काकी यह तू क्या कह रही है

अरे हम अपनी डॉली का हाथ विकास के हाथ में दे रहे हैं ,तो इतना प्रॉमिस तो ये दे ही सकता है ।

काकी ने कहा राज अब चले

या फिर तुझे कुछ और भी कहना है

या पूछना है !

जब राज और काकी जीप में बैठकर आने लगे ,तो विकास ने आगे बढ़ते हुए काकी से कहा !

काकी आप लोगों से मेरी एक रिक्वेस्ट है

कि आप लोग इस शादी में ज्यादा तामझाम ना करें ,मुझे सादगी ही पसंद है

शादी जितने सिंपल तरीके से होगी

मुझे अच्छा लगेगा ,,,,,,

काकी ने मुस्कुराते हुए विकास से कहा

पर बेटा कुछ बातें हमारी पसंद पर भी छोड़ दे ,,,,,,हम अपने हिसाब से देख लेंगे ,,,

तब तक राज ने गाड़ी स्टार्ट की और गाड़ी आगे बढ़ा ली,,,,

राज गाड़ी चलाते हुए काकी से बोलता जा रहा था ,काकी तू हर बात बीच में क्यों काट रही थी

उनने कहा शादी रविवार को होगी

तो तूने कह दिया नहीं सोमवार को होगी उन्होंने कहा कि शादी शहर से होगी

तो तूने गांव में करवा ली,,,,

अगर विकास को सादा पसंद है

तो तूने कहा नहीं हम तो तामझाम करेंगे

अरे ये सब कहने की क्या जरूरत थी

जैसा वो चाहते हैं ,वैसा कर देंगे ना

राज तू कब तक दूसरों के बारे में सोचता रहेगा ,अपनी ख्वाहिशें भी तो कुछ हो सकती हैं ,कुछ अपनी चाहते भी तो हो सकती है वो हम क्यों नहीं पूरी कर सकते

हमेशा दूसरों के लिए नहीं जिया जाता

कभी कभी अपने लिए भी जी लेते हैं !

अगर भगवान ने जिंदगी दी है

तो उसको खूबसूरत बनाना हमारा काम है काकी पता नहीं तू क्या कहती रहती है

मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा ,,,

ठीक है तू कुछ समझेगा भी नहीं

चल ,अब जल्दी घर चल ,वैसे भी हम बहुत लेट हो गए हैं ।

हमें कल से ही शादी की तैयारियां शुरू करनी होंगी।

ठीक है काकी घर तो हम पहुंच ही जाएंगे और तू चिंता

मत कर ,,,,

अब उन्हें ना अपन सब तैयारी चकाचक करके देगा ,और तू चिंता मत कर ,,,

तू जैसा चाहेगी ,और डॉली जैसा चाहेगी अपुन बैसा ही करेगा ।

अब अगर गांव से शादी हो रही है

तो तू अपन का इंतजाम देखना ,सारे गांव वालों को बुलाकर पूरे गांव को सजा देगा और उनके खाने-पीने का इंतजाम भी टॉप होगा ,,,,

हां राज वह तो एन वक्त पर ही पता चलेगा कि उन लोगों का स्वागत कैसा होता है

मेरा मतलब कि हम चाहे कितनी भी कोशिश कर ले ,हमेशा होता वही है जो भगवान ने हमारी तकदीर में लिख दिया है मेरा मतलब ! कि सब कुछ अच्छा ही होगा शाम होते-होते राज और काकी घर वापस आ गए थे,,,,,,,,

राज और काफी जब शाम को घर आए, तो देखा डॉली तो किसी यंत्र की भांति अपने काम लगी हुई थी ।

ना उसे इनके आने का आने की खुशी थी और ना ही किसी बात का गम।

डॉली किसी शांत झील की तरह चुप रह गई थी ,आते साथ ही राज ,काकी को सुनाते हुए सारी बातें कह रहा था ,,,,

जो वह डॉली से कहना चाहता था।

डॉली ने उनकी किसी भी बात का कोई ध्यान नहीं दिया ,,,,न ही कुछ पूछा ,काकी हाथ मुंह धो लीजिए खाना लगाती हूं ।

राज बोले ही जा रहा था, तब तक काकी भी हाथ धो कर आ गई ,और काकी ने राज से भी कहा , राज बहुत रात हो गई है ।

डॉली को सुबह भी जल्दी उठना है, तू जल्दी से जाकर हाथ मुंह धो ले ,हम सब खाना खाते हैं ।

राज समझ गया था ,कि डॉली तो इस रिश्ते से खुश ही नहीं है,इसलिए वह किसी बात का जवाब नहीं दे रही ।

लेकिन राज को विकास के साथ ही डॉली की खुशी

दिख रही थी ,,,वह हाथ मुंह धो कर आया ,और खाने के लिए सोफे पर बैठ गया ,,,,,

डॉली ने सारी चीजें राज की पसंद की ही बनाई थी,, आलू के पराठे, पालक की दाल और खूब सारा लहसुन डालकर बैंगन का भरता ,काकी बचपन से ही ये सब बनाती थी ,तो राज को यह सारी चीजें बहुत पसंद थी, डॉली ने अच्छे से थाली लगाई और तीनों की थालियां टेबल पर रख ली, बिना कुछ कहे ही वह खाना खाने लगी।

थोड़ी देर बाद राज, ने काकी से बातें शुरू कर दी काकी अब हमें शादी की तैयारियां शुरू कर देना चाहिए , अभी दिन ही कितने बचे हैं ।

मैं कल टेंट हलवाई की बात करने शहर जाता हूं ,कल ही सब कुछ फिक्स कर दूंगा वर्ना एन टाइम पर सारी चीजें ठीक से नहीं हो पाती,,,,,,, पराठे का टुकड़ा मुंह में रखते हुए राज ने कहा ,,,,,,महारानी आज तूने दाल पालक ,और बैंगन का भर्ता बहुत अच्छा बनाया है ,,,,

डॉली ने एक फीकी हंसी के साथ कह दिया राज आज आखिरी बार आप मेरे हाथ का खाना खा रहे हैं ना, इसलिए मैंने सब कुछ आपकी पसंद का बनाया है ।

राज हैरानी से डॉली को देखने लगा

महारानी ये तू क्या बोले जा रही है

क्या शादी के बाद तू इस घर में आएगी नहीं पता नहीं !

इतना कहते हुए डॉली दोबारा खाना खाने लगी,,,,

खाना खाते हुए राज ने काकी से दोबारा शादी की बातें करना शुरू कर दी थी और अचानक राज को याद आया, कि काकी हम उनसे अंगूठी का नाप लेना तो भूल ही गए ,अरे जब डॉली और विकास की सगाई होगी , तो विकास के लिए अंगूठी भी तो देना पड़ेगी !

काकी ने बिना राज की तरफ देखे हुए ही कहा , राज तू अपने नाप की अंगूठी ले लेना विकास की कद काठी तेरे जैसे ही है ।

मेरे ख्याल से तेरे नाप की अंगूठी उसे सही आ जाएगी ।

अरे काकी तू ऐसे कैसे कह सकती है।

कि मेरे नाप की अंगूठी उसे सही आ जाएगी राज औरतौ में परखने की क्षमता बहुत तेज होती है , एक बार में ही सारी चीजों को देख लेती हैं ,यहां तक कि किसी के चेहरे पर क्या लिखा है , और उसकी आंखों में क्या दिख रहा है ,उन्हें यह भी समझ में आ जाता है ,तो फिर विकास से तो मैं दो-तीन बार मिल भी चुकी हूं , मुझे उंगली उसकी उंगलियों का नाप अच्छी तरह से पता है ।

तू अपने आप की अंगूठी लेगा ,तो उसको आराम से आ जाएगी ,,,,,,

ठीक है काकी , कल मैं शहर जाऊंगा तो विकास के नाप की अंगूठी लेते आऊंगा ।

अरे नहीं राज तू कल शहर मत जाना एक काम करते हैं ,परसों डॉली की छुट्टी है

तो मैं और डॉली भी तेरे साथ चलेंगे

डॉली की शादी की और भी तो खरीदारी करनी होगी ।

इसके लिए भी तो अंगूठी लेनी होगी

राज ने कहा काकी को देखते हुए कहा पर काकी , डॉली के लिए तो अंगूठी विकास के यहां से आएगी ना ,,,,

हां राज पर उंगली सिर्फ एक ही नहीं होती पूरे हाथों में 10 उंगलियां होती हैं।

अगर 10 अंगूठी भी डॉली के पास होंगी तो भी दिक्कत की बात नहीं है ।

और इसके लिए कपड़े ,जेवर ,मेकअप बहुत सारी चीजें खरीदनी होंगी,,,,

ठीक है काकी, फिर कल तू महारानी के साथ मिलकर सारी लिस्ट बना लेना ।

कल मैं गांव के ही सारे काम निपटा लेता हूं पंडित ,हलवाई और शादी में और भी लोग जो लगते हैं ,उन सब से कल ही बोल देता हूं,,,,,

20 दिन पता भी नहीं चलेंगे ,20 मिनट की तरह निकल जाएंगे ।
 
राज काकी बातें कर ही रहे थे कि डॉली ने तीनों की थालीयां उठाई ,उन्हें रसोई में रखा , और टेबल को कपड़े से साफ करके अपने कमरे में चली गई ।

सुबह उठकर भी डॉली ने घर के काम निपटाए ,और रोज की तरह आंगनबाड़ी चली गई ,जब आंगनबाड़ी से आई तो काकी ने डॉली को अपने पास सामान की लिस्ट बनाने के लिए बिठा लिया था ।

डॉली का किसी भी काम के लिए मन नहीं कर रहा था ,

पर काकी ने उसे प्यार से समझाया ,और अपने पास बिठाकर कहा डॉली बेटा जो हो रहा उसे होने दे, अब तू अपनी जिंदगी में आगे बढ़, और जैसे मैं कह रही हूं ,वैसा कर ,सब कुछ अच्छा ही होगा। डॉली के मना करने के बाद भी काकी ने प्यार से समझा-बुझाकर डॉली से बात करते हुए उसके सारे कपड़े , मेकअप , और भी सारी चीजों की लिस्ट बना ली थी ।

शाम को राज भी गांव के कुछ जरूरी काम निपटा कर आ गया था ।

दूसरे दिन सुबह से ही डॉली काकी और राज शहर के लिए निकल गए थे ।

सबसे पहले वह तीनों एक ज्वेलर्स के यहां जा पहुंचे ,जहां पर काकी ने अंगूठी के जोड़े दिखाने की बात दुकानदार से कहीं बह सुंदर-सुंदर अंगूठियों के सेट दिखाने लगा जिसमें एक लेडीस और जेंट्स अंगूठी जोड़े में बनाई गई थी ।

डॉली तो किसी बूत की तरह ही बैठी थी काकी काफी सारे डिजाइन पसंद करती जा रही थी ,काकी को पांच-छह डिजाइन उसमें से पसंद आए ,जो उसने अलग करवा लिये आखिर काकी ने राज से पूछना ही ठीक समझा ,,,,,,,,

राज को एक डिजाइन पसंद आया , जिसमें दो दिल बने हुए थे ,और उसके बीच में बहुत ही खूबसूरत सा लाल रंग का नग चमक रहा था,,,,,काकी ने छोटी अंगूठी उठाकर डॉली की उंगली में डाली, और उसका नाप देखने लगी,,,, और यह अंगूठी सच में डॉली को

बिल्कुल फिट आई थी ,और उसकी उंगली में बहुत खूबसूरत भी लग रही थी ।

जेंट्स अंगूठी उठाते हुए काकी ने राज की तरफ बढ़ाई और उससे उंगली में पहन कर देखने के लिए कहा !

राज ने उसे अपनी उंगली में पहन कर देखा तो उसको भी नाप बिल्कुल सही था।

काकी ने अंगूठी का जोड़ा पैक करने के लिए दुकानदार से कह दिया ।

उसके बाद एक छोटा सा नेकलेस और उसी की मैचिंग के कानों के झुमके भी लिये

हाथों के दो कड़े,और एक नाक की नथ ,काकी का कहना था कि नथ तो नई दुल्हन को पहननी ही चाहिए ,ये तो सुहाग की निशानी होती है।

जब सारी चीजों का बिल बन गया , और दुकान से बाहर निकलने लगे , तो काकी की नजर डॉली के पैरों पर गई ,,काकी एक बार फिर मुड़ी और दुकान वाले से एक खूबसूरत से घुंघरू लगे पायल ,और उसके साथ उंगलियो के बिछुए भी डॉली के लिए खरीद लीये ।

काकी का कहना था , कि बहू छम छम करती हुई अपने घर के आंगन में फिरती है तो खुशियां आती है ।

इसलिए उसके पैरों में पायल तो होनी ही चाहिए ,यह सारी चीजें लेकर अब सभी लोग कपड़े की दुकान पर जा पहुंचे थे ।

जहां पर डॉली के लिए कुछ साड़ियां ली गई साथ ही काकी राज के लिए भी खरीदारी करती जा रही थी ।

क्योंकि उसे पता था ,कि राज खुद अपने लिए कुछ

नहीं खरीदेगा ।

कपड़ों के बाद डॉली का मेकअप उसकी चप्पल ,उसकी जरूरत की सारी चीजें ली जा चुकी थी ।

काकी की खरीदारी बजट से कुछ ज्यादा ही हो गई थी , काकी जब भी राज से जानना चाहती , कि वह कोई चीज लेले

राज पूरे विश्वास के साथ कहता काकी अपनी महारानी के लिए जो भी जरूरी है तू सब कुछ ले,,,, मुझे तेरे ऊपर पूरा विश्वास है कि तू महारानी के लिए हर चीज अच्छी ही चुनेंगी,,,, तब काफी ने राज के दोनों हाथ अपने हाथ में लिए ,और उसकी आंखों में देख कर कहने लगी , राज इतना भरोसा तो तू मुझ पर कर ही सकता है , कि तेरी महारानी के लिए मैं सब कुछ सही ही चुनूँगी जो उसके लिए सही होगा !

हां काकी तुझ पर तो मुझे पूरा भरोसा है सारी खरीदारी हो चुकी ,,,,,,

तो देर रात तीनों घर वापस आ गए थे।

इसी तरह रोज़ कुछ ना कुछ काम कंप्लीट होते जा रहे थे ।

पंडित ,हलवाई ,टेंट खरीदारी रिश्तेदारों की लिस्ट , रिश्तेदारों के नाम पर काकी और राज का कोई भी नहीं था ।

काकी कमला बुआ को ही अपना सब कुछ मानती थी ।

और राज के लिए तो काकी में पूरी दुनिया थी ।

तैयारी होते होते वह दिन भी आ गया , जब दूसरे दिन

डॉली की सगाई थी।

काकी के रिश्तेदार के नाम पर तो कोई था नहीं ,इसलिए काकी ने पूनम को बुलाना ठीक समझा ,डॉली की बहन या सहेली जो भी कह सकते पूनम ही डॉली के सबसे करीब थी ।

उसका साथ भी हो जाएगा ,और डॉली के कामों में सहायता भी कर देगी ।

यही सोचते हुए काकी ने पूनम के मां-बाप से उसके यहां 8 दिन दुखने की परमिशन ले ली थी ।

वह भी काकी को अच्छी तरह से जानते थे तो उन्होंने पूनम को वहां रुकने के लिए कह दिया ,दोपहर तक पूनम काकी के यहां आ चुकी थी ।

पूनम के आते ही, डॉली उसके गले रख कर देर तक रोती रही,,,,पूनम को सच में यकीन नहीं हो रहा था , कि डॉली की शादी विकास से हो रही है ।

उसने तो यही सोचा था , कि डॉली और राज ही एक होंगे ,उसने देखा था कि दोनों एक दूसरे के लिए ही बने हैं ।

दोनों का प्यार एक दूसरे के लिए अटूट है राज डॉली की एक हल्की सी चीख पर सब को छोड़कर डॉली के लिए भागा था ।

और डॉली साफ पानी की तरह राज के पीछे बहती जाती है ।

उसकी जिंदगी राज से शुरू होकर खत्म भी राज पर ही होती है।

पूनम को बहुत आश्चर्य लग रहा था , कि राज ऐसे

कैसे मना कर सकता है ।

पर फिर भी जो किस्मत में लिखा होगा वही होकर रहेगा,,,,,

पूनम भी क्या कर सकती थी।

वह डॉली को समझा ही सकती थी ।

तो उसने समझाया ,,, कि भी जो हो रहा है उसे होने दे ,विकास भी अच्छा लड़का है विकास का प्यार तुझे मिलेगा तो धीरे-धीरे सब कुछ भूल जाएगी ।

और जब राज खुद ही यह नहीं चाहते तो कोई क्या कर सकता है ।

देर रात तक दोनों दो-तीन घंटे बातें करती रही । डॉली रोती रही और पूनम उसको समझाने की कोशिश करती रही ।

न तो डॉली रोना छोड़ रही थी ,और ना ही पूनम समझाना ,,,,

बहुत देर हो गई ,और डॉली रो-रो के थक गई ,,तो थकावट से उसका बदन टूटने लगा था , उस पर नींद का नशा छाने लगा था जब पूनम को लगा डॉली को नींद आ रही है तो उसने डॉली के सिर पर हाथ फेरते हुए एक बार फिर कहा !

डॉली तू सो जा, और मैं उम्मीद करती हूं कि सुबह तू एक नई उम्मीद के साथ नई जिंदगी शुरू करने की सोच लेकर ही जागेगी लेकिन बेहोशी की नींद में डॉली ने पूनम से एक ही बात कही !

डॉली मेरी जिंदगी राज से शुरू होती है और उन पर ही खत्म ,अगर मेरी जिंदगी में रहेंगे तो राज ही

रहेंगे ,,,या फिर जिंदगी ही नहीं रहेगी ,,,,,,

और इतना कहते हुये गहरी नींद की आगोश में चली गई थी,,,,,,

पूनम उसकी बात को समझने की कोशिश कर रही थी , कि डॉली ये सब क्या बोले जा रही है ।

पूनम को भी नींद आने लगी थी ।

और दोनों सो चुकी थी, आज सुबह डॉली उठी ,उससे पहले पूनम उठ चुकी थी ।

पूनम ने सबके लिए चाय बनाई ,और नाश्ता बनाने रसोई में भी जा पहुंची ।

काकी घर के बाकी कामों को देख रही थी कल डॉली की सगाई होने वाली थी ।

और आज उसके आंगनबाड़ी का आखिरी दिन था ।

आज के बाद डॉली ने छुट्टी ले रखी थी , और शादी के 5 दिन बाद ही उसकी सुपरवाइजर की नौकरी में जॉइनिंग थी ।

वैसे तो सारा काम वह कल ही खत्म कर चुकी थी , बस आज उसे सिर्फ साइन करने के लिए आंगनबाड़ी जाना था ।

जाते हुए पूनम ने डॉली के हाथ में चाय नाश्ता दिया , डॉली ने 2,3 कौर ही तोड़े और थोड़ी सी चाय पीकर कमरे में गई कुछ ढूढते हुए अपना पर्स उठाया और आंगनबाड़ी जाने के लिए चप्पल पहनने लगी तब तक काकी डॉली के पास आ गई थी । काकी ने प्यार से बोला, डॉली बेटा राज से बोल दूं , तुझे छोड़ आएगा !

नहीं काकी मैं खुद ही चली जाऊंगी ।

जैसे ही डॉली निकलने लगी, वह काकी के गले लग गई ,,,,लेकिन काकी कुछ कहती इससे पहले ही मुड़ी ,,,,,

और धीरे-धीरे एक-एक कदम बढ़ाते हुए आंगनबाड़ी की तरफ चल दी ,,,वह बोझिल कदमों से आंगनबाड़ी चली जा रही थी,,,,,,,,,,,

डॉली आंगनबाड़ी पहुंच चुकी थी ,और काफी पूनम के साथ घर के कामों में लगी हुई थी। कल ही डॉली की सगाई थी ,और यहां से यही कोई 8,10 लोग शिव मंदिर जाने वाले थे ।

और कुछ इतने ही लोग विकास के यहां से भी आ रहे थे ,तो बस काकी और पूनम मिलकर उसी की तैयारियां कर रही थी ।

डॉली आंगनबाड़ी पहुंच गई ,,और एक दो काम बाकी थे वह भी देखने लगी, वैसे तो सब कुछ हो गया था ।

लेकिन डॉली की जगह एक नई सहायका आंगनबाड़ी में आ चुकी थी ,तो डॉली उसी को और भी कामों के बारे में समझा रही थी डॉली कह कर गई थी, कि सिर्फ आधे घंटे में आ जाएगी ,लेकिन जब करीब 2 घंटे बाद भी वह नहीं आई, तो काकी ने फोन लगाया डॉली ने फोन उठाया ,,और कहा काकी एक बहुत जरूरी काम है ,बस कुछ ही देर में खत्म होने वाला है ,और फोन रख दिया। काकी ने पूनम को बताया ,कि डॉली ऐसा कह रही है ,आखिर ऐसा कौन सा जरूरी काम है ,वह तो पहले ही पूरा काम निपटा चुकी है ।

काकी डॉली के लिए परेशान हो रही थी उसने पूनम से भी कहा पूनम जरा एक बार तू भी फोन लगा कर बात कर ,और उससे कह दे, कि ज्यादा काम करने की जरूरत नहीं है ,अब जल्दी से चुपचाप घर आ जाए पूनम ने कहा काकी अभी लगाती हूं।

लेकिन जब पूनम का फोन डॉली ने नहीं उठाया ,और काकी को बताया, कि डॉली फोन नहीं उठा रही है ,तो काकी ने पूनम को खुद आंगनबाड़ी जाकर डॉली को लाने के लिए कहा ,कि वह तो जब भी आंगनवाड़ी जाती है, वहां के काम में मगन हो जाती है। अरे कल उसकी सगाई है, जरा रंग रूप पर भी तो उसे ध्यान देना चाहिए ।

इस तरह काम में लगी रही ,तो क्या खाक रंग रूप निखर कर आएगा,,,,,

पूनम ने दुपट्टा उठाते हुए कहा अभी जाती हूं काकी ने जाते-जाते पूनम को एक थैला भी पकड़ा दिया ,उसमें डॉली के लिए कुछ जरूरी सामान था।

काकी ने कहा अगर काम में बिजी हो तो उसको थोड़ा सा कुछ खिला देना ,पूनम ने थैला लिया और आंगनवाड़ी जाने के लिए चप्पल पहने लगी,,,,

वह चप्पल पहन ही रही थी ,कि काकी के फोन पर डॉली का फोन आने लगा,,,,

काकी ने फोन उठाया और डॉली को डांटते हुए कहा ,डॉली तू सुनती क्यों नहीं, मैंने तुमसे कहा था ना ,कि दस्तखत करके तुरंत घर चली आना,,,,

तुझे काम किए बिना चैन नहीं पड़ता,,,

बेटा कल तेरी सगाई है ,जरा अपने रंग रूप का भी ख्याल कर ले ,जल्दी घर आ जा अच्छे से तेरा उबटन करवा देती हूं ,तेरे बालों में दही लगावा दूंगी, चमक आ जाएगी ,,

पर डॉली कुछ भी नहीं बोल रही थी।

जब काकी ने दुबारा कहा डॉली तू मेरी बात सुन रही है ,कि नहीं, मैं क्या कह रही हूं,,,

डॉली लड़खड़ाती जुबान से बस इतना ही बोल पाई ,,,,,

काकी आप जल्दी से आंगनबाड़ी आ जाइये मुझे बहुत घबराहट हो रही है ,,,

और ऐसे लगा जैसे फोन डॉली के हाथ से छूट गया ,,,,

इधर फोन काकी के हाथ से भी छूट कर जमीन पर गिर चुका था।

और काकी तेजी से नंगे पैर ही बेतहाशा दौड़ती आंगनबाड़ी की तरफ चली गई,,,

पूनम उसके पीछे ही थी, पूनम भी काकी के पीछे दौड़ने लगी,,,,,

वह लगातार पूछती जा रही थी।

काकी क्या हुआ

आप ऐसे क्यों भाग रही है

काकी बुरी तरह हांफ रही थी ,पूनम मुझे नहीं पता डॉली ने मुझे अभी आगनबाडी बुलाया है ,उसे बहुत घबराहट हो रही है।

पता नहीं क्या हुआ मेरी बच्ची को !

काकी और पूनम आंगनबाड़ी पहुंची तो देखा कि डॉली नीचे फर्श पर लेटी हुई थी ।

और बुरी तरह तड़प रही थी, वह अपने पेट की तरफ इशारा कर रही थी ।

आंगनबाड़ी के कुछ बच्चे और वहां की तीन चार सहायिकाये डॉली के पास ही बैठी,, कोई उसे पानी पिला रहा ,तो कोई उसको हवा कर रहा ,,काकी भागकर डॉली के पास बैठी ,और उसके कंधे पकड़कर उससे पूछने लगी,,,,,

डॉली क्या हुआ ,,,तुझे डॉली बेटा,,,

तू बताती क्यों नहीं ,क्या हुआ ,,,,,,

डॉली ने अपने हाथ से पेट की तरफ इशारा किया, क्योंकि वह बोल नहीं पा रही थी।

जब हाथ ऊपर उठाया ,तो डॉली की बंद मुट्ठी में कुछ दिखा ,,,जिस पर एक साथ सभी की निगाहें गई ,,,,,,एक छोटी सी काले रंग की सीसी पूनम ने डॉली की मुट्ठी से वह शीशी निकाली,,,,

और उसे सूंघकर देखने लगी,,,

और जैसे ही उस पर लिखा हुआ पढ़ा

पूनम की बुरी तरह से चीख निकल गई घबराते हुए बोली,,,,,,,,

काकी डॉली ने जहर पिया है

पॉइज़न की सीसी है यह ,,,,

कहते हुए पूनम बुरी तरह से कांप रही थी क्या

काकी के तो जैसे होश ठिकाने नहीं थे।

काकी चिल्लाते हुए बोली ,,,

पूनम तू ये क्या बक रही है

अरे मुझे नहीं पता क्या हुआ जल्दी से डॉक्टर को

बुलाओ ,,,

जल्दी डॉक्टर को फोन कर ,,,,

पूनम की समझ में नहीं आ रहा था

कि वह पहले राज को बुलाये या डॉक्टर को ,,,,

लेकिन उसने सबसे पहले डॉक्टर का नंबर डायल किया, और उन्हें बताया कि डॉक्टर साहब डॉली ने जहर पिया है, प्लीज उसके लिए जो भी सही हो, आप जल्दी से बोल दीजिए ।

डिस्पेंसरी यहां से थोड़ी दूर थी।

डॉक्टर ने कहा मैं जल्द से जल्द आने की कोशिश करता हूं,,,,,

और पूनम आंगनबाड़ी से बाहर झाँकते हुए डॉक्टर का इंतजार करने लगी।

धीरे-धीरे लोगों को डॉली के बारे में पता चलता गया ,,,और आंगनबाड़ी के अंदर बाहर भीड़ लग चुकी थी ।

लेकिन इन सबके बीच पूनम राज को फोन करना तो भूल ही गई थी ।

पर गाँव इतना बड़ा नहीं था, की राज को खबर ना मिले ,,,,,,

आंगनबाड़ी के पास का ही एक 15 ,16 साल का लड़का दौड़ता हुआ ढाबे पर पहुंचा और चिल्ला चिल्ला कर राज को आवाज देने लगा ,,,,

राज भैया

राज भैया

जल्दी चलिए डॉली ने जहर पी लिया है ।

वह आंगनबाड़ी में बेहोश हो गई है ।

क्या

राज के हाथ में टमाटर से भरी हुई डलिया थी ,,, जिसे वह लोडिंग से उतारकर अंदर रख रहा था ।

बस कुछ ही सेकंड में सारे टमाटर राज के चारों तरफ बिखरे पड़े थे ।

इतना सुनकर उसके हाथ वही जम गए थे उसका दिमाग सुन्न हो रहा था ।

उसने लड़के को डांटते हुए पूछा

तू पागल है क्या ,यह सब क्या बके जा रहा है लड़के ने रोते हुए कहा !!!

राज भैया मैं कोई बकवास नहीं कर रहा यह सच है ,आप एक बार चलिए तो आंगनबाड़ी के बाहर भीड़ लगी हुई है ।

काकी और पूनम दीदी भी रोए जा रही है आप जल्दी चलिए,,,,

राज पैदल ही आंगनबाड़ी की तरफ भागने लगा ,,,पर उसे लगा कि नहीं अभी डॉक्टर को लेकर सीधा जाना चाहिए।

तो अपनी गाड़ी स्टार्ट की ,,

पर सच ही कहा है

हमेशा देर में ही अंधेर होती है

यानी कि हमे जल्दी होगी तो उतनी ही उसमें देर लगेगी ,,,,,

जब गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई तो राज ने जल्दी से मोटरसाइकिल निकाली,,,

अब तक उस पर वह लड़का भी पीछे बैठ चुका था ,,,

राज किक मारते हुए उससे पूछ रहा था

यह सब कैसे हुआ, तू अपन को कुछ बताएगा कि नहीं

राज भैया आधा एक घंटा हो गया होगा और तू अपन को अब बता रहा है

राज भैया मुझे लगा आप अंदर ही होंगे लेकिन जब आप मुझे वहाँ नहीं दिखे

तो मैं आपको बताने यहां चला आया

गाड़ी भी स्टार्ट नहीं हुई थी,,,,

राज ने गुस्से में चाबी फेंकते हुए जोर से

एक लात गाड़ी को मारी ,और आंगनबाड़ी की तरफ दौड़ कर जाने लगा,,,,

राज किसी हवा की तरह आंगनबाड़ी पहुंच चुका था ।
 
आंगनबाड़ी के काफी दूर से लोगों की भीड़ इकठ्ठी थी, यह इत्तेफाक था, कि आज विकास को भी आंगनबाड़ी में कोई अर्जेंट काम आ गया ,और ठीक उसी समय विकास भी अपनी गाड़ी से उतरता जा रहा था ।

उसे यहां की भीड़ देखकर कुछ अजीब लग रहा था, लेकिन जैसे ही गाड़ी से नीचे उतरा सारी बाते उसे समझ आ गई थी ।

राज लोगों को धक्का देते हुए अंदर की तरफ बढ़ता जा रहा था ।

जब अंदर देखा तो डॉली फर्श पर लेटी हुई थी,और उसके चारों तरफ लोगों की भीड़ थी जहां काकी जोर जोर से रो रही थी ।

पूनम डॉली के हाथ पैरों को मल रही थी, और आसपास जो लोग थे कोई उसके ऊपर पानी छिड़क रहा था ,तो कोई उसे होश में लाने की कोशिश कर रहा था ।

राज जैसे ही अंदर पहुंचा ,उसने दौड़ के डॉली को अपनी गोद में उठा लिया, और अपने घुटनों पर लिटा कर उसे जोर जोर से हिलाने लगा ,,,,

शहज़ादी उठ !

क्या हुआ तुझे

तू कुछ बोलती क्यों नहीं

अरे कोई डॉक्टर को बुलाओ , ये खड़े-खड़े मुंह क्या देख रहे हो !

राज ने डॉली को सहारा देकर उठाया, और दूसरे हाथ से उसके गालों को थपथपाने लगा उसके हाथ पैरों को मलने लगा,,,,

राज बुरी तरह से घबरा रहा था, कभी उसके एक हाथ को सहलाता, तो कभी दूसरे पैर को ,कभी उसके सिर पर हाथ फेरता तो कभी उसके गालों को थपथपाता, उसकी धड़कन तेज होती जा रही थी, बोलने में होंठ कांप रहे थे ,,,,,,

उसने एक ही धुन लगा रखी थी, जल्दी से डॉक्टर को बुलाओ ,अरे कोई सुनता क्यों नहीं ,,,,,,

पूनम ने बताया,कि डॉक्टर साहब आ ही रहे हैं ,मैंने उन्हें फोन कर दिया है,प्लीज आप इस तरह से मत घबराइए ,,,,,

पूनम तू पागल है ,अरे तुझे शहज़ादी की हालत नहीं

दिख रही ,,,इसकी क्या हालत हो रही है

और ये डॉक्टर कहा मर गया साला ,,,

इतनी देर लगती है क्या आने में, अरे कोई कुछ तो करो, कैसे भी जल्दी से इसका इलाज शुरू करवाओ,,,,,,

राज ने जब उसके तलवे छुये तो ,उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी,,,,,,

काकी!!! इसके हाथ पैर ठंडे हो रहे हैं काकी तू कुछ बोलती क्यों नहीं

आखिर हुआ क्या

जब राज ने डॉली के दाहिने हाथ की मुट्ठी मलने के लिए खोली,तो उसमें तुड़ा मुड़ा सा एक कागज उसने मजबूती से पकड़ा हुआ था ।

बड़ी मुश्किल से मुट्ठी खोलकर राज ने वह कागज पूनम को देते हुए कहा ,,,,

पूनम इसे पढ़, पूनम ने धीरे-धीरे कागज को पूरा खोला और उसका एक,एक शब्द पड़ने लगी ,,,,,,,,,

राज !!!

मेरे लिए सब कुछ आप ही थे

और हमेशा आप ही रहोगे ,शायद मेरे प्यार में कोई कमी रह गई होगी ,जो आप मुझे खुद से दूर कर रहे थे ।

लेकिन मेरी दुनिया आप से शुरू होकर आप पर ही खत्म होती है, मैंने आप को समझाने की कितनी कोशिश की ,हर तरह से आपको बताया ,कि मैं सिर्फ आपसे प्रेम करती हूं। और आपकी होना चाहती हूं,

आपके सिवा मेरी जिंदगी में कोई कभी नहीं आ सकता लेकिन लगता है ,मुझे ही आपसे प्यार था , आपको नही ,अगर आपको भी मुझसे प्यार होता ,तो आप उसे स्वीकार जरूर करते। मुझे आप का तो पता नहीं ,पर मैं आपके बिना नहीं जी सकती, और इसलिए आज मैं अपनी जिंदगी को खत्म कर रही हूं ।

मैं जीते जी तो आपको नहीं पा सकी , शायद मरने के बाद किसी और जन्म में आप मुझे मिल जाओ ,,,,

और यकीन मानिए ,मैं अगले सात जन्म तक आपका इंतजार करूंगी!

सिर्फ आपकी शहज़ादी

राज की डॉली

नीलकंठ की डॉली

पूनम ने इतने साफ़ और तेज शब्दों में डॉली का लेटर पड़ा था ,कि वहां खड़े सारे लोगों ने एक एक शब्द सुन लिया था ।

अब सबकी निगाहें राज के ऊपर ही थी

जब काकी ने सवालिया नजरों से राज की तरफ देखा ,,,,

राज यह सब क्या है

अरे मैं नहीं मानती ,मुझे तो लगता है किसी और ने यह चिट्ठी डॉली के हाथ मे पकड़ाई होगी ,अरे उसने मुझे तो कभी ऐसा कुछ नहीं बताया ,यह सब गलत है ,अगर ऐसा कुछ होता ,तो मेरी डॉली एक बार मुझसे जरूर

बात करती,,,,,,,,,

तब तक डॉक्टर आ गए थे ।

गांव के डॉक्टर तो डिस्पेंसरी में थे नहीं

तभी यहां के किस आदमी ने पास के शहर से डॉक्टर को बुला लिया था ।

सबने जल्दी से डॉक्टर को आने की जगह दी डॉक्टर डॉली की नब्ज चेक करने लगे

उन्होंने आंखें जीभ सब कुछ चेक किया

और उसके साथ ही डॉक्टर ने सिर झुका लिया था ,,,,,

आई एम सॉरी ,,,,कहते हुये वह बाहर निकल आये,,,,,

राज भागता हुआ डॉक्टर के पीछे गया

और उनकी कॉलर पकड़ कर हिलाने लगा ओए डॉक्टर तू पागल है क्या

ऐसे कैसे तू कुछ भी बोल सकता है

अरे तूने तो उसे देखा भी नहीं ठीक से

मैं कहता हूं अभी उसको एंबुलेंस में ले और शहर के बड़े अस्पताल में ले चल,,,,

अरे अपन की महारानी को कुछ नहीं हो सकता ,लेकिन डॉक्टर बिल्कुल चुप थे

कुछ लोग राज को पकड़कर उसे डॉक्टर से अलग करने की कोशिश करने लगे थे ।

विकास भी राज को संभालने लगा था

राज भैया होश में आइए ,,,,,

भला डॉक्टर झूठ क्यों बोलेंगे

और आप अपनी भड़ास डॉक्टर पर मत निकालिए ,,,,

तब तक काकी भी उठ कर खड़ी हो गई थी काकी एक

ही बात कहे जा रही थी ।

यह सब झूठ है ,अरे ऐसा कुछ भी नहीं था

जरूर मेरी डॉली के साथ कुछ और हुआ है राज ने पूनम के हाथ से वह लेटर छीना

और दोबारा उसका एक एक शब्द पढ़ने लगा वह डॉली की लिखी राइटिंग अच्छी तरह से पहचानता था ।

उसने बचपन से डॉली कि हर कॉपी पर उसके लिखे अक्षर देखे थे ।

उसके अक्षरों की बनावट, लिखने का ढंग उसे कैसे छुप सकता था।

एक एक शब्द डॉली के द्वारा लिखा गया था लेटर पूरा पढ़ने के बाद,,,,

राज घुटनों के बल बैठ कर जोर जोर से चीख चीख कर रोने लगा ,,,,,

काकी इस लेटर की एक एक बात सही है अपुन ही गलत है,,,, अरे शहज़ादी ने खुद अपुन को कितना समझाया था ।

कि वह अपुन से प्यार करती है ,वह अपुन के बिना नहीं जी पाएगी ,,,

उसने एक बार नहीं ,सैकड़ों बार अपुन से बोला था ,पर अपुन तो उसके फ्यूचर को देखते हुये ही उसकी शादी विकास से कराने का फैसला किया था ।

राज की चीखें दूर-दूर तक गूंज रही थी काकी अपुन शहज़ादी के बिना कैसे भी नहीं रह सकता ,,,काकी अपन को अपनी महारानी बापस चाहिए,,,

अभी चाहिए ,,,,,सॉरी मिस्टेक अपुन की है उसने एक

बार भी नहीं सोचा कि अपुन उसके बिना जीने की सोच भी कैसे सकता है काकी वो क्यों नही समझ पाई कि अपुन से ज्यादा प्यार तो उसे कोई कर ही नहीं सकता अपुन अपनी शहज़ादी को बहुत प्यार करता है ,,,,बहुत प्यार करता है ,, उसके बिना तो अपन की दुनिया ही खत्म है ।

जबसे बह घर में आई थी ,अपन ने जीना सीखा था ,उसके साथ हंसना सीखा था अपन को तो पूरी दुनिया ही उसमें दिखती थी काकी मैं नहीं जी पाऊंगा उसके बिना !

राज की आंखों से आंसुओं की धार बहती जा रही थी ।

उसने एक बार फिर डॉली को अपनी बाहों में उठाकर जोर से अपने गले लगा लिया,,,,

शहज़ादी तू उठ जा ,,,,,

उठ जा तू ,,,,अपन तेरी कसम खाकर कहता है ,,,तू कहती थी ना ,कि अपुन के दो बच्चे होंगे ,,,,,

दो नहीं 4 बच्चे होंगे ,,,,,तुझे अपुन के साथ शादी बनानी थी ना

अपन बनाएगा तेरे साथ शादी !

तू जो कहेगी अपुन वही करेगा

तेरी हर बात मानेगा

पर ऐसे छोड़कर मत जा ,,,,

लोग राज को डॉली से अलग करने की कोशिश कर रहे थे ।

काकी भी समझाते हुए एक ही बात कह रही थी ,राज

जो होना था ,हो गया ,पर क्या तू सच में डॉली से प्यार करता था

हां काकी अपन महारानी को बहुत प्यार करता था

तो फिर तूने उससे कहा क्यों नहीं ,उसकी बात क्यों नहीं मानी काकी रोते हुए सारी बातें बोलती जा रही थी ।

काकी अपन डॉली के लायक नहीं था

अपन तो यही सोचता था ,कि बिकास एक पढ़ा लिखा और समझदार लड़का है।

उसको मिलेगा तो उसकी जिंदगी बन जाएगी राज ने एक बार फिर पागलों की तरह चिल्लाते हुये, डॉली को अपने करीब खींच लिया ,और उसे अपने गले से लगा लिया

शहज़ादी तू उठ जा ,,, अपन तेरे से प्रॉमिस करता है, तेरी हर बात मानेगा ,,,,,

जितने भी लोग खड़े थे ,सब के आंसू उनके कपड़े भिगो रहे थे ,बच्चे ,बूढ़े ,जवान सबके लिए उनकी जिंदगी का सबसे दुखद पल था कोई किसी से कुछ भी नहीं बोल पा रहा था सब की सांसे रुकी हुई थी ,,,,

और सबसे ज्यादा दुख तो राज को हो रहा था ,,,,,,,

राज पूरी तरह से अपने होशो हवास खो बैठा था ,और पागलों की तरह डॉली को अपने गले लगाते हुए ,जोर जोर से रोए जा रहा था,,,,

आत्मग्लानि से उसका दिल फटा जा रहा था पूरे गांव में एक सन्नाटा खिंच गया,,,,,,

और खुशियों की जगह एक ऐसे भयानक दुख ने ले ली थी ,जिसकी कमी कभी भी पूरी नहीं हो सकती

थी,,,,,,,,

माहौल इतना गमगीन और सूना हो गया था कि किसी की सांसो की आवाज भी नहीं आ रही थी।

सभी शांत थे ,बहुत सारे लोग राज को संभालने में लगे हुए थे ।

राज को डॉली से दूर ले जाकर उसे पानी पिलाने की कोशिश कर रहे थे।

किसी तरह तो राज शांत हो ।

पर राज

उसे तो एक ही बात की रट लगा रखी थी

शहज़ादी तू एक बार उठ जा ,अपन पूरे गांव के सामने तुझसे शादी बनाएगा ।

तेरी हर बात मानेगा ,,,,,, तू उठ जा ,,,,

तभी पीछे से राज के कानों में आवाज पड़ी राज आप सच कह रहे हैं

अब पूरे गांव के सामने अपनी महारानी से शादी बनाएंगे

हां ,,,हां,,,, अपन बिल्कुल सच कह रहा है मेरी महारानी एक बार वापस आ जाए

वह जो कहेगी, मैं करूंगा,,,,,

तो फिर अपना हाथ आगे करके प्रॉमिस कीजिए ,कि आप अपने वादे से मुकरोगे नहीं अपुन पक्का वादा करता है ।

यह कहते हुए राज ने हाथ ऊपर किया तो पीछे खड़ी डॉली ने अपना हाथ राज के हाथ के ऊपर रख दिया ।

और जैसे ही डॉली के हाथ में राज का हाथ आया ,,,,तो कस के पकड़ती हुई बोली,,,

राज आप प्रॉमिस कर चुके हैं ।

अब आप अपने वादे से नहीं मुकर सकते,,,,,,

दो मिनट बाद राज का दिमाग घुमा

और वह जैसे ही पीछे मुड़ा ,तो देखा कि डॉली मुस्कुराते हुए उसके पीछे खड़ी है ।

और डॉली का हाथ राज के हाथ में है।

राज आँखे फाड़ते हुए डॉली को देखने लगा और उसे देखने के बाद ,वापस उस जगह पर देखा ,जहां डॉली पड़ी हुई थी।

पर वहां ,,,वहां,,, तो कोई था ही नहीं ।

डॉली ने एक बार फिर मुस्कुराते हुए कहा राज आपने जो भी कहा है ,उस बात के लिए पूरा गांव गवाही देगा ,बहुत सारे लोगों ने तो मोबाइल में इसकी रिकॉर्डिंग भी की है अब!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg अब,, आप अपनी बात से मुकर नहीं सकते ।

राज की हलक में फंसी हुई जान वापस उसके अंदर आ गई थी ।

उसने अपना दूसरा हाथ डॉली के गाल पर रखा ,वह

उसे छूने की कोशिश कर रहा था और डॉली सही सलामत उसके सामने थी वह भी एक बहुत ही खूबसूरत सी मुस्कान के साथ ।

जो शायद पिछले कई महीनों बाद डॉली के चेहरे पर दिख रही थी ।

राज ने अपनी जल्दी से डॉली से अपना हाथ छुड़ाते हुए ,,,

दोनों हाथों से कभी डॉली के चेहरे को छूता तो कभी उसके पैरों को ,कभी हाथों को

तभी पूनम डॉली के बगल में आकर खड़ी हो गई ,,,,,,और राज की तरफ देखकर वह कहा !

राज यह डॉली ही है ,डॉली का भूत नहीं और हां अब इससे ज्यादा छूने की कोशिश मत कीजिए ,,,इसे अच्छी तरह से छूने का अधिकार तो आपको शादी के बाद ही मिलेगा ,,,,,

राज अभी भी कुछ समझ नहीं पा रहा था धीरे धीरे आसपास खड़े लोग लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट आने लगी थी।

लेकिन उनमें से कुछ लोग एक तेज हंसी के साथ हंस रहे थे ।

जिसमें काकी, विकास ,पूनम ,और शहर से आए हुए डॉ कुछ खास थे ।

जिनकी हंसी फूट फूट कर बाहर निकल रही थी।

अब तक राज खड़ा हो चुका था ।

और विकास, पूनम की तरफ देखते हुए कहने लगा,,,,,

यह सब क्या था

विकास को वैसे तो बहुत हंसी आ रही थी

पर उसने शुरू से ही राज की एक बड़े भाई की तरह इज्जत की है ,और फिर वह जानता था,,,, कि राज का गुस्सा भी तेज है

इसलिए उसने खुद को संभालते हुए राज से कहा !!!

सॉरी राज भैया !

हम सभी ने बहुत कोशिश की, पर इसके सिवा हमें कोई और रास्ता समझ ही नहीं आया ,,,,डॉली के साथ हम पिछले 15 दिनों से इसी बारे में सोच रहे थे।

कि कैसे क्या किया जाए ,पर हमारे लिए एक ही रास्ता बचा था ।

यह रास्ता बहुत टफ था

बहुत रिस्की था

पर डॉली और आपके लिए हम सबको इसे चुनना ही पड़ा ।

अब राज की थोड़ी-थोड़ी समझ में आया,,, मतलब कि तुम सब मिलकर अपन को उल्लू बना रहे थे ।

राज भैया आप इसे जो भी समझे

पर हमें तो इसमें आपके लिए डॉली का प्यार ही नजर आया था।

राज भैया पूरा गांव इस बात की गवाही दे रहा है ,कि आप और डॉली ही एक दूसरे के लिए बने हो ,आज से 7 साल पहले ही भगवान जी ने डॉली को आपके लिए आपके घर में भेजा था ।

तो भला कोई से इतनी आसानी से कैसे ले जा सकता था,आपकी डॉली को!//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f60a.svg

विकास तू भी ऐसा कह रहा है

हां राज भैया ! क्योंकि डॉली मेरी बहुत अच्छी दोस्त है।

और काकी उसकी तो मैं बिल्कुल अपनी मां की तरह इज्जत करता हूं ।

और अगर काकी मुझसे कुछ कहे ,और मैं ना मानूं ,ऐसा तो कभी हो ही नहीं सकता,,,,, मतलब काकी तू भी इन सब में शामिल थी भैया काकी ने ही यह सारा प्लान बनाया था जब राज की नजर डॉली पर गई ,तो उसका सारा गुस्सा दूर हो गया था ।

उसकी सारी शर्म ,संकोच ,आंसुओं में बह के निकल चुकी थी,,,,

डॉली के दूर जाने की कल्पना से ही राज कांप उठा था ।

यह कुछ पल उसके लिए सबसे भयानक हो गए थे, अब डॉली का मुस्कुराता हुआ चेहरा उसके सामने था ।

तो वह सारी बातें भूल गया ,और उसे डॉली पर प्यार आने लगा ,,,,,

प्यार तो वह डॉली से कब से करता आ रहा था ।

बस उसे स्वीकार नहीं कर पा रहा था

जब यह सारी बातें उसने सोची तो उसकी खुशी भी ,राज के चेहरे पर दिखने लगी थी कि वह सबके सामने क्या-क्या बोल गया

इस प्लान में जो जो शामिल थे।

उन सब ने तो राज का वीडियो भी बना डाला था ,काकी आगे बढ़ी ,और राज का कान पकड़ते हुए

कहा!

राज अगर तू मेरा बेटा है ,तो मैं भी तेरी काकी हूं ,,,,कद में ना सही ,उम्र में और तजुर्बे में तो तुझसे बड़ी ही हूं ।

और तूने यह कैसे सोच लिया, कि मैं अपने बेटे को उसकी जिंदगी में अकेला रहने दूंगी सारी बातें छोड़ अब एक काम कर

सारे गांव वालों के सामने एक बार डॉली से अपने दिल की बात कह दे ।

अब तो राज के चेहरे पर पसीने की बूंदे आ गई थी ।

वह अपनी बगले झांकने लगा ,,,,

वह शर्म और संकोच से आंखें ऊपर ही नहीं उठा पा रहा था ।

काकी यह तू क्या कह रही है

हां राज बोल दे ना ,,,,,,,,,

अरे अपन ने अभी बोला तो था।

तू क्या बहरी हो गई थी ,उतनी देर के लिए राज तब डॉली होश में नहीं थी

लेकिन अब हंसती मुस्कुराती डॉली तेरे सामने खड़ी है

और वह सब कुछ सुनना चाहती है

क्या

अभी भी तुझे कुछ और सोचना है ,क्या काफी अपन तो महारानी से सच में शादी बनाएगा ,,,,,

हां हां वह तो ठीक है, लेकिन तू कम से कम एक बार जाकर डॉली से बोल तो दे ,,,

डॉली सामने खड़ी राज का इंतजार कर रही

थी ,,,,,,कि वह उसे कैसे प्रपोज करता है गांव के सभी लोग सांस रोककर राज के बोलने का इंतजार कर रहे थे ।

सबके चेहरे पर एक दबी हुई मुस्कान थी राज डॉली के थोड़ी सा पास गया ,लेकिन अभी वह डॉली से नज़रें नहीं मिला पा रहा था।

और इधर उधर देखते हुए कहने लगा

महारानी अपुन तेरे से शादी बनाएगा

पूनम ने कहा !!!

राज इससे आगे भी आपने कुछ कहा था वह भी कह दीजिए!

पूनम तू भी ना ,और अपन ने कुछ भी नहीं कहा ,,,,अरे कहा था ,जरा याद कीजिए

हां यह कहा था,,,, कि,,, कुछ कहा तो था अपुन को याद नहीं आ रहा,,,,,

राज आपने यह कहा था ,कि दो नहीं आप चार बच्चे पैदा करोगे ,,,,,

लेकिन सॉरी अगर आपने 4 बच्चे पैदा किए तो डॉली का इंक्रीमेंट रुक जाएगा ,और उसे प्रमोशन भी नहीं मिल पाएगा ।

इसलिए दो ही बच्चे ठीक है ,,,,,,

हां हां ठीक है ना ,,,,

ठीक है तो फिर डॉली को प्रपोज करो ना

शहज़ादी तू अपुन के दो बच्चों की मां बनेगी क्या

राज का इतना कहना था कि वहां पर खड़े छोटे बच्चे तालियां बजाने लगे ,,,,

राज के हमउम्र शोर मचाते हुए राज का हौसला बढ़ाने लगे,,,,,,

और आसपास खड़ी हुई उम्र दराज औरतें अपने पल्लू में मुंह छुपा कर खुसर पुसर करते हुए हंसने लगी,,,,,

उनके लिए यह बहुत ही शर्म वाली बात थी कि राज इस तरह से सरेआम डॉली को बच्चों के लिए कह रहा है ।

लेकिन राज भोलेनाथ की तरह मुद्दे की बातें कर रहा था ।

उसे घुमा फिरा कर बात करना आता ही नहीं था ,,,

पूनम ने डॉली से भी कहा ,,,डॉली तू भी तो हां कर ,ऐसे ही खड़ी रहेगी शर्माते हुए,,,

डॉली ने राज की आंखों में देखा ,और कहां राज आपने जो भी कहा मैं उसके लिए कब से तैयार हूं ।

इतना कहने के साथ डॉली सबसे खुद को छुड़ाती हुई दौड़कर घर की तरफ चली गई डॉली के अंदर इतनी खुशी थी।

उसका मन कर रहा था ,वह जोर-जोर से राज का नाम पुकारे ,और किसी अच्छे से गाने पर झूम के डांस कर ले ,,,,,,

डॉली खुशी से हाँफती हुई घर की तरफ दौड़ रही थी ,बस कुछ ही देर में घर के अंदर आ गई ,,,,,,,

खुशी के मारे उसके होठ फैले जा रहे थे।

ये सोच कर ही कि राज से उसकी शादी होगी ,वह एक अलग ही दुनिया में पहुंच गई थी ।
 
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